ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। उन्होंने कहा कि फिल्म में घटनाओं को भारत के पक्ष में दिखाया गया है और इससे असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ ने मंगलवार तड़के करीब 2 बजे सोशल मीडिया X पर यह बयान दिया। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को ‘ट्रेजेडी और कॉमेडी’ तक बताया। उनका आरोप है कि फिल्म में कुछ चुनिंदा इंटरव्यू, भावुक कहानी और फिल्मी अंदाज का इस्तेमाल किया गया है। डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ 15 अगस्त को रिलीज हुई थी। इसमें ऑपरेशन सिंदूर में शामिल भारतीय सैन्य अधिकारियों के इंटरव्यू हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी इसमें नजर आए हैं। पाकिस्तान बोला- सैन्य नाकामी को जीत बताया पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत ने ऑपरेशन के नतीजे को अपनी जीत के तौर पर दिखाया है। उन्होंने कहा कि फिल्म में कहानी और वीडियो के जरिए सैन्य नाकामी को सफल ऑपरेशन बताया गया है। उनका कहना था कि फिल्म बनाने से उस समय हुई असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के संघर्ष में उनकी सेना ने 8 भारतीय सैन्य विमान गिराए थे। हालांकि भारत इन दावों को पहले ही नकार चुका है। सीजफायर पर भी पाकिस्तान ने सवाल उठाए पाकिस्तानी सेना ने कहा कि लड़ाई दोनों देशों के DGMO यानी सैन्य ऑपरेशन के प्रमुख अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद रुकी थी। इसलिए इसे भारत की एकतरफा जीत बताना सही नहीं है। पाकिस्तान ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री में एक तरफ भारत की बड़ी और सटीक सैन्य कार्रवाई की बात कही गई है, तो दूसरी तरफ यह भी कहा गया है कि भारत ने लड़ाई को सीमित रखा और पाकिस्तान को पीछे हटने का मौका दिया। पाकिस्तान ने इसे विरोधाभासी दावा बताया। पहलगाम हमले से ऑपरेशन सिंदूर तक 19 दिनों में क्या-क्या हुआ? 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष बढ़ा और 10 मई को DGMO स्तर की बातचीत के बाद सीजफायर पर सहमति बनी। ————————
ये खबर भी पढ़ें…. इमरान खान से बहन और पत्नी ने मुलाकात की:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अडियाला जेल पहुंचीं; पूर्व PM अस्पताल शिफ्ट किए जाएंगे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से उनकी बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने अडियाला जेल में मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मुलाकात हुई। नोरीन 9 महीने बाद इमरान से मिलीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बहन नोरीन नियाजी ने मंगलवार को अडियाला जेल में उनसे मुलाकात की। करीब 9 महीने बाद हुई इस मुलाकात के लिए नोरीन सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश के बाद जेल पहुंचीं, जिसमें इमरान को परिवार से हर हफ्ते मिलने की अनुमति दी गई है। करीब 15 मिनट चली मुलाकात में नोरीन ने इमरान की सेहत के बारे में पूछा। उन्होंने उन्हें सुप्रीम कोर्ट के उस आदेश की जानकारी भी दी, जिसमें इमरान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने को कहा गया है। दोनों ने कुछ कानूनी मामलों पर भी बात की। इमरान ने अपनी पत्नी बुशरा बीबी से भी मुलाकात की। दोनों करीब 30 से 35 मिनट साथ रहे। इससे पहले बुशरा ने अपनी बेटी मुबाशरा शेख और ननद मेहरुन्निसा से मुलाकात की थी। पुलिस सिर्फ ने नोरीन को मिलने दिया नोरीन अपनी बहनों अलीमा खान और उजमा खान के साथ अडियाला जेल के रास्ते में डहगल चेकपॉइंट पहुंची थीं। पुलिस ने तीनों को रोक लिया, लेकिन बाद में सिर्फ नोरीन को इमरान से मिलने के लिए जेल जाने दिया। करीब 15 मिनट की मुलाकात के बाद नोरीन ने इमरान से मिलने की पुष्टि की। हालांकि, कोर्ट में दिए भरोसे के मुताबिक उन्होंने मीडिया से कोई बात नहीं की। कोर्ट ने कहा- परिवार से मिलना अधिकार सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इमरान के परिवार से हर हफ्ते मुलाकात कराने का आदेश दिया था। कोर्ट ने कहा कि परिवार से मिलना कोई एहसान नहीं, बल्कि मौलिक अधिकार है। अदालत ने पिछले 3 साल में इमरान और उनकी बहनों के बीच हुई मुलाकातों का रिकॉर्ड भी मांगा है। उनके बेटों से हुई बातचीत और फोन कॉल की जानकारी देने को भी कहा गया है। इमरान को अस्पताल भेजने का भी आदेश सुप्रीम कोर्ट ने इमरान को इलाज और मेडिकल जांच के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने का आदेश भी दिया है। कोर्ट ने उनके इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड बनाने को कहा है, जिसमें उनके निजी डॉक्टर और बहन डॉ. उजमा खान को शामिल किया जाएगा। अडियाला जेल की मेडिकल रिपोर्ट में इमरान के ब्लड प्रेशर और तनाव को लेकर चिंता जताई गई थी। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें सबसे पहले तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई। तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा रोक दी गई। इसके बावजूद दूसरे मामलों के चलते वह अभी जेल में हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी पीटीआई का कहना है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ मामले राजनीतिक वजहों से दर्ज किए गए। उनका आरोप है कि उन्हें राजनीति और चुनाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया। वहीं, पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं और कहती हैं कि ये मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। ————————– ये खबर भी पढ़ें… PAK सुप्रीम कोर्ट बोला-इमरान को 2 दिन में अस्पताल भेजें:कहा- बहनों से मिलना उनका अधिकार; 2023 से जेल में हैं पूर्व PM पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को अस्पताल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इमरान को 48 घंटे में शिफा इंटरनेशनल अस्पताल ट्रांसफर किया जाए। पूरी खबर यहां पढ़ें…

वैश्विक वित्तीय संस्था JP Morgan से जुड़ी एक चेतावनी के मुताबिक, वर्ष 2027 में दुनिया को बड़े खाद्य आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ सकता है। भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया उन देशों में शामिल हो सकते हैं, जहां इसका असर सबसे गंभीर रहने की आशंका है। इस संभावित संकट के पीछे भूराजनीतिक तनाव, उर्वरकों की कमी, कृषि लागत में बढ़ोतरी और अल नीनो से जुड़े बदलते मौसम के पैटर्न को प्रमुख कारण माना गया है।
2027 की पहली छमाही में महंगाई 5% तक पहुंचने का अनुमान
रिपोर्ट के अनुसार, 2027 के पहले छह महीनों में वैश्विक महंगाई करीब 5% तक पहुंच सकती है। इसकी तुलना में 2026 की इसी अवधि में यह करीब 2.8% रही थी।
संभावित संकट केवल खाद्यान्न की कमी तक सीमित नहीं रहेगा। उत्पादन लागत बढ़ने और मौसम में अनिश्चितता के कारण किसानों के लिए फसल उत्पादन बनाए रखना भी मुश्किल हो सकता है। अगर खाद्य कीमतों में तेज वृद्धि होती है तो विकासशील देशों में परिवारों को अपनी आय का बड़ा हिस्सा जरूरी खाद्य वस्तुओं पर खर्च करना पड़ सकता है।
उर्वरक की कमी बढ़ा सकती है चिंता
संभावित खाद्य संकट में उर्वरक आपूर्ति एक महत्वपूर्ण कारक हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कुल यूरिया निर्यात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी करीब 42%, जबकि अमोनिया निर्यात में हिस्सेदारी करीब 27% है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है।
रिपोर्ट में एक संभावित घटनाक्रम की ओर भी इशारा किया गया है। इसके अनुसार, संघर्ष से ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है, जिसके बाद उर्वरकों की कमी, कृषि लागत में बढ़ोतरी, उत्पादन में गिरावट और अंततः खाद्य कीमतों में वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, बाधित आपूर्ति व्यवस्था और उत्पादन को सामान्य स्तर पर लाने में एक से चार साल तक का समय लग सकता है।
अल नीनो से फसल उत्पादन पर बढ़ सकता है दबाव
अल नीनो से जुड़े मौसम में बदलाव वैश्विक कृषि पर दबाव और बढ़ा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो के दौरान सूखा, बाढ़ और अन्य प्रतिकूल मौसम की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अल नीनो के कारण फसल उत्पादन में औसतन 3.5% की गिरावट देखी गई है। वहीं, एक 'सुपर अल नीनो' वैश्विक खाद्य महंगाई को करीब 0.7% तक बढ़ा सकता है। यदि इसके साथ ऊर्जा की कीमतों में भी वृद्धि होती है तो इसका प्रभाव 1.3% से 1.5% तक पहुंच सकता है।
भारत पर भी पड़ सकता है सीधा असर
भारत में अगर मानसून कमजोर या अनियमित रहता है तो कृषि क्षेत्र पर सीधा असर पड़ सकता है। बारिश पर निर्भर धान, दाल, तिलहन, कपास और गन्ने जैसी फसलों पर बारिश के बदलते पैटर्न का प्रभाव पड़ने की आशंका है। भारत के सामने चुनौती केवल पर्याप्त अनाज उपलब्ध कराने की नहीं होगी, बल्कि उर्वरक और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच किसानों के लिए कृषि उत्पादन की लागत को वहनीय बनाए रखना भी होगी।
ब्राजील और इंडोनेशिया भी जोखिम वाले देशों में
रिपोर्ट में ब्राजील और इंडोनेशिया को भी संभावित खाद्य संकट से गंभीर रूप से प्रभावित होने वाले देशों में शामिल किया गया है। कृषि लागत में वृद्धि, फसल उत्पादन में कमी, उर्वरक की संभावित कमी और प्रतिकूल मौसम इन देशों में खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। हालांकि, संभावित संकट का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में भूराजनीतिक तनाव, उर्वरक की उपलब्धता, ऊर्जा कीमतों और मौसम की स्थिति किस तरह बदलती है।

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) की ओर से 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित 'संसद चलो मार्च' के दौरान प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस बलप्रयोग का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादती के आरोपों की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करने की बात कही है। हालांकि, CJP ने समिति के गठन को लेकर अपनी कुछ शर्तें रखी हैं। पार्टी का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट समिति गठित करता है तो उसके सभी सदस्य पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष होने चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट बनाएगा हाई लेवल कमेटी
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ पुलिस की कथित ज्यादती की जांच के लिए एक उच्चस्तरीय समिति का गठन किया जाएगा। इसमें रिटायर्ड जज, पूर्व डीजीपी, सीबीआई के पूर्व निदेशक समेत अन्य सदस्य शामिल हो सकते हैं। चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने कहा कि समिति में शामिल किए जाने वाले अन्य सदस्यों को लेकर अलग-अलग पक्षों से सुझाव लिए जाएंगे। इसके बाद समिति के गठन का आदेश बुधवार को जारी किया जाएगा।
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CJP ने कहा- समिति स्वतंत्र होनी चाहिए
सुप्रीम कोर्ट के बाहर CJP के सह संयोजक सौरभ दास ने कहा कि यदि अदालत को लगता है कि प्रदर्शनकारियों को न्याय दिलाने के लिए उच्चस्तरीय समिति जरूरी है तो पार्टी अदालत के फैसले का सम्मान करेगी। हालांकि, उन्होंने समिति के सदस्यों के चयन को लेकर स्पष्ट शर्त रखी। दास के मुताबिक, समिति के सदस्य ऐसे होने चाहिए जिनकी निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर कोई सवाल न उठे। उन्होंने कहा कि समिति में ऐसे लोगों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए जिनका पिछला रिकॉर्ड पहले से सवालों के घेरे में रहा हो। उन्होंने कहा कि यह सरकार की समिति नहीं बल्कि सुप्रीम कोर्ट की समिति होगी और देश के युवा इस पूरी प्रक्रिया पर नजर रख रहे हैं।
CJP ने अपने सदस्यों को समिति में शामिल करने की मांग की
CJP की लीगल मामलों की प्रमुख रत्ना सिंह ने कहा कि सरकार की ओर से उन्हें भरोसा दिया गया था कि प्रदर्शन से जुड़े सभी एफआईआर रद्द किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि पार्टी प्रदर्शन खत्म होने के एक सप्ताह के भीतर इस आश्वासन पर कार्रवाई चाहती थी। रत्ना सिंह ने कहा कि अगर जांच समिति बनाई जा रही है तो वह पूरी तरह स्वतंत्र होनी चाहिए और उसके सभी सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
उन्होंने यह भी मांग की कि CJP के सदस्यों को समिति में शामिल किया जाए, ताकि समिति के सामने रखी जाने वाली सूचनाओं का सत्यापन किया जा सके। उनका कहना है कि व्यक्तिगत रूप से पार्टी उच्चस्तरीय समिति नहीं चाहती, बल्कि वह सरकार की ओर से दिए गए आश्वासन को पूरा किए जाने की मांग कर रही है।
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क्या है पूरा मामला?
20 जुलाई : दिल्ली में 'संसद चलो मार्च' के दौरान पुलिस बलप्रयोग के आरोप।
सुप्रीम कोर्ट : प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए हाई लेवल कमेटी बनाने की घोषणा।
प्रस्तावित समिति : रिटायर्ड जज, पूर्व डीजीपी, पूर्व सीबीआई निदेशक समेत अन्य सदस्य।
CJP की मांग : समिति पूरी तरह स्वतंत्र और निष्पक्ष हो।
दूसरी मांग : समिति के सदस्यों के नाम सार्वजनिक किए जाएं।
CJP की अतिरिक्त मांग : पार्टी के सदस्यों को भी समिति में शामिल किया जाए।
जंतर-मंतर आंदोलन के बाद 'स्कूल ठीक करो' अभियान
संसद मार्च और सुप्रीम कोर्ट में जांच समिति की मांग के बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके अब सरकारी स्कूलों की बदहाल व्यवस्था को लेकर अभियान चला रहे हैं। उनके अभियान का असर उनके पैतृक गांव महाराष्ट्र के हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी में भी दिखाई देने लगा है।
दीपके ने 15 अगस्त को अपने पैतृक गांव के जिला परिषद स्कूल का दौरा किया था। इस दौरान उन्होंने स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और टूटी खिड़कियों समेत कई समस्याओं को सामने रखा था। इसके बाद स्थानीय प्रशासन ने स्कूल में मरम्मत कार्य शुरू करा दिया।
मिलीं नई बेंच-डेस्क और कंप्यूटर
अभिजीत दीपके ने मंगलवार, 18 अगस्त को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर स्कूल की तस्वीरें साझा कीं। उन्होंने बताया कि उनके गांव के स्कूल के बच्चों को अब नई बेंच-डेस्क मिल गई हैं। उन्होंने गांव के लोगों और स्कूल स्टाफ का आभार जताते हुए इसे अपने जीवन के सबसे खुशी भरे पलों में से एक बताया। एक अन्य वीडियो में उन्होंने बताया कि स्कूल में अब कंप्यूटर भी लगाए गए हैं। दीपके ने कहा कि जब सरकारें विफल होती हैं तो आम लोग मदद के लिए आगे आते हैं।
When the Govt Fails, People Step Up!
First ever computer arrives at my village.
Change is possible! pic.twitter.com/GKkCrb24RH
— Abhijeet Dipke (@abhijeet_dipke) August 18, 2026
'अब रुकना नहीं है, स्कूल ठीक करके ही रहेंगे'
दीपके ने इससे पहले एक वीडियो में कहा था कि हिंगोली जिले के लिंबाला गांव के लोगों की यह पहली बड़ी जीत है। उन्होंने बताया कि स्कूल के प्रिंसिपल को निलंबित किया गया है। उन्होंने इस जीत को अब्दुल और उसके पिता को समर्पित करते हुए कहा कि अब स्कूल सुधार का अभियान रुकना नहीं चाहिए।
15 अगस्त से शुरू किया 'स्कूल ठीक करो' अभियान
अभिजीत दीपके ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत अपने पैतृक गांव के स्कूल से की थी। ध्वजारोहण समारोह में शामिल होने के बाद उन्होंने स्कूल परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कक्षाओं की टूटी खिड़कियों, खराब सीसीटीवी कैमरों और अन्य बुनियादी सुविधाओं की कमी को उजागर किया। दीपके के दौरे के बाद स्थानीय ग्राम पंचायत ने स्कूल की समस्याओं को दूर करने के लिए काम शुरू कराया।
खिड़कियां बदली जा रहीं, नए CCTV कैमरे लगाए जा रहे
संतुक पिंपरी के सरपंच विजय पुरी ने बताया कि दीपके ने स्कूल में उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया था और जिन कमियों की ओर ध्यान दिलाया गया, उन्हें दूर करने का काम शुरू कर दिया गया है। स्कूल की क्षतिग्रस्त खिड़कियों को बदला जा रहा है और खराब सीसीटीवी कैमरों की जगह नए कैमरे लगाए जा रहे हैं।
इसके अलावा शौचालयों में पानी की समस्या को भी दूर किया गया है और चौबीसों घंटे पानी की आपूर्ति की व्यवस्था की गई है। राज्य के शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने भी स्कूल प्रबंधन को बुनियादी सुविधाओं से जुड़े मरम्मत कार्य जल्द पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
सरकारी स्कूलों को लेकर दीपके का बड़ा सवाल
अभिजीत दीपके ने सरकारी स्कूलों की व्यवस्था को लेकर सरकार और शिक्षा विभाग के अधिकारियों पर सवाल उठाया है। उनका कहना है कि अगर मंत्री, शिक्षा विभाग के अधिकारी, प्रिंसिपल, शिक्षक और दूसरे कर्मचारी अपने बच्चों को सरकारी स्कूलों में पढ़ाएं तो इन स्कूलों की स्थिति में तेजी से सुधार हो सकता है। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकारी अधिकारी अपने बच्चों को निजी स्कूलों में क्यों पढ़ाते हैं? क्या उन्हें अपने ही सरकारी स्कूलों की व्यवस्था पर भरोसा नहीं है? दीपके का कहना है कि सरकारी स्कूलों की वास्तविक स्थिति में सुधार के लिए केवल घोषणाओं की नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और जवाबदेही की जरूरत है।

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की खराब सेहत पर सुप्रीम कोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने उन्हें इलाज के लिए तुरंत इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल भेजने और 16 सितंबर तक अस्पताल में रखने का आदेश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने अदियाला जेल में बंद इमरान को इलाज के लिए तुरंत इस्लामाबाद के शिफा इंटरनेशनल हॉस्पिटल में भर्ती कराने का आदेश दिया है। उन्हें 16 सितंबर तक अस्पताल में रखने का निर्देश दिया गया है। उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) ने इस फैसले का स्वागत किया है।
पीटीआई और इमरान खान का परिवार लंबे समय से उनकी खराब सेहत को लेकर चिंता जताता रहा है। PTI प्रवक्ता ने कहा कि यह फैसला स्वागत योग्य है लेकिन उनकी पार्टी चाहती है कि इमरान खान को तब तक अस्पताल में रखा जाए, जब तक डॉक्टर उनकी सेहत को पूरी तरह ठीक न मान लें।
आंखों की रोशनी जाने का खतरा
गौरतलब है कि 73 वर्षीय इमरान खान अगस्त, 2023 से जेल में हैं। उन्हें कई मामलों में सजा सुनाई गई है। इमरान इन मामलों को राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताते हुए आरोपों से इनकार करते रहे हैं। उनके वकीलों के मुताबिक जेल में रहने के दौरान उनकी दाहिनी आंख की रोशनी काफी प्रभावित हुई है। उनके बेटों ने भी पिछले साल उनकी बिगड़ती सेहत को लेकर चिंता जताई थी।
पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को इलाज के लिए शिफा इंटरनेशनल अस्पताल भेजने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि इमरान को आज ही अस्पताल ट्रांसफर किया जाए। उनकी सेहत की जांच और इलाज के लिए मेडिकल बोर्ड भी बनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अडियाला जेल प्रशासन से इमरान की पूरी मेडिकल रिपोर्ट मांगी। जस्टिस शाहिद वहीद ने कहा कि कोर्ट के सामने पूरी रिपोर्ट के बजाय सिर्फ उसकी समरी पेश की गई है। तीन जजों की बेंच इमरान के इलाज और परिवार से मुलाकात से जुड़ी याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। बेंच की अध्यक्षता जस्टिस शाहिद वहीद ने की। इसमें जस्टिस नईम अख्तर अफगान और जस्टिस इश्तियाक इब्राहिम शामिल थे। रिपोर्ट में इमरान की पल्स और दिल की हालत पर चिंता जताई जेल प्रशासन की रिपोर्ट में इमरान की पल्स और दिल की हालत को लेकर भी चिंता जताई गई थी। रिपोर्ट में एंजियोग्राफी कराने की सलाह का जिक्र था। इस पर इस्लामाबाद के एडवोकेट जनरल ने बताया कि यह जांच जेल के बाहर अस्पताल में कराई जा सकती है। PTI के वकील ने इमरान के शरीर में ब्लड क्लॉट बनने की वजह पता लगाने और उनके निजी डॉक्टरों से जांच कराने की मांग भी की। कोर्ट बोला- इमरान की सेहत पर राजनीति न करें सुप्रीम कोर्ट ने PTI से इमरान की मेडिकल स्थिति को राजनीतिक मुद्दा नहीं बनाने को कहा। कोर्ट ने मुलाकात के बाद PTI नेताओं और परिवार की ओर से मीडिया में दिए जाने वाले बयानों पर भी सवाल उठाए। जस्टिस अफगान ने कहा कि पार्टी को यह तय करना चाहिए कि इमरान की सेहत को लेकर राजनीति न हो। कोर्ट ने इमरान की बहनों से मुलाकात को लेकर भी सवाल उठाया। जस्टिस वहीद ने कहा कि बहनों से मिलना कोई एहसान नहीं, बल्कि उनका मौलिक अधिकार है। अदालत ने पिछले तीन साल में इमरान और उनकी बहनों के बीच हुई सभी मुलाकातों की जानकारी मांगी। इमरान के बेटों से उनकी बातचीत और कॉल डिटेल रिकॉर्ड की जानकारी भी देने को कहा गया है। जेल रिपोर्ट में आंखों की बीमारी का जिक्र अडियाला जेल के सुपरिंटेंडेंट ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में इमरान की दो पेज की मेडिकल रिपोर्ट जमा की थी। इसमें उनकी आंख की बीमारी सेंट्रल रेटिनल वेन ऑक्लूजन (CRVO) का भी जिक्र है। रिपोर्ट के मुताबिक, इमरान का इस बीमारी का इलाज चल रहा है और उनकी प्रभावित आंख की नजर लगभग सामान्य हो गई है। रिपोर्ट में 4 नवंबर 2023 से 10 अगस्त 2026 के बीच 39 मेडिकल जांचों का भी जिक्र किया गया है। 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उन पर कई मामले दर्ज हुए। इनमें सरकारी तोहफों और गैरकानूनी शादी से जुड़े मामले भी शामिल हैं। इमरान और उनकी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक कार्रवाई बताते रहे हैं और आरोपों से इनकार करते हैं।

Latest News Today Live Updates in Hindi : छात्रों के संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देते हुए कहा कि छात्र बगैर अनुमति आगे बढ़ें, जो कि गलत था। पल पल की जानकारी…
ट्रंप ने कहा कि भारत में करोड़ों लोगों ने मतदान किया और मतदाताओं के लिए पहचान पत्र जरूरी था। उन्होंने कहा कि भारत में हर मतदाता की पहचान फिर अमेरिका में क्यों नहीं। उन्होंने इसी आधार पर सेव अमेरिका एक्ट पारित करने की मांग की। ALSO READ: भारत से सीख ले अमेरिका! ट्रंप ने की वोटर ID अनिवार्य करने की मांग, CEC ज्ञानेश कुमार का लिया नाम
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उत्तर प्रदेश, पंजाब और गुजरात के लिए नए राज्य प्रभारी और सह-प्रभारी नियुक्त किए हैं। विनोद तावड़े को उत्तर प्रदेश, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को पंजाब का प्रभारी नियुक्त किया गया। ALSO READ: BJP में बड़ा फेरबदल: विनोद तावड़े को UP, सतीश पूनिया को पंजाब और तरुण चुघ को गुजरात की जिम्मेदारीछात्रों के संसद मार्च पर दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा देते हुए कहा कि छात्र बगैर अनुमति आगे बढ़ें, जो कि गलत था। पुलिस ने दावा किया कि छात्रों पर न्यूनतम बल प्रयोग किया गया।

Rahul Gandhi Disproportionate Assets Case: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से बहुत बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने आय से अधिक संपत्ति मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट के समक्ष चल रही कार्यवाही को आगे न बढ़ाने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही अदालत ने सीबीआई (CBI) और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी केंद्रीय एजेंसियों को इस मामले में हाई कोर्ट के सामने कोई भी रिपोर्ट दाखिल करने से रोक दिया है।
अदालत ने इलाहाबाद हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि इस मामले में कार्यवाही को आगे न बढ़ाया जाए। साथ ही सीबीआई और ईडी समेत सभी संबंधित केंद्रीय एजेंसियों को भी सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे इस मामले में हाई कोर्ट के समक्ष अपनी कोई भी जांच रिपोर्ट दाखिल न करें। ALSO READ: UGC-NET रद्द होने पर राहुल गांधी का NTA पर हमला, बोले- गलती एजेंसी की, सजा छात्रों को क्यों?
शीर्ष अदालत ने जारी किया नोटिस
भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ ने राहुल गांधी की याचिका पर सुनवाई की। राहुल गांधी की ओर से अदालत में वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने पक्ष रखा और दलीलें पेश कीं। सिब्बल की दलीलों पर गौर करने के बाद शीर्ष अदालत ने सीबीआई, ईडी और याचिकाकर्ता (कर्नाटक निवासी एस विग्नेश शिशिर) को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
क्या था इलाहाबाद हाई कोर्ट का आदेश?
इससे पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस आरएस चौहान और जस्टिस बीआर सिंह की खंडपीठ ने कर्नाटक के भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर की याचिका पर सुनवाई करते हुए जांच एजेंसियों को निर्देश जारी किए थे। हाई कोर्ट ने सीबीआई, ईडी, कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT), राजस्व विभाग, वित्त मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय और गंभीर कपट अन्वेषण कार्यालय (SFIO) को आठ सप्ताह के भीतर आरोपों पर जवाब दाखिल करने को कहा था। उस समय सीबीआई और ईडी ने हाई कोर्ट को सूचित किया था कि उन्हें शिकायत मिल चुकी है और वे आरोपों की जांच कर प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत कर सकते हैं। इसी आदेश के खिलाफ राहुल गांधी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ALSO READ: पीएम रात में नहीं सोते, अमित शाह संसद से भाग गए…राहुल गांधी ने दिखाए तेवर, कहा- हम इनको पागल कर देंगे!
राहुल गांधी की संपत्ति से जुड़ा क्या है यह मामला?
यह मामला कर्नाटक के एक भाजपा कार्यकर्ता एस विग्नेश शिशिर द्वारा दायर की गई एक जनहित याचिका (PIL) से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि राहुल गांधी ने आय के अपने ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की है। याचिका में मांग की गई थी कि राहुल गांधी की कुल संपत्ति, वित्तीय लेनदेन और कॉर्पोरेट मामलों में कथित संलिप्तता की गहन जांच सीबीआई (CBI), ईडी (ED) और गंभीर कपट अन्वेषण कार्यालय (SFIO) जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों से कराई जाए।
राहुल गांधी की ओर से इसे राजनीति से प्रेरित और निराधार बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी, जिस पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने फिलहाल हाई कोर्ट की कार्यवाही और जांच एजेंसियों की रिपोर्ट दाखिल करने की प्रक्रिया पर रोक लगा दी है।

EPFO Higher Pension: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) के तहत ज्यादा पेंशन का इंतजार कर रहे कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए सरकार ने अहम जानकारी दी है। लोकसभा में पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार ने बताया कि EPS के तहत उच्च पेंशन (Higher Pension) के आवेदनों के निपटारे में तेजी लाने के लिए EPFO चार प्रमुख कदम उठा रहा है। हालांकि, सरकार ने सभी लंबित मामलों के निपटारे या बकाया राशि (Arrears) के भुगतान के लिए कोई नई अंतिम समयसीमा घोषित नहीं की है।
यह प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2022 के फैसले के बाद शुरू हुई थी। इस फैसले में पात्र कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को निर्धारित शर्तों के अधीन वास्तविक उच्च वेतन के आधार पर पेंशन में योगदान का विकल्प दिया गया था।
EPFO क्या कर रहा है? जानिए 4 बड़े कदम
1. ऑनलाइन आवेदन की सुविधा
EPFO ने पात्र कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए Joint Option के Validation हेतु ऑनलाइन आवेदन की सुविधा शुरू की थी। इसका उद्देश्य उच्च वेतन पर पेंशन के विकल्प की प्रक्रिया को आसान बनाना था।
हालांकि, केवल ऑनलाइन आवेदन कर देने का मतलब यह नहीं है कि उच्च पेंशन मंजूर हो गई है। EPFO आवेदन की जांच करता है और यह सुनिश्चित करता है कि आवेदक निर्धारित पात्रता शर्तों को पूरा करता है या नहीं।
2. आवेदन और रिकॉर्ड की जांच
EPFO आवेदनों की जांच लागू नियमों के अनुसार कर रहा है। इसमें कर्मचारी के वेतन, PF योगदान और पुराने रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है। जरूरत पड़ने पर नियोक्ता से अतिरिक्त जानकारी या दस्तावेज भी मांगे जा सकते हैं।
अगर वेतन या योगदान के रिकॉर्ड में कोई अंतर है अथवा जानकारी अधूरी है, तो आवेदन के निपटारे में अतिरिक्त समय लग सकता है।
3. क्षेत्रीय कार्यालयों को समय पर निपटारे के निर्देश
सरकार के मुताबिक, EPFO ने अपने Regional Offices को उच्च वेतन पर पेंशन से जुड़े मामलों का समय पर निपटारा करने के निर्देश दिए हैं।
इसका मतलब है कि लंबित आवेदनों को निपटाने की जिम्मेदारी सिर्फ EPFO मुख्यालय की नहीं, बल्कि क्षेत्रीय कार्यालयों की भी है। इन कार्यालयों में ही आवेदनों के रिकॉर्ड और दस्तावेजों की काफी जांच होती है।
4. वीडियो कॉन्फ्रेंस से लगातार निगरानी
EPFO उच्च पेंशन के मामलों की प्रगति की Zonal और Regional Offices के साथ नियमित वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए समीक्षा भी कर रहा है।
इसका उद्देश्य लंबित मामलों की स्थिति जानना, रिकॉर्ड से जुड़ी समस्याओं की पहचान करना और जिन आवेदनों में देरी हो रही है, उन्हें जल्द निपटाना है।
99.2 फीसदी से ज्यादा आवेदन हो चुके हैं निपटाए
सरकार के मार्च 2026 में लोकसभा में दिए जवाब के मुताबिक, 31 जनवरी 2025 तक करीब 15.24 लाख Joint Options के आवेदन नियोक्ताओं की ओर से EPFO को भेजे गए थे। वहीं, 9 मार्च 2026 तक EPFO को प्राप्त 99.2 फीसदी से ज्यादा आवेदनों का निपटारा किया जा चुका था। हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। आवेदन का 'Disposed' होना और वास्तव में बढ़ी हुई पेंशन मिलना एक ही बात नहीं है।
आवेदन निपटने के बाद क्या होता है?
पात्र आवेदकों को EPFO की ओर से Demand Letter जारी किया जा सकता है। इसके बाद रिटायर्ड आवेदकों को निर्धारित राशि जमा करने और Form 10D सहित आवश्यक प्रक्रिया पूरी करनी होती है। इसके बाद पात्रता पूरी होने पर Pension Payment Order (PPO) जारी किया जा सकता है। वहीं, जो सदस्य अभी नौकरी में हैं, उन्हें निर्धारित आयु पर पेंशन का दावा करने और जरूरी फॉर्म जमा करने के बाद PPO मिलेगा।
क्या सरकार ने नई डेडलाइन घोषित की है?
नहीं।
उच्च पेंशन के लिए लंबित सभी मामलों को निपटाने या बकाया पेंशन का भुगतान करने के लिए सरकार ने फिलहाल कोई नई देशव्यापी अंतिम समयसीमा घोषित नहीं की है। सरकार का कहना है कि EPFO सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों को समयबद्ध तरीके से लागू कर रहा है और मामलों की लगातार निगरानी की जा रही है।
पेंशन का इंतजार कर रहे लोगों को क्या करना चाहिए?
अगर आपने Higher Pension के लिए आवेदन किया है तो सिर्फ आवेदन जमा होने के आधार पर यह न मानें कि ज्यादा पेंशन मंजूर हो गई है। आपको अपने आवेदन की वर्तमान स्थिति, EPFO की ओर से जारी Demand Letter, आवश्यक अतिरिक्त योगदान और Form 10D जैसी औपचारिकताओं की स्थिति पर नजर रखनी चाहिए।
कांग्रेस नेता और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को विनायक दामोदर सावरकर के खिलाफ की गई टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को राहुल गांधी के खिलाफ निचली अदालत द्वारा जारी समन और आपराधिक मानहानि की शिकायत को पूरी तरह से रद्द कर दिया है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि इस मामले में आवश्यक मंजूरी प्राप्त नहीं की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट ने फैसले में क्या कहा?
बेंच ने आदेश सुनाते हुए कहा कि अपर सॉलिसिटर जनरल और शिकायतकर्ता के वकील ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा दायर हलफनामे के संदर्भ में प्रस्तुत किया है कि मंजूरी मिलने की कोई जानकारी नहीं देता है। मामले के ऐसे परिदृश्य को देखते हुए शिकायत और मजिस्ट्रेट द्वारा पारित आदेशों को रद्द किया जाता है।
क्या है पूरा मामला और टिप्पणी का विवाद?
यह पूरा मानहानि मामला राहुल गांधी द्वारा अपनी भारत जोड़ो यात्रा के दौरान सावरकर पर दी गई एक टिप्पणी से जुड़ा हुआ है। राहुल गांधी ने 17 नवंबर 2022 को महाराष्ट्र के अकोला जिले में आयोजित एक रैली के दौरान सावरकर को लेकर टिप्पणी की थी। एडवोकेट नृपेंद्र पांडे ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी ने रैली के दौरान जानबूझकर सावरकर का अपमान किया और उनकी टिप्पणियां सावरकर को बदनाम करने की एक सुव्यवस्थित साजिश का हिस्सा थीं।
हाई कोर्ट का फैसला और राहुल गांधी की चुनौती
लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने अपने खिलाफ चल रही कार्यवाही का विरोध करते हुए निचली अदालत द्वारा जारी समन के फैसले को अदालत में चुनौती दी थी। इससे पहले हाई कोर्ट की लखनऊ पीठ ने 4 अप्रैल 2025 को कहा था कि राहुल गांधी सत्र अदालत के सामने एक रिवीजन पिटीशन दाखिल कर सकते हैं। इसके बाद हाई कोर्ट ने कहा कि इस चरण में उनके हस्तक्षेप की जरूरत नहीं है। इसके बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा। अब सर्वोच्च अदालत ने मंजूरी न होने के आधार पर पूरी शिकायत और समन आदेशों को ही खारिज कर दिया है।







