रिकवरी के बावजूद Sensex 374 प्वाइंट्स कमजोर, Nifty 23914 पर बंद, डूबे निवेशकों के ₹2.69 लाख करोड़

Share Market Crash: अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर युद्ध की आंच तेज हुई तो कच्चा तेल उबल पड़ा और इन दोनों ने मिलकर दुनिया भर में कोहराम मचा दिया। घरेलू स्टॉक मार्केट में सेंसेक्स 800 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी टूटकर 23800 के नीचे आ गया और निचले स्तर पर रिकवरी के बावजूद यह गहरे लाल बंद हुआ। ब्रोडर लेवल पर भी रिकवरी हल्की ही रही और शुरुआती कारोबार में 1% की गिरावट से हल्की रिकवरी के साथ निफ्टी मिडकैप 100 आज 0.53% तो निफ्टी स्मॉलकैप 100 भी 0.37% की गिरावट के साथ बंद हुआ।

सेक्टरवाइज आईटी और आईटी सेक्टर ने मार्केट पर ऐसा दबाव बनाया कि यह संभल ही नहीं पाया। निफ्टी ऑटो डेढ़ फीसदी से अधिक और निफ्टी आईटी 1% से अधिक कमजोर हुआ। सरकारी बैंकों ने रिकवरी तो कर ली लेकिन इसके निफ्टी इंडेक्स में बढ़त मामूली रही तो दूसरी तरफ प्राइवेट बैंकों के निफ्टी इंडेक्स में आधे फीसदी से अधिक की गिरावट आई। बिकवाली के इस दबाव में आज BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹3 लाख करोड़ से अधिक गिर गया।

अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो आज 02 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 373.93 प्वाइंट्स यानी 0.49% की फिसलन के साथ 76,570.35 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 141.35 प्वाइंट्स यानी 0.59% की कमजोरी के साथ 23,914.45 पर बंद हुआ है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 808.56 प्वाइंट्स टूटकर 76,135.72 और निफ्टी 269.00 प्वाइंट्स गिरकर 23,786.80 पर आ गया।

निवेशकों के ₹2.69 लाख करोड़ स्वाहा

एक कारोबारी दिन पहले यानी 01 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,89,41,989.64 करोड़ था। आज यानी 02 सितंबर 2026 को यह घटकर ₹4,86,72,129.50 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी में आज ₹269,860.14 करोड़ की गिरावट आई है।

Sensex के 10 स्टॉक्स ग्रीन

सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें 10 आज ग्रीन रहे। दिन के आखिरी में आज अदाणी पोर्ट्स, बजाज फिनसर्व और पावरग्रिड सबसे अधिक बढ़त के साथ बंद हुए तो दूसरी तरफ एशियन पेंट्स, एचडीएफसी बैंक और एमएंडएम में सबसे अधिक गिरावट रही। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

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स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Milky Mist Share Price: रॉकेट की तरह भागा शेयर, IPO में निवेश किया होता तो 15 दिन में 78% कमाया होता

Milky Mist Share Price: मिल्की मिस्ट डेयरी फूड के शेयरों में 2 सितंबर को भी जबर्दस्त तेजी दिखी। 1 सितंबर को 10 फीसदी उछाल के बाद इस शेयर में अपर सर्किट लगा था। सिर्फ दो दिन में यह शेयर करीब 20 फीसदी उछला है। 2 सितंबर को कारोबार के अंत में यह शेयर 7.57 फीसदी चढ़कर 249.60 रुपये पर बंद हुआ।

जून तिमाही में कंपनी का शानदार प्रदर्शन

Milky Mist Dairy Food के शेयरों में 1 सितंबर को आई तेजी की वजह जून तिमाही में इसका प्रदर्शन है। जून तिमाही में कंपनी का स्टैंडएलोन नेट प्रॉफिट 1,000 फीसदी से ज्यादा बढ़ा है। कंपनी का रेवेन्यू भी इस दौरान 45 फीसदी बढ़कर 973 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले की समान अवधि में यह 673 करोड़ रुपये था।

कंपनी वैल्यू-एडेड मिल्क प्रोडक्ट्स बनाती है

यह कंपनी वैल्यू-ऐडेड मिल्क प्रोडक्ट्स के बिजनेस में है। इनमें पनीर, चीज, दही, बटर, घी और आइसक्रीम शामिल हैं। कंपनी ने रेडी-टू-कुक और रेडी-टू-ईट फूड्स के बिजनेस में भी एंट्री ली है। कंपनी का प्रदर्शन FY24 से ही जोरदार रहा है। इसके रेवेन्यू का सीएजीआर 31 फीसदी रहा है।

पिछले महीने आया था कंपनी का आईपीओ

मिल्की मिस्ट का आईपीओ पिछले महीने आया था। कंपनी ने 140 रुपये के भाव पर इनवेस्टर्स को आईपीओ में शेयर इश्यू किए थे। कंपनी के शेयर 18 अगस्त को 25 फीसदी प्रीमियम के साथ 165 रुपये पर लिस्ट हुए थे। इस इश्यू को निवेशकों का शानदार रिस्पॉन्स मिला था। यह आईपीओ 55 गुना सब्सक्राइब हुआ था। अगर आईपीओ में आपको शेयर मिला होता तो आज आपका मुनाफा 78 फीसदी होता।

बाजार के कमजोर सेटीमेंट में भी चढ़ा शेयर 

मिल्की मिस्ट के शेयरों में तब जोरदार तेजी दिखी है, जब शेयर बाजार का सेंटिमेंट कमजोर है। 2 सितंबर को भी शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों पर दबाव दिखा। निफ्टी 0.59 फीसदी यानी 141 अंक गिरकर 23,914 पर आ गया। सेंसेक्स भी 0.49 फीसदी यानी 373 फीसदी गिरकर 76,570 पर आ गया। कई सत्रों के बाद निफ्टी 24,000 के नीचे आया है।

Bihar Teacher Recruitment 4.0: 21 सितंबर से शुरू होंगे बिहार टीआरई 4 के लिए आवेदन? सरकार ने बढ़ाए म्यूजिक टीचर के पद

Bihar Teacher Recruitment 4.0: बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) ने जल्द ही स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा के चौथे चरण (TRE-4.0) की शुरुआत कर सकता है। आयोग ने मंगलवार शाम को बताया कि चौथे चरण की स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा के लिए आवेदन 21 सितंबर से शुरू हो सकता है। बिहार टीआरई 4.0 के लिए आवेदन की शुरुआत एक औपचारिक संशोधित विज्ञापन जारी होने और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया में जरूरी बदलावों के बाद हो सकता है।

यह अपडेट बीपीएससी के आधिकारिक एक्स हैंडल पर उपलब्ध था। ट्वीट में लिखा है, “एडवरटाइजमेंट नंबर-14/2026, चौथे फेज के स्कूल टीचर रिक्रूटमेंट एग्जामिनेशन (TRE-4.0) के तहत, स्कूल टीचर के पदों पर नियुक्ति के लिए आवेदन प्रक्रिया, संशोधित विज्ञापन और ऑनलाइन आवेदन में जरूरी बदलावों के बाद, तारीख-21.09.2026 से शुरू होने की संभावना है।”

बीपीएससी टीआरई भर्ती प्रक्रिया में अलग-अलग स्कूल स्तर पर 32388 टीचिंग पद शामिल होंगे। कुल वैकेंसी में से, क्लास 1 से 5 के लिए 3,847 पोस्ट, क्लास 6 से 8 के लिए 8,563, क्लास 9 और 10 के लिए 3,877, और क्लास 11 और 12 के लिए 16,101 पोस्ट तय की गई हैं।

राज्य भर के सरकारी स्कूलों में 32,388 टीचर पदों को भरने के उद्देश्य से बीपीएससी टीआरई 4.0 आयोजित करने की तैयारी कर रहा है। इससे पहले, 31 अगस्त को, बीपीएससी ने टीआरई 4.0 के लिए आवेदन प्रक्रिया को टालने का ऐलान किया था। जबकि आवेदन प्रक्रिया 1 सितंबर से शुरू होने वाला था।

आधिकारिक रिलीज में कहा गया था, “शिक्षा विभाग, बिहार के अंतर्गत 1 सितंबर से शुरू होने वाले चौथे चरण के स्कूल शिक्षक भर्ती परीक्षा (TRE-4.0) के तहत स्कूल शिक्षकों के कुल 32,388 खाली पदों पर नियुक्ति के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रोसेस में बदलाव की वजह से टाल दिए गए हैं। इस विज्ञापन से जुड़ी तारीख की घोषणा जल्द ही की जाएगी।” शिक्षा के क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक राज्य के ढेरों उम्मीदवार कई मुख्य मांगों को लेकर विरोध कर रहे थे। इसमें एग्जाम पैटर्न में बदलाव और नेगेटिव मार्किंग लागू करना शामिल था। विरोध कर रहे उम्मीदवारों से बातचीत के बाद, राज्य सरकार ने हाल ही में घोषणा की कि टीआरई 4.0 एक ही चरण में आयोजित किया जाएगा।

टीआरई 4.0 की वैकेंसी बढ़ाई गई

राज्य सरकार ने उम्मीदवारों की म्यूजिक टीचर के पदों की संख्या बढ़ाने की मांग के बाद, पदों की संख्या 111 बढ़ा दी।

IBPS RRB Recruitment 2026: 13000 से ज्यादा पदों पर भर्ती के लिए आईबीपीएस ने जारी किया नोटिफिकेशन, आधिकारिक वेबसाइट पर आवेदन शुरू

Success Story: छत पर शुरू की ड्रैगन फ्रूट की खेती, ऐसे होने लगी लाखों की कमाई, महिला ने अपनाया ये तरीका

रिटायरमेंट के बाद आमतौर पर लोग आराम और परिवार के साथ समय बिताने की योजना बनाते हैं। लेकिन केरल की पूर्व हेडमिस्ट्रेस रेमाभाई एस की जिंदगी में रिटायरमेंट के बाद एक अलग ही अध्याय शुरू हुआ। अकेलेपन से निपटने के लिए घर में पौधे लगाने से शुरू हुआ उनका सफर धीरे-धीरे ऐसे बिजनेस में बदल गया, जिससे अब वह करीब ₹4 लाख महीने की कमाई कर रही हैं।

मां की मौत के बाद बढ़ गया था अकेलापन

रेमाभाई ने 31 मई 2022 को 30 साल से ज्यादा समय तक जूलॉजी पढ़ाने के बाद रिटायरमेंट लिया। उनके पति रिटायर्ड सीनियर बैंक मैनेजर हैं और उस समय भी एक इंजीनियरिंग कॉलेज में काम कर रहे थे। वहीं उनका बेटा और बहू दोनों डॉक्टर हैं और दिल्ली में रहते थे। उसी साल उनकी मां का निधन हो गया। रिटायरमेंट और मां की मौत के बाद घर में अकेलापन उन्हें ज्यादा महसूस होने लगा। इसी दौरान उन्होंने खुद को व्यस्त रखने के लिए घर में पौधे उगाने का फैसला किया।

52 विदेशी फलों पर की रिसर्च, फिर चुना ड्रैगन फ्रूट

रेमाभाई ने शुरुआत किसी जल्दबाजी में नहीं की। उन्होंने जर्नल, ऑनलाइन जानकारी और अलग-अलग फार्म की यात्राओं के जरिए करीब 52 विदेशी फलों के बारे में जानकारी जुटाई। काफी रिसर्च के बाद उन्होंने Malaysian King Red Dragon Fruit किस्म को चुना। सीमित जगह में ज्यादा पौधे लगाने के लिए उन्होंने हाई-डेंसिटी फार्मिंग का तरीका अपनाया।

1,750 वर्ग फुट में लगाए 360 पौधे

घर के करीब 1,750 वर्ग फुट के हिस्से में उन्होंने 360 ड्रैगन फ्रूट पौधे लगाए। इसके लिए 90 स्थानीय स्तर पर बने कंक्रीट पोल लगाए गए और हर पोल पर चार पौधों को सहारा दिया गया। उन्होंने खर्च कम रखने के लिए GI पाइप और पुराने टायरों का भी इस्तेमाल किया। शुरुआती दौर में एक पौधे की स्टेम करीब ₹100 में खरीदी गई थी। मेहनत का नतीजा जल्दी दिखा। करीब छह महीने में पौधों में फूल आने लगे और मार्च 2023 से उन्होंने फल की पहली फसल लेना शुरू कर दिया।

शुरुआत में ₹50 हजार, फिर बढ़कर ₹1.5 लाख महीना

पहले 360 पौधों से उन्हें हर महीने ₹50 हजार से ज्यादा की आमदनी हुई। पौधों के बड़े होने के साथ कमाई बढ़कर करीब ₹1.5 लाख महीने तक पहुंच गई। उत्पादन के चरम समय में वह लगभग 750 किलो ड्रैगन फ्रूट हर महीने तैयार करने लगीं। वह फल करीब ₹175 प्रति किलो की दर से बेचती थीं। खास बात यह रही कि थोक खरीदार और ऑर्गेनिक स्टोर उनके घर से ही फल उठा लेते थे।

नई जमीन नहीं खरीदी, छत को बनाया अगला फार्म

बिजनेस बढ़ाने के लिए रेमाभाई के सामने अगली चुनौती थी बिना जमीन खरीदे उत्पादन बढ़ाना। घर की छत पर बड़ी मात्रा में मिट्टी ले जाना उन्हें सही नहीं लगा। इसलिए उन्होंने सोइल-लेस यानी कम मिट्टी वाली खेती के विकल्प पर प्रयोग शुरू किया। उन्होंने सामान्य मिट्टी और घर में तैयार किए गए कंपोस्ट की तुलना की। कंपोस्ट में पौधों की ग्रोथ बेहतर दिखने के बाद उन्होंने इसी तरीके को आगे बढ़ाया।

बैरल में लगाए 100 और पौधे

रेमाबाई ने छत पर 50 बैरल लगाए। इनमें कंपोस्ट और गोबर की खाद का मिश्रण इस्तेमाल किया गया और हर बैरल में दो पौधे लगाए गए। इस तरह छत पर 100 और ड्रैगन फ्रूट पौधे तैयार हो गए। करीब पांच महीने में इन पौधों पर फल आने लगे। अक्टूबर 2023 तक छत की खेती भी उत्पादन देने लगी थी। एक पौधे पर एक समय में करीब 10 से 20 फल तक दिखाई देते थे।

घर के कचरे से तैयार करती हैं खाद और लिक्विड फर्टिलाइजर

रेमाबाई की खेती की खासियत सिर्फ ड्रैगन फ्रूट उगाना नहीं है। वह घर और बगीचे से निकलने वाले जैविक कचरे का इस्तेमाल भी खेती में करती हैं। किचन वेस्ट, पत्तियां, कटहल का बचा हिस्सा, प्याज और सब्जियों के अवशेष जैसी चीजों से वह कंपोस्ट तैयार करती हैं। उनके पास तीन कंपोस्टिंग यूनिट हैं और वह 15 से ज्यादा तरह के लिक्विड प्रिपरेशन भी तैयार करती हैं। मछली के कचरे से वह फिश अमीनो एसिड भी बनाती हैं। उनके मुताबिक, अब तक 5,000 लीटर से ज्यादा यह तैयारी तैयार की जा चुकी है।

साल में ज्यादा लंबे समय तक मिलता है फल

उनके खेती के तरीके का एक फायदा यह भी है कि ड्रैगन फ्रूट का उत्पादन लंबे समय तक चलता है। जहां आमतौर पर इसकी मुख्य फसल करीब पांच से छह महीने तक रहती है, वहीं रेमाबाई लगभग 10 महीने तक फल प्राप्त कर लेती हैं। जनवरी और फरवरी में उत्पादन में मुख्य अंतराल रहता है। उनके बगीचे में महीने में करीब तीन बार फसल होती है और हर बार लगभग 250 किलो फल निकलता है।

अब पौधों की कटिंग भी बन गई कमाई का जरिया

समय के साथ रेमाभाई के ड्रैगन फ्रूट पौधों की स्टेम कटिंग की मांग भी बढ़ने लगी। उन्होंने इसे अलग आय के स्रोत के रूप में विकसित कर लिया। वह एक कटिंग करीब ₹70 में बेचती हैं और अब तक भारत, मालदीव और श्रीलंका में उनके 2,500 से ज्यादा ग्राहक बताए जाते हैं। बड़े ऑर्डर कुरियर के जरिए भेजे जाते हैं। एक दिन में तेलंगाना के लिए 5,500 स्टेम कटिंग का ऑर्डर भी भेजा गया।

सिर्फ पौधे नहीं बेचतीं, तरीका भी सिखाती हैं

रेमाबाई अपने ग्राहकों को सिर्फ कटिंग देकर नहीं छोड़तीं। वह उन्हें पौधे लगाने और उनकी देखभाल के बारे में जानकारी देती हैं और आगे की ग्रोथ पर भी नजर रखती हैं। उनके मुताबिक, सही परिस्थितियों में स्टेम से करीब छह महीने में फल मिलना शुरू हो सकता है।

रिटायरमेंट का शौक बना पूरा बिजनेस

रेमाबाई की कहानी की खास बात यह है कि उन्होंने बिजनेस शुरू करने के लिए न बड़ी जमीन खरीदी और न ही भारी निवेश किया। घर के आंगन और छत जैसी सीमित जगह का इस्तेमाल करते हुए उन्होंने पहले पौधे लगाए, फिर रिसर्च की, प्रयोग किए और धीरे-धीरे खेती को कमाई के मॉडल में बदल दिया।

आज ड्रैगन फ्रूट, छत पर खेती और स्टेम कटिंगइन अलग-अलग स्रोतों से उनकी कुल मासिक कमाई करीब ₹4 लाख बताई जाती है। रिटायरमेंट के बाद अकेलेपन से बचने के लिए शुरू हुआ पौधों का शौक अब उनकी आर्थिक आत्मनिर्भरता की कहानी बन चुका है।

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यूपी चुनाव से पहले AIMIM को बड़ा झटका, सैयद असीम वकार कांग्रेस में शामिल

यूपी चुनाव से पहले AIMIM को बड़ा झटका, सैयद असीम वकार कांग्रेस में शामिल

syed asim waqar

उत्तर प्रदेश चुनाव से पहले AIMIM को बुधवार को उस समय बड़ा झटका लगा जब पार्टी नेता सैयद असीम वकार कांग्रेस में शामिल हो गए। वे एआईएमआईएम के प्रवक्ता के तौर पर विभिन्न चैनलों पर पार्टी का पक्ष बड़ी मजबूती के साथ रखते थे। 

 

लखनऊ से ताल्लुक रखने वाले सैयद असीम वकार ने कहा कि देश से मोहब्बत करने वाले लोग BJP की देशविरोधी सरकार को सत्ता से उखाड़ फेंकना चाहते हैं, ताकि देश में एक सेक्युलर और जनहित की सरकार बनाई जा सके। 

 

उन्होंने कहा कि AIMIM में रहने के बाद मुझे लगा कि हम बात तो BJP और उसकी विचारधारा से लड़ने की करते हैं, लेकिन जमीन पर उनसे लड़ रहे हैं जो BJP के खिलाफ हैं। इसलिए मैंने फैसला लिया कि अगर हम सच्चे देशभक्त हैं और ईमानदारी से BJP को सत्ता से हटाना चाहते हैं, तो कांग्रेस के साथ आना होगा जो मजबूती के साथ BJP से लड़ रही है।

इस अवसर पर यूपी कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि आज कांग्रेस पार्टी में सैयद असीम वकार जैसे मजबूत व्यक्ति की ज्वाइनिंग हुई है। इन्होंने हमेशा अपनी वाकपटुता के साथ समाज को एक सकारात्मक संदेश देने का काम किया है। इनकी सोच और इनके विचार हमारे नेता राहुल गांधी जी के उस सपने से जुड़े हैं, जो उन्होंने इस देश के लिए देखा है। आज ‘मोहब्बत की दुकान’ लगातार बढ़ती जा रही है और साल 2027 में उत्तर प्रदेश के हर गांव, हर गली में कांग्रेस का झंडा फहराएगा।

गौरतलब है कि AIMIM जोरों से उत्तर प्रदेश चुनाव की तैयारी कर रही है। पार्टी नेता असदुद्दीन ओवैसी ने पिछले दिनों समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव को गठबंधन की पेशकश की थी।

Upcoming Hyundai Midsize SUV Spied in Clearest Look Yet

Upcoming Hyundai Midsize SUV Spied in Clearest Look Yet
New Hyundai midsize SUV

The upcoming Hyundai Bayon-based midsize SUV has been spied testing on our roads once again ahead of its launch this festive season. This latest sighting gives us the clearest look yet at the upcoming model which will sit below the Creta in Hyundai’s lineup, but still measure over 4-meters in length.

Although it’s based on the international-spec Bayon, the India-spec model gets a complete different top hat with crossover-ish stance and sharp LED styling elements. It is expected to come with a 1.5-litre naturally aspirated petrol engine with manual and CVT gearbox options. This engine will also be offered in CNG form with an underbody tank, making the Bayon-based SUV the first Hyundai car over four metres long to be powered by CNG.

Much like Maruti, this will give Hyundai a two-pronged plan to tackle the burgeoning midsize SUV market.  

राहुल गांधी का इंदौर में होने वाला छात्रों की गूंज कार्यक्रम टला, बीजेपी ने कहा, कांग्रेस ने ही रचा पूरा खेल

राहुल गांधी का इंदौर में होने वाला छात्रों की गूंज कार्यक्रम टला, बीजेपी ने कहा, कांग्रेस ने ही रचा पूरा खेल

Rahul Gandhi

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी का इंदौर दौरा टला गया है। बता दे कि पूर्व आधारित कार्यक्रम के अनुसार राहुल गांधी को 12 सितंबर को आना था, लेकिन वे अब इस दिन इंदौर नहीं आ रहे हैं। शहर अध्‍यक्ष चिंटू चौकसे ने वेबदुनिया को बताया कि दौरान टल गया है,

हालांकि इस बारे में पूरी जानकारी और आगामी तारीख के बारे में आज शाम प्रेस वार्ता कर के देंगे। अब तक की जानकारी के अनुसार इंदौर में उनके कार्यक्रम के लिए व्यवस्थित जगह नहीं मिलने से एआईसीसी ने कार्यक्रम की तारीख आगे बढ़ाई है। कहा जा रहा है कि राहुल गांधी 12 सितंबर के बजाय अब 19 सितम्बर को आएंगे।

जानकारी सामने आ रही है कि इंदौर का नेहरू स्टेडियम नहीं मिलने से एआईसीसी ने राहुल का कार्यक्रम बदला है। इंदौर में अब 12 के बजाय 19 सितंबर को राहुल का “छात्रों की गूंज” कार्यक्रम होगा। इस बीच पता चला है कि स्थानीय कांग्रेस द्वारा रीजनल पार्क के सामने आयोजन स्थल को प्राथमिकता से तैयार किया जाएगा।

बीजेपी ने कहा, कांग्रेस का ही खेल : बीजेपी नेता राकेश सिंह यादव ने बताया कि यह पूरा खेल ही कांग्रेस का है। कांग्रेस यह आयोजन करने की स्‍थिति में ही नहीं है। उन्‍होंने जीतू पटवारी पर आरोप लगाते हुए कहा कि यह सब मिलकर भी यहां जेन जी को इकठ्ठा करने की स्‍थिति में नहीं थे, ऐसे में जगह का बहाना बनाकर आयोजन स्‍थगित कर दिया गया है। अब 19 सितंबर को आयोजन करने की बात कही जा रही है, इस बात में कोई दम नहीं है।

उज्‍जैन वाली नरभक्षी अघोरी पर FIR, शमशान से शव का मांस निकालकर खाया था, अब वीडियो बनाकर दी ये धमकी

उज्‍जैन वाली नरभक्षी अघोरी पर FIR, शमशान से शव का मांस निकालकर खाया था, अब वीडियो बनाकर दी ये धमकी

Aghori ujjain

उज्‍जैन के चक्रतीर्थ स्‍थित एक शमशान घाट से जलती चिता में से शव का मांस खाने वाली अघोरी तांत्रिक काली उर्फ नंद गिरी पर पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है। बता दें कि किन्नर अखाड़े से जुड़ी अघोरी तांत्रिक काली उर्फ नंद गिरी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया था, जिसमें वह जलती चिता से तलवार के जरिए इंसानी मांस निकालकर खाते हुए नजर आ रही है।

वीडियो में तांत्रिक को “यह बहुत टेस्टी है” और “मैं तुम्हारे जीवन से खेलूंगी” जैसी अमानवीय बातें कहते हुए सुना जा सकता है। इस वीभत्स वीडियो के वायरल होने के बाद आम जनता के साथ-साथ संत समाज में भी भारी आक्रोश था। महामंडलेश्वर शैलेशानंद गिरी ने इस कृत्य की कड़ी निंदा करते हुए इसे वैदिक परंपरा और अघोर मर्यादा के खिलाफ बताया था और अघोरी तांत्रिक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी।

वीडियो वायरल होने और संत समाज (विशेषकर अघोर व जूना अखाड़े) के भारी आक्रोश के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की। शव के साथ छेड़छाड़ और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने के आरोप में आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 301 व अन्य संबंधित धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है

एफआईआर के बाद बनाया एक और वीडियो : पुलिस ने आरोपी अघोरी को हिरासत में ले लिया है। हालांकि, FIR दर्ज होने के बाद उसका एक और वीडियो सामने आया, जिसमें वह पुलिस और विरोध करने वालों को चुनौती देती व धमकी देती नजर आ रही है। संतों और स्थानीय नागरिकों ने इस कृत्य को सनातन धर्म और अघोर परंपरा की आड़ में किया गया एक घिनौना, अमानवीय व पब्लिसिटी बटोरने वाला स्टंट बताया है। पुलिस फिलहाल मामले की विस्तृत जांच और वीडियो की फोरेंसिक पुष्टि कर रही है।

क्‍या है पूरा मामला : वायरल वीडियो में तांत्रिक काली उर्फ नंद गिरी यह कहते हुए नजर आती है कि वह चिता से मांस खाएगी। इसके बाद वह हाथ में तलवार लेकर जलती चिता के पास जाती और उसमें से मांस निकालकर खाने का दावा करती है। वीडियो सामने आने के बाद उज्जैन के साधु-संतों और अघोर परंपरा से जुड़े लोगों ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई थी। वीडियो में वह यह कहती हुई सुनाई देती है कि ‘हम आज इंसान का मांस खाएंगे। इसके बाद वह तलवार की मदद से चिता में से कुछ निकालती है और उसे खाने का दावा करती है।

बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया ‘नो-ईटिंग’ अलर्ट!

बिहार की गंडक नदी में नेपाल से बहकर आईं अजीब विशालकाय मछलियां, जानिए क्यों प्रशासन ने जारी किया 'नो-ईटिंग' अलर्ट!

Bihar no eating fish alert

Bihar no eating fish alert: नेपाल में हाल ही में आई प्रलयंकारी बाढ़ और लैंडस्लाइड के बाद इसका सीधा असर भारत के सीमावर्ती राज्य बिहार पर दिखाई दे रहा है। नेपाल की नदियों से बहकर विशालकाय और असामान्य वजन वाली मछलियां उत्तर बिहार की गंडक (Gandak River) और कोसी नदियों में पहुंच गई हैं।

 

स्थानीय लोग और मछुआरे इन विशाल मछलियों को पकड़ने के लिए नदियों के किनारे जुट रहे हैं, लेकिन स्थानीय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग ने इन मछलियों को पकड़ने और खाने पर सख्त रोक लगा दी है। ALSO READ: Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

गंडक नदी में अचानक कैसे आईं ये विशाल मछलियां?

नेपाल में मूसलाधार बारिश और ग्लेशियर टूटने के कारण भोटे कोशी, त्रिशूली और गंडकी नदी प्रणालियों में भीषण फ्लैश फ्लड आया।

  • नेपाल के हैचरी और प्राकृतिक जलाशयों से बहाव : नेपाल के ऊपरी इलाकों में स्थित बड़े मत्स्य पालन केंद्रों (Fish Farms/Hatcheries) और प्राकृतिक झीलों के तटबंध बाढ़ में बह गए।
  • तेज बहाव के साथ भारत में प्रवेश : भारी पानी के बहाव और गाद (Sedimentation) के साथ 10 किलो से लेकर 40-50 किलो तक की विशालकाय मछलियां बहकर बिहार के वाल्मीकिनगर (पश्चिम चंपारण), गोपालगंज और सारण जिलों में गंडक नदी के मैदानी इलाकों में आ गईं।

प्रशासन क्यों कर रहा है इन मछलियों को खाने से मना?

विशालकाय मछलियों को देखकर स्थानीय लोगों में इन्हें खाने की होड़ मच गई है, लेकिन प्रशासन और जिला मत्स्य अधिकारियों ने इसे स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताया है। इसके पीछे मुख्य वैज्ञानिक और चिकित्सीय कारण निम्नलिखित हैं:

 

(A) पानी में जहरीले रसायनों और भारी धातुओं का मिश्रण (Heavy Metal Contamination)

नेपाल में आई बाढ़ सिर्फ पानी नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर चट्टानों, खदानों के मलबे और औद्योगिक कचरे को बहाकर लाई है। गंडक नदी में बहकर आ रही मछलियों में आर्सेनिक, सीसा (Lead) और मरकरी (Mercury) जैसे जहरीले तत्वों की मात्रा अत्यधिक होने की आशंका है, जो मानव शरीर के लिए विषैले साबित हो सकते हैं।

 

(B) दूषित और सड़ी हुई मछलियों का खतरा (Bacterial Contamination)

बाढ़ के तीव्र बहाव में दम घुटने (Oxygen Depletion) और पत्थरों से टकराने के कारण कई मछलियां रास्ते में ही मर चुकी थीं या घायल हो गई थीं। पानी में पड़े रहने से इनमें ई-कोलाई (E-coli) और साल्मोनेला (Salmonella) जैसे खतरनाक जीवाणु पनप चुके हैं। ऐसी मछलियों का सेवन करने से:

  • फूड पॉइज़निंग (Food Poisoning)
  • पेट में गंभीर संक्रमण और उल्टी-दस्त
  • लिवर और किडनी को नुकसान पहुँच सकता है।

(C) एलियन/इन्वेंसिव स्पीशीज (Invasive Species) का खतरा

प्रशासन को यह भी अंदेशा है कि नेपाल के हैचरी से बहकर आई कुछ मछलियां 'सकर-माउथ कैटफिश' (Sucker-mouth Catfish) या 'थाई मांगुर' जैसी विदेशी नस्ल की हो सकती हैं, जिनमें प्राकृतिक रूप से विषाक्तता होती है और ये स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र को भी नुकसान पहुंचाती हैं।

प्रशासन की सख्त कार्रवाई और एडवाइजरी

  • नदी घाटों पर धारा 144 व पुलिस बल : वाल्मीकिनगर बैराज और गंडक नदी के तटीय इलाकों में लोगों को पानी के पास जाने और जाल बिछाने से रोकने के लिए पुलिस बल तैनात किया गया है।
  • बाजारों में बिक्री पर रोक : स्थानीय बाजारों में नेपाल से बहकर आई संदिग्ध मछलियों की खरीद-बिक्री पर रोक लगाने के लिए खाद्य सुरक्षा अधिकारियों (Food Safety Officers) की टीमें छापेमारी कर रही हैं।
  • सैंपलिंग और लैब जांच: मत्स्य विभाग ने इन मछलियों के सैंपल इकट्ठा करके जांच के लिए लैबोरेटरी भेजे हैं, ताकि पानी और मछली में किसी भी प्रकार के टॉक्सिन (विष) की पुष्टि की जा सके।

नेपाल की बाढ़ से आई ये विशाल मछलियां पहली नजर में भले ही एक अवसर लग रही हों, लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि लैब रिपोर्ट आने तक इन मछलियों का सेवन जानलेवा साबित हो सकता है। स्थानीय प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे किसी भी अफवाह पर ध्यान न दें और नदी से पकड़ी गई संदिग्ध मछलियों को खाने से पूरी तरह परहेज करें।

हथिनी कुंड बैराज पर ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, मोटर बोट बंद होने से यमुना में गिरे स्पेशल फोर्स के जवान

हथिनी कुंड बैराज पर ट्रेनिंग के दौरान बड़ा हादसा, मोटर बोट बंद होने से यमुना में गिरे स्पेशल फोर्स के जवान

Hathini Kund Barrage Accident

हरियाणा के हथिनी कुंड बैराज में स्पेशल फोर्स के जवानों की ट्रेनिंग के दौरान मंगलवार शाम बड़ा हादसा हो गया। यमुना में अभ्यास के दौरान जवानों को ले जा रही मोटर बोट अचानक बंद हो गई। इसी बीच तेज बहाव के चलते बोट बहने लगी और उसमें सवार 5 जवान नदी के पानी में गिर गए। हादसे के बाद 3 जवान किसी तरह तैरकर सुरक्षित बाहर निकल आए, जबकि दो जवानों का अभी तक पता नहीं चल पाया है।

 

मीडिया खबरों के अनुसार, स्पेशल फोर्स की ट्रेनिंग 30 अगस्त से चल रही थी और मंगलवार को इसका आखिरी दिन था। शाम करीब 5 बजे यमुना की अपस्ट्रीम में जवानों का अभ्यास कराया जा रहा था। ट्रेनिंग के दौरान जवान हेलिकॉप्टर से एक-एक कर यमुना में मौजूद मोटर बोट पर उतर रहे थे। जवानों के बोट पर पहुंचने के बाद अचानक मोटर बोट स्टार्ट नहीं हुई। इसी दौरान तेज पानी के बहाव ने बोट को अपनी चपेट में ले लिया और वह बहने लगी। बोट पर सवार जवान पानी में गिर गए।

तेज बहाव में तैरकर निकले 3 जवान 

हादसे के बाद तीन जवानों ने पश्चिमी यमुना नहर की ओर तैरकर सुरक्षित निकलने की कोशिश की। उस वक्त नहर में करीब 14,500 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। तेज बहाव के बीच तीनों जवानों ने करीब 600 मीटर तक तैरकर नहर के खुले गेट से बाहर निकलने में सफलता हासिल की। हालांकि, दो जवानों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। उनके पानी में बह जाने की आशंका को देखते हुए सेना और रेस्क्यू टीम ने तलाशी अभियान तेज कर दिया है।

 

जवानों की तलाश जारी

2 जवानों के लापता होने की सूचना मिलते ही सेना ने तत्काल बचाव अभियान शुरू किया। कर्नल योगेंद्र के नेतृत्व में सेना की टीम यमुना और पश्चिमी यमुना नहर के संभावित इलाकों में सर्च ऑपरेशन चला रही है। रेस्क्यू टीम रस्सियों और अन्य जरूरी उपकरणों की मदद से नदी और नहर में लापता जवानों की तलाश कर रही है। फिलहाल अभियान जारी है और सेना की टीम दोनों जवानों को खोजने में जुटी हुई है।