Gold Price: 2026 के अंत तक कहां पहुंच सकता है सोना? Goldman Sachs ने $4900 का टारगेट दिया

Gold Price: सोने की कीमत में हाल के दिनों में काफी उतार-चढ़ाव आया है। इस हफ्ते की शुरुआत में गोल्ड तीन महीने के ऊपरी स्तर पर पहुंच गया था। लेकिन इसके बाद तेज बिकवाली हुई। शुक्रवार को कीमत 3% से ज्यादा टूट गई।

अब सवाल है कि आगे सोना किस दिशा में जाएगा। Goldman Sachs का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 4,900 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस तक पहुंच सकती है। यह मौजूदा करीब 4,550 डॉलर के स्तर से लगभग 8% ज्यादा है।

भारत में कितना महंगा हो सकता है सोना

भारत में सोने की मौजूदा कीमत ₹1.56 लाख प्रति 10 ग्राम के आसपास है। अंतरराष्ट्रीय कीमत में Goldman Sachs के अनुमान के मुताबिक करीब 8% बढ़ोतरी हो सकती है। ऐसे में घरेलू कीमत भी मोटे तौर पर ₹1.69 लाख प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकती है।

हालांकि, भारत में सोने की कीमत सिर्फ अंतरराष्ट्रीय बाजार से तय नहीं होती। डॉलर के मुकाबले रुपये की चाल, आयात शुल्क और टैक्स भी भाव को प्रभावित करेंगे।

केंद्रीय बैंकों की खरीद बड़ा सपोर्ट

Goldman Sachs को सोने की कीमत में आगे भी मजबूती की उम्मीद है। इसकी सबसे बड़ी वजह केंद्रीय बैंकों की खरीदारी है। कई देश अपने विदेशी मुद्रा भंडार में सोने की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं। Goldman Sachs Research के मुताबिक, केंद्रीय बैंक इस साल हर महीने औसतन 50 टन सोना खरीद सकते हैं। 2022 से पहले यह औसत सिर्फ 17 टन प्रति माह था।

जून 2026 में खरीदारी और तेज हुई। तीन महीने के सीजनली एडजस्टेड आधार पर यह आंकड़ा 100 टन प्रति माह तक पहुंच गया। इससे पहले यह 66 टन था। जून में चीन का केंद्रीय बैंक सबसे बड़ा पहचाना जा सकने वाला खरीदार रहा।

2026 में काफी उतार-चढ़ाव आया

इस साल सोने की चाल काफी उतार-चढ़ाव वाली रही है। 29 जनवरी को गोल्ड 5,600 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर तक पहुंच गया था। जुलाई के मध्य में यह 4,000 डॉलर से नीचे फिसल गया।

हालांकि, जुलाई के निचले स्तर से सोना करीब 15% चढ़ चुका है। Goldman Sachs को बाकी बचे साल में भी तेजी की उम्मीद है।

ब्याज दरें तय करेंगी आगे की चाल

सोने की कीमत पर ब्याज दरों का बड़ा असर पड़ता है। ब्याज दरें बढ़ने की आशंका से सोने पर दबाव बनता है। यही वजह है कि अमेरिकी फेड प्रमुख केविन वॉर्श के बयान के बाद गोल्ड में तेज गिरावट आई।

Goldman Sachs का मानना है कि आगे फेड से जुड़ा दबाव कम हो सकता है। ब्रोकरेज को उम्मीद है कि महंगाई में नरमी आने पर फेड इस साल ब्याज दरों को स्थिर रख सकता है। ऐसा हुआ तो सोने को सपोर्ट मिल सकता है।

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न नौकरी छोड़ने की जरूरत, न ऑफिस का झंझट! इस साइड बिजनेस से 5 लाख महीने कमाने का दावा

आज के दौर में नौकरी के साथ एक्सट्रा कमाई का रास्ता तलाशने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। कोई ऑनलाइन काम शुरू करता है तो कोई कंटेंट क्रिएशन या छोटे कारोबार में हाथ आजमाता है। इसी बीच एक्स पर एक यूजर की पोस्ट ने लोगों का ध्यान खींचा है, जिसमें एक ऐसे साइड बिजनेस का जिक्र किया गया है, जिसे शुरू करने के लिए बड़े निवेश की जरूरत नहीं बताई गई है। पोस्ट के मुताबिक, कुछ लोग इसी काम को पार्ट-टाइम करते हुए हर महीने करीब 5 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।

खास बात यह है कि इसके लिए न अपना ऑफिस खोलने की जरूरत बताई गई है और न ही कर्मचारियों या सामान के स्टॉक का झंझट है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर इस कमाई के मॉडल को लेकर दिलचस्पी बढ़ गई है। हालांकि, असल कमाई कितनी होगी, यह कई बातों पर निर्भर कर सकता है।

न दुकान, न स्टाफ… फिर कमाई कैसे?

एक्स यूजर अंकित पांडे ने बताया कि उनके कुछ दोस्त रियल एस्टेट में फ्रीलांसिंग के जरिए अच्छी कमाई कर रहे हैं। उन्होंने इसे ‘रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग’ नाम दिया और दावा किया कि इसे बेहद कम शुरुआती खर्च के साथ शुरू किया जा सकता है।

उनके मुताबिक, सबसे पहले अपने शहर के कई बिल्डरों से संपर्क करना होगा और उनके चैनल पार्टनर प्रोग्राम से जुड़ना होगा। इसके बाद उनके प्रोजेक्ट, कीमत, भुगतान योजना और कब्जे की तारीख जैसी जानकारी समझनी होगी।

असली काम है खरीदार ढूंढना

बिल्डरों से जुड़ने के बाद अगला कदम संभावित ग्राहकों तक पहुंचना है। पांडे के अनुसार, खरीदार सोशल मीडिया, दोस्तों, रिश्तेदारों, सहकर्मियों और अपने निजी नेटवर्क के जरिए खोजे जा सकते हैं। यानी इस काम में दुकान खोलने या कोई सामान खरीदकर रखने की जरूरत नहीं है। मुख्य भूमिका खरीदार और बिल्डर के बीच संपर्क बनाने, भरोसा कायम करने और सौदा पूरा कराने की होती है।

50 लाख के फ्लैट पर कितना बन सकता है कमीशन?

पांडे ने अपनी पोस्ट में एक उदाहरण के जरिए कमाई का गणित समझाया। उनके मुताबिक, अगर 50 लाख रुपये के फ्लैट पर 3 प्रतिशत कमीशन मिले, तो एक सौदे से 1.5 लाख रुपये बन सकते हैं। इसी हिसाब से तीन फ्लैट बिकने पर करीब 4.5 लाख रुपये और चार सौदों पर 6 लाख रुपये तक कमीशन बन सकता है। हालांकि, रियल एस्टेट में कमीशन की दर हर जगह एक जैसी नहीं होती। यह बिल्डर, प्रोजेक्ट और समझौते के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।

सुनने में आसान, लेकिन सौदा पक्का करना मुश्किल

सोशल मीडिया पर कुछ लोगों ने इस मॉडल को आकर्षक जरूर माना, लेकिन कई यूजर्स ने इसकी असली चुनौती भी बताई। उनका कहना था कि खरीदार ढूंढना और आखिर में डील बंद करना उतना आसान नहीं है, जितना पोस्ट में दिखाई देता है।

एक यूजर ने कहा कि इस काम में ग्राहकों की तलाश के साथ जोखिम भी जुड़ा होता है। वहीं, दूसरे ने बताया कि कमीशन आकर्षक लग सकता है, लेकिन ग्राहक को मनाकर सौदा पूरा करना काफी मुश्किल होता है।

30 साल से यही काम कर रहे अंकल

एक यूजर ने अपने परिवार का अनुभव साझा करते हुए बताया कि उसके अंकल करीब तीन दशक से रियल एस्टेट का काम कर रहे हैं। कभी उनके महीने में 5-7 घर तक बिक जाते हैं, तो कभी लगातार 4-6 महीने तक एक भी सौदा नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति इसलिए संभल जाती है क्योंकि उनकी पत्नी सरकारी नौकरी में हैं। उनके मुताबिक, रियल एस्टेट का यह काम ऐसे व्यक्ति के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है जो अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य हो।

‘साइड इनकम’ का मौका या पूरी तरह बिक्री पर निर्भर काम?

इस पूरी चर्चा ने रियल एस्टेट फ्रीलांसिंग की एक दिलचस्प तस्वीर सामने रखी है। इसमें शुरुआती निवेश कम हो सकता है, लेकिन कमाई पूरी तरह ग्राहकों, बिक्री और सौदे पूरे होने पर निर्भर करती है। यानी कागज पर यह मॉडल जितना आसान दिखता है, असल जिंदगी में उतना ही नेटवर्क, भरोसे और बिक्री की क्षमता का खेल है। सोशल मीडिया पर 5 लाख रुपये महीने की कमाई का दावा भले आकर्षक हो, लेकिन हर व्यक्ति के लिए इतनी आय की गारंटी नहीं मानी जा सकती।

डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।

VIDEO: पति को अचानक शुरू हुई उल्टियां, रात में दवा लेने निकली डॉक्टर… फिर बताई भारत की वो सुविधा जो विदेश में आसानी से नहीं मिलती

NSE IPO Update: NSE के आईपीओ से पहले SBI का बड़ा ऐलान! ₹30000 करोड़ के मेगा इश्यू में बेचेगा अपनी हिस्सेदारी

SBI to Dilute Stake in NSE IPO: देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और उसकी सब्सिडियरी एसबीआई कैपिटल मार्केट्स मिलकर नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के प्रस्तावित ₹30,000 करोड़ के आईपीओ में अपनी 1% तक हिस्सेदारी बेचने जा रहे हैं।

इस बात की पुष्टि खुद एसबीआई के चेयरमैन सी एस शेट्टी ने की है। इसके साथ ही उन्होंने बैंक के होम लोन पोर्टफोलियो और हालिया एसबीआई म्यूचुअल फंड आईपीओ को लेकर भी कई अहम जानकारियां साझा की हैं।

NSE IPO में SBI ग्रुप कितना बेचेगा हिस्सा?

एसबीआई चेयरमैन सी एस शेट्टी ने एक इंटरव्यू में बताया कि बैंक और उसकी सहयोगी कंपनी मिलकर एनएसई के आईपीओ (OFS के जरिए) में हिस्सा बेचेंगे। एसबीआई मुख्य रूप से एनएसई में अपनी 0.65% हिस्सेदारी बेचेगा। एसबीआई कैपिटल मार्केट्स अपनी 0.35% हिस्सेदारी बेचेगा। इस तरह एसबीआई ग्रुप मिलकर कुल 1% हिस्सेदारी कैश करेगा। अन्य शेयरधारकों के शामिल होने के आधार पर यह आंकड़ा थोड़ा कम भी हो सकता है।

वर्तमान में कितनी है हिस्सेदारी?

मौजूदा समय में एनएसई में SBI की 3.23% और एसबीआई कैपिटल मार्केट्स की 4.33% हिस्सेदारी है। चेयरमैन ने साफ किया कि फिलहाल बैंक की किसी अन्य सब्सिडियरी कंपनी के मोनेटाइजेशन या आईपीओ की तत्काल कोई योजना नहीं है।

सुपरहिट रहा था SBI Mutual Fund का IPO

हाल ही में एसबीआई ने अपने विदेशी पार्टनर ‘अमुंडी’ के साथ मिलकर एसबीआई म्यूचुअल फंड में लगभग 10% हिस्सेदारी बेची थी। ₹9,800 करोड़ का यह पब्लिक ऑफर निवेशकों के बीच बेहद सुपरहिट रहा और इसे 42 गुना सब्सक्रिप्शन मिला था।लिस्टिंग के बाद एसबीआई की हिस्सेदारी 61.76% से घटकर 55.46% रह गई, जबकि अमुंडी की हिस्सेदारी 3.7% घटकर 32.56% पर आ गई।

होम लोन पोर्टफोलियो ₹10 लाख करोड़ पार करने की तैयारी में

हाउसिंग फाइनेंस सेगमेंट में एसबीआई की बादशाहत कायम है। बैंक जल्द ही एक बड़ा नया रिकॉर्ड बनाने जा रहा है। चालू तिमाही में एसबीआई का होम लोन पोर्टफोलियो ₹10 लाख करोड़ के ऐतिहासिक आंकड़े को पार कर जाएगा। बीते वित्त वर्ष में बैंक ने ₹9 लाख करोड़ का आंकड़ा पार किया था। होम लोन सेगमेंट में एसबीआई की बाजार हिस्सेदारी लगभग 28% है। देशभर में बैंक के 460 से ज्यादा होम लोन प्रोसेसिंग सेंटर्स काम कर रहे हैं, जो ग्राहकों के लिए प्रक्रिया को आसान बनाते हैं।

देश की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है होम लोन: CS Setty

सी एस शेट्टी ने कहा कि ग्राहक कागजी कार्रवाई की पारदर्शिता, बिल्डर्स की ड्यू-डिलिजेंस और बैंक के भरोसे के कारण एसबीआई से होम लोन लेना पसंद करते हैं।उन्होंने जोर देकर कहा कि होम लोन को केवल एक बैंकिंग प्रोडक्ट के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। 200 से अधिक उद्योग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से रियल एस्टेट सेक्टर पर निर्भर हैं, इसलिए होम लोन भारत की आर्थिक वृद्धि का एक अभिन्न और महत्वपूर्ण हिस्सा है।

VIDEO: पति को अचानक शुरू हुई उल्टियां, रात में दवा लेने निकली डॉक्टर… फिर बताई भारत की वो सुविधा जो विदेश में आसानी से नहीं मिलती

सोशल मीडिया पर इन दिनों एक डॉक्टर का वीडियो काफी वायरल हो रहा है। वीडियो में उन्होंने बताया कि भारत में रात के समय अचानक तबीयत खराब होने पर दवाएं आसानी से मिल जाती है। वहीं UK और दूसरे पश्चिमी देशों में रात के समय काफी मुश्किल से मिलती है। एक डॉक्टर को कुछ देर के लिए रुकना पड़ा। इस दौरान उन्हें महसूस हुआ कि भारत में स्वास्थ्य से जुड़ी कुछ ऐसी सुविधाएं हैं, जिन पर हम अक्सर ध्यान नहीं देते। उन्होंने भारत और पश्चिमी देशों की हेल्थकेयर व्यवस्था की तुलना करते हुए कहा कि विदेशों में भी कई ऐसी चुनौतियां हैं, जिनका सामना लोगों को करना पड़ता है। भारत में देर रात तक मेडिकल स्टोर खुले रहना और जरूरत के समय आसानी से दवाइयां मिल जाना इनमें शामिल है। इस अनुभव से उन्हें समझ आया कि ये छोटी लगने वाली सुविधाएं असल में कितनी जरूरी हैं।

रात 10 बजे तबीयत हुई थी

डॉ. दीपांजलि शर्मा ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए अपना एक्सपीरिएंस शेयर किया। उन्होंने बताया कि, एक शाम उनके डॉक्टर पति की अचानक तबीयत बिगड़ गई। शुरुआत में उन्हें सिरदर्द की शिकायत हुई, लेकिन कुछ देर बाद उल्टी भी होने लगी। उनकी हालत को देखते हुए रात करीब 10 बजे दीपांजलि को जरूरी दवाइयों का इंतजाम करने के लिए घर से बाहर जाना पड़ा। उन्होंने कहा, “मैं उनके लिए कुछ दवाइयां और IV इंजेक्शन लेने जा रही हूं। ऐसे समय में मुझे एहसास होता है कि भारत में रहना कितनी बड़ी सुविधा है।”

तुंरत नहीं मिलती जरूरी दवाएं

शर्मा ने बताया कि, इस घटना ने उन्हें UK और दूसरे पश्चिमी देशों में स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता के बारे में सोचने पर मजबूर कर दिया। उन्होंने कहा कि डॉक्टर होने के बावजूद विदेशों में तुरंत मेडिकल मदद या जरूरी दवाइयां मिलना आसान नहीं होता, खासकर रात या सामान्य समय के बाद। उन्होंने कहा, “अगर मैं इस समय UK या किसी दूसरे पश्चिमी देश में होती, तो शायद मुझे पहले लाइन में इंतजार करना पड़ता। संभव है कि बहुत ज्यादा भीड़ वाले इमरजेंसी डिपार्टमेंट में मेरे पति को तुरंत इलाज न मिल पाता।” उन्होंने यह भी बताया कि वहां जरूरी दवाइयां इतनी आसानी से उपलब्ध नहीं होतीं कि उन्हें तुरंत जाकर खरीदा और इस्तेमाल किया जा सके।

 

हर देश बेहतर नहीं होता

शर्मा ने बताया कि, भारत में उन्हें रात के समय भी जरूरी दवाइयां और मेडिकल सामान आसानी से मिल गया। वह बाहर जाकर सामान लाई और फिर अपने पति की देखभाल कर सकीं। इसके साथ उन्होंने यह भी कहा कि भारत की हेल्थकेयर व्यवस्था पूरी तरह बेहतर नहीं है और इसमें कई कमियां हैं। उनका कहना था कि हर देश की स्वास्थ्य व्यवस्था में कुछ न कुछ परेशानियां होती हैं, लेकिन जरूरत के समय दवाइयां आसानी से मिल जाना भारत की एक बड़ी सुविधा है। उन्होंने लिखा, “हमारे देश में कई चीजों में सुधार की जरूरत है, लेकिन हमें यह भी याद रखना चाहिए कि दुनिया का कोई भी देश हमें हर मामले में 100/100 वाला सबसे बेहतर अनुभव नहीं देता।”

विदेशों में भी होती है दिक्कतें

उन्होंने माना कि उन्हें भारत में जो सुविधाएं मिलीं, उनमें उनकी व्यक्तिगत स्थिति का भी असर था और देश में हर व्यक्ति को आसानी से स्वास्थ्य सेवाएं मिलना अभी भी आसान नहीं है। उनका कहना था कि जो लोग विदेश जाने को हर मामले में बेहतर मानते हैं, उन्हें वहां की चुनौतियों को भी समझना चाहिए। विदेशों में भी कई ऐसी परेशानियां हैं, जहां कुछ सुविधाएं भारत की तुलना में आसानी से नहीं मिलतीं। उनके मुताबिक, विदेश में रहने के फायदे हैं, लेकिन वहां भी लोगों को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।

लोगों ने किया कमेंट

शर्मा के वीडियो पर लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कई लोगों ने कहा कि भारत में देर रात तक दवाइयों की दुकानें खुली रहना, डॉक्टर से जल्दी संपर्क हो जाना और जरूरत की दवाइयां आसानी से मिल जाना बड़ी सुविधाएं हैं। वहीं कुछ यूजर्स ने भारत और विदेशों की स्वास्थ्य व्यवस्था की तुलना करते हुए नियमों और डॉक्टर की पर्ची वाली दवाइयों की उपलब्धता जैसे मुद्दों पर भी चर्चा की। कई लोगों ने यह बात भी मानी कि दुनिया में कोई भी जगह पूरी तरह बेहतर या परफेक्ट नहीं है और हर देश में लोगों को कुछ सुविधाओं के साथ कुछ परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

Hot Stocks : अगले हफ्ते सुदीप शाह के पसंदीदा इन शेयरों पर रहे नजर, चमका सकते हैं आपका पोर्टफोलियो

Hot stocks : कल 31 अगस्त से शुरू होने वाले नए हफ्ते के लिए एक्शन वाले शेयरों पर बात करते हुए SBI सिक्योरिटीज के टेक्निकल और डेरिवेटिव्स रिसर्च हेड सुदीप शाह ने कहा कि अगले हफ्ते LTM और Elgi Equipments के शेयरों धीरे-धीरे खरीदारी करने (एक्युमुलेशन) की सलाह होगी। LTM में 34-डे EMA के पास पांच-दिन की कंसोलिडेशन रेंज से मज़बूत वॉल्यूम के साथ जबरदस्त ब्रेकआउट देखने को मिला है, जबकि Elgi Equipments ने 61.8 प्रतिशत के फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल से वापसी की है और अपने पिछले चार-दिन के हाई से ऊपर जबरदस्त ब्रेकआउट दिखाया है। इन शेयरों में और आगे बढ़ने का दम नजर आ रहा है।

एथर एनर्जी (Ather Energy)

एथर एनर्जी (Ather Energy) के शेयरों पर अपनी राय देते हुए सुदीप शाह ने कहा कि मज़बूत वॉल्यूम सपोर्ट के साथ इस शेयर ने अपने पिछले हाई लेवल को पार किया है,जबकि RSI ऊपर की ओर बढ़ा है,जो बुलिश मोमेंटम में सुधार का संकेत है। जब तक यह स्टॉक ₹1,520–1,500 के जोन के ऊपर बना रहता है,तब तक इसमें बुलिश ट्रेंड के बने रहने की संभावना है।

BSE 

क्या BSE लिमिटेड में नया निवेश करने का यह सही समय है,जिसने पिछले दो हफ्तो में ₹3,220 के सपोर्ट लेवल को बनाए रखा है? इसके जवाब में सुदीप शाह ने कहा कि BSE का शेयर पिछले 10 सेशन से ₹3,412–3,223 की रेंज में बना हुआ है और अपने 200-डे EMA के ऊपर टिका हुआ है। अगर यह ₹3,412 के लेवल को पार करके ऊपर जाता है,तो इसमें नई तेजी आ सकती है।

कोफोर्ज (Coforge)

क्या हॉरिजॉन्टल ट्रेंडलाइन ब्रेकआउट कोफोर्ज (Coforge) में खरीदारी के लिए मजबूत संकेत दे रहा है? इस पर सुदीप शाह ने कहा कि Coforge ने मजबूत वॉल्यूम सपोर्ट के साथ अपनी पांच दिन की कंसोलिडेशन रेंज को तोड़ा है। जबकि MACD लाइन सिग्नल लाइन के ऊपर चली गई,जो तेजी के मोमेंटम (bullish momentum) के मजबूत होने का संकेत है। जब तक स्टॉक ₹1,920–1,900 के जोन के ऊपर बना रहता है,तब तक इस तेजी के जारी रहने की संभावना है।

अगले हफ्ते के लिए सुदीप शाह की दो टॉप पिक्स

एलटी माइंडट्री (LTM)

सुदीप शाह का कहना है कि इस स्टॉक में 34 डे EMA के पास पांच दिन की कंसोलिडेशन रेंज से जबरदस्त ब्रेकआउट देखा गया है,जिसे अच्छे वॉल्यूम का सपोर्ट मिला है। इससे पता चलता है कि इसमें फिर से खरीदारी में दिलचस्पी बढ़ रही है। यह अभी भी अपने 200-डे EMA के ऊपर ट्रेड कर रहा है,जबकि 60 से ऊपर RSI और पॉजिटिव MACD इसके तेजी वाले मोमेंटम को और मज़बूत करते हैं। शॉर्ट टर्म में ₹4,680-₹4,640 की रेंज में इसे खरीदने की सलाह होगी। इसके लिए ₹4,530 के स्टॉप-लॉस के साथ ₹4,980 का अपसाइड टारगेट सेट करें।

एल्गी इक्विपमेंट्स ( Elgi Equipments)

सुदीप शाह में कहा कि यह स्टॉक 61.8 प्रतिशत फिबोनाची रिट्रेसमेंट लेवल से वापस ऊपर आया है और पिछले चार दिनों के हाई से ऊपर एक मज़बूत ब्रेकआउट दिखाया है,जिसे पिछले छह सेशन में सबसे ज़्यादा वॉल्यूम का सपोर्ट मिला है। यह स्टॉक अपने 20 डे और 50 डे EMA से ऊपर ट्रेड कर रहा है। साथ ही RSI में सुधार और MACD में बढ़त के कारण इसका टेक्निकल सेटअप पॉज़िटिव बना हुआ है। इसमें ₹628-622 की रेंज में खरीदारी (एक्युमुलेशन) की सलाह होगी। इसके लिए ₹603 का स्टॉप-लॉस और ₹660 का शॉर्ट-टर्म टारगेट रखा जा सकता है।

 

Experts View : अगले हफ्ते निफ्टी के 24000 के नीचे जाने की संभावना कम, बैंक निफ्टी में एक मजबूत चाल दिखने की उम्मीद

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

बंगाल सरकार लौटाएगी मेसी के कोलकाता इवेंट का पैसा, CM का बड़ा ऐलान, 33 हजार लोगों को मिलेगा रिफंड

नेशनल स्पोर्ट्स डे के मौके पर पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने फुटबॉलर लियोनेल मेसी के कार्यक्रम को लेकर बड़ा ऐलान किया। पिछले साल 13 दिसंबर को मेसी के युवा भारती स्टेडियम पहुंचने के दौरान कार्यक्रम में भारी भीड़ आने की वजह से हालात बिगड़ गए। अर्जेंटीना के मशहूर फुटबॉलर की एक झलक देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने 4,000 और 6,000 रुपये तक के टिकट खरीदे थे। मैदान में पैदा हुई कुछ परेशानियों के कारण कई दर्शकों को उन्हें देखने का मौका नहीं मिल सका। इसे बाद से टिकट के पैसे वापस करने की बात कही गई है। अभी तक इस मामले में उन्हें कोई राहत नहीं मिली है। वहीं सुवेंदु अधिकारी ने कहा कि, टिकट खरीदने वाले करीब 33,000 दर्शकों को उनकी रकम वापस की जाएगी।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, मेसी के कार्यक्रम की टिकट खरीदने वाले करीब 33,000 दर्शकों को उनकी रकम वापस की जाएगी। अर्जेंटीना के मशहूर फुटबॉलर की एक झलक देखने के लिए बड़ी संख्या में लोगों ने 4,000 और 6,000 रुपये तक के टिकट खरीदे थे। इसके लिए राज्य के खेल बजट से पैसे दिए जाएंगे।

रिफंड किया जाएगा

नेशनल स्पोर्ट्स डे पर बोलते हुए अधिकारी ने कहा, “मेसी के बहुत बड़े फैन हैं। उन्होंने Rs 4,000 और Rs 6,000 के टिकट खरीदे थे। मेरी इच्छा है कि इन 33,000 स्पोर्ट्स के शौकीनों का दिया हुआ पैसा वापस किया जाए। मैंने पहले ही अंदरूनी तौर पर प्रोसेस शुरू कर दिया है। मुझे उम्मीद है कि मैं इसे पूरा कर पाऊंगा।” उन्होंने आगे कहा,” 29 अगस्त को आयोजित इस कार्यक्रम में पूर्व हॉकी खिलाड़ी गुरबक्स सिंह, खेल मंत्री इंद्रनील खान, AIFF अध्यक्ष कल्याण चौबे समेत कई मशहूर हस्तियां मौजूद रहीं। कार्यक्रम के दौरान बेहतरीन प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को सम्मानित किया गया और उन्हें नियुक्ति पत्र भी सौंपे गए।

पश्चिम बंगाल की भागीदारी हुई कम

अधिकारी ने कहा कि, “ये हैरान करने वाली बात है कि जिन खिलाड़ियों को आज नियुक्ति पत्र मिले हैं, उनमें से कई के पेपर 11 साल से मुख्यमंत्री के ऑफ़िस में धूल फांक रहे थे।” उन्होंने आगे कहा कि, “पिछले कुछ वर्षों में ओलंपिक, एशियन गेम्स और राष्ट्रीय टीमों में पश्चिम बंगाल के खिलाड़ियों की भागीदारी बेहद कम रही है, जबकि ओडिशा और झारखंड जैसे राज्य लगातार अपने खिलाड़ियों को बड़े मंच पर भेज रहे हैं।

मेसी के कार्यक्रम में हुई थी तोड़फोड़

13 दिसंबर, 2025 को कोलकाता के साल्ट लेक स्टेडियम में मेसी के G.O.A.T. इंडिया टूर इवेंट में अफरा-तफरी और तोड़फोड़ हो गई। हजारों फैंस, जिन्होंने 10,000 रुपये या उससे ज्यादा दिए थे, गुस्सा हो गए जब अधिकारियों और सेलिब्रिटीज ने पिच के किनारे भीड़ लगा दी, जिससे फुटबॉल सुपरस्टार को देखने में रुकावट आई और लगभग 20 मिनट बाद उन्हें अचानक जाना पड़ा।

नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

नेपाल बाढ़ में 24 गुजराती लापता, पीड़ितों की पहचान के लिए गांधीनगर NFSU की टीम रवाना

nepal flood

नेपाल में आई भीषण बाढ़ और प्राकृतिक आपदा में करीब 24 गुजराती पर्यटकों के लापता होने की खबर है। इस आपदा का शिकार हुए लोगों की पहचान करने के लिए गांधीनगर स्थित नेशनल फॉरेंसिक साइंस यूनिवर्सिटी (NFSU) से 10 सदस्यों की एक विशेष टीम नेपाल के लिए रवाना हो गई है। डॉ. भार्गव पटेल के नेतृत्व में यह टीम नेपाल पहुंचकर पीड़ितों की वैज्ञानिक तरीके से पहचान करेगी। गौरतलब है कि NFSU के इन विशेषज्ञों को अमेरिकी रक्षा विभाग (US Department of Defense) के साथ भी फॉरेंसिक मामलों में काम करने का अनुभव है।

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बाढ़ के कारण 24 गुजराती संपर्क से बाहर, अमरेली के पर्यटक से हुआ संपर्क 

 

नेपाल में आई बाढ़ और भूस्खलन की स्थिति में कई गुजराती फंस गए हैं, जिनमें से 24 लोगों का अभी तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और उनके परिजनों से संपर्क टूट गया है। प्रशासन द्वारा उनकी तलाश के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। राहत की बात यह है कि इस बीच अमरेली के एक पर्यटक से संपर्क हो पाया है। स्थानीय प्रशासन को जानकारी दी गई है कि अमरेली के पर्यटक सुरक्षित हैं और उनकी अपने परिवार से बातचीत हो चुकी है।

 

कैलाश मानसरोवर यात्रा के दौरान आनंद का दंपत्ति लापता 

 

नेपाल में आए इस प्रलय में गुजरात के आनंद जिले के विमल पटेल और उनकी पत्नी जैमीना पटेल भी लापता हो गए हैं। यह दंपत्ति बीते 16 अगस्त को 'नमस्ते नेपाल टूर एंड ट्रेवल्स' के माध्यम से नेपाल घूमने गया था। इसके बाद वे नेपाल से कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर निकले थे और चीन का वीजा प्राप्त करने की प्रक्रिया में थे। परिजनों के साथ उनका आखिरी बार टेलीफोन पर संपर्क पिछले रविवार को हुआ था, लेकिन उसके बाद से उनका कोई संपर्क नहीं हो सका है।

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खोज और राहत कार्य के प्रयास तेज 

 

लापता सभी गुजराती पर्यटकों का पता लगाने के लिए स्थानीय प्रशासन और नेपाल स्थित भारतीय दूतावास लगातार संपर्क में रहकर राहत कार्य कर रहे हैं। गांधीनगर से गई विशेषज्ञों की टीम भी घटनास्थल पर पहुंचकर पीड़ितों और उनके परिजनों की मदद के लिए कार्य शुरू करेगी। सभी लापता लोगों से सुरक्षित संपर्क हो सके, इसके लिए उनके परिजन उम्मीद लगाए बैठे हैं।

Tata Sierra vs Harrier: Diesel AT performance compared

Tata Sierra vs Harrier: Diesel AT performance compared
Tata Sierra vs Harrier: Diesel AT performance compared

The Tata Sierra is one of the newer midsize SUVs to offer a diesel engine, a powertrain that is becoming increasingly rare in the segment. Positioned below the Harrier in Tata’s SUV lineup, the Sierra gets a 1.5-litre diesel engine, while a 2.0-litre diesel powers the larger Harrier. Both SUVs are available with a 6-speed automatic gearbox, but with different engines under the hood, how do they compare in terms of performance? Let’s find out.

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: Specifications and price

The Sierra’s smaller engine offers less performance, but it is also more affordable

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: Specifications and price

 

Tata Sierra 1.5D AT

Tata Harrier 2.0D AT

Engine

4-cyl, turbo-diesel

4-cyl, turbo-diesel

Displacement (cc)

1,497

1,956

Power (hp)

118

170

Torque (Nm)

280

350

Kerb weight (kg)

NA

1,823

Power-to-weight (hp per tonne)

93.25

Torque-to-weight (Nm per tonne)

191.99

Price range (Rs, lakh)

15.99-21.29

18.85-25.40  

The Tata Harrier gets a larger 2.0-litre diesel engine, making 52hp and 70Nm more than the Sierra’s 1.5-litre diesel. Tata is yet to reveal the Sierra diesel’s kerb weight, but it will be lower than the Harrier diesel’s weight because of its smaller size. For reference, the Sierra’s turbo-petrol AT weighs 1,552kg.

The Sierra diesel also has a clear price advantage. Its starting price is Rs 2.86 lakh lower than the Harrier’s, while the top-spec Sierra diesel undercuts the Harrier by a substantial Rs 4.11 lakh.

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: 0-100kph acceleration test

The Harrier is 0.77s faster than the Sierra to reach 100kph from a standstill

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: Acceleration from rest (in seconds)

 

Tata Sierra 1.5D AT

Tata Harrier 2.0D AT

20kph

1.44

1.33

40kph

3.53

2.94

60kph

5.93

5.16

80kph

9.31

8.30

100kph

13.37

12.60

The Harrier diesel-AT gets off the line 0.11 seconds quicker than the Sierra diesel-AT and continues to pull ahead as speeds rise. By 60kph, the Harrier’s lead grows to 0.77 seconds, a gap it maintains through to 100kph.

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: Rolling acceleration tests

While the Harrier clocks a faster 20-80kph run, the Sierra is quicker to do 40-100kph

Tata Sierra vs Harrier diesel AT: Rolling acceleration (in seconds)

 

Tata Sierra 1.5D AT

Tata Harrier 2.0D AT

20-80kph

7.97

7.20

40-100kph

9.42

9.52

In the rolling acceleration tests, the Harrier diesel-AT is again quicker in the 20-80kph test, taking 0.77 seconds less than the Sierra diesel-AT.

However, the Sierra clocks a 0.10-second quicker 40-100kph time. In the real world, we noticed that the Sierra’s 1.5-litre engine builds power linearly and lacks the midrange punch associated with diesel engines. On the other hand, the Harrier offers a punchy mid-range and the powertrain feels more responsive to throttle inputs. 

Autocar India’s testing standards

Before we conduct our performance tests, we check and maintain tyre pressures based on the manufacturer’s recommendation and ensure the car has a full tank of fuel. The car is then tested in a controlled environment with two people on board, and the data is collected via highly accurate GPS-based timing equipment.

Step Up SIP: क्या आप इस 10% वाले सीक्रेट फॉर्मूले के बारे में जानते हैं? सिर्फ ₹5000 की SIP से बन गया ₹1 करोड़ का फंड

Step-Up SIP Wealth Creation: शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव के बीच हर नौकरीपेशा व्यक्ति का सपना होता है कि वह अपने और अपने परिवार के भविष्य के लिए एक बड़ा फंड तैयार करे। लेकिन अक्सर लोग यह सोचकर कदम पीछे खींच लेते हैं कि शुरुआत में उनके पास बड़ा पैसा निवेश करने के लिए नहीं है।

अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं, तो अमित की कहानी आपकी इस सोच को पूरी तरह बदल देगी। अमित ने कोई बहुत बड़ा निवेश नहीं किया, बल्कि सिर्फ ‘स्टेप-अप SIP’ की एक छोटी सी तरकीब अपनाकर ₹1 करोड़ का बड़ा फंड तैयार कर लिया। आइए आपको बताते हैं कम पैसों के इनवेस्टमेंट से भी इस फॉर्मूले से मोटा फंड तैयार किया जा सकता है।

₹5,000 की SIP से शुरू की इन्वेस्टमेट जर्नी की शुरूआत

बात लगभग 20 साल पुरानी है। अमित ने जब अपने करियर की शुरुआत की, तो उसकी सैलरी बहुत कम थी। बचत के नाम पर उसके पास ज्यादा पैसे नहीं बचते थे। हालांकि, उसके बावजूद उसने म्यूचुअल फंड में हर महीने ₹5000 की एक छोटी मंथली SIP से शुरुआत करने का फैसला किया। उसी के साथ काम करने वाले विकास ने भी ₹5,000 महीने की ही SIP शुरू की। लेकिन दोनों के निवेश करने के अंदाज में एक बड़ा अंतर था जिसका असर उसके वेल्थ क्रिएशन पर भी देखने को मिला।

विकास ने तय किया कि वह अगले 20 सालों तक बिना किसी फेरबदल के हर महीने ₹5,000 जमा करता रहेगा। अमित ने एक स्मार्ट फॉर्मूला अपनाया। वो जानता था कि हर साल उसकी सैलरी में कम से कम 10% से 12% का इंक्रीमेंट होगा। इसलिए उसने फैसला किया कि वह हर साल अपनी SIP में भी 10% की बढ़ोतरी करेगा।

साल-दर-साल कैसे बढ़ा अमित का निवेश?

अमित ने अपनी जेब पर बिना कोई एक्स्ट्रा दबाव डाले इस प्रक्रिया को बेहद आसान रखा:

  • पहला साल: हर महीने ₹5,000 जमा किए (साल में कुल ₹60,000 निवेश)।
  • दूसरा साल (10% बढ़ोतरी): इंक्रीमेंट होते ही SIP ₹500 बढ़ा दी। अब हर महीने ₹5,500 जाने लगे।
  • तीसरा साल (10% बढ़ोतरी): अब हर महीने ₹6,050 की SIP होने लगी।
  • चौथा साल: हर महीने ₹6,655 जमा होने लगे… और इसी तरह हर साल 10% का स्टेप-अप अपने आप लागू होता गया।

एक जैसी शुरुआत, लेकिन 20 साल बाद नतीजों में जमीन-आसमान का अंतर!

जब 20 साल पूरे हुए और औसतन 12% का वार्षिक रिटर्न मिला, तो दोनों के खातों का रिपोर्ट कार्ड कुछ इस तरह था:

मापदंड विकास (साधारण SIP) अमित (स्टेप-अप SIP)
शुरुआती मंथली SIP₹5,000₹5,000
सालाना बढ़ोतरी0% (फिक्स्ड)10% प्रति वर्ष
20 साल में कुल निवेश₹12 लाख₹34.36 लाख
20 साल बाद मिला कुल फंड₹49.95 लाख (करीब ₹50 लाख)₹98.71 लाख (करीब ₹1 करोड़)

बड़ा टेकअवे: साधारण SIP से विकास केवल ₹50 लाख बना पाया, जबकि अमित ने सिर्फ हर साल थोड़ा-थोड़ा निवेश बढ़ाकर लगभग ₹1 करोड़ का फंड बना लिया।

कंपाउंडिंग का जादू: अमित कैसे बना विजेता?

अमित की सफलता के पीछे 3 मुख्य कारण रहे:

1- जेब पर बोझ नहीं पड़ा: उसने एक साथ ₹15,000-₹20,000 की बड़ी SIP शुरू नहीं की। सैलरी बढ़ने के साथ-साथ निवेश बढ़ा, जिससे उसकी दिनचर्या और खर्चों पर कोई असर नहीं पड़ा।

2- कंपाउंडिंग की ताकत: जो एक्स्ट्रा पैसा अमित ने दूसरे, तीसरे और चौथे साल से बढ़ाया, उस बढ़ी हुई रकम पर भी उसे अगले 15-18 सालों तक ब्याज पर ब्याज मिलता रहा।

3- अनुशासन: ऑटो-डेबिट और टॉप-अप ऑप्शन की मदद से उसका निवेश हर साल अपने आप बढ़ता गया।

आप अपने लिए इसे कैसे शुरू कर सकते हैं?

अगर आप भी अमित की तरह कम समय या छोटी शुरुआत से बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो जब भी किसी म्यूचुअल फंड ऐप (Groww, Zerodha, PayTM Money आदि) से नई SIP शुरू करें, वहां ‘Step-Up SIP’ या ‘Top-Up’ का विकल्प जरूर चुनें।

वहां अपनी सुविधा के अनुसार 10% सालाना या ₹500/₹1,000 सालाना की बढ़ोतरी सेट कर दें। आज लिया गया यह छोटा सा फैसला आपके भविष्य को आर्थिक रूप से पूरी तरह चिंतामुक्त बना सकता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

30 की उम्र में सालाना 1-2 लाख की कमाई, टेक कर्मचारी की परेशानी सुनकर लोगों ने बताए आमदनी बढ़ाने के तरीके

कोलकाता के एक तकनीकी कर्मचारी की कम सैलरी और रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। करीब 30 साल के इस कर्मचारी की सालाना कमाई सिर्फ 1 से 2 लाख रुपये है। माता-पिता के साथ रहने के कारण उन्हें किराए का खर्च नहीं उठाना पड़ता, फिर भी उनका कहना है कि जिंदगी में मनमुताबिक खुशियां और सुविधाएं जुटाना मुश्किल हो रहा है। तकनीकी क्षेत्र में काम करने के बावजूद इतनी कम आय ने उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है।

उन्होंने रेडिट पर अन्य लोगों से पूछा कि आखिर इतनी कम कमाई में लोग अपने खर्च और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। उनकी यह बात कई नौकरीपेशा लोगों को अपनी शुरुआती नौकरी और सीमित वेतन के दिनों की याद दिला रही है।

हफ्ते में साढ़े पांच दिन नौकरी

रेडिट पोस्ट के मुताबिक, वह सोमवार से शुक्रवार तक करीब 8.5 घंटे रोज काम करते हैं और शनिवार को भी आधे दिन की ड्यूटी होती है। इतनी मेहनत के बावजूद कम वेतन मिलने से उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर चिंता है।

इसी परेशानी ने उन्हें रेडिट पर सवाल पूछने के लिए मजबूर किया कि आखिर इतने कम वेतन में लोग खर्च, करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।

किसी ने 2.4 लाख से शुरू किया, आज 40 लाख कमा रहा

पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत 2.4 लाख रुपये सालाना वेतन से की थी। करीब नौ साल बाद उसकी आय बढ़कर 40 लाख रुपये सालाना हो गई। उसने सलाह दी कि मौजूदा कमाई से परेशान होने के बजाय लगातार नई चीजें सीखते रहना चाहिए और समय-समय पर बेहतर अवसर के लिए नौकरी बदलनी चाहिए।

10 हजार रुपये महीने से शुरुआत

एक अन्य उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत महज 10 हजार रुपये महीने की कमाई से की थी। यानी सालाना आय करीब 1.2 लाख रुपये थी। बाद में उसे पता चला कि बाजार में उसी तरह के काम के लिए दूसरे लोग ज्यादा पैसा कमा रहे हैं। इसके बाद उसने अपने कौशल पर काम किया और कंपनियां बदलता गया। उसके मुताबिक, अब उसकी सालाना आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है।

‘1-2 लाख में गुजारा करना बहुत मुश्किल’

एक यूजर ने मौजूदा महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में सालाना 1-2 लाख रुपये में जीवन चलाना बेहद मुश्किल है। उसके मुताबिक, कम से कम 3-4 लाख रुपये सालाना तक पहुंचना जरूरी है, क्योंकि 20-30 हजार रुपये महीना भी अब कई लोगों के लिए सिर्फ जरूरतें पूरी करने जितना ही रह गया है।

वहीं, एक अन्य यूजर ने बेहद साधारण तरीके से खर्च संभालने की बात कही और कम कीमत वाले खाने-पीने के विकल्पों का उदाहरण दिया।

कुछ लोगों के लिए कम वेतन भी ‘सीखने’ का मौका

चर्चा में एक कर्मचारी ने बताया कि उसने तीन साल पहले 1.5 लाख रुपये सालाना से शुरुआत की थी। इससे पहले वह उसी कंपनी में सिर्फ 3 हजार रुपये महीने की इंटर्नशिप कर रहा था। उसका कहना था कि कम वेतन पर नौकरी तब तक जारी रखी जा सकती है, जब तक वहां अच्छा काम सीखने और नए कौशल विकसित करने का मौका मिल रहा हो। उसने खुद दो परियोजनाओं पर शुरू से अंत तक काम किया और इस अनुभव को अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण बताया।

Trends (25)

रेडिट की चर्चा का सीधा संदेश

इस पूरी चर्चा में एक बात बार-बार सामने आई कम शुरुआती वेतन का मतलब यह नहीं कि करियर वहीं रुक जाएगा। कई लोगों ने अपने अनुभव के जरिए बताया कि कौशल बढ़ाने, बेहतर अवसर तलाशने और सही समय पर नौकरी बदलने से आय में बड़ा बदलाव आ सकता है।

हालांकि, कोलकाता के इस कर्मचारी की परेशानी यह भी दिखाती है कि कम वेतन, बढ़ते खर्च और लंबे कामकाजी घंटों के बीच संतुलन बनाना आज कई युवा कर्मचारियों के लिए आसान नहीं है।

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