अभिषेक ने 30 हजार रुपये का कर्ज लिया और खाने-पीने का कारोबार शुरू करने का फैसला किया। उन्होंने यूट्यूब से अलग-अलग तरह की सैंडविच बनाने की रेसिपी सीखीं और एक छोटी सी सैंडविच की रेहड़ी लगा दी। शुरुआत भले ही छोटी थी, लेकिन धीरे-धीरे लोगों को उनका सैंडविच पसंद आने लगा

भोपाल। 'भगवान श्री बलराम ने कृषि को प्रकृति के साथ जोड़कर स्वावलंबन का नया अध्याय शुरू किया था। भारतीय संस्कृति में खेती को सर्वोत्तम मना गया है। खेती से प्रकृति समृद्ध होती है और मनुष्य को अनाज मिलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चार श्रेणियों- गरीब, अन्नदाता, युवा और नारी कल्याण का संकल्प लिया है। हमारे लिए सीमा पर जवान और खेतों में किसान दोनों बराबर सम्मान रखते हैं। अन्नदाता अपने अथक परिश्रम से देश को समृद्ध बनाता है। राज्य सरकार खेतों से लेकर खातों तक किसानों के कल्याण पर विशेष ध्यान दे रही है। किसानों को पैक्स समितियों के माध्यम से लाभ दिया जा रहा है।' यह बात मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ग्वालियर में आयोजित बलराम जयंती महोत्सव को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कार्यक्रम में उपस्थित किसानों पर पुष्प वर्षा की। उन्होंने ऑनलाइन किसान क्रेडिट कार्ड पोर्टल, कृषक कवच योजना, नवीन पंजीकृत 200 पैक्स समितियों के कार्यालयों और ग्वालियर में अपेक्स बैंक संभागीय शाखा का शुभारंभ किया।
ढाई साल में हजारों गुना बढ़ गया बिजली उत्पादन-कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि किसान कवच योजना के माध्यम से हमारी सरकार किसानों के साथ खड़ी है। प्रदेश में किसानों को सिंचाई के लिए 24 घंटे बिजली मिल रही है। अब दिन में भी बिजली मिलेगी। मध्यप्रदेश बिजली उत्पादन में अब देश का अग्रणी राज्य बना है। आजादी के बाद 55 साल में मध्यप्रदेश सिर्फ 5 हजार मेगावॉट बिटली उत्पादन करता था। हमारी पूर्व सरकारों के कार्यकाल के बाद राज्य की बिजली उत्पादन क्षमता 25 हजार मेगावॉट थी। हमारी सरकार के ढाई साल में ही बिजली उत्पादन क्षमता 6 हजार मेगावॉट बढ़कर अब 31 हजार मेगावॉट हो चुकी है।
प्रदेश में सिंचाई का रकबा अभी 60 लाख हेक्टेयर से अधिक है, जिसे अगले ढाई वर्ष में 100 लाख हेक्टेयर तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने किसानों को कर्ज चुकाने की सुविधा दी है। अब उन्हें 6-6 माह में खाता पटलने की जरूरत नहीं है। नई व्यवस्था के मुताबिक, अब किसान वर्ष में किसी भी समय कर्ज की राशि भर सकते हैं। किसान अनाज के साथ उद्यानिकी फसलों से लाभ कमाएं। इसके लिए एक बगिया मां के नाम योजना की शुरुआत की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार पशुपालन को भी प्रोत्साहित कर रही है। दूध उत्पादन को 20 प्रतिशत तक बढ़ाने के लिए नई गौपालन योजना की शुरुआत की है। इस योजना में पशुपालकों को 40 लाख के लोन पर 10 लाख का अनुदान दिया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मन की नीयत अच्छी हो तो परामात्मा की कृपा बनी रहती है। किसानों को मत्स्य पालन, कुकुट पालन और बकरी पालन जैसी योजनाओं से भी जोड़ा गया है।
जन-कल्याण के लिए निरंतर काम कर रही राज्य सरकार-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि युवा कल्याण के लिए सरकार निरंतर कार्य कर रही है। बोर्ड परीक्षाओं में 75 प्रतिशत से अधिक अंक प्राप्त करने वाले मेधावी विद्यार्थियों को लैपटॉप बांटे गए हैं। हमारे बच्चे पढ़-लिखकर डॉक्टर, इंजीनियर बनें। लेकिन खेती से रिश्ता बनाए रखें। कृषि हमारी समृद्ध संस्कृति की गौरवशाली विरासत है। शासकीय स्कूलों के बच्चों को किताबें, ड्रेस, साइकिलें बांटी जा रही हैं। प्रदेशभर में भव्य सांदीपनि विद्यालय बन रहे हैं। युवाओं को उद्योग और रोजगार से जोड़ा जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम समृद्ध मध्यप्रदेश में रोजगार देने वाले युवा तैयार करने पर काम कर रहे हैं। मध्य प्रदेश पर इंद्र देव की विशेष कृपा बनी हुई है।
मध्यप्रदेश की धरती पर सबसे पहले केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना की शुरुआत की गई है। मध्यप्रदेश बदल रहा है, किसान अपनी जमीन नहीं बेचें। मध्यप्रदेश खेती में अब पंजाब से आगे निकलने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में चहुंओर एक्सप्रेसवे, हाईवे और ग्रीन फील्ड रोड बनाए जा रहे हैं। प्रदेश में एविएशन और रेल कनेक्टिविटी भी बढ़ाई जा रही है। गरीब-जरूरतमंदों को नि:शुल्क एयर एंबुलेंस की सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। हमारी सरकार के लिए व्यक्ति की जान बचाना जरूरी है। राहवीर योजना के अंतर्गत सड़क दुर्घटना में घायलों को अस्पताल पहुंचाने पर 25 हजार रुपए की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है। हमने प्रदेश के सहकारिता विभाग से जुड़े 16 बैंकों को डिफॉल्टर होने से बचाया है। उन्हें पर्याप्त राशि दी गई है।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का इसी माह जन्मदिन आने वाला है। उनके सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने वाले हैं। उनका चरित्र बेदाग है। प्रधानमंत्री मोदी ने अनेकों चुनौतियों के बीच आशा का दीपक हम सबके लिए जलाए रखा है। भारत दुनिया में अपनी अलग साख बना रहा है। भारत की आर्थिक विकास दर 7.8 प्रतिशत की गति से आगे बढ़ रही है। यह अमेरिका और जापान जैसे देशों के कही अधिक है। प्रदेश में 1 लाख 14 हजार करोड़ रुपए की लागत से रेलवे के अनेक विकास कार्य जारी हैं। हमारी सरकार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) पास कराया है। उसी दिशा में आगे बढ़ते हुए कार्य किए जाएंगे।

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, अमेरिका ने मंगलवार रात ईरान के सिरिक, खुज़ेस्तान, क़ेश्म द्वीप और बंदर अब्बास में मिसाइल और ड्रोन हमले किए। इन हमलों में 12 लोगों की मौत और 68 लोग घायल हुए हैं। ईरान का दावा है कि सिरिक में एक शादी समारोह के दौरान मिसाइल गिरी, जिसमें पांच लोगों की मौत हो गई। मृतकों में एक चार साल का बच्चा भी शामिल बताया गया है।
खुज़ेस्तान में भी हमले का दावा
ईरानी अधिकारियों के अनुसार, खुज़ेस्तान प्रांत में हुए एक अन्य हमले में 7 लोगों की मौत और 8 लोग घायल हुए हैं। हालांकि, अमेरिका ने इन आरोपों के बीच कहा है कि उसकी सेना ने केवल ईरानी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया।
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ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई का किया दावा
अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने दावा किया है कि उसने जॉर्डन और बहरीन में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। इससे दोनों देशों के बीच सैन्य तनाव और बढ़ने की आशंका है।
होर्मुज जलडमरूमध्य के पास भी हुआ था अमेरिकी हमला
यह ताजा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब अमेरिका ने 30 अगस्त को होर्मुज जलडमरूमध्य के पास लारक द्वीप पर मौजूद दो ईरानी रॉकेट लॉन्चरों पर हवाई हमला किया था। लगातार हो रही सैन्य कार्रवाई से क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी वैश्विक चिंता बढ़ सकती है।

भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव को जन-जन का पर्व बनाने के उद्देश्य से संस्कृति विभाग के श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा 4 सितंबर को ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का राज्य स्तरीय व्यापक आयोजन किया जा रहा है। ‘घर-घर गोकुल, घर-घर गोपाल’ की संकल्पना के साथ प्रदेश के सभी 55 जिलों में 111 स्थानों पर विविध सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किये जायेंगे।
संस्कृति, पर्यटन और धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व राज्य मंत्री धर्मेंद्र भाव सिंह लोधी ने बताया कि राज्य के 7500 से अधिक श्रीकृष्ण मंदिरों में विशेष साज-सज्जा की जाएगी, जबकि भव्य जन्मोत्सव में 1500 से अधिक कलाकार अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं, भक्ति और सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत करेंगे। इस प्रदेशव्यापी पर्व का विशेष आयोजन मुख्यमंत्री निवास पर भी होगा। यहाँ श्रीकृष्ण की विविध कलाओं और परंपराओं से जुड़े कार्यक्रम प्रमुख आकर्षण होंगे। जन्मोत्सव में मटकी फोड़ कार्यक्रम भी आयोजित किया जाएगा, जो श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और ब्रज की उत्सव परंपरा की झलक प्रस्तुत करेगा।
मुख्यमंत्री निवास पर होने वाले आयोजन में 101 से अधिक बच्चे राधा-कृष्ण की वेशभूषा में शामिल होंगे। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा कार्यक्रम में उपस्थित सभी बच्चों को माखन मिश्री, लड्डू गोपाल की मूर्ति, श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं पर केन्द्रित पुस्तक भेंट करेंगे। कार्यक्रम उपरांत जानापाव में मुख्यमंत्री डॉ. यादव द्वारा परशुराम श्रीकृष्ण लोक का भूमि-पूजन किया जायेगा।
राज्य मंत्री लोधी ने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण आस्था और भक्ति के साथ भारतीय जीवन-दर्शन, संस्कृति और मानवीय मूल्यों के महान प्रतीक हैं। मध्यप्रदेश की धरती का भगवान श्रीकृष्ण के जीवन और परंपराओं से गहरा ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक संबंध रहा है। श्रीकृष्ण के जीवन से हमें मित्रता, करुणा, धैर्य, कर्तव्य और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिलती है। इसी गौरवशाली विरासत को जन-जन तक पहुँचाने और नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने के उद्देश्य से ‘श्रीकृष्ण पर्व’ का व्यापक आयोजन किया जा रहा है।
राज्य मंत्री लोधी ने बताया कि श्रीकृष्ण पर्व के लिए चयनित 111 स्थलों में अनेक ऐसे पावन और ऐतिहासिक स्थल सम्मिलित हैं, जिनकी परंपराएँ सीधे तौर पर द्वापर युग और भगवान श्रीकृष्ण के जीवन-प्रसंगों से जुड़ी हुई हैं। इनमें सांदीपनी आश्रम-उज्जैन, नारायणा धाम-उज्जैन, अमझेरा-धार, जानापाव-महू एवं जामगढ़-रायसेन जैसे स्थल प्रमुख हैं। इसके साथ ही आयोजन स्थलों में अनेक ऐसे प्राचीन मंदिर और धार्मिक केंद्र भी शामिल हैं, जिनका धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व होने के साथ-साथ गौरवशाली ऐतिहासिक अतीत भी है।
श्रीकृष्ण पाथेय न्यास के मुख्य कार्यपालक अधिकारी श्रीराम तिवारी ने बताया कि मध्यप्रदेश की धरती भगवान श्रीकृष्ण से जुड़े अनेक ऐतिहासिक, पौराणिक और सांस्कृतिक संदर्भों को अपने भीतर समेटे हुए है। भगवान श्रीकृष्ण के जीवन के विभिन्न पहलुओं एवं लीलाओं के लोकव्यापीकरण, सनातन संस्कृति के विस्तार के साथ ही उनके द्वारा बताए जीवन मूल्यों यथा धैर्य, मित्रता, करुणा, दया इत्यादि जनमानस तक प्रेषित करने के उद्देश्य से माननीय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मंशानुरूप श्रीकृष्ण पर्व के माध्यम से सांस्कृतिक परिदृश्य में दर्शाने का प्रयास किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इन आयोजनों के माध्यम से न केवल इन स्थलों की ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक विशिष्टता को व्यापक पहचान मिल रही है, बल्कि नई पीढ़ी भी मध्यप्रदेश की समृद्ध विरासत और गौरवपूर्ण इतिहास से परिचित हो रही है। यह पहल आस्था के उत्सव के साथ-साथ विरासत के संरक्षण, सांस्कृतिक पुनर्स्मरण और प्रदेश की ऐतिहासिक पहचान को नई पीढ़ी तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन रही है। इस वर्ष श्रीकृष्ण पर्व के आयोजन स्थलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। प्रदेश के विभिन्न अंचलों में होने वाली स्थानीय गतिविधियों का विस्तार करने के लिए सांस्कृतिक महत्व के स्थलों को चिन्हित कर वहाँ आयोजन किए जा रहे हैं।
कृष्णमय होगा मध्यप्रदेश, 1500 से अधिक कलाकार देंगे प्रस्तुतियाँ-‘श्रीकृष्ण पर्व’ के अंतर्गत प्रदेश के विभिन्न जिलों में भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, लीलाओं, गुरु-शिष्य परंपरा, मित्रता, भक्ति और लोक संस्कृति पर केंद्रित विविध सांस्कृतिक आयोजन होंगे। नारायणा धाम, सांदीपनि आश्रम, महिदपुर, पन्ना, अमझेरा और जानापाव सहित प्रदेश के अनेक प्रमुख धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों पर नृत्य-नाटिका, रासलीला, भजन, लोकगायन और अन्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाएंगी। इन आयोजनों में प्रदेश के 1500 से अधिक स्थानीय कलाकार और विभिन्न सांस्कृतिक दल सहभागिता करेंगे।
नारायणा धाम में पांच दिवसीय आयोजन-उज्जैन के नारायणा धाम मंदिर प्रांगण में 2 से 6 सितंबर तक प्रतिदिन शाम 7 बजे से पांच दिवसीय सांस्कृतिक आयोजन होगा। भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता की स्मृति से जुड़े इस स्थल पर पहले दिन गुरु सांदीपनि आश्रम से जुड़े प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसमें श्रीकृष्ण और सुदामा के आश्रम के लिए लकड़ियां चुनने तथा सुदामा द्वारा गुरु माता के दिए चने छिपाकर खाने के प्रसंग को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया जाएगा। इसके साथ भरतनाट्यम, भजन गायन और ‘रासलीला : श्रीकृष्ण की दान लीला’ का मंचन होगा। दूसरे दिन कथक में ‘कृष्णम’ नाटिका, भजन गायन तथा ‘श्रीकृष्ण की माखन चोरी’ रासलीला होगी। तीसरे दिन ओडिसी शैली में कृष्ण आधारित नृत्य-नाटिका, भजन गायन और ‘श्रीकृष्ण जन्म एवं बाल लीला’ प्रस्तुत की जाएगी। चौथे दिन श्रीकृष्ण-सुदामा मित्रता प्रसंग पर नृत्य-नाट्य और भजन गायन होगा। पांचवें दिन गीता उपदेश पर आधारित नृत्य-नाटिका तथा भजन गायन होगा। सभी पांचों दिनों रासलीला का मंचन भी किया जाएगा।
सांदीपनि आश्रम में गुरु-शिष्य परंपरा की झलक-उज्जैन के सांदीपनि आश्रम में 2 से 4 सितंबर तक शाम 4 बजे से तीन दिवसीय आयोजन होगा। इसमें ‘कर्षति इति कृष्ण’, भजन गायन और बघेली लोकगायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महर्षि सांदीपनि से शिक्षा प्राप्त करने तथा 64 कलाओं और 14 विद्याओं के ज्ञान अर्जित करने की पौराणिक परंपरा पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।
महिदपुर में राधा-कृष्ण प्रेम और लोकसंगीत-महिदपुर के रामलीला चौक में 2 से 4 सितंबर तक शाम 7 बजे से कार्यक्रम होंगे। पहले दिन राधा-कृष्ण प्रेम प्रसंग पर नृत्य प्रस्तुति और भक्ति गायन होगा। दूसरे दिन बुंदेली गायन तथा भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। तीसरे दिन भजन गायन के साथ श्रीकृष्ण पाथेय से जुड़ी महिदपुर की परंपरा पर केंद्रित श्रीकृष्ण जन्म आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी।
पन्ना और अमझेरा में साकार होंगे कृष्ण के विविध प्रसंग-पन्ना के श्री बलदेवजी मंदिर परिसर में 2 सितंबर को बलदेव-श्रीकृष्ण प्रसंग पर नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। श्री जुगल किशोर मंदिर में 3 और 4 सितंबर को दो दिवसीय आयोजन में श्रीकृष्ण नृत्य-नाटिका, भक्ति गायन तथा प्रणामी परंपरा पर केंद्रित भरतनाट्यम प्रस्तुति होगी। धार जिले के अमझेरा में 3 और 4 सितंबर को श्रीकृष्ण लीला तथा रुक्मिणी वरण एवं विवाह प्रसंग पर आधारित नृत्य-नाटिकाएं प्रस्तुत की जाएंगी। साथ ही भजन गायन भी होगा। अमझेरा को श्रीकृष्ण द्वारा रुक्मिणी वरण से जुड़े प्राचीन स्थल के रूप में आयोजन की विषयवस्तु में विशेष स्थान दिया गया है।
जानापाव में परशुराम-श्रीकृष्ण प्रसंग-महू के जानापाव में 4 सितंबर को शाम 4 बजे भगवान परशुराम द्वारा भगवान श्रीकृष्ण को सुदर्शन चक्र प्रदान किए जाने के प्रसंग पर केंद्रित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की जाएगी। इसके बाद भजन गायन होगा। आयोजन स्थल पर भगवान परशुराम और श्रीकृष्ण से जुड़े प्रसंगों पर विशेष प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी।
प्रदेश के अनेक जिलों में कृष्ण भक्ति का रंग-श्रीकृष्ण पर्व के अंतर्गत पाली (उमरिया), शहडोल, मंडला, दमोह, रीवा और खातेगांव सहित अनेक स्थानों पर एक दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे। इनमें मथुरा प्रवेश, कृष्ण-सुदामा प्रसंग, गोवर्धन धारण, सुदामा मिलन और कालियानाग मानमर्दन जैसे प्रसंगों पर आधारित प्रस्तुतियां शामिल हैं। लोकगायन और भजन के साथ विभिन्न शास्त्रीय नृत्य शैलियों के माध्यम से श्रीकृष्ण की लीलाओं को मंच पर साकार किया जाएगा। उज्जैन के गोपाल मंदिर में 4 सितंबर को गीत गोविंद केंद्रित नृत्य-नाटिका और भजन गायन होगा। तराना स्थित श्रीकृष्ण मंदिर में भी लोक एवं भक्ति गायन की प्रस्तुतियां होंगी। आगर-मालवा, रायसेन, गुना, ग्वालियर, छतरपुर, शिवपुरी, झाबुआ, नीमच, मंदसौर, मुरैना, राजगढ़ और इंदौर सहित अनेक जिलों में भी 4 सितंबर को शाम 7 बजे से कृष्ण केंद्रित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होंगे। इनमें नृत्य-नाटिका, भजन और लोकगायन के माध्यम से स्थानीय सांस्कृतिक परंपराओं को श्रीकृष्ण भक्ति से जोड़ा जाएगा।
1500 से अधिक स्थानीय कलाकार होंगे सहभागी-‘श्रीकृष्ण पर्व’ की सबसे बड़ी विशेषताओं में प्रदेश के विभिन्न जिलों के स्थानीय कलाकारों की व्यापक भागीदारी है। 1500 से अधिक कलाकार धार्मिक एवं सांस्कृतिक वातावरण में अपनी प्रस्तुतियां देंगे। खरगौन, बड़वानी, खंडवा, राजगढ़, बैतूल, सीहोर, भोपाल, मंदसौर, रतलाम, उज्जैन, नीमच, रायसेन, सागर, सतना, रीवा, सिंगरौली, सीधी, कटनी, छिंदवाड़ा, झाबुआ, धार, देवास, नरसिंहपुर, उमरिया, बालाघाट, शहडोल, अनूपपुर, मंडला, डिंडोरी, बुरहानपुर, निवाड़ी, टीकमगढ़ सहित प्रदेश के अनेक जिलों के कलाकार मंदिरों और प्रमुख धार्मिक स्थलों पर प्रस्तुतियां देंगे। इस सांस्कृतिक श्रृंखला में लोकगायन, भजन, नृत्य-नाटिका और नाट्य प्रस्तुतियों के माध्यम से श्रीकृष्ण के जीवन एवं दर्शन के विविध आयाम सामने आएंगे। प्रदेश के 82 मंदिरों में प्रस्तावित सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के साथ यह आयोजन स्थानीय कलाकारों को मंच प्रदान करने और प्रदेश की विविध लोक एवं सांस्कृतिक परंपराओं को कृष्ण भक्ति से जोड़ने का व्यापक प्रयास बनकर सामने आएगा।
PM Kisan Yojana: देशभर के करोड़ों किसान प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की 24वीं किस्त का इंतजार कर रहे हैं। इसके तहत हर पात्र किसान के खाते में ₹2,000 भेजे जाते हैं। पिछली यानी 23वीं किस्त जून 2026 में जारी हुई थी।
अब सवाल है कि अगली किस्त सितंबर में आएगी या अक्टूबर में। कृषि विभाग से जुड़े अधिकारियों के बयानों के आधार पर अक्टूबर में किस्त आने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि, सरकार ने अभी इसकी आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है।
अक्टूबर में आने की संभावना क्यों?
पीएम किसान योजना के तहत साल में ₹6,000 की मदद मिलती है। यह पैसा ₹2,000 की तीन किस्तों में सीधे बैंक खाते में भेजा जाता है। आमतौर पर दो किस्तों के बीच करीब चार महीने का अंतर रहता है।
23वीं किस्त जून में आई थी। इसलिए अक्टूबर में 24वीं किस्त आने की उम्मीद है। कृषि विभाग के उप कृषि निदेशक नीलेश चौरसिया ने भी संकेत दिया है कि अगली किस्त अक्टूबर में आ सकती है। हालांकि, पक्की तारीख के लिए सरकार के ऐलान का इंतजार करना होगा।
इन किसानों का रुक सकता है पैसा
24वीं किस्त के लिए कुछ जरूरी काम पूरे होने चाहिए। अगर इनमें कोई कमी है, तो पैसा अटक सकता है।
- ई-केवाईसी पूरी नहीं है तो किस्त रुक सकती है।
- लैंड रिकॉर्ड का वेरिफिकेशन भी जरूरी है।
- बैंक खाते से जुड़ी जानकारी सही होनी चाहिए।
- आधार और दूसरी जरूरी डिटेल्स सही रहे।
घर बैठे कैसे चेक करें स्टेटस?
- पीएम किसान की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
- वहां Farmers Corner में जाकर Know Your Status विकल्प चुनें।
- इसके बाद अपना रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और कैप्चा डालें।
- मोबाइल पर आए OTP को दर्ज करने के बाद किस्त से जुड़ा स्टेटस देख सकते हैं।
- अगर कोई जानकारी अधूरी या पेंडिंग है, तो उसे समय रहते पूरा कर लें।
फिलहाल 24वीं किस्त की तारीख को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए किसानों को सोशल मीडिया के दावों पर भरोसा करने के बजाय सरकारी अपडेट का इंतजार करना चाहिए।
Warren Buffett: वॉरेन बफे ने 1977 में बताए थे निवेश के 5 नियम, आज भी हर निवेशक के लिए हैं काम के

UP outsourcing employees outsourcing job security: नौकरी सिर्फ हर महीने मिलने वाली तनख्वाह का नाम नहीं होती। नौकरी के साथ कर्मचारी को अपने भविष्य की चिंता होती है, परिवार की जिम्मेदारी होती है और यह भरोसा भी चाहिए होता है कि उसकी मेहनत का रिकॉर्ड सुरक्षित है, उसका वेतन समय पर मिलेगा और जरूरत पड़ने पर उसके अधिकारों की सुनवाई करने वाली कोई व्यवस्था मौजूद है।
आउटसोर्सिंग व्यवस्था में काम करने वाले कर्मचारियों के सामने लंबे समय से यही सबसे बड़ी चिंता रही है। वेतन, EPF, ESIC और सेवा संबंधी दूसरी सुविधाओं को लेकर भी असमंजस की स्थिति रहती थी। अब योगी आदित्यनाथ सरकार ने इस पूरी व्यवस्था को एक संस्थागत और डिजिटल ढांचे से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को उत्तर प्रदेश आउटसोर्स सेवा निगम यानी UPCOS का शुभारंभ किया। इसके साथ ही आउटसोर्स कर्मचारियों की भर्ती, तैनाती, उपस्थिति, वेतन, सामाजिक सुरक्षा और शिकायत निस्तारण जैसी व्यवस्थाओं को एक व्यवस्थित ढांचे में लाने की शुरुआत हुई है।
एक कर्मचारी, एक डिजिटल व्यवस्था
UPCOS के जरिए सरकारी विभाग, आउटसोर्सिंग एजेंसियां और कर्मचारी एक आधुनिक, पारदर्शी और तकनीक आधारित व्यवस्था से जुड़ेंगे। मैनपावर की जरूरत का आकलन, रिक्तियों का पूर्वानुमान और उसके अनुसार मानव संसाधन की योजना भी बनाई जाएगी।
भर्ती प्रक्रिया ऑनलाइन, पारदर्शी, योग्यता और मेरिट आधारित होगी तथा राज्य सरकार की आरक्षण नीति का पालन किया जाएगा। SC, ST, OBC, दिव्यांगजन, महिलाओं, EWS, स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के आश्रितों और पूर्व सैनिकों के लिए नियमों के अनुसार आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। कर्मचारी अपने सर्विस डिटेल, बैंक अकाउंट, उपस्थिति, भुगतान और अन्य जानकारी एक ही जगह देख सकेगा। वह अपनी शिकायत भी दर्ज कर सकेगा, उसकी स्थिति ट्रैक कर सकेगा और समयबद्ध समाधान की व्यवस्था होगी।
हर महीने 5 तारीख तक वेतन
नई व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण पहलू समय पर पारिश्रमिक से जुड़ा है। आउटसोर्स कर्मचारियों को हर महीने 1 से 5 तारीख के बीच पारिश्रमिक उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है। भुगतान सीधे कर्मचारी के बैंक खाते में पहुंचाने का प्रावधान है। EPF और ESIC से जुड़े कर्मचारियों के खाते खुलवाना और नियमित रूप से अंशदान जमा कराना भी व्यवस्था का हिस्सा होगा। एजेंसियों को इसका प्रमाण भी निगम को निर्धारित समय में देना होगा। यानी कर्मचारी के वेतन और सामाजिक सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदारियों को अब अधिक स्पष्ट और जवाबदेह ढांचे में लाया जा रहा है।
मनमाने ढंग से नहीं हटाया जा सकेगा कर्मचारी
आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सबसे बड़ी चिंताओं में से एक नौकरी की असुरक्षा भी रही है। नई व्यवस्था में कर्मचारी को मनमाने ढंग से हटाने पर रोक लगाई गई है। आउटसोर्सिंग एजेंसी किसी कर्मचारी को अपने स्तर से नहीं हटा सकेगी। अनुशासनहीनता या दंडनीय अपराध जैसी परिस्थितियों में भी संबंधित विभाग या संस्था और निगम की सहमति के बाद ही कार्रवाई की जा सकेगी।
प्रशिक्षण और मेरिट आधारित चयन
नई व्यवस्था केवल नौकरी देने तक सीमित नहीं है। कर्मचारियों की कार्यक्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए समय-समय पर प्रशिक्षण देने की भी व्यवस्था की गई है। सेवायोजन विभाग के पोर्टल के माध्यम से उम्मीदवारों का चयन किया जाएगा। योग्यता, दक्षता और तय मानकों के आधार पर पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाई जाएगी। श्रेणी-3 और श्रेणी-4 के पदों के लिए साक्षात्कार नहीं होगा। विधवा, तलाकशुदा और परित्यक्ता महिलाओं को चयन प्रक्रिया में वरीयता देने का भी प्रावधान है।
मातृत्व अवकाश और वैधानिक सेवा लाभ
नई व्यवस्था में आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए केवल वेतन और नौकरी की बात नहीं की गई है। मातृत्व अवकाश सहित अन्य वैधानिक सेवा लाभों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था की गई है। EPF, ESIC और बैंकिंग से जुड़ी अनुमन्य सुविधाओं को भी कर्मचारियों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी तय की गई है।

40 लाख तक का दुर्घटना बीमा
UPCOS के साथ सामाजिक सुरक्षा का दायरा भी बढ़ाया गया है। भारतीय स्टेट बैंक के साथ हुए एमओयू के माध्यम से आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए व्यापक सामाजिक सुरक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। निर्धारित वेतन श्रेणियों के अनुसार कर्मचारी को लगभग 40 लाख तक का व्यक्तिगत दुर्घटना बीमा मिलेगा। स्थायी आंशिक दिव्यांगता की स्थिति में भी निर्धारित बीमा सुरक्षा उपलब्ध होगी। इसके अलावा जलने की स्थिति में प्लास्टिक सर्जरी के लिए 10 लाख तक, आकस्मिक दवाओं के लिए 5 लाख तक और आपात स्थिति में एयर एंबुलेंस के लिए 10 लाख रुपए तक की सुविधा शामिल है।
कर्मचारी के बाद परिवार की भी चिंता
इस व्यवस्था की सबसे अलग बात यह है कि सामाजिक सुरक्षा का दायरा कर्मचारी तक ही सीमित नहीं रखा गया है। किसी बड़ी अनहोनी की स्थिति में उसके परिवार के लिए भी आर्थिक सहायता की व्यवस्था की गई है। कर्मचारी के पुत्र की शिक्षा के लिए ₹8 लाख तक और पुत्री की शिक्षा के लिए ₹10 लाख तक सहायता का प्रावधान है। दो पुत्रियों के विवाह के लिए ₹8 से ₹10 लाख तक की सहायता और कर्मचारी के अंतिम संस्कार के लिए ₹50 हजार तक की व्यवस्था की गई है।
कर्मचारी और उसके परिवार के लिए जीरो बैलेंस बैंक खाते की सुविधा भी उपलब्ध होगी। वेतन खाते के माध्यम से परिवार के अधिकतम चार सदस्यों को विशेष योजनाओं का लाभ देने की व्यवस्था भी की गई है।
बिचौलियों की जगह जवाबदेह व्यवस्था
UPCOS का बड़ा उद्देश्य आउटसोर्सिंग व्यवस्था में कर्मचारी, एजेंसी और विभाग के बीच जिम्मेदारियों को स्पष्ट करना भी है। एजेंसियों का चयन और इंपैनलमेंट तय प्रक्रिया के तहत किया जाएगा। विभाग, निगम और एजेंसी के बीच त्रिपक्षीय व्यवस्था के माध्यम से जवाबदेही तय होगी। भर्ती से लेकर पोस्टिंग, उपस्थिति, वेतन, ग्रेच्युटी, बीमा और दूसरी सेवा सुविधाओं का डिजिटल प्रबंधन और निगरानी की जाएगी। इसका सीधा अर्थ है कि कर्मचारी को अपनी सेवा से जुड़ी जानकारी के लिए अलग-अलग दफ्तरों और लोगों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
3.5 लाख कर्मचारियों को सीधा फायदा
योगी सरकार के इस फैसले के बाद प्रदेश के विभिन्न विभागों में कार्यरत करीब 3.50 लाख आउटसोर्स कर्मचारियों को सीधा फायदा होगा। अब इन कर्मचारियों को समय पर वेतन के साथ ही सुरक्षा की गारंटी और भविष्य की सिक्योरिटी भी मिलेगी।
Apple का सितंबर इवेंट, जिसका नाम “Surprise and Shine” है, 9 सितंबर 2026 को होने वाला है। यह इवेंट भारत में इंडियन स्टैंडर्ड टाइम (IST) के अनुसार रात 10:30 बजे शुरू होगा। इस दिन तीन नए फोन देखने को मिल सकते हैं: iPhone 18, iPhone 18 Pro और iPhone Ultra (Apple का पहला फोल्ड होने वाला फोन)। हाल ही में लीक हुई जानकारी से iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max के प्री-ऑर्डर की तारीख का पता चला है। यहां इनके बारे में, साथ ही इनके स्पेसिफिकेशन और कैमरा के बारे में पूरी जानकारी दी गई है।
Apple iPhone 18 Pro के प्री-ऑर्डर की डेट
Macwelt की एक रिपोर्ट के अनुसार, Apple प्री-ऑर्डर में एक दिन की देरी करेगा और शनिवार, 12 सितंबर 2026 से ऑर्डर लेना शुरू करेगा। ऐसा इसलिए होगा, क्योंकि 11 सितंबर का दिन अमेरिका में याद और शोक का दिन होता है। Apple शुरू होने का समय भी बदल सकता है। आम तौर पर शाम 5:30 बजे (IST) प्री-ऑर्डर शुरू होते हैं, लेकिन इस बार इनके 12 सितंबर को आधी रात (PT के अनुसार) और भारत में दोपहर लगभग 12:30 बजे शुरू होने की उम्मीद है।
Apple प्री-ऑर्डर शुरू करने का समय भी बदल सकता है। आमतौर पर प्री-ऑर्डर शाम 5:30 बजे (IST) शुरू होते हैं, लेकिन इस बार 12 सितंबर को PT के हिसाब से आधी रात से प्री-ऑर्डर शुरू होने की उम्मीद है। भारत में यह समय करीब दोपहर 12:30 बजे (IST) हो सकता है।
Apple iPhone 18 Pro के स्पेसिफिकेशन्स (अनुमानित)
Apple iPhone 18 Pro में 120Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.3-इंच का OLED डिस्प्ले हो सकता है। इसमें 2nm प्रोसेस पर बना Apple A20 Pro चिपसेट इस्तेमाल किया जा सकता है। लीक से पता चलता है कि यह चिपसेट परफॉर्मेंस में 15% तेज होगा और लगभग 30% बेहतर एनर्जी एफिशिएंसी देगा। इस हैंडसेट में MagSafe वायरलेस चार्जिंग सपोर्ट के साथ 5100mAh की बैटरी भी मिल सकती है।
कैमरा की बात करें तो, Apple iPhone 18 Pro में ट्रिपल रियर कैमरा सेटअप हो सकता है, जिसमें 48MP का प्राइमरी शूटर, 48MP का अल्ट्रा-वाइड-एंगल सेंसर और 48MP का टेलीफोटो सेंसर शामिल होगा। इसके फ्रंट में सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए 18MP का कैमरा हो सकता है।
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A camo-clad test mule of JSW Motors‘ upcoming SUV based on the Jetour T2 was recently spied on our roads. The T2-based model will be JSW Motors’ debut offering, and it will be offered with a plug-in hybrid powertrain. It will be assembled at JSW Motors’ Chhatrapati Sambhajinagar (formerly Aurangabad) plant in Maharashtra.
JSW Motors’ Jetour T2-based SUV: Spy shots explained

Going by the spy shots, the design resembles that of the T2 sold overseas. Even the design for the tail-lights, roof rails and wheels look similar. A design patent filed in India earlier this year suggests the JSW SUV could retain most of the T2’s design elements, while replacing the Jetour branding with the carmaker’s own.

The SUV’s interior was not seen, and specifics around the feature list are currently unknown. The global-spec Jetour T2, for reference, gets a massive 15.6-inch touchscreen, a 540-degree camera, Level 2 ADAS, a panoramic sunroof, a Sony surround-sound system, ambient lighting, a wireless charging pad, a powered tailgate and more.

JSW Motors’ Jetour T2-based SUV: Powertrain details
The JSW SUV is expected to use the Jetour T2 i-DM’s plug-in hybrid powertrain, which features a 1.5-litre direct-injection turbo-petrol engine, and a 26.7kWh battery pack which powers two electric motors. One of the motors is placed on the front axle and can drive the wheels. The other motor, meanwhile, is integrated into the gearbox to provide assistance during engine starting and torque fill during gear shifts.

The Jetour T2 plug-in hybrid’s combined output stands at 381hp and 610Nm and transmission duties are handled by a 3-speed dedicated hybrid transmission (DHT). The global-spec T2 i-DM has an NEDC-rated electric-only range of 139km, while the combined range is over 1,000km (brand claimed figure). As of now, the range figures for the JSW Motors SUV are not known.
JSW Motors’ Jetour T2-based SUV: Estimated price and rivals
We expect JSW Motors’ Jetour T2-based SUV to be priced between Rs 38 lakh and Rs 40 lakh, ex-showroom. At this price, it will find itself in the company of the Skoda Kodiaq and Volkswagen Tayron. However, among ICE SUVs in this price range, the T2-based SUV is expected to offer significantly more power and torque than its rivals.
As for the launch, our sources had earlier indicated a September timeline, but JSW Motors has not yet made any official announcement. Recent reports, meanwhile, suggest that the company will launch its first passenger vehicle in January 2027.
क्या आप सीधे शेयरों में पैसा लगाने से डरते हैं? अगर हां तो आपका डरना सही है। कई लोग शेयर बाजार को फटाफट मुनाफा कमाने का जरिया समझते हैं। ऐसे लोग दोस्त-रिश्तेदार को देख शेयर बाजार में निवेश करना शुरू करते हैं। फिर, नुकसान होने पर हमेशा के लिए बाजार से मुंह मोड़ लेते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि शेयर बाजार फटाफट कमाई का जरिया नहीं है। शेयरों में निवेश से पहले बुनियादी बातों की समझ जरूरी है। इससे पैसा डूबने का रिस्क घट जाता है। आइए ऐसी 5 बुनियादी बातें जानते हैं, जिन्हें शेयरों में निवेश करने से पहले समझना जरूरी है।
1. रिस्क लेने की अपनी क्षमता को समझें
शेयर बाजार की दिशा के बारे में पक्के तौर पर कुछ कहना मुश्किल है। बाजार की दिशा पर देश और विदेश से आने वाली खबरों का असर पड़ता है। निगेटिव खबरों पर बाजार गिरता है। पॉजिटिव खबरों पर बाजार चढ़ता है। लेकिन, इतिहास बताता है कि लंबी अवधि यानी 8-10 साल में शेयरों का रिटर्न किसी दूसरे एसेट क्लास से ज्यादा रहता है। फिर भी, पैसे लगाने से पहले आपको रिस्क लेने की अपनी क्षमता को जानने की जरूरत है। आप जितने पैसे पर रिस्क ले सकते हैं, उतने ही पैसे का निवेश शेयर बाजार में करें।
2. उधार के पैसे से नहीं करें निवेश
कई लोग किसी कंपनी के शेयर या आईपीओ से मोटी कमाई के लिए उधार लेकर निवेश करते हैं। इसमें काफी रिस्क है। अगर आपका दांव गलत साबित होता है तो आपको बड़ा नुकसान हो सकता है। बड़े इनवेस्टर्स को भी पोर्टफोलियो के हर शेयर पर मुनाफा नहीं होता। कुछ शेयरों में नुकसान होना स्वाभाविक है। अगर उस शेयर में उधार के पैसे से आपने निवेश किया है तो आपकी मुश्किल बढ़ सकती है।
3. निवेश से पहले कंपनी को जानें
किसी दोस्त या रिश्तेदार के बताने पर किसी निवेश करना कई बार खतरनाक साबित होता है। ऐसे शेयर में नुकसान होने पर आप दोस्त या रिश्तेदार को दोष देना शुरू कर देते हैं। सच यह है कि आपको निवेश से पहले कंपनी के बारे में बुनियादी बातें जानना जरूरी है। कंपनी का मैनेजमेंट अच्छा होना चाहिए। प्रॉफिट का ट्रैक रिकॉर्ड स्ट्रॉन्ग होना चाहिए। कंपनी में गवर्नेंस के नियमों का पालन होना जरूरी है। साथ ही कंपनी पर ज्यादा कर्ज नहीं होना चाहिए।
4. इनवेस्टमेंट में धैर्य जरूरी है
अगर आपने सोच-समझकर किसी कंपनी के शेयरों में निवेश किया है तो फिर आपको धैर्य रखना चाहिए। कई बार शेयर में गिरावट आने पर निवेशक डर जाते हैं। वे ज्यादा लॉस होने के डर से अपने शेयर बेचना शुरू कर देते हैं। इससे उन्हें बड़ा नुकसान होता है। सच यह है कि उतार-चढ़ाव बाजार का स्वभाव है। अगर किसी शेयर में गिरावट आती है तो वह कुछ समय के लिए होगी। स्थितियां बदलते ही शेयरों में तेजी फिर से शुरू होगी। हर कुछ साल बाद बाजार में बड़ी गिरावट आती है। फिर बाजार में तेजी देखने को मिलती है।
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5. लंबी अवधि के लिए करें निवेश
कई निवेशक शेयरों में निवेश के बाद थोड़ा मुनाफा होते ही शेयर बेच देते हैं। इससे वे बड़ी कमाई का मौका चूक जाते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि शेयरों में पैसा तब बनता है, जब लंबी अवधि के लिए निवेश करते हैं। ऐसे कई शेयर हैं, जिन्होंने 8 साल, 10 साल और 15 साल में निवेशकों के पैसे को कई गुना कर दिया है। लंबे समय तक बाजार में टिके रहने वाले निवेशक वेल्थ क्रिएट कर पाते हैं। थोड़ा मुनाफा होने पर शेयर बेचने वाले निवेशक वेल्थ क्रिएट नहीं कर पाते हैं।

Saryu river water level drops: अयोध्या समेत आसपास के जिलों में सरयू और राप्ती नदी का जलस्तर घटने से बाढ़ का खतरा टल गया है, लेकिन कछार के इलाकों में कीचड़, बीमारी और पशुचारे का संकट गहराया हुआ है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, अयोध्या में सरयू का जलस्तर घटकर 92.44 से 92.47 मीटर दर्ज किया गया। इससे पहले जलस्तर 92.540 मीटर तक पहुंच गया था। सरयू का यह स्तर खतरे के निशान से नीचे है, जबकि खतरे का निशान 92.730 मीटर है। जलस्तर इसके नीचे आने से प्रशासन और स्थानीय लोगों ने राहत की सांस ली है। दूसरी ओर, मेंहदावल क्षेत्र में राप्ती नदी का जलस्तर बीते 24 घंटों में 13 सेंटीमीटर नीचे आया है। ALSO READ: अयोध्या में सरयू खतरे के निशान के ऊपर, प्रभावितों को सरकार से मिली मदद
प्रभावित क्षेत्रों का हाल व जनजीवन पर असर
- गांवों से उतरा पानी : अयोध्या के रुदौली, संत कबीर नगर के धनघटा, अंबेडकरनगर, गोंडा और बस्ती के माझा क्षेत्रों से पानी उतरने लगा है।
- फसलें और भूसा बर्बाद : धनघटा तहसील क्षेत्र के 18 गांवों में पानी घटने के बाद जमीनी समस्याएं सामने आ रही हैं। नमी की वजह से घरों में रखा गेहूं और पशुओं का भूसा नष्ट हो गया है। कई लोगों के छप्पर गिर गए हैं।
- मच्छरों का प्रकोप : निचले इलाकों में कीचड़ और जलजमाव के कारण मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। ग्रामीणों- राम दरस, सजन लाल, राम भवन, दीनदयाल, बांकेलाल आदि का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा किए गए एंटी-लार्वा छिड़काव का खास असर नहीं दिख रहा है।
प्रशासनिक तैयारी और राहत कार्य
जलभराव उतरने के बाद संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य विभाग की टीमें प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य जांच के साथ ही दवाओं का छिड़काव भी कर रही हैं।
- राहत किट व पशु चारा : प्रभावित परिवारों को प्रशासन की ओर से राहत किट और मवेशियों के लिए सूखा भूसा वितरित किया जा रहा है।
- घाटों पर सतर्कता : अयोध्या में श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए स्नान घाटों पर बैरिकेडिंग की गई है। जल पुलिस और SDRF की टीमें लगातार मुस्तैद हैं।
- तटबंधों की निगरानी : राप्ती नदी के तटबंधों पर सिंचाई विभाग के सहायक अभियंता मनीष राय और विभागीय अधिकारी जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं तथा बाढ़ निरोधक कार्य करा रहे हैं।







