इमरान के बेटे का दावा-पाकिस्तान तानाशाही की ओर बढ़ रहा:पिता के साथ जेल में बुरे बर्ताव का आरोप लगाया, कहा- सेना का इसमें बड़ा रोल

पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान के बेटे सुलैमान ईसा खान ने दावा किया है कि पाकिस्तान तानाशाही की तरफ बढ़ रहा है। उन्होंने अपने पिता के लंबे समय से जेल में होने को इसका उदाहरण बताया। न्यूज एजेंसी ANI के साथ वर्चुअल प्रेस कॉन्फ्रेंस में सुलैमान ने कहा कि पिछले कई साल से उनके पिता के साथ अमानवीय व्यवहार किया जा रहा है और इसमें सेना की बड़ी भूमिका है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति को लेकर चर्चा की गई। सुलैमान के साथ उनके भाई कासिम खान, अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर और अंतरराष्ट्रीय मामलों तथा मीडिया के सलाहकार सैयद बुखारी भी शामिल हुए। इमरान के बेटे बोले- पिता से नहीं मिल पा रहे इमरान के बेटों ने कहा कि वे जेल में बंद अपने पिता से मिलने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन उनकी कोशिशें लगातार नाकाम हो रही हैं। उनका कहना है कि पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनके वीजा आवेदन को बार-बार टाला या खारिज किया है। कासिम खान ने कहा, “उन्हें देखने का कोई भी मौका मिले तो हम तुरंत जाना चाहेंगे। हम पाकिस्तान आना चाहते हैं, लेकिन अब हालात और निराशाजनक होते जा रहे हैं। हमारे वीजा आवेदन खारिज किए गए, टाले गए और बार-बार अटकाए गए।” कासिम ने कहा, “मेरे पिता को लगातार एकांत कारावास में रखा जा रहा है। उन्हें 6×8 फुट की एक ऐसी कोठरी में 23 घंटे तक बंद रखा जाता है, जिसमें न खिड़की है और न ही रोशनी। उनकी उम्र 73 साल है और उनकी एक आंख की 85 फीसदी नजर जा चुकी है। वह आज भी अपने सिद्धांतों पर मजबूती से कायम हैं, लेकिन अब इसकी कीमत उनका शरीर चुका रहा है।” वकील का आरोप- जनरल मुनीर मनमाना शासन चला रहे इमरान खान के अंतरराष्ट्रीय वकील जेरेड जेनसर ने पाकिस्तान में लोकतंत्र की स्थिति पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने देश के सैन्य नेतृत्व को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया और सेना प्रमुख असीम मुनीर पर ‘ऑथॉरिटेरियनिज्म’ यानी दमनकारी शासन का आरोप लगाया। जेनसर ने कहा, इमरान खान और उनकी पत्नी के खिलाफ जिस तरह कार्रवाई हो रही है, वह किसी लोकतांत्रिक सरकार के तरीके जैसी नहीं है। उन्होंने दावा किया कि इमरान खान के खिलाफ सैकड़ों मामले मनगढ़ंत आरोपों के आधार पर दर्ज किए गए हैं। यह मामला अब सिर्फ उनकी जेल तक सीमित नहीं है। जेनसर के मुताबिक, उनकी गिरफ्तारी उन लोगों के लिए भी एक चेतावनी है, जो पाकिस्तान में सत्ता को चुनौती देने की कोशिश कर सकते हैं। जेनसर ने आगे कहा, उन्हें जेल में रखकर शासन पाकिस्तान के लोगों को साफ संदेश देने की कोशिश कर रहा है कि उन्हें सत्ता के खिलाफ खड़ा होने की कोशिश नहीं करनी चाहिए। जेनसर ने कहा, “कल्पना कीजिए कि अगर हम इमरान खान के साथ ऐसा कर सकते हैं, जिन्हें पूरी दुनिया जानती है, तो उस व्यक्ति के साथ क्या किया जा सकता है, जिसे दुनिया नहीं जानती?” इमरान खान के इलाज को लेकर भी विवाद इमरान खान की सेहत और जेल में उनके इलाज को लेकर भी विवाद बना हुआ है। 18 अगस्त को पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की पीठ ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि इमरान खान को इलाज के लिए 48 घंटे के भीतर अदियाला जेल से इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाया जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि इमरान खान की जांच एक स्वतंत्र मेडिकल पैनल करे। इसमें हृदय रोग विशेषज्ञ, आंखों के डॉक्टर, सामान्य चिकित्सक और उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान को शामिल किया जाना था। हालांकि, 20 अगस्त को अधिकारियों ने इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ले जाने के बजाय पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) पहुंचाया। वहां कई घंटों तक उनकी मेडिकल जांच की गई। इसके बाद उन्हें चिकित्सकीय रूप से फिट घोषित कर वापस अदियाला जेल भेज दिया गया। इमरान खान की टीम का आरोप है कि जेल से शिफा अस्पताल की दिशा में एक ‘डमी काफिला’ भेजा गया, ताकि ऐसा लगे कि इमरान खान को वहां ले जाया जा रहा है। टीम ने यह भी दावा किया कि उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान शिफा अस्पताल में उनका इंतजार कर रहे थे, लेकिन उन्हें इमरान खान की जांच करने का मौका नहीं दिया गया। इमरान से फिर मिलीं बहन नूरीन नियाजी इमरान खान की बहन नूरीन नियाजी ने मंगलवार को अदियाला जेल में उनसे मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद यह लगातार दूसरे हफ्ते है, जब नूरीन ने अपने भाई से मुलाकात की है। सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को आदेश दिया था कि कैदी इमरान खान की उनके परिवार के सदस्यों से सप्ताह में एक बार मुलाकात कराई जाए। अदालत ने यह भी निर्देश दिया था कि सरकार उनके बेटों से सप्ताह में दो बार फोन पर बात कराने की व्यवस्था करे। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद इमरान खान के परिवार ने अदालत को भरोसा दिलाया था कि वे मीडिया से बात नहीं करेंगे। PTI के वकील अवैस यूनुस चौधरी के मुताबिक, मंगलवार को नूरीन नियाजी की इमरान खान से मुलाकात करीब 45 मिनट चली। उन्होंने कहा कि इमरान की दो और बहनें भी जेल के बाहर गाड़ी में इंतजार कर रही थीं। नूरीन नियाजी के जेल से बाहर आने के बाद तीनों बहनें बिना मीडिया से बात किए वहां से चली गईं। ———————————- यह खबर भी पढ़ें… इमरान खान अस्पताल से फिर जेल भेजे गए:डॉक्टर बोले- पूर्व पीएम को जेल में रखना सुरक्षित; देर रात हॉस्पिटल में भर्ती किया था
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को मेडिकल जांच के बाद शुक्रवार को इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल से वापस अडियाला जेल भेज दिया गया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Stocks to Watch: 26 अगस्त को फोकस में रहेंगे ये 12 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: बुधवार, 26 अगस्त को शेयर बाजार में कई स्टॉक्स खबरों के चलते फोकस में रह सकते हैं। कुछ कंपनियों को नए ऑर्डर मिले हैं, तो कुछ से जुड़े बड़े कॉरपोरेट अपडेट सामने आए हैं। वहीं OFS, ब्लॉक डील और मैनेजमेंट बदलाव भी चर्चा में हैं। आइए जानते हैं किन 12 शेयरों पर रहेगी बाजार की नजर।

Cipla

फार्मा कंपनी Cipla की पीथमपुर मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी में 17 से 25 अगस्त तक US FDA का इंस्पेक्शन हुआ। जांच के बाद Form 483 में 7 ऑब्जर्वेशन दिए गए हैं। अब कंपनी को इन कमियों पर जवाब देना होगा और जरूरी सुधार करने पड़ सकते हैं।

JSW Energy

पावर कंपनी JSW Energy से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में है। महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी की याचिका पर सुनवाई टल गई है। विवाद करीब ₹600 करोड़ के टैरिफ भुगतान से जुड़ा है। महाराष्ट्र इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने पहले यह रकम JSW Energy को देने का आदेश दिया था।

Advait Energy Transitions

पावर ट्रांसमिशन कंपनी Advait Energy Transitions को ₹134.62 करोड़ का टर्नकी कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह ऑर्डर Madhya Pradesh Power Transmission Company से मिला है। ऑर्डर को 18 महीने में पूरा करना है।

United Breweries

बीयर कंपनी United Breweries ने Heineken Silver का विस्तार किया है। कंपनी ने इसे केरल, ओडिशा और मध्य प्रदेश में लॉन्च किया है। United Breweries ने बताया कि जिन बाजारों में यह ब्रांड पहले से उपलब्ध है, वहां इसे अच्छी मांग मिली है।

Rainbow Children’s Medicare

हेल्थकेयर कंपनी Rainbow Children’s Medicare के CFO विकास महेश्वरी ने इस्तीफा दे दिया है। उनका इस्तीफा 31 अगस्त 2026 से प्रभावी होगा। CFO कंपनी के वित्तीय मामलों की अहम जिम्मेदारी संभालता है।

Varun Beverages

बेवरेज कंपनी Varun Beverages नए सेगमेंट में उतरने की तैयारी कर रही है। कंपनी Ready-to-Drink और Alcoholic Beverages कारोबार में एंट्री के लिए KIVA Spirits and Company नाम की नई इकाई बनाएगी। इसके अलावा Tunisia में 75:25 जॉइंट वेंचर बनाने की योजना को मंजूरी मिली है।

Hindustan Copper

सरकारी कॉपर कंपनी Hindustan Copper का OFS 26 अगस्त को रिटेल निवेशकों और कर्मचारियों के लिए खुलेगा। संस्थागत निवेशकों ने पहले दिन OFS को 3.41 गुना सब्सक्राइब किया। इसके बाद सरकार ने पूरी ग्रीन शू ऑप्शन का इस्तेमाल करने का फैसला किया है। यानी अब अतिरिक्त हिस्सेदारी भी बेची जाएगी।

Groww

फिनटेक कंपनी Groww में एक बड़े ब्लॉक डील की खबर है। जानकारी के मुताबिक Ribbit Capital करीब 1.6% हिस्सेदारी बेच सकता है। इस सौदे का आकार करीब ₹1,914 करोड़ बताया गया है। Block Deal के लिए ₹195 प्रति शेयर का Floor Price रखा गया है।

Tata Motors

ऑटो कंपनी Tata Motors Passenger Vehicles ने ग्रुप कंपनी Tata Communications के साथ साझेदारी की है। दोनों कंपनियां भारत में Software-Defined Vehicles को बढ़ावा देंगी। इसकी शुरुआत नई Sierra.ev से होगी। इसमें In-built 5G Cellular Connectivity दी जाएगी।

Fedbank Financial Services

NBFC कंपनी Fedbank Financial Services के बोर्ड ने कर्ज के जरिए ₹2,500 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। कंपनी इस रकम का इस्तेमाल कारोबार की जरूरतों और विस्तार के लिए कर सकती है।

HEG

ग्रेफाइट इलेक्ट्रोड कंपनी HEG का डीमर्जर 1 सितंबर 2026 से प्रभावी होगा। इसकी रिकॉर्ड डेट 7 सितंबर तय की गई है। डीमर्जर के बाद कंपनी का कारोबार दो अलग-अलग लिस्टेड कंपनियों में बंट जाएगा। इनमें HEG Graphite और HEG Advanced Materials शामिल होंगी।

Welspun Corp

पाइप और इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Welspun Corp में बड़े ब्लॉक डील की खबर है। Welspun Investments & Commercials और MD & CEO Vipul Mathur करीब 63 लाख शेयर, यानी कंपनी की लगभग 2.4% हिस्सेदारी बेच सकते हैं।

हिंदुस्तान कॉपर के शेयर में OFS के बाद फिर आ सकती है तेजी, आनंद राठी ने ₹715 का टारगेट दिया

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कर्नल सोफिया मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं देगी मध्यप्रदेश सरकार!

कर्नल सोफिया मामले में मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी नहीं देगी मध्यप्रदेश सरकार!

कर्नल सोफिया कुरैशी पर विवादित टिप्पणी करने वाले मध्यप्रदेश के जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी को लेकर मंगलवार को हुई मोहन कैबिनेट की बैठक में कोई प्रस्ताव नहीं आया। बैठक से पहले शाह के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति नहीं देने का प्रस्ताव कैबिनेट में रखे जाने की चर्चा थी, लेकिन अंतिम समय में इसे एजेंडे से हटा दिया गया। अब राज्य सरकार के सामने 31 अगस्त को होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई से पहले अपना पक्ष रखने की चुनौती है।

 

मंगलवार को मंत्रालय में हुई कैबिनेट बैठक में मंत्री विजय शाह पर केस चलाने के लिए सरकार के स्तर पर अभियोजन स्वीकृति देने के प्रस्ताव  की चर्चा थी लेकिन कैबिनेट बैठक मे यह प्रस्ताव नहीं आया है। कैबिनेट मंत्री राकेश सिंह से जब इस विषय में सवाल किया गया तो उन्होंने साफ कहा कि ऐसा कोई प्रस्ताव कैबिनेट में नहीं आया। वहीं मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट की बैठक में में मौजूद अफसरों को बाहर कर इस पूरे विषय पर चर्चा हुई। 

 

क्या है पूरा मामला?- कैबिनेट मंत्री विजय शाह से जुडा यह पूरा मामला मई 2025 का है। पहलगाम आतंकी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पीओके में आतंकी ठिकानों पर कार्रवाई की थी। इस ऑपरेशन की जानकारी मीडिया को देने वाली सैन्य अधिकारियों की टीम में कर्नल सोफिया कुरैशी भी शामिल थीं। 11 मई 2025 को महू के रायकुंडा गांव में आयोजित एक कार्यक्रम में विजय शाह ने कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर ऐसी टिप्पणी की, जिसे उनके धर्म और पहलगाम हमले के आतंकियों के समुदाय से जोड़कर देखा गया। इस पूरे मामले मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने मामले का स्वत: संज्ञान लिया और शाह के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। हाईकोर्ट ने टिप्पणी को बेहद आपत्तिजनक माना था। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।

 

सुप्रीम कोर्ट ने मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल यानी SIT गठित की। SIT ने जांच पूरी करने के बाद विजय शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धारा 196(1)(a) के तहत अभियोजन की अनुमति मांगी। यही अनुमति लंबे समय से राज्य सरकार के पास लंबित है। जनवरी 2026 में सुप्रीम कोर्ट ने मध्यप्रदेश सरकार को अभियोजन स्वीकृति पर दो सप्ताह के भीतर निर्णय लेने का निर्देश दिया था। इसके बाद भी फैसला नहीं हुआ। मई में सुप्रीम कोर्ट ने फिर सरकार के रुख पर नाराजगी जताई और आदेश के पालन के लिए समय दिया। जुलाई की स्थिति रिपोर्ट में भी सरकार की ओर से जरूरी दस्तावेज दाखिल नहीं किए जाने की बात सामने आई थी।

 

अब सुप्रीम कोर्ट में मामले की अगली सुनवाई 31 अगस्त को होनी है। मंगलवार की कैबिनेट में अभियोजन स्वीकृति का प्रस्ताव नहीं आने के बाद माना जा रहा है कि सरकार अदालत के सामने अपना पक्ष रखने के लिए हलफनामा दाखिल कर सकती है। गौरतलब है कि मंत्री विजय शाह इस विवाद के बाद सार्वजनिक रूप से माफी मांग चुके हैं और उनका कहना रहा है कि उनका उद्देश्य कर्नल सोफिया कुरैशी या भारतीय सेना का अपमान करना नहीं था। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट उनकी माफी और मामले में सरकार की देरी को लेकर पहले ही सख्त रुख अपना चुका है।

 

आप डायरेक्ट प्लान में निवेश करते हैं या रेगुलर प्लान में? जानिए किसमें है आपको फायदा

आप म्यूचुअल फंड की डायरेक्ट स्कीम में इनवेस्ट करते हैं या रेगुलर स्कीम में? शुरुआत में निवेश के दोनों तरीके एक जैसे लगते हैं, लेकिन लंबी अवधि में दोनों के रिटर्न में फर्क आता है। डायरेक्ट स्कीम का रिटर्न रेगुलर स्कीम के रिटर्न से थोड़ा ज्यादा होता है। यही वजह है कि डायरेक्ट स्कीम में निवेश में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है। क्रिसिल इंटेलिजेंस ने एंफी के डेटा का विश्लेषण किया है। इससे पता चलता है कि डायरेक्ट प्लान में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ रही है।

डायरेक्ट प्लान में बढ़ रही निवेशकों की दिलचस्पी

क्रिसिल इंटेलिजेंस ने पाया है कि रिटेल इनवेस्टर्स के म्यूचुअल फंड्स एसेट्स में डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी बढ़ी है। यह मार्च 2021 में 21.4 फीसदी थी, जो मार्च 2026 में बढ़कर 36.7 फीसदी हो गई। इसका मतलब है कि पांच साल पहले रिटेल म्यूचुअल फंड में होने वाले 5 रुपये के निवेश में से एक से थोड़े ज्यादा का निवेश डायरेक्ट प्लान के जरिए होता था। आज हर तीन में से एक निवेश डायरेक्ट प्लान के जरिए हो रहा है।

हर स्कीम में होता है डायरेक्ट और रेगुलर प्लान का विकल्प

म्यूचुअल फंड की करीब हर स्कीम में डायरेक्ट और रेगुलर प्लान होते हैं। दोनों प्लान एक ही स्कीम में निवेश करते हैं। सिर्फ निवेश का तरीके में फर्क होता है। निवेशक जब बगैर किसी म्यूचुअल फंड डिस्ट्रिब्यूटर खुद स्कीम में निवेश करता है तो वह डायरेक्ट प्लान का इस्तेमाल करता है। अगर वह किसी डिस्ट्रिब्यूटर के जरिए निवेश करता है तो वह रेगुलर प्लान के जरिए निवेश करता है।

डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो अपेक्षाकृत कम होता है

दोनों प्लान के बीच सबसे बड़ा फर्क कॉस्ट का है। डायरेक्ट प्लान का एक्सपेंस रेशियो कम होता है। इसकी वजह यह है कि इसमें डिस्ट्रिब्यूटर कमीशन शामिल नहीं होता है। रेगुलर प्लान का एक्सपेंस रेशियो ज्यादा होता है, क्योंकि इसमें डिस्ट्रिब्यूटर का कमीशन शामिल होता है। इस वजह से एक ही स्कीम के डायरेक्ट और रेगुलर प्लान की नेट एसेट वैल्यू (NAV) में अंतर दिखता है।

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कुल एसेट्स में बढ़ रही डायरेक्ट प्लान की हिस्सेदारी 

मार्च 2026 में डायरेक्ट-प्लान का एयूएम 33.28 लाख करोड़ रुपये था। यह इंडस्ट्री के कुल एसेट का 45.1 फीसदी है। यह मार्च 2021 में 43.4 फीसदी था। उधर, कुल एसेट्स में रेगुलर प्लान की हिस्सेदारी घटी है। यह इस दौरान 56.6 फीसदी से घटकर 54.9 फीसदी पर आ गई है। हालांकि, अभी भी यह निवेश का ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तरीका है। इस तरीके से होने वाले निवेश का एयूएम 40.46 लाख करोड़ रुपये है।

CJP ने संगठन में किए बड़े बदलाव, नए पदाधिकारियों का ऐलान, पार्टी ने बताया अब आगे का क्या है प्लान

CJP ने संगठन में किए बड़े बदलाव, नए पदाधिकारियों का ऐलान, पार्टी ने बताया अब आगे का क्या है प्लान

Abhijeet Dipke Cockroach Janta Party

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने मंगलवार को अपने संगठन में नए पदाधिकारियों और जोनल कोऑर्डिनेशन कमेटियों के सदस्यों की घोषणा की। यह फैसला संगठन की 14 सदस्यीय नेशनल वर्किंग कमेटी के गठन के कुछ सप्ताह बाद लिया गया है। पार्टी ने अपने संस्थापक अभिजीत दिपके को राष्ट्रीय संयोजक नियुक्त किया है। वहीं मुख्य प्रवक्ता सौरव दास और प्रवक्ता आशुतोष रांका को सह-संयोजक की जिम्मेदारी दी गई है।

 

CJP ने अपने आधिकारिक X हैंडल पर नए संगठनात्मक पदाधिकारियों की घोषणा करते हुए कहा कि वह देशभर में संगठन को और मजबूत तथा सक्रिय बनाने की दिशा में काम करना चाहती है। संगठन ने इसके साथ ही पांच संगठन संयुक्त सचिवों और दो राष्ट्रीय प्रवक्ताओं के नामों का भी ऐलान किया है।

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व्यंग्यात्मक संगठन से युवा आंदोलन तक पहुंचा CJP

 

कॉकroach जनता पार्टी की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक संगठन के तौर पर हुई थी, लेकिन पिछले महीने हुए सफल प्रदर्शन के बाद यह धीरे-धीरे युवा आंदोलन और दबाव समूह के रूप में उभरा। संगठन का दावा है कि उसके आंदोलन के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को पद से इस्तीफा देना पड़ा था।

 

नए पदाधिकारियों की घोषणा ऐसे समय हुई है, जब CJP ने केंद्र सरकार पर 25 जुलाई को किए गए कथित वादों और प्रतिबद्धताओं को पूरा नहीं करने का आरोप लगाते हुए एक बार फिर आंदोलन का ऐलान किया है।

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5 सितंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च का ऐलान

 

CJP ने सोमवार को देशभर में विरोध प्रदर्शन करने और 5 सितंबर को दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने की घोषणा की थी। संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को किए गए आश्वासनों को पूरा नहीं किया है। CJP के मुताबिक, 25 जुलाई को सरकार की ओर से दिए गए आश्वासनों के बाद संगठन ने अच्छे विश्वास में अपना राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन वापस लिया था। हालांकि, अब संगठन का आरोप है कि सरकार अपनी प्रतिबद्धताओं पर खरी नहीं उतरी।

 

संगठन ने बताया कि 5 सितंबर को होने वाला मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाएगा। मार्च का नेतृत्व कथित तौर पर मृत NEET अभ्यर्थियों के परिवार और पुलिस कार्रवाई से प्रभावित लोगों के परिवार करेंगे। CJP ने दावा किया कि देशभर से छात्र, युवा संगठन और युवा नागरिक इस शांतिपूर्ण मार्च में शामिल हो सकते हैं।

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FIR वापस लेने के वादे को लेकर सरकार पर आरोप

 

CJP लंबे समय से केंद्र सरकार पर अपने वादों से पीछे हटने का आरोप लगाती रही है। संगठन का मुख्य आरोप प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने और प्रदर्शनकारियों को दंडात्मक कानूनी कार्रवाई से सुरक्षा देने के कथित आश्वासन से जुड़ा है। इस महीने की शुरुआत में CJP ने सुप्रीम कोर्ट का रुख भी किया था। संगठन ने केंद्र की मोदी सरकार पर छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज FIR को खत्म करने की प्रक्रिया में कथित तौर पर अड़चन डालने का आरोप लगाया था।

 

संगठन ने चेतावनी दी थी कि यदि 25 जुलाई को किए गए कथित वादों पर ठोस प्रगति नहीं हुई तो देशभर में आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है। CJP ने सोमवार को अपने बयान में कहा कि सरकार किसी पूरी पीढ़ी का भरोसा लेकर युवाओं को घर भेजने के बाद अपने ही वादे से पीछे नहीं हट सकती। संगठन ने इसे “विश्वासघात” करार देते हुए कहा कि वह इसे स्वीकार नहीं करेगा।

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आगे क्या?

नए पदाधिकारियों की नियुक्ति और 5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च के ऐलान से CJP ने अपने संगठनात्मक विस्तार के साथ-साथ सरकार पर दबाव बढ़ाने की रणनीति भी स्पष्ट कर दी है। अब नजर इस बात पर होगी कि केंद्र सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और 5 सितंबर को प्रस्तावित मार्च में कितनी भागीदारी होती है।

क्या कोई प्राइवेट कंपनी आपके ITR और EPFO डेटा को एक्सेस कर सकती है? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा है

क्या प्राइवेट कंपनियां आपका इनकम टैक्स रिटर्न या प्रोविडेंट फंड रिकॉर्ड एक्सेस कर सकती हैं? सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से उन आरोपों की जांच करने को कहा है जिनमें यह कहा गया है कि प्राइवेट वेरिफिकेशन कंपनियां लोगों के एंप्लॉयमेंट और फाइनेंशियल जानकारियां एक्सेस कर रही हैं और उनका व्यावसायिक इस्तेमाल कर रही हैं।

आईटीआर और ईपीएफओ को डेटा को संवेदनशील माना जाता है

सरकार ने एक जनहित याचिका पर यह निर्देश जारी किया है। इस याचिका में कहा गया है कि एक ऐसा कमर्शियल ईकोसिस्टम बना है, जिसमें EPFO/UAN Records और PAN से जुड़े फाइनेंशियल डेटा को प्राइवेट कंपनियां एक्सेस कर रही हैं। ऐसे डेटा को काफी संवेदनशील माना जाता है।

याचिकाकर्ता ने प्राइवेट कंपनियों के डेटा के एक्सेस पर सवाल उठाए हैं

सुप्रीम कोर्ट ने हालांकि किसी कंपनी को ऐसी जानकारियां गैरकानूनी तरीके से एक्सेस करते नहीं पाया है। उसने यह भी नहीं कहा है कि प्राइवेट कंपनियों के पास लोगों के आईटीआर और ईपीएफओ रिकॉर्ड के इस्तेमाल की आजादी है। लेकिन, इस याचिका से एक बड़ा मसले को लेकर सवाल उठे हैं, जो करोड़ों भारतीयों से जुड़ा है।

डेटा एक्सेस के मसले से जुड़े तीन अहम सवाल सामने आए हैं

इस मसले से जुड़े कई सवाल हैं। पहला, सरकारी एजेंसियों के पास लोगों की जो व्यक्तिगत जानकारियां हैं, उनमें से किन जानकारियों का इस्तेमाल प्राइवेट कंपनियां कर सकती हैं? दूसरा, उनके इस्तेमाल का तरीका क्या होगा? तीसरा, क्या वे व्यक्ति विशेष से उसकी इन जानकारियों के इस्तेमाल की इजाजत लेती हैं?

सुप्रीम कोर्ट ने व्यक्तिगत जानकारियों के इस्तेमाल पर चिंता जताई है

सुप्रीम कोर्ट ने लोगों की संवेदनशील व्यक्तिगत जानकारियों के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई है। उसने सरकार से इस मामले की जांच करने को कहा है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच ने कहा कि सरकार इस समस्या पर लगाम लगाने के तरीके पर विचार कर सकती है। वह इस फील्ड के एक्सपर्ट्स की मदद ले सकती है।

याचिकाकर्ता ने कुछ प्राइवेट सर्विसेज के एडवर्टाइजमेंट पर सवाल उठाए हैं

याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत में उन प्राइवेट सर्विसेज का जिक्र किया है, जो कथित रूप से ‘ईपीएफओ पासबुक एपीआई’, ‘फॉर्म26 एपीआई’ और ‘इनकम टैक्स रिटर्न एपीआई’ जैसे प्रो़क्ट्स का विज्ञापन देती हैं। उन्होंने कहा है कि इससे यह सवाल उठता है कि ऐसी संवेदनशील जानकारियां कैसे हासिल या वेरिफाय की जा रही हैं।

अयोध्या में चंपत राय के विरोध में संतों की बैठक पर पुलिस की रोक, संतों ने लगाया गंभीर आरोप

अयोध्या में चंपत राय के विरोध में संतों की बैठक पर पुलिस की रोक, संतों ने लगाया गंभीर आरोप

अयोध्या से इस वक्त बड़ी खबर सामने आ रही है। राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय के विरोधी गुट के संतों की प्रस्तावित बैठक को पुलिस द्वारा रोक दिए जाने का आरोप लगा है। बताया जा रहा है कि यह बैठक रामायणम आश्रम में आयोजित होनी थी। संतों का आरोप है कि स्थानीय पुलिस ने रामायणम आश्रम में ताला लगवा दिया और कुछ समय के लिए वहां मौजूद संतों को नजरबंद रखा। इसके बाद संतों ने जिला प्रशासन पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए जमकर नारेबाजी की।

 

प्रदर्शन के दौरान संतों ने 'चंदा चोरों अयोध्या छोड़ो' के नारे लगाए। संतों ने आरोप लगाया कि चढ़ावा प्रकरण में जिम्मेदार लोगों को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। विरोधी गुट के संतों ने चेतावनी दी कि जल्द ही एक लाख संतों को लेकर अयोध्या में बड़ी बैठक आयोजित की जाएगी। संतों ने वर्तमान राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर संतों का नया ट्रस्ट बनाए जाने की मांग भी उठाई। 

 

महंत जन्मेजय शरण ने कहा कि राम मंदिर में चंदा व चढ़ावा चोरी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए जिसे प्रदेश के मुख्यमंत्री योगीजी ने अयोध्या मे कई बार कही है कि दूध का दूध व पानी का पानी हो तो वहीं होना चाहिए, महंत दिलीप त्यागी ने कहा की राम मंदिर मे चढ़ावा चोरी से अयोध्या की गरिमा – महिमा की वैश्विक स्तर पऱ बदनामी हुई है जिसका कोई निराकरण नहीं हुआ।

उन्होंने  कहा कि हमारा केंद्र व प्रदेश की सरकार से मांग है कि SIT की जांच व उससे इनको क्लीन चिट मिलने का कोई मतलब नहीं है। उन्होंने कहा कि ट्रस्ट बनाने का आदेश सर्वोच्च न्यायलय ने दिया था और भारत सरकार के निर्देश पऱ ट्रस्ट बना है इसलिए SIT कुछ नहीं कर सकती है। राम मंदिर चढ़ावा चोरी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के द्वारा रिटायर्ड जजों की एक कमेटी बनाई जाए और उनके द्वारा जांच कराई जाए।

साथ ही इस ट्रस्ट को भंग किया जाए। संत प्रकाशनन्द उर्फ कम्प्यूटर बाबा ने कहा कि आज हमारे संत समाज की शांतिपूर्वक चलने वाली संगोष्ठी थी। इसके माध्यम से हम ज्ञापन प्रशासन को सौपते परन्तु जिस प्रकार से यह कार्य हुआ है। चंदा चोरों को बचाया जा रहा है। इसमें जिला प्रशासन भी शामिल है। इसीलिए हम लोगों को रोका जा रहा है। ताला लगा दिया गया। उन्होंने कहा कि हम चुप नहीं बैठेंगे।

इसकी आवाज पूरे देश के संतों के साथ उठाएंगे। उन्होंने कहा कि राम मंदिर मे हुई चोरी के अभी तक केवल छोटी मछलियां ही पकड़ी गई हैं। बड़ी मछली बाहर जिनका नाम दुनिया जानती है, संतों की बैठक मे शामिल होने आए संत प्रकाशनन्द ने कहा की हम लोगों ने शांतिपूर्ण ढंग से अपने कार्यक्रम को आयोजित किया था। इसके पूर्व भी हम लोगों ने कई जगह व दिल्ली में शांतिपूर्वक बैठक की थी।

कोई दिक्कत किसी को नहीं हुई किन्तु श्रीराम की नगरी अयोध्या मे उनके मंदिर के चढ़ावे की चोरी को लेकर होने वाली साधु-संतों की बैठक को रोका जा रहा है, हमें धमकियां दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अब हमें लगता है कि चढ़ावा चोरी का लाभ स्थानीय प्रशासन को भी मिला है इसीलिए हम लोगो को रोका जा रहा है। उन्होंने कहा कि हमारे संतों को बंद कर दिया गया। उन्होंने कहा कि हम लोग अयोध्या एक लाख संतो के साथ आएंगे और जन-जन आंदोलन होगा। देखते हैं कि कितने लोगों  को जेल भेजा जाता है। हम लोग मरेंगे तो राम के लिए जिएंगे तो राम के लिए।

बांके बिहारी मंदिर के चढ़ावे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- दान का हर पैसा दान पेटी या ऑनलाइन खाते में ही जमा हो

बांके बिहारी मंदिर के चढ़ावे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- दान का हर पैसा दान पेटी या ऑनलाइन खाते में ही जमा हो

shri banke bihari temple

वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर में दान की रकम की कथित हेराफेरी पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि दान का हर पैसा दान पेटी या ऑनलाइन खाते में ही जमा हो और मंदिर की आय-व्यय व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता रखी जाए। ALSO READ: तरुण तेजपाल को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका, उत्पीड़न मामले में आत्मसमर्पण से छूट की याचिका खारिज

 

क्या है पूरा मामला? 

सुप्रीम कोर्ट ठाकुर श्री बांके बिहारी जी महाराज मंदिर की मैनेजमेंट कमेटी की याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। मंदिर में कथित चंदा चोरी को लेकर सीनियर एडवोकेट मनिंदर सिंह ने हाई पावर कमेटी की एक स्टेटस रिपोर्ट पेश की। उन्होंने तस्वीरें पेश करते हुए कहा कि मामले बहुत गंभीर हैं और इसमें तुरंत कार्रवाई की जरूरत है। उन्होंने कहा कि एक वीडियो है। तीन लोग 'गोलक' (पारंपरिक दान पेटी) के सामने खड़े होकर भक्तों से पैसे इकट्ठा कर रहे हैं और उन्हें अपनी पॉलीथीन की थैलियों में डाल रहे हैं। ALSO READ: मध्यप्रदेश में रिश्वतखोरी और भ्रष्टाचार के भंवर में खाकी, कटनी के बाद इंदौर में पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

 

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हम निर्देश देते हैं कि दान का हर पैसा दान पेटी या ऑनलाइन खाते में ही आना चाहिए। 'सेवायत' या किसी और की तरफ से इसमें कोई भी रुकावट डालने को बहुत गंभीरता से लिया जाएगा। मैनेजमेंट कमेटी को मंदिर के खजाने के लिए एक पारदर्शी सिस्टम लागू करना चाहिए।

 

शीर्ष अदालत ने कहा कि सेवायतों या किसी अन्य व्यक्ति की ओर से दान की इस व्यवस्था में किसी भी तरह की बाधा को 'बहुत गंभीरता से' लिया जाएगा। अदालत ने मंदिर की प्रबंधन समिति को दान की पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए एक ऐसी व्यवस्था लागू करने का निर्देश दिया, जिससे किसी भी तरह की अनियमितता या गड़बड़ी को रोका जा सके।

 

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मंदिर के पैसे से संपत्ति खरीदने के प्रस्तावों को लेन-देन पूरा होने से पहले अदालत के सामने रखा जाए।

राम मंदिर चंदे में ‘चोरी’ की खबर करने वाले पत्रकार अभिषेक उपाध्याय पहुंचे SC, गाजियाबाद में रोड-रेज की FIR का मामला

पत्रकार और कंटेंट क्रिएटर अभिषेक उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। उन्होंन गाजियाबाद में ‘रोड-रेज’ (सड़क पर झगड़े) की एक कथित घटना को लेकर अपने खिलाफ दर्ज FIR को चुनौती दी है। उपाध्याय ने अयोध्या में राम मंदिर के लिए मिले दान के प्रबंधन में चोरी और गड़बड़ी के आरोपों की रिपोर्ट सबसे पहले करने वालों में से एक थे।

उपाध्याय का आरोप है कि यह मामला झूठे और मनगढ़ंत आरोपों पर आधारित है और इसका मकसद उनकी स्वतंत्र खोजी पत्रकारिता के लिए उन्हें परेशान करना है। उन्होंने FIR को रद्द करने और गिरफ्तारी व अन्य कठोर कार्रवाई से सुरक्षा की मांग की है। इसके अलावा, उन्होंने अनुरोध किया है कि मामले की जांच उत्तर प्रदेश पुलिस के अलावा किसी अन्य एजेंसी, जैसे CBI या दिल्ली पुलिस को सौंपी जाए।

यह FIR 18 अगस्त को इंदिरापुरम पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई थी। शिकायत के अनुसार, शिप्रा मॉल के पास एक बलेनो कार ने एक मोटरसाइकिल को टक्कर मार दी थी। इसके बाद शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि ड्राइवर ने उसे गाली दी और धमकी दी और कार के संबंध में उपाध्याय का नाम लिया।

उपाध्याय ने आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि 18 अगस्त को अपनी बेटी के स्कूल से लौटते समय, शिप्रा मॉल के पास एक मोटरसाइकिल सवार उनकी कार के पास आया और हंगामा किया। उनके अनुसार, कोई टक्कर या हाथापाई नहीं हुई थी और वह उस जगह से चले गए क्योंकि उनकी बेटी उनके साथ थी।

उन्होंने मोटरसाइकिल के रजिस्ट्रेशन नंबर में भी गड़बड़ी का आरोप लगाया है। जबकि FIR में ‘स्प्लेंडर’ का जिक्र है। उनका दावा है कि शिकायत में दिया गया नंबर किसी दूसरी मोटरसाइकिल का है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से CCTV फुटेज और अन्य इलेक्ट्रॉनिक सबूतों को सुरक्षित रखने का निर्देश देने की मांग की है। उनका आरोप है कि पुलिसकर्मी उस जगह के पास की दुकानों पर गए और दुकानदारों पर CCTV रिकॉर्डिंग डिलीट करने या न देने का दबाव डाला।

पत्रकार ने यह भी आरोप लगाया है कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद उन्हें पूरी FIR नहीं दी गई। उन्होंने यह भी दावा किया कि ‘यूथ बार एसोसिएशन’ मामले में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुसार FIR को पुलिस की वेबसाइट पर अपलोड नहीं किया गया था।

उपाध्याय ने यह भी आरोप लगाया है कि 20 अगस्त की देर रात पुलिसकर्मी उनके गाजियाबाद स्थित घर पर आए थे। उनके अनुसार, रात करीब 10:20 बजे, जब वे दिल्ली में थे, उनकी पत्नी ने उन्हें बताया कि आठ या नौ पुलिसकर्मी घर पर आए हैं। याचिका में यह संख्या लगभग एक दर्जन बताई गई है और कहा गया है कि उस समय उनकी पत्नी और दो बेटियां घर पर मौजूद थीं। उन्होंने आरोप लगाया है कि पुलिस टीम में कोई महिला अधिकारी शामिल नहीं थी।

‘द हिंदू’ ने यह भी रिपोर्ट किया कि 19 अगस्त को उपाध्याय ने एक IAS अधिकारी के खिलाफ आरोपों से जुड़ी एक रिपोर्ट प्रकाशित की थी। यह मामला 2023 में खरीदे गए करोड़ों रुपये मूल्य के दो कृषि भूखंडों और उन पर स्कूल के निर्माण से संबंधित था। उन्होंने आरोप लगाया कि धमकाने और परेशान करने से संबंधित प्रावधानों के तहत उनके YouTube वीडियो को लगभग आधे घंटे के भीतर हटा दिया गया था, लेकिन कानूनी चुनौती के बाद 20 अगस्त को उसे बहाल कर दिया गया।

उपाध्याय ने पुलिस की इस कार्रवाई को उत्तर प्रदेश में कथित भ्रष्टाचार पर अपनी रिपोर्टिंग से जोड़ा है। उनके YouTube चैनल पर लोक निर्माण विभाग, अवैध खनन, परीक्षा में अनियमितताओं, राज्य राजस्व विभाग और राम मंदिर दान विवाद से जुड़ी रिपोर्टें दिखाई गई हैं।

‘द वायर’ से बात करते हुए उपाध्याय ने कहा, “मैंने 7 जून को राम मंदिर में चोरी की खबर ब्रेक की थी, तब से मेरे खिलाफ ऐसी शिकायतें और FIR दर्ज होना एक आम बात हो गई है। मैं उनके भ्रष्टाचार का पर्दाफाश कर रहा हूं, यही उनकी समस्या है।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया, “हिंदू-मुस्लिम राजनीति की आड़ में उत्तर प्रदेश के सरकारी विभागों में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार हो रहा है।”

अपनी याचिका में उपाध्याय ने कहा कि उन्हें “जल्द गिरफ्तारी और शारीरिक नुकसान” की आशंका है और दावा किया कि “राज्य तंत्र द्वारा भेजे गए गुंडों” से उन्हें नुकसान पहुंचाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इसी वजह से वे सुरक्षित रूप से इलाहाबाद हाईकोर्ट नहीं जा पा रहे हैं।

उन्होंने FIR रद्द करने, गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा और इसके विकल्प के तौर पर एक स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने यह भी कहा है कि वे किसी भी कानूनी जांच में सहयोग करने को तैयार हैं। उपाध्याय को इससे पहले 2024 में लखनऊ के हजरतगंज पुलिस स्टेशन में दर्ज एक FIR के सिलसिले में पुलिस कार्रवाई का सामना करना पड़ा था, जो उनकी रिपोर्टिंग के बाद दर्ज की गई थी। ‘द वायर’ के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने 4 अक्टूबर 2024 को आदेश दिया था कि उस मामले में उनके खिलाफ कोई कठोर कार्रवाई न की जाए।

इमरान के लिए 21 पूर्व क्रिकेट कप्तानों की चिट्ठी:पाकिस्तान सरकार को लिखा- उन्हें सही इलाज दिया जाए; गावस्कर-कपिल के भी दस्तखत

पाकिस्तान के पूर्व कप्तान और पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को सही इलाज दिलाने के लिए दुनियाभर के क्रिकेटर आगे आए हैं। सुनील गावस्कर, कपिल देव समेत 21 पूर्व कप्तानों ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ सरकार को पत्र लिखकर वर्ल्ड कप विजेता कप्तान इमरान खान को सही मेडिकल इलाज देने की मांग रखी है। 23 अगस्त को लिखे गए लेटर में मांग की गई कि इमरान खान के साथ मानवीय व्यवहार किया जाए। साथ ही सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक इमरान की मेडिकल जांच की जाए। लेटर लिखने वालों में भारत के 3, ऑस्ट्रेलिया के 8, इंग्लैंड के 6, वेस्टइंडीज-श्रीलंका के 1-1 और न्यूजीलैंड के 2 पूर्व कप्तान शामिल हैं। क्रिकेटर्स ने ईमेल से लेटर भेजा पूर्व कप्तानों का छह महीने बाद दूसरा लेटर इस पत्र में कहा गया है- ‘छह महीने पहले 14 पूर्व इंटरनेशनल क्रिकेट कप्तानों ने आपको और पाकिस्तान सरकार को इमरान खान के साथ मानवीय व्यवहार और सही मेडिकल इलाज की अपील की थी। हमने तब राजनेताओं के तौर पर नहीं, बल्कि पूर्व साथियों के तौर पर लिखा था। उन्होंने कहा- क्रिकेट मैदान पर बना यह रिश्ता उन सीमाओं और मतभेदों से ऊपर है, जो अक्सर देशों को बांटते हैं। अब हम फिर लिख रहे हैं और इस बार 7 अन्य पूर्व कप्तान भी हमारे साथ हैं। 6 देशों के 21 पूर्व कप्तान, इनमें पाकिस्तान-बांग्लादेश का एक भी नहीं निजी डॉक्टरों को जांंच में शामिल करने को कहा पूर्व कप्तानों ने लिखा- सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की जांच के लिए गठित मेडिकल बोर्ड में उनके पर्सनल डॉक्टरों और बहन डॉ. उजमा खान को शामिल करने और परिवार से हर हफ्ते मुलाकात का आदेश दिया था। हालांकि, कोर्ट के आदेश के विपरीत राज्य द्वारा नियुक्त टीम ने महज कुछ ही घंटे में उन्हें फिट बताकर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही अदियाला जेल वापस भेज दिया।’ इमरान के परिवार और कानूनी टीम ने इसे अदालत के निर्देशों का सीधा उल्लंघन बताया है। वहीं, मामले पर नजर रख रहे पूर्व अंतरराष्ट्रीय कप्तानों ने स्पष्ट किया कि वे पाकिस्तान की कानूनी प्रक्रिया पर फैसला नहीं दे रहे, बल्कि निष्पक्षता के लिए गठित मेडिकल बोर्ड को पूरी और स्वतंत्र जांच करने देने की अपील कर रहे हैं। जैक गोल्डस्मिथ ने ब्रिटेन के विदेश मंत्री को पत्र लिखा ब्रिटेन की कंजरवेटिव पार्टी के सदस्य और इमरान के पूर्व बहनोई जैक गोल्डस्मिथ ने 21 अगस्त को ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड को पत्र लिखा। उन्होंने ब्रिटेन के विदेश मंत्री से इमरान के इलाज को लेकर पाकिस्तान सरकार से हस्तक्षेप करने की अपील की। गोल्डस्मिथ ने आरोप लगाया- ‘अगर सार्थक हस्तक्षेप नहीं किया गया, तो पाकिस्तानी सरकार इमरान खान को सिर्फ इसलिए खत्म कर देगी, क्योंकि जब तक वह जिंदा हैं, वे उनकी सत्ता और भ्रष्टाचार के लिए खतरा हैं।’ गोल्डस्मिथ पहले भी ब्रिटेन की संसद में इमरान की जेल का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने इस्लामाबाद पर ज्यादा कूटनीतिक दबाव बनाने की मांग की थी। ब्रिटेन के मंत्रियों ने कहा है कि पाकिस्तान को बुनियादी आजादी, जेल में मानवीय व्यवहार और उचित मेडिकल इलाज तक पहुंच का सम्मान करना चाहिए। इमरान के इलाज को लेकर पाकिस्तान में राजनीतिक विवाद जेल में बंद पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) और सरकार के बीच उनके स्वास्थ्य और इलाज को लेकर विवाद चल रहा है। यह मामला अब मानवीय चिंता का विषय बन गया है। हालिया तनाव तब बढ़ा, जब इमरान को कोर्ट के आदेश के बावजूद निजी शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल ले जाने के बजाय इस्लामाबाद के सरकारी पाकिस्तान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (PIMS) ले जाया गया। PTI और पाकिस्तान सरकार ने एक-दूसरे पर कोर्ट के आदेश का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है। दाहिनी आंख की 85% रोशनी जाने का दावा इमरान के स्वास्थ्य में गिरावट के दावों के बीच उनके वकीलों ने फरवरी में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उनकी दाहिनी आंख की 85% रोशनी जा चुकी है। इमरान ने अक्टूबर 2025 से आंख की समस्या की शिकायत की थी, लेकिन वकीलों के मुताबिक जेल अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया। पाकिस्तान सरकार ने उनकी हालत की गंभीरता पर सवाल उठाया है। इमरान के परिवार और वकीलों ने उनके निजी डॉक्टर डॉ. फैसल सुल्तान से मिलने और इलाज में उन्हें शामिल करने की मांग की है। इमरान के इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड बनेगा सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की सेहत की जांच के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने का आदेश दिया है। कोर्ट ने इमरान की बहन डॉ. उजमा खान और उनके निजी डॉक्टर को भी मेडिकल बोर्ड में शामिल करने को कहा है। मेडिकल बोर्ड में कई विशेषज्ञ डॉक्टर होंगे। वे मिलकर इमरान की पूरी जांच करेंगे और पुरानी मेडिकल रिपोर्ट भी देखेंगे। इसके बाद डॉक्टर पता लगाएंगे कि उन्हें क्या परेशानी है, ब्लड क्लॉट क्यों बन रहा है और आगे कोई खतरा तो नहीं है। जांच के बाद बोर्ड बताएगा कि इमरान को किस इलाज की जरूरत है और उनका इलाज जेल में हो सकता है या अस्पताल में भर्ती कराना जरूरी है। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें सबसे पहले तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई। तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा रोक दी गई। इसके बावजूद दूसरे मामलों के चलते वह अभी जेल में हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई का कहना है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ मामले राजनीतिक वजहों से दर्ज किए गए। उनका आरोप है कि उन्हें राजनीति और चुनाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया। वहीं, पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं और कहती हैं कि ये मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। तोशाखाना क्या है और इमरान खान का मामला क्या है? तोशाखाना पाकिस्तान सरकार का सरकारी भंडार है। यहां प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति, मंत्री और दूसरे सरकारी अधिकारियों को विदेशों से मिले कीमती तोहफे जमा किए जाते हैं। इनमें घड़ियां, गहने, पेंटिंग जैसी चीजें शामिल होती हैं। इमरान खान से जुड़े विवाद इमरान खान 2018 से 2022 तक पाकिस्तान के प्रधानमंत्री रहे। इस दौरान उन्हें कई महंगे विदेशी तोहफे मिले। आरोप है कि कुछ तोहफों की जानकारी और उनकी बिक्री से मिली रकम की पूरी जानकारी नहीं दी गई। इससे जुड़े तीन मामले… 1. तोहफों की जानकारी छिपाने का आरोप 2022 में पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने इमरान को तोहफों की जानकारी गलत तरीके से घोषित करने का दोषी माना और उन्हें अयोग्य ठहराया। 2. तोशाखाना का पहला मामला इमरान पर आरोप था कि उन्होंने कुछ महंगे तोहफे तय कीमत देकर अपने पास रखे और बाद में बेच दिए। अगस्त 2023 में उन्हें 3 साल की सजा सुनाई गई। बाद में सजा निलंबित हो गई। 3. तोशाखाना-2 मामला इसमें 2021 में सऊदी क्राउन प्रिंस से मिले बुल्गारी ज्वेलरी सेट का मामला है। अभियोजन के मुताबिक इसकी कीमत करीब 8 करोड़ पाकिस्तानी रुपए थी, जबकि इसे करीब 29 लाख रुपए में रखने का आरोप है। इमरान खान के प्रमुख केस की स्थिति 1. तोशाखाना केस 2023 में इमरान खान को तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा हुई थी। बाद में यह सजा निलंबित हुई। हालांकि, बाद में तोशाखाना से जुड़े एक अन्य मामले में दिसंबर 2025 में इमरान खान और बुशरा बीबी को 17-17 साल की सजा सुनाई गई। यह सजा महंगे सरकारी तोहफों की कथित कम कीमत पर खरीद से जुड़े मामले में है। 2. साइफर केस इमरान खान को साइफर/स्टेट सीक्रेट्स केस में मिली 10 साल की सजा हाईकोर्ट ने पलट दी थी। जून 2024 में उन्हें इस मामले में बरी कर दिया गया। 3. इद्दत निकाह केस फरवरी 2024 में इमरान खान और बुशरा बीबी को 7-7 साल की सजा मिली थी। जुलाई 2024 में दोनों को इस मामले में बरी कर दिया गया। 4. अल-कादिर ट्रस्ट/£190 मिलियन केस यह मामला इमरान खान के प्रधानमंत्री रहते हुए ब्रिटेन से पाकिस्तान लौटाए गए करीब £190 मिलियन और उससे जुड़े कथित भ्रष्टाचार से संबंधित है।17 जनवरी 2025 को इमरान खान को 14 साल और बुशरा बीबी को 7 साल की सजा सुनाई गई। मई 2026 में इस सजा को निलंबित करने की उनकी याचिका इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने खारिज कर दी। उनकी मुख्य अपील पर सुनवाई जारी है। पाकिस्तान की ‘तिहाड़’ है अडियाला जेल अडियाला जेल रावलपिंडी की हाई-सिक्योरिटी जेल है। यहां 176 हाई-प्रोफाइल कैदियों के लिए अलग हाई-सिक्योरिटी बैरक है। 2013 में यहां 67 हाई-प्रोफाइल आतंकवादी समेत करीब 5,000 कैदी बंद थे। सुरक्षा के लिए यहां पुलिस, रेंजर्स और दूसरी एजेंसियां तैनात की जाती हैं। 2024 में यहां आतंकी हमले जैसी स्थिति से निपटने के लिए पुलिस, रेंजर्स, बम डिस्पोजल स्क्वॉड और रेस्क्यू टीम ने जॉइंट मॉक ड्रिल भी की थी। इमरान खान के यहां बंद होने के बाद जेल के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा पिकेट और एलीट कमांडो भी तैनात किए गए थे। यानी इसकी तुलना भारत की हाई-सिक्योरिटी तिहाड़ जेल से की जा सकती है। ———————– स्पोर्ट्स की यह खबर भी लिखें… कर्ण शर्मा ने क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लिया:भारत के लिए 4 मुकाबले खेले; 25 अगस्त को यूपी लीग में आखिरी मैच खेलेंगे 38 साल के लेग स्पिनर कर्ण शर्मा ने इंटरनेशनल और घरेलू क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास का ऐलान कर दिया। उन्होंने भारत के लिए 1 टेस्ट, 2 वनडे और 1 टी-20 मैच खेला। पूरी खबर पढ़ें…