Uber ड्राइवर ने गलती से भेजे गए ₹37,000 पैसेंजर को लौटाए, इनाम लेने से भी किया मना

कोलकाता की एक पत्रकार ने बताया कि कैसे एक उबर ड्राइवर ने उन्हें 37,000 रुपये कुछ ही मिनटों में लौटा दिए, जब उन्होंने गलती से Google Pay के जरिए उसे पैसे भेज दिए थे। उन्होंने कहा कि इस घटना ने ऑनलाइन धोखाधड़ी और स्कैम को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच लोगों में उनका भरोसा फिर से जगा दिया है।

संचारी घोष ने लिंक्डइन पोस्ट में इस घटना का जिक्र करते हुए बताया कि 1 सितंबर को Google Pay से पेमेंट करते समय उन्होंने गलती से आनंद दास नाम के गलत व्यक्ति को 37,000 रुपये भेज दिए थे।

मनीकंट्रोल से बात करते हुए घोष ने कहा कि वह एक ऐसे कॉन्टैक्ट को पैसे भेजना चाहती थीं, जिसका पहला नाम और सरनेम उनके फोन में सेव किसी दूसरे व्यक्ति जैसा ही था। उन्हें अपनी गलती का एहसास कई घंटों बाद हुआ, जब जिस व्यक्ति को पैसे मिलने थे, उसने पेंडिंग पेमेंट के बारे में उनसे संपर्क किया।

उन्होंने पैसे पाने वाले शख्स को कैसे ढूंढा?

गलती का पता चलने के बाद, घोष ने HDFC बैंक और कोलकाता पुलिस के साइबर सेल से संपर्क किया। अपनी ट्रांजैक्शन हिस्ट्री देखने और यह शक होने पर कि पैसे पाने वाला व्यक्ति शायद उनकी पिछली किसी राइड से जुड़ा हो सकता है, उन्होंने उबर से भी संपर्क किया।

लेकिन, जब आधिकारिक तरीकों से मामले पर कार्रवाई हो रही थी, तब उन्होंने खुद भी छानबीन करने का फैसला किया।

घोष ने पब्लिकेशन को बताया कि उन्होंने अपने पिछले ट्रांजैक्शन चेक किए और पाया कि उन्होंने 24 अगस्त को आनंद दास नाम के ड्राइवर को उबर का 180 रुपये का किराया दिया था।

इसके बाद उन्होंने अपनी पिछली राइड की जानकारी निकाली और सीधे उस ड्राइवर से संपर्क करने में कामयाब रहीं।

15 मिनट में पैसे वापस मिल गए

घोष ने बताया कि उन्होंने दास को पूरी बात बताई। दास ने तुरंत ट्रांजैक्शन की जांच की और पूरे 37,000 रुपये वापस कर दिए।

उन्होंने ‘मनीकंट्रोल’ को बताया, “पूरी बात सुनने के बाद, उन्होंने तुरंत जांच की और पूरी रकम वापस कर दी।” पत्रकार ने आगे बताया कि बाद में उन्होंने दास से मिलकर उन्हें तारीफ के तौर पर कुछ छोटा-सा तोहफा देने की पेशकश की, लेकिन उन्होंने विनम्रता से मना कर दिया। इसके बजाय, दास ने उनसे कहा: “आपकी तारीफ और भरोसा ही मेरे लिए सबसे बड़ा तोहफा है। 37,000 रुपये से मैं कब तक गुजारा कर पाता? लेकिन यह भरोसा मुझे बहुत आगे ले जाएगा।”

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इजराइल बोला- अमेरिका तैयार हुआ तो गाजा खाली करा देंगे:विदेश मंत्री ने कहा- हमास हथियार नहीं छोड़ रहा, लोगों को हटाकर ही समस्या सुलझेगी

इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने कहा कि अगर अमेरिका मंजूरी देता है तो हम गाजा से फिलिस्तीनियों को बाहर निकाल देंगे। काट्ज ने कहा कि हमास हथियार छोड़ने को तैयार नहीं है। ऐसे में गाजा की समस्या का समाधान लोगों को वहां से हटाए बिना संभव नहीं है। फिलिस्तीनियों को गाजा से बाहर निकालने की योजना तैयार है। लोगों को समुद्र, हवाई मार्ग या किसी भी दूसरे तरीके से बाहर भेजने की तैयारी है। उन्होंने कहा- अब इजराइल अमेरिका के फैसले का इंतजार कर रहा है कि इन लोगों को कहां भेजा जाएगा। इजिप्ट के विरोध के बाद प्रस्ताव पर पीछे हटे ट्रम्प ट्रम्प को इस प्रस्ताव पर कड़े विरोध का सामना करना पड़ा। इसमें मिस्र भी शामिल था, जो इजराइल के अलावा गाजा से सीमा साझा करने वाला इकलौता देश है। फिलिस्तीनियों ने भी इस प्रस्ताव की निंदा की। उनके लिए अपनी जमीन से जबरन हटाने की कोई भी कोशिश 1948 में इजराइल के बनने के दौरान हुए बड़े पैमाने पर विस्थापन की याद दिलाती है, जिसे नकबा यानी तबाही कहा जाता है। अक्टूबर में गाजा युद्धविराम का ऐलान करते समय ट्रम्प ने इस इलाके के लिए 20 बिंदुओं की योजना बताई थी। इसमें जबरन विस्थापन नहीं करने की बात शामिल थी। काट्ज बोले- योजना रद्द नहीं हुई काट्ज ने कहा कि योजना रद्द नहीं हुई है। ट्रम्प ने इस विचार को सिर्फ फ्रीज किया है। वे फिलिस्तीनियों को रखने वाले देशों की तलाश कर रहे हैं। मुझे लगता है कि सभी की भलाई के लिए कोई दूसरा समाधान नहीं है। लेकिन इसे लागू करने के लिए हमें अमेरिका की जरूरत है। हमें उसकी मंजूरी कब मिलेगी? जब यह साफ हो जाएगा कि युद्धविराम के तहत हमास अपनी जिम्मेदारियां पूरी नहीं कर रहा है।” काट्ज का दावा- गाजा के 80% लोग जाना चाहते हैं काट्ज ने अपने दावे का सोर्स बताए बिना कहा कि गाजा के 80% लोग वहां से जाना चाहते हैं। हमास उन्हें रोक रहा है। कब्जे वाले इलाके में आम लोगों को जबरन हटाना जेनेवा कन्वेंशन के तहत युद्ध अपराध माना जाता है। इंटरनेशनल कोर्ट ने प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और काट्ज के के खिलाफ युद्ध अपराधों को लेकर गिरफ्तारी वारंट जारी किए हैं। हमास के हमले और गाजा में मौतों का आंकड़ा हमास के हमले के बाद इजराइली हमलों के कारण गाजा की बड़ी आबादी पहले ही अपने ही इलाके में विस्थापित हो चुकी है। इजराइली आंकड़ों के अनुसार, हमले में 1,221 लोग मारे गए थे। गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसके बाद इजराइल के हमलों में 73,470 लोगों की मौत हुई है। उसके मुताबिक युद्धविराम के बाद भी 1,330 से ज्यादा लोग मारे गए हैं।

Ram Mandir : ‘प्रभु राम मुझे यह जिम्मेदारी निभाने का सामर्थ्य दें’, अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO जितेंद्र मिश्रा ने कहा

Ram Mandir : 'प्रभु राम मुझे यह जिम्मेदारी निभाने का सामर्थ्य दें', अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट के पहले CEO जितेंद्र मिश्रा ने कहा

Jitendra Mishra Ram Mandir CEO

श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट, अयोध्या के पहले मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किए गए एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा (सेवानिवृत्त) ने नई जिम्मेदारी मिलने पर चयन समिति, श्री राम मंदिर ट्रस्ट और भगवान राम के प्रति आभार जताया।

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पूर्व एयर मार्शल जीतेंद्र मिश्रा को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का पहला सीईओ बनाए जाने पर उनके पैतृक गांव भोपतपुरा में खुशी का माहौल है।  ग्रामीणों ने उनकी नियुक्ति पर जश्न मनाया और इसे गांव के लिए गर्व का पल बताया। एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने कहा कि जैसा कि मैंने कहा, मैं चयन समिति, श्री राम मंदिर ट्रस्ट और भगवान राम का आभार व्यक्त करना चाहता हूं कि उन्होंने मुझे इस जिम्मेदारी के लिए चुना। 

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मैं भगवान से प्रार्थना करता हूं कि मुझे इतनी क्षमता प्रदान करें कि मैं इस जिम्मेदारी को अच्छी तरह निभा सकूं।  उन्होंने कहा कि वह इस महत्वपूर्ण दायित्व को पूरी निष्ठा और क्षमता के साथ निभाने के लिए भगवान राम से आशीर्वाद की कामना करते हैं।

Stock in Focus: सरकारी कंपनी को ₹3244 करोड़ का प्रोजेक्ट, शेयरों पर रहेगी नजर

Stock in Focus: सरकारी कंपनी Power Grid Corporation of India Ltd ने राजस्थान के रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट से बिजली निकालने के लिए बड़ा ट्रांसमिशन प्रोजेक्ट हासिल किया है। कंपनी को राजस्थान के बाड़मेर कॉम्प्लेक्स से 6 GW सोलर पावर ट्रांसमिशन के लिए सफल बोलीदाता चुना गया है।

यह प्रोजेक्ट टैरिफ बेस्ड कॉम्पिटिटिव बिडिंग के तहत मिला है। कंपनी ने इसके लिए ₹3,244.33 करोड़ सालाना ट्रांसमिशन चार्ज की बोली लगाई है। POWERGRID को 2 सितंबर 2026 को लेटर ऑफ इंटेंट of Intent मिला है।

1,000 किमी लंबी HVDC लाइन बनेगी

प्रोजेक्ट के तहत राजस्थान के बाड़मेर-II में 6,000 MW की HVDC टर्मिनल स्थापित की जाएगी। महाराष्ट्र के साउथ कलांब में भी टर्मिनल बनेगी। दोनों जगहों पर ±800 kV HVDC सिस्टम लगाया जाएगा।

बाड़मेर-II से साउथ कलांब के बीच करीब 1,000 किमी लंबी ट्रांसमिशन लाइन बिछाई जाएगी। यह राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र से होकर गुजरेगी।

इसके अलावा राजस्थान में 400 kV की ट्रांसमिशन लाइन, जरूरी बे और दूसरे उपकरण भी लगाए जाएंगे। बाड़मेर-II पावर स्टेशन पर दो SynCon यूनिट भी स्थापित की जाएंगी।

BOOT मॉडल पर बनेगा प्रोजेक्ट

यह प्रोजेक्ट Build, Own, Operate and Transfer यानी BOOT मॉडल पर विकसित होगा। इसके तहत कंपनी प्रोजेक्ट बनाएगी, चलाएगी और तय अवधि के बाद इसे ट्रांसफर किया जाएगा।

हाल में गुजरात का भी प्रोजेक्ट मिला

पिछले महीने भी POWERGRID को गुजरात में रिन्यूएबल एनर्जी ट्रांसमिशन का बड़ा प्रोजेक्ट मिला था। इस प्रोजेक्ट के लिए कंपनी ने ₹822.91 करोड़ सालाना ट्रांसमिशन टैरिफ की बोली लगाई थी।

बुधवार को Power Grid Corporation का शेयर NSE पर 1.23% की तेजी के साथ ₹267.80 पर बंद हुआ।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

नेपाल की बाढ़ से बिहार को बचा रहा है 57 साल पुराना गंडक बैराज | Gandak Barrage Valmikinagar | Nepal

नेपाल की बाढ़ से बिहार को बचा रहा है 57 साल पुराना गंडक बैराज | Gandak Barrage Valmikinagar | Nepal

हिमालय की तबाही भारत की चौखट तक पहुँच गई।
नेपाल में आई भयानक बाढ़ के बाद त्रिशूली और नारायणी नदियों में पानी का सैलाब उमड़ पड़ा, जो गंडक नदी के रास्ते बिहार पहुँचा।

वाल्मीकिनगर में इंजीनियरों ने 57 साल पुराने गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए, और करीब 1.5 लाख क्यूसेक पानी नियंत्रित तरीके से छोड़ा गया, ताकि अचानक बढ़े पानी के दबाव को संभाला जा सके।

हालांकि, निचले इलाकों के कई गांवों में बाढ़ आई और लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुँचाना पड़ा।
फिर भी, इस पुराने Engineering Marvel ने बाढ़ के पानी को नियंत्रित करने में अहम भूमिका निभाई।

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ये कपल 30 दिनों तक घूमा यूरोप और खर्च किए 9.5 लाख रुपये फिर बताया एक-एक पैसे का पूरा हिसाब

Europe Travel Budget: भारत के कई लोगों के लिए यूरोप घूमना काफी महंगा हो सकता है, खासकर तब जब ट्रिप में कई देशों की यात्रा करनी हो और सफर करीब एक महीने तक चले। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि 30 दिनों तक यूरोप घूमने में असल में कुल कितना खर्च आता है? बता दें कि एक भारतीय कपल ने अपनी पूरी ट्रिप का खर्च शेयर किया है, जिसमें बताया गया है कि उन्होंने रहने की जगह, फ्लाइट, खाने, ट्रांसपोर्ट और एक्टिविटीज पर कितना खर्च किया।

मुस्कान मित्तल और आशीष गुप्ता ने अपनी एक महीने की ट्रिप के दौरान 8 देशों की सैर की। उनकी यात्रा में फ्रांस, बेल्जियम, नीदरलैंड, प्राग, ऑस्ट्रिया, इटली, वेटिकन सिटी और स्विट्जरलैंड शामिल थे।

इंस्टाग्राम पर शेयर किया वीडियो

अपने जॉइंट इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किए गए एक वीडियो में, इस कपल ने बताया कि उन्होंने अपना ट्रैवल बजट कैसे बांटा और यह भी बताया कि ट्रिप के किस हिस्से में उनका सबसे ज्यादा खर्च हुआ।

8 देशों की यात्रा करते समय, हर जगह ठहरने की जगह का खर्च तेजी से बढ़ सकता है। इस कपल के लिए, रहने-सहने का खर्च ही सबसे बड़ा खर्च साबित हुआ।

वे Airbnb और होटलों में रुके; ज्यादातर जगहें शहर के सेंटर में या बड़े रेलवे स्टेशनों के पास थीं। मुस्कान ने कहा, “औसतन, हमने हर रात के लिए 10,000 रुपये खर्च किए।”

यूरोप तक पहुंचने की फ्लाइट भी कपल के ट्रिप बजट का एक बड़ा हिस्सा थी। उन्होंने फ्लाइट पर प्रति व्यक्ति ₹50,000 खर्च किए। सीधी फ्लाइट लेने के बजाय, उन्होंने मिडिल ईस्ट से होकर जाने वाली कनेक्टिंग फ्लाइट बुक कीं। दो लोगों के लिए, उनकी कुल फ्लाइट का खर्च लगभग ₹1 लाख आया।

यात्रा में 8 देश शामिल थे, इसलिए शहरों के बीच घूमना भी ट्रिप का एक अहम हिस्सा था। कपल ने बताया कि उन्होंने एक महीने का ‘यूरेल ग्लोबल पास’ इस्तेमाल किया, जिसमें उनके रूट की लगभग सभी ट्रेन यात्राएं शामिल थीं और इसकी कीमत ₹58,000 थी। उन्होंने कार रेंटल और मेट्रो पर भी ₹28,000 खर्च किए।

खाने-पीने का खर्च भी एक ऐसी चीज थी जिसके लिए कपल को अपनी 30 दिन की यात्रा के दौरान प्लानिंग करनी पड़ी। उन्होंने दोनों के खाने पर रोजाना लगभग ₹5,000 खर्च किए। उन्होंने बताया, “हम दिन में एक बार बाहर खाना खाते थे, लेकिन खाने का खर्च कंट्रोल में रखने के लिए साथ में ‘रेडी-टू-ईट’ खाना भी रखते थे और अक्सर ग्रोसरी स्टोर से सामान खरीदते थे।”

यूरोप घूमना सिर्फ एक शहर से दूसरे शहर जाने तक ही सीमित नहीं है। ट्रिप के दौरान कई टूरिस्ट प्लेस, अलग-अलग एक्सपीरियंस और एक्टिविटीज पर भी खर्च होता है। इस कपल ने अपनी 30 दिनों की यात्रा के दौरान एक्टिविटीज पर प्रति व्यक्ति 85,000 रुपये खर्च किए।

कपल ने अपने बजट में वीजा और ट्रैवल इंश्योरेंस का खर्च भी शामिल किया था। इन खर्चों पर उन्होंने प्रति व्यक्ति ₹15,000 खर्च किए। उन्होंने अन्य खर्चों के लिए भी प्रति व्यक्ति ₹10,000 से ₹15,000 अलग रखे थे।

रहने, फ्लाइट, ट्रांसपोर्ट, खाने-पीने, घूमने-फिरने की एक्टिविटीज, वीजा, इंश्योरेंस और अन्य खर्चों को मिलाकर, इस कपल ने बताया कि दो लोगों के लिए उनकी एक महीने की यूरोप बैकपैकिंग ट्रिप का कुल खर्च लगभग 9.5 लाख रुपये आया।

इस कपल के खर्चों के ब्योरे को देखकर दूसरे यूजर्स ने भी बताया कि उन्होंने अपनी यूरोप की छुट्टियों पर कितना खर्च किया था।

एक यूजर ने कमेंट किया, “हमने 10 दिनों के लिए 8 लाख रुपये खर्च किए।” एक और यूजर ने कहा, “यह तो काफी सही है।”

हालांकि, एक यूजर को यह रकम कम लगी। उसने कहा, “मुझे लगता है कि यह सस्ता है। हमारे मामले में, 2 लोगों की ट्रिप का खर्च रोजाना लगभग 800-900 यूरो आता है, जिसमें हवाई जहाज़ का किराया शामिल नहीं है।”

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर शेयर किए गए यूजर-जनरेटेड कंटेंट पर आधारित है। Moneycontrol ने इन दावों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की है और न ही इनका समर्थन करता है।

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ट्रम्प ने अमेरिकी नौसेना मजबूत करने के लिए वॉरफाइटर चुना:हंग काओ को दी जिम्मेदारी, पिता के साथ वियतनाम से भागकर अमेरिका आए थे

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने हंग काओ को नेवी सेक्रेटरी बनाने का फैसला किया है। उन्होंने बुधवार को सोशल मीडिया पर लिखा कि ‘सच्चे वॉरियर’ हैं। वह अमेरिकी नौसेना और मरीन कॉर्प्स को दुनिया की सबसे मजबूत सेना बनाए रखने के लिए सही व्यक्ति हैं। काओ को सैन्य अनुभव वाला अधिकारी माना जाता है। वह 31 साल तक अमेरिकी नौसेना में रहे हैं और इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया जैसे इलाकों में मिशन का हिस्सा रहे हैं। काओ का जन्म 1971 में दक्षिण वियतनाम के साइगॉन में हुआ था। जब वे 4 साल के थे तब दक्षिण वियतनाम में अमेरिका समर्थक सरकार गिर गई थी। उस पर उत्तर वियतनाम की कम्युनिष्ट सरकार ने कब्जा कर लिया था। इसके बाद काओ का परिवार भागकर अमेरिका पहुंचा था। नौसेना से रिटायर होने के बाद राजनीति में उतरे, दो बार हार मिली काओ ने 1989 में अमेरिकी नौसेना में अपना करियर शुरू किया। उनका काम समुद्र के अंदर खतरनाक मिशन करना और बम या दूसरे विस्फोटकों से जुड़े खतरों से निपटना था। उन्होंने इराक, अफगानिस्तान और सोमालिया में कई सैन्य मिशनों में काम किया। अंडरवॉटर मिशनों की कमान संभाली और स्पेशल ऑपरेशंस से जुड़े काम भी किए। करीब तीन दशक के सैन्य करियर के बाद वह 2021 में कैप्टन के पद से रिटायर हुए। नौसेना से रिटायर होने के बाद काओ ने राजनीति में कदम रखा। उन्होंने 2022 में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और 2024 में सीनेट के लिए वर्जीनिया से चुनाव लड़ा। हालांकि, दोनों चुनावों में उन्हें हार मिली। अक्टूबर 2025 में काओ को अमेरिकी नौसेना का अंडरसेक्रेटरी नियुक्त किया गया। यह नौसना में दूसरा सबसे बड़ा पद था। अप्रैल 2026 में ट्रम्प ने तत्कालीन नेवी सेक्रेटरी जॉन फेलन को पद से हटा दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक फेलन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ के बीच नहीं बन रही थी। इसके बाद काओ को कार्यवाहक सेक्रेटरी की जिम्मेदारी दी गई थी। तब से काओ अमेरिकी नौसेना की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। अब ट्रम्प उन्हें इसी पद पर स्थायी रूप से नियुक्त करना चाहते हैं। हंग काओ स्थायी नेवी सेक्रेटरी कैसे बनेंगे? काओ की नियुक्ति अभी पक्की नहीं हुई है। दरअसल, राष्ट्रपति का काम नेवी सेक्रेटरी के पद के लिए नामित करना है। अंतिम मंजूरी अमेरिकी सीनेट देती है। 1. नामांकन सीनेट के पास जाएगा
ट्रम्प का आधिकारिक नामांकन सीनेट को भेजा जाएगा। इसके बाद काओ के रिकॉर्ड और उनकी योग्यता की जांच की जाएगी। 2. सीनेट की सुनवाई होगी
काओ को सीनेट की समिति के सामने पेश होना पड़ सकता है। वहां उनसे उनकी सोच, नौसेना की नीतियों, जहाज निर्माण, सैन्य तैयारियों और दूसरे मुद्दों पर सवाल पूछे जा सकते हैं। 3. समिति फैसला करेगी
सुनवाई और जांच के बाद समिति उनके नामांकन को आगे बढ़ा सकती है। इसके बाद मामला पूरी सीनेट के सामने जाएगा। 4. वोटिंग होगी
सीनेटर काओ के नाम पर वोट करेंगे। सीनेट में 100 सदस्य होते हैं, अगर उन्हें 51 वोट मिले तो उन्हें यह जिम्मेदारी सौंप दी जाएगी। ईरान युद्ध के बीच काओ के लिए नौसेना संभालना आसान नहीं काओ ऐसे समय में नौसेना की स्थायी जिम्मेदारी संभालने जा रहे हैं, जब अमेरिकी सेना का ईरान के खिलाफ अभियान चल रहा है। इस दौरान अमेरिकी नौसेना की तैनाती और उस पर काम का दबाव बढ़ा है। अमेरिकी विमानवाहक पोत USS अब्राहम लिंकन नौ महीने से ज्यादा समय तक समुद्र में तैनात रहा। इस दौरान उसका एक बड़ा हिस्सा ईरान के खिलाफ अमेरिकी सैन्य अभियान के समर्थन में बीता। इतनी लंबी तैनाती के कारण जहाज पर मौजूद सैनिकों की थकान, मानसिक सेहत और जरूरी सामान की कमी को लेकर सवाल उठे। अमेरिकी सांसदों ने भी पेंटागन से इन हालात पर जवाब मांगा। अगस्त में काओ ने अब्राहम लिंकन की लंबी तैनाती का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि मिशन की जरूरत के कारण जहाज की तैनाती बढ़ाई गई और सैनिकों की सुरक्षा सबसे अहम है। काओ के सामने नौसेना का बेड़ा बढ़ाने, नए युद्धपोत तैयार करने और सैनिकों पर लंबी तैनाती का दबाव कम करने की चुनौती होगी। चीन भी अमेरिकी नौसेना के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।

Gold Silver Prices Today: दिल्ली में सोने में लगातार छठे सत्र गिरावट, चांदी एक दिन में ₹5000 रुपये लुढ़की

Gold Silver Prices Today: दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने में 2 सितंबर को लगातार छठे सत्र गिरावट आई। यह 2,100 रुपये गिरकर 1.56 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। बीते छह सत्रों में सोने की कीमत 11,000 रुपये गिर चुकी है। 25 अगस्त को इसका कीमत 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गई थी, जो बीते तीन महीनों का सबसे ज्यादा प्राइस था। 2 सितंबर को चांदी में भी बड़ी गिरावट आई।

चांदी एक दिन में 5000 रुपये फिसली

चांदी भी 5000 रुपये गिरकर 2,35,000 रुपये प्रति किलोग्राम पर आ गई। यह चांदी का बीते हफ्ते में सबसे कम भाव है। बुलियन की कीमतों में गिरावट के पीछे मध्यपूर्व में फिर से तनाव बढ़ने का हाथ है। अमेरिका ईरान पर हमले कर रहा है। इसके जवाब में ईरान खाड़ी देशों में अमेरिकी ठिकानों को निशाना बना रहा है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतें चढ़ रही हैं।

क्रूड में उछाल से महंगाई बढ़ने का खतरा

चॉयस ब्रोकिंग में कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर माकदा ने कहा कि ऑयल की कीमतें बढ़ने से महंगाई बढ़ने का खतरा बढ़ा है। इससे अमेरिका सहित दूसरे देशों में इंटरेस्ट रेट्स बढ़ सकते हैं। अमेरिका में बॉन्ड यील्ड में फिर से उछाल है। डॉलर इंडेक्स भी चढ़ा है। अगर क्रूड की कीमतें हाई लेवल पर बनी रहती हैं तो इस महीने फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने-चांदी में तेजी 

अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी में हल्की तेजी दिखी। स्पॉट गोल्ड 1.19 फीसदी चढ़कर 4,380 डॉलर प्रति औंस पर चल रहा था। स्पॉट सिल्वर 2 फीसदी उछाल के साथ 65.42 डॉलर प्रति औंस पर था। मिरै एसेट शेयरखान के कमोडिटीज हेड प्रवीण सिंह ने कहा कि क्रूड की ऊंची कीमतों के बीच फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श ने आक्रामक पॉलिसी का संकेत दिया है।

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अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ा तो सोने पर पड़ेगा असर

अगर अमेरिका में सितंबर में इंटरेस्ट रेट बढ़ता है तो यह सोने पर इसका खराब असर पड़ेगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के माहौल में सोने की चमक घटती है, जबकि इंटरेस्ट रेट घटने पर बढ़ती है। उधर, डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसलिए डॉलर मजबूत होने पर सोने की कीमतों पर दबाव बढ़ता है।

GDP Growth: सरकार ने 2.6% GDP ग्रोथ के दावे को खारिज किया, 7.8% को सटीक बताया

GDP Growth: सरकार ने पहली तिमाही की GDP ग्रोथ 2.6% रहने के दावे को खारिज कर दिया है। सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के सचिव सौरभ गर्ग ने कहा कि 7.8% की GDP ग्रोथ का आंकड़ा मजबूत प्रोडक्शन डेटा पर आधारित है। उन्होंने पुराने और नए GDP डेटा की तुलना को ‘सेब और संतरे की तुलना’ जैसा बताया। PTI के मुताबिक, सरकार ने कहा कि दोनों आंकड़े अलग-अलग डेटा सीरीज के हैं और उनकी सीधी तुलना नहीं की जा सकती।

यह विवाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग के बयान के बाद शुरू हुआ था। उनका कहना था कि अगर पिछले साल की पहली तिमाही की GDP को ₹86 लाख करोड़ से घटाकर ₹80 लाख करोड़ नहीं किया जाता, तो मौजूदा ग्रोथ करीब 2.6% होती।

सरकार ने 2.6% के दावे को क्यों बताया गलत?

सौरभ गर्ग के मुताबिक, आलोचक FY26 की पहली तिमाही के पुराने ₹86.05 लाख करोड़ के GDP आंकड़े की तुलना नए ₹80 लाख करोड़ के आंकड़े से कर रहे हैं। यह ₹86.05 लाख करोड़ का आंकड़ा पुराने 2011-12 बेस ईयर वाली GDP सीरीज का था।

फरवरी 2026 में सरकार ने 2022-23 को बेस ईयर मानकर नई GDP सीरीज जारी की। इसके बाद पुरानी सीरीज की जगह नई सीरीज लागू हो गई। नई सीरीज में Q1 FY26 का GDP पहले ₹80.32 लाख करोड़ आंका गया। बाद में यह ₹80.44 लाख करोड़ हुआ और फिर नए IIP और PPI डेटा के आधार पर इसे ₹80 लाख करोड़ किया गया।

PTI के मुताबिक, मंत्रालय ने कहा कि यह सामान्य डेटा रिवीजन की प्रक्रिया है। इसका मकसद पिछले साल का GDP घटाकर मौजूदा ग्रोथ रेट को बढ़ाना नहीं था।

असली तुलना किससे होनी चाहिए?

सरकार का कहना है कि GDP ग्रोथ की तुलना एक ही डेटा सीरीज और स्थिर कीमतों पर की जानी चाहिए। नई 2022-23 बेस ईयर सीरीज के मुताबिक, FY27 की पहली तिमाही में भारत की रियल GDP ग्रोथ 7.8% रही।

मंत्रालय ने स्टील, सीमेंट और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टरों में मजबूत वॉल्यूम ग्रोथ का भी हवाला दिया। PTI के मुताबिक, सरकार का तर्क है कि वास्तविक उत्पादन में बढ़ोतरी के आंकड़े भी मजबूत आर्थिक गतिविधि दिखाते हैं।

मैन्युफैक्चरिंग में रियल ग्रोथ ज्यादा कैसे?

मैन्युफैक्चरिंग की रियल GVA ग्रोथ 9.2% रही, जबकि नॉमिनल ग्रोथ 7.7% रही। इसके चलते इंप्लिसिट GVA डिफ्लेटर माइनस 1.5% रहा।

मंत्रालय ने कहा कि इसका मतलब फैक्ट्री गेट कीमतें घटीं, यह जरूरी नहीं है। नई पद्धति में आउटपुट और इनपुट को अलग-अलग डिफ्लेट किया जाता है। अगर कच्चे माल और दूसरे इनपुट की कीमतें आउटपुट कीमतों से ज्यादा तेजी से बढ़ती हैं, तो ऐसा अंतर आ सकता है।

माइनिंग में रियल ग्रोथ घटी, नॉमिनल क्यों बढ़ी?

Q1 FY27 में माइनिंग की रियल GVA 2.4% घटी। लेकिन नॉमिनल GVA 22.3% बढ़ी। PTI के मुताबिक, इसकी बड़ी वजह मिनरल्स की कीमतों में तेज उछाल रही।

माइनिंग और क्वॉरिंग की PPI महंगाई अप्रैल में 22% और मई में 21.2% रही। कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी दर्ज हुई।

GDP डिफ्लेटर और CPI-WPI में अंतर क्यों?

सरकार ने कहा कि GDP डिफ्लेटर को CPI और WPI से सीधे नहीं मिलाया जा सकता। CPI घरों के खर्च की तय बास्केट को मापता है। WPI मुख्य रूप से वस्तुओं की कीमतों को ट्रैक करता है। वहीं, GDP डिफ्लेटर निवेश, सरकारी खर्च, एक्सपोर्ट और सर्विसेज समेत पूरी अर्थव्यवस्था को कवर करता है।

मंत्रालय ने कहा कि उत्पादन और खर्च के आधार पर निकाले गए GDP आंकड़ों के बीच सांख्यिकीय अंतर भी सामान्य है। जैसे-जैसे ज्यादा डेटा आता है, इसमें बदलाव हो सकता है। इसलिए मौजूदा अंतर को GDP में किसी गड़बड़ी का सबूत नहीं माना जाना चाहिए।

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यूपी में अगले 6 महीने में 1 लाख युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी, सीएम योगी का बड़ा ऐलान, सैफई सिंडिकेट पर तंज

यूपी में अगले 6 महीने में 1 लाख युवाओं को मिलेगी सरकारी नौकरी, सीएम योगी का बड़ा ऐलान, सैफई सिंडिकेट पर तंज

Yogi adityanath

CM Yogi Adityanath news: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य के युवाओं के लिए एक बड़ा और राहत भरा ऐलान किया है। सीएम योगी ने स्पष्ट किया है कि प्रदेश सरकार युवाओं के भविष्य को संवारने और उन्हें रोजगार देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। उन्होंने घोषणा की है कि आगामी छह महीनों के भीतर राज्य के 1,000,00 (एक लाख) युवाओं को पारदर्शी तरीके से सरकारी नौकरियां दी जाएंगी। इसके साथ ही उन्होंने पिछली सरकारों के 'सैफई-रामपुर सिंडिकेट' पर तीखा हमला बोलते हुए आउटसोर्सिंग व्यवस्था में हो रहे शोषण पर भी करारा प्रहार किया।

 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 2017 से पहले जब भी कोई भर्ती निकलती थी, तो युवाओं को पेपर लीक और भ्रष्टाचार जैसी कई बड़ी चुनौतियों से जूझना पड़ता था। हमारी सरकार ने यूपी के सभी भर्ती आयोगों और बोर्डों में व्यापक सुधार किए हैं। सख्त कानून बनाए गए हैं ताकि युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने वालों को जेल भेजा जा सके और उनकी संपत्ति जब्त की जा सके। सीएम ने बताया कि अब तक केवल यूपी पुलिस में 2.25 लाख से अधिक भर्तियां की जा चुकी हैं, जिसमें महिला कार्मिकों की संख्या 10 हजार से बढ़ाकर 44 हजार से अधिक कर दी गई है और नई भर्तियों में 11-12 हजार और महिलाओं को अवसर मिलेगा।

'सैफई-रामपुर सिंडिकेट' और आउटसोर्सिंग शोषण पर प्रहार

सीएम योगी ने पिछली सरकारों पर हमला बोलते हुए कहा कि 2017 से पहले 'सैफई-रामपुर सिंडिकेट' पूरी व्यवस्था का खून चूसता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले की सरकारें आउटसोर्स कर्मचारियों को बोझ मानती थीं और उस समय की एजेंसियां सत्ताधारी नेताओं के रिश्तेदारों की होती थीं, जो युवाओं का शोषण करती थीं। हमारी सरकार ने आउटसोर्स कर्मचारियों को मानव संसाधन माना है और नए आउटसोर्स निगम के गठन से इस शोषण वाले तीसरे सिंडिकेट को भी ध्वस्त कर दिया गया है।

यूपी की अर्थव्यवस्था में हर वर्ग की भागीदारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और ऑटोमेशन के दौर में भले ही काम की प्रकृति बदले, लेकिन मानव श्रम की गरिमा कभी खत्म नहीं होगी।

  • किसान और एमएसएमई : यूपी में 96 लाख एमएसएमई यूनिट्स में 3.15 करोड़ लोग कार्यरत हैं। 1000 दिनों में एनओसी की सुविधा से प्रदेश में उद्योग तेजी से बढ़ रहे हैं।
  • निवेश और स्टार्टअप : राज्य में 50 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव आए हैं। 2017 में जहां केवल 120 स्टार्टअप थे, आज उनकी संख्या 24,000 के पार पहुंच चुकी है।
  • महिला सशक्तिकरण : मिल्क प्रोड्यूसर समूहों से 4 लाख बहनें और स्वयं सहायता समूहों से करीब 1 करोड़ महिलाएं जुड़कर राज्य की प्रगति को रफ्तार दे रही हैं।