Janmashtami Puja Samagri List: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, द्वापर युग में भगवान विष्णु के आठवें अवतार श्रीकृष्ण ने देवकी और वासुदेव के पुत्र के रूप में जन्म लिया था। इस दिन दुनिया भर के कृष्ण भक्त विशेष पूजा-अर्चना करते हैं। भगवान कृष्ण की लीलाओं की झांकियां सजाते हैं, उनके मोहक बाल रूप का कीर्तन-भजन करते हैं। माना जाता है कि ऐसा करने से भगवान विष्णु की कृपा से सभी दुख दूर होते हैं और जीवन में खुशहाली आती है। यह पर्व हर साल भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है। इस साल यह पर्व 4 सितंबर 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन लोग उपवास करते हैं और विभिन्न प्रकार से श्रीकृष्ण की पूजा करते हैं। माना जाता है विधि-विधान से जन्माष्टमी की पूजा करने वाले भक्तों से भगवान प्रसन्न होते हैं। आइए जानें जन्माष्टमी की पूजा में क्या चीजें शामिल करना बेहद जरूरी है और जिनके बिना यह पूजा अधूरी मानी जाती है।
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा के लिए आवश्यक सामग्री की सूची नीचे दी गई है:
भगवान श्री कृष्ण के श्रृंगार और प्रतिमा हेतु
बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) की पीतल या मिट्टी की मूर्ति
नए वस्त्र : मोरपंख से सजे सुंदर वस्त्र या पोशाक
श्रृंगार सामग्री : मुकुट, बांसुरी, मोरपंख, वैजयंती माला, कुंडल, कड़े, और पायल
झूला : बाल गोपाल को बैठाने के लिए छोटा झूला और सजावट का सामान
मुख्य पूजा की सामग्री
- अक्षत (चावल), रोली (कुमकुम), हल्दी, और चंदन (सफेद व पीला)
- अबीर, गुलाल, और सिंदूर
- धूपबत्ती, अगरबत्ती, और दूर्वा (दूब घास)
- दीपक (घी या तिल के तेल का) और आल की बत्ती/रेशमी बत्ती
- कपूर (आरती के लिए)
- सुपारी, पान के पत्ते, और लौंग-इलायची
- कलावा (मौली) और गंगाजल
- ताजे फूल (विशेषकर कमल या गेंदे के फूल) और तुलसी के पत्ते (भोग के लिए अत्यंत अनिवार्य)
पंचामृत और भोग सामग्री
पंचामृत : दूध, दही, देसी घी, शहद, और शक्कर (या बुरा) का मिश्रण
माखन और मिस्री : श्रीकृष्ण का सबसे प्रिय भोग
धनिया पंजीरी : भुने हुए धनिये के पाउडर, घी, चीनी और सूखे मेवों से बनी
मखाना और मेवे (पंचमेवा): काजू, बदाम, किशमिश, मखाना, और चिरौंजी
ताजे फल : केला, सेब, संतरा, और विशेष रूप से खीरा (डंठल और पत्ती वाला, जो जन्मोत्सव की प्रक्रिया के लिए आवश्यक है)
पूजा के बर्तन और अन्य वस्तुएं
- पूजा की चौकी और लाल या पीला कपड़ा (चौकी पर बिछाने के लिए)
- अर्घ्य और अभिषेक के लिए दक्षिणावर्ती शंख
- छोटी घंटी और आरती की थाली
- जल का कलश और आचमनी (तांबे या पीतल का छोटा लोटा)
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि
श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की पूजा मध्यरात्रि (रात 12 बजे) में की जाती है, क्योंकि भगवान श्री कृष्ण का जन्म रोहिणी नक्षत्र में मध्यरात्रि को हुआ था। सरल और प्रामाणिक पूजा विधि:
- सुबह स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें और हाथ में जल, अक्षत व फूल लेकर व्रत का संकल्प लें।
- दिनभर सात्विक रहें और ‘ॐ नमो भगवते वासुदेवाय’ या ‘हरे कृष्णा’ मंत्र का जाप करते रहें।
- शाम को पूजा के स्थान को साफ करें और उत्तर या पूर्व दिशा में एक चौकी स्थापित करें।
- चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं और उस पर बाल गोपाल (लड्डू गोपाल) का झूला या प्रतिमा स्थापित करें।
- चौकी के पास जल से भरा कलश रखें और दीपक व धूप जलाएं।
- रात 12 बजे खीरे को सिक्के या डंठल से काटकर बाल गोपाल का प्रतीकात्मक जन्म कराएं।
- इसके बाद शंख में गंगाजल और पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शक्कर) भरकर लड्डू गोपाल का अभिषेक करें।
- अभिषेक के बाद उन्हें शुद्ध जल से स्नान कराकर साफ कपड़े से पोंछें।
- बाल गोपाल को सुंदर पोशाक, मुकुट, बांसुरी, वैजयंती माला और मोरपंख से सजाएं।
- उन्हें रोली और चंदन का तिलक लगाएं और अक्षत अर्पित करें।
- इसके बाद उन्हें प्यार से झूले में बैठाएं और झूला झुलाएं।
- बाल गोपाल को उनका सबसे प्रिय भोग माखन-मिस्री और धनिया पंजीरी अर्पित करें।
- पंचामृत, पंचमेवा, फल और मिठाइयों का भोग लगाएं।
- सभी भोग सामग्रियों में तुलसी का पत्ता अवश्य रखें, क्योंकि इसके बिना श्री कृष्ण भोग स्वीकार नहीं करते।
- धूप-दीप जलाकर ‘जय देव जय देव जय श्री कृष्णा’ या ‘कुंजबिहारी जी की आरती’ गाएं।
- आरती के बाद हाथ जोड़कर जाने-अनजाने में हुई गलतियों के लिए क्षमा मांगें।
- अंत में सभी सदस्यों में प्रसाद बांटें और अपना व्रत (धनिया पंजीरी व पंचामृत से) खोलें।





