Fifth-gen Mitsubishi Pajero image gallery

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Fifth-gen Mitsubishi Pajero front quarter static

Mitsubishi has revealed the fifth-generation Pajero, marking a comeback for the SUV after it was discontinued globally in 2021. It is built on a ladder-frame chassis like the older Pajeros, and is offered with a 2.4-litre diesel engine mated to an 8-speed automatic transmission and a four-wheel-drive (4WD) system. It is around 5 metres long and has a 2,870mm wheelbase. Its exterior design has been revamped and modernised, but the upright stance has been retained. The interior looks clean and premium, with dual displays, leatherette upholstery on the 7 seats and all the major touchpoints of the SUV. 

उबलती नहीं जमती है कॉफी! भारत में क्यों बढ़ हो रहा है जेन-जी के बीच आइस-कॉफी का दीवानापन

कॉफी पीने का तरीका अब धीरे-धीरे बदल रहा है। जेन-जी के लिए कॉफी सिर्फ सुबह की नींद भगाने या दोस्तों के साथ बैठकर पीने वाली चीज नहीं रह गई है। अब लोग अपने ड्रिंक में अपनी पसंद का स्वाद, टॉपिंग और अलग-अलग फ्लेवर जोड़ना पसंद करते हैं। साथ ही, ऐसा ड्रिंक भी पसंद किया जा रहा है जो देखने में अच्छा लगे और सोशल मीडिया पर फोटो या वीडियो के लिए भी परफेक्ट हो।

इस बदलते ट्रेंड का असर कॉफी शॉप्स के मेन्यू पर भी साफ दिखाई दे रहा है। पहले जहां गर्म कॉफी सबसे ज्यादा पसंद की जाती थी, वहीं अब आइस्ड और दूसरे ठंडे ड्रिंक्स की मांग तेजी से बढ़ रही है। कस्टमर अपनी पसंद के हिसाब से ड्रिंक को कस्टमाइज कर रहे हैं और नए-नए कॉम्बिनेशन आजमा रहे हैं। कॉफी का कप अब सिर्फ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि पर्सनल स्टाइल और पसंद दिखाने का तरीका भी बनता जा रहा है।

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जेन-जी का पसंद बना कस्टमाइजेशन

जेन-जी अपनी पसंद के हिसाब से ड्रिंक को बदलना पसंद करती है। वे मूड, मौसम और मौके के अनुसार फ्लेवर, सिरप, फोम, टॉपिंग और दूसरी चीजें जोड़ना चाहते हैं। इससे उन्हें लगता है कि ड्रिंक उनकी अपनी पसंद के हिसाब से तैयार हुआ है। यही वजह है कि सिर्फ एक तय स्वाद वाली कॉफी के बजाय कस्टमाइज किए जा सकने वाले कोल्ड ड्रिंक्स युवाओं के बीच ज्यादा पसंद किए जा रहे हैं।

स्पेशल ड्रिंक के लिए ज्यादा खर्च

जेन-जी कीमत को लेकर जागरूक जरूर है, लेकिन कोई ड्रिंक उन्हें स्पेशल, टेस्टी या हेल्थ से जुड़ा फायदा देने वाला लगता है, तो वे उसके लिए ज्यादा पैसे खर्च करने को तैयार रहते हैं। ड्रिंक अब सिर्फ प्यास बुझाने के लिए नहीं, बल्कि उसका टेस्ट, पैकेजिंग, लुक और ब्रांड भी खरीदारी के डिसीजन को प्रभावित करता है। इसी वजह से कोल्ड ड्रिंक्स को कई युवा छोटी-सी ‘अफोर्डेबल लग्जरी’ की तरह भी देखते हैं।

कोल्ड ड्रिंक बनी पहचान

आज जेन-जी के लिए ड्रिंक का टेस्ट जितना मायने रखता है, उसका लुक भी उतना ही जरूरी हो गया है। रंग-बिरंगे कप, अलग-अलग फ्लेवर और अट्रैक्टिव टॉपिंग वाला ड्रिंक सोशल मीडिया पर शेयर करने के लिए भी अच्छा लगता है। IHL ग्रुप के एनालिस्ट जेरी शेल्डन के मुताबिक, कोल्ड ड्रिंक अब सेल्फ-एक्सप्रेशन का एक तरीका बन रही है। ब्रिटेन के आंकड़ों में भी यह ट्रेंड साफ दिखता है। 25 साल से कम उम्र के लोगों की घर से बाहर खरीदी जाने वाली ड्रिंक्स में 60% ठंडी होती हैं, जबकि 55 साल से ज्यादा उम्र वालों में यह आंकड़ा करीब 30% है।

युवाओं की पसंद को देखते हुए स्टारबक्स से लेकर डंकिन और मैकडॉनल्ड्स जैसी कंपनियां अपने मेन्यू में नए-नए कोल्ड ऑप्शन जोड़ रही हैं। स्टारबक्स का रंग-बिरंगा यूनिकॉर्न फ्रैपुचीनो सोशल मीडिया पर काफी चर्चा में रहा था। वहीं डंकिन प्रोटीन और कस्टमाइज्ड कोल्ड ड्रिंक्स पर फोकस कर रही है, जबकि दूसरी कंपनियां फ्रूट-बेस्ड और बिना कैफीन वाले ठंडे ऑप्शन बढ़ा रही हैं। भारत में भी आइस्ड लाटे, कोल्ड ब्रू और रेडी-टू-ड्रिंक कॉफी की मांग बढ़ रही है। इसी को देखते हुए कंपनियां वनीला, चॉकलेट, बनाना, ऑरेंज और कोकोनट जैसे नए फ्लेवर और कोल्ड फोम वाले ऑप्शन भी पेश कर रही हैं।

Teacher day 2026: 5 सितंबर शिक्षक दिवस पर इस बार क्या है खास

Teacher day 2026:  5 सितंबर शिक्षक दिवस पर इस बार क्या है खास

Teacher day 2026

Teacher day 2026: भारत में हर साल 5 सितंबर को देश के पूर्व राष्ट्रपति, महान विद्वान और शिक्षाविद डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती के अवसर पर शिक्षक दिवस मनाया जाता है। देशभर के स्कूलों में कार्यक्रम का आयोजन होता है। चलिए जानते हैं इस अवसर पर आयोजित होने वाले प्रमुख कार्यक्रम और विशेषताएं।

 

1. राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026

राष्ट्रपति द्वारा सम्मान: नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित राष्ट्रीय समारोह में भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू देश भर से चुने गए उत्कृष्ट शिक्षकों को राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार 2026 से सम्मानित करेंगी।

48 चयनित शिक्षक: इस वर्ष देश भर से 48 उत्कृष्ट शिक्षकों (26 पुरुष और 22 महिला शिक्षक) का चयन किया गया है, जिन्होंने शिक्षा, शिक्षण में नए प्रयोग (इनोवेशन) और छात्रों के सर्वांगीण विकास में असाधारण योगदान दिया है।

 

2. विद्यालयों एवं कॉलेजों में विशेष आयोजन

भूमिका अदला-बदली (Role Reversal): वरिष्ठ छात्र (Senior Students) एक दिन के लिए शिक्षक बनकर निचली कक्षाओं को पढ़ाते हैं और प्रशासनिक व्यवस्था संभालते हैं, जिससे वे शिक्षकों की मेहनत और उत्तरदायित्व को समझ सकें।

सांस्कृतिक कार्यक्रम व प्रतियोगिताएं: छात्रों द्वारा शिक्षकों के लिए नाटक, नृत्य, संगीत और रोचक खेल (जैसे- क्विज़, रैपिड-फायर) आयोजित किए जाते हैं।

'थैंक यू' कार्ड और कृतज्ञता की अभिव्यक्ति: छात्र अपने पसंदीदा शिक्षकों को हस्तनिर्मित कार्ड, पत्र व पुष्प गुच्छ देकर उनके योगदान के प्रति आभार व्यक्त करते हैं।

 

3. डिजिटल एवं सोशल मीडिया पहल

ऑनलाइन माध्यमों और सोशल मीडिया पर छात्र #TeachersDay2026 और #ThankYouTeacher जैसे अभियानों के जरिए अपने शिक्षकों, प्रोफेसरों और मेंटर्स के प्रति अपने अनुभव और आभार संदेश साझा करते हैं।

 

शिक्षक दिवस का मुख्य संदेश

यह दिन हमें याद दिलाता है कि शिक्षक केवल किताबी ज्ञान ही नहीं देते, बल्कि वे चरित्र निर्माण, मूल्यों के विकास और राष्ट्र के उज्ज्वल भविष्य की नींव रखते हैं।

₹30 हजार से शुरू किया सैंडविच का ठेला, आज ₹25 लाख महीना! फेल इंटरनेट कैफे के बाद ऐसे बदली अभिषेक की किस्मत

कारोबार में पहली कोशिश नाकाम हो जाए तो बहुत से लोग दोबारा जोखिम लेने से बचते हैं। लेकिन भोपाल के अभिषेक साहू की कहानी कुछ अलग है। करीब 15 साल पहले शुरू किया गया उनका इंटरनेट कैफे एक साल के अंदर बंद हो गया। इसके बाद उन्होंने हार मानने के बजाय महज ₹30 हजार के लोन से एक छोटे से सैंडविच कार्ट की शुरुआत की। आज उनका यही छोटा कारोबार सोशल मीडिया पर चर्चा में है।

पहला बिजनेस एक साल में ही हो गया बंद

अभिषेक साहू करीब 15 साल पहले भोपाल पहुंचे थे। उन्होंने शुरुआत इंटरनेट कैफे से की। उस दौर में इंटरनेट कैफे एक अच्छा बिजनेस आइडिया माना जाता था, लेकिन उनका कारोबार उम्मीद के मुताबिक नहीं चला।

करीब एक साल बाद ही उन्हें इंटरनेट कैफे बंद करना पड़ा। पहली कोशिश की असफलता के बावजूद अभिषेक ने कारोबार करने का विचार नहीं छोड़ा। इस बार उन्होंने ऐसा बिजनेस चुना, जिसमें कम पूंजी लगाकर शुरुआत की जा सके।

₹30 हजार जुटाए और बदल दी दिशा

पहले कारोबार के बाद अभिषेक ने फूड बिजनेस की तरफ रुख किया। उन्होंने ₹30 हजार का लोन लिया और एक छोटा सा सैंडविच कार्ट शुरू किया। खास बात यह थी कि उनके पास सैंडविच बनाने की कोई बड़ी प्रोफेशनल ट्रेनिंग नहीं थी। उन्होंने YouTube की मदद से अलग-अलग सैंडविच की रेसिपी सीखीं और फिर उन्हें अपने छोटे से कार्ट पर आजमाना शुरू किया। यानी दूसरी शुरुआत बड़े निवेश या बड़े सेटअप से नहीं, बल्कि सीमित पैसे और खुद सीखने की कोशिश से हुई।

धीरे-धीरे लोगों को पसंद आने लगा स्वाद

शुरुआत में यह एक छोटा सा सैंडविच कार्ट था, लेकिन समय के साथ ग्राहकों की संख्या बढ़ने लगी। लोगों को सैंडविच पसंद आने लगे और धीरे-धीरे इस छोटे कारोबार ने अपनी पहचान बनानी शुरू कर दी। अभिषेक के बिजनेस की कहानी में सोशल मीडिया ने भी अहम भूमिका निभाई। नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, उनके सैंडविच कार्ट पर बनी एक Instagram Reel वायरल हो गई। इसके बाद भोपाल के अलग-अलग हिस्सों से लोग उनके सैंडविच का स्वाद लेने पहुंचने लगे।

अब 30-50 मिनट तक इंतजार करते हैं ग्राहक

कभी जिस कारोबार की शुरुआत एक छोटे कार्ट से हुई थी, आज उसकी लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि ग्राहक सैंडविच के लिए इंतजार करने को भी तैयार रहते हैं।रिपोर्ट के मुताबिक, कई ग्राहकों को ऑर्डर के लिए करीब 30 से 50 मिनट तक इंतजार करना पड़ता है। इसके बावजूद लोगों की भीड़ कम नहीं हुई।

हर दिन सैकड़ों सैंडविच की बिक्री

सोशल मीडिया पर अभिषेक की कहानी शेयर करने वाले यूजर प्रथम के मुताबिक, उनका Hari Har Sandwich अब हर दिन लगभग 600 से ज्यादा सैंडविच बेचता है। वीकेंड पर यह संख्या और बढ़ जाती है। पोस्ट में दावा किया गया है कि शनिवार और रविवार जैसे दिनों में 1,000 से ज्यादा सैंडविच बिकते हैं। इसी पोस्ट के अनुसार, इस छोटे से फूड बिजनेस का मासिक टर्नओवर करीब ₹25 लाख तक पहुंच चुका है।

असफलता से शुरुआत, लेकिन वहीं नहीं रुके

अभिषेक साहू की कहानी का सबसे दिलचस्प हिस्सा सिर्फ ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं है। असली बात यह है कि पहला बिजनेस बंद होने के बाद उन्होंने खुद को दोबारा आजमाया।

इंटरनेट कैफे के अनुभव के बाद उन्होंने कम पैसे वाला बिजनेस चुना, YouTube से स्किल सीखी और धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बनाया। यही छोटा कदम आगे चलकर बड़े कारोबार में बदलता गया।

सोशल मीडिया पर क्यों हो रही चर्चा?

प्रथम ने X पर अभिषेक की कहानी शेयर करते हुए उनके सफर को उजागर किया। पोस्ट के वायरल होने के बाद कई यूजर्स ने उनकी दोबारा शुरुआत करने की हिम्मत की तारीफ की। एक यूजर ने लिखा कि इस कहानी की सबसे खास बात ₹25 लाख का टर्नओवर नहीं, बल्कि पहली असफलता के बाद सिर्फ ₹30 हजार से दोबारा शुरुआत करने का फैसला है। दूसरे यूजर ने इसे एक शानदार ‘कमबैक’ बताया।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

Video: भगवान को अकेला नहीं छोड़ सकता… चित्रकूट बाढ़ के बीच भावुक करने वाला नजारा! DM-SP जोड़ते रहे हाथ फिर भी मंदिर से नहीं निकले पुजारी

जीतू पटवारी ने सीएम से मांगा नेहरू स्टेडियम, BJP ने बताया लोगों का मनोरंजन, राहुल गांधी के इंदौर दौरे में फंसा पेच

जीतू पटवारी ने सीएम से मांगा नेहरू स्टेडियम, BJP ने बताया लोगों का मनोरंजन, राहुल गांधी के इंदौर दौरे में फंसा पेच

Rahul Gandhi

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के इंदौर में होने वाले आयोजन को लेकर राजनीतिक पेच फंस गया है। कांग्रेस लगातार नेहरू स्‍टेडियम में आयोजन की अनुमति मांग रही है, लेकिन अब तक उन्‍हें कोई जगह कार्यक्रम के लिए नहीं मिल सकी है।

अब प्रदेश कांग्रेस अध्‍यक्ष जीतू पटवारी ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखकर मांग की है। बता दें कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को पत्र लिखकर राहुल गांधी के 'छात्रों की गूंज' कार्यक्रम के लिए नेहरू स्टेडियम उपलब्ध कराने का आग्रह किया है।

जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कांग्रेस के प्रस्ताव को संज्ञान में लेते हुए नेहरू स्टेडियम कार्यक्रम के लिए तत्काल उपलब्ध कराया जाए। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष हैं और शिक्षा की सुरक्षा तथा युवाओं के भविष्य को लेकर पूरे देश में जनजागृति अभियान चला रहे हैं। जीतू पटवारी ने कहा कि यह कार्यक्रम किसी राजनीतिक दल के प्रचार के लिए नहीं है। यह देश के भविष्य, युवाओं के सपनों और शिक्षा के अधिकार से जुड़ा संवाद है।

उन्होंने कहा कि युवाओं के सपने तभी सुरक्षित रहेंगे, जब शिक्षा सुरक्षित रहेगी। शिक्षा बचेगी तो देश का भविष्य भी सुरक्षित रहेगा। पटवारी ने सरकार से अपील की कि वह कार्यक्रम के महत्व को समझते हुए नेहरू स्टेडियम उपलब्ध करवाए।

Rahul Gandhi

भाजपा ने कांग्रेस को फिर घेरा : दूसरी तरफ राहुल गांधी के प्रस्तावित इंदौर दौरे को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच पत्रों की राजनीति भी तेज हो गई है। भाजयुमो इंदौर महानगर अध्यक्ष सौगात मिश्रा ने कांग्रेस जिलाध्यक्ष विपिन वानखेड़े को पत्र लिखकर कांग्रेस पर निशाना साधा है। मिश्रा ने कहा कि भाजपा को राहुल गांधी की किसी यात्रा या सभा की चिंता नहीं होती। बल्कि कांग्रेस ही उनकी सभाओं को लेकर ज्यादा चिंतित रहती है।

मनोरंजन है राहुल की सभाएं: उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि राहुल गांधी की सभाओं में लोग मनोरंजन के लिए जाते हैं और वह मनोरंजन कराने में कोई कसर नहीं छोड़ते। सौगात मिश्रा ने अपने पत्र में कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष की भाषा पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की मातृशक्ति पर शराबी होने का झूठा आरोप लगाकर माताओं और बहनों का अपमान किया गया। उन्होंने कहा कि भाजपा शहर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष को सौजन्यपूर्ण भाव से पत्र लिखा था, लेकिन कांग्रेस ने उसे गंभीरता से नहीं लिया। भाजयुमो नेता ने राहुल गांधी और कांग्रेस पर छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर भी निशाना साधा। उन्होंने चंडीगढ़ छात्रसंघ चुनाव में एनएसयूआई की हार का उल्लेख करते हुए कांग्रेस की छात्र राजनीति पर सवाल उठाए। पत्र के अंत में सौगात मिश्रा ने राहुल गांधी को सलाह दी कि इंदौर दौरे के दौरान वे देवी अहिल्या माता के दर्शन और नमन जरूर करें।

2-5 सितंबर के बीच दिल्ली, यूपी-बिहार से MP तक इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, मौसम के अगले 48 घंटे इन इलाकों में पड़ेंगे भारी!

Weather Update: उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उसके आसपास बने वेल मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया और कई एक्टिव वेदर सिस्टम के चलते देश के बड़े हिस्से में मानसून एक बार फिर काफी आक्रामक रूप दिखा रहा है। इसे देखते हुए भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 से 5 सितंबर के दौरान दिल्ली, उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।

खासकर अगले 48 घंटों के अंदर मध्य प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में बेहद भारी बारिश की संभावना जताई गई है। दूसरी ओर दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में अगले एक सप्ताह तक बारिश की गतिविधियां धीमी रहेंगी।

मध्य प्रदेश में अगले 48 घंटे भारी, 02 और 03 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट

मध्य भारत में बारिश का दौर सबसे ज्यादा परेशानी की वजह बन सकता है। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश पर बना गहरा कम दबाव का क्षेत्र अगले 24 घंटों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में दक्षिण उत्तर प्रदेश और उत्तरी मध्य प्रदेश की ओर बढ़ेगा। इस वजह से पूर्वी मध्य प्रदेश में 2 और 3 सितंबर को कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश (20 सेमी से अधिक) हो सकती है।

पूर्वी मध्य प्रदेश में 2 से 5 सितंबर तक और पश्चिमी मध्य प्रदेश में 2 से 7 सितंबर तक मूसलाधार बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। इसके अलावा विदर्भ में 3 सितंबर को बहुत भारी बारिश और छत्तीसगढ़ में 2 सितंबर को भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है।

यूपी, उत्तराखंड और दिल्ली-एनसीआर में 2 से 5 सितंबर तक कैसा रहेगा मौसम?

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों के लिए भी मौसम अलर्ट जारी किया गया है। पूर्वी उत्तर प्रदेश में 2 सितंबर को बहुत भारी बारिश होने का अनुमान है। वहीं पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 2 से 4 सितंबर के दौरान भारी से बहुत भारी बारिश देखने को मिल सकती है। राजधानी दिल्ली, हरियाणा और चंडीगढ़ में 3 और 4 सितंबर को काफी बारिश होगी और 2 से 5 सितंबर तक अलग-अलग जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

पहाड़ी राज्य उत्तराखंड में 2 से 8 सितंबर के बीच लगातार बारिश का सिलसिला जारी रहेगा। यहां भी 2 सितंबर को भारी से अत्यंत भारी बारिश का अनुमान है। हिमाचल प्रदेश और पंजाब में भी 2 से 5 सितंबर के बीच भारी बारिश दर्ज की जा सकती है।

बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में भारी बारिश का अनुमान

पूर्वी भारत के राज्यों पर भी मानसून मेहरबान रहेगा। बिहार और गांगेय पश्चिम बंगाल में 2 सितंबर को बहुत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। इसके बाद 3 और 4 सितंबर को भी बिहार में भारी बारिश जारी रहेगी। उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में 2 और 3 सितंबर को बहुत भारी बारिश होने की संभावना है।

वहीं, झारखंड में 2 और 8 सितंबर को भारी बारिश के साथ 2 से 4 सितंबर तक बादलों की गरज और बिजली कड़कने की चेतावनी दी गई है। इसके साथ ही पूर्वोत्तर भारत के असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 2 से 8 सितंबर तक लगातार तेज बारिश का दौर जारी रहेगा।

पिछले 24 घंटों का हाल और चक्रवातीय प्रणालियां

बीते 24 घंटों की बात करें तो उत्तराखंड, झारखंड और गांगेय पश्चिम बंगाल के अलग-अलग जगहों पर बेहद भारी बारिश (20 सेमी से ज्यादा) दर्ज की गई है। इसके अलावा हिमाचल प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पूर्वी मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और बिहार में 12 से 20 सेमी तक बारिश हुई। मौसम प्रणालियों की बात करें तो मानसून ट्रफ सामान्य स्थिति में है।

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इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम उत्तर प्रदेश से बांग्लादेश तक एक ट्रफ रेखा फैली हुई है। वहीं उत्तर-पूर्वी अरब सागर और सौराष्ट्र के ऊपर एक साइक्लॉनिक सर्कुलेशन बना हुआ है। इन मौसमी प्रणालियों की वजह से देश के उत्तरी, मध्य और पूर्वी राज्यों में अगले 3-4 दिनों तक मौसमी गतिविधियां काफी तेज रहने वाली हैं।

श्रीकृष्‍ण जन्माष्टमी विशेष: जब जीवन हारने लगे, तब श्री कृष्ण का जीवन पढ़िए

श्रीकृष्‍ण जन्माष्टमी विशेष: जब जीवन हारने लगे, तब श्री कृष्ण का जीवन पढ़िए

Shri Krishna Janmashtami Traditions

आज मनुष्य के पास पहले से अधिक साधन हैं, लेकिन शायद पहले से कम धैर्य है। उसके पास संवाद के लिए अनेक माध्यम हैं, फिर भी भीतर का अकेलापन बढ़ता जा रहा है। छोटी-सी असफलता उसे भीतर तक हिला देती है, संबंधों में आया मामूली तनाव निराश कर देता है और जीवन की कठिन परिस्थितियों के लिए 'डिप्रेशन' जैसे शब्द सहजता से बातचीत का हिस्सा बन गए हैं।

 

ऐसे समय में प्रश्न यह नहीं है कि कठिनाइयां क्यों आती हैं; प्रश्न यह है कि कठिनाइयों के बीच मनुष्य स्वयं को कैसे संभाले? इस प्रश्न का उत्तर हजारों वर्ष पूर्व श्रीकृष्ण के जीवन में छिपा है। यदि कृष्ण को केवल मंदिर में विराजमान भगवान के रूप में देखा जाए, तो हम उनके व्यक्तित्व का एक अत्यंत सीमित भाग ही देख पाएंगे। कृष्ण को समझने के लिए उनके जीवन को देखना होगा—एक ऐसा जीवन जिसमें जन्म से लेकर अंतिम समय तक परिस्थितियां कभी अनुकूल नहीं थीं, लेकिन उन्होंने कभी परिस्थितियों को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया।

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1. संघर्षों से घिरा जन्म और बाल्यकाल का आनंद

कारागार में जन्म: उनका जन्म किसी उत्सव के बीच नहीं, बल्कि कारागार में हुआ। माता-पिता के जीवित रहते हुए भी जन्म लेते ही उनसे दूर होना पड़ा। आधी रात को पिता वसुदेव उन्हें लेकर यमुना पार कर गोकुल पहुंचाते हैं। जिस उम्र में बालक को माता-पिता का आश्रय चाहिए, उस उम्र में कृष्ण का जीवन सुरक्षा और संघर्ष की कहानी बन चुका था।

 

संकटों के बीच मुस्कान: गोकुल में उन्हें यशोदा का वात्सल्य, नंदबाबा का स्नेह और मित्रों का साथ मिला। किंतु वहां भी पूतना से लेकर कालिया नाग तक अनेक संकट सामने आए। बाल-कान्हा हर संकट के बाद मुस्कुराते दिखाई देते हैं। यह मुस्कान सिखाती है कि जीवन में संकट का आना हमारे नियंत्रण में नहीं है, लेकिन संकट के समक्ष हमारी प्रतिक्रिया हमारे हाथ में है।

 

दायित्वों के बीच जीवन का रस: श्रीकृष्ण के बाल्यकाल को प्रायः माखन, बांसुरी, गोपियों और रास की कथाओं तक सीमित कर दिया जाता है। वास्तव में ये प्रसंग सिखाते हैं कि गंभीर जिम्मेदारियों के बीच भी जीवन से आनंद और सहजता समाप्त नहीं होनी चाहिए।

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2. त्याग, विरक्ति और नए दायित्वों की ओर कदम

संसार को पीछे छोड़ना: एक दिन कृष्ण गोकुल छोड़ देते हैं। जिस भूमि ने बचपन दिया, जिन मित्रों के साथ खेले, जिससे उनका भावनात्मक संसार बसा था—सब पीछे छूट गया।

 

समय की मांग स्वीकारना: आज हम नौकरी या शिक्षा के लिए शहर छोड़ते हैं तो विचलित हो जाते हैं। कृष्ण ने तो अपने बचपन का संपूर्ण संसार ही छोड़ दिया, लेकिन वे पीछे मुड़कर रुके नहीं। वे आगे बढ़े क्योंकि समय उनसे नई भूमिका की मांग कर रहा था। मथुरा में कंस का अंत किया और आगे चलकर द्वारका की स्थापना की। राज्य, समाज, राजनीति और सुरक्षा के अनेक उत्तरदायित्व उनके सामने आए।

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3. कुरुक्षेत्र का संदेश: कर्म की गरिमा और आत्मनिर्भरता

अर्जुन का संशय और भगवद्गीता का सार: कुरुक्षेत्र में अर्जुन का संकट आज के मनुष्य के संकट जैसा ही था। उसके सामने निर्णय लेने की चुनौती थी, लेकिन भावनाएं और संबंध आड़े आ रहे थे। जब अर्जुन का गांडीव छूट गया, तब श्रीकृष्ण ने उसे जीवन को देखने की नई दृष्टि दी—मनुष्य का अधिकार केवल अपने कर्म पर है, उसके परिणाम पर नहीं। यदि परिणाम की चिंता में कर्म ही छूट जाए, तो जीवन का उद्देश्य कमजोर पड़ जाता है।

 

कर्म की गरिमा: स्वयं राजा होते हुए भी कृष्ण शस्त्र उठाने के बजाय अर्जुन के सारथी बने। आज के समाज में जहां पद के आधार पर काम को छोटा-बड़ा समझा जाता है, कृष्ण बताते हैं कि काम की गरिमा पद में नहीं, उसके उद्देश्य और निष्ठा में होती है।

 

सक्षम बनाने का दर्शन: कृष्ण चाहते तो अपनी शक्ति से युद्ध का परिणाम क्षण भर में बदल सकते थे, लेकिन उन्होंने मनुष्य को उसकी जिम्मेदारी स्वयं निभाने दी। वे मनुष्य को आश्रित नहीं, बल्कि सक्षम बनाते हैं।

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4. विपाद के बीच संतुलन और आधुनिक युग की प्रासंगिकता

जीवन के प्रति संतुलन: कृष्ण के जीवन में केवल विजय नहीं थी। उन्होंने वियोग, मृत्यु, युद्ध, प्रियजनों को खोना और अंततः अपने ही वंश का विनाश देखा। इसके बावजूद उन्होंने जीवन का संतुलन कभी नहीं खोया।

युवाओं के लिए प्रेरणा: आज का युवा असफलता, नौकरी न मिलने या संबंध टूटने पर बिखर जाता है। ऐसे समय में कृष्ण का जीवन कहता है:

 

  • तुम्हारी एक असफलता तुम्हारा पूरा जीवन नहीं है।
  • एक परिस्थिति तुम्हारी संपूर्ण पहचान नहीं है।
  • दुःख आएगा, लेकिन दुःख ही अंतिम सत्य नहीं है।
  • वियोग होगा, लेकिन जीवन वहीं समाप्त नहीं होता।

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5. जीवन को साधने की कला

श्रीकृष्ण जीवन से पलायन का दर्शन नहीं देते; वे जीवन के बीच खड़े होकर जीवन को साधने की कला सिखाते हैं। जब मन भ्रमित हो, विकल्प बहुत हों और निर्णय कठिन हो—तब श्रीकृष्ण के विचारों को पढ़िए। जब परिणाम की चिंता कर्म से बड़ी हो जाए या असफलता आत्मविश्वास कम करने लगे—तब कृष्ण के जीवन को देखिए।

 

वे केवल गोकुल के नटखट कान्हा, द्वारका के राजा या कुरुक्षेत्र के सारथी नहीं हैं; वे योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं। वे आज भी संदेश देते हैं कि परिस्थिति चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हो, अपने कर्म, विवेक और धर्म का मार्ग कभी मत छोड़ो। जीवन की सबसे बड़ी विजय कठिनाइयों का समाप्त हो जाना नहीं, बल्कि कठिनाइयों के बीच स्वयं को संभाले रखना है।

 

जय श्री कृष्ण!

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Zerodha संभालेगी IPO का काम! SEBI ने मर्चेंट बैंकर बनने का रास्ता किया साफ

बाजार नियामक सेबी (SEBI) ने मर्चेंट बैंकिंग लाइसेंस के लिए जीरोधा (Zerodha) के एप्लीकेशन का रास्ता साफ कर दिया। मनीकंट्रोल को यह जानकारी सूत्रों के हवाले से मिली है। हालांकि सेबी के साथ औपचारिक रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया अभी पूरी होनी बाकी है। जीरोधा की जीरोधा कॉरपोरेट एडवाइजर्स ने इसका एप्लीकेशन 27 अप्रैल 2026 को फाइल किया था। सेबी ने ऐसे समय में एप्लीकेशन को मंजूरी दी है, जब मर्चेंट बैंकिंग इंडस्ट्री तेजी से बढ़ रही है और फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी और फाइनेंशियल सर्विसेज फर्म्स देश में बढ़ते प्राइमरी कैपिटल मार्केट का फायदा उठाने के लिए इसमें दिलचस्पी बढ़ा रहे हैं।

Merchant Banker बनने से क्या मिलेगा Zerodha को?

मर्चेंट बैंकर का लाइसेंस मिलने के बाद जीरोधा अपने मौजूदा ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़कर इंवेस्टमेंट बैंकिंग सेक्टर में एंट्री कर सकेगी। इसके तहत कंपनी कई तरह के काम कर सकेगी, जैसे कि कंपनियों के IPO और FPO (फॉलो-ऑप पब्लिक ऑफर) मैनेज करने के साथ-साथ राइट्स इश्यू और कैपिटल मार्केट के दूसरे ट्रांजैक्शंस में कंपनियों का काम करना। इस कदम से जीरोधा की इंवेस्टमेंट बैंकिंग में एंट्री होगी।

जीरोधा ने ब्रोकिंग बिजनेस के बाहर तेजी से बढ़ाया कारोबार

पिछले कुछ वर्षों में जीरोधा ने अपने ट्रेडिशनल ब्रोकिंग बिजनेस से आगे बढ़कर कई फाइनेंशियल सर्विसेज शुरू की जैसे कि एसेट मैनेजमेंट, जीरोधा कैपिटल के जरिए लेंडिंग, और अपने प्रोप्रॉयटरी फंड के जरिए इंवेस्टमेंट्स। इसके अलावा इसे गिफ्ट सिटी में ब्रोकर-डीलर के रूप में काम करने के लिए IFSCA (इंटरनेशनल फाइनेंशियल सर्विसेज सेंटर्स अथॉरिटी) से रजिस्ट्रेशन मिल चुका है, जिससे यह भारतीय निवेशकों को विदेशी निवेश की सुविधा दे सकती है। अब यह मर्चेंट बैंकिंग में भी एंट्री करने वाली है। 31 अगस्त, 2026 तक सेबी के पास कुल 248 रजिस्टर्ट मर्चेंट बैंकर्स थे तो सेबी के एप्लीकेशन स्टेटस डेटा के मुताबिक 10 मर्चेंट बैंकिंग रजिस्ट्रेशन एप्लीकेशन पर काम चल रहा है।

मर्चेंट बैंकिंग के लिए नियम हुए और सख्त

जीरोधा के मर्चेंट बैंकिंग में आने से पहले सेबी ने मर्चेंट बैंकर्स के लिए नियम सख्त किए थे। सेबी ने कैटेगरी I मर्चेंट बैंकर्स की मिनिमम नेटवर्थ ₹5 करोड़ से बढ़ाकर ₹50 करोड़ तो कैटेगरी II मर्चेंट बैंकर्स के लिए मिनिमम ₹10 करोड़ की नेटवर्थ तय की है। इसमें सिर्फ पहली कैटेगरी वाले ही मर्चेंट बैंकर्स मेनबोर्ड सेगमेंट के आईपीओ को मैनेज कर सकते हैं। नए नियमों में लिक्विड नेटवर्थ से जुड़ी शर्तें भी रखी गई हैं और मर्चेंट बैंकर्स की कुल अंडरराइटिंग ऑब्लिगेशंस को लिक्विड नेटवर्थ के 20 गुना तक सीमित किया गया है। मौजूदा मर्चेंट बैंकर्स के लिए इन बढ़ी हुई जरूरतों को धीरे-धीरे लागू किया जा रहा है तो जीरोधा जैसी नई कंपनियों को शुरुआत से ही नए नियमों के मुताबिक जरूरी नेटवर्थ बनाए रखना होगा।

‘मक्का गठबंधन’ की इस्तांबुल में हुई पहली बैठक, पाकिस्तान को बड़ी जिम्मेदारी

'मक्का गठबंधन' की इस्तांबुल में हुई पहली बैठक, पाकिस्तान को बड़ी जिम्मेदारी

Mecca Defense Alliance

Mecca Defense Alliance: दुनिया भर में अपनी चौधराहट दिखाने का आदी रहा अमेरिका, मध्य-पूर्व में अपनी अब तक की भूमिका से पीछे हट रहा है। इस कारण, वहाँ पैदा होने वाले खालीपन को भरने के लिए तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान ने 7 अगस्त, 2026 को मक्का में अपना जो नया गठबंधन बनाया था, उसकी पहली बैठक सोमवार, 31 अगस्त को तुर्की के सबसे बड़े शहर इस्तांबुल में हुई।

 

तुर्की के विदेश मंत्री हाकान फि़दान ने इस बैठक में घोषणा की कि तुर्की, सऊदी अरब और पाकिस्तान के “मक्का डिफेंस अलायंस” (MDA) का सचिवालय सऊदी अरब की राजधानी रियाद में बनाया जाएगा और पाकिस्तान का एक प्रतिनिधि उसका पहला महासचिव होगा। हालांकि, 7 अगस्त को मक्का में हुए इन तीनों देशों के शिखर नेताओं के बीच जो समझौता हुआ था, उसकी कोई सटीक जानकारी अभी तक सामने नहीं आई है। ALSO READ: तुर्की, पाकिस्तान और सऊदी अरब ने किया त्रिपक्षीय सैन्य समझौता

एक पर हमला, सब पर हमले के समान

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की का कहना है कि उनके गठबंधन में शामिल किसी भी देश पर हमले को वे तीनों देशों पर हमला मानेंगे। यह बात अमेरिका और यूरोप वाले “उत्तर अटलांटिक संधि संगठन” नाटो (NATO) जैसी ही एक शर्त है—हालांकि दोनों ही मामलों में, यानी न तो नाटो संधि में और न ही MDA संधि में, यह अनिवार्य नहीं है कि किसी एक देश पर हमला होते ही, बाक़ी देशों को उस देश के पास तुरंत अपनी सेना भेजना या अपनी सेना को वहाँ तैनात करना होगा।

 

“इस्तांबुल पॉलिटिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट” (IstanPol) में तुर्की की विदेश नीति के विशेषज्ञ रिकार्डो गैस्को का कहना है कि शायद यही एक बात है जो दोनों गठबंधनों में एक समान है। उनकी नज़र में, “मक्का डिफेंस अलायंस” असल में कोई गठबंधन नहीं है, बल्कि “हितों का तालमेल” है। उनका तर्क है कि यह ऐसी कोई चीज़ नहीं है “जो नाटो जैसी हो।” ALSO READ: ट्रंप समेत 13 टॉप लीडर ईरान की HIT लिस्ट में, जानिए कौन-कौन हैं वे नेता

एक नई क्षेत्रीय शक्ति का उदय

पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्की ने मिलकर अपना एक त्रिगुट बना तो लिया है, पर तीनों देशों की अपनी सुरक्षा से जुड़ी चिंताएं अलग-अलग हैं, भले ही तुर्की और सऊदी अरब की एक प्रमुख सोच मिलती-जुलती है: यह कि अमेरिका अब मध्य-पूर्व में स्थिरता लाने वाली शक्ति नहीं रहा।

 

अत: इन तीनों मुस्लिम देशों का उद्देश्य मध्य-पूर्व में एक ऐसा “पावर वैक्यूम” (सत्ता का खालीपन) बनने से रोकना लगता है, जिसमें इसराइल या ईरान जैसी कोई दूसरी शक्ति अपनी जगह बना सके। ईरान के साथ चल रहे टकराव के बीच सऊदी अरब को भी बार-बार ईरानी मिसाइलों और ड्रोनों का निशाना बनाया गया है। सऊदी में मौजूद अमेरिकी सेना के अड्डे अब सुरक्षा-कवच के बजाय सुरक्षा-संकट अधिक बन गए लगते हैं।

 

तुर्की इस इलाके में —विशेषकर सीरिया में— इसराइल की गतिविधियों को अपने लिए बढ़ते ख़तरे के तौर पर देखता है। वैसे, तुर्की ही नहीं, सारा इस्लामी जगत धार्मिक कट्टरता के चलते इसराइल से इतना जलता-भुनता है, कि उसका अस्तित्व ही मिटा देना चाहता है।

 

यही धार्मिक विद्वेष भारत के प्रति पाकिस्तान की अंधी सोच-समझ पर भी हावी है। कर्ज़ में डूबे और भीतर से खंडित होते पाकिस्तान को लगता है कि सऊदी अरब का साथ मिल जाने पर भारत के मामले में उसे इस अरबी धन्नासेठ का राजनीतिक समर्थन ही नहीं, भरपूर धन-धान्य भी मिल सकता है। ALSO READ: बड़बोले ट्रंप की घटिया बेशर्मी, अंकारा में नहीं था Trump को कोई खतरा

नाटो बनाम मक्का?

तुर्की के विदेश मंत्री फिदान के अनुसार, तुर्की का बहुत पहले से ही नाटो जैसे रक्षा गठबंधन का हिस्सा होना कोई विरोधाभास नहीं है; मक्का समझौते का उद्देश्य “मौजूदा ज़िम्मेदारियों और ढांचों के पूरक” के तौर पर काम करना है।

 

“इस्तांबुल पॉलिटिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट” के रिकार्डो गैस्को ने मीडिया से कहा, “तुर्की के लिए नाटो और मक्का समझौते के अलग-अलग लाभ हैं।” तुर्की की सरकार के लिए—जिसने हाल ही में अपने यहाँ नाटो के शिखर सम्मेलन की मेज़बानी की थी—नाटो ही यूरो-अटलांटिक क्षेत्र में उसकी अपनी सुरक्षा का आधार है।

 

रिकार्डो गैस्को का यह भी कहना है कि मक्का गठबंधन “फ़ारस की खाड़ी, लाल सागर, हॉर्न ऑफ़ अफ्रीका या दक्षिण एशिया में हर संकट से निपटने के लिए नहीं बनाया गया है।” “इसलिए, मक्का समझौता तुर्की को क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ सीधे सहयोग के लिए एक लचीला ज़रिया देता है।”

 

ट्रंप मक्का समझौते से खुश हैं यूरोपीय संघ के मुख्यालय ब्रसेल्स में, संघ के एक अधिकारी ने बताया कि तुर्की ने अपने NATO सहयोगियों को मक्का समझौते के बारे में पहले ही जानकारी दे दी थी। सऊदी अरब और पाकिस्तान के साथ यह समझौता दो साल से ज़्यादा समय से तैयार किया जा रहा था। तुर्की के सबसे प्रमुख NATO सहयोगी अमेरिका ने इस सारी प्रक्रिया का सकारात्मक रूप से समर्थन किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने मक्का समझौते को “एक बड़ा, साहसी और महत्वपूर्ण पहला क़दम” बताया है। उन्होंने इस बात पर खुशी जताई है कि सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्की ने “आख़िरकार” इस समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं।

तुर्की के रक्षा उद्योग के लिए निर्यात बाज़ार

इस नई साझेदारी से तुर्की को एक और लाभ है: उसे एक आकर्षक निर्यात बाज़ार मिल रहा है। तुर्की का रक्षा उद्योग दुनिया में सबसे तेज़ी से बढ़ने वाले उद्योगों में से एक माना जाता है। सरकारी रक्षा उद्योग एजेंसी (SSB) के अनुसार, तु्र्की के रक्षा उद्योग ने पिछले साल 10.05 अरब अमेरिकी डॉलर के बराबर मूल्य का सामान निर्यात किया—जो 2024 की तुलना में 48 प्रतिशत ज़्यादा है। तुर्की की “बायकर” (Baykar) कंपनी द्वारा बनाए गए ड्रोन सबसे ज़्यादा बिकने वाले निर्यात उत्पाद हैं।

 

“बायकर” कंपनी के मुख्य तकनीक अधिकारी सेल्चुक बायराक्तार ने, मक्का समझौते के बारे में मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा कि “खासकर रक्षा उद्योग में हमारे देश की जो वैश्विक महत्वाकांक्षाएँ विकसित हुई हैं, वे नई कूटनीतिक पहलों के लिए रास्ता बना रही हैं।” बायकर कंपनी पहले से ही सऊदी अरब को ड्रोन बेच रही है और वहाँ उनका निर्माण भी कर रही है।

 

बायराक्तार ने बताया, “हमारी कुल कमाई का 90 प्रतिशत हिस्सा निर्यत से आता है। यदि हमने यह टेक्नोलॉजी अपने मित्र और सहयोगी देशों को नहीं दी होती, तो शायद हम इसका दसवां हिस्सा ही कमा पाते।” पाकिस्तान भी पहले से ही बायकर ड्रोन इस्तेमाल कर रहा है और तुर्की की डिज़ाइन के आधार पर युद्धपोत भी बना रहा है।

लक्ष्य : मक्का अलायंस का विस्तार है

मक्का गठबंधन की “रणनीतिक-राजनीतिक और रक्षा समिति” (स्ट्रैटेजिक-पॉलिटिकल एंड डिफेंस कमिटी) की पहली बैठक में, तुर्की के विदेश मंत्री फिदान ने ज़ोर दिया कि यह गठबंधन समय के साथ उसके विस्तार के उद्देश्य से बना है। वह किसी देश के विरुद्ध नहीं है, बल्कि उसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हमारा क्षेत्र अपनी समस्याओं की ज़िम्मेदारी खुद संभाले।

 

फिलहाल इस समझौते पर हस्ताक्षर करने वाले तीनों देश मिलकर उसके प्रथम “स्थापना चरण” को पूरा करना चाहते हैं। जानकारों का मानना है कि इस नए गठजोड़ के पास मध्यपूर्व की क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था को बदलने की क्षमता है—हालांकि ऐसा तुरंत नहीं होगा, क्योंकि नए साझे ढांचे को बनाने में अभी कई साल लग सकते हैं।

Indus Waters Treaty: पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने SCO में उठाया सिंधु जल संधि का केस फिर क्या हुआ?

Indus Waters Treaty: सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के भारत के कड़े रुख से पाकिस्तान को बड़ा झटका लगा है। पिछले दिनों भारत ने इस मामले में आर्बिट्रेशन बॉडी को ही गैर कानूनी बताते हुए इसके फैसले को खारिज कर दिया। इससे आहत होकर पाकिस्तान ने अब शंघाई सहयोग संगठन यानी SCO की बैठक में इस मामले को उठाया है। पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ ने भारत के साथ इस मसले को लेकर चल रहे विवाद पर कहा कि शेयर्ड वॉटर रिसोर्स का इस्तेमाल राजनीतिक लाभ उठाने के हथियार के रूप में नहीं किया जाना चाहिए।

शहबाज शरीफ ने इसे अपने इलाके की जीवनरेखा से जोड़ते हुए कहा कि यह करोड़ों लोगों के जीवन, खेती और आने वाली पीढ़ियों के लिए बेहद जरूरी है। शहबाज शरीफ ने यहां तक कहा कि इसके लिए जो संधियां हैं, उन्हें दोनों पक्षों द्वारा माना जाना चाहिए।

‘द हेग’ के फैसले पर भारत ने दिखाया सख्त रुख तो बिलबिलाया पाकिस्तान

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी भारत द्वारा ‘द हेग’ स्थित पर्मानेंट कोर्ट ऑफ आर्बिट्रेशन के सिंधु जल संधि से जुड़े फैसले को खारिज करने के ठीक एक दिन बाद आई है। मध्यस्थता अदालत ने अपने फैसले में कहा था कि 1960 की सिंधु जल संधि पूरी तरह से लागू है। भारत को इस समझौते के तहत अपने दायित्वों को पूरा करना जारी रखना चाहिए। मध्यस्थता फोरम के मुताबिक इसमें पश्चिमी नदियों पर जलविद्युत परियोजनाओं को नियंत्रित करने वाले नियम भी शामिल हैं।

इसका तगड़ा जवाब देते हुए भारत ने इस मध्यस्थता निकाय को ही गैर-कानूनी रूप से गठित बता दिया। इस कदम के साथ ही साथ भारत ने साफ और स्पष्ट लहजे में दुनिया को बता दिया कि ऐसे मध्यस्थता निकाय के पास भारत के संप्रभु निर्णयों के ऊपर कोई क्षेत्राधिकार नहीं है। भारत के विदेश मंत्रालय ने यह भी साफ कहा कि संधि को स्थगित रखने का भारत का फैसला अभी भी पूरी तरह से लागू है।

क्यों स्थगित की गई थी सिंधु जल संधि?

अप्रैल 2025 में पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 लोगों की जान जाने के बाद भारत ने 1960 की इस संधि को स्थगित कर दिया था। भारत का कहना है कि यह संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान सीमा पार आतंकवाद को अपना समर्थन देना पूरी तरह से बंद नहीं कर देता। पाकिस्तान ने इस हमले में अपनी किसी भी तरह की संलिप्तता से इनकार किया था।

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यह विवाद तब और तेज हो गया जब भारत ने जम्मू और कश्मीर में अपनी जलविद्युत परियोजनाओं पर काम की रफ्तार बढ़ा दी। पाकिस्तान सिंधु जल संधि का हवाला देकर भारत की इन परियोजनाओं का लगातार विरोध करता रहा है।