Rajesh Sharma: प्रभास स्टारर ‘फौजी’ के सेट पर बीमार पड़े राजेश शर्मा अस्पताल से हुए डिस्चार्ज, सामने आया हेल्थ अपडेट

Rajesh Sharma: प्रभास की आने वाली फिल्म ‘फ़ौजी’ की शूटिंग के दौरान कीड़े के काटने की घटना के कुछ दिनों बाद, अस्पताल से छुट्टी मिलने पर एक्टर राजेश शर्मा मुंबई स्थित अपने घर पर ठीक हो रहे हैं। हालांकि अनुभवी एक्टर की हालत ठीक बताई जा रही है और उम्मीद है कि वे जल्द ही काम पर लौटेंगे, लेकिन इस घटना को लेकर अलग-अलग बातें सामने आई हैं।

फेडरेशन ऑफ़ वेस्टर्न इंडिया सिने एम्प्लॉइज (FWICE) की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, इलाज के बाद शर्मा घर लौट आए हैं और अभी ठीक हो रहे हैं। इस बात की पुष्टि करते हुए FWICE के प्रेसिडेंट बीएन तिवारी ने बॉलीवुड हंगामा को बताया, “राजेश शर्मा जी को हाल ही में अस्पताल से छुट्टी मिली है। वे अभी मुंबई में अपने घर पर ठीक हो रहे हैं। वे आने वाले दिनों में एक प्रोजेक्ट की शूटिंग के लिए विदेश भी जाने वाले हैं।”

हाल ही में, उनके पारिवारिक दोस्त और एक्टर सुदीपा चटर्जी ने बताया कि शर्मा की हालत ‘काफी बेहतर’ है और उनकी स्थिति पर लगातार नज़र रखी जा रही है। चटर्जी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया, “अब वे थोड़े बेहतर हैं। किसी अनजान कीड़े के काटने की वजह से यह हुआ है; टेस्ट किए जा रहे हैं और उनकी हालत पर नज़र रखी जा रही है। इलाज चल रहा है और पिछले दो दिनों में वे काफी बेहतर हुए हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “राजेश जी की मां बहुत बुज़ुर्ग हैं और उनकी बहन विदेश में थीं, इसलिए वे हमारे पारिवारिक दोस्त हैं। जब हमें इस बारे में पता चला, तो हम तुरंत अस्पताल पहुंचे और तभी मैंने अपना पहला बयान भी दिया।”

सुदीपा ने आगे बताया, “हैदराबाद से लौटने के बाद जब वे घर पर थे, तो उन्हें बुखार था। उन्हें लगा कि यह बुखार है या शायद मच्छर के काटने की वजह से हो सकता है, इसलिए वे घर आ गए। घर पर बेचैनी महसूस होने के बाद वे पास के अस्पताल गए, जहां उन्हें भर्ती कर लिया गया।”

शर्मा की सेहत से जुड़ी खबरें इस महीने की शुरुआत में तब सामने आईं, जब एक्ट्रेस और उनकी पारिवारिक दोस्त सुदीपा चटर्जी ने सोशल मीडिया पर एक बयान शेयर किया; हालांकि, बाद में उस बयान को हटा दिया गया। बयान में कहा गया था कि हैदराबाद के रामोजी फिल्म सिटी में ‘फ़ौजी’ की शूटिंग के दौरान एक्टर को किसी कीड़े ने काट लिया था। इसमें आगे बताया गया कि इस घटना के बाद उनकी हालत बिगड़ गई, जिसके बाद वे कोलकाता गए और इलाज के लिए ढाकुरिया के मणिपाल अस्पताल में भर्ती हुए।

हालांकि, ‘फौजी’ के मेकर्स ने ऐसी किसी घटना की जानकारी होने से इनकार किया है। ‘गुल्टे’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, फिल्म की टीम के सदस्यों ने बताया कि राजेश ने अपनी तय शूटिंग लगभग एक हफ़्ते पहले ही पूरी कर ली थी और वे सेट से जा चुके थे। उन्होंने कहा कि उन्हें कीड़े के काटने की घटना के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

एक्टर अक्षय कुमार, जिन्होंने ‘भूत बंगला’ में शर्मा के साथ काम किया है, ने भी इस खबर पर प्रतिक्रिया दी और उनके जल्द ठीक होने की कामना की। X पर एक पोस्ट शेयर करते हुए उन्होंने लिखा, “शूटिंग के दौरान कीड़े के काटने के बाद मेरे प्यारे दोस्त राजेश की सेहत के बारे में सुनकर बहुत चिंता हुई। उम्मीद है कि महादेव उन्हें जल्द और पूरी तरह से ठीक कर देंगे। जल्दी ठीक हो जा यार, अभी साथ बैठकर बहुत हंसना है।”

राजेश शर्मा या उनके प्रतिनिधियों ने अभी तक इस घटना पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है। शर्मा ने कई सालों में बेहतरीन काम किया है। उन्होंने ‘खोसला का घोसला’, ‘इश्किया’, ‘नो वन किल्ड जेसिका’, ‘चिल्लर पार्टी’, ‘द डर्टी पिक्चर’, ‘स्पेशल 26’, ‘तनु वेड्स मनु रिटर्न्स’, ‘बजरंगी भाईजान’, ‘एम.एस. धोनी: द अनटोल्ड स्टोरी’, ‘टॉयलेट: एक प्रेम कथा’, ‘इंडियाज़ मोस्ट वांटेड’ और ‘भूत बंगला’ जैसी फिल्मों में शानदार अभिनय किया है।

चारों तरफ पर्दे, सादे कपड़ों में पुलिस और आधी रात का एक्शन… सोनम वांगचुक की मिडनाइट शिफ्टिंग की पूरी इनसाइड स्टोरी

Sonam Wangchuk Shifted to Hospital: दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से जारी पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल शनिवार तड़के एक नाटकीय मोड़ पर खत्म हुई। पुलिस ने बेहद सीक्रेट अभियान से वांगचुक को धरना स्थल से उठाकर सफदरजंग अस्पताल में भर्ती करा दिया।

यह केवल एक सामान्य मेडिकल शिफ्टिंग नहीं थी, बल्कि इसके पीछे एक गहरी प्रशासनिक रणनीति और कानूनी मजबूरी थी। आइए जानते हैं जंतर-मंतर पर रात के सन्नाटे में हुए इस पूरे एक्शन की ‘इनसाइड स्टोरी’ कि आखिर कैसे और क्यों ऐसा किया गया।

आधी रात का सन्नाटा और सादे कपड़ों में पुलिस की घेराबंदी

इस पूरे ऑपरेशन की टाइमिंग और तरीका बेहद चौंकाने वाला था। पुलिस नहीं चाहती थी कि दिन के उजाले में कार्रवाई करने से समर्थकों की भारी भीड़ जुट जाए या जंतर-मंतर पर कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़े। इसलिए तड़के का समय चुना गया।

धरना स्थल पर अचानक पहुंचे पुलिस बल के कई जवान सादे कपड़ों में थे ताकि प्रदर्शनकारियों को तुरंत भनक न लगे कि कोई बड़ा एक्शन होने जा रहा है। उन्होंने आते ही वांगचुक के चारों तरफ एक अभेद्य सुरक्षा घेरा बना दिया।

ऑपरेशन ‘पर्दा’: कैमरे और लाइव स्ट्रीमिंग रोकने की कवायद

इंसाइड स्टोरी का सबसे दिलचस्प हिस्सा था सोनम वांगचुक को ले जाने का तरीका। वांगचुक को व्हीलचेयर या स्ट्रेचर पर ले जाने से पहले उनके चारों तरफ बड़े-बड़े पर्दे तान दिए गए।

सोशल मीडिया के इस दौर में पुलिस किसी भी ऐसे वीडियो या लाइव स्ट्रीमिंग को रोकना चाहती थी, जिससे यह संदेश जाए कि वांगचुक के साथ जबरदस्ती की जा रही है। पर्दे के पीछे ही उन्हें सुरक्षित रूप से गाड़ी तक ले जाया गया, जिससे कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के कार्यकर्ता कुछ समझ पाते, तब तक गाड़ी निकल चुकी थी।

नए पुलिस कमिश्नर की ताजपोशी और 24 घंटे में एक्शन

इस कार्रवाई के पीछे प्रशासनिक गलियारों में हो रही हलचल भी एक बड़ा कारण थी। जंतर-मंतर पर 20 दिनों से अनशन चल रहा था, लेकिन यह सख्त एक्शन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अनुराग कुमार को दिल्ली का नया पुलिस कमिश्नर बनाए जाने के ठीक एक दिन बाद हुआ। उन्होंने सतीश गोलचा की जगह ली है। नए नेतृत्व के आते ही पेंडिंग पड़े इस संवेदनशील मामले को तुरंत निपटाने का फैसला लिया गया।

दिल्ली हाईकोर्ट का ‘सुरक्षा कवच’ और मेडिकल मजबूरी

पुलिस के इस कदम के पीछे दिल्ली हाईकोर्ट का वह सख्त आदेश था, जिसने पुलिस को कानूनी रूप से मजबूत आधार दिया। दो दिन पहले हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने साफ कहा था कि ‘किसी भी नागरिक का जीवन कीमती है’। कोर्ट ने प्रशासन को वांगचुक की रोजाना क्लिनिकल जांच करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल दखल देने का आदेश दिया था।

20 दिनों के उपवास के कारण वांगचुक के शरीर में पानी की गंभीर कमी हो चुकी थी और वे बेहद कमजोर हो चुके थे। डॉक्टरों की रिपोर्ट के आधार पर पुलिस ने कोर्ट के आदेश का हवाला देकर यह कदम उठाया ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए प्रशासन को जिम्मेदार न ठहराया जा सके।

अस्पताल के अंदर का माहौल और पत्नी की चेतावनी

सफदरजंग अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भर्ती होने के बाद भी यह मामला शांत नहीं हुआ है। डॉक्टरों ने वांगचुक को स्थिर लेकिन बेहद कमजोर बताया है। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो ने अस्पताल प्रशासन को दो टूक कह दिया है कि उनकी लिखित सहमति के बिना वांगचुक को कोई भी ड्रिप, दवा या जबरन खाना न दिया जाए। उन्होंने किसी भी ऊंच-नीच के लिए सीधे प्रशासन को जिम्मेदार ठहराने की बात कही है।

प्रशासन की अगली चुनौती: 20 जुलाई का ‘संसद मार्च’

पुलिस ने वांगचुक को तो अस्पताल पहुंचा दिया और जंतर-मंतर को भी खाली करा लिया है, लेकिन आंदोलनकारियों के हौसले पस्त नहीं हुए हैं। CJP के संस्थापक अभिजीत दिपके ने खुद भूख हड़ताल शुरू कर दी है और ऐलान किया है कि मानसून सत्र के पहले दिन यानी 20 जुलाई को होने वाला ‘संसद मार्च’ किसी भी कीमत पर रुकने वाला नहीं है। अब दिल्ली पुलिस के सामने 20 जुलाई को संसद के घेराव को रोकने की सबसे बड़ी चुनौती होगी।

20 दिन की भूख हड़ताल के बाद सोनम वांगचुक की बिगड़ी तबीयत, दिल्ली पुलिस ने अस्पताल में कराया भर्ती

दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 20 दिनों से अनशन कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार को पुलिस अस्पताल लेकर गई। लंबे समय से जारी भूख हड़ताल के कारण उनकी सेहत को लेकर काफी चिंता जताई जा रही थी। पुलिस द्वारा वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद प्रदर्शन स्थल पर मौजूद अन्य प्रदर्शनकारियों को भी वहां से हटाया जा रहा है। बता दें कि सोनम वांगचुक 28 जून से नीट (NEET) जैसी बड़ी परीक्षाओं के पेपर लीक के मामलों को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं।

वहीं, पुलिस द्वारा सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के कार्यकर्ताओं ने विरोध-प्रदर्शन और नारेबाजी शुरू कर दी।

दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर हुई कार्रवाई

यह कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट में वांगचुक की बिगड़ती सेहत पर हुई सुनवाई के बाद की गई। दो दिन पहले, कोर्ट ने अधिकारियों को निर्देश दिया था कि वे इस क्लाइमेट एक्टिविस्ट की रोजाना क्लिनिकल जांच करें। साथ ही यह भी कहा था कि “किसी भी नागरिक की जान कीमती होती है” और उनकी सेहत पर लगातार नजर रखने के साथ जरूरत पड़ने पर तुरंत मेडिकल सहायता दी जानी चाहिए।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, रोजाना जारी होने वाले मेडिकल बुलेटिन में लगातार वांगचुक की हालत को लेकर चिंता जताई गई थी। दो दिन पहले जारी एक अपडेट में डॉक्टरों ने बताया था कि भूख हड़ताल के दौरान उनका वजन 8 किलोग्राम से ज्यादा घट गया है और उनकी सेहत लगातार बिगड़ रही है।

दिल्ली पुलिस ने दी जानकारी 

वहीं, अब दिल्ली पुलिस ने बताया कि जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक को शनिवार को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, क्योंकि उनके अनशन के 21वें दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई थी।

पुलिस ने एक बयान में कहा, “माननीय हाई कोर्ट के आदेशों और एक्सपर्ट मेडिकल सलाह के अनुसार, सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत को देखते हुए उन्हें जरूरी मेडिकल देखभाल के लिए अस्पताल ले जाया गया है। माननीय हाई कोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए जब उन्हें ले जाया जा रहा था, तो प्रदर्शनकारियों ने बाधा डालने की कोशिश की, जिससे थोड़ी अफरातफरी मची। हालांकि, पुलिस ने बहुत संयम बरता और पूरी प्रक्रिया को सुरक्षित रूप से पूरा किया।”

वहीं, दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे अपना आंदोलन खत्म कर जंतर-मंतर स्थल को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण तरीके से खाली कर दें।

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‘हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये…’, मरीज ने शेयर किया मुंबई के अस्पताल का बिल, लोगों के उड़े होश

अस्पताल में चार दिन रहना…, एक आम सर्जरी… और 11 लाख रुपये से ज्यादा का बिल। मुंबई के एक अस्पताल में हर्निया की सर्जरी के लिए एक मरीज द्वारा 11.04 लाख रुपये चुकाने का दावा करने वाली एक वायरल पोस्ट ने बहस छेड़ दी है। इस दावे ने भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर की बढ़ती लागत पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

यह चर्चा तब शुरू हुई जब X यूजर निखिल झा ने एक पोस्ट शेयर किया, जिसमें दावा किया गया कि उनके एक फॉलोअर की मुंबई के एक नामी अस्पताल में इंग्वाइनल हर्निया की सर्जरी हुई थी। पोस्ट के अनुसार, मरीज से इलाज के लिए 11.04 लाख रुपये लिए गए।

जानकारी शेयर करते हुए पोस्ट में लिखा था, “कल एक फॉलोअर ने हमें मुंबई के एक बड़े अस्पताल में अपनी हर्निया सर्जरी के बारे में मैसेज किया। कुल खर्च 11.04 लाख रुपये था। हां, हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये।” आगे अपनी बात रखते हुए झा ने लिखा, “हम इतनी बड़ी रकम देखकर हैरान और स्तब्ध रह गए। अगर छोटी सी हर्निया सर्जरी का खर्च इतना है, तो बड़ी सर्जरी का खर्च क्या होगा? तो क्या मुंबई में अस्पताल में भर्ती होना कोई अपराध बनता जा रहा है? क्या शहर में अच्छी हेल्थकेयर ऐसी लग्जरी बन गई है, जिसे सिर्फ बहुत अमीर लोग ही उठा सकते हैं?”

पोस्ट में एक स्क्रीनशॉट भी शेयर किया गया, जो इंश्योरेंस क्लेम सेटलमेंट का मैसेज लग रहा था। इमेज के अनुसार, कुल मेडिकल खर्च 11,04,100 रुपये था, जबकि सेटल किया गया इंश्योरेंस क्लेम अमाउंट 4,64,000 रुपये था। डॉक्यूमेंट से पता चला कि मरीज को इंग्वाइनल हर्निया से जुड़े इलाज के लिए 6 जुलाई से 10 जुलाई, 2026 तक अस्पताल में भर्ती किया गया था।

हालांकि, पोस्ट में इलाज के बारे में पूरी जानकारी नहीं थी, जैसे कि कौन सी सर्जरी हुई, कमरे की कैटेगरी, डॉक्टर की फीस, अतिरिक्त प्रक्रियाएं या क्या मरीज़ को अतिरिक्त मेडिकल देखभाल की जरूरत थी। इसके बावजूद, पोस्ट ने तेजी से लोगों का ध्यान खींचा और यूजर्स ने प्राइवेट अस्पतालों के खर्च और मेडिकल इलाज के खर्च को उठाने की क्षमता पर अपनी राय दी। जहां कुछ यूजर्स ने सवाल उठाया कि हर्निया की सर्जरी का बिल इतना ज्यादा कैसे हो सकता है, वहीं दूसरों ने कहा कि मामले को ठीक से समझने के लिए और जानकारी की जरूरत है।

एक डॉक्टर ने पोस्ट पर कमेंट किया, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11 लाख रुपये बहुत ज़्यादा हैं। क्या इसमें हेलीकॉप्टर से पिक-अप और ड्रॉप भी शामिल था?” एक यूजर ने हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता के बारे में चिंता जताई और लिखा, “हर्निया की सर्जरी के लिए 11.04 लाख रुपये? यह भारत के मेट्रो शहरों में हेल्थकेयर के खर्च को उठाने की क्षमता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। 11 लाख रुपये से ज़्यादा की आम हर्निया सर्जरी कई मध्यम-वर्गीय परिवारों की पहुंच से बाहर है। इंश्योरेंस होने पर भी, अगर क्लेम सीमित हैं या रिजेक्ट हो जाते हैं, तो ऐसे खर्च आर्थिक तनाव पैदा कर सकते हैं। अस्पताल की कीमतों, इंश्योरेंस सेटलमेंट और मेडिकल बिलिंग में ज़्यादा पारदर्शिता होनी चाहिए। अच्छी क्वालिटी की हेल्थकेयर सिर्फ अमीरों के लिए ही नहीं होनी चाहिए।”

एक और यूजर ने शहरों के बीच इलाज के खर्च की तुलना की और लिखा, “सूरत में हर्निया की सर्जरी का खर्च 1.5 लाख रुपये है, जबकि मुंबई के एक बड़े अस्पताल में उसी प्रक्रिया का खर्च 11.04 लाख रुपये है। कीमत में इतना बड़ा अंतर होने के बावजूद, पॉलिसीहोल्डर एक जैसा प्रीमियम देते हैं। यह दिखाता है कि कैसे बड़े मेट्रो अस्पतालों में इलाज का बढ़ता खर्च सालाना हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम को बढ़ाने में योगदान दे सकता है।”

कुछ यूजर्स ने यह भी कहा कि सिर्फ अस्पताल का बिल पूरी मेडिकल स्थिति को नहीं समझा सकता। यूजर ने लिखा, “यह मैसेज यह नहीं बताता कि कौन सी प्रक्रिया की गई थी। यह समझने के लिए कि क्या मरीज को कोई कॉम्प्लिकेशन हुआ था और क्या उसे ICU में रहना पड़ा था, हमें ऑपरेशन नोट्स और डिस्चार्ज समरी देखने की जरूरत है।”

Delhi Crime News: स्कूटी पर पति-पत्नी के बीच हुआ झगड़ा, कांस्टेबल ने बीच सड़क पर पत्नी को मारी गोली

Delhi Crime News: पूर्वी दिल्ली के कल्याणपुरी इलाके में सोमवार (13 जुलाई) को घरेलू विवाद ने खौफनाक मोड़ ले लिया। दिल्ली पुलिस के एक कांस्टेबल ने कथित तौर पर अपनी पत्नी की बीच सड़क सर्विस पिस्टल से गोली मारकर हत्या कर दी। वारदात के बाद आरोपी मौके से फरार हो गया। पुलिस उसकी तलाश में कई जगहों पर छापेमारी कर रही है।

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पति-पत्नी के बीच लंबे समय से घरेलू विवाद चल रहा था। दोनों के बीच अक्सर कहासुनी होती रहती थी। सोमवार को भी दोनों घर से एक ही स्कूटर पर निकले थे। लेकिन रास्ते में फिर विवाद शुरू हो गया।

दिल्ली पुलिस ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “कल्याणपुरी इलाके में एक कॉन्स्टेबल अपनी पत्नी के साथ स्कूटर पर जा रहा था, तभी दोनों के बीच बहस हो गई। कॉन्स्टेबल ने सड़क पर ही अपनी पत्नी को गोली मार दी। चार-पांच लोगों ने यह घटना देखी और उसे ऑटो-रिक्शा से अस्पताल पहुंचाया। लेकिन उसकी मौत हो गई। आरोपी कांस्टेबल फरार है।”

आरोपी कांस्टेबल पूर्वी जिला पुलिस की एएटीएस (एंटी ऑटो थेफ्ट स्क्वॉड) में तैनात था। जांच के दौरान पुलिस को इलाके का CCTV फुटेज मिला है, जिसमें कथित तौर पर दोनों सड़क किनारे स्कूटर रोककर उतरते और बहस करते दिखाई दे रहे हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, बहस के दौरान कांस्टेबल ने अपनी सर्विस पिस्टल निकाली और पत्नी को गोली मार दी।

पत्नी ने अस्पताल में तोड़ा दम

गोली लगने के बाद आसपास मौजूद लोगों ने महिला को तुरंत अस्पताल पहुंचाया। लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद आरोपी कांस्टेबल मौके से फरार हो गया। पुलिस के अनुसार, आरोपी पूर्वी जिले की एंटी-थेफ्ट स्क्वॉड में तैनात था। उसकी गिरफ्तारी के लिए कई टीमें गठित की गई हैं।

पुलिस आसपास के CCTV फुटेज खंगाल रही है और फरार आरोपी के संभावित भागने के रास्तों की भी जांच कर रही है। मामले में हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस परिजनों और दंपति के परिचितों से भी पूछताछ कर रही है ताकि वारदात के पीछे की परिस्थितियों का पता लगाया जा सके। जांच जारी है।

दिल्ली में एक और बड़ी घटना

इस बीच दिल्ली के अलीपुर इलाके में हिरनकी गांव के पास यमुना नदी में नहाते समय तेज बहाव में बह जाने से चार नाबालिगों के डूबने की आशंका है। एक अधिकारी ने बताया कि पुलिस को रविवार शाम करीब 7:30 बजे इस घटना की सूचना मिली। पुलिस के मुताबिक, रविवार को पांच नाबालिग नहाने के लिए यमुना में उतरे थे। उनमें से एक ने दूसरों को आगाह करने के लिए शोर मचाया, जबकि बाकी चार तेज़ बहाव में बह गए और लापता हो गए।

नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF), दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA), दिल्ली फायर सर्विस और स्थानीय पुलिस की टीमें तलाशी अभियान में जुटी हुई हैं। सोमवार को लगातार दूसरे दिन भी तलाशी जारी रही। पुलिस ने बताया कि अब तक कोई शव बरामद नहीं हुआ है।

Ayurveda’s Garbhadana Samskara: क्या है आयुर्वेद का गर्भाधान संस्कार जो दे रहा इनफर्टिलिटी को मात?

आज के दौर में इनफर्टिलिटी, हार्मोनल असंतुलन और प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानियां तेजी से सामने आ रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता बनने की तैयारी सिर्फ गर्भधारण के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले भी शुरू होनी चाहिए। इसी सोच को प्री-कन्सेप्शन केयर कहा जाता है, जिसमें गर्भधारण से पहले महिला और पुरुष दोनों के स्वास्थ्य, खानपान और मानसिक स्थिति पर ध्यान दिया जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि आधुनिक चिकित्सा में जिस सोच पर अब जोर दिया जा रहा है, आयुर्वेद में इसकी चर्चा सदियों पहले ‘गर्भाधान संस्कार’ के रूप में की गई थी। इसमें स्वस्थ संतान के लिए माता-पिता को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार करने की बात कही गई है।

सिर्फ बच्चा पैदा करना नहीं, स्वस्थ शुरुआत पर जोर

कर्नाटक के उडुपी स्थित SDM College of Ayurveda and Hospital में कई वर्षों से गर्भाधान संस्कार को आयुर्वेदिक प्री-कन्सेप्शन केयर के तौर पर अपनाया जा रहा है। यहां कई दंपती गर्भधारण से पहले सलाह लेने पहुंचते हैं। संस्थान की प्रिंसिपल और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता केवी के मुताबिक, इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल गर्भधारण में मदद करना नहीं, बल्कि भावी माता-पिता के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। इसमें खानपान में सुधार, जीवनशैली में बदलाव, व्यक्तिगत आयुर्वेदिक उपचार और मानसिक परामर्श जैसी चीजों पर ध्यान दिया जाता है।

आयुर्वेद में गर्भधारण को माना गया एक जिम्मेदार फैसला

डॉ. ममता के अनुसार, ‘गर्भ’ का मतलब भ्रूण और ‘आदान’ का अर्थ स्थापना होता है। गर्भाधान संस्कार का उद्देश्य है कि संतान के आने से पहले माता-पिता अपने शरीर और मन को बेहतर तरीके से तैयार करें। आयुर्वेद के अनुसार, गर्भधारण केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।

स्वस्थ संतान के लिए चार चीजों को माना गया अहम

आयुर्वेद में स्वस्थ गर्भधारण के लिए चार प्रमुख आधार बताए गए हैं

  • ऋतु – गर्भधारण का सही समय
  • क्षेत्र – महिला का स्वस्थ प्रजनन तंत्र
  • अंबु – पर्याप्त पोषण
  • बीज – स्वस्थ अंडाणु और शुक्राणु

आयुर्वेद इसे खेती से जोड़कर समझाता है। जैसे अच्छी फसल के लिए सही मौसम, उपजाऊ जमीन, पर्याप्त पानी और अच्छे बीज जरूरी होते हैं, वैसे ही स्वस्थ संतान के लिए भी सही तैयारी जरूरी मानी जाती है।

बदलती जीवनशैली से बढ़ रही प्री-कन्सेप्शन केयर की जरूरत

आज की जीवनशैली में तनाव, खराब खानपान और कई स्वास्थ्य समस्याएं प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में बड़ी संख्या में लोग अपने जीवनकाल में कभी न कभी इनफर्टिलिटी की समस्या का सामना करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि PCOD, मोटापा, डायबिटीज और थायरॉइड जैसी समस्याएं गर्भावस्था के दौरान कई जोखिम बढ़ा सकती हैं, जिनमें मिसकैरेज, प्रेग्नेंसी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और समय से पहले डिलीवरी शामिल हैं।

PCOD और थायरॉइड के बाद भी स्वस्थ मां बनीं अनन्या

डॉक्टरों ने बेंगलुरु की 33 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल अनन्या (बदला हुआ नाम) का उदाहरण साझा किया। अनन्या PCOD, हाइपोथायरॉइडिज्म, गर्भाशय में फाइब्रॉइड और पहले हुए मिसकैरेज जैसी समस्याओं से जूझ चुकी थीं। उन्होंने तुरंत गर्भधारण की कोशिश करने के बजाय पहले अपनी सेहत सुधारने का फैसला किया। आयुर्वेदिक मार्गदर्शन में उन्होंने गर्भाधान संस्कार के तीन उपचार चक्र पूरे किए। कुछ समय बाद उन्होंने प्राकृतिक रूप से गर्भधारण किया। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी पूरी प्रेग्नेंसी सामान्य रही और अगस्त 2025 में उन्होंने 3.2 किलोग्राम वजन वाले स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

डॉक्टरों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि हर महिला की गर्भावस्था अलग होती है और कोई भी चिकित्सा पद्धति निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं दे सकती। हालांकि, गर्भधारण से पहले स्वास्थ्य पर ध्यान देना मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।

 

ऑपरेशन के बीच में ही आ गया होश…! 10 साल की बहन को खोने वाले इन्फ्लुएंसर भाई ने यूपी के अस्पताल का खौफनाक हाल सुनाया

कंटेंट क्रिएटर और ऑन्टोप्रेन्योर यश प्रताप सिंह ने सोशल मीडिया पर एक इमोशनल वीडियो शेयर किया है। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के रायबरेली के एक निजी अस्पताल की लापरवाही के कारण उनकी 10 साल की बहन की मौत हो गई। यश ने बताया कि उनकी बहन का टॉन्सिल का ऑपरेशन रायबरेली के शाश्वत अस्पताल में डॉ. अमित सिंह की देखरेख में कराया गया था। उनके अनुसार, यह एक सामान्य सर्जरी थी, लेकिन ऑपरेशन के बाद बच्ची की मौत हो गई।

वीडियो में यश अपने परिवार के साथ बहन का शव घर ले जाते हुए दिखाई देते हैं। उन्होंने दावा किया कि डॉक्टरों ने बताया था कि ऑपरेशन सफल रहा, लेकिन ऑपरेशन के दौरान अचानक स्थिति बिगड़ गई। यश का आरोप है कि ऑपरेशन के समय बच्ची को दिए गए एनेस्थीसिया (बेहोशी की दवा) में गड़बड़ी हुई। उनका कहना है कि सर्जरी के बीच में ही उनकी बहन को होश आ गया और वह दर्द से चिल्लाने लगी। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर लोगों में गुस्सा है और मामले की निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों पर कार्रवाई की मांग की जा रही है।

10 साल की बच्ची की मौत पर परिवार ने अस्पताल पर लगाए गंभीर आरोप

यश प्रताप सिंह ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के दौरान उनकी बहन की हालत अचानक बिगड़ गई। उन्होंने बताया कि बच्ची की चीख सुनकर परिवार के सभी लोग ऑपरेशन थिएटर के बाहर पहुंच गए। उनका दावा है कि डॉक्टर बच्ची को बिना स्ट्रेचर के बाहर लेकर आए, जबकि वह दर्द से रो रही थी। यश के अनुसार, कुछ देर बाद डॉक्टरों ने बच्ची को एक इंजेक्शन लगाया। इसके तुरंत बाद उसकी तबीयत और बिगड़ गई। उन्होंने कहा कि कुछ ही सेकंड में उसकी धड़कन और सांसें रुक गईं और उसकी आंखें पलट गईं।

उन्होंने बताया कि डॉक्टरों ने तुरंत सीपीआर (CPR) देकर बच्ची को बचाने की कोशिश की। इसके बाद परिवार को बताया गया कि बच्ची को वेंटिलेटर पर रखना होगा और बेहतर इलाज के लिए उसे लखनऊ ले जाना पड़ेगा। यश के मुताबिक, उनकी बहन सात दिन तक वेंटिलेटर पर जिंदगी की जंग लड़ती रही, लेकिन आखिरकार उसकी मौत हो गई। परिवार का आरोप है कि यह पूरी घटना अस्पताल की मेडिकल लापरवाही का नतीजा है। उन्होंने डॉक्टर और अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही लोगों से अपील की है कि इस मामले को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाने के लिए सोशल मीडिया पर उन्हें टैग करें।

सोशल मीडिया पर उठी जांच और कार्रवाई की मांग

यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। बड़ी संख्या में लोगों ने बच्ची के परिवार के प्रति संवेदना जताई है। वहीं, कई लोगों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और अस्पताल व डॉक्टर के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। एक यूजर ने लिखा, “टॉन्सिल के ऑपरेशन से किसी की मौत होने की बात कभी नहीं सुनी। अगर ऐसा हुआ है तो यह गंभीर लापरवाही का मामला है और इसकी पूरी जांच होनी चाहिए।” एक अन्य यूजर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री कार्यालय और यूपी पुलिस को टैग करते हुए अस्पताल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

एक और व्यक्ति ने लिखा कि बच्ची और उसके परिवार को न्याय मिलना चाहिए और यदि जांच में लापरवाही साबित होती है तो अस्पताल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए। कुछ लोगों ने यह भी मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए। वहीं, कई यूजर्स का कहना है कि अगर मेडिकल लापरवाही साबित होती है तो ऐसे डॉक्टरों और अस्पतालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

घर के बाहर मौत बनकर पहुंचा शेर! चरवाहे को जमीन पर दबोचा, लोगों ने पत्थर बरसाकर बचाई जान, VIDEO वायरल

Gujarat lion attack

गुजरात के भावनगर जिले से सोमवार सुबह एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी। पालिताना तालुका के गरजिया गांव में एक शेर ने अचानक एक पशुपालक पर हमला कर दिया। इस दिल दहला देने वाली घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे देखकर लोगों के रोंगटे खड़े हो रहे हैं।


जानकारी के अनुसार, घटना 6 जुलाई की सुबह उस समय हुई जब गरजिया गांव के बाहरी इलाके में रहने वाले पशुपालक कालूभाई भोगभाई गामरा अपने घर के पास मौजूद थे। तभी अचानक एक शेर वहां पहुंचा और उन पर झपट पड़ा।

जमीन पर दबोचकर करता रहा हमला

वायरल वीडियो में साफ दिखाई देता है कि शेर ने पशुपालक को जमीन पर दबोच रखा है। वह लगातार उनके पैर को काटने की कोशिश कर रहा है, जबकि घायल पशुपालक अपनी जान बचाने के लिए पूरी ताकत से संघर्ष करता नजर आता है। आसपास मौजूद लोगों की सांसें थम गईं और मौके पर अफरा-तफरी मच गई।

पत्थर फेंककर लोगों ने बचाई जान

 

शेर के हमले से घबराए ग्रामीणों ने हिम्मत दिखाई और दूर से लगातार पत्थर फेंककर शेर को भगाने की कोशिश की। काफी देर की मशक्कत के बाद शेर वहां से भागा, जिसके बाद घायल पशुपालक को लोगों ने सुरक्षित बाहर निकाला। हमले में उनके शरीर के कई हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं और काफी खून बह गया।

वन विभाग जांच में जुटा

घटना की सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने पूरे इलाके का निरीक्षण किया और जांच शुरू कर दी है। यह पता लगाया जा रहा है कि शेर गांव के रिहायशी इलाके तक कैसे पहुंचा और उसने अचानक हमला क्यों किया। इस घटना के बाद गरजिया गांव सहित आसपास के इलाकों में दहशत का माहौल है। ग्रामीणों ने वन विभाग से शेर की लगातार निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

Dividend Stocks: टाइटन से नेस्ले तक… इस हफ्ते 45 कंपनियां देंगी ₹75 तक का डिविडेंड, चेक करें पूरी लिस्ट

Dividend Stocks: अगले हफ्ते यानी 6 से 10 जुलाई के बीच शेयर बाजार में कई कंपनियों के कॉरपोरेट एक्शन पर निवेशकों की नजर रहेगी। कई बड़ी कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड (Ex-Dividend) पर ट्रेड करेंगे। अगर आप डिविडेंड का फायदा उठाना चाहते हैं, तो एक्स-डेट से पहले शेयर खरीदना होगा। तभी आप कंपनी की ओर से घोषित डिविडेंड पाने के हकदार होंगे।

सिर्फ डिविडेंड ही नहीं, अगले हफ्ते कुछ कंपनियों के शेयर बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट के लिए भी एक्स-डेट पर ट्रेड करेंगे। ऐसे में यह हफ्ता निवेशकों के लिए काफी अहम रहने वाला है।

6 जुलाई को किन शेयरों पर रहेगा फोकस?

6 जुलाई को चार कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड होंगे। DCM Shriram International अपने निवेशकों को 0.40 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। DJ Mediaprint & Logistics ने 0.15 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

वहीं, Pilani Investment and Industries Corporation 9 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देगी। Sundaram Finance ने 24 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

7 जुलाई को इन कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड

7 जुलाई को पांच कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड पर ट्रेड करेंगे। Cera Sanitaryware ने 75 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है। Dodla Dairy और Sun Pharmaceutical Industries दोनों 5-5 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देंगी।

वहीं, JSW Steel ने 7.10 रुपये प्रति शेयर और LKP Securities ने 0.20 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड घोषित किया है।

8 जुलाई को किन स्टॉक्स में मिलेगा डिविडेंड?

8 जुलाई को छह कंपनियां एक्स-डिविडेंड होंगी। इनमें Bliss GVS Pharma 1 रुपये, Hannah Joseph Hospital 2 रुपये, Kesar Terminals & Infrastructure 1.25 रुपये और Morarka Finance 1.50 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देगी।

वहीं, Mphasis ने 62 रुपये प्रति शेयर और United Spirits ने 11 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है।

9 जुलाई को इन शेयरों पर रहेगी नजर

9 जुलाई को चार कंपनियां एक्स-डिविडेंड होंगी। Harsha Engineers International 1.50 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देगी। RPG Life Sciences ने 24 रुपये प्रति शेयर, Sheela Foam ने 1 रुपये प्रति शेयर और Titan Company ने 15 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया है।

10 जुलाई को सबसे ज्यादा कंपनियां

10 जुलाई इस हफ्ते का सबसे व्यस्त दिन रहेगा। इस दिन 25 से ज्यादा कंपनियों के शेयर एक्स-डिविडेंड पर ट्रेड करेंगे। इनमें Apollo Tyres, Axis Bank, Birlasoft, CAMS, D-Link (India), Dr Reddy’s Laboratories, Geojit Financial, Hindalco, JK Cement, JSW Cement, Mahindra Logistics, Nestle India और Sobha जैसी कंपनियां शामिल हैं।

इन कंपनियों में D-Link (India) ने 20 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड और 7.50 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड घोषित किया है। Nestle India अपने निवेशकों को 5 रुपये प्रति शेयर का फाइनल और 2 रुपये प्रति शेयर का स्पेशल डिविडेंड देगी।

इसके अलावा Axis Bank 1 रुपये, Hindalco Industries 5 रुपये, JK Cement 20 रुपये, Apollo Tyres 2.50 रुपये और Dr Reddy’s Laboratories 8 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड देगी।

बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट भी होंगे

अगले हफ्ते चार कंपनियों में बोनस इश्यू और स्टॉक स्प्लिट भी होने वाला है। Gujarat Inject Kerala का शेयर 8 जुलाई को 10 रुपये फेस वैल्यू से 1 रुपये फेस वैल्यू में स्टॉक स्प्लिट होगा। Goldiam International 10 जुलाई को 1:3 बोनस इश्यू के लिए एक्स-डेट पर ट्रेड करेगी।

वहीं, Hindusthan Insulators & Industries ने 2:1 बोनस इश्यू का ऐलान किया है। Mangalam Worldwide का शेयर भी 10 जुलाई को 10 रुपये फेस वैल्यू से 1 रुपये फेस वैल्यू में स्टॉक स्प्लिट होगा।

निवेशकों के लिए क्या है जरूरी?

अगर आप डिविडेंड, बोनस शेयर या स्टॉक स्प्लिट का फायदा उठाना चाहते हैं, तो संबंधित कंपनी के शेयर एक्स-डेट से पहले खरीदने होंगे। साथ ही, कंपनी की ओर से तय रिकॉर्ड डेट का भी ध्यान रखना जरूरी है। रिकॉर्ड डेट पर जिन निवेशकों के नाम कंपनी के रिकॉर्ड में होंगे, वही डिविडेंड, बोनस शेयर या स्टॉक स्प्लिट का लाभ पाने के पात्र होंगे।

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Snake News: चीन में कोबरा ने किसान को डसा, घबराई पत्नी ने किया टीवी वाला इलाज, खुद भी हो गई शिकार!

दक्षिण-पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत में खेत में काम कर रहे एक किसान को अचानक कोबरा ने काट लिया, जिससे इलाके में हड़कंप मच गया। सांप के काटते ही किसान की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी और उसे चक्कर, कमजोरी और शरीर में सुन्नपन महसूस होने लगा। घटना के बाद परिवार के लोग घबरा गए और तुरंत मदद की कोशिश करने लगे। यह मामला इसलिए भी चर्चा में आ गया क्योंकि इसके बाद जो हुआ उसने सबको चौंका दिया। सांप के जहर से बचाव को लेकर अक्सर लोग गलत जानकारी पर भरोसा कर लेते हैं, और यही इस घटना में भी देखने को मिला। डॉक्टरों ने बाद में साफ किया कि ऐसी स्थिति में तुरंत मेडिकल मदद लेना ही सबसे सुरक्षित तरीका होता है, वरना जहर तेजी से शरीर में फैल सकता है।

पत्नी ने टीवी देखकर किया खतरनाक इलाज

घबराई हुई पत्नी ने तुरंत वही किया जो उसने टीवी पर देखा था उसने अपने पति के घाव से जहर चूसने की कोशिश की। उसे लगा कि इससे जान बच जाएगी, लेकिन यही फैसला उसके लिए भी भारी पड़ गया।

दोनों को अस्पताल ले जाना पड़ा

कुछ ही घंटों बाद पत्नी के मुंह, जीभ और चेहरे में सुन्नपन शुरू हो गया। हालत बिगड़ने पर परिवार ने उसे भी अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने बताया कि दोनों को कोबरा के जहर से हल्का जहर चढ़ गया था और एंटी-वेनम देकर इलाज किया गया।

ये गलती कभी न करें

डॉक्टरों ने साफ कहा कि सांप के जहर को मुंह से चूसना बेहद खतरनाक है। मुंह की नसों के जरिए जहर सीधे शरीर में पहुंच सकता है। साथ ही घाव को काटना, जलाना या बर्फ लगाना भी नुकसानदायक हो सकता है।

सांप काटने पर क्या करें?

डॉक्टरों के अनुसार, ऐसे समय में तुरंत अस्पताल जाएं और मरीज को कम से कम हिलाएं। सांप का रंग, आकार और निशान याद रखना या फोटो लेना इलाज में मदद कर सकता है।

सोशल मीडिया पर चर्चा में मामला

यह घटना सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। लोग इसे “टीवी ड्रामा वाली गलती” बता रहे हैं, जबकि कई लोगों ने पत्नी की चिंता और प्यार की भी तारीफ की है।

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