West Bengal SIR: ‘क्या हम नए चुनाव कराने का निर्देश दे सकते हैं?’; बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल

West Bengal SIR: सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) मामले की सुनवाई के दौरान एक अहम कानूनी सवाल उठाए। शीर्ष अदालत ने पूछा कि क्या न्यायपालिका नए चुनाव का आदेश दे सकती है, जब ऐसे दावे किए जा रहे हों कि कई विधानसभा क्षेत्रों में हटाए गए वोटरों की संख्या जीत के अंतर (victory margin) से ज्यादा थी। न्यूज 18 के मुताबिक, चीफ जस्टिस सूर्य कांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) सदस्य की ओर से सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय द्वारा दायर याचिका पर विचार-विमर्श किया।

TMC याचिकाकर्ता का पक्ष रखते हुए, सीनियर एडवोकेट कल्याण बंदोपाध्याय ने 31 विधानसभा क्षेत्रों का ब्योरा पेश किया। इन क्षेत्रों में जीतने वाले BJP उम्मीदवारों की जीत का अंतर, SIR प्रक्रिया के दौरान हटाए गए कुल वोटरों की संख्या से कम था। एक विधानसभा क्षेत्र (AC-145) में हार का अंतर सिर्फ 401 वोट था। जबकि 8,785 वोटर हटाए गए थे। एक और सीट पर SIR के तहत बहुत ज्यादा वोटर हटाए जाने के बावजूद उम्मीदवार 316 वोटों से हार गया।

नतीजों पर असर

याचिकाकर्ताओं ने तर्क दिया कि इतने बड़े पैमाने पर वोटर हटाने से चुनाव के नतीजों पर असर पड़ा। हजारों वैध नागरिकों को वोट देने के अधिकार से वंचित कर दिया गया। सार्वजनिक डेटा की कमी: TMC के वकील ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि विधानसभा-वार अपील डेटा का हिसाब लगाना मुश्किल है क्योंकि भारत के चुनाव आयोग (ECI) ने ये आंकड़े सार्वजनिक नहीं किए हैं।

सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी

इन दलीलों के जवाब में चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्य कांत ने मौखिक रूप से टिप्पणी की, “आप इस पर याचिका दायर कर सकते हैं, लेकिन क्या कोर्ट इस तरह नए चुनाव का आदेश दे सकता है?” चीफ जस्टिस ने पूछा कि क्या प्रभावित उम्मीदवारों ने उन 31 विधानसभा क्षेत्रों में जीते हुए उम्मीदवारों को चुनौती देने के लिए औपचारिक चुनाव याचिकाएं दायर की थीं। इस पर वकील ने जवाब दिया कि कुछ सीटों पर चुनाव याचिकाएं दायर की गई थीं, लेकिन सभी पर नहीं। इस पर जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने इस बात पर जोर दिया कि यह पता लगाना जरूरी है कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के बाद कितने लोगों ने असल में अपील दायर की थी।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने कहा कि अगर नाम हटाए जाने वाले किसी वोटर ने अपील दायर किए बिना इसे स्वीकार कर लिया, तो उनकी ओर से नतीजों को चुनौती देना केवल सैद्धांतिक बात रह जाती है। हालांकि, अगर 100 लोगों के नाम हटाए गए, जीत का अंतर 50 था। हटाए गए वोटरों में से 60 या 70 ने अपील दायर की जो अभी भी लंबित है, तो नाम हटाने की इस प्रक्रिया को चुनौती देना एक अहम और बहुत जरूरी मामला बन जाता है।

लंबित अपील का आंकड़ा मांगा

इससे एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को चुनाव आयोग (ECI) को पश्चिम बंगाल में SIR के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने या नाम शामिल किए जाने को चुनौती देने वाली विभिन्न अपील पर अधिकारियों द्वारा निपटाए गए मामलों और लंबित मामलों का आंकड़ा पेश करने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि इन मामलों का समयबद्ध तरीके से निपटारा किया जाना जरूरी है। पीठ ने निर्वाचन आयोग से यह बताने को कहा कि लंबित अपील के निपटारे की प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील कल्याण बनर्जी ने कहा कि लोगों को यह जानकारी नहीं मिल रही है कि न्यायाधिकरणों के समक्ष कितनी अपील लंबित हैं या कितनी अपील का निपटारा हो चुका है, क्योंकि यह जानकारी सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं है। बनर्जी ने कहा कि नगर निकाय और पंचायत चुनाव होने वाले हैं। इस सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह मामले को केवल 31 विधानसभा क्षेत्रों तक सीमित नहीं रखेगा।

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24 अप्रैल को शीर्ष अदालत ने अपीलीय न्यायाधिकरणों को निर्देश दिया था कि पश्चिम बंगाल में एसआईआर के बाद मतदाता सूची से नाम हटाए जाने के खिलाफ तत्काल सुनवाई की जरूरत साबित करने वाले मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाए। करीब 60 लाख दावों और आपत्तियों के निपटारे के लिए पश्चिम बंगाल एवं पड़ोसी राज्यों ओडिशा और झारखंड के करीब 700 न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया था।

मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को नहीं मिलेगी बागवानी सब्सिडी; केंद्र सरकार ने बदले NHB के नियम, कितनी मिलती थी सब्सिडी, क्या था नियम?

Horticulture subsidy rules: केंद्र सरकार ने नेशनल हॉर्टिकल्चर बोर्ड (NHB) की कमर्शियल हॉर्टिकल्चर और कोल्ड स्टोरेज स्कीम के तहत आर्थिक मदद पाने के लिए योग्यता के नियमों को और सख्त कर दिया है। अब संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों के अलावा मौजूदा मंत्रियों, सांसद (MP), विधायक (MLA), मेयर और जिला पंचायत अध्यक्षों समेत कई कैटेगरी के लोग योजना के लाभ से बाहर होंगे। नई गाइडलाइंस 21 अगस्त को जारी की गईं। इसी के साथ ये तुरंत लागू हो गई हैं।

बदली हुई गाइडलाइंस के अनुसार, केंद्र और राज्य सरकार के मंत्रालयों और विभागों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग्स, ऑटोनॉमस बॉडीज और लोकल बॉडीज के कर्मचारियों को भी NHB से आर्थिक मदद पाने के लिए अयोग्य घोषित कर दिया गया है।

हालांकि, मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) और क्लास IV कर्मचारियों को इस नियम से छूट दी गई है। इसके अलावा, ₹10,000 या उससे अधिक की मासिक पेंशन पाने वाले रिटायर्ड कर्मचारी या पेंशनभोगी भी इस स्कीम के तहत योग्य नहीं होंगे।

बदली हुई गाइडलाइंस के तहत, इन कैटेगरी में आने वाले लोगों के परिवार के सदस्य स्कीम के तहत एक बार आर्थिक मदद ले सकते हैं, बशर्ते वे परिवार की नई परिभाषा के तहत योग्यता के नियमों को पूरा करते हों।

‘परिवार’ की इस परिभाषा में आवेदक के जीवनसाथी, माता-पिता, बेटे और बेटियाँ शामिल हैं। NHB स्कीम के तहत आर्थिक मदद के लिए प्रति परिवार केवल एक सदस्य ही योग्य है। गाइडलाइंस के अनुसार, परिवार के किसी भी सदस्य को दी गई आर्थिक मदद को पूरे परिवार को दी गई मदद माना जाएगा।

नियमों में क्यों करने पड़े बदलाव?

NHB ने कहा कि इन बदलावों का मकसद आर्थिक मदद को तर्कसंगत बनाना, फायदों का समान वितरण सुनिश्चित करना, सब्सिडी के दोहराव को रोकना और स्कीम को लागू करने की प्रक्रिया को ज़्यादा पारदर्शी और असरदार बनाना है। ये बदलाव कुछ हफ्ते पहले यह पता चलने के बाद किए गए हैं कि केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी और BJP सांसद लुंबा राम ने NHB स्कीम के तहत फायदा उठाया था।

मंत्री ने सब्सिडी लौटाया

कृषि राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने 28 जुलाई को संसद को बताया था कि चौधरी ने संबंधित बैंक को सब्सिडी की रकम लौटा दी थी। बैंक को निर्देश दिया गया था कि वह फंड NHB को वापस भेज दे। ‘हॉर्टिकल्चर फसलों के उत्पादन और कटाई के बाद के मैनेजमेंट के जरिए कमर्शियल हॉर्टिकल्चर का विकास’ नाम की इस स्कीम का मकसद बड़े पैमाने पर हॉर्टिकल्चर फसलों की कमर्शियल खेती (मुनाफे के लिए) को बढ़ावा देना है।

इस स्कीम में तीन तरह की सब्जियां जैसे शिमला मिर्च, खीरा और टमाटर और आठ तरह के फूल जैसे गुलाब, लिली और गुलदाउदी शामिल हैं। इस स्कीम के तहत प्रोजेक्ट की लागत का 50% सब्सिडी के तौर पर दिया जाता था, जिसकी अधिकतम सीमा प्रति परिवार 1 करोड़ रुपये तय की गई थी।

केंद्र सरकार की बागवानी सब्सिडी स्कीम का पूरा नाम Mission for Integrated Development of Horticulture (MIDH) है। यह केंद्र की अहम योजना है। यह फल, सब्जी, फूल, मसाले, मशरूम, नर्सरी आदि बागवानी गतिविधियों को कवर करती है। सब्सिडी काम और फसल के हिसाब से अलग होती है।

Sawan Purnima 2026: जीवन में लाना चाहते हैं सुख-समृद्धि तो सावन के अंतिम दिन करें ये 7 उपाय, मां लक्ष्मी की कृपा से नहीं होगी किसी चीज की कमी

Sawan Purnima 2026: सावन का महीना अब समापन की ओर बढ़ रहा है। हिंदू पंचांग के अनुसार, उत्तर भारत में मुख्य रूप से प्रचलित पूर्णिमान्त कैलेंडर में श्रावण मास का समापन श्रावण पूर्णिमा के दिन होता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं। इसी दिन ब्राह्मण और द्विज समाज के लोग पुराना यज्ञोपवीत उतार कर नया धारण करते हैं। साथ ही, श्रावण पूर्णिमा को ‘विश्व संस्कृत दिवस’ के रूप में भी मनाया जाता है।

सावन पूर्णिमा के दिन सिर्फ रक्षाबंधन का पर्व ही नहीं, गायत्री जयंती, वरलक्ष्मी व्रत और नारली पूर्णिमा भी मनाई जाती है। इस साल सावन का अंतिम दिन और भी खास है, क्योंकि इस दिन चंद्र ग्रहण भी लग रहा है। हालांकि ये ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा, जिस कारण से इसका यहां कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा। बता दें, हर हिंदू माह में पूर्णिमा का दिन माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा के लिए भी खास माना जाता है। सावन की पूर्णिमा पर भगवान शिव की भी पूजा की जाती है। इसलिए इस दिन को जीवन में खुशहाली और सुख समृद्धि लाने के लिए बेहद अहम माना जाता है। अगर आप इस दिन कुछ खास उपाय करते हैं तो घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है।

कब है श्रावण पूर्णिमा 2026?

सावन महीना 28 अगस्त 2026 को खत्म हो रहा है। इस दिन श्रावण पूर्णिमा है, जो 27 अगस्त 2026 की सुबह 09:08 बजे से 28 अगस्त 2026 की सुबह 09:48 बजे तक रहेगी।

सावन पूर्णिमा के उपाय

  • श्रावण पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान पूजा जरूर करें, उन्हें मखाने की खीर का भोग लगाएं। साथ ही कनकधारा स्तोत्र या विष्णु सहस्रनाम का पाठ करें। कहते हैं ऐसा करने से धन-धान्य में वृद्धि के रास्ते खुलते हैं।
  • सावन के आखिरी दिन मां लक्ष्मी के चरणों में 5 साबुत पीली कौड़ियां और थोड़ा अक्षत अवश्य चढ़ाएं। पूजा के बाद इन कौड़ियों और चावल को एक लाल रेशमी कपड़े में बांधकर घर की तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। मान्यता है इस उपाय को करने से घर में धन-धान्य की कभी कमी नहीं होती।
  • सावन के अंतिम दिन शिवलिंग का पंचामृत से अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग पर शुद्ध जल भी जरूर चढ़ाएं। इसके बाद शिवजी को बेलपत्र और शमी के पत्ते चढ़ाएं। मान्यता है कि सावन के आखिरी दिन भक्तिभाव से यह उपाय करने से जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं।
  • सावन के अंतिम दिन यानी श्रावण पूर्णिमा की रात में चंद्र देव की पूजा भी जरूर करें। रात में चांदी के पात्र में साफ जल, थोड़ा सा कच्चा दूध, अक्षत और सफेद फूल मिलाकर चंद्र देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय चंद्र देव के मंत्र को 3 बार जरूर बोलें। मंत्र है ‘ॐ चंद्राय नमः’।
  • सावन के आखिरी दिन पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करना अत्यंत शुभ फलदायी माना जाता है। साथ ही पीपल के पेड़ पर सरसों के तेल का दीपक भी जलाएं। कहते हैं इससे सभी देवी-देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है।
  • सावन के अंतिम दिन किसी जरूरतमंद या ब्राह्मण को तिल, सफेद वस्त्र, चावल, दूध या भोजन का दान जरूर करें। कहते हैं इससे माता लक्ष्मी की असीम कृपा प्राप्त होती है।

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Rakshabandhan 2026: इस रक्षाबंधन पर एक नहीं बल्कि 7 शुभ योग बन रहे हैं, जानें रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त

Rakshabandhan 2026: इस रक्षाबंधन पर एक नहीं बल्कि 7 शुभ योग बन रहे हैं, जानें रक्षाबंधन की तारीख और राखी बांधने के शुभ मुहूर्त

Rakshabandhan 2026: रक्षाबंधन 2026 शुक्रवार, 28 अगस्त को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, इस साल यह त्योहार खास तौर पर शुभ माना जा रहा है क्योंकि एक ही दिन सात अत्यंत दुर्लभ और शुभ योग बन रहे हैं। ग्रहों और नक्षत्रों का ऐसा मेल होने की उम्मीद है, जिसका परिणाम बहुत शुभ होगा। इससे भी जरूरी बात यह है कि भद्रा त्योहार पर असर नहीं डालेगी, जिससे बहनों को अपने भाइयों की कलाई पर पवित्र धागा बांधने के लिए ज्यादा समय मिलेगा।

रक्षाबंधन पर भद्रा नहीं

पंचांग के अनुसार, भद्रा गुरुवार, 27 अगस्त को सुबह 9:08 बजे शुरू होगी और उसी दिन रात 9:27 बजे खत्म होगी। इसलिए, 28 अगस्त को भद्रा नहीं होगी, जिससे परिवार बिना इस रोक के रक्षाबंधन मना सकेंगे। भद्रा को राखी बांधने के लिए अशुभ समय माना जाता है। हालांकि, इस साल यह त्योहार से एक दिन पहले खत्म हो जाएगी।

रक्षाबंधन पर सात शुभ योग

रक्षाबंधन 2026 को खास बनाने के लिए कई अच्छे ज्योतिषीय संयोग बनने की उम्मीद है। इनमें शतभिषा नक्षत्र, सुकर्मा योग, त्रिपुष्कर योग और सर्वार्थ सिद्धि योग के साथ-साथ दूसरे शुभ ग्रहों की स्थिति शामिल है।

शतभिषा नक्षत्र के प्रभाव में चंद्रमा कुंभ राशि में रहेगा। ज्योतिष में, यह नक्षत्र वरुण देव से जुड़ा है और राहु इसका स्वामी है। इस दौरान की जाने वाली पूजा, दान और दूसरे आध्यात्मिक कामों का खास महत्व माना जाता है।

कर्क राशि में बृहस्पति का होना भी अच्छा माना जाता है। इसके अलावा, भद्रा का न होना भी उन वजहों में गिना जा रहा है जो इस दिन को रक्षाबंधन की रस्में करने के लिए ज़्यादा सही बनाती हैं।

सावन पूर्णिमा तिथि कब से कब तक है?

पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त को सुबह करीब 9:09 बजे शुरू होने और 28 अगस्त को सुबह करीब 9:48 बजे खत्म होने की उम्मीद है। पूर्णिमा 28 अगस्त को सूर्योदय के समय रहेगी, इसलिए उदया तिथि की परंपरा के अनुसार उसी दिन रक्षाबंधन मनाया जाएगा। पूर्णिमा का व्रत करने वाले श्रद्धालु 27 अगस्त को उपवास कर सकते हैं, जबकि बहनें 28 अगस्त को राखी बांध सकती हैं।

राखी बांधने का सबसे अच्छा समय

सुबह का मुहूर्त : सुबह 5:57 बजे से 9:48 बजे तक

शुभ चौघड़िया के आधार पर एक और शुभ समय इस समय रहने की उम्मीद है:

शुभ चौघड़िया : सुबह 11:45 बजे से दोपहर 1:19 बजे तक

राहु काल में राखी बांधने से बचें

राहु काल सुबह 10:11 बजे से 11:45 बजे तक रहने की उम्मीद है। ज्योतिष के हिसाब से समय मानने वाले परिवार इस दौरान राखी बांधने से बच सकते हैं।

पंचांग का समय शहर और कैलेंडर के हिसाब से थोड़ा अलग हो सकता है। इसलिए परिवार यह रस्म करने से पहले लोकल मुहूर्त देख सकते हैं।

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दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे CM मोहन यादव, की अतिवृष्टि-राहत कार्यों की समीक्षा, जानें क्या दिए निर्देश?

दिल्ली से सीधे रीवा पहुंचे CM मोहन यादव, की अतिवृष्टि-राहत कार्यों की समीक्षा, जानें क्या दिए निर्देश?

Chief Minister Dr Mohan Yadav reviewed relief operations

– मुख्यमंत्री डॉ. मोहन की रीवा संभाग-शहडोल संभाग-जबलपुर के प्रशासन के साथ अहम बैठक

– मुख्‍यमंत्री ने किसी भी स्थिति में बीमारी को फैलने से रोकने के निर्देश

– प्रदेश के मुखिया ने किया जल भराव वाले इलाकों का निरीक्षण
Chief Minister Dr Mohan Yadav :
मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 23 अगस्त को नई दिल्ली से रीवा पहुंचे। उन्होंने यहां रीवा संभाग-शहडोल संभाग-जबलपुर के कलेक्टरों, पुलिस अधीक्षकों के साथ अतिवृष्टि और चल रहे राहत कार्यों की समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने निर्देश दिए कि जहां अभी भी बाढ़ का पानी है, वहां राहत कैंप अच्छी तरह से संचालित किए जाएं। राहत कैंपों में समुचित मात्रा में खाद्य सामग्री, पीने के पानी एवं चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करें।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि यदि लोगों का खाने-पीने का सामान, घर इत्यादि नष्ट हो गए हों उन्हें तत्काल आरबीसी 6 (4) के तहत सहायता उपलब्ध कराएं। इसके अलावा उन्होंने रीवा के गुलाब नगर में जल भराव का निरीक्षण भी किया। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि शिविरों में साफ-सफाई का भी विशेष ध्यान रखा जाए।

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जहां बाढ़ का पानी उतर गया है, वहां शासकीय अमले को भेजें, लोगों को खाने-पीने की किसी तरह की परेशानी नहीं होनी चाहिए। पीने के पानी की शुद्धता के लिए सभी जल स्रोतों एवं हैंडपंपों में ब्लीचिंग पाउडर इत्यादि से क्लोरिनेशन कराएं। उन्होंने कहा कि ऐसे सभी गांव में और नगरी क्षेत्र के वार्डों में जहां बाढ़ का प्रकोप रहा है वहां विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित करें।

महामारी फैलने से बचाएं

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुखार एवं सर्दी जुकाम के मरीज को भी गंभीरता से लिया जाए, किसी तरह की महामारी की स्थिति निर्मित ना हो। जिन गांवों में अति वर्षा से विद्युत आपूर्ति प्रभावित हुई हो, उसे तत्काल बहाल करें।

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पशु चिकित्सा विभाग को भी बाढ़ ग्रस्त क्षेत्रों में जानवरों के इलाज में भेजें, किसी तरह की महामारी नहीं फैलनी चाहिए और यदि पशुओं की मृत्यु हुई हो तो उनका वैज्ञानिक तरीके से डिस्पोजल करें। उन्होंने कहा कि गौशालाओं इत्यादि में पशुओं के खाने-पीने एवं चारे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित करें।

फील्ड में उतरें अधिकारी-कर्मचारी

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निर्देश दिए कि यदि फसल क्षति की सूचना हो तो वहां तत्काल सर्वे कराएं। यदि बुवाई वगैरा प्रारंभिक अवस्था में हो तो उसके नष्ट होने पर बीज इत्यादि की व्यवस्था करें। राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, चिकित्सा विभाग, पशु चिकित्सा विभाग, कृषि विभाग इत्यादि के अधिकारी एवं कर्मचारियों को उनके कार्य स्थल-फील्ड में रहना सुनिश्चित करवाएं। इनके दल बनाकर प्रभावित क्षेत्रों में भेजें। सीएम डॉ. यादव ने कहा कि सभी नगरी निकायों एवं गांव में साफ सफाई का एक विशेष अभियान प्रारंभ करें ताकि किसी तरह की बीमारी न फैले।

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जनता का रखा जाएगा पूरा ध्यान

समीक्षा बैठक के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने मीडिया से कहा कि आज रीवा, शहडोल और जबलपुर संभाग में अतिवृष्टि से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की समीक्षा की। प्रशासन द्वारा प्रभावित क्षेत्रों में राहत शिविर स्थापित कर नागरिकों को आवश्यक सुविधाएं एवं सहायता उपलब्ध कराई गई। बीते दो दिनों से वर्षा थमने के बाद अधिकांश नागरिक राहत शिविरों से अपने घरों को लौट चुके हैं।

अतिवृष्टि के दौरान जिन नागरिकों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं तथा जहां जनहानि एवं पशुहानि हुई है, उन्हें नियमानुसार सरकार की ओर से मुआवजा एवं आवश्यक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि 24 से 27 अगस्त 2026 के बीच जिन जिलों में वर्षा चक्र सक्रिय होने की संभावना है, वहां सुरक्षा की दृष्टि से प्रशासनिक अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं। संभावित प्रभावित क्षेत्रों में सतत निगरानी रखने तथा आवश्यकता के अनुरूप राहत एवं बचाव की सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

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वहीं इस वर्ष प्रदेश में अब तक सामान्य से लगभग 20% कम वर्षा हुई है। इसे ध्यान में रखते हुए कृषि विभाग को कम पानी में बेहतर उत्पादन देने वाली फसलों को प्रोत्साहित करने तथा किसानों को आवश्यक मार्गदर्शन उपलब्ध कराने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का प्रयास है कि बदलती मौसम परिस्थितियों के बीच नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ किसानों के हितों का भी पूरा ध्यान रखा जाए।

Raksha Bandhan Gift: रक्षाबंधन पर यूपी की महिलाओं को सीएम योगी का बड़ा तोहफा, एक साथी के साथ दो दिन बस में फ्री सफर कर सकेंगी महिलाएं

Raksha Bandhan Gift: उत्तर प्रदेश के मु्ख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रक्षाबंधन पर महिलाओं और उनके एक सहयात्री को सरकारी बसों में फ्री यात्रा की सौगात दी है। खास बात यह है कि यह फ्री सेवा एक नहीं बल्कि दो दिन तक जारी रहेगी। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शनिवार (23 अगस्त) को कहा कि रक्षाबंधन पर 27 अगस्त की रात से 28 अगस्त की रात तक राज्य सड़क परिवहन निगम की बसों में महिला यात्री एक सहयोगी के साथ मुफ्त यात्रा कर सकेंगी। आपको बता दें कि इस साल रक्षाबंधन का पवित्र त्योहार 28 अगस्त, शुक्रवार को मनाया जाएगा।

सीएम योगी ने इस संबंध में परिवहन विभाग, पुलिस और प्रशासन को मिलकर व्यापक इंतजाम करने के निर्देश दिए, ताकि महिलाएं त्योहार के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक तरीके से अपने घर पहुंच सकें। मुख्यमंत्री ने महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए ‘एंटी-रोमियो स्क्वॉड’ को सक्रिय रखने और प्रमुख रूट्स पर ट्रैफिक मैनेजमेंट को बेहतर बनाने के भी निर्देश दिए। एक आधिकारिक बयान के मुताबिक मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शासन स्तर के वरिष्ठ अधिकारियों एवं जिलों में तैनात प्रशासनिक अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक की।

बैठक में उन्होंने प्रदेश में जलभराव, बाढ़ की स्थिति, रक्षाबंधन पर महिला यात्रियों के लिए परिवहन व्यवस्था, चीनी की उपलब्धता, आगामी गन्ना पेराई सत्र तथा स्कूलों की व्यवस्थाओं की समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने रक्षाबंधन के मद्देनजर बस चालकों की जांच और निगरानी के भी निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि नशे का सेवन करने वाले किसी भी चालक को बस चलाने की अनुमति न दी जाए। उन्होंने कहा कि ऑटो और टैक्सी चालकों का भी सत्यापन सुनिश्चित करते हुए महिला यात्रियों की सुरक्षा के लिए आवश्यक व्यवस्था किए जाएं।

सीएम आदित्यनाथ ने बैठक में प्रदेश के विभिन्न मंडलों और जिलों में जलभराव की स्थिति की समीक्षा की। उन्होंने प्रयागराज, वाराणसी, लखनऊ, कानपुर, गोरखपुर, मेरठ, सहारनपुर और गाजियाबाद के मण्डलायुक्तों तथा नोएडा प्राधिकरण से जलभराव वाले क्षेत्रों और उसके कारणों की जानकारी ली। मुख्यमंत्री ने कहा कि कहीं भी अनावश्यक जलभराव नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि निचले क्षेत्रों को चिह्नित कर जरूरत के अनुसार अतिरिक्त पम्पिंग स्टेशन स्थापित किए जाएं।

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मुख्यमंत्री ने सभी मेयर, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायतों के अध्यक्षों को स्थानीय पार्षदों के साथ फील्ड में जाकर जलभराव और सफाई व्यवस्था देखने को कहा। उन्होंने निर्देश दिए कि नालों पर जहां भी अतिक्रमण है, उसे चिह्नित कर तत्काल हटाया जाए। सीएम योगी ने यूपी के 19 बाढ़ प्रभावित जिलों की स्थिति की समीक्षा भी की। उन्होंने बलिया, गोण्डा, बहराइच, बाराबंकी, फर्रुखाबाद और लखीमपुर खीरी के जिलाधिकारियों से बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी ली।

Raksha Bandhan 2026 Bhadra timing: इस बार रक्षा बंधन पर नहीं होगा भद्रा का साया, जानें कौन हैं भद्रा और इसमें क्यों नहीं बांधनी चाहिए राखी

Raksha Bandhan 2026 Bhadra timing: हिंदू धर्म में पूरे दिन में कुछ विशेष समय को अशुभ माना जाता है। इस समय में कोई शुभ या मांगलिक कार्य नहीं किए जाते हैं। ऐसा ही एक समय है भद्रा का। हिंदू पौराणिक कथाओं और पंचांग का एक विशेष भाग है। इस समय में रक्षा बंधन का पर्व भी नहीं मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस समय में राखी भी नहीं बांधनी चाहिए। इस साल रक्षा बंधन का पर्व 28 अगस्त 2026 को मनाया जाएगा। इस दिन बहनें अपने भाइयों को रक्षा सूत्र बांधती हैं और उनको तिलक लगाकर मुंह मीठा कराती हैं। साथ ही, उनकी शुभ और मंगल की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन को हमेशा रक्षा करने का वचन देते हैं और भेंट देकर विदा करते हैं।

इस बार भद्रा का साया नहीं

इस बार रक्षा बंधन पर भद्रा का साया नहीं रहीं हेगा। भद्रा रक्षा बंधन के दिन सूर्योदय से पूर्व ही समाप्त हो जाएगी। इसलिए भद्रा की अड़चन के बिना पूरे दिन राखी का त्योहार मनाया जा सकेगा।

कौन है भद्रा?

पौराणिक पहचान : धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, भद्रा भगवान सूर्यदेव और माता छाया की पुत्री हैं, तथा भगवान शनिदेव की सगी बहन हैं।

स्वभाव : शनिदेव की तरह भद्रा का स्वभाव भी अत्यंत क्रोधी और उग्र माना जाता है। जन्म लेते ही वे यज्ञों और मांगलिक कार्यों में विघ्न डालने लगी थीं।

ज्योतिष/पंचांग में स्थान : उनके उग्र स्वभाव को नियंत्रित करने के लिए ब्रह्मा जी ने उन्हें पंचांग के 11 करणों में से 7वें करण (विष्टि करण) में स्थान दिया। भद्रा काल एक ऐसा समय होता है जब भद्रा का प्रभाव पृथ्वी पर रहता है।

भद्रा में राखी क्यों नहीं बांधनी चाहिए?

ज्योतिष शास्त्र और हिंदू मान्यताओं में भद्रा काल को अशुभ और किसी भी शुभ या नए कार्य के लिए वर्जित माना गया है। इसके पीछे मुख्य कारण निम्नलिखित हैं :

अशुभ प्रभाव और अनिष्ट की आशंका : भद्रा के दौरान किए गए शुभ कार्यों का फल नहीं मिलता या वे कार्य निष्फल हो जाते हैं। भाई-बहन का रिश्ता अटूट रहे, इसलिए इस उग्र काल को छोड़कर शुभ मुहूर्त में ही रक्षासूत्र बांधा जाता है।

पौराणिक कथा : प्रचलित कथा के अनुसार, लंकापति रावण की बहन शूर्पणखा ने रावण को भद्रा काल में ही राखी बांधी थी। इसके फलस्वरूप उसी वर्ष रावण के वंश और साम्राज्य का विनाश हो गया। इसी कारण से भद्रा के साये में राखी बांधने से बचा जाता है।

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Mercury Transit 2026: बुध का स्वराशि कन्या में होगा प्रवेश, इन 5 राशियों के जातकों की होगी मौज और खुलेंगे तरक्की के दरवाजे

Mercury Transit 2026: ग्रहों के राजकुमार बुध ग्रह का सितंबर में बड़ा गोचर होने वाला है। ज्योतिष शास्त्र में बुध ग्रह को बुद्धि, वाणी, तर्क, व्यापार, गणना और संचार का कारक माना जाता है। सितंबर में ग्रहों के राजकुमार बुध का गोचर कन्या राशि में होने वाला है। जब बुध अपनी स्वराशि कन्या में प्रवेश करते हैं तो उनकी स्थिति बेहद मजबूत मानी जाती है। बुध ग्रह का कन्या राशि में गोचर (प्रवेश) एक अत्यंत महत्वपूर्ण ज्योतिषीय घटना है। बुध ग्रह कन्या राशि के स्वामी हैं, इसलिए कन्या राशि में उनका आना उनकी उच्च स्थिति और स्वराशि का गोचर माना जाता है।

बुध गोचर का समय और तारीख

कन्या राशि में प्रवेश : 7 सितंबर 2026 (सोमवार)

समय : दोपहर लगभग 1:22 – 1:35 बजे

अवधि : 7 सितंबर 2026 से 26 सितंबर 2026 तक (लगभग 19 से 20 दिन)

अगला गोचर : 26 सितंबर 2026 को बुध तुला राशि में प्रवेश कर जाएंगे।

गोचर का ज्योतिषीय महत्व

अपनी ही राशि कन्या में प्रवेश करने से बुध ‘भद्र पंच महापुरुष राजयोग’ का निर्माण करेंगे, जो बुद्धि, निर्णय क्षमता और व्यापार के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। कन्या राशि में बुध के रहने से विश्लेषणात्मक क्षमता, गणितीय कौशल, संचार कौशल, तर्कशक्ति और एकाग्रता में भारी सुधार आता है।

इन 5 राशियों के लिए खूब फलदायी है बुध का गोचर

वृष राशि : वृषभ राशि वालों के लिए बुध का कन्या में गोचर आर्थिक मामलों में सकारात्मक परिणाम दे सकता है। निवेश, बचत और आय को लेकर बनाई गई योजनाएं फायदा दे सकती हैं। नौकरी में नए अवसर मिल सकते हैं और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग प्राप्त हो सकता है।

मिथुन राशि : मिथुन राशि के स्वामी स्वयं बुध हैं। ऐसे में कन्या राशि में बुध का गोचर आपके लिए कई क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव ला सकता है। नौकरी करने वाले जातकों को नई जिम्मेदारी या बेहतर अवसर मिल सकते हैं। कार्यस्थल पर आपकी बातों और सुझावों को महत्व मिल सकता है।

कन्या राशि : बुध का कन्या राशि में प्रवेश इनके आर्थिक पक्ष को मजबूत करने वाला साबित हो सकता है। आय के नए स्रोत बनने की संभावना है। नौकरीपेशा लोगों को वेतन वृद्धि, इंसेंटिसें व या नई जिम्मेदारी मिलने के संकेत मिल सकते हैं। कारोबार में अटके हुए काम गति पकड़ सकते हैं।

वृश्चिक राशि : वृश्चिक राशि के जातकों के लिए बुध का यह गोचर करियर के लिहाज से महत्वपूर्ण रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत और निर्णय लेने की क्षमता की सराहना हो सकती है। नौकरी में जिम्मेदारी बढ़ने के अवसर बन सकते हैं। व्यापार में लाभ बढ़ाने के लिए नई रणनीति कारगर साबित हो सकती है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई सामग्री जानकारी मात्र है। हम इसकी सटीकता, पूर्णता या विश्वसनीयता का दावा नहीं करते। कृपया किसी भी कार्रवाई से पहले विशेषज्ञ से संपर्क करें

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Parivartan Yog 2026: देवगुरु बृहस्पति का ज्योतिष शास्त्र में अहम स्थान है। इस ग्रह की स्थिति जातक के जीवन में बड़े बदलाव का कारण बनती है। बृहस्पति ग्रह वर्तमान में कर्क राशि में गोचर कर रहा है। कर्क गुरु की उच्च राशि है और इस वजह से गुरु इस समय अतिचारी होकर विचरण कर रहे हैं। इसी अवस्था में उन्होंने ग्रहों के राजकुमार बुध के स्वामित्व वाले अश्लेषा नक्षत्र में गोचर किया है।

ज्योतिष में देवगुरु बृहस्पति को ज्ञान, वृद्धि, समृद्धि और सौभाग्य का कारक माना गया है। वहीं, बुध बुद्धि, व्यापार और संचार के देवता हैं। द्रिक पंचांग के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति ने 20 अगस्त को अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश किया है। ज्ञान के कारक बृहस्पति के अश्लेषा नक्षत्र में प्रवेश का बेहद शुभ और सकारात्मक प्रभाव 31 अक्टूबर तक कई राशियों के जीवन पर देखने को मिलता है। अश्लेषा नक्षत्र में गुरु और बुध के एक साथ होने से परिवर्तन योग का निर्माण हो रहा है। आइए जानते हैं कि इस योग से किन 5 राशियों को सबसे ज्यादा फायदा होने वाला है।

मेष राशि : मेष राशि के जातकों के लिए गुरु का यह गोचर अत्यंत फलदायी सिद्ध होगा। अचानक धन लाभ के योग बनेंगे। आय के नए स्रोत खुलेंगे। नौकरीपेशा लोगों को कार्यक्षेत्र में बड़ी सफलता, पदोन्नति या मनचाहा इंक्रीमेंट मिल सकता है।

वृषभ राशि : वृषभ राशि वालों के लिए बुध के नक्षत्र में गुरु का आना भाग्य में वृद्धि लेकर आएगा। जो लोग बिजनेस में हैं, उन्हें नए सौदे और बड़ा मुनाफा हासिल हो सकता है। आपकी बौद्धिक क्षमता और वाणी का प्रभाव बढ़ेगा, जिससे समाज और परिवार में मान-प्रतिष्ठा बढ़ेगी।

मिथुन राशि : मिथुन राशि के स्वामी स्वयं बुध देव हैं, इसलिए गुरु का अश्लेषा नक्षत्र में जाना आपके लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लंबे समय से रुकी हुई योजनाएं गति पकड़ेंगी। विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे लोगों को शुभ समाचार प्राप्त होगा।

कर्क राशि : कर्क राशि के जातकों के लिए यह गोचर मानसिक शांति और सुख-सुविधाओं में बढ़ोतरी करेगा। नया मकान, वाहन या भूमि खरीदने के प्रबल योग बन रहे हैं। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी और मांगलिक कार्यों का आयोजन हो सकता है।

कन्या राशि : कन्या राशि के स्वामी भी बुध हैं, जिससे गुरु का यह गोचर आपके लिए अत्यंत लाभकारी रहेगा। पहले किए गए निवेश का बेहतरीन रिटर्न मिलेगा। आर्थिक तंगी दूर होगी। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को बेहतरीन अवसर प्राप्त होंगे।

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Sawan Purnima 2026 Date: 27 या 28 अगस्त, कब किया जाएगा श्रावण पूर्णिमा का व्रत? जानें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Sawan Purnima 2026 Date: सावन पूर्णिमा हिंदू धर्म में एक अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण तिथि मानी जाती है। यह दिन धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। श्रावण पूर्णिमा के दिन ही रक्षाबंधन का त्योहार मनाया जाता है। इस दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र यानी राखी बांधकर उनकी लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करती हैं, और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं।

यह श्रावण माह का अंतिम दिन होता है। इस पूरे महीने में भगवान शिव की पूजा-आराधना का विशेष विधान होता है, जो पूर्णिमा के दिन जलाभिषेक और विशेष पूजा के साथ पूर्ण होता है। श्रावण पूर्णिमा के दिन जनेऊ धारण करने वाले (द्विज) गंगा या पवित्र नदियों में स्नान करके पुराना यज्ञोपवीत (जनेऊ) बदलते हैं और नया जनेऊ धारण करते हैं। इसे ‘श्रावणी’ या ‘उपाकर्म’ कहा जाता है। साथ ही, अमरनाथ में पवित्र छड़ी मुबारक की रस्म भी श्रावण पूर्णिमा के दिन ही अमरनाथ गुफा पहुंचती है और वार्षिक यात्रा का समापन होता है।

श्रावण पूर्णिमा 2026: सही तारीख

दृक पंचांग के मुताबिक श्रावण शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त 2026 को सुबह करीब 9:08 बजे आरंभ होगी। यह तिथि अगले दिन यानी 28 अगस्त को सुबह लगभग 9:48 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर श्रावण पूर्णिमा 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मानी जाएगी।

स्नान और दान की सही तिथि

सावन पूर्णिमा तिथि 28 अगस्त की सुबह तक रहने के कारण स्नान और दान जैसे कार्य इस दिन सूर्योदय के बाद किए जाएंगे। व्रत और पूजा की तारीख स्थानीय पंचांग तथा क्षेत्रीय परंपरा के अनुसार अलग हो सकती है।

पूर्णिमा तिथि का समय

पूर्णिमा तिथि का प्रारंभ : 27 अगस्त 2026 को सुबह 09:08 बजे से

पूर्णिमा तिथि का समापन : 28 अगस्त 2026 को सुबह 09:48 बजे तक

स्नान-दान और पूजन के शुभ मुहूर्त

ब्रह्म मुहूर्त : सुबह 04:28 बजे से सुबह 05:12 बजे तक

प्रातःकाल स्नान-दान मुहूर्त : सूर्योदय से लेकर सुबह 09:48 बजे तक

अभिजीत मुहूर्त : दोपहर 11:56 बजे से दोपहर 12:48 बजे तक

चंद्र ग्रहण व भद्रा का प्रभाव

चंद्र ग्रहण : 28 अगस्त 2026 को आंशिक चंद्र ग्रहण लग रहा है, परंतु यह ग्रहण भारत में दृश्यमान नहीं रहेगा। इसलिए इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा, जिससे आप बिना किसी रुकावट के पूजा, स्नान, दान व रक्षाबंधन का त्योहार मना सकते हैं।

भद्रा काल : 27 अगस्त की रात में ही भद्रा समाप्त हो जाएगी, इसलिए 28 अगस्त को पूरे दिन रक्षाबंधन एवं धार्मिक कार्यों के लिए भद्रा दोष नहीं रहेगा।

सावन पूर्णि 2026: पूजा विधि

स्नान व दान : इस दिन गंगा या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने तथा दान-पुण्य करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है।

सत्यनारायण कथा : पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा पाने के लिए श्री सत्यनारायण भगवान की कथा और पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।

चंद्र देव की पूजा : रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देने से मानसिक शांति और आरोग्य की प्राप्ति होती है।

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