अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 60 दिन का समझौता सोमवार को खत्म हो गया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच युद्ध रोकना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद का समाधान निकालना था। डेडलाइन खत्म होने के बावजूद न तो कोई फाइनल समझौता हुआ, न ही अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया। 60 दिनों के दौरान ट्रम्प ने कई बार कहा कि अगर बातचीत नाकाम रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। माना जा रहा था कि डेडलाइन खत्म होते ही अमेरिका फिर बड़ा हमला कर सकता है। समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले ट्रम्प का रुख बदलता दिखा। एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा, “हम पहले के मुकाबले हल्का रुख अपना रहे हैं।” वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अमेरिका, ईरान को तीन तरीके से घेर रहा है। 1. आर्थिक दबाव- ईरान की कमाई और अर्थव्यवस्था को कमजोर करना। 2. नौसैनिक नाकाबंदी- ईरान के लिए समुद्र के रास्ते व्यापार मुश्किल करना। 3. बातचीत- सीधे या दूसरे देशों के जरिए ईरान से समझौते की कोशिश करना। ट्रम्प के इस बयान का मतलब अभी अमेरिका सीधे बड़ा हमला करने की बजाय ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है, समुद्र के रास्ते उसका व्यापार रोक रहा है और बातचीत से समझौते की कोशिश भी कर रहा है। ट्रम्प हमला रोककर क्या हासिल करना चाहते हैं? ट्रम्प की मौजूदा रणनीति को समझने के लिए सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका युद्ध को खत्म नहीं मान रहा है। ट्रम्प को लगता है कि फिलहाल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना सैन्य हमले से ज्यादा असरदार हो सकता है। अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने ईरान की आर्थिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। ट्रम्प का मानना है कि अगर ईरान युद्ध में नहीं उलझा रहेगा तो उसे अपनी असली आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ेगा। जैसे कि बर्बाद बुनियादी ढांचा, कमजोर अर्थव्यवस्था, महंगाई और पैसों की कमी। यानी अमेरिका का दांव यह है कि युद्ध रोककर ईरान को कमजोर होने दिया जाए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को कहा कि अमेरिका कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य तीनों तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है। अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि युद्ध जारी रहने पर ईरानी सरकार अपनी आर्थिक परेशानियों के लिए जंग को जिम्मेदार ठहरा सकती है। जब युद्ध नहीं होगा, तब जनता और सरकार को आर्थिक संकट का सामना सीधे करना पड़ेगा। ट्रम्प को ईरान के खिलाफ रणनीति क्यों बदलनी पड़ी? ट्रम्प ने फरवरी में इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। शुरुआत में उम्मीद थी कि संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं चलेगा, लेकिन यह कई महीनों तक खिंच गया। अब अमेरिका के सामने दो तरह का दबाव है। एक तरफ वह ईरान के खिलाफ अपने सैन्य लक्ष्य हासिल करना चाहता है, दूसरी तरफ लंबे युद्ध की बढ़ती लागत भी उसके लिए चिंता बन रही है। ट्रम्प लगातार कहते रहे हैं कि ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका के सामने दो रास्ते हैं- या तो ईरान को आर्थिक रूप से टूटने दिया जाए या फिर उस पर बहुत बड़ा सैन्य हमला किया जाए। फिलहाल ट्रम्प पहला रास्ता आजमाते दिख रहे हैं। हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका ने टकराव खत्म कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रम्प सरकार चीन की उन रिफाइनरियों पर नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है जो ईरानी तेल खरीदती हैं। इसके अलावा ईरान के साथ लेन-देन करने वाले चीनी बैंकों और उन संस्थाओं पर भी कार्रवाई की तैयारी है, जिन पर प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद करने का आरोप है। यानी हमला भले ही रुका हुआ है, लेकिन दबाव कम नहीं हुआ है। होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा सौदेबाजी का मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव में होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ा दांव बन गया है। दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है। ईरान इस मुद्दे पर ओमान के साथ बातचीत कर रहा है। 9 अगस्त को ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि ओमान के साथ समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है। लेकिन तेहरान ने यह भी साफ कर दिया कि ओमान के साथ समझौता होने का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट तुरंत अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा। ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करे, प्रतिबंध हटाए और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दे। यानी अमेरिका चाहता है कि समुद्री रास्ते और जहाजों की आवाजाही सामान्य हो, जबकि ईरान इसे अमेरिकी रियायतों से जोड़कर देख रहा है। इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं रह गया है। यह दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा सौदेबाजी का हथियार बन चुका है। युद्ध की बड़ी कीमत चुका रहा अमेरिका सूत्रों के मुताबिक, ईरान के साथ पांच महीने चले युद्ध में अमेरिका ने लंबी दूरी तक मार करने वाली बड़ी संख्या में मिसाइलें इस्तेमाल की हैं। इनमें ATACMS और प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइल शामिल हैं। दो सूत्रों ने दावा किया कि अमेरिका ने इन हथियारों का लगभग पूरा भंडार इस्तेमाल कर लिया है, हालांकि उन्होंने सटीक संख्या नहीं बताई। अमेरिका युद्ध के दौरान कम से कम 45 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी गंवा चुका है। यह उसके कुल बेड़े का करीब 25% है। अमेरिकी वायुसेना के मुताबिक, एक रीपर ड्रोन की कीमत उसके उपकरणों के आधार पर 3 से 5 करोड़ डॉलर तक हो सकती है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, इन नुकसानों की कुल कीमत 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकती है। इन ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास निगरानी और हमलों के लिए किया गया था। कम ऊंचाई और धीमी गति के कारण ये ईरानी बलों और ईरान समर्थित समूहों के निशाने पर रहे। युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास करीब 185 रीपर ड्रोन थे। इनमें 165 वायुसेना और 20 मरीन कॉर्प्स के पास थे। मई में अमेरिकी वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल डेविड टैबर ने सीनेट को बताया था कि वायुसेना के पास करीब 135 रीपर ड्रोन बचे हैं। पेंटागन पहले से ही रीपर ड्रोन को धीरे-धीरे हटाकर उनकी जगह कम कीमत वाले नए हथियारबंद ड्रोन लाने की योजना पर काम कर रहा है। लंबी दूरी की मिसाइलों की कीमत भी 10 लाख डॉलर से ज्यादा होती है। इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में भी किया गया है। अगर अमेरिका के पास इन हथियारों का भंडार कम होता है तो भविष्य में ईरान पर बड़े हमले या रूस और चीन जैसे दूसरे प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ उसकी सैन्य क्षमता प्रभावित हो सकती है। हालांकि एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में मौजूद अपने सैन्य भंडार से इन हथियारों की फिर से आपूर्ति कर सकता है। ईरान की मांगें क्या हैं? अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ाकर ईरान को समझौते के लिए तैयार करना चाहता है। लेकिन ईरान भी अपने पास मौजूद विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज खोलने के लिए 6 मांगें रखी हैं। यानी अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों को दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जबकि ईरान दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग पर अपनी पकड़ को दबाव के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है। यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत की गुंजाइश होते हुए भी समझौते की राह आसान नहीं है।
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ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने ओमान पर बमबारी की धमकी दी:कहा- ईरान मुद्दे पर बीच में न आए; IRGC का अमेरिका से बातचीत का दावा खारिज अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर ओमान को बमबारी की धमकी दी है। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि अगर ओमान अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में बाधा बना, तो अमेरिका उस पर ‘बमबारी करेगा’। पूरी खबर यहां पढ़ें…
इंजीनियरिंग की डिग्री या बड़े कॉलेज से पढ़ाई किए बिना भी अच्छी नौकरी और सैलरी हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में यूजर ने अपनी नौकरी और कमाई से जुड़ी कहानी शेयर की है। यूजर ने बताया कि उसने करीब नौ साल के करियर में अपनी सालाना कमाई ₹1.84 लाख से बढ़ाकर ₹75 लाख कर ली। अपनी कहानी से यूजर ने बताया कि सही स्किल और लगातार मेहनत के दम पर बिना बड़े कॉलेज बैकग्राउंड के भी करियर में अच्छी ग्रोथ हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।
Reddit के r/IndianWorkplace सबरेडिट पर इस प्रोफेशनल ने अपनी करियर जर्नी शेयर किया है। रेडिट पर शेयर किए गए इस पोस्ट को X पर एक यूजर ने शेयर किया है। यूजर ने कहा कि, उसने यह कहानी उन लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए शेयर की है, जो नौकरी जाने या B.Tech डिग्री न होने से परेशान हैं। उसके मुताबिक, मेहनत और बेहतर स्किल्स से करियर में सफलता हासिल की जा सकती है।
₹1.84 लाख सालाना से शुरू किया करियर
पोस्ट के अनुसार, इस प्रोफेशनल ने एक Tier-3 कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन के साथ मैथ में B.Sc. की पढ़ाई की। इसके बाद उसे WITCH कंपनी में कैंपस प्लेसमेंट के जरिए पहली नौकरी मिली। उसने अपने करियर की शुरुआत महज ₹1.84 लाख सालाना सैलरी से की थी, जो टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले कई लोगों को काफी कम लग सकती है। करियर के शुरुआती चार सालों में उसकी सैलरी में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई।
From 1.84LPA to 75LPA in 9 years.
No BTech. Passed out from a Tier-3 college.
This is how he achieved it: pic.twitter.com/pJjQQGcfaA
— Swapna Kumar Panda (@swapnakpanda) August 16, 2026
कोविड के बाद बढ़ी सैलरी
कोविड-19 के दौर तक उसकी सालाना कमाई करीब ₹4.5 लाख पहुंची थी। इसके बाद नौकरी के बाजार में आए बदलाव के बीच उसे एक बड़ी कंपनी में काम करने का मौका मिला, जहां उसका सालाना पैकेज ₹8 लाख हो गया। इस तरह उसकी सैलरी में एक साथ करीब 78 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और उसके करियर को आगे बढ़ने का नया रास्ता मिला। इसके करीब एक साल बाद उसकी कमाई में एक और बड़ा बदलाव आया। मौजूदा नौकरी से संतुष्ट न होने के कारण उसने दूसरी कंपनियों में अवसर तलाशने शुरू किए।
कुछ ही सालों में सालाना सैलरी ₹42.2 लाख हो गई
इस दौरान उसे कई नौकरी के ऑफर मिले और बेहतर विकल्प मिलने के बाद उसने ₹17.4 लाख सालाना पैकेज पर नई नौकरी तय की। यह उसकी पिछली ₹8 लाख सालाना सैलरी से दोगुने से भी ज्यादा थी। अगले तीन सालों में उसने कॉर्पोरेट सेक्टर में काम जारी रखा और कई चुनौतियों के बावजूद अपनी कमाई बढ़ाता रहा। समय-समय पर मिलने वाली सैलरी बढ़ोतरी के चलते उसका सालाना पैकेज करीब ₹30 लाख तक पहुंच गया। इसके बाद उसने बेहतर कमाई और काम का अच्छा माहौल पाने के लिए एक स्टार्टअप का रुख किया। यह फैसला उसके लिए फायदेमंद रहा और उसकी सालाना सैलरी बढ़कर ₹42.2 लाख हो गई।
नौकरी से निकाला भी गया
करियर में सबसे बड़ा बदलाव उस समय आया, जब स्टार्टअप में काम करने के करीब एक साल बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। हालांकि, उसने इसे अपने करियर का अंत मानने के बजाय इस समय का इस्तेमाल आगे की नौकरी की तैयारी में किया। इसके बाद उसे एक दूसरे स्टार्टअप में काम करने का मौका मिला, जहां उसका सालाना पैकेज बढ़कर ₹75 लाख हो गया। यह उसकी पिछली ₹42.2 लाख की सैलरी से करीब 77 फीसदी ज्यादा थी। यूजर के मुताबिक, करियर में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल्स, लगातार सीखना और सही फैसले ज्यादा जरूरी हैं। समस्या हल करने की क्षमता भी सफलता में अहम भूमिका निभाती है।
सैलरी को लेकर करे नेगोशिएशन
Reddit यूजर ने अपनी कहानी में बताया कि नौकरी बदलते समय सैलरी पर बातचीत करना कितना जरूरी है। उन्होंने पहला ऑफर तुरंत स्वीकार करने के बजाय बेहतर पैकेज के लिए बातचीत की, जिससे उनकी सालाना सैलरी ₹8 लाख से बढ़कर ₹17.4 लाख हो गई। उन्होंने ये भी बताया कि नौकरी जाना हमेशा करियर के लिए नुकसान नहीं होता। उनके मामले में ₹42 लाख सालाना पैकेज वाली नौकरी छूटने के बाद उन्हें ऐसा मौका मिला, जहां उनकी कमाई बढ़कर ₹75 लाख सालाना हो गई।
Silver Gold Price Today : सोमवार, 17 अगस्त को MCX पर सोने और चांदी की कीमतों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। अमेरिकी डॉलर में गिरावट और सितंबर में अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें बढ़ाने की उम्मीदों के कम होने से सोने-चांदी को सपोर्ट मिल रहा है। हांलांकि अमेरिका-ईरान के बीच बातचीत में गतिरेध और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पूरी तरह से खुलने को लेकर बनी अनिश्चितता के कारण महंगाई का डर बना हुआ है, जिससे सोने की कीमतों में होने वाली बढ़त सीमित रही है।
11.40 बजे के आसपास एमसीएक्स पर गोल्ड का अक्टूबर वायदा 685 रुपए यानी 0.44 फीसदी की बढ़त के साथ 155,191 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं, सिल्वर का सितंबर वायदा 2,692 रुपए यानी 1.14 फीसदी की तेजी के साथ 238,616 रुपए पर कारोबार कर रहा था।
पृथ्वीफिनमार्ट कमोडिटी रिसर्च के मनोज कुमार जैन का कहना है कि आज के सेशन में सोने के लिए $4,400 और $4,364 पर सपोर्ट है, जबकि $4,470 और $4,500 प्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है। वहीं चांदी के लिए $63.40 और $62.60 पर सपोर्ट है, जबकि $65.80 और $67 प्रति ट्रॉय औंस पर रेजिस्टेंस है।
उन्होंने आगे कहा कि MCX गोल्ड के लिए 1,53,650 -1,52,800 रुपए पर सपोर्ट और 1,55,500-1,56,100 रुपए पर रेजिस्टेंस है। जबकि सिल्वर के लिए 2,34,000 -2,31,600 रुपए पर सपोर्ट और 2,38,000- 2,41,000 पर रेजिस्टेंस है।
1,53,000 और 1,52,500 के आस-पास गिरावट पर सोने में खरीदारी की सलाह होगी। जिसमें 1,51,800 रुपए से नीचे स्टॉप लॉस रखकर 1,55,500 और 1,56,000 रुपए का टारगेट रखा जा सकता है। साथ ही, 2,33,300 और 2,32,000 रुपए के आस-पास चांदी में खरीदारी की जा सकती है। इसके लिए 2,29,800 से नीचे स्टॉप लॉस रखकर 2,38,000 और 2,40,000 रुपए का टारगेट रखा जा सकता है।
दूसरी कमोडिटीज पर एक नजर
एमसीएक्स पर कॉपर का अगस्त वायदा 17.80 रुपए यानी 1.30 फीसदी की बढ़त के साथ 1,396.30 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं, क्रूड ऑयल का सितंबर वायदा 36.00 रुपए यानी 0.46 फीसदी की कमजोरी के साथ 7,771 रुपए पर दिख रहा था। वहीं, नैचुरल गैस का अगस्त वायदा 9.30 रुपए यानी 3.53 फीसदी की गिरावट के साथ 254.50 रुपए के आसपास कारोबार कर रहा था। वहीं, ELECDMBL का अगस्त वायदा 18.00 रुपए यानी 0.39 फीसदी की कमजोरी के साथ 4,581 रुपए पर दिख रहा था।
कमोडिटी में कमाई वाले कॉल
कमोडिटी में कमाई वाले कॉल के लिए आज हमारे साथ हैं कुंवरजी ग्रुप के रवि दियोरा। इनको आज जिंक और नैचुरल गैस में कमाई के मौके दिख रहे हैं। एमसीएक्स जिंक अगस्त वायदा में इनकी 398.5 रुपए के आसपास, 396.0 रुपए के स्टॉप लॉस के साथ 403 रुपए के टारेगट के लिए खरीदारी की सलाह है। वहीं, एमसीएक्स नैचुरल गैस वायदा में इनकी 264 रुपए के आसपास, 268 रुपए के स्टॉप लॉस के के साथ 256 रुपए के टारेगट के लिए खरीदने की सलाह है।
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ब्रिटेन में रह रही भारतीय महिला अनुष्का व्यास का एक वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। वीडियो में उन्होंने UK और भारत की 9-5 नौकरी के बाद की जिंदगी का अंतर दिखाने की कोशिश की है। अनुष्का ने गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अपने घर के पास एक पार्क का वीडियो शेयर किया, जहां लोग काम खत्म करने के बाद परिवार के साथ समय बिताते, घूमते और फिटनेस पर ध्यान देते नजर आए। उनका कहना है कि UK में नौकरी के बाद भी लोगों के पास अपनी जिंदगी के लिए वक्त बचता है।
वहीं, भारत में ऑफिस खत्म होने के बाद लंबा सफर, ट्रैफिक और कई बार अतिरिक्त काम दिन का बाकी समय भी ले लेते हैं। अनुष्का के मुताबिक, इसी वजह से कई लोगों की पूरी उम्मीद वीकेंड पर टिक जाती है। उनके वीडियो ने सोशल मीडिया पर वर्क-लाइफ बैलेंस को लेकर नई बहस छेड़ दी है।
गुरुवार शाम 5:30 बजे पार्क का दिखाया नजारा
अनुष्का ने इंस्टाग्राम पर शेयर वीडियो में गुरुवार शाम करीब 5:30 बजे अपने घर के पास एक पार्क का नजारा दिखाया। उन्होंने बताया कि यह न तो वीकेंड था और न ही कोई छुट्टी का दिन। इसके बावजूद पार्क में लोग परिवार के साथ समय बिता रहे थे, पिकनिक कर रहे थे और फिटनेस पर ध्यान दे रहे थे।
‘यहां काम के बाद भी जिंदगी बचती है’
अनुष्का के मुताबिक, UK में लोग अपना काम खत्म करने के बाद परिवार और निजी जिंदगी के लिए समय निकाल पाते हैं। उनके अनुसार, शाम का समय सिर्फ घर पहुंचने और आराम करने में ही नहीं निकलता, बल्कि लोग घूमने, एक्सरसाइज करने और अपनों के साथ वक्त बिताने का मौका भी पाते हैं।
भारत में 9-5 के बाद शुरू होती है दूसरी जद्दोजहद?
अनुष्का ने भारत की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि कई लोगों के लिए ऑफिस का समय खत्म होने के बाद भी दिन खत्म नहीं होता। ऑफिस से निकलने के बाद ट्रैफिक और लंबा सफर समय ले लेता है। कई बार बॉस की तरफ से अतिरिक्त काम भी मिल जाता है। ऐसे में घर पहुंचते-पहुंचते काफी देर हो जाती है।
वीकेंड का भी नहीं मिल पाता पूरा आराम
उन्होंने कहा कि लगातार थकान के कारण कई लोग वीकेंड का इस्तेमाल भी सिर्फ आराम करने में कर देते हैं। ऐसे में परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताना या अपनी सेहत और फिटनेस पर ध्यान देना मुश्किल हो जाता है।
‘सिर्फ पैसा नहीं, क्वालिटी ऑफ लाइफ भी जरूरी’
अनुष्का का कहना है कि बेहतर वर्क-लाइफ बैलेंस भी उन वजहों में शामिल है, जिनके कारण कुछ भारतीय विदेश में बसना पसंद करते हैं। उनके मुताबिक, अच्छी नौकरी और कमाई के साथ सुकून, परिवार के लिए समय और अपनी जिंदगी जीने की आजादी भी जरूरी है।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अपनी राय रखी। कुछ लोगों ने UK के वर्क-लाइफ बैलेंस को बेहतर बताया, तो कुछ ने भारतीय वर्क कल्चर में बदलाव की जरूरत पर बात की। एक यूजर ने इसे “अनरियल वर्क-लाइफ बैलेंस” बताया, जबकि दूसरे ने कहा कि काम के बाद मिलने वाला सुकून भी बेहद जरूरी है।
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Market Trend : हॉर्मुज को लेकर घमासान से कच्चा तेल 88 डॉलर के करीब पहुंच गया है। कच्चे तेल में तेजी के बीच भारतीय बाजार के लिए नरम संकेत हैं। गिफ्ट निफ्टी में गिरावट है। FIIs की कैश में हल्की खरीदारी रही, लेकिन वायदा में बिकवाली देखने को मिली है। वहीं एशिया में भी हल्का दबाव है। शुक्रवार को अमेरिकी बाजारों में भी हल्की गिरावट देखने को मिली थी। सोने और चांदी के दाम में तेजी का सिलसिला कायम है। सोना 4400 डॉलर के ऊपर निकल गया है। चांदी भी 66 डॉलर के पार दिख रही है। डॉलर इंडेक्स 100 के नीचे है। वहीं US बॉन्ड यील्ड 4.7 के नीचे टिकी हुई है।
US-ईरान वॉर को लेकर ट्रंप का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा है कि हॉर्मुज पर US जल्द कब्जा करेगा। अमेरिका की ईरान पर अब तक सबसे बड़े इकोनॉमिक प्रतिबंध की भी धमकी आई है। इधर लेबनान में इजरायल का भीषण हमला हुआ है। नेतन्याहू ने कहा है कि अगर US कहे तो ईरान पर अटैक को तैयार हैं।
सोने और चांदी के दाम में तेजी का सिलसिला कायम है। सोना 4400 डॉलर के ऊपर निकल गया है। चांदी भी 66 डॉलर के पार दिख रही है। डॉलर इंडेक्स 100 के नीचे है। वहीं US बॉन्ड यील्ड 4.7 के नीचे टिकी है।
आज बाजार में क्या हो रणनीति?
सीएनबीसी-आवाज़ के वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी के लिए पहला रजिस्टेंस 24452-24483/24519 पर और बड़ा रजिस्टेंस 24536-24577 पर है। इसके लिए पहला बेस 24266-24309 पर और बड़ा बेस 24188-24231 पर है। FIIs का नेट शॉर्ट बढ़कर 1.76 लाख पर रहा है। 8700 शॉर्ट्स और जुड़े हैं। 24400-24500-24600 पर भारी कॉल राइटिंग हुई है। 24400-24300-24200 पर पुट राइटिंग हुई है। निफ्टी 10/20 DEMA के आसपास है और 200 DEMA के ऊपर है। 24309-24266 शुरुआती बेस है। 100-50 DEMA (बेस-2) अहम वीकली सपोर्ट है। शुरुआती रेंज 24450-24500 से 24309-24280 है। बेस के पास BUY ON DIPS की रणनीति रखें। ऊपरी रेंज में मुनाफावसूली करें। 24500-24550 बड़ी बाधा है। इसके ऊपर ही ब्रेकआउट संभव है। 24231-24188 (बेस-1) के नीचे गिरावट में बड़ा ब्रेकडाउन संभव है।
निफ्टी बैंक पर रणनीति
वीरेंद्र कुमार का कहना है कि निफ्टी बैंक के लिए पहला रजिस्टेंस 57810-58033 पर और बड़ा रजिस्टेंस 58188-58267 पर है। इसके लिए पहला बेस 57221-57333 पर और बड़ा बेस 56910-57060 पर है। यह अभी भी रेंज में है। शुक्रवार को रेंज के निचले हिस्से तक फिसला। कच्चे तेल से अभी राहत नहीं है। 57500-58000-58200 पर भारी कॉल राइटिंग हुई है। 57200-56500 के बीच 50/100/200 DEMA है। 57000 पर मेगा पुट राइटिंग हुई है।
अभी भी 58000-58200 से 57400-57200 के बीच रेंज संभव है। निफ्टी बैंक में साइडवेज मूव संभव है। बेस-1 के ऊपर ही पुलबैक की संभावना है। बेस-1 से रजिस्टेंस-1 के बीच रेंज संभव है। बेस-1 के नीचे रिवर्सल की कोशिश न करें। बेस-1 टूटने पर बेस-2 के टूटने का खतरा है,सावधानी जरूरी है।
चकाचक चार्ट वाले शेयर
चकाचक चार्ट वाले शेयर बताने के लिए हमारे साथ जुड़े हैं manasjaiswal.com के मानस जायसवाल। इनकी KFINTECH में 924 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ 970 रुपए के टारगेट के लिए और HAVELLS में 1279 रुपए के स्टॉपलॉस के साथ 1340 रुपए के टारगेट के लिए खरीदारी की सलाह है।
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Small Cap Stocks: साल 2025 की शुरुआत से आई गिरावट के बाद अब स्मॉलकैप शेयरों में जोखिम और रिटर्न का संतुलन पहले से बेहतर दिख रहा है। Ambit Asset Management का कहना है कि अब कमाई, वैल्यूएशन, कैपेक्स, घरेलू निवेश और ग्लोबल माहौल जैसे कई बड़े फैक्टर स्मॉलकैप शेयरों के पक्ष में नजर आ रहे हैं।
कंपनी का मानना है कि इस बार की गिरावट पहले जैसी नहीं थी। यह ज्यादातर वैल्यूएशन करेक्शन था, न कि क्रेडिट संकट या अर्थव्यवस्था में बड़ी कमजोरी की वजह से। आइए जानते हैं कि Ambit किन 5 कारणों से स्मॉल कैप स्टॉक्स पर दांव लगाने का सुझाव दे रहा है।
1. कमाई में फिर आई तेजी
Ambit के मुताबिक, जून 2026 तक Nifty Smallcap 250 कंपनियों का PAT सालाना आधार पर करीब 27% बढ़ा है। यह ग्रोथ लार्जकैप कंपनियों से भी बेहतर रही।
पिछली दो तिमाहियों में रेवेन्यू और EBITDA दोनों में सुधार आया है। साथ ही FY27 के लिए कमाई के अनुमान भी बढ़ाए गए हैं।
2. वैल्यूएशन पहले से ज्यादा आकर्षक
स्मॉलकैप शेयरों में सबसे बड़ा वैल्यूएशन रीसेट देखने को मिला है। जुलाई 2026 तक करीब 47% स्मॉलकैप शेयर अपने 10 साल के औसत वैल्यूएशन से नीचे ट्रेड कर रहे थे।
तुलना करें तो मिडकैप में यह आंकड़ा 31% और लार्जकैप में 27% था। 18 में से 12 स्मॉलकैप सेक्टर अब अपने लंबे समय के औसत वैल्यूएशन से नीचे आ चुके हैं।
3. कैपेक्स मजबूत बना हुआ है
FY26 में लिस्टेड कंपनियों का कुल कैपिटल एक्सपेंडिचर 9% बढ़कर ₹11.5 लाख करोड़ पहुंच गया। इसमें मिडकैप कंपनियों का कैपेक्स 16% और स्मॉलकैप कंपनियों का 13% बढ़ा।
Ambit का अनुमान है कि अगले चार साल में पावर, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसे सेक्टरों में ₹20-25 लाख करोड़ का अतिरिक्त निवेश हो सकता है।
4. घरेलू निवेशकों का बढ़ा भरोसा
स्मॉलकैप म्यूचुअल फंड में निवेश तेजी से बढ़ा है। FY22 में जहां नेट इनफ्लो ₹10,145 करोड़ था, वहीं FY26 में यह बढ़कर ₹51,872 करोड़ पहुंच गया।
साथ ही Nifty Smallcap 250 में ट्रेडिंग एक्टिविटी भी फरवरी 2025 के मुकाबले जून 2026 तक काफी बढ़ गई है, जिससे बाजार में लिक्विडिटी बेहतर हुई है।
5. ट्रेड डील से मिल सकता है फायदा
Ambit का कहना है कि भारत के नए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट का सबसे ज्यादा फायदा स्मॉलकैप कंपनियों को मिल सकता है। खासकर कैपिटल गुड्स, ऑटो कंपोनेंट, केमिकल, टेक्सटाइल, पावर और मेटल सेक्टर की कंपनियां इससे लाभ उठा सकती हैं।
इसके अलावा अमेरिका-ईरान संघर्ष के बाद बने सीजफायर माहौल और भारत-अमेरिका ट्रेड वार्ता में प्रगति से भी निवेशकों का भरोसा मजबूत हुआ है।
निवेशकों के लिए क्या मतलब है?
Ambit Asset Management का मानना है कि स्मॉलकैप शेयरों में फिर से तेजी के लिए जरूरी कई हालात बनते दिख रहे हैं। हालांकि, हर स्मॉलकैप शेयर एक जैसा नहीं होता। इसलिए मजबूत बैलेंस शीट, बेहतर कमाई और उचित वैल्यूएशन वाली कंपनियों का चयन करना ज्यादा अहम रहेगा।
Amber Enterprises: ओप्पो, वनप्लस और रियलमी के फोन बनाएगी कंपनी, अगले साल से प्रोडक्शन शुरू होगा
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– उत्तर प्रदेश पुलिस के थीम गीत ‘खाकी का सितारा’ के विमोचन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे अभिनेता नाना पाटेकर
– नाना पाटेकर बोले- योगी सरकार ने लोगों की सुरक्षा को दी सर्वोच्च प्राथमिकता
– फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने की यूपी की कानून व्यवस्था की सराहना
– नाना पाटेकर बोले- 25 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में सुरक्षा आसान नहीं
Film actor Nana Patekar : प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था की जमकर सराहना की. उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि इतने बड़े और विविधताओं से भरे प्रदेश में प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखना आसान नहीं है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था को शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल किया गया है और इसके सकारात्मक परिणाम आज स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।
लखनऊ में उत्तर प्रदेश पुलिस के थीम गीत ‘खाकी का सितारा’ के विमोचन कार्यक्रम में नाना पाटेकर ने कहा कि लगभग 25 करोड़ की आबादी वाले प्रदेश में केवल पुलिस बल की संख्या बढ़ाने से सुरक्षा सुनिश्चित नहीं होती, बल्कि इसके लिए मजबूत नेतृत्व, स्पष्ट नीति और दृढ़ इच्छाशक्ति की आवश्यकता होती है।
उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बधाई देते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पुलिस को आधुनिक संसाधन, नई तकनीक और आत्मविश्वास प्रदान किया गया है, जिससे कानून व्यवस्था मजबूत हुई है। नाना पाटेकर ने कहा कि पिछले कई दशकों में उन्होंने उत्तर प्रदेश में उल्लेखनीय परिवर्तन देखा है।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में कानून व्यवस्था के प्रति लोगों का विश्वास बढ़ा है, प्रशासनिक व्यवस्था में सुधार दिखाई देता है और सरकार की कार्यशैली में निर्णय लेने की स्पष्टता नजर आती है। उन्होंने कहा कि पुलिस जितनी आधुनिक होगी, नागरिक उतना सुरक्षित होगा और नागरिक जितना जागरूक होगा, अपराधियों के लिए काम करना उतना ही कठिन हो जाएगा।
नाना पाटेकर ने साइबर अपराध और डिजिटल अरेस्ट जैसे बढ़ते खतरों पर भी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि साइबर अपराध आज एक वास्तविक चुनौती है और इसका शिकार कोई भी हो सकता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि यदि कोई व्यक्ति पुलिस, सीबीआई या किसी अन्य एजेंसी का अधिकारी बनकर फोन या वीडियो कॉल के माध्यम से डराने और पैसे मांगने का प्रयास करे, तो तुरंत सतर्क हो जाएं। उन्होंने कहा कि साइबर अपराधियों का सबसे बड़ा हथियार तकनीक नहीं, बल्कि लोगों का डर होता है।
उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा डिजिटल अरेस्ट के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए बनाई गई फिल्म की भी सराहना की और कहा कि यदि कलाकारों की भागीदारी से किसी परिवार की जीवनभर की कमाई बचाई जा सकती है या किसी बुजुर्ग को ठगी से बचाया जा सकता है, तो इससे बड़ा सामाजिक योगदान और कुछ नहीं हो सकता।
नाना पाटेकर ने उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारियों और जवानों के कार्यों की प्रशंसा करते हुए कहा कि पुलिसकर्मियों के पास फिल्मों की तरह रीटेक का अवसर नहीं होता। उन्हें कठिन परिस्थितियों में तत्काल निर्णय लेने पड़ते हैं और यही उनकी सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि उत्तर प्रदेश पुलिस जनता के भरोसे को आगे भी बनाए रखेगी तथा प्रदेश को और अधिक सुरक्षित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रहेगी।
Amber Enterprises: इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग कंपनी Amber Enterprises India अगले साल से चीन की स्मार्टफोन कंपनियों Oppo, OnePlus और Realme के लिए भारत में फोन बनाना शुरू करेगी। कंपनी ने कहा है कि ट्रायल प्रोडक्शन वित्त वर्ष 2027 की चौथी तिमाही में शुरू होगा। वहीं, कमर्शियल प्रोडक्शन FY28 की पहली तिमाही यानी मार्च 2027 के बाद शुरू होने की उम्मीद है।
पहले साल 80 लाख का टारगेट
एंबर एंटरप्राइजेज के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन और CEO जसबीर सिंह ने बताया कि पहले साल करीब 80 लाख स्मार्टफोन बनाने का लक्ष्य है। दूसरे साल इसे बढ़ाकर 1.5 से 1.6 करोड़ यूनिट तक पहुंचाने की योजना है। कंपनी ने अपने मोबाइल कारोबार के लिए नया COO भी नियुक्त किया है।
कंपनी ने Oppo Mobiles India के साथ मैन्युफैक्चरिंग सहयोग समझौता किया है। इसके तहत कंपनी Oppo, OnePlus और Realme तीनों ब्रांड के स्मार्टफोन बनाएगी।
चीन की कंपनियां अपना मॉडल बदल रहीं
ये कदम इस बात का संकेत माना जा रहा है कि चीन की स्मार्टफोन कंपनियां भारत में खुद फैक्ट्री चलाने की बजाय कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग मॉडल अपनाने लगी हैं। अभी Oppo के कुछ फोन Vivo की नोएडा फैक्ट्री में भी बनते हैं। वहीं, Vivo अपनी फैक्ट्री को Dixon Technologies के साथ जॉइंट वेंचर में ट्रांसफर करने की प्रक्रिया में है।
भारतीय बाजार में मजबूत पकड़
Counterpoint Research के मुताबिक, 2026 की दूसरी तिमाही में Vivo की भारतीय स्मार्टफोन बाजार में 17.8% हिस्सेदारी रही। Samsung 17.6% के साथ दूसरे नंबर पर रहा, जबकि Oppo की हिस्सेदारी 13.6% रही। अगर Vivo, iQOO, Oppo, Realme और OnePlus को मिलाकर देखें, तो इन ब्रांड्स की संयुक्त हिस्सेदारी 45.6% रही।
PCB कारोबार में दबाव
एंबर एंटरप्राइजेज ने बताया कि उसके PCB कारोबार में फिलहाल मार्जिन पर दबाव है। इसकी वजह Copper-Clad Laminate (CCL) की बढ़ती कीमतें हैं। हालांकि, कंपनी धीरे-धीरे इस अतिरिक्त लागत का बोझ ग्राहकों तक पहुंचा रही है।
Amber Enterprises की योजना 2029-30 तक अपना CCL प्लांट लगाने की भी है। इससे भविष्य में कच्चे माल पर निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
एंबर एंटरप्राइजेज के शेयरों का हाल
एंबर एंटरप्राइजेज का शेयर पिछले कारोबारी सत्र में 0.68% बढ़कर 7,224 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 9.89% गिरा है। वहीं, 1 साल में यह 2.88% टूटा है। हालांकि, बीते 5 साल में इसने 158% का मल्टीबैगर रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 24.48 हजार करोड़ रुपये है।
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
LPG Supply Plan: भारत सरकार ने पहली बार हर रिफाइनरी और कंपनी के लिए LPG प्रोडक्शन की अधिकतम सीमा तय कर दी है। इसका मकसद है कि अगर भविष्य में गैस सप्लाई पर संकट आए, तो देश में रसोई गैस की कमी न हो।
यह फैसला पश्चिम एशिया में हुए संघर्ष के बाद लिया गया है। उस दौरान आयात प्रभावित हुआ था और सरकार को आपातकालीन कदम उठाने पड़े थे।
13 अगस्त को पेट्रोलियम मंत्रालय ने 21 रिफाइनरियों और अपस्ट्रीम कंपनियों के लिए कुल 63,810 टन प्रतिदिन LPG उत्पादन क्षमता तय की। यह देश की मौजूदा रोजाना खपत का करीब 70% है। तुलना करें तो FY26 में भारत का घरेलू उत्पादन सिर्फ 35,900 टन प्रतिदिन था।
रिलायंस को मिली सबसे बड़ी क्षमता
सरकार ने गुजरात के जामनगर स्थित Reliance Industries की घरेलू बाजार वाली रिफाइनरी के लिए सबसे ज्यादा 18,000 टन प्रतिदिन की क्षमता तय की है।
सरकारी तेल कंपनियों की 18 रिफाइनरियों को मिलाकर 31,470 टन प्रतिदिन की क्षमता मिली है। वहीं Nayara Energy की वाडिनार रिफाइनरी को 4,480 टन प्रतिदिन और ONGC व GAIL जैसी कंपनियों को मिलाकर 6,460 टन प्रतिदिन की क्षमता दी गई है।
सरकार को यह कदम क्यों उठाना पड़ा?
FY26 में भारत ने 3.32 करोड़ टन LPG की खपत की। इसमें घरेलू उत्पादन सिर्फ 1.31 करोड़ टन रहा। बाकी 2.13 करोड़ टन गैस बाहर से मंगानी पड़ी। यानी देश की 60% से ज्यादा जरूरत आयात पर टिकी रही।
ईरान संघर्ष के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य से सप्लाई प्रभावित हुई थी। तब सरकार ने रिफाइनरियों से कहा था कि पेट्रोकेमिकल की बजाय ज्यादा LPG बनाएं। इससे उत्पादन बढ़कर करीब 55,000 टन प्रतिदिन तक पहुंच गया था।
अब हर संकट के लिए पहले से प्लान तैयार
नई व्यवस्था में सरकार जरूरत पड़ने पर रिफाइनरियों और तेल कंपनियों को तय समय के लिए उत्पादन बढ़ाने का आदेश दे सकेगी। कंपनियों को स्टोरेज, ट्रांसपोर्ट और सप्लाई की तैयारी भी पहले से रखनी होगी।
सरकार चाहती है कि रिफाइनरियां नई तकनीक अपनाकर और ज्यादा LPG निकालने के तरीके भी खोजें। इसके लिए नैफ्था को LPG में बदलने और रिफाइनरी यूनिट अपग्रेड करने जैसे विकल्पों पर काम करने को कहा गया है।
हर छह महीने में होगी समीक्षा
यह व्यवस्था एक बार बनाकर छोड़ नहीं दी जाएगी। सरकार हर साल 1 जनवरी और 1 जुलाई को इस सूची की समीक्षा करेगी। नई रिफाइनरियां, गैस प्रोजेक्ट और बढ़ी हुई क्षमता इसमें जोड़ी जाएगी। इससे भविष्य में विदेशों से सप्लाई रुकने पर भी घरेलू गैस व्यवस्था संभालना आसान होगा।
Stocks to Watch: सोमवार 17 अगस्त को 20 शेयरों पर रहेगी नजर, मिल सकता है तगड़ी कमाई का मौका
Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।
Awarapan 2: इमरान हाशमी इन दिनों बहुत खुश हैं, क्योंकि उनकी 2007 की फ़िल्म ‘आवारापन’ का सीक्वल बॉक्स ऑफ़िस पर हिट साबित हो रहा है। एक्टर की इस नई फिल्म को क्रिटिक्स और दर्शकों, दोनों से ही काफी अच्छे रिव्यूज मिले हैं और कई दर्शक तो ओरिजिनल फ़िल्म से जुड़ी पुरानी यादों को भी पसंद कर रहे हैं। हालांकि, फैन्स ने ‘आवारापन 2’ में एक बात पर ध्यान दिया कि इसमें इमरान का कोई किसिंग सीन नहीं है।
‘सब लोग मर्डर वाले इमरान हाशमी को ढूंढ रहे थे’
अपने करियर के शुरुआती सालों में ‘सीरियल किसर’ के रूप में मशहूर इमरान फिल्मों में इंटीमेट सीन और जोशीले रोमांस के लिए जाने जाते थे। हालांकि, प्रशंसकों ने गौर किया कि इमरान की नई फिल्म में कोई किसिंग सीन नहीं है और इस पर कई लोगों ने मजेदार प्रतिक्रियाएं दीं। कुछ प्रशंसकों ने तो मजाक में यह भी कहा कि वे फिल्म में ‘पुराने’ इमरान हाशमी को ढूंढ रहे हैं।
एक यूजर ने लिखा था, “उम्र हो गई है वो वाला इमरान हाशमी अब नहीं रहा।” एक अन्य दर्शक ने लिखा, “सब यहां इस सीन में मर्डर वाले इमरान हाशमी को ढूंढ रहे हैं।” एक और कमेंट में लिखा था, “इमरान हाशमी को बिना किसिंग सीन के देखना गैरकानूनी सा लगता है।” एक और कमेंट में लिखा था, “इमरान भाई, दिशा को किस कर लो ना, आलिया देख तो नहीं रही है ना। Awarapan2।”
एक और कमेंट में लिखा था, “मैंने अपनी मम्मी से कहा था कि हमें कुछ और देखना चाहिए क्योंकि इमरान हाशमी इस फिल्म में हैं। पता चला कि इसमें एक भी नॉर्मल किस सीन नहीं था, और कहानी तो वाकई बहुत अच्छी थी।”
‘उन्होंने खुद इसे कम किया और इससे दूर हो गए’
हालांकि, हर किसी ने किसिंग सीन न होने को नकारात्मक रूप से नहीं देखा। कुछ फैंस ने इस बात की सराहना की कि इमरान अपने करियर की शुरुआत में बनी अपनी छवि से आगे बढ़ चुके हैं। एक सोशल मीडिया यूज़र ने कमेंट कहा, “वह शादीशुदा हैं। उन्होंने खुद इसे कम किया और कामुक फिल्मों से दूर हो गए। कम से कम इसकी तो सराहना करें।” एक अन्य दर्शक ने बस इतना लिखा, “अच्छा है कि कोई किसिंग सीन नहीं है।”
अपनी इमेज बदलने पर इमरान हाशमी
एक पुरानी बातचीत में, इमरान ने ‘सीरियल किसर’ वाली इमेज से बाहर निकलने और इस बात पर चर्चा की कि कैसे यह आज भी उनके करियर से जुड़ी एक अहम बात बनी हुई है। उन्होंने हिंदुस्तान टाइम्स से कहा, “होता यह है कि जब आपकी इमेज इतनी मज़बूत हो जाती है – खासकर भारत जैसे बहुत रूढ़िवादी समाज में – तो लोग उसे ही पकड़े रहते हैं। जैसे, अगर आप कुछ दिन पहले हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस में लोगों को देखें, तो वहां भी किस (kiss) को लेकर सवाल उठ ही गया। लेकिन भारत ऐसा ही है। लोग अभी भी उसी चीज़ में उलझे रहते हैं। आपको बस आगे बढ़कर खेलना होगा और अपनी वर्सटैलिटी (अलग-अलग तरह के रोल करने की काबिलियत) दिखाने के लिए कुछ करना होगा। बस बाहर निकलिए और जो काम आप कर रहे हैं, उसमें हिम्मत दिखाइए।”
पिछले कुछ सालों में, इमरान ने सोच-समझकर अलग-अलग तरह की फ़िल्मों और किरदारों में काम किया है, जिनमें ‘हक़’, ‘ग्राउंड ज़ीरो’, ‘चेहरे’, ‘सेल्फ़ी’ और दूसरी फ़िल्में शामिल हैं। ‘आवारापन 2’, 2007 की फ़िल्म ‘आवारापन’ का सीक्वल है। इसमें इमरान हाशमी, दिशा पाटनी और शबाना आज़मी हैं और इसे नितिन कक्कड़ ने डायरेक्ट किया है। यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर हिट रही है। अब तक भारत में इसकी कुल नेट कमाई ₹67.46 करोड़ रही है।


