India’s Toy Industry: भारत के खिलौनों की दुनिया में बढ़ी धाक, 7 साल में 89% बढ़ा एक्सपोर्ट, जानें ये सक्सेस स्टोरी

Toy Industry updates: वैश्विक बाजार में भारतीय खिलौनों का दबदबा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले सात वर्षों में डोमेस्टिक मैन्युफैक्चरिंग और सरकार की प्रोत्साहन नीतियों के बल पर भारत के खिलौना उद्योग का परिदृश्य पूरी तरह बदल गया है। वर्ष 2018-19 की तुलना में वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत से खिलौनों के निर्यात में 89.1 प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्ज किया गया है। वहीं दूसरी तरफ विदेशी खिलौनों पर निर्भरता कम हुई है और आयात में 37.5 फीसदी की भारी कमी देखने को मिली है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब के जरिए इस सफलता का ब्योरा साझा किया। भारत अब खिलौने आयात करने वाले देश से उभरकर एक शुद्ध निर्यातक बन चुका है और अमेरिका, ब्रिटेन, नीदरलैंड्स तथा जर्मनी जैसे विकसित देशों को भारतीय खिलौने निर्यात किए जा रहे हैं।

सात वर्षों में बदला व्यापार का संतुलन

ट्रेडस्टैट आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2018-19 में भारत दुनिया भर से 371.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर के खिलौने आयात करता था। हालांकि वित्त वर्ष 2025-26 में यह आंकड़ा घटकर 232.3 मिलियन डॉलर पर आ गया। वर्ष 2018-19 में भारत का खिलौना निर्यात 203.5 मिलियन अमेरिकी डॉलर था, जो 2025-26 में 89.1 फीसदी बढ़कर 384.7 मिलियन अमेरिकी डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। यह बदलाव इस बात को दिखा रहा है कि देश में टॉय मैन्युफैक्चरिंग की क्षमताओं में तेजी से इजाफा हुआ है।

खिलौनों की गुणवत्ता और सुरक्षा में बड़ा सुधार

वर्ष 2018-19 में भारत आने वाले आयातित खिलौनों का एक बड़ा हिस्सा घटिया, असुरक्षित और नकली होता था। वर्ष 2019 में आयोजित एक मिस्ट्री शॉपिंग सर्वे के दौरान पाया गया था कि भारतीय बाजार में बिकने वाले सिर्फ 33 फीसदी खिलौने ही भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) के गुणवत्ता मानकों पर खरे उतरते थे। इस स्थिति को सुधारने के लिए सरकार ने कड़े कदम उठाए। इसी का नतीजा है कि साल 2025 में बीआईएस द्वारा किए गए सर्वेक्षण में पाया गया कि अब देश में उपलब्ध 95 प्रतिशत खिलौने निर्धारित गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन कर रहे हैं।

टॉय बिज़ इंटरनेशनल 2026 में दिखा भारतीय ब्रांड्स का जलवा

टॉय एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा 4 से 7 जुलाई 2026 के दौरान नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 17वीं टॉय बिज़ इंटरनेशनल B2B प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। इस विशाल आयोजन में 400 भारतीय खिलौना ब्रांड्स, 40 से अधिक देशों के 100 अंतरराष्ट्रीय खरीदार और लगभग 30000 बिजनेस विजिटर्स शामिल हुए। इस प्रदर्शनी ने भारतीय निर्माताओं को वैश्विक खरीदारों, थोक विक्रेताओं, वितरकों और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स के साथ व्यापारिक संबंध स्थापित करने का एक बड़ा मंच प्रदान किया। आपको बता दें कि अभी केंद्र सरकार की कोई अलग से खिलौना नीति नहीं है, लेकिन अलग अलग मंत्रालयों के संयुक्त प्रयासों से इस उद्योग को जबरदस्त गति मिली है।

सरकारी नीतियों और पहलों का मिला फायदा

खिलौना उद्योग की इस सफलता के पीछे सरकार की खास रणनीति रही है। 14 मंत्रालयों और विभागों के समन्वय से 21 एक्शन पॉइंट्स वाली राष्ट्रीय खिलौना कार्य योजना (NAPT) लागू की गई, जिसमें भारतीय संस्कृति व इतिहास पर आधारित खिलौनों के डिजाइन और स्वदेशी क्लस्टरों को प्राथमिकता दी गई। इसके साथ ही फरवरी 2020 में बेसिक कस्टम ड्यूटी को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत और 2023 में 70 प्रतिशत किया गया जबकि बजट 2025-26 में इलेक्ट्रॉनिक खिलौनों के कलपुर्जों पर शुल्क 20 प्रतिशत संशोधित किया गया। 25 फरवरी 2020 को गुणवत्ता नियंत्रण आदेश (QCO) जारी कर 1 जनवरी 2021 से लागू किया गया जिसके तहत बीआईएस ने घरेलू निर्माताओं को 1800 से अधिक और विदेशी निर्माताओं को 50 से अधिक लाइसेंस जारी किए हैं।

नई शिक्षा नीति, क्लस्टर विकास और निर्यात प्रोत्साहन

नई शिक्षा नीति 2020 के तहत एनसीईआरटी ने ‘टॉय बेस्ड पेडागोजी’ पर हैंडबुक जारी की, जिसने पढ़ाई में स्वदेशी खिलौनों के इस्तेमाल को बढ़ावा दिया। एमएसएमई मंत्रालय ने स्फूर्ति योजना के तहत 18 खिलौना क्लस्टरों को मंजूरी दी और कपड़ा मंत्रालय 40 क्लस्टरों को डिजाइनिंग व टूलिंग सहायता प्रदान कर रहा है। इसके अलावा डीपीआईआईटी द्वारा 700 से अधिक खिलौना स्टार्टअप्स को मान्यता दी गई है और RoDTEP योजना के जरिए 2200 से अधिक निर्यातकों को वित्तीय सहायता मिली है। यूएई, ऑस्ट्रेलिया, ईएफटीए, ओमान, न्यूजीलैंड और यूके के साथ हुए मुक्त व्यापार समझौतों से भारतीय खिलौनों को वैश्विक बाजारों में शून्य-शुल्क पहुंच मिली है। इसने भारत को खिलौना निर्माण का वैश्विक केंद्र बना दिया है।

iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max सितंबर में हो सकते हैं लॉन्च, बड़ी बैटरी, 2nm चिप और DSLR जैसे कैमरे की चर्चा

 Apple के अगली पीढ़ी के प्रीमियम स्मार्टफोन iPhone 18 Pro और iPhone 18 Pro Max को लेकर नई लीक्स सामने आई हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक कंपनी इस साल सितंबर में इन दोनों मॉडल्स को लॉन्च कर सकती है। लीक्स में दावा किया गया है कि नए iPhone Pro मॉडल्स में 2nm A20 प्रोसेसर, बड़ी बैटरी, बेहतर OLED डिस्प्ले और पहली बार Variable Aperture Camera जैसे बड़े अपग्रेड देखने को मिल सकते हैं। हालांकि Apple ने अभी तक इन फीचर्स या लॉन्च डेट की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है।

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सितंबर में हो सकता है लॉन्च

 

अगर Apple अपने पुराने लॉन्च शेड्यूल का पालन करता है तो iPhone 18 Pro सीरीज का अनावरण सितंबर में किया जा सकता है। लीक्स में 12 सितंबर को संभावित लॉन्च डेट बताया जा रहा है। कुछ टिप्स्टर्स का दावा है कि कंपनी पहले Pro मॉडल्स लॉन्च कर सकती है, जबकि रेगुलर iPhone 18 को बाद में पेश किया जा सकता है। साथ ही Apple के पहले फोल्डेबल iPhone की भी चर्चा है, लेकिन फिलहाल यह केवल अफवाहों तक सीमित है।

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डिजाइन में बड़े बदलाव नहीं, नए कलर ऑप्शन मिल सकते हैं

 

रिपोर्ट्स के अनुसार iPhone 18 Pro सीरीज का डिजाइन पिछले मॉडल जैसा ही रहेगा। हालांकि कंपनी Dark Cherry, Light Blue और Dark Grey जैसे नए रंग पेश कर सकती है। वहीं iPhone 18 Pro Max में बड़ी बैटरी के कारण फोन थोड़ा मोटा और भारी हो सकता है।

 

डिस्प्ले होगा ज्यादा ब्राइट और पावर एफिशिएंट

 

iPhone 18 Pro में 6.3 इंच और iPhone 18 Pro Max में 6.9 इंच का डिस्प्ले मिलने की उम्मीद है। दोनों फोन में अपग्रेडेड LTPO+ OLED पैनल दिया जा सकता है, जिससे स्क्रीन ज्यादा ब्राइट होगी और बैटरी की खपत भी कम होगी।

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छोटा होगा Dynamic Island

लीक्स के मुताबिक Apple Face ID टेक्नोलॉजी का बड़ा हिस्सा डिस्प्ले के नीचे शिफ्ट कर सकता है। इससे Dynamic Island का आकार करीब 35 प्रतिशत तक छोटा हो सकता है और यूजर्स को ज्यादा स्क्रीन स्पेस मिलेगा।

 

पहली बार मिल सकता है Variable Aperture Camera

iPhone 18 Pro सीरीज में पहली बार Variable Aperture Camera मिलने की चर्चा है। यह कैमरा रोशनी के हिसाब से अपने आप अपर्चर एडजस्ट करेगा, जिससे कम रोशनी में बेहतर फोटो, अधिक प्राकृतिक पोर्ट्रेट, कम ओवरएक्सपोजर और बेहतर वीडियो रिकॉर्डिंग संभव हो सकती है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि यूजर इसे मैन्युअली कंट्रोल कर पाएंगे या नहीं।

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A20 2nm चिप दे सकती है दमदार परफॉर्मेंस

नई Pro सीरीज में Apple का A20 चिपसेट मिलने की संभावना है, जिसे TSMC की 2nm प्रोसेस टेक्नोलॉजी पर तैयार किया जा सकता है। यह प्रोसेसर पहले से ज्यादा तेज और ऊर्जा की बचत करने वाला हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें Apple का नया C2 5G मॉडेम और बेहतर सैटेलाइट कनेक्टिविटी भी देखने को मिल सकती है।

 

बड़ी बैटरी से बढ़ सकती है बैकअप

रिपोर्ट्स के अनुसार iPhone 18 Pro Max में 5,200mAh तक की बैटरी मिल सकती है, जबकि iPhone 18 Pro की बैटरी क्षमता में भी बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। नई बैटरी और 2nm प्रोसेसर के साथ बेहतर बैटरी बैकअप मिलने की संभावना जताई जा रही है।

 

भारत में कीमत बढ़ सकती है

लीक्स के मुताबिक iPhone 18 Pro सीरीज की कीमत भारत में मौजूदा मॉडल्स की तुलना में 20,000 से 30,000 रुपये तक बढ़ सकती है। फिलहाल iPhone 17 Pro की शुरुआती कीमत ₹1,34,999 और iPhone 17 Pro Max की शुरुआती कीमत ₹1,49,999 है। ऐसे में नई Pro सीरीज और अधिक महंगी हो सकती है। वैश्विक बाजार में भी कीमत करीब 200 डॉलर तक बढ़ने की चर्चा है, जिसकी वजह महंगे कंपोनेंट्स और बढ़ी हुई सप्लाई चेन लागत बताई जा रही है।

अभी कुछ भी आधिकारिक नहीं

ध्यान देने वाली बात यह है कि Apple ने अभी तक iPhone 18 Pro सीरीज की लॉन्च डेट, फीचर्स या कीमत को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में फिलहाल इन सभी जानकारियों को केवल लीक्स और रिपोर्ट्स के आधार पर ही देखा जाना चाहिए।

हिमालय की वादियों में बसा है 172 साल पुराना भारत का यह स्कूल, दुनिया के सबसे खूबसूरत कैंपस में होती है गिनती

देश के उत्तरी राज्य उत्तराखंड की खूबूसरत वादियों में एक ऐसा नायाब नगीना छुपा हुआ है, जिसकी सुंदरता का चर्चा बहुत दूर तक होता है। यहां हम बात कर रहे हैं मसूरी के वुडस्टॉक स्कूल की। इसे 2024 में आर्किटेक्चरल डाइजेस्ट ने दुनिया के 9 सबसे खूबसूरत बोर्डिंग स्कूलों में शामिल किया था। इस ऐतिहासिक स्कूल को अपने शानदार कैंपस डिजाइन और सेटिंग के लिए जानी जाने वाली ग्लोबल लिस्ट में जगह दी गई है। उत्तराखंड में हिमालय की तलहटी में बसा यह स्कूल, हेरिटेज आर्किटेक्चर, मल्टीकल्चरल लर्निंग माहौल और बड़े प्राकृतिक माहौल का परफेक्ट मिक्स है। यही वजह है कि इसे भारत के सबसे खास रेजिडेंशियल स्कूलों में से एक माना जाता है।

वुडस्टॉक स्कूल 1854 में शुरू हुआ था। यह स्कूल ईसाई मिशनरियों के बच्चों के लिए एक छोटे से संस्थान के तौर पर बनाया गया था। लेकिन, 170 से ज्यादा सालों में ये भारत के सबसे जाने-माने इंटरनेशनल बोर्डिंग स्कूलों में से एक बन गया है। आज, दुनिया भर से छात्र यहां आते हैं, जहां एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त करिकुलम और एक ऐसा कैंपस मिलता है जो इतिहास को प्रकृति बहुत खूबसूरती से जोड़ता है।

पूरी दुनिया का ध्यान खींचता है वुडस्टॉक स्कूल

उत्तराखंड के मसूरी में, लगभग 2,000 मीटर की ऊंचाई पर बना वुडस्टॉक स्कूल, ज्यादातर शैक्षिक संस्थानों से अलग लोकेशन पर है। इसका कैंपस जंगलों, पहाड़ों और पैदल चलने के रास्तों से घिरा हुआ है। वुडस्टॉक स्कूल एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त शिक्षा देता है। वुडस्टॉक स्कूल में इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) प्रोग्राम को फॉलो करता है। यह एक ऐसा पाठ्यक्रम है जिसे दुनिया भर के विश्वविद्यालय मानते हैं।

कई देशों में छात्र पढ़ते हैं यहां

स्कूल एक बहुसांस्कृतिक माहौल को भी बढ़ावा देता है। दर्जनों देशों के छात्र यहां पढ़ते हैं। यह एक्सपोजर सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है और छात्रों को एक बड़ा ग्लोबल नजरिया विकसित करने में मदद करता है। बेहतरीन शिक्षा के साथ-साथ यह संस्थान को-करिकुलर लर्निंग को भी उतना ही महत्व देता है। यहां छात्र संगीत, थिएटर, स्पोर्ट्स, आउटडोर एजुकेशन, एनवायरनमेंटल इनिशिएटिव और कम्युनिटी सर्विस प्रोग्राम में हिस्सा लेते हैं।

वुडस्टॉक स्कूल की विरासत पढ़ाई से कहीं आगे तक फैली हुई है

अपने लंबे इतिहास में, वुडस्टॉक स्कूल ने भारत और विदेशों से कई जाने-माने एल्युम्नाई दिए हैं। इसके पुराने छात्रों में लेखक, डिप्लोमैट, उद्यमी, कलाकार और दूसरे पब्लिक फिगर शामिल हैं जिन्होंने अलग-अलग प्रोफेशन में योगदान दिया है।

वुडस्टॉक स्कूल पर एक नजर

खास जानकारी

स्कूल : वुडस्टॉक स्कूल

जगह : मसूरी, उत्तराखंड

शुरू हुआ : 1854

उम्र : 172 साल

ऊंचाई : लगभग 2,000 मीटर

दुनिया भर में पहचान : 2024 में आर्किटेक्चरल डाइजेस्ट द्वारा दुनिया के नौ सबसे खूबसूरत बोर्डिंग स्कूलों में शामिल

करिकुलम : इंटरनेशनल बैकलॉरिएट (IB) प्रोग्राम

स्टूडेंट कम्युनिटी : दर्जनों देशों के स्टूडेंट

कैंपस की खास बातें : हेरिटेज पत्थर की इमारतें, जंगल, पहाड़ों के नज़ारे और खुली हरी-भरी जगहें

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सराय काले खां लूप के जाम से मिलेगी राहत! NHAI ने शुरू किया बड़ा एक्शन प्लान, नोएडा-गुरुग्राम का सफर होगा आसान

Delhi Update: दिल्ली-एनसीआर में रोजाना यात्रा करने वाले लोगों के लिए सुविधा बढ़ाने और ट्रैफिक जाम की समस्या को दूर करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने एक बड़ा कदम उठाया है। NHAI ने NH-148NA के DND-सोहना सेक्शन पर स्थित सराय काले खां लूप पर ट्रैफिक की भीड़भाड़ और जाम को खत्म करने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) तैयार करने का काम शुरू कर दिया है। पीटीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक NHAI ने बताया कि यह DPR दिल्ली के सबसे व्यस्त ट्रांसपोर्ट नोड्स में से एक के लिए लंबे समय के ट्रैफिक मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग समाधानों का आकलन करेगी।

ट्रैफिक का मुख्य केंद्र है सराय काले खां लूप

सराय काले खां लूप दिल्ली के ट्रैफिक नेटवर्क में एक स्ट्रैटिजिक कंर्वजेंस पॉइंट के रूप में काम करता है। यहां आश्रम, नोएडा और सराय काले खां की ओर से आने-जाने वाला भारी ट्रैफिक आपस में मिलता है। इस इंटरचेंज पर गाड़ियों का भारी दबाव रहता है। इससे बिजी समय में यात्रियों को लंबे जाम का सामना करना पड़ता है।

DND-सोहना कॉरिडोर शुरू होने से पहले तैयारी

NHAI के मुताबिक DND-सोहना नेशनल हाईवे कॉरिडोर के चालू होने के साथ ही इस जगह पर गाड़ियों की संख्या और भी बढ़ने की उम्मीद है, जो समस्या को और बढ़ाएगी। इसी को ध्यान में रखते हुए समय रहते यह कदम उठाया जा रहा है ताकि जब कॉरिडोर पूरी तरह चालू हो तो गाड़ियां इसपर बिना किसी रुकावट के सुचारू और कुशल तरीके से चल सकें।

DPR से क्या-क्या होगा हासिल?

इस डीपीआर में एनएचएआई इंटरचेंज की गाड़ी क्षमता को बढ़ाने के लिए जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर बदलावों का मूल्यांकन करेगा। यात्रियों के यात्रा समय को कम करने और सड़कों पर सुरक्षित यातायात आवाजाही सुनिश्चित करने के विकल्प इसमें तलाशे जाएंगे। इस जरूरी लूप पर सीमलेस कनेक्टिविटी देने और DND-सोहना कॉरिडोर का लोगों को पूरा फायदा मिले, इन पहलुओं पर भी डीपीआर में विचार किया जाएगा।

Gold Silver Rates Today: देश और विदेश में सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी एक दिन में 5200 रुपये क्रैश

Gold Silver Rates Today: सोने और चांदी पर 28 जुलाई को बड़ा दबाव दिखा। देश और विदेश में दोनों की कीमतें गिर गईं। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 2,640 रुपये गिरकर 1,47,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी की कीमत 5,200 रुपये फिसलकर 2,24,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 1.26 फीसदी गिरकर 4,026 डॉलर प्रति औंस था, जबकि चांदी 1.72 फीसदी गिरकर 57.39 डॉलर प्रति औंस थी।

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में भी गिरावट 

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में भी गिरावट देखने को मिली। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स 1.07 फीसदी यानी 1,536 रुपये गिरकर 1,41,527 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 2.12 फीसदी यानी 4,792 रुपये गिरकर 2,16,3888 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा था। बीते तीन महीने में सिल्वर फ्यूचर्स करीब 14 फीसदी क्रैश कर चुका है।

फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी पर नजरें 

बुलियन ट्रेडर्स और इनवेस्टर्स की नजरें 29 जुलाई को आने वाली फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी पर लगी हैं। फेडरल रिजर्व की एफओएमसी की बैठक 28 जुलाई को भारतीय समय के मुताबिक देर शाम में शुरू होगी। इसके नतीजे 29 जुलाई को भारतीय समय के मुताबिक देर रात आएंगे। अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए अपना रुख सख्त कर सकता है।

फेडरल रिजर्व रुख को सख्त बना सकता है

सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक, कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट 0.25 फीसदी बढ़ा सकता है। अगर वह 29 जुलाई को इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाता है तो भी वह अपना रुख सख्त बनाएगा। ज्यादतर एनालिस्ट्स का मानना है कि फेड सितंबर की अपनी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने का सोने की कीमतों पर खराब असर पड़ता है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के अनुमान ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है।

डॉलर में मजबूती का सोने की कीमतों पर असर

उधर, अमेरिकी डॉलर में मजबूती का असर भी सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। अमेरिकी डॉलर 28 जुलाई को चार हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया। डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। बीते कुछ महीनों में डॉलर में मजबूती देखने को मिली है।

बुलियन पर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता का असर

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “फेडरल रिजर्व की पॉलिसी से पहले इनवेस्टर्स सावधानी बरत रहे हैं। इसका असर मंगलवार को सोने की कीमतों पर दिखा।” हालांकि, क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी आई है। लेकिन, इनवेस्टर्स का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

ऊंची कूद में पहला सिल्वर मेडल जीतने वाले भारतीय एथलीट बने सर्वेश कुशारे (Video)

ग्लास्गो में जारी राष्ट्रमंडल खेल 2026 में सर्वेश कुशारे ने ऐतिहासिक रजत पदक अपने नाम कर लिया है। इस टूर्नामेंट में ऊंची कूद स्पर्धा में रजत पदक जीतने वाले वह पहले भारतीय एथलीट बन गए हैं।

कुशारे ने 2.25 मीटर की ऊंचाई पार कर दूसरा स्थान हासिल किया। जमैका के रोमेन बेकफोर्ड ने स्वर्ण पदक जीता। दोनों खिलाड़ी 2.25 मीटर के बाद 2.28 मीटर पार करने में असफल रहे, लेकिन काउंटबैक नियम के आधार पर बेकफोर्ड को विजेता घोषित किया गया। इंग्लैंड के जैक किमानी ने 2.20 मीटर के प्रयास के साथ कांस्य पदक जीता।अन्य भारतीय खिलाड़ी आदर्श राम 2.15 मीटर की छलांग के साथ पांचवें स्थान पर रहे।

इससे पहले राष्ट्रमंडल खेलों में ऊंची कूद में भारत का एकमात्र पदक तेजस्विन शंकर ने 2022 बर्मिंघम खेलों में कांस्य पदक के रूप में जीता था लेकिन 31 वर्षीय कुशारे ने रजत पदक जीतकर उस उपलब्धि को पीछे छोड़ दिया।

तेजस्विन ने भी सोमवार को स्पर्धा में हिस्सा लिया, लेकिन गुरुवार से शुरू होने वाली पुरुषों की डेकाथलॉन स्पर्धा की तैयारी को देखते हुए उन्होंने 2.05 मीटर के पहले प्रयास में असफल रहने के बाद हटने का फैसला किया। 27 वर्षीय तेजस्विन का व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 2.29 मीटर है और पिछले दो वर्षों में उन्होंने डेकाथलॉन पर ध्यान केंद्रित करने के कारण व्यक्तिगत ऊंची कूद प्रतियोगिताओं में ज्यादा हिस्सा नहीं लिया है।

E20 Fuel: क्या E20 पेट्रोल से इंजन खराब हुआ तो मिलेगा इंश्योरेंस क्लेम? समझिए नियम और एक्सपर्ट्स की राय

Motor Insurance Policy on E20 Fuel: भारत में 1 अप्रैल से E20 पेट्रोल यानी पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाया हुआ पेट्रोल स्टैंडर्ड फ्यूल बन चुका है। इसके बाद से ही पुरानी पेट्रोल गाड़ियों के मालिकों के मन में एक बड़ा सवाल उठ रहा है कि, अगर E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से गाड़ी का इंजन या फ्यूल सिस्टम खराब होता है, तो क्या कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस पॉलिसी में इसका क्लेम मिलेगा?

इस मुद्दे पर सरकार, इंश्योरेंस कंपनियों और ऑटोमोटिव एक्सपर्ट्स का रुख बिल्कुल साफ है। आइए आपको बताते हैं कि E20 पेट्रोल और कार इंश्योरेंस से जुड़े नियम क्या कहते हैं।

क्या केवल E20 फ्यूल इस्तेमाल करने से इंश्योरेंस रद्द हो जाता है?

बिल्कुल नहीं, सरकार और इंश्योरेंस कंपनियों ने साफ कर दिया है कि गाड़ी में E20 पेट्रोल का इस्तेमाल करने से आपकी इंश्योरेंस पॉलिसी रद्द नहीं होती। आईसीआईसीआई लोम्बार्ड जनरल इंश्योरेंस ने विवाद के बाद साफ किया कि, ‘गाड़ी में E20 फ्यूल का इस्तेमाल करने से पॉलिसी अमान्य नहीं होती। क्लेम इस बात पर निर्भर करता है कि दुर्घटना या चोरी जैसी बीमित घटना हुई है या नहीं। पुरानी गाड़ियों में E20 के इस्तेमाल को लापरवाही नहीं माना जाएगा।’

पॉलिसीबाजार के मोटर इंश्योरेंस बिजनेस हेड पारस पसरीचा (Paras Pasricha) के मुताबिक, केवल E20 फ्यूल के इस्तेमाल से क्लेम रिजेक्ट नहीं होता। क्लेम इस बात पर तय होता है कि नुकसान की असली वजह क्या है।

क्या E20 से इंजन खराब होने पर क्लेम मिलेगा?

यहीं पर बीमा के नियमों का अंतर समझना जरूरी है:

क्या E20 से इंजन खराब होने पर क्लेम मिलेगा?

पारस पसरीचा के अनुसार, ‘अगर सर्वेयर की जांच में यह साबित होता है कि इंजन या फ्यूल सिस्टम का नुकसान सिर्फ और सिर्फ ऐसे फ्यूल (E20) का इस्तेमाल करने से हुआ है जो वाहन निर्माता द्वारा अनुशंसित नहीं था, तो इसे स्टैंडर्ड पॉलिसी के तहत मैकेनिकल ब्रेकडाउन या कन्सिक्वेंशियल डैमेज माना जाएगा। इस स्थिति में क्लासिकल कॉम्प्रिहेंसिव पॉलिसी में क्लेम मिलना मुश्किल होगा।’

किस बात पर फंस रहा पेंच?

ICICI Lombard का ब्लॉग पोस्ट: जून 2026 में ICICI लोम्बार्ड के एक ब्लॉग में कहा गया था कि पुरानी गैर-E20 कंपैटिबल गाड़ियों में E20 फ्यूल से हुए नुकसान को लापरवाही के दायरे में देखा जा सकता है। हालांकि, विवाद बढ़ता देख कंपनी ने तुरंत स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति साफ की। अप्रैल 2023 के बाद बनी सभी BS6 Phase-2 गाड़ियां पूरी तरह से E20 फ्यूल फ्रेंडली हैं और उनमें ऐसी कोई समस्या नहीं आती।

सरकार और इंडस्ट्री का क्या रुख है?

सरकार और एथेनॉल इंडस्ट्री ने E20 से बड़े पैमाने पर इंजन खराब होने के दावों को पूरी तरह से खारिज किया है। संसद में केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस राज्य मंत्री सुरेश गोपी ने लोकसभा में लिखित जवाब में कहा कि सरकार को वाहन निर्माताओं या कंज्यूमर ग्रुप्स से E20 के कारण माइलेज घटने या इंजन/टैंक खराब होने की कोई आधिकारिक शिकायत नहीं मिली है।

केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इंश्योरेंस कंपनियों ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है और सोशल मीडिया पर फैल रही भ्रामक खबरों पर ध्यान न दें।

सरकार के मुताबिक पिछले 2.5 सालों से देश में 20 करोड़ से ज्यादा टू-व्हीलर्स और 3 करोड़ कारें एथेनॉल ब्लेंडेड पेट्रोल पर बिना किसी परेशानी के चल रही हैं।

भारत इंडिपेंडेंट एथेनॉल प्रोड्यूसर्स एसोसिएशन (BIEPA) के जॉइंट वाइस प्रेसिडेंट अक्षय मोदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर चल रहा कैंपेन सिर्फ भ्रामक जानकारी पर आधारित है और एथेनॉल ब्लेंडिंग पूरी तरह से वैज्ञानिक जांच और OEM अप्रूवल के बाद ही लागू की गई है।

कार मालिकों के लिए निष्कर्ष और काम की सलाह

आपकी कार का इंश्योरेंस E20 पेट्रोल डालने से रद्द नहीं होता है, दुर्घटना या चोरी की स्थिति में क्लेम पहले की तरह ही मिलेगा। अगर E20 के कारण फ्यूल पाइप, इंजेक्टर या जंग लगने से मैकेनिकल ब्रेकडाउन होता है, तो सामान्य इंश्योरेंस इसे कवर नहीं करेगा। इसके लिए आपके पास Engine Protect Add-on या Extended Warranty होना जरूरी है। आप अपनी गाड़ी के यूजर मैनुअल में फ्यूल कंपैटिबिलिटी जरूर जांच लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

विराट कोहली और अनुष्का शर्मा ने खरीदा ₹18.29 करोड़ का सी-फेसिंग फ्लैट, जानिए क्या है इसमें खास

भारतीय क्रिकेटर विराट कोहली और एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने मुंबई के पॉश इलाके वर्सोवा में एक शानदार अपार्टमेंट खरीदा है। इस आलीशान अपार्टमेंट की कीमत करीब 18.29 करोड़ रुपये बताई गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ये फ्लैट ‘गोदरेज स्काईशोर’ प्रोजेक्ट में है, जिसका क्षेत्रफल 2,644 वर्ग फुट है। ये लग्जरी अपार्टमेंट मुंबई के अंधेरी पश्चिम स्थित वर्सोवा इलाके की एक प्रीमियम रिहायशी इमारत की ऊपरी मंजिलों में स्थित है। बड़े फ्लैट के साथ इस प्रॉपर्टी में तीन कार पार्किंग की सुविधा भी दी गई है। इसके अलावा करीब 316 वर्ग फुट का अतिरिक्त विशेष क्षेत्र भी शामिल है, जिससे यह घर और भी खास बन जाता है।

विराट-अनुष्का ने खरीदा फ्लैट

जैपकी को मिले प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन पेपर्स के मुताबिक, इस प्रॉपर्टी की खरीद का रजिस्ट्रेशन 21 जुलाई 2026 को पूरा हुआ। इस दौरान अनुष्का शर्मा और विराट कोहली ने रजिस्ट्रेशन फीस के रूप में 30,000 रुपये जमा किए, जबकि इस सौदे पर करीब 1.09 करोड़ रुपये की स्टाम्प ड्यूटी का भुगतान किया गया। रजिस्ट्रेशन पेपरवर्क के मुताबिक, ये अपार्टमेंट करीब 69,159 रुपये प्रति वर्ग फुट की दर से खरीदा गया है, जो मुंबई के पश्चिमी इलाकों में लग्जरी घरों की बढ़ती मांग को दर्शाता है।

इन जगहों पर है लग्जरी प्रॉपर्टी

मुंबई का ये नया अपार्टमेंट अनुष्का शर्मा और विराट कोहली की पहली लग्जरी प्रॉपर्टी नहीं है। इससे पहले भी दोनों देश के अलग-अलग शहरों में कई महंगे और आलीशान घर खरीद चुके हैं। समय-समय पर उनकी प्रॉपर्टी में किए गए निवेश सुर्खियों में रहे हैं और वे प्रीमियम रियल एस्टेट प्रोजेक्ट्स में निवेश करने के लिए भी जाने जाते हैं। मुंबई के अलावा विराट और अनुष्का के पास गुरुग्राम में भी एक आलीशान बंगला है। डीएलएफ फेज-1 में स्थित यह घर करीब 10,000 वर्ग फुट में फैला हुआ है, जिसमें निजी स्विमिंग पूल, आधुनिक जिम और कई लग्जरी सुविधाएं मौजूद हैं। इसकी अनुमानित कीमत करीब 80 करोड़ रुपये बताई जाती है।

अलीबाग में किया बड़ा निवेश

इसके अलावा, दोनों ने अलीबाग के जिराड गांव में आवास बीच के पास 5 एकड़ से अधिक जमीन भी खरीदी है, जिसकी कीमत करीब 37.86 करोड़ रुपये बताई गई है। कपल ने अलीबाग में भी पहले से बड़ा निवेश किया हुआ है। साल 2022 में दोनों ने करीब 19 करोड़ रुपये खर्च कर लगभग 8 एकड़ जमीन खरीदी थी। इस जमीन पर उन्होंने एक लग्जरी विला बनवाया है, जिसमें तापमान नियंत्रित स्विमिंग पूल, मॉडर्न किचन, चार बाथरूम, जकूजी, खूबसूरत गार्डन, कवर पार्किंग और स्टाफ के रहने की अलग व्यवस्था जैसी कई शानदार सुविधाएं मौजूद हैं।

कब हुई थी शादी

अनुष्का शर्मा और विराट कोहली ने साल 2017 में इटली में परिवार और करीबी दोस्तों की मौजूदगी में शादी की थी। दोनों की पहली मुलाकात 2013 में एक विज्ञापन की शूटिंग के दौरान हुई थी। आज इस कपल के दो बच्चे हैं, बेटी वामिका और बेटा अकाय। मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया जाता है कि दोनों भविष्य में बच्चों की परवरिश के लिए लंदन में बसने पर विचार कर रहे हैं। वहीं, अनुष्का शर्मा ने हाल के वर्षों में नेटफ्लिक्स फिल्म ‘काला’ में कैमियो भूमिका निभाई थी और इस फिल्म की सह-निर्माता भी रहीं।

SIP Calculator: क्या ₹50,000 महीने की सैलरी में बन सकते हैं करोड़पति? जानें एक्सपर्ट का SIP वाला ये फॉर्मूला

Mutual Fund SIP Calculator: ₹1 करोड़ का फंड तैयार करना हर किसी का सपना होता है। ऐसा इसलिए क्योंकि पहला करोड़ बनने के बाद संपत्ति की रफ्तार तेजी से बढ़ती है। लेकिन क्या ₹50,000 महीने की कमाई करने वाला कोई सामान्य व्यक्ति ₹1 करोड़ का कॉर्पस बना सकता है?

फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का कहना है कि यह बिल्कुल संभव है, बशर्ते आप अनुशासन, धैर्य और सही रणनीति के साथ लंबी अवधि के लिए निवेशित रहें। आइए समझते हैं एसआईपी (SIP) के जरिए करोड़पति बनने का पूरा गणित।

₹50,000 की सैलरी में कैसे बनेगा ₹1 करोड़ का फंड?

KAARMIKA Wealth Mentors के डायरेक्टर किरण गांधी का कहना है कि अगर आप हर महीने ₹50,000 कमाते हैं, तो भी अनुशासित निवेश से करोड़पति बना जा सकता है। उन्होंने इसके लिए कुछ जरूरी नियम बताए हैं:

सैलरी का 20-30% निवेश: अपनी मासिक आय का कम से कम 20 से 30 फीसदी हिस्सा हर महीने म्यूचुअल फंड SIP में लगाएं।

स्टेप-अप एसआईपी: हर साल जब आपकी सैलरी बढ़े, तो अपने एसआईपी निवेश में भी 10% से 15% की बढ़ोतरी करें।

इमरजेंसी फंड तैयार रखें: अपने निवेश को बीच में टूटने से बचाने के लिए इमरजेंसी फंड अलग बनाकर रखें और बेवजह के कर्ज से बचें।

हाई रिटर्न का लालच न करें: केवल ज्यादा रिटर्न के पीछे भागने के बजाय एसेट एलोकेशन पर ध्यान दें और हर साल अपने पोर्टफोलियो का रिव्यू करें।

SIP Calculator: ₹12,000 प्रति महीने का गणित

किरण गांधी के अनुसार, अगर आप ₹12,000 महीने की एसआईपी शुरू करते हैं और इस पर औसतन 12% का सालाना रिटर्न मानकर चलते हैं, तो करीब 20 साल में आपका फंड लगभग ₹1 करोड़ हो जाएगा।

अगर आप हर साल अपनी एसआईपी की रकम में केवल 10% की बढ़ोतरी यानी स्टेप-अप SIP का रास्ता चुना, तो ₹1 करोड़ का यह लक्ष्य 20 साल से भी काफी पहले हासिल किया जा सकता है।

इस कैलकुलेशन के हिसाब से ₹50,000 महीने की सैलरी में करोड़पति बनना कोई नामुमकिन सपना नहीं है। इसके लिए सिर्फ एक सही रणनीति, अनुशासन और समय की जरूरत है। अगर आप 25-30 साल की उम्र से ही 15-20 सालों के लिए ₹10,000 से ₹12,000 की अनुशासित एसआईपी शुरू कर देते हैं, तो कंपाउंडिंग की ताकत से ₹1 करोड़ का लक्ष्य आसानी से हासिल किया जा सकता है।

भारत में SIP का नया रिकॉर्ड, जून में ₹31,781 करोड़ का निवेश

एसोसिएशन ऑफ म्यूचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के हालिया आंकड़ों के मुताबिक, देश में छोटे निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। जून 2026 में मंथली एसआईपी योगदान ₹31,781 करोड़ के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह मई 2026 के मुकाबले 2.7% और जून 2025 के मुकाबले 16.5% ज्यादा है। सक्रिय एसआईपी खातों की संख्या बढ़कर 9.78 करोड़ हो गई है, जो एक साल पहले 8.64 करोड़ थी। म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री का कुल SIP AUM बढ़कर ₹17.70 लाख करोड़ पर पहुंच गया है, जो पूरी इंडस्ट्री के कुल एसेट का 21.5% है।

Retirement Planning: रिटायरमेंट के लिए कितना फंड है पर्याप्त? एक्सपर्ट विवेक जैन से जानिए सही फॉर्मूला

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

13 मैचों में 21 कैच ड्रॉप, सुनील गावस्कर ने कहा बाहर करो खराब फील्डर्स को (Video)

भारत का यूरोप दौरा और जिम्बाब्वे दौरे को मिलाकर 13 मैच खेले गए। इसमें से 10 मैच टी-20 के थे और 3 मैच वनडे के थे। कुल 13 मैचों में भारत ने 21 कैच ड्रॉप किए। इसमें से यूरोप (इंग्लैंड आयरलैंड दौरे पर खेले गए मैचों में) भारत ने 11 कैच ड्रॉप किए। वहीं जिम्बाब्वे दौरे पर टीम ने 3 टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में ही 10 कैच ड्रॉप किए। इसमें से 4 कैच अंतिम टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैच में आए।

ऐसे में टीम के खराब फील्डिंग मानकों पर सुनील गावस्कर ने कहा है कि औसत फील्डर को टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में खेलने का कोई हक नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि कप्तान को उन्हें टीम से बाहर का रास्ता दिखाना चाहिए। ना कि यह सोचना चाहिए कि किसी तरह गेंद उन 3 से 4 खिलाड़ियों के पास ना जाए।

भारतीय टीम ने इन 13 मैचों में 47 कैच पकड़े हैं जिससे टीम का कैच प्रतिशत 69.1 है। गौरतलब है कि भारत को आयरलैंड के खिलाफ टी-20 अंतरराष्ट्रीय मैचों में 0-2 और फिर इंग्लैंड के खिलाफ 0-4 से हार का सामना करना पड़ा था। एकदिवसीय श्रृंखला में भी भारत को इंग्लैंड के हाथों 2-1 की हार झेलनी पड़ी थी। इसके बाद टीम ने हालांकि जिम्बाब्वे को में 3-0 से हराया।

भारतीय टीम की ग्राउंड फील्डिगं भी कई समय से आलोचनाओं के घेरे में है। यूरोप दौरा (इंग्लैंड आयरलैंड दौरे पर खेले गए मैचों में) कई बार यह देखने में आया कि टीम ने ना केवल आसान कैच छोड़े बल्कि आसान चौके भी दे दिए। वहीं इंग्लैंड और आयरलैंड के खिलाड़ियों ने ना केवल शानदार कैच पकड़े बल्कि ग्राउंड फील्डिंग भी उम्दा की।

इसके अलावा सुनील गावस्कर ने एकदिवसीय विश्वकप 2027 को ध्यान में रखकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड को सलाह भी दी है कि वह मैदान की सीमा को लंबा करें ताकि विदेशी दौरे और खासकर विश्वकप तक भारत बड़े मैदानों पर खेलने का आदि हो जाए। भारत को अब अगली एकदिवसीय श्रृंखला वेस्टइंडीज के खिलाफ अक्टूबर में खेलनी है।