स्टडी टाइम और होमवर्क बनेगा फन टाइम! इन 7 आसान तरीको से बच्चे खुद करने लगेंगे पढ़ाई

होमवर्क के समय बच्चों को बैठाना कई माता-पिता के लिए रोज चैलेंजिंग हो जाता है। कभी बच्चा पढ़ने का मन नहीं करता, तो कभी छोटी-सी बात पर चिड़चिड़ा हो जाता है। ऐसे में डांटने या प्रेशर बनाने के बजाय पढ़ाई का माहौल थोड़ा आसान और ऑर्गेनाइज बनाना ज्यादा मददगार हो सकता है। कुछ छोटी-छोटी आदतों से होमवर्क करने को स्ट्रेस फ्री बनाया जा सकता है और बच्चे में धीरे-धीरे खुद पढ़ने की अच्छी आदत भी डेवलप हो सकती है।

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1. एक रूटीन बनाएं

बच्चे के होमवर्क के लिए रोज एक तय समय रखें। कोशिश करें कि वह हर दिन लगभग उसी समय और एक ही जगह पर पढ़ाई करे। इससे बच्चे को पहले से पता रहेगा कि कब उसे खेलना या टीवी देखना छोड़कर पढ़ाई शुरू करनी है। शुरुआत में उसे रूटीन की आदत डालने में थोड़ा समय लग सकता है, लेकिन कुछ दिनों बाद वह खुद उस समय पढ़ाई के लिए तैयार होने लगेगा।

 

 

2. पढ़ने की जगह साफ रखें

पढ़ाई के लिए ऐसी जगह चुनें जहां ज्यादा शोर न हो और बच्चा आसानी से ध्यान लगा सके। डेस्क पर सिर्फ जरूरी किताबें, कॉपियां और स्टेशनरी रखें। खिलौने, मोबाइल फोन, टैबलेट या ऐसी दूसरी चीजें दूर रखें जो उसका ध्यान बार-बार भटका सकती हैं। क्लीन और ऑर्गेनाइज जगह होने से बच्चे को पढ़ाई पर फोकस करने में आसानी होती है।

 

 

3. बड़े काम को छोटे हिस्सों में बांटें

अगर बच्चे को एक साथ बहुत सारा होमवर्क या कोई बड़ा प्रोजेक्ट मिल जाए, तो उसे देखकर वह घबरा सकता है। ऐसे में पूरे काम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांट दें। उदाहरण के लिए, पहले गणित के सवाल, फिर हिंदी की कॉपी और उसके बाद प्रोजेक्ट का काम। एक-एक करके काम पूरा करने से बच्चा परेशान कम होगा और उसे अपना काम आसान लगेगा।

 

 

4. बीच में शार्ट ब्रेक दें

बच्चे से लगातार लंबे समय तक पढ़ने की उम्मीद न करें। कुछ देर पढ़ने के बाद छोटा ब्रेक देना उसके लिए फायदेमंद हो सकता है। उदाहरण के लिए, करीब 20 मिनट पढ़ाई के बाद 5 मिनट का ब्रेक दिया जा सकता है। इसमें बच्चा थोड़ा चल सकता है, पानी पी सकता है या आंखों को आराम दे सकता है। बस ब्रेक इतना लंबा न हो जाए कि बच्चा फिर से पढ़ाई न करना चाहे।

 

 

5. उसे खुद करने का मौका दें

बच्चे को हर सवाल का जवाब तुरंत बताने के बजाय पहले खुद सोचने और कोशिश करने का मौका दें। वह किसी सवाल पर अटक जाए, तो डायरेक्ट आंसर देने के बजाय हिंट देकर उसकी मदद करें। इससे बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ेगा और उसे खुद प्रॉब्लम सॉल्व करने की आदत होगी। धीरे-धीरे वह मुश्किल सवालों को समझने की कोशिश करेगा।

 

 

6. खुद भी शांत रहें

होमवर्क करते समय बच्चा परेशान हो जाए, गलती करे या किसी सवाल को बार-बार गलत करे, तो गुस्सा करने से सिचुएशन और बिगड़ सकती है। ऐसे समय पर अपनी आवाज शांत रखें और उसे समझाएं कि गलती होना सामान्य बात है। उसे यह महसूस कराएं कि वह कोशिश कर रहा है, इसलिए घबराने की जरूरत नहीं है। माता-पिता का शांत आवाज बच्चे का स्ट्रेस कम करती है।

 

 

7. बच्चे की मेहनत की करें तारीफ

सिर्फ अच्छे नंबर आने पर ही बच्चे की तारीफ न करें, बल्कि उसकी मेहनत और कोशिश को भी महत्व दें। उसने खुद कोई मुश्किल सवाल हल किया है या बिना याद दिलाए अपना होमवर्क पूरा किया है, तो उसकी तारीफ करें। इससे बच्चे का कॉन्फिडेंस बढ़ता है और वह आगे भी मन लगाकर पढ़ाई करने के लिए मोटिवेट होता है।

बच्चों के लिए पढ़ाई को बोझ बनाने के बजाय उसे उनकी रोज की जिंदगी का नेचुरल पार्ट बनाना जरूरी है। माता-पिता का सपोर्ट और सही माहौल बच्चे के मन से पढ़ाई का डर कम कर सकता है। इस तरह धीरे-धीरे बच्चा जिम्मेदारी समझने लगता है और पढ़ाई को लेकर उसका भरोसा भी बढ़ता है।

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बच्चों का हर बात पर तुरंत जवाब न देना या माता-पिता की बात को अनसुना करना अक्सर चिंता की वजह बन जाता है। ऐसे समय में कई पैरेंट्स बार-बार समझाने, डांटने या आवाज ऊंची करने लगते हैं। लेकिन हर बार बच्चे का बात न मानना जानबूझकर किया गया व्यवहार नहीं होता।

कई बार बच्चा खेल में इतना व्यस्त होता है कि उसे आसपास की बात सुनाई ही नहीं देती, तो कभी थकान, तनाव या भावनाओं की वजह से वह ठीक से प्रतिक्रिया नहीं दे पाता। इसलिए बच्चे को डांटने से पहले यह समझना जरूरी है कि वह आपकी बात क्यों नहीं सुन रहा।

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1. बच्चे का ध्यान अपनी ओर करें

कोई बात कहने से पहले बच्चे के पास जाएं, उसका नाम लें और उसकी तरफ देखकर बात करें। दूर से बार-बार आवाज लगाने के बजाय उसके पास जाकर बोलें, ताकि वह आपकी बात अच्छे से सुन सके। बात करते समय टीवी, मोबाइल या दूसरे शोर को कम रखें। इससे बच्चे का ध्यान आपकी बात पर रहेगा और वह धीरे-धीरे ध्यान से सुनना भी सीखेगा।

 

2. बात छोटी और आसान रखें

एक साथ बहुत सारी बातें कहने के बजाय बच्चे को एक-एक काम बताएं। जैसे पहले खिलौने रखने को कहें और उसके बाद दांत साफ करने के लिए बोलें। इससे बच्चे को आपकी बात समझने में आसानी होगी बच्चे की उम्र के हिसाब से आसान शब्दों में बात करें। जरूरत हो तो उससे पूछें कि उसने क्या समझा, ताकि वह काम सही तरीके से कर सके।

 

3. बच्चे के इमोशन समझें

कई बार बच्चा गुस्से, थकान या किसी परेशानी के कारण आपकी बात नहीं सुन पाता। ऐसे समय में तुरंत डांटने के बजाय उसे थोड़ा शांत होने का समय दें। उससे प्यार से पूछें कि वह परेशान क्यों है या उसे किस बात पर गुस्सा आ रहा है। उसकी बात सुनने से बच्चा अपनी फीलिंग बताना सीखता है।

 

4. रोज का रूटीन बनाएं

बच्चों के लिए रोज का एक तय रूटीन बनाना अच्छा रहता है। जैसे रात में खिलौने रखना, नहाना, दांत साफ करना और फिर सोने जाना। इससे बच्चे को पहले से पता रहता है कि उसे क्या करना है। रूटीन बच्चे की उम्र के हिसाब से रखें और जब वह कोई काम सही समय पर करे, तो उसकी तारीफ करें। इससे वह अच्छी आदतें अपनाने के लिए तैयार होगा।

 

5. खुद भी शांत रहें

बच्चे माता-पिता को देखकर बहुत कुछ सीखते हैं। इसलिए बच्चे के बात न मानने पर चिल्लाने या गुस्सा करने के बजाय शांत रहने की कोशिश करें। अगर बच्चा तुरंत बात नहीं मानता, तो उसे थोड़ा समय दें और जरूरत हो तो प्यार से दोबारा समझाएं। इससे बच्चा धीरे-धीरे आपकी बात सुनना और सहयोग करना सीखेगा।

 

बच्चों का हर बात पर जवाब न देना या माता-पिता की बात न सुनना हमेशा उनकी जिद नहीं होती। कई बार बच्चा खेल में व्यस्त, थका हुआ या किसी बात से परेशान हो सकता है। माता-पिता का धैर्य और अच्छा व्यवहार बच्चे को धीरे-धीरे अपनी बात सुनने, समझने और सही तरीके से अपनी भावनाएं बताने में मदद कर सकता है।

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आजकल बच्चों को अपनी बात खुलकर कहना तो सिखाया जाता है, लेकिन सामने वाले की बात ध्यान से सुनना भी उतना ही जरूरी है। कई बार बच्चा बहुत अच्छा बोलता है, लेकिन किसी की बात बीच में काट देता है, जवाब देने में जल्दबाजी करता है या थोड़ी देर में ही उसका ध्यान भटक जाता है। ऐसे में सिर्फ उसकी बोलने की एबिलिटी पर ध्यान देने के बजाय लिसनिंग स्किल यानी ध्यान से सुनने की आदत विकसित करना भी जरूरी है। यह छोटी-सी आदत बच्चे की पढ़ाई, कंसंट्रेशन, बातचीत और दूसरों के साथ बिहेवियर में काफी मदद कर सकती है।

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1. ध्यान लगाने की आदत

जब बच्चा किसी की बात ध्यान से सुनता है, तो उसे कुछ देर तक अपना ध्यान एक जगह बनाए रखना पड़ता है। धीरे-धीरे इससे उसकी कंसंट्रेशन बेहतर हो सकती है। यही आदत पढ़ाई में भी काम आती है। टीचर की बात ध्यान से सुनने पर बच्चा सवाल और जवाब आसानी से समझ सकता है और काम करते समय गलतियां भी कम हो सकती हैं।

 

 

2. बेहतर कम्युनिकेशन स्किन

सुनने की अच्छी आदत बच्चे को यह समझने में मदद करती है कि बातचीत में कब बोलना है और कब सामने वाले को मौका देना है। वह हर बात के बीच में बोलने या अपनी बात थोपने के बजाय दूसरे की बात पूरी होने का इंतजार करना सीख सकता है। इससे दोस्तों, भाई-बहन और परिवार के साथ उसकी बातचीत ज्यादा अच्छी हो सकती है।

 

 

3. इमोशन समझने में मदद

किसी को ध्यान से सुनने का मतलब सिर्फ उसके शब्द सुनना नहीं होता। बच्चा धीरे-धीरे आवाज के उतार-चढ़ाव और बात करने के तरीके से सामने वाले की फीलिंग को भी समझना सीख सकता है। इससे उसमें एम्पैथी यानी दूसरों की फीलिंग को समझने की एबिलिटी डेवलप हो सकती है।

 

 

4. पढ़ाई में मिलेगा फायदा

क्लास में बच्चों को लगातार नई बातें और अलग-अलग इंस्ट्रक्शन दिए जाते हैं। यदि बच्चा ध्यान से सुनने की आदत रखता है, तो उसे पढ़ाई समझने और दिए गए काम को सही तरीके से करने में आसानी हो सकती है। सवाल पूरा सुनना, टीचर के इंस्ट्रक्शन समझना उसकी सीखने की प्रोसेस को बेहतर बनाता है।

 

 

5. धैर्य और खुद पर कंट्रोल

दूसरों की पूरी बात सुनने के लिए बच्चे को तुरंत जवाब देने और बीच में बोलने से खुद को रोकना पड़ता है। इससे धीरे-धीरे उसमें धैर्य और सेल्फ-कंट्रोल की आदत डेवलप हो सकती है। वह अपनी बारी का इंतजार करना, दूसरे की बात पूरी सुनना और फिर जवाब देना सीखता है।

 

 

बच्चे को अच्छा कम्युनिकेटर बनाने के लिए सिर्फ बोलना सिखाना ही काफी नहीं है, उसे ध्यान से सुनना भी सिखाना जरूरी है। बच्चों में सुनने की आदत बढ़ाने के लिए माता-पिता खुद भी बच्चे की बात ध्यान से सुनें और उसे बिना टोके अपनी बात पूरी करने का मौका दें। धीरे-धीरे रोज की बातचीत और छोटी-छोटी एक्टिविटीज के जरिए बच्चे में एक अच्छे लिसनर बनने की आदत डेवलप की जा सकती है।