Opinion: Freak accidents are almost always human negligence

Opinion: Freak accidents are almost always human negligence
Opinion: Freak accidents are almost always human negligence

Going by the amount of social media chatter around any NCAP test, you’d think India is one safety-obsessed nation. Awareness is rising, but safety is far from ingrained in our ethos like it is in, say, Japan. We all know the current state of road safety is appalling, but I’m not talking about driving manners or vehicle collisions or crash ratings. Of late, there’s another aspect of road safety that’s really been bothering me; the road itself and everything around it. 

During the rains in Mumbai last month, two girls were electrocuted in a water-logged street. Luckily, timely intervention from a passer-by and medical treatment at a hospital saved them. Last year, an auto-rickshaw driver had his head 

pierced by a falling iron rod from metro construction; thankfully emergency neurosurgery saved him too. Not everyone is so lucky though, if you can even call these accidents lucky. A concrete slab from an under-construction girder bridge fell onto a moving auto-rickshaw and car and resulted in one death and multiple injuries.

You would have read the horrific news of a 25-year-old biker in Delhi who died after his motorcycle plunged into an unbarricaded, 14-foot-deep construction pit dug up and left open. And it’s not just bikes; people have fallen into open manholes, flooded over with water, and lost their lives, and recently a 20-year-old student died after his car plunged into an open drain. Two years ago, a massive illegal billboard blew over and killed 17 people and injured over 75 others during heavy winds in Mumbai. This monsoon season, a tree collapsed onto a school bus and took the life of an 11-year-old child. 

This is the aspect of road safety that has been bothering me recently, not because car crashes and other accidents do not, but because these are all too often termed ‘freak accidents’ or ‘random happenings’. Nonsense! These are not freak incidents, but accidents caused by negligence and unaccountability. So many folks say, ‘oh, his/her time had come’. Again, nonsense. Would you say all those poor kids who died in Africa due to starvation died because their time had come? No. They died because of human action, or inaction. 

So, really, I write this column only to highlight this fact; to remind us all that it isn’t random. As the saying goes, ‘everything happens for a reason’. Here it’s callousness, from those in charge and from us. So, the next time you express outrage over a non-5-star NCAP-rated car, spare some words of outrage for these incidents too.

अमेरिका में 43 लाख की सर्जरी भारत में सिर्फ 4.3 लाख में हुई! फिर भी अमेरिकी महिला ने बताईं ये 3 कमियां

अमेरिका की एक महिला की सोशल मीडिया पोस्ट इन दिनों तेजी से चर्चा में है। उन्होंने अपनी मां के इलाज से जुड़ा ऐसा अनुभव साझा किया, जिसने अलग-अलग देशों में मेडिकल खर्च को लेकर बहस छेड़ दी। मां की सर्जरी के लिए अमेरिका में मिले खर्च के अनुमान ने परिवार को दूसरे विकल्प तलाशने पर मजबूर किया। इसके बाद उन्होंने विदेश में इलाज कराने के बारे में सोचा और कई देशों पर विचार किया। इसी दौरान भारत का विकल्प भी उनके सामने आया। परिवार के लिए यह फैसला आसान नहीं था, क्योंकि इलाज के साथ नए देश में अस्पताल, सुविधाओं और पूरी प्रक्रिया को लेकर भी भरोसा जरूरी था।

लेकिन भारत पहुंचने के बाद सामने आया अनुभव उनके लिए उम्मीद से अलग रहा। महिला ने अपने अनुभव को सोशल मीडिया पर साझा किया, जिसके बाद भारत की मेडिकल सुविधाओं और इलाज की लागत को लेकर लोगों के बीच चर्चा शुरू हो गई।

डॉक्टर की सलाह पर भारत आए

इसी दौरान महिला के एक डॉक्टर दोस्त ने उन्हें भारत में इलाज कराने की सलाह दी। इसके बाद परिवार ने भारत आने का फैसला किया। महिला के अनुसार, भारत के एक बड़े अस्पताल में उनकी मां की सर्जरी हुई। अस्पताल में रहने का खर्च भी इसमें शामिल था।

सिर्फ ₹4.3 लाख में हुआ इलाज

महिला ने बताया कि भारत में सर्जरी और अस्पताल में रहने समेत कुल खर्च करीब 4,500 डॉलर यानी 4.3 लाख रुपये आया। अमेरिका में मिले अनुमान से तुलना करें तो यह रकम करीब दस गुना कम थी। हालांकि, इलाज का वास्तविक खर्च मरीज और बीमारी के हिसाब से अलग हो सकता है।

इलाज की गुणवत्ता ने किया प्रभावित

महिला ने केवल कम खर्च की तारीफ नहीं की। उन्होंने भारत में मिली मेडिकल सुविधाओं और देखभाल को भी अच्छा बताया। उनके मुताबिक, इलाज उनकी उम्मीद से बेहतर रहा। इसी वजह से उन्होंने भारत में मेडिकल टूरिज्म की संभावनाओं पर भी बात की।

भारत में मेडिकल टूरिज्म का बड़ा मौका

महिला का मानना है कि भारत अगर विदेशी मरीजों के लिए यात्रा, लॉजिस्टिक्स और सुरक्षा जैसी सुविधाओं को और बेहतर करे, तो मेडिकल टूरिज्म में देश और आगे बढ़ सकता है। उनके मुताबिक, भारत के पास इस क्षेत्र में काफी बड़ी संभावनाएं हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

पोस्ट वायरल होने के बाद लोगों ने अमेरिका और भारत में इलाज की लागत पर चर्चा शुरू कर दी। कई यूजर्स ने सवाल किया कि अमेरिका जैसे विकसित देश में मेडिकल ट्रीटमेंट इतना महंगा क्यों है कि लोग इलाज के लिए विदेश जाने पर मजबूर हो रहे हैं।

निजी अस्पतालों की भी हुई तारीफ

कुछ यूजर्स ने भारत के निजी अस्पतालों की तारीफ की। उनका कहना था कि कई अस्पताल कम लागत में अच्छी मेडिकल सुविधाएं उपलब्ध कराते हैं। हालांकि, कुछ लोगों ने यह भी कहा कि भारत की सरकारी और प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं में अभी सुधार की जरूरत है।

विदेशी मरीजों को मिलती है मदद

मेडिकल टूरिज्म से जुड़े लोगों के मुताबिक, कई भारतीय अस्पताल विदेशी मरीजों को इलाज के साथ दूसरी सुविधाओं में भी मदद करते हैं। इनमें एयरपोर्ट ट्रांसफर, रहने की व्यवस्था, अपॉइंटमेंट और इलाज का शेड्यूल शामिल हो सकता है।

 

Aaban Ahmed Dead: सड़क हादसे में माफिया अतीक अहमद के बेटे आबान की दर्दनाक मौत, जेल में बंद भाई से जा रहा था मिलने, चकनाचूर हुई कार

Aaban Ahmed News: माफिया एवं पूर्व सांसद अतीक अहमद के छोटे बेटे आबान समेत दो लोगों की गुरुवार (6 अगस्त) को उत्तर प्रदेश के झांसी जिले में एक सड़क हादसे में मौत हो गई। इस घटना में कार सवार तीन अन्य लोग भी घायल हो गए, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अपर पुलिस अधीक्षक (देहात) अरविंद कुमार ने बताया कि पूर्व सांसद अतीक अहमद का बेटा आबान अहमद अपने कुछ साथियों के साथ झांसी जेल में बंद अपने भाइयों से मिलने जा रहा था। इस दौरान रास्ते में पुंछ थाना में झांसी-कानपुर नेशनल हाईवे पर उसकी तेज रफ्तार कार बेकाबू होकर एक डिवाइडर से टकराकर पलट गई।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SP) बीबीजीटीएस मूर्ति ने पत्रकारों को बताया कि इस हादसे में 21 वर्षीय आबान अहमद और उसके दोस्त सोनू (26) की मौत हो गई। जबकि तीन अन्य लोग घायल हो गए जिनका मेडिकल कॉलेज में इलाज किया जा रहा है। मूर्ति ने बताया कि शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

‘दैनिक भास्कर’ की रिपोर्ट के मुताबिक, आबान अपने बड़े भाई अली अहमद से मिलने के लिए झांसी जेल गया था। वहां से लौटते वक्त तेज रफ्तार कार अनियंत्रित होकर डिवाइडर से टकरा गई। कार का अलग हिस्सा पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया। बताया जा रहा है कि गाड़ी में कुल 5 लोग थे। घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

हादसे के दौरान आबान और उसके एक साथी सोनू की मौत हो गई। इसी झांसी में अतीक अहमद के तीसरे नंबर वाले बेटे असद अहमद की भी एनकाउंटर में मौत हुई थी। अतीक के कुल 5 बेटे थे। इनमें से अब दो की मौत हो चुकी है। जबकि दो बेटे जेल में बंद है। अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन अभी भी फरार चल रही है। उनके ऊपर यूपी पुलिस ने 50,000 रुपये का इनाम घोषित किया है।

अतीक अहमद और उनके भाई अशरफ अहमद की 15 अप्रैल 2023 की रात प्रयागराज में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। यह घटना उस समय हुई जब पुलिस दोनों को मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जा रही थी। हमलावर मीडिया कर्मी बनकर पहुंचे थे। पुलिस सुरक्षा के बीच उन्होंने दोनों पर नजदीक से गोलियां चला दीं। तीनों आरोपियों को मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया गया।

इसके अलावा अतीक अहमद के बेटे असद अहमद का 13 अप्रैल 2023 को उत्तर प्रदेश एसटीएफ ने झांसी में मुठभेड़ (एनकाउंटर) में मार गिराया था। उस पर उमेश पाल हत्याकांड में शामिल होने का आरोप था। अब यूपी पुलिस को अतीक की पत्नी शाइस्ता परवीन की तलाश है।

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5 साल से बिना रुके भूखों को खाना खिला रहे हैं ये शख्श | Maa Ki Rasoi Muzaffarpur | Real life hero

कुछ लोग सिर्फ अपनी ज़िंदगी बदलते हैं।
और कुछ लोग, दूसरों की ज़िंदगी आसान बना देते हैं।
मुज़फ्फरपुर के प्रकाश गुप्ता पिछले 5 सालों से ‘माँ की रसोई’ के ज़रिए हर दिन 120 से ज़्यादा ज़रूरतमंदों तक भोजन पहुंचा रहे हैं। उनके लिए यह सिर्फ खाना नहीं, बल्कि इंसानियत की सबसे खूबसूरत मिसाल है।
अगर आपके शहर में भी कोई भूखा है, तो शायद मदद की शुरुआत एक थाली से हो सकती है।
आप भी अगर प्रकाश गुप्ता के इस अभियान के साथ जुड़ना चाहते हैं
तो इस नंबर पर संपर्क करें – 8083848726

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फ्रैक्चर का इलाज कराने पहुंची महिला का डॉक्टर ने कर दिया दिल का ऑपरेशन! हुई मौत, जानें पूरा मामला

हरियाणा के पानीपत में एक महिला के इलाज में हुए लापरवाही का मामला सामने आया है। पानीपत में स्थित एक प्राईवेट हॉस्पिटल पर गंभीर लापरवाही के आरोप लगे हैं। 24 जुलाई को सड़क हादसे में महिला के पैर की हड्डी टूट गई थी। इसके बाद उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिवार का आरोप है कि, अगले दिन उनकी अनुमति लिए बिना डॉक्टरों ने उनके दिल में स्टेंट डाल दिया। इलाज के दौरान महिला की मौत हो गई, जिसके बाद पुलिस ने डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। ये मामला पानीपत के जीटी रोड स्थित एक निजी अस्पताल का बताया जा रहा है।

दिल का कर दिया ऑपरेशन

पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, रमेश नगर में रहने वाली गुड्डी देवी मूल रुप से उत्तर प्रदेश के कानपुर देहात की रहने वाली थी। 24 जुलाई को सड़क हादसे में घायल हो गई थीं और उनके पैर की हड्डी टूट गई थी। इसके बाद उन्हें फ्रैक्चर के इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। परिजनों का आरोप है कि, भर्ती के अगले दिन उन्हें अचानक पता चला कि महिला के दिल में स्टेंट डाला जा चुका है। गुड्डी देवी के बेटे कुलदीप ने कहा कि, अस्पताल ने इस प्रक्रिया से पहले परिवार को कोई जानकारी नहीं दी और न ही उनकी लिखित या मौखिक सहमति ली। उनका आरोप है कि पूरी प्रक्रिया बिना अनुमति के की गई।

कुलदीप का आरोप है कि, हार्ट स्टेंट के सहमति पत्र पर फर्जी हस्ताक्षर किए गए। उनका कहना है कि अस्पताल ने परिवार को न तो दिल की किसी गंभीर बीमारी की जानकारी दी गई और न ही स्टेंट लगाने से पहले उनकी अनुमति ली गई।

नहीं दी गई पूरी जानकारी

परिवार ने अस्पताल पर इलाज में लापरवाही और बिना जरूरत इलाज करने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि, बिना उनकी अनुमति के इलाज किया गया, जिससे गुड्डी देवी की मौत हो गई। परिवार का ये भी आरोप है कि मौत के बाद जब उन्होंने डॉक्टरों और अस्पताल से जवाब मांगा, तो उन्हें सही जानकारी नहीं दी गई। इसके बजाय उन्हें डराया-धमकाया गया और कहा गया कि अस्पताल के खिलाफ शिकायत करने से भी कुछ नहीं होगा।

दर्ज हुआ एफआईआर

परिजनों की शिकायत मिलने के बाद पानीपत पुलिस ने संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साथ ही महिला की मौत की असली वजह जानने और इलाज में किसी तरह की लापरवाही हुई या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए पोस्टमॉर्टम कराने के निर्देश दिए गए हैं। ये मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों के बीच इसकी काफी चर्चा हो रही है।

 

लोगों ने जताई नाराजगी

एक यूजर ने कमेंट किया, “करप्शन खून में है, इसलिए कोई प्रोटेस्ट असली प्रॉब्लम सॉल्व नहीं करेगा, असलियत आखिर तक वैसी ही रहेगी।” एक और यूजर ने कहा, “मुझे लगता है कि डॉक्टर को नेगेटिव मार्क्स वाली सीट मिली है। शायद आपको कन्फर्मेशन के लिए हॉस्पिटल और डॉक्टर का नाम पोस्ट करना चाहिए।”

मौजूद डिटेल्स पर सवाल उठाते हुए, एक और यूजर ने लिखा, “यहां क्या जानकारी है, कुछ नहीं। हॉस्पिटल का नाम गायब है, सर्जन का नाम गायब है, यह सिर्फ हेडलाइन बनाने के लिए है, कोई डिटेल्स नहीं हैं। अगर यह सच में हुआ, तो कहां हुआ और कब हुआ? असली सवाल यह होगा कि ऐसा क्यों हुआ?”

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अस्पताल से डिस्चार्ज होकर राजघाट पहुंचे सोनम वांगचुक, बोले- बापू का शांति का रास्ता आज भी सबसे प्रासंगिक

sonam wangchuk on rajghat

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक सोमवार को गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल से डिस्चार्ज होने के बाद अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ सीधे दिल्ली के राजघाट पहुंचे और महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि शांति के रास्ते हर हल मुमकिन है। बापू का रास्ता आज भी प्रासंगिक है। ALSO READ: बिहार छात्र आंदोलन पर AK-47 से फायरिंग करने वाला सिपाही सस्पेंड, भाजपा सांसद संबित पात्रा घिरे

 

वांगचुक ने कहा कि 26 दिन के अनशन और इस आंदोलन के अंत पर मैं सबसे पहले बापू को याद करने के लिए राजघाट आना चाहता था। मैं देश को बताना चाहता था कि उनका बताया गया रास्ता आज भी उतना ही उपयुक्त है जितना 100 साल पहले था।

उन्होंने कहा कि मेरी समझ है कि ये तरीके जनता के दिल तक संदेश पहुंचाते हैं। इस बार मुझे यह तसल्ली हुई कि यह देश के स्तर पर प्रासंगिक है। मैं लोगों से कहता हूं कि वे बापू द्वारा शांति के मार्ग पर चलकर ही अपनी बात रखें। मैं सभी नागरिकों को बधाई देता हूं। ALSO READ: जंतर-मंतर प्रदर्शन के बाद CJP का पार्टी वीडियो वायरल, फंडिंग पर उठे सवाल; क्या बोले तवलीन सिंह और सौरव दास?

 

वीडियो संदेश में क्या बोले सोनम वांगचुक

अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद वांगचुक ने एक वीडियो संदेश जारी कर अपनी सेहत की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि वह अब काफी बेहतर महसूस कर रहे हैं। वह धीरे-धीरे भोजन कर रहे हैं और उनके शरीर में ताकत लौट रही है। उन्होंने अपने स्वास्थ्य लाभ के लिए डॉक्टरों और अस्पताल स्टाफ को भी धन्यवाद दिया।

वांगचुक ने लद्दाख के आंदोलन को मिले व्यापक समर्थन के लिए जनता का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह सभी के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। उन्होंने लोगों की एकजुटता और अपनी आवाज उठाने की सराहना की। वांगचुक ने अपने संदेश में आंदोलन की सफलता का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि यह जीत उन सभी की है जिन्होंने इस मुहिम में साथ दिया।

 

गौरतलब है कि सीजेपी के आंदोलन की सबसे अहम कड़ी सोनम वांगचुक का अनशन ही था। सोनम वांगचुक की 26 दिनों की भूख हड़ताल ने बड़ी संख्या में युवाओं को जंतर मंतर की ओर आने के लिए प्रेरित किया। वांगचुक आ अनशन समाप्त होने के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया।

Viral Post: ‘सर्जरी के लिए नहीं थे पैसे… फिर मालिक ने चुकाए 4.25 लाख रुपये’ सोशल मीडिया पर छाई ये कहानी

Viral Post: सोशल मीडिया पर एक कार्डियक सर्जन की पोस्ट तेजी से वायरल हो रही है। इस पोस्ट में सर्जन ने बताया कि एक कंपनी के मालिक ने अपने कई सालों से साथ काम कर रहे ड्राइवर की बाईपास सर्जरी का पूरा खर्च उठाने का फैसला किया। सोशल मीडिया पर इस इंसानियत भरे कदम की लोग जमकर तारीफ कर रहे हैं। वहीं कुछ इसे अपने कर्मचारियों के प्रति जिम्मेदारी और सम्मान की मिसाल बताया जा रहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर ये पोस्ट कार्डियक सर्जन डॉ. प्रशांत मिश्रा ने शेयर किया है। उन्होंने बताया कि एक मरीज के मालिक ने अपने कर्मचारी को सिर्फ काम करने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि परिवार जैसा मानते हुए उसके इलाज की जिम्मेदारी उठाई।

बाईपास सर्जरी के लिए आया ड्राइवर

डॉ. प्रशांत मिश्रा ने बताया कि उनके पास एक ड्राइवर बाईपास सर्जरी के लिए आया था। प्राइवेट हॉस्पिटल में ऑपरेशन का खर्च करीब 4.25 लाख रुपये होने की वजह से उन्होंने मरीज को सलाह दी कि अगर चाहें तो बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉर्पोरेशन (BMC) के सरकारी अस्पताल में इलाज करा सकते हैं, जहां सरकारी ल्थकेयर स्कीम के तहत ये सर्जरी बिना खर्च के हो सकती है। लेकिन उसी दिन शाम को मरीज के बेटे ने डॉक्टर से दोबारा बात की और आग्रह किया कि ऑपरेशन निजी अस्पताल में ही किया जाए।

सफल रही बाईपास सर्जरी

मरीज के बेटे ने डॉक्टर से कहा, “डॉक्टर साहब, हम चाहते हैं कि पिताजी की बाईपास सर्जरी थुंगा हॉस्पिटल में ही हो। कृपया जितना हो सके खर्च कम कराने में हमारी मदद करें।” इस पर डॉ. प्रशांत मिश्रा ने परिवार को भरोसा दिलाया कि वे इलाज का खर्च कम कराने के लिए अपनी ओर से पूरी कोशिश करेंगे। अगले ही दिन मरीज के एम्प्लॉयर ने RTGS के जरिए सर्जरी के लिए जरूरी रकम सीधे अस्पताल के खाते में भेज दी, जिससे बिना किसी देरी के ऑपरेशन हो सका। सर्जरी सफल रहने के बाद डॉ. प्रशांत मिश्रा ने एम्प्लॉयर को फोन कर जानकारी दी और कहा, “आपके सहयोग के लिए धन्यवाद। मिस्टर शुक्ला की बाईपास सर्जरी सफल रही है।”

हैरान रह गए डॉक्टर

एम्प्लॉयर की बात सुनकर डॉ. प्रशांत मिश्रा हैरान रह गए। उन्होंने कहा, “मेरे कलीग की इतनी अच्छी देखभाल करने के लिए धन्यवाद, डॉक्टर।” इस पर डॉक्टर ने पूछा, “कलीग? लेकिन उन्होंने तो बताया था कि वह आपके ड्राइवर हैं।”

जवाब में एम्प्लॉयर ने कहा, “वह पिछले 15 साल से मेरे साथ काम कर रहे हैं। मैं उन्हें सिर्फ अपना ड्राइवर नहीं मानता। मैं अपना काम करता हूं और वह अपना काम करते हैं। हमारे काम अलग हो सकते हैं, लेकिन हम एक ही टीम का हिस्सा हैं, इसलिए वह मेरे सहयोगी हैं।” डॉ. मिश्रा ने कहा कि एम्प्लॉयर की यह सोच और अपने कर्मचारी के प्रति सम्मान देखकर वह काफी प्रभावित हुए।

नौकर ना समझे

इस घटना को शेयर करते हुए डॉ. प्रशांत मिश्रा ने कहा कि घरों और दफ्तरों में काम करने वाले कर्मचारियों, घरेलू सहायकों और सपोर्ट स्टाफ का हमेशा सम्मान किया जाना चाहिए। उन्होंने लिखा, “अपने घर या कार्यस्थल पर काम करने वाले लोगों को कभी सिर्फ नौकर या कर्मचारी समझकर न देखें। वे हमारी रोजमर्रा की जिंदगी को आसान बनाने में अहम भूमिका निभाते हैं और उतने ही सम्मान और आदर के हकदार हैं, जितने कोई और।”

पोस्ट पर लोगों ने किए कमेंट

ये कहानी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई और बड़ी संख्या में लोगों ने एम्प्लॉयर की सोच और अपने कर्मचारी के प्रति सम्मान की जमकर सराहना की। एक यूजर ने लिखा, “बिल्कुल सही डॉक्टर, हमारे समाज में आज भी कई लोग हर काम की बराबर इज्जत करना नहीं सीख पाए हैं।” वहीं दूसरे यूजर ने कहा, “थोड़ा सम्मान, धन्यवाद और इंसानियत किसी की जिंदगी बदल सकती है।” एक अन्य यूजर ने अपना एक्सपीरिएंस शेयर करते हुए बताया कि उन्होंने अपने घरेलू काम करने वालों के लिए SIP शुरू की है, ताकि कई साल बाद उनके काम छोड़ने पर उन्हें रिटायरमेंट की तरह एक अच्छी रकम दी जा सके।

जिसे अपना बेटा समझकर पाला, वह निकला किसी और का! DNA टेस्ट से हुआ बड़ा खुलासा

अमेरिका से सामने आया एक चौंकाने वाला मामला लोगों को हैरान कर रहा है, जहां दो परिवारों को करीब चार दशक बाद पता चला कि जिन बच्चों को उन्होंने अपना समझकर पाला, वे जन्म के समय ही आपस में बदल गए थे। एक सामान्य DNA टेस्ट ने 38 साल पुराने इस रहस्य को उजागर कर दिया और परिवारों की पूरी जिंदगी की कहानी बदल गई। इस खुलासे के बाद दोनों परिवारों ने अस्पताल पर गंभीर आरोप लगाते हुए कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।

मामला सिर्फ बच्चों की अदला-बदली तक सीमित नहीं है, बल्कि इससे जुड़े भावनात्मक नुकसान, खोए हुए रिश्तों और बीते वर्षों की भरपाई को लेकर भी सवाल खड़े हो गए हैं। अब यह घटना जन्म के समय होने वाली लापरवाही और उसकी दूरगामी असर पर बड़ी चर्चा का कारण बन गई है।

एक DNA रिपोर्ट से सामने आया दशकों पुराना सच

काइल बायलिन और जेरेमी मॉरिसन का जन्म 26 जनवरी 1988 को नॉर्थ डकोटा के ग्राफ्टन स्थित यूनिटी मेडिकल सेंटर में हुआ था। दोनों परिवारों का आरोप है कि अस्पताल की गलती के कारण नवजात बच्चों की अदला-बदली हो गई और दोनों बच्चे गलत परिवारों के साथ घर चले गए। यह मामला तब सामने आया जब काइल को क्रिसमस पर मिले होम DNA टेस्ट के नतीजों ने उसे एक ऐसे रिश्तेदार से जोड़ दिया, जो उसके परिवार से अलग था। आगे की जांच में पता चला कि वह और जेरेमी एक-दूसरे के जैविक परिवारों में पले-बढ़े थे।

मैं अपने परिवार में अलग क्यों दिखता था?’

जेरेमी मॉरिसन, जो अब कोलोराडो में रहते हैं, लंबे समय से खुद को अपने परिवार से अलग महसूस करते थे। उनका कहना था कि परिवार में कोई भी उनके जैसा नहीं दिखता था। जहां बाकी सभी के बाल भूरे थे, वहीं वह सुनहरे बालों वाले बच्चे थे। DNA जांच के बाद उन्हें एहसास हुआ कि उनकी यह अलग पहचान किसी संयोग की वजह से नहीं, बल्कि जन्म के समय हुई कथित गलती का नतीजा थी।

माता-पिता बोले- खोए हुए साल वापस नहीं आ सकते

इस खुलासे का असर सिर्फ दोनों बेटों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनके माता-पिता भी भावनात्मक रूप से प्रभावित हुए।

काइल को अपना बेटा मानकर पालने वाली एवलिन न्यूटन ने कहा कि उनका रिश्ता आज भी पहले जैसा ही है, लेकिन उन्हें इस बात का दुख है कि वह अपने जैविक बेटे के साथ बिताए जाने वाले कई अनमोल साल खो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि काइल हमेशा उनका बेटा रहेगा, लेकिन बीते हुए वर्षों को दोबारा हासिल नहीं किया जा सकता।

जैविक परिवारों से मिलना रहा भावुक अनुभव

सच्चाई सामने आने के बाद दोनों युवकों ने अपने असली माता-पिता से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि मुलाकातें बेहद भावुक थीं, लेकिन परिस्थितियां असामान्य होने के कारण कुछ अजीब भी महसूस हुईं।

अस्पताल ने आरोपों से किया इनकार

दोनों परिवारों ने यूनिटी मेडिकल सेंटर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। हालांकि अस्पताल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए अदालत से केस रद्द करने की मांग की है। अस्पताल का कहना है कि उस समय के रिकॉर्ड अब उपलब्ध नहीं हैं और डिलीवरी टीम के कोई भी सदस्य वर्तमान में वहां काम नहीं करते। हालांकि, अस्पताल ने यह भी माना कि इस घटना ने परिवारों पर गहरा भावनात्मक असर डाला है।

DNA टेक्नोलॉजी ने खोला 38 साल पुराना रहस्य

यह मामला दिखाता है कि आधुनिक DNA टेस्ट किस तरह वर्षों पुराने पारिवारिक रहस्यों को उजागर कर सकते हैं। लेकिन इस खुलासे ने उन परिवारों के सामने भावनाओं, रिश्तों और खोए हुए समय से जुड़े कई मुश्किल सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

जब कर्मचारी ने मांगी सैलरी कट की सजा, बॉस ने कर दिया ऐसा ऐलान कि सब रह गए दंग