थाईलैंड और वियतनाम ही नहीं, ये अनोखा देश भी बना सकते हैं आपकी अगली ट्रिप यादगार!

दक्षिण-पूर्व एशिया घूमने का प्लान बनाते समय थाईलैंड लंबे समय से लोगों की पसंद रहा है। खूबसूरत समुद्र तट, नाइटलाइफ, शॉपिंग और कई तरह के टूरिस्ट स्पॉट की वजह से यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन अब ट्रैवलर्स की पसंद में धीरे-धीरे बदलाव देखने को मिल रहा है और वियतनाम भी तेजी से लोगों की पसंद बनता जा रहा है।

वियतनाम की खास बात यह है कि यहां घूमने वालों को खूबसूरत प्राकृतिक नजारे, ऐतिहासिक जगहें, लोकल कल्चर और अलग तरह का ट्रैवल एक्सपीरियंस एक साथ मिल जाता है। साथ ही, बजट में यात्रा करने वालों के लिए भी यह देश काफी अट्रैक्टिव नजर आता है। यही वजह है कि कई ट्रैवलर अब अगली छुट्टी के लिए थाईलैंड के बजाय वियतनाम को चुनने के बारे में सोच रहे हैं।

थाईलैंड और वियतनाम की तुलना करने के तरीके:

1. कीमत और ट्रिप का खर्च

बजट की बात करें तो वियतनाम थाईलैंड के मुकाबले सस्ता ऑप्शन माना जाता है। होटल, लोकल खाना, टैक्सी और रोजकी छोटी जरूरतों पर यहां कम पैसे खर्च हो सकते हैं। बैकपैकिंग या कम बजट में घूमने वाले ट्रैवलर के लिए वियतनाम अट्रैक्टिव है। लेकिन भारत से जाने वाले ट्रैवलर का पूरा बजट सिर्फ वहां के खर्च पर डिपेंड नहीं करता। फ्लाइट, वीजा, होटल और घूमने वाली जगहों के टिकट को मिलाकर कुल खर्च देखना ज्यादा सही रहेगा।

2. घूमने की जगहों में किसका पलड़ा भारी?

डेस्टिनेशन के मामले में किसी एक देश को बेहतर कहना सही नहीं है, क्योंकि दोनों की अपनी अलग खासियत है। थाईलैंड खूबसूरत समुद्र तटों, द्वीपों, रिसॉर्ट्स और नाइटलाइफ के लिए जाना जाता है। बैंकॉक जैसे बड़े शहरों में शॉपिंग, मनोरंजन और घूमने के कई ऑप्शन मिलते हैं। दूसरी तरफ, वियतनाम में पहाड़, समुद्र, पुराने शहर, नदियां और ग्रामीण इलाकों का अलग एक्सपीरियंस मिलता है। हनोई, सापा, हा लॉन्ग बे और मेकांग डेल्टा जैसी जगहें उन लोगों को पसंद आ सकती हैं जो नेचर के साथ हिस्ट्री और लोकल कल्चर को भी करीब से देखना चाहते हैं।

3. खाने के मामले में कौन बेहतर?

खाने की पसंद पूरी तरह व्यक्ति पर डिपेंड करती है, क्योंकि दोनों देशों का खाना अपने-अपने तरीके से खास है। थाईलैंड में पैड थाई, टॉम यम, करी और कई तरह का स्ट्रीट फूड आसानी से मिल जाता है। वहीं वियतनाम का फो, बान्ह मी, बन चा और वियतनामी कॉफी काफी लोकप्रिय हैं। थाई खाना ज्यादा मसालेदार और तीखा होता है, जबकि वियतनामी खाने में ताजी सब्जियों, हर्ब्स और हल्के स्वाद का इस्तेमाल ज्यादा देखने को मिलता है। आप स्ट्रीट फूड ट्राय करना पसंद करते हैं, तो दोनों देशों में आपके लिए काफी कुछ नया हो सकता है।

4. इंफ्रास्ट्रक्चर और सेफ्टी

टूरिस्टों के लिए घूमने की फैसिलिटी के मामले में थाईलैंड को काफी एक्सपीरियंस हासिल है। बैंकॉक जैसे शहरों में पब्लिक ट्रांसपोर्ट, होटल, टैक्सी और टूरिस्ट सुविधाएं आसानी से मिल जाती हैं। वियतनाम में भी पिछले कुछ वर्षों में टूरिज्म इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से बेहतर हुआ है, लेकिन कुछ जगहों पर ट्रैफिक और लोकल ट्रांसपोर्ट नए ट्रैवलर के लिए थोड़ा अलग एक्सपीरियंस हो सकता है। दोनों देशों में सड़क पार करते समय, बाइक वाले इलाकों में और भीड़भाड़ वाली जगहों पर सामान संभालकर रखना और सावधानी बरतना जरूरी है।

5. वीजा और इमिग्रेशन

फॉरेन ट्रिप की प्लानिंग में वीजा सबसे जरूरी चीजों में से एक है और इसके रूल समय के साथ बदलते रहते हैं। 2026 में भारतीय ट्रैवलर के लिए थाईलैंड की एंट्री व्यवस्था आसान रही है, जबकि वियतनाम जाने के लिए भारतीय पासपोर्ट होल्डर्स को ई-वीजा की जरूरत पड़ती है। इसलिए टिकट बुक करने से पहले दोनों देशों की मौजूदा वीजा और एंट्री शर्तों को जरूर चेक कर लेना चाहिए।

दक्षिण-पूर्व एशिया में घूमने के लिए हर देश की अपनी अलग खासियत है। किसी को समुद्र तट और आइलैंड पसंद आ सकते हैं, तो किसी को इतिहास, संस्कृति, पहाड़ या मॉडर्न शहर ज्यादा अट्रैक्ट कर सकते हैं। इस पूरे रीजन में टूरिस्म को आसान, बेहतर और ज्यादा टिकाऊ बनाने पर भी लगातार काम हो रहा है। इसलिए किसी एक देश को हर ट्रैवलर के लिए सबसे बेहतर कहना सही नहीं होगा। आप पहली बार दक्षिण-पूर्व एशिया घूमने जा रहे हैं, तो अपने बजट, पसंद और ट्रैवल के मकसद के हिसाब से डेस्टिनेशन चुनना ज्यादा अच्छा रहेगा। सही जगह चुनकर आपकी छुट्टी को सिर्फ एक ट्रिप नहीं, बल्कि एक नया एक्सपीरियंस बना सकता है।

इंडिगो की स्पेशल सेल: कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर मिल रहा है भारी डिस्काउंट, सस्ते में करें देश-विदेश की यात्रा

एयर ट्रैवलर के लिए एक अच्छी खबर है। एयरलाइन कंपनी IndiGo ने पैसेंजर को कम बजट में सफर का तोहफा देते हुए कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर एक स्पेशल सेल की घोषणा की है। इस लिमिटेड टाइम ऑफर में डोमेस्टिक और इंटरनेशनल दोनों रूट पर शुरुआती किराए में कटौती की गई है। यदि आप आने वाले दिनों में ट्रिप की प्लानिंग बना रहे हैं, तो इस सेल के जरिए अपने ट्रिप के बजट को काफी कम कर सकते हैं।

कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर मिल रहा है ऑफर

इंडिगो ने पैसेंजर के लिए कनेक्टिंग फ्लाइट्स की एक स्पेशल सेल शुरू की है। इस सेल का फायदा डोमेस्टिक और इंटरनेशनल दोनों तरह की कनेक्टिंग फ्लाइट्स की बुकिंग पर लिया जा सकता है। यदि आप आने वाले महीनों में छुट्टी मनाने या किसी जरूरी काम से ट्रिप करने वाले हैं, तो इस ऑफर में अपनी पसंद की फ्लाइट और तारीख का किराया चेक कर सकते हैं।

कब तक कर सकते हैं टिकट की बुकिंग?

इंडिगो की इस लिमिटेड टाइम वाली सेल में टिकट बुक करने की आखिरी तारीख 17 सितंबर 2026 है। यानी ऑफर का फायदा लेने के लिए आपको इस तारीख तक अपनी बुकिंग पूरी करनी होगी। वहीं, इस सेल के तहत बुक की गई टिकटों पर 18 सितंबर 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच ट्रिप की जा सकती है।

डोमेस्टिक और इंटरनेशनल फ्लाइट का किराया

सेल में डोमेस्टिक कनेक्टिंग फ्लाइट्स का ऑल-इन्क्लूसिव वन-वे किराया 3,999 रुपये से शुरू हो रहा है। वहीं, इंटरनेशनल कनेक्टिंग फ्लाइट्स के लिए शुरुआती किराया 8,999 रुपये रखा गया है। इन शुरुआती किरायों में कुछ जरूरी चार्ज शामिल हैं, लेकिन वास्तविक किराया रूट और ट्रैवल की तारीख के हिसाब से अलग हो सकता है। यह भी जरूरी नहीं है कि हर फ्लाइट में आपको 3,999 रुपये या 8,999 रुपये वाला किराया मिल जाए। जैसे-जैसे कम किराए वाली सीटें बुक होती जाएंगी, आगे की सीटों का किराया बढ़ सकता है।

ट्रैवल से पहले बुकिंग कंडीशन समझें

इस सेल का फायदा लेने के लिए एक जरूरी शर्त यह है कि टिकट ट्रैवल की तारीख से कम से कम तीन दिन पहले बुक करनी होगी। आखिरी समय में की गई बुकिंग इस ऑफर के लिए एलिजिबल नहीं हो सकती। इसके अलावा किराया रूट, तारीख और अवेलेबल सीटों के बेस पर बदल सकता है। इसलिए केवल शुरुआती किराया देखकर टिकट बुक करने के बजाय अपनी पूरी जर्नी का किराया पहले चेक लें।

बुकिंग के साथ ऐड-ऑन सर्विस का भी फायदा

इंडिगो की इस सेल में टिकट के साथ कुछ ऐड-ऑन सर्विस पर भी कम कीमत का फायदा मिलेगा। इंडिगो स्विच 199 रुपये और 6E फेयर होल्ड 49 रुपये से शुरू होंगे, जिसका लाभ सीधे इंडिगो के जरिए टिकट बुक करने वाले पैसेंजर को मिलेगा। वहीं फास्ट फॉरवर्ड 299 रुपये से शुरू होगा और इसे सभी बुकिंग चैनलों से लिया जा सकता है। टिकट की बुकिंग इंडिगो की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, 6Eskai और व्हॉट्सऐप के जरिए की जा सकती है। बुकिंग के समय ट्रैवल की तारीख, कनेक्टिंग रूट, बैगेज और दूसरी फैसिलिटी की इनफार्मेशन जरूर चेक कर लें।

बुकिंग से पहले इन बातों का रखें ध्यान

ऑफर का शुरुआती किराया सभी रूट्स और सभी तारीखों के लिए अवेलेबल नहीं होगा। इसलिए टिकट बुक करने से पहले अपनी ट्रैवल की तारीख और रूट के हिसाब से वास्तविक किराया जरूर चेक करें। साथ ही यह भी देख लें कि चुनी गई फ्लाइट कनेक्टिंग फ्लाइट है और सेल की शर्तों के तहत आती है या नहीं। ऑफर लिमिटेड टाइम के लिए है और कम किराए वाली सीटें भी लिमिटेड हैं, इसलिए पसंद की तारीख पर सीट अवेलेबल हो तो बुकिंग करने से पहले सभी टर्म्स और कंडीशन पढ़ लेना चाहिए।

Disclaimer: फ्लाइट का किराया रूट, ट्रैवल की तारीख और सीट की उपलब्धता के आधार पर बदल सकता है। टिकट बुक करने से पहले इंडिगो की वेबसाइट पर किराया और ऑफर की शर्तें जरूर जांच लें।

घूमने का बना रहे हैं प्लान? IndiGo घरेलू और इंटरनेशनल फ्लाइट पर दे रहा बड़ा ऑफर, जानें पूरी डिटेल

अगर आप कहीं पर घूमने का प्लान बना रहे हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। इंडिगो ने यात्रियों के लिए ‘ग्रेट कनेक्शन्स सेल’ ऑफर शुरू किया है। इस ऑफर के तहत लोगों को घरेलू (डोमेस्टिक) और अंतरराष्ट्रीय (इंटरनेशनल) रूट्स की कनेक्टिंग फ्लाइट्स की कीमत पर तगड़ा ऑफर मिलने वाला है। वहीं इंडिगो का ये ऑफर कम ही समय के लिए है। आप इस सेल का लाभ 17 सितंबर 2026 तक ही उठा सकते हैं। वहीं ऑफर के तहत 18 सितंबर 2026 से 31 मार्च 2027 तक की यात्रा के लिए टिकट बुक किए जा सकेंगे। आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ

कितने किराए में होगा सफर

इंडिगो एयरलाइन का ये ऑफर केवल कनेक्टिंग फ्लाइट्स पर ही लागू होगा। इंडिगो की इस सेल में घरेलू कनेक्टिंग फ्लाइट का एक तरफ का किराया 3,999 रुपये और अंतरराष्ट्रीय कनेक्टिंग फ्लाइट का किराया 8,999 रुपये से शुरू होगा। इस ऑफर का फायदा उठाने के लिए यात्रियों को फ्लाइट रवाना होने से कम से कम तीन दिन पहले टिकट बुक करनी होगी। एयरलाइन के मुताबिक, इस सेल का उद्देश्य यात्रियों को कनेक्टिंग और एक से ज्यादा शहरों की यात्रा कम खर्च में करने का मौका देना है।

इन सेवाओं पर भी मिलेगी छुट

इंडिगो की सेल में यात्रियों को कुछ अतिरिक्त सेवाएं भी कम कीमत पर मिलेंगी। इंडिगो स्विच की कीमत 199 रुपये से शुरू होगी, जबकि सीधे इंडिगो से टिकट बुक करने पर 6ई फेयर होल्ड की सुविधा 49 रुपये से मिल सकेगी। वहीं, फास्ट फॉरवर्ड की सुविधा इंडिगो के ट्रैवल पार्टनर्स समेत सभी बुकिंग चैनल पर 299 रुपये से उपलब्ध होगी। कस्टमर टिकट और इन सेवाओं की बुकिंग इंडिगो की वेबसाइट, मोबाइल ऐप, 6ईस्काई, व्हाट्सऐप या चुने हुए ट्रैवल पार्टनर्स के जरिए कर सकते हैं।

इन बातों का रखें ध्यान

ये बात ध्यान देने वाली है कि 3,999 रुपये और 8,999 रुपये का शुरुआती किराया हर फ्लाइट में नहीं मिलेगा। कम किराए वाली सीटें सीमित हैं और टिकट की कीमत यात्रा के रूट, तारीख और सीटों की उपलब्धता के हिसाब से बदल सकती है। इसलिए कम कीमत में टिकट पाने के लिए जल्द बुकिंग करना बेहतर रहेगा। इंडिगो के मुताबिक, एयरलाइन के पास 430 से ज्यादा विमानों का बेड़ा है। कंपनी हर दिन करीब 2,200 उड़ानें संचालित करती है। इन फ्लाइट्स के जरिए देश के 95 से ज्यादा शहरों के साथ-साथ 40 अंतरराष्ट्रीय जगहों को भी जोड़ा जाता है।

बैकपैक उठाओ, पैसे बचाओ! मानसून के ठीक बाद इन 5 जगहों पर जाने का है परफेक्ट टाइम

मानसून खत्म होते ही घूमने का मौसम धीरे-धीरे बदलने लगता है और इसी के साथ ट्रैवल बजट को कम रखने का मौका भी मिल सकता है। सितंबर से नवंबर के बीच कई जगहों पर पीक सीजन की भीड़ शुरू होने से पहले घूमने पर फ्लाइट और होटल के दाम जेब पर थोड़े हल्के पड़ सकते हैं। इस मौसम भी कई जगहों पर घूमने के लिए अच्छा रहता है और कम भीड़ का फायदा मिल सकता है। यदि आने वाले महीनों में ट्रिप का प्लान बना रहे हैं, तो इन 5 जगहों पर नजर डाल सकते हैं:

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1. लोनावला

मुंबई और पुणे के पास होने की वजह से लोनावला छोटी ट्रिप के लिए काफी पसंद किया जाता है। मानसून के बाद भी यहां हरियाली और पहाड़ों का नजारा बना रहता है, जबकि बारिश के कारण होने वाली परेशानी कम हो सकती है। यहां भुशी डैम, टाइगर पॉइंट, राजमाची किला, कार्ला गुफाएं और लोहगढ़ किला घूम सकते हैं। मुंबई और पुणे के पास होने के कारण यह छोटी और बजट ट्रिप के लिए भी अच्छा ऑप्शन है। होटल प्राइस ट्रेंड में सितंबर का औसत करीब ₹6,458 प्रति रात रहा है। अक्टूबर और नवंबर में यह करीब ₹7,875 तक पहुंचता है, इसलिए सितंबर में वीकडे ट्रिप प्लान करना बजट में हो सकता है।

2. उदयपुर

उदयपुर में सितंबर के दौरान बारिश का असर कम होने लगता है और झीलों के आसपास का नजारा काफी खूबसूरत रहता है। यहां सिटी पैलेस, पिछोला झील, सज्जनगढ़ पैलेस, जग मंदिर और सहेलियों की बाड़ी देख सकते हैं। झीलों और पुराने महलों की खूबसूरती के साथ यहां का मौसम भी ट्रिप को खास बना सकता है। होटल की कीमतों में सितंबर 2026 का औसत करीब ₹3,908 प्रति रात लग सकता है, जबकि अक्टूबर में यह करीब ₹4,765 और नवंबर में करीब ₹5,401 हो सकता है। वहीं जनवरी में औसत कीमत करीब ₹6,290 तक पहुंच जाती है। यानी सितंबर में ट्रिप प्लान करने पर होटल में अच्छी बचत हो सकती है।

3. केरल

मानसून के बाद केरल में हरियाली और मौसम दोनों ही घूमने का मजा बढ़ा देते हैं। यहां मुन्नार, अल्लेप्पी, वायनाड, कोच्चि और थेक्कडी जैसी जगहें देख सकते हैं। मुन्नार की पहाड़ियां और चाय के बागान, अल्लेप्पी की हाउसबोट और वायनाड की हरियाली ट्रिप को खास बना सकती है। सितंबर-अक्टूबर में पीक सीजन शुरू होने से पहले होटल और रुकने के खर्च में कुछ बचत मिल सकती है। ट्रैवल गाइड के मुताबिक, सितंबर-अक्टूबर के shoulder season में होटल और फ्लाइट पर पीक सीजन की तुलना में करीब 30% तक बचत हो सकती है। नवंबर से यहां पीक सीजन शुरू होने लगता है, इसलिए बजट ट्रिप के लिए सितंबर और अक्टूबर ज्यादा बेहतर रह सकते हैं।

4. गोवा

गोवा में सितंबर को होटल को सबसे सस्ते महीनों में गिना जाता है। यहां बागा बीच, कलंगुट बीच, अंजुना, फोर्ट अगुआडा, पणजी और दूधसागर वाटरफॉल जैसी जगहें देख सकते हैं। सितंबर में बारिश के बाद गोवा का मौसम धीरे-धीरे घूमने लायक होने लगता है और होटल के दाम दिसंबर के पीक सीजन से कम रह सकते हैं। दो लोगों के लिए होटल का median रेट करीब $69 यानी लगभग ₹6,000 के आसपास है, जबकि नवंबर में यह करीब $113 तक पहुंच जाता है। सितंबर का औसत होटल रेट करीब ₹4,899 प्रति रात है, जो नवंबर के ₹6,418 से कम है। इसलिए कम बजट में गोवा घूमने के लिए सितंबर अच्छा ऑप्शन हो सकता है।

5. जयपुर

जयपुर में सितंबर के बाद मौसम धीरे-धीरे घूमने लायक होने लगता है और पीक सर्दियों के शुरू होने से पहले होटल की कीमतें कुछ कम रह सकती हैं। जयपुर में आमेर किला, हवा महल, सिटी पैलेस, जल महल, नाहरगढ़ किला और जंतर-मंतर घूम सकते हैं। सितंबर के बाद मौसम में धीरे-धीरे बदलाव आने लगता है, जिससे शहर की ऐतिहासिक जगहों को घूमना आसान हो सकता है। होटल का औसत करीब ₹3,786 प्रति रात है, जबकि अक्टूबर में यह करीब ₹5,099 और नवंबर में ₹5,100 तक पहुंचता है। इसलिए सितंबर में जयपुर घूमने पर होटल के बजट को थोड़ा कम रखा जा सकता है।

मानसून के बाद घूमने का मौसम आते ही ट्रैवल का बजट भी थोड़ा हल्का किया जा सकता है। सितंबर से नवंबर के बीच ये सभी जगहें हैं, जहां घूमने का मजा लेने के साथ फ्लाइट और होटल पर भी बचत का मौका मिल सकता है। तो आप भी कम खर्च में अच्छी ट्रिप प्लान करने के लिए अपनी अगली ट्रिप प्लान कर सकते है।

ट्रेन का सफर, पेट्स हमसफर! जानिए रेलवे की पेट पॉलिसी के वीआईपी नियम

यदि आपका पेट आपके फैमिली मेंबर के जैसे हैं और कहीं घूमने जाने पर उसे अकेला छोड़ने का मन नहीं करता है, तो अगली ट्रिप में उसे घर पर छोड़ने के बजाय अपने साथ ले जाने का प्लान बना सकते हैं। डॉग या कैट के साथ सफर करना सुनने में थोड़ा मुश्किल जरूर लगता है, लेकिन ट्रेन में ट्रैवल के लिए भारतीय रेलवे ने पालतू जानवरों को साथ ले जाने की सुविधा दी है। सफर शुरू करने से पहले यह जानना जरूरी है कि पेट को किस कोच में ले जा सकते हैं और इसके लिए कौन-कौन से नियमों का पालन करना होता है।

पेट्स की बुकिंग के ऑप्शन

आप अपने डॉग या कैट को ट्रेन में साथ लेकर जाना चाहते हैं, तो रेलवे की ओर से दो ऑप्शन मिलते हैं। पहला ऑप्शन फर्स्ट एसी (1AC) का पूरा कूपे या केबिन बुक करना है। इसमें आपका पेट आपके साथ ही सफर कर सकता है। 2-बर्थ वाला पूरा कूपे या 4-बर्थ वाला पूरा केबिन एक ही PNR पर बुक होना चाहिए। यह पेट के लिए बेस्ट ऑप्शन माना जाता है, क्योंकि वह पूरी ट्रिप में आपके साथ रहता है। दूसरा ऑप्शन लगेज वैन में बने डॉग बॉक्स का है। आप 1AC में सफर नहीं कर रहे हैं, तो पेट को इसी खास हवादार बॉक्स में सफर करना पड़ता है।

सिर्फ इन ट्रेनों में बुकिंग की परमिशन

आप अपने पेट को किसी भी ट्रेन के किसी भी डिब्बे में नहीं ले जा सकते। AC 2-Tier, AC 3-Tier, 3AC Economy, Sleeper और General Coach के अंदर डॉग या कैट को ले जाना मना है। वहीं, वंदे भारत, शताब्दी और तेजस एक्सप्रेस जैसी चेयर कार ट्रेनों में भी पेट्स को साथ ले जाने की फैसिलिटी नहीं होती, क्योंकि इनमें 1AC कूपे या डॉग बॉक्स नहीं होते है। राजधानी एक्सप्रेस में भी पेट को साथ रखने के लिए 1AC कूपे का ही ऑप्शन होता है, क्योंकि इनमें लगेज वैन में डॉग बॉक्स की सुविधा नहीं होती। इसलिए टिकट बुक करने से पहले यह जरूर देख लें कि आपकी ट्रेन में पेट्स के लिए कौन-सा ऑप्शन अवेलेबल है।

पेट बुकिंग का किराया और टिकट

पेट्स के लिए भी रेलवे में अलग से बुकिंग और किराया देना होता है। इसका किराया पेट के वजन और जर्नी डिस्टेंस बेस पर पार्सल रेट से तय होता है। पेट को अपने साथ 1AC कूपे में ले जा रहे हैं, तो कूपे की बुकिंग और पेट की बुकिंग से जुड़े रेगुलेशन का ध्यान रखना जरूरी है। डॉग बॉक्स में सफर कराने के लिए स्टेशन के पार्सल ऑफिस में जाकर बुकिंग करानी पड़ती है। इसके लिए आपका अपना ट्रेन टिकट कन्फर्म होना चाहिए, वेटिंग या RAC टिकट के बेस पर पेट की बुकिंग नहीं की जाती।

1AC के लिए कूपे बुक रूल्स

पूरी जर्नी में पेट को साथ रखने के लिए 1AC का पूरा 2-बर्थ कूपे या 4-बर्थ केबिन बुक करना जरूरी है। सिर्फ एक या दो सीट बुक करके पेट को साथ ले जाना परेशानी खड़ी कर सकता है। ऐसा इसलिए क्योंकि आपके साथ सफर कर रहे किसी दूसरे पैसेंजर को आपके पेट से परेशानी होती है और वह शिकायत करता है, तो रेलवे के रूल के मुताबिक पेट को लगेज वैन में शिफ्ट किया जा सकता है। ऐसी सिचुएशन में आपको परेशानी के साथ-साथ एक्स्ट्रा खर्च भी उठाना पड़ सकता है और बुकिंग का रिफंड मिलना भी तय नहीं होता। इसलिए पेट के साथ आराम से सफर करना है तो पहले से पूरा कूपे बुक करने की कोशिश करें।

डॉक्यूमेंटेशन और पेट एब्डोमिनल प्रोसीजर

ट्रेन पकड़ने से पहले पेट से जुड़े जरूरी डॉक्यूमेंट अपने पास रखें। इसमें रजिस्टर्ड पशु चिकित्सक का फिटनेस या हेल्थ सर्टिफिकेट, वैक्सीनेशन रिकॉर्ड, आपका ओरिजिनल फोटो आईडी और कन्फर्म ट्रेन टिकट शामिल हैं। 1AC कूपे में पेट को साथ ले जाना है, तो जरूरत के हिसाब से रिजर्वेशन ऑफिसर के नाम एप्लीकेशन भी तैयार रखें।

इसके अलावा पेट के सफर को कंफर्टेबल बनाने के लिए उसका खाना, पानी का बाउल, जरूरी मेडिसिन, खिलौना, साफ करने वाले वाइप्स और एक छोटा कंबल साथ रखें। ट्रिप से ठीक पहले उसे बहुत ज्यादा खाना न खिलाएं। पेट डॉग बॉक्स में सफर करेगा, तो उसे कुछ दिन पहले से क्रेट में रहने की आदत डालना भी अच्छा रहेगा। इससे ट्रेन में पहुंचने के बाद उसे घबराहट और डर कम महसूस होगा। इस तरह तैयारियों के साथ होने प्यारे पेट को लेकर ट्रेन से सफर करना आसान हो जाता है। बस जर्नी से पहले उसकी जरूरतों का ध्यान रखें और ट्रैवल में भी उसके आराम और सुरक्षा को प्रायोरिटी दें। थोड़ी सी प्लानिंग से आप बिना स्ट्रेस के अपने प्यारे पेट के साथ छुट्टियों का मजा ले सकते हैं।

सस्ती नहीं फ्री में मिलेगी फ्लाइट! क्रेडिट कार्ड का ऐसा इस्तेमाल नहीं जानते होंगे आप

डेली लाइफ में हम क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल शॉपिंग, बिल पेमेंट और दूसरी जरूरतों के लिए करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इसका इस्तेमाल ट्रैवलिंग के दौरान भी काफी काम आ सकता है। सही तरीके से इस्तेमाल करने पर क्रेडिट कार्ड से मिलने वाले कुछ फायदे आपकी ट्रैवल का खर्च कम करने में मदद कर सकते हैं। फ्लाइट से सफर करने वालों के लिए यह तरीका काफी यूनिक हो सकता है। इसमें रोज के खर्च को समझदारी से इस्तेमाल करके ट्रैवल से जुड़े फायदे लिए जा सकते हैं।

ऐसे काम में आता है क्रेडिट कार्ड

क्रेडिट कार्ड से मिलने वाला वेलकम बोनस

कई क्रेडिट कार्ड नए कस्टमर को कार्ड लेने के बाद कुछ कंडीशन पूरी करने पर वेलकम बोनस देते हैं। यह बोनस रिवॉर्ड पॉइंट, एयर माइल्स या ट्रैवल वाउचर के रूप में मिल सकता है। कुछ कार्ड में तय समय के अंदर एक स्पेसिफिक अमाउंट खर्च करनी होती है। इसलिए कार्ड लेने से पहले यह देखना जरूरी है कि बोनस पाने के लिए कितनी रकम खर्च करनी होगी और उसकी वैलिडिटी कितनी है।

क्रेडिट कार्ड से माइल्स ट्रांसफर

क्रेडिट कार्ड से जमा किए गए रिवॉर्ड पॉइंट्स को कुछ मामलों में एयरलाइन के पार्टनर प्रोग्राम में ट्रांसफर किया जा सकता है। इसके बाद इन माइल्स का इस्तेमाल फ्लाइट टिकट या दूसरे ट्रैवल बेनिफिट्स के लिए किया जा सकता है। हर कार्ड और एयरलाइन के ट्रांसफर रूल अलग हो सकते हैं, इसलिए पॉइंट ट्रांसफर करने से पहले रेट और टर्म्स जरूर देख लें।

शॉपिंग से करें पॉइंट कलेक्शन

घर के बिजली-पानी के बिल, किराने का सामान, ऑनलाइन शॉपिंग या दूसरे जरूरी खर्च क्रेडिट कार्ड से करने पर रिवॉर्ड पॉइंट मिल सकते हैं। यानी जिन खर्चों को आप वैसे भी करने वाले हैं, उन पर मिलने वाले पॉइंट्स को बाद में ट्रैवल के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। लेकिन कार्ड का इस्तेमाल अपनी जरूरत और बजट के हिसाब से ही करना चाहिए।

माइलस्टोन बेनिफिट और फॉरेक्स चार्ज से सेविंग

कुछ क्रेडिट कार्ड पर साल में एक तय रकम खर्च करने पर माइलस्टोन बेनिफिट मिलते हैं। इनमें फ्लाइट वाउचर, ट्रैवल क्रेडिट या दूसरे फायदे शामिल हो सकते हैं। यदि आप वैसे ही उस रकम के आसपास खर्च करते हैं, तो यह बेनिफिट आपके लिए काम के हो सकता है। फॉरेन ट्रैवलिंग में कार्ड से पेमेंट करने पर फॉरेन करेंसी से जुड़ा एक्स्ट्रा चार्ज लग सकता है। कुछ जीरो फॉरेक्स मार्क-अप कार्ड इस खर्च को कम करने में मदद कर सकते हैं। अब्रॉड जाने से पहले कार्ड पर लगने वाले फॉरेक्स चार्ज, सालाना फीस और दूसरे चार्ज की इनफार्मेशन जरूर चेक कर लें।

ध्यान रखें ये जरूरी बातें

कार्ड की फीस चेक करें

क्रेडिट कार्ड लेने से पहले उसकी सालाना फीस, रिन्यूअल चार्ज और दूसरे शुल्क के बारे में जरूर जानकारी ले लें। कई बार रिवॉर्ड के चक्कर में कार्ड की फीस ज्यादा हो सकती है और इससे मिलने वाला फायदा कम हो सकता है। इसलिए कार्ड चुनने से पहले उसके सभी चार्ज और ट्रैवल बेनिफिट्स को अच्छी तरह समझना जरूरी है।

सिर्फ रिवॉर्ड पाने के लिए खर्च न करें

सिर्फ रिवॉर्ड पॉइंट जमा करने के लिए जरूरत से ज्यादा शॉपिंग करना सही नहीं है। कई बार ज्यादा पॉइंट पाने के चक्कर में हम ऐसी चीजों पर भी पैसे खर्च कर देते हैं, जिनकी सच में जरूरत नहीं होती। इससे ट्रैवल पर बचत होने के बजाय आपका कुल खर्च बढ़ सकता है।

बिल पेमेंट में रखें सावधानी

ट्रैवल रिवॉर्ड का फायदा तभी है जब क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल समझदारी से किया जाए। हर महीने बिल की तय तारीख से पहले पूरा पेमेंट चुकाने की कोशिश करें। बिल का पेमेंट देर से होता है या इंटरेस्ट देना पड़ता है, तो रिवॉर्ड से मिलने वाला फायदा कम हो सकता है।

क्रेडिट कार्ड को सिर्फ खर्च करने का जरिया समझने के बजाय सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो यह आपकी यात्रा की प्लानिंग में भी काम आ सकता है। जरूरत है तो बस थोड़ी समझदारी और सावधानी की। अपनी जरूरत के हिसाब से इसका इस्तेमाल करें और रूल को समझकर ही फायदा उठाएं, ताकि ट्रैवल का खर्च संभालना आपके लिए आसान हो सके।

Stocks to Watch: 11 स्टॉक्स; Biocon, Raymond और Innovision समेत ये शेयर आज 9 सितंबर को फोकस में

Stocks to Watch: एशियाई बाजारों से मिले-जुल रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में लाल शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। गिफ्ट निफ्टी फिलहाल 66.00 प्वाइंट्स यानी 0.28% की गिरावट के साथ 23,647.50 पर है। एक कारोबारी दिन पहले 8 सितंबर को निफ्टी की वीकली एक्सपायरी के दिन सेंसेक्स (Sensex) 555.23 प्वाइंट्स यानी 0.73% की गिरावट के साथ 75,577.58 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 144.05 प्वाइंट्स यानी 0.61% की फिसलन के साथ 23,635.10 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Biocon

सीएनबीसी-टीवी18 की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय प्राइवेट इक्विटी फर्म ट्रू नॉर्थ की कंपनी एक्टिव पाइन ब्लॉक डील के जरिए बायोकॉन के पेड-अप इक्विटी का लगभग 1% हिस्सा (1.66 करोड़ शेयर तक) बेच सकती है। ₹638.4 करोड़ की इस ब्लॉक डील के लिए फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹385 तय किया गया है।

Laxmi Organic Industries

राजन वेंकटेश ने नए मौकों की तलाश के लिए लक्ष्मी ऑर्गेनिक के एमडी और सीईओ पद से इस्तीफा दे दिया है, जो 13 नवंबर 2026 से प्रभावी होगा। बोर्ड ने कंपनी के मौजूदा एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर हर्षवर्धन गोयनका को 14 नवंबर 2026 से पांच साल के लिए एमडी और सीईओ नियुक्त किया है।

Innovision

इनोविजन को ₹243.6 करोड़ का LoA (लेटर ऑफ अवॉर्ड) मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट मध्य प्रदेश में NH-3 के इंदौर-देवास सेक्शन को छह-लेन का बनाने के लिए IDTL A और IDTL B टोल प्लाजा पर यूजर फीस कलेक्शन एजेंसी नियुक्त करने और NH-39 के झांसी-खजुराहो सेक्शन को चार-लेन का बनाने के लिए पचवारा टोल प्लाजा के लिए है। इस ऑर्डर में आस-पास के टॉयलेट ब्लॉक की देखरेख और मेंटेनेंस भी शामिल है।

Enviro Infra Engineers

एनवायरो इंफ्रा इंजीनियर्स की सब्सिडियरी सुयोग ऊर्जा को टाटा पावर रिन्यूएबल एनर्जी से ₹189.99 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट महाराष्ट्र के परली में 180 MW के NTPC विंड पावर प्रोजेक्ट के डेवलपमेंट के लिए EPC टर्न्की वर्क पूरा करने के लिए है।

Moschip Technologies

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के मुताबिक मॉसचिप टेक को वायव्य लैब्स (Vayavya Labs) की 73% इक्विटी शेयर कैपिटल के प्रस्तावित अधिग्रहण से जुड़े विवाद के मामले में 15 सितंबर से पहले ₹200 करोड़ की अतिरिक्त सिक्योरिटी जमा करने का निर्देश दिया गया है।

Raymond

रेमंड के बोर्ड ने मिनर्वा वेंचर्स फंड को प्राइवेट प्लेसमेंट के आधार पर प्रेफरेंशियल अलॉटमेंट के जरिए 33.29 लाख कन्वर्टिबल वारंट जारी करके ₹214.71 करोड़ का फंड जुटाने को मंजूरी दी है। हर वारंट ₹645 के भाव पर जारी होंगे।

Fermenta Biotech

फर्मेंटा बायोटेक ने फर्मेंटेड फूड्स में नैचुरल इन-सिटू विटामिन B12 फोर्टिफिकेशन की टेक्नोलॉजी के कमर्शियलाइजेशन के लिए वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (VIT), वेल्लोर के साथ एक एक्सक्लूसिव लाइसेंस एग्रीमेंट साइन करने का ऐलान किया है।

Great Eastern Shipping Company

ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी ने लगभग 81,609 DWT क्षमता वाला एक पुराना यानी सेकंड-हैंड कामसारमैक्स ड्राई बल्क कैरियर खरीदने का कॉन्ट्रैक्ट किया है। 2019 में बने इस जहाज के वित्त वर्ष 2027 की तीसरी तिमाही अक्टूबर-दिसंबर 2026 में कंपनी के बेड़े में शामिल होने की उम्मीद है। इसके लिए पूरी फंडिंग कंपनी के अपने इंटरनल फंड से की जाएगी।

Sanofi India

सनोफी इंडिया ने अपने ऊपर आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने के लिए याचिका दायर की थी, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया। यह मामला 2012 और 2015 के बीच भाभा एटॉमिक रिसर्च सेंटर (BARC), मैसूर को फार्मा सप्लाई और खरीद के फैसलों को गलत तरीके से प्रभावित करने के लिए BARC के एक कर्मचारी के साथ कथित मिलीभगत के आरोपों से जुड़ा है। फिलहाल आपराधिक शिकायत का मामला ट्रायल के चरण में है।

Shadowfax Technologies

ग्लोबल अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट फर्म टीपीजी के निवेश वाली न्यूवेस्ट एशिया फंड IV (सिंगापुर) ने शैडोफैक्स के 80 लाख शेयर (1.36% हिस्सेदारी) ₹250.03 के भाव पर बेच दिए। इसके साथ ही न्यूवेस्ट ने मौजूदा तिमाही में शैडोफैक्स में लगभग 3.5% हिस्सेदारी बेच दी है, जिससे उसकी हिस्सेदारी जून 2026 तक 11.53% से घटकर 8.03% रह गई है। वहीं दूसरी तरफ हांगकांग की इन्वेस्टमेंट फर्म ऑक्सबो कैपिटल मैनेजमेंट के मैनेजमेंट वाली ऑक्सबो मास्टर फंड ने प्रति शेयर ₹250 के भाव पर ₹119.6 करोड़ में 47.85 लाख शेयर (0.81% हिस्सेदारी) और खरीदे। इससे पहले 6 अगस्त 2026 को भी इसने 1.18% हिस्सेदारी खरीदी थी, और अब नई खरीदारी के बाद कंपनी में ऑक्सबो मास्टर फंड की हिस्सेदारी बढ़कर 2% हो गई है

Rays of Belief

लिस्टिंग के दिन सच्चियाय स्टॉक ब्रोकिंग ने ₹6.57 करोड़ में रेज ऑफ बिलीफ के 2.75 लाख शेयर, कैपेशियस वेल्थ मैनेजमेंट एलएलपी ने ₹5.37 करोड़ में 2.25 लाख शेयर, संतोष भंसाली एचयूएफ ने ₹4.54 करोड़ में 1.9 लाख शेयर और प्रज्ञा मर्केंटाइल ने ₹9.8 करोड़ में 4.1 लाख शेयर खरीदे। इन चारों ने मिलकर प्रति शेयर ₹239 के भाव पर कंपनी में 5.26% हिस्सेदारी खरीदी। वहीं लॉन्गथ्राइव कैपिटल वीसीसी-ट्रेंडव्यू कैपिटल फंड ने ने समान भाव पर रेज ऑफ बिलीफ के 1.43 लाख शेयर ₹3.42 करोड़ में बेच दिए।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

एक्स-डिविडेंड: आस्था स्पिनटेक्स, ऐकनिट इंडस्ट्रीज, एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड ब्रुअरीज, सेंचुरी प्लाईबोर्ड्स (इंडिया), एम्पायर इंडस्ट्रीज, फोर्स मोटर्स, गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स, जेबीएम ऑटो, ज्योति रेजिन्स एंड एढेसिव्स, क्रोनॉक्स लैब साइंसेज, नेपेरोल इन्वेस्टमेंट्स, नेशनल फिटिंग्स, परफेक्टपैक, प्रिंस पाइप्स एंड फिटिंग्स, शेयर इंडिया सिक्योरिटीज, श्री दिग्विजय सीमेंट कंपनी, ट्रैवल फूड सर्विसेज, WEP सॉल्यूशंस, वर्थ पेरिफेरल्स

एक्स-इनकम डिस्ट्रीब्यूशन: ऑल्टियस टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर ट्रस्ट

F&O बैन: आज आईनॉक्स विंड, कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, मणप्पुरम फाइनेंस और SAIL में एफएंडओ की नई पोजिशन नहीं ले पाएंगे।

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ईरान का अमेरिका पर बड़ा पलटवार! 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

फ्लाइट टिकट बुक करते वक्त सीट चुनने में न करें जल्दबाजी, ये टिप्स आएंगी काम!

फ्लाइट में सीट चुनना छोटी बात लग सकती है, लेकिन सही सीट सफर को काफी आरामदायक बना सकती है। कुछ पैसेंजर को खिड़की के पास बैठकर बाहर का नजारा देखना और सोना पसंद होता है, तो कुछ लोग ऐसी सीट चाहते हैं जहां से आसानी से उठकर वॉशरूम जा सकें। इसलिए सीट का चुनाव आपकी जरूरत और सफर के तरीके के हिसाब से करना बेहतर रहता है।

आप भी फ्लाइट टिकट बुक करते समय विंडो, आइल और मिडिल सीट को लेकर कंफ्यूज हो जाते हैं, तो इनके फायदे और नुकसान जान लेना चाहिए। इससे छोटी हो या लंबी फ्लाइट, आप अपनी सुविधा के हिसाब से सही सीट चुन पाएंगे।

1. आइल सीट

आइल यानी गलियारे वाली सीट उन लोगों के लिए अच्छी रहती है जिन्हें सफर के दौरान बार-बार उठना पड़ता है। यहां से वॉशरूम जाने, पैर फैलाने या ऊपर रखे सामान तक पहुंचने में आसानी रहती है। फ्लाइट लैंड होने के बाद बाहर निकलना भी थोड़ा आसान हो सकता है। लेकिन इस सीट से गुजरने वाले पैसेंजर और सर्विस ट्रॉली आपको परेशान कर सकते हैं।2. मिडिल सीट

मिडिल सीट आमतौर पर पैसेंजर की पहली पसंद नहीं होती, लेकिन इसके भी कुछ फायदे हैं। यदि आप किसी दोस्त या परिवार के सदस्य के साथ सफर कर रहे हैं, तो साथ बैठने के लिए यह सीट काम आ सकती है। इसके अलावा, आम तौर पर मिडिल सीट पर बैठे पैसेंजर को दोनों आर्मरेस्ट इस्तेमाल करने की फैसिलिटी देने की बात कही जाती है। लेकिन दो पैसेंजर के बीच बैठने से जगह थोड़ी कम महसूस हो सकती है।3. विंडो सीट

विंडो से फ्लाइट के बाहर का सीन देखना है तो विंडो सीट आपके लिए परफेक्ट हो सकती है। इसमें आप खिड़की से सिर टिकाकर आराम कर सकते हैं और आसपास के पैसेंजर की आवाजाही भी कम परेशान करती है। लेकिन वॉशरूम जाने के लिए आपको साथ बैठे पैसेंजर से बाहर निकलने के लिए कहना पड़ सकता है।4. लंबी फ्लाइट के लिए ऐसे चुनें सीट

लंबी फ्लाइट में सीट चुनना और भी जरूरी हो जाता है। आपका ज्यादातर समय सोने में गुजरने वाला है, तो विंडो सीट कम्फर्टेबल रह सकती है। वहीं, बार-बार वॉशरूम जाने या बीच-बीच में चलने की जरूरत हो तो आइल सीट ज्यादा सुविधाजनक होगी। इसलिए लॉन्ग जर्नी में अपनी जरूरत के हिसाब से सीट चुनें।सीट बुक करने से पहले इन बातों का रखें ध्यान

सीट चुनते समय सिर्फ विंडो या आइल ही न देखें, बल्कि फ्लाइट का रूट, सफर की अवधि और एयरक्राफ्ट का सीट मैप भी देख लें। आपको शांति चाहिए तो वॉशरूम या गैली के बिल्कुल पास वाली सीट से बचना बेहतर हो सकता है। सीट पहले से बुक करने पर पसंद की जगह मिलने की संभावना भी ज्यादा रहती है।

यदि आपका बजट थोड़ा ज्यादा है, तो आप लॉन्ग लेग स्पेस वाली सीट भी ले सकते हैं। इसमें पैरों को फैलाने के लिए ज्यादा जगह मिलती है, जिससे खासकर लंबी फ्लाइट में बैठना ज्यादा कम्फर्टेबल हो सकता है।सही सीट आपकी पूरी फ्लाइट को ज्यादा आरामदायक बना सकती है। इसलिए टिकट बुक करते समय सिर्फ खिड़की का नजारा या सीट की कीमत न देखें, बल्कि यह भी सोचें कि सफर के दौरान आपको कितनी बार उठना पड़ेगा, आराम करना है या सोना है और आपके साथ कौन ट्रैवल कर रहा है। थोड़ी सी समझदारी से चुनी गई सीट लॉन्ग जर्नी की थकान को कम कर सकती है और सफर को ज्यादा सुकूनभरा बना सकती है।

कोडिंग छोड़कर जंगलों में रहकर, जानवरों से सीखा बिजनेस और खड़ा कर दिया करोड़ों का स्टार्टअप!

13 साल तक टेक्नोलॉजी की दुनिया में काम करने के बाद हैदराबाद के एक इंजीनियर ने अपना करियर बदलने का फैसला किया। उन्होंने IT की नौकरी छोड़कर वाइल्डलाइफ के अपने पुराने शौक को ही बिजनेस का रूप दे दिया। इस तरह ‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ की शुरुआत हुई, जो जानवरों और नेचर से मिलने वाली सीख को कॉर्पोरेट ट्रेनिंग से जोड़ती है। बिना किसी बाहरी फंडिंग के शुरू हुई इस कंपनी ने पहले ही साल करीब 80 लाख रुपये का रेवेन्यू कमाया।

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टेक से वाइल्डलाइफ तक

2010 में इलेक्ट्रॉनिक्स और कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने हैदराबाद, चेन्नई और मुंबई में काम किया। इसके बाद 2014 में डेटा साइंस में मास्टर्स करने के लिए अमेरिका चले गए। IT में काम करते हुए भी उनका नेचर और जानवरों से प्यार कम नहीं हुआ। वीकेंड पर वह DSLR कैमरा लेकर जंगल और नेशनल पार्क घूमने निकल जाते थे। धीरे-धीरे भारत, अमेरिका और अफ्रीका के कई नेशनल पार्कों में ट्रैवल ने उनकी इस दिलचस्पी को और बढ़ा दिया।

 

 

फोटोग्राफी से मिला नया बिजनेस विजन

शुरुआत में वाइल्डलाइफ फोटोग्राफी उनके लिए जानवरों की फोटो लेने का एक शौक था। लेकिन बाद में उन्हें समझ आया कि जंगल सिर्फ खूबसूरत तस्वीरों के लिए नहीं, बल्कि जानवरों का व्यवहार, उनका एक-दूसरे के साथ जुड़ाव और मुश्किल कंडीशन में उनका सर्वाइव करना इंसानों को भी बहुत कुछ सिखा सकता है। इसी सोच ने आगे चलकर उनके बिजनेस आइडिया की नींव रखी।

 

 

जंगली जानवरों ने सिखाया कॉर्पोरेट मैनेजमेंट

‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ में जंगल और जानवरों के उदाहरणों के जरिए कॉर्पोरेट टीमों को कई जरूरी बातें सिखाई जाती हैं। जैसे, शेरों से टीमवर्क, चींटियों से काम बांटने यानी डेलिगेशन और मधुमक्खियों से खतरे के समय मिलकर काम करने की सीख ली जाती है। इन उदाहरणों को लीडरशिप, टीमवर्क, मुश्किल समय में मजबूती से टिके रहने और माइंडफुलनेस जैसे सब्जेक्ट से जोड़ा जाता है।

 

 

जंगल बना ट्रेनिंग क्लासरूम

यह बिजनेस सिर्फ ऑफिस में बैठकर होने वाली सामान्य ट्रेनिंग तक सीमित नहीं है। कंपनी कॉर्पोरेट वर्कशॉप के साथ-साथ कई दिनों तक चलने वाले जंगल के एक्सपीरियंस भी कराती है। इन प्रोग्राम्स में टीम के लोगों को नेचर के पास ले जाकर ऐसी एक्टिविटी कराई जाती हैं, जिनसे वे लीडरशिप और मुश्किल हालात में सही फैसला लेने जैसी चीजें सीख सकें। इस तरह जंगल एक तरह से उनका अलग और अनोखा ट्रेनिंग क्लासरूम बन जाता है।

 

लाखों के आइडिया का हिट फॉर्मूला

इस अनोखे बिजनेस आइडिया को कॉर्पोरेट कंपनियों से अच्छा रिस्पॉन्स मिला। रिपोर्ट के मुताबिक, बिना इन्वेस्टमेंट के शुरू हुई ‘वाइल्डलाइफ व्हिस्परर्स’ ने अपने पहले साल में करीब 80 लाख रुपये का रेवेन्यू कमाया। कंपनी ने परफेटी वैन मेले और सीमेंस डिजिटल जैसी कंपनियों के साथ काम किया है। इस बिजनेस में टेक्नोलॉजी और कॉर्पोरेट एक्सपेरिएंस को नेचर और वाइल्डलाइफ के जुनून के साथ जोड़कर एक बिल्कुल अलग तरह का मॉडल तैयार किया गया है।

 

यह कहानी बताती है कि करियर शिफ्ट करने के साथ अपने जुनून पर भरोसा करना भी जरूरी है। सही सोच और मेहनत के साथ पसंद के काम को भी एक सफल बिजनेस बनाया जा सकता है। नेचर से सीख लेकर शुरू किया गया यह अनोखा सफर दूसरों को भी अपनी स्किल और इंटरेस्ट को नए तरीके से देखने के लिए इंस्पिरेशन देता है।

सीएम डॉ. मोहन यादव ने की शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट के साथ मीटिंग, एमपी के शिपिंग-लॉजिस्टिक्स में मिल सकता है सपोर्ट

सीएम डॉ. मोहन यादव ने की शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट के साथ मीटिंग, एमपी के शिपिंग-लॉजिस्टिक्स में मिल सकता है सपोर्ट

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दुबई में आयोजित 'एआईएम कांग्रेस-2026' (Annual Investment Meeting) के तीसरे दिन 8 सितंबर को ताज दुबई में शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर से अहम मुलाकात की। दोनों के बीच शिपिंग-लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन सहित कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की। बैठक में मध्यप्रदेश के हर सेक्टर में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कपूर को अगले साल होने वाली ग्लोबल इंवेस्टर समिट (GIS) 2027 के लिए आमंत्रित किया। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शराफ ग्रुप के प्रेसिडेंट-सीईओ श्याम कपूर के बीच हुई बैठक में मध्यप्रदेश में रेल-साइडिंग युक्त लॉजिस्टिक्स पार्क स्थापित करने के प्रस्ताव पर चर्चा हुई। इसके लिए लगभग 30-50 मिलियन अमेरिकी डॉलर (250-450 करोड़ रुपये) के निवेश का प्रस्ताव है। इस परियोजना से लगभग 300-600 लोगों के लिए रोजगार के अवसर सृजित होने की संभावना है। बैठक में बताया गया कि कंपनी इंदौर और पीथमपुर क्षेत्र में निवेश करने के लिए इच्छुक है। साथ ही, मध्यप्रदेश के अन्य संभावित स्थानों पर भी निवेश की संभावनाएं तलाशने के लिए तैयार है।

 

बैठक में इस प्रस्ताव पर हुई चर्चा-बैठक में मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्क, आधुनिक वेयरहाउसिंग और रीजनल डिस्ट्रीब्यूशन सेंटर्स का विकास किए जाने पर चर्चा हुई। बैठक में कहा गया कि कंपनी एग्रीकल्चर, फूड, फार्मास्यूटिकल्स और ऑर्गनाइज़्ड रिटेल सप्लाई चेन के लिए कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करेगी। मध्यप्रदेश के उत्पादों के लिए एक्सपोर्ट-ओरिएंटेड कार्गो कंसॉलिडेशन और इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन तय करेगी। प्रमुख कमर्शियल और डेस्टिनेशन लोकेशन्स में रिटेल, हॉस्पिटैलिटी और टूरिज़्म इन्वेस्टमेंट पर ध्यान देगी। कंपनी कुशल लॉजिस्टिक्स ऑपरेशन्स के लिए सप्लाई-चेन टेक्नोलॉजी और वर्कफोर्स डेवलपमेंट पार्टनरशिप करेगी। साथ ही, स्थानीय ट्रांसपोर्टर्स, वेंडर्स और सर्विस प्रोवाइडर्स को ग्रुप के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम से जोड़ेगी।

 

कंपनी के पास कई स्टोरेज यार्ड-कंपनी के प्रेसिडेंट कपूर ने बैठक में बताया कि कंपनी भारत में अपनी भारतीय सहायक कंपनी हिंद टर्मिनल्स प्राइवेट लिमिटेड (HTPL) के माध्यम से मौजूद है। कंपनी मल्टी-मॉडल एग्री-लॉजिस्टिक्स पार्कों की स्थापना एवं संचालन, रेल-रोड परिवहन तथा थर्ड-पार्टी लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में कार्यरत है। एचटीपीएल इनलैंड कंटेनर डिपो के संचालन के साथ-साथ ताजे कृषि उत्पादों के संरक्षण के लिए कोल्ड-चेन समाधान भी उपलब्ध कराती है। कंपनी भारत में 35 मालवाहक ट्रेनों और लगभग 900 ट्रकों का संचालन कर रही है। कंपनी मध्यप्रदेश में अपना संचालन एवं प्रतिष्ठान स्थापित करने के लिए विशेष रूप से इच्छुक है। कंपनी के पास देश में पर्याप्त स्टोरेज यार्ड उपलब्ध हैं। कंपनी 69 देशों में काम कर रही है। उसका मुख्यालय दुबई है। कंपनी शिपिंग-लॉजिस्टिक्स, सप्लाई चेन, रिटेल, ट्रैवल एवं टूरिज्म, इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, फायनेंशियल सर्विसेज, हॉस्पिटेलिटी और रियल इस्टेट सेक्टर में काम करती है।