बच्चे की जिद को डील करने के पेरेंटिंग टिप्स, पहले वजह समझें, फिर बदलें व्यवहार!

बच्चों का हर बात पर तुरंत जवाब न देना या माता-पिता की बात को अनसुना करना अक्सर चिंता की वजह बन जाता है। ऐसे समय में कई पैरेंट्स बार-बार समझाने, डांटने या आवाज ऊंची करने लगते हैं। लेकिन हर बार बच्चे का बात न मानना जानबूझकर किया गया व्यवहार नहीं होता।

कई बार बच्चा खेल में इतना व्यस्त होता है कि उसे आसपास की बात सुनाई ही नहीं देती, तो कभी थकान, तनाव या भावनाओं की वजह से वह ठीक से प्रतिक्रिया नहीं दे पाता। इसलिए बच्चे को डांटने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह आपकी बात क्यों नहीं सुन रहा।

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1. बच्चे का ध्यान अपनी ओर करें

कोई बात कहने से पहले बच्चे के पास जाएं, उसका नाम लें और उसकी तरफ देखकर बात करें। दूर से बार-बार आवाज लगाने के बजाय उसके पास जाकर बोलें, ताकि वह आपकी बात अच्छे से सुन सके। बात करते समय टीवी, मोबाइल या दूसरे शोर को कम रखें। इससे बच्चे का ध्यान आपकी बात पर रहेगा और वह धीरे-धीरे ध्यान से सुनना भी सीखेगा।

 

2. बात छोटी और आसान रखें

एक साथ बहुत सारी बातें कहने के बजाय बच्चे को एक-एक काम बताएं। जैसे पहले खिलौने रखने को कहें और उसके बाद दांत साफ करने के लिए बोलें। इससे बच्चे को आपकी बात समझने में आसानी होगी बच्चे की उम्र के हिसाब से आसान शब्दों में बात करें। जरूरत हो तो उससे पूछें कि उसने क्या समझा, ताकि वह काम सही तरीके से कर सके।

 

3. बच्चे के इमोशन समझें

कई बार बच्चा गुस्से, थकान या किसी परेशानी के कारण आपकी बात नहीं सुन पाता। ऐसे समय में तुरंत डांटने के बजाय उसे थोड़ा शांत होने का समय दें। उससे प्यार से पूछें कि वह परेशान क्यों है या उसे किस बात पर गुस्सा आ रहा है। उसकी बात सुनने से बच्चा अपनी फीलिंग बताना सीखता है।

 

4. रोज का रूटीन बनाएं

बच्चों के लिए रोज का एक तय रूटीन बनाना अच्छा रहता है। जैसे रात में खिलौने रखना, नहाना, दांत साफ करना और फिर सोने जाना। इससे बच्चे को पहले से पता रहता है कि उसे क्या करना है। रूटीन बच्चे की उम्र के हिसाब से रखें और जब वह कोई काम सही समय पर करे, तो उसकी तारीफ करें। इससे वह अच्छी आदतें अपनाने के लिए तैयार होगा।

 

5. खुद भी शांत रहें

बच्चे माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। इसलिए बच्चे के बात न मानने पर चिल्लाने या गुस्सा करने के बजाय शांत रहने की कोशिश करें। अगर बच्चा तुरंत बात नहीं मानता, तो उसे थोड़ा समय दें और जरूरत हो तो प्यार से दोबारा समझाएं। इससे बच्चा धीरे-धीरे आपकी बात सुनना और सहयोग करना सीखेगा।

 

बच्चों का हर बात पर जवाब न देना या माता-पिता की बात न सुनना हमेशा उनकी जिद नहीं होती। कई बार बच्चा खेल में व्यस्त, थका हुआ या किसी बात से परेशान हो सकता है। माता-पिता का धैर्य और अच्छा व्यवहार बच्चे को धीरे-धीरे अपनी बात सुनने, समझने और सही तरीके से अपनी भावनाएं बताने में मदद कर सकता है।

फ्रिज डोर नहीं, कॉन्फिडेंस बूस्टर है! इसपर लगी एक तस्वीर बदल सकती है आपके बच्चे की सोच

बच्चों की ड्रॉइंग, स्कूल के सर्टिफिकेट, फोटो या मेडल को रेफ्रिजरेटर पर लगाना कई घरों में आम बात है। देखने में यह डेकोरेशन या बच्चे की अचीवमेंट को दिखाने का तरीका लग सकता है, लेकिन इसके पीछे माता-पिता के इमोशन भी जुड़े होते हैं। जब माता-पिता बच्चे की बनाई पेंटिंग या मिले अवार्ड को ऐसी जगह लगाते हैं, जहां सबकी नजर पड़े, तो बच्चे को महसूस हो सकता है कि उसकी मेहनत और कोशिश को महत्व दिया जा रहा है। यह जरूरी नहीं कि ऐसा किसी को दिखाने के लिए किया जा रहा हो, कई बार माता-पिता बस बच्चे के अचीवमेंट पर गर्व करते हैं और उन पलों को यादगार बनाना चाहते हैं।

साइकोलॉजी के अनुसार, बच्चों के काम को पहचान और तारीफ मिलने से उनके कॉन्फिडेंस पर अच्छा असर पड़ सकता है। माता-पिता का प्रोत्साहन बच्चों को अपनी क्षमता समझने और आगे कुछ नया करने के लिए इंस्पायर कर सकता है। जब बच्चा अपनी ड्रॉइंग या मेडल को रोज देखता है, तो उसे अपनी मेहनत पर गर्व महसूस हो सकता है और यह संदेश मिलता है कि उसकी कोशिश मायने रखती है।prixe

बच्चे की मेहनत को मिलता है सम्मान

साइकोलॉजिस्ट एलिजाबेथ गुंडरसन, कैरोल ड्वेक और उनके साथियों की रिसर्च में पाया गया कि बचपन में माता-पिता जब बच्चे की कोशिश और मेहनत की तारीफ करते हैं, तो इसका संबंध आगे चलकर सीखने और अपनी काबिलियत को बेहतर बनाने वाली सोच से हो सकता है। यानी बच्चा यह समझने लगता है कि किसी काम में अच्छा बनने के लिए लगातार कोशिश और सीखना जरूरी है। यह बात अलग है कि बच्चे की ड्रॉइंग को फ्रिज पर लगाना और उसकी कोशिश की सीधे तारीफ करना एक ही चीज नहीं है। रिसर्च से यह साबित नहीं हुआ है कि फ्रिज पर पेंटिंग लगाने से सीधे बच्चे में ग्रोथ माइंडसेट बनता है।

 

बढ़ता है बच्चे का आत्मविश्वास

बच्चों के लिए यह महसूस करना जरूरी होता है कि वे कुछ कर सकते हैं और उनके काम की अहमियत है। जब माता-पिता बच्चे की पेंटिंग, सर्टिफिकेट या मेडल को गर्व से फ्रिज पर लगाते हैं, तो बच्चे को अपनी कैपेसिटी पर भरोसा बढ़ाने वाला सिग्नल मिलता है। इसका मतलब यह नहीं कि माता-पिता बच्चे को दुनिया का सबसे अच्छा आर्टिस्ट बता रहे हैं।

 

बचपन की यादें रहेंगी ताजा

रेफ्रिजरेटर घर की ऐसी जगह है, जिस पर परिवार के सदस्यों की बार-बार नजर पड़ती है। इसलिए बच्चे की पहली ड्रॉइंग, पहला मेडल या स्कूल का सर्टिफिकेट वहां लगाना दिखावा नहीं, बल्कि वह परिवार की यादों का हिस्सा बन जाता है। कुछ साल बाद वही पेंटिंग देखकर माता-पिता को याद आ सकता है कि बच्चा उस समय कितना छोटा था या उसने पहली बार ड्रॉइंग कब बनाई थी।

 

 

हर अचीवमेंट देता है सेल्फ-कॉन्फिडेंस

जब बच्चे की मेहनत को बार-बार पहचान मिलती है, तो उसे आगे भी कुछ नया करने की इच्छा हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर बच्चे ने कोई पेंटिंग बनाई और माता-पिता ने उसे फ्रिज पर लगा दिया, तो बच्चे को यह एहसास हो सकता है कि उसकी क्रिएटिविटी को घर में जगह मिल रही है। इसी तरह किसी खेल में जीता मेडल सामने दिखाई देने पर बच्चा अपनी मेहनत को याद कर सकता है।

 

 

मायने रखता है माता-पिता का नजरिया

एक ही मेडल या पेंटिंग बच्चे के लिए अलग-अलग संदेश दे सकती है और यह काफी हद तक इस बात पर डिपेंड करता है कि माता-पिता उससे क्या कहते हैं। वे कहते हैं, तुमने इसके लिए बहुत मेहनत की है, तो बच्चे का ध्यान कोशिश और लगन पर जाता है। वहीं बार-बार कहा जाए, तुम तो जन्म से ही सबसे होशियार हो, तो बच्चे को अपनी एक तय खूबी बनाए रखने का प्रेशर हो सकता है। कैरोल ड्वेक और उनके साथियों की रिसर्च इसी तरह की तारीफ के फर्क को समझने में मदद करती है।

 

बच्चों की ड्रॉइंग, मेडल या सर्टिफिकेट को रेफ्रिजरेटर पर लगाना सिर्फ डेकोरेशन या अचीवमेंट दिखाने की बात नहीं है। हर परिवार के लिए इसका मतलब अलग हो सकता है, लेकिन कई माता-पिता के लिए यह बच्चे की मेहनत, कोशिश और खुशी को पहचानने का एक छोटा-सा तरीका होता है। जब बच्चा अपनी बनाई चीज को घर में खास जगह पर देखता है, तो उसे महसूस हो सकता है कि उसके काम और उसकी कोशिश की कद्र की जाती है। इसलिए फ्रिज पर लगी एक छोटी-सी ड्रॉइंग भी बच्चे के लिए प्यार, गर्व और प्रोत्साहन का बड़ा संदेश दे सकती है।