भारत ने श्रीलंका के खिलाफ 2 टेस्ट मैचों के लिए 4 स्पिनरों से युक्त घोषित की टीम

INDvsSL भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड ने सुबह तड़के श्रीलंका के खिलाफ 15 अगस्त से शुरु हो रहे 2 टेस्ट मैचों के दौरे के लिए टीम की घोषणा कर दी। टीम में 4 स्पिनरों को जगह दी है और शीर्ष तेज गेंदबाजी क्रम अनुभवी है। हालांकि जसप्रीत बुमराह की फिटनेस पर संशय है। टीम में कुलदीप यादव, रविंद्र जड़ेजा, अफगानिस्तान के खिलाफ ड्रीम डेब्यू करने वाले मानव सुथार और इस सीरीज में डेब्यू करने वाले स्पिन ऑलराउंडर सारांश जैन को मौका मिला है।

BCCI (भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड) के सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि टीम में कुछ छोटे-मोटे बदलावों को छोड़कर, ज़्यादा बदलाव नहीं है; यह टीम वैसी ही हैजैसी जून में शुभमन गिल की कप्तानी में अफगानिस्तान के खिलाफ खेली थी। चयन मीटिंग में मुख्य ध्यान  इस बात पर होगा कि क्या जसप्रीत बुमराह अंतिम ग्यारह में जगह बना पाएंगे या नहीं।

एक खुशखबरी यह सुनाई दे रही है कि रविंद्र जड़ेजा लाल गेंद की क्रिकेट में टीम की योजनाओं में है।टेस्ट क्रिकेट में उनकी उपयोगिता को नकारा नहीं जा सकता। साल 2012 से शुरु हुआ रविंद्र जड़ेजा का क्रिकेट करियर अब ढलान पर है। 89 मैचों में उन्होंने 38.3 की औसत से 4095 रन बनाए हैं। जिसमें 6 शतक और 28 अर्धशतक लगाए हैं। गेंदबाजी की बात करें तो उन्होंने 25 की औसत से 348 विकेट चटकाए हैं। इस दौरान उन्होंने 17 बार 4 विकेट और 15 बार 5 विकेट चटकाए हैं।

वहीं चोट से जूझ रहे कुछ खिलाड़ियों को दौरे से आराम दिया गया है। वॉशिंगटन सुंदर को टीम में शामिल नहीं किया गया है।श्रीलंका में स्पिन के मुफीद पिचों पर उनका ना रहना सही संकेत नहीं है।वहीं तेज गेंदबाज हर्षित राणा भी फिट नहीं है। उनके ना रहने से टीम शायद उतनी चिंतित ना हो। नीतीश कुमार रेड्डी, जो जून में न्यू चंडीगढ़ टेस्ट के लिए टीम का हिस्सा थे, पिछले महीने लगी क्वाड्रिसेप्स की चोट के कारण बेंगलुरु के Centre of Excellence में rehabilitation से गुज़र रहे हैं और इस दौरे के लिए नहीं चुने गए।

भारतीय टीम इस प्रकार है: शुभमन गिल (कप्तान), केएल राहुल (उपकप्तान), यशस्वी जायसवाल, ऋषभ पंत (विकेटकीपर), साई सुदर्शन, ध्रुव जुरेल (विकेटकीपर),रविंद्र जडेजा , कुलदीप यादव, मानव सुथार, जसप्रीत बुमराह, मोहम्मद सिराज, प्रसिद्ध कृष्णा, गुरनूर बराड़, देवदत्त पडिक्कल, सारांश जैन।

बिना ड्राइवर के चलेगी आपकी कार! जानिए भारत में आने वाली फ्यूचर कार टेक्नोलॉजी

भारत में कारों की दुनिया तेजी से बदल रही है। पेट्रोल, CNG और इलेक्ट्रिक कारों के बाद अब हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड और रेंज एक्सटेंडर जैसी नई टेक्निक भी बाजार में दस्तक दे रही हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि आने वाले समय में इंडियन के लिए सबसे बेहतर और किफायती फ्यूल टेक्नोलॉजी (fuel technology) कौन-सी होगी:

Strong Hybrid Car (स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कार)

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स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों में पेट्रोल इंजन (petrol engine) और इलेक्ट्रिक मोटर दोनों साथ काम करते हैं। इसकी बैटरी को अलग से चार्ज नहीं करना पड़ता, बल्कि यह ब्रेक लगाने या इंजन के जरिए खुद चार्ज हो जाती है। शहर में कम स्पीड पर कार कुछ किलोमीटर तक केवल इलेक्ट्रिक मोड में चल सकती है, जिससे पेट्रोल की बचत होती है और माइलेज बढ़ता है। हालांकि इन कारों की कीमत सामान्य पेट्रोल कारों (petrol vehicles) से ज्यादा होती है।

 

 

Mild Hybrid Car (माइल्ड हाइब्रिड कार)

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माइल्ड हाइब्रिड टेक्निक में भी इंजन के साथ छोटी इलेक्ट्रिक मोटर होती है, लेकिन यह कार को अकेले इलेक्ट्रिक मोड (electric-only mode) में नहीं चला सकती। इसका मेन काम इंजन की मदद करना और ईंधन की थोड़ी बचत करना होता है। इस तकनीक से माइलेज में हल्का सुधार मिलता है, लेकिन स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड जितना फायदा नहीं होता।

 

Plug-in Hybrid Car (प्लग-इन हाइब्रिड कार)

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प्लग-इन हाइब्रिड कारों में बड़ी बैटरी (battery) होती है, जिसे घर या चार्जिंग स्टेशन से चार्ज किया जा सकता है। बैटरी चार्ज रहने तक कार लंबी दूरी केवल इलेक्ट्रिक मोड में चलती है। बैटरी खत्म होने पर पेट्रोल इंजन अपने आप काम शुरू कर देता है। इससे रोजाना शहर में बिना पेट्रोल खर्च किए ड्राइव करना आसान हो जाता है, जबकि लंबी यात्रा (long journey) में भी चार्जिंग की चिंता नहीं रहती।

Range Extender EV Car (रेंज एक्सटेंडर ईवी कार)

This may contain: an electric car is parked next to two charging stations

रेंज एक्सटेंडर EV पूरी तरह इलेक्ट्रिक कार होती है। इसमें लगा छोटा पेट्रोल इंजन पहियों को नहीं चलाता, बल्कि केवल बैटरी को चार्ज करने का काम करता है। कार हमेशा इलेक्ट्रिक मोटर (electric motor) से ही चलती है। बैटरी कम होने पर इंजन बिजली बनाकर बैटरी को चार्ज करता रहता है। इससे लंबी दूरी पर भी चार्जिंग स्टेशन (charging station) खोजने की परेशानी काफी कम हो जाती है।

Pure Electric Vehicle (प्योर इलेक्ट्रिक व्हीकल)

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प्योर इलेक्ट्रिक कारें (Pure electric car) केवल बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर से चलती हैं। इनमें पेट्रोल या डीजल इंजन नहीं होता, इसलिए पॉल्यूशन भी नहीं होता। हालांकि लंबी दूरी की जर्नी में चार्जिंग स्टेशन की अवेलेबिलिटी और चार्ज होने में लगने वाला समय अभी भी कई लोगों के लिए चुनौती बना हुआ है।

Future Technology (भविष्य की टेक्निक)

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आने वाले वर्षों में भारत में अलग-अलग जरूरतों के अनुसार कई टेक्निक साथ-साथ देखने को मिल सकती हैं। शहर में रोजाना चलने वालों के लिए इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड (plug-in hybrid) बेहतर ऑप्शन बन सकते हैं, जबकि लंबी दूरी तय करने वाले लोगों के लिए रेंज एक्सटेंडर EV और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड ज्यादा उपयोगी साबित हो सकते हैं।

फिलहाल माना जा रहा है कि आने वाले समय में कोई एक टेक्निक सभी पर हावी नहीं होगी। लोगों की जरूरत, बजट और इस्तेमाल के हिसाब से पेट्रोल, हाइब्रिड, प्लग-इन हाइब्रिड, रेंज एक्सटेंडर और इलेक्ट्रिक कारें सभी बाजार में साथ-साथ चलती रहेंगी।

PUC Validity: अब हर साल PUC बनवाने का झंझट खत्म, BS-VI गाड़ियों का 3 साल तक वैध रहेगा सर्टिफिकेट!

Vehicle PUC Certificate New Rules: देश में करोड़ों कार-बाइक मालिकों के लिए एक राहत भरी खबर है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय गाड़ियों के प्रदूषण सर्टिफिकेट को लेकर एक बड़ा बदलाव करने जा रहा है। सरकार के नए प्रस्ताव के तहत BS-VI (BS-6) निजी वाहनों का पीयूसी सर्टिफिकेट अब 3 साल तक के लिए मान्य हो सकता है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने केंद्रीय मोटर वाहन (संशोधन) नियमावली, 2026 का ड्राफ्ट नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। सरकार ने इस नए प्रस्ताव पर आम जनता और हितधारकों से 30 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं।

वाहनों की श्रेणी के हिसाब से PUC की नई वैधता

गैजेट नोटिफिकेशन के अनुसार, वाहनों के एमिशन नॉर्म्स और उनके इस्तेमाल (कमर्शियल या प्राइवेट) के आधार पर प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUC) की वैधता इस प्रकार तय की जाएगी:

A. BS-VI (BS-6) निजी वाहन

शुरुआती 6 साल तक: प्रथम पंजीकरण की तारीख से पहले 6 साल तक 3 साल की वैधता मिलेगी।

6 से 10 साल पुराने वाहन: 6 साल से अधिक लेकिन 10 साल तक पुराने होने पर 1 साल की वैधता मिलेगी।

10 साल से पुराने वाहन: 10 वर्ष से अधिक पुराने होने पर 6 महीने की वैधता रहेगी।

B. BS-VI (BS-6) कमर्शियल वाहन

शुरुआती 6 साल तक: प्रथम पंजीकरण की तारीख से पहले 6 साल तक 2 साल की वैधता मिलेगी।

6 से 10 साल पुराने वाहन: 1 साल की वैधता मिलेगी।

10 साल से पुराने वाहन: 6 महीने की वैधता रहेगी।

C. अन्य BS स्टेज वाले वाहन

BS-I, BS-II और BS-III वाहन: इन गाड़ियों के लिए पीयूसी की वैधता 3 महीने रहेगी।

BS-IV (BS-4) वाहन: बीएस-4 उत्सर्जन मानकों वाली सभी गाड़ियों के लिए पीयूसी की वैधता 6 महीने होगी।

रिन्यूअल के लिए बनाए गए खास नियम

ड्राफ्ट में पीयूसी सर्टिफिकेट के नवीनीकरण को लेकर भी स्पष्टता दी गई है। अगर कोई वाहन मालिक अपने पीयूसी समाप्त होने की तारीख से 15 दिन पहले ही नया सर्टिफिकेट बनवा लेता है, तो नया सर्टिफिकेट पुरानी समाप्ति तिथि से ही प्रभावी माना जाएगा। अन्य सभी मामलों में, नया सर्टिफिकेट उसकी जारी होने या नवीनीकरण की तारीख से लागू होगा।

30 दिनों में मांगे गए सुझाव और आपत्तियां

सरकार द्वारा 22 जुलाई 2026 को हस्ताक्षरित और 24 जुलाई 2026 को भारत के राजपत्र में प्रकाशित इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन पर 30 दिनों का समय दिया गया है। आम जनता या कोई भी हितधारक अपने सुझाव या आपत्तियां ईमेल आईडी comments-morth@gov.in पर भेज सकते हैं। 30 दिन की अवधि समाप्त होने के बाद प्राप्त सुझावों पर विचार करके केंद्र सरकार अंतिम नियम लागू करेगी।

मां करती थीं खेतों में मजदूरी और पिता ट्रक ड्राइवर, खुद भी की दिहाड़ी और फिर राष्ट्रमंडल में जीत गए सिल्वर! ऋषिकांत की गजब कहानी

मणिपुर के इंफाल पश्चिम जिले के एक छोटे से गांव से निकलकर राष्ट्रमंडल खेलों के मंच तक का सफर तय करने वाले वेटलिफ्टर चनांबम ऋषिकांत सिंह की कहानी अदम्य साहस, कड़ी मेहनत और पारिवारिक त्याग की मिसाल है। राष्ट्रमंडल खेलों में पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में सिल्वर मेडल जीतने वाले 28 वर्षीय ऋषिकांत ने एक समय तक जेब खर्च के लिए खेतों और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर दिहाड़ी मजदूर के रूप में भी काम किया था। PTI की रिपोर्ट के मुताबिक ऋषिकांत के बड़े भाई अमरजीत ने उनके इस प्रेरणादायक सफर और कठिनाइयों की पूरी कहानी साझा की है।

गरीबी में बीता बचपन, 200 रुपये दिहाड़ी पर काम करती थीं मां

फाल से लगभग 15-20 किलोमीटर दूर स्थित नगैरांगबाम गांव के रहने वाले ऋषिकांत के परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद खराब थी। नकी मां चंद्रजिनी देवी पास के खेतों में मजदूरी करती थीं। खेती के सीजन में उन्हें रोजाना 200 से 300 रुपये मिलते थे और बाकी समय में वह दूसरे छोटे-मोटे काम करती थीं। उनके पिता चनामबम इराभोट सिंह बस और ट्रक ड्राइवर थे। परिवार के पास खेती के लिए अपनी एक टुकड़ा जमीन भी नहीं थी और छह लोगों के परिवार का गुजारा रोजमर्रा की कमाई पर ही टिका था।

जेब खर्च के लिए खुद भी की मजदूरी

भाई के मुताबिक ऋषिकांत को करीब 2008 या 2009 में कक्षा 6 में खूमन लंपक स्थित नेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी में प्रवेश मिल गया। यह एक आवासीय अकादमी थी, जहां पढ़ाई और खेल प्रशिक्षण मुफ्त था। इसके बावजूद ऋषिकांत को जेब खर्च की जरूरत तो थी ही। पर इसके लिए भी ऋषिकांत ने अपनी मां पर कभी कोई बोझ नहीं डाला। जब भी वे गर्मी या सर्दी की छुट्टियों में घर आते थे, तो अपनी मां के साथ खेतों में मजदूरी करते थे और कंस्ट्रक्शन साइट्स पर भी काम करते थे। इन मुश्किलों ने उन्हें मानसिक रूप से और अधिक मजबूत बनाया।

बॉक्सर बनने का था सपना, लेकिन किस्मत में लिखा था वेटलिफ्टिंग

ऋषिकांत की पहली पसंद मुक्केबाजी थी। वे डिंको सिंह, मैरी कॉम और सरिता देवी जैसे मणिपुर के खेल दिग्गजों से प्रभावित थे। जब नेशनल स्पोर्ट्स एकेडमी में दाखिले का ट्रायल हुआ तो उनका चयन वेटलिफ्टिंग के लिए हो गया। शुरुआत में उन्होंने बॉक्सिंग चुनने की काफी जिद की और उनके बड़े भाई ने अधिकारियों से गुहार भी लगाई। लेकिन नियम के मुताबिक खेल बदलना संभव नहीं था। इसके बाद उन्होंने वेटलिफ्टिंग को अपनाया और धीरे-धीरे उन्हें इस खेल से प्यार हो गया। लगभग पांच साल पहले उन्होंने अपने भाई से वादा किया था कि वे राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले मणिपुर के पहले पुरुष वेटलिफ्टर बनेंगे।

राष्ट्रमंडल खेलों में रचा इतिहास

रविवार को ऋषिकांत ने पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में 264 किलो (स्नैच में 121 किलो और क्लीन एंड जर्क में 143 किलो) वजन उठाकर सिल्वर मेडल जीत लिया। घुटने की चोट की वजह से वो गोल्ड मेडल जीतने से चूक गए लेकिन इसके बावजूद वे राष्ट्रमंडल खेलों में पदक जीतने वाले मणिपुर के पहले पुरुष वेटलिफ्टर बन गए। मणिपुर ने देश को मीराबाई चानू और कुंजारानी देवी जैसी महिला वेटलिफ्टर दी हैं लेकिन पुरुषों के वर्ग में यह उपलब्धि हासिल कर ऋषिकांत ने इतिहास रच दिया।

टीवी पर पहली बार माता-पिता ने देखा लाइव प्रदर्शन

अभी भारतीय नौसेना में काम कर रहे और गुजरात में तैनात ऋषिकांत चार भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर हैं। उनके बड़े भाई अमरजीत भारतीय वायुसेना में बाड़मेर (राजस्थान) में एयरमैन के पद पर तैनात हैं, जबकि उनकी दो बहनें शादीशुदा हैं। ऋषिकांत के माता-पिता फिलहाल राजस्थान में अमरजीत के साथ हैं, जहां उनके पिता का इलाज चल रहा है। उनके माता-पिता ने पहली बार टीवी पर ऋषिकांत को लाइव खेलते और राष्ट्रमंडल खेलों में मेडल जीतते देखा। अमरजीत के मुताबिक गांव वाले घर में ऋषिकांत का कमरा जूनियर और सीनियर स्तर पर जीती गई मेडल से भरा पड़ा है। ये सब उनकी मां के त्याग का परिणाम है।

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‘क्या बिहार के छात्र आतंकवादी हैं?’ AK-47 फायरिंग के मुद्दे पर केजरीवाल का BJP पर बड़ा हमला

Arvind Kejriwal on firing on students with AK 47

आप संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्‍यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मंगलवार को बिहार में छात्रों पर एके 47 से गोलियां चलाए जाने पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने सवाल किया कि क्या ये छात्र आतंकवाद है। ALSO READ: बुरा मत मानिए, आईना हमेशा सुंदर नहीं होता…

 

केजरीवाल ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा, आखिर BJP को क्या हो गया है? बिहार में हमारे छात्रों पर AK-47 से गोलियां चलाई गईं। क्या ये छात्र आतंकवादी हैं? मैं मोदी-सम्राट को याद दिलाना चाहता हूं कि लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में बिहार की धरती से नारा लगा था – 'सिंहासन खाली करो की जनता आती है।' कृपया छात्रों से पंगा न लें।

 

गौरतलब है कि सिवान में बिहार बंद के दौरान एके-47 से फायरिंग के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। फायरिंग करने वाले सिपाही अभिषेक कुमार पटेल को एसपी के निर्देश पर तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। मामले की विभागीय जांच भी कराई जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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राहुल ने उठाया था मामला

राहुल गांधी ने सोशल मीडिया साइट एक्स पर एक पोस्ट में दावा किया था कि रिपोर्टों से पता चलता है कि बिहार में प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ एके-47 राइफलों का इस्तेमाल किया गया था। सैकड़ों को गिरफ्तार कर एफआई दर्ज किया गया था। उन्होंने छात्रों पर हुए कथित हमले के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

संबित पात्रा ने किया पलटवार

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और लोकसभा सांसद संबित पात्रा ने कहा कि विपक्ष के नेता की ओर से दिखाई गई अत्यंत गैरजिम्मेदारी बेहद शर्मनाक है। यह बिल्कुल निंदनीय है कि इस तरह की झूठी बातें भारत में विपक्ष के नेता के पद पर आसीन व्यक्ति द्वारा फैलाई जा रही हैं।

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा को लेकर हाईअलर्ट, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे समेत ये रास्ते रहेंगे बंद, भारतीय रेलवे ने चलाई कई स्पेशल ट्रेनें

Kanwar Yatra 2026: उत्तर भारत के कई राज्यों में प्रशासन ने कांवड़ यात्रा 2026 के दौरान लाखों कांवड़ियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें स्पेशल ट्रेन सेवाएं, अतिरिक्त बसों की व्यवस्था और ट्रैफिक डायवर्जन जैसे उपाय शामिल हैं, ताकि आम यात्रियों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, हरिद्वार और ऋषिकेश जाने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए उत्तर रेलवे ने स्पेशल ट्रेन सेवाएं शुरू की हैं और कुछ मौजूदा ट्रेनों के रूट का विस्तार भी किया है। इन ट्रेनों में शामिल है-

दिल्ली-सहारनपुर MEMU ट्रेन, जो 30 जुलाई से 14 अगस्त तक हरिद्वार तक चलेगी। यह ट्रेन दिल्ली से शाम 4:15 बजे चलेगी, रात 8:50 बजे सहारनपुर पहुंचेगी। वहां 20 मिनट रुकने के बाद यह रवाना होगी और रुड़की व ज्वालापुर होते हुए रात 10:50 बजे हरिद्वार पहुंचेगी। वापसी की यात्रा में, यह ट्रेन हरिद्वार से रात 2 बजे चलेगी और सुबह 8:45 बजे दिल्ली पहुंचेगी।

इसी तरह, दिल्ली-शामली DEMU ट्रेन को भी 30 जुलाई से 14 अगस्त के बीच शामली, थाना भवन, रामपुर मनिहारन और टपरी होते हुए हरिद्वार तक बढ़ाया गया है।

इसके अलावा, नॉर्दर्न रेलवे तीर्थयात्रा के मौसम में दो स्पेशल मेला ट्रेनें भी चलाएगा। इनमें हरिद्वार-दिल्ली शाहदरा मेला स्पेशल ट्रेन (टपरी के रास्ते) 30 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगी, जबकि योगनगरी ऋषिकेश-दिल्ली शाहदरा मेला स्पेशल ट्रेन (टपरी के रास्ते) 30 जुलाई से 14 अगस्त तक संचालित की जाएगी।

हरियाणा में भी चलेंगी अतिरिक्त बसें 

हरियाणा रोडवेज ने भी कांवड़ यात्रा को देखते हुए तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों ने बताया कि अभी बल्लभगढ़ और हरिद्वार के बीच रोजाना दो बसें चल रही हैं और यात्रियों की मांग के आधार पर और बसें चलाई जा सकती हैं। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, बस का किराया पहले की तरह 385 रुपये प्रति यात्री रखा गया है।

वहीं, गाजियाबाद पुलिस ने ट्रैफिक मैनेजमेंट का एक विस्तृत प्लान लागू किया है। शहर में 29 जुलाई से 12 अगस्त तक भारी मालवाहक गाड़ियों के आने पर रोक रहेगी। इन भारी वाहनों को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, NH-9 और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से डायवर्ट किया जाएगा।

इसके अलावा, गंगा नहर ट्रैक, कांवड़ मार्ग, पाइपलाइन मार्ग, NH-34 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भी भारी गाड़ियों की आवाजाही पर रोक रहेगी।

गाजियाबाद के इलाकों में वाहनों पर लागू रहेंगी पाबंदियां

5 अगस्त से 12 अगस्त तक गाजियाबाद के कई इलाकों में कारों, टेम्पो, पिकअप और दूसरे हल्के कमर्शियल वाहनों पर भी पाबंदियां लागू रहेंगी। कुछ खास रूटों पर ऑटो-रिक्शा सर्विस बंद रहेगी। जबकि, रोडवेज, प्राइवेट और इलेक्ट्रिक बसों को सीमापुरी बॉर्डर और तुलसी निकेतन के रास्ते शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

प्रशासन ने एम्बुलेंस और इमरजेंसी गाड़ियों की बिना रुकावट आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर भी बनाए हैं। साथ ही संवेदनशील जगहों पर CCTV कैमरे, ड्रोन और अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।

मुजफ्फरनगर के इन रास्तों पर वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी

वहीं, मुजफ्फरनगर में दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे और गंगा नहर रोड पर भारी वाहनों पर पाबंदियां 30 जुलाई से शुरू हो जाएंगी। 4 अगस्त से 12 अगस्त तक इन रास्तों पर सभी गाड़ियों की आवाजाही पर रोक रहेगी और हाईवे का एक खास हिस्सा सिर्फ कांवड़ यात्रियों के लिए आरक्षित रहेगा।

इसके अलावा, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का उत्तर प्रदेश वाला हिस्सा 7 अगस्त से 12 अगस्त तक ट्रैफिक के लिए बंद रहेगा। मेरठ, हरिद्वार और मुजफ्फरनगर जाने वाले यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें, जिनमें ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और NH-9 शामिल हैं।

मिर्जापुर प्रशानस ने ट्रैफिक डायवर्जन की घोषणा की

मिर्जापुर जिला प्रशासन ने भी 31 जुलाई से 28 अगस्त तक ट्रैफिक डायवर्जन की घोषणा की है। सावन के महीने में दूध, पेट्रोलियम उत्पादों और स्कूल के सामान जैसी जरूरी चीजें ले जाने वाले वाहनों को छोड़कर, अन्य भारी वाहनों की एंट्री पर रोक रहेगी। कांवड़ियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए कई डायवर्जन रूट तय किए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि यात्रा के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुख्य रास्तों और स्नान घाटों पर अस्थायी पुलिस स्टेशन, गोताखोर और अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए गए हैं।

अधिकारियों ने जारी की एडवाइजरी

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने भक्तों और आम यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा करने से पहले ट्रेनों के लेटेस्ट शेड्यूल, बस सेवाओं और ट्रैफिक एडवाइजरी को देख लें, क्योंकि भीड़ की आवाजाही के आधार पर व्यवस्थाओं में बदलाव किया जा सकता है।

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धर्मेंद्र प्रधान को बचाने की हुई थी आखिरी कोशिश! शिक्षा मंत्रालय बदलने का ऑफर ठुकराया, इस्तीफे पर अड़ा रहा CJP

Dharmendra Pradhan Resignation: पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले केंद्र सरकार ने उन्हें बचाने की पूरी कोशिश की थी। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सरकार ने उन्हें शिक्षा मंत्रालय से हटाकर किसी दूसरे मंत्रालय की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव तैयार किया था। लेकिन आंदोलन का नेतृत्व कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने इसे पूरी तरह खारिज कर दिया। संगठन का साफ कहना था कि धर्मेंद्र प्रधान का सिर्फ मंत्रालय बदलना नहीं, बल्कि केंद्रीय मंत्रिमंडल से इस्तीफा ही स्वीकार होगा।

बताया गया है कि 25 जुलाई को धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से पहले पिछले कई सप्ताह से NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित अनियमितताओं और पेपर लीक को लेकर छात्रों का आंदोलन लगातार तेज हो रहा था। दिल्ली के जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह विरोध प्रदर्शन धीरे-धीरे राष्ट्रीय स्तर के अभियान में बदल गया। रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधान के पद छोड़ने से पहले केंद्र ने एक समझौता करने की कोशिश की थी, लेकिन सरकार CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका को मनाने में नाकाम रही।

सरकार ने निकाला था बीच का रास्ता

The Indian Express की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार ने विवाद को शांत करने के लिए एक समझौते का रास्ता तलाशने की कोशिश की। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने CJP के नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से संपर्क कर यह जानने की कोशिश की थी कि यदि धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय लेकर उन्हें किसी अन्य मंत्रालय में भेज दिया जाए तो क्या आंदोलन समाप्त किया जा सकता है।

हालांकि आंदोलनकारी नेताओं ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि उनकी मुख्य मांग धर्मेंद्र प्रधान का पूर्ण इस्तीफा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच प्रभावी संवाद समय पर स्थापित नहीं हो सका, जिससे दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर और अधिक अड़ गए। रिपोर्ट के अनुसार, सरकार और प्रदर्शनकारियों के बीच लगातार बातचीत का जरिया न बन पाने की वजह से गतिरोध बना रहा। फिर दोनों पक्षों का रुख और कड़ा हो गया।

NEET विवाद से शुरू हुआ था आंदोलन

यह आंदोलन NEET-UG 2026 परीक्षा में कथित गड़बड़ियों और पेपर लीक के आरोपों के बाद शुरू हुआ था। बाद में यह सिर्फ एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहा। बल्कि भर्ती परीक्षाओं और प्रवेश परीक्षाओं में पारदर्शिता तथा जवाबदेही की मांग को लेकर व्यापक अभियान बन गया। CJP नेताओं ने इसे केवल एक मंत्री के खिलाफ विरोध नहीं। बल्कि परीक्षा प्रणाली में कथित खामियों और जवाबदेही की कमी के खिलाफ आंदोलन बताया।

बीजेपी के भीतर भी बढ़ी थी चिंता

रिपोर्ट के मुताबिक, इस्तीफे से करीब 48 घंटे पहले भारतीय जनता पार्टी (BJP) और सरकार के भीतर भी यह महसूस किया जाने लगा था कि बढ़ते जनाक्रोश और संसद में लगातार हो रहे हंगामे के बीच धर्मेंद्र प्रधान का शिक्षा मंत्री बने रहना राजनीतिक रूप से मुश्किल होता जा रहा है। सरकार ने बैक-चैनल बातचीत के जरिए संकट टालने की कोशिश की। लेकिन जंतर-मंतर पर बैठे आंदोलनकारी किसी भी समझौते के लिए तैयार नहीं हुए।

खबरों के मुताबिक, सरकार ने पर्दे के पीछे से बातचीत करके और प्रधान को कैबिनेट से हटाने के बजाय कुछ रियायतें देकर संकट को कम करने की कोशिश की थी। हालांकि, CJP का कहना था कि आंदोलन की मुख्य मांग तभी पूरी होगी जब वे इस्तीफा देंगे। सोशल मीडिया पर मजबूत लामबंदी और पहली बार वोट देने वालों एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले उम्मीदवारों के बीच अपील के कारण इस विरोध प्रदर्शन को असामान्य राजनीतिक महत्व भी मिला।

आखिरकार देना पड़ा इस्तीफा

करीब पांच सप्ताह तक चले आंदोलन के बाद धर्मेंद्र प्रधान ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। इस्तीफे के बाद CJP ने इसे छात्रों की जीत बताते हुए अपना आंदोलन स्थगित करने की घोषणा की। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद केंद्र सरकार ने प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंप दिया। ओडिशा के वरिष्ठ BJP नेता प्रधान ने पेट्रोलियम, स्टील और शिक्षा जैसे कई अहम मंत्रालय संभाले थे। लेकिन लगभग पांच सप्ताह के विरोध प्रदर्शन के बाद उन्हें अपनी कुर्सी छोड़नी पड़ी।

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बारिश की बूंदे, समंदर की लहरे और एक लंबी सड़क! ये है भारत की सबसे खूबसूरत कोस्टल रोड ट्रिप्स

आपको लंबी ड्राइव, ठंडी हवाएं और समुद्र की लहरों का सुकून पसंद है, तो भारत की कोस्टल रोड ट्रिप्स (coastal road trip) आपके लिए परफेक्ट हैं। इन रास्तों पर सफर करते हुए एक तरफ नीला समंदर, दूसरी ओर हरियाली, पहाड़ और नारियल के पेड़ों का मनमोहक नजारा देखने को मिलता है। खासकर मानसून (monsoon) के मौसम में ये सड़कें और भी खूबसूरत हो जाती हैं। आप भी अपनी अगली छुट्टियों को यादगार बनाना चाहते हैं, तो कार या बाइक से इन सी-व्यू रोड ट्रिप्स (Sea-view road trips) का एक्सपीरियंस जरूर लें:

Goa to Gokarna (गोवा से गोकर्ण: सुकून और समुद्र का परफेक्ट कॉम्बिनेशन)

The Ultimate Road Trip Guide To India: 6 Scenic Routes | Outlook Traveller

अगर आप भीड़भाड़ से दूर शांति भरा सफर करना चाहते हैं, तो गोवा से गोकर्ण की रोड ट्रिप आपके लिए बेहतरीन रहेगी। इस पूरे रास्ते में कभी समुद्र की लहरें आपका साथ देती हैं तो कभी हरियाली से घिरे खूबसूरत नजारे मन मोह लेते हैं। बीच-बीच में छोटे-छोटे बीच (beache) और तटीय गांव (coastal village) मिलते हैं, जहां कुछ देर रुककर ताजा हवा का आनंद लिया जा सकता है। यह रूट उन लोगों के लिए खास है, जो ड्राइव के साथ प्रकृति का भरपूर मजा लेना चाहते हैं।

Chennai to Puducherry (चेन्नई से पुडुचेरी: समंदर के साथ दौड़ती शानदार सड़क)

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चेन्नई से पुडुचेरी तक की ईस्ट कोस्ट रोड (East Coast Road) भारत की सबसे खूबसूरत सी-फेसिंग सड़कों में गिनी जाती है। कई जगह सड़क समुद्र के बिल्कुल पास से गुजरती है, जिससे पूरे रास्ते बंगाल की खाड़ी का शानदार नजारा दिखाई देता है। सुबह की हल्की धूप या शाम की ठंडी हवा में इस रूट पर ड्राइव (Driving) करना एक अलग ही एक्सपीरियंस देता है। रास्ते में कई बीच, कैफे और व्यू पॉइंट (viewpoints) भी मिलते हैं, जहां रुककर सफर को और यादगार बनाया जा सकता है।

Kochi to Kanyakumari (कोच्चि से कन्याकुमारी: हरियाली और समुद्र का खूबसूरत संगम)

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अगर आप प्रकृति के बीच लंबी ड्राइव का आनंद लेना चाहते हैं, तो कोच्चि से कन्याकुमारी का सफर जरूर करें। इस रूट पर नारियल के ऊंचे-ऊंचे पेड़, हरे-भरे नजारे और समुद्र का खूबसूरत दृश्य पूरे रास्ते आपका स्वागत करते हैं। जैसे-जैसे आप कन्याकुमारी के करीब पहुंचते हैं, समुद्र का नजारा (coastal scenery) और भी मनमोहक होता जाता है। यहां पहुंचकर सूर्योदय और सूर्यास्त देखना इस पूरी यात्रा की सबसे यादगार बात बन सकता है।

Mumbai to Goa (मुंबई से गोवा: हर मोड़ पर बदलता खूबसूरत नजारा)

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मुंबई से गोवा की रोड ट्रिप (road trip) देश की सबसे पसंदीदा ट्रिप में शामिल है। कोंकण तट (Konkan coast) से गुजरने वाला यह रास्ता हरे-भरे पहाड़ों, घुमावदार सड़कों, छोटे गांवों और समुद्र के खूबसूरत दृश्यों से भरपूर है। अगर आप बिना जल्दबाजी के सफर करें, तो रास्ते में आने वाले कई बीच, लोकल मार्केट और खाने-पीने की जगहों का भी आनंद ले सकते हैं। मानसून (monsoon) में यह रूट और भी ज्यादा खूबसूरत दिखाई देता है।

Mangaluru to Goa (मंगलुरु से गोवा: शांत सफर और मनमोहक नजारे)

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मंगलुरु से गोवा तक की ड्राइव उन लोगों के लिए शानदार है, जिन्हें लंबा और शांत सफर पसंद है। इस रूट पर कई जगह सड़क के एक ओर समुद्र और दूसरी ओर हरियाली का नजारा देखने को मिलता है। रास्ते में छोटे-छोटे बीच, नारियल के पेड़ों से घिरे गांव और शांत माहौल सफर को खास बना देते हैं। अगर आप नेचर के बीच आरामदायक रोड ट्रिप (road trip) चाहते हैं, तो यह रूट आपकी ट्रैवल लिस्ट में जरूर होना चाहिए।

ये जरूरी बातें रखें ध्यान

8 Epic Monsoon Road Trips in India That Are Worth Every Mile

समुद्र किनारे रोड ट्रिप (coastal road trip) का मजा तभी आता है, जब सफर पूरी तरह सेफ हो। निकलने से पहले अपनी कार या बाइक के टायर, ब्रेक, इंजन ऑयल और सभी जरूरी दस्तावेज अच्छी तरह जांच लें। मानसून (monsoon) के दौरान तटीय इलाकों की सड़कें (Coastal road) फिसलन भरी हो सकती हैं, इसलिए वाहन धीरे और सावधानी से चलाएं। ट्रैफिक नियमों का पालन करें, स्पीड लिमिट का ध्यान रखें और समुद्र किनारे बने खतरनाक जगहों पर वाहन रोकने से बचें। थोड़ी-सी सावधानी आपकी रोड ट्रिप (road trip) को सेफ और यादगार दोनों बना सकती है।

NEET Protest: प्रदर्शनकारी छात्रों की कानूनी लड़ाई के लिए आगे आए कपिल सिब्बल, CJP लीगल फंड में दिए ₹1 करोड़

Kapil Sibal: राज्यसभा सांसद और सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने सोमवार को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के लीगल एड फंड में 1 करोड़ रुपये का योगदान देने की घोषणा की। यह फंड NEET से जुड़े हालिया विरोध-प्रदर्शनों के दौरान पुलिस केस का सामना कर रहे छात्रों और प्रदर्शनकारियों की मदद के लिए बनाया गया है।

सिब्बल ने कहा कि यह फंड अलग-अलग राज्यों में छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज कानूनी मामलों पर नजर रखने और वकीलों के नेटवर्क के जरिए कानूनी मदद मुहैया कराने में मदद करेगा। उन्होंने कहा कि बिहार, असम, बंगाल और महाराष्ट्र जैसी जगहों पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए और उनके खिलाफ दर्ज FIR वापस लेने की मांग की।

वहीं, दूसरी तरफ CJP के प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि केंद्र के आश्वासन के बावजूद, देश भर में छात्रों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज किए जाने की आशंका बनी हुई है। उन्होंने बताया कि CJP सुप्रीम कोर्ट के वकील के संपर्क में है ताकि पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए गए छात्रों के लिए कानूनी मदद ली जा सके।

कपिल सिब्बल ने दी आर्थिक मदद

दास के साथ बैठे कपिल सिब्बल ने CJP को आर्थिक मदद के अपने फैसले पर सहमति जताई।

उन्होंने कहा, “मैंने कहा है कि भारत में जहां भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन हुए हैं – चाहे वह बिहार, असम, बंगाल या महाराष्ट्र हो – और जहां छात्रों या प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया गया है, वहां सरकारों द्वारा दर्ज किए गए कानूनी मामलों पर नजर रखने के लिए हमने एक सिस्टम बनाने का फैसला किया है, ताकि हमारे वकील कानूनी मदद दे सकें। हमने मांग की है कि कोई FIR दर्ज नहीं होनी चाहिए, और अगर दर्ज की गई हैं, तो उन्हें वापस लिया जाना चाहिए।”

सिब्बल ने कहा कि CJP एक वेबसाइट बनाएगी जिसमें FIR का सामना कर रहे छात्रों की जानकारी होगी और जो वकील मुफ्त (प्रो बोनो) या अन्य कानूनी मदद देने के इच्छुक हैं, वे इस पहल से जुड़ सकेंगे।

उन्होंने आगे कहा, “मैंने अपनी तरफ से 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, और मैं पूरे भारत के वकीलों से अपील करता हूं कि वे इस फंड में योगदान देकर मदद करें ताकि हम प्रभावित लोगों की मदद कर सकें। हमारे वकील उन लोगों के साथ खड़े हैं, जो कानून के दुरुपयोग से प्रभावित हुए हैं।”

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Gift Nifty Indicator: ग्लोबल बाजार में मचा कोहराम क्या दिखाएगा भारतीय बाजार पर अपना असर, जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या मिल रहे है आज संकेत

Gift Nifty Indicator: ग्लोबल मार्केट के कमजोर संकेतों को देखते हुए, मंगलवार, 28 जुलाई को भारतीय शेयर बाजार के बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी 50 के लाल निशान में खुलने की संभावना है। सुबह 8.35 बजे गिफ्ट निफ्टी 23,970.50 के स्तर के आसपास ट्रेड कर रहा है जो निफ्टी फ्यूचर्स की पिछली क्लोजिंग से 71.50 अंक नीचे है।

सोमवार को भारतीय शेयर बाजार ने लगातार पांच दिनों की गिरावट का सिलसिला तोड़ा और बेंचमार्क निफ्टी 50 इंडेक्स 23,900 के स्तर के ऊपर बंद हुआ। सेंसेक्स 776.01 अंक या 1.02% की बढ़त के साथ 76,835.78 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 228.50 अंक या 0.96% की बढ़त के साथ 23,995.95 पर बंद हुआ।

क्रूड में नरमी

मंगलवार, 28 जुलाई को कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट जारी रही। यह गिरावट तब आई जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि वाशिंगटन और तेहरान मध्य पूर्व के संघर्ष को सुलझाने के लिए बातचीत कर रहे हैं।

पिछले सत्र में 7% से ज़्यादा गिरने के बाद वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड $82 प्रति बैरल से नीचे आ गया, जबकि ब्रेंट क्रूड में तीन महीने से ज़्यादा समय में एक दिन की सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई और यह $88 प्रति बैरल के करीब बंद हुआ।

एशियाई बाजारों में गिरावट

एशियाई बाजारों में गिरावट देखने को मिली। US में चिप कंपनियों में बिकवाली के चलते कोरिया का बाजार 8 फीसदी के लोअर सर्किट पर फिसल गया। निक्केई 4.40 फीसदी टूटा है। अमेरिकी बाजार भी ऊपरी स्तरों से फिसले है। बेंचमार्क कोस्पी (Kospi) 8.70 फीसदी गिरा। जबकि स्मॉल-कैप कोस्डैक (Kosdaq) में 3.63% की गिरावट आई। जापान का निक्केई 225 (Nikkei 225) 4.21% गिरा और व्यापक टॉपिक्स (Topix) इंडेक्स में 0.63% की गिरावट दर्ज की गई। वहीं, ऑस्ट्रेलिया का S&P/ASX 200 शुरुआती कारोबार में 0.38% नीचे आ गया।

निफ्टी- बैंक निफ्टी के लिए कौन से लेवल हैं अहम

HDFC सिक्योरिटीज के सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि शुक्रवार को कमजोर ग्लोबल संकेतों की वजह से आई भारी गिरावट के बाद सोमवार को निफ्टी 50 में जोरदार रिकवरी हुई और यह 228 अंक ऊपर बंद हुआ। उन्होंने बताया कि इंडेक्स ने डेली चार्ट पर गैप-अप ओपनिंग के साथ एक लंबी बुलिश कैंडल बनाई, और ओपनिंग गैप भरा नहीं गया—जो एक अच्छा टेक्निकल संकेत है।

शेट्टी के अनुसार, 23,600 के सपोर्ट ज़ोन से वापसी (जो 15 जून के अपसाइड गैप और एक ऊपर की ओर बढ़ती ट्रेंडलाइन से मेल खाता है)ने इंडेक्स को तुरंत 24,000–24,100 के रेजिस्टेंस लेवल को तोड़ने की स्थिति में ला दिया है। अगले कुछ सेशन में 24,100 के ऊपर लगातार बने रहने से 24,500 की ओर बढ़ने का रास्ता खुल सकता है, जबकि 23,800 तुरंत सपोर्ट लेवल बना हुआ है।

SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने कहा कि बैंक निफ्टी एक तय दायरे में ट्रेड कर रहा है, जिससे पता चलता है कि इसमें कोई मजबूत दिशात्मक मोमेंटम नहीं है। उन्होंने बताया कि एक अहम रेजिस्टेंस ज़ोन के पास ‘डोजी’ (Doji) कैंडलस्टिक का बनना बुल्स और बेयर्स के बीच चल रही खींचतान को दिखाता है।

शाह के अनुसार, 57,500–57,600 का ज़ोन तुरंत रेजिस्टेंस का काम कर सकता है। 57,600 के ऊपर निर्णायक ब्रेकआउट से नई खरीदारी शुरू हो सकती है और इंडेक्स के जल्द ही 58,200 के लेवल तक पहुंचने का रास्ता बन सकता है।

नीचे की तरफ, शाह को उम्मीद है कि 56,700–56,600 का 100-दिन का एक्सपोनेंशियल मूविंग एवरेज (EMA) ज़ोन मजबूत सपोर्ट देगा। इस दायरे के ऊपर बने रहने से व्यापक टेक्निकल स्ट्रक्चर बरकरार रहेगा, जबकि इसके टूटने से फिर से बिकवाली का दबाव बन सकता है।

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