RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी आई पसंद, जानिए किन शेयरों में देखने में मिल सकता है एक्शन

RBI Policy : फाइनेंशियल सेक्टर के दिग्गजों को आज की पॉलिसी पसंद आई है। यूजीआरओ कैपिटा (UGRO Capita) में चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर शिल्पा भट्टर का कहना है कि RBI का रेपो रेट के 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,दुनिया भर में छाई अनिश्चितताओं के बावजूद भारत की मैक्रोइकॉनॉमिक मजबूती पर भरोसे को दिखाता है। पश्चिम एशिया युद्ध का शुरुआती असर काफी हद तक खत्म हो जाने के बाद, पॉलिसी की स्थिरता से बिज़नेस कम्युनिटी के भरोसे के मजबूती मिलनी चाहिए,लिक्विडिटी की स्थिति बेहतर होनी चाहिए और MSMEs को वर्किंग कैपिटल को बेहतर ढंग से मैनेज करने में मदद मिलनी चाहिए,जिससे बेहतर रीपेमेंट और मज़बूत क्रेडिट क्वालिटी में मदद मिलेगी। खास बात यह है कि पॉलिसी स्टेटमेंट का टोन काफी न्यूट्रल रहा, इससे यह नहीं लगता कि रेट में जल्द ही सख्ती आने वाली है।

मॉडुलस अल्टरनेटिव्स (Modulus Alternatives) के CEO और CIO संदीप अग्रवाल ने कहा कि RBI का रेपो रेट 5.25% पर बनाए रखने का फैसला,ग्रोथ और मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी के बीच बैलेंस बनाने के लिए एक सोच-समझकर लिया गया फैसला नजर आता है। महंगाई के दबाव पर करीब से नजर रखी जा रही है और दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितताएं लगातार बढ़ रही हैं,ऐसे में जैसा है वैसा बनाए रखने से स्टेबिलिटी मिलती है और पिछली पॉलिसी के उपायों का असर इकॉनमी में और आगे तक पहुंच पाता है।

उन्होंने आगे कहा कि आरबीआई के आज के फैसले से बैंकिंग सेक्टर को फंडिंग कॉस्ट और इंटरेस्ट रेट्स के बारे में बेहतर अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही रिटेल, MSME और बिज़नेस सेगमेंट में क्रेडिट डिमांड भी बढ़ सकती। आगे महंगाई,लिक्विडिटी की स्थिति और ग्लोबल डेवलपमेंट RBI की पॉलिसी तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे। एक स्थिर पॉलिसी के साथ ही घरेलू इकोनॉमिक फंडामेंटल्स में सुधार से आने वाले महीनों में कर्ज की मांग टिकाऊ ग्रोथ देखने को मिलेगी।

एक्सिस डायरेक्ट की रिसर्च एनालिस्ट-BFSI, ज्ञानदा वैद्य का कहना है कि महंगाई का दबाव थोड़ा कम हुआ है और ग्रोथ मजबूत बनी रही है। इसको देखते हुए RBI का रेपो रेट में कोई बदलाव न करने और अपना न्यूट्रल रुख बनाए रखने का फैसला काफी हद तक उम्मीद के मुताबिक ही है। हालांकि तेल की कीमतों में नरमी आई है, लेकिन मानसून से जुड़ी चुनौतियां महंगाई के लिए एक बड़ा रिस्क बनी हुई हैं और इस पर पैनी नजर बनी हुई है।

आरबीआई ने महंगाई के अपने अनुमान को थोड़ा कम करके 5% कर दिया है, जो पहले 5.1% था। साथ ही, कोर महंगाई के अनुमान को भी घटाकर 4.3% कर दिया गया है, जो पहले 4.7% था। साथ ही, FY27 के लिए ग्रोथ के अनुमान को भी थोड़ा बढ़ाकर 6.7% कर दिया गया है, जो पहले 6.6% था।

बैंकिंग सेक्टर के नज़रिए से बात करें तो बैंकों ने सीजन के हिसाब से कमजोर रहने वाले Q1 में भी अच्छा काम किया है। इस अवधि में क्रेडिट ग्रोथ मजबूत रही और अर्निंग भी अच्छी रही। इसे क्रेडिट कॉस्ट को कंट्रोल करने और मामूली ओपेक्स ग्रोथ से सपोर्ट मिला, भले ही ज्यादातर बैंकों के मार्जिन में दिक्कतें रही। एसेट क्वालिटी में सुधार इस तिमाही की सबसे बड़ी पॉज़िटिव बात रही। नए एनपीए में नियंत्रण की वजह से ज्यादातर बैंकों में सुधार दिखा।

एक और खास बात यह रही है कि अब तक FCNR(B) डिपॉजिट में मजबूती आई है, जिससे Q2 में डिपॉज़िट ग्रोथ को सपोर्ट मिलना चाहिए। हमें उम्मीद है कि शॉर्ट-टर्म में मार्जिन काफी हद तक रेंज-बाउंड रहेंगे और कोई भी सुधार काफी हद तक पोर्टफोलियो मिक्स में अच्छे बदलाव से होगा।

ऐसे में निवेश के नजरिए से वह बैंक अच्छे लग रहे हैं जिनकी अर्निंग्स ग्रोथ, बैलेंस शीट और वैल्यूएशनम अच्छे हैं। नजरिए से कोटक महिंद्रा बैंक, ICICI बैंक, SBI, फेडरल बैंक और उज्जीवन SFB अच्छे लग रहे है। वहीं, NBFC में बजाज फाइनेंस, श्रीराम फाइनेंस और क्रेडिटएक्सेस ग्रामीण अच्छे नजर आ रहे हैं।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

 

RBI ने खराब ग्लोबल माहौल के बावजूद ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया, महंगाई कम होने की जताई उम्मीद, जानिए कहां से मिल रहा भरोसा

Crude Oil Price: होर्मुज खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल में बड़ी गिरावट, 5% से ज्यादा गिरकर $79 के पास

Crude Oil Price: होर्मुज खुलने की उम्मीद से कच्चे तेल में गिरावट बड़ी है। कच्चा तेल 5% से ज्यादा गिरकर 79 डॉलर के  पास आया। यह दबाव इस उम्मीद के बीच बना रहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने और फारस की खाड़ी से कच्चे तेल की सप्लाई बहाल करने के लिए कोई समझौता हो सकता है। ब्रेंट क्रूड गिरकर $79 प्रति बैरल के आसपास आ गया और $79.14 पर ट्रेड कर रहा था। वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) 0.9% गिरकर $75.06 पर आ गया। इससे पहले पिछले दो सेशन में बेंचमार्क में 10% से ज़्यादा की गिरावट आ चुकी थी।

कच्चे तेल की कीमतें क्यों बदल रही हैं?

मंगलवार को कतर ने घोषणा की कि एक अंतरिम प्रस्ताव तैयार किया गया है, जबकि अमेरिका और ईरान दोनों ने होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को फिर से खोलने के लिए बातचीत में प्रगति का संकेत दिया है।

पिछले दो हफ़्तों में तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्होंने राजनयिक बातचीत के लिए और समय देने के लिए ईरान पर नए सैन्य हमलों को टाल दिया है। हालाँकि, भले ही जलडमरूमध्य से व्यावसायिक शिपिंग को बहाल करने के लिए कोई अस्थायी समझौता हो जाए, लेकिन इससे संघर्ष का स्थायी समाधान नहीं हो सकता है या ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन की चिंताओं का समाधान नहीं हो सकता है।

अमेरिका और ईरान के बीच पिछला संघर्ष-विराम एक महीने से भी कम समय तक चला और होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव के कारण टूट गया। नए सिरे से हुए संघर्ष के कारण पिछले महीने ब्रेंट क्रूड की कीमतों में लगभग $32 का उतार-चढ़ाव आया, क्योंकि तनाव रेड सी (Red Sea) तक फैल गया था। जुलाई के अंत में लड़ाई में कुछ समय के लिए रुकावट आई थी, जिसका उद्देश्य राजनयिक प्रयासों का समर्थन करना था, लेकिन वह भी अंततः विफल हो गया।

ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, कतरी सरकार ने बताया कि ट्रंप ने मंगलवार को कतर के अमीर, शेख तमीम बिन हमद अल-थानी से भी बात की, ताकि वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव कम करने के प्रयासों पर चर्चा की जा सके। व्हाइट हाउस ने बातचीत की पुष्टि की लेकिन आगे कोई विवरण नहीं दिया।

संभावित राजनयिक प्रगति के एक और संकेत के रूप में, चर्चाओं से परिचित राजनयिकों के अनुसार, ईरान यूरोपीय देशों को होर्मुज जलडमरूमध्य से बारूदी सुरंगें (माइंस) हटाने की अनुमति देने पर विचार कर रहा है। अलग से, सरकारी IRIB न्यूज़ ने बताया कि ईरान के विदेश मंत्रालय ने कहा कि ओमान के साथ बातचीत रचनात्मक रही और रणनीतिक जलमार्ग के माध्यम से सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर केंद्रित थी।

इस बीच, मामले से परिचित लोगों के अनुसार, सऊदी अरब ने संघर्ष को फैलने से रोकने के प्रयास में ओमान के मध्यस्थों के माध्यम से यमन के हूथी विद्रोहियों के साथ चर्चा की है। सूत्रों ने कहा कि बातचीत विफल होने की स्थिति में किंगडम सैन्य आकस्मिक योजनाएँ भी तैयार कर रहा है।

आपूर्ति के मोर्चे पर, पिछले सप्ताह अमेरिकी कच्चे तेल के भंडार में 2.7 मिलियन बैरल की वृद्धि हुई, जबकि कुशिंग, ओक्लाहोमा( जो WTI क्रूड के लिए डिलीवरी हब है) में भंडार 2.4 मिलियन बैरल बढ़ गया। यदि बुधवार को बाद में आधिकारिक सरकारी आंकड़ों से इसकी पुष्टि हो जाती है, तो यह मार्च के बाद से कुशिंग में सबसे बड़ी साप्ताहिक वृद्धि होगी और भंडार को वापस 20 मिलियन-बैरल के स्तर से ऊपर ले जाएगी, जिसे सुचारू संचालन के लिए न्यूनतम आवश्यक स्तर माना जाता है।

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा बाजार के मजबूत खुलने की शुरुआत, RBI पॉलिसी पर होगी बाजार की नजर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

यौन शोषण मामले में आजीवन सजा काट रहे आसाराम को मिली 20 दिन की पैरोल, कोर्ट ने दिया आदेश

राजस्थान हाई कोर्ट ने उम्रकैद की सजा काट रहे आसाराम को 20 दिनों की पैरोल देने का आदेश दिया है। 85 वर्षीय आसाराम को वर्ष 2013 में एक नाबालिग से यौन उत्पीड़न के मामले में दोषी ठहराया गया था, जिसके बाद उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी। अब अदालत के आदेश के अनुसार उन्हें तय अवधि के लिए पैरोल पर रिहा किया जाएगा।

कोर्ट ने दिया ये आदेश

अदालत ने पैरोल देने का फैसला करते समय इस बात पर भी ध्यान दिया कि आसाराम लंबे समय से जेल में हैं और पहले मिली अंतरिम रिहाई के दौरान उनका आचरण संतोषजनक रहा। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे यह साबित हो कि उन्होंने जमानत की शर्तों का उल्लंघन किया, कानूनी कार्रवाई से बचने की कोशिश की, किसी गवाह को प्रभावित किया या उनकी वजह से कानून-व्यवस्था की कोई समस्या पैदा हुई। राजस्थान हाई कोर्ट की कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायमूर्ति संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने आसाराम को राहत देते हुए नियमित पैरोल देने का आदेश दिया। फिलहाल वह जोधपुर सेंट्रल जेल में सजा काट रहे हैं। अदालत ने अपने फैसले में यह भी माना कि वह करीब 13 साल से जेल में हैं और पहले मिली अस्थायी रिहाई के दौरान उनके खिलाफ किसी नियम के उल्लंघन की शिकायत सामने नहीं आई।

13 साल से जेल में बंद हैं आसाराम

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि आसाराम 13 साल, एक महीना और 24 दिन जेल में बिता चुके हैं। 3 अगस्त को दिए गए फैसले के अनुसार, उन्हें 50,000 रुपये के निजी मुचलके और 25-25 हजार रुपये की दो जमानतें जमा करने के बाद 20 दिनों की नियमित पैरोल पर रिहा किया जाएगा। कोर्ट ने यह भी माना कि पिछली अंतरिम रिहाई के दौरान उन्होंने सभी तय शर्तों का पालन किया था और उनके खिलाफ किसी भी नियम के उल्लंघन का रिकॉर्ड नहीं मिला।

राज्य सरकार ने पैरोल का किया विरोध

राज्य सरकार ने अदालत में आसाराम की पैरोल का विरोध किया। सरकार की ओर से बताया गया कि जोधपुर के जिला कलेक्टर और जिला मजिस्ट्रेट की अध्यक्षता वाली समिति पहले ही उनकी पैरोल की अर्जी खारिज कर चुकी है। पुलिस ने भी आशंका जताई कि रिहाई मिलने पर उनके फरार होने की संभावना हो सकती है। इसके अलावा, सरकार ने कहा कि उनकी रिहाई से पीड़ित पक्ष और उसके परिवार की सुरक्षा पर भी असर पड़ सकता है।

राज्य सरकार ने अदालत में यह भी कहा कि आसाराम का इलाज चल रहा है और मेडिकल अधिकारियों ने उन्हें पैरोल के लिए पूरी तरह फिट नहीं माना है। इसके अलावा सरकार ने राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज ऑन पैरोल नियम, 1958 के नियम 14(ए) का हवाला देते हुए बताया कि उनके खिलाफ राजस्थान के बाहर भी आपराधिक मामले लंबित हैं और गुजरात के गांधीनगर की एक अदालत उन्हें एक अन्य मामले में दोषी भी ठहरा चुकी है। इसलिए सरकार ने उनकी पैरोल का विरोध किया।

कोर्ट में फेल हुई ये दलील

अदालत ने सुनवाई के दौरान कहा कि राज्य सरकार और पुलिस की ओर से जताई गई आशंकाओं के समर्थन में कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं किए गए। कोर्ट का मानना था कि ये केवल संभावनाओं पर आधारित दलीलें हैं। साथ ही, अदालत ने स्पष्ट किया कि राजस्थान की अदालत से मिली सजा के मामले में आसाराम की पैरोल पर फैसला राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज़ ऑन पैरोल नियमों के अनुसार ही किया जाएगा।

अदालत ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति के खिलाफ दूसरे राज्यों में मामले चल रहे हैं या वहां किसी मामले में सजा मिली है, तो उनका फैसला संबंधित राज्यों के कानूनों के अनुसार होगा। केवल इसी आधार पर राजस्थान के मामले में पैरोल देने से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, हाई कोर्ट ने यह भी याद दिलाया कि 27 मई को उसने इसी मामले में आसाराम की दोषसिद्धि और उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा था।

आसाराम ने ओपन एयर कैंप में स्थानांतरण के लिए भी अलग से याचिका दायर की है। हालांकि, राजस्थान सरकार ने इसका विरोध करते हुए अदालत को बताया कि राजस्थान प्रिजनर्स ओपन एयर कैंप नियम, 1972 के तहत कुछ श्रेणी के कैदियों को ऐसी सुविधा नहीं दी जा सकती। सरकार का कहना है कि इन नियमों के अनुसार कुछ गंभीर यौन अपराधों में दोषी ठहराए गए और 60 वर्ष से अधिक उम्र के कैदी ओपन एयर कैंप के लिए पात्र नहीं माने जाते।

मुंबई के सिद्धिविनायक मंदिर में 18 करोड़ की दान चोरी! जांच के लिए सरकार के पास पहुंची मंदिर ट्रस्ट

मुंबई के प्रसिद्ध श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर ट्रस्ट के आठ ट्रस्टियों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर मंदिर के दान-पात्रों से कथित नकदी चोरी की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उनका दावा है कि इस मामले से मंदिर को हर साल करीब 18 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ हो सकता है। 21 अप्रैल 2026 को लिखे गए इस पत्र में मंदिर ट्रस्ट के लोगों ने कहा है कि कैश चोरी के आरोप में कुछ कर्मचारियों की गिरफ्तारी के बाद मंदिर के दान-पात्रों में हर सप्ताह जमा होने वाली रकम में अचानक बड़ी बढ़ोतरी हुई। उनका कहना है कि इससे यह संकेत मिलता है कि लंबे समय से दान की रकम में गड़बड़ी की जा रही थी।

जांच के दिए  गए आदेश

ट्रस्टियों ने यह भी मांग की है कि इस मामले में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका की भी जांच हो। उनका कहना है कि उन्हें यह मानने के ठोस कारण हैं कि यह मामला केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं हो सकता। वहीं महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे से मुलाकात के बाद सिद्धिविनायक मंदिर ट्रस्ट के चेयरमैन ने कहा कि, जांच के आदेश दे दिए गए हैं। दान की ऑडिट की जाएगी और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

मंदिर ट्रस्ट ने सरकार ने मांग

पत्र में ट्रस्टियों ने कहा है कि आरोपी कर्मचारियों की गिरफ्तारी से पहले मंदिर के दान-पात्रों से हर सप्ताह 50 लाख रुपये से भी कम दान मिलता था। लेकिन कर्मचारियों के पकड़े जाने के बाद लगातार तीन हफ्तों तक हर बुधवार को दान की राशि बढ़कर करीब 1.5 करोड़ रुपये पहुंच गई। ट्रस्ट के लोगों का आरोप है कि इससे यह संकेत मिलता है कि दान-पात्रों में जमा होने वाली रकम का बड़ा हिस्सा गिनती से पहले ही निकाल लिया जाता था। उनका कहना है कि उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर मंदिर को हर साल करीब 18 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ हो सकता है। पत्र में यह भी कहा गया है कि इस मामले में सिर्फ निचले स्तर के कर्मचारी ही नहीं, बल्कि वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका होने की भी आशंका है। इसलिए पूरे मामले की निष्पक्ष और गहराई से जांच कराई जानी चाहिए।

ट्रस्टियों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से पूरे मामले की उच्च स्तरीय सरकारी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा है कि जांच में मंदिर प्रशासन से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका की भी निष्पक्ष तरीके से पड़ताल की जानी चाहिए। अतुल लोधे, भास्कर राउत, महेश मुरलीधर, जितेंद्र राउत, मीना कांबले, मंगला तुपे, गोपाल दलवी और सुदर्शन सांगले के हस्ताक्षर वाले इस पत्र में कहा गया है कि पिछले करीब डेढ़ साल में ट्रस्ट बोर्ड ने कई प्रशासनिक सुधार किए हैं। इन कदमों की वजह से मंदिर की आय में लगभग 25 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।

राज ठाकरे ने उठाया मुद्दा

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने भी सिद्धिविनायक मंदिर में दान की कथित गड़बड़ी का मुद्दा उठाया। उन्होंने शनिवार को पार्टी की छात्र शाखा के एक कार्यक्रम में ट्रस्टियों के पत्र के कुछ हिस्से पढ़कर सुनाए। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि सिद्धिविनायक मंदिर में हर साल करीब 18 करोड़ रुपये की दान राशि की कथित हेराफेरी हुई है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अयोध्या के राम मंदिर में भी 1,400 करोड़ रुपये की कथित गड़बड़ी हुई है। साथ ही उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर अपनी बात रखनी चाहिए। राज ठाकरे ने कहा, “कई निराश और परेशान लोग आस्था के साथ मंदिरों में जाते हैं, लेकिन अगर मंदिरों में भी भ्रष्टाचार के आरोप लगें, तो यह बेहद गंभीर बात है।”

अबतक 9 लोगों की हुई गिरफ्तारी

सिद्धिविनायक मंदिर में दान की कथित गड़बड़ी के मामले में अब तक नौ कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया है। इस बात की पुष्टि मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष सदा सरवणकर ने की है। सदा सरवणकर ने पत्रकारों से कहा कि जहां-जहां जरूरत थी, वहां मामले दर्ज कराए गए हैं। उन्होंने बताया कि पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और दान की कथित हेराफेरी से जुड़े सभी पहलुओं की पड़ताल की जा रही है।

देवभूमि में कांवड़ियों का भव्य स्वागत, पुष्पवर्षा और चरण प्रक्षालन से किया अभिनंदन, CM धामी ने परोसा भोजन

cm dhami

धर्मनगरी हरिद्वार में कांवड़ यात्रा के दौरान मंगलवार को आस्था, सेवा और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिला। मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में देवभूमि उत्तराखंड ने देश के विभिन्न राज्यों से आए शिवभक्त कांवड़ियों का आत्मीय स्वागत और अभिनंदन किया। राज्य सरकार की ओर से आयोजित इस विशेष कार्यक्रम में श्रद्धालुओं के सम्मान के साथ-साथ कांवड़ यात्रा के सुरक्षित, सुव्यवस्थित और सफल संचालन के लिए किए जा रहे प्रयासों का भी संदेश दिया गया।

 

मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के हरिद्वार आगमन पर हरकीपैड़ी से लेकर कांवड़ यात्रा मार्ग पर हेलीकॉप्टर से शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया गया। अलकनंदा होटल परिसर में आयोजित भव्य समारोह में मुख्यमंत्री ने पाँच शिवभक्त कांवड़ियों का चरण प्रक्षालन कर उनका सम्मान किया।  

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रियों की स्वास्थ्य सहायता एवं सुविधाओं के लिए स्थापित मुख्यमंत्री स्वास्थ्य सेवा शिविर का उद्घाटन किया। उन्होंने शिविर में उपलब्ध चिकित्सकीय सुविधाओं का अवलोकन किया और श्रद्धालुओं को त्वरित उपचार, आवश्यक दवाइयां तथा अन्य स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

 

मुख्यमंत्री ने देश के विभिन्न राज्यों से आए शिवभक्त कांवड़ियों के बीच पहुंचकर उनका स्वागत किया और अपने हाथों से भोजन परोसा।

 

काँवड़ यात्रियों के अभिनदंन कार्यक्रम के अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड सरकार का संकल्प है कि देवभूमि आने वाले प्रत्येक शिवभक्त को सुरक्षित, सुगम और सम्मानजनक वातावरण मिले। कांवड़ यात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि भारत की सनातन परंपरा, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक चेतना का विराट पर्व है। इसके सफल आयोजन के लिए राज्य सरकार सभी संबंधित विभागों के समन्वय से निरंतर कार्य कर रही है।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले पाँच वर्षों से उन्हें कांवड़ यात्रा के दौरान शिवभक्तों के बीच आने और उनकी सेवा करने का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का नाम करोड़ों श्रद्धालुओं के लिए आस्था, ऊर्जा और विश्वास का आधार है। कठिन परिस्थितियों में भी शिवभक्त सैकड़ों किलोमीटर की यात्रा पूरी करते हैं और “बम-बम भोले” के जयघोष के साथ अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं। कांवड़ यात्रा अनुशासन, सेवा, समर्पण और सामाजिक एकता का भी प्रतीक है।

 

मुख्यमंत्री ने बताया कि इस वर्ष अब तक एक करोड़ से अधिक शिवभक्त गंगाजल लेकर सफलतापूर्वक अपने गंतव्य की ओर प्रस्थान कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश की सांस्कृतिक विरासत और आध्यात्मिक स्थलों के संरक्षण एवं विकास का व्यापक कार्य हो रहा है। काशी विश्वनाथ धाम, महाकाल लोक, श्रीराम जन्मभूमि, केदारनाथ धाम के पुनर्निर्माण और बद्रीनाथ मास्टर प्लान जैसी परियोजनाएं भारतीय संस्कृति को वैश्विक स्तर पर नई पहचान प्रदान कर रही हैं।

 

उन्होंने केदारनाथ आपदा का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2013 की आपदा के बाद प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में केदारनाथ धाम का पुनर्निर्माण कर इसे भव्य और दिव्य स्वरूप दिया गया है। वहां आस्था पथ, सरस्वती घाट, आदि शंकराचार्य की प्रतिमा, तीर्थ पुरोहित आवास सहित अनेक सुविधाओं का विकास किया गया है। उन्होंने कहा कि हरिद्वार में प्रस्तावित गंगा कॉरिडोर और शारदा कॉरिडोर जैसी योजनाएं राज्य के विकास और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा प्रदान करेंगी।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वाेच्च प्राथमिकता है। इसके लिए यात्रा मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे, ड्रोन निगरानी, एंबुलेंस सेवाएं, स्वास्थ्य शिविर और आपातकालीन सहायता व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। उन्होंने शिवभक्तों से यात्रा के दौरान अनुशासन, मर्यादा और धार्मिक परंपराओं का पालन करने की अपील की।

उन्होंने पुलिस, प्रशासन, स्वास्थ्य विभाग, पर्यावरण मित्रों, स्वच्छता कर्मियों, स्वयंसेवी संस्थाओं और अन्य सेवा कार्यों में जुटे कर्मयोगियों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि सभी का सामूहिक सहयोग ही इस विशाल आयोजन को सफल बनाता है। मुख्यमंत्री ने कांवड़ यात्रा के सफल संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले पाँच पुलिसकर्मियों तथा पाँच पर्यावरण मित्रों को सम्मानित किया। उन्होंने कहा कि यह सम्मान केवल कुछ व्यक्तियों का नहीं, बल्कि उन सभी कर्मयोगियों के प्रति राज्य की कृतज्ञता का प्रतीक है, जो यात्रा के दौरान सुरक्षा, स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाओं और अन्य व्यवस्थाओं को सुचारु बनाए रखने में दिन-रात जुटे हुए हैं।

 

इस अवसर पर महामण्डलेश्वर ललितानंद गिरी महाराज, कैबिनेट मंत्री श्री मदन कौशिक, श्री प्रदीप बत्रा एवं श्री राम सिंह कैड़ा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती किरण चौधरी, विधायक रानीपुर श्री आदेश चौहान, हरिद्वार की मेयर श्रीमती किरण जैसल, रुड़की की मेयर श्रीमती अनिता अग्रवाल, पूर्व कैबिनेट मंत्री स्वामी यतीश्वरानंद, भाजपा जिलाध्यक्ष श्री आशुतोष शर्मा, पूर्व विधायक श्री संजय गुप्ता, राज्य मंत्री श्री देशराज कर्णवाल, श्री दिनेश कौशिक, डॉ. जयपाल सिंह चौहान, श्री श्यामवीर सैनी, श्री शोभाराम प्रजापति, श्री नितिन गौतम, शिवालिक नगर पालिका अध्यक्ष श्री राजीव शर्मा, गंगा सभा के महामंत्री तन्मय वशिष्ठ, भाजपा युवा मोर्चा के प्रदेश उपाध्यक्ष श्री विक्रम भुल्लर, पूर्व मेयर मनोज गर्ग, गढ़वाल आयुक्त श्री आनंद स्वरूप, मेलाधिकारी श्रीमती सोनिका, आईजी गढ़वाल श्री राजीव स्वरूप, आईजी (कुंभ मेला) श्री योगेन्द्र सिंह रावत, जिलाधिकारी श्री मयूर दीक्षित, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्री नवनीत सिंह भुल्लर, एसएसपी (कुंभ मेला) श्री आयुष अग्रवाल, नगर आयुक्त श्री नंदन कुमार, मुख्य विकास अधिकारी डॉ. ललित नारायण मिश्र, पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्रीमती निशा यादव, अपर जिलाधिकारी श्री जितेंद्र कुमार, पुलिस अधीक्षक नगर श्री अभय प्रताप सिंह, सचिव एचआरडीए श्री प्रत्यूष सिंह तथा उपजिलाधिकारी हरिद्वार श्री योगेश मेहरा, उप मेलाधिकारी मनजीत सिंह, सहित अन्य जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, गणमान्य नागरिक एवं बड़ी संख्या में शिवभक्त कांवड़िए उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन अपर मेलाधिकारी श्री दयानंद सरस्वती ने किया।

NEET UG 2026 Merit List: नीट यूजी चॉइस फिलिंग और रजिस्ट्रेशन कल, पुडुचेरी ने जारी की राज्यवार मेरिट लिस्ट

NEET UG 2026 Merit List: चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाने के इच्छुक छात्र अब नीट यूजी काउंसलिंग का इंतजार कर रहे हैं। नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) के जरिए स्नातक स्तरीय (UG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए लिखित परीक्षा के बाद अब काउंसलिंग प्रक्रिया 5 अगस्त से शुरू होने वाली है। इसके तहत अलग-अलग राज्यों के लिए नीट यूजी 2026 मेरिट लिस्ट जारी कर दी गई है। पुडुचेरी के हेल्थ और फैमिली वेलफेयर सर्विसेज विभाग ने भी अपनी आधिकारिक वेबसाइट health.py.gov.in पर स्टेट मेरिट लिस्ट जारी कर दी है।

पुडुचेरी मेरिट लिस्ट में एक अनोखी बात सामने आई है जिसने कैंडिडेट्स का ध्यान खींचा है। सबसे ज़्यादा रैंक वाले कैंडिडेट को 670 मार्क्स मिले हैं, लेकिन लिस्ट में ऐसे कैंडिडेट्स भी शामिल हैं जिन्हें -1 से -23 मार्क्स मिले हैं। इन कैंडिडेट्स के शामिल होने से छात्रों में उत्सुकता बढ़ गई है, भले ही मेरिट लिस्ट में उनके नाम होने से एमबीबीएस सीट की गारंटी नहीं है।

कुल 10 छात्रों को नीट यूजी परीक्षा में नेगेटिव मार्क्स मिले हैं। नेगेटिव मार्क्स में -1, -3, -6, -7, -9, -11, -14, -15, -16 और -23 शामिल हैं। इन कैंडिडेट्स की रैंक 4707 और 4716 के बीच है। कृष्णाथ अभिनव एम 670 अंक और एआईआर 553 के साथ राज्य की मेरिट लिस्ट में टॉप पर हैं। दूसरे नंबर पर प्रवीण ए हैं, जिन्होंने 646 अंक और ओवरऑल रैंक 1721 हासिल की है, और लिस्ट में तीसरे नंबर पर रामानीश्वर ए हैं, जिन्होंने 646 मार्क्स और ओवरऑल रैंक 1756 हासिल की है।

जिन छात्रों को जारी मेरिट लिस्ट पर आपत्ति है, वे 5 अगस्त, 2026 तक ऑब्जेक्शन दर्ज करा सकते हैं। वे अपने ऑब्जेक्शन DMS@PY.GOV.IN पर ईमेल के जरिए भेज सकते हैं।

नीट यूजी 2026 मेरिट लिस्ट: रैंक लिस्ट कैसे चेक करें

  • मेरिट लिस्ट चेक करने के लिए, कैंडिडेट्स नीचे दिए गए स्टेप्स फॉलो कर सकते हैं।
  • ऑफिशियल वेबसाइट health.py.gov.in पर जाएं।
  • होम पेज पर मौजूद NEET UG 2026 मेरिट लिस्ट लिंक पर क्लिक करें।
  • एक नया पेज खुलेगा जहां कैंडिडेट अपनी रैंक चेक कर सकते हैं।
  • आगे इस्तेमाल के लिए फाइल डाउनलोड करें।

नीट यूजी काउंसलिंग पंजीकरण कल, 5 अगस्त, 2026 से शुरू होगा। आवेदन करने की आखिरी तारीख 12 अगस्त, 2026 है। चॉइस फिलिंग 6 अगस्त से शुरू होगी और 13 अगस्त, 2026 को बंद हो जाएगी। सीट आवंटन रिजल्ट 17 अगस्त को घोषित किया जाएगा। जिन छात्रों को सीट आवंटित होगी, वे 18 अगस्त से 22 अगस्त, 2026 तक इंस्टीट्यूट में रिपोर्ट कर सकते हैं।

बता दें, नीट यूजी री-एग्जाम रिजल्ट 16 जुलाई, 2026 को अनाउंस किया गया था। एग्जाम 21 जून, 2026 को हुआ था। स्टेट मेरिट लिस्ट से जुड़ी ज्यादा जानकारी के लिए, कैंडिडेट डिपार्टमेंट ऑफ हेल्थ एंड फैमिली वेलफेयर सर्विसेज, पुडुचेरी की ऑफिशियल वेबसाइट देख सकते हैं।

CLAT 2027: देश की लॉ यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में प्रवेश के लिए शुरू हुई रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया, 31 अक्टूबर तक दाखिले के लिए भरें फॉर्म

Market view :ऑप्शन राइटर्स 3:00-3:10 बजे से पहले पोजिशन कवर करने पर फोकस करें, आज इन दो शेयरों में हो सकती है बंपर कमाई

Market view : पिछले कई दिनों की तेजी के बाद बाजार में अब थोड़ा ठहराव देखने को मिल सकता है। ऐसे में निफ्टी और बैंक निफ्टी का आगे की चाल पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार ने कहा कि निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 24736-24778/24809 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 24858-24897/24934 पर है। इसके लिए पहला बेस 24489-24551 पर और बड़ा बेस 24419-24457 पर है। आज की पूरी कमेंट्री निफ्टी फ्यूचर्स के भाव पर आधारित है।

कल लॉन्ग पोजिशन कैरी करने की सलाह सही साबित हुई। FIIs की कैश में मजबूत खरीदारी देखने को मिली। इंडेक्स में शॉर्ट कवरिंग हुई। नेट शॉर्ट घटकर अब 1.50 लाख पर आ गया है। 24800 पहली बाधा है। 24950-25000 पर ऑप्शन बाधा है। 24600-24500 पर पुट राइटिंग का सपोर्ट है। बेस-1 तक किसी भी गिरावट में खरीदारी की रणनीति काम करेगी। 24736 पहली रुकावट है, इसके बाद 24778-24809 का जोन मुमकिन है। 24809 के ऊपर टिकने पर रजिस्टेंस-2 तक स्विंग की उम्मीद है। ऑप्शन राइटर्स 3:00-3:10 बजे से पहले पोजिशन कवर करने पर ध्यान दें।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

वीरेंद्र कुमार ने कहा कि बैंक निफ्टी के लिए पहला रेजिस्टेंस 58097-58221 पर और बड़ा रेजिस्टेंस 58389-58486/58571 पर है। इसके लिए पहला बेस 57523-57610 पर और बड़ा बेस 57210-57331 पर है। बैंक निफ्टी में तेजी बरकरार है। लेकिन 58000 बड़ा ऑप्शन बाधा है। RBI पॉलिसी से पहले बैंक निफ्टी की चाल अहम रहेगी। बेस-1 तक किसी भी गिरावट में खरीदारी की रणनीति काम करेगी। रेजिस्टेंस-1 पर मुनाफावसूली और सौदों पर नजर रखें। रेजिस्टेंस-1 के ऊपर टिकने पर रेजिस्टेंस-2 तक स्विंग की उम्मीद है।

Trading Plan : पिछले कुछ सेशन में आई एकतरफा तेजी के बाद अब थोड़ा करेक्शन मुमकिन, जानिए क्या हो ट्रेडिंग रणनीति

चकाचक चार्ट वाले शेयर

चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं मंत्री फिनमार्ट (Mantri FinMart) के अरुण कुमार मंत्री। इनकी आज नेशनल एल्युमीनियम में 365 रुपए के आसपास, 359 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ,377 रुपए के टारेगट के लिए खरीदारी की सलाह है। HONASA में भी इनकी 458 रुपए के आसपास, 452 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ,475 रुपए के टारेगट के लिए खरीदारी की सलाह है।

बाजार की सोमवार की चाल पर एक नजर

भारतीय इक्विटी मार्केट में 3 अगस्त को लगातार चौथे सेशन में बढ़त देखने को मिली। निफ्टी 24,700 के ऊपर बंद हुआ। मीडिया स्टॉक्स को छोड़कर,सभी सेक्टर्स में हुई खरीदारी की वजह से बाजार में तेजी आई

ट्रेडिंग सेशन के अंत में सेंसेक्स 544.39 अंक यानी 0.70 फीसदी बढ़कर 78,639.03 पर और निफ्टी 390.70 अंक या 1.60 फीसदी बढ़कर 24,774.30 पर सेटल हुआ था।

ब्रॉडर मार्केट में भी अच्छी खरीदारी आई। इसके चलते निफ्टी मिडकैप 100 और स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में 1.2% की बढ़त देखने को मिली।

निफ्टी 50 स्टॉक्स की बात करें तो इंटरग्लोब एविएशन,TCS,इंफोसिस,श्रीराम फाइनेंस और ग्रासिम इंडस्ट्रीज टॉप गेनर्स रहे,जबकि सन फार्मा,अपोलो हॉस्पिटल्स,मारुति सुजुकी,ONGC और टेक महिंद्रा टॉप लूजर्स रहे।

निफ्टी मीडिया को छोड़कर सभी सेक्टोरल इंडेक्स हरे निशान पर बंद हुए। निफ्टी IT इंडेक्स में सबसे अधिक बढ़त रही। यह 3% से ज्यादा की बढ़त लेकर बंद हुआ था।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

बांकीपुर से प्रशांत किशोर की जीत के क्या हैं मायने

prashant kishor

मनीष कुमार

प्रशांत किशोर (पीके) की बिहार के उपचुनाव में जीत पर फिलहाल उन्हें गेम चेंजर तो नहीं कहा जा सकता लेकिन इतना तो साफ है कि बिहार की राजनीति करवट लेना चाह रही है। ALSO READ: दक्षिण कोरिया में गर्मी ने तोड़ा 100 साल का रिकॉर्ड

 

इस जीत का साफ संदेश है कि कुछ वोटर सिर्फ जातिगत समीकरण नहीं देख रहे, बल्कि उनकी नजर में मुद्दों, गवर्नेंस व विकास के साथ-साथ विकल्प भी अहमियत रख रहा है। साथ ही, यह भी तय है कि बतौर विधायक अब अकेले ही प्रशांत किशोर विधानसभा में गवर्नेंस के मुद्दे पर दबाव बनाए रखेंगे। अगर सब कुछ ठीक रहा तो एनडीए को मजबूरी मान रहे लोगों को उनकी पार्टी भी विकल्प के रूप में दिखेगी। भारत की राजनीति ने एक बार फिर चौंकाया है। 

 

बीजेपी की पारंपरिक सीट

बांकीपुर उपचुनाव के लिए 30 जुलाई को मतदान हुआ था। इस बार 2025 के चुनाव की तुलना में यहां सात प्रतिशत कम वोटिंग हुई। पिछली बार यहां 41.39 प्रतिशत मतदान हुआ था, जबकि इस बार 34.30 फीसदी वोटिंग हुई। 2010 में हुए विधानसभा चुनाव के बाद मतदान का यह सबसे कम प्रतिशत है। एनडीए की तरफ से बीजेपी के नीरज सिन्हा और महागठबंधन की ओर से आरजेडी की रेखा गुप्ता सहित कुल 25 उम्मीदवार चुनाव मैदान में थे।

 

बांकीपुर की यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद नितिन नवीन के इस्तीफे से खाली हुई थी। यह बीजेपी की परंपरागत सीट मानी जाती रही है। 1995 से यहां बीजेपी जीतती रही है। पहले पिता नवीन कुमार सिन्हा और फिर पुत्र नितिन यहां से लगातार जीतते रहे।

 

यहां से पांच बार लगातार जीतने वाले नितिन को इस बार भी पार्टी की जीत का इतना अधिक भरोसा था कि उन्होंने यहां तक कहा था कि बांकीपुर की जनता इस चुनाव में बीजेपी की जीत के नए कीर्तिमान स्थापित करेगी। लेकिन अब, जब पीके ने बीजेपी के गढ़ में घुसकर सेंध लगा दी है।

 

राजनीतिक समीक्षक एके चौधरी कहते हैं, ‘‘बिहार में चुनाव में जाति ही जीत की गारंटी रही है। इसी समीकरण को देखकर पार्टियां टिकट भी देती रही हैं, यह इतनी जल्दी टूटने वाला नहीं है। हां, इतना जरूर है कि पीके की जीत से उन सुधारों की चर्चा अवश्य ही तेज होगी, जिससे संबंधित मुद्दे वे 2025 के चुनाव से उठा रहे। अब इन मुद्दों से अन्य पार्टियां भी मुंह नहीं मोड़ सकेंगी।'' ALSO READ: क्या हम फफूंद के खतरे को अब तक कम आंकते रहे हैं?

 

पीके पर भरोसा बढ़ेगा

प्रशांत किशोर की 'वोटकटवा' वाली छवि पर इसका असर पड़ेगा। 2025 के चुनाव में जनसुराज ने 238 सीट पर अपने प्रत्याशी खड़े थे, किंतु हालत इतनी खराब हुई कि 237 पर पार्टी के उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सके थे। चौधरी कहते हैं, ‘‘पीके को पिछली बार ही चुनाव लड़ना चाहिए था। राघोपुर सहित अन्य सीटों से उनके चुनाव लड़ने की बात पहले सामने आई, किंतु अंतत: वे शायद हिम्मत नहीं जुटा सके, या यूं कहिए कि अपनी जीत के प्रति आश्वस्त नहीं थे। पार्टी के मुखिया की यह अनिश्चितता लोगों को शायद रास नहीं आई।''

 

विश्लेषकों का कहना है कि इस जीत से उनका मनोबल तो बढ़ेगा ही, साथ ही उनकी जिम्मेदारियां भी बढ़ गई हैं। आखिरकार, उन्हें चुनौतीपूर्ण लंबी लड़ाई जो लडऩी है। हालांकि बीजेपी के एक नेता कहते हैं, “और कारण जो भी रहे हों, पीके की जीत में भितरघात की भी बड़ी भूमिका रही। अन्यथा इतना अधिक मार्जिन नहीं रहता। निशाने पर कौन और क्यों था, आप समझ सकते हैं।”

 

बीजेपी के गढ़ में मिली यह जीत प्रशांत किशोर के लिए संजीवनी का काम करेगी। राजनीति विज्ञान की अवकाश प्राप्त प्रोफेसर श्यामली घोष कहती हैं, ‘‘अब उनकी शख्सियत केवल एक पॉलिटिकल स्ट्रैटेजिस्ट की नहीं रह जाएगी, बल्कि वह राजनेता के रूप में स्थापित हो जाएंगे। उनकी पार्टी के लिए अवसर बढ़ेंगे, लेकिन बहुत कुछ विधानसभा में उनके परफार्मेंस पर निर्भर करेगा, जिससे आम जनता को लगे कि उनकी बात दमदार तरीके से उठाने वाला कोई है, जिस पर कोई चर्चा नहीं होती।''

 

घोष के मुताबिक प्रशांत किशोर को सरकार के उन वादों को जोरदार तरीके से उछालना होगा, जिन पर काम नहीं हुआ या वे पूरे नहीं हुए। सरकार के आंकड़ों के खेल पर भी उन्हें सक्रिय रहना होगा। तभी उनकी पार्टी के प्रति लोगों का भरोसा बढ़ेगा, क्योंकि बिहार में जातिगत रूढ़िवादिता को तोड़ना इतना आसान नहीं है।

 

श्यामली घोष यह भी कहती हैं, ‘‘यह कहना जल्दबाजी होगी कि इससे एनडीए की पार्टियों का कोर वोटर शिफ्ट हो रहा। हां, यह इस बात का संकेत हो सकता है कि सवर्ण सहित इनका शहरी व मिडिल क्लास वोटर इनसे बिदक सकता है। मुझे नहीं लगता कि सम्राट सरकार पर कोई असर पड़ने वाला है।''

 

हालांकि, पीके एनडीए की हार का ठीकरा मुख्यमंत्री के सिर फोड़ने की कोशिश करते हुए उनसे नैतिक आधार पर इस्तीफे को लेकर तंज तो कसते रहेंगे। जनसुराज पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती ने इसे जनता की जीत और बीजेपी की हार बताते हुए कहा, ‘‘बिहार में लोकतंत्र को जीवित रखने के लिए इस जीत के बड़े मायने हैं।'' ALSO READ: अमेरिका-चीन के बीच तनाव, अमेरिका ने लगाया चीनी रोबोट पर प्रतिबंध

 

गठबंधनों को करना होगा आत्ममंथन

बिहार में पिछले कई दशकों से कोई भी पार्टी अकेले सत्ता पर काबिज नहीं हो सकी है। जातिगत समीकरणों को देखते हुए गठबंधन उनकी मजबूरी बन जाती है। सत्ता पक्ष में बीजेपी, जेडीयू, चिराग पासवान की एलजेपी (लोक जनशक्ति पार्टी), उपेंद्र कुशवाहा की आरएलएम (राष्ट्रीय लोकतांत्रिक मोर्चा) और जीतन राम मांझी की हिन्दुस्तानी अवाम मोर्चा (हम) है तो विपक्ष में आरजेडी, कांग्रेस और माले सहित सात पार्टियां हैं। पिछले 21 सालों के अधिकांश समय में एनडीए सत्ता और आरजेडी विपक्ष में है। यह परिणाम इन दोनों गठबंधनों के लिए झटका तो है ही, साथ यह एक अवसर भी है।

 

श्यामली घोष कहती हैं, ‘‘अब समय आ गया है कि दोनों ही पक्ष आत्ममंथन करें। किसी वर्ग विशेष को अपनी जागीर का हिस्सा नहीं समझें। अपनी नीतियों तथा रणनीति की समीक्षा करें। क्योंकि, अगर एनडीए से शहरी वोटरों का मोहभंग दिख रहा है तो आरजेडी का माइ (मुस्लिम-यादव) समीकरण भी कहीं न कहीं दरक रहा।''

 

जेडीयू-आरजेडी में भी नेतृत्व के प्रति चुनौती बढ़ेगी। कांग्रेस प्रवक्ता असितनाथ तिवारी तो पहले ही कह चुके हैं कि बिहार में महागठबंधन को चलाने की जिम्मेदारी आरजेडी पर है, लेकिन इस चुनाव में तेजस्वी यादव ने साथी दलों को साथ लेने की जरूरत ही नहीं समझी। हालांकि, आरजेडी प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस आरोप को सिरे से खारिज किया है।

 

इस खींचतान के बीच गठबंधन की पार्टियों में परिवर्तन के इच्छुक वोटर जनसुराज के प्रति आकर्षित तो हो ही सकते हैं। पटना के बोरिंग रोड निवासी वोटर राहुल कहते हैं, ‘‘परिवर्तन से ही बेहतर मिलता है। पहले विकल्प का अभाव था। लोग यह सोचते थे कि कहीं पहले वाली स्थिति ना लौट आए, इसलिए मजबूरी में वोट करते थे। स्वाभाविक है, जब विकल्प दिखेगा तो लोग आजमाएंगे ही। इसमें गलत क्या है।''

 

प्रशांत किशोर की जीत के फैक्टर अब चाहे जितने गिना लें, फिलहाल बीजेपी का यह भ्रम तो टूट ही गया कि वे बांकीपुर सीट से किसी को भी जीत दिला देंगे।

जिनकी जेब से राममंदिर निर्माण के लिए एक पैसा नहीं निकला, वे लोग कर रहे चंदा चोरी की बात : CM योगी

Jevar Airport Farmers meet cm yogi

Yogi Adityanath statement on Ram Temple funds: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश विधानमंडल का मानसून सत्र प्रारंभ होने से पहले सोमवार को पत्रकारों से वार्ता की। उन्होंने गरीब, युवा, महिला व किसान के मुद्दे पर विपक्ष को खरी-खरी सुनाते हुए कहा कि ये सभी डबल इंजन सरकार की प्राथमिकता में हैं। मुख्यमंत्री ने राम मंदिर के चढ़ावा चोरी पर भी विरोधी दलों के नेताओं पर सवालिया निशाना खड़ा करते हुए कहा कि जो लोग अयोध्या के मुद्दे को उठा रहे हैं, उन्होंने जयश्रीराम बोलने पर रामभक्तों पर लाठी-गोली चलवाई थी। राम मंदिर के खिलाफ न्यायालय में वकीलों की फौज खड़ी करके इसे बाधित करने का कुत्सित प्रयास किया। राम मंदिर में चंदा चोरी की बात वे लोग कर रहे हैं, जिनके जेब से मंदिर निर्माण के लिए एक पैसा भी नहीं निकला। देश-दुनिया इनका दोहरे चरित्र देख रही है।

एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन, तय होगा न्यूनतम मानदेय 

सीएम ने बड़ी घोषणा की कि सरकार एक-डेढ़ सप्ताह में आउटसोर्स कमीशन को लागू करने के साथ ही न्यूनतम मानदेय सुनिश्चित करने जा रही है। आंगनवाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं, रसोइयों व ग्राम चौकीदारों को भी उचित मानदेय प्राप्त हो और उनकी सेवाएं प्रदेश के हित को संवर्धित करने के लिए कार्य करें, इसके लिए अनुपूरक बजट का सहारा लिया गया है। 

किसानों को असुरक्षित करने वालों का दोहरा चरित्र सामने  

मुख्यमंत्री ने विपक्षी दलों पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि जिन लोगों के समय में किसानों के हितों पर कुठाराघात हुआ, जिन्होंने किसानों को खेत के लिए पानी नहीं दिया। उनके हक पर बिचौलियों का वर्चस्व स्थापित कराया और किसानों को असुरक्षित करते हुए उनके जीवन में बदहाली लाने का पाप किया। ऐसे दोहरे चरित्र वाले लोग आज किसान की बात करके उनके जले पर नमक छिड़क रहे हैं। पीएम मोदी जी के नेतृत्व में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना जिसके तहत यूपी में 24 लाख हेक्टेयर भूमि में अतिरिक्त सिंचाई की सुविधा दी गई, समेत कई योजनाएं चल रही हैं। किसान अब तीन-चार फसलें लगा रहा है। पैक हाउस के माध्यम से औद्यानिक फसलों का विभिन्न देशों में निर्यात हो रहा है।

खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश 

सीएम ने किसानों के मुद्दे पर सपा को घेरा और अपनी सरकार में गन्ना किसानों के लाभों को भी गिनाया। उन्होंने कहा कि 2007 से 2017 के बीच 29 चीनी मिलें बंद हुईं, 21 चीनी मिलें औने-पौने दाम पर बेच दी गईं, लेकिन हमारी सरकार में 3.23 लाख करोड़ से अधिक का गन्ना मूल्य भुगतान हुआ है। 122 में से 105 से अधिक चीनी मिलें चौथे-पांचवें दिन ही किसानों के खाते में गन्ना मूल्य का भुगतान कर रही हैं। समाजवादी पार्टी के समय में 10 वर्ष का गन्ना मूल्य बकाया था। ये लोग किसानों के हितों का संरक्षण करने के बजाय उन्हें आत्महत्या और पलायन के लिए मजबूर करते थे। उस समय किसानों के ट्यूबवेल तक सुरक्षित नहीं थे। सरकार आज 16 लाख ट्यूबवेल को निशुल्क बिजली उपलब्ध करा रही है। कुछ जगहों पर पोर्टल की तकनीकी समस्या आई थी, लेकिन विभाग को किसानों के लिए खाद की व्यवस्था सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया गया है।

नकारात्मकता की राजनीति त्यागें विपक्ष के साथी

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह सत्र हमारे लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए सदन के समय का बेहतर उपयोग हो। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रदेश के हित और 25 करोड़ आमजन के विकास के लिए विधानमंडल की कार्यवाही को शांतिपूर्ण ढंग से चलाने के लिए विपक्ष के साथी नकारात्मकता की राजनीति को छोड़कर प्रदेश के विकास व समृद्धि में योगदान देंगे। सीएम ने कहा कि विधायिका आमजन की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण माध्यम होती है। संसदीय प्रणाली में विधायिका गरीब, किसान, युवा और महिला से जुड़े मुद्दों पर चर्चा, समीक्षा और परिणाम तक पहुंचाने का सबसे अच्छा प्लेटफॉर्म है। हर जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र की समस्या को रखकर सरकार से समाधान का रास्ता निकलवा सकता है। इस प्लेटफॉर्म का बेहतर उपयोग हो, यह भाजपा नेतृत्व की एनडीए सरकार की सदैव प्राथमिकता रही है। 

संवाद से ही सरकार कर सकी बेहतर काम

सीएम ने कहा कि 9 वर्ष में संवाद और जनप्रतिनिधियों द्वारा उठाए गए मुद्दों की समीक्षा करने के उपरांत बनी योजनाओं के माध्यम से ही सरकार बेहतर काम कर सकी है। इससे उत्तर प्रदेश के प्रति धारणा बदलने के साथ ही इसे बीमारू राज्य से उबारकर रेवेन्यू सरप्लस व इकॉनमी का ब्रेकथ्रू स्टेट बनाना संभव हो सका। 9 वर्षों में सरकार ने युवाओं के कल्याण, महिलाओं की सुरक्षा-सम्मान और स्वावलंबन, किसानों के जीवन में परिवर्तन और चेहरे पर खुशहाली लाने के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं और वर्तमान में सरकार क्या करने जा रही है, इस पर भी चर्चा होगी।

विधायिका से संभव होता है गरीबों के जीवन में परिवर्तन

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार ने 9 वर्षों में छह करोड़ से अधिक लोगों को गरीबी रेखा से उबारकर मध्यम श्रेणी में लाकर यदि उनके जीवन में परिवर्तन लाने का प्रयास किया है तो उसकी केंद्रबिंदु विधायिका है, क्योंकि यहीं नीतियां बनती हैं। उससे पहले चर्चा-परिचर्चा होती है। विधायिका सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स, शिक्षा, स्वास्थ्य, गरीबी उन्मूलन, किसान, निवेश, रोजगार आदि पर चर्चा करने का भी सशक्त माध्यम है। 

सावन का महीना अत्यंत महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि खेती-किसानी की दृष्टि से किसानों, स्कूल-कॉलेज में एडमिशन के लिए युवाओं और कांवड़ यात्रियों के लिए यह महीना अत्यंत महत्वपूर्ण है। युवा ऊर्जा के प्रतीक जिन छात्रों ने प्रवेश लिया है और जो नए रोजगार के लिए बढ़ रहे हैं, उन सभी प्रतिभाशाली युवाओं को शुभकामनाएं। किसान जब दिनरात मेहनत करता है तो उत्तर प्रदेश की धरती सोना उगलती है। भारत की कुल कृषि भूमि में यूपी की हिस्सेदारी मात्र 11 प्रतिशत है, लेकिन हमारे किसान देश के कुल खाद्यान्न उत्पादन में 21-22 फीसदी का योगदान दे रहे हैं। किसानों के जीवन में आज व्यापक परिवर्तन हुआ है। मोदी जी के विजन के अनुरूप किसानों की आय दोगुनी से अधिक हुई है। किसानों के जीवन में खुशहाली लाने वाले अन्य मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। सीएम ने रिफॉर्म में किसानों के योगदान की सराहना भी की।

आधी आबादी के जीवन में व्यापक परिवर्तन

सीएम योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश में आधी आबादी के जीवन में भी व्यापक परिवर्तन आया है। 2017 में जो महिला श्रमबल 12 फीसदी था, वह अब बढ़कर 37-38 फीसदी से अधिक हो गया है। डबल इंजन सरकार सभी बड़े महानगरों में कामकाजी महिलाओं के लिए श्रमजीवी हॉस्टल का निर्माण कर रही है। मिशन शक्ति के अंतर्गत सरकार ने महिला सुरक्षा, सम्मान व स्वावलंबन के लिए अनेक कदम उठाए हैं। 9 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी और उसमें 20 फीसदी से अधिक महिलाओं की भागीदारी के साथ प्रदेश सरकार ने कीर्तिमान स्थापित किया है।

 

प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे युवाओं का अभिनंदन 

सीएम ने कहा कि डबल इंजन सरकार के कारण प्रदेश में ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, सुरक्षा व अन्य कारणों से निवेश के बेहतर अवसर प्राप्त हुए हैं। लाखों युवाओं को अपने जनपद, क्षेत्र में नौकरी व रोजगार की गारंटी मिली है। परंपरागत उद्यम को प्रोत्साहित करते हुए एक जनपद-एक उत्पाद और पीएम विश्वकर्मा आदि योजनाओं से व्यापक बदलाव हुए हैं। करोड़ों नौजवानों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराए गए हैं। सीएम ने प्रदेश की अर्थव्यवस्था को मजबूती प्रदान कर रहे युवाओं का अभिनंदन किया।  

विधानसभा व परिषद के सदस्य सावन के आयोजनों में लेंगे भाग 

मुख्यमंत्री ने सावन में शिवभक्तों की आस्था को भी नमन किया और कहा कि  देश-प्रदेश में शिवभक्त हर-हर, बम-बम के उत्साहपूर्ण माहौल में शिवभक्ति को निवेदित कर रहे हैं। अभी से करोड़ों शिवभक्त पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हरिद्वार के पावन धाम में हर की पैड़ी से गंगाजल लेने के लिए प्रस्थान कर चुके हैं। शासन, स्थानीय प्रशासन, स्वयंसेवी, सामाजिक, व्यापारिक व धार्मिक संगठनों ने उनके स्वागत, सुरक्षा, सुविधा के लिए अनेक कार्यक्रम प्रारंभ किए हैं। विधानसभा व परिषद के सदस्य भी 7 अगस्त से इन आयोजनों में भाग लेंगे। 

सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा करें जनप्रतिनिधि 

सीएम ने सभी जनप्रतिनिधियों से कहा कि सदन में स्वस्थ चर्चा-परिचर्चा बनाए रखने के लिए कार्य करें। सरकारी कर्मचारियों, आउटसोर्स व संविदा कार्मिकों ने 9 वर्षों में मेहनत की पराकाष्ठा दिखाई है, ऐसे में सरकार उनके वेलफेयर के लिए भी कार्य कर रही है। अनुदेशकों, शिक्षामित्रों, बेसिक, माध्यमिक व उच्च शिक्षा के सभी शिक्षकों को कैशलेस की सुविधा दी गई। साथ ही सरकार ने अनुदेशकों, शिक्षामित्रों के मानदेय को भी बढ़ाया है। 

 

पत्रकार वार्ता के दौरान उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, ब्रजेश पाठक, संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना, कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख आदि मौजूद रहे।

आस्था और अनुशासन का अद्भुत संगम है कांवड़ यात्रा

-डॉ. रंगनाथ त्रिपाठी

सावन के इस महीने में उत्तर प्रदेश ही नहीं, बल्कि पूरे उत्तर भारत में कांवड़ियों के झुंड कंधों पर गंगाजल लिए शिवत्व को आत्मसात करते हुए अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं तो यह सनातन परंपरा की उस अनंत धारा का साक्षात प्रकटीकरण है जो प्राचीन काल से भारतीय चेतना में प्रवाहित होती रही है। यह महीना शिव-आराधना का सबसे पवित्र काल है। यही वह समय है जब पौराणिक मान्यता के अनुसार समुद्र-मंथन से निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने कंठ में धारण किया था और सृष्टि को विनाश से बचाया था।

 

कांवड़िए गंगाजल लेकर शिवलिंग पर अभिषेक करते हैं तो यह उस देवता के प्रति कृतज्ञता ज्ञापन है, जिसने संसार के कल्याण के लिए विष पिया। यह त्याग और भक्ति के शाश्वत सिद्धांत की जीवंत अभिव्यक्ति है। आस्था के इसी धरातल पर, यदि हम इस यात्रा को सामाजिक और मनोवैज्ञानिक रूप में देखें, तो ऐसी संरचना उभरती है जिसमें मनुष्य की सामूहिक चेतना, अनुशासन और सामाजिक सहयोग की गहरी परतें हैं। यही गहराई उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पूर्ण समर्पण से इन तपस्वियों के प्रति सेवा भाव के लिए प्रेरित करती है।

 

इस यात्रा का मूल तत्व आस्था और अनुशासन है। आस्था मनुष्य की सहनशक्ति बढ़ा देती है। सैकड़ों किलोमीटर की पदयात्रा, वह भी भीषण गर्मी और मानसून की अनिश्चितता के बीच, किसी सामान्य शारीरिक क्षमता का काम नहीं। श्रद्धा के आवेग में शरीर धीरे-धीरे थकान की सीमाओं को पार करता जाता है। शिव भक्त को अपने शरीर की सीमाओं का नए सिरे से साक्षात्कार होता है। यह अनुभव दीर्घकालिक और सामूहिक है। यहां प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि सहभागिता केंद्र में होती है। शरीर की यह परीक्षा व्यक्ति को यह सिखाती है कि सीमाएं जितनी भौतिक होती हैं, उतनी ही मानसिक भी, और अक्सर मन शरीर से पहले हार मान लेता है।

इसी बिंदु से मानसिक अनुशासन का प्रश्न जुड़ता है। लंबी पदयात्रा में कांवड़ियों को एक निश्चित संयम और मर्यादा का पालन भी करना पड़ता है। समय पर विश्राम, भोजन में सादगी, और सबसे महत्वपूर्ण, कांवड़ को भूमि पर न रखने जैसे नियमों का निर्वहन। यह अनुशासन स्वेच्छा से स्वीकार किया गया प्रतिबंध है। जब कोई व्यक्ति किसी बड़े लक्ष्य के लिए स्वयं को संयमित करता है, तो उसमें आत्म-नियंत्रण की क्षमता विकसित होती है। अनेक कांवड़िए इस अनुभव को केवल धार्मिक कृत्य नहीं, बल्कि आत्म-परिष्करण की एक प्रक्रिया के रूप में वर्णित करते हैं। आध्यात्मिक दृष्टि से देखें तो कांवड़ को भूमि पर न रखने का नियम भी गहरा प्रतीकात्मक अर्थ रखता है। यह जल साक्षात गंगा का, स्वयं शिव की जटाओं से प्रवाहित पवित्रता का प्रतिनिधित्व करता है। भारतीय परंपरा में तप, व्रत और संयम को सदा मोक्ष के मार्ग के रूप में देखा गया है, और कांवड़ यात्रा इसी तपस्या-परंपरा का समकालीन रूप है।

 

समाजशास्त्रीय दृष्टि से देखें तो कांवड़ यात्रा ऐसी सामूहिकता है जो सामाजिक ढांचों, जाति, वर्ग और आर्थिक स्थिति की सीमाओं को अस्थायी रूप से धुंधला कर देती है। सड़क पर चलते समय एक मजदूर और एक व्यापारी, दोनों समान रूप से थकान और कष्ट साझा करते हैं। यह साझा अनुभव एक अस्थायी किंतु सशक्त बंधन उत्पन्न करता है। मनुष्य के सामाजिक स्वभाव में यह प्रवृत्ति गहराई से अंतर्निहित है कि साझा कष्ट और साझा उद्देश्य समुदाय को अधिक दृढ़ता से बांधते हैं। साझा सुख में यह दृढ़ता नहीं होती।

 

इसी सामूहिकता में सेवा शिविरों की व्यवस्था भी है। मार्ग में स्थान-स्थान पर स्थापित सेवा शिविर, जहां स्थानीय निवासी, सामाजिक संगठन और स्वयंसेवक निःशुल्क भोजन, विश्राम और चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराते हैं, पूरी यात्रा का सामाजिक आधार बनाते हैं। यह स्वतःस्फूर्त सामुदायिक सहयोग का उदाहरण है। हजारों परिवार और संस्थाएं बिना किसी प्रत्यक्ष लाभ की अपेक्षा के इस व्यवस्था में योगदान देती हैं। आज के दौर में जहां आधुनिक शहरी जीवन व्यक्तिवाद और पारस्परिक अलगाव की ओर बढ़ रहा है, कांवड़ यात्रा वर्ष में एक बार ही सही, पारस्परिक निर्भरता और सामुदायिक दायित्व की भावना को पुनर्जीवित करती है।

 

राज्य की भूमिका पर विचार किए बिना यह विषय पूरा नहीं होगा। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने बीते वर्षों में इस यात्रा को व्यवस्थित, सुरक्षित और गरिमामय बनाने की दिशा में जो प्रयास किए हैं, वे एक स्पष्ट सांस्कृतिक दृष्टि का प्रतिबिंब हैं। मार्ग प्रकाश व्यवस्था, चिकित्सा शिविर, ड्रोन निगरानी, स्वच्छता अभियान, पुष्प वर्षा और यातायात प्रबंधन जैसे कदम यह दर्शाते हैं कि योगी सरकार श्रद्धालुओं को भीड़ के रूप में नहीं, सम्मानित आस्था-यात्रियों के रूप में देखती है।

 

योगी आदित्यनाथ स्वयं धर्माचार्य हैं और उनके नेतृत्व में यह प्रयास सांस्कृतिक पुनर्जागरण या 'सनातन गौरव की पुनर्स्थापना' के रूप में देखा जाता है। एक ऐसी दृष्टि जिसके अंतर्गत काशी विश्वनाथ धाम का भव्य पुनर्निर्माण, अयोध्या में राम मंदिर के आसपास के अवसंरचनात्मक कायाकल्प, और कुंभ जैसे आयोजनों की भव्यता को भी रखा जा सकता है। कांवड़ यात्रा मार्ग की हर सड़क, हर लाइट, हर सेवा शिविर, आस्था और शासन के बीच सम्मानजनक संबंध का प्रतीक है। स्वाभाविक है कि किसी भी बड़े सार्वजनिक विषय पर भिन्न मत भी होते हैं, और कुछ टिप्पणीकार इस विषय पर अलग दृष्टिकोण भी रखते हैं परंतु व्यापक जनसमर्थन और श्रद्धालुओं की निरंतर बढ़ती संख्या इस बात का प्रमाण है कि योगी सरकार उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप है।

 

कांवड़ यात्रा को सिर्फ आस्था या अनुशासन के ही रूप में देखना उचित नहीं होगा। यह यात्रा वास्तव में इन दोनों तत्वों के संगम पर खड़ी है जहां आध्यात्मिक विश्वास शारीरिक कष्ट को अर्थ प्रदान करता है, और शारीरिक कष्ट उस विश्वास को अधिक सघन, अधिक प्रत्यक्ष और अधिक अनुभवजन्य बना देता है। आस्था के बिना यह यात्रा केवल एक कठिन शारीरिक परीक्षा रह जाती और अनुशासन के बिना यह केवल भावुक उन्माद बनकर रह जाती। किंतु, जब लाखों भक्त शिव के प्रति अपने प्रेम में एक साथ चलते हैं, कष्ट सहते हैं और फिर भी मुस्कुराते हुए 'बोल बम' का उद्घोष करते हैं, तब यह केवल सामाजिक व्यवहार नहीं रह जाता, यह सनातन धर्म की अजेय जीवंतता का प्रमाण बन जाता है।

 

जब राज्य स्वयं आगे बढ़कर इस आस्था को गरिमा, सुरक्षा और सम्मान देता है, तो यह सभ्यता की उस स्मृति के प्रति राजकीय कृतज्ञता है जिसने हमें सनातन पहचान दी है। इन दोनों के संतुलन में ही इस परंपरा की वास्तविक शक्ति निहित है। एक ऐसी शक्ति जो व्यक्ति को स्वयं से जोड़ती है, समुदाय को एक-दूसरे से जोड़ती है, और राष्ट्र को उसकी आध्यात्मिक जड़ों से जोड़ती है। (लेखक श्री गोरक्षनाथ संस्कृत विद्यापीठ स्नातकोत्तर महाविद्यालय, गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर में वेद विभागाध्यक्ष हैं)