योगी सरकार ने पेश किया 59019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट

Yogi Government Supplementary Budget 2026-27: उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए ₹59,019.54 करोड़ का अनुपूरक बजट सदन में प्रस्तुत किया। अनुपूरक मांगों के अनुरूप प्रस्तावित अनुपूरक बजट प्रस्तुत करते हुए वित्त मंत्री ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए प्रस्तावित अनुपूरक बजट का कुल आकार ₹59,019.54 करोड़ है। प्रस्तावित अनुपूरक बजट का आकार इस वर्ष के मूल बजट का 6.47 प्रतिशत है। इसमें राजस्व लेखे का व्यय ₹17,399.50 करोड़ तथा पूंजी लेखे का व्यय ₹41,620.04 करोड़ रखा गया है।

 

उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय पर विशेष बल देने का उद्देश्य प्रदेश में सड़क, ऊर्जा, उद्योग, चिकित्सा, ग्रामीण विकास तथा अन्य आधारभूत संरचनाओं का तेजी से विस्तार करना है, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को दीर्घकालिक मजबूती मिले। इस अनुपूरक बजट के माध्यम से योगी सरकार का उद्देश्य प्रदेश में चल रही विकास परियोजनाओं को गति देना, नई जनकल्याणकारी योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना तथा आधारभूत संरचना को और अधिक मजबूत बनाना है। उन्होंने बताया कि इस प्रस्तावित अनुपूरक बजट में नई मांगों के लिए ₹7,854.25 करोड़ की व्यवस्था की गई है। इससे सरकार नई विकास परियोजनाओं के साथ-साथ पहले से चल रही योजनाओं को भी और अधिक प्रभावी ढंग से आगे बढ़ा सकेगी। 

उद्योग और निवेश को सबसे बड़ी प्राथमिकता

वित्त मंत्री ने बताया कि अनुपूरक बजट में भारी एवं मध्यम उद्योग विभाग के लिए ₹22,107.88 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इसके माध्यम से औद्योगिक निवेश, रोजगार सृजन और प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति प्रदान की जा सकेगी। 

गांवों के विकास पर विशेष फोकस

सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के विकास को भी बड़ी प्राथमिकता दी है। इसके लिए ग्राम विकास विभाग के लिए ₹17,942.73 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग ग्रामीण अधोसंरचना, पंचायत विकास, ग्रामीण आजीविका, मूलभूत सुविधाओं तथा गांवों में विकास कार्यों को गति देने में किया जाएगा।

ऊर्जा क्षेत्र को मिलेगा बड़ा निवेश

प्रदेश में बिजली व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने तथा ऊर्जा अवसंरचना के विस्तार के लिए ऊर्जा विभाग को ₹7,422.27 करोड़ की अतिरिक्त धनराशि उपलब्ध कराई गई है। सरकार का उद्देश्य प्रदेश में निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ औद्योगिक एवं घरेलू उपभोक्ताओं को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है।

स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगी मजबूती

अनुपूरक बजट में चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए ₹2,000.25 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस राशि से अस्पतालों की सुविधाओं का विस्तार, चिकित्सा सेवाओं का सुदृढ़ीकरण तथा स्वास्थ्य संबंधी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में सहायता मिलेगी।

समाज कल्याण और महिला सशक्तीकरण पर भी जोर

सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं को और प्रभावी बनाने के लिए समाज कल्याण विभाग को ₹1,655 करोड़ आवंटित किए हैं। वहीं महिला कल्याण विभाग के लिए ₹1,094.40 करोड़ की व्यवस्था की गई है, जिससे महिलाओं के सशक्तीकरण, सुरक्षा और कल्याण से जुड़ी योजनाओं को मजबूती मिलेगी।

सड़क और आधारभूत ढांचे का होगा विस्तार

अनुपूरक बजट में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के लिए ₹700.01 करोड़ का प्रावधान किया गया है। इस राशि का उपयोग सड़क निर्माण, पुलों तथा अन्य आधारभूत ढांचागत परियोजनाओं को गति देने में किया जाएगा।

वित्तीय अनुशासन पर सरकार का जोर

वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने सदन को भरोसा दिलाया कि प्रदेश की वित्तीय स्थिति पूरी तरह मजबूत है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश का राजकोषीय घाटा (फिसकल डेफिसिट) निर्धारित सीमा के भीतर है, जो सरकार के वित्तीय अनुशासन और बेहतर आर्थिक प्रबंधन का प्रमाण है। सरकार विकास कार्यों को गति देने के साथ-साथ वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

₹9.71 लाख करोड़ से अधिक हुआ राज्य का कुल बजट 

वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए उत्तर प्रदेश सरकार का मूल बजट ₹9,12,696.35 करोड़ था, जिसमें राजस्व व्यय ₹6,64,470.55 करोड़ तथा पूंजीगत व्यय ₹2,48,225.80 करोड़ निर्धारित किया गया था। अब ₹59,019.54 करोड़ के अनुपूरक बजट को शामिल किए जाने के बाद राज्य का कुल बजट बढ़कर ₹9,71,715.89 करोड़ हो जाएगा। इसमें राजस्व व्यय बढ़कर ₹6,81,870.05 करोड़ तथा पूंजीगत व्यय ₹2,89,845.84 करोड़ हो जाएगा। इससे स्पष्ट है कि सरकार ने अतिरिक्त संसाधनों का बड़ा हिस्सा विकास परियोजनाओं, आधारभूत संरचना और जनकल्याणकारी योजनाओं के विस्तार के लिए पूंजीगत निवेश पर केंद्रित किया है।

सेक्टरवार अनुपूरक बजट का बंटवारा

वित्तीय वर्ष 2026-27 के अनुपूरक बजट में सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए धनराशि का प्रावधान किया है। कुल ₹59,019.14 करोड़ की अनुपूरक मांग में सबसे अधिक ₹45,568.63 करोड़ (लगभग 77%) आर्थिक सेवाओं के लिए प्रस्तावित किए गए हैं, जिससे स्पष्ट है कि सरकार का प्रमुख फोकस आधारभूत संरचना, उद्योग, ऊर्जा, कृषि और विकास कार्यों पर है। इसके अलावा सामाजिक सेवाओं के लिए ₹9,707.74 करोड़ (लगभग 16%), सामान्य सेवाओं के लिए ₹633.19 करोड़ (लगभग 1%) तथा कर्ज एवं उधार संबंधी दायित्वों के लिए ₹3,110.02 करोड़ (लगभग 6%) की व्यवस्था की गई है। (फाइल फोटो)

Mangala Gauri Vrat 2026: 3 शुभ योगों में सावन का पहला मंगला गौरी व्रत आज, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त और नियम

Mangala Gauri Vrat 2026: सावन का महीना सिर्फ भगवान शिव की पूजा-अर्चना के लिए ही नहीं जाना जाता है। इस माह में जहां सोमवार का विशेष महत्व है, उसी तरह मंगलवार के दिन का भी विशेष स्थान है। सावन माह में आने वाले सभी मंगलवार को मंगला गौरी का व्रत किया जाता है। माना जाता है कि पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से मंगला गौरी व्रत से वैवाहिक जीवन सुखमय बनता है और रिश्तों में मधुरता आती है। इस दिन मां गौरी के साथ भगवान शिव और भगवान गणेश की भी पूजा की जाती है।

यह व्रत माता पार्वती की कृपा पाने और पति की लंबी उम्र के लिए किया जाता है। अविवाहित कन्याएं मंगला गौरी व्रत मनचाहा जीवनसाथी पाने के लिए करती हैं। साल 2026 में सावन माह का पहला मंगलवार आज है, इसलिए आज मंगला गौरी व्रत किया जा रहा है। पंचांग के अनुसार सावन के पहले मंगला गौरी व्रत में तीन शुभ योग बनने से यह दिन और भी पावन हो गया है।

3 शुभ योगों का संयोग

पंचांग के अनुसार, सावन का पहला मंगला गौरी व्रत कृष्ण पक्ष की षष्ठी तिथि को किया जाएगा, जो रात 10:03 बजे तक रहेगी। सावन के पहले मंगल गौरी व्रत पर एक साथ तीन शुभ योग बन रहे हैं। सर्वार्थ सिद्धि योग, अमृत सिद्धि योग और रवि योग बन रहे हैं। ये तीनों शुभ योग 4 अगस्त की रात 9:54 बजे से शुरू होकर 5 अगस्त की सुबह 5:45 बजे तक रहेंगे। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, ऐसे संयोग में पूजा-पाठ और भगवान का स्मरण करना शुभ माना जाता है। इसके अलावा सुबह से शाम 7:33 बजे तक धृति योग रहेगा और इसके बाद शूल योग शुरू होगा। वहीं रेवती नक्षत्र रात 9:54 बजे तक रहेगा, जिसके बाद अश्विनी नक्षत्र लग जाएगा।

मंगला गौरी व्रत शुभ मुहूर्त

मंगल गौरी के दिन ब्रह्म मुहूर्त सुबह 4:20 बजे से 5:02 बजे तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक है, जबकि सामान्य पूजा का समय सुबह 9:06 बजे से दोपहर 2:08 बजे तक माना गया है। जो लोग प्रदोष काल में पूजा करते हैं, वे शाम 7:10 बजे के बाद पूजा शुरू कर सकते हैं।

भद्रा और पंचक का रखें ध्यान

पहले मंगल गौरी व्रत के दिन भद्रा और पंचक दोनों का संयोग भी बन रहा है। भद्रा 4 अगस्त रात 10:03 बजे से शुरू होकर 5 अगस्त सुबह 5:45 बजे तक रहेगी। मान्यता है कि इस दौरान भद्रा स्वर्ग लोक में रहेगी, इसलिए इसका शुभ कामों पर नकारात्मक असर नहीं माना जाता। वहीं, चोर पंचक सुबह 5:44 बजे से रात 9:54 बजे तक रहेगा। परंपरा के अनुसार, इस दौरान कीमती सामान का थोड़ा ज्यादा ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।

5 साल मंगला गौरी व्रत करने की परंपरा

मंगल गौरी व्रत विवाहित कन्याएं शादी के बाद 5 साल तक यह व्रत करती हैं। इस व्रत से जुड़ी पुरानी परंपरा के अनुसार, शादी के बाद जब पहला सावन आता है, तो महिला को पहला मंगल गौरी व्रत अपने मायके में रखना चाहिए। इसके बाद अगले चार साल तक यह व्रत ससुराल में रखा जाता है। यानी शादी के बाद लगातार पांच साल तक इस व्रत को करने की परंपरा बताई जाती है।

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Raksha Bandhan 2026: इस साल क्या भद्रा के साये में मनाया जाएगा रक्षा बंधन का पर्व? भाई की तरक्की के लिए बहनें राखी बांधने से पहले करें ये उपाय

Raksha Bandhan 2026: रक्षा बंधन के पर्व का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। यह पर्व पूरे साल में आने वाले सभी उत्सव और त्योहारों में सबसे मासूम और प्यारा माना जाता है, क्योंकि ये भाई-बहन के बीच प्रेम और मधुरता का प्रतीक है। रक्षा बंधन का पर्व हर साल सावन माह की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन बहनें भाई की कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनके स्वस्थ, सुखी जीवन और दीर्घायु की कामना करती हैं। बदले में भाई अपनी बहन की रक्षा और हर मुश्किल घड़ी में उसके साथ खड़े रहने का वचन देता है।

रक्षा बंधन के पर्व की शुरुआत पौराणिक काल से जुड़ी हुई है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, देवासुर संग्राम के समय सुदर्शन चक्र के कारण श्री कृष्ण की उंगली कट गई थी, जिससे उनकी उंगली से खून निकलने लगा। द्रौपदी ने यह दृश्य देखा और तुरंत अपनी साड़ी का किनारा फाड़ कर उनकी उंगली में बांध दिया। भगवान कृष्ण द्रौपदी के इस स्नेह और समर्पण से भावुक हो गए। श्रीकृष्ण ने जीवन भर द्रौपदी की रक्षा का वचन दिया और जब द्रौपदी के सम्मान पर संकट आया, तब श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाकर अपना वचन निभाया। माना जाता है कि इस दिन बहनें राखी बांधने से पहले अगर एक उपाय कर लें, तो उससे भाइयों की तरक्की होती है। आइए जानें इस साल कब मनाया जाएगा राखी का त्योहार और क्या इस दिन रहेगा भद्रा का साया

कब है रक्षा बंधन ?

हिंदू पंचांग के अनुसार, इस साल सावन पूर्णिमा तिथि का आरंभ 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 9 मिनट पर होगा और इसका समापन 28 अगस्त को सुबह 9 बजकर 49 मिनट पर होगा। चूंकि 28 अगस्त को पूर्णिमा उदया तिथि में रहेगी। इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन का पर्व इसी दिन मनाया जाएगा। उदया तिथि के कारण 28 अगस्त को पूरे दिन त्योहार मनाया जा सकेगा।

रक्षाबंधन पर भद्रा का प्रभाव

शास्त्रों के अनुसार, भद्रा काल में रक्षा बंधन वर्जित माना गया है। राहत की बात यह है कि 28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन भद्रा नहीं रहेगी। हालांकि सावन पूर्णिमा पर 27 अगस्त को सुबह 9 बजकर 8 मिनट से रात 9 बजकर 32 मिनट तक भद्रा का प्रभाव रहेगा। लेकिन 28 अगस्त को पूर्णिमा उदया तिथि के साथ-साथ भद्रा रहित भी रहेगी।

राखी बांधने से पहले करें भगवान गणेश और विष्णु का पूजन

राखी बांधने से पहले भगवान गणेश और भगवान विष्णु का पूजन करना शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इससे पूजा में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं।

राखी बांधने का शुभ समय

28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन बहनें सुबह 5 बजकर 57 मिनट से सुबह 9 बजकर 48 मिनट के बीच अपने भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। इस अवधि को रक्षा सूत्र बांधने के लिए शुभ माना गया है। इसके अलावा बहनें सुबह 11 बजकर 56 मिनट से दोपहर 12 बजकर 48 मिनट के समय अभिजीत मुहूर्त में भी भाई की कलाई पर राखी बांध सकेंगी।

Solah Somwar Vrat 2026: आज से ही शुरू होंगे 16 सोमवार के व्रत, जानें इस व्रत के संकल्प से लेकर उद्यापन के नियम और क्या है प्रसाद बांटने की विधि

Solah Somwar Vrat 2026: आज से ही शुरू होंगे 16 सोमवार के व्रत, जानें इस व्रत के संकल्प से लेकर उद्यापन के नियम और क्या है प्रसाद बांटने की विधि

Solah Somwar Vrat 2026: सावन का महीना शुरू हो चुका है और आज इस माह का पहला सोमवार है। सावन के सोमवार का हिंदू धर्म में विशेष स्थान है। माना जाता है कि इस दिन व्रत और शिव पूजा करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। सावन के सोमवार उन भक्तों के लिए अहम माने जाते हैं, जो 16 सोमवार व्रत की इच्छा रखते हैं। सावन के सोमवार से 16 सोमवार व्रत भी शुरू होते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, 16 सोमवार व्रत खासतौर से मनोकामना पूर्ति, सुखी वैवाहिक जीवन, योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति, संतान सुख और परिवार की खुशहाली के लिए किया जाता है। शिव पुराण में बताया गया है कि इस व्रत की पूजा में कुछ विशेष नियमों का पालन करना शुभ माना जाता है, तभी व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त होता है। आइए जानें 16 सोमवार व्रत से जुड़े विशेष नियम

सोलह सोमवार व्रत में इस तरह करें संकल्प

आज से 16 सोमवार व्रत शुरू करने वाले भक्तों को सबसे पहले व्रत का संकल्प लेना चाहिए। संकल्प लेने के लिए स्नान व ध्यान करें। इसके बाद शिवजी के सामने हाथ में जल, बेलपत्र, अक्षत और फूल लेकर श्रद्धा व विश्वास के साथ लगातार 16 सोमवार का व्रत करने का संकल्प करें। भगवान शिव से प्रार्थना करें, हे प्रभु आप मुझे शक्ति दें। अगर मुझसे कोई गलती हो जाए तो उसके लिए क्षमा भी करें।

सोलह सोमवार व्रत विधि

सोलह सोमवार व्रत के लिए स्नान करें और स्वच्छ या सफेद वस्त्र धारण करें। पास के शिवालय में शिवलिंग का गंगाजल और शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक भी करें। अभिषेक के बाद बेलपत्र, धतूरा, आक के फूल, सफेद पुष्प, भस्म, चंदन और मौसमी फल अर्पित करें। पूजा में भगवान शिव के समक्ष पांच देसी घी के दीपक जलाएं। दीपक पूजा समाप्त होने तक जलता रहे, इसका विशेष ध्यान रखें। धूप और अगरबत्ती अर्पित करने के बाद ॐ नमः शिवाय मंत्र का कम से कम 108 बार जाप करें। इस व्रत में शिव चालीसा, रुद्राष्टक या सोलह सोमवार व्रत कथा का पाठ करना भी अत्यंत फलदायी माना जाता है।

तीन भागों में बांटे सोलह सोमवार व्रत का प्रसाद

सोलह सोमवार के व्रत में प्रसाद को तीन बराबर भागों में बांटने की परंपरा है। प्रसाद का पहला भाग गाय को, दूसरा भाग परिवार के सदस्यों के लिए और तीसरे भाग को स्वयं ग्रहण करना चाहिए। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ऐसा करने से सभी देवी-देवताओं को प्रसाद अर्पित हो जाता है और पुण्यफल की प्राप्ति होती है। व्रत के दौरान ब्रह्मचर्य का पालन करें और सुबह व प्रदोष काल में पूजा अवश्य करें।

17वें सोमवार को करते हैं 16 सोमवार व्रत का उद्यापन

16 सोमवार व्रत तभी संपूर्ण माना जाता है, जब इसका उद्यापन 17वें सोमवार को विधि विधान से किया जाए। पंडितों के अनुसार, सोलह सोमवार व्रत का उद्यापन सुबह 11 बजे तक कर लेना चाहिए। इस दिन विधि विधान के साथ पूजा अर्चना करें और हवन व तर्पण करें। इसके बाद ब्राह्मण भोज कराएं और दक्षिण देकर आशीर्वाद लें। इस तरह सोलह सोमवार व्रत का समापन होता है।

Sawan First Somwar 2026: सच्ची श्रद्धा के साथ आज दिन में इस समय करें भगवान शिव का जलाभिषेक, जानें विधि और जरूरी नियम

Sawan Shivratri 2026: सावन में कब मनाई जाएगी शिवरात्रि? जानिए सही तारीख, पूजा और जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

Sawan Shivratri 2026: सावन का महीना शुरू हो चुका है। भगवान शिव को समर्पित इस माह में कई प्रमुख व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। इनमें से एक है शिवरात्रि का पर्व। यूं तो शिवरात्रि हिंदू कैलेंडर के हर माह में कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को आती है, लेकिन सावन के महीने में आने वाले शिवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है। इस दिन श्रद्धालु कांवड़ में जल भरकर लाते हैं और अपने आराध्य भगवान शिव का जलाभिषेक करते हैं।

सावन शिवरात्रि, भगवान शिव की आराधना के लिए अत्यंत पवित्र और महत्वपूर्ण पर्व मानी जाती है। यह श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाई जाती है। इस दिन श्रद्धालु जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, व्रत और शिव पूजन करते हैं। इस दिन पूजा, व्रत और रुद्राभिषेक का फल कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन भगवान शिव की पूजा करने से कई ग्रह दोष भी शांत होते हैं। आइए जानें इस साल सावन शिवरात्रि कब है और पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।

सावन शिवरात्रि 2026 की तिथि व शुभ मुहूर्त

शिवरात्रि का पर्व सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। इस साल चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 11 अगस्त 2026, सुबह 04:54 बजे से हो रहा है। सावन कृष्ण चतुर्दशी तिथि का समापन 12 अगस्त 2026, रात 01:52 बजे होगा। उदयातिथि के अनुसार, शिवरात्रि का पर्व 11 अगस्त 2026, मंगलवार को मनाया जाएगा।

निशिता काल पूजा मुहूर्त : 11 अगस्त की रात 12:05 बजे से 12:48 बजे तक

जलाभिषेक का समय : 11 अगस्त सुबह 04:54 बजे से लेकर 12 अगस्त रात 01:52 बजे तक

चार प्रहर की पूजा का समय

रात्रि में भगवान शिव की चार प्रहर की पूजा का विशेष महत्व है:

प्रथम प्रहर : शाम 07:04 बजे से रात 09:45 बजे तक

द्वितीय प्रहर : रात 09:45 बजे से रात 12:26 बजे तक

तृतीय प्रहर : रात 12:26 बजे से सुबह 03:07 बजे तक (12 अगस्त)

चतुर्थ प्रहर : सुबह 03:07 बजे से सुबह 05:49 बजे तक (12 अगस्त)

सावन 2026 शिवरात्रि पूजा सामग्री

जल, कच्चा दूध, दही, शहद, गंगाजल, बेलपत्र, भांग, धतूरा, शमी के पत्ते, सफेद फूल, फल और भस्म।

सावन 2026 शिवरात्रि पूजा विधि

  • प्रातः काल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और व्रत का संकल्प लें।
  • शिवलिंग का जल और पंचामृत से अभिषेक करें।
  • बेलपत्र, धतूरा और फल-फूल चढ़ाकर “ॐ नमः शिवाय” या महामृत्युंजय मंत्र का निरंतर जाप करें।
  • शिव आरती करें व प्रसाद वितरित करें।
  • शिवलिंग पर तुलसी पत्र, केतकी का फूल, सिंदूर या हल्दी अर्पित न करें।

Grahan In August 2026: गर्भवती महिलाएं अगस्त में इन बातों का रखें ध्यान, दो ग्रहण से बच्चे पर पड़ सकता है बुरा असर

Surya Grahan 2026 August: हरियाली अमावस्या पर लगेगा साल का दूसरा और अंतिम सूर्य ग्रहण, करियर, सेहत और संपत्ति को लेकर 4 राशियां रहें सावधान

Surya Grahan 2026 August: सूर्य ग्रहण एक खगोलीय घटना है, जिसे धार्मिक और ज्योतिषीय रूप से भी अहम माना जाता है। साल 2026 का पहला सूर्य ग्रहण फरवरी में लगा था, जबकि दूसरा सूर्य ग्रहण सावन के महीने में हरियाली अमावस्या के दिन लगेगा। ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, यह ग्रहण चंद्रमा की राशि कर्क राशि में लगेगा, जिसका नकारात्मक प्रभाव मेष, कर्क, तुला और मकर राशि पर देखने को मिलेगा। खास बात ये है कि साल के दूसरे और अंतिम सूर्य ग्रहण के दौरान सूर्य, चंद्रमा, बुध और गुरु कर्क राशि में होंगे, जिससे चतुर्ग्रही योग का निर्माण होगा।

अंतिम सूर्य ग्रहण 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन आमवस्या तिथि 12 अगस्त को मध्यरात्रि 01:52 बजे से लेकर रात 11:06 बजे तक है। उदया तिथि के अनुसार, श्रावणी अमावस्या 12 अगस्त को होगी। इसी दिन साल का अंतिम सूर्य ग्रहण भी लगेगा। इसका समय रात में 9 बजकर 4 मिनट पर लगेगा। इसका समापन या मोक्ष 13 अगस्त को प्रात: 4 बजकर 25 मिनट पर होगा।

कब से कब तक रहेगा सूतक काल

ज्योतिष गणना के अनुसार, सूर्य ग्रहण का सूतक काल प्रारंभ समय से 12 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। इस आधार पर सूर्य ग्रहण का सूतक काल सुबह में 09:04 बजे से लगना चाहिए, लेकिन यह सूर्य ग्रहण भारत में दृश्य नहीं होगा। इस वजह इसका सूतक काल भारत में मान्य नहीं होगा।

सूर्य ग्रहण पर सतर्क रहें 4 राशियां 

सूर्य ग्रहण भारत में नहीं लग रहा है और उसका सूतक काल नहीं मान्य होगा। लेकिन ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, सूर्य ग्रहण का प्रभाव सभी 12 राशियों पर होगा। यह सूर्य ग्रहण 4 राशिवालों के लिए मुश्किल हो सकता है। सूर्य ग्रहण का अशुभ प्रभाव मेष, कर्क, तुला और मकर राशि के जातकों पर होने की आशंका है। इन राशियों के जातकों को 12 अगस्त से लेकर 12 जनवरी तक सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है। इन्हें अपनी सेहत, करियर, मान-सम्मान, धन-संपत्ति को लेकर सावधान रहना चाहिए। धन हानि, प्रॉपर्टी विवाद, बीमारी, अपयश, तनाव आदि से आप लोग परेशान हो सकते हैं।

सूर्य ग्रहण के दुष्प्रभावों से बचने के उपाय

इन चार राशि के लोगों को 12 अगस्त से 6 माह तक भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए। हर सोमवार के दिन आप भगवान शिव का जलाभिषेक करें। शिव जी की कृपा से सभी ग्रह, दोष और संकट दूर होंगे।

Sawan 2026 Rahu Gochar: मंगल के धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश करने वाला है राहु, 4 राशियों के जीवन में होगा धमाल और चमकेगी किस्मत

First Sawan Somwar 2026 Shubh Yog: 04 शुभ योगों में 03 अगस्त को होगा सावन के पहले सोमवार का व्रत, जानें जलाभिषेक और शिव पूजन का शुभ मुहूर्त

First Sawan Somwar 2026 Shubh Yog: यूं तो हर सप्ताह सोमवार का दिन भगवान शिव को समर्पित है। लेकिन सावन के महीने में आने वाले सोवमार का विशेष स्थान है। शिव भक्तों के लिए यह दिन अत्यंत पवित्र माना जाता है। इस दिन वे अपने आराध्य के लिए खास पूजा, उपवास और अनुष्ठान करते हैं। साल 2026 में सावन के महीने में 4 सोमवार का सौभाग्य बन रहा है। सावन के सोमवार व्रत करने वाले श्रद्धालु इस व्रत का उद्यापन चौथे और अंतिम सोमवार को करते हैं।

सावन के पहले सोमवार पर बने रहे हैं 4 शुभ योग

इस साल पहले सावन सोमवार पर 4 शुभ योग बन रहे हैं, जो लोगों के लिए शुभ फलदायी हैं। वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन का पहला सोमवार श्रावण कृष्ण पंचमी तिथि को है। उस दिन हंसराज योग, सुकर्मा योग, धृति योग और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेंगे।

हंसराज योग : पंच महापुरुष योगों में से एक होता है। इस समय गुरु ग्रह अपनी उच्च राशि कर्क में विराजमान हैं, जिसकी वजह से हंसराज योग बना है।

सर्वार्थ सिद्धि योग : पहले सावन सोमवार को सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। सर्वार्थ सिद्धि योग मध्यरात्रि 00:01 बजे से लेकर सुबह 05 बजकर 44 मिनट तक रहेगा। इस योग में पूजा, जप, तप, दान आदि का पुण्य फल प्राप्त होता है।

सुकर्मा योग : इस दिन सुकर्मा योग प्रात:काल से लेकर रात 9 बजकर 13 मिनट तक रहेगा। सुकर्मा योग के स्वामी देव इंद्र और ग्रह मंगल हैं। यह शुभता प्रदान करने वाला मंगलकारी योग है।

धृति योग : पहले सावन सोमवार पर धृति योग रात में 9:13 बजे से पूर्ण रात्रि तक है। इसमें नया बिजनेस, भूमि पूजन, मकान की नींव डालना, नई वस्तु की खरीदारी करना अच्छा रहता है।

चोर पंचक में सावन के पहले सोमवार का व्रत

पहले सावन सोमवार को पूरे दिन चोर पंचक रहेगा। उत्तर भाद्रपद नक्षत्र प्रात:काल से लेकर रात 10:00 पी एम तक है, उसके बाद रेवती नक्षत्र है।

पहला सावन सोमवार 2026 जलाभिषेक मुहूर्त

सावन के पहले सोमवार को जलाभिषेक के साथ ही शिव जी की पूजा की जाएगी।

ब्रह्म मुहूर्त: 04:19 ए एम से 05:01 ए एम

अभिजीत मुहूर्त: 12:00 पी एम से 12:54 पी एम

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 05:44 ए एम से 07:24 ए एम

शुभ-उत्तम मुहूर्त: 09:05 ए एम से 10:46 ए एम

चर-सामान्य मुहूर्त: 02:08 पी एम से 03:49 पी एम

लाभ-उन्नति मुहूर्त: 03:49 पी एम से 05:30 पी एम

अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त: 05:30 पी एम से 07:11 पी एम

Sawan 2026 Rudrabhishek Date: सावन में कराना चाहते हैं रुद्राभिषेक, इन तिथियों पर महादेव के अनुष्ठान का मिलेगा शुभ परिणाम

Har Ghar Tiranga 2026: यूपी में 5 करोड़ घरों तक पहुंचेगा अभियान, 14-15 अगस्त को सिनेमाघरों में राष्ट्रगीत-राष्ट्रगान

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रदेशवासियों से 'हर घर तिरंगा' अभियान में बढ़-चढ़कर सहभागिता का आह्वान करते हुए इस वर्ष 5 करोड़ घरों पर राष्ट्रीय ध्वज फहराने का लक्ष्य निर्धारित किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि 'हर घर तिरंगा' केवल एक अभियान नहीं, बल्कि राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय ध्वज के प्रति सम्मान और देश के गौरवशाली इतिहास से जन-जन को जोड़ने का राष्ट्रीय अभियान है।

इसे व्यापक जनभागीदारी के साथ जनआंदोलन का स्वरूप दिया जाना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने निर्देश दिए कि 14 और 15 अगस्त को प्रदेश के सभी सिनेमाघरों में राष्ट्रगीत एवं राष्ट्रगान का अनिवार्य रूप से प्रसारण सुनिश्चित किया जाए। 

 

शुक्रवार को एक उच्चस्तरीय बैठक में मुख्यमंत्री ने 'हर घर तिरंगा' अभियान, स्वतंत्रता दिवस तथा विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के आयोजनों की तैयारियों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश ने पिछले वर्षों में इस अभियान को अभूतपूर्व जनसहभागिता के साथ सफल बनाकर पूरे देश के सामने एक उदाहरण प्रस्तुत किया है। सभी सरकारी, अर्धसरकारी, सहायता प्राप्त विभाग/संस्थान, स्थानीय निकाय, शैक्षणिक संस्थान, ग्राम पंचायतें, राशन की उचित दर की दुकानें, औद्योगिक एवं व्यावसायिक प्रतिष्ठान तथा सामाजिक संगठन अपने भवनों पर तिरंगा फहराएं। उन्होंने कहा है कि समन्वित प्रयासों से अभियान अभूतपूर्व सफलता प्राप्त करेगा।

 

बैठक में बताया गया कि वर्ष 2022 में प्रदेश के 4.10 करोड़ से अधिक, वर्ष 2023 और 2024 में 4.50 करोड़ से अधिक तथा वर्ष 2025 में 4.76 करोड़ घरों पर तिरंगा फहराया गया था। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि राष्ट्रीय ध्वजों के निर्माण, उपलब्धता और वितरण की समुचित व्यवस्था समय से सुनिश्चित की जाए। स्वयं सहायता समूहों, खादी एवं ग्रामोद्योग संस्थाओं, एमएसएमई इकाइयों तथा स्थानीय उत्पादन केंद्रों को अभियान से जोड़ा जाए। राशन की दुकानों, ग्राम पंचायत भवनों, जन सेवा केंद्रों, तहसीलों, विकास खंड कार्यालयों, विद्यालयों, आंगनबाड़ी केंद्रों, डाकघरों, पेट्रोल पंपों तथा अन्य निर्धारित केंद्रों के माध्यम से आमजन को राष्ट्रीय ध्वज सहज उपलब्ध कराया जाए।

 

बैठक में बताया गया कि प्रदेशभर में तिरंगा रैली, तिरंगा संगीत समारोह, तिरंगा प्रदर्शनी, तिरंगा विषयक कलाकृतियों की प्रदर्शनी, तिरंगा थीम आधारित रंगोली, प्रकाश सज्जा तथा 'सेल्फी विद तिरंगा' जैसे कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। प्रमुख सरकारी भवनों, रेलवे स्टेशनों, बस अड्डों, हवाई अड्डों, सार्वजनिक स्थलों, प्रमुख बाजारों और चौराहों को तिरंगा थीम पर सजाया जाएगा। विद्यालयों और महाविद्यालयों में स्वतंत्रता सेनानियों पर आधारित चित्र प्रदर्शनी, वंदे मातरम का गायन, चित्रांकन प्रतियोगिताएं तथा अन्य राष्ट्रभक्ति आधारित गतिविधियां आयोजित की जाएंगी, जिससे युवा पीढ़ी स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास से जुड़ सके।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 9 अगस्त को काकोरी ट्रेन एक्शन दिवस तथा 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के सभी कार्यक्रम पूरे सम्मान, गरिमा और राष्ट्रभक्ति के भाव के साथ आयोजित किए जाएं। 9 से 15 अगस्त तक प्रदेशभर में स्वतंत्रता संग्राम से जुड़े सभी स्मारकों, स्मृति स्थलों और शहीद स्थलों पर विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। इन स्थलों की समुचित साफ-सफाई, रंगाई-पुताई, साज-सज्जा एवं प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों और अमर शहीदों के परिजनों को सम्मानित किया जाए। कार्यक्रमों में पुलिस बैंड की सहभागिता भी रहे, जिससे राष्ट्रभक्ति का वातावरण सृजित हो। 

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन आयोजनों से पूर्व पूरे प्रदेश में विशेष स्वच्छता अभियान चलाया जाए। स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानियों के योगदान को व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाया जाए। राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत सांस्कृतिक कार्यक्रमों, तिरंगा रैलियों, तिरंगा संगीत समारोहों तथा सामूहिक 'वंदे मातरम्' के माध्यम से प्रत्येक नागरिक को अभियान से जोड़ा जाए। ग्राम पंचायतों में अमृत सरोवरों और ग्राम सचिवालयों पर भी विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाएं। 

 

बैठक में 14 अगस्त को आयोजित होने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश के विभाजन की त्रासदी को केवल इतिहास के एक अध्याय के रूप में नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता को अक्षुण्ण बनाए रखने की प्रेरणा के रूप में नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। ऐसे कार्यक्रम आयोजित हों, जिनसे युवाओं को विभाजन की पीड़ा, लाखों लोगों के विस्थापन और उनके संघर्ष के वास्तविक इतिहास को जानने का अवसर मिले।

 

मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि 14 अगस्त को राजधानी लखनऊ सहित प्रत्येक जिला मुख्यालय पर विभाजन विभीषिका विषयक प्रदर्शनी आयोजित की जाए। प्रत्येक जनपद में नामित मंत्रिगण तथा जनप्रतिनिधियों की सहभागिता सुनिश्चित की जाए। पंजाबी, सिंधी और बंगाली सहित विभाजन की त्रासदी से प्रभावित परिवारों को आमंत्रित कर उनके अनुभव साझा कराए जाएं। बांग्लादेश से आए शरणार्थी परिवारों को भी कार्यक्रमों में सहभागी बनाया जाए तथा उनके साथ कैंडल मार्च आयोजित किए जाएं।

विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में परिचर्चाओं, संवादों तथा विचार गोष्ठियों के माध्यम से युवाओं को विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, उसके दुष्परिणामों और राष्ट्रीय एकता के महत्व से अवगत कराया जाए। अभियान के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए एनसीसी, एनएसएस, स्वयंसेवी संगठनों, व्यापार मंडलों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों तथा विभिन्न संचार माध्यमों का सहयोग लिया जाए, ताकि स्वतंत्रता पर्व के सभी आयोजन व्यापक जनभागीदारी के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हों।

Hariyali Teej 2026: 14 या 15 अगस्त, इस साल कब है हरियाली तीज? पंडित जी से जानें इस व्रत के नियम और महत्व

Hariyali Teej 2026: हरियाली तीज का व्रत हर साल सावन माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को किया जाता है। अखंड सौभाग्य और सुखी दांपत्य की कामना से किया जाने वाला यह महिलाओं का प्रमुख व्रत है। इस व्रत को अविवाहित कन्याएं सुयोग्य वर का आशीर्वाद पाने के लिए भी करती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पौराणिक काल में माता पार्वती ने भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की थी। तब भगवान शिव ने प्रसन्न होकर पाव्रती को अपनी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था। माता पार्वती की इसी घोर तपस्या के प्रतीक के रूप में हरियाली तीज का व्रत किया जाता है।

मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से व्रत और पूजन करने से अखंड सौभाग्य, सुख-समृद्धि और मनचाहे जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त होता है। अयोध्या के ज्योतिषाचार्य पंडित कल्कि राम ने न्यूज 18 को बताया, वर्ष 2026 में हरियाली तीज के दिन कई शुभ योग बनने से इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है। इस दिन शनिवार, सिद्ध योग और शिव योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है। शुभ योगों में पूजा-अर्चना करने से व्रत का फल कई गुना बढ़ जाता है।

हरियाली तीज 2026 तारीख और शुभ मुहूर्त

हिंदू पंचांग के अनुसार, श्रावण शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि 14 अगस्त 2026 को शाम 6:47 बजे से प्रारंभ होगी और 15 अगस्त 2026 को शाम 5:29 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर हरियाली तीज का व्रत और पूजन 15 अगस्त, शनिवार को किया जाएगा।

पूजा विधि

हरियाली तीज के दिन ब्रह्म मुहूर्त में स्नान कर स्वच्छ और विशेष रूप से हरे रंग के वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की प्रतिमा या चित्र स्थापित कर उन्हें गंगाजल, अक्षत, रोली, चंदन, पुष्प, बेलपत्र, धतूरा, फल और मिठाई अर्पित करें। पूजन के दौरान शिव-पार्वती की कथा सुनना या पढ़ना शुभ माना जाता है। शिव मंत्र और माता पार्वती के मंत्रों का जाप करें। परिवार की सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की प्रार्थना करें। अंत में आरती कर प्रसाद वितरित किया जाता है।

हरियाली तीज व्रत के नियम

  • इस व्रत में सुहाग सामग्री का दान भी शुभ माना जाता है।
  • हरियाली तीज पर क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहना चाहिए।
  • व्रत के दौरान सात्विक भोजन और पूजा-पाठ पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

हरियाली तीज का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि माता पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था, इसलिए यह पर्व अटूट प्रेम, समर्पण और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। उन्होंने बताया कि भारतीय संस्कृति में प्रत्येक पर्व का सीधा संबंध प्रकृति से है। सावन का महीना चारों ओर हरियाली लेकर आता है। यह पर्व प्रकृति, प्रेम, सौभाग्य और आध्यात्मिक ऊर्जा का संदेश देता है।

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Sawan Putrada Ekadashi 2026: संतान प्राप्ति के लिए कब किया जाएगा पुत्रदा एकादशी का व्रत, जानें श्रीहरि के साथ शिव कृपा पाने की सही तारीख

Sawan Putrada Ekadashi 2026: सावन का पवित्रा महीना शुरू हो चुका है। इसके साथ ही चारों भोलेनाथ के भक्तों के जयकारे भी गूंजने लगे हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सावन का महीना भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। इस माह में भगवान शिव और माता पार्वती को समर्पित कई व्रत और पर्व मनाए जाते हैं। सावन में नि:संतान दंपतियों को उम्मीद देने वाला एक उपवास भी किया जाता है। इस व्रत का नाम है श्रावण पुत्रदा एकादशी व्रत। यह व्रत संतान की इच्छा रखने वाले और संतान की शुभ की कामना करने वाली माताएं भी करती हैं। आइए जानें इस साल ये व्रत किस दिन किया जाएगा और इसमें पूजा का मुहूर्त क्या होगा?

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल 23 अगस्त को मध्यरात्रि 02:00 बजे सावन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि की शुरूआत हो रही है। इस तिथि का समापन 24 अगस्त को प्रात: 04:18 बजे होगा। उदयातिथि के आधार पर सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 23 अगस्त दिन रविवार को रखा जाएगा, लेकिन 24 अगस्त को भी यह व्रत रहेगा। 23 अगस्त को गृहस्थ लोग सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत रखेंगे, वहीं वैष्णव लोग सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत 24 अगस्त सोमवार को रखेंगे क्योंकि 23 अगस्त को हरि वासर का समापन सुबह 10:49 बजे होगा।

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 मुहूर्त

23 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04:26 बजे से लेकर प्रात: 05:10 बजे तक है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:58 बजे से लेकर दोपहर 12:49 बजे तक है। जबकि 24 अगस्त को ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04:27 बजे से प्रात: 05:11 बजे तक और अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:57 बजे से दोपहर 12:49 बजे तक है। 23 अगस्त को सुबह 07:32 बजे से लेकर दोपहर 12:24 बजे के बीच आप विष्णु पूजा कर सकते हैं, वहीं 24 अगस्त को विष्णु पूजा सुबह 05:55 बजे से 07:32 बजे और सुबह 09:09 बजे से 10:46 बजे के बीच कर सकते हैं।

सावन पुत्रदा एकादशी 2026 पारण समय

23 अगस्त को सावन पुत्रदा एकादशी का व्रत करने वाले श्रद्धालु 24 अगस्त को पारण दोपहर 01:41 बजे से शाम 04:16 पारण के बीच कर सकते हैं। वहीं, 24 अगस्त को व्रत रखने वाले लोग पारण 25 अगस्त को सुबह 05:55 पारण से 06:20 पारण के बीच कर सकते हैं।

August 2026 Festival List: सावन की फुहारों के बीच अगस्त में हर दिन मनेगा महादेव का पर्व, जानें पूरे महीने के व्रत और त्योहारों की लिस्ट