कानपुर के बिकरू कांड के मुख्य आरोपी विकास दुबे का एनकाउंटर हुए छह साल हो चुके हैं, लेकिन सरकारी रिकॉर्ड में उसकी मौत अब भी अटकी हुई है। वजह पंचायतनामा में पिता के नाम की एक गलती है। रामकुमार की जगह राजकुमार दर्ज होने से डेथ सर्टिफिकेट नहीं बन सका है।
Nepal Flood News: नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी पूरी तरह बदल दी है। हिमालयी क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में से एक रासुवा में तबाही का मंजर अभी भी साफ दिखाई दे रहा है। घर, सड़कें और पुल बह चुके हैं। बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों से विस्थापित होकर अस्थायी राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं। इस त्रासदी के बीच एक युवती की कहानी ने इस आपदा की भयावहता को सामने ला दिया है।
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, रासुवा के सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में रहने वाली एक युवती ने अपने परिवार के 17 सदस्यों को खो दिया। उसका घर भी बाढ़ में बह गया। उसके पास अब अपने परिवार की यादों के तौर पर सिर्फ मोबाइल फोन में मौजूद तस्वीरें बची हैं। नेपाल में अचानक आई बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 1,100 के पार हो गई है।
एक झटके में पूरा परिवार उजड़ गया
कॉपिला तमांग नाम की इस युवती के परिवार ने इससे पहले 2015 के विनाशकारी भूकंप की त्रासदी भी झेली थी। उस आपदा में उनका घर तबाह हुआ था। लेकिन परिवार ने दोबारा जिंदगी शुरू की और नया घर बनाया। इस बार बाढ़ ने उस नए घर को भी नहीं छोड़ा। अमेरिकी चैनल की रिपोर्ट के मुताबिक, बाढ़ में उनकी मां, बहन, दादी समेत परिवार के कुल 17 सदस्य मारे गए। इनमें महज एक महीने का एक बच्चा भी शामिल था।
वापस लौटने पर सबकुछ बर्बाद!
कॉपिला उस समय काठमांडू में थीं। जैसे ही उन्हें पहाड़ी इलाके में बाढ़ आने और परिवार के फंसने की खबर मिली, वह वापस लौट गईं। लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। उन्होंने CNN से कहा कि उन्हें बेहद अकेलापन महसूस हो रहा है। परिवार के छोटे बच्चे के लिए यह त्रासदी और भी मुश्किल है। उनका सात साल का छोटा भाई अभी यह समझ नहीं पा रहा कि उसकी मां अब वापस नहीं आएगी। कॉपिला ने कहा कि अब उसे अपने छोटे भाई के लिए खुद मजबूत बनना होगा।
राहत शिविर में रात होते ही सताने लगता है डर
बाढ़ से बचाए गए और विस्थापित परिवारों को फिलहाल अस्थायी शिविरों, स्कूलों और अधूरी इमारतों में शरण दी गई है। लेकिन यहां पहुंचने के बाद भी लोगों को सुरक्षा का भरोसा नहीं मिल पा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, कई परिवारों को अब भी डर है कि कहीं दोबारा बाढ़ न आ जाए। रात में जब भी पानी बढ़ने या नई बाढ़ की चेतावनी मिलती है, कुछ लोग सुरक्षित ऊंचाई की तलाश में जंगल और पहाड़ी इलाकों की ओर चले जाते हैं।
कई विस्थापित लोग खुले या अधूरे भवनों की छतों पर रात गुजार रहे हैं। एक 17 वर्षीय युवक ने सीएनएस से बातचीत में बताया कि उसके दो छोटे भाई-बहन भी बाढ़ में मारे गए। राहत शिविरों में रात के समय लोग अपने परिवार के सदस्यों को याद कर रोते हैं। कई लोगों के लिए नींद तक मुश्किल हो गई है।
13 साल की बच्ची भी बाढ़ के बीच फंसी
नेपाल की इस आपदा में बच्चों की मुश्किलें भी बेहद गंभीर हैं। एक 13 वर्षीय बच्ची ने बताया कि बाढ़ आने के समय वह अपने परिवार से अलग हो गई थी। उसे कुछ समय तक यह तक पता नहीं था कि उसके माता-पिता कहां हैं। UNICEF के अनुसार, 26 अगस्त को आई बाढ़ से नेपाल के रासुवा, नुवाकोट और धादिंग इलाकों में कम से कम 17,000 बच्चे प्रभावित हुए हैं।
इस विनाशकारी तबाही में कई स्कूल पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। हजारों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हुई है। एक अन्य मामले में स्कूल से लौटते समय बाढ़ की चपेट में आए बच्चों को अपनी जान बचाने के लिए ऊंचे स्थानों की ओर भागना पड़ा। कुछ बच्चों ने पेड़ों पर चढ़कर अपनी जान बचाई।
लोगों के सामने सिर्फ घर नहीं, पूरी जिंदगी दोबारा बसाने की चुनौती
इस बाढ़ ने नेपाल के प्रभावित इलाकों में लोगों से सिर्फ उनके घर और सामान ही नहीं छीने। बल्कि कई परिवारों के पूरे के पूरे सदस्य खत्म हो गए। कई लोगों को अभी तक अपने लापता परिजनों के शव नहीं मिले हैं, जिससे उनके लिए इस त्रासदी को स्वीकार करना और भी मुश्किल हो गया है।
CNN के अनुसार, कुछ परिवारों के लापता सदस्य अभी तक आधिकारिक लापता लोगों की लिस्ट में भी दर्ज नहीं हो पाए थे। अब राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की सबसे बड़ी चिंता यही है कि अगली रात सुरक्षित होगी या फिर एक और बाढ़ उन्हें अपना सब कुछ छोड़कर भागने पर मजबूर कर देगी। उनके पास घर लौटने के लिए कई जगह घर ही नहीं बचे हैं।
मृतकों की संख्या 1,100 के पार
नेपाल में अचानक आई विनाशकारी बाढ़ से मरने वालों की संख्या बुधवार को बढ़कर 1,127 हो गई। हिमालयी क्षेत्र में आई इस आपदा के एक सप्ताह बाद भी बचावकर्मी हजारों लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन से 348, नवलपरासी पूर्व से 217, नवलपरासी पश्चिम से 190 और नुवाकोट से 155 शव बरामद किए गए हैं। इसी तरह गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव बरामद हुए हैं।
I met a girl who lost 17 members of her family and a 13-year-old survivor who nearly got washed away on her school bus. Displaced families are living in makeshift shelters after fleeing the worst-hit area of Rasuwa, Nepal. But they still don’t feel safe and fear more floods. pic.twitter.com/J9s4Zjp3hR
— Will Ripley (@willripleyCNN) September 2, 2026
पुलिस ने बताया कि 1,113 शवों का पोस्टमार्टम और कानूनी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। जबकि 95 शव परिजनों को सौंपे जा चुके हैं। लापता परिजनों की पहचान में परिवारों की मदद के लिए 911 अज्ञात शवों का विवरण नेपाल पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड किया गया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक सुरक्षा बलों ने प्रभावित इलाकों से 6,541 लोगों को सुरक्षित निकाला है। जबकि 4,858 लापता लोगों की तलाश अभी जारी है।
अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में 7,912 पुलिसकर्मियों को तैनात किया है। नेपाल-तिब्बत सीमा के निकट 26 अगस्त को बर्फ और चट्टानों के ढहने या हिमस्खलन के कारण अचानक बाढ़ आ गई थी। इस बाढ़ ने उत्तरी और मध्य नेपाल के कई कस्बों और गांवों में भारी तबाही मचाई थी।
VIDEO | Nepal flood: Rescue and relief operations intensify in Rasuwa as Army airlifts survivors and supplies.
Volunteer Lepen Shah says, “We came here from Kathmandu yesterday. The government is also carrying out rescue and relief operations, and we are doing our bit to help.… pic.twitter.com/VuX72Rop7i
— Press Trust of India (@PTI_News) September 2, 2026

उद्योगपतियों को राहत देने, सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने और औद्योगिक विकास को गति देने के दृष्टिकोण के साथ राज्य सरकार उद्योग क्षेत्र के लिए पारदर्शी और विकासोन्मुख प्रशासन प्रदान करने के लिए लगातार कार्यरत है। GIDC के प्लॉट धारकों द्वारा औद्योगिक प्लॉट या शेड के हस्तांतरण (ट्रांसफर) के समय पंजीकृत लीज डीड करने के बजाय केवल अलॉटमेंट लेटर या सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट दिए जाते थे। इसके कारण पूर्व प्लॉट धारकों द्वारा अधिकांश मामलों में स्टांप ड्यूटी का भुगतान नहीं किया गया था। ALSO READ: गुजरात विधानसभा का 3 दिवसीय मानसून सत्र 9 सितंबर से: पहले दिन दिवंगत नेताओं को श्रद्धांजलि के बाद शुरू होगी कार्यवाही
गुजरात स्टांप अधिनियम में संशोधन और जुर्माना के प्रावधान
राज्य सरकार ने दिनांक 02/04/2025 से गुजरात स्टांप अधिनियम, 1958 में समेकित संशोधन किए हैं। इसके तहत धारा-39(1)(ख) के अनुसार, यदि कोई पक्षकार स्वेच्छा से मूल दस्तावेज प्रस्तुत करता है, तो हस्ताक्षर की तिथि से प्रति माह 2% साधारण ब्याज के साथ बकाया स्टांप ड्यूटी के 4 गुना से अधिक न हो उतना जुर्माना वसूला जाएगा। यदि सरकारी तंत्र द्वारा जांच के दौरान दस्तावेज जब्त किया जाता है, तो प्रति माह 3% साधारण ब्याज के साथ 6 गुना से अधिक न हो उतना जुर्माना वसूलने का प्रावधान 10/04/2025 से लागू हुआ है।
वर्तमान मालिकों पर वित्तीय बोझ
इन कानूनी प्रावधानों के परिणामस्वरूप जब वर्तमान मालिक को बैंक लोन या किसी अन्य सरकारी आवश्यकता के लिए पंजीकृत लीज डीड करानी होती है, तब पिछले सभी अनरजिस्टर्ड सौदों की बकाया स्टांप ड्यूटी, भारी जुर्माना और ब्याज के साथ भरने का अत्यधिक वित्तीय बोझ उन पर आ पड़ता है। ALSO READ: Gen Z के मुद्दों पर विपक्ष को जवाब देंगे पीएम मोदी: 11 साल बाद वडोदरा में युवाओं के बीच भरेंगे हुंकार
GIDC एम्नेस्टी स्कीम की घोषणा
इस संदर्भ में राज्य के उद्योगपतियों और GIDC एसोसिएशंस की ओर से मिले ज्ञापनों पर संवेदनशीलता से प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने GIDC प्लॉटों के पिछले हस्तांतरण सौदों में बकाया स्टांप ड्यूटी और पेनल्टी के बोझ से पात्र MSME उद्योगों को राहत देने के लिए 'GIDC एम्नेस्टी स्कीम' लागू करने का निर्णय लिया है।
GIDC एम्नेस्टी स्कीम क्या है?
अतीत में प्लॉट या शेड के आवंटन के समय पंजीकृत दस्तावेज के बजाय केवल अलॉटमेंट लेटर या सप्लीमेंट्री एग्रीमेंट किए जाने के कारण स्टांप ड्यूटी का भुगतान नहीं हो सका था। वर्तमान मालिकों को नए दस्तावेज के पंजीकरण के समय खड़े होने वाले भारी जुर्माने के प्रश्न का व्यावहारिक समाधान प्रदान करने के लिए यह एम्नेस्टी योजना शुरू की गई है।
MSME उद्योगपतियों को 80% तक स्टांप ड्यूटी में राहत
इस योजना के तहत पात्र मामलों में लागू स्टांप ड्यूटी में से 80% तक की राशि माफ करके केवल 20% स्टांप ड्यूटी और लागू पेनल्टी वसूल की जाएगी। हालांकि, जिन मामलों में 20% स्टांप ड्यूटी और पेनल्टी की कुल राशि मूल स्टांप ड्यूटी से कम होती है, वहां मूल स्टांप ड्यूटी के बराबर राशि वसूल कर राहत का लाभ दिया जाएगा।
योजना के लिए पात्रता मानदंड (किसे मिलेगा लाभ?)
इस स्कीम का लाभ मुख्य रूप से वैध उद्यम प्रमाणपत्र (Udyam Certificate) रखने वाली MSME इकाइयों को मिलेगा। इस योजना के तहत दिनांक 30 जून, 2025 तक हुए पात्र अलॉटमेंट लेटर, शेयर ट्रांसफर, लीज/सब-लीज और संपत्ति हस्तांतरण से संबंधित सौदों को शामिल किया जाएगा। ALSO READ: किसानों के लिए बड़ी राहत, गुजरात सरकार ने बढ़ाई कृषि उपकरण खरीद की समय सीमा, अब 15 दिन का और मौका
दस्तावेज का पंजीकरण और अपील/कोर्ट मामलों में राहत
राहत का लाभ उठाने वाले वर्तमान आवंटी को निर्धारित 20% ड्यूटी और पेनल्टी का भुगतान करके संबंधित संपत्ति का कानूनी पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराना अनिवार्य होगा। इसके अलावा, जहां सक्षम प्राधिकारी के समक्ष अपील की गई हो और 25% राशि जमा की गई हो या कोर्ट में याचिका लंबित हो, वहां याचिका वापस लेने की शर्त पर निर्धारित नियमों के अधीन योजना का लाभ मिलेगा।
01 जनवरी, 2018 से पहले और बाद के सौदों के लिए राहत
दिनांक 01/01/2018 से पहले हुए हस्तांतरणों के मामलों में अंतिम हस्तांतरण के दस्तावेज के बाजार मूल्य के आधार पर निर्धारित स्टांप ड्यूटी में 80% की राहत देकर 20% ड्यूटी और लागू पेनल्टी वसूल की जाएगी। इसके अलावा, दिनांक 01/01/2018 को या उसके बाद हुए उन सभी हस्तांतरणों में जहां स्टांप ड्यूटी देय बनती है, वहां भी 80% राहत देकर 20% ड्यूटी और लागू पेनल्टी वसूलने का प्रस्ताव है।

It’s not a stretch to say that the Konarc is the most important product from Ather yet, because the company hopes this new EV will help it unlock segments and markets hitherto untouched by it. The question then is, will the Konarc live up to the lofty expectations placed on its shoulders?
Konarc Design and Quality –
Straightforward design with high quality finish

Striking looks aren’t a trait family scooters are known for and Ather wanted to play it very safe with the Konarc to bring in buyers that typically shop for ‘decent-looking’ scooters. While it does look a bit plain, it will still not completely meld into the ocean of humdrum two-wheelers on the road. Further reinforcing its family scooter aspirations are a quartet of very classy, yet inoffensive colours.
Another aspect that the Konarc’s prospective customers will appreciate is its excellent finish and quality levels all across – a typical Ather trait.
Konarc Ride and Handling –
Excellent ride and seating comfort, planted and surefooted handler
One big reason Ather moved to the new EL platform is that its earlier platform was never built for outright comfort and practicality. In this application, the main focus was to maximise comfort for both rider and pillion. The use of a 14-in front wheel and suspension with 90mm/100mm (F/R) of travel are two key factors in providing lovely ride comfort here.

Point the Konarc towards most bumps and it will round them off without getting unsettled while isolating you from the shock to a great extent. In the scooter space, this is one of the most comfortable options available. Ofcourse, this is still a scooter and really big bumps will filter through – don’t expect motorcycle-like comfort.
| Specifications | Values |
|---|---|
| Wheelbase | 1352 mm |
| Kerb Weight | 126.5 kg |
| Chassis type | Monocoque Full – Steel Body Construction |
Something that a typical family scooter buyer values is a centre stand and the Konarc becomes the first Ather to offer it. Like other family scooters, the Konarc’s chassis is geared towards stability and ease of use. Despite the larger 14-in wheel and long 1352mm wheelbase, it felt very straightforward to ride. Its low 770mm seat height will help shorter folks get their feet down comfortably although its wide floorboard will have an impact here.

A spacious seat with a padded backrest means two full-size riders will fit comfortably on the Konarc. Another nice feature is that the front end doesn’t get flighty even with a heavy pillion onboard, despite no preload adjustability on the monoshock. The only ergonomic miss is that riders taller than 5’10 will find their knees touching the handlebar during full-lock turns.
| Specifications | Values |
|---|---|
| Wheel Size | Front – 14 inch, Rear – 12 inch |
| Front Tyre Size | 90/90-14 |
| Rear Tyre Size | 100/90-12 |
| Brake type | Front – Disc, Rear – Drum |
| Front Brake Size | 220 mm |
| Rear Brake Size | 130 mm |
| Front Suspension Type | Telescopic Fork, 90mm travel |
| Rear Suspension Type | Dual Hydraulic Coil Spring, 100mm travel |
Konarc Performance –
Has enough performance, new motor has very silent running
Not only is the Konarc a big leap ahead in terms of comfort, its riding experience is also well-suited to city commuting. A big part of that is down to the comfort but its new swingarm-mounted motor also contributes here. Unlike the Rizta and 450 which used a rather noisy and relatively more maintenance intensive belt final drive, this motor is whisper quiet. It also directly powers the rear wheel without a chain or belt, reducing the number of components in the powertrain.
| Specifications | Values |
|---|---|
| Fuel Type/ Propulsion | Electric |
| Motor Type | PMSM |
| Max Motor Power | 4.7 kW |
| Max Motor Torque | 16 Nm |
| EV Battery Capacity | 2.7 kWh |
With 4.7kW and 16Nm of torque on tap, the Konarc’s performance is best described as sufficient, but only in the top Power mode. Here, the scooter is capable of negotiating its way through big city traffic reasonably quickly. Switching to Eco / SmartEco dulls acceleration significantly and unless you’re running out of juice or you live in a small town, this level of performance will feel out of place.

Except for the bottom 2.1, all S variants come with a front disc brake, a rear drum and CBS. This setup is capable of bringing the Konarc to a halt quickly and safely with almost no hiccups. The one concern with the combined braking system was that the front could lock up when braking on sandy, gravelly loose surfaces using the rear brake lever exclusively. Only the Z variants launching next year come with Ather’s AeBS (Advanced Electronic Braking System) which uses the regen system to shorten braking distances.
Konarc Features –
S variants are decently equipped but Z gets all the feel-good ones
And that is a good segue into the way Ather has distributed features across the S and Z. The keyless ignition system, automatic seat opening, AeBS, Magic Twist regen braking, traction control, the colour TFT display and all the smart functions enabled by it are reserved only for the Z. Common to all Konarcs is the 31L underseat storage area, which can easily swallow an imported full-face helmet with room to spare.

What three S variants (except the most affordable one) get is the 7-in simple TFT dash with Bluetooth connectivity, hill hold assist, reverse, several app-based functions, a 450W onboard charger and Airwalk. Airwalk is basically the Konarc’s motor sending a tiny amount of power to the rear wheel when you’re pushing it around to help make your life easier – this is truly effective and makes the 129kg Konarc feel far lighter than it is when moving it around. While the S has a good number of features, when you bring pricing into the equation, it stings a little.

Konarc Price and Verdict –
Not a cutthroat price but this is still a polished and competitive scooter
The two S variants which are on sale right now, S 125 and S 161, are priced at Rs 1.22 lakh and Rs 1.45 lakh, respectively – near identical pricing to the Rizta S. Like the Rizta, you have to pay extra for the Ather StackPro which unlocks many of the smart electronic features.

The base S 2.1 (Rs 99,999) misses out on niceties like the disc brake and backrest and comes with rudimentary tech and a basic 4.2-in display. In that sense, the Konarc isn’t really pushing the envelope when it comes to an alluring price.
| Variant | Price (ex-showroom) |
|---|---|
| Konarc S 100 | Rs 1 lakh |
| Konarc S 125 | Rs 1.22 lakh |
| Konarc S 161 | Rs 1.45 lakh |
However, as a scooter, the Konarc is a well-thought out product that nails comfort, promises enough performance, predictable range and lower maintenance costs. Ather claims a 10,000km / 1 year service interval and lower service charges owing to fewer parts and quicker turnaround times.
It may not have made as stellar an impression as it could have with more aggressive pricing, but nonetheless the Konarc definitely has what it takes to elevate Ather to a higher echelon in the market.

अयोध्या राम मंदिर के CEO के लिए 3 नाम हुए शॉर्टलिस्ट कर लिए गए हैं। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट आज मंदिर के पहले CEO के नाम का एलान कर सकता है। सचिव पद पर भी आधिकारिक घोषणा हो सकती है। ट्रस्ट में 2 सदस्यों पद पर भी बुधवार को नियुक्ति की जा सकती है।
करीब दो माह चली चयन प्रक्रिया के बाद चयन समिति ने तीन अभ्यर्थियों का पैनल तैयार किया है। समिति ने मंगलवार को इन नामों को ट्रस्ट को सौंप दिया। अब समिति की सिफारिश के आधार पर ट्रस्ट नियुक्ति की आगे की प्रक्रिया पूरी करेगा। कहा जा रहा है कि एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजेश पांडेय का नाम सीईओ पद की दौड़ में सबसे आगे है। अब सभी की नजरें श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक पर है।
बैठक में शामिल होने के लिए ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि, सदस्य शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद, सदस्य युगपुरुष स्वामी परमानंद अयोध्या पहुंच गए हैं। ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास, अंतरिम महासचिव कृष्णमोहन, सदस्य महांत दिनेंद्रदास, पदेन सदस्य जिलाधिकारी शशांक त्रिपाठी भी अयोध्या में हैं।
राम मंदिर का CEO एक तरह से मंदिर के प्रशासनिक और मैनेजमेंट प्रमुख की भूमिका निभाएगा। ट्रस्ट नीति तय करेगा और CEO उस नीति को प्रभावी तरीके से लागू कराने की जिम्मेदारी संभालेगा।
कानपुर में पेट्रोल में पानी मिला। इसके बाद 20 हजार लीटर तेल नाली में फिंकवाया। पुलिस ने पंप सील कर दिया। गाड़ी बंद होने की शिकायत पर नोजल चेक करने पर खेल का खुलासा हुआ। जिलापूर्ति अधिकारी ने बीपीसीएल को पत्र लिखा। जांच तक बिक्री बंद की गई।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बुधवार को दावा किया कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट पर अब अमेरिका का लगभग पूरा कंट्रोल है। उन्होंने यह भी कहा कि ईरानी अर्थव्यवस्था क्रैश की ओर बढ़ रही है। हालांकि ईरान ने इसका खंडन किया है। ALSO READ: India-Russia Defence Deal : भारत को S-500 और Su-57 की पेशकश, रूस ने बढ़ाया रक्षा सहयोग का हाथ
ट्रंप ने ट्रूथ सोशल पर अपनी पोस्ट में कहा, 'मैं ईरान को बातचीत की मेज पर लाने की कोशिश नहीं कर रहा हूं, जैसा कि ABC फेक न्यूज ने रिपोर्ट किया है. मुझे जरा भी परवाह नहीं है
कि वे एक बेकार समझौते पर हस्ताक्षर करते हैं या नहीं। मुझे हमारी वर्तमान स्थिति कहीं बेहतर लगती है, जिसमें होर्मुज पर लगभग पूर्ण नियंत्रण है और उनकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह से बर्बाद हो रही है।
गौरतलब है कि ट्रंप इससे पहले भी कई बार दावा कर चुके हैं कि अमेरिका ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण स्थापित कर लिया है। हालांकि, ईरान ने इन दावों को खारिज किया है और कहा है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर नियंत्रण अभी भी उसके पास है। ALSO READ: Trump का खर्ग द्वीप पर बड़ा दावा, कहा- 'पूरी तरह तबाह'; होर्मुज जलडमरूमध्य के पास फिर आमने-सामने अमेरिका-ईरान
अमेरिका का चाबहार और केशम द्वीप पर हमला
अमेरिकी सेना ने मंगलवार को ईरान में चाबहार और केशम द्वीप समेत कई अहम ठिकानों पर मिसाइलों से हमला किया। IRGC के ठिकानों को भी निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई होर्मुज में कमर्शियल शिप और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिकों पर ईरान की ओर से किए गए हालिया हमलों के जवाब में किया गया। वहीं राष्ट्रपति ट्रंप ने धमकी दी कि अगर ईरान ने इस हमले का जवाब दिया, तो उसे और भी सख्त परिणाम भुगतने होंगे।
कच्चा तेल 96 डॉलर पार
दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने से कच्चे तेल के दाम फिर आसमान पर पहुंच गए। ब्रेंट क्रूड 96 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया तो WTI क्रूड भी 90 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर है। इंडियन बास्केट में कच्चे तेल की कीमत 90.53 डॉलर प्रति बैरल हो गई।
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कुछ बच्चे अपने माता-पिता के किए की सज़ा भुगतते हुए अपना बचपन जेल की चारदीवारी में बिताने को मजबूर हो जाते हैं। लेकिन ओडिशा की आभा रानी चौधरी ने ऐसे बच्चों को सिर्फ सहारा नहीं, बल्कि एक घर और माँ का प्यार दिया।
पिछले 23 वर्षों में उन्होंने 200+ कैदियों के बच्चों को बेहतर जिंदगी की राह दिखाई है। आज भी उनके आश्रम में 36 बच्चे प्यार और देखभाल के साथ बड़े हो रहे हैं।
आखिर कैसे आभा रानी बनीं 200 कैदियों के बच्चों की माँ?
200 कैदियों के बच्चों की माँ आभा रानी!Aabharani Choudhury | Odisha | Mother to Prisoner’s Children | Changemaker
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Share Market Crash: कच्चे तेल की कीमतों में तेजी, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी और अमेरिका-ईरान के बीच युद्ध गहराने से घरेलू स्टॉक मार्केट में कोहराम मच गया। शुरुआती कारोबार में ही सेंसेक्स 800 प्वाइंट्स से अधिक टूट गया तो निफ्टी भी टूटकर 23800 के नीचे आ गया। ब्रोडर लेवल पर भी काफी दबाव है और निफ्टी मिडकैप 100 और निफ्टी स्मॉलकैप में 1-1% की गिरावट है। निफ्टी के सभी सेक्टर्स के इंडेक्स लाल हैं। ओवरऑल बात करें तो BSE पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप ₹5.60 लाख करोड़ घट गया है यानी निवेशकों की दौलत मार्केट खुलते ही ₹5.60 लाख करोड़ कम हो गई।
अब इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सों की बात करें तो फिलहाल 09:21 AM पर सेंसेक्स (Sensex) 706.50 प्वाइंट्स यानी 0.92% की गिरावट के साथ 76,237.78 और निफ्टी 50 (Nifty 50) 235.40 प्वाइंट्स यानी 0.98% की फिसलन के साथ 23,820.40 पर है। इंट्रा-डे में सेंसेक्स 808.56 प्वाइंट्स टूटकर 76,135.72 और निफ्टी 269.00 प्वाइंट्स गिरकर 23,786.80 पर आ गया।
09:21
निवेशकों की दौलत में ₹5.60 लाख करोड़ की गिरावट
एक कारोबारी दिन पहले यानी 01 सितंबर 2026 को बीएसई पर लिस्टेड सभी शेयरों का कुल मार्केट कैप ₹4,89,41,989.64 करोड़ था। आज यानी 02 सितंबर 2026 को मार्केट खुलते ही यह ₹4,83,81,902.24 करोड़ पर आ गया। इसका मतलब हुआ कि निवेशकों की पूंजी ₹5,60,087.4 करोड़ घट गई है।
Sensex का सिर्फ एक शेयर ग्रीन
सेंसेक्स पर 30 शेयर लिस्टेड हैं जिसमें सिर्फ एक सन फार्मा ही फिलहाल ग्रीन है लेकिन इसमें भी तेजी मामूली ही है। सबसे अधिक गिरावट फिलहाल इंडिगो, इंफोसिस और एमएंडएम में है। नीचे सेंसेक्स पर लिस्टेड सभी शेयरों के लेटेस्ट भाव और आज उतार-चढ़ाव की डिटेल्स देख सकते हैं-

63 शेयर एक साल के हाई पर
बीएसई पर आज 2836 शेयरों की ट्रेडिंग हो रही है। इसमें 895 शेयर मजबूत दिख रहे हैं तो 1766 में गिरावट का रुझान है और 175 में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। इसके अलावा 63 शेयर एक साल के हाई और 65 शेयर एक साल के निचले स्तर पर आ गए। वहीं 71 शेयर अपर सर्किट पर पहुंच गए तो 97 शेयर लोअर सर्किट पर आ गए।

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें
डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Aaj Ka Mausam: देश भर में मानसून का असर लगातार बना हुआ है। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने 2 सितंबर के लिए मौसम का ताजा बुलेटिन जारी कर दिया है। मौसम विभाग के मुताबिक देश के 15 से अधिक राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मध्यम से लेकर मूसलाधार बारिश का दौर देखने को मिलेगा। कई राज्यों में आकाशीय बिजली चमकने, तेज आंधी-तूफान चलने और समुद्री इलाकों में खतरनाक तूफानी हवाएं चलने की चेतावनी जारी की गई है।
यूपी, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश में बहुत भारी बारिश का अलर्ट
उत्तर भारत और मध्य भारत के कुछ राज्यों में 2 सितंबर को मूसलाधार बारिश का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। IMD के मुताबिक पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और पूर्वी मध्य प्रदेश के अलग-अलग जगहों पर भारी से बहुत भारी बारिश होने की पूरी संभावना जताई गई है। इन राज्यों के कई जिलों में बारिश के साथ-साथ बादलों की गरज और बिजली कड़कने की घटनाएं भी देखने को मिल सकती हैं।
दिल्ली, बिहार, पंजाब और हरियाणा समेत 15 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश
देश के एक बड़े हिस्से में 2 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग के बुलेटिन के मुताबिक, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, बिहार, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, झारखंड, ओडिशा, विदर्भ, पश्चिम बंगाल, सिक्किम और पश्चिमी मध्य प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर तेज बारिश दर्ज की जा सकती है। पूर्वोत्तर भारत के अरुणाचल प्रदेश, असम और मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में भी कई जगहों पर मूसलाधार बारिश होने का अनुमान है।
आंधी-तूफान, बिजली और तेज हवाओं का अलर्ट
मौसम विभाग ने बारिश के साथ-साथ तेज आंधी और आकाशीय बिजली चमकने को लेकर भी चेतावनी जारी की है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, ओडिशा और रायलसीमा में 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज झोंकेदार हवाएं चलने और बिजली कड़कने का पूर्वानुमान है।
बिहार, झारखंड, गांगेय पश्चिम बंगाल और सिक्किम, तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, आंतरिक कर्नाटक, पूर्वी राजस्थान और जम्मू-कश्मीर-लद्दाख के इलाकों में 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवाएं चलने के साथ बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हरियाणा, दिल्ली, पंजाब, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मराठवाड़ा, विदर्भ और पूर्वोत्तर के राज्यों में भी अलग-अलग जगहों पर बिजली चमकने और आकाशीय बिजली गिरने का अलर्ट जारी किया गया है। आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तेलंगाना में मजबूत सतही हवाएं चलने की भी संभावना है।

समुद्र और तटीय इलाकों में तूफानी हवाएं, मछुआरों को चेतावनी
समुद्री क्षेत्रों में मौसम का मिजाज काफी खराब रहने वाला है। अरब सागर में सोमालिया और ओमान के तटों से सटे क्षेत्रों, पश्चिम-मध्य अरब सागर के बड़े हिस्सों, दक्षिण-पश्चिम और उत्तर व पूर्व-मध्य अरब सागर के कुछ हिस्सों में 45 से 55 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चल सकती हैं। इनकी स्पीड बढ़कर 65 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है।
इसी तरह बंगाल की खाड़ी में दक्षिण तमिलनाडु तट, मन्नार की खाड़ी के कुछ हिस्सों और दक्षिण श्रीलंका तट से सटे दक्षिण-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में भी 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलने और 65 किमी प्रति घंटे तक झोंके आने का अनुमान है। अंडमान सागर में भी 40 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तूफानी मौसम और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई गई है। इसे देखते हुए मछुआरों को इन इलाकों में न जाने की सलाह दी गई है।






