ESDS Software Solution IPO का अलॉटमेंट आज, 2 सितंबर को; 143 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद अब अच्छी लिस्टिंग की उम्मीद

ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन का ₹720 करोड़ का IPO 1 सितंबर को बंद हो चुका है। इसे कुल 142.88 गुना सब्सक्रिप्शन मिला। अब आज, 2 सितंबर को इसका अलॉटमेंट फाइनल हो रहा है। इसके बाद शेयरों की लिस्टिंग 4 सितंबर को NSE और BSE पर होने वाली है। ग्रे मार्केट में कंपनी का शेयर 58.74 प्रतिशत प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है। ग्रे मार्केट एक अनऑथराइज्ड मार्केट है, जहां​ किसी कंपनी के शेयर उसकी लिस्टिंग तक ट्रेड करते हैं।

जिन लोगों ने ESDS सॉफ्टवेयर सॉल्यूशन के IPO में पैसे लगाए हैं, वे इसकी रजिस्ट्रार MUFG Intime India Pvt.Ltd. और स्टॉक एक्सचेंज BSE की वेबसाइट के जरिए अलॉटमेंट स्टेटस चेक कर सकते हैं। इसकी प्रोसेस इस तरह है…

BSE पर कैसे करें चेक

  • https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx पर जाएं।
  • इश्यू का टाइप ‘इक्विटी’ चुनें।
  • ड्रॉपडाउन मेन्यू से ESDS Software Solution IPO चुनें।
  • एप्लीकेशन नंबर या PAN डिटेल एंटर करें।
  • ‘कैप्चा’ डालें।
  • ‘Submit’ बटन पर क्लिक करें।

MUFG Intime की वेबसाइट से कैसे करें चेक

  • https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html पर जाएं।
  • कंपनी नेम में ESDS Software Solution सिलेक्ट करें।
  • PAN या एप्लीकेशन नंबर या DP/क्लाइंट ID या अकाउंट नंबर/IFSC में से एक को सिलेक्ट कर डिटेल डालें।
  • Submit पर क्लिक करें।

इस IPO के लिए प्राइस बैंड ₹408-₹429 प्रति शेयर था। क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 274.97 गुना, नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 202.87 गुना और रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व हिस्सा 41.68 गुना भरा। कंपनी AI-इनेबल्ड क्लाउड, मैनेज्ड सर्विसेज, डेटा सेंटर इंफ्रास्ट्रक्चर और सॉफ्टवेयर सॉल्यूशंस मुहैया कराती है। कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर-एज-अ-सर्विस (IaaS), मैनेज्ड सर्विसेज और सॉफ्टवेयर-एज-अ-सर्विस (SaaS) जैसी एंड-टू-एंड सर्विसेज देती है।

Mahanadi Coalfields IPO: एक और सरकारी कंपनी ने जमा किया ड्राफ्ट, कोल इंडिया बेचेगी 10% हिस्सा

ESDS Software Solution की वित्तीय सेहत

कंपनी ने IPO से पहले एंकर इनवेस्टर्स से ₹216 करोड़ जुटाए। कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 28 प्रतिशत बढ़कर 480.65 करोड़ रुपये हो गया। शुद्ध मुनाफा 117 प्रतिशत की बढ़त के साथ 120.82 करोड़ रुपये रहा। इस बीच कंपनी पर 42.92 करोड़ रुपये की उधारी थी। एक साल पहले रेवेन्यू 376.64 करोड़ रुपये और शुद्ध मुनाफा 55.61 करोड़ रुपये था।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

शादी में मिले गहने बेचने पर नहीं लगेगा टैक्स? जानिए इनकम टैक्स का क्या है असली नियम

Taxation on Jewellery Sale: शादी-ब्याह के मौके पर माता-पिता या रिश्तेदारों से मिले सोने-चांदी के गहने न सिर्फ इमोशनल महत्व रखते हैं, बल्कि मुश्किल समय में एक बड़े वित्तीय सहारे का काम भी करते हैं। अक्सर लोगों के मन में यह धारणा होती है कि शादी में मिला तोहफा टैक्स-फ्री होता है, इसलिए इसे बेचने पर मिलने वाला पूरा पैसा भी टैक्स से पूरी तरह मुक्त होगा।

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अलर्ट हो जाइए। वित्तीय मामलों के विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया है कि यह बात पूरी तरह सही नहीं है। शादी में गहने मिलना तो टैक्स-फ्री है, लेकिन उन्हें बेचने से होने वाली कमाई पर कैपिटल गेंस टैक्स देना पड़ता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि टैक्स कानून क्या कहता है और गहने बेचने पर टैक्स का गणित कैसे तय होता है।

शादी में गहना मिलना टैक्स-फ्री, लेकिन बेचना नहीं!

मौजूदा इनकम टैक्स कानूनों के मुताबिक, शादी के अवसर पर मिलने वाले किसी भी गिफ्ट चाहे वह गहने हों, कैश हो या कोई अन्य संपत्ति पर पाने वाले व्यक्ति को कोई टैक्स नहीं देना होता। यह छूट पूरी तरह असीमित है। यानी गिफ्ट की वैल्यू चाहे कितनी भी हो और वह किसी से भी मिला हो, उस पर एक रुपया भी टैक्स नहीं लगता।

वैसे तो शादी के दिन तक तो वह गहना पूरी तरह टैक्स-फ्री है, लेकिन जिस दिन आप उसे बाजार में बेचकर पैसा हासिल करते हैं, तो उस बिक्री से होने वाले मुनाफे पर इनकम टैक्स की देनदारी बनती है। इसलिए, बिक्री से मिला पूरा पैसा न तो पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है और न ही पूरे पैसे पर टैक्स लगता है। टैक्स सिर्फ आपके मुनाफे पर लगता है।

शॉर्ट-टर्म या लॉन्ग-टर्म टैक्स? ऐसे तय होती है समयावधि

बिक्री पर कितना टैक्स लगेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह गहना आपके और आपके माता-पिता (गिफ्ट देने वाले) के पास कुल मिलाकर कितने समय तक रहा।

शॉर्ट-टर्म कैपिटल गेंस (STCG): अगर पिता द्वारा खरीदे जाने की तारीख से लेकर आपके द्वारा बेचे जाने तक की कुल अवधि 24 महीने या उससे कम है, तो होने वाले मुनाफे को आपकी नियमित आय में जोड़ा जाएगा और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा।

लॉन्ग-टर्म कैपिटल गेंस (LTCG): अगर संयुक्त अवधि 24 महीने से अधिक है, तो इसे लॉन्ग-टर्म माना जाएगा और होने वाले मुनाफे पर 12.50% की फ्लैट दर से टैक्स लगेगा।

खरीद लागत कैसे तय होगी?

टैक्स का हिसाब लगाने के लिए सबसे बड़ा सवाल यह उठता है कि गहने की खरीद कीमत क्या मानी जाएगी, क्योंकि आपको तो वह गिफ्ट में मिला था? टैक्स नियमों के तहत, उस गहने को खरीदने के लिए आपके पिता (या पुराने मालिक) ने जो कीमत चुकाई थी, वही आपकी खरीद लागत मानी जाएगी।

1 अप्रैल 2001 से पुराने गहनों का नियम: अगर वह गहना 1 अप्रैल 2001 से पहले खरीदा गया था, तो आपके पास 1 अप्रैल 2001 की फेयर मार्केट वैल्यू को अपनी खरीद लागत मानने का विकल्प होता है।

वैल्यूएशन सर्टिफिकेट जरूरी: 1 अप्रैल 2001 की मार्केट वैल्यू साबित करने के लिए आपको किसी रजिस्टर्ड वैल्यूअर से आधिकारिक वैल्यूएशन सर्टिफिकेट बनवाना होगा।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Video: भगवान को अकेला नहीं छोड़ सकता… चित्रकूट बाढ़ के बीच भावुक करने वाला नजारा! DM-SP जोड़ते रहे हाथ फिर भी मंदिर से नहीं निकले पुजारी

उत्तर प्रदेश के चित्रकूट में बाढ़ के बीच सामने आई एक तस्वीर लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच रही है। लगातार बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ गया और कई इलाकों में पानी भर गया। इसी दौरान एक मंदिर में मौजूद पुजारी ने वहां से निकलने से इनकार कर दिया। प्रशासनिक अधिकारियों ने उन्हें सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए समझाया, लेकिन वह अपनी जगह से हटने को तैयार नहीं हुए। पुजारी का कहना था कि वह अपने आराध्य को अकेला छोड़कर नहीं जा सकते। बाढ़ के बीच उनका यह फैसला अब सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

वीडियो देखने के बाद लोग उनकी आस्था और समर्पण की बात कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग उनकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जता रहे हैं। दूसरी ओर, प्रशासन लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव अभियान चला रहा है। जलस्तर बढ़ने से रामघाट समेत कई क्षेत्रों में जनजीवन प्रभावित हुआ है।

चारों तरफ पानी, मंदिर में क्या हुआ?

लगातार बारिश के बाद मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने से चित्रकूट के कई निचले इलाकों में पानी भर गया। इसी दौरान प्रशासन की टीम बाढ़ प्रभावित मंदिरों का जायजा लेने पहुंची। एक मंदिर में पुजारी मौजूद मिले। अधिकारियों ने उन्हें बाहर निकलकर सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी, लेकिन उन्होंने मंदिर छोड़ने से इनकार कर दिया।

अधिकारियों ने पुजारी को क्यों समझाया?

बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इसी वजह से अधिकारियों ने मंदिर में मौजूद पुजारी की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए उन्हें वहां से निकलने के लिए कहा। प्रशासन की कोशिश प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाने की है।

चित्रकूट में बिगड़े बाढ़ के हालात

मंदाकिनी के खतरे के निशान से ऊपर बहने के कारण रामघाट समेत कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है। निर्मोही अखाड़ा और टेम्पो स्टैंड के आसपास भी पानी पहुंच गया है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है।

रामघाट में 400 से ज्यादा दुकानें प्रभावित

बाढ़ का असर स्थानीय कारोबार पर भी पड़ा है। रामघाट और आसपास की 400 से अधिक दुकानें पानी में डूबने की जानकारी सामने आई है। करीब 20 से 25 होटल भी प्रभावित बताए जा रहे हैं। दुकानदारों और स्थानीय लोगों के सामने कारोबार के साथ रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर भी परेशानी खड़ी हो गई है।

लोगों की आवाजाही भी हुई मुश्किल

जलभराव के कारण सामान्य रास्तों से आवाजाही प्रभावित हुई है। कई लोगों को कामदगिरि परिक्रमा मार्ग के आसपास हाथ ठेलों की मदद लेनी पड़ रही है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि बाढ़ ने स्थानीय जनजीवन को किस तरह प्रभावित किया है।

वीडियो वायरल होने के बाद छिड़ी चर्चा

पुजारी और प्रशासन के बीच हुई बातचीत का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद मामला तेजी से चर्चा में आ गया। जहां कुछ लोग इसे धार्मिक आस्था से जोड़कर देख रहे हैं, वहीं कुछ यूजर्स का कहना है कि बाढ़ जैसी स्थिति में सुरक्षा को सबसे ज्यादा महत्व दिया जाना चाहिए।

Viral Robot Video: रोबोट को धक्का देना पड़ा भारी! मशीन ने ‘किक’ मारने के लिए बढ़ाया पैर, वीडियो वायरल

Vinfast plans India-specific EVs, gets approval for plant expansion

Vinfast plans India-specific EVs, gets approval for plant expansion
Vinfast

Vinfast plans to design, develop and manufacture electric vehicles specifically for India as it expands its operations in the country. The Vietnamese EV maker has also received investment approval for Phase 2 of its Thoothukudi plant in Tamil Nadu, although it has not disclosed the investment amount, additional production capacity or timeline for the expansion.

  1. Phase 2 of Vinfast’s Thoothukudi plant gets investment approval
  2. Vinfast to increase sourcing from Indian suppliers

India-specific EVs won’t be existing cars adapted for the market

Vinfast says its upcoming models will not simply be existing products adapted for India. The company plans to develop them specifically for local requirements and with a higher level of localisation.

“For upcoming models, Vinfast’s approach is not simply to bring existing products from our global portfolio into the market, but to design, develop and manufacture products specifically for India, tailored to the needs of local customers, while also targeting a much higher level of localisation,” a Vinfast spokesperson told our sister publication, Autocar Professional.

The company said it has conducted market studies and customer clinics to understand Indian customer requirements. Feedback from these exercises has already been used to make changes to products such as the VF6 and VF7 for the Indian market.

VF6, VF7 CKD assembly to continue

VinFast currently assembles the VF6 and VF7 from completely knocked down (CKD) kits at its Thoothukudi facility. The company has clarified that it has neither changed nor suspended production plans for the two SUVs and will continue CKD assembly for India. The clarification follows a Reuters report that had raised questions over the carmaker’s production plans for the two models.

Vinfast said India remains an important part of its long-term business and manufacturing strategy, adding that the initial response to its products has helped it consistently rank among the five largest electric passenger vehicle brands in India.

Vinfast to expand local supplier base

The carmaker is also working to increase sourcing from Indian suppliers. It has held supplier conferences in India and Vietnam involving more than 300 Indian suppliers to explore sourcing opportunities and increase localisation.

“Building a sustainable and resilient supply chain is the foundation of Vinfast’s long-term strategy in India. Accordingly, we are accelerating our operations in line with the ‘Make in India’ direction,” the spokesperson said.

Vinfast is also engaging with government agencies on policy measures aimed at supporting further production and investment by global EV manufacturers in India. The company described the approval for Phase 2 of the Thoothukudi plant as an important step towards expanding its manufacturing capacity.

PNB की करेंसी चेस्ट से निकले 17 करोड़ के जाली नोट, असली नोट गायब कर ऐसे हुआ खेल

PNB की करेंसी चेस्ट से निकले 17 करोड़ के जाली नोट, असली नोट गायब कर ऐसे हुआ खेल

pnb fake note scam

PNB Fake Note Scam: सहारनपुर के सोफिया मार्केट स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) की करेंसी चेस्ट में एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। करेंसी चेस्ट में ऑडिट के दौरान 17 करोड़ रुपये के जाली नोट बरामद हुए हैं। 500-500 रुपये के नए नोटों वाले 340 बंडलों में मिले इन नकली नोटों ने बैंक अधिकारियों से लेकर सुरक्षा और जांच एजेंसियों के भी होश उड़ा दिए हैं। ALSO READ: Bristy Mukherjee Death : ममता बनर्जी की भतीजी बृष्टि मुखर्जी की मौत, घर में फंदे से लटका मिला शव, शिक्षक भर्ती मामले में गई थी नौकरी, जांच शुरू

 

प्राथमिक जांच में यह आशंका जताई जा रही है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से आई नई करेंसी की फोटोकॉपी या प्रिंट निकालकर असली नोटों को चेस्ट से पार कर दिया गया और उनकी जगह इन नकली नोटों को खपा दिया गया।

 

23 मशीनों से हुई नोटों की गिनती और सीरियल नंबर की जांच

बैंक अधिकारियों के अनुसार, बरामद किए गए सभी 340 बंडल 500 रुपये के नए नोटों के हैं। इतनी भारी मात्रा में मिले नकली नोटों की सटीकता से जांच और गिनती के लिए कुल 23 मशीनों को लगाया गया था। हर एक नोट को मशीन से गुजारने के साथ उसके सीरियल नंबर की भी बारीकी से पड़ताल की गई है।

बैंक के एक पार्टटाइम हाउसकीपर से जुड़े चोरी के मामले की जांच के दौरान इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ, जिसके बाद करेंसी चेस्ट के भीतर रखे नोटों की विस्तृत जांच शुरू की गई। ALSO READ: सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व सेलिब्रिटी मैनेजर दिशा सालियान केस में बड़ा मोड़, बॉम्बे हाईकोर्ट ने CBI को सौंपी जांच की जिम्मेदारी

 

तीन बैंक अधिकारी गिरफ्तार, जल्द खुलेगा राज

इस मामले में पुलिस और जांच एजेंसियों ने बड़ी कार्रवाई करते हुए वरिष्ठ मंडल प्रबंधक कार्यालय के रवि कुमार कांसे, करेंसी चेस्ट प्रबंधक सुशील कुमार और जगाधरी के करेंसी चेस्ट प्रबंधक अमित कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों का मानना है कि इन आरोपियों से पूछताछ के बाद ही यह पूरी तरह साफ हो पाएगा कि 17 करोड़ रुपये के असली नोट बैंक से कब और कैसे बाहर निकाले गए और उनकी जगह यह नकली खेप किसने और कैसे पहुंचाई।

‘कॉकरोच’ कहने पर हिला दी सरकार! पढ़िए CJP आंदोलन से अभिजीत दीपके को मिले 3 सबसे बड़े सबक

‘कॉकरोच’ कहने पर हिला दी सरकार! पढ़िए CJP आंदोलन से अभिजीत दीपके को मिले 3 सबसे बड़े सबक

Gen Z Protests India: बॉस्टन के एक कमरे में बैठा 30 साल का अंतर्मुखी नौजवान—दिमाग में सिर्फ दो बातें: नौकरी और एजुकेशन लोन की अदायगी। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अभिजीत दीपके ने कभी नहीं सोचा था कि वे भारत के इतिहास के सबसे बड़े और मुखर छात्र आंदोलनों में से एक की अगुवाई करेंगे।

 

हाल ही में न्यूयॉर्क टाइम्स (New York Times) के ओपिनियन वीडियो में अभिजीत दीपके ने उस पूरे घटनाक्रम का खुलासा किया है कि कैसे एक तंज से भरे ट्वीट ने ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (Cockroach Janta Party) का रूप लिया और सत्ता के गलियारों को हिलाकर रख दिया। ALSO READ: NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

एक ट्वीट और 5 दिन में 1 करोड़ लोग : आंदोलन की शुरुआत

इस ऐतिहासिक मोड़ की शुरुआत तब हुई जब देश के मुख्य न्यायाधीश ने बेरोजगार युवाओं के एक हिस्से को कथित तौर पर 'कॉकरोच' (ऐसे नौजवान जिन्हें रोजगार नहीं मिलता और समाज में जगह नहीं मिलती) कहकर संबोधित किया।

 

बॉस्टन में बैठे अभिजीत दीपके ने X पर लिखा: “क्या हो अगर सारे कॉकरोच एक साथ आ जाएं?”

 

यह सवाल इंटरनेट पर आग की तरह फैला। महज 5 दिनों के भीतर 1 करोड़ लोग इस डिजिटल मुहिम से जुड़ गए—जो भारत की सत्ताधारी पार्टी के कुल सक्रिय सदस्यों से भी ज्यादा थे। दो महीनों के भीतर यह आंकड़ा 2.6 करोड़ के पार पहुंच गया। ALSO READ: CJP ने संगठन में किए बड़े बदलाव, नए पदाधिकारियों का ऐलान, पार्टी ने बताया अब आगे का क्या है प्लान

आंदोलन का तात्कालिक कारण:

  • पेपर लीक और रद्द परीक्षा : लाखों छात्रों द्वारा दी गई राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा (NEET) में धांधली और पेपर लीक के बाद सरकार ने परीक्षा रद्द कर दी।
  • 20 से ज्यादा छात्रों की खुदकुशी : रिपोर्टों के मुताबिक, इस विवाद के कारण 20 से अधिक अभ्यर्थियों ने हताशा में अपनी जान दे दी।
  • शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग : युवाओं का गुस्सा उस शिक्षा व्यवस्था के खिलाफ चरम पर पहुंच गया जहां सालों की मेहनत का सिला सिर्फ बेरोजगारी और पेपर लीक के रूप में मिल रहा था।

अभिजीत दीपके के 3 सबसे बड़े सबक

अभिजीत दीपके ने अपने अनुभव साझा करते हुए जेन-जी और देश के नागरिकों के लिए तीन मुख्य सबक बताए हैं:

 

पहला सबक : किस्मत और सही वक्त (Timing & Opportunity)

अमेरिका में बैठे होने के बावजूद दीपके ने तुरंत भांपा कि भारत का युवा खारिज किए जाने से गुस्से में है। वे कहते हैं कि सरकारें और मीडिया हर रात टीवी डिबेट्स के जरिए सांप्रदायिक ध्रुवीकरण और हिंदू-मुसलमान की बहस में असली मुद्दों (जैसे नौकरी और शिक्षा) को दबा देती हैं। लेकिन Gen-Z अलग है—वह मुखर है और कम पर राजी नहीं होती। ALSO READ: CJP के दीपके ने लिखा शिक्षा मंत्रियों को पत्र, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए 6 तीखे सवाल

 

दूसरा सबक : हिम्मत (Courage in Face of Threat)

जब आंदोलन बढ़ा, तो तंत्र ने उन्हें “राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा” बताना शुरू किया।

 

  • भारत लौटने का फैसला : वकीलों ने कहा कि यह पागलपन है, पत्रकारों ने चेतावनी दी कि एयरपोर्ट पर उतरते ही जेल होगी और मां टूट गई थीं।
  • एयरपोर्ट का हाई-ड्रामा : भारत उतरते ही प्लेन में खास अनाउंसमेंट हुई। 15-20 पुलिस अधिकारियों ने उन्हें घेर लिया और एक तैयार लेटर पर साइन करने को कहा। दीपके ने मना कर दिया और पुलिस के सामने बैठकर हाथ से लिखा: “मैं भारत का नागरिक हूं, विरोध प्रदर्शन मेरा लोकतांत्रिक अधिकार है। अगर आपको यह मंजूर नहीं, तो आप मुझे गिरफ्तार कर सकते हैं।” प्रशासन को झुकना पड़ा और उन्हें जाने दिया गया।

तीसरा सबक : जिद और निरंतरता (Persistence)

दिल्ली के धरनास्थल पर 36 दिनों से ज्यादा प्रदर्शन चला। 200 लोगों से शुरू हुआ आंदोलन हजारों की भीड़ में बदल गया।

 

सबसे बड़ी जीत : डर का टूटना

अभिजीत दीपके का मानना है कि उनकी सबसे बड़ी जीत शिक्षा मंत्री का इस्तीफा नहीं है। असली जीत यह है कि पिछले एक दशक से भारत के लोगों के दिलों में सरकार से सवाल पूछने का जो डर बैठा था, वह डर अब टूट चुका है।

 

वे मुख्यधारा के मीडिया पर भी कड़ा हमला बोलते हुए कहते हैं कि गोदी मीडिया को देश के युवाओं की बात सुननी ही पड़ेगी, क्योंकि युवा ही इस देश की बहुसंख्यक आवाज हैं।

 

“शिक्षा कोई व्यापार नहीं, भारत में पैदा हुए हर बच्चे का मौलिक अधिकार है।” — अभिजीत दीपके

 

'कॉकरोच जनता पार्टी' का देशव्यापी अभियान

अब यह आंदोलन केवल एक परीक्षा या मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं है। कॉकरोच जनता पार्टी अब हर राज्य में जाकर जमीनी समस्याओं, युवाओं के दर्द और उनकी उम्मीदों को समझने के लिए एक देशव्यापी अभियान शुरू कर रही है।

 

Gen-Z अपनी स्क्रीन के जरिए दुनिया भर के लोकतंत्र और अवसरों को देख रही है। वह जानती है कि बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर और बेहतर शिक्षा उनका हक है। जब न रोजी-रोटी संभल रही हो, न बच्चों की पढ़ाई, तो चुपचाप बैठना और शिकायत न करना अब किसी विकल्प में शामिल नहीं है।

इस दिन पूरी रात खुला रहेगा खजराना मंदिर, सवा लाख मोदक का भोग, 6 करोड़ के सोने के आभूषण से सजेंगे गजानन

इस दिन पूरी रात खुला रहेगा खजराना मंदिर, सवा लाख मोदक का भोग, 6 करोड़ के सोने के आभूषण से सजेंगे गजानन

Khajrana Temple

इंदौर के प्रसिद्ध खजराना गणेश मंदिर में हजारों लाखों श्रद्धालुओं की आस्‍था है। यहां रोजाना हजारों लोग दर्शन के लिए आते हैं। इंदौर का तो कोई भी नागरिक बगैर खजराना गणेश के दर्शन के अपना कोई नया काम शुरू नहीं करता। अब गणेश चतुर्थी पर यहां विशेष तौर पर तैयारी की जा रही है।

मंदिर में होने वाले आयोजनों, भगवान के श्रृंगार, सजावट, प्रसाद और भोग, लाइटिंग, भक्तों की दर्शन व्यवस्था और पुलिस व्यवस्था सहित अन्य तैयारियां की जा रही हैं। मंदिर परिसर में 80 से ज्यादा CCTV कैमरों से नजर रखी जाएगी। व्यवस्था के लिए चार थानों का पुलिस बल भी तैनात रहेगा। मंदिर प्रबंधन समिति के 30 सुरक्षा गार्ड यहां नियमित रूप से तैनात रहते हैं। गणेशोत्सव के दौरान इनकी संख्या बढ़ाकर 100 की जाएगी।

सवा लाख मोदकों का भोग : इस बार भी गणेश चतुर्थी पर भगवान गणेश को सवा लाख मोदकों का भोग लगाया जाएगा। गणेशोत्सव का शुभारंभ 14 सितंबर को सुबह 10 बजे ध्वजा पूजन के साथ होगा। कलेक्टर एवं मंदिर प्रबंधन समिति के अध्यक्ष शिवम वर्मा और निगम कमिश्नर एवं मंदिर के प्रशासक क्षितिज सिंघल ध्वजा पूजन करेंगे। सवा लाख मोदक बनाने का काम भी जल्द मंदिर परिसर में शुरू होगा।

रातभर होंगे गजानन के दर्शन : गणेशोत्सव से एक दिन पहले हरतालिका तीज को लेकर भी मंदिर में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर के मुख्य पुजारी पंडित अशोक भट्ट ने बताया कि 13 सितंबर को हरतालिका तीज पर मंदिर रातभर भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहेगा। यानी मंदिर 24 घंटे खुला रहेगा। पंडित अशोक भट्ट ने बताया कि गणेशोत्सव पर हर साल मंदिर में भगवान गणेश को सवा लाख मोदकों का भोग लगाया जाता है। इस साल भी सवा लाख मोदक भगवान को अर्पित किए जाएंगे। इसके अलावा 10 दिनों तक शाम की आरती के समय अलग-अलग प्रकार के 11 हजार लड्डुओं का भोग लगाया जाएगा। इसमें सोंठ, ड्रायफ्रूट, उड़द आदि के लड्डू शामिल होंगे।

6 करोड़ के स्वर्ण आभूषणों से श्रृंगार: गणेशोत्सव के दौरान भगवान गणेश का रोजाना भव्य श्रृंगार किया जाएगा। भगवान को स्वर्ण आभूषण पहनाए जाएंगे। इन स्वर्ण आभूषणों की कीमत 6 करोड़ रुपए से ज्यादा है। आभूषणों को पूरी सुरक्षा व्यवस्था के साथ मंदिर में लाया जाता है। इसके बाद भगवान गणेश को ये स्वर्ण आभूषण धारण कराए जाते हैं। यह श्रृंगार विशेष होता है। पूरे 10 दिनों तक भगवान के अलग-अलग स्वरूपों में श्रृंगार देखने को मिलेगा।

फ्रिज डोर नहीं, कॉन्फिडेंस बूस्टर है! इसपर लगी एक तस्वीर बदल सकती है आपके बच्चे की सोच

बच्चों की ड्रॉइंग, स्कूल के सर्टिफिकेट, फोटो या मेडल को रेफ्रिजरेटर पर लगाना कई घरों में आम बात है। देखने में यह डेकोरेशन या बच्चे की अचीवमेंट को दिखाने का तरीका लग सकता है, लेकिन इसके पीछे माता-पिता के इमोशन भी जुड़े होते हैं। जब माता-पिता बच्चे की बनाई पेंटिंग या मिले अवार्ड को ऐसी जगह लगाते हैं, जहां सबकी नजर पड़े, तो बच्चे को महसूस हो सकता है कि उसकी मेहनत और कोशिश को महत्व दिया जा रहा है। यह जरूरी नहीं कि ऐसा किसी को दिखाने के लिए किया जा रहा हो, कई बार माता-पिता बस बच्चे के अचीवमेंट पर गर्व करते हैं और उन पलों को यादगार बनाना चाहते हैं।

साइकोलॉजी के अनुसार, बच्चों के काम को पहचान और तारीफ मिलने से उनके कॉन्फिडेंस पर अच्छा असर पड़ सकता है। माता-पिता का प्रोत्साहन बच्चों को अपनी क्षमता समझने और आगे कुछ नया करने के लिए इंस्पायर कर सकता है। जब बच्चा अपनी ड्रॉइंग या मेडल को रोज देखता है, तो उसे अपनी मेहनत पर गर्व महसूस हो सकता है और यह संदेश मिलता है कि उसकी कोशिश मायने रखती है।prixe

बच्चे की मेहनत को मिलता है सम्मान

साइकोलॉजिस्ट एलिजाबेथ गुंडरसन, कैरोल ड्वेक और उनके साथियों की रिसर्च में पाया गया कि बचपन में माता-पिता जब बच्चे की कोशिश और मेहनत की तारीफ करते हैं, तो इसका संबंध आगे चलकर सीखने और अपनी काबिलियत को बेहतर बनाने वाली सोच से हो सकता है। यानी बच्चा यह समझने लगता है कि किसी काम में अच्छा बनने के लिए लगातार कोशिश और सीखना जरूरी है। यह बात अलग है कि बच्चे की ड्रॉइंग को फ्रिज पर लगाना और उसकी कोशिश की सीधे तारीफ करना एक ही चीज नहीं है। रिसर्च से यह साबित नहीं हुआ है कि फ्रिज पर पेंटिंग लगाने से सीधे बच्चे में ग्रोथ माइंडसेट बनता है।

 

बढ़ता है बच्चे का आत्मविश्वास

बच्चों के लिए यह महसूस करना जरूरी होता है कि वे कुछ कर सकते हैं और उनके काम की अहमियत है। जब माता-पिता बच्चे की पेंटिंग, सर्टिफिकेट या मेडल को गर्व से फ्रिज पर लगाते हैं, तो बच्चे को अपनी कैपेसिटी पर भरोसा बढ़ाने वाला सिग्नल मिलता है। इसका मतलब यह नहीं कि माता-पिता बच्चे को दुनिया का सबसे अच्छा आर्टिस्ट बता रहे हैं।

 

बचपन की यादें रहेंगी ताजा

रेफ्रिजरेटर घर की ऐसी जगह है, जिस पर परिवार के सदस्यों की बार-बार नजर पड़ती है। इसलिए बच्चे की पहली ड्रॉइंग, पहला मेडल या स्कूल का सर्टिफिकेट वहां लगाना दिखावा नहीं, बल्कि वह परिवार की यादों का हिस्सा बन जाता है। कुछ साल बाद वही पेंटिंग देखकर माता-पिता को याद आ सकता है कि बच्चा उस समय कितना छोटा था या उसने पहली बार ड्रॉइंग कब बनाई थी।

 

 

हर अचीवमेंट देता है सेल्फ-कॉन्फिडेंस

जब बच्चे की मेहनत को बार-बार पहचान मिलती है, तो उसे आगे भी कुछ नया करने की इच्छा हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर बच्चे ने कोई पेंटिंग बनाई और माता-पिता ने उसे फ्रिज पर लगा दिया, तो बच्चे को यह एहसास हो सकता है कि उसकी क्रिएटिविटी को घर में जगह मिल रही है। इसी तरह किसी खेल में जीता मेडल सामने दिखाई देने पर बच्चा अपनी मेहनत को याद कर सकता है।

 

 

मायने रखता है माता-पिता का नजरिया

एक ही मेडल या पेंटिंग बच्चे के लिए अलग-अलग संदेश दे सकती है और यह काफी हद तक इस बात पर डिपेंड करता है कि माता-पिता उससे क्या कहते हैं। वे कहते हैं, तुमने इसके लिए बहुत मेहनत की है, तो बच्चे का ध्यान कोशिश और लगन पर जाता है। वहीं बार-बार कहा जाए, तुम तो जन्म से ही सबसे होशियार हो, तो बच्चे को अपनी एक तय खूबी बनाए रखने का प्रेशर हो सकता है। कैरोल ड्वेक और उनके साथियों की रिसर्च इसी तरह की तारीफ के फर्क को समझने में मदद करती है।

 

बच्चों की ड्रॉइंग, मेडल या सर्टिफिकेट को रेफ्रिजरेटर पर लगाना सिर्फ डेकोरेशन या अचीवमेंट दिखाने की बात नहीं है। हर परिवार के लिए इसका मतलब अलग हो सकता है, लेकिन कई माता-पिता के लिए यह बच्चे की मेहनत, कोशिश और खुशी को पहचानने का एक छोटा-सा तरीका होता है। जब बच्चा अपनी बनाई चीज को घर में खास जगह पर देखता है, तो उसे महसूस हो सकता है कि उसके काम और उसकी कोशिश की कद्र की जाती है। इसलिए फ्रिज पर लगी एक छोटी-सी ड्रॉइंग भी बच्चे के लिए प्यार, गर्व और प्रोत्साहन का बड़ा संदेश दे सकती है।

इंदौर में बारिश में भी पानी का संकट, अब भी चल रहे 350 टैंकर, बोरवेल भी सूख रहे, गर्मियों में क्या होगा हाल?

इंदौर में बारिश में भी पानी का संकट, अब भी चल रहे 350 टैंकर, बोरवेल भी सूख रहे, गर्मियों में क्या होगा हाल?

indore water crisis

  • 18 इंच बारिश के बाद भी सूखे हैं इंदौर के बोरवेल
  • हर साल जुलाई में बंद हो जाता है टैंकर से पानी सप्‍लाय
  • इस बार अगस्‍त में भी चल रहे पानी सप्‍लाय के लिए टैंकर
  • अगले साल गर्मी में क्‍या होगा इंदौर का हाल

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी कहे जाने वाले इंदौर में इस बार मानसून सीजन के दौरान चिंताजनक स्थिति देखने को मिल रही है। शहर में करीब 18 इंच बारिश दर्ज हो चुकी है, इसके बावजूद भू-जल स्तर (Groundwater Level) में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है। आलम यह है कि जो निजी टैंकर अमूल्य रूप से सिर्फ गर्मियों में संकट से निपटने के लिए चलाए जाते थे, वे इस बार अगस्त का महीना बीतने को होने के बावजूद शहर में पानी की सप्लाई में जुटे हुए हैं।

सामान्य तौर पर जुलाई की बारिश के बाद टैंकरों की जरूरत खत्म हो जाती है, लेकिन मौजूदा हालात ने नगर निगम और आम नागरिकों दोनों की नींद उड़ा दी है। बता दें कि कई इलाकों के बोरिंगों में भी भरपूर पानी नहीं आ रहा है और कई मल्टियों में अभी भी पानी की पूर्ति के लिए टैंकर मंगाने पड़ रहे हैं।

संकट के लिए तैयार रहे इंदौर: यदि सितंबर माह में भरपूर बारिश नहीं होती है तो फिर अगले साल शहरवासियों को जलसंकट का सामना करना पड़ सकता है। शहर के बड़े हिस्से की प्यास बुझाने वाले यशवंत सागर तालाब में 13 फीट पानी है, जबकि तालाब की क्षमता 19 फीट है। अभी भी तालाब में छह फीट पानी की आवश्यकता है। शहर के बिलावली, पिपलियापाला और पिपलियाहाना तालाब भी आधे खाली हैं। पिपलियाहाना तालाब को भरने के लिए नगर निगम सड़कों पर बहने वाले पानी को पाइपों के जरिए चैनल से तालाब तक लाया, लेकिन कम वर्षा होने के कारण तालाब खाली है।पिछले साल अगस्त माह तक कई तालाब भर चुक थे और अतिरिक्त पानी तालाबों से चैनलों के जरिए बाहर निकाला गया था।

जुलाई तक हो जाता है वाटर रिचार्ज: बता दें कि सामान्य मानसून में जुलाई तक भू-जल स्तर रिचार्ज हो जाता है और बोरवेल अपनी क्षमता के अनुसार पानी देने लगते हैं। इस साल 18 इंच बारिश होने के बाद भी कई इलाकों में बोरवेल सूखने लगे हैं। कई निजी बोरिंग में भी पानी कम आने लगा है।

अब भी चल रहे निजी टैंकर: नगर निगम सीमा के अंतर्गत अभी भी लगभग 350 निजी टैंकर पानी सप्लाई के लिए संचालित हो रहे हैं, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि जल वितरण नेटवर्क और प्राकृतिक स्रोत दोनों दबाव में हैं। बारिश के दिनों में लगातार अच्छी मानसूनी गतिविधियों की कमी और भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन के कारण यह संकट और गहराया है।

गर्मियों में संकट लेगा विकराल रूप: अगर अगस्त में भी टैंकरों की आवश्यकता पड़ रही है, तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आगामी गर्मी के मौसम में जल संकट कितना भीषण हो सकता है, इसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। बता दें कि पिछले साल भी इंदौर में पानी का संकट गहराया था और निगम को कई टैंकर चलाने पडे थे।

भू-जल पुनर्भरण (Groundwater Recharge) की विफलता: यह इस बात का भी प्रमाण है कि शहर में कंक्रीट का दायरा बढ़ने और वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम के सही ढंग से काम न करने के कारण बारिश का पानी जमीन के अंदर जाने के बजाय बहकर निकल जाता है।

वाटर हार्वेस्टिंग ऑडिट में बरतना होगी सख्ती : शहर की बड़ी कॉलोनियों, कमर्शियल कॉम्प्लेक्स और सरकारी इमारतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम की अनिवार्यता की सख्त जांच हो। नर्मदा जल पाइपलाइन नेटवर्क में होने वाले लीकेज को तुरंत दुरुस्त किया जाए ताकि पानी की एक-एक बूंद बचाई जा सके। इसके साथ ही शहर के पारंपरिक तालाबों और बावड़ियों का गहरीकरण और सौंदर्यीकरण समय रहते पूरा किया जाए तो पानी के संकट से कुछ हद तक बचा जा सकता है।

हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

हिमालय क्षेत्र में भविष्य में भी ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा

himalaya

संयुक्त राष्ट्र यानी यूएन की एक वरिष्ठ अधिकारी ने चेतावनी दी है कि हिमालय क्षेत्र में भविष्य में ग्लेशियर फ्लड आने का गंभीर खतरा है। इसके चलते ना सिर्फ जलविद्युत ऊर्जा पर संकट छा जाएगा बल्कि नदियों के तटों के पास रहने वाले लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं। ALSO READ: क्या तिब्बत में आपदा के नुकसान को छिपा रहा है चीन?

यूएन की सहायक महासचिव कन्नी विग्नराजा ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स से कहा कि लाखों की संख्या में लोग इस खतरे से प्रभावित हो सकते हैं।  शोधकर्ताओं ने साल 2020 में नेपाल, चीन और भारत में 47 संभावित रूप से खतरनाक ग्लेशियर झीलों की पहचान की थी। बाद में अनुमान लगाया गया कि वास्तविक संख्या इससे कहीं अधिक हो सकती है।

 

कन्नी विग्नराजा ने कहा कि हिमालय क्षेत्र में ग्लेशियर फ्लड के साथ-साथ ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड का खतरा भी बढ़ रहा है क्योंकि जलवायु परिवर्तन के चलते ग्लेशियरों के पिघलने की रफ्तार तेज हो गई है। ALSO READ: नेपाल: विनाशकारी बाढ़ से उबरने के लिए 4-5 अरब डॉलर की दरकार

 

नेपाल में पिछले हफ्ते विनाशकारी बाढ़ भी एक ग्लेशियर के कुछ हिस्सों के टूटकर गिरने की वजह से आई थी। इस बाढ़ में अब तक 1,000 से अधिक लोगों की मौत होने की पुष्टि हो चुकी है। नेपाल के 10 से अधिक हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट भी इसकी चपेट में आए। इन परियोजनाओं की सुरंगों में भी बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं, जिन्हें बचाए जाने के लिए अभियान चलाए जा रहे हैं लेकिन अभी तक कोई बड़ी कामयाबी नहीं मिली है।