Neha Bora: प्रोटेस्ट में पुलिस को खूब छकाने के बाद देशभर में चर्चा का केंद्र बनीं नेहा बोरा JNU से कर रही हैं कैसी पढ़ाई?

Neha Bora Qualification: राजधानी दिल्ली में निर्वाचन आयोग (ECI) और मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ विरोध-प्रदर्शनों के बीच जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) की छात्रा और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। प्रदर्शन के दौरान पुलिस बैरिकेडिंग पार करने, पुलिसकर्मियों से बचते हुए आगे बढ़ने और हिरासत में लिए जाने से जुड़ी उनकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आए हैं। इसके बाद उनकी एजुकेशन क्वालीफिकेशन, पारिवारिक बैकग्राउंड और छात्र राजनीति में उनके सफर को लेकर लोगों की दिलचस्पी बढ़ी है।

प्रदर्शन के बाद भारत समेत दुनियाभर में नेहा की बढ़ती लोकप्रियता के साथ ही लोग उनकी पढ़ाई-लिखाई और उत्तराखंड से छात्र राजनीति तक के सफर के बारे में भी जानना चाहते हैं। आइए जानते हैं कि नेहा बोरा जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में फिलहाल क्या पढ़ाई कर रही हैं और वह राजनीति में कैसे आईं…

कहां की रहने वाली हैं नेहा बोरा?

नेहा बोरा उत्तराखंड के खटीमा की रहने वाली हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनके पिता भारतीय सेना में कार्यरत हैं। सेना में तैनाती के कारण परिवार को अलग-अलग शहरों और सैन्य छावनियों में रहना पड़ा। इसी वजह से नेहा का बचपन देश के अलग-अलग शहरों में बीता।

कहां से की 10वीं और 12वीं की पढ़ाई?

हमारे सहयोगी ‘News18 हिंदी’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नेहा बोरा ने अपनी 10वीं और 12वीं की पढ़ाई पश्चिम बंगाल से पूरी की। रिपोर्ट्स के अनुसार, स्कूल के दिनों में ही उनकी रुचि सामाजिक और राजनीतिक विचारों में बढ़ने लगी थी। इसी दौरान उन्होंने कम्युनिस्ट एवं क्रांतिकारी विचारक चारू मजूमदार, कवि पाब्लो नेरुदा और लेखिका अरुंधति रॉय के विचारों तथा लेखन में दिलचस्पी ली।

बताया जाता है कि उनके शुरुआती वैचारिक अनुभवों ने सामाजिक मुद्दों और राजनीति के प्रति उनकी समझ विकसित करने में भूमिका निभाई।

DU से ग्रेजुएशन, अंबेडकर यूनिवर्सिटी से मास्टर्स

नेहा बोरा ने देश की राजधानी में दिल्ली यूनिवर्सिटी (DU) से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉ. बी.आर. अंबेडकर यूनिवर्सिटी दिल्ली से परफॉर्मेंस स्टडीज में मास्टर डिग्री हासिल की। परफॉर्मेंस स्टडीज में थिएटर, कला, अभिव्यक्ति और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों का स्टडी किया जाता है। नेहा की परफॉर्मेंस स्टडीज में थिएटर और सामाजिक विषयों की अहम भूमिका रही है।

JNU में थिएटर और परफॉर्मेंस स्टडीज में कर रहीं PhD

ग्रेजुएशन और मास्टर्स के बाद नेहा बोरा ने जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में एडमिशन लिया। वह फिलहाल JNU के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स में थिएटर एंड परफॉर्मेंस स्टडीज विषय में PhD कर रही हैं। वह अभी यूनिवर्सिटी में डॉक्टोरल स्कॉलर हैं। इस तरह उनकी शैक्षणिक यात्रा दिल्ली विश्वविद्यालय से शुरू होकर अंबेडकर यूनिवर्सिटी और फिर जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी तक पहुंची। पढ़ाई के साथ-साथ वह सामाजिक गतिविधियों और छात्र राजनीति में भी लगातार एक्टिव रहीं।

थिएटर से भी जुड़ी रही हैं नेहा

नेहा बोरा की पहचान केवल एक छात्र नेता के तौर पर नहीं है। वह लंबे समय तक थिएटर से भी जुड़ी रही हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उन्होंने दिल्ली के स्ट्रीट थिएटर समूह ‘संगवारी’ के साथ काम किया है। स्ट्रीट थिएटर के माध्यम से सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों को आम लोगों तक पहुंचाया जाता है। इस तरह की गतिविधियों में भागीदारी नेहा के लिए सामाजिक सवालों पर संवाद करने और अपनी बात लोगों तक पहुंचाने का एक माध्यम रही।

CAA विरोध-प्रदर्शन के दौरान बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

नेहा बोरा की छात्र राजनीति में सक्रियता 2019-20 के नागरिकता संशोधन कानून (CAA) विरोधी प्रदर्शनों के दौरान तेजी से बढ़ी। उस समय देश के कई यूनिवर्सिटी में नागरिकता कानून को लेकर विरोध-प्रदर्शन हो रहे थे। इसी दौर में नेहा की सामाजिक मुद्दों, कैंपस चर्चाओं और थिएटर से जुड़ी गतिविधियों में भागीदारी के साथ छात्र राजनीति में सक्रियता भी बढ़ी। बाद में वह वामपंथी छात्र संगठन ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) से जुड़ गईं। AISA एजुकेशन, छात्र अधिकारों और सामाजिक न्याय जैसे मुद्दों पर अभियान चलाने वाला छात्र संगठन है। नेहा आगे चलकर इस संगठन की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनीं।

प्रदर्शन के बाद फिर चर्चा में क्यों आईं?

दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के बाद नेहा बोरा एक बार फिर चर्चा में आ गई हैं। प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद उनकी एजुकेशन और छात्र राजनीति में भूमिका को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है। नेहा की यात्रा में उच्च शिक्षा, थिएटर और छात्र आंदोलनों के तीन प्रमुख पहलू दिखाई देते हैं। उत्तराखंड से निकलकर दिल्ली के विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और फिर छात्र संगठन के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंचने का उनका सफर अब सार्वजनिक चर्चा का विषय बना हुआ है।

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12 लाख का पैकेज, फिर भी वीकेंड पर चलाते हैं रैपिडो! कमाई जान हो जाएंगे हैरान

Viral Post: अगर आप हर महीने एक लाख से ज्यादा कमाते हो और फिर वीकेंड पर आप अपने एंटरटेरमेंट के लिए रैपिडो चलाए…सुनने में ये आपको थोड़ा अजीब लगेगा पर पुणे से एक ऐसी ही कहानी सामने आई है। पुणे में रहने वाले एक सॉफ्टवेयर डेवलपर ने सोशल मीडिया पर अपने दो रूममेट्स से जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया है। उसने बताया कि उसके दोनों रूममेट सालाना 12 लाख रुपये से ज्यादा कमाते हैं, लेकिन इसके बावजूद उन्होंने वीकेंड पर रैपिडो बाइक टैक्सी चलाने का फैसला किया है।

खास बात ये है कि वे ऐसा पैसे कमाने की जरूरत के लिए नहीं, बल्कि अपने खाली समय में कुछ नया करने और शौक के लिए कर रहे हैं। उनके इस फैसले ने सोशल मीडिया पर एक अलग बहस छेड़ दी है।

सोशल मीडिया पर किया पोस्ट

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए सॉफ्टवेयर डेवलपर ने लिखा कि उसके दो रूममेट हैं, जो हर साल 12 लाख रुपये से ज्यादा कमाते हैं। इसके बावजूद, पिछले सप्ताहांत दोनों ने रैपिडो बाइक टैक्सी चलाने के लिए पजिस्ट्रेशन कराया और सिर्फ शौक के लिए कुछ यात्रियों को उनकी मंजिल तक पहुंचाया। दोनों के पास स्पोर्ट्स बाइक हैं। इस दौरान एक ने 900 रुपये कमाए, जबकि दूसरे की कमाई 500 रुपये रही। डेवलपर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि जब कोई महीने में एक लाख रुपये कमाता हो और फिर भी ऐसा करे, तो समझिए कि लड़के अपने शौक के लिए कुछ भी कर सकते हैं।

 

900-500 रुपए कमाए

पोस्ट के मुताबिक, दोनों रूममेट के पास स्पोर्ट्स बाइक हैं और रैपिडो चलाकर एक ने 900 रुपये, जबकि दूसरे ने 500 रुपये कमाए। इस घटना से पता चलता है कि कुछ लोग सिर्फ पैसे कमाने के लिए नहीं, बल्कि नए अनुभव हासिल करने और मनोरंजन के लिए भी अलग-अलग काम करना पसंद करते हैं। दोनों इंजीनियरों के लिए वीकेंड पर बाइक टैक्सी चलाना भी कुछ ऐसा ही अनुभव रहा। उनका यह कदम अतिरिक्त कमाई से ज्यादा कुछ नया आजमाने और खाली समय को मजेदार बनाने की कोशिश नजर आता है।

यूजर्स ने किया कमेंट

इस पोस्ट के सामने आने के बाद से ही सोशल मीडिया पर लोगों के बीच इसकी खूब चर्चा हो रही है। पुरुषों की दोस्ती, अचानक बनाए गए प्लान और सिर्फ मजे के लिए कुछ अलग करने के उनके अंदाज ने लोगों का ध्यान खींचा है। यह किस्सा दिखाता है कि कई बार दोस्त मिलकर ऐसे काम भी कर जाते हैं, जिनका मकसद कमाई नहीं, बल्कि साथ में अच्छा समय बिताना और नई चीजों का अनुभव लेना होता है। वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, “मैंने भी नए लोगों से मिलने और उनसे जान-पहचान बढ़ाने के लिए ऐसा करने के बारे में सोचा था।”

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पूर्व बांग्लादेशी एडवाइजर यूनुस को लोगों ने आतंकवादी कहा:न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर घेरा; सरकार बोली- विरोध करने वालों पर कार्रवाई करेंगे

बांग्लादेश के पूर्व चीफ एडवाइजर मोहम्मद यूनुस को अमेरिका के न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर विरोध का सामना करना पड़ा। एयरपोर्ट पर मौजूद कुछ लोगों ने उन्हें घेर लिया और ‘आतंकवादी’ कहा। लोगों ने उन पर बांग्लादेश में हत्याएं कराने और लोकतंत्र को बर्बाद करने के आरोप लगाए। उन्होंने यूनुस से कहा कि तुम यहां क्यों आए हो, वापस जाओ। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग यूनुस के खिलाफ नारे लगाते और उन पर सवाल उठाते नजर आ रहे हैं। हालात को देखते हुए यूनुस और उनकी सहयोगी लामिया मोर्शेद को एयरपोर्ट के अंदर वापस ले जाया गया। प्रदर्शनकारियों ने हजारों लोगों की मौत का आरोप लगाया प्रदर्शनकारियों ने यूनुस पर हजारों पुलिसकर्मियों की मौत के लिए जिम्मेदार होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह दावा भी किया कि बांग्लादेश में करीब 2 लाख लोगों को गिरफ्तार किया गया है। विरोध करने वालों की पहचान नहीं हुई है। बांग्लादेश के एक मीडिया संस्थान ने उन्हें पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग का समर्थक बताया है। घटना पर यूनुस या उनके प्रतिनिधियों की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया नहीं आई। सरकार बोली- विरोध करने वालों पर कार्रवाई करेंगे बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सूचना एवं कम्युनिकेशन सलाहकार जाहेद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि यूनुस का सामना करने वाले लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि किन कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी। यूनुस के कार्यकाल में हिंसा और गिरफ्तारियों पर उठे सवाल शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद 8 अगस्त 2024 को यूनुस ने अंतरिम सरकार की कमान संभाली थी। उनके कार्यकाल में बांग्लादेश में हिंसा रोकने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने को लेकर सवाल उठे। इस दौरान हिंदू समुदाय और उनके धार्मिक स्थलों पर हमलों, लोगों की गिरफ्तारी और हिरासत में मौतों की खबरें भी सामने आईं। अवामी लीग ने आरोप लगाया था कि उसके नेताओं और समर्थकों को निशाना बनाया गया। मानवाधिकार संगठनों ने इन मामलों की जांच और जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग की थी। खसरे से 1170 बच्चों की मौतों पर भी घिरे यूनुस बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप से बच्चों की मौतों को लेकर भी यूनुस की अंतरिम सरकार की आलोचना हुई। रिपोर्ट के मुताबिक, इस बीमारी से 1,170 बच्चों की मौत हुई है। यूनिसेफ ने मई 2026 में कहा था कि उसने वैक्सीन की खरीद में देरी को लेकर अंतरिम सरकार को कम से कम 10 बार चेतावनी दी थी। इसके बाद भी सरकार ने यूनिसेफ के जरिए वैक्सीन खरीदने के बजाय खुली टेंडर प्रक्रिया अपनाई। इस प्रक्रिया में देरी के बीच वैक्सीन का स्टॉक खत्म हो गया। इसके बाद बीमारी का प्रकोप बढ़ गया। हालांकि, इस मामले में सरकार की जिम्मेदारी को लेकर जांच के निष्कर्ष अलग से देखे जाने चाहिए। हसीना की सरकार गिरने के बाद डेढ़ साल सत्ता में रहे यूनुस अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद यूनुस ने अंतरिम सरकार का नेतृत्व किया। उनकी सरकार करीब डेढ़ साल तक सत्ता में रही। 2025 में बांग्लादेश के एक विशेष ट्रिब्यूनल ने शेख हसीना की गैरमौजूदगी में मुकदमा चलाया और उन्हें मौत की सजा सुनाई। यूनुस की सरकार ने अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाया और भारत से हसीना को बांग्लादेश भेजने की मांग की।

Muhammad Yunus Video: ‘तुम आतंकी हो, बांग्लादेश में हजारों लोगों को मारा…’; न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर बेइज्जत हुए मोहम्मद यूनुस, देखें नारेबाजी का वीडियो

Muhammad Yunus Video: बांग्लादेश की अंतरिम सरकार के पूर्व मुख्य सलाहकार और नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को सोमवार (12 अक्टूबर) को अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित जॉन एफ. कैनेडी (JFK) इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर भारी विरोध का सामना करना पड़ा। बांग्लादेशी मूल के कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर तीखे सवाल पूछे और उन पर गंभीर आरोप लगाए। इस दौरान लोगों ने उन्हें आतंकवादी तक बता दिया। उनके खिलाफ हुए इस नारेबाजी का वीडियो जमकर वायरल हो रहा है।

सोशल मीडिया पर सामने आए एक वीडियो में कुछ लोग यूनुस को ‘आतंकवादी’ कहते हुए सुनाई दे रहे हैं। प्रदर्शनकारियों ने उन पर बांग्लादेश में लोगों की मौत और लोकतंत्र को कमजोर करने के आरोप भी लगाए। इस घटना के बाद बांग्लादेश की राजनीति में एक बार फिर यूनुस की अंतरिम सरकार के कार्यकाल, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। दूसरी ओर बांग्लादेश के प्रधानमंत्री के सूचना एवं संचार सलाहकार जाहेद उर रहमान ने मंगलवार को कहा कि यूनुस का सामना करने वाले लोगों के खिलाफ ढाका कानूनी कार्रवाई करेगा।

‘तुम आतंकवादी हो, बांग्लादेश में लोगों को मारा’

सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक व्यक्ति मोहम्मद यूनुस से कहता सुनाई देता है, “तुम आतंकवादी हो। तुमने बांग्लादेश में लोगों को मारा है। यहां क्यों आए हो? हमें बताओ, यहां क्यों आए हो?” कुछ अन्य लोग भी बांग्लादेश सरकार के पूर्व मुख्य सलाहकार के खिलाफ नारेबाजी करते दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों ने उन्हें वापस जाने के लिए भी कहा। आरोप लगाने वाले लोगों ने दावा किया कि बांग्लादेश में हजारों लोगों की जान गई और बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया गया।

व्हीलचेयर पर एयरपोर्ट से बाहर जा रहे थे यूनुस

बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस दोहा से कतर एयरवेज की फ्लाइट के जरिए न्यूयॉर्क पहुंचे थे। बताया गया कि एयरपोर्ट के टर्मिनल-8 पर पहुंचने के बाद जब उन्हें व्हीलचेयर पर बाहर ले जाया जा रहा था, तभी कुछ लोगों ने उन्हें घेरकर सवाल पूछने शुरू कर दिए।

बिगड़ते हालात को देखते हुए सुरक्षा कर्मियों ने यूनुस को वहां से सुरक्षित निकालने की कोशिश की। ढाका के अखबार ‘डेली सन’ ने एयरपोर्ट पर मौजूद लोगों के हवाले से बताया कि विरोध के दौरान यूनुस और उनके साथ मौजूद सहयोगी लामिया मोर्शेद तेजी से वापस एयरपोर्ट के अंदर चले गए।

शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से विवादों में रहा अंतरिम सरकार का कार्यकाल

बांग्लादेश में अगस्त 2024 में पूर्व पीएम शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद मोहम्मद यूनुस ने अंतरिम सरकार के मुख्य सलाहकार की जिम्मेदारी संभाली थी। उनका कार्यकाल राजनीतिक उथल-पुथल, हिंसा, कानून-व्यवस्था और मानवाधिकारों से जुड़े सवालों के बीच गुजरा। यूनुस की अंतरिम सरकार को लेकर उनके राजनीतिक विरोधियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन हिंसक घटनाओं को रोकने और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में नाकाम रहा।

अवामी लीग से जुड़े नेताओं और समर्थकों ने भी दावा किया कि अंतरिम प्रशासन के दौरान पार्टी के सदस्यों और उससे जुड़े लोगों को निशाना बनाया गया। यूनुस सरकार के कार्यकाल में मानवाधिकारों और अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठे। हिंदू समुदाय और धार्मिक स्थलों पर कथित हमलों, मनमानी गिरफ्तारियों, हिरासत में मौतों तथा राजनीतिक समर्थकों के साथ व्यवहार को लेकर चिंताएं जताई गईं।

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आलोचकों ने सरकार से हिंसा की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की। वहीं, इन मामलों में किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने के लिए संबंधित घटनाओं की जांच, विश्वसनीय रिपोर्टों और उपलब्ध साक्ष्यों को ध्यान में रखना जरूरी है। प्रदर्शनकारियों ने बांग्लादेश में पुलिसकर्मियों की मौत और बड़ी संख्या में गिरफ्तारियों का मुद्दा भी उठाया। यूनुस सरकार के कार्यकाल में जुलाई-अगस्त 2024 के आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और उससे जुड़े मामलों को लेकर राजनीतिक विवाद बना रहा।

Sword Raas Video: एक हाथ से ड्राइव करती जीप, दूसरे हाथ से भांजती तलवार… क्षत्रिय राजपूत महिलाओं का ये तलवार रास हो गया वायरल

नवरात्रि में गरबा और डांडिया की रौनक तो आपने खूब देखी होगी, लेकिन गुजरात में उत्सव का एक ऐसा नजारा भी देखने को मिला, जिसने लोगों का ध्यान खींच लिया। यहां महिलाएं हाथों में तलवार लेकर मैदान में उतरीं और अपनी पारंपरिक कला का प्रदर्शन किया। राजकोट और जामनगर में राजपूत समाज की महिलाओं ने तलवार रास के जरिए वीरता और संस्कृति की अनूठी झलक पेश की। पारंपरिक पोशाक, हाथों में चमचमाती तलवारें और आत्मविश्वास से भरी महिलाओं का अंदाज इस आयोजन को खास बनाता है।

यह प्रदर्शन केवल मनोरंजन तक सीमित नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही परंपरा को सहेजने की कोशिश भी है। खास बात यह है कि इस कला को सीखने के लिए महिलाओं को बाकायदा प्रशिक्षण दिया जाता है और नवरात्रि से पहले लंबे समय तक अभ्यास कराया जाता है।

गरबा के साथ दिखा वीरता और परंपरा का संगम

गुजरात में नवरात्रि का नाम आते ही गरबा और डांडिया की तस्वीर सामने आती है। हालांकि, राजकोट में होने वाला तलवार रास इस उत्सव को एक अलग पहचान देता है। यहां महिलाएं तलवारों के साथ पारंपरिक दांव-पेच और करतब दिखाती हैं। राजकोट पैलेस के ऐतिहासिक मैदान में क्षत्रिय समाज की महिलाएं इस प्रस्तुति के जरिए अपनी परंपरा को आगे बढ़ा रही हैं। आयोजकों से जुड़ी जानकारी के अनुसार, यह कार्यक्रम पिछले करीब 18 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। इसका उद्देश्य प्राचीन गरबा और रास संस्कृति को सहेजकर अगली पीढ़ी तक पहुंचाना है।

तलवार चलाना नहीं जानने वाली महिलाओं को भी मिलती है ट्रेनिंग

इस आयोजन की खास बात यह है कि इसमें भाग लेने के लिए पहले से तलवार चलाना आना जरूरी नहीं है। कार्यक्रम से जुड़ी एक महिला ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि संस्था में महिलाओं को बारीकी से प्रशिक्षण दिया जाता है। उन्होंने कहा कि जब दूर-दूर से लोग इस अनोखी प्रस्तुति को देखने पहुंचते हैं, तो उन्हें गर्व महसूस होता है। इस परंपरा को आगे बढ़ाने के लिए महिलाओं ने काफी मेहनत की है। प्रशिक्षण के दौरान उन महिलाओं को भी सिखाया जाता है, जिन्हें पहले तलवार चलाने का अनुभव नहीं होता।

डेढ़ महीने पहले से शुरू हो जाती है तैयारी

इस कार्यक्रम से करीब 15 वर्षों से जुड़ी एक वरिष्ठ सदस्य ने बताया कि तलवार रास में क्षत्रिय समाज की महिलाएं विशेष रूप से हिस्सा लेती हैं। उनके मुताबिक, नवरात्रि शुरू होने से लगभग डेढ़ महीने पहले ही अभ्यास शुरू हो जाता है। पैलेस ग्राउंड में होने वाली इस प्रस्तुति में तलवार के अलग-अलग दांव और स्टंट दिखाए जाते हैं। लगातार अभ्यास के जरिए महिलाएं अपने प्रदर्शन को तैयार करती हैं।

परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने की कोशिश

राजकोट और जामनगर में महिलाओं का यह प्रदर्शन नवरात्रि के पारंपरिक उत्सव में एक अलग रंग जोड़ता है। जहां गरबा और डांडिया भक्ति और सामूहिक उल्लास का प्रतीक हैं, वहीं तलवार रास के जरिए महिलाएं अपनी सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक युद्ध-कला से जुड़ी परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास कर रही हैं।

Zoho में इस साल सैलरी हाइक नहीं करने का ऐलान कर इसके फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने मांगी माफी, खस्ता हालत की वजह भी बताई

Zoho में इस साल सैलरी हाइक नहीं करने का ऐलान कर इसके फाउंडर श्रीधर वेम्बू ने मांगी माफी, खस्ता हालत की वजह भी बताई

नौकरी करने वाले लोगों के लिए सालाना सैलरी हाइक का इंतजार काफी अहम होता है। बढ़ती महंगाई के बीच वेतन में होने वाली बढ़ोतरी से घर का बजट संभालने में मदद मिलती है। लेकिन सॉफ्टवेयर कंपनी Zoho के कर्मचारियों को इस साल निराशा का सामना करना पड़ सकता है। कंपनी के संस्थापक श्रीधर वेम्बू ने बताया है कि इस साल कर्मचारियों की सैलरी में सामान्य सालाना बढ़ोतरी नहीं की जाएगी। इसके पीछे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े बढ़ते खर्च, सर्वर की महंगी कीमतें और वैश्विक कारोबारी अनिश्चितता जैसे कारण हैं। हालांकि, उन्होंने कर्मचारियों को यह भरोसा भी दिया है कि कंपनी बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की पूरी कोशिश करेगी।

Zoho कर्मचारियों को इस साल नहीं मिलेगा सालाना इंक्रीमेंट

श्रीधर वेम्बू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट के जरिए कंपनी की मौजूदा स्थिति साझा की। उन्होंने बताया कि सॉफ्टवेयर इंडस्ट्री का भविष्य फिलहाल अनिश्चित बना हुआ है और AI के बढ़ते इस्तेमाल से कंपनियों का खर्च काफी बढ़ गया है। इसी दबाव के चलते Zoho ने इस साल कर्मचारियों की सामान्य वेतन वृद्धि रोकने का फैसला किया है। वेम्बू ने स्वीकार किया कि यह फैसला लेना आसान नहीं था। उन्होंने कर्मचारियों से माफी भी मांगी कि वह इस साल सैलरी हाइक को जारी नहीं रख सके।

AI के कारण चार गुना बढ़ी सर्वर की कीमतें

कंपनी के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक डेटा सेंटर के लिए जरूरी सर्वर की बढ़ती लागत है। वेम्बू के मुताबिक, सर्वर की कीमतें चार गुना तक बढ़ गई हैं। इसके अलावा, AI टूल्स का इस्तेमाल तेजी से बढ़ने के कारण कंपनी के परिचालन खर्च में भी इजाफा हुआ है। इन बढ़ते खर्चों को नियंत्रित करने के लिए Zoho ने अपने मार्केटिंग बजट में कटौती की है। वैश्विक भू-राजनीतिक परिस्थितियों ने भी कारोबारी माहौल को चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

बड़े पैमाने पर छंटनी से बचने की कोशिश

सैलरी हाइक रोकने के फैसले के बीच कर्मचारियों के लिए राहत की बात यह है कि कंपनी फिलहाल बड़े पैमाने पर छंटनी से बचना चाहती है। वेम्बू ने कहा कि कंपनी कर्मचारियों की बड़े स्तर पर नौकरी जाने की स्थिति से बचने के लिए पूरी मेहनत करेगी।

हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि सॉफ्टवेयर क्षेत्र में नौकरियों का भविष्य चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहा है। उनके मुताबिक, Zoho ने पिछले 18 महीनों से अपने कर्मचारियों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं की है। इससे कंपनी में भर्ती की रफ्तार धीमी रहने का संकेत मिलता है।

अगले 3 से 5 साल Zoho के लिए अहम

वेम्बू ने बताया कि कंपनी इस समय खुद को नए कारोबारी माहौल के अनुरूप ढालने की प्रक्रिया में है। अगले तीन से पांच साल यह तय करने में महत्वपूर्ण होंगे कि कंपनी का बदलाव कितना सफल रहता है।

उन्होंने कर्मचारियों के सहयोग के लिए आभार भी जताया। उनके मुताबिक, ज्यादातर कर्मचारी कंपनी की स्थिति को समझ रहे हैं। यह फैसला ऐसे समय में आया है, जब तकनीकी कंपनियां AI में निवेश बढ़ाने के साथ अपने खर्चों पर नियंत्रण रखने की चुनौती का सामना कर रही हैं।

भूकंप के मलबे में फोटोशूट करवाने वाली ये मॉडल इंटरनेट पर हो गईं वायरल, कौन हैं ग्रेसी बोन?

भूकंप के मलबे में फोटोशूट करवाने वाली ये मॉडल इंटरनेट पर हो गईं वायरल, कौन हैं ग्रेसी बोन?

सोशल मीडिया पर कभी-कभी कुछ तस्वीरें ऐसी सामने आती हैं, जो लोगों का ध्यान खींचने के साथ विवाद भी खड़ा कर देती हैं। इन दिनों मॉडल ग्रेसी बोन (Gracie Bon) अपनी कुछ तस्वीरों को लेकर चर्चा में हैं। भूकंप से प्रभावित इलाके में मलबे के बीच उनकी तस्वीरें वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई। कुछ लोगों ने उनके फोटोशूट के तरीके पर सवाल उठाए, तो ग्रेसी ने वीडियो जारी कर अपनी सफाई दी। आखिर कौन हैं ग्रेसी बोन और उनकी तस्वीरों को लेकर इतना विवाद क्यों हो रहा है? आइए जानते हैं।

मलबे के बीच तस्वीरें शेयर कर चर्चा में आईं ग्रेसी बोन

पिछले हफ्ते आए 7.7 तीव्रता के भूकंप ने भारी तबाही मचाई थी। इस प्राकृतिक आपदा के बाद कई जगहों पर इमारतों और घरों को नुकसान पहुंचा। इसी बीच ग्रेसी बोन ने रविवार को भूकंप प्रभावित इलाके की कुछ तस्वीरें सोशल मीडिया पर शेयर कीं। इनमें वह मलबे के बीच पोज देती नजर आईं।

तस्वीरों के साथ उन्होंने अपने देश के हालात पर दुख जताया। ग्रेसी ने लिखा कि भौतिक चीजों को दोबारा हासिल किया जा सकता है, लेकिन जिंदगी अनमोल है। उन्होंने लोगों से वर्तमान के लिए आभारी रहने और जरूरतमंदों की मदद करने की अपील भी की।

आखिर कौन हैं ग्रेसी बोन?

ग्रेसी बोन एक मॉडल और सोशल मीडिया पर्सनैलिटी हैं, जो अपनी तस्वीरों और सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए लोगों का ध्यान खींचती हैं। इस बार उनकी चर्चा किसी फैशन शूट के कारण नहीं, बल्कि भूकंप से प्रभावित इलाके में खिंचवाई गई तस्वीरों की वजह से हो रही है।

उनकी पोस्ट सामने आने के बाद कई यूजर्स ने सवाल उठाया कि प्राकृतिक आपदा से प्रभावित जगह पर इस तरह पोज देकर तस्वीरें शेयर करना कितना सही है। कुछ लोगों को उनका यह अंदाज असंवेदनशील लगा, क्योंकि भूकंप से प्रभावित परिवार उस समय मुश्किलों का सामना कर रहे थे।

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वायरल तस्वीरों पर ग्रेसी बोन ने क्या कहा?

आलोचनाओं के बीच ग्रेसी ने एक वीडियो साझा कर अपनी बात रखी। उन्होंने बताया कि वह प्रभावित इलाके में केवल तस्वीरें खिंचवाने नहीं गई थीं, बल्कि परिवारों को जरूरी सामान देने और उनकी जिंदगी दोबारा पटरी पर लाने में मदद करना चाहती थीं।

ग्रेसी के मुताबिक, तस्वीरें साझा करने का उद्देश्य लोगों का ध्यान प्रभावित परिवारों की ओर खींचना और अपने फॉलोअर्स को मदद के लिए प्रेरित करना था। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनका मकसद आपदा की गंभीरता को नजरअंदाज करना नहीं था।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

ग्रेसी बोन की तस्वीरों को लेकर इंटरनेट पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ यूजर्स ने उनके फोटोशूट के तरीके की आलोचना की, जबकि उनकी सफाई के मुताबिक, वह प्रभावित लोगों की मदद के लिए जागरूकता फैलाना चाहती थीं।

देश की प्रोटेस्ट पोस्टर गर्ल बनीं नेहा बोरा खुद कितना पढ़ी-लिखी हैं? उनकी JNU में आने तक की एजुकेशन जर्नी कुछ ऐसी है

चुनाव हारकर भी तेलंगाना के मंत्री बने मोहम्मद अजहरुद्दीन ने मांगा ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा (Video)

भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान और वर्तमान में तेलंगाना राज्य में कांग्रेस के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री ने भी केंद्रीय पार्टी लाइन पकड़ते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांगा है और S.I.R (Special Intensive revision) को धोखाधड़ी बताया है।यह बातचीत उन्होंने प्रदर्शन के दौरान कही जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

गौरतलब है कि 3 साल पहले मोहम्मद अजहरुद्दीन तेलंगाना में घरेलू पिच पर भी नहीं जीत सके। तेलंगाना की हाई प्रोफाइल जुबली हिल्स सीट पर  उनकी स्थिती मजबूत मानी जा रही थी। लेकिन वह इस सीट पर तब हार गए जब पूरे राज्य में कॉंग्रेस की आँधी चल रही थी।हार के बाद भी कांग्रेस आलाकमान ने मशहूर  और मुस्लिम चेहरा होने के कारण अल्पसंख्यक मंत्रालय थमा दिया।

कांग्रेस की आंधी में भी चुनाव हारे अजहर

इस सीट पर भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान मोहम्मद अजहरुद्दीन को कुल 26 राउंड की वोटिंग के बाद  62,343 वोट मिले। वहीं भारत राष्ट्र समिति के प्रतिद्वंदी मगांथी गोपीनाथ को 78282 वोट मिले थे। इस कारण मोहम्मद अजहरुद्दीन 15,939 वोटों से हार गए थे। तीसरे स्थान पर भारतीय जनता पार्टी के लंकाला दीपक रेड्डी रहे थे जिन्हें कुल 25,083 वोट हासिल हुए थे। साल 2018 में भी मगांथी गोपीनाथ की इस सीट पर जीत हुई थी लेकिन मोहम्मद अजहरुद्दीन को जीत का दावेदार बताया जा रहा था।

साल 2009 में कॉंग्रेस पार्टी से अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले मोहम्मद अजहरुद्दीन ने इस ही साल लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश की मुरादाबद सीट पर जीत अर्जित की थी।इसके बाद साल 2014 में वह राजस्थान के टोंक सवाई माधोपुर से लोकसभा चुनाव में  उतरे थे लेकिन यहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था। भारतीय जनता पार्टी के  प्रत्याशी सुखबीर सिंह जौनपुरिया ने उनको मात दी थी।

शानदार करियर का फिक्सिंग के आरोप ने किया अंत

भारतीय क्रिकेट के दिग्गज खिलाड़ियों में से एक अजहर ने भारत का 99 टेस्टों और 334 वनडे में प्रतिनिधित्व किया था। वह 1992, 1996 और 1999 के विश्व कप में भारत के कप्तान रहे थे।अजहर ने अपने करियर में 99 टेस्टों में 22 शतकों की मदद से 6215 रन और 334 वनडे में 7 शतकों की मदद से 9378 रन बनाए थे। वह भारत के सफल कप्तानों में शुमार थे। उन्होंने 47 टेस्टों में भारत का नेतृत्व किया और 14 मैच जीते जबकि वनडे में उन्होंने 174 मैचों में भारत का नेतृत्व किया और 90 मैच जीते।

अपने शानदार करियर के दौरान अजहर का नाम मैच फिक्सिंग में आया था जिसके बाद बीसीसीआई ने उनपर आजीवन प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि 2012 में आंध्र प्रदेश उच्च न्यायालय ने उनपर लगा प्रतिबंध हटा दिया।

SBI ETF: आज से खुला SBI का नया डिफेंस ETF, जानिए NFO, निवेश राशि और जोखिम की पूरी डिटेल

SBI BSE India Defence ETF: डिफेंस सेक्टर में निवेश की बढ़ती दिलचस्पी के बीच एसबीआई म्यूचुअल फंड ने अपने नए इंडेक्स-ट्रैकिंग फंड ‘SBI BSE India Defence ETF’ के लॉन्च की घोषणा की है। इस NFO में निवेश की शुरुआत आज, 13 अक्टूबर 2026 से हो चुकी है और निवेशक 19 अक्टूबर 2026 तक इसमें सब्स्क्रिप्शन के लिए आवेदन कर सकते हैं।

यह एक ओपन-एंडेड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF) है, जो मुख्य रूप से BSE India Defence Index को ट्रैक करेगा और ट्रैकिंग एरर के अधीन रहते हुए इंडेक्स के समान टोटल रिटर्न देने का लक्ष्य रखेगा।

कैसा होगा एसेट एलोकेशन?

एसबीआई म्यूचुअल फंड द्वारा जारी स्कीम इंफॉर्मेशन डॉक्यूमेंट के मुताबिक, फंड का एसेट एलोकेशन इस प्रकार रहेगा:

95% से 100% हिस्सा: बीएसई इंडिया डिफेंस इंडेक्स में शामिल रक्षा क्षेत्र की कंपनियों के सिक्योरिटीज/शेयरों में निवेश किया जाएगा।

0% से 5% हिस्सा: सरकारी प्रतिभूतियों, स्टेट डेवलपमेंट लोन्स, ट्रेजरी बिल्स, ट्राई-पार्टी रेपो और लिक्विड म्यूचुअल फंड यूनिट्स में लगाया जाएगा।

निवेश की शर्तें और फंड मैनेजर

यह एक पैसिवली मैनेज्ड फंड है। इसमें फंड मैनेजर एक्टिवली स्टॉक सिलेक्शन करने के बजाय सीधे इंडेक्स की कंपनियों में आनुपातिक निवेश करेगा। इस स्कीम के फंड मैनेजर वायरल छड़वा है। वे दिसंबर 2020 से एसबीआई म्यूचुअल फंड से जुड़े हुए हैं और कई पैसिव स्कीम्स की देखरेख करते हैं।

एक ही सेक्टर में केंद्रित होने के कारण इस फंड का रिस्क मीटर ‘वेरी हाई’ श्रेणी में रखा गया है। निवेशकों पर रक्षा क्षेत्र और संबंधित कंपनियों के शेयर उतार-चढ़ाव का सीधा असर पड़ेगा।

NFO की मुख्य बातें

पैरामीटर विवरण
फंड का नाम SBI BSE India Defence ETF
स्कीम का प्रकारओपन-एंडेड एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ETF)
अंडरलाइंग इंडेक्सBSE India Defence Index
एनएफओ की तारीख13 अक्टूबर 2026 से 19 अक्टूबर 2026
ऑफर प्राइस₹10.00 प्रति यूनिट
न्यूनतम निवेश₹5,000 (इसके बाद ₹1,000 के गुणक में)
फंड मैनेजरवायरल छड़वा
रिस्क रेटिंगवेरी हाई

निवेशकों के लिए क्या है खास?

अगर आप डिफेंस क्षेत्र की कंपनियों के प्रदर्शन का सीधा फायदा उठाना चाहते हैं और किसी एक शेयर में जोखिम लेने के बजाय पूरे इंडेक्स में डायवर्सिफाइड निवेश की तलाश में हैं, तो यह ETF एक विकल्प हो सकता है। वैसे चूंकि यह एक थीमैटिक/सेक्टोरल फंड है, इसलिए इसमें सामान्य डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड्स की तुलना में जोखिम अधिक रहता है।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Viral Video: न भारत, न गुजरात… पाकिस्तान में दिखा नवरात्रि का ऐसा नजारा, वीडियो देख खुश हो जाएंगे आप

भारत में नवरात्रि के दौरान गरबा, पूजा और माता रानी के जयकारों से माहौल भक्तिमय हो जाता है। लेकिन क्या आपने कभी पाकिस्तान में नवरात्रि का ऐसा नजारा देखा है? सोशल मीडिया पर कराची के एक मंदिर का वीडियो चर्चा में है, जहां हिंदू श्रद्धालु माता रानी की भक्ति में डूबे नजर आ रहे हैं। कोई गरबा कर रहा है, तो कोई प्रसाद बांटकर त्योहार की खुशियां साझा कर रहा है। इस वीडियो को देखकर भारत के कई सोशल मीडिया यूजर्स भी अपनी भावनाएं जाहिर कर रहे हैं। खास बात यह है कि सरहद के उस पार मनाए जा रहे इस त्योहार की झलक लोगों को धार्मिक आस्था और आपसी जुड़ाव का खूबसूरत संदेश देती नजर आ रही है।

कराची के मंदिर में गरबा करते दिखे श्रद्धालु

इंस्टाग्राम यूजर @munji_galhiyun ने यह वीडियो साझा किया है। इसमें पाकिस्तान के कराची स्थित श्री रत्नेश्वर महादेव मंदिर में नवरात्रि उत्सव की झलक दिखाई गई है। वीडियो पर लिखा है, “Navratri Day: 1: Shiv Mandir, Karachi Pakistan।”

वीडियो की शुरुआत में महिला कहती है, “This is not India, this is Pakistan Navratri।” इसके बाद मंदिर परिसर में गरबा करते श्रद्धालु दिखाई देते हैं। कहीं लोग भक्ति संगीत पर झूम रहे हैं, तो कहीं एक साथ प्रसाद ग्रहण करते नजर आ रहे हैं। माता रानी की प्रतिमा और ‘जय माता दी’ लिखे हेडबैंड पहने भक्तों की तस्वीरें भी इस वीडियो को खास बनाती हैं।

नौ दिनों तक चलती हैं नवरात्रि की रौनक

इंस्टाग्राम पर साझा की गई जानकारी के अनुसार, मंदिर में नवरात्रि का उत्सव नौ दिनों तक चलता है। इस दौरान पूजा-पाठ, पारंपरिक गरबा और सामूहिक कार्यक्रमों के जरिए श्रद्धालु त्योहार मनाते हैं। महिला ने एक अन्य वीडियो में यह भी बताया कि मुस्लिम लड़के अपने परिवार के साथ इन कार्यक्रमों में आ सकते हैं। उसने इसकी वजह लड़कियों की सुरक्षा बताई। उसके अनुसार, उत्सव का समय रात 8 बजे से मध्यरात्रि तक रहता है।

वीडियो देखकर भारतीय यूजर्स ने जताई खुशी

वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी चर्चा में हैं। कई यूजर्स ने पाकिस्तान में हिंदू समुदाय को नवरात्रि मनाते देखकर खुशी जताई, जबकि कुछ ने भविष्य में इन समारोहों में शामिल होने की इच्छा जाहिर की।

एक यूजर ने लिखा, “भगवान आप सभी को आशीर्वाद दें। भारत से ढेर सारा प्यार और प्रार्थनाएं।” वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि वह भी नवरात्रि में उनके साथ शामिल होना चाहता है और ‘जय माता दी’ कहकर शुभकामनाएं दीं।

एक अन्य यूजर ने हैरानी जताते हुए पूछा कि क्या यह सच है। वहीं, किसी ने लिखा कि यह वीडियो देखकर उसका दिन बन गया।

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भारत-पाकिस्तान के बीच त्योहार साथ मनाने की उम्मीद

कुछ लोगों ने इस वीडियो को दोनों पड़ोसी देशों के बीच बेहतर रिश्तों की उम्मीद से भी जोड़ा। एक यूजर ने इच्छा जताई कि काश किसी दिन भारत और पाकिस्तान के लोग मिलकर त्योहार मना सकें।कराची के मंदिर में नवरात्रि की यह झलक दिखाती है कि धार्मिक परंपराएं और त्योहार लोगों के जीवन में कितनी अहम जगह रखते हैं। सोशल मीडिया पर वायरल यह वीडियो इसी वजह से लोगों का ध्यान खींच रहा है और सरहद के दोनों ओर रहने वाले लोगों के बीच भावनात्मक जुड़ाव की चर्चा को आगे बढ़ा रहा है।

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