SBI Loan Recovery: विधवा पत्नी की एफडी से बैंक ने गुपचुप की पति के लोन की वसूली, हाईकोर्ट ने सुनाया ब्याज सहित पैसा लौटाने का फैसला

SBI Loan Recovery: लखनऊ स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया बैंक (SBI) से जुड़ा एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहां की एक एसबीआई ब्रांच ने पति की असमय मृत्यु के बाद पत्नी की निजी एफडी गुपचुप तरीके से तुड़वा कर लोन की बकाया रकम काट ली। इस मामले में इलाहाबाद हाईकोट की लखनऊ बेंच ने बैंक को कड़ी फटकार लगाई और महिला को ब्याज सिहत रकम लौटाने का आदेश दिया है। अपनी टिप्पणी में अदालत ने बैंक के इस रवैये को ‘बैंकिंग नीति का घृणित उल्लंघन’ भी बताया। इस मामले ने एक बार फिर बैंक पर ग्राहकों के अटूट भरोसे पर सवाल खड़े किए हैं।

बैंक ने सीज किया वेतन खाता

यह मामला लखनऊ के रिंग रोड स्थित मेडिसिन अस्पताल में सहायक प्रोफेसर की पत्नी नेहा मिश्रा से जुड़ा हुआ है। नेहा के पति ने नवंबर 2020 में एसबीआई से 15 लाख रुपए का पर्सनल लोन लिया था। दुर्भाग्यवश, कोविड संक्रमण के कारण मई 2021 में उनके पति का निधन हो गया। न्यूज 18 की खबर के अनुसार, बैंक ने सितंबर 2025 में एसबीआई ने नेहा मिश्रा को कानूनी नोटिस भेजा और 13.87 लाख रुपए के बकाया लोन का भुगतान करने की मांग की। हालांकि, आरबीआई लोकपाल के हस्तक्षेप के बाद यह रोक हटा दी गई। अभी बैंक और महिला के बीच बकाया लोन भुगतान पर बातचीत चल रही थी। लेकिन इसी बीच एसबीआई ने गुपचुप तरीके से महिला की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) भुना ली और उसमें से 19.90 लाख रुपए कर्ज के नाम पर डेबिट कर लिए।

नेहा मिश्रा ने किया हाईकोर्ट का रुख

बैंक की इस हरकत का पता चलने के बाद पीड़िता नेहा मिश्रा ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच का रुख किया। मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने पाया कि मृत प्रोफेसर की पत्नी न तो इस लोन की सह-उधारकर्ता थीं और न ही गारंटर, जमानतदार, क्षतिपूर्तिकर्ता या नॉमिनी। कर्ज के इस लेनदेन में उन्होंने बैंक के साथ किसी भी तरह का करार नहीं किया था। इसके अलावा, कोर्ट ने यह भी गौर किया कि कर्ज एक बीमा पॉलिसी से कवर था, जिसके लिए मृतक ने प्रीमियम का भुगतान किया था।

अदालत ने एसबीआई को लताड़ लगाते हुए कहा कि बैंक यह साबित करने में पूरी तरह असफल रहा कि किस कानूनी प्रावधान के तहत उसने पति के कर्ज की भरपाई के लिए पत्नी के निजी खाते से रकम काटी है। कोर्ट ने एसबीआई को महिला का पूरा पैसा एफडी के लागू ब्याज दर के साथ चार हफ्ते के भीतर वापस करने का आदेश दिया। साथ ही बैंक को 1 लाख रुपए का दंडात्मक मुआवजा देने का भी निर्देश दिया। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि बैंक अपने ग्राहकों के धन के संरक्षक होते हैं और जनता के पैसों को एक ट्रस्ट के रूप में रखते हैं।

बैंक का गुपचुप वसूली का तरीका ग्राहक अधिकारों का हनन

हाईकोर्ट ने अपने फैसले में दो टूक कहा कि यदि बैंक कानूनन मृतक के कर्ज की वसूली उसकी पत्नी से कानूनी उत्तराधिकारी के रूप में करने का हकदार था, तब भी इसके लिए कानून सम्मत प्रक्रिया अपनानी जरूरी थी। इस तरह रातोंरात गुपचुप तरीके से और मनमाने ढंग से किसी के खाते से पैसे काट लेना पूरी तरह अवैध है।

Gold Price Today: कच्चे तेल में नरमी से सोने में फिर तेजी, दिल्ली से लेकर चेन्नई तक चढ़ा; चांदी भी उछली

देश में सोने की कीमत में एक बार फिर तेजी दिख रही है। 19 सितंबर की सुबह राजधानी दिल्ली में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत बढ़कर 154580 रुपये प्रति 10 ग्राम हो गई। मुंबई में कीमत 154430 रुपये प्रति 10 ग्राम पर है। अन्य शहरों में भी भाव में उछाल है। एक दिन पहले दिल्ली के सराफा बाजार में 99.9 प्रतिशत शुद्धता वाले सोने की कीमत 1,600 रुपये बढ़ी। कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से महंगाई की चिंताएं कम होने और हाल की बिकवाली के बाद निवेशकों के सराफा बाजार में लौटने से सोने के दाम चढ़े।

पश्चिम एशिया में तनाव अभी भी एक जोखिम बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर सोना 4,390.11 डॉलर प्रति औंस पर है। सोने की वैश्विक कीमतें एक सप्ताह में 1 प्रतिशत चढ़ी हैं।

देश के कुछ बड़े शहरों में गोल्ड रेट

दिल्ली में सोने की कीमत: दिल्ली में 24 कैरेट सोने की कीमत 154580 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 141710 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

मुंबई और कोलकाता: मुंबई और कोलकाता में 22 कैरेट सोने की कीमत 141560 रुपये प्रति 10 ग्राम, जबकि 24 कैरेट सोने की कीमत 154430 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

चेन्नई में सोने की कीमत: 24 कैरेट सोने की कीमत 154430 रुपये प्रति 10 ग्राम है। 22 कैरेट का भाव 141560 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

पुणे और बेंगलुरु में कीमत: इन दोनों शहरों में 24 कैरेट गोल्ड की कीमत 154430 रुपये प्रति 10 ग्राम और 22 कैरेट गोल्ड की कीमत 141560 रुपये प्रति 10 ग्राम है।

शहर22 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)24 कैरेट सोने का आज का भाव (₹)
दिल्ली141710154580
मुंबई141560154430
अहमदाबाद141610154480
चेन्नई141560154430
कोलकाता141560154430
हैदराबाद141610154430
जयपुर141710154580
भोपाल140140154480
लखनऊ141710154580
चंडीगढ़141710154580

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चांदी की कीमत

सोने की तरह दूसरी कीमती धातु चांदी में भी शनिवार को तेजी दिख रही है। 19 सितंबर की सुबह चांदी बढ़कर 250100 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में हाजिर चांदी यानि कि स्पॉट सिल्वर की कीमत बढ़कर 66.70 डॉलर प्रति औंस हो गई है। सोने और चांदी की देश के अंदर कीमतें डोमेस्टिक फैक्टर्स के साथ-साथ ग्लोबल फैक्टर्स से भी प्रभावित होती हैं।

Rate Hike: त्योहारी सीजन में RBI दे सकता है झटका! बढ़ जाएगी आपकी EMI, बैंक FD पर भी पड़ेगा बड़ा असर

RBI Repo Rate Hike Expectations: अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में 25 बेसिस प्वाइंट (0.25%) की बढ़ोतरी के बाद अब सभी की नजरें भारतीय रिजर्व बैंक पर टिक गई हैं। देश में बढ़ती रिटेल इंफ्लेशन और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच अर्थशास्त्रियों का अनुमान है कि आरबीआई भी अक्टूबर 2026 की MPC समीक्षा बैठक में ब्याज दरें बढ़ा सकता है।

अगर दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की बढ़ोतरी होती है, तो रेपो रेट 5.50% से बढ़कर 5.75% हो सकता है। आइए आपको बताते हैं कि आरबीआई यह कदम क्यों उठा सकता है और इसका आपकी होम लोन ईएमआई और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की दरों पर क्या असर पड़ेगा।

आरबीआई क्यों बढ़ा सकता है रेपो रेट?

अमेरिकी फेड के फैसले के अलावा भारत के आंतरिक आर्थिक हालात भी आरबीआई को सख्त रुख अपनाने पर मजबूर कर रहे हैं। अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई जो जुलाई में 4.45% थी। अल-नीनो के कारण कमजोर मानसून, खाद्य वस्तुओं के दाम और कच्चे तेल की कीमतें $100 प्रति बैरल के करीब पहुंचने से महंगाई 6% के ऊपरी दायरे को पार कर सकती है। अगर डॉलर के मुकाबले रुपया और कमजोर होता है, तो भारत का क्रूड ऑयल इंपोर्ट का बिल काफी बढ़ जाएगा, जिससे देश में महंगाई और बढ़ेगी।

एसबीआई, एचएसबीसी, डॉयचे बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के अर्थशास्त्रियों का मानना है कि आरबीआई अक्टूबर और दिसंबर की बैठकों में 25-25 बीपीएस की दो किश्तों में रेपो रेट बढ़ा सकता है।

होम लोन ग्राहकों पर क्या असर पड़ेगा?

अगर आरबीआई अक्टूबर में रेपो रेट में 25 बीपीएस की बढ़ोतरी करता है, तो इसका सीधा असर आपके रिटेल लोन पर पड़ेगा। ज्यादातर होम लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क (EBLR) से जुड़े होते हैं। रेपो रेट बढ़ते ही बैंक आपके लोन की ब्याज दरें बढ़ा देंगे।इससे अगली रीसेट डेट पर या तो आपकी मासिक EMI बढ़ जाएगी या फिर आपकी लोन चुकाने की कुल अवधि लंबी हो जाएगी।

इसे उदाहरण से समझे तो अगर आपने ₹30 लाख का होम लोन 20 साल के लिए लिया है, तो 0.25% ब्याज दर बढ़ने से आपकी ईएमआई में हर महीने ₹400 से ₹500 तक का एक्स्ट्रा इजाफा हो सकता है।

फिक्स्ड डिपॉजिट पर क्या होगा असर?

रेपो रेट बढ़ने पर अमूमन बैंक जमा दरों में भी बढ़ोतरी करते हैं, लेकिन लोन की तरह यह तुरंत लागू नहीं होता। बैंक बाजार में लिक्विडिटी, अपने एसेट-लायबिलिटी मैनेजमेंट (ALM) और फंड की जरूरतों के आधार पर ही एफडी दरों में रिवीजन करेंगे। ब्याज दरें बढ़ने पर बैंक विशेष मैच्योरिटी वाली एफडी पर ब्याज बढ़ा सकते हैं, जिससे नए एफडी निवेशकों और वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बनेगी।

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Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

iPhone 18 Pro की कीमत ₹1.64 लाख, FD या लंपसम में लगाएं तो कितना बनेगा पैसा? समझिए पूरा कैलकुलेशन

अमेरिकी टेक कंपनी Apple के नए iPhone 18 Pro की भारत में शुरुआती कीमत ₹1,64,900 है। सोशल मीडिया पर मीम चल रहा है कि अगर आप ₹1.64 लाख से आईफोन की जगह एक भैंस खरीदते हैं, तो ज्यादा फायदे में रहेंगे। 5 साल बाद आईफोन खराब होने लगेगा। वहीं भैंस तब तक कई बच्चे और दूध देकर आपका मुनाफा कई गुना बढ़ा चुकी होगी।

खैर, अगर मीम से हटकर बात करें तो इतना पैसा किसी प्रीमियम फोन पर खर्च करने के बजाय निवेश किया जाए, तो आने वाले वर्षों में यह रकम कितनी हो सकती है? इसे FD और एकमुश्त इक्विटी निवेश के जरिए समझते हैं।

इसके लिए ₹1,64,900 की शुरुआती रकम को 5, 10 और 15 साल के लिए निवेश करने का कैलकुलेशन किया गया है। FD के लिए 6.5% सालाना ब्याज और लंपसम निवेश के लिए औसतन 12% सालाना रिटर्न माना गया है।

अवधि6.5% पर FD का रिटर्न12% पर  लंपसम का रिटर्न
5 साल₹2.26 लाख₹2.91 लाख
10 साल₹3.10 लाख₹5.12 लाख
15 साल₹4.24 लाख₹9.03 लाख

नोट : FD का ब्याज बैंक की पॉलिसी और लंपसम का रिटर्न मार्केट की हालत के हिसाब से बदल सकता है।

5 साल बाद कितना पैसा बनेगा?

अगर ₹1,64,900 को 6.5% सालाना ब्याज वाली FD में रखा जाता है, तो 5 साल बाद यह रकम करीब ₹2.26 लाख हो सकती है। यानी करीब ₹61,000 की बढ़ोतरी होगी।

वहीं, इसी रकम को 12% सालाना रिटर्न के अनुमान पर एकमुश्त इक्विटी निवेश में लगाया जाए, तो 5 साल बाद करीब ₹2.91 लाख हो सकते हैं। इसमें शुरुआती रकम करीब ₹1.26 लाख बढ़ जाती है।

10 साल बाद कैसा हाल रहेगा?

समय बढ़ने के साथ कंपाउंडिंग का असर भी बढ़ता है। 6.5% सालाना ब्याज की दर से ₹1,64,900 की FD करीब ₹3.10 लाख हो सकती है।

अगर यही रकम 12% सालाना रिटर्न के अनुमान पर एकमुश्त निवेश की जाए, तो 10 साल बाद करीब ₹5.12 लाख हो सकती है। यानी FD के मुकाबले करीब ₹2 लाख ज्यादा रकम बन सकती है।

15 साल बाद की तस्वीर क्या है?

15 साल की अवधि में दोनों विकल्पों के बीच अंतर और बड़ा हो जाता है। 6.5% सालाना ब्याज के हिसाब से FD की रकम करीब ₹4.24 लाख हो सकती है।

दूसरी तरफ, 12% सालाना रिटर्न के अनुमान पर एकमुश्त निवेश करीब ₹9.03 लाख तक पहुंच सकता है। यानी ₹1.64 लाख की शुरुआती रकम करीब साढ़े पांच गुना हो सकती है।

iPhone खरीदने और निवेश के बीच फर्क

यह कैलकुलेशन दिखाता है कि ₹1.64 लाख की रकम को लंबे समय तक निवेश करने पर कंपाउंडिंग का फायदा कितना बड़ा हो सकता है। फोन खरीदने पर यह रकम एक प्रोडक्ट पर खर्च हो जाती है। वहीं निवेश में पैसा आगे भी कमाई कर सकता है।

हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि फोन खरीदना हमेशा गलत फैसला है। अगर आपकी बचत, इमरजेंसी फंड और दूसरे वित्तीय लक्ष्य पहले से रास्ते पर हैं, तो आप को बेशक अपनी पसंद का फोन खरीद सकता है। लेकिन अगर ₹1.64 लाख उसकी कुल बचत का बड़ा हिस्सा है, तो इस रकम को खर्च करने से पहले निवेश का विकल्प देखना ज्यादा समझदारी भरा हो सकता है।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Bank FD: बिना जोखिम गारंटीड रिटर्न! जानिए 7 प्रकार के ऑप्शंस और आपके लिए कौन सी FD रहेगी सबसे बेस्ट

Fixed Deposit Investment Guide: शेयर बाजार या म्यूचुअल फंड के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर जो लोग एक सुरक्षित और तय रिटर्न की गारंटी चाहते हैं, उनके लिए फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) हमेशा से पहली पसंद रही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एफडी केवल एक तरह की नहीं होती?

कोई एफडी आपको हर महीने तय इनकम देती है, कोई टैक्स बचाती है, तो किसी में जरूरत पड़ने पर बिना किसी पेनाल्टी के पैसा निकाला जा सकता है। ऐसे में अपनी वित्तीय जरूरतों और गोल्स के हिसाब से सही एफडी चुनना बेहद जरूरी है।

आइए आसान भाषा में समझते हैं कि एफडी कितने प्रकार की होती है और आपको अपने लिए कौन सा ऑप्शन चुनना चाहिए।

कितने प्रकार की होती है फिक्स्ड डिपॉजिट (FD)?

बैंक और वित्तीय संस्थान आपकी अलग-अलग जरूरतों के हिसाब से ये कुछ प्रमुख FD ऑप्शंस ऑफर करते हैं:

 1. स्टैंडर्ड एफडी (Standard FD): यह सबसे आम एफडी है, जो 7 दिनों से लेकर 10 साल तक की अवधि के लिए होती है। इसमें आपको बचत खाते से बेहतर और तय ब्याज मिलता है।

2. टैक्स-सेविंग एफडी (Tax-Saving FD): अगर आप टैक्स बचाना चाहते हैं, तो यह बेस्ट है। इसमें 5 साल का लॉक-इन पीरियड होता है और आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट मिलती है।

3. कम्युलेटिव एफडी (Cumulative FD): इसमें मिलने वाले ब्याज को मूलधन में जोड़कर कंपाउंड यानी ब्याज पर ब्याज किया जाता है और पूरा पैसा मैच्योरिटी पर एक साथ मिलता है। यह उन लोगों के लिए बेहतर है जिन्हें बीच में नियमित पैसे की जरूरत नहीं होती और वे बड़ा फंड बनाना चाहते हैं।

4. नॉन-कम्युलेटिव एफडी (Non-Cumulative FD): इसमें मैच्योरिटी का इंतजार नहीं करना पड़ता। आपको आपकी जरूरत के हिसाब से हर महीने, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर ब्याज का भुगतान किया जाता है। रिटायर्ड लोगों के लिए यह बेहतरीन विकल्प है।

5. फ्लेक्सी एफडी (Flexi FD): यह आपके बचत खाते से लिंक होती है। सेविंग्स अकाउंट में एक तय सीमा से ज्यादा पैसा होते ही वह अपने आप एफडी में बदल जाता है, जिस पर ज्यादा ब्याज मिलता है। जरूरत पड़ने पर आप बिना किसी पेनाल्टी के वह पैसा निकाल भी सकते हैं।

6. सीनियर सिटीजन एफडी (Senior Citizen FD): 60 साल या उससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को बैंक सामान्य ग्राहकों के मुकाबले 0.50% से 0.75% तक ज्यादा ब्याज देते हैं।

7. कॉरपोरेट एफडी (Corporate FD): यह बैंक नहीं, बल्कि एनबीएफसी या हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां जारी करती हैं। इनमें बैंक एफडी से ज्यादा ब्याज मिलता है, लेकिन ध्यान रखें कि इन पर DICGC का 5 लाख रुपये वाला सरकारी बीमा कवर लागू नहीं होता। इसलिए इसमें निवेश से पहले कंपनी की क्रेडिट रेटिंग जरूर जांच लें।

अपने लिए सही FD कैसे चुनें?

लिक्विडिटी और गोल तय करें: अगर आपको हर महीने खर्चों के लिए पैसा चाहिए तो नॉन-कम्युलेटिव एफडी चुनें। अगर लंबे समय के लिए पैसा जोड़ना है तो कम्युलेटिव एफडी चुनें।

समयसीमा का ध्यान रखें: आमतौर पर कम अवधि की एफडी पर ब्याज दर थोड़ी कम और लंबी अवधि की एफडी पर ज्यादा होती है।

लैडरिंग तकनीक अपनाएं: सारा पैसा एक ही एफडी में लगाने के बजाय उसे अलग-अलग अवधि (जैसे- 1 साल, 2 साल, 3 साल) की 3-4 एफडी में बांट दें। इससे आपको जरूरत पड़ने पर बीच-बीच में पैसे मिलते रहेंगे और आपको कभी पूरी एफडी समय से पहले नहीं तोड़नी पड़ेगी।

केवल हाई ब्याज दर देखकर ही किसी एफडी का चुनाव न करें। कॉरपोरेट एफडी में जहां ब्याज थोड़ा ज्यादा मिलता है, वहीं बैंक एफडी में आपकी जमा पूंजी को सरकारी सुरक्षा (DICGC कवरेज) का फायदा मिलता है। अपनी जरूरत, टैक्स स्लैब और लिक्विडिटी को ध्यान में रखकर ही सही विकल्प का चयन करें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

FD पर 8.5% इंट्रेस्ट देने वाले बैंकों की पूरी लिस्ट, सीनियर सिटिजंस सेविंग स्कीम या एफडी, 10 लाख रुपये इन्वेस्ट करने पर जानिए कहां तगड़ा रिटर्न

सीनियर सिटीजंस बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट पर 8.50 फीसदी तक इंटरेस्ट कमा सकते हैं। कई स्मॉल फाइनेंस बैंक ज्यादा इंटरेस्ट रेट ऑफर करते रहते हैं। प्राइवेट बैंक, सरकारी बैंक और विदेशी बैंकों की नजरें भी सीनियर सिटीजंस पर हैं। सीनियर सिटीजंस आम तौर पर रिटायरमेंट का पैसा एफडी में रखना पसंद करते हैं। बड़े अमाउंट के एफडी के इंटरेस्ट रेट में थोड़ा फर्क भी बड़ा मायने रखता है।

कई स्मॉल फाइनेंस बैंक एफडी पर ज्यादा इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहे हैं। इनमें इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक, ESAF Small Finance Bank, सर्वोदय एसएफबी, उज्जीवन एसएफबी और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक शामिल हैं। हालांकि, इंटरेस्ट रेट एफडी की अवधि के हिसाब से बदलता है।

fd 1

कई प्राइवेट बैंक भी सीनियर सिटीजंस को एफडी पर अट्रैक्टिव रेट्स ऑफर कर रहे हैं। सबसे ज्यादा इंटरेस्ट रेट SBM Bank India ऑफर कर रहा है। इसके बाद DCB ज्यादा इंटरेस्ट रेट दे रहा है। बंधन बैंक का इंटरेस्ट रेट भी 8 फीसदी से थोड़ा ही कम है। प्राइवेट बैंकों में सबसे कम इंटरेस्ट रेट IDBI Bank ऑफर कर रहा है।

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कई सीनियर सिटीजंस सरकारी बैंकों के एफडी में पैसा रखना पसंद करते हैं। उन्हें यह ज्यादा सुरक्षित लगता है। हालांकि, सरकारी बैंकों का एफडी पर इंटरेस्ट रेट स्मॉल फाइनेंस बैंक और प्राइवेट बैंकों से कम है। सरकारी बैंकों में सबसे ज्यादा इंटरेस्ट रेट बैंक ऑफ इंडिया का है। दूसरे नंबर पर पंजाब एंड सिंध बैंक है। इसके बाद बैंक ऑफ बड़ौदा का इंटरेस्ट रेट सबसे ज्यादा है।

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विदेशी बैंकों में सीनियर सिटीजंस को एफडी पर सबसे ज्यादा इंटरेस्ट रेट ऑफर करने वाला बैंक स्टैंडर्ड एंड चार्टर्ड बैंक है। इसके बाद डोएचे बैंक का नंबर है। एचएसबीसी बैंक भी बुजुर्गों को एफडी पर ज्यादा इंटरेस्ट रेट ऑफर कर रहा है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि सीनियर सिटीजंस को किसी एक बैंक के एफडी में अपना पूरा पैसा रखने की जगह कई बैंकों के एफडी में पैसा रखना चाहिए। इसकी वजह यह है कि एफडी में जमा पैसा पर बीमा की लीमिट सिर्फ 5 लाख रुपये है।

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इक्विटास स्मॉल फाइनेंस बैंक 3 साल एक दिन के एफडी पर सबसे ज्यादा 8.5 फीसदी इंटरेस्ट रेट सीनियर सिटीजंस को ऑफर कर रहा है। इसका मतलब है कि अगर आप 3 साल एक दिन के लिए इस बैंक में 10 लाख का एफडी करते हैं तो आपको 2,87,019 रुपये बतौर इंटरेस्ट मिलेगा। ESAF SFB में 800 दिन तक यह पैसा रखने पर इतना इंटरेस्ट मिलेगा। सूर्योदय एसएफबी में 5 साल तक पैसा रखने पर इतना इंटरेस्ट मिलेगा।

3 लाख का iPhone Duo या पूरी जिंदगी का खर्च? इंटरनेट ने गिनाए ऐसे विकल्प, मीम्स देख नहीं रुकेगी हंसी

Apple का नया iPhone Duo लॉन्च होते ही सोशल मीडिया पर सिर्फ इसके फीचर्स की चर्चा नहीं हुई, बल्कि इसकी कीमत ने लोगों को अपना कैलकुलेटर निकालने पर मजबूर कर दिया। करीब 3 लाख रुपये की शुरुआती कीमत देखकर यूजर्स ने सवाल उठाया कि इतने पैसों में आखिर एक फोन खरीदा जाए या जिंदगी की कई दूसरी जरूरतें पूरी की जाएं। किसी ने कार और सोने का हिसाब लगाया, तो किसी ने पूरी Apple shopping list तैयार कर दी।

वहीं 3.5 लाख रुपये सालाना कमाने वालों से लेकर मिडिल क्लास की जेब तक, सब पर मीम्स बन गए। खास बात यह है कि iPhone Duo की कीमत जितनी बड़ी है, इंटरनेट की मीम क्रिएटिविटी उससे भी बड़ी निकली।

3 लाख में iPhone या बहुत कुछ और?

एक X यूजर ने iPhone Duo की कीमत को लेकर बेहद मजेदार हिसाब लगाया। उसका कहना है कि करीब 3 लाख रुपये में सिर्फ फोन खरीदने के बजाय एक अच्छी सेकंड-हैंड कार या मोटरसाइकिल ली जा सकती है। लगभग 20 ग्राम सोना खरीदा जा सकता है या कई शहरों में पूरे साल का किराया चुकाया जा सकता है। इतना ही नहीं, इस रकम में भाई या बहन की शादी का कैटरिंग बिल, घर का फ्रिज, एसी, टीवी, वॉशिंग मशीन और सोफा तक आ सकता है। माता-पिता को छुट्टी पर ले जाने या 10-15 अच्छे Android फोन खरीदने का विकल्प भी मौजूद है। और अगर निवेश करना चाहें तो रकम FD में डाल सकते हैं।

लेकिन मीम का पंचलाइन सबसे आखिर में आता है-या फिर 3 लाख रुपये में एक फोल्डिंग iPhone खरीद लीजिए।

एक फोन के बदले पूरा Apple सेटअप!

एक दूसरे यूजर ने भी iPhone Duo की कीमत देखकर अपना अलग गणित लगाया। उसके मुताबिक करीब 3 लाख रुपये खर्च करके एक iPhone Duo लेने के बजाय MacBook Neo, iPad, iPhone 17, AirPods और Apple Watch Series 10 खरीदे जा सकते हैं। खास बात यह कि उसके हिसाब से इतना सब लेने के बाद भी कुछ पैसे बच जाएंगे। एक फोल्डिंग फोन या Apple के कई डिवाइस?

3.5 लाख सालाना कमाई और 3 लाख का फोन!

iPhone Duo की कीमत करीब 3 लाख रुपये है। ऐसे में मीमर ने 3.5 लाख रुपये सालाना पैकेज वालों की हालत पर भी मजेदार मीम बना दिया। इसके लिए सांसद मनोज तिवारी का फेमस क्लिप इस्तेमाल किया गया है। मीम का इशारा साफ है जब साल भर की कमाई और फोन की कीमत में ज्यादा अंतर न हो, तो फोन खरीदने से पहले जेब जरूर याद आएगी।

 Apple का रिएक्शन भी बना मीम

एक अन्य इंटरनेट यूजर ने iPhone Duo लॉन्च होने के बाद Apple के संभावित रिएक्शन को लेकर मीम शेयर किया। यूजर ने लिखा, “आईफोन डुओ लॉन्च करने के बाद एप्पल का रिएक्शन कुछ ऐसा होगा।”

महंगी कीमत को लेकर बने इस मीम ने दिखा दिया कि सोशल मीडिया यूजर्स Apple के हर नए लॉन्च को कितने मजेदार अंदाज में लेते हैं।

मिडिल क्लास ने भी लगा दिया अपना हिसाब

एक यूजर ने मिडिल क्लास व्यक्ति के iPhone Duo खरीदने की कोशिश को लेकर मशहूर ‘तेरा घर जाएगा इसमें’ मीम शेयर किया। मीम के जरिए मजाक में यह दिखाया गया कि करीब 3 लाख रुपये का फोन खरीदने के लिए आम आदमी को किन-किन चीजों से समझौता करना पड़ सकता है। यानी iPhone Duo भले ही फोल्ड होता हो, लेकिन इसकी कीमत ने सोशल मीडिया पर लोगों की कल्पना को जरूर खोल दिया है।

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FD में ब्याज मंथली लें या मैच्योरिटी पर, किसमें ज्यादा फायदा है? समझिए पूरा कैलकुलेशन

FD में पैसा लगाते समय सिर्फ ब्याज दर देखना काफी नहीं है। यह भी तय करना होता है कि ब्याज हर महीने चाहिए या मैच्योरिटी पर। दोनों विकल्पों में बड़ा फर्क है। हर महीने वाला विकल्प चुनने से नियमित कमाई मिलती है। वहीं, क्यूम्युलेटिव FD में ब्याज जुड़ता रहता है। और उस पर भी ब्याज मिलता है। इसी वजह से लंबी अवधि में मैच्योरिटी वाला विकल्प ज्यादा रकम दे सकता है।

मान लीजिए आपने ₹5 लाख की FD 7.1% सालाना ब्याज पर 5 साल के लिए कराई। अब देखते हैं कि दोनों विकल्पों में कितना पैसा बन सकता है।

हर महीने कितना ब्याज मिलेगा?

अगर आप मासिक ब्याज वाला विकल्प चुनते हैं तो करीब ₹2,958 हर महीने मिलेंगे। 5 साल में कुल ब्याज करीब ₹1.77 लाख होगा। आपका ₹5 लाख का मूलधन FD में बना रहेगा। मैच्योरिटी पर आपको यही ₹5 लाख वापस मिलेंगे।

यानी इस विकल्प में ब्याज आपको बीच-बीच में मिलता रहता है। इसलिए उस रकम पर FD के अंदर दोबारा ब्याज नहीं बनता।

मैच्योरिटी पर कितनी रकम मिलेगी?

अब यही ₹5 लाख क्यूम्युलेटिव FD में लगाते हैं। इसमें ब्याज हर महीने आपके खाते में नहीं आएगा। ब्याज FD में ही जुड़ता रहेगा। इस पर आगे ब्याज भी मिलेगा।

7.1% की दर और 5 साल की अवधि मानें तो रकम करीब ₹7.11 लाख हो सकती है। इसमें करीब ₹2.11 लाख ब्याज शामिल होगा।

दोनों विकल्पों में कितना फर्क?

विकल्पनिवेशकुल ब्याज
मैच्योरिटी पर रकम

मासिक ब्याज₹5 लाखकरीब ₹1.77 लाख₹5 लाख
क्यूम्युलेटिव FD₹5 लाखकरीब ₹2.11 लाखकरीब ₹7.11 लाख

इस हिसाब से क्यूम्युलेटिव FD में करीब ₹33,000 ज्यादा ब्याज बनता है। वजह साफ है। इसमें ब्याज FD में ही जुड़ता रहता है। उस पर भी ब्याज मिलता है। यही कंपाउंडिंग का फायदा है।

हर महीने इनकम चाहिए तो क्या करें?

अगर आपको हर महीने पैसे की जरूरत है तो मासिक ब्याज वाली FD ज्यादा काम की हो सकती है। इससे नियमित इनकम मिलती रहती है। रिटायरमेंट के बाद खर्च चलाने वाले लोगों के लिए यह विकल्प उपयोगी हो सकता है।

इसमें आपका मूलधन भी बना रहता है। बस ब्याज FD में वापस नहीं जुड़ता।

पैसा बढ़ाना है तो क्यूम्युलेटिव FD

अगर आपको FD से हर महीने इनकम नहीं चाहिए तो क्यूम्युलेटिव FD पर विचार किया जा सकता है। इसमें ब्याज को निकालने के बजाय FD में ही रहने दिया जाता है।

इससे ब्याज पर भी ब्याज मिलता है। लंबी अवधि में यही कंपाउंडिंग आपकी कुल रकम को बढ़ाती है।

सिर्फ ज्यादा ब्याज देखकर फैसला न करें

FD का चुनाव आपकी जरूरत पर निर्भर करता है। हर महीने पैसे चाहिए तो मासिक ब्याज ठीक है। लंबे समय तक पैसा नहीं निकालना है तो क्यूम्युलेटिव FD ज्यादा फायदेमंद हो सकती है।

हालांकि, वास्तविक मैच्योरिटी रकम बैंक की ब्याज दर, कंपाउंडिंग के तरीके और FD की शर्तों पर निर्भर करेगी। FD से मिलने वाला ब्याज टैक्स के दायरे में भी आता है। इसलिए निवेश से पहले टैक्स के बाद मिलने वाली रकम देखना ज्यादा सही रहेगा।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।