PPF Vs SSY: हर महीने ₹5000 निवेश करें तो पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना में कितना पैसा बनेगा? जानिए पूरा हिसाब

PPF Vs SSY: अपनी बेटी के हायर एजुकेशन, शादी या दूसरी लंबे समय की फाइनेंशियल जरूरतों के लिए बचत की शुरुआत करते समय माता-पिता के मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि पैसा कहां निवेश किया जाए। सरकार द्वारा समर्थित पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) और सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) दो सबसे लोकप्रिय और सुरक्षित विकल्प हैं। हालांकि इनकी एलिजिबिलिटी, इंट्रेस्ट रेट, मैच्योरिटी और समय से पहले पैसे निकालने के नियमों के मामले में दोनों योजनाएं एक-दूसरे से काफी अलग हैं।

वर्तमान में सुकन्या समृद्धि योजना 8.2 प्रतिशत का हायर इंट्रेस्ट रेट देती है। वहीं पीपीएफ पर 7.1 प्रतिशत की दर से ब्याज मिल रहा है। हालांकि सुकन्या योजना में मिलने वाला अधिक रिटर्न सख्त विड्रॉल नियमों के साथ आता है जबकि पीपीएफ में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है।

बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी कहते हैं कि पीपीएफ और सुकन्या समृद्धि योजना दोनों ही सरकार के सपोर्ट से चलने वाली बचत योजनाएं हैं, लेकिन उनकी एलिबिलिटी, टेन्योर, इंट्रेस्ट रेट और निकासी के नियम अलग-अलग हैं। ये बातें उन्हें अलग-अलग बचत जरूरतों के हिसाब से बनाते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि सही ऑप्शन का चुनाव बच्ची की उम्र, निवेश की समयसीमा और इस बात पर निर्भर करता है कि आप बेटी के भविष्य के लिए इन्वेस्ट करना चाहते हैं या आपका लॉन्ग टर्म गोल कुछ और है।

सुकन्या समृद्धि योजना (SSY): ज्यादा इंट्रेस्ट पर विड्रॉल के नियम सख्त

सुकन्या समृद्धि योजना का खाता 10 साल से कम उम्र की बच्ची के लिए खोला जा सकता है। यह अकाउंट ओपन होने के डेट से 21 साल में मैच्योर होता है। इसमें सिर्फ शुरुआती 15 वर्षों तक ही कंट्रीब्यूशन करना होता है। अभी इस योजना पर 8.2 प्रतिशत की दर से इंट्रेस्ट दिया जा रहा है।

यह योजना उन माता-पिता के लिए ज्यादा बेहतर है जो अपनी बेटी के भविष्य के लिए फोकस होकर फंड बनाना चाहते हैं।

पैसे निकालने के नियम: SSY से आप जब चाहें तब पैसे नहीं निकाले जा सकते। नियम के मुताबिक बच्ची के 18 वर्ष का होने के बाद हायर एजुकेशन के खर्चों के लिए पिछले वित्तीय वर्ष के अंत में मौजूद बैलेंस का 50 फीसदी तक आंशिक रूप से निकालने की अनुमति देते हैं। यह रकम एक बार में या कुछ वर्षों की किश्तों में ली जा सकती है।

समय से पहले खाता बंद करना: बच्ची के 18 साल का होने के बाद शादी होने की स्थिति में खाता बंद किया जा सकता है। इसके अलावा खाताधारक की मौत या फाइनेंशियल क्राइसिस जैसी गंभीर परिस्थितियों में भी शर्तों के तहत समय से पहले खाता बंद करने की अनुमति है।

पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF): इन्वेस्टमेंट में ज्यादा फ्लेक्सिबिलिटी के लिए पीपीएफ की शुरुआती मैच्योरिटी अवधि 15 साल की होती है। इसे 5-5 साल के ब्लॉक में आगे बढ़ाया जा सकता है। इसमें फिक्स्ड टेन्योर के बाद लोन और पार्टिशयस विड्रॉल की सुविधा मिलती है।

खाता खोलने के वर्ष के अंत से 5 साल पूरे होने के बाद कुछ खास परिस्थितियों या वजहों से पीपीएफ खाते को समय से पहले बंद किया जा सकता है, जैसे-

खाताधारक, जीवनसाथी, बच्चों या आश्रित माता-पिता की गंभीर बीमारी के इलाज के लिए।

खाताधारक या उनके बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए (प्रवेश का प्रमाण पत्र देने पर)।

खाताधारक की निवास स्थिति में बदलाव होने पर।

यह सुविधा उन माता-पिता के लिए फायदेमंद है जो अपनी बेटी के लिए बचत तो करना चाहते हैं लेकिन उस पैसे को सिर्फ उसी के खर्चों से पूरी तरह बांधकर नहीं रखना चाहते।

PPF VS SSY कैलकुलेशन: हर महीने ₹5000 के निवेश पर कितना मिलेगा रिटर्न?

अगर आप PPF और SSY दोनों में हर महीने ₹5000 (यानी ₹60000 सालाना) इन्वेस्ट करते हैं तो मौजूदा इंट्रेस्ट रेट पर ही कैलकुलेट किया जाए तो भी दोनों की मैच्योरिटी पर बड़ी फर्क देखने को मिलता है। पहले बात करते हैं पीपीएफ की। अगर आप हर महीने ₹5000 डालते हैं तो 15 साल में आप कुल 9 लाख रुपये जमा करेंगे। 7.1 फीसदी के इंट्रेस्ट रेट के हिसाब से आपको 7 लाख 27 हजार के करीब ब्याज मिलेगा। 15 साल बाद आपकी कुल मैच्योरिटी राशि ₹1627284 हो जाएगी.

अगर आप सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) में अपनी बेटी के लिए हर महीने ₹5000 जमा करते हैं, तो 8.2 प्रतिशत की वर्तमान ब्याज दर के आधार पर आपको काफी अधिक रिटर्न मिलेगा। इस योजना के नियमानुसार आपको सिर्फ शुरुआती 15 सालों तक ही पैसे जमा करने होते हैं। इससे आपकी कुल जमा राशि 9 लाख रुपये ही रहेगी. हालांकि खाता खोलने की तारीख से 21 वर्ष में मैच्योर होने की वजह से अगले 6 वर्षों तक आपकी जमा राशि पर ब्याज जुड़ता रहेगा। इस तरह 21 साल की मैच्योरिटी पूरी होने पर आपको करीब ₹18 लाख 71 हजार का सिर्फ इंट्रेस्ट मिलेगा और आपकी कुल मैच्योरिटी 27 लाख 71 हजार से ज्यादा हो जाएगी।

यह भी पढ़ें: SSY Return Calculator: सुकन्या समृद्धि योजना में ₹3 लाख इंटरेस्ट कमाना चाहते हैं? तो इस्तेमाल करें यह फॉर्मूला

कौन सा विकल्प आपके लिए सबसे सही है?

अगर आपका एकमात्र उद्देश्य अपनी बेटी के भविष्य के लिए एक बड़ा और डेडिकेटेड फंड तैयार करना है, तो उच्च ब्याज दर (8.2%) की वजह से सुकन्या समृद्धि योजना अधिक फायदेमंद है। अगर आप उच्च ब्याज दर के बजाय निवेश में अधिक फ्लेक्सिबिलिटी और इमरजेंसी में पैसे निकालने की सुविधा चाहते हैं, तो पीपीएफ ज्यादा बेहतर विकल्प है।

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver Weekly Report: सोने और चांदी में हफ्ते के आखिर में तेज गिरावट, सोना 3% फिसला

Gold Silver Weekly Report: सोने के लिए यह हफ्ता अच्छा नहीं रहा। चांदी में भी इस हफ्ते गिरावट आई। इसकी वजह अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच है। 28 अगस्त को फेड चेयरमैन ने साफ कर दिया कि फिलहाल उनका फोकस इनफ्लेशन को कंट्रोल करने पर होगा। इसका असर बुलियन की कीमतों पर पड़ा।

24 अगस्त को सोना 4700 डॉलर के करीब पहुंच गया था

सोना इस हफ्ते मंगलवार यानी 24 अगस्त को तीन महीने के सबसे ऊंचे लेवल 4,696 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया था। हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन यानी 28 अगस्त को स्पॉट गोल्ड 3.18 फीसदी गिरकर 4,454 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। चांदी भी 27 अगस्त को करीब 69 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई थी। 28 अगस्त को यह 4.48 फीसदी गिरकर 66 डॉलर पर आ गई।

फेड चेयरमैन की स्पीच से सोने और चांदी में तेज गिरावट 

शुक्रवार की गिरावट से पहले इस हफ्ते सोने और चांदी में अच्छी तेजी आई थी। इसकी वजह अमेरिका में बॉन्ड यील्ड को बढ़ने से रोकने के लिए सरकार की तरफ से उपाय का ऐलान डिबेसमेंट ट्रेड था। लेकिन, फेड चेयरमैन की स्पीच से सोने और चांदी की कीमतों में तेजी पर ब्रेक लग गया। अमेरिका में जुलाई में पर्सनल कंजमप्शन एक्सपेंडिचर इनफ्लेशन 3.7 फीसदी पर रहा।

दिल्ली सर्राफा बाजार में भी फिसला सोना 

दिल्ली सर्राफा बाजार में भी सोने और चांदी की कीमतों में 28 अगस्त को गिरावट आई। सोना 3,300 रुपये गिरकर 1,62,400 रुपये प्रति 10 ग्राम पर आ गया। यह दिल्ली में सोने की कीमतों में गिरावट का लगातार तीसरा दिन था। इस हफ्ते दिल्ली सर्राफा बाजार में सोने की कीमतेंत 4,700 रुपये प्रति 10 ग्राम गिरी हैं। 25 अगस्त को दिल्ली में सोना 1,67,100 रुपये प्रति 10 ग्राम पर पहुंच गया था।

यह भी पढ़ें: फेड चेयरमैन केविन वार्श ने महंगाई पर चेताया, बोले- 2% इंफ्लेशन का लक्ष्य हासिल करना जरूरी

सोने की कीमतों पर मुनाफा वसूली का भी असर 

कमोडिटी एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस हफ्ते कीमतों में तेजी के बाद सोने में मुनाफावसूली देखने को मिली। अमेरिकी डॉलर में मजबूती का असर भी सोने पर पड़ा। डॉलर मजबूत होने से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना सस्ता हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। घरेलू बाजार में बुलियन की कीमतों पर सोने और चांदी पर इंपोर्ट ड्यूटी कम होने की चर्चा का भी असर पड़ा।

दक्षिण अफ्रीका नहीं जीत पाती नामिबिया से, कल भी हुई उलटफेर का शिकार

दक्षिण अफ्रीका की टीम जो 2 बार टी-20 विश्वकप के सेमीफाइनल और एक बार फाइनल में जगह बना चुकी है वह अपने पड़ोसी देश की टीम और असोसिएट देश नामिबिया की टीम से एक भी टी-20 मैच नहीं जीत पाई। गौरतलब है कि दक्षिण अफ्रीका जिम्बाब्वे और नामिबिया त्रिकोणीय टी-20 श्रृंखला खेल रहे हैं और कल के शरुआती मुकाबले में मेजबान नामिबिया ने दक्षिण अफ्रीका को 18 रनों से हरा दिया।

यह  नामिबिया की दक्षिण अफ्रीका पर लगातार दूसरी जीत है। इससे पहले एक टी-20 मुकाबले में नामिबिया दक्षिण अफ्रीका को पहले भी हरा चुकी है। नामिबिया क्रिकेट ग्राउंड पर खेले गए इस मैच में दक्षिण अफ्रीका ने टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी चुनी। उनको पहला विकेट 10वें ओवर में मिला और नामिबिया ने तब तक 84 रन जड़ दिए। प्रेनेल सुब्रायन ने सर्वाधिक 3 विकेट चटकाए।

सलामी बल्लेबाजों के अलावा नामिबिया के लिए कोई खास रन नहीं आए लेकिन लौरेन स्टीनकैंप और जैन फ्राएलिंक (41 और 60 रन ) ने नामिबिया को 9 विकेटों के नुकसान पर 163 रनों तक पहुंचा दिया। इसके जवाब में बल्लेबाजी करने उतरी दक्षिण अफ्रीका की शुरुआत खराब रही टीम ने शीर्ष 3 बल्लेबाज 7 ओवर में 39 रन बनाकर ही गंवा दिए।

डेवाल्ड ब्रेविस ने 75 रन बनाकर टीम की जीत को जिंदा रखा लेकिन जैसे ही वह आउट हुए दक्षिण अफ्रीका ताश के पत्तों की तरह ढह गई और निर्धारित 20 ओवरों में सिर्फ 145 रन ही बना पाई। मैन ऑफ द मैच नामिबिया के जेे जे स्मट को मिला जिन्होंने 31 रन देकर 3 विकेट लिए।

11 साल की बेटी का फोन चेक करते ही मां के उड़े होश, चैट और वीडियो देखकर बढ़ी चिंता

11 साल की बेटी के फोन पर आए कुछ अजीब नोटिफिकेशन ने एक मां की चिंता बढ़ा दी। पहले उसने इन संदेशों को सामान्य समझकर नजरअंदाज किया, लेकिन लगातार नोटिफिकेशन आने के बाद उसने फोन देखने का फैसला किया। इसके बाद जो बातें सामने आईं, उन्होंने मां को परेशान कर दिया और उसे अपनी बेटी के हालिया व्यवहार के बारे में दोबारा सोचने पर मजबूर कर दिया। मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों के बीच बहस शुरू हो गई। कुछ लोगों का मानना था कि कम उम्र के बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर माता-पिता की नजर रहनी चाहिए, जबकि दूसरे लोगों ने बच्चे की निजता और भावनात्मक स्थिति को ज्यादा अहम बताया।

खासकर यह सवाल चर्चा में रहा कि ऐसी परिस्थिति में माता-पिता को सजा देने के बजाय बच्चे से किस तरह बातचीत करनी चाहिए। इस घटना ने बच्चों के फोन इस्तेमाल, सोशल मीडिया और पैरेंटिंग को लेकर एक जरूरी बहस छेड़ दी है।

रात में फोन लेने वाली मां ने पहली बार चेक किया

27 साल की मां ने बताया कि वह हर रात अपनी बेटी का फोन अपने पास रखती है। सप्ताह के दिनों में रात 9 बजे और वीकेंड पर करीब 10:30 बजे फोन ले लिया जाता है। हालांकि, उसने पहले कभी बेटी का फोन खंगाला नहीं था, क्योंकि उसे ऐसा करने की जरूरत महसूस नहीं हुई।

लेकिन इस बार फोन पर लगातार TikTok के नोटिफिकेशन देखकर उसका ध्यान गया। खास बात यह थी कि बेटी को TikTok इस्तेमाल करने की अनुमति भी नहीं थी।

नोटिफिकेशन में खाने को लेकर हो रही थी बात

मां ने पहले सोचा कि शायद कोई जरूरी संदेश आया होगा, इसलिए उसने नोटिफिकेशन का प्रीव्यू पढ़ा। वहां किसी व्यक्ति द्वारा उसकी बेटी से पूछा जा रहा था कि उसने क्या खाया और कितना खाया। यह देखकर मां को चिंता हुई। इसके बाद उसने बेटी का TikTok अकाउंट और दूसरी बातचीत भी देखी। उसे खाने से जुड़े कई पोस्ट, बहुत दुबली लड़कियों वाले वीडियो और कम खाना खाने को लेकर बातचीत मिली।

बेटी के बदलते व्यवहार से भी जुड़ गईं कड़ियां

फोन देखने के बाद मां ने पिछले कुछ हफ्तों में बेटी में आए बदलावों को नए नजरिए से देखा। उसके मुताबिक, बेटी पहले की तुलना में कम खाना खा रही थी और उसका वजन भी घट रहा था। शुरुआत में मां ने इसे उम्र बढ़ने और शरीर में होने वाले बदलावों का हिस्सा समझा था। उसने बताया कि वह खुद भी करीब इसी उम्र में लंबी और दुबली हुई थी, इसलिए उसे बेटी में आए बदलाव असामान्य नहीं लगे।

मां के सामने अब सबसे बड़ा सवाल- सजा या मदद?

मां ने माना कि बेटी का फोन देखना उसकी निजता में दखल था। लेकिन फोन में मिली चीजों ने उसे इस कदर परेशान कर दिया कि वह समझ नहीं पा रही थी कि बेटी से इस मुद्दे पर कैसे बात करे। उसने ऑनलाइन लोगों से यह भी पूछा कि बिना अनुमति ऐप इस्तेमाल करने पर बेटी को सजा देना सही होगा या नहीं। यही सवाल पोस्ट का सबसे विवादित हिस्सा बन गया।

लोगों ने कहा- सजा नहीं, पहले बच्चे को समझिए

सोशल मीडिया पर कई लोगों ने मां के सजा पर ध्यान देने की आलोचना की। कुछ यूजर्स ने कहा कि अगर बच्ची खाने और शरीर को लेकर परेशान करने वाली चीजों से प्रभावित हो रही है, तो सबसे पहले उसकी स्थिति समझना जरूरी है।

एक यूजर ने कहा कि बच्ची को मदद और भावनात्मक सहारे की जरूरत हो सकती है, जबकि मां का ध्यान ऐप इस्तेमाल करने की सजा पर ज्यादा है।

कुछ लोगों ने मां की भी बात मानी

हालांकि, हर किसी ने मां को गलत नहीं ठहराया। कुछ यूजर्स ने कहा कि 11 साल की उम्र में बच्चे को बिना निगरानी इंटरनेट इस्तेमाल करने देना भी जोखिम भरा हो सकता है। एक व्यक्ति ने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए कहा कि बचपन में बिना निगरानी इंटरनेट इस्तेमाल करने का उस पर बुरा असर पड़ा था। उसके मुताबिक, कम उम्र के बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर माता-पिता की नजर रहनी चाहिए।

असली बहस फोन की नहीं, बच्चे की सुरक्षा की है

इस पूरी घटना ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है- बच्चों को फोन देते समय माता-पिता उनकी निजता और सुरक्षा के बीच संतुलन कैसे बनाएं? एक तरफ बच्चों की निजी बातचीत में दखल देने का सवाल है, तो दूसरी तरफ इंटरनेट पर मौजूद ऐसा कंटेंट भी है जो कम उम्र में उनके खाने, शरीर और खुद को देखने के तरीके को प्रभावित कर सकता है। सोशल मीडिया पर हुई बहस में ज्यादातर लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि ऐसे हालात में बच्चे से खुलकर बात करना और उसकी परेशानी को समझना, केवल सजा देने से कहीं ज्यादा जरूरी है।

विदेश में हनीमून का सपना पूरा करने का ये तरीका जान लीजिए, 13 दिन में कपल ने खर्च किए सिर्फ ₹5.93 लाख

2026 Mahindra Thar 3-door facelift spied with new fascia

2026 Mahindra Thar 3-door facelift spied with new fascia
2026 Mahindra Thar 3-door facelift

A newly spotted test mule of the upcoming Mahindra Thar 3-door facelift previews the off-roader’s revised front end. While the Thar 3-door received a nip-and-tuck with some feature additions in October 2025, this upcoming facelift looks to be more comprehensive in scope. Expect the 2026 Thar 3-door facelift to launch in the coming months, priced slightly higher than the current model, which costs Rs 10.32 lakh-18 lakh (ex-showroom).

2026 Mahindra Thar 3-door facelift exterior updates

Credit: thepathfinder722 via Instagram

Previous test mule sightings of the facelifted Thar 3-door hinted at an all-new grille that heavily resembles the double-stacked 6-slat one of the Thar Roxx. This test mule, however, has a different 5-slot grille with a small horizontal intrusion on the right side, possibly to accommodate a badge. The discrepancy in grille designs is unclear, with one likely explanation being that the Thar 3-door facelift will be sold in different editions with unique grilles. Aside from the grille, new 5-spoke alloy wheels can also be spotted on the test mule.

2026 Mahindra Thar 3-door facelift powertrain updates

Under the bonnet, the facelifted Thar 3-door is expected to retain the current model’s 119hp 1.5-litre diesel, 132hp 2.2-litre diesel, and 152hp 2.0-litre direct-injection turbo-petrol engine options. All engines get a 6-speed manual gearbox as standard, with the 2.2-litre diesel and 2.0-litre turbo-petrol ones additionally offering a 6-speed torque converter automatic. 4×4 can be equipped with those two engines as well, while the 1.5-litre diesel comes with 4×2 (RWD) only. As we exclusively reported last April, An electric power steering system is also expected to replace the current hydraulic setup.

BSEB Dummy Registration Card 2027: अब इस तारीख तक गलतियां सुधारने का मौका, बीएसईबी ने बढ़ाई सुधार विंडो की आखिरी तारीख

BSEB Dummy Registration Card 2027: बिहार में मैट्रिक (कक्षा 10) और इंटरमीडिएट (कक्षा 12) के छात्रों को डमी रजिस्ट्रेशन कार्ड को लेकर चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है। बिहार स्कूल परीक्षा बोर्ड (BSEB) ने 2027 में स्कूलों के लिए कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षा शामिल होने वाले छात्रों के डमी रजिस्ट्रेशन कार्ड में करेक्शन करने की डेडलाइन बढ़ा दी है। ताजा सूचना के मुताबिक, शैक्षिक संस्थान 28 अगस्त से 16 सितंबर, 2026 तक छात्रों या उनके अभिभावकों के हस्ताक्षर किए हुए घोषणा वाले डमी रजिस्ट्रेशन कार्ड अपलोड कर सकते हैं।

बोर्ड ने स्कूलों को उन छात्रों के लिए पहले से भरे हुए डिक्लेरेशन फॉर्म जमा करने का भी निर्देश दिया है जिनका ऑनलाइन पंजीकरण और फीस पहले ही पूरी हो चुकी है, लेकिन जिनके डिक्लेरेशन फॉर्म अभी जमा नहीं हुए हैं। बढ़ी हुई डेडलाइन मैट्रिक और इंटरमीडिएट दोनों छात्रों पर लागू होती है।

बीएसईबी डमी रजिस्ट्रेशन कार्ड 2027: जरूरी जानकारी

स्कूलों को सभी पात्र कक्षा 10 और 12 के छात्रों के डमी रजिस्ट्रेशन कार्ड चेक करने होंगे और बदली हुई डेडलाइन के अंदर जरूरी सुधार करने होंगे।

करेक्शन/अपलोड विंडो : 28 अगस्त से 16 सितंबर, 2026

कक्षा 12 पोर्टल : intermediate.biharboardonline.com

कक्षा 10 पोर्टल : biharboardonline.org

स्कूलों को छात्र/अभिभावक का साइन किया हुआ डिक्लेरेशन अपलोड करना होगा।

जिन छात्रों का रजिस्ट्रेशन और फीस पहले ही जमा हो चुकी है, लेकिन जिनका पहले से भरा हुआ डिक्लेरेशन लंबित है, उन्हें भी 16 सितंबर तक प्रोसेस पूरा करना होगा।

बीएसईबी 2027 डमी रजिस्ट्रेशन कार्ड : कैसे अपलोड करें?

  • बीएसईबी की आधिकारिक वेबसाइट पर जाएं।
  • स्कूल लॉगिन विंडो खोलें।
  • जरूरी स्कूल लॉगिन क्रेडेंशियल डालें।
  • डमी रजिस्ट्रेशन कार्ड में जहां भी जरूरत हो, करेक्शन सबमिट करें।
  • पहले से भरे हुए डिक्लेरेशन फॉर्म अपलोड करें, जैसा लागू हो।
  • सभी डिटेल्स ध्यान से चेक करें और सबमिट पर क्लिक करें।
  • कन्फर्मेशन या सबमिट की गई डिटेल्स को भविष्य के लिए सेव कर लें।

स्कूलों को यह पक्का करना चाहिए कि बीएसईबी 2027 बोर्ड परीक्षा में शामिल होने वाले सभी छात्रों की जानकारी 16 सितंबर, 2026 की डेडलाइन से पहले सही तरीके से जमा कर दी गई हों।

NEET PG 2026 Exam: 340 शहरों में कल सुबह 9 बजे से होगी नीट पीजी की परीक्षा, यहां देखें सभी जरूरी परीक्षा निर्देश

Sensex, Nifty लगातार तीसरे हफ्ते गिरे, क्या बाजार के अच्छे दिन अभी दूर हैं?

शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट आई। बाजार में काफी उतार-चढ़ाव भी दिखा। यह बीते पांच महीनों में गिरावट का सबसे लंबा सिलसिला रहा। हालांकि, 28 अगस्त को यानी हफ्ते के अंतिम दिन सेंसेक्स और निफ्टी हरे निशान में बंद हुए।

इस हफ्ते प्रमुख सूचकांकों में 0.47 फीसदी तक गिरावट आई

28 अगस्त को निफ्टी 0.35 फीसदी यानी 84 अंक चढ़कर 24,175 पर बंद हुआ। Sensex 0.43 फीसदी यानी 330 अंक चढ़कर 77,264 पर क्लोज हुआ। बीते एक हफ्ते में सेंसेक्स 0.44 फीसदी गिरा है। निफ्टी इस दौरान 0.47 फीसदी यानी 114 प्वाइंट्स गिरा है। शेयर बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार तीसरे हफ्ते गिरावट ने इनवेस्टर्स को चिंतित कर दिया है।

BSE का मार्केट कैपिटलाइजेशन करीब 1 लाख करोड़ घटा

बीएसई का मार्केट कैपिटलाइजेशन इस हफ्ते करीब 1 लाख करोड़ रुपये घटा है। इस गिरावट में रिलायंस इंडस्ट्रीज, भारती एयरटेल और महिंद्रा एंड महिंद्रा का बड़ा हाथ रहा। उधर, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने लगातार दूसरे हफ्ते बिकवाली की। हालांकि, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) की खरीदारी से बाजार को कुछ सपोर्ट मिला।

जियोपॉलिटिकल स्थितियां अब भी चिंताजनक

मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि वैश्विक स्थितियां अभी भी चिंताजनक बनी हुई हैं। खासकर मिडिलईस्ट में हालात में बदलाव नहीं आया है। ईरान और अमेरिका के बीच टकराव की स्थिति बनी हुई है। उधर, ईरान और ओमान में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलने पर बातचीत हुई है। इससे क्रूड ऑयल की कीमतों में थोड़ी नरमी आई है। लेकिन, अब भी ब्रेंट क्रूड 88 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर बना हुआ है। यह चिंता की बात है।

अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ने का आसार

उधर, अमेरिका में फेडरल रिजर्व चेयरमैन केविन वॉर्श की स्पीच के बाद 28 अगस्त को शेयर बाजारों में बड़ी गिरावट आई। वॉर्श ने यह साफ कर दिया है कि फेड का फोकस फिलहाल महंगाई को बढ़ने से रोकने पर होगा। इसका मतलब है कि अगले महीने मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के बाद फेड इंटरेस्ट रेट बढ़ाने का एलान कर सकता है। अगर अमेरिका में इंटरेस्ट रेट बढ़ता है तो उसका असर भारत में भी आरबीआई की मॉनेटरी पॉलिसी पर पड़ेगा। भारत में भी इनफ्लेशन आरबीआई की तय रेंज से बाहर निकल चुका है।

क्रूड में तेजी जारी रही तो बढ़ेगी महंगाई

क्रूड की कीमतें अगर नीचे नहीं आती हैं तो इनफ्लेशन बढ़ना जारी रहेगा। इस बीच इनवेस्टर्स की नजरें अगस्त के रिटेल इनफ्लेशन के डेटा पर लगी हैं। सितंबर के दूसरे हफ्ते में अगस्त के इनफ्लेशन के डेटा आएंगे। अगर इनफ्लेशन ज्यादा बढ़ता है तो अक्तूबर में आरबीआई इंटरेस्ट रेट बढ़ा सकता है। इसका असर कंपनियों के कैपिटल एक्सपेंडिचर प्लान पर पड़ेगा।

निफ्टी-सेंसेक्स में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव

बाजार के जानकारों का कहना है कि जून तिमाही के कंपनियों के नतीजे अच्छे आए हैं। इससे इकोनॉमी में डिमांड स्ट्रॉन्ग रहने का संकेत मिलता है। लेकिन, शेयरों की कीमतों में बड़ी तेजी तभी दिखेगी, जब क्रूड की कीमतें नीचे आएंगी। इस बीच निफ्टी और सेंसेक्स में सीमित दायरे में उतार-चढ़ाव जारी रह सकता है।

यह भी पढ़ें: IPO Profit Booking: आईपीओ के शेयर लिस्ट होते ही प्रॉफिट बुक नहीं किया तो क्या होगा? यहां जानिए सवाल का जवाब 

फिलहाल बड़ी गिरावट की आशंका नहीं

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर टेक्निकल रिसर्च एनालिस्ट नागराज शेट्टी ने कहा कि निफ्टी का अंडरलाइंग ट्रेंड बता रहा है कि सूचकांक सीमित दायरे में रह सकता है। हालांकि, इंडिया वीआईएक्स में नरमिी है। यह 3.5 फीसदी गिरकर 10.68 पर आ गया है। यह अपने शॉर्ट टर्म मूविंग एवरेजज से नीचे है। इसका मतलब है कि बाजार में आगे बड़ी गिरावट की आशंका नहीं है। फिलहाल बाजार सीमित दायरे में रह सकता है।

Ather Konarc launched from Rs 1 lakh, up to 200km IDC range

Ather Konarc launched from Rs 1 lakh, up to 200km IDC range
Ather Konarc launched from Rs 1 lakh, up to 200km IDC range

Ather has launched the Konarc electric scooter in India at its Annual community day, with prices starting at Rs 1 lakh (ex-showroom, Bengaluru). It is available in three variants – S 100, S 125 and S 161 – with the numbers corresponding to their respective IDC range figures. A 200km version is also in the pipeline, while a feature-loaded Z variant with a 125km IDC range will also join the line-up.

  1. New AEBS braking system and MagicKey boot access headline the technology package.
  2. 100mm rear suspension travel and a 1,352mm wheelbase are aimed at improving ride comfort and stability.
  3. Up to 200km IDC range, 31-litre boot and 1.35kW combined charging add to its practicality.

Ather Konarc is based on the EL-platform

The Konarc is aimed at delivering improved ride comfort and stability, with 90mm of front and 100mm of rear suspension travel. It has a 1,352mm wheelbase, the longest of any Ather scooter, along with a 14-inch front wheel and 12-inch rear wheel. The S 100 gets drum brakes at both ends, while the S 125 and S 161 get a 220mm front disc and 130mm rear drum.

Ather Konarc Battery and range information

The S 100 gets a 2.1kWh battery and produces 4kW and 16Nm, while the S 125 and S 161 use 2.7kWh and 3.5kWh batteries, respectively, and produce 4.7kW and 16Nm. All three have a claimed top speed of 70kph. While their TrueRange figures are 80km, 100km and 130km, respectively.

The Konarc comes with a 450W onboard charger as standard. Ather says this can be combined with a 900W off-board charger, giving a total charging capacity of 1.35kW. The claimed home charging time from 0-80 percent with the standard charger is 4 hours for the S 100, 4hr 30min for the S 125 and 5hr 40min for the S 161. With the combined charger, these times fall to two hours, 2hr 25min and 3hr 10min, respectively. The charging speed is claimed at 13km in 10 minutes for the S 100 and 15km in 10 minutes for the S 125 and S 161.

Ather described EL as a scalable platform capable of underpinning different scooter formats while sharing major components. Developed using 26 lakh kilometres of field data, it features a new chassis, powertrain and electronics architecture. Ather says reducing the component count could make assembly 15 percent faster and periodic servicing up to twice as quick. The company also demonstrated the platform’s serviceability on stage, with trained technicians dismantling and reassembling the Konarc’s battery and motor in around three minutes, highlighting the potential to significantly reduce workshop time for major component replacement jobs.

The Konarc offers 31 litres of underseat storage, along with an 18W USB Type-C port and an underseat lamp. The S 100 gets a 4.2-inch DeepView display, while the higher variants get a 7-inch DeepView display. Other features include Park Assist reverse, which uses the motor to help manoeuvre the scooter backwards, and AutoHold, which holds the scooter stationary when stopped.

Ather Konarc features

The Konarc Z gets some of Ather’s more significant new technology, including Advanced Electronic Braking System (AEBS). The system uses electronic control to improve braking performance, with Ather saying it reduces stopping distances and minimises rear-wheel lock-ups. It is intended to offer greater braking control, particularly during hard braking.

The Z also gets MagicKey, which allows the rider to unlock the scooter’s boot through the Ather app rather than using a physical key. On the Konarc Z 161, MagicKey works with the boot’s AutoPop function, allowing the boot to open automatically.

Other Z-specific technology includes Google Maps and WhatsApp on the dashboard, while cricket scores can also be displayed when the scooter is stationary. The Konarc gets Ather Connect with features such as theft and tow alerts, ride statistics, Find My Scooter and remote charging-status monitoring. OTA updates are also supported.

The Konarc uses a PMSM motor with IP67 protection, while its battery is also IP67-rated and housed in an aluminium casing. The S 100 weighs 126.5kg, while the S 161 weighs 129kg.

Ather Konarc Price and warranty details

The Konarc also introduces longer service intervals, with periodic maintenance scheduled once every 10,000km or one year, whichever comes first. The Konarc S 100 is priced at Rs 1 lakh, while the S 125 costs Rs 1.22 lakh and the S 161 is priced at Rs 1.45 lakh. Ather has also revealed Konarc Z variants with 125km and 161km IDC range figures, although their prices are yet to be announce

Ather Konarc variants

VariantPrice (ex-showroom)IDC rangeBattery pack
Konarc S 100Rs 1 lakh100km2.1kWh
Konarc S 125Rs 1.22 lakh125km2.7kWh
Konarc S 161Rs 1.45 lakh161km3.5kWh
Konarc Z 125To be announced125kmNot specified in the sheet
Konarc Z 161To be announced161kmNot specified in the sheet

UGC NET June 2026 Result: यूजीसी नेट ने जारी 84 विषयों की फाइनल आंसर और रिजल्ट, 6 लाख से ज्यादा उम्मीदवारों ने दी थी परीक्षा

UGC NET June 2026 Result: नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने यूजीसी नेट जून 2026 के रिजल्ट घोषित कर दिए हैं और 84 विषयों के लिए सब्जेक्ट और श्रेणी के हिसाब से कट-ऑफ मार्क्स जारी कर दिए हैं। जो उम्मीदवार परीक्षा में शामिल हुए थे, वे आधिकारिक वेबसाइट ugcnet.nta.nic.in पर लॉग इन करके अपने रिजल्ट और श्रेणी के हिसाब से कट-ऑफ मार्क्स देख सकते हैं। बता दें, तीन विषयों अंग्रेजी, कॉमर्स ओर सोशियोलॉजी की परीक्षा सितंबर में दोबारा होगी, जिसके बाद इनका रिजल्ट जारी किया जाएगा।

यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा के लिए कुल 7,73,806 कैंडिडेट ने पंजीकरण किया था। इसमें 4,30,195 (55.59%) महिलाएं, 3,43,575 (44.40%) पुरुष और 36 (0.01%) थर्ड-जेंडर कैंडिडेट शामिल थे। यूजीसी नेट जून 2026 की परीक्षा 22, 23, 24, 25, 29, 30 जून और 5 जुलाई को देश भर के 286 शहरों में 655 परीक्षा केंद्रों पर 87 सब्जेक्ट के लिए कंप्यूटर-बेस्ड टेस्ट (CBT) मोड में आयोजित की गई थी। इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी – की परीक्षा 9 और 10 सितंबर को दोबारा होगी।

यूजीसी नेट जून 2026 परीक्षा के 84 विषयों के लिए उम्मीदवारों के प्रश्नपत्र, अस्थायी उत्तर कुंजी और रिकॉर्डेड रिस्पॉन्स 16 अगस्त को जारी किए गए थे। इन पर आपत्ति दर्ज कराने के लिए उम्मीदवारों को 18 अगस्त तक समय दिया गया था। परीक्षार्थियों द्वारा सबमिट की गई चुनौतियों की विशेषज्ञों ने समीक्षा की, जिसके बाद फाइनल आंसर की को फाइनल किया गया, और परिणाम प्रोसेस किए गए।

एक नजर में रिजल्ट

84 विषयों में परीक्षा के लिए पंजीकृत 7,73,806 उम्मीदवारों में से 6,07,151 उम्मीदवार शामिल हुए।

JRF और असिस्टेंट प्रोफेसर के लिए क्वालिफाई हुए कैंडिडेट : 4,241

असिस्टेंट प्रोफेसर और PhD में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए कैंडिडेट : 45,904

सिर्फ PhD के लिए क्वालिफाई हुए कैंडिडेट : 97,434

इन उम्मीदवारों को नहीं दिखेगा स्कोरकार्ड

एनटीए ने कहा कि इंग्लिश, कॉमर्स और सोशियोलॉजी विषयों की परीक्षा देने वाले उम्मीदवार अगर यूजीसी नेट जून 2026 का स्कोरकार्ड एक्सेस करने की कोशिश करेंगे, तो उन्हें “इनवैलिड एप्लीकेशन नंबर/पासवर्ड” मैसेज मिल सकता है। इन उम्मीदवारों का स्कोरकार्ड/रिजल्ट उनकी परीक्षाएं दोबारा होने के बाद ही मिलेगा। यह परीक्षाएं 9 और 10 सितंबर, 2026 को दोबारा आयोजित होंगी।

एजेंसी के आधिकारिक नोटिस में लिखा है, “योग्य उम्मीदवार के पात्रता मानदंड, स्वघोषणा, अलग-अलग दस्तावेज वगैरह को यूजीसी नेट जून 2026 के सूचना बुलेटिन में बताए गए मानकों के हिसाब से संबंधित अधिकारिकयों द्वारा तय प्रक्रिया के हिसाब से वेरिफाई किया जाएगा।”

Reforms in Public Examinations: सरकार ने शुरू की सार्वजनिक परीक्षा व्यवस्था में बदलाव की तैयारी, जनता से मांगा सुझाव