IPO Returns: इस साल 5 छोटे IPO ने किया बड़ा धमाका, 149% तक चढ़े स्टॉक्स

IPO Returns: 2026 में कई छोटे IPO ने निवेशकों को शानदार रिटर्न दिया है। खास बात यह है कि इनमें से हर कंपनी का इश्यू साइज 1,000 करोड़ रुपये से कम था। Prime Database के 18 अगस्त तक के आंकड़ों के मुताबिक, ये पांच IPO लिस्टिंग के बाद 50% से 149% तक चढ़ चुके हैं।

Omnitech Engineering

राजकोट की Omnitech Engineering इस लिस्ट में सबसे आगे है। कंपनी एनर्जी, इंडस्ट्रियल इक्विपमेंट और ऑटोमेशन सेक्टर के लिए हाई-प्रिसिजन इंजीनियर्ड कंपोनेंट बनाती है। कंपनी ने 583 करोड़ रुपये का IPO लाया था। मार्च 2026 में इसकी लिस्टिंग हुई और तब से शेयर करीब 149% चढ़ चुका है।

GSP Crop Science

अहमदाबाद की GSP Crop Science फसल सुरक्षा से जुड़े प्रोडक्ट बनाती है। इसमें कीटनाशक, फफूंदनाशक, खरपतवारनाशक और बायोपेस्टिसाइड शामिल हैं। कंपनी ने 400 करोड़ रुपये जुटाए थे। इसके शेयर अब तक करीब 85% का रिटर्न दे चुके हैं।

OnEMI Technology

मुंबई की OnEMI Technology Solutions डिजिटल लेंडिंग और फाइनेंसिंग प्लेटफॉर्म चलाती है। इसका IPO 926 करोड़ रुपये का था। लिस्टिंग के बाद शेयर करीब 78% ऊपर है।

Gaudium IVF

दिल्ली की Gaudium IVF and Women Health महिलाओं की प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं देती है। कंपनी IVF, ICSI और IUI जैसी फर्टिलिटी ट्रीटमेंट्स में काम करती है। कंपनी ने 165 करोड़ रुपये का IPO लाया था। अब तक इसका शेयर करीब 53% चढ़ चुका है।

Laser Power & Infra

कोलकाता की Laser Power & Infra पावर केबल, कंडक्टर और बिजली ट्रांसमिशन से जुड़े दूसरे प्रोडक्ट बनाती है। कंपनी पावर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर भी काम करती है। इसने 742 करोड़ रुपये जुटाए थे। लिस्टिंग के बाद शेयर करीब 52% का रिटर्न दे चुका है।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Ayurveda’s Garbhadana Samskara: क्या है आयुर्वेद का गर्भाधान संस्कार जो दे रहा इनफर्टिलिटी को मात?

आज के दौर में इनफर्टिलिटी, हार्मोनल असंतुलन और प्रेग्नेंसी से जुड़ी परेशानियां तेजी से सामने आ रही हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि माता-पिता बनने की तैयारी सिर्फ गर्भधारण के बाद नहीं, बल्कि उससे पहले भी शुरू होनी चाहिए। इसी सोच को प्री-कन्सेप्शन केयर कहा जाता है, जिसमें गर्भधारण से पहले महिला और पुरुष दोनों के स्वास्थ्य, खानपान और मानसिक स्थिति पर ध्यान दिया जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि आधुनिक चिकित्सा में जिस सोच पर अब जोर दिया जा रहा है, आयुर्वेद में इसकी चर्चा सदियों पहले ‘गर्भाधान संस्कार’ के रूप में की गई थी। इसमें स्वस्थ संतान के लिए माता-पिता को शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से तैयार करने की बात कही गई है।

सिर्फ बच्चा पैदा करना नहीं, स्वस्थ शुरुआत पर जोर

कर्नाटक के उडुपी स्थित SDM College of Ayurveda and Hospital में कई वर्षों से गर्भाधान संस्कार को आयुर्वेदिक प्री-कन्सेप्शन केयर के तौर पर अपनाया जा रहा है। यहां कई दंपती गर्भधारण से पहले सलाह लेने पहुंचते हैं। संस्थान की प्रिंसिपल और वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. ममता केवी के मुताबिक, इस प्रक्रिया का उद्देश्य केवल गर्भधारण में मदद करना नहीं, बल्कि भावी माता-पिता के स्वास्थ्य को बेहतर बनाना है। इसमें खानपान में सुधार, जीवनशैली में बदलाव, व्यक्तिगत आयुर्वेदिक उपचार और मानसिक परामर्श जैसी चीजों पर ध्यान दिया जाता है।

आयुर्वेद में गर्भधारण को माना गया एक जिम्मेदार फैसला

डॉ. ममता के अनुसार, ‘गर्भ’ का मतलब भ्रूण और ‘आदान’ का अर्थ स्थापना होता है। गर्भाधान संस्कार का उद्देश्य है कि संतान के आने से पहले माता-पिता अपने शरीर और मन को बेहतर तरीके से तैयार करें। आयुर्वेद के अनुसार, गर्भधारण केवल एक शारीरिक प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य से जुड़ी एक महत्वपूर्ण शुरुआत है।

स्वस्थ संतान के लिए चार चीजों को माना गया अहम

आयुर्वेद में स्वस्थ गर्भधारण के लिए चार प्रमुख आधार बताए गए हैं

  • ऋतु – गर्भधारण का सही समय
  • क्षेत्र – महिला का स्वस्थ प्रजनन तंत्र
  • अंबु – पर्याप्त पोषण
  • बीज – स्वस्थ अंडाणु और शुक्राणु

आयुर्वेद इसे खेती से जोड़कर समझाता है। जैसे अच्छी फसल के लिए सही मौसम, उपजाऊ जमीन, पर्याप्त पानी और अच्छे बीज जरूरी होते हैं, वैसे ही स्वस्थ संतान के लिए भी सही तैयारी जरूरी मानी जाती है।

बदलती जीवनशैली से बढ़ रही प्री-कन्सेप्शन केयर की जरूरत

आज की जीवनशैली में तनाव, खराब खानपान और कई स्वास्थ्य समस्याएं प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर रही हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनिया में बड़ी संख्या में लोग अपने जीवनकाल में कभी न कभी इनफर्टिलिटी की समस्या का सामना करते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि PCOD, मोटापा, डायबिटीज और थायरॉइड जैसी समस्याएं गर्भावस्था के दौरान कई जोखिम बढ़ा सकती हैं, जिनमें मिसकैरेज, प्रेग्नेंसी डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और समय से पहले डिलीवरी शामिल हैं।

PCOD और थायरॉइड के बाद भी स्वस्थ मां बनीं अनन्या

डॉक्टरों ने बेंगलुरु की 33 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल अनन्या (बदला हुआ नाम) का उदाहरण साझा किया। अनन्या PCOD, हाइपोथायरॉइडिज्म, गर्भाशय में फाइब्रॉइड और पहले हुए मिसकैरेज जैसी समस्याओं से जूझ चुकी थीं। उन्होंने तुरंत गर्भधारण की कोशिश करने के बजाय पहले अपनी सेहत सुधारने का फैसला किया। आयुर्वेदिक मार्गदर्शन में उन्होंने गर्भाधान संस्कार के तीन उपचार चक्र पूरे किए। कुछ समय बाद उन्होंने प्राकृतिक रूप से गर्भधारण किया। डॉक्टरों के अनुसार, उनकी पूरी प्रेग्नेंसी सामान्य रही और अगस्त 2025 में उन्होंने 3.2 किलोग्राम वजन वाले स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया।

डॉक्टरों की सलाह

विशेषज्ञों का कहना है कि हर महिला की गर्भावस्था अलग होती है और कोई भी चिकित्सा पद्धति निश्चित परिणाम की गारंटी नहीं दे सकती। हालांकि, गर्भधारण से पहले स्वास्थ्य पर ध्यान देना मां और बच्चे दोनों के लिए फायदेमंद हो सकता है।