Delhi Holiday: दिल्ली में 11 सितंबर से लेकर लगातार 3 दिन छुट्टी! जानिए क्या बंद रहेगा और कौन सी सर्विस रहेंगी चालू

BRICS Summit 2026 In Delhi: राष्ट्रीय राजधानी में होने वाले 18वें ब्रिक्स लीडर्स समिट को देखते हुए दिल्ली में केंद्र सरकार के सभी दफ्तर 11 सितंबर 2026 (शुक्रवार) को बंद रहेंगे। BRICS समिट 2026 के लिए बड़े पैमाने पर लॉजिस्टिकल इंतजाम करने और आम लोगों को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए नई दिल्ली इलाके में सभी केंद्र सरकार के ऑफिस शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को बंद रहेंगे।

सरकार ने गुरुवार (3 सितंबर) को इस बारे में एक नोटिफिकेशन जारी कर कहा कि BRICS बिजनेस फोरम और 18वां BRICS लीडर्स समिट 11 से 13 सितंबर 2026 को नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में आयोजित किया जाएगा। इस समिट में लगभग तीस BRICS सदस्य और पार्टनर देशों के नेता, इंटरनेशनल संगठनों के प्रमुख और भारत सहित BRICS देशों के बिजनेस प्रतिनिधि शामिल होंगे।

लगातार तीन दिन मिलेगी छुट्टी

कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय की तरफ से गुरुवार (3 सितंबर) को जारी एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, दिल्ली और नई दिल्ली में केंद्र सरकार के दफ्तरों को बंद करने का फैसला इस कार्यक्रम के बड़े पैमाने और इस हाई-लेवल समिट के आयोजन के लिए ज़रूरी बड़े लॉजिस्टिकल इंतज़ामों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। 11 सितंबर के अगले दिन शनिवार और रविवार है। यानी केंद्रीय कर्मचारियों को 11 सितंबर से लगातार तीन दिन छुट्टी मिलेगी।

11 से 13 सितंबर तक आयोजित होगा समिट

BRICS बिजनेस फोरम और 18वां BRICS लीडर्स समिट नई दिल्ली के ‘भारत मंडपम’ में 11 से 13 सितंबर तक आयोजित होने हैं। इस समिट में भारत समेत BRICS देशों के बिजनेस प्रतिनिधियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुखों के अलावा, लगभग 30 BRICS सदस्य और पार्टनर देशों के नेता शामिल होंगे। इस कदम का मकसद समिट के दौरान आम जनता को होने वाली परेशानी को कम करना भी है। इसके लिए राजधानी में बड़े पैमाने पर सुरक्षा और ट्रैफिक इंतजाम किए जाएंगे। यह बंदी 11 सितंबर (शुक्रवार) को लागू होगी। जबकि 12 और 13 सितंबर को क्रमशः शनिवार और रविवार है।

BRICS देशों के दिग्गज होंगे शामिल

एक आदेश में कहा गया है, “मुझे यह बताने का निर्देश दिया गया है कि BRICS बिजनेस फोरम और 18वां BRICS लीडर्स समिट 11-13 सितंबर, 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित होने वाला है। समिट में लगभग तीस BRICS सदस्य और पार्टनर देशों के नेता, अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रमुख और भारत सहित BRICS देशों के बिजनेस प्रतिनिधि शामिल होंगे। इस कार्यक्रम के बड़े पैमाने और इसमें शामिल लॉजिस्टिकल इंतजामों को देखते हुए और आम जनता को होने वाली परेशानी को कम करने के लिए यह निर्णय लिया गया है कि दिल्ली/नई दिल्ली में स्थित केंद्र सरकार के दफ्तर शुक्रवार, 11 सितंबर 2026 को बंद रखे जाएं (12 और 13 सितंबर 2026 को क्रमशः शनिवार और रविवार है)।”

25 शहरों में 350 से ज्यादा बैठकें होंगी

इस साल भारत की अध्यक्षता में ब्रिक्स समिट देश भर के 25 से ज्यादा शहरों में 350 से अधिक बैठकें और उच्च-स्तरीय कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों और बिजनेस-टू-बिजनेस तथा लोगों के बीच आपसी पहल के जरिए भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता ने व्यावहारिक और विकास-उन्मुख नतीजों के माध्यम से ब्रिक्स सहयोग को आगे बढ़ाने में योगदान दिया है।

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भारत ‘ब्रिक्स’ का एक संस्थापक सदस्य है। इससे पहले भारत 2012, 2016 और 2021 में इसकी अध्यक्षता कर चुका है। भारत ने 1 जनवरी 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली। साल 2026 एक महत्वपूर्ण पड़ाव भी है क्योंकि ब्रिक्स अपनी स्थापना के बीस साल पूरे कर रहा है।

गडकरी पूरे देश में चाहते हैं बाइक टैक्सी पर राज्यों के हाथ में चाबी! ऐसा हुआ तो 8 करोड़ लोगों को होने लगेगी टू-व्हीलर से कमाई

Bike Taxi Update: केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने प्राइवेट टू-व्हीलर का इस्तेमाल सवारी ढोने यानी बाइक टैक्सी के रूप में करने की वकालत की है। उन्होंने राज्यों से अपील की है कि वे निजी मोटरसाइकिल और स्कूटर मालिकों को यात्रियों को ले जाने की अनुमति दें। गडकरी का तर्क है कि अगर ऐसा हुआ तो ग्रामीण इलाकों में करीब 8 करोड़ लोगों के लिए कमाई के नए मौके पैदा हो सकते हैं। वैसे आपको बता दें कि केंद्र सरकार भले ऐसा चाह ले लेकिन इसक बावजूद यह पूरी तरह से राज्यों पर निर्भर करता है कि वे अपने अधिकार क्षेत्र में बाइक टैक्सी चलाने की इजाजत देते हैं या नहीं।

राज्यों के पास क्यों है अंतिम फैसला?

महाराष्ट्र में सरकार के ‘सुरक्षा’ पायलट प्रोग्राम के शुभारंभ के दौरान नितिन गडकरी ने कहा कि, ‘हमने इसकी अनुमति दे दी है, लेकिन कुछ राज्य ऐसा नहीं कर रहे हैं। ट्रांसपोर्ट स्टेट सब्जेक्ट है। मैं उनसे ऐसा करने का आग्रह करूंगा क्योंकि इससे कई लोगों को आजीविका का साधन मिलेगा।’ Motor Vehicle Aggregator Guidelines, 2025 एक ऐसा फ्रेमवर्क देती है जिससे एग्रीगेटरों को पैसेंजर जर्नी के लिए नॉन-ट्रांसपोर्ट मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल करने की अनुमति दे सकते हैं।

क्या आपकी अपनी बाइक बन सकती है टैक्सी?

हर जगह खुद ब खुद किसी प्राइवेट बाइक का इस्तेमाल टैक्सी के रूप में नहीं किया जा सकता है। अलग-अलग राज्यों में इसे लेकर अलग-अलग रूल हैं। इसे कर्नाटक और महाराष्ट्र के हिसाब से समझा जा सकता है। इस साल जनवरी में कर्नाटक हाई कोर्ट ने कहा था कि मोटरसाइकिलों का इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट गाड़ियों के रूप में किया जा सकता है और अधिकारियों को पीले रंग की प्लेट रजिस्ट्रेशन और कॉन्ट्रैक्ट पैसेंजर्स कैरियर्स के रूप में काम करने के लिए परमिट मांगने वाले मालिकों के आवेदनों पर विचार करने का निर्देश दिया था। हालांकि राज्य सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा, इंश्योरेंस, महिलाओं की सेफ्टी और बाइक टैक्सियों के लिए एक व्यापक फ्रेमवर्क की कमी से जुड़ी चिंताओं का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में इस फैसले को चुनौती दी।

दूसरी ओर महाराष्ट्र ने 2025 में अपने बाइक-टैक्सी नियमों को नोटिफाइड कर दिया था। इसमें एग्रीगेटर्स, परमिट और ऑपरेटिंग कंडिशन को कवर करने वाले प्रावधान शामिल हैं। इस फ्रेमवर्क में ई-बाइक और स्कूटर भी शामिल हैं।

ट्रैफिक नियमों के लिए ‘नेगेटिव पॉइंट सिस्टम’ और ‘सुरक्षा’ कार्यक्रम

बाइक टैक्सी पर बात करने के साथ ही गडकरी ने भारत के सड़क सुरक्षा नियमों में एक और प्रस्तावित बदलाव की जानकारी दी है। मंत्रालय ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन के लिए एक नेगेटिव पॉइंट सिस्टम पेश करने की तैयारी कर रहा है। इस प्रस्तावित सिस्टम के तहत बार-बार नियम तोड़ने वाले ड्राइवरों के नेगेटिव पॉइंट जमा होंगे और दोबारा उल्लंघन करने वालों का ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जा सकता है। इस कदम का उद्देश्य जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार को बढ़ावा देना है।

आपको बता दें कि सुरक्षा नाम के पायलट कार्यक्रम का उद्देश्य राजमार्गों और खनन कार्यों में शामिल ड्राइवरों और श्रमिकों को मुफ्त चिकित्सा जांच, परामर्श देना है। यह पायलट प्रोजेक्ट एनएच 44 पर नागपुर से काम्टी तक 150 किलोमीटर के हिस्से और चंद्रपुर के खनन क्षेत्र को कवर करेगा। इसमें शुरुआती चरण में 10000 लोगों को शामिल करने का लक्ष्य रखा गया है।

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PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: दिल्ली के 2.30 लाख परिवारों को तोहफा! घर की छत पर मुफ्त लगेगा 3 KW का सोलर पैनल, सरकार देगी ₹78,000 की सब्सिडी

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana: देश की राजधानी दिल्ली के लाखों बिजली उपभोक्ताओं के लिए बड़ी राहत वाली खबर है। दिल्ली सरकार ने राजधानी के 2.30 लाख घरों की छतों पर तीन किलोवाट क्षमता का रूफटॉप सोलर पैनल लगाने की योजना को मंजूरी दे दी है। खास बात यह है कि पात्र परिवारों को इसके लिए अपनी जेब से शुरुआती रकम खर्च नहीं करनी होगी। योजना के तहत केंद्र और दिल्ली सरकार की ओर से सब्सिडी का प्रावधान है। सोलर सिस्टम लगाने का काम भी सरकार की ओर से कराया जाएगा।

‘पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के तहत केंद्र सरकार की ओर से 78,000 रुपये की सब्सिडी प्रदान की जाएगी। यह फैसला मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में लिया गया। सरकार का लक्ष्य मार्च 2027 तक सभी पात्र घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने का है। इसके लिए संबंधित विभागों को प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए गए हैं।

400 यूनिट तक बिजली खपत वाले घरों को मिलेगा फायदा

इस योजना का सबसे बड़ा फायदा उन परिवारों को मिलने की उम्मीद है, जिनकी औसत मासिक बिजली खपत 400 यूनिट तक है। तीन किलोवाट का रूफटॉप सोलर सिस्टम घरेलू जरूरतों के एक बड़े हिस्से की बिजली पैदा करने में मदद करेगा। इससे ऐसे परिवारों के बिजली खर्च में कमी आने की संभावना है। सरकार का मकसद केवल बिजली का बिल कम करना नहीं है। बल्कि दिल्ली के घरों को बिजली उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाना भी है। यानी जिस घर की छत पर सोलर पैनल लगेगा, वह खुद बिजली पैदा कर सकेगा। इससे अपनी जरूरत के मुताबिक उसका इस्तेमाल कर सकेगा।

78 हजार रुपये तक की सब्सिडी का प्रावधान

PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana के तहत सोलर सिस्टम लगाने पर केंद्र सरकार की ओर से 78,000 रुपये तक की सब्सिडी दी जाती है। इसके अलावा दिल्ली सरकार भी 78 हजार रुपये तक की पूंजीगत सब्सिडी देने की व्यवस्था करेगी। इस तरह पात्र उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए बड़ी रकम का बोझ उठाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

‘पीएम सूर्य घर’ योजना के मुताबिक, इंस्टॉलेशन का काम भी सरकार की ओर से कराया जाएगा। सरकार ने इस महत्वाकांक्षी योजना को समयबद्ध तरीके से पूरा करने का खाका तैयार किया है। इसके तहत मार्च 2027 तक सभी पात्र 2.30 लाख घरों की छतों पर सोलर सिस्टम इंस्टॉल करने का लक्ष्य रखा गया है।

लाभ लेने के लिए पहले पैसे जमा कराने की जरूरत नहीं

इस योजना की एक अहम बात यह है कि उपभोक्ताओं को सोलर सिस्टम लगवाने के लिए कोई एडवांस राशि नहीं देनी होगी। सरकार की ओर से प्रक्रिया पूरी कराकर पात्र घरों पर सिस्टम लगाया जाएगा। हालांकि, यदि सोलर सिस्टम की कुल लागत और उपलब्ध सब्सिडी के बीच अंतर रहता है, तो राज्य सरकार द्वारा किए जाने की बात कही गई है। इससे आम परिवारों के लिए योजना का लाभ लेना आसान होगा।

घरों को बिजली उत्पादक बनाना लक्ष्य

दिल्ली सरकार का कहना है कि योजना का उद्देश्य केवल बिजली के बिल में कमी लाना नहीं है। इसके जरिए घरों को क्लीन एनर्जी का उत्पादक बनाना भी लक्ष्य है। रूफटॉप सोलर से पारंपरिक बिजली पर निर्भरता कम होगी और सौर ऊर्जा का इस्तेमाल बढ़ेगा। इससे लंबे समय में बिजली की मांग और पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है। साथ ही दिल्ली में प्रदूषण और कार्बन उत्सर्जन कम करने की दिशा में भी यह कदम महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

मार्च 2027 तक पूरा करने की तैयारी

सरकार ने PM Surya Ghar Muft Bijli Yojana को तेजी से लागू करने की तैयारी शुरू कर दी है। लक्ष्य रखा गया है कि मार्च 2027 तक 2.30 लाख पात्र घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाया जाए। इसके लिए विभागीय स्तर पर प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। इससे दिल्ली के बड़ी संख्या में परिवारों को लंबे समय तक बिजली खर्च में राहत मिलने की उम्मीद है। खासकर मध्यम और कम बिजली खपत वाले परिवारों के लिए यह योजना घरेलू बजट पर पड़ने वाले खर्च को कम करने में मददगार साबित हो सकती है।

दिल्ली में बढ़ेगा रूफटॉप सोलर का इस्तेमाल

दिल्ली जैसे बड़े शहर में घरों की छतों का इस्तेमाल सौर ऊर्जा उत्पादन के लिए करना सरकार की ऊर्जा नीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यदि 2.30 लाख घरों पर सोलर सिस्टम लगाए जाते हैं, तो इससे राजधानी में स्वच्छ और रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़ेगी।

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सरकार का दावा है कि यह पहल दिल्ली को रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के साथ-साथ आम लोगों को बिजली के बढ़ते खर्च से राहत देने में भी अहम भूमिका निभाएगी। आने वाले महीनों में पात्र परिवारों को योजना से जोड़ने और सिस्टम लगाने की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद है। उपभोक्ताओं को सोलर पैनल लगवाने के लिए किसी भी तरह का एडवांस भुगतान नहीं करना होगा।

8th Pay Commission: पेंशनर्स के लिए बड़ी खबर! इस डेट से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन रिवीजन पर आयोग ने उठाया ये कदम

8th CPC Pension Revision Update: 8वां वेतन आयोग की बैठकों के बीच देश के लाखों पेंशनर्स के लिए एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक हलचल देखने को मिल रही है। 1 जनवरी 2026 से पहले सेवानिवृत्त हो चुके कर्मचारियों की पेंशन संशोधन की मांग को लेकर बड़ा अपडेट सामने आया है।

कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 8वें वेतन आयोग के नियम और शर्तों (ToR) में संशोधन की मांग करने वाले आवेदनों को अंतिम विचार और उचित कार्रवाई के लिए वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पास भेज दिया है। आइए आपको बताते हैं कि पेंशन संगठनों ने क्या मांग रखी है और इस कदम का पूर्व कर्मचारियों पर क्या असर पड़ेगा।

किन पेंशनभोगी संगठनों ने भेजी है अर्जी?

DoPT ने जिन दो मुख्य कर्मचारी/पेंशनभोगी संगठनों के ज्ञापनों को व्यय विभाग को फॉरवर्ड किया है, उनके नाम ये हैं:

1- ऑल इंडिया आरएमएस, एमएमएस एंड पोस्टल पेंशनर्स एसोसिएशन: संगठन के महासचिव गिरिराज सिंह द्वारा 30 जुलाई 2026 को भेजा गया आवेदन।

2- ऑल इंडिया डिफेंस एंप्लाइज फेडरेशन: संगठन के महासचिव सी. श्रीकुमार द्वारा 4 अगस्त 2026 को प्रस्तुत किया गया आवेदन।

DoPT ने 18 अगस्त 2026 के अपने ऑफिस मेमोरेडम में स्पष्ट किया है कि इन ज्ञापनों पर ‘उचित कार्रवाई’ के लिए इन्हें व्यय विभाग को सौंपा जा रहा है।

पेंशनभोगियों की मुख्य मांग क्या है?

पेंशनभोगी संगठनों की प्राथमिक मांग यह है कि 8वें वेतन आयोग के Terms of Reference में संशोधन किया जाए। वर्तमान में पेंशनभोगी चाहते हैं कि आयोग के अधिकार क्षेत्र में 1 जनवरी 2026 से पहले रिटायर हुए कर्मचारियों की पेंशन संशोधन के मुद्दे को स्पष्ट रूप से शामिल किया जाए, ताकि जब आयोग वेतन और पेंशन ढांचे की समीक्षा करे, तो पुराने पेंशनभोगियों के हितों की भी अनदेखी न हो।

क्या पेंशन संशोधन को मंजूरी मिल गई है?

नहीं, बिल्कुल नहीं। DoPT के मेमोरेंडम को लेकर किसी भी प्रकार का भ्रम नहीं होना चाहिए। DoPT ने अभी केवल पेंशनभोगियों की मांग को वित्त मंत्रालय को स्थानांतरित किया है। इस आदेश में पेंशन संशोधन को मंजूरी नहीं दी गई है और न ही ToR में कोई संशोधन हुआ है। इस मेमोरेंडम में किसी भी फिटमेंट फैक्टर, संशोधित पेंशन फॉर्मूले या अतिरिक्त लाभ का ऐलान नहीं किया गया है। आयोग के ToR में बदलाव का निर्णय केवल केंद्र सरकार के औपचारिक आदेश द्वारा ही संभव है।

चौथे वेतन आयोग (1985) का दिया गया ऐतिहासिक संदर्भ

पेंशनभोगी संगठनों ने अपनी मांग के समर्थन में ऐतिहासिक मिसाल का हवाला दिया है।8 नवंबर 1985 को वित्त मंत्रालय ने एक प्रस्ताव पारित कर चौथे वेतन आयोग के नियम और शर्तों (ToR) में संशोधन किया था। इसके जरिए आयोग को यह विशेष जिम्मेदारी दी गई थी कि वह पुराने और नए दोनों पेंशनभोगियों के लिए एक न्यायसंगत पेंशन ढांचे की समीक्षा करे।

इसी तर्ज पर संगठन चाहते हैं कि 8वें वेतन आयोग में भी पुरानी और नई पेंशन दरों के बीच तालमेल बिठाने के लिए ToR में संशोधन किया जाए।

आगे क्या होगा?

अब यह पूरा मामला वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के पाले में है। व्यय विभाग इन ज्ञापनों की समीक्षा करेगा और यह तय करेगा कि क्या 8वें वेतन आयोग के ToR में संशोधन का प्रस्ताव कैबिनेट को भेजा जाना चाहिए या नहीं। जब तक वित्त मंत्रालय या कैबिनेट की ओर से कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं होती, तब तक 1 जनवरी 2026 से पहले के सेवानिवृत्त कर्मचारियों की पेंशन समीक्षा पर अंतिम निर्णय का इंतजार करना होगा।

CJP Protest Marc h: 5 सितंबर के दिल्ली मार्च पर SC ने क्यों नहीं लगाई रोक? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

CJP Protest Marc h: 5 सितंबर के दिल्ली मार्च पर SC ने क्यों नहीं लगाई रोक? जानिए सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा

Supreme Court Jantar Mantar Protest

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को Cockroach Janata Party (CJP) की ओर से 5 सितंबर को दिल्ली में प्रस्तावित विरोध मार्च पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर तत्काल प्रतिबंध लगाने से इनकार कर दिया। अदालत ने कहा कि उसे उम्मीद है कि सभी पक्ष शांतिपूर्ण और कानून के मुताबिक व्यवहार करेंगे तथा कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी संबंधित एजेंसियों की होगी।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा वी. मोहना की पीठ ने याचिकाकर्ता को निर्देश दिया कि पुलिस द्वारा NEET प्रदर्शन के दौरान कथित हिंसा की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित High Powered Enquiry Committee के समक्ष भी अपनी याचिका प्रस्तुत करें। पीठ ने मामले में नोटिस जारी करते हुए कहा कि इसे लंबित याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध किया जाए और 10 सितंबर को सुनवाई की जाए।

 

कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी एजेंसियों की

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने और शांतिपूर्ण तरीके से व्यवहार करने की उम्मीद है। वहीं, कानून लागू कराने वाली एजेंसियों की जिम्मेदारी है कि वे तय करें कि क्या कानूनी है और क्या प्रतिबंधित है। अदालत ने कहा कि दोनों पक्षों से अपेक्षा है कि वे कानून का सम्मान करें, अपने आचरण में संयम रखें और देश के कानून का पालन करें।

 

5 सितंबर को दिल्ली में मार्च निकालने की तैयारी

CJP ने 5 सितंबर को दिल्ली में विरोध मार्च का आह्वान किया है। पार्टी का आरोप है कि केंद्र सरकार ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ चलाए गए 36 दिन के आंदोलन को समाप्त कराने के लिए 25 जुलाई को किए गए वादों को पूरा नहीं किया। CJP के मुताबिक प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक निकाला जाना है। हालांकि, दिल्ली पुलिस ने पहले कहा था कि उसे इस तरह के किसी जुलूस के आयोजन के लिए अभी तक कोई अनुरोध प्राप्त नहीं हुआ है।

 

याचिका में सुरक्षा-संवेदनशील इलाकों में मार्च पर रोक की मांग

सेवानिवृत्त दिल्ली पुलिस अधिकारी राजेंद्र सिंह की ओर से दायर याचिका में मांग की गई है कि इंडिया गेट, सेंट्रल विस्टा और आसपास के इलाकों जैसे सुरक्षा की दृष्टि से संवेदनशील संवैधानिक क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर जुटान, मार्च या संगठित प्रदर्शन की अनुमति तभी दी जाए, जब आयोजकों ने आवश्यक अनुमति हासिल कर ली हो। याचिका में लुटियंस दिल्ली में प्रस्तावित किसी भी बड़े प्रदर्शन को नियंत्रित करने, टालने या उसके स्वरूप में बदलाव करने की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता ने यह व्यवस्था 12-13 सितंबर को प्रस्तावित BRICS Summit के समाप्त होने तक लागू रखने की मांग की है।

 

इसके अलावा याचिका में कहा गया है कि कोई भी मार्च या जुलूस निर्धारित और अधिकृत सीमा से आगे न बढ़े तथा संबंधित क्षेत्र में लागू कानूनी अनुमति और नियामक व्यवस्था का पालन किया जाए।

 

Teachers' Day पर होगा प्रस्तावित मार्च

CJP का प्रस्तावित मार्च Teachers' Day यानी 5 सितंबर को आयोजित किया जाना है। खबर के मुताबिक इसमें उन छात्रों के परिवारों के शामिल होने की बात कही गई है, जिन्होंने इस साल NEET परीक्षा रद्द होने और उसके बाद दोबारा परीक्षा कराए जाने के घटनाक्रम के बाद कथित तौर पर आत्महत्या की थी। इसके अलावा जुलाई के आंदोलन के दौरान कथित पुलिस ज्यादती का सामना करने वाले छात्रों के परिवारों के भी मार्च में शामिल होने की बात कही गई है।

September 2026: दूध से लेकर LPG सिलेंडर तक… 1 सितंबर से बदल जाएंगे ये 9 बड़े नियम! आपकी जेब पर पड़ेगा बड़ा असर

Financial Rule Changes September 2026: सितंबर का महीना शुरू होते ही आम आदमी से लेकर निवेशकों और करदाताओं के लिए कई नियम बदलने वाले हैं। सितंबर 2026 में दूध की कीमतों से लेकर डीमैट अकाउंट, एडवांस टैक्स, एलपीजी सिलेंडर बायोमेट्रिक और फ्लाइट में सफर तक से जुड़े 9 बड़े बदलाव लागू हो रहे हैं। 1 सितंबर 2026 से लागू होने वाले इन सभी 9 महत्वपूर्ण बदलावों के बारे में विस्तार से जानिए।

1. डीमैट और म्यूचुअल फंड में नॉमिनेशन के नए नियम

1 सितंबर 2026 से डीमैट अकाउंट और म्यूचुअल फंड फोलियो के लिए नॉमिनेशन के नए दिशानिर्देश लागू हो जाएंगे। निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे अपने खातों का नॉमिनेशन स्टेटस तुरंत चेक करें और आवश्यक प्रक्रिया या ऑप्ट-आउट फॉर्म समय रहते पूरा कर लें।

2. SEBI के नए ETF रूल्स

शेयर बाजार के नियामक सेबी का नया एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) फ्रेमवर्क 7 सितंबर 2026 से लागू होने जा रहा है। इसमें बेस प्राइस, प्राइस बैंड, प्री-ओपन कॉल ऑक्शन और क्लोज-आउट प्रक्रियाओं में बदलाव शामिल हैं। पहले इसे लागू करने की समयसीमा अलग थी, जिसे बढ़ाकर 7 सितंबर किया गया है।

3. FCNR(B) डिपॉजिट पर स्पेशल स्वैप विंडो बंद

भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की FCNR(B) डिपॉजिट के लिए विशेष डॉलर-रुपया स्वैप सुविधा 31 अगस्त को समाप्त हो रही है। 1 सितंबर से नई FCNR(B) एफडी पर यह स्पेशल फैसिलिटी नहीं मिलेगी। हालांकि, FCNR(B) डिपॉजिट बंद नहीं हुए हैं, लेकिन अब इन पर ब्याज दरें बैंक की सामान्य दरों के आधार पर तय होंगी।

4. एडवांस टैक्स चुकाने की लास्ट डेट: 15 सितंबर

करदाताओं के लिए 15 सितंबर 2026 एडवांस टैक्स की अगली किश्त जमा करने की अंतिम तिथि है। नियमों के तहत, योग्य टैक्सपेयर्स को 15 सितंबर तक अपनी कुल एडवांस टैक्स देनदारी का कम से कम 45% हिस्सा सरकार को जमा करना अनिवार्य है।

5. छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव

सितंबर का आखिरी दिन यानी 30 सितंबर छोटी बचत योजनाओं में निवेश करने वालों के लिए बेहद अहम है। केंद्र सरकार अक्टूबर-दिसंबर 2026 तिमाही के लिए पीपीएफ (PPF), सुकन्या समृद्धि और एनएससी (NSC) जैसी स्मॉल सेविंग्स स्कीम्स की नई ब्याज दरों की समीक्षा और घोषणा करेगी।

6. इंटरनेशनल फ्लाइट्स: बोर्डिंग पास पर स्टैंप की जरूरत खत्म

1 सितंबर 2026 से भारत से विदेश यात्रा करने वाले यात्रियों को इमिग्रेशन काउंटर पर बोर्डिंग पास पर मोहर लगवाने की बाध्यता से छूट दे दी गई है। अब यात्री अपने मोबाइल में इलेक्ट्रॉनिक बोर्डिंग पास का उपयोग कर सकते हैं या प्रिंटेड पास दिखाकर इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं।

7. LPG e-KYC की अनिवार्यता

घरेलू एलपीजी उपभोक्ताओं के लिए बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन (e-KYC) कराने की समयसीमा 31 अगस्त यानी आज तक है। जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक ई-केवाईसी पूरी नहीं की है, उन्हें 1 सितंबर के बाद रसोई गैस सिलेंडर की रीफिल बुकिंग या सब्सिडी दरों का लाभ लेने में दिक्कत का सामना करना पड़ सकता है।

8. मुंबई में दूध की कीमतें बढ़ीं

मुंबई में 1 सितंबर से ताजा भैंस के दूध के थोक दामों में ₹9 प्रति लीटर की बढ़ोतरी होने वाली है। इसके बाद अब दूध की नई दरें ₹102 प्रति लीटर तक पहुंच गई हैं। यह रिवाइज्ड रेट अगले छह महीनों के लिए लागू रहेंगे।

9. मुंबई में ऑटो और टैक्सी के किराए में बढ़ोतरी

मुंबई में रोजाना सफर करने वाले यात्रियों के लिए भी झटका लगने वाला है। 1 सितंबर से मुंबई में ऑटो-रिक्शा और टैक्सी के बेस फेयर में बढ़ोतरी होने वाली है, जिससे लोकल ट्रैवलिंग थोड़ी महंगी हो जाएगी।

EPFO 3.0 Big Update: अब UPI और ATM से झटपट निकलेगा PF का पैसा! जानें ऑटो-सेटलमेंट सहित ये 5 बड़े बदलाव

EPFO 3.0 Digital Reforms: कर्मचारी भविष्य निधि संगठन के करोड़ों नौकरीपेशा सदस्यों के लिए बड़ी खबर है। सरकार अपने डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को अपग्रेड करते हुए EPFO 3.0 की शुरुआत कर रही है। इस नए सिस्टम के लागू होने के बाद पीएफ (PF) क्लेम सेटलमेंट की लंबी प्रक्रिया खत्म हो जाएगी और मेंबर्स बिना किसी कागजी कार्रवाई के सीधे अपने UPI या UPI-सक्षम ATM से पैसा निकाल सकेंगे।

हाल ही में केंद्र सरकार ने FY26 के लिए EPF और VPF पर 8.25% ब्याज दर को मंजूरी दी थी। अब EPFO 3.0 के जरिए सदस्यों को उनके फंड तक तुरंत और आसान पहुंच दी जा रही है। आइए जानते हैं कि इस नए सिस्टम से पीएफ सब्सक्राइबर्स की जिंदगी कितनी आसान होने वाली है।

क्या है EPFO 3.0 और क्यों हुआ यह बदलाव?

EPFO 3.0 का मुख्य उद्देश्य पीएफ क्लेम में लगने वाले समय को कम करना और सेवाओं को पूरी तरह डिजिटल बनाना है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अनुसार, EPFO ने जुलाई में अपने पूरे मेंबर्स डेटाबेस को सेन्ट्रलाइज्ड आईटी-सक्षम प्रणाली (CITES) प्लेटफॉर्म पर सफलतापूर्वक ट्रांसफर कर दिया है। इससे पुराना सिस्टम खत्म हो गया है और पूरे देश का एक नेशनल डेटाबेस बन गया है। इसकी मदद से अब सब्सक्राइबर्स UPI के जरिए अपने लिंक्ड बैंक अकाउंट में तुरंत पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे।

EPFO 3.0 से सब्सक्राइबर्स को मिलेंगे ये 5 बड़े फायदे

1. UPI और ATM से 75% तक PF निकासी

नियमों और शर्तों के आधार पर सब्सक्राइबर्स अपने ईपीएफ बैलेंस का 50% से 75% तक हिस्सा UPI या UPI-सक्षम ATM के जरिए निकाल सकेंगे। मेंबर्स अपने बैंक खाते में ट्रांसफर योग्य एलिजिबल बैलेंस देख सकेंगे और UPI PIN का इस्तेमाल करके सुरक्षित तरीके से पैसा ट्रांसफर कर सकेंगे। इसके बाद इस पैसे को आप डिजिटली खर्च कर सकते हैं या ATM से कैश निकाल सकते हैं।

2. ऑटो-सेटलमेंट लिमिट बढ़कर हुई ₹5 लाख

EPFO ने ऑटो-सेटलमेंट की सीमा को ₹1 लाख से बढ़ाकर सीधे ₹5 लाख कर दिया है। इससे बीमारी, बच्चों की पढ़ाई, शादी या घर खरीदने/बनाने जैसी जरूरतों के लिए सब्सक्राइबर्स का क्लेम मात्र 3 दिनों के भीतर ऑटो-प्रोसेस होकर खाते में आ जाएगा।

3. UMANG App में Face Authentication

मेंबर्स अब उमंग ऐप में फेस ऑथेंटिकेशन टेक्नोलॉजी (FAT) का उपयोग करके अपना UAN जेनरेट या एक्टिवेट कर सकते हैं। इसके साथ ही वे तुरंत पासबुक एक्सेस करने, गलत जानकारियों को सुधारने और ऑनलाइन क्लेम सबमिट करने जैसी सुविधाएं घर बैठे पा सकते हैं।

4. क्लेम रिजेक्शन से मिलेगी मुक्ति

पुराने सिस्टम में मेंबर्स को यह पता नहीं होता था कि वे कितना पैसा निकालने के पात्र हैं, जिससे क्लेम रिजेक्ट हो जाता था। अब EPFO 3.0 में सब्सक्राइबर्स को अलग-अलग परिस्थितियों के हिसाब से पात्र राशि पहले ही स्क्रीन पर दिखाई देगी।

5. ऑनलाइन शिकायतों का डिजिटल जवाब

अगर क्लेम प्रोसेसिंग के दौरान पीएफ ऑफिस को किसी अतिरिक्त जानकारी की जरूरत होती है, तो मेंबर्स अब उसका जवाब ऑनलाइन डिजिटली दे सकेंगे। पहले ऑनलाइन स्पष्टीकरण देने की कोई सुविधा उपलब्ध नहीं थी।

EPFO 3.0 में क्या-क्या बदल गया?

EPFO 3.0 में क्या-क्या बदल गया?

Dussehra Bonus: इस दशहरा पर सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले! रिवाइज्ड बोनस को लेकर बड़ा अपडेट, खाते में आएगी मोटी रकम

7th Pay Commission Bonus Update: आगामी दशहरा के त्योहार से पहले केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए एक बड़ी और खुशखबरी वाली खबर सामने आ रही है। केंद्रीय कर्मचारियों की सैलरी के साथ-साथ इस बार उनके बोनस में भी तीन गुना तक का बंपर इजाफा देखने को मिल सकता है।

कर्मचारी पक्ष का प्रतिनिधित्व करने वाली संस्था नेशनल काउंसिल – जॉइंट कंसल्टेटिव मशीनरी (NC-JCM) ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर मांग की है कि इस दशहरा कर्मचारियों को ₹7000 के बजाय संशोधित ₹21000 तक का बोनस जारी किया जाए।

NC-JCM ने कैबिनेट सचिव को लिखा पत्र, उठाई ये मांग

NC-JCM के सचिव शिव गोपाल मिश्रा ने 27 अगस्त 2026 को कैबिनेट सचिव को एक लिखित पत्र भेजा है। पत्र में कहा गया है कि दशहरा का त्योहार नजदीक आ रहा है और सरकार जल्द ही प्रॉडक्टिविटी लिंक्ड बोनस (PLB), बोनस और एड-हॉक बोनस के आदेश जारी करेगी।

ऐसे में NC-JCM की 49वीं बैठक में आधिकारिक पक्ष द्वारा दिए गए आश्वासन के अनुसार, केंद्र सरकार के कर्मचारियों के लिए बोनस की सीलिंग लिमिट को ₹7,000 से बढ़ाकर तुरंत ₹21,000 किया जाना चाहिए।

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने अधिसूचित की नई सीमा

NC-JCM ने अपने पत्र में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय द्वारा 25 अगस्त 2026 को जारी उस अधिसूचना का हवाला दिया है, जिसमें बोनस पात्रता की सीमा बढ़ाई गई है। कोड ऑन वेजेस 2019 की धारा 26(1) के तहत जारी अधिसूचना S.O. 4711(E) के अनुसार, ₹21,000 प्रति माह तक वेतन पाने वाले कर्मचारी बोनस के हकदार होंगे। इस नियम को 21 नवंबर 2025 से बैकडेट में लागू माना गया है।

₹7,000 की पुरानी सीमा पर उठ रहे थे सवाल

ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लाइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष मंजीत सिंह पटेल ने कहा कि 10 साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी कर्मचारियों को मात्र ₹6,908 का नॉन-प्रॉडक्टिविटी लिंक्ड बोनस दिया जा रहा था। वर्तमान में कर्मचारियों का बोनस ₹7,000 की पुरानी प्राइवेट सेक्टर दर पर तय होता था।

अप्रैल 2026 में सरकार द्वारा तय न्यूनतम दैनिक मजदूरी की दरों (₹783 से ₹1,035 तक) के औसत के आधार पर कर्मचारियों को वास्तव में ₹27,694 तक का बोनस मिलना चाहिए।

11 मई 2026 की बैठक में क्या तय हुआ था?

NC-JCM के अनुसार, 11 मई 2026 को कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता में हुई 49वीं बैठक में बोनस सीमा बढ़ाने का मुद्दा उठाया गया था। उस समय सरकार की ओर से कहा गया था कि जैसे ही पेमेंट ऑफ बोनस एक्ट 1965 (अब कोड ऑन वेजेस 2019) के तहत सीलिंग लिमिट में बदलाव होगा, केंद्रीय कर्मचारियों के बोनस पर विचार किया जाएगा।

चूंकि अब श्रम मंत्रालय ने ₹21,000 की नई लिमिट जारी कर दी है, इसलिए कर्मचारी यूनियनों को पूरी उम्मीद है कि सरकार इस दशहरा त्योहार से पहले संशोधित बोनस आदेश जारी कर कर्मचारियों को बड़ा तोहफा देगी।

Union Budget 2027: यूनियन बजट 2027 बनाने की प्रक्रिया शुरू, सरकार ने जारी किया सर्कुलर

Union Budget 2027: बजट 2027 बनाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक अफेयर्स (बजट डिविजन) ने सरकार के सभी मंत्रालयों को बजट सर्कुलर 2027-28 इश्यू कर दिया है। यूनियन बजट हर साल 1 फरवरी को पेश होता है। इस साल 1 फरवरी, 2027 को पेश होने वाला बजट वित्त वर्ष 2027-28 का केंद्र सरकार का बजट होगा।

12 अक्टूबर से प्री-बजट मीटिंग्स शुरू हो जाएंगी

मंत्रालयों को सर्कुलर जारी होने के साथ ही 2026-27 के रिवाइज्ड एस्टिमेट (RE) और 2027-28 के लिए बजट एस्टिमेट (BE) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। सर्कुलर में मंत्रालयों से दोनों का अनुमान पेश करने को कहा गया है। प्री-बजट मीटिंग्स का सिलसिला 12 अक्तूबर, 2026 से शुरू हो जाएगा। इसकी अध्यक्षता एक्सपेंडिचर सेक्रेटरी करेंगे।

6 अक्टूबर तक मंत्रालयों को अपनी मांग बतानी होगी

सभी मंत्रालयों और विभागों को पैसे की अपनी जरूरत के बारे में यूनियन बजट इंफॉर्मेशन सिस्टम (UBIS) को बताने को कहा गया है। उन्हें यह काम 6 अक्तूबर, 2026 तक पूरा करना होगा। उधर, पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार इस वित्त वर्ष में सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर अब तक 55,757 करोड़ रुपये जुटा चुकी है।

सरकार विनिवेश का 78 फीसदी लक्ष्य हासिल कर चुकी है

सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में सरकारी कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचकर 80,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य तय किया है। अब तक वह इस टारगेट का 78 फीसदी जुटा चुकी है। अभी इस वित्त वर्ष के खत्म होने में 7 महीने का समय बचा है। अनुमान है कि बाकी पैसा इस दौरान आसानी से जुटा लेगी।

मुश्किल में पेश होगा अगले वित्त वर्ष का बजट 

अगले वित्त वर्ष का यूनियन बजट ऐसे वक्त में पेश होने जा रहा है, जब इकोनॉमी के सामने कई चुनौतियां हैं। वैश्विक स्थितियां खासकर मध्यपूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच टकराव का असर भारत सहित दुनियाभर की अर्थव्यवस्था पर पड़ा रहा है। क्रूड की कीमतों में उछाल से महंगाई लगातार बढ़ रही है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर महंगाई कंट्रोल में नहीं आती है तो इसका असर जीडीपी ग्रोथ पर भी पड़ेगा। इधर, डॉलर के मुकाबले रुपये में काफी गिरावट आई है। विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने रुपये पर दबाव बढ़ाया है।

अगले साल यूपी चुनावों का असर बजट पर दिख सकता है

सरकार और आरबीआई की कोशिश महंगाई को जल्द से जल्द काबू में करने पर होगी। उधर, अगले साल उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। यह आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य है। 1 फरवरी, 2027 को पेश होने वाले बजट पर यूपी चुनावों को असर दिख सकता है। सरकार बजट में विदेशी निवेश बढ़ाने वाले उपायों का ऐलान कर सकती है।

नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

नेपाल की बाढ़ में फंसे 320 भारतीयों से संपर्क नहीं, खरगे ने PM मोदी और अमित शाह से की बड़ी मांग

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नेपाल में आई भीषण बाढ़ और उससे पैदा हुए मानवीय संकट को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखा है। खरगे ने केंद्र सरकार से नेपाल को तत्काल मानवीय और आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने के साथ-साथ वहां फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित भारत वापस लाने के लिए तेजी से कदम उठाने की मांग की है। ALSO READ: नेपाल में जलप्रलय से भारी तबाही, 626 लोगों की मौत; 2400 से ज्यादा लापता, 320 भारतीयों से संपर्क टूटा

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में बाढ़ से हुए बड़े पैमाने पर जान-माल के नुकसान पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक आपदा में 600 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि करीब 2,000 लोग अब भी लापता हैं। बड़ी संख्या में लोग भोजन, दवाइयों, आश्रय और दूसरी जरूरी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।

 

नेपाल में फंसे भारतीयों को लेकर जताई चिंता

खरगे ने कहा कि बाढ़ के कारण नेपाल के कई हिस्सों में भारतीय नागरिक और भारतीय मूल के लोग भी फंसे हुए हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री से संबंधित अधिकारियों को बचाव और निकासी अभियान तेज करने के निर्देश देने का आग्रह किया, ताकि प्रभावित भारतीयों को जल्द से जल्द सुरक्षित भारत लाया जा सके।

 

खरगे ने विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी का हवाला देते हुए कहा कि नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिकों से अभी संपर्क नहीं हो पा रहा है। उन्होंने सरकार से इन लोगों का पता लगाने और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए हर संभव प्रयास करने की अपील की। ALSO READ: नेपाल की त्रासदी में विदिशा की स्वाति बागरेचा लापता, 26 अगस्त से परिवार से संपर्क टूटा

 

नेपाल को तत्काल राहत सहायता देने की मांग

कांग्रेस अध्यक्ष ने प्रधानमंत्री से नेपाल सरकार के साथ समन्वय कर बाढ़ प्रभावित लोगों तक पर्याप्त राहत और मानवीय सहायता पहुंचाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में भारत को नेपाल के लोगों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए।

 

अमित शाह को दिया सुझाव

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को लिखे पत्र में खरगे ने नेपाल में तत्काल और व्यापक मानवीय एवं आपदा राहत सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने सुझाव दिया कि नेपाल सरकार के साथ समन्वय करते हुए जरूरत के अनुसार राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) की टीमें भी तैनात की जाएं, ताकि बचाव, निकासी और राहत कार्यों में मदद मिल सके।

 

खरगे ने उम्मीद जताई कि केंद्र सरकार नेपाल के इस मानवीय संकट को गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ लेते हुए राहत एवं बचाव कार्यों में तत्काल आवश्यक कदम उठाएगी।