2027 Kawasaki Versys 650 भारत में लॉन्च, Candy Lime Green कलर में आई बाइक, जानें कीमत और फीचर्स

अगर आप एक प्रीमियम और स्पोर्टी बाइक खरीदने की सोच रह हैं, तो Kawasaki India ने 2027 Versys 650 को ₹8.63 लाख (एक्स-शोरूम) की कीमत पर लॉन्च कर दिया है, जिसमें सिर्फ नया ‘Candy Lime Green’ पेंट स्कीम का अपडेट दिया गया है। मैकेनिकल और इक्विपमेंट के मामले में यह स्पोर्ट-टूरर पहले जैसी ही है, और इसकी डिलीवरी अगस्त के आखिर तक शुरू होने की उम्मीद है।

नए कलर ऑप्शन

MY27 Kawasaki Versys 650 सिर्फ नए ‘Candy Lime Green’ कलर में उपलब्ध है, जो पिछली MY26 मोटरसाइकिल के कलर की जगह लेगा। वहीं, नए पेंट से कावासाकी की जानी-पहचानी हरी पहचान बनी हुई है, जबकि मोटरसाइकिल की बाकी स्टाइलिंग में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

इसके अलावा, बाइक के इंजन, चेसिस, इलेक्ट्रॉनिक्स और फीचर्स में कोई अपग्रेड नहीं किया गया है। Kawasaki ने इसकी कीमत भी भी 8.63 लाख रुपये (एक्स-शोरूम) ही रखी है, जिसका मतलब है कि 2027 का यह अपडेट मुख्य रूप से उन राइडर्स के लिए है जो लेटेस्ट मॉडल ईयर और नई कलर स्कीम चाहते हैं।

Kawasaki Versys 650: मैकेनिक्स

2027 Kawasaki Versys 650 में वही 649cc, लिक्विड-कूल्ड, पैरेलल-ट्विन इंजन इस्तेमाल किया गया है। यह इंजन 8,500 rpm पर 67 hp की पावर और 7,000 rpm पर 61 Nm का टॉर्क देता है। इसमें छह-स्पीड गियरबॉक्स और असिस्ट-एंड-स्लिपर क्लच स्टैंडर्ड फीचर के तौर पर मिलते हैं।

बाइक को ट्यूबलर डायमंड फ्रेम पर तैयार किया गया है। सस्पेंशन के लिए इसमें 150mm ट्रैवल वाला 41mm का टेलीस्कोपिक फ्रंट फोर्क और 145mm ट्रैवल वाला रियर मोनोशॉक दिया गया है। रियर यूनिट में रिमोट प्रीलोड एडजस्टर भी है, जो सामान या पीछे बैठने वाले यात्री (पिलियन) के साथ यात्रा करने वाले मालिकों के लिए एक काम का फीचर है।

फीचर्स

Kawasaki Versys 650 में एडजस्टेबल विंडस्क्रीन, फुल-LED लाइटिंग, ट्रैक्शन कंट्रोल और स्मार्टफोन कनेक्टिविटी के साथ 4.3-इंच का TFT कलर डिस्प्ले जैसे फीचर्स मिलते हैं।

इसमें 21-लीटर का फ्यूल टैंक है, जो मोटरसाइकिल की टूरिंग क्षमता को बेहतर बनाता है। वहीं, टैंक फुल होने पर Versys 650 का वजन 220kg हो जाता है। कम हाइट वाले राइडर्स के लिए 845mm की सीट हाइट एक अहम बात हो सकती है, हालांकि इसका 170mm का ग्राउंड क्लीयरेंस खराब सड़कों, स्पीड ब्रेकर और ऊबड़-खाबड़ रास्तों पर चलने में मदद करेगा।

अपडेटेड Versys 650 भारत के मिडिलवेट टूरिंग बाइक सेगमेंट में एक अलग जगह रखती है। इसकी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी बाइक्स में Honda NX500 शामिल है, जिसकी कीमत ₹7.44 लाख है। हालांकि, NX500 में कम क्षमता वाला इंजन मिलता है और इसका फोकस ज्यादा एडवेंचर राइडिंग पर है।

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पानी की कमी के लक्षण और उसे दूर करने के 5 असरदार घरेलू तरीके, जानिए पांच मिनट में

ज्यादा पानी पीने के लिए किसी नियम की जरूरत नहीं होती। दिनभर थोड़ा-थोड़ा पानी पीना, पानी वाली चीजें खाना और शरीर के संकेतों पर ध्यान देना सबसे आसान तरीका है। जाने शरीर के लिए पर्याप्त पानी पीना क्यों जरूरी है, पानी की मात्रा कैसे बढ़ाई जा सकती है और किन आसान आदतों को अपनाकर पूरे दिन हाइड्रेट रहा जा सकता है।

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कम पानी पीने के नुकसान

पानी शरीर के लगभग हर अंग के सही काम करने के लिए जरूरी है। यह शरीर का टेम्परेचर कंट्रोल रखता है, ब्लड सर्कुलेशन बेहतर बनाता है, पाचन में मदद करता है और किडनी के जरिए शरीर से गंदगी बाहर निकालने में सहायता करता है। पर्याप्त पानी पीने से बॉडी सेल्स भी सही तरीके से काम करती हैं। पानी की कमी होने पर थकान, सिरदर्द, ध्यान लगाने में परेशानी, कब्ज और होंठ सूखने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

सही समय

एक्सपर्ट के अनुसार, पानी पीने की आदत धीरे-धीरे बनानी चाहिए। सुबह उठते ही एक गिलास पानी पिएं, हर भोजन और स्नैक के साथ पानी लें, हमेशा अपने पास पानी की बोतल रखें और जरूरत हो तो मोबाइल में रिमाइंडर लगाएं। सादा पानी पसंद न आए तो उसमें नींबू, खीरा, पुदीना या नेचुरल फ्लेवर मिलाकर पी सकते हैं। इससे पानी पीना आसान हो जाता है।

हाइड्रेटेड फूड्स

हाइड्रेशन सिर्फ पानी पीने से ही नहीं होता, बल्कि कई फूड्स भी इसमें मदद करते हैं। तरबूज, संतरा, खीरा, टमाटर, दही और सूप जैसे फूड्स में पानी की मात्रा ज्यादा होती है। इन्हें रोजाना की डाइट में शामिल करने से शरीर को अतिरिक्त तरल मिलता है और पानी की जरूरत पूरी करने में मदद मिलती है।

डिहाइड्रेशन

यदि शरीर में पानी की कमी होने लगे तो प्यास ज्यादा लगना, मुंह सूखना, गहरे पीले रंग का पेशाब, कम पेशाब आना, चक्कर आना, सिरदर्द, कमजोरी और ध्यान न लगना जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। पेशाब का हल्का पीला रंग सामान्य हाइड्रेशन का संकेत माना जाता है, जबकि गहरा रंग इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर को ज्यादा पानी की जरूरत है।

लक्षण

कई लोग बिजी शेड्यूल, ट्रैवलिंग, बार-बार बाथरूम जाने से बचने की आदत या सादा पानी पसंद न आने की वजह से पर्याप्त पानी नहीं पीते। वहीं, बुखार, उल्टी, दस्त, ज्यादा पसीना आना, गर्म मौसम और कुछ दवाएं भी शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकती हैं। इसलिए मौसम और अपनी फिजिकल एक्टिविटी के अनुसार पानी का सेवन बढ़ाना जरूरी होता है।

सुरक्षित तरीके से हाइड्रेट

एक्सपर्ट का कहना है कि एक बार में बहुत ज्यादा पानी पीने के बजाय पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पानी पीना बेहतर होता है। जरूरत से ज्यादा पानी पीना भी नुकसानदायक हो सकता है। अपनी उम्र, मौसम, फिजिकल एक्टिविटी और स्वास्थ्य के अनुसार पानी पिएं।

डॉक्टर से सलाह

अगर पर्याप्त पानी पीने के बाद भी बार-बार प्यास लगे, बार-बार डिहाइड्रेशन हो, बहुत कम पेशाब आए, अचानक वजन कम होने लगे, धुंधला दिखाई दे या लगातार कमजोरी और चक्कर महसूस हों, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए। ये लक्षण डायबिटीज, किडनी की बीमारी, हार्मोन संबंधी समस्या या किसी अन्य स्वास्थ्य परेशानी का संकेत हो सकते हैं।

24×7 पार्टी और नाइटलाइफ सिटी बनेगी दिल्ली, मास्टर प्लान 2047 में 24-घंटे इकोनॉमी का पूरा ब्लूप्रिंट

देश में भी नाइटलाइफ मुंबई जैसी हो जाए तो क्या आपको पसंद आएगी? असल में दिल्ली मास्टर प्लान 2047 के लॉन्च होने के बाद दिल्ली को 24 घंटे की इकोनॉमी में बदलने का प्लान सामने आया है। इस नए प्लान के लागू होने के बाद दिल्ली के रेस्टोरेंट्स, बाजार, सांस्कृतिक केंद्र और वर्किंग प्लेस जैसी जगहों ट्रेडिशनल वर्किंग आवर के काफी बाद तक गुलजार और रोशन रह सकेंगे।

मास्टर प्लान 2047 के तहत 24-घंटे वाले शहर के कॉन्सेप्ट पर आगे बढ़ने की तैयारी है। इसके लिए दिल्ली भर में ऐसे प्रमुख नोड्स, परिसर और सर्किटों की पहचान की गई है। इन जगहों को ऐसे डेवलप किया जाएगा ताकि अंधेरा होने के बाद भी यहां तमाम एक्टिविटी सेफ तरीके से चलती रहें। नाइट लाइफ को बढ़ावा देने का ये पूरा प्रोसेस अंततः दिल्ली की अर्थव्यवस्था को ही मजबूत करने का काम करेगा।

ये इलाके बनेंगे दिल्ली के नए नाइटलाइफ जोन

दिल्ली के कुछ सबसे बड़े और लोकप्रिय इलाके इस नई नाइट-टाइम इकोनॉमी को रफ्तार देने का काम करेंगे। मास्टर प्लान के मुताबिक इन प्रमुख क्षेत्रों में कनॉट प्लेस शामिल है। सीपी पहले से ही नाइटलाइफ का एक बड़ा केंद्र है और अब यहां प्लानिंग की मदद से और बेहतर नाइट लाइफ की सुविधाएं डेवलप की जाएंगी। इसके अलावा हौज खास के अर्बन विलेज और उसके बाजार में कैफे, बार और सांस्कृतिक स्थलों के खुलने का समय बढ़ाया जा सकता है।

ऐतिहासिक क्षेत्र चांदनी चौक यानी पुरानी दिल्ली को एक हेरिटेज और कल्चरल नाइट सर्किट के रूप में डेवलप किया जाएगा। वहीं इंडिया गेट के लॉन को शाम और रात के समय इस्तेमाल के लिए एक पब्लिक हब बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। इसके साथ ही निजामुद्दीन और चिराग दिल्ली को सांस्कृतिक सर्किट नोड्स के रूप में चिह्नित किया गया है जबकि महरौली को देर रात के सार्वजनिक जीवन के लिए एक और अर्बन विलेज हब के रूप में चुना गया है। प्लान में यह भी प्रस्ताव है कि पुरानी खदानों, लैंडफिल, ऐश डैक्स और बेकार पड़े थर्मल प्लांटों जैसी खाली पड़ी जमीनों का जीर्णोद्धार करके समय के साथ उन्हें सार्वजनिक या इवेंट स्पेस में बदला जाए।

जमीन पर क्या-क्या बदलेगा और क्या सुविधाएं मिलेंगी?

मास्टर प्लान 2047 सिर्फ दुकानों के देर रात तक खुले रहने तक सीमित नहीं है बल्कि यह शहर के पूरे एक्सपीरियंस को बदलने वाला साबित हो सकता है। योजना के तहत संबंधित सरकारी एजेंसियों की इजाजत से रेस्टोरेंट्स, रिटेल स्टोर्स, खेल और सांस्कृतिक सुविधाओं के संचालन के समय को बढ़ाया जाएगा। दिल्ली के बाजारों में पैदल चलने योग्य एक्टिव ट्रैवल एरिया डेवलप किए जाएंगे। इन्हें इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि लोग लंबे समय तक घूम सकें, खरीदारी कर सकें और समय बिता सकें।

कलाकारों, विक्रेता संघों और कम्युनिटी के साथ मिलकर थीम आधारित नाइट वॉक, सीजनल फेस्टिवल और डेडिकेटेट नाइक मार्केट डेवलप किए जाएंगे। इसके अलावा अंधेरा होने के बाद लोगों की आवाजाही बढ़ाने के उद्देश्य से ग्रीन-ब्लू कॉरिडोर और हेरिटेज सर्किट तैयार किए जाएंगे।

रात के समय आवाजाही और पब्लिक ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था

देर रात तक चलने वाले शहर के लिए यह सबसे जरूरी है कि लोग सुरक्षित तरीके से अपने घरों तक पहुंच सकें। इसी बात को ध्यान में रखते हुए मास्टर प्लान पब्लिक ट्रांसपोर्ट पर भी काफी फोकस है। अंतिम ट्रेन छूटने के बाद लोगों को फंसे रहने से बचाने और नाइट-टाइम इकोनॉमी को रियलिस्टिक बनाने के लिए एक्सटेंडेड मेट्रो सर्विस के अलावा ऐसी व्यवस्थाएं देने की तैयारी है जो 24 घंटे चलें।

क्या दिल्ली वाकई नाइट लाइफ के सपने को साकार कर पाएगी?

इस पूरी महत्वाकांक्षी योजना की सफलता पूरी तरह से इस बात पर डिपेंड करती है कि इसे लागू कैसे कराया जाता है। इसके लिए सुरक्षा व्यवस्था, पुलिसिंग, स्ट्रीट लाइटिंग और विभिन्न नागरिक एजेंसियों के बीच बेहतर तालमेल की सबसे पहले जरूरत होगी। अगर रात 2 बजे तक कोई बाजार खुला रहता है लेकिन लोग वहां तक पहुंचने या घर लौटने में सुरक्षित महसूस नहीं करते तो इसका कोई मतलब नहीं रह जाएगा। वैसे अगर यह योजना सही तरीके से जमीन पर उतरती है तो इसके बेहद पॉजिटिव रिजल्ट देखने को मिल सकते हैं। इससे हॉस्पिटैलिटी, रिटेल, एंटरटेनमेंट और क्रिएटिव इकोनॉमी में नए जॉब और बिजनेस के अवसर पैदा होंगे। इनकी मदद से दिल्ली दुनिया के उन वैश्विक शहरों से मुकाबला कर सकेगी जो कभी रात में बंद नहीं होते।

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Apoorva Mukhija: भारत छोड़ने के बाद अपूर्वा मुखिजा ने शेयर की पहली पोस्ट, न्यूयॉर्क MBA डेस्टिनेशन का चला पता

Apoorva Mukhija: अपूर्वा मुखिजा हाल ही में ‘अनट्रिगर्ड बाय अमीनजैज’ (Untriggered by AminJaz) पॉडकास्ट में नजर आईं और बताया कि वह अब भारत में नहीं रहती हैं। इन्फ्लुएंसर ने बताया कि वह MBA करने के लिए न्यूयॉर्क चली गई हैं, जो उस शहर में रहने की उनकी लंबे समय से चली आ रही इच्छा को भी पूरा करता है।

हाल ही में एक इंस्टाग्राम स्टोरी में, उन्होंने न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी कैंपस के अंदर खड़े होकर अपनी एक तस्वीर पोस्ट की। इन्फ्लुएंसर शहर में रहने, MBA करने, डॉर्म में रहने और स्टूडेंट लाइफ में वापस लौटने को लेकर उत्साहित हैं।

अपूर्वा मुखिजा ने MBA के लिए न्यूयॉर्क यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया

इन्फ्लुएंसर को कैंपस के अंदर पोज देते हुए देखा गया, जिसमें उन्होंने स्ट्रेट-फिट जींस और नीले रंग का टैंक टॉप पहना था जिस पर “NYC” लिखा था। कैप्शन में लिखा था, “भले ही मैं न्यूयॉर्क में रहती हूं, लेकिन मुझे अभी भी टूरिस्ट की तरह तैयार होना पसंद है।”

25 साल की डिजिटल क्रिएटर ने बताया कि उन्होंने ‘पास्ट मॉडर्न’ (Past Modern) कलेक्शन का टॉप पहना था। एक और स्टोरी में, उन्होंने बताया कि उन्होंने उसी ब्रांड से एक और टॉप खरीदा था, जिस पर मोतियों से न्यूयॉर्क की स्काईलाइन की कढ़ाई की गई थी।

अपूर्वा मुखिजा न्यूयॉर्क क्यों गईं?

पॉडकास्ट पर बात करते हुए इन्फ्लुएंसर ने बताया, “मैंने काफी ट्रैवल किया है, और जब मैं न्यूयॉर्क पहुंची, तो मुझे लगा कि ‘मैं सच में यहीं रहना चाहती हूं।’ इस शहर में कुछ तो खास बात है। यहां की जिंदगी बहुत तेज-तर्रार है, लोग बहुत अच्छे कपड़े पहनते हैं, खाना बहुत बढ़िया है और मुझे यहां का आर्किटेक्चर बहुत पसंद है। मैंने अपनी पसंदीदा हर वेब सीरीज में न्यूयॉर्क देखा है, इसलिए मैं हमेशा से वहां रहना चाहती थी। मैंने न्यूयॉर्क के सिर्फ़ एक कॉलेज में अप्लाई किया और मेरा एडमिशन हो गया।”

उन्होंने बताया कि न्यूयॉर्क जाना हमेशा से उनका सपना था, लेकिन इस बदलाव के दौरान उन्हें घबराहट भी हो रही थी। MBA करने, डॉर्म रूम में रहने और फिर से स्टूडेंट बनने के लिए उन्होंने भारत में अपने दोस्तों, करियर और जानी-पहचानी चीज़ों को पीछे छोड़ दिया।

अपूर्वा ने आगे बताया कि इस कदम के पीछे एक वजह अपना सोशल सर्कल बढ़ाना और नए लोगों से मिलना भी था। उन्होंने कहा कि वह अपना बिज़नेस शुरू करना चाहती थीं, लेकिन इसके लिए उन्हें लॉजिस्टिक्स और कंपनी चलाने के दूसरे पहलुओं के बारे में सीखना ज़रूरी था। इसी मकसद से उन्होंने बिज़नेस की पढ़ाई करने का फैसला किया। इन्फ्लुएंसर ने अपने फ़ैन्स को भरोसा दिलाया कि वह न्यूयॉर्क से कंटेंट शेयर करती रहेंगी, लेकिन उन्होंने लगातार ऐसा करने का कोई वादा नहीं किया।

दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमीशन पर चला बुलडोजर, वीजा काउंटर के पास अवैध निर्माण ध्वस्त; जानें क्यों हुई कार्रवाई

दिल्ली में पाकिस्तानी हाई कमीशन पर चला बुलडोजर, वीजा काउंटर के पास अवैध निर्माण ध्वस्त; जानें क्यों हुई कार्रवाई

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भारत ने दिल्ली स्थित पाकिस्तानी दूतावास में किए गए अवैध निर्माण पर बड़ी कार्रवाई की है। इस दौरान बुलडोजर से वीजा काउंटर और अन्य अवैध हिस्सों को हटाया गया। हाई कमीशन के बाहर सुरक्षा घेरे के लिए लगाए गए बैरिकेड और ट्रैफिक बोलार्ड भी हटाए गए। ALSO READ: अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप का ईरान पर सबसे बड़ा आर्थिक हमला, इकोनॉमिक डी-डे घोषित

 

चाणक्यपुरी स्थित पाकिस्तान हाई कमीशन में अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर बुलडोजर से कार्रवाई की गई। शांति पथ स्थित दूतावास परिसर में निर्धारित क्षेत्र से बाहर बनाए गए ढांचे को ढहा दिया गया। कार्रवाई के दौरान वीजा काउंटर और उससे जुड़े कुछ हिस्से भी हटाए गए।

 

पाकिस्तान ने भी की थी कार्रवाई 

भारत की यह कार्रवाई इस्लामाबाद स्थित भारतीय उच्चायोग के बाहर पाकिस्तान की ओर से पार्किंग पोल हटाए जाने के कुछ दिन बाद हुई है। इसे पाकिस्तान में भारतीय उच्चायोग के आसपास की गई कार्रवाई के जवाब के तौर पर भी देखा जा रहा है। ALSO READ: हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है, बांग्लादेश में हारुन इजहार की खुलेआम धमकी

 

सर्जियो गोर के बयान से पाकिस्तान नाराज

गौरतलब है कि भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर की यात्रा के दौरान इसे भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया था। जम्मू-कश्मीर की अपनी पहली यात्रा पर पहुंचे अमेरिकी राजदूत ने यह भी कहा कि अमेरिका इस क्षेत्र को लेकर जारी अपनी ट्रैवल एडवाइजरी की समीक्षा कर सकता है। उनके इस बयान पर पाकिस्तान ने आपत्ति जताई और अमेरिकी राजनयिक को तलब कर विरोध दर्ज कराया है। ALSO READ: सर्जियो गोर के J&K दौरे से भड़का Pakistan, 'जम्मू-कश्मीर भारत का हिस्सा' वाले बयान पर अमेरिकी राजदूत तलब

 

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय ने बयान जारी कर अमेरिकी राजदूत की टिप्पणी की कड़ी निंदा की और इसे “गैर-जिम्मेदाराना” बताया। पाकिस्तान ने दावा किया कि जम्मू-कश्मीर का अंतिम समाधान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के संबंधित प्रस्तावों और कश्मीरी लोगों की आकांक्षाओं के अनुरूप होना चाहिए।

पहाड़ों में बसने का सपना 71 दिनों में ही टूटा! दिल्ली छोड़ मनाली रहने गए Gen Z कंटेंट क्रिएटर ने लौटकर क्या बताया?

भागदौड़ भरी जिंदगी, शहरों में पलूशन वाली जहरीली हवा और तेज रफ्तार लाइफ से ऊबकर पहाड़ों की शांत वादियों में जा बसना आज हर वर्किंग युवा का सपना लगता है। वर्क फ्रॉम होम और रील्स की दुनिया में हर कोई बस यही सोचता है कि काश! वो भी सब कुछ छोड़कर पहाड़ों में हमेशा के लिए बस जाए। दिल्ली के रहने वाले एक Gen Z कंटेंट क्रिएटर अजय शर्मा ने भी कुछ ऐसा ही किया। वो यह देखने मनाली पहुंचे कि क्या सचमुच पहाड़ों की जिंदगी वैसी ही हसीन होती है जैसी तब लगता है जब हम छुट्टियां मनाने पहाड़ पहुंचते हैं या फिर इसके पीछे कोई और ही सच्चाई छिपी है?

अजय ने 23 मई को दिल्ली से मनाली के पास बसे छोटे से गांव सियाल में शिफ्ट हुए थे। उनका इरादा था कि वो यहां टूरिस्ट बनकर नहीं बल्कि लोकल शख्स की तरह रहें। अजय ने पूरे 71 दिन पहाड़ों में बिताए, इस दौरान करीब 55 वीडियो बनाए और अपनी रोजमर्रा की जिंदगी का हर पल इंटरनेट पर लोगों के साथ शेयर किया। लेकिन 2 अगस्त आते-आते उनका यह सपना सिमट गया और वो वापस दिल्ली लौट आए।

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जब अनजाने रास्ते और अजनबी लोग धीरे-धीरे अपने से लगने लगेअजय जब मनाली पहुंचे थे तो वहां उनका कोई अपना नहीं था, कोई जान-पहचान नहीं थी। लेकिन देखते ही देखते वो वहां की गलियों, रास्तों, हसीन वादियों और लोकल लोगों के करीब आ गए, उनसे घुल-मिल गए। जो काम सिर्फ एक प्रयोग की तरह शुरू हुआ था, वो उनकी जिंदगी का एक अनमोल हिस्सा बन गया।

दिल्ली लौटने के बाद एक वीडियो में उन्होंने मनाली की अपनी यादों को साझा किया। उन्होंने बताया कि सिर्फ दो महीने से थोड़े ज्यादा वक्त में जिस जगह से उनका इतना दिल लग गया था, उसे छोड़कर आना दर्दनाक था। अजय के मुताबिक इस तजुर्बे ने उन्हें उम्मीद से कहीं ज्यादा गहराई और जिंदगी का नया नजरिया दिया। मनाली को अलविदा कहना उनके लिए बेहद मुश्किल था क्योंकि यह सिर्फ कोई ट्रिप खत्म नहीं हो रही थी बल्कि उनकी जिंदगी के एक नए दौर की शुरुआत थी।

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क्या वाकई पहाड़ों में बसना उतना ही हसीन है, जितना छुट्टियों में दिखता है?

अजय के मनाली शिफ्ट होने की सबसे बड़ी वजह एक सीधे से सवाल का जवाब तलाशना था। वो ये कि क्या पहाड़ों में बसकर रहना सचमुच उतना ही मजेदार है जितना वहां कुछ दिनों की छुट्टियां बिताना? मनाली जाने से पहले अजय के दिलो-दिमाग में भी एक आम शहर की तरह ही खूबसूरत ख्यालात थे, पहाड़ों के खूबसूरत दृश्यों के बीच काम करना, ढलते और उगते सूरज को देखना, आसपास की वादियों में घूमना, वहां का लोकल फूड ट्राई करना और रात में अलाव के गिर्द बैठकर लोगों से बातें करना।

इनमें से कई हसीन पल उन्होंने जिए भी। लेकिन वहां फुल टाइम रहने पर उन्हें उन मुश्किलों से रूबरू होना पड़ा जो अक्सर तब नहीं समझ में आतीं जब हम छुट्टियों में पहाड़ घूमने जाते हैं।

मनाली में रहने का खर्च: उम्मीद से कहीं ज्यादा किफायती!मनाली में रहने के दौरान अजय का सबसे हैरान कर देने वाला अनुभव वहां का खर्च रहा। ये उनकी उम्मीद से काफी कम निकला। अजय सियाल गांव में 14000 रुपये महीने के किराये पर अकेले एक वन-बैडरूम फ्लैट में रहते थे। इस किराये में वाई-फाई और बिजली का बिल दोनों शामिल थे। वो ज्यादातर वक्त घर पर ही खाना खुद बनाते थे। राशन और ग्रोसरी पर महीने का लगभग 3500 रुपये खर्च आता था। जब कभी खाना पकाने का मन न होता, तो वो हफ्ते में एक-दो बार बाहर खा लेते थे। इसमें करीब 500 रुपये हफ्ते का खर्च बैठता था।

फिटनेस के शौकीन अजय ने वहां का एक लोकल जिम भी जॉइन किया। वैसे तो जिम की फीस 1800 रुपये महीना थी, लेकिन उन्होंने बात करके इसे 1500 रुपये करवा लिया। अजय को गाड़ियों के बजाय पैदल चलना पसंद था, इसलिए लोकल ट्रैवल पर उनका न के बराबर पैसा खर्च होता था। अगर इन सारे खर्चों को जोड़ दिया जाए, तो मनाली में अजय का कुल मासिक खर्च करीब 21000 रुपये के आसपास आता था।

वो दिक्कतें जो आम पर्यटकों की नजरों से हमेशा छिपी रह जाती हैं

मनाली ने अजय को सुकून और नए अनुभव तो दिए, लेकिन जैसे-जैसे दिन बीते कुछ प्रैक्टिकल प्रॉब्लम भी सामने आईं। पहाड़ों में अक्सर नेटवर्क की समस्या रहती थी, जिससे ऑनलाइन काम करना या वर्क फ्रॉम होम संभालना बेहद मुश्किल हो जाता था। पहाड़ों का मौसम मजेदार होने के साथ टेंशन देने वाला भी मिला। बिना किसी पूर्व चेतावनी के अचानक तेज बारिश शुरू हो जाती थी। मानसून के आते ही सड़कें और रोजमर्रा की आवाजाही बेहाल हो गई।

यहां अकेले रहने का मतलब था कि खाना बनाने से लेकर साफ-सफाई और घर के बाकी सारे काम अजय को खुद ही करने पड़ते थे। मशहूर टूरिस्ट स्पॉट्स तक पहुंचने के लिए लंबी और सीधी चढ़ाई चढ़नी पड़ती थी। छुट्टियों में ऐसी ट्रैकिंग भले ही रोमांचक लगे लेकिन हर दिन ऐसा करना शरीर को तोड़कर रख देता है। सबसे बड़ी चुनौती थी उनका अकेलापन। जिस खामोशी और शांति की तलाश में वो दिल्ली से भागे थे, वही सन्नाटा धीरे-धीरे दीमक की तरह उन्हें काटने लगा और भारी अकेलेपन में बदल गया।

अजय ने 3 जुलाई को शेयर किए गए एक वीडियो में इन तमाम दुश्वारियों का जिक्र किया था और बताया था कि आखिर क्यों पहाड़ों में उनका स्टे समय से पहले खत्म होने जा रहा है।

मनाली से लौटकर अब एक नई राह पर हैं अजय

मनाली का अपना 71 दिनों का आशियाना छोड़कर अजय अब वापस दिल्ली लौट आए हैं, लेकिन पहाड़ों को लेकर उनका नजरिया अब पूरी तरह बदल चुका है। इस छोटे से स्टे ने उन्हें एक बड़े शहर से दूर रहने की खूबसूरती और उसकी कड़वी सच्चाइयों दोनों से रूबरू करा दिया। अजय आज भी मनाली में बिताए अपने इन दिनों को जिंदगी का सबसे हसीन और यादगार पल मानते हैं। दिल्ली लौटने के बाद अब वो जिंदगी को एक नए अंदाज में खंगाल रहे हैं। उनके हालिया वीडियो बता रहे हैं कि पहाड़ों की बर्फीली वादियों के बाद अब वो समुद्र के शांत किनारों पर अपना वक्त बिता रहे हैं।

हवाई जहाज को टक्कर देगी चीन की ट्रेन! फ्लाइंग ट्रेन ने मचाया तहलका

चीन तेज रफ्तार वाली ट्रेनों के मामले में लगातार नई टेक्निक पर काम कर रहा है। देश में पहले से ही शंघाई मैग्लेव जैसी तेज ट्रेन चलती है, जो करीब 460 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड से दौड़ती है। अब साइंटिस्ट इससे भी ज्यादा तेज ट्रेन बनाने की तैयारी में जुटे हैं। इसी कड़ी में एक ऐसी ‘फ्लाइंग ट्रेन’ पर काम किया जा रहा है, जिसे फ्यूचर की बेहद तेज ट्रेन कहा जा रहा है।

इस ट्रेन का शुरुआती ट्रायल भी किया जा चुका है। बताया जा रहा है कि टेस्टिंग के दौरान इसकी स्पीड लगभग 800 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंची। यानी इसकी स्पीड शंघाई मैग्लेव से काफी ज्यादा है। इतनी हाई स्पीड वाली ट्रैन से कम टाइम में लंबी दुरी तय की जा सकती है। यह टेक्निक अभी टेस्टिंग में है और इसे पैसेंजर के लिए शुरू करने में समय लग सकता है। यदि आगे के ट्रायल सफल रहते हैं, तो आने वाले समय में ट्रेन से ट्रैवल करने का एक्सपीरियंस बदल सकता है।

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एरोप्लेन जैसी स्पीड

चीन के साइंटिस्ट ऐसी ट्रेन तैयार करने में जुटे हैं, जिसे ‘फ्लाइंग ट्रेन’ कहा जा रहा है। यह आम ट्रेन से काफी अलग होगी और खास टेक्निक की मदद से पटरी के ऊपर चलेगी। शुरुआती टेस्टिंग में इस ट्रेन की करीब 800 किलोमीटर प्रति घंटे की स्पीड है। इतनी तेज स्पीड के कारण यह ट्रेन फ्यूचर में एयर ट्रैवल का एक ऑप्शन बन सकती है।

 

 

बिना पहिये चलेगी ट्रेन

इस ट्रेन को तेज रफ्तार देने के लिए इलेक्ट्रोमैग्नेटिक यानी मैग्नेटिक फाॅर्स का इस्तेमाल किया जाएगा। इस टेक्निक में ट्रेन के पहिए सीधे पटरी के कॉन्टैक्ट में नहीं आते, बल्कि मैग्नेटिक फाॅर्स से ट्रेन पटरी के ऊपर थोड़ी दूरी पर आगे बढ़ती है। इससे पहिए और पटरी के बीच फ्रिक्शन काफी कम हो जाता है। फ्रिक्शन कम होने पर ट्रेन को ज्यादा तेज स्पीड से चलाना आसान होता है।

हवा नहीं रोकेगी रफ्तार

800 किलोमीटर प्रति घंटे जैसी हाई स्पीड पर ट्रेन के सामने हवा का दबाव एक बड़ी समस्या बन सकता है। इसी वजह से इस ट्रेन के लिए खास ट्यूब या सुरंग तैयार की जा रही है। इस ट्यूब के अंदर से पंप की मदद से हवा को बाहर निकाला जाएगा, जिससे ट्रेन को कम हवा वाले वातावरण में चलने में मदद मिलेगी। हवा का दबाव कम होने से ट्रेन के लिए तेज रफ्तार हासिल करना आसान हो सकता है और सफर के दौरान एनर्जी की बचत भी हो सकती है। चीन के हुबेई में साइंटिस्ट ने करीब एक किलोमीटर लंबे ट्रैक पर इस टेक्निक का टेस्ट किया। रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रायल में ट्रेन ने सिर्फ 5.3 सेकंड में 800 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार हासिल की। अब साइंटिस्ट इस टेक्निक को और बेहतर बनाने और फ्यूचर में इसकी स्पीड को 1000 किलोमीटर प्रति घंटे तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

 

 

टेस्टिंग के लिए तैयार

इस फ्यूचर ट्रेन पर चाइना एयरोस्पेस साइंस एंड इंडस्ट्री कॉरपोरेशन (CASIC) काम कर रहा है। इतनी हाई स्पीड वाली ट्रेन के लिए ट्रैक और ट्यूब को स्टैंडर्ड रेलवे ट्रैक की तुलना में कहीं ज्यादा सटीक बनाना जरूरी है। टेस्टिंग के लिए तैयार किए गए करीब एक किलोमीटर लंबे कंक्रीट और स्टील ट्रैक में अलाइनमेंट को सिर्फ 0.5 मिलीमीटर तक रखने की बात कही गई है। फिलहाल यह प्रोजेक्ट शुरुआती ट्रायल में है टेक्निक सफल हुई तो लंबी दूरी की जर्नी कम टाइम में पूरी हो सकती है।

अब Uber ऐप पर भी बुक होंगी ट्रेन टिकटें, कंपनी ने ixigo के साथ मिलाया हाथ, जानिए कैसे काम करेगा नया फीचर

उबर ने 18 अगस्त को ixigo के साथ साझेदारी कर अपने ऐप पर ट्रेन टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू करने का ऐलान किया। अब यूजर्स उबर ऐप के जरिए ट्रेन टिकट बुक कर सकेंगे, अपना पीएनआर स्टेटस देख सकेंगे और ट्रेन यात्रा से पहले या बाद की अपनी आने-जाने की जरूरत को उबर की कैब सेवा से जोड़ सकेंगे। कंपनी के मुताबिक, यह सुविधा भारत में उबर की इंटरसिटी यात्रा सेवाओं को बढ़ाने की दिशा में एक और कदम है। ट्रेन टिकट बुकिंग शुरू होने के साथ उबर अपने लंबी दूरी की यात्रा से जुड़े विकल्पों को और बढ़ा रही है। इस सुविधा में ixigo की ट्रेन टिकट बुकिंग तकनीक और टिकट बुक करने के बाद मिलने वाली सुविधाओं का इस्तेमाल किया गया है। इससे यात्रियों को एक ही ऐप के जरिए अपनी यात्रा के अलग-अलग हिस्सों की योजना बनाने में आसानी होगी।

ऐप से टिकट होगी बुक

भारत में लंबी दूरी की यात्रा के लिए ट्रेन आज भी लोगों की पहली पसंद में शामिल है। भारतीय रेलवे ने वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 741 करोड़ यात्रियों को ट्रेन से सफर कराया। ऐसे में उबर ने ट्रेन यात्रा को आसान बनाने के लिए अपने ऐप में टिकट बुकिंग की सुविधा शुरू की है। उबर इंडिया और दक्षिण एशिया में बिजनेस डेवलपमेंट के डायरेक्टर अर्नब कुमार ने कहा कि भारत में ट्रेन से सफर करना लोगों की रोजमर्रा की यात्रा का अहम हिस्सा है। उन्होंने कहा कि यात्रियों की यात्रा सिर्फ ट्रेन में बैठने से शुरू नहीं होती, बल्कि स्टेशन तक पहुंचने और मंजिल पर उतरने के बाद भी उन्हें आने-जाने की जरूरत होती है। अब उबर ऐप के जरिए यात्री एक ही जगह से ट्रेन टिकट बुक कर सकेंगे, पीएनआर स्टेटस देख सकेंगे और रेलवे स्टेशन तक आने-जाने के लिए उबर की कैब भी बुक कर सकेंगे।

स्टेशन पर पिकअप और ड्रॉप-ऑफ  की भी मिलेगी सुविधा 

इस नई सुविधा से रेलवे स्टेशनों पर उबर की सेवाएं भी और मजबूत होंगी। कंपनी ने बताया कि अहमदाबाद से लेकर सिकंदराबाद और हावड़ा जैसे बड़े रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों के लिए उबर के पिकअप और ड्रॉप-ऑफ जोन उपलब्ध हैं। आने वाले समय में देश के कई और बड़े रेलवे स्टेशनों पर भी ऐसे खास पिकअप और ड्रॉप-ऑफ जोन बनाए जाएंगे। ixigoके ग्रुप सीईओ आलोक बाजपेयी और ग्रुप को-सीईओ रजनीश कुमार ने कहा कि ट्रेन टिकट बुकिंग के मामले में ixigoदेश की बड़ी ऑनलाइन ट्रैवल कंपनियों में शामिल है। कंपनी का लक्ष्य रेल यात्रा को यात्रियों के लिए आसान, भरोसेमंद और तनाव से दूर बनाना है। उन्होंने कहा कि उबर के साथ साझेदारी से यह सुविधा ट्रेन यात्रा से आगे बढ़ेगी और यात्री अपने घर से लेकर अंतिम मंजिल तक की पूरी यात्रा की योजना आसानी से बना सकेंगे।

दुनिया के सबसे जगमग नाइट व्यू वाले शहर, जहां शाम के बाद बढ़ जाती है रौनक!

आजकल ट्रैवलर सिर्फ दिन में नहीं घूमना चाहते, बल्कि रात को भी अपनी खास ट्रिप कर रहे हैं। जिसे नाइट टूरिज्म कहते है इसमें लोग लोकल फूड, नाइट मार्केट, लाइव म्यूजिक, थिएटर, स्पोर्ट्स और शहर की नाइट लाइफ का मजा लेते हैं। कई शहर है जो इस ट्रेंड के लिए दुनिया भर में मशहूर हो रहे हैं। आप भी ऐसे ही नाईट ट्रिप को मजेदार बनाना चाहते हैं, तो इन शहरों की नाइट लाइफ का एक्सपीरियंस जरूर करें।

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मैड्रिड – देर रात तक रहती है चहल-पहल

यहां देर रात तक चहल-पहल रहती है जो बाकी शहरों से काफी अलग है। यहां लोग देर से डिनर करते हैं और देर रात तक दोस्तों और परिवार के साथ घूमते हैं। शाम के समय प्लाजा में टहलना, तपस बार में लोकल डिश खाना और फ्लेमेंको डांस शो देखना यहां की पहचान है। रात में शहर की गलियां, कैफे और टेरेस लोगों से भर जाती हैं। आप स्पेन कल्चर को देखना चाहते हैं, तो मैड्रिड में रात में में जरूर घूमने निकले।

न्यू ऑरलियन्स – संगीत से भरी रातें

न्यू ऑरलियन्स अपनी म्यूजिक कल्चर के लिए दुनिया भर में पॉपुलर है। यहां पर जब शाम होती है तो रोड पर लाइव जैज म्यूजिक की धुनें सुनाई देने लगती हैं। फ्रेंचमेन स्ट्रीट और फ्रेंच क्वार्टर जैसी जगहों में कई छोटे-बड़े म्यूजिक क्लब और बार हैं, जहां हर रात शानदार परफॉर्मेंस होती है। यहां घूमते समय ऐसा लगता है जैसे शहर में कोई म्यूजिक फेस्टिवल हो। इसके साथ ही खाने का टेस्ट और पुराने बाजारों की शॉपिंग इस शहर की रात को और भी शानदार बना देती है।

बैंकॉक – रात में खाने का असली स्वाद

बैंकॉक में घूमने का असली मजा सूरज ढलने के बाद ही आता है। यहां के नाइट मार्केट रंग-बिरंगी दुकानों और स्वादिष्ट स्ट्रीट फूड से भरे रहते हैं। आप यहां थाई खाने का स्वाद ले सकते है। कपड़े, हैंडीक्राफ्ट और कई यादगार चीजों की खरीदारी कर सकते हैं। चाओ फ्राया नदी के किनारे बैठकर डिनर करना और रूफटॉप बार से पूरे शहर की चमक देखना एक बहुत ही यादगार पल होता है। आपको खाने पीने और घूमने का शौक है, तो बैंकॉक की रातें आपको जरूर पसंद आएंगी।

टोक्यो – रात में भी रहती है रौनक

टोक्यो को उन शहरों में गिना जाता है, जो रात में भी पूरी रफ्तार से चलते हैं। यहां शिंजुकु और शिबुया जैसे इलाके रंग-बिरंगी नियॉन लाइट्स से जगमगा उठते हैं। देर रात तक खुले रहने वाले रामेन रेस्टोरेंट, जापानी पब, कराओके और गेमिंग सेंटर लोगों को खूब पसंद आते हैं। अगर आपको शॉपिंग का शौक है, तो कई मार्केट और स्टोर देर रात तक खुले रहते हैं। यहां के रूफटॉप कैफे और बार से रात में चमकते शहर का नजारा देखने का अपना अलग ही मजा है। टोक्यो की रातें हर उम्र के ट्रैवलर के लिए कुछ न कुछ खास जरूर लेकर आती हैं।

फिलाडेल्फिया – खेल और मस्ती से भरी शाम

फिलाडेल्फिया उन शहरों में से है, जहां शाम होते ही माहौल पूरी तरह बदल जाता है। अगर आपको खेल पसंद हैं, तो यहां प्रोफेशनल स्पोर्ट्स मैच का रोमांच देखने को मिलेगा। मैच का टिकट न होने पर भी आप स्पोर्ट्स बार में बैठकर टीवी पर इसे लाइव देख सकते हैं। इसके अलावा यहां लाइव म्यूजिक, थिएटर शो, बॉलिंग, गेमिंग और मिनी गोल्फ जैसी कई एक्टिविटीज रात को और मजेदार बना देती हैं। खाने-पीने के शौकीनों के लिए भी यह शहर किसी जन्नत से कम नहीं है। यहां के लोकल कैफे, फूड टूर और खास रेस्टोरेंट आपको शहर के असली स्वाद चखाते हैं। आपको एक ही शाम में मनोरंजन, स्वाद और लोकल कल्चर का एक्सपीरियंस लेना हैं, तो फिलाडेल्फिया परफेक्ट जगह है।

सियोल – कैफे और नाइट मार्केट का मजा

सियोल की रातें काफी शांत, खूबसूरत और रंगीन होती हैं। यहां के नाइट मार्केट में घूमने के साथ आप लोकल स्ट्रीट फूड का स्वाद ले सकते हैं और आसपास की दुकानों से खरीदारी भी कर सकते हैं। हान नदी के किनारे शाम बिताना और शहर की रोशनी देखना यहां आने वाले टूरिस्ट का पसंदीदा एक्सपीरियंस होता है। इसके अलावा थीम कैफे, देर रात तक खुले शॉपिंग एरिया और खूबसूरत गलियां इस शहर को खास बनाती हैं। यहां घूमने के लिए बिकुल भी जल्दबाजी न करें आपम से समय निकालकर सियोल नाईट के मजे ले।

बढ़ रहा है नाइट टूरिज्म

आज के समय में लोग सिर्फ फोटो खींचने के लिए ट्रैवल नहीं करते, बल्कि उन शहरों की असली जिंदगी को भी जीना चाहते हैं। यही कारण है कि नाइट टूरिज्म तेजी से पॉपुलर हो रहा है। रात के समय लोग लोकल फूड का मजा लेते हैं, लाइव म्यूजिक सुनते हैं, नाइट मार्केट में शॉपिंग करते हैं और शहर कल्चर को जानते हैं। इससे ट्रैवलर को एक अलग एक्सपीरियंस मिलता है और दुकानों, रेस्टोरेंट, होटल और मनोरंजन से जुड़े कारोबार को भी फायदा होता है। आप भी इन शहरो को अपनी ट्रैवल लिस्ट में जोड़कर ट्रिप को यादगार बना सकते हैं।

पासपोर्ट खोने की गलती पड़ सकती है भारी, तुरंत अपनाएं ये आसान ट्रिक

विदेश ट्रैवलिंग करते समय यदि अचानक आपका पासपोर्ट खो जाए, तो घबराहट हो ही जाती है। लेकिन ऐसी सिचुएशन में जल्दबाजी करने से बेहतर सही कदम उठाना जरूरी होता है। थोड़ी समझदारी और सही जानकारी के साथ आप नया ट्रैवल डॉक्यूमेंट बनवा सकते हैं और अपनी जर्नी बिना ज्यादा परेशानी के कर सकते हैं।

पहले ढूंढें और शिकायत करें

अगर विदेश में आपका पासपोर्ट नहीं मिल रहा है, तो घबराएं नहीं। होटल का कमरा, बैग, कैब, एयरपोर्ट या जिन जगहों पर आप गए थे, वहां अच्छी तरह से चेक करें। अगर फिर भी पासपोर्ट नहीं मिलता या चोरी होने का शक है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन में कम्प्लेन कराएं। पुलिस रिपोर्ट बहुत जरूरी होती है, क्योंकि नया पासपोर्ट या इमरजेंसी ट्रैवल डॉक्यूमेंट बनवाते समय इसकी जरूरत पड़ती है। इसलिए कम्प्लेन करने में देर न लगाएं।

एम्बेसी से तुरंत कांटेक्ट करें

पुलिस में कम्प्लेन करने के बाद अपने देश के पास के इंडियन एम्बेसी (Embassy) या वाणिज्य दूतावास (Consulate) से कांटेक्ट करें। वहां के ऑफिसर आपको पूरी प्रोसेस समझाएंगे और बताएंगे कि आगे क्या करना है। अगर आपके पास आइडेंटिटी डॉक्यूमेंट या उनकी कॉपी हैं, तो उन्हें साथ रखें। इससे आपकी आइडेंटिटी जल्दी चेक हो जाती है और नया डॉक्यूमेंट बनवाने में आसानी होती है।

जरूरी डॉक्यूमेंट रखें तैयार 

जब भी आप ट्रिप पर निकले तो पहले पासपोर्ट, वीजा और दूसरे जरूरी आइडेंटिटी कार्ड की डिजिटल और प्रिंट कॉपी अपने पास जरूर रखें। ओरिजिनल पासपोर्ट खो जाए, तो यही कॉपियां आपके काम आ सकती हैं। नया पासपोर्ट बनवाने के लिए पुलिस रिपोर्ट, पहचान का प्रमाण, जन्मतिथि का प्रमाण, पते का प्रमाण और पासपोर्ट खोने का एफिडेबिट डॉक्यूमेंट लिए जा सकते हैं। पहले से तैयारी होने पर परेशानी कम होती है।

नया पासपोर्ट या इमरजेंसी सर्टिफिकेट

अगर आपकी ट्रिप अभी बाकी है, तो आप नया पासपोर्ट बनवाने के लिए अप्लाई कर सकते हैं। इसमें कुछ दिन या करीब एक हफ्ते लग सकते है। लेकिन अगर आपको सिर्फ भारत वापस लौटना है, तो एम्बेसी आपको इमरजेंसी सर्टिफिकेट या टेम्परेरी ट्रैवल डॉक्यूमेंट है। इससे आप अपने देश वापस आ सकते हैं। यह फैसिलिटी ट्रैवल के बेस पर दी जाती है।

वीजा और इंश्योरेंस का रखें ध्यान 

पुराने पासपोर्ट में किसी देश का वैलिड वीजा होने पर उसके लिए भी अलग से प्रोसेस पूरी करनी पड़ सकती है। ऐसे में उस देश के एम्बेसी से कांटेक्ट करें और नया वीजा बनाने की प्रोसेस जाने। साथ ही अपनी एयरलाइन, होटल और ट्रैवल इंश्योरेंस कंपनी को भी पासपोर्ट खोने के बारे में बताये। कई ट्रैवल इंश्योरेंस पॉलिसीस इस केस में ज्यादा रहने, आने-जाने और जरूरी डॉक्यूमेंट बनवाने का खर्च भी कवर करती हैं।

आगे के लिए रखें ये सावधानी 

पासपोर्ट खोने जैसी परेशानी से पूरी तरह बचना मुश्किल है, लेकिन थोड़ी तैयारी आपका काफी टाइम और स्ट्रेस बचा सकती है। टॉवल से पहले पासपोर्ट और वीजा की स्कैन कॉपी क्लाउड स्टोरेज में सेव करें, एक कॉपी ईमेल में रखें और एक प्रिंट अपने सामान से अलग रखें। किसी भरोसेमंद फैमिली मेंबर के पास भी इसकी कॉपी होना अच्छा रहता है। यह तैयारी मुश्किल समय में आपकी ट्रिप को एक बड़ी मदद कर सकती है।