8th Pay Commission Family Unit Formula: केंद्र सरकार के कर्मचारियों की सैलरी और पेंशन में कितना बड़ा उछाल आएगा, इसका फैसला केवल महंगाई दर (DA) या आम आंकड़ों से तय नहीं होने वाला। इस बार एक ऐसा ‘मास्टर फैक्टर’ चर्चा में है, जो अगर लागू हो गया, तो आपकी न्यूनतम बेसिक सैलरी में 283% का ऐतिहासिक इजाफा हो सकता है।
यह मास्टर फैक्टर है ‘फैमिली यूनिट’ की संख्या में बदलाव। आसान भाषा में समझें तो अब तक सरकार आपके परिवार में सिर्फ 3 लोगों (आप, आपकी पत्नी/पति और बच्चे) का पेट पालने का खर्च जोड़कर सैलरी तय करती थी। लेकिन 8वें वेतन आयोग से मांग की जा रही है कि इसमें आश्रित माता-पिता को जोड़कर 5 फैमिली यूनिट्स का खर्च शामिल किया जाए।
आइए आसान गणित और सटीक उदाहरणों से समझते हैं कि यह ‘फैमिली यूनिट’ का नियम आपकी इनहैंड सैलरी और फिटमेंट फैक्टर पर कितना बड़ा असर डालेगा।
क्या है ‘फैमिली यूनिट’ और अब तक कैसे तय होती थी सैलरी?
वेतन आयोग कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन तय करने के लिए 1957 के 15वें इंडियन लेबर कांफ्रेंस (ILC) के मानकों का इस्तेमाल करता है। 7th पे कमीशन में 3 यूनिट्स का नियम था।
कर्मचारी = 1 यूनिट
पति/पत्नी = 1 यूनिट
2 बच्चे = 1 यूनिट (0.5 + 0.5)
कुल योग = 3 यूनिट्स
इसी 3 यूनिट के फॉर्मूले पर 7वें वेतन आयोग ने 2.57 का फिटमेंट फैक्टर दिया और आपकी न्यूनतम बेसिक पे ₹18,000 तय हुई।
8th Pay Commission में 5 यूनिट्स का नया प्रस्ताव
कर्मचारी = 1 यूनिट
पति/पत्नी = 1 यूनिट
2 बच्चे = 1.6 यूनिट (0.8 + 0.8)
आश्रित माता-पिता = 1.6 यूनिट (0.8 + 0.8)
कुल योग = 5.2 यूनिट्स (राउंड ऑफ करके 5 यूनिट्स)
3 बनाम 5 यूनिट से आपकी सैलरी में कितना फर्क आएगा?
मान लीजिए, एक परिवार के प्रति व्यक्ति महीने भर का न्यूनतम लिविंग कॉस्ट यानी राशन, कपड़ा, बिजली, मकान किराया, बच्चों की पढ़ाई, डॉक्टर का खर्च आज की महंगाई में ₹13,800 बैठता है।
केस A: पुराने फॉर्मूले (3 यूनिट) के तहत
3 यूनिट × ₹13,800 = ₹41,400 (अनुमानित न्यूनतम सैलरी)
केस B: नए प्रस्ताव (5 यूनिट) के तहत
5 यूनिट × ₹13,800 = ₹69,000 (प्रस्तावित न्यूनतम सैलरी)
फर्क साफ है कि सिर्फ 2 यूनिट्स माता-पिता का खर्च जुड़ने से ही आपकी बेसिक सैलरी सीधे ₹27,600 प्रति महीना अतिरिक्त बढ़ जाती है!
‘फिटमेंट फैक्टर’ में कैसे आएगा बंपर उछाल?
फिटमेंट फैक्टर वह मल्टीप्लायर होता है, जिससे आपकी पुरानी बेसिक सैलरी में गुणा करके नई बेसिक सैलरी निकाली जाती है।
7वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर: 2.57 (न्यूनतम बेसिक पे: ₹7,000 से बढ़कर ₹18,000 हुई)।
5 यूनिट लागू होने पर 8वें वेतन आयोग का फिटमेंट फैक्टर: 3.83
उदाहरण से समझें अपनी सैलरी की कैलकुलेशन:
अगर किसी केंद्रीय कर्मचारी (लेवल-1) की मौजूदा बेसिक सैलरी ₹18,000 है:
नई बेसिक सैलरी=मौजूदा बेसिक सैलरी×फिटमेंट फैक्टर
नई बेसिक सैलरी=₹18,000×3.83=₹68,940(≈₹69,000)
यानी 5 यूनिट्स का फॉर्मूला मंजूर होते ही आपकी बेसिक सैलरी ₹18,000 से बढ़कर सीधे ₹69,000 हो जाएगी। इसके ऊपर से मिलने वाला महंगाई भत्ता (DA), HRA और अन्य अलाउंस अलग से जुड़ेंगे।
कर्मचारी यूनियनों ने 5 यूनिट्स के लिए क्या कानूनी तर्क दिए हैं?
नेशनल काउंसिल ऑफ जेसीएम (NC-JCM) ने 8वें वेतन आयोग को सौंपे ज्ञापन में 5 यूनिट्स लागू करने के लिए बेहद ठोस आधार पेश किए हैं:
सीनियर सिटीजन एक्ट का हवाला: ‘माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण अधिनियम’ के तहत अपने बुजुर्ग माता-पिता का ध्यान रखना कर्मचारी की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।
सोशल सिक्योरिटी कोड 2020: नए लेबर कोड्स में भी कर्मचारी के परिवार की परिभाषा में आश्रित माता-पिता को कानूनी रूप से शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट का आदेश: सुप्रीम कोर्ट (1991 और भूपेंद्र नाथ हजारिका केस) ने भी माना है कि सरकार को अपने कर्मचारियों को सिर्फ ‘जीवित रहने लायक’ नहीं, बल्कि एक ‘सम्मानजनक जीवन’ जीने लायक वेतन देना चाहिए।
8वें वेतन आयोग की चर्चाओं में ‘फिटमेंट फैक्टर 3.83’ की चाबी इसी ‘5 फैमिली यूनिट’ वाले नियम में छिपी है। अगर पे-पैनल माता-पिता के खर्च को आधार मानते हुए 5 यूनिट्स का नियम अपनाता है, तो यह देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के वेतन में अब तक का सबसे बड़ा ऐतिहासिक उछाल लेकर आएगा।