फ्रिज डोर नहीं, कॉन्फिडेंस बूस्टर है! इसपर लगी एक तस्वीर बदल सकती है आपके बच्चे की सोच

बच्चों की ड्रॉइंग, स्कूल के सर्टिफिकेट, फोटो या मेडल को रेफ्रिजरेटर पर लगाना कई घरों में आम बात है। देखने में यह डेकोरेशन या बच्चे की अचीवमेंट को दिखाने का तरीका लग सकता है, लेकिन इसके पीछे माता-पिता के इमोशन भी जुड़े होते हैं। जब माता-पिता बच्चे की बनाई पेंटिंग या मिले अवार्ड को ऐसी जगह लगाते हैं, जहां सबकी नजर पड़े, तो बच्चे को महसूस हो सकता है कि उसकी मेहनत और कोशिश को महत्व दिया जा रहा है। यह जरूरी नहीं कि ऐसा किसी को दिखाने के लिए किया जा रहा हो, कई बार माता-पिता बस बच्चे के अचीवमेंट पर गर्व करते हैं और उन पलों को यादगार बनाना चाहते हैं।

साइकोलॉजी के अनुसार, बच्चों के काम को पहचान और तारीफ मिलने से उनके कॉन्फिडेंस पर अच्छा असर पड़ सकता है। माता-पिता का प्रोत्साहन बच्चों को अपनी क्षमता समझने और आगे कुछ नया करने के लिए इंस्पायर कर सकता है। जब बच्चा अपनी ड्रॉइंग या मेडल को रोज देखता है, तो उसे अपनी मेहनत पर गर्व महसूस हो सकता है और यह संदेश मिलता है कि उसकी कोशिश मायने रखती है।prixe

बच्चे की मेहनत को मिलता है सम्मान

साइकोलॉजिस्ट एलिजाबेथ गुंडरसन, कैरोल ड्वेक और उनके साथियों की रिसर्च में पाया गया कि बचपन में माता-पिता जब बच्चे की कोशिश और मेहनत की तारीफ करते हैं, तो इसका संबंध आगे चलकर सीखने और अपनी काबिलियत को बेहतर बनाने वाली सोच से हो सकता है। यानी बच्चा यह समझने लगता है कि किसी काम में अच्छा बनने के लिए लगातार कोशिश और सीखना जरूरी है। यह बात अलग है कि बच्चे की ड्रॉइंग को फ्रिज पर लगाना और उसकी कोशिश की सीधे तारीफ करना एक ही चीज नहीं है। रिसर्च से यह साबित नहीं हुआ है कि फ्रिज पर पेंटिंग लगाने से सीधे बच्चे में ग्रोथ माइंडसेट बनता है।

 

बढ़ता है बच्चे का आत्मविश्वास

बच्चों के लिए यह महसूस करना जरूरी होता है कि वे कुछ कर सकते हैं और उनके काम की अहमियत है। जब माता-पिता बच्चे की पेंटिंग, सर्टिफिकेट या मेडल को गर्व से फ्रिज पर लगाते हैं, तो बच्चे को अपनी कैपेसिटी पर भरोसा बढ़ाने वाला सिग्नल मिलता है। इसका मतलब यह नहीं कि माता-पिता बच्चे को दुनिया का सबसे अच्छा आर्टिस्ट बता रहे हैं।

 

बचपन की यादें रहेंगी ताजा

रेफ्रिजरेटर घर की ऐसी जगह है, जिस पर परिवार के सदस्यों की बार-बार नजर पड़ती है। इसलिए बच्चे की पहली ड्रॉइंग, पहला मेडल या स्कूल का सर्टिफिकेट वहां लगाना दिखावा नहीं, बल्कि वह परिवार की यादों का हिस्सा बन जाता है। कुछ साल बाद वही पेंटिंग देखकर माता-पिता को याद आ सकता है कि बच्चा उस समय कितना छोटा था या उसने पहली बार ड्रॉइंग कब बनाई थी।

 

 

हर अचीवमेंट देता है सेल्फ-कॉन्फिडेंस

जब बच्चे की मेहनत को बार-बार पहचान मिलती है, तो उसे आगे भी कुछ नया करने की इच्छा हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर बच्चे ने कोई पेंटिंग बनाई और माता-पिता ने उसे फ्रिज पर लगा दिया, तो बच्चे को यह एहसास हो सकता है कि उसकी क्रिएटिविटी को घर में जगह मिल रही है। इसी तरह किसी खेल में जीता मेडल सामने दिखाई देने पर बच्चा अपनी मेहनत को याद कर सकता है।

 

 

मायने रखता है माता-पिता का नजरिया

एक ही मेडल या पेंटिंग बच्चे के लिए अलग-अलग संदेश दे सकती है और यह काफी हद तक इस बात पर डिपेंड करता है कि माता-पिता उससे क्या कहते हैं। वे कहते हैं, तुमने इसके लिए बहुत मेहनत की है, तो बच्चे का ध्यान कोशिश और लगन पर जाता है। वहीं बार-बार कहा जाए, तुम तो जन्म से ही सबसे होशियार हो, तो बच्चे को अपनी एक तय खूबी बनाए रखने का प्रेशर हो सकता है। कैरोल ड्वेक और उनके साथियों की रिसर्च इसी तरह की तारीफ के फर्क को समझने में मदद करती है।

 

बच्चों की ड्रॉइंग, मेडल या सर्टिफिकेट को रेफ्रिजरेटर पर लगाना सिर्फ डेकोरेशन या अचीवमेंट दिखाने की बात नहीं है। हर परिवार के लिए इसका मतलब अलग हो सकता है, लेकिन कई माता-पिता के लिए यह बच्चे की मेहनत, कोशिश और खुशी को पहचानने का एक छोटा-सा तरीका होता है। जब बच्चा अपनी बनाई चीज को घर में खास जगह पर देखता है, तो उसे महसूस हो सकता है कि उसके काम और उसकी कोशिश की कद्र की जाती है। इसलिए फ्रिज पर लगी एक छोटी-सी ड्रॉइंग भी बच्चे के लिए प्यार, गर्व और प्रोत्साहन का बड़ा संदेश दे सकती है।

क्या पर्स छोड़कर निकलना है नई स्मार्टनेस? जानिए आपकी यह आदत क्या कहती है

आज के दौर में मोबाइल फोन ने पर्स की जगह काफी हद तक ले ली है। अब कई लोग घर से निकलते समय सिर्फ मोबाइल और चाबी साथ रखते हैं, क्योंकि पेमेंट से लेकर आइडेंटिटी से जुड़े कई काम फोन से ही हो जाते हैं। लेकिन क्या यह आदत सिर्फ सुविधा का हिस्सा है या फिर आपकी सोच और लाइफस्टाइल के बारे में भी कुछ संकेत देती है?

 मिनिमलिस्ट सोच की झलक

Things you shouldn't carry in your wallet any more - AVIATOR by EVERMADE WALLETS

अगर आप बिना पर्स के बाहर निकलते हैं, तो हो सकता है कि आपको सिर्फ जरूरी सामान साथ रखना पसंद हो। साइकोलॉजी के अनुसार ऐसे लोग अक्सर सिम्पलिसिटी और ऑर्गनाइज़्ड लाइफ को महत्व देते हैं। वे मानते हैं कि कम सामान के साथ चलने से जिंदगी आसान और कम उलझन वाली रहती है।

नई टेक्निक पर ज्यादा भरोसा

Mobile wallets lose pace as UPI surges, growth remains muted over four years - Storyboard18

UPI, मोबाइल बैंकिंग, डिजिटल वॉलेट और डिजिटल आईडी ने लोगों की आदतें बदल दी हैं। जो लोग नई टेक्निक को जल्दी अपनाते हैं, वे मोबाइल से पेमेंट और दूसरे डिजिटल काम करने में सहज महसूस करते हैं। इसलिए उन्हें हर समय पर्स साथ रखने की जरूरत नहीं लगती।

सुविधा और समय को देते हैं प्रायोरिटी

Office man Images - Free Download on Magnific (formerly Freepik)

कुछ लोग हर काम सबसे आसान और तेज तरीके से करना चाहते हैं। जब एक ही मोबाइल से बैंकिंग, टिकट बुकिंग और पेमेंट हो सकता है, तो अलग से पर्स रखना उन्हें एक्स्ट्रा बोझ लगता है। ऐसे लोग अपनी डेली लाइफ को सिंपल और कम्फर्टेबल रखना पसंद करते हैं।

हर सिचुएशन में खुद को ढालने की क्षमता

पर्स में भूलकर भी न रखें ये 4 चीजें, होने लगेगी धन की बर्बादी - Vastu tips do not keep these four things in your wallet bring proverty tvisu

साइकोलॉजी के अनुसार कई लोग बिना पर्स के इसलिए भी निकलते हैं क्योंकि वे छोटी-छोटी परेशानियों को लेकर ज्यादा स्ट्रेस नहीं लेते। जरूरत पड़ने पर वे हालात के अनुसार जल्दी फैसला लेने और खुद को ढालने में सक्षम होते हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि वे लापरवाह हैं।

सिर्फ इस आदत से पर्सनैलिटी डिसाइड नहीं होती

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एक्सपर्ट का कहना है कि पर्स रखना या न रखना किसी व्यक्ति डिसाइड नहीं होता है। यह आदत उसकी जरूरतों, काम और लाइफस्टाइल पर भी डिपेंड करती है। साथ ही, पूरी तरह मोबाइल पर डिपेंड रहने के बजाय थोड़ा कैश और आइडेंटिटी कार्ड साथ रखना हमेशा समझदारी माना जाता है।

बिना पर्स के घर से निकलना आज की डिजिटल लाइफस्टाइल का हिस्सा बन चुका है, लेकिन इससे किसी का नेचर डिसाइड नहीं किया जा सकता। लेकिन पूरी तरह मोबाइल पर डिपेंड रहने के बजाय थोड़ा कैश और वैलिड आइडेंटिटी कार्ड साथ रखना हमेशा बेहतर माना जाता है।