MP में 25 सितंबर से शुरू होगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा, CM मोहन यादव 351 बसों को दिखाएंगे हरी झंडी

MP में 25 सितंबर से शुरू होगी मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा, CM मोहन यादव 351 बसों को दिखाएंगे हरी झंडी

मध्यप्रदेश के नागरिकों को सुलभ, सुरक्षित, आधुनिक  एवं पर्यावरण अनुकूल सार्वजनिक परिवहन सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा प्रदेश सरकार बड़ा कदम उठाने जा रही है। परिवहन विभाग की महत्वाकांक्षी ‘मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा’ का 25 सितंबर 2026 को शुभारंभ होगा। भोपाल के दशहरा मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शुरुआती चरण में 351 बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना करेंगे। प्रदेश सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के विभिन्न शहरों के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करना, दैनिक यात्रियों को राहत पहुंचाना और पर्यावरण-अनुकूल सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देना है। मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रदेश में लगभग 1500 बसें चलना शुरू हो जाएंगी। 

 

दो श्रेणियों में शुरू होंगी बस सेवाएं

 

कार्यक्रम के दौरान 351 बसों को एक साथ हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसे दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इसमें 120 इंटरसिटी बसें हैं। ये बसें दो या दो से अधिक शहरों के बीच आवागमन को सुगम और तीव्र बनाएंगी। 231 इंट्रासिटी बसें शहरों के भीतर नागरिकों को सुरक्षित, सुलभ और सस्ती यात्रा सुविधा प्रदान करेंगी।

 

7 शहरों की 351 बसों को दिखाई जाएगी हरी झंडी

 

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा अंतर्गत प्रथम चरण में प्रदेश के 7 प्रमुख शहरों  की बसों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा। इसमें इदौर, भोपाल, जबलपुर, रीवा, देवास, कटनी और भिंड शामिल है। इंदौर में 145 बस, जिसमें 50 इंटरसिटी, 95 इंट्रासिटी,  भोपाल के लिए 106 बसें, जिसमें  23 इंटरसिटी, 83 इंट्रासिटी, जबलपुर के लिए 67 बसें, जिसमें  14 इंटरसिटी, 53 इंट्रासिटी। रीवा की 18 इंटरसिटी बस, देवास की 10 इंटरसिटी बस, कटनी की 3 और भिंड की  2 इंटरसिटी बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जाएगा।

 

लगभग 15,000 सार्वजनिक बसें की जाएंगी संचालित

 

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत वर्ष 2031 तक 75 प्रतिशत ग्राम पंचायतों को बस सेवा से जोड़कर ग्रामीण कनेक्टिविटी को नई मजबूती दी जाएगी। प्रदेशभर में लगभग 15,000 से अधिक आधुनिक सार्वजनिक बसें संचालित की जाएंगी। इससे प्रतिदिन 30 लाख से ज्यादा यात्रियों को सुरक्षित आवागमन की सुविधा प्रदान होगी। साथ ही 180 से अधिक आधुनिक बस स्टैंड्स, टर्मिनल्स और डिपो का कायाकल्प किया जाएगा। 

 

इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर 

 

प्रदेश सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण और कार्बन उत्सर्जन में कमी लाने के उद्देश्य से स्वच्छ ईंधन और इलेक्ट्रिक बसों के विस्तार पर विशेष जोर दिया जाएगा। 

 

 

इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के माध्यम से की जाएगी निगरानी

 

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा के अंतर्गत संचालित बसों की निगरानी इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS) के माध्यम से की जाएगी। इसके लिए मध्यप्रदेश यात्री परिवहन एण्ड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (MPYPIL) एवं उसकी 7 सहायक कंपनियों में अत्याधुनिक कमांड-कंट्रोल सेंटर स्थापित किए गए हैं। इन सेंटरों के माध्यम से बसों के संचालन, लोकेशन, समयबद्धता एवं अन्य महत्वपूर्ण गतिविधियों की रियल टाइम निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। इसके साथ ही सार्वजनिक बसों में महिला और बाल सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। इससे यात्री परिवहन व्यवस्था अधिक सुरक्षित, सुगम, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में भी मदद मिलेगी। सभी बसों को 07 सीसीटीवी कैमरों, पैनिक बटन और रियल-टाइम व्हीकल लोकेशन ट्रैकिंग (VLTD) सिस्टम से लैस किया जा रहा है। इसके अलावा, पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम (PIS), ड्राइवरों की तकनीकी ट्रेनिंग और त्वरित शिकायत निवारण तंत्र के जरिए सुरक्षित एवं समयबद्ध यात्रा सुनिश्चित की जाएगी। 

 

पीपीपी मॉडल के जरिए निजी ऑपरेटरों की सशक्त भागीदारी

जन-निजी भागीदारी (PPP) को गति देने के लिए पारदर्शी अनुबंध प्रणाली और प्रोत्साहन योजनाएं लागू की जाएगी। इस मॉडल से निजी बस ऑपरेटरों को राजस्व रिसाव रोकने, नॉन-फेयर रेवेन्यू (जैसे विज्ञापन व कार्गो सेवाएं) बढ़ाने और आधुनिक डिपो व टर्मिनलों के उपयोग की सुविधाएं मिलेंगी साथ ही प्रशासन का पूर्ण सहयोग भी मिलेगा। 

 

परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा

 

प्रदेश में सुगम यात्री परिवहन सेवा शुरू होने से परिवहन क्षेत्र में रोजगार और निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यात्री परिवहन के विस्तार से प्रदेश में बस संचालन, वाहन निर्माण, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सेवाओं और अन्य संबद्ध क्षेत्रों में निवेश की संभावनाएं बढ़ेंगी। इससे परिवहन क्षेत्र से जुड़े उद्योगों को प्रोत्साहन मिलने के साथ युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।

Ai+ Nova 2 Power 5G लॉन्च! 7000mAh बैटरी और 120Hz डिस्प्ले के साथ, जानें कीमत

Ai+ स्मार्टफोन ने अपनी Nova 2 सीरीज में नया मॉडल Nova 2 Power 5G भारत में लॉन्च कर दिया है। इस स्मार्टफोन में 7000mAh की बैटरी, MediaTek Dimensity 7100 चिपसेट और 120Hz का डिस्प्ले दिया गया है। इसकी बिक्री 24 सितंबर से Flipkart के जरिए शुरू होगी।

बता दें कि Ai+ Nova 2 Power को नई दिल्ली में आयोजित एक फैशन शो में पेश किया गया। इस दौरान कंपनी ने स्मार्टफोन के साथ अपने एथलीजर आउटफिट्स भी दिखाए। कंपनी इस फोन को “Design to Inspire. Power to Outlast” थीम के साथ पेश कर रही है। इसका रियर पैनल डुअल-टोन फिनिश (Blue Gold Fusion और Blue Fusion) में आता है।

Ai+ Nova 2 Power 5G: कीमत और उपलब्धता

Ai+ Nova 2 Power 5G की शुरुआती कीमत 15,999 रुपये है, जिसमें लागू बैंक ऑफर भी शामिल है। यह फोन दो कॉन्फिगरेशन 6GB RAM + 128GB स्टोरेज और 8GB RAM + 128GB स्टोरेज के साथ उपलब्ध होगा। बता दें कि इसकी पहली सेल गुरुवार, 24 सितंबर को रात 12 बजे Flipkart पर शुरू होगी।

Ai+ Nova 2 Power 5G: फीचर्स और स्पेसिफिकेशन्स

इस स्मार्टफोन में 120Hz रिफ्रेश रेट वाला 6.75-इंच का HD+ पंच-होल IPS डिस्प्ले है। इसमें 6nm मीडियाटेक डाइमेंसिटी 7100 प्रोसेसर लगा है और ज्यादा स्टोरेज के लिए इसमें माइक्रो-SD कार्ड लगाने की सुविधा भी है।

फोटोग्राफी के लिए, Nova 2 Power में 48MP का AI प्राइमरी कैमरा और उसके साथ 8MP का अल्ट्रा-वाइड कैमरा दिया गया है। जबकि सेल्फी और वीडियो कॉल के लिए इसमें 13MP का फ्रंट कैमरा भी है।

इसके अलावा फोन को पावर देने के लिए 7000mAh की बड़ी बैटरी दी गई है, जो 33W फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करती है। फोन को IP65 रेटिंग भी मिली है, जिससे यह धूल और पानी के छींटों से सुरक्षित रहता है।

Ai+ Nova 2 Power 5G में डुअल 5G SIM, Wi-Fi 6 और Bluetooth 5.4 जैसे कनेक्टिविटी फीचर्स मिलते हैं।

कंपनी के मुताबिक, यह फोन Blue Gold Fusion, Blue Fusion, Ocean Green, Deep Purple और Midnight Black इन पांच कलर ऑप्शन में उपलब्ध है।

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ओमप्रकाश राजभर का दावा: यूपी के चार टुकड़े होंगे, पूर्वांचल का सीएम बनेगा राजभर समाज का बेटा

ओमप्रकाश राजभर का दावा: यूपी के चार टुकड़े होंगे, पूर्वांचल का सीएम बनेगा राजभर समाज का बेटा

omprakash rajbhar

उत्तर प्रदेश के देवरिया में रविवार को सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) की सामाजिक समरसता रैली आयोजित की गई। इस रैली में कैबिनेट मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने आगामी चुनावों से पहले एक बड़ा सियासी दांव चलते हुए उत्तर प्रदेश के भविष्य और आरक्षण के मुद्दे पर तीखे बयान दिए।

 

करीब साढ़े तीन घंटे की देरी से पहुंचे सुभासपा प्रमुख राजभर ने मंच से हुंकार भरते हुए कहा कि आने वाले समय में उत्तर प्रदेश चार हिस्सों में बंटेगा। उन्होंने पुरजोर दावा किया कि यदि पूर्वांचल अलग राज्य बनता है, तो वहां राजभर समाज का कोई बेटा ही मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालेगा। उनके इस बयान को पूर्वांचल की राजनीति में एक नए समीकरण की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

आरक्षण और शिक्षा पर जोर

राजभर ने 27 प्रतिशत आरक्षण के भीतर हिस्सेदारी और इसके वर्गीकरण की मांग एक बार फिर उठाई। उन्होंने कहा कि 1993 से पिछड़ों को 27% आरक्षण मिल रहा है, लेकिन इसका फायदा सिर्फ कुछ चुनिंदा जातियों तक ही सीमित रह गया है। इस लाभ को समाज की हर पिछड़ी जाति तक पहुँचाने के लिए आरक्षण का बंटवारा बेहद जरूरी है।

 

उन्होंने बताया कि इस मांग को लेकर वे लखनऊ में पंचायत करने के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने भी अपना पक्ष रख चुके हैं, जिसके बाद केंद्र स्तर पर ‘रोहिणी आयोग’ का गठन भी हुआ था।

 

रैली के दौरान राजभर ने गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए आयुष्मान कार्ड, पेंशन योजनाओं और सरकारी कल्याणकारी स्कीमों का भी जिक्र किया। उन्होंने शिक्षा की अनिवार्यता पर जोर देते हुए कहा कि जब तक गरीब और पिछड़े वर्ग के बेटा-बेटी नहीं पढ़ेंगे, तब तक समाज का वास्तविक विकास संभव नहीं है।

झूठ की गूंज में कांग्रेस के युवराज का आचरण नारी शक्ति का अपमान : योगी आदित्यनाथ

झूठ की गूंज में कांग्रेस के युवराज का आचरण नारी शक्ति का अपमान : योगी आदित्यनाथ

Chief Minister Yogi Adityanath targeted Rahul Gandhi in Greater Noida

– ग्रेटर नोएडा में दो दिवसीय ‘प्रेरणा विमर्श-2026’ के समापन समारोह को मुख्यमंत्री योगी ने किया संबोधित

– मुख्यमंत्री योगी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना, बोले- देश को उनसे उम्मीद करना छोड़ देना चाहिए, ये पथभ्रष्ट और मार्ग से भटके हुए लोग

– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- समाज में भ्रम पैदा कर अव्यवस्था और अराजकता फैलाना इनका एकमात्र लक्ष्य

– मुख्यमंत्री योगी ने हामिद अंसारी पर भी साधा निशाना, बोले- भारत की समदृष्टि समझते तो हिंदू दृष्टि को नहीं कोसते

– मुख्यमंत्री योगी बोले- बीमारू राज्य से रेवेन्यू सरप्लस स्टेट बना यूपी, अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट हुआ तीन गुना

– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी, 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में सवा तीन करोड़ को काम

– मुख्यमंत्री योगी बोले- यूपी में 24 हजार से अधिक स्टार्टअप, इनमें आधे महिलाओं के हाथ, महिला वर्कफोर्स 12 से बढ़कर 36-37 फीसदी

– मुख्यमंत्री योगी ने कहा- अगले तीन-चार महीने में यूपी पुलिस में 50 हजार से अधिक होगी महिलाओं की संख्या

Chief Minister Yogi Adityanath : मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी और पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी पर निशाना साधा। राहुल गांधी का नाम लिए बिना उन्हें ‘कांग्रेस का युवराज’ बताते हुए कहा कि अपने झूठ की गूंज में उन्होंने जिस प्रकार का आचरण किया, वह पूरी नारी शक्ति का अपमान है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देश को ऐसे लोगों से उम्मीद करना छोड़ देना चाहिए। ये पथभ्रष्ट और मार्ग से भटके हुए लोग हैं, जिनका लक्ष्य समाज में भ्रम पैदा कर अव्यवस्था और अराजकता फैलाना है।

 

ग्रेटर नोएडा में दो दिवसीय ‘प्रेरणा विमर्श-2026’ के समापन समारोह में मुख्यमंत्री योगी ने पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी के वक्तव्य को दुर्भाग्यपूर्ण और डरावना बताया। उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर रहे व्यक्ति से पद की गरिमा के अनुरूप आचरण की अपेक्षा होती है। काश वह भारत की समदृष्टि को समझ पाते तो भारत, भारतीयता और हिंदू दृष्टि को नहीं कोसते। मुख्यमंत्री ने महिला सशक्तीकरण, युवाओं को रोजगार, स्टार्टअप और प्रदेश की अर्थव्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि बीमारू कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश अब रेवेन्यू सरप्लस स्टेट और देश का ग्रोथ इंजन बन चुका है।

 

नारी सशक्तीकरण भाषण से नहीं, काम से होगा

मुख्यमंत्री ने कहा कि नारी गरिमा की रक्षा और महिला सशक्तीकरण केवल भाषणों से नहीं होगा। सरकार ने योजनाओं में महिलाओं को प्राथमिकता दी है। देश में तीन करोड़ परिवारों को घरौनी के माध्यम से मकान का मालिकाना अधिकार दिया गया, जिसमें पहला अधिकार महिलाओं का है। 12 करोड़ परिवारों को एलपीजी कनेक्शन और 12 करोड़ घरों में शौचालय की सुविधा दी गई। यूपी में 54 हजार बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट सखी गांवों में बैंकिंग सेवाएं दे रही हैं।

 

उन्होंने झांसी के बलिनी मिल्क प्रोड्यूसर का उदाहरण देते हुए कहा कि 2019 में पांच महिलाओं से शुरू समूह से आज 62 हजार महिलाएं जुड़ी हैं। इसका टर्नओवर 115 करोड़ रुपए है और प्रत्येक महिला आठ से 10 हजार रुपए महीने कमा रही है। आगरा, काशी, गोरखपुर और लखनऊ में भी मिल्क प्रोड्यूसर काम कर रहे हैं। इनसे करीब चार लाख महिलाएं जुड़ी हैं।

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महिला पुलिस 10 हजार से बढ़कर 44 हजार

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 में यूपी पुलिस में केवल 10 हजार महिलाएं थीं, जिनकी संख्या अब 44 हजार हो गई है। अगले तीन-चार महीने में यह आंकड़ा 50 हजार के पार होगा। प्रदेश में महिला वर्कफोर्स की भागीदारी भी 12 प्रतिशत से बढ़कर 36-37 प्रतिशत हो गई है। डिजिटल एंटरप्रेन्योरशिप की नई योजना के तहत आठ हजार न्याय पंचायतों में से चार हजार में महिला उद्यमियों को जोड़कर प्रशिक्षण दिया जाएगा।

 

9.5 लाख सरकारी नौकरियां, सवा तीन करोड़ को एमएसएमई में काम

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत में सबसे बड़ी युवा शक्ति उत्तर प्रदेश के पास है और प्रदेश में 56 प्रतिशत युवा हैं। पिछले साढ़े नौ वर्ष में 9.5 लाख युवाओं को सरकारी नौकरी दी गई। 96 लाख एमएसएमई इकाइयों में सवा तीन करोड़ युवा काम कर रहे हैं। बेहतर सुरक्षा व्यवस्था के कारण प्रदेश को 50 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले। इनमें 15 लाख करोड़ रुपए से अधिक का निवेश धरातल पर उतरा और इससे 65 लाख से अधिक युवाओं को नौकरी मिली।

 

अब यूपी को कोई बीमारू राज्य नहीं कहता

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, प्रति व्यक्ति आय और बजट तीन गुना हुआ है। नौ-दस वर्ष पहले बीमारू कहा जाने वाला उत्तर प्रदेश आज रेवेन्यू सरप्लस स्टेट और भारत का ग्रोथ इंजन है। अब प्रदेश के सामने पहचान का संकट नहीं है। यह बदलाव विरासत के सम्मान और अपराध व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति से आया है।

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विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जो लोग पहले यूपी के सामने पहचान का संकट खड़ा करते थे, वे फिर दंगा, कर्फ्यू, समाज को बांटने, भेदभाव, अव्यवस्था और अराजकता का दौर लाना चाहते हैं।

 

120 से कम थे स्टार्टअप, अब 24 हजार से अधिक

मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले यूपी में 120 से भी कम स्टार्टअप थे, जबकि आज इनकी संख्या 24 हजार से अधिक है। इनमें करीब आधे महिलाओं द्वारा संचालित हैं। उन्होंने पंडित राम प्रसाद बिस्मिल, ठाकुर रोशन सिंह, चंद्रशेखर आजाद, नेताजी सुभाष चंद्र बोस और वीर सावरकर का उल्लेख करते हुए युवाओं से राष्ट्रीय नायकों से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए राष्ट्र प्रथम है। देश सुरक्षित है तो धर्म, उपासना पद्धति, जाति, परिवार और व्यक्ति भी सुरक्षित हैं। नारी और युवा शक्ति का स्वावलंबन ही उत्तर प्रदेश और भारत के स्वावलंबन का आधार बनेगा।

 

भूतकाल जानेंगे तभी भविष्य के सपने गढ़ेंगे

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन ने महर्षि अरविंद का उल्लेख करते हुए कहा कि जो समाज अपने भूतकाल के गौरव, वर्तमान की पीड़ा और भविष्य के सपनों को समझता है, वही उन्नति के मार्ग पर आगे बढ़ता है। आचार्य धर्मपाल की पुस्तक ‘द ब्यूटीफुल ट्री’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि युवाओं को अपने देश, संस्कृति और उपलब्धियों को जानकर भविष्य के सपने गढ़ने चाहिए।

 

2020 में शुरू हुई प्रेरणा विमर्श की यात्रा

संसद टीवी के संपादक श्याम किशोर ने कहा कि कृपा शंकर के मार्गदर्शन में 2020 में प्रेरणा विमर्श की यात्रा शुरू हुई। इसके तहत स्मारिका, पुस्तकें और ‘केशव संवाद’ प्रकाशित होते हैं। विषय आधारित प्रदर्शनी भी इसका प्रमुख हिस्सा है। समाज और राष्ट्रहित में सकारात्मक पत्रकारिता करने वाली एक महिला को हर वर्ष सम्मानित किया जाता है। उन्होंने बताया कि प्रेरणा विमर्श-2026 का विषय ‘उत्कर्ष नारी सम्मान, युवा स्वाभिमान’ है।

 

दीप प्रज्ज्वलन से हुआ समापन समारोह का शुभारंभ

मुख्यमंत्री योगी ने दीप प्रज्ज्वलित कर समारोह का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में ‘केशव संवाद’ और ‘प्रेरणा विचार’ की वैचारिक यात्रा पर वीडियो दिखाया गया और मुख्यमंत्री को दोनों पत्रिकाओं की प्रतियां सौंपी गईं। एक अन्य वीडियो में प्रदेश की नारी और युवा शक्ति की बदलती तस्वीर प्रस्तुत की गई।

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कार्यक्रम में ये रहे मौजूद

समारोह में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अखिल भारतीय प्रचारक प्रमुख स्वांत रंजन, गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. राणा प्रताप सिंह, प्रेरणा विमर्श के कार्यकारी अध्यक्ष वीके गुप्ता, अध्यक्ष अनिल त्यागी, डॉ. मनमोहन सिंह सिसोदिया, प्रेरणा शोध संस्थान की अध्यक्ष प्रीति दादू, सचिव मोनिका चौहान, गौतम बुद्ध नगर के जनप्रतिनिधि और स्वयंसेवक मौजूद रहे।

Vishwakarma Puja Kab Hai 2026: सिद्ध योग आज की जाएगी देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा की पूजा, जानें पूजा का शुभ मुहूर्त

Vishwakarma Puja Kab Hai 2026: विश्वकर्मा पूजा को विश्वकर्मा जयंती भी कहा जाता है। यह हिंदू धर्म का एक प्रमुख त्योहार है, जो देवताओं के शिल्पी भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है। भगवान विश्वकर्मा को ब्रह्मांड का पहला शिल्पकार, वास्तुकार और इंजीनियर माना जाता है। यह पर्व हर साल मुख्य रूप से 17 सितंबर कन्या संक्रांति के अवसर पर मनाया जाता है। इस दिन निर्माण कार्य से जुड़ी मशीनों, औजारों, गाड़ियों, कारखानों और इलेक्ट्रॉनिक्स की साफ-सफाई की जाती है और उनकी पूजा की जाती है। माना जाता है कि भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से व्यापार में उन्नति होती है, मशीनों में खराबी नहीं आती और कार्यक्षेत्र में सफलता मिलती है।

विश्वकर्मा पूजा 2026 सही तारीख

विश्वकर्मा की पूजा कन्या संक्रांति के दिन की जाती है। सूर्य देव जब कन्या राशि में प्रवेश करते हैं तो उस समय कन्या संक्रांति होती है। वैदिक पंचांग के अनुसार, सूर्य देव 17 सितंबर को कन्या राशि में प्रवेश करेंगे। कन्या में सूर्य का गोचर 17 सितंबर को सुबह 7:58 बजे होगा और इसी दिन कन्या संक्रांति मनाई जाएगी। इसलिए विश्वकर्मा पूजा भी 17 सितंबर गुरुवार को ही मनाई जाएगी।

विश्वकर्मा पूजा 2026 मुहूर्त

विश्वकर्मा पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7:58 बजे से होगा क्योंकि इस समय ही कन्या संक्रांति का क्षण है। सुबह 10:43 ए एम से लेकर दोपहर 01:48 पी एम के बीच भी पूजा कर सकते हैं।

इसमें आपको चर-सामान्य मुहूर्त 10:43 ए एम से 12:15 पी एम और लाभ-उन्नति मुहूर्त दोपहर 12:15 पी एम से 01:48 पी एम प्राप्त हो जाएगा। शाम के समय में शुभ-उत्तम मुहूर्त 04:52 पी एम से 06:24 पी एम तक रहेगा। कन्या संक्रांति का पुण्य काल भी सुबह 7:58 बजे से लेकर दोपहर 02:31 बजे तक रहेगा।

पंचांग के अनुसार, विश्वकर्मा पूजा के दिन भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि है। इस दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:33 ए एम से 05:20 ए एम तक है, वहीं दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11:51 ए एम से 12:40 पी एम तक है। विश्वकर्मा पूजा के दिन राहुकाल दोपहर में 01 बजकर 48 मिनट से दोपहर 03 बजकर 20 मिनट तक है।

विश्वकर्मा पूजा पर रहेंगे दो शुभ योग

इस साल विश्वकर्मा पूजा पर सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग विराजमान रहेंगे। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:07 ए एम से बनेगा और शाम 07:53 पी एम तक रहेगा। इस समय में ही रवि योग भी बन रहा है। ये दोनों ही शुभ योग फलदायी हैं।

विश्वकर्मा पूजा को प्रात:काल में विष्कम्भ योग बनेगा, जो दोपहर 12:50 पी एम तक है, उसके बाद से प्रीति योग का निर्माण होगा, जो रात्रि तक है। इस दिन अनुराधा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर शाम 07:53 पी एम तक है, फिर ज्येष्ठा नक्षत्र है।

Kanya Sankranti 2026 Date: सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश पर होगी कन्या संक्रांति कल, सूर्य दोष और करियर में उड़ान के लिए महापुण्यकाल में करें ये 4 उपाय

Kanya Sankranti 2026 Date: सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश पर होगी कन्या संक्रांति कल, सूर्य दोष और करियर में उड़ान के लिए महापुण्यकाल में करें ये 4 उपाय

Kanya Sankranti 2026 Date: ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को ग्रहों का राजा माना जाता है। ज्योतिष में सूर्य को पिता, अच्छी सेहत और करियर का कारक माना जाता है। सूर्य के राशि परिवर्तन का राशि चक्र की सभी 12 राशियों पर असर पड़ता है। यह ग्रह हर 30 दिनों में राशि परिवर्तन करता है। इस हिसाब से हर माह सूर्य का राशि परिवर्तन होता है, जिसे संक्रांति कहते हैं। सितंबर माह में सूर्य देव एक बार फिर राशि बदलने जा रहे हैं। इस बार सूर्य देव अपने मित्र बुध की राशि कन्या में प्रवेश करेंगे। इस समय अपनी उच्च राशि सिंह में गोचर कर रहे सूर्य देव जिस समय कन्या राशि में गोचर करेंगे, उस समय सूर्य की कन्या संक्रांति होगी।

कन्या संक्रांति के दिन लोग गंगा आदि पवित्र नदियों में स्नान के बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान पुण्य करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इससे पाप मिटते हैं और पुण्य लाभ होता है। इस दिन पितरों को जल से तर्पण देना शुभ माना जाता है। कहते हैं ऐसा करने से पितृ तृप्त होते हैं और आशीर्वाद प्रदान करते हैं, जिससे जीवन में खुशहाली आती है। इस साल कन्या संक्रांति कल यानी 17 सितंबर को होगी। इस बार कन्या संक्रांति के साथ विश्वकर्मा पूजा का भी संयोग बन रहा है। कन्या संक्रांति के दिन कुछ ज्योतिष उपायों को करने से कुंडली का सूर्य दोष मिट जाता है और करियर में आने वाली रुकावटें भी दूर होती हैं।

कन्या संक्रांति 2026 तारीख

वैदिक पंचांग क अनुसार, कन्या राशि में सूर्य का प्रवेश 17 सितंबर को सुबह में 7 बजकर 58 मिनट पर होगा। उस समय कन्या संक्रांति का क्षण होगा। कन्या संक्रांति के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बनेगा। इन दोनों ही शुभ योगों में किए गए कार्य सफल सिद्ध होंगे।

कन्या संक्रांति 2026 महापुण्य काल

कन्या संक्रांति का महापुण्य काल 2 घंटे 3 मिनट का होगा। महापुण्य काल सुबह में सुबह में 07 बजकर 58 मिनट से सुबह 10 बजकर 01 मिनट तक रहेगा।

वहीं कन्या संक्रांति का पुण्य काल सुबह में 07 बजकर 58 मिनट से दोपहर 02 बजकर 31 मिनट तक रहेगा। इस आधार पर पुण्य काल का कुल समय 6 घंटे 33 मिनट का होगा। जो लोग किसी कारणवश महापुण्य काल में स्नान और दान न कर पाएं, वे पुण्य काल में ये काम कर सकते हैं।

कन्या संक्रांति 2026 पर करें सूर्य दोष के उपाय

कन्या संक्रांति पर अपनी कुंडली के सूर्य दोष को दूर करने के लिए महापुण्य काल में स्नान करें, पितरों को जल अर्पित करें और सूर्य देव को जल से अर्घ्य दें। इसके लिए एक लोटे में जल भरकर उसमें लाल रंग के फूल, लाल चंदन और थोड़ा सा गुड़ डालें। ओम सूर्य देवाय नम: मंत्र का जाप करते हुए भगवान भास्कर को अर्पित करें। फिर आदित्य हृदय स्तोत्र का पाठ और आरती करें।

कन्या संक्रांति पर सूर्य के शुभ प्रभाव की प्राप्ति के लिए सूर्य से संबंधित वस्तुओं का दान करें। सामर्थ्यानुसार गुड़, गेहूं, लाल चंदन, लाल रंग के वस्त्र, लाल फूल, तांबे के बर्तन आदि का दान किसी ब्राह्मण को कर सकते हैं।

सूर्य देव के बीज मंत्र ॐ घृणि: सूर्याय नम: का जाप लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से कर सकते हैं।

कन्या संक्रांति के अवसर पर अपने माता पिता और घर के वरिष्ठ लोगों की सेवा करें। पिता तुल्य किसी व्यक्ति की सेवा करके आशीर्वाद लें, आपकी उन्नति होगी।

Jitiya Kab Hai 2026: अपनी संतान की खुशहाली के लिए माताएं इस दिन रखेंगी जीतिया व्रत, जानें इस निर्जला व्रत की तारीख, मुहूर्त और पारण समय

Jitiya Kab Hai 2026: अपनी संतान की खुशहाली के लिए माताएं इस दिन रखेंगी जीतिया व्रत, जानें इस निर्जला व्रत की तारीख, मुहूर्त और पारण समय

Jitiya Kab Hai 2026: जितिया व्रत को जीवित्पुत्रिका व्रत या जिउतिया व्रत के नाम से भी जाना जाता है। यह व्रत आश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को किया जाता है। जीतिया व्रत हिंदू धर्म के सबसे कठिन और प्रभावशाली व्रतों में से एक माना जाता है क्यों इसमें व्रत 24 घंटे से अधिक समय तक निर्जला उपवास करती हैं। माताएं यह व्रत अपनी संतान की लंबी आयु, उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि के लिए करती हैं। यह पर्व विशेष रूप से बिहार, झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश और नेपाल के तराई क्षेत्रों में बहुत श्रद्धा से मनाया जाता है।

जीतिया व्रत तीन दिवसीय पर्व है, जिसकी शुरुआत सप्तमी तिथि को नहाय-खाय से होती है। अगले दिन यानी अष्टमी को निर्जला उपवास होता है और नवमी के दिन इस व्रत का पारण किया जाता है। छठ पर्व की तरह इसमें भी कठोर नियमों और अनुष्ठानों का पालन किया जाता है। इस दिन गन्धर्व राजकुमार जीमूतवाहन की पूजा की जाती है। साथ ही चील और सियारिन की प्रतीक आकृतियों का पूजन करने की परंपरा है।

जितिया 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल जितिया व्रत के लिए जरूरी आश्विन कृष्ण अष्टमी तिथि का प्रारंभ 3 अक्टूबर को सुबह में 7 बजकर 59 मिनट पर हो रहा है। यह तिथि अगले दिन 4 अक्टूबर को सुबह 5 बजकर 51 मिनट तक मान्य रहेगी। प्रदोष काल के पूजा मुहूर्त के आधार पर जितिया का व्रत 3 अक्टूबर दिन शनिवार को रखा जाएगा।

जितिया 2026 मुहूर्त

इस साल जितिया व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त 04:38 ए एम से लेकर 05:26 ए एम तक रहेगा। यह समय स्नान के लिए सबसे उत्तम होता है। उस दिन का शुभ समय यानि अभिजीत मुहूर्त 11 बजकर 46 ए एम से दोपहर 12 बजकर 34 मिनट तक रहेगा।

जितिया के दिन सूर्यास्त शाम को 6 बजकर 5 मिनट पर होगा। जितिया की प्रदोष पूजा शाम 06:05 बजे से की जाएगी। निशिता मुहूर्त रात में 11 बजकर 46 मिनट से देर रात 12 बजकर 35 ए एम तक है।

वरीयान योग और आर्द्रा नक्षत्र में होगा जितिया 2026 व्रत

इस साल जितिया के दिन वरीयान योग और आर्द्रा नक्षत्र रहेगा। वरीयान योग प्रात:काल से लेकर दोपहर 03 बजकर 21 मिनट तक रहेगा, उसके बाद से परिघ शुरू होगा। वरीयान एक शुभ योग हैं, इसके स्वामी धन के देवता कुबेर हैं। जितिया पर आर्द्रा नक्षत्र पूरे दिन है, जो प्रात:काल से लेकर मध्य रात्रि 01 बजकर 29 ए एम तक है।

जितिया 2026 पारण समय

जितिया का निर्जला व्रत सूर्योदय से लेकर अगले दिन सूर्योदय तक चलता है। ऐसे में जितिया का व्रत 3 अक्टूबर को सुबह 06:15 ए एम से प्रारंभ होगा और 4 अक्टूबर को 06:15 ए एम तक चलेगा। जितिया व्रत का पारण 4 अक्टूबर को सुबह 06:15 ए एम के बाद होगा।

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Anant Chaturdashi 2026 Date: हिंदू धर्म में गणेश उत्सव बहुत धूमधाम से मनाया जाता है। भाद्रपद माह शुक्ल चतुर्थी के दिन भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र गणेश भगवान धरती पर अपने भक्तों के बीच आते हैं। इसे गणेश चतुर्थी पर्व के नाम से जाना जाता है। बप्पा 10 दिन अपने भक्तों के बीच अतिथि बन कर रहते हैं और अनंत चतुर्दशी के दिन वापस अपने धाम लौट जाते हैं। लोग गणेश जी का विसर्जन करने से पूर्व उनसे अगले साल फिर आने का निवेदन करते हैं। ताकि उनके शुभ चरणों के आगमन से उनके जीवन में खुशहाली, शुभता और उन्नति आए।

हालांकि, भक्त अपनी सामर्थ्य और श्रद्धा के अनुसार गणेश जी का विसर्जन डेढ़ दिन, तीसरे दिन, पांचवे दिन, सातवें दिन और दसवें दिन करते हैं। 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव का समापन अनंत चतुर्दशी के दिन गणेश जी की मूर्तियों के विसर्जन के साथ होता है। पंचांग के अनुसार, भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को अनंत चतुर्दशी मनाते हैं। इस साल अनंत चतुर्दशी के दिन रवि योग बन रहा है। रवि योग में किए गए कार्य शुभ फलदायी होते हैं।

अनंत चतुर्दशी 2026 तारीख

वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर को रात 11 बजकर 18 मिनट पर शुरू हो रही है और इस तिथि का समापन 25 सितंबर को रात 11 बजकर 6 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर अनंत चतुर्दशी 25 सितंबर दिन शुक्रवार को है।

अनंत चतुर्दशी 2026 श्री हरि की पूजा का शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा करने की विधान है। उस दिन पूजा के लिए आपको 16 घंटे 55 मिनट का शुभ मुहूर्त प्राप्त होता है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 6 बजकर 11 मिनट से लेकर रात 11 बजकर 6 मिनट तक है।

अनंत चतुर्दशी 2026 पर रवि योग और शूल योग

इस साल अनंत चतुर्दशी पर रवि योग सुबह में 06 बजकर 11 मिनट से प्रारंभ होगा और सुबह 11 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। इस योग में सूर्य का प्रभाव होने से सभी दोष मिट जाते हैं। उस दिन शूल योग सुबह से लेकर दोपहर 02 बजकर 51 मिनट तक है, उसके बाद से गण्ड योग बन रहा है। शतभिषा नक्षत्र प्रात:काल से लेकर सुबह 11 बजकर 22 मिनट तक रहेगा। उसके बाद से पूर्व भाद्रपद नक्षत्र है।

गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त

अनंत चतुर्दशी पर सुबह में गणेश विसर्जन का समय 6 बजकर 11 मिनट से सुबह 10 बजकर 42 मिनट तक है। इसमें सुबह के चर, लाभ और अमृत मुहूर्त शामिल हैं।

अपराह्न के समय शुभ चौघड़िया मुहूर्त दोपहर में 12 बजकर 13 मिनट से दोपहर 01 बजकर 43 मिनट तक है। वहीं चर चौघड़िया मुहूर्त शाम में 04 बजकर 44 मिनट से शाम 06 बजकर 14 मिनट तक है।

रात के समय में गणेश विसर्जन का मुहूर्त 9 बजकर 14 मिनट से रात 10 बजकर 43 मिनट तक है। देर रात चौघड़िया मुहूर्त 12:13 ए एम से लेकर 26 सितंबर को 04:42 ए एम तक है। इसमें शुभ, अमृत और चर मुहूर्त शामिल हैं।

Parivartini Ekadashi 2026 Rules: गणेश उत्सव के बीच 22 सितंबर को होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें इस दिन बप्पा को मोदक चढ़ाने का क्या है नियम

Parivartini Ekadashi 2026 Rules: गणेश उत्सव के बीच 22 सितंबर को होगा परिवर्तनी एकादशी का व्रत, जानें इस दिन बप्पा को मोदक चढ़ाने का क्या है नियम

Parivartini Ekadashi 2026 Rules: भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि को गणेश भगवान अपने भक्तों के बीच आते हैं और 10 दिन तक रहने के बाद अनंत चतुर्दशी के दिन वापस लौट जाते हैं। इस बीच भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को परिवर्तनी एकादशी का व्रत किया जाता है। इस साल गणेश उत्सव 14 सितंबर से शुरू हो चुका है और 25 सितंबर तक मनाया जाएगा। इससे पहले 22 सितंबर को परिवर्तनी एकादशी का व्रत किया जाएगा। ऐसे भक्तों में इस बात को लेकर दुविधा रहती है कि परिवर्तनी एकादशी के दिन गणेश भगवान को किस चीज का भोग लगाना चाहिए? बप्पा के प्रिय मोदक चावल के आटे से बनते हैं और एकादशी के दिन चावल तो क्या व्रत करने वाले भक्त कोई उपवास करते हैं। आइए जानें गणपति बप्पा को उस दिन सामान्य मोदक या अनाज से बनी मिठाई का भोग लगाया जाए या नहीं?

गणेश उत्सव के दौरान कब है परिवर्तिनी एकादशी?

साल 2026 में गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी, जबकि अनंत चतुर्दशी और गणपति विसर्जन का मुख्य दिन 25 सितंबर रहेगा। यानी दस दिनों तक गणपति स्थापना रखने वाले घरों और पंडालों में 22 सितंबर को भी बप्पा विराजमान होंगे। पंचांग के अनुसार परिवर्तिनी एकादशी की तिथि 21 सितंबर की रात करीब 8 बजे से शुरू होकर 22 सितंबर की रात 9:43 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के नियम के अनुसार एकादशी का व्रत 22 सितंबर, मंगलवार को रखा जाएगा। व्रत का पारण 23 सितंबर की सुबह किया जाएगा।

एकादशी के दिन गणपति को क्या भोग लगाएं?

महाराष्ट्र में लोकप्रिय उकड़ीचे मोदक मुख्य रूप से चावल के आटे से तैयार किए जाते हैं। वहीं कई जगह गेहूं का आटा, मैदा, सूजी या बेसन इस्तेमाल करके भी मोदक बनाए जाते हैं। मगर एकादशी का व्रत रखने वाले भक्त इस दिन अन्न का सेवन नहीं करते हैं। इसलिए एकादशी व्रत करने वाले भक्त बप्पा को अर्पित इस भोग को प्रसाद के रूप में ग्रहण नहीं कर सकते। गणेश भगवान को भोग लोग अपनी परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं के आधार पर अर्पित करते हैं। इसलिए मोदक अर्पित करने को लेकर कोई कठोर नियम नहीं हैं। एकादशी व्रत करने वाले भक्तों के लिए फलाहारी भोग रखना सबसे सरल विकल्प है।

परिवर्तिनी एकादशी पर गणपति को कौन-कौन से भोग लगाएं?

  • केला, सेब, अमरूद और दूसरे मौसमी फल
  • नारियल
  • मखाना
  • काजू, बादाम, अखरोट और दूसरे सूखे मेवे
  • दूध से बनी ऐसी मिठाइयां जिनमें अनाज न हो
  • मावा, नारियल और मेवों से तैयार मोदक
  • मिश्री और सूखे मेवों से बने फलाहारी नैवेद्य
  • नारियल, मावा और ड्राई फ्रूट्स से बिना अनाज वाला मोदक तैयार किया जा सकता है
  • साबूदाना, राजगिरा या सिंघाड़े के आटे से भी मोदक बनाए जा सकते हैं।

एकादशी पर पहले गणपति की पूजा करें या भगवान विष्णु की?

पूजा की शुरुआत गणेश वंदना से करने की परंपरा व्यापक रूप से प्रचलित है। इसलिए सुबह स्नान आदि से निवृत्त होकर पहले गणपति बप्पा का स्मरण और पूजन किया जा सकता है। गणपति को दूर्वा, फूल, फल और फलाहारी नैवेद्य अर्पित करें। इसके बाद भगवान विष्णु की पूजा कर एकादशी व्रत का संकल्प लिया जा सकता है। भगवान विष्णु को पीले फूल, तुलसी, फल और पंचामृत अर्पित करें। एकादशी के दिन तुलसी दल नहीं तोड़ते हैं। इसलिए तुलसी एक दिन पहले ही तोड़कर रख लेना बेहतर माना जाता है।

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Budh Uday 2026: अपनी उच्च राशि कन्या में हुआ बुध का उदय, 4 राशियों को मिलेगा भाग्य का साथ और करियर भरेगा तरक्की की उड़ान

Budh Uday 2026: ग्रहों के राजकुमार बुध का ज्योतिष शास्त्र में अहम स्थान है। यह ग्रह जातक के जीवन में बुद्धि, वाणी, व्यापार और तर्क का कारक माना जाता है। कन्या बुध ग्रह की उच्च राशि मानी जाती है। यह ग्रह जब अपनी उच्च राशि में विराजमान होता है, इसका असर बहुत शुभ और प्रभावशाली माना जाता है। पंचांग एवं ज्योतिषीय गणना के अनुसार, बुद्धि, तर्क, वाणी और व्यापार के कारक बुध देव का अपनी उच्च राशि कन्या में उदय हो चुका है। ऐसे में कन्या राशि में बुध का उदय ज्योतिषीय दृष्टि से महत्वपूर्ण घटना माना जाता है। बुध की मजबूत स्थिति का संबंध बुद्धि, विश्लेषण क्षमता, व्यापारिक समझ, वाणी और निर्णय क्षमता से जोड़ा जाता है। हालांकि किसी पर इसका वास्तविक प्रभाव उसकी जन्मकुंडली में बुध की स्थिति और अन्य ग्रहों के प्रभाव पर निर्भर करता है। बुध के शुभ प्रभाव को बढ़ाने के लिए भगवान गणेश की पूजा करें, उन्हें दूर्वा अर्पित करें और “ॐ बुं बुधाय नमः” मंत्र का जाप करें।

बुध उदय की तारीख और समय

पंचांग के अनुसार 14 सितंबर 2026 को बुध ग्रह रात 2 बजकर 52 मिनट पर कन्या राशि में उदय हुए हैं। कन्या राशि बुध की स्वराशि होने के साथ-साथ उनकी उच्च राशि भी मानी जाती है। ऐसे में कन्या राशि में बुध का उदय ज्योतिष की दृष्टि से विशेष महत्व रखता है।

कन्या राशि : इस राशि के जातकों के लिए बुध का उदय विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जा सकता है। करियर में नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं और कार्यक्षेत्र में आपकी समझदारी के साथ निर्णय लेने की क्षमता की सराहना हो सकती है। नौकरीपेशा लोगों को तरक्की या बेहतर अवसर मिलने के योग बन सकते हैं।

मकर राशि : मकर राशि वालों के लिए बुध उदय आर्थिक और पेशेवर मोर्चे पर सकारात्मक बदलाव ला सकता है। लंबे समय से अटके काम गति पकड़ सकते हैं। नौकरी में नई जिम्मेदारी मिलने की संभावना बन सकती है। कारोबारियों को नए संपर्कों का लाभ मिल सकता है और व्यापार विस्तार की योजना आगे बढ़ सकती है।

सिंह राशि : बुध का उदय सिंह राशि के जातकों के लिए करियर में प्रगति के नए रास्ते खोल सकता है। आपकी बातचीत और नेतृत्व क्षमता का फायदा कार्यक्षेत्र में मिल सकता है। नई नौकरी की तलाश कर रहे लोगों को अच्छी खबर मिल सकती है। व्यापार करने वालों को नए क्लाइंट या लाभदायक डील मिल सकती है।

वृश्चिक राशि : बुध का उदय इनके लिए भी शुभ परिणाम देने वाला रह सकता है। कार्यक्षेत्र में आपकी मेहनत रंग ला सकती है और वरिष्ठ अधिकारियों का सहयोग मिल सकता है। कारोबार में नई रणनीति बनाने और उसे लागू करने का अच्छा समय मिल सकता है। आर्थिक स्थिति में भी धीरे-धीरे सुधार के संकेत बन सकते हैं।

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