अमेरिकी राजदूत बोले- भारत-अमेरिका रिश्तों से दूसरे देश जलते हैं:PM मोदी उन नेताओं में सबसे ऊपर, जिनसे ट्रम्प मिलना चाहते हैं

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच मजबूत होते रिश्तों से कई दूसरे देश ‘जलते’ हैं। गोर ने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प प्रधानमंत्री मोदी को अपना दोस्त मानते हैं और दिसंबर में होने वाले G20 समिट के दौरान जिन नेताओं से वह मिलना चाहते हैं, उनमें मोदी का नाम सबसे ऊपर होगा। G20 में मोदी-ट्रम्प की अलग मुलाकात संभव सर्जियो गोर ने इंडिया टुडे को दिए इंटरव्यू में कहा कि ट्रम्प और मोदी के बीच अच्छे व्यक्तिगत रिश्ते हैं। ऐसे में दिसंबर में G20 समिट के लिए मोदी के फ्लोरिडा पहुंचने पर दोनों नेताओं की अलग से मुलाकात भी हो सकती है। हालांकि, मोदी और ट्रम्प के बीच अलग से द्विपक्षीय बैठक की अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। गोर ने ट्रम्प के 2027 में भारत दौरे की संभावना के भी संकेत दिए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प 2020 में अपनी भारत यात्रा को अब भी याद करते हैं। अमेरिकी राजदूत के मुताबिक, जब भी ट्रम्प भारत की बात करते हैं तो वह यहां के लोगों से मुलाकात और प्रधानमंत्री मोदी के साथ अपने रिश्तों को याद करते हैं। गोर ने कहा कि अगला साल आने में ज्यादा समय नहीं है। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के भारत दौरे की कोई तारीख या आधिकारिक कार्यक्रम नहीं बताया। ट्रेड डील पर बोले- समझौते के काफी करीब भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर गोर ने कहा कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद डील से जुड़े मुद्दों पर दोबारा काम किया जा रहा है। उन्हें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में दोनों देश समझौते को अंतिम रूप दे सकते हैं। गोर ने कहा कि इतने बड़े व्यापार समझौते में समय लगना सामान्य है। उन्होंने अमेरिका और यूरोपीय संघ के बीच लंबे समय से चल रही व्यापार वार्ता का उदाहरण देते हुए कहा कि बड़े व्यापारिक समझौतों में कई साल लग सकते हैं। 240 अरब डॉलर का व्यापार, 500 अरब डॉलर का लक्ष्य गोर के मुताबिक, भारत और अमेरिका के बीच अभी करीब 240 अरब डॉलर का व्यापार है। दोनों देशों का लक्ष्य आने वाले वर्षों में इसे बढ़ाकर 500 अरब डॉलर करना है। उन्होंने कहा कि ट्रेड डील से दोनों देशों को आर्थिक फायदा हो सकता है। अमेरिका एक मजबूत और स्थिर भारत के साथ मिलकर काम करना चाहता है। गोर के बयान से साफ है कि भारत-अमेरिका के रिश्तों में व्यापार के साथ दोस्ती और रणनीतिक साझेदारी भी अहम है। ————————– यह भी पढ़ें….. पीएम मोदी ने मेलोनी को बधाई दी: सबसे लंबे समय तक इटली की प्रधानमंत्री रहने का रिकॉर्ड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी को सबसे लंबे समय तक लगातार प्रधानमंत्री रहने पर बधाई दी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…

भारत चांद पर पहुंच गया लेकिन जाति व्यवस्था अभी भी जारी है: बॉम्बे हाईकोर्ट

भारत चांद पर पहुंच गया लेकिन जाति व्यवस्था अभी भी जारी है: बॉम्बे हाईकोर्ट

bombay High court News

बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि 21वीं सदी में हम चांद के दूसरे छोर तक पहुंचने का बखान करते हैं लेकिन कठोर हकीकत यह है कि हमारे देश में अभी भी जाति व्यवस्था की सामाजिक बुराई जारी है, जिसकी वजह से हमारे कुछ नागरिकों को मानवीय गरिमा से नीचे के काम करने पर मजबूर होना पड़ता है। ALSO READ: मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों पर जलवायु के गंभीर खतरे का डर

 

कानूनी खबरों की वेबसाइट लाइव लॉ के मुताबिक, जस्टिस भारती डांगरे और जस्टिस मंजुशा देशपांडे की डिविजनल बेंच ने ‘मैनुअल स्कैवेंजिंग’ से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। हाथ से मैला ढोने या साफ करने को मैनुअल स्कैवेंजिग कहा जाता है। हाथों से सीवर या सेप्टिक टैंक की सफाई भी इसके दायरे में आती है। 

 

बेंच ने कहा, “मैनुअल स्कैवेंजिग एक ऐसी प्रथा है, जो आज भी हमारे देश में जारी है और जो एक विशेष वर्ग को पीढ़ियों से यह अमानवीय काम करने के लिए मजबूर कर रही है।” कोर्ट ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों और ऐसी प्रथाओं को प्रतिबंधित करने वाले कानूनों के बावजूद यह प्रथा अभी भी जारी है। ALSO READ: भारत के विमानन क्षेत्र पर संकट के बादल

 

कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार के उस नियम को चुनौती दी गई थी जिसमें कहा गया था कि अगर निजी सोसाइटी या ठेकेदार, मैनुअल स्कैवेंजिग के लिए किसी को काम पर रखते हैं तो दुर्घटना होने की स्थिति में मुआवजा देने की जिम्मेदारी भी उन्ही की होगी। कोर्ट ने कहा कि कानून नियोक्ता के आधार पर सफाई कर्मचारियों के साथ भेदभाव नहीं करता है।

अमेरिका में पढ़ाई पर घिरे अभिजीत दीपके ने PM मोदी को दी चुनौती, जानिए क्या कहा…

अमेरिका में पढ़ाई पर घिरे अभिजीत दीपके ने PM मोदी को दी चुनौती, जानिए क्या कहा...

Abhijeet Dipke Degree Controversy

Abhijeet Dipke News: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने अपनी शैक्षणिक योग्यता पर उठ रहे सवालों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक अनोखी चुनौती दी है। अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई के रिकॉर्ड पर हाल ही में शुरू हुए विवाद के बाद दीपके ने पीएम मोदी से कहा कि चलिए दोनों अपनी-अपनी डिग्री सार्वजनिक करते हैं। 

 

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में अभिजीत दीपके ने लिखा कि लोग मेरी डिग्री देखने का इंतजार करते-करते अपना सब्र खो रहे हैं। मुझे हैरानी होती है कि वे 12 साल से प्रधानमंत्री की डिग्री देखे बिना कैसे रह रहे हैं। इसके आगे उन्होंने पीएम मोदी को टैग करते हुए इनवाइट किया और कहा कि चलो हम दोनों अपनी डिग्री दिखाते हैं और इस मामले को यहीं खत्म करते हैं। ALSO READ: ‘कॉकरोच’ कहने पर हिला दी सरकार! पढ़िए CJP आंदोलन से अभिजीत दीपके को मिले 3 सबसे बड़े सबक

क्या है दीपके के सवाल?

दीपके ने एक्स पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की डिग्री साझा करते हुए कई सवाल उठाए हैं। उन्होंने लिखा- 1976 में, मोदी के मार्क्स कंप्यूटर से जेनरेट किए गए थे, जबकि दूसरे छात्रों के मार्क्स हाथ से लिखे गए थे। उन्होंने आगे लिखा- मोदी की मार्कशीट में 'यूनिवर्सिटी ऑफ़ दिल्ली' गोथिक फ़ॉन्ट में लिखा हुआ है, जबकि DU ने 1983 के बाद गोथिक फ़ॉन्ट का इस्तेमाल करना शुरू किया था। ALSO READ: NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला, दिल्ली समेत 5 राज्यों में FIR रद्द; CJP नहीं करेगी प्रोटेस्ट

पॉडकास्ट से शुरू हुआ विवाद

गौरतलब है कि अभिजीत दीपके की अमेरिकी डिग्री पर लंबे समय से सवाल उठते रहे हैं। यह विवाद तब और बढ़ गया जब हाल ही में प्रखर गुप्ता के एक पॉडकास्ट में (जिसमें एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक मेहमान थे) दीपके की बोस्टन यूनिवर्सिटी की शिक्षा पर खुले तौर पर सवाल खड़े किए गए। इसके जवाब में दीपके ने साफ किया कि वे अपनी डिग्री दिखाने के लिए पूरी तरह तैयार हैं, बशर्ते प्रधानमंत्री भी अपनी डिग्री सार्वजनिक करें।

 

हालांकि पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता पर सवाल उठना कोई नया मामला नहीं है, विपक्षी दल भी समय-समय पर यह मुद्दा उठाते रहे हैं। हालांकि, भाजपा पहले ही पीएम मोदी की डिग्री सार्वजनिक कर चुकी है और उसका कहना है कि यह मामला बहुत पहले ही सुलझ चुका है।

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में गोविंद देव गिरि के प्रमोशन पर उठे सवाल

​ram mandir trust govind dev giri: अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक में प्रशासनिक और संगठनात्मक स्तर पर कई ऐतिहासिक फैसले लिए गए हैं। चढ़ावा विवाद के चलते चंपत राय की जिम्मेदारी अब गोविंद देव गिरि को सौंपी गई है। दिल्ली के महेश भागचंदका को ट्रस्ट का कोषाध्यक्ष बनाया गया है। गिरि को महासचिव बनाए जाने के फैसले पर सवाल उठने लगे हैं। उनके बारे में कहा जा रहा है उनके कोषाध्यक्ष रहते हुए ही चढ़ावा में चोरी की घटना हुई थी। कोष के लिए कोषाध्यक्ष ही सीधे जिम्मेदार माना जाता है। ऐसे में महासचिव के रूप में गोविंद गिरि का नाम लोगों के गले नहीं उतर रहा है। 

क्या कहा गोविंद देव गिरि ने?

​ट्रस्ट के नवनियुक्त महासचिव स्वामी गोविंद देव गिरि ने स्पष्ट किया कि नई टीम का मुख्य लक्ष्य अयोध्या को दुनिया की सांस्कृतिक राजधानी के रूप में विकसित करना और मंदिर निर्माण के साथ-साथ ट्रस्ट के प्रशासनिक व वित्तीय कामकाज को पूरी पारदर्शिता से आगे बढ़ाना है।

 

​बैठक में वित्तीय व्यवस्था में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने, चढ़ावे की गिनती में मानवीय हस्तक्षेप कम करने और SIT जांच से जुड़े सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ट्रस्ट का रुख स्पष्ट किया गया। आने वाले दिनों में जरूरत पड़ने पर ज्वाइंट या डिप्टी CEO की नियुक्ति के लिए जल्द ही SOP और दिशा-निर्देश तैयार किए जाएंगे।

चंपतराय का दबदबा बरकरार

महासचिव पद से इस्तीफा दे चुके चंपत राय का सीधे-सीधे तो नहीं, लेकिन परोक्ष रूप से ट्रस्ट में उनका दबदबा बरकरार है। दरअसल, नए कोषाध्यक्ष महेश भागचंदका अशोक सिंघल फाउंडेशन के संस्थापक ट्रस्टी हैं। चंपत राय इस ट्रस्ट के आजीवन ट्रस्टी हैं। ट्रस्ट के नए सदस्य महेश पांडेय को भी चंपत राय का करीबी माना जाता है। हालांकि अध्यक्ष और महासचिव के पद अब संत समाज के पास हैं।  

 

उल्लेखनीय है कि ट्रस्ट के प्रशासनिक संचालन को सुदृढ़ करने के लिए पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर का पहला मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) चुना गया है। इस पद के लिए 16 अभ्यर्थियों में से तीन नाम—एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा, मेजर जनरल संजय प्रताप सिंह और श्रुति भारद्वाज—शॉर्टलिस्ट किए गए थे, जिसमें से जितेंद्र मिश्रा के नाम पर अंतिम सहमति बनी।

 

​इनके अलावा अयोध्या निवासी ​वरिष्ठ अधिवक्ता मदन मोहन पांडेय, जिन्होंने राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में रामलला की ओर से प्रभावी कानूनी पैरवी की थी। शिक्षाविद डॉ. निर्मला यादव को भी ट्रस्ट का सदस्य बनाया गया। 

गडकरी पूरे देश में चाहते हैं बाइक टैक्सी पर राज्यों के हाथ में चाबी! ऐसा हुआ तो 8 करोड़ लोगों को होने लगेगी टू-व्हीलर से कमाई

Bike Taxi Update: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने प्राइवेट टू-व्हीलर का इस्तेमाल सवारी ढोने यानी बाइक टैक्सी के रूप में करने की वकालत की है। उन्होंने राज्यों से अपील की है कि वे निजी मोटरसाइकिल और स्कूटर मालिकों को यात्रियों को ले जाने की अनुमति दें। गडकरी का तर्क है कि अगर ऐसा हुआ तो ग्रामीण इलाकों में करीब 8 करोड़ लोगों के लिए कमाई के नए मौके पैदा हो सकते हैं। वैसे आपको बता दें कि केंद्र सरकार भले ऐसा चाह ले लेकिन इसक बावजूद यह पूरी तरह से राज्यों पर निर्भर करता है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में बाइक टैक्सी चलाने की इजाजत देते हैं या नहीं।

राज्यों के पास क्यों है अंतिम फैसला?

महाराष्ट्र में सरकार के ‘सुरक्षा’ पायलट प्रोग्राम के शुभारंभ के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि, ‘हमने इसकी अनुमति दे दी है, लेकिन कुछ राज्य ऐसा नहीं कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट स्टेट सब्जेक्ट है। मैं उनसे ऐसा करने का आग्रह करूंगा क्योंकि इससे कई लोगों को आजीविका का साधन मिलेगा।’ Motor Vehicle Aggregator Guidelines, 2025 एक ऐसा फ्रेमवर्क देती है जिससे एग्रीगेटरों को पैसेंजर जर्नी के लिए नॉन-ट्रांसपोर्ट मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकते हैं।

क्या आपकी अपनी बाइक बन सकती है टैक्सी?

हर जगह खुद ब खुद किसी प्राइवेट बाइक का इस्तेमाल टैक्सी के रूप में नहीं किया जा सकता है। अलग-अलग राज्यों में इसे लेकर अलग-अलग रूल हैं। इसे कर्नाटक और महाराष्ट्र के हिसाब से समझा जा सकता है। इस साल जनवरी में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा था कि मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट गाड़ियों के रूप में किया जा सकता है और अधिकारियों को पीले रंग की प्लेट रजिस्ट्रेशन और कॉन्ट्रैक्ट पैसेंजर्स कैरियर्स के रूप में काम करने के लिए परमिट मांगने वाले मालिकों के आवेदनों पर विचार करने का निर्देश दिया था। हालांकि राज्य सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा, इंश्योरेंस, महिलाओं की सेफ्टी और बाइक टैक्सियों के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क की कमी से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।

दूसरी ओर महाराष्ट्र ने 2025 में अपने बाइक-टैक्सी नियमों को नोटिफाइड कर दिया था। इसमें एग्रीगेटर्स, परमिट और ऑपरेटिंग कंडिशन को कवर करने वाले प्रावधान शामिल हैं। इस फ्रेमवर्क में ई-बाइक और स्कूटर भी शामिल हैं।

ट्रैफिक नियमों के लिए ‘नेगेटिव पॉइंट सिस्टम’ और ‘सुरक्षा’ कार्यक्रम

बाइक टैक्सी पर बात करने के साथ ही गडकरी ने भारत के सड़क सुरक्षा नियमों में एक और प्रस्तावित बदलाव की जानकारी दी है। मंत्रालय ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए एक नेगेटिव पॉइंट सिस्टम पेश करने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्तावित सिस्टम के तहत बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों के नेगेटिव पॉइंट जमा होंगे और दोबारा उल्लंघन करने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार को बढ़ावा देना है।

आपको बता दें कि सुरक्षा नाम के पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य राजमार्गों और खनन कार्यों में शामिल ड्राइवरों और श्रमिकों को मुफ्त चिकित्सा जांच, परामर्श देना है। यह पायलट प्रोजेक्ट एनएच 44 पर नागपुर से काम्टी तक 150 किलोमीटर के हिस्से और चंद्रपुर के खनन क्षेत्र को कवर करेगा। इसमें शुरुआती चरण में 10000 लोगों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

यह भी पढ़ें: पुरी जगन्नाथ मंदिर के बैंक खाते में जमा है ₹1,912 करोड़, सामने आया कमाई और खर्च का पूरा ब्योरा

ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता से जुड़े आदेश पर रोक:जज बोलीं- सरकार जन्म से मिली नागरिकता नहीं छीन सकती

अमेरिका में फेडरल जज ने बुधवार को ट्रम्प प्रशासन के नए आदेश पर रोक लगा दी। यह आदेश अमेरिका में जन्म से मिलने वाली नागरिकता के नियम सीमित करने के लिए जारी किया गया था। ग्रीनबेल्ट की अमेरिकी जिला जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को यह फैसला दिया। प्रवासी अधिकार संगठनों ने ट्रम्प के आदेश के खिलाफ याचिका लगाई थी। विवाद 30 जून को आए अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुरू हुआ था। तब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रम्प प्रशासन की उस कोशिश को खारिज कर दिया था, जिसमें ऐसे बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की बात कही गई थी, जिनके माता-पिता अमेरिकी नागरिक या ग्रीन कार्ड धारक नहीं हैं। ट्रम्प ने बर्थ टूरिज्म को बनाया निशाना इसके बाद ट्रम्प ने 6 अगस्त को नया आदेश जारी किया। इसमें खास तौर पर ‘बर्थ टूरिज्म’ को निशाना बनाया गया था। बर्थ टूरिज्म उस स्थिति को कहा जाता है, जब विदेशी नागरिक अपने बच्चे को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के लिए अमेरिका जाकर जन्म देते हैं। नए आदेश में कुछ अन्य श्रेणियों के बच्चों की नागरिकता पर भी सवाल उठाया गया था। नए आदेश के खिलाफ उन बच्चों की ओर से अदालत में याचिका दायर की गई, जिनकी नागरिकता प्रभावित हो सकती थी। याचिकाकर्ताओं ने मांग की कि मुकदमे के नतीजे आने तक उनकी नागरिकता को पूरी तरह मान्यता दी जाए। सरकार नागरिकता को नकार नहीं सकती जज बोर्डमैन ने याचिकाकर्ताओं से सहमति जताते हुए कहा कि ट्रम्प का नया आदेश भी संविधान के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने अपने फैसले में लिखा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि इस मामले से जुड़े बच्चे जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं। ऐसे में सरकार उनकी नागरिकता को नकार नहीं सकती। अदालत के आदेश के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय, गृह सुरक्षा विभाग और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन जैसी संघीय एजेंसियां फिलहाल उन बच्चों की नागरिकता में दखल नहीं दे सकेंगी, जो इस मुकदमे के दायरे में आते हैं। संविधान से मिला हक राष्ट्रपति नहीं बदल सकते इस मामले में प्रवासी अधिकार संगठन CASA और असायलम सीकर अडवोकेट प्रोजेक्ट याचिकाकर्ता हैं। संगठनों का कहना है कि अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता संविधान से मिला अधिकार है और इसे राष्ट्रपति के आदेश से नहीं बदला जा सकता। सरकार का तर्क – कोर्ट ने जल्दबाजी में दखल दिया अमेरिकी सरकार का तर्क है कि अदालत ने जल्दबाजी में दखल दिया, क्योंकि आदेश को कैसे लागू किया जाएगा, इससे जुड़े नियम और दिशा-निर्देश अभी जारी नहीं हुए हैं। हालांकि जज बोर्डमैन ने कहा कि मामले में तत्काल अदालत की दखल जरूरी है। उन्होंने लिखा कि राष्ट्रपति की ओर से नागरिकता के अधिकार को सीमित करने की यह नई कोशिश भी न्यायिक समीक्षा के दायरे में आती है। ———————-

ट्रम्प के जन्मजात नागरिकता से जुड़े आदेश पर रोक:जज बोलीं- सरकार जन्म से मिली नागरिकता नहीं छीन सकती

अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के जन्म से मिलने वाली नागरिकता सीमित करने वाले नए आदेश पर फेडरल जज ने रोक लगा दी है। मैरीलैंड की जज डेबोरा बोर्डमैन ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। जज ने कहा कि संविधान के तहत जन्म से अमेरिकी नागरिकता पाने वाले बच्चों की नागरिकता सरकार नहीं रोक सकती। ट्रम्प ने 6 अगस्त को यह आदेश जारी किया था। इसमें ‘बर्थ टूरिज्म’ को निशाना बनाया गया था। इसमें विदेशी लोग बच्चे के जन्म के लिए अमेरिका आते हैं, ताकि बच्चे को अमेरिकी नागरिकता मिल सके। आदेश में कुछ अन्य मामलों में अमेरिका में जन्म लेने वाले बच्चों की नागरिकता पर भी रोक लगाने की बात कही गई थी। जज बोलीं- नागरिकता रोकने का अधिकार नहीं जज बोर्डमैन ने कहा कि ट्रम्प का आदेश संविधान के खिलाफ हो सकता है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही साफ कर चुका है कि इस मामले में आने वाले बच्चे जन्म से अमेरिकी नागरिक हैं। अदालत के आदेश के बाद अमेरिकी विदेश मंत्रालय, गृह सुरक्षा विभाग और सोशल सिक्योरिटी एडमिनिस्ट्रेशन फिलहाल इस मामले से जुड़े बच्चों की नागरिकता रोकने की कार्रवाई नहीं कर सकेंगे। सरकार ने फैसले का विरोध किया ट्रम्प प्रशासन ने कहा कि अदालत ने जल्दबाजी में दखल दिया है। सरकार के मुताबिक, आदेश को लागू करने के नियम और दिशा-निर्देश अभी तैयार भी नहीं हुए थे। हालांकि जज ने कहा कि मामले में तत्काल अदालत का दखल जरूरी है। राष्ट्रपति की ओर से नागरिकता का अधिकार सीमित करने की कोशिश की अदालत में समीक्षा हो सकती है। प्रवासी संगठनों ने कोर्ट में चुनौती दी थी प्रवासी अधिकार संगठनों CASA और असायलम सीकर, एडवोकेसी प्रोजेक्ट ने आदेश के खिलाफ अदालत का रुख किया था। उनका कहना था कि इससे कई बच्चों की नागरिकता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने मांग की कि मामले की सुनवाई पूरी होने तक इन बच्चों को मिलने वाली नागरिकता पर कोई रोक न लगाई जाए। सुप्रीम कोर्ट पहले भी ट्रम्प को रोक चुका है जन्म से मिलने वाली नागरिकता को लेकर ट्रम्प प्रशासन की कोशिशों पर सुप्रीम कोर्ट भी 30 जून को फैसला दे चुका है। कोर्ट ने प्रशासन की उस कोशिश को रोक दिया था, जिसमें कुछ बच्चों की जन्मसिद्ध नागरिकता खत्म करने की बात कही गई थी। अब फेडरल जज के इस फैसले से ट्रम्प प्रशासन की जन्मसिद्ध नागरिकता सीमित करने की कोशिश को एक और झटका लगा है। बच्चों की नागरिकता के लिए हजारों लोग अमेरिका आते हैं माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट (MPI) के अनुसार, अमेरिका में हर साल जन्म लेने वाले बच्चों में ‘बर्थ टूरिज्म’ से जुड़े मामलों की संख्या बहुत कम होती है। संस्था का अनुमान है कि हर साल 22 हजार से 26 हजार लोग अपने बच्चों को अमेरिकी नागरिकता दिलाने के उद्देश्य से अमेरिका आते हैं। हालांकि 2024 के सरकारी आंकड़ों में विदेशी पते वाली माताओं से जन्मे केवल 9,600 बच्चों का रिकॉर्ड दर्ज किया गया था। ———————- यह भी पढ़ें…. अमेरिका में 2 लाख विदेशियों के वीजा रद्द होंगे: इतिहास में पहली बार एक साथ इतने वीजा कैंसिल होंगे अमेरिकी सरकार 2 लाख विदेशी नागरिकों के बिजनेस (B1) और टूरिस्ट वीजा (B2) रद्द करने की तैयारी कर रही है। पूरी खबर पढ़ें…

Bristy Mukherjee Death : ममता बनर्जी की भतीजी बृष्टि मुखर्जी की मौत, घर में फंदे से लटका मिला शव, शिक्षक भर्ती मामले में गई थी नौकरी, जांच शुरू

Bristy Mukherjee Death : ममता बनर्जी की भतीजी बृष्टि मुखर्जी की मौत, घर में फंदे से लटका मिला शव, शिक्षक भर्ती मामले में गई थी नौकरी, जांच शुरू

पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की 28 वर्षीय भतीजी बृष्टि मुखर्जी (Bristy Mukherjee) की मंगलवार को बीरभूम जिले के रामपुरहाट में मौत हो गई।   बृष्टि का शव उनके गांव स्थित आवास में फंदे से लटका मिला। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, बृष्टि मुखर्जी का शव रामपुरहाट इलाके के कुसुम्बा स्थित उनके घर की दूसरी मंजिल के एक कमरे से बरामद किया गया। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है और मामले की जांच जारी है।

ALSO READ: SCO Summit : पाकिस्तान ने PM मोदी की फोटो की क्रॉप, वीडियो भी काटा, भारत ने दिखाया पूरा सच

शिक्षक भर्ती मामले में गई थी नौकरी

 

रिपोर्टों के मुताबिक, बृष्टि मुखर्जी उन करीब 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों में शामिल थीं, जिनकी नियुक्तियों को लेकर पश्चिम बंगाल शिक्षक भर्ती मामले में जांच हुई थी। बृष्टि बोलपुर के एक अपर प्राइमरी स्कूल में गैर-शिक्षण कर्मचारी के तौर पर कार्यरत थीं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद नौकरी गंवाने वाले उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम कथित तौर पर 608वें स्थान पर था। हाईकोर्ट के फैसले को बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी बरकरार रखा था।

ALSO READ: Maruti Suzuki : छोटी और सस्ती इलेक्ट्रिक कारों पर बड़ा अपडेट, मारुति सुजुकी ने EV को लेकर बताया अपना प्लान

कोर्ट के फैसले के बाद तनाव में होने की बात

 

रिपोर्टों के अनुसार, शिक्षक भर्ती मामले में अदालत के फैसले के बाद बृष्टि मानसिक तनाव में थीं। परिवार की ओर से बताया गया कि उनका इलाज भी चल रहा था। हालांकि, उनकी मौत के वास्तविक कारण और परिस्थितियों को लेकर पुलिस जांच कर रही है। अधिकारी के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम और अन्य कानूनी प्रक्रियाओं के बाद मौत से जुड़ी परिस्थितियां स्पष्ट हो सकेंगी।

क्या है West Bengal SSC भर्ती मामला?

यह मामला 2016 West Bengal State Level Selection Test (SLST) के जरिए स्कूलों में हुई शिक्षक और गैर-शिक्षक कर्मचारियों की भर्ती से जुड़ा है। आरोप था कि बड़ी संख्या में उम्मीदवारों को कथित तौर पर अनियमित तरीके से नौकरी दी गई। मामले की जांच के दौरान भर्ती प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार और पैसों के लेनदेन के आरोप सामने आए थे।

ALSO READ: Redmi Note 17 Pro Max 5G India Launch: भारत में जल्द दस्तक देगा Xiaomi का नया स्मार्टफोन, 10,000mAh बैटरी समेत मिलेंगे ये दमदार फीचर्स

इसी मामले के चलते करीब 26,000 शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों की नियुक्तियां रद्द करने का मामला अदालत तक पहुंचा। यह प्रकरण पश्चिम बंगाल में तत्कालीन ममता बनर्जी सरकार के कार्यकाल के दौरान सामने आए प्रमुख भर्ती विवादों में शामिल रहा है। पुलिस फिलहाल बृष्टि मुखर्जी की मौत की परिस्थितियों की जांच कर रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और जांच के बाद ही मौत के कारणों को लेकर स्थिति स्पष्ट होगी।

नोएडा सेक्टर 148 और 150 को जोड़ने के लिए एक्सप्रेसवे पर बनेगा नया फ्लाईओवर, संकरे अंडरपास से मिलेगी मुक्ति, फुल डिटेल जानिए

Noida News: राजधानी दिल्ली से सटे नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से बढ़ती आबादी और लगातार बढ़ते ट्रैफिक को देखते हुए नोएडा अथॉरिटी ने एक अहम योजना तैयार की है। नोएडा सेक्टर-148 और सेक्टर-150 को जोड़ने के लिए करीब 500 मीटर लंबा फ्लाईओवर बनाया जाएगा। इस प्रोजेक्ट पर लगभग 85 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। इसका उद्देश्य एक्सप्रेसवे के दोनों ओर स्थित सेक्टरों के बीच आवाजाही आसान करना और मौजूदा संकरे अंडरपास पर वाहनों का दबाव कम करना है।

148 से 150 के बीच बनेगा 500 मीटर का फ्लाईओवर

नोएडा अथॉरिटी एक्सप्रेसवे के किनारे स्थित सेक्टर-148, 149, 150, 151, 152 और 153 के बीच कनेक्टिविटी बेहतर करने की तैयारी में है। प्रस्तावित फ्लाईओवर करीब 500 मीटर लंबा होगा और मुख्य रूप से सेक्टर-148 तथा सेक्टर-150 को आपस में जोड़ेगा। अथॉरिटी ने इस परियोजना की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। परियोजना की अनुमानित लागत करीब 85 करोड़ रुपये बताई गई है।

मौजूदा अंडरपास बना परेशानी का कारण

फिलहाल, इस एक्सप्रेसवे के नीचे बने अंडरपास के जरिए आसपास के सेक्टरों के लोग एक तरफ से दूसरी तरफ आते-जाते हैं। लेकिन यह अंडरपास काफी संकरा है। खासकर सुबह और शाम के पीक आवर्स में यहां वाहनों की लंबी कतार लग जाती है। भारी ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है।

समस्या सिर्फ जाम तक सीमित नहीं है। मानसून के दौरान अंडरपास में पानी भरने से आवाजाही और ज्यादा प्रभावित होती है। ऐसे में फ्लाईओवर बनने के बाद स्थानीय वाहन चालकों को अंडरपास पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। साथ ही एक्सप्रेसवे के दोनों ओर आने-जाने के लिए एक वैकल्पिक और सीधा रास्ता उपलब्ध होगा।

करीब 2 लाख लोगों को होगा फायदा

अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक इस परियोजना से आसपास के सेक्टरों में रहने वाले करीब दो लाख लोगों को फायदा मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा आसपास के करीब 20 गांवों के लोगों के लिए भी स्थानीय आवागमन आसान होगा। फ्लाईओवर का सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि स्थानीय ट्रैफिक को एक्सप्रेसवे के नीचे बने संकरे अंडरपास से गुजरने की मजबूरी कम होगी। इससे पीक आवर्स में जाम की समस्या कम करने में मदद मिल सकती है।

स्पोर्ट्स सिटी में बढ़ने वाली गतिविधियों को ध्यान में रखकर फैसला

नोएडा अथॉरिटी के अधिकारियों के मुताबिक, सेक्टर-150 में स्पोर्ट्स सिटी से जुड़े विकास कार्य भी तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले समय में यहां खेल सुविधाओं और अन्य परियोजनाओं के विकसित होने के साथ ट्रैफिक का दबाव बढ़ने की संभावना है। इसी को देखते हुए अथॉरिटी ने अभी से कनेक्टिविटी मजबूत करने की योजना बनाई है। नोएडा अथॉरिटी के जनरल मैनेजर ए.के. अरोड़ा ने बताया कि क्षेत्र में तेजी से हो रहे विकास को ध्यान में रखते हुए सेक्टर-148 और सेक्टर-150 को जोड़ने वाला फ्लाईओवर बनाने का निर्णय लिया गया है।

स्पोर्ट्स सिटी की परियोजनाओं को भी मिली राहत

इसी बीच नोएडा जनरल मैनेजर बोर्ड ने स्पोर्ट्स सिटी के संशोधित लेआउट को मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही वर्ष 2022 में स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं पर लगाया गया व्यापक प्रतिबंध भी हटा दिया गया है।इस फैसले से लंबे समय से अटके प्रोजेक्टों में फंसे करीब 20,000 होमबायर्स को अपने फ्लैटों का कब्जा और रजिस्ट्री मिलने की उम्मीद जगी है।

यह कदम नवंबर 2025 में जारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के अनुपालन में उठाया गया है। इससे उन परियोजनाओं से जुड़े नक्शे की मंजूरी, बिल्डिंग प्लान के दोबारा सत्यापन और ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट जैसी प्रक्रियाओं का रास्ता साफ हुआ है, जो लंबे समय से अटकी हुई थीं।

एक्सप्रेसवे पर पहले से हैं दो प्रमुख फ्लाईओवर

नोएडा-ग्रेटर नोएडा एक्सप्रेसवे पर फिलहाल महामाया फ्लाईओवर और सेक्टर-128 का फ्लाईओवर प्रमुख क्रॉस-एक्सप्रेसवे कनेक्टिविटी देते हैं। प्राधिकरण ने एक्सप्रेसवे के आसपास ट्रैफिक व्यवस्था बेहतर करने के लिए कई अंडरपास भी बनाए हैं। इनमें सेक्टर-94, कोंडली गांव, एडवांट और सेक्टर-148 के अंडरपास शामिल हैं। इसके अलावा झट्टा और सुल्तानपुर गांव में भी अंडरपास का निर्माण कार्य चल रहा है।

फ्लाईओवर से स्थानीय ट्रैफिक को मिलेगा सीधा रास्ता

नए फ्लाईओवर के बनने के बाद नोएडा के प्रमुख सेक्टर-148 और 150 के बीच आने-जाने वाले गाड़ियों को मौजूदा संकरे अंडरपास से होकर गुजरने की जरूरत काफी हद तक कम हो जाएगी। इससे जाम, मानसून में जलभराव और पीक आवर्स में ट्रैफिक दबाव जैसी समस्याओं से राहत मिलने की उम्मीद है। नोएडा में एक्सप्रेसवे के आसपास तेजी से हो रहे आवासीय और कमर्शियल डेवलपमेंट के बीच यह फ्लाईओवर भविष्य में बढ़ने वाले ट्रैफिक को देखते हुए एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट साबित हो सकता है।

ये भी पढ़ें- रूसी सेना में भर्ती 227 भारतीयों में से 51 की यूक्रेन युद्ध में मौत, 139 लौटे घर; बाकी की रिहाई के लिए बातचीत जारी

CJP Protest Marc h: 5 सितंबर के दिल्ली मार्च पर SC ने क्यों नहीं लगाई रोक? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

CJP Protest Marc h: 5 सितंबर के दिल्ली मार्च पर SC ने क्यों नहीं लगाई रोक? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

Supreme Court Jantar Mantar Protest

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को Cockroach Janata Party (CJP) की ओर से 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर तत्काल प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद है कि सभी पक्ष शांतिपूर्ण और कानून के मुताबिक व्यवहार करेंगे तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की होगी।

ALSO READ: YouTube Creators की बल्ले-बल्ले, Amazon के साथ शुरू हुआ नया Affiliate फीचर, वीडियो से होगी अतिरिक्त कमाई

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि पुलिस द्वारा NEET प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित High Powered Enquiry Committee के समक्ष भी अपनी याचिका प्रस्तुत करें। पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए कहा कि इसे लंबित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया जाए और 10 सितंबर को सुनवाई की जाए।

 

कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी एजेंसियों की

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करने की उम्मीद है। वहीं, कानून लागू कराने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे तय करें कि क्या कानूनी है और क्या प्रतिबंधित है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों से अपेक्षा है कि वे कानून का सम्मान करें, अपने आचरण में संयम रखें और देश के कानून का पालन करें।

 

5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की तैयारी

CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च का आह्वान किया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चलाए गए 36 दिन के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया। CJP के मुताबिक प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाना है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि उसे इस तरह के किसी जुलूस के आयोजन के लिए अभी तक कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।

 

याचिका में सुरक्षा-संवेदनशील इलाकों में मार्च पर रोक की मांग

सेवानिवृत्त दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के इलाकों जैसे सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील संवैधानिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जुटान, मार्च या संगठित प्रदर्शन की अनुमति तभी दी जाए, जब आयोजकों ने आवश्यक अनुमति हासिल कर ली हो। याचिका में लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित किसी भी बड़े प्रदर्शन को नियंत्रित करने, टालने या उसके स्वरूप में बदलाव करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने यह व्यवस्था 12-13 सितंबर को प्रस्तावित BRICS Summit के समाप्त होने तक लागू रखने की मांग की है।

 

इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि कोई भी मार्च या जुलूस निर्धारित और अधिकृत सीमा से आगे न बढ़े तथा संबंधित क्षेत्र में लागू कानूनी अनुमति और नियामक व्यवस्था का पालन किया जाए।

 

Teachers' Day पर होगा प्रस्तावित मार्च

CJP का प्रस्तावित मार्च Teachers' Day यानी 5 सितंबर को आयोजित किया जाना है। खबर के मुताबिक इसमें उन छात्रों के परिवारों के शामिल होने की बात कही गई है, जिन्होंने इस साल NEET परीक्षा रद्द होने और उसके बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने के घटनाक्रम के बाद कथित तौर पर आत्महत्या की थी। इसके अलावा जुलाई के आंदोलन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का सामना करने वाले छात्रों के परिवारों के भी मार्च में शामिल होने की बात कही गई है।