तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी TET पर शिक्षकों को राहत देने की उठी मांग

तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी TET पर शिक्षकों को राहत देने की उठी मांग

umang singhar

भोपाल। मध्यप्रदेश में लंबे समय से चल रहा शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता का विवाद एक बार फिर सियासी मुद्दा बन गया है। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर TET के मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने की मांग की है। सिंघार ने तमिलनाडु की तर्ज पर मध्यप्रदेश में भी पुराने शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से राहत देने के लिए विधानसभा में प्रस्ताव पारित करने की मांग की है। 

 

नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पूरे मुद्दें को उठाते हुए  कहा कि  TET की अनिवार्यता से प्रदेश में लंबे समय से सेवाएं दे रहे करीब 1.50 लाख शिक्षक और उनके परिवार प्रभावित हो रहे हैं। उनका कहना है कि परीक्षा की अनिवार्यता का सीधा असर शिक्षकों की सेवा-निरंतरता, पदोन्नति और अन्य सेवा लाभों पर पड़ रहा है। ऐसे में सरकार को शिक्षकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए इस मामले में गंभीरता से निर्णय लेना चाहिए। 

 

नेता प्रतिपक्ष ने अपने पत्र में तमिलनाडु विधानसभा के 25 अगस्त 2026 के प्रस्ताव का हवाला दिया है। तमिलनाडु विधानसभा ने 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET की अनिवार्यता से स्थायी छूट देने तथा उनकी सेवा और पदोन्नति संबंधी हितों के संरक्षण की मांग की है। प्रस्ताव में केंद्र से शिक्षा का अधिकार अधिनियम में आवश्यक संशोधन करने और संबंधित दिशा-निर्देश जारी करने का आग्रह भी किया गया है।  इसी आधार पर सिंघार का तर्क है कि मध्यप्रदेश में भी विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर शिक्षकों की स्थिति पर चर्चा की जाए और तमिलनाडु की तर्ज पर राहत का रास्ता निकाला जाए।

 

राहुल गांधी तक पहुंचा शिक्षकों का मुद्दा- वहीं TET को लेकर शिक्षकों के एक संगठन के  प्रतिनिधियों ने दिल्ली में कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात कर उनसे दखल देने की मांग की है।संगठन ने राहुल गांधी से शिक्षकों के पक्ष में हस्तक्षेप करने और इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर उठाने की मांग की। संगठन के अनुसार, राहुल गांधी ने शिक्षकों की बात सुनी और इस मुद्दे को उठाने का भरोसा दिया।  शिक्षक संगठनों का दावा है कि यह केवल मध्यप्रदेश का मामला नहीं है, बल्कि देशभर में करीब 25 लाख शिक्षक इससे प्रभावित हो सकते हैं। ऐसे में वे चाहते हैं कि TET को लेकर केंद्र स्तर पर भी स्पष्ट निर्णय लिया जाए।

 

TET पर शिक्षकों की क्या हैं मांगें?-TET की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षक संगठनों की प्रमुख मांग है कि 23 अगस्त 2010 से पहले नियुक्त शिक्षकों को TET से पूर्ण और स्थायी छूट दी जाए। संगठनों का तर्क है कि इन शिक्षकों की नियुक्ति उस समय लागू नियमों और निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के आधार पर हुई थी। वर्षों तक सेवा देने के बाद अब उन पर नई पात्रता शर्त लागू करना उनके लिए नौकरी की सुरक्षा और भविष्य को लेकर गंभीर संकट पैदा कर रहा है।

 

शिक्षक संगठन केवल TET से छूट ही नहीं, बल्कि वरिष्ठता, पदोन्नति, सेवा-निरंतरता और अन्य सेवा लाभों का संरक्षण भी चाहते हैं। उनका कहना है कि यदि सरकार परीक्षा आयोजित करती है तो लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों के लिए अलग और व्यावहारिक व्यवस्था बनाई जाए। मध्यप्रदेश में 2005 से 2009 के बीच नियुक्त शिक्षकों को लेकर यह मांग विशेष रूप से जोर पकड़ रही है। 

 

 

भारत के 1 पैसे के चार्ज पर आपत्ति, चीन से 127% महंगी बिजली क्यों खरीद रहा बांग्लादेश?

Bangladesh Story: बांग्लादेश की तारिक रहमान की सरकार एक तरफ जहां भारत के मामूली पावर चार्ज पर आपत्ति जता रही है। वहीं, दूसरी तरफ वह चीनी कंपनी से बेहद महंगी दरों पर बिजली खरीदने की तैयारी कर रही है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ ही दिनों पहले ढाका ने सीमा पार बिजली लेनदेन के निपटान के लिए भारत द्वारा प्रस्तावित 0.01 रुपये प्रति यूनिट (1 पैसा) के चार्ज पर आपत्ति जताई थी। बांग्लादेश की आपत्ति के बाद भारत ने इस प्रस्तावित चार्ज को घटाकर आधा यानी 0.005 रुपये प्रति यूनिट कर दिया था।

अमीनबाजार में चीन का प्रोजेक्ट: वेस्ट मैनेजमेंट है उद्देश्य

‘इंडिया टुडे’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ढाका के अमीनबाजार लैंडफिल में बनने वाले चीनी प्रोजेक्ट की प्लांड कैपिसिटी 42 मेगावाट होगी। इस प्रोजेक्ट का मुख्य उद्देश्य बांग्लादेश की राजधानी में बढ़ते वेस्ट मैनेजमेंट क्राइसिल का हल निकालना है। यह प्रोजेक्ट बिजली निर्माण का काम एक्स्ट्रा फायदे के लिए करेगा। आपको बता दें कि इस 42 मेगावाट के प्रोजेक्ट को भारत द्वारा बांग्लादेश को बड़े पैमाने पर की की जाने वाली इलेक्ट्रिसिटी सप्लाई का रिप्लेसमेंट नहीं माना जा सकता।

बांग्लादेश इस समय गंभीर बिजली संकट, गैस सप्लाई में रुकावट और लंबे समय तक होने वाले ब्लैकआउट से जूझ रहा है। देश के कई हिस्सों में बिजली कटौती को लेकर विरोध प्रदर्शन भी शुरू हो चुके हैं। ऐसे संवेदनशील समय में चीनी कंपनी को 25 टका प्रति यूनिट देने का फैसला लिया गया है। यहां जानना जरूरी है कि अभी बांग्लादेश का एक टका भारत के 0.77 रुपये के करीब है।

इंपोर्टे़ बिजली के औसत खर्च से दोगुने से भी अधिक रेट

बांग्लादेश के न्यूज पेपर द डेली स्टार के मुताबित वित्तीय वर्ष 2020-21 और 2024-25 के बीच बांग्लादेश में इंपोर्टेट बिजली की औसत लागत दोगुने से अधिक हो गई है। ये 5.82 टका प्रति यूनिट से बढ़कर 11.72 टका प्रति यूनिट हो गई थी। इस बैकग्राउंड में देखें तो अमीनबाजार वेस्ट-टू-पावर प्रोजेक्ट के लिए प्रस्तावित 25 टका प्रति यूनिट का टैरिफ बांग्लादेश द्वारा वित्तीय वर्ष 2024-25 में इंपोर्ट की गई बिजली के लिए चुकाई गई औसत कीमत से दोगुने से भी अधिक है।

ढाका शहर से निकलने वाले कचरे के पहाड़ों से बिजली और दूसरे जरूरी प्रोडक्ट्स बनाने की कोशिश कर रहा है। हालांकि 25 टका की इस दर ने बांग्लादेश की बिजली रणनीति की कॉस्ट को लेकर नया विवाद खड़ा कर दिया है। वह भी खासकर तब जब बिजली की हर एक अतिरिक्त यूनिट और लागत की जांच की जा रही है।

भारत से बिजली आपूर्ति और 1 पैसे के चार्ज का विवाद समझिए

‘द डेली स्टार’ के आंकड़ों के मुताबिक वित्तीय वर्ष 2024-25 में बांग्लादेश के कुल बिजली खरीद खर्च में भारत से इंपोर्ट बिजली की हिस्सेदारी लगभग 15.8% थी। उस वर्ष बांग्लादेश ने कुल 121420 करोड़ टका के बिजली खरीद बजट में से भारत से इंपोर्ट की गई बिजली के लिए करीब 19225 करोड़ टका का पेमेंट किया था।

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अगर इसकी तुलना करें तो चीन का 42 मेगावाट वाला प्रोजेक्ट बेहद मामूली क्षमता का है। भारत और चीन के बीच यह अंतर तब और अधिक सामने आया है जब बांग्लादेश ने भारत के सेटलमेंट नोडल एजेंसी चार्ज पर आपत्ति उठाई। भारत की केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) द्वारा सीमा पार बिजली व्यापार के लिए एसएनए चार्ज लागू करने के फैसले के बाद 24 अगस्त को भारत ने बांग्लादेश को सप्लाई की जाने वाली बिजली पर 0.005 रुपये (आधा पैसा) प्रति यूनिट का SNA चार्ज प्रस्तावित किया था।

Salary vs EMI: सैलरी आते ही EMI से खाली हो जाता है अकाउंट? कर्ज के जाल से निकलने के लिए अपनाएं ये 3 आसान स्टेप्स

Debt Management Tips: महीने की पहली तारीख को सैलरी क्रेडिट होने का मैसेज आता है और कुछ ही घंटों में EMIs कटने के बाद अकाउंट खाली लगने लगता है। अगर आपकी सैलरी का भी एक बड़ा हिस्सा पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड बिल और होम लोन की किश्तों में जा रहा है, तो बचत करना तो दूर, रोजमर्रा के खर्चे संभालना भी चुनौती बन जाता है।

ऐसी स्थिति में अक्सर लोग किसी इमरजेंसी खर्च से निपटने के लिए एक और नया लोन या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल कर लेते हैं, जो उन्हें एक गंभीर ‘डेट ट्रैप’ यानी कर्ज के जाल में फंसा देता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी अपने वित्तीय साक्षरता अभियानों में बार-बार आगाह करता है कि पुराना कर्ज चुकाने के लिए नया लोन लेना बहुत खतरनाक साबित हो सकता है। अगर आप भी EMI के दबाव से परेशान हैं, तो इन 3 आसान स्टेप्स के जरिए अपनी वित्तीय स्थिति पर दोबारा नियंत्रण पा सकते हैं।

कर्ज के दबाव को कम करने का 3-स्टेप फॉर्मूला

स्टेप 1: जानिए पैसा कहां जा रहा है और महंगे कर्ज पहले खत्म कीजिए

कोई भी रणनीति बनाने से पहले आपको अपनी मौजूदा वित्तीय स्थिति की पूरी तस्वीर साफ देखनी होगी। अपनी हर EMI, क्रेडिट कार्ड का कुल बकाया, यूटिलिटी बिल्स और राशन/किराए जैसे फिक्स्ड खर्चों को एक कागज पर लिखें। क्रेडिट कार्ड बकाया और पर्सनल लोन पर ब्याज दरें बहुत ज्यादा होती हैं, जबकि होम लोन या कार लोन तुलनात्मक रूप से सस्ते होते हैं।

सभी कर्जों को एक साथ भरने के बजाय सबसे महंगे कर्ज (हाई-इंटरेस्ट लोन) को पहले चुकाने का लक्ष्य बनाएं। बाकी कर्जों की सिर्फ मिनिमम EMI देते रहें और जितनी भी एक्स्ट्रा बचत हो, उसे सबसे महंगे लोन को बंद करने में लगाएं।

स्टेप 2: एक छोटा कैश बफर जरूर तैयार करें

जब बजट पहले से टाइट हो, तो महीने के ₹1,000 या ₹2,000 बचाना भी मुश्किल लगता है। लेकिन यही छोटी बचत आपकी ढाल बनती है। अगर अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी या गाड़ी की खराबी आ जाए, तो इमरजेंसी फंड न होने पर आपको दोबारा क्रेडिट कार्ड का सहारा लेना पड़ता है।

रिजर्व बैंक का मानना है कि हर परिवार के पास एक छोटा कैश बफर होना चाहिए ताकि आपात स्थिति में नया कर्ज न लेना पड़े। शुरुआत में ₹5,000 से ₹10,000 का छोटा बफर बनाएं, फिर धीरे-धीरे इसे 3-6 महीने के आवश्यक खर्चों के बराबर ले जाएं।

स्टेप 3: सैलरी इंक्रीमेंट या बोनस का बुद्धिमानी से इस्तेमाल करें

साल में जब भी सैलरी बढ़े, बोनस मिले या कोई टैक्स रिफंड आए, तो उस पूरे पैसे को नए शौक या लाइफस्टाइल पर खर्च करने की गलती न करें। मिली हुई एक्स्ट्रा राशि का कम से कम 50% से 70% हिस्सा अपने सबसे महंगे लोन के प्रिंसिपल को चुकाने में लगाएं। इससे आपका आने वाला ब्याज काफी घट जाता है।

लोन की प्री-पेमेंट करने से पहले अपने बैंक के नियमों और प्री-पेमेंट चार्जेस की जांच जरूर कर लें। RBI के नियमों के अनुसार बैंकों को लोन की शर्तों में प्री-पेमेंट चार्जेस का पारदर्शी खुलासा करना अनिवार्य है।

पुराने लोन को चुकाने के लिए कभी न लें नया लोन!

कई बार लोग EMI कम करने के लिए लोन कंसोलिडेशन या री-फाइनेंसिंग का सहारा लेते हैं। जब बैंक किसी नए लोन में कम EMI दिखाता है, तो लोग आकर्षित हो जाते हैं। लेकिन ध्यान रखें कि EMI इसलिए कम दिखती है क्योंकि लोन की अवधि बढ़ा दी जाती है।

लोन की अवधि बढ़ाने से आपकी महीने की किस्त तो छोटी हो सकती है, लेकिन बैंक को जाने वाला कुल ब्याज बहुत बढ़ जाता है। इसके अलावा, देर से भुगतान करने पर आपको न केवल लेट फीस और अतिरिक्त ब्याज देना पड़ेगा, बल्कि आपका CIBIL स्कोर भी खराब होगा, जिससे भविष्य में इमरजेंसी लोन मिलना मुश्किल हो जाएगा।

क्या हो लोन रीपेमेंट की बेस्ट स्ट्रेटजी

कर्ज के जाल से बाहर निकलने का रास्ता किसी जादुई फॉर्मले से नहीं, बल्कि सही वित्तीय अनुशासन से निकलता है। जब धीरे-धीरे आपकी एक-एक EMI खत्म होगी, तो उससे बचने वाला पैसा ही आपकी भविष्य की बचत और निवेश की नींव बनेगा। पहला लक्ष्य स्थिति को बिगड़ने से रोकना है, और दूसरा लक्ष्य हर एक्स्ट्रा रुपये को किसी नए कर्ज में फंसाने के बजाय उससे निकलने का जरिया बनाना है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

चांद या मंगल पर कैसा होगा इंसानों का आशियाना? भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने शेयर किया खास ‘BHEEM’ प्रोजेक्ट का वीडियो

चांद या मंगल पर कैसा होगा इंसानों का आशियाना? भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने शेयर किया खास 'BHEEM' प्रोजेक्ट का वीडियो

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भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने सोशल मीडिया पर 'BHEEM' (भारतीय रहने योग्य विस्तार योग्य अलौकिक आवास) प्रोजेक्ट का वीडियो साझा किया है। आईआईएससी बेंगलुरु की आलोक लैब में तैयार इस तकनीक से इंसानों के चंद्रमा या मंगल ग्रह पर रहने का रास्ता साफ हो सकता है। ALSO READ: Priya Adhikari कौन हैं , नेपाल बाढ़ के बीच 6 दिन में किए 100 रेस्क्यू मिशन, सैकड़ों जिंदगियां बचाईं

 

शुक्ला ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, बी.एच.ई.ई.एम. (B.H.E.E.M.) — भारतीय रहने योग्य, विस्तार योग्य, अलौकिक आवास (Bharatiya Habitable Expandable Extraterrestrial Habitat)।  जब हम रूस में अपनी ट्रेनिंग पूरी करके लौटे, तो हमने अपने अंतरिक्ष यात्री प्रशिक्षण के भारतीय चरण की शुरुआत की। इसमें लॉन्च व्हीकल और ऑर्बिटल मॉड्यूल के सिस्टम को सीखना, साथ ही व्यापक शारीरिक और अंतरिक्ष उड़ान प्रशिक्षण शामिल था। लेकिन हमारे प्रशिक्षण का एक और, काफी अलग पहलू भी था—एकेडमिक रिसर्च।

 

उन्होंने कहा कि हमें भविष्य के अंतरिक्ष अन्वेषण से संबंधित किसी विषय को चुनने, उसकी अपनी समझ को गहरा करने और, उम्मीद है कि, भारत के भविष्य के अंतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए उपयोगी हो सकने वाला कुछ योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया गया था। मैंने उस अंतरिक्ष यान से आगे की सोचना तय किया जिसमें हम उड़ान भरने की ट्रेनिंग ले रहे थे और इस बारे में सोचना शुरू किया कि उतरने के बाद मनुष्य कहाँ रह सकते हैं।

 

शुक्ला ने कहा कि मेरा शोध का क्षेत्र बाह्य अंतरिक्ष आवास (एक्सट्राटेरेस्ट्रियल हैबिटेट्स) था—ऐसी तकनीकें और अवधारणाएं जो अंततः इंसानों को पृथ्वी से परे रहने और काम करने की अनुमति दे सकती हैं। उस काम का परिणाम अंततः iisc bangalore की आलोक लैब में B.H.E.E.M. के रूप में सामने आया।

 

अनगिनत विशाल चुनौतियों को हल करना बाकी

भारतीय अंतरिक्ष यात्री ने कहा कि चंद्रमा, मंगल या अन्य बाह्य अंतरिक्ष गंतव्यों पर इंसानों की स्थायी उपस्थिति स्थापित होने से पहले अनगिनत विशाल चुनौतियों को हल करना बाकी है।

 

उन्होंने कहा कि विकिरण और अत्यधिक तापमान से लेकर जीवन रक्षक प्रणालियों, ऊर्जा, निर्माण और इस सीधे से सवाल तक कि—हम कहां रहेंगे? ठीक यही कारण है कि हमें आज से ही इस बारे में सोचना शुरू करने की आवश्यकता है। 

 

क्या होगा दूसरी दुनिया में आवास बनाने की दिशा में पहला कदम?

शुक्ला ने अनुसार, यदि हम चाहते हैं कि आज से 20 साल बाद इंसान पृथ्वी से परे रहें, तो इस पर काम आज से 20 साल बाद शुरू नहीं हो सकता। इसकी शुरुआत आज ही करनी होगी। किसी दूसरी दुनिया में आवास बनाने की दिशा में पहला कदम शायद उसकी पहली ईंट रखना न हो। यह केवल यह कल्पना करने की हिम्मत जुटाना हो सकता है कि वह आवास कैसा दिख सकता है।

BSE मैनेजमेंट के इस बयान से शेयर धड़ाम, जानिए क्या है यह पूरा मामला

बीएसई के शेयरों में 2 सितंबर को बड़ी गिरावट आई। दिन के उच्च स्तर से शेयर 4 फीसदी से ज्यादा गिर गए। इसकी वजह बीएसई का एक बयान है। इस बयान के बाद ही शेयर में तेज गिरावट आई। स्टॉक एक्सचेंज ने कहा है कि क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (कैश) की शुरुआत के बाद वॉल्यूम में गिरावट आई है।

CAS की वजह से घटा है पार्टिसिपेशन 

BSE के मैनेजमेंट ने जी बिजनेस से बातचीत में कहा, “CAS की वजह से एचएफटी, प्रॉपरायटरी अकाउंट्स, रिटेल ट्रेडर्स का पार्टिसिपेशन घटा है। सीएएस के बाद पार्टिसिपेशन बढ़ना जरूरी है।” बीएसई का शेयर 2 सितंबर को एक समय 3,252 रुपये के लेवल पर पहुंच गया था। 12 बजे शेयर का प्राइस 3 फीसदी गिरकर 3,144.80 रुपये पर चल रहा था।

NSE के शेयरों की लिस्टिंग का भी असर

बीएसई मैनेजमेंट के यह बताने का असर भी उसके शेयरों पर पड़ा कि NSE के शेयरों को खुद के प्लेटफॉर्म पर ट्रेड करने की इजाजत मिल सकती है। खबरों के मुताबिक, BSE पर लिस्ट होने के बाद NSE के शेयरों में अपने ही एक्सचेंज पर ‘permitted to trade’ कैटेगरी के जरिए ट्रेडिंग हो सकती है।

अर्निंग्स में 1-2 फीसदी कमी आ सकती है

पीएल कैपिटल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, एनएसई के इस कदम से FY27 में बीएसई के अर्निंग्स पर करीब 1-2 फीसदी का असर पड़ सकता है। यह अनुमान एक एनालिसिस पर आधारित है, जिसमें यह माना गया है कि कैश मार्केट की हिस्सेदारी और नहीं बढ़ेगी।

दो ब्रोकरेज फर्मों ने आउटलुक घटाया

विदेशी ब्रोकरेज फर्मों नुवामा और जेफरीज ने बीएसई के शेयरों पर अपने आउटलुक को घटाया है। PL Capital ने बीसई के शेयरों के लिए 12 महीने के टारगेट प्राइस को 4,850 रुपये से घटाकर 4,025 रुपये कर दिया है। हालांकि, इस शेयर पर उसने ‘buy’ की अपनी रेटिंग बनाए रखी है।

3 अगस्त को हुई थी CAS की शुरुआत

CAS यानी क्लोजिंग ऑक्शन सेशन की शुरुआत 3 अगस्त को हुई थी। यह कारोबार के आखिर में होने वाला एक संक्षिप्त ऑक्शन है, जिसमें शेयर के क्लोजिंग प्राइस को तय करने के लिए बाय (Buy) और सेल (Sell) ऑर्डर्स को मैच कराया जाता है। शेयर के क्लोजिंग प्राइस को तय करने के लिए दूसरे एशियाई बाजारों में भी इस सिस्टम का इस्तेमाल होता है। इसमें चीन, ताइवान, हांगकांग और दक्षिण कोरिया के बाजार शामिल हैं।

CAS का मतलब क्या है

CAS की व्यवस्था शुरू होने से पहले शेयर के क्लोजिंग प्राइस का निर्धारण अंतिम 30 मिनट में लगातार होने वाली ट्रेडिंग में ट्रेड्स के औसत प्राइस के आधार पर होता था। रेगुलेटर्स का कहना है कि दुनिया के कई बाजारों में लागू सिस्टम को ध्यान में रख CAS को लागू किया। कैस लागू होने के बाद बाजार और प्रमुख सूचकांकों में काफी ज्यादा उतार-चढ़ाव देखने को मिला है।

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CAS से पहले क्या था सिस्टम

करीब 20 मिनट के ऑक्शन प्रोसेस में लिक्विडिटी काफी कम रही है और इसमें ज्यादातर संस्थानों की हिस्सेदारी रही है। एक्सचेंज के डेटा के मुताबिक, डेली कैश मार्केट टर्नओवर में CAS ट्रेड्स की हिस्सेदारी 1 फीसदी से भी कम है। कम पार्टिसिपेशन का मतलब अपेक्षाकृत छोटे बाय और सेल ऑर्डर्स से है।

प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी के जन सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर सेवा संकल्प अभियान चलाया जाएगा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

प्रधानमंत्री नरेंंद्र मोदी के जन सेवा के 25 वर्ष पूर्ण होने पर सेवा संकल्प अभियान चलाया जाएगा: मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

भोपाल। अगामी 7 अक्टूबर को मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के रूप में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जनसेवा के 25 साल पूरे हो रहे हैं। इन 25 सालों में विकास और जनकल्याण के जो अविस्मरणीय कार्य हुए हैं, उनकी जानकारी जन-जन तक पहुंचाने के लिए मध्यप्रदेश में सेवा संकल्प अभियान चलाया जाएगा। यह अभियान प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस 17 सितंबर से प्रारंभ होकर 1 माह यानी 17 अक्तूबर तक चलेगा। सेवा संकल्प अभियान विकसित भारत के संकल्प की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। इस अभियान के अंतर्गत अधिक से अधिक जनभागीदारी सुनिश्चित करते हुए कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अप्रैल से जून की तिमाही में देश की जीडीपी वृद्धि दर 7.8% होने पर प्रधानमंत्री मोदी को बधाई दी तथा मंत्रि-परिषद की ओर से उनका अभिनंदन किया। पिछले साल इसी अवधि में यह दर 6.9% थी। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की नीतियों के परिणामस्वरूप देश सभी क्षेत्रों में तेजी से प्रगति कर रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सांस्कृतिक उत्थान और धार्मिक पर्यटन की जो दृष्टि प्रदान की, उसी के परिणामस्वरूप प्रदेश में विभिन्न स्थानों पर हमारी गौरवशाली परम्परा और ऐतिहासिक धरोहरों को सहेजने का कार्य आरंभ किया गया है। इस दिशा में प्रदेश में 243 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न संरक्षण और विकास कार्य जारी हैं।

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रदेश में विगत 7 अगस्त से आरंभ जन-विश्वास अभियान के अंतर्गत न देरी, न दूरी के सिद्धांत पर काम करते हुए राज्य सरकार अभियान को सुशासन के क्षेत्र में एक मील का पत्थर बनाने का प्रयास कर रही है। अभी तक उन्होंने स्वयं चार जिलों, छिंदवाड़ा, बड़वानी, टीकमगढ़ और बालाघाट का भ्रमण किया है। उन्होंने मंत्रियों से अभियान में निरंतर दौरा कर, विभिन्न योजनाओं तथा विकास गतिविधियों की मॉनीटरिंग करने और विभिन्न समुदायों से संवाद में बने रहने की बात कही।

Nissan begins Tekton exports from India

Nissan begins Tekton exports from India
Nissan Tekton exports

Nissan Motor India announced the commencement of exports for the Tekton on September 1, 2026. The automaker stated that the Tekton will be sold in South Africa, Bhutan, and Nepal. For this first batch, the company said it has dispatched a total of 1,300 units to the three countries.

Nissan India’s domestic wholesales grow by 147 percent YoY

Tekton’s launch has helped drive momentum for the brand

Nissan India’s domestic wholesales increased by 147 percent year-on-year to 3,246 units in August 2026, up from 1,384 units registered in the corresponding period last year. The growth was driven by the domestic market rollout of the Tekton alongside sustained volumes for its existing SUV portfolio, according to Nissan.

However, international export dispatches across all models totaled 5,924 units during the month, down 23.7 percent year-on-year from 7,769 in August 2025. This reduction in exports offset the large gain in domestic wholesales, with total wholesales increasing marginally by 2.2 percent from 9,153 units to 9,350 units year-on-year.

Saurabh Vatsa, Managing Director, Nissan Motor India, said, “The response to the Nissan Tekton has been encouraging and has contributed to a strong domestic wholesale performance in August.” Nissan said that the initial shipments to South Africa, Nepal, and Bhutan represent the first phase of the model’s overseas rollout, with plans to expand dispatches to additional export destinations as production scales up.

With inputs from Dev Vadchhedia

5000 अमेरिकी थाईलैंड पहुंचे, 5 दिन पटाया में छुट्टियां मनाएंगे:9 महीने से USS अब्राहम लिंक पर तैनाती; पुलिस का देह व्यापार के खिलाफ एक्शन

अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर USS अब्राहम लिंकन बुधवार सुबह थाईलैंड पहुंच गया है। इस एयरक्राफ्ट पर पिछले 9 महीनों से 5 हजार सैनिक तैनात हैं। लंबे सैन्य अभियान के बाद अब उन्हें पटाया में करीब 5 दिन की छुट्टी मिलेगी।

USS अब्राहम लिंकन के साथ अमेरिकी नौसेना के दो और जहाज भी पहुंचे हैं। लाम चाबांग पोर्ट पर उतरने के बाद सैनिकों को बसों से करीब 96 किमी दूर पटाया ले जाया जाएगा। हालांकि पटाया पहुंचने से पहले ही थाई पुलिस ने शहर में देह व्यापार के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। रॉयटर्स के मुताबिक, पुलिस ने पिछले वीकेंड में छापेमारी कर 40 से 50 लोगों को हिरासत में लिया। शहर के समुद्र तट और नाइटलाइफ वाले इलाकों में गश्त भी बढ़ा दी गई है। कानून व्यवस्था बनाए रखने में जुटी पुलिस पटाया में अमेरिकी नौसेना के बड़ी संख्या में जवानों और मरीन के आने से पहले पुलिस ने शहर में छापेमारी और जांच बढ़ा दी है। बार, समुद्र तट और दूसरी भीड़भाड़ वाली जगहों पर पुलिस खास नजर रख रही है। इसी दौरान पब्लिक प्लेस पर ग्राहकों की तलाश करने के आरोप में कम से कम 25 महिलाओं को हिरासत में लिया गया। इनमें थाईलैंड के साथ लाओस और युगांडा की महिलाएं भी शामिल थीं। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, अलग-अलग कार्रवाइयों में 40 से 50 लोगों को पकड़ा गया है। पुलिस का कहना है कि अमेरिकी जवानों के आने से पहले शहर में गैरकानूनी गतिविधियों पर रोक लगाना और कानून-व्यवस्था बनाए रखना जरूरी है। अमेरिकी नौसैनिकों को भी ड्रग्स और गांजा बेचने वाली दुकानों से दूर रहने की सलाह दी गई है। हालांकि उन्हें नाइटलाइफ वाली जगहों पर जाने से नहीं रोका गया है, लेकिन देर रात तक बार और मनोरंजन की जगहों पर रुकने से बचने को कहा गया है। कारोबारियों को बड़ी कमाई की उम्मीद अमेरिकी नौसैनिकों के पटाया पहुंचने से शहर के कारोबारियों को अच्छी कमाई की उम्मीद है। करीब 5 हजार अमेरिकी जवानों के आने से होटल, रेस्तरां, बार, शॉपिंग और दूसरे पर्यटन कारोबारों में ग्राहकों की संख्या बढ़ सकती है। खासकर नाइटलाइफ़ और मनोरंजन से जुड़े कारोबारियों को इसका सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है। स्थानीय कारोबारियों के लिए यह ऐसे समय में बड़ा मौका है, जब पर्यटन कारोबार में पहले जैसी तेजी नहीं है। हजारों अमेरिकी जवान कुछ दिनों के लिए शहर में रहेंगे और इस दौरान खाने-पीने, होटल में ठहरने, घूमने-फिरने और मनोरंजन पर पैसा खर्च करेंगे। इससे छोटे दुकानदारों से लेकर बड़े होटल और रेस्तरां तक कई तरह के कारोबारों को फायदा मिल सकता है। स्थानीय मीडिया के मुताबिक एक अमेरिकी नौसैनिक रोजाना करीब 1,000 (₹2800) से 3,000 (₹8500) थाई बाहत तक खर्च कर सकता है। इस हिसाब से अगर करीब 5 हजार नौसैनिक शहर में आते हैं तो उनके खर्च से स्थानीय कारोबार में करोड़ों थाई बाहत का पैसा आ सकता है। पटाया और अमेरिकी सेना का पुराना कनेक्शन पटाया शहर का अमेरिकी सेना से रिश्ता 1960 और 1970 के दशक के वियतनाम युद्ध के समय से है। वियतनाम युद्ध के दौरान अमेरिकी सैनिक छुट्टियां मनाने और आराम करने के लिए यहां आते थे। इससे स्थानीय होटल, बार, रेस्तरां और दूसरे कारोबार तेजी से बढ़े। धीरे-धीरे यह छोटा मछुआरा गांव दुनिया भर के पर्यटकों के बीच मशहूर शहर बन गया। यूएसएस अब्राहम लिंकन थाईलैंड क्यों आया? यूएसएस अब्राहम लिंकन हाल ही में वेस्ट एशिया में लंबी तैनाती पूरी करके लौटा है। यह अमेरिकी नौसेना का परमाणु ऊर्जा से चलने वाला विमानवाहक पोत है, जिसने नौ महीने से ज्यादा समय समुद्र में बिताया। इस दौरान यह ईरान से जुड़े तनाव के बीच वेस्ट एशिया में अमेरिकी सैन्य अभियानों का हिस्सा रहा। लंबी तैनाती के दौरान जहाज पर तैनात नौसैनिकों की मानसिक सेहत और रहने की परिस्थितियों को लेकर भी चिंताएं सामने आई थीं। अब थाईलैंड में पांच दिन के इस पड़ाव के दौरान जहाज को जरूरी सप्लाई दी जाएगी, रखरखाव का काम होगा और हजारों नौसैनिकों को लंबे समय बाद आराम का मौका मिलेगा।

LIVE: CBI करेगी दिशा सालियान मामले की जांच

LIVE: CBI करेगी दिशा सालियान मामले की जांच

disha salian

Latest News Today Live Updates in Hindi : बॉम्बे हाई कोर्ट ने दिशा सालियान मामले में सीबीआई को FIR दर्ज करने का आदेश दिया। पल पल की जानकारी…

-बॉम्बे हाई कोर्ट ने CBI को दिशा सालियन की मौत के मामले में FIR दर्ज करने का आदेश दिया है। हाई कोर्ट का कहना है कि इस मामले की CBI जांच होनी चाहिए।

-दिशा के पिता सतीश सालियान की ओर से दायर उस याचिका पर यह फैसला आया है, जिसमें उन्होंने साल 2020 में हुई अपनी बेटी की मौत के कारणों और परिस्थितियों पर गंभीर सवाल उठाए थे। 

Janmashtami Bank Holiday: 4 सितंबर को जन्माष्टमी पर बैंक बंद रहेंगे या खुलेंगे? देखिए RBI की पूरी बैंक हॉलिडे लिस्ट

Janmashtami Bank Holiday 2026: देशभर में श्री कृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल 4 सितंबर, शुक्रवार को जन्माष्टमी के पावन अवसर पर देश के कई राज्यों में बैंकों की छुट्टी रहने वाली है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी की गई आधिकारिक बैंक हॉलिडे लिस्ट के मुताबिक, कई सर्किलों में सरकारी और प्राइवेट दोनों तरह के बैंकों की शाखाओं में कामकाज नहीं होगा।

अगर आपको इस हफ्ते बैंक जाकर चेक क्लियरिंग, कैश डिपॉजिट या अन्य जरूरी काम निपटाने हैं, तो अपने शहर की हॉलिडे लिस्ट चेक करके ही घर से निकलें।

4 सितंबर को किन-किन राज्यों में बंद रहेंगे बैंक?

RBI की ‘नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट’ के तहत 4 सितंबर को देश के प्रमुख शहरों और सर्किलों में बैंक बंद रहेंगे:

  • उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड: लखनऊ, कानपुर, वाराणसी, देहरादून और नोएडा।
  • राजस्थान और मध्य प्रदेश: जयपुर, भोपाल और इंदौर।
  • गुजरात और महाराष्ट्र: अहमदाबाद और मुंबई (कुछ क्षेत्रों में स्थानीय मान्यताओं के अनुसार)।
  • पूर्वी भारत: कोलकाता, पटना, गंगटोक और रांची।
  • दक्षिण भारत: चेन्नई, हैदराबाद और बेंगलुरु (चुनिंदा सर्किल)।

(नोट: जिन राज्यों या केंद्र शासित प्रदेशों में जन्माष्टमी का आधिकारिक अवकाश अधिसूचित नहीं है, वहां बैंक शाखाएं अपने सामान्य समय के अनुसार खुली रहेंगी।)

सितंबर 2026: बैंकों की छुट्टियों का कैलेंडर

4 सितंबर, शुक्रवार: श्री कृष्ण जन्माष्टमी- उत्तर प्रदेश, राजस्थान, एमपी, दिल्ली NCR आदि

12 सितंबर, शनिवार: दूसरा शनिवार- पूरे भारत में बैंक बंद रहेंगे

13 सितंबर, रविवार: साप्ताहिक अवकाश- पूरे भारत में बैंक बंद रहेंगे

26 सितंबर, शनिवार: चौथा शनिवार- पूरे भारत में बैंक बंद रहेंगे

बैंक बंद रहने पर भी चालू रहेंगी ये डिजिटल सेवाएं

बैंक शाखाएं बंद रहने के बावजूद ग्राहकों को वित्तीय लेनदेन में कोई परेशानी नहीं होगी। आप घर बैठे ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं। Google Pay, PhonePe, Paytm और भीम ऐप से पैसों का लेनदेन 24 घंटे चालू रहेगा। कैश निकालने और जमा करने के लिए एटीएम सेवाएं चालू रहेंगी। NEFT और RTGS के जरिए ऑनलाइन फंड ट्रांसफर आसानी से किया जा सकेगा।