वोट चोरी के खिलाफ जन आंदोलन जारी रहेगा : राहुल

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने वोट चोरी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जनआंदोलन जारी रखने का ऐलान करते हुए कहा है कि जब तक मुख्य चुनाव आयुक्त इस्तीफा नहीं देते तथा चुनाव व्यवस्था में सुधार नहीं होता तब तक युवा पीछे नहीं हटेंगे और यह जन आंदोलन चलता रहेगा।

श्री गांधी ने सोमवार को यहां विशेष संवाददाता सम्मेलन में यह घोषणा करते हुए कहा कि दिल्ली को किले में तब्दील कर दिया गया है और लोगों को राजधानी पहुंचने से रोका जा रहा है, आंदोलनकारी को पीटा जा रहा है और इसे साफ है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी सरकार ज्ञानेश कुमार को बचा रही है। उन्होंने दावा किया कि पुलिसकर्मी भी मौजूदा हालात से परेशान हैं और उनमें से कई विपक्ष के आंदोलन को सही मानते हैं। उनका कहना था कि सच्चाई उनके साथ है और वे न थकेंगे, न रुकेंगे और लड़ते रहेंगे।

उन्होंने कहा कि पुलिस, आईटीबीपी, सीआरपीएफ, जनता और विपक्षी दल एक तरफ हैं, जबकि दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और ज्ञानेश कुमार हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आरएसएस और भाजपा से जुड़े लोग महिलाओं और युवाओं के खिलाफ हिंसा कर प्रदर्शनकारियों को निशाना बना रहे है। उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार के करीब 200 अधिकारी उनके संपर्क में हैं और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) तथा विदेश मंत्रालय के भीतर से उन्हें सूचनाएं लगातार मिल रही हैं। उन्होंने कहा कि मतदाताओं के अधिकार छीने जाने पर लोग सवाल पूछ रहे हैं।

Also Read : मास्को का ग्लोबल डिजिटल फोरम हुआ संपन्न

श्री गांधी ने बताया कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और उन्होंने लोकतंत्र तथा चुनाव की निष्पक्षता पर गंभीर चिंता जताते हुए भारत के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। मुख्य न्यायाधीश ने जवाब देते हुए याचिका दायर करने को कहा है। इंडिया गठबंधन के नेता अब मिलकर उच्चतम न्यायालय जाकर याचिका दायर करेंगे। लोगों से जन आंदोलन में जुटने की अपील करते हुए उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा में विश्वास रखने वाले सभी दलों के लोग इस लड़ाई में शामिल होंगे। जब तक संविधान की रक्षा, मुख्य चुनाव आयुक्त का इस्तीफा, चुनाव व्यवस्था में सुधार और देश के लोगों को न्याय नहीं मिलता आंदोलन जारी रहेगा।

कांग्रेस नेता ने कहा कि पहले दिन विपक्षी नेताओं को चुनाव आयोग जाते समय रोका गया और बस में बैठाया गया, दूसरे दिन जंतर-मंतर जाते समय भी उन्हें रोका गया और धक्का-मुक्की हुई, जबकि तीसरे दिन विपक्षी नेताओं ने राजघाट पर प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि अब विपक्ष उच्चतम न्यायालय जा रहा है।

उन्होंने युवाओं से हर दिन लोकतंत्र और संविधान की रक्षा की लड़ाई जारी रखने, किसी से डरे बिना आंदोलन से पीछे नहीं हटने का आह्वान किया और कहा कि यह आंदोलन भगवान शिव का तांडव और शिव की बारात की तरह लोक कल्याण के लिए है इसमें कुछ भी पहले से तय नहीं होता और इसमें कोई भी शामिल हो सकता है।

Pic Credit : UNI

दिल्ली में प्रदर्शन पर वर्ल्ड मीडिया:NYT बोला- राजधानी किले में तब्दील, विरोध को दबाना मुश्किल, अल-जजीरा ने लिखा- सरकार के लिए सबसे गंभीर चुनौती

भारत में SIR को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मामले को दुनियाभर के मीडिया संस्थानों को प्रमुखता से कवर किया गया है।

NYT – सरकार के लिए सत्ता बनाए रखने के तरीके कमजोर पड़े अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स लिखता है कि भारत में एक समय कमजोर पड़ चुका विपक्ष अब फिर सक्रिय होता दिखाई दे रहा है। विपक्षी दल युवाओं के आंदोलन से बनी राजनीतिक जगह का फायदा उठाने की कोशिश कर रहे हैं। शनिवार को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र की राजधानी एक किले में तब्दील हो गई। भारतीय अधिकारियों ने जरूरत से ज्यादा ताकत का इस्तेमाल किया, तो देश के युवाओं ने भी उतने ताकतवर तरीके से इसका विरोध किया। मोदी समर्थक पहले विरोधियों के प्रदर्शन को कमजोर बताकर या ‘देशद्रोही’ कहकर उनका विरोध कम करने की कोशिश करते रहे हैं। लेकिन इस आंदोलन में समाज के अलग-अलग वर्गों के लोग शामिल हैं। इससे प्रदर्शनकारियों को उसी तरीके से निशाना बनाना सरकार के लिए मुश्किल हो रहा है। वॉशिंगटन पोस्ट – मोदी और चुनाव आयोग के खिलाफ गुस्सा बढ़ा अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट ने लिखा कि भारत में युवाओं के विरोध-प्रदर्शन के बीच प्रधानमंत्री मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ गुस्सा बढ़ रहा है। वोटर लिस्ट में बदलाव के विरोध में आंदोलन कर रहे युवाओं ने दिल्ली में प्रदर्शन का ऐलान किया था, लेकिन पुलिस ने जंतर-मंतर पहुंचने से पहले ही कई नेताओं, विपक्षी सांसदों और छात्र कार्यकर्ताओं को हिरासत में ले लिया। पुलिस ने दिल्ली में सुरक्षा बढ़ाई, जगह-जगह बैरिकेडिंग की और वाहनों की जांच की। यह आंदोलन ऐसे समय तेज हुआ है, जब इससे पहले पेपर लीक के मुद्दे पर हुए युवा प्रदर्शनों के बाद जुलाई में शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था। CNN- सरकार ही नहीं CJP के लिए भी बड़ी परीक्षा अमेरिकी अखबार CNN लिखता है कि कई हफ्तों तक धरने और मार्च चलने के बाद जुलाई में धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया था। यह मोदी सरकार के लिए एक राजनीतिक झटका था। विपक्षी दल भी सरकार को इस तरह का झटका नहीं दे पाए थे।अब मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ हो रहा प्रदर्शन CJP के लिए एक परीक्षा है। पार्टी यह देखना चाहती है कि क्या शिक्षा मंत्री के इस्तीफे के लिए अपनाई गई उसकी सफल रणनीति को देश की चुनाव व्यवस्था जैसे बड़े मुद्दे पर भी दोहराया जा सकता है। साउथ चाइना पोस्ट- भारत में चुनाव प्रक्रिया पर सवाल हॉन्गकॉन्ग के अखबार साउथ चाइना पोस्ट ने लिखा वोटर लिस्ट में करीब 13 करोड़ नाम हटाए जाने की खबर के बाद विरोध तेज हुआ है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वोटर लिस्ट में बदलाव से भाजपा को फायदा पहुंच सकता है। शनिवार को दिल्ली में प्रदर्शन रोकने के लिए हजारों पुलिस और पैरामिलिट्री जवान तैनात किए गए, कई मेट्रो स्टेशन और बाजार बंद रहे और 2,000 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया। रिपोर्ट ने इस विरोध को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अब तक की गंभीर राजनीतिक चुनौतियों में से एक बताया है। अल जजीरा – PM मोदी के लिए अब तक की सबसे गंभीर चुनौती अल जजीरा ने विरोध प्रदर्शन को लेकर लिखा है कि ये PM मोदी और उनकी सरकार के लिए अब तक की सबसे गंभीर चुनौतियों में से एक हैं। पिछले हफ्ते इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के बाद विरोध और तेज हो गया। रिपोर्ट में बताया गया था कि दो चुनाव आयुक्तों ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के वोटर लिस्ट में किए गए बदलावों पर सवाल उठाए थे। इन बदलावों के चलते वोटर लिस्ट से करीब 13 करोड़ नाम हटा दिए गए थे। भाजपा का कहना है कि चुनावों में उसकी सफलता मोदी की लोकप्रियता और भारत की आर्थिक तरक्की को दिखाती है। पार्टी ने विपक्ष पर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया है। —————————- यह खबर भी पढ़ें… CJP का दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम: कहा- प्रदर्शन की इजाजत नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे कॉकरोच जनता पार्टी ने दिल्ली पुलिस को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। उसने कहा कि जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तारीख नहीं मिली तो फिर आंदोलन करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

लोकतंत्र का रण-क्षेत्र

यह सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी है कि सभी हित-धारकों से संवाद कर वह अधिकतम सहमति बनाने का प्रयास करे, ताकि लोकतंत्र वोट के अलावा किसी अन्य तरह के शक्ति-प्रदर्शन का रण क्षेत्र ना बन जाए।

कॉकरोच प्रतिरोध को रोकने के लिए राष्ट्रीय राजधानी की किलेबंदी और आंदोलनकारियों पर सख्त कार्रवाई से ऐसा गतिरोध खड़ा हो रहा है, जिसके परिणाम के बारे में अभी अनुमान लगाना कठिन है। चूंकि इस जन आंदोलन के समानांतर विपक्षी दल भी मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को रद्द करने, और हाल में हुए चुनावों को रद्द करने की मांग को लेकर आंदोलन चला रहे हैं, अतः राजनीतिक संकट अधिक गंभीर हो गया है। स्पष्टतः जनमत के एक बड़े हिस्से का चुनावों की पवित्रता पर यकीन नहीं रहा, नतीजतन उसके मन में निर्वाचित सरकारों की वैधता पर प्रश्न खड़े लगे हैं।

इसके खिलाफ हो रहे प्रतिरोध के दमन की कोशिशें इन सवालों को और गंभीर रूप देंगी। लोकतांत्रिक देशों में अक्सर ऐसी स्थितियां दीर्घकालिक अस्थिरता का कारण बनती हैं। दुर्भाग्यपूर्ण है कि नरेंद्र मोदी सरकार ऐसी आशंकाओं के प्रति लापरवाह बनी हुई है। इस सूरत में सुप्रीम कोर्ट सार्थक हस्तक्षेप कर सकता था, लेकिन एसआईआर के सवाल पर बार-बार गुजारिश लेकर वहां जाने वाले वरिष्ठ वकील अब यह कहने लगे हैं कि वहां से राहत की कोई उम्मीद नहीं बची। कुछ अधिवक्ताओं ने तो यह सवाल उठा दिया है कि क्या नागरिकों के मौलिक अधिकारों की रक्षा के नजरिए से न्यायपालिका प्रासंगिक रह गई है? इन संदेहों और सवालों के जल्द जवाब नहीं ढूंढे गए, तो संवैधानिक व्यवस्था के अवरोध-ग्रस्त हो जाने की स्थिति बन सकती है।

अतः उचित होगा कि सत्ता पक्ष अपने संसदीय बहुमत और चुनाव/ उप-चुनावों में मिल रही जीत के आधार पर अत्यधिक आश्वस्त ना रहे। उसे भारत में खड़े हो रहे संकट को वैश्विक स्तर पर जन आंदोलनों से स्थापित सत्ता ढांचों को मिल रही चुनौतियों के व्यापक संदर्भ में देखना चाहिए। सत्ता में होने के नाते यह उसकी जिम्मेदारी है कि सभी हित-धारकों से संवाद कर वह अधिकतम सहमति बनाने का प्रयास करे, ताकि लोकतंत्र वोट के अलावा किसी अन्य शक्ति-प्रदर्शन का रण क्षेत्र ना बन जाए। उसे याद रखना चाहिए कि लोकतंत्र में ना सिर्फ राजनीतिक दल, बल्कि नागरिक समाज एवं जन संगठन भी समान महत्त्व के हितधारक होते हैं।

जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले केजरीवाल, संजय सिंह समेत कई आप नेता हिरासत में

मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर शनिवार को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया।

हिरासत में लिए गये नेताओं में आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज और विधायक दुर्गेश पाठक भी शामिल हैं।

आप विधायक कुलदीप कुमार ने आज दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और आप सांसद संजय सिंह को पुलिस मोदी सरकार के आदेश पर हिरासत में लेकर जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंच रही थी और इसी दौरान पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया।

Also Read : हिरासत में लिए जाने के बाद ममता ने द्वारका नॉर्थ थाने में धरना शुरू किया

उन्होंने कहा, ”याद रखना, मोदी जी, ज्ञानेश कुमार को इस्तीफा देना पड़ेगा।” उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।

आप के राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी अनुराग ढाँडा ने कहा “पिछले डेढ़ घंटे से केजरीवाल और हम सबको दिल्ली पुलिस बस में घुमा रही है। इनको पता ही नहीं कि जाना कहाँ है या फिर दिल्ली के किसी थाने में केजरीवाल जी को ले जाने की हिम्मत नहीं हो रही?”

श्री संजय सिंह ने कहा “पिछले डेढ़ घंटे से दिल्ली पुलिस यहाँ से वहाँ घूम रही है। अरविंद केजरीवाल को किस थाने में ले जाना है दिल्ली पुलिस को नहीं पता? ग़ज़ब मजाक चल रहा है।

Pic Credit : UNI

सीजेपी के प्रदर्शन पर पुलिस की सख्त कार्रवाई, कई नेता हिरासत में

कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे सहित अन्य मांगों में शनिवार को राजधानी दिल्ली के जंतर मंतर पर पहुंचने की आशंका को देखते हुए दिल्ली पुलिस तथा अन्य सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय स्तर के कई नेताओं माकपा के एमए बेबी, तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी, आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल और सैकड़ों की संख्या में प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले लिया।

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रमुख नेताओं अभिजीत दीपके, सौरभ दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने के बाद इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डे पर हिरासत में लिया गया। दिल्ली पुलिस ने बार्डर सहित कई इलाकों में पहरा सख्त करते हुए कई जगह पर बैरिकेडिंग लगा दी और सुबह से ही यातायात पर कड़ी पाबंदियां लागू कर दी गईं।

वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने और स्थिति पर निगरानी रखने के लिए प्रमुख चौराहों पुलिस बल तैनात किया गया है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने कनॉट प्लेस, मंडी हाउस, जंतर-मंतर, पटेल चौक और मध्य दिल्ली के अन्य हिस्सों में यातायात जाम और रूट डायवर्जन की चेतावनी देते हुए एडवाइजरी जारी की। पुलिस की सख्ती के बावजूद बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जगह जगह पहुंचे। इनमें मिंटो ब्रिज, दिल्ली रेलवे स्टेशन, प्रभावित चौराहों और मार्गों में अशोक रोड-जंतर-मंतर रोड गोल चक्कर, टॉलस्टॉय मार्ग-जनपथ क्रॉसिंग, जय सिंह रोड-संसद मार्ग क्रॉसिंग, रेल भवन गोल चक्कर, गोल डाकखाना और विंडसर प्लेस शामिल हैं।

पुलिस ने सीजेपी संस्थापक सर्वश्री दीपके, दास और रांका को राष्ट्रीय राजधानी में तब हिरासत में ले लिया जब वे मुंबई से यहां आए हवाई जहाज से उतरने वाले थे। दिल्ली पुलिस ने उनको विमान के भीतर से अपनी हिरासत में ले लिया। इस घटना के बाद पार्टी ने सोशल मीडिया पर बताया कि इन नेताओं के हिरासत में लिए जाने के बाद संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे शनिवार को जंतर-मंतर पर होने वाले प्रदर्शन का नेतृत्व करेंगे।

श्री दीपके ने एक पूर्व रिकार्डेड मैसेज से यह जानकारी देते हुए कहा कि शीर्ष नेतृत्व की हिरासत के बावजूद यह प्रदर्शन जारी रहेगा तथा श्री कुमार के इस्तीफे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को वापस लेने की मांग पर आंदोलन पूरी दृढ़ता से आगे बढ़ाया जाएगा। इस बीच यह भी जानकारी सामने आई कि श्री दीपके की दादी का निधन हो गया। पार्टी ने एक बयान जारी कर कहा कि नेताओं की इस तरह की गई हिरासत कार्यकर्ताओं के हौसलों को नहीं डिगा सकती और यह लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के लिए एक निर्णायक संघर्ष है।

बयान में कहा गया जब राज्य सत्ता लोकतांत्रिक असंतोष को दबाने के लिए बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियों का सहारा लेती है, तो लोकतंत्र को बचाने के लिए जनता को स्वयं कमान संभालनी होगी । इसके अलावा खुफिया एजेंसियों के सूत्रों के अनुसार, शनिवार सुबह एक संयुक्त अभियान के तहत दिल्ली और गुरुग्राम पुलिस ने गुरुग्राम के एक आवासीय फ्लैट से चर्चित यूट्यूबर ध्रुव राठी को हिरासत में लेकर अज्ञात स्थान पर भेज दिया है। श्री राठी ऐसे वीडियोज के लिए जाने जाते हैं जिनमें केंद्र सरकार की कठोर आलोचना की जाती है।

इस विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए मध्य दिल्ली और उसके आसपास के इलाकों में सुरक्षा बलों और पुलिसकर्मियों को भारी संख्या में तैनात किया गया है। निर्धारित प्रदर्शन स्थल के पास एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों को पुलिस द्वारा हिरासत में लेकर बसों में भरकर अन्य स्थानों पर ले जाया गया। सुरक्षा उपायों के तहत दिल्ली पुलिस अधिनियम की धारा 65 के अंतर्गत बड़े पैमाने पर कार्रवाई करते हुए अब तक हजारों लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है। दिल्ली पुलिस ने सीजेपी के इस प्रदर्शन की अनुमति देने से यह कहते हुए इनकार कर दिया था कि पार्टी द्वारा प्रस्तुत सूचना कोई औपचारिक आवेदन नहीं थी, क्योंकि नियमों के अनुसार जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए कम से कम 10 दिन पहले आवेदन देना अनिवार्य होता है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने भी सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासन को दिल्ली पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने और राजधानी की ओर प्रदर्शनकारियों के आने को रोकने के लिए एहतियाती कदम उठाने के निर्देश दिए थे। एहतियात के तौर पर अधिकारियों ने दिल्ली के कुछ हिस्सों में इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदियां लगाई हैं, बाजारों और मेट्रो स्टेशनों को बंद रखने के आदेश दिए हैं तथा शहर में आने वाली कई ट्रेनों को रद्द कर दिया है। दिल्ली के लोकप्रिय दिल्ली हाट से छात्रों की भीड़ का नेतृत्व करने की कोशिश कर रही वामपंथी छात्र नेता नेहा बोरा को भी “सरफ़रोशी की तमन्ना” कविता गाते हुए देर दोपहर हिरासत में ले लिया गया।

ममता बनर्जी और उनके सांसदों और समर्थकों का एक समूह प्रतिबंध का उल्लंघन करने के कारण हिरासत में लिए जाने से पहले अपने साउथ एवेन्यू स्थित आवास के बाहर तख्तियां लेकर धरने पर बैठा था। ममता बनर्जी ने एक पुलिस वाहन में ले जाए जाते समय संवाददाताओं से कहा देश में क्या चल रहा है, सबको पता है । दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी ने शनिवार को विपक्ष पर अपना हमला तेज करते हुए राहुल गांधी और अरविंद केजरीवाल सहित अन्य नेताओं पर देश में तनाव भड़काने की कोशिश करने का आरोप लगाया। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि सरकार उनके द्वारा अशांति भड़काने के प्रयासों से सख्ती से निपटेगी।

उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्षी नेता बार-बार की चुनावी हार के बाद हताश होकर काम कर रहे हैं और चेतावनी दी कि पार्टी तथा उसके समर्थक उनके इन प्रयासों का विरोध करेंगे। उन्होंने कहा भारत सरकार आपके द्वारा तनाव पैदा करने के लिए किए जा रहे प्रयासों से सख्ती से निपटेगी । कांग्रेस ने सत्तारूढ़ पार्टी और सरकार पर राष्ट्रीय राजधानी को “किले” में तब्दील करने का आरोप लगाया, जिसके तहत पार्टी के महासचिव जयराम रमेश ने ‘एक्स’ पर लिखा राष्ट्रीय राजधानी को एक किले में बदल दिया गया है, जहाँ हर तरफ सशस्त्र सुरक्षाकर्मी तैनात हैं ।कांग्रेस अध्यक्ष एवं राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने मोदी सरकार पर आरोप लगाया है कि सरकार से सवाल करने वालों को हिरासत में लेकर उनकी आवाज दबायी जा रही है और देश को ‘खामोश लोकतंत्र’ में बदला जा रहा है।

Also Read : यूपीआई पेमेंट के लिए अब मोबाइल निकालने की जरूरत नहीं

श्री खरगे ने सोशल मीडिया एक्स पर कहा कि युवाओं, छात्रों, वकीलों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, किसान संगठनों के नेताओं, यूट्यूबरों और कंटेंट क्रिएटरों सहित सरकार से सवाल करने वाले सभी लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है। उन्होंने कहा “भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की कायरता आज पूरी तरह सामने आ गयी है। हिरासत, गिरफ्तारियां, जेल, लाठियां और पैलेट भी भारत के लोगों को रोक नहीं सकते। स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही युवा देश की नियति तय करने में अग्रणी भूमिका निभाते रहे हैं । कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि उनकी पार्टी एकजुट विपक्ष के साथ मिलकर इस तानाशाही शासन के खिलाफ पूरी ताकत से लड़ती रहेगी। भारत की आजादी के लिए खून बहाने वाली कांग्रेस लोकतंत्र, संविधान और प्रत्येक भारतीय के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रखेगी। समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर निशाना साधते हुये कहा कि जनता की आवाज को ताकत के बल पर दबाने की कोशिश सरकार की बड़ी भूल साबित होगी।

श्री यादव ने ‘एक्स’ पर कहा किसी के रोकने से नहीं रुकेगा, अब दिल्ली में देश जुटेगा । उन्होंने कहा कि देश की युवा ऊर्जा उनके साथ है। भाजपा सरकार अगर यह समझ रही है कि वह ताकत के बल पर जनता को रोक लेगी, तो यह उसकी और भी बड़ी भूल साबित होगी। श्री यादव ने कहा कि ‘जंतर-मंतर’ अब केवल एक जगह का नाम नहीं, बल्कि नई चेतना और जागरण का प्रतीक बन गया है। पुलिस ने सुबह ही जंतर-मंतर पर आयोजित प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के शीर्ष नेताओं समेत कई नेताओं को हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए गए नेताओं में माकपा महासचिव एमए बेबी, पूर्व मुख्यमंत्री एवं केरलम विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष पिनराई विजयन, केरलम के पूर्व वित्त मंत्री केएन. बालगोपाल, राज्यसभा सांसद जॉन ब्रिटास, मणिकंतन वी. गोविंदान, श्रीमती, वृंदा करात, के के शैलजा और पी राजीव शामिल हैं।

श्रीमती करात ने फेसबुक पेज पर लिखा मोदी और उनकी सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि भारत के लोग उठ खड़े हुए हैं और वे उन्हें रोक नहीं सकते। दिल्ली का दिल उसके सभी लोगों का है। ये दबाने वाले तरीके हमें नहीं रोक पाएंगे! चलो जंतर-मंतर की ओर!”

केरलम भवन से बाहर निकलते ही पुलिस ने वामपंथी नेताओं को जंतर-मंतर की ओर मार्च करने से रोक दिया और उन्हें हिरासत में ले लिया। शुरुआत में पुलिस ने श्री विजयन, श्री ब्रिटास और श्री केएन बालगोपाल को छोड़कर अन्य नेताओं को हिरासत में लिया था लेकिन जब ये तीनों नेता जंतर-मंतर की ओर बढ़ने लगे तो पुलिस के साथ उनकी तीखी बहस हुई और पुलिस ने उन्हें भी हिरासत में ले लिया। हिरासत में लिए जाने के दौरान मीडिया से बात करते हुए श्री विजयन ने इस कार्रवाई को ‘लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया। उन्होंने कहा कि नागरिकों से उनकी सरकार चुनने का अधिकार छीना जा रहा है और 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि यह काम मुख्य चुनाव आयुक्त ने सरकार के इशारे पर किया है और सरकार अब उन्हें बचाने के लिए गैर-कानूनी तरीके अपना रही है लेकिन यह विरोध आज खत्म नहीं होगा। श्री विजयन ने कहा कि भारत देश कोई पुलिस राज्य नहीं, बल्कि एक लोकतांत्रिक देश है और सत्ताधारी दल के मन में लोकतंत्र के प्रति कोई सम्मान न होने के कारण ऐसी कार्रवाई की जा रही है।

वहीं, सांसद जॉन ब्रिटास ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे। इसी बीच, सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने सुप्रीम कोर्ट क्षेत्र में शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान वकीलों के खिलाफ बल प्रयोग किए जाने और उनकी हिरासत की खबरों पर गंभीर चिंता व्यक्त की है। एसोसिएशन ने विशेष रूप से महिला अधिवक्ताओं सहित वरिष्ठ और युवा वकीलों की कथित हिरासत का मुद्दा उठाया है। उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत को दिए गए एक ज्ञापन में एसोसिएशन ने हस्तक्षेप की मांग करते हुए हिरासत में लिए गए वकीलों की सुरक्षा और उनके ठिकाने का पता लगाने का आग्रह किया है। इसके साथ ही, बिना किसी कानूनी आधार के रोके गए वकीलों को तत्काल कानूनी सहायता प्रदान करने, उनकी रिहाई सुनिश्चित करने और पूरी घटना की निष्पक्ष जांच के बाद उचित कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है।

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने जा रहे आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल समेत पार्टी के कई नेताओं को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया है। हिरासत में लिए गए नेताओं में आप के राज्यसभा सांसद संजय सिंह, दिल्ली के पूर्व मंत्री सौरभ भारद्वाज और विधायक दुर्गेश पाठक भी शामिल हैं।आप विधायक कुलदीप कुमार ने आज दिल्ली पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल और आप सांसद संजय सिंह को पुलिस मोदी सरकार के आदेश पर हिरासत में लेकर जा रही है। उन्होंने कहा कि पार्टी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन करने पहुंच रही थी और इसी दौरान पुलिस ने नेताओं को हिरासत में लिया।

Pic Credit : UNI

Digital India: 35,000 गांवों में हाई-स्पीड नेटवर्क के लिए मोदी सरकार का मास्टर प्लान! खर्च होंगे ₹15,000 करोड़

Govt To Spend ₹15000 Crore Telecom Connectivity: दूरदराज के इलाकों में नेटवर्क की पहुंच बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने गुरुवार को ‘इंडिया मोबाइल कांग्रेस (IMC) 2026’ में घोषणा की कि सरकार देश के लगभग 35,000 गांवों में टेलीकॉम टावर लगाने के लिए ₹12,000 करोड़ से ₹15,000 करोड़ के बीच खर्च कर रही है।

संचार मंत्री ने स्पष्ट किया कि जिन इलाकों में टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर व्यापारिक दृष्टिकोण से फायदे का सौदा नहीं है, वहां सरकार को खुद आगे आकर निवेश करना पड़ रहा है ताकि कोई भी क्षेत्र कनेक्टिविटी से अछूता न रहे।

जहां फायदा नहीं, वहां सरकार खुद करेगी निवेश

मंत्री सिंधिया ने इंफ्रास्ट्रक्चर शेयरिंग और इंटर-ऑपरेबिलिटी पर जोर देते हुए कहा, ‘हर क्षेत्र रिटर्न या मुनाफा देने वाला नहीं हो सकता। कई दूरदराज के इलाकों में पहुंच एक बड़ी चुनौती है, जहां निजी कंपनियां मुनाफा न होने के कारण नेटवर्क नहीं लगा पातीं। ऐसे क्षेत्रों में सरकार का आगे आना अनिवार्य है और हमने यही काम किया है।’

ग्राहकों को ध्यान में रखकर स्पेक्ट्रम रिफार्मिंग

संचार मंत्री ने कहा कि सरकार स्पेक्ट्रम के बेहतर और सही इस्तेमाल के लिए ‘स्पेक्ट्रम रिफार्मिंग’ पर काम कर रही है। इससे मौजूदा स्पेक्ट्रम का इस्तेमाल ग्राहकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए किया जाएगा।

हाईवे की तरह बनेगा टेलीकॉम नेटवर्क

नेविगेशन और नेटवर्क कनेक्टिविटी को मजबूत करने के लिए ‘मिडिल माइल’ इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण पर बल दिया गया। सिंधिया ने सरकार की भूमिका की तुलना हाईवे निर्माण से करते हुए कहा, ‘जैसे सरकार का काम हाईवे बनाना है, वैसे ही टेलीकॉम में हमारा काम ‘मिडिल माइल’ तैयार करना है। इसके बाद हमारा अगला कदम यह सुनिश्चित करना है कि लोग इस नेटवर्क हाईवे का सही और प्रभावी ढंग से इस्तेमाल कर सकें।’

भारतनेट और 4G सैचुरेशन स्कीम का विस्तार

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम के तहत सरकार ने ₹1.40 लाख करोड़ का बजट तय किया है। इसका मकसद केवल ग्राम पंचायतों तक ही नहीं, बल्कि सीधे गांवों और घरों तक ब्रॉडबैंड कनेक्शन पहुंचाना है।

इससे पहले सरकार ने ‘4G सैचुरेशन स्कीम’ के तहत करीब 30,000 गांवों की पहचान की थी, जहां 21,000 टेलीकॉम टावर लगाने का लक्ष्य रखा गया था। इनमें से 17,000 टावर पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और सुरक्षा के नियम

इमर्जिंग टेक्नोलॉजीज और AI के प्रभाव पर बात करते हुए सिंधिया ने 2000 के दशक से पहले के आईटी दौर का उदाहरण दिया। उन्होंने कहा कि टेक्नोलॉजी अपने आप में एक जरिया है, लेकिन आप इसका इस्तेमाल कैसे करते हैं, उसी से आपकी उत्पादकता तय होती है।

सिंधिया ने सचेत करते हुए कहा कि AI के विस्तार से कुछ नकारात्मक परिणाम भी सामने आएंगे। इसके लिए एक ‘कॉमन मिनिमम प्रोग्राम’ की जरूरत है ताकि लोगों को टेक्नोलॉजी के गलत प्रभावों से बचाया और सुरक्षित रखा जा सके।

देश में 4G और 5G की मौजूदा स्थिति

IMC 2026 में डेटा साझा करते हुए सिंधिया ने बताया, भारत के 99% से अधिक गांवों में अब 4G कनेक्टिविटी पहुंच चुकी है। वहीं देश के 99.9% जिलों को 5G नेटवर्क से कवर कर लिया गया है। अब भारत का मुख्य फोकस केवल बुनियादी नेटवर्क देने तक सीमित नहीं है, बल्कि 5G, 6G और AI-सक्षम सेवाओं के लिए मजबूत आधार तैयार करना है।

मैं गलत कामों को बंद करने की ठान कर बैठा हूं, बंद कर के रहूंगा: मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को कहा कि उनकी सरकार ने मोबाइल संचार प्रौद्योगिकी के माध्यम से जनता का लाखों करोड़ रुपया गलत हाथों में जाने से बचाया है और बहुतों की मुफ्त की कमाई बंद की है और ऐसे ही लोग आज उनका विरोध कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि उन्होंने गलत कामों को बंद करने की ठान रखी हैं और ऐसा करके रहेंगे चाहे उनका विरोध करने वाले कितना ही शोर क्यों न करें। श्री मोदी यहां यशोभूमि में भारत मोबाइल कांग्रेस 2026 का औपचारिक उद्घाटन कर रहे थे। उनका यह बयान ऐसे वातावरण में महत्वपूर्ण माना जा रहा है जबकि विपक्ष राज्यों की मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के चुनाव आयोग के कार्यक्रम को लेकर मोदी सरकार पर दबाव बनाने के लिए जगह जगह- धरने प्रदर्शन कर रहा है और मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग कर रहा है।

प्रधानमंत्री ने कहा आज सरकार की सैकड़ों सर्विसेज मोबाइल फोन पर हैं। सरकारी मदद अब सीधे बेनिफिशरीज़ के खाते में जाती है। डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर से करीब 50 लाख करोड़ रुपए सीधे लाभार्थियों के मोबाइल में भेजे गए और उनके बैंक अकाउंट में पहुंचे। और इससे करीब 5 लाख करोड़ रुपए, ये आंकड़ा छोटा नहीं है, 5 लाख करोड़ रुपए गलत हाथों में जाने से बचे हैं।

श्री मोदी ने कहा अब मुझे बताइए, जिनकी ये मुफ्त की कमाई बंद हो गई है, वो क्या, मोदी को प्यार करेंगे क्या? मैंने सही किया कि नहीं किया? करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? ये सारे गलत कामों को बंद करना चाहिए कि नहीं करना चाहिए? वो कितने ही चिल्लाते रहें, चीखते रहें, मैं इसको ठान के बैठा हूं, करके रहूंगा। श्री मोदी ने कहा कि टेलीकॉम के क्षेत्र में भारत में पिछले 10-12 साल में जो क्रांति आई है उसका नागरिक को सीधा-सीधा फायदा हुआ है।

उन्होंने देश विदेश से आयी दूरसंचार जगत की हस्तियों को संबोधित करते हुए कहा आप जानते हैं कि भारत, भाषा और भूगोल, हर प्रकार से डायवर्स देश है, विविधताओं से भरा हुआ देश है। इसके कारण लोगों के जीवन में अनेक असुविधाएं भी आती हैं। मोबाइल कनेक्टिविटी ने इस डायवर्सिटी (विविधता) को भी सुविधा से जोड़ा है। पहले ज्यादातर बैंक शहरों में ही होते थे, अस्पताल शहरों में होते थे, सरकारी दफ्तर ब्लॉक या जिला स्तर पर रहते थे। यानि कुछ भी काम करना हो, सरकारी सेवा लेनी हो, तो लोगों का पैसा और समय दोनों खर्च होता था। 

Also Read : रूस के भीषण मिसाइल हमलों से यूक्रेन में तबाही

डिजिटल गवर्नेंस ने इन परिस्थितियों को बदला है। उन्होंने कहा पुरानी व्यवस्था होती, तो सरकार का 5 लाख करोड़ रुपए लीकेज में चला जाता और ऐसे लोगों की जेब भर देता, मोदी ने इसको रोका है। और अब वही पैसा सही लाभार्थी को मिल रहा है और बचा हुआ पैसा सही काम के लिए उपयोग आ रहा है।

श्री मोदी ने कहा पीएम किसान सम्मान निधि के तहत हम 4 लाख करोड़ रुपए से अधिक किसानों के बैंक अकाउंट में जमा कर चुके हैं। किसान को मोबाइल फोन पर ही पैसा जमा होने का मैसेज मिल जाता है। ये पैसा उन करोड़ों छोटे किसानों तक पहुंचा है, जिन तक कभी सरकारी स्कीम्स का लाभ पहुंच ही नहीं पाता था। प्रधानमंत्री ने कहा कि दूरसंचार की चर्चा में अक्सर नेटवर्क और स्पैक्ट्रम पर बहस , मोबाइल टावर, नेटवर्क की पहुंच और गति की बातें होती हैं। लेकिन भारत के लोगों के लिए टेलीकॉम के मायने और भी रहे हैं। बीते 10-12 वर्षों में मोबाइल फोन आधुनिक संचार के माध्यम के साथ-साथ गुड-गवर्नेंस (सुशासन) का भी अहम औजार बनकर सामने आया है। और यह हमारे डिजिटल इंडिया विजन के केंद्र में रहा है।

श्री मोदी ने कहा आज हम सुनते हैं कि भारत में डेटा सस्ता है, मोबाइल फोन सस्ते हैं, मोबाइल फोन यूजर बेस इतना एक्सपैंड हो गया है, ये अपनी जगह सब सच है, लेकिन ये हुआ कैसे? और ये सब किया क्यों गया? ये जब हम समझेंगे, तो सभी को भारत का फोकस, भारत का ध्यान एकदम स्पष्ट होगा। उन्होंने कहा कि एक दशक पहले तक भारत में डिजिटल डिवाइड बहुत बड़ी चुनौती थी। आधुनिक टेक्नोलॉजी बड़े लोगों का अधिकार बनती जा रही थी। यानि जिसके पास साधन है, वही आधुनिक टेक्नोलॉजी का लाभ ले सकता था।

प्रधानमंत्री ने कहा डिजिटल इंडिया अभियान से हमने इस स्थिति को बदलने की ठानी और इसके केंद्र में मोबाइल फोन को लेकर के आए। यह टेक्नोलॉजी के लोकतांत्रीकरण का बहुत बड़ा प्रयास था। उन्होंने कहा कि इसके लिए दूरसंचार क्षेत्र में हर जरूरी सुधार किए गए, अवसंरचना का विस्तार किया गया। हमने इस बात पर ध्यान दिया किया कि मोबाइल फोन और अन्य टेलीकॉम हार्डवेयर भारत में ही बने।

Pic Credit : UNI

PM मोदी के 25 साल: ‘गुजरात मॉडल’ से ‘विकसित भारत’ तक, देश में ऐसे बदली विकास की राजनीति

PM Modi 25 Years: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 7 अक्टूबर 2001 को गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर सत्ता संभाली थी। उस समय गुजरात भुज भूकंप की तबाही से उबर रहा था। उस वक्त राज्य के सामने सूखा, पानी की कमी, बिजली संकट और राजनीतिक अस्थिरता जैसी कई चुनौतियां थीं। 25 साल बाद पीएम मोदी की विकास राजनीति का दायरा गुजरात मॉडल से निकलकर ‘सबका साथ, सबका विकास’, ‘आत्मनिर्भर भारत’ और अब ‘विकसित भारत @2047’ तक पहुंच चुका है। यह बदलाव सिर्फ नारों का नहीं, बल्कि विकास की पूरी सोच के विस्तार को दिखाता है। प्रधानमंत्री ने आज यानी 7 अक्तूबर को सार्वजनिक जीवन में 25 साल पूरे कर लिए हैं।

गुजरात मॉडल से हुई शुरुआत

गुजरात में मोदी के शुरुआती शासन की प्राथमिकता प्रशासन को ज्यादा जवाबदेह और प्रभावी बनाना, बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और निवेश एवं उद्योग के लिए अनुकूल माहौल तैयार करना था। इसी दौर की चर्चित पहल SWAGAT (State Wide Attention on Grievances by Application of Technology) थी। इसके जरिए आम लोग अपनी शिकायतें सीधे सरकार तक पहुंचा सकते थे। इस पहल को 2010 में संयुक्त राष्ट्र का पब्लिक सर्विस अवॉर्ड भी मिला।

इसी तरह ज्योतिग्राम योजना के जरिए कृषि और घरेलू बिजली आपूर्ति के लिए अलग-अलग फीडर की व्यवस्था की गई। केंद्र सरकार की ओर से पीएम मोदी के 25 साल के शासन को लेकर जारी प्रस्ताव में SWAGAT और ज्योतिग्राम को गुजरात से निकली ऐसी पहलों के तौर पर बताया गया है, जिनका प्रभाव बाद में राष्ट्रीय स्तर पर दिखाई दिया।

SWAGAT से क्या बदला?

SWAGAT में तकनीक के जरिए शिकायतों और प्रशासनिक कामकाज की निगरानी का जो मॉडल अपनाया गया, उसी सोच का विस्तार आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दिया। PRAGATI के जरिए केंद्र सरकार की बड़ी परियोजनाओं की समीक्षा और उनके सामने आ रही अड़चनों को दूर करने पर जोर दिया गया।

‘गुजरात मॉडल’ बना राष्ट्रीय चुनावी मुद्दा

धीरे-धीरे गुजरात मॉडल की पहचान औद्योगीकरण, निवेश, इंफ्रास्ट्रक्चर और आर्थिक विकास से जुड़ गई। 2013 में जब नरेंद्र मोदी बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार बने, तब गुजरात मॉडल उनके राष्ट्रीय राजनीतिक अभियान का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका था। लेकिन 2014 में दिल्ली आने के बाद विकास की यह कहानी और व्यापक हो गई।

विकास के साथ कल्याण योजनाओं पर जोर

प्रधानमंत्री बनने के बाद मोदी सरकार ने विकास को सिर्फ उद्योग और निवेश तक सीमित नहीं रखा। जन धन खाते, आधार और मोबाइल कनेक्टिविटी के जरिए सीधे लाभ पहुंचाने का ढांचा तैयार किया गया। इसके बाद प्रधानमंत्री आवास योजना, उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत मिशन, आयुष्मान भारत, जल जीवन मिशन और पीएम-किसान जैसी योजनाओं के जरिए सरकार ने ‘लास्ट माइल डिलीवरी’ पर जोर दिया।

सरकार के 25 साल के प्रस्ताव के मुताबिक, देश में करीब 60 करोड़ जन धन खाते खोले गए हैं। 4 करोड़ से ज्यादा घर उपलब्ध कराए गए हैं। करीब 25 करोड़ लोग गरीबी से बाहर आए हैं। वहीं पीएम-किसान के तहत अब तक 4 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि ट्रांसफर किए जाने का दावा किया गया है। इस तरह विकास का पैमाना भी बदल गया। अब सवाल सिर्फ यह नहीं रहा कि कितने निवेश आए या कितने उद्योग लगे। बल्कि यह भी देखा जाने लगा कि कितने परिवारों को बैंक खाता, घर, शौचालय, गैस, नल का पानी और स्वास्थ्य सुविधाएं मिलीं।

टेक्नोलॉजी बनी सरकार और जनता के बीच कड़ी

पीएम मोदी की विकास सोच में गुजरात से लेकर केंद्र तक एक चीज लगातार दिखाई देती है और वह है टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल…। SWAGAT की सोच आगे चलकर PRAGATI में दिखाई दी। इसके बाद आधार आधारित सेवाओं, डिजिटल भुगतान और UPI ने तकनीक को आम लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बना दिया।

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के अनुसार, 2014 से अब तक PRAGATI के जरिए 377 प्रोजेक्ट्स की समीक्षा की जा चुकी है। पहचाने गए करीब 94 फीसदी मुद्दों का समाधान किया गया है। सरकार का कहना है कि PRAGATI सिस्टम ने 85 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की परियोजनाओं को गति देने में मदद की है।

‘मेक इन इंडिया’ से ‘आत्मनिर्भर भारत’ तक

2020 में कोरोना महामारी के बाद विकास की भाषा में एक और बड़ा बदलाव आया। ‘मेक इन इंडिया’ और ‘डिजिटल इंडिया’ के साथ अब ‘आत्मनिर्भर भारत’ पर ज्यादा जोर दिया जाने लगा।

वैश्विक सप्लाई चेन में आई मुश्किलों ने घरेलू उत्पादन और रणनीतिक क्षेत्रों में आत्मनिर्भरता की जरूरत को और प्रमुख बना दिया। सरकार अब इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, डिफेंस प्रोडक्शन, सेमीकंडक्टर निवेश और बढ़े हुए पूंजीगत खर्च को इसी बदलाव के उदाहरण के तौर पर पेश करती है।

‘विकसित भारत @2047’

पीएम मोदी की विकास यात्रा का मौजूदा सबसे बड़ा लक्ष्य ‘विकसित भारत @2047’ है। इसका उद्देश्य 2047 तक यानी आजादी की 100वीं वर्षगांठ तक भारत को एक विकसित देश बनाना है। इस लक्ष्य के तहत इंफ्रास्ट्रक्चर, मैन्युफैक्चरिंग, तकनीक, निवेश, आत्मनिर्भरता और नागरिक-केंद्रित सरकारी सेवाओं को एक बड़े विजन के साथ जोड़ा जा रहा है।

ये भी पढ़ें- Heatwave Alert: भीषण गर्मी से गर्भवती महिलाओं और नवजातों पर बढ़ा खतरा, सर्वे में सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर

मोदी मंत्रिमंडल में वैकेंसी बढ़ रही है

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कब अपनी सरकार में फेरबदल करेंगे इसका सस्पेंस बढ़ता जा रहा है। लेकिन जब भी संगठन में बदलाव हो रहा है या राज्यसभा के चुनाव हो रहे हैं तो सरकार में नई वैकेंसी बन जा रही है। तीन मंत्रियों के इस्तीफे हुए हैं, तीन मंत्री संगठन में गए हैं और दो मंत्रियों की राज्यसभा रिन्यू नहीं हुई है। इस तरह आठ वैकेंसी बन गई है। हालांकि इस वैकेंसी को भरने की जल्दी प्रधानमंत्री को नहीं दिख रही है। इस बार उत्तर प्रदेश की आठ सीटों के लिए भाजपा ने अपने उम्मीदवारों का ऐलान किया तो मोदी सरकार में दो और वैकेंसी बनने का रास्ता साफ हुआ। भाजपा ने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को टिकट नहीं दी। हालांकि अभी दोनों का कार्यकाल समाप्त नहीं हुआ है। कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी छह महीने तक दोनों मंत्री बनी रह सकते हैं। लेकिन उसके बाद भी राज्यसभा या लोकसभा की कोई वैकेंसी नहीं है, जहां से इन दोनों को संसद पहुंचाया जाएगा। इसलिए इस्तीफा तो होना है। सिर्फ समय की बात है कि कब इस्तीफा होता है।

इससे पहले भाजपा ने संगठन में फेरबदल किया तो उससे भी वैकेंसी क्रिएट हुई। नितिन नबीन की टीम में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। वे दोहरी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। हालांकि जानकार सूत्रों का कहना है कि उनके लिए अपवाद बनाया जा सकता है। यानी वे सरकार और संगठन दोनों जगह रह सकते हैं। लेकिन यह छूट शायद हर्ष मल्होत्रा और पंकज चौधरी को नहीं मिले। कुछ समय पहले हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया था। हालांकि यह किसी को समझ में नहीं आया कि वीरेंद्र सचदेवा को क्यों हटाया गया। राज्य में कोई चुनाव भी नहीं था। फिर भी एक पंजाबी को हटा कर दूसरा पंजाबी अध्यक्ष बनाया गया। मल्होत्रा सरकार में मंत्री बने हुए हैं। उत्तर प्रदेश में चुनाव था और सामाजिक समीकरण के हिसाब से जाट नेता भूपेंद्र सिंह को हटा कर पिछड़ी जाति से आने वाले पंकज चौधरी को अध्यक्ष बनाया गया। वे भी केंद्र में मंत्री बने हुए हैं।

इससे पहले अप्रैल में जब राज्यसभा के दोवार्षिक चुनाव हुए तब रिटायर हो रहे दो सदस्यों को दोबारा टिकट नहीं मिली। पंजाब के रवनीत सिंह बिट्टू राजस्थान से राज्यसभा गए थे। उनका कार्यकाल खत्म हुआ तो उनको पंजाब भेजा गया है। बताया जा रहा है कि वे वहां से विधानसभा का चुनाव लड़ेंगे। इसी तरह केरल के रहने वाले जॉर्ज कुरियन को मध्य प्रदेश से राज्यसभा भेजा गया था। लेकिन उनका भी कार्यकाल रिन्यू नहीं हुआ। बाद में दोनों ने मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। कॉकरोच जनता पार्टी के आंदोलन के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हुआ। इस तरह तीन मंत्रियों को इस्तीफे हो चुके हैं। पीयूष गोयल, पंकज चौधरी और हर्ष मल्होत्रा संगठन में जिम्मेदारी निभा रहे हैं। और अब हरदीप सिंह पुरी व बीएल वर्मा का कार्यकाल रिन्यू नहीं हुआ है। इस तरह मोदी सरकार में आठ वैकेंसी बन गई है। अब अगर मोदी अपनी सरकार से किसी को नहीं भी हटाते हैं तो आठ से 10 लोगों को मंत्री बना सकते हैं। जानकार सूत्रों का कहना है कि अभी मंत्रिपरिषद में तुरंत बदलाव होता नहीं दिख रहा है। महिला  आरक्षण कानून में संशोधन और परिसीमन के बारे में कोई फैसला होने के बाद ही मंत्रिमंडल का विस्तार होगा। ध्यान रहे सरकार ने अभी तक संसद के मानसून सत्र का सत्रावसान नहीं किया है। कहा जा रहा है दो तिहाई बहुमत जुटाने के लिए बातचीत चल रही है।

अल्पसंख्यक मंत्री क्या कोई नहीं रहेगा?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के इकलौते सिख मंत्री हरदीप सिंह पुरी की सरकार से छुट्टी हो रही है। उनके राज्यसभा का कार्यकाल अगले महीने 25 नवंबर को खत्म हो रहा है। वे उत्तर प्रदेश से राज्यसभा के सांसद हैं। भाजपा ने राज्य की अपने कोटे की आठ सीटों के लिए उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया तो उसमें पुरी का नाम नहीं आया। हालांकि वे 25 नवंबर के बाद भी छह महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं। लेकिन उसके बाद उनको इस्तीफा देना होगा। ध्यान रहे पंजाब में फरवरी में विधानसभा के चुनाव हैं। तभी यह भी कहा जा रहा है कि शायद उसके बाद उनका इस्तीफा हो। गौरतलब है कि उनसे पहले रवनीत सिंह बिट्टू भी एक सिख मंत्री थे। लेकिन उनको भी राज्यसभा का दूसरा कार्यकाल नहीं मिला और उनको पंजाब में विधानसभा का चुनाव लड़ने के लिए भेजा गया है। सवाल है कि क्या अकाली दल से तालमेल होगा और सिख मंत्री की कमी हरसिमरत कौर बादल से पूरी होगी? य़ह देखने वाली बात होगी।

इस साल अप्रैल में राज्यसभा के दोवार्षिक चुनाव हुए थे तो जॉर्ज कुरियन की राज्यसभा रिन्यू नहीं हुई थी और उनको इस्तीफा देना पड़ा था। वे मोदी सरकार के इकलौते ईसाई मंत्री थे। केरल में भाजपा ने ईसाई वोट लुभाने की खूब कोशिश की थी लेकिन कामयाबी नहीं मिली। उसके बाद ही कुरियन हटाए गए थे। उनसे पहले कभी केजे अल्फोंस भी मंत्री थे। जहां तक मुस्लिम मंत्रियों की बात है तो पिछली सरकार में ही इकलौते मुस्लिम मंत्री की छुट्टी हो गई थी और उसके बाद किसी को नहीं बनाया गया। एमजे अकबर आखिरी मुस्लिम मंत्री थे। ‘मी टू’ विवाद में नाम आने के बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था। उससे पहले मुख्तार अब्बास नकवी मुस्लिम मंत्री थे। सो, अगर हरदीप पुरी के इस्तीफे के समय तक कोई सिख मंत्री नहीं बनता है तो मोदी सरकार में देश के तीन सबसे बड़े अल्पसंख्यक समूहों मुस्लिम, ईसाई औऱ सिख का कोई मंत्री नहीं रहेगा। ध्यान रहे भारत सबसे बड़ी धार्मिक विविधता वाला देश है।