Weather Update : भारत में Monsoon ने पकड़ी रफ्तार, गुजरात-असम में बाढ़ का कहर, 17 राज्यों के लिए IMD का अलर्ट

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देशभर में दक्षिण-पश्चिम मानसून एक बार फिर पूरी तरह सक्रिय हो गया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि दो सक्रिय निम्न दबाव (लो-प्रेशर) सिस्टम और एक पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश, आंधी और तेज हवाएं चलने की संभावना है। इस बीच गुजरात और असम में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है, जबकि दिल्ली समेत 17 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

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सक्रिय मौसम प्रणालियों से तेज हुआ मानसून

 

मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और आसपास के क्षेत्रों में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बना हुआ है। वहीं, उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक और लो-प्रेशर सिस्टम विकसित हुआ है, जो पश्चिम बंगाल और उत्तरी ओडिशा के तटीय क्षेत्रों तक फैला हुआ है। अगले दो दिनों में इसके और मजबूत होने की संभावना है।

 

इसके अलावा, मध्य और ऊपरी क्षोभमंडल में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ भी उत्तर भारत में बारिश की गतिविधियों को बढ़ा रहा है। इन सभी मौसम प्रणालियों के संयुक्त प्रभाव से देश के बड़े हिस्से में तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर जारी रहने की संभावना है।

 

दिल्ली समेत उत्तर भारत में भारी बारिश की चेतावनी

 

आईएमडी ने दिल्ली के लिए येलो अलर्ट जारी किया है। राजधानी में 64.5 मिमी से 115.5 मिमी तक बारिश, गरज-चमक और 70 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का अनुमान है। अधिकतम तापमान लगभग 33 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 28 डिग्री सेल्सियस रहने की संभावना है। लोगों को भारी बारिश के दौरान गैर-जरूरी यात्रा से बचने की सलाह दी गई है। उत्तराखंड के बागेश्वर, पिथौरागढ़, नैनीताल, चमोली, अल्मोड़ा, रुद्रप्रयाग, ऊधम सिंह नगर, पौड़ी गढ़वाल और चंपावत जिलों में भी भारी बारिश और 60 किमी प्रति घंटे तक तेज हवाओं की चेतावनी जारी की गई है।

 

हिमाचल प्रदेश के चंबा, कांगड़ा, मंडी, शिमला, सिरमौर, हमीरपुर, सोलन, बिलासपुर और कुल्लू में अगले दो दिनों तक व्यापक बारिश होने की संभावना है।

 

जम्मू-कश्मीर के पुलवामा, रामबन, जम्मू, पुंछ, कुलगाम, उधमपुर, कठुआ, डोडा, अनंतनाग, गांदरबल और कुपवाड़ा जिलों में भी येलो अलर्ट जारी किया गया है।

 

गुजरात और असम में बाढ़ से हालात गंभीर

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के कारण गुजरात में बाढ़ की स्थिति बेहद गंभीर हो गई है। अब तक 40,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। बारिश से जुड़ी घटनाओं में पांच लोगों की मौत हो चुकी है। एहतियात के तौर पर अहमदाबाद में स्कूल, कॉलेज और आंगनबाड़ी केंद्र बंद कर दिए गए हैं। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों के लिए रेड अलर्ट जारी करते हुए 204.5 मिमी से अधिक बारिश की चेतावनी दी है।

 

असम में बाढ़ का संकट लगातार गहराता जा रहा है। पिछले 24 घंटे में 14 और लोगों की मौत के बाद राज्य में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 61 हो गई है। 12 जिलों में 7.05 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। उफनती नदियों के कारण घर, सड़कें और कृषि भूमि जलमग्न हो गई हैं। राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।

 

इन राज्यों में भी भारी बारिश का अलर्ट

आईएमडी के अनुसार, गुजरात और हिमालयी राज्यों के अलावा कोंकण-गोवा, मध्य महाराष्ट्र, ओडिशा और राजस्थान में भी भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। इन क्षेत्रों में 115.6 मिमी से 204.4 मिमी तक वर्षा दर्ज की जा सकती है। इसके अलावा असम, मेघालय, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, हरियाणा, पंजाब, झारखंड, केरल, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा तथा तटीय और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में भी भारी बारिश, आंधी और बिजली गिरने की आशंका जताई गई है।

Dharmendra Pradhan Resigns: किसी विवाद के कारण इस्तीफा देने वाले मोदी सरकार के दूसरे मंत्री हैं धर्मेंद्र प्रधान, पहले कौन थे?

Dharmendra Pradhan Resigns: दिल्ली के जंतर-मंतर समेत देशभर में NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर हुए विरोध-प्रदर्शनों के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा समकालीन भारतीय राजनीतिक इतिहास में एक दुर्लभ घटना है। साल 2014 से नरेंद्र मोदी सरकार के लगातार तीन कार्यकाल और 12 से अधिक वर्षों के दौरान सार्वजनिक विवादों के कारण मंत्रियों के इस्तीफे की घटनाएं बहुत कम हुई हैं। असल में प्रधान मोदी सरकार में किसी बड़े विवाद के बीच इस्तीफा देने वाले केवल दूसरे केंद्रीय मंत्री हैं। इससे पहले विदेश राज्य मंत्री एम.जे. अकबर थे, जिन्होंने विवाद के बाद इस्तीफा दिया था।

सार्वजनिक विवाद के केंद्र में रहते हुए किसी केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे का एकमात्र पिछला उदाहरण 17 अक्टूबर 2018 का है। वरिष्ठ पत्रकार से राजनेता बने एम.जे. अकबर ने विदेश मंत्रालय से इस्तीफा दिया था। अकबर ने #MeToo आंदोलन के दौरान लगे कथित आरोपों के बीच अपने पद से इस्तीफा दिया था।

वर्ष 2018 में कई महिला पत्रकारों ने एम.जे. अकबर पर उनके पत्रकारिता के दौर से जुड़े आरोप लगाए थे। बढ़ते विवाद के बीच उन्होंने मंत्री पद छोड़ते हुए कहा था कि वह व्यक्तिगत क्षमता में कानूनी लड़ाई लड़ना चाहते हैं, ताकि सरकारी कामकाज प्रभावित न हो।

हालांकि, शिरोमणि अकाली दल (SAD) की नेता हरसिमरत कौर बादल ने 2020 में तीन विवादास्पद कृषि कानूनों का विरोध करते हुए नरेंद्र मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दिया था। लेकिन वे उस विवाद का मुख्य केंद्र नहीं थीं। उनका इस्तीफा तीन कृषि कानूनों के विरोध में था। वह खुद किसी व्यक्तिगत विवाद के केंद्र में नहीं थीं।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की चर्चा क्यों?

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, NEET-UG परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर छात्रों और अभिभावकों के विरोध के बाद शिक्षा मंत्रालय पर लगातार दबाव बना। ऐसे में धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को सरकार की जवाबदेही और परीक्षा व्यवस्था में भरोसा बहाल करने की दिशा में एक कदम के तौर पर देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि सरकार का उद्देश्य छात्रों की चिंताओं को कम करना, परीक्षा प्रणाली पर विश्वास बहाल करना और संसद के मानसून सत्र के दौरान महत्वपूर्ण विधायी कार्यों को सुचारु रूप से आगे बढ़ाना है।

2014 में स्थापित मौजूदा शासन मॉडल के तहत कैबिनेट की स्थिरता और संरचनात्मक निरंतरता मुख्य स्तंभ रहे हैं। हालांकि समय-समय पर कैबिनेट में फेरबदल या प्रशासनिक बदलावों के दौरान कई मंत्रियों ने मंत्रिपरिषद छोड़ी है। लेकिन बाहरी राजनीतिक दबाव या सार्वजनिक विवादों के कारण इस्तीफे की घटनाएं अपवाद ही रही हैं।

प्रशासनिक मतभेदों या पॉलिसी से जुड़ी चुनौतियों के ज्यादातर मामलों में सरकार ने तुरंत राजनीतिक इस्तीफ़े के बजाय ढांचे में बड़े बदलाव, विभागीय जांच या एजेंसी से जांच कराने को प्राथमिकता दी है। यह तरीका जल्दबाज़ी में राजनीतिक रियायतें देने के बजाय पॉलिसी को जारी रखने और संस्थागत स्थिरता को अहमियत देता है।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के पीछे की वजह?

धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा इसलिए खास है क्योंकि यह राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी प्रवेश परीक्षाओं में गड़बड़ियों को लेकर छात्रों के जबरदस्त विरोध-प्रदर्शन का सीधा जवाब है। आम राजनीतिक विवादों के उलट, NEET-UG विवाद ने देश भर के लाखों युवा उम्मीदवारों और उनके परिवारों पर सीधा असर डाला।

सरकार ने दो मुख्य मकसद हासिल करने की कोशिश की!

युवाओं की चिंता कम करना: छात्रों को यह संकेत देना कि सरकार जवाबदेह है और जनता को परीक्षा की निष्पक्षता के बारे में भरोसा दिलाना।

संसद का कामकाज सुचारू बनाना: विपक्षी दलों के साथ टकराव के एक बड़े मुद्दे को खत्म करना ताकि मानसून सत्र के दौरान जरूरी कानूनों को आसानी से पास कराया जा सके।

जवाबदेही के लिए एक रणनीतिक तरीका

2018 में एम.जे. अकबर और धर्मेंद्र प्रधान दोनों का हटना मंत्रियों की जवाबदेही तय करने के एक सोचे-समझे तरीके को दिखाता है। दोनों ही मामलों में बड़े नेताओं के इस्तीफे का इस्तेमाल रणनीतिक कदम के तौर पर किया गया ताकि संस्थागत गतिरोध को दूर किया जा सके। साथ ही जनता के तनाव को कम किया जा सके और प्रशासन अपने मुख्य गवर्नेंस एजेंडे पर आगे बढ़ सके।

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