ग्वालियर में एक शख्स ने रील पर व्यूज पाने के लिए कार पर 3400 किस के निशान बनवा दिए। ‘किसिंग कार’ का वीडियो वायरल होने के बाद रील पर 55 लाख व्यूज मिले। हालांकि पुलिस ने रीलबाज की खुमारी उतार दी।
बिना किसी फैमिली बैकग्राउंड, बिना किसी बड़े सपोर्ट और बिना किसी मार्केटिंग टीम के एक 16 साल के लड़के ने कुछ अपना अलग खड़ा करने का सपना देखा और उसे पूरा कर दिखाया। मध्य प्रदेश के जबलपुर के रहने वाले महेंद्र ने बेलवारो नाम से अपना एक यूनिक शर्ट ब्रांड लॉन्च किया है। सोशल मीडिया पर जब इस युवा एंटरप्रेन्योर का खुद अपनी शर्ट्स बेचने और कॉन्फिडेंस के साथ लोगों से कनेक्ट करने का वीडियो वायरल हुआ तो उसने लाखों लोगों का दिल जीत लिया।
डिजिटल क्रिएटर के पास पहुंचा 16 साल का महेंद्र
हमारी सहयोगी न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, महेंद्र की कहानी तब सामने आई जब वह एक कपड़े के ब्रांड के मालिक और डिजिटल क्रिएटर शुभम शिवहरे के स्टूडियो के बाहर पहुंचा। महेंद्र ने बेझिझक शुभम से संपर्क किया और सीधे अपनी बात रखी। उसने शुभम से कहा कि उसने अपना खुद का शर्ट ब्रांड बनाया है और वह अपनी शर्ट्स बेचना चाहता है। इसके बाद दोनों के बीच बातचीत शुरू हुई।
8000 रुपये की शर्ट और ब्रांडिंग का अनोखा गणित
बातचीत के दौरान महेंद्र ने शुभम को अपने ब्रांड बेलवारो का प्रमोशन वीडियो दिखाया। खास बात यह है कि इस 16 साल के लड़के ने अपने ब्रांड का लोगो, पैकेजिंग और सोशल मीडिया अकाउंट सब कुछ खुद ही तैयार किया है। जब शुभम ने उससे एक शर्ट की कीमत पूछी तो महेंद्र ने बताया कि वह एक शर्ट 8000 रुपये में बेच रहा है।
शर्ट की इतनी ज्यादा कीमत सुनकर शुभम हैरान रह गए और उन्होंने पूछा कि यह इतनी महंगी क्यों है? इस पर महेंद्र ने बहुत ही आत्मविश्वास से जवाब दिया कि एक शर्ट को बनाने की लागत लगभग 3000 रुपये आती है जबकि बाकी का खर्च ब्रांडिंग का है। महज 16 साल की उम्र में अपने प्रोडक्ट और बिजनेस को खड़ा करने के लिए महेंद्र की लगन और उसका आत्मविश्वास अब चर्चा का विषय बना हुआ है। पर असल कहानी सिर्फ इतनी नहीं है।
पिता का साया नहीं, मां भी नहीं करतीं काम
पहले वीडियो के वायरल होने के बाद शुभम ने दोबारा महेंद्र से मुलाकात की और उसकी निजी जिंदगी की कहानी लोगों के साथ शेयर की। महेंद्र ने बताया कि उसके सिर पर पिता का साया नहीं है। वह अपनी मां, दो छोटे भाइयों और एक बहन के साथ रहता है। उसकी मां फिलहाल कोई काम नहीं करती हैं। बिना किसी आर्थिक मदद और बिना किसी बिजनेस कनेक्शन के वह अकेले ही अपने ब्रांड को प्रमोट करने की कोशिश में जुटा है।
शुभम ने इंस्टाग्राम पर उसकी कहानी शेयर करते हुए लिखा कि 16 साल की उम्र में जब ज्यादातर बच्चे अपने भविष्य के बारे में सोचना शुरू ही करते हैं तब महेंद्र अपना भविष्य खुद बनाने की कोशिश कर रहा है। उसके पास संसाधन भले कम हैं लेकिन सपने बहुत बड़े हैं।
सोशल मीडिया पर मिली तारीफ और लोगों ने बढ़ाए मदद के हाथ
सोशल मीडिया पर महेंद्र के इस जज्बे और हिम्मत की जमकर सराहना हो रही है। इंटरनेट यूज़र्स उसकी कड़ी मेहनत और लगन देखकर काफी प्रभावित है। कई लोग उसके ब्रांड की मदद के लिए भी आगे आए हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि यही असली Gen Z है जिसका भारत को इंतजार है। वहीं एक दूसरे यूजर ने कहा कि ऐसे ही बच्चे बड़े होकर बिड़ला और टाटा जैसे बड़े ब्रांड बनाते हैं।
शर्ट की क्वॉलिटी पर कमेंट करते हुए एक यूजर ने लिखा कि शर्ट देखने में काफी अच्छी लग रही है, इसकी लाइनिंग, मटीरियल और कॉलर काफी प्रीमियम दिख रहे हैं।
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Tukaram Mundhe News मुंबई समेत पूरे महाराष्ट्र में इन दिनों खाने-पीने की दुकानों और रेस्टोरेंट संचालकों के बीच एक नाम चर्चा में है तुकाराम मुंढे…। महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) कमिश्नर के तौर पर 51 वर्षीय मुंढे ने देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में खाद्य सुरक्षा और साफ-सफाई को लेकर ऐसा अभियान शुरू किया है, जिसकी तस्वीरें और कार्रवाई सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही हैं।
कमिश्नर का पद संभालने के बाद से FDA खाद्य सुरक्षा और अन्य नियमों का उल्लंघन करने वाले कई चर्चित प्रतिष्ठानों के खिलाफ अभियान चला रहा है। हाल ही में चलाए गए एक विशेष अभियान के तहत FDA ने राज्य भर में सैकड़ों होटलों, रेस्तरां और ढाबों एक्शन लिया था।
मुंढे के नेतृत्व में खाद्य सुरक्षा विभाग ने पिछले कुछ हफ्तों में Domino’s के चार और Pizza Hut के एक आउटलेट के फूड परमिट निलंबित किए हैं। मई में महाराष्ट्र के खाद्य सुरक्षा प्रमुख का पद संभालने के बाद से उनकी टीम 3,000 से ज्यादा छापे और निरीक्षण कर चुकी है।
इन कार्रवाइयों में बड़े ब्रांडों के साथ-साथ क्रिकेट क्लब, होटल, मशहूर रेस्टोरेंट, छोटे ढाबों और सड़क किनारे खाने की दुकानों को भी जांच के दायरे में रखा गया है। मुंढे का साफ संदेश है कि जो भी खाद्य कारोबारी नियमों का पालन नहीं करेगा, उसके खिलाफ नियामक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां मामला सिर्फ नियमों का नहीं, बल्कि लोगों की जिंदगी से जुड़ा हुआ है।
जज ने पूछा- कोर्ट की कैंटीन की जांच हुई?
मुंढे की कार्रवाई तब और चर्चा में आ गई जब मुंबई की एक अदालत के जज ने सवाल उठाया कि क्या खाद्य विभाग निजी दुकानों के खिलाफ ही सख्ती कर रहा है। क्या अदालत की कैंटीनों की भी जांच की गई है? मुंढे की टीम ने इस सवाल का जवाब घंटों के भीतर कार्रवाई से दिया।
अधिकारियों ने अदालत परिसर की कैंटीनों का निरीक्षण किया। इस दौरान कुछ ऐसी कैंटीनों को बंद कराया जो कथित तौर पर बिना लाइसेंस चल रही थीं। इस घटना ने यह संदेश दिया कि विभाग बड़े ब्रांड और छोटे कारोबारियों के साथ-साथ सरकारी या संस्थागत परिसरों में चलने वाले खाद्य प्रतिष्ठानों को भी जांच के दायरे में रख रहा है।
हर दिन वायरल हो रही छापेमारी की तस्वीरें
मुंढे की कार्रवाई की सबसे खास बात उसका सार्वजनिक असर है। छापों के बाद खाद्य विभाग की ओर से जारी तस्वीरों में कई जगहों पर गंदी दीवारें, कॉकरोच, चूहे और एक्सपायर्ड खाद्य सामग्री दिखाई दी। इन तस्वीरों ने सोशल मीडिया पर लोगों को हैरान कर दिया। कई लोगों का कहना है कि वर्षों से खराब साफ-सफाई और खाद्य गुणवत्ता को यह कहकर सामान्य मान लिया गया था कि भारत में ऐसा होता है।
अब मुंढे की कार्रवाई से लोगों को उम्मीद दिखाई दे रही है कि खाद्य सुरक्षा के नियम वास्तव में लागू किए जा सकते हैं। कंज्यूमर कंसल्टिंग फर्म ‘The Knowledge Company’ के पार्टनर अंकुर बिसेन के मुताबिक, लोगों में लंबे समय से दबा हुआ गुस्सा है। ऐसे में मुंढे की कार्रवाई ने उसे आवाज दी है।
खाने में रंग से लेकर तेल बदलने तक, दुकानदारों में डर
मुंबई में न्यूज एजेंसी Reuters ने 25 स्ट्रीट वेंडर्स और रेस्टोरेंट का दौरा किया। रिपोर्ट के मुताबिक, मुंढे की कार्रवाई का असर छोटे कारोबारियों के काम करने के तरीके पर भी दिखाई दे रहा है। एक दुकानदार ने चीनी व्यंजनों में इस्तेमाल होने वाले खतरनाक लाल रंग की जगह प्राकृतिक लाल मिर्च का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। एक अन्य दुकानदार ने अपना तलने वाला तेल दिन में तीन बार बदलना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों के लिए दस्ताने और सिर ढकने वाली कैप पहनना भी अनिवार्य किया गया है।
मुंबई के फेमस वड़ा पाव पर भी कार्रवाई
मुंबई का मशहूर वड़ा पाव भी मुंढे की खाद्य सुरक्षा मुहिम से बच नहीं पाया है। जून में खाद्य विभाग ने वड़ा पाव समेत खाने की चीजों को पैक करने के लिए अखबार के इस्तेमाल पर रोक लगा दी। मुंबई में लंबे समय से सड़क किनारे खाने की चीजों को अखबार में लपेटकर देने का चलन रहा है। अब कई जगहों पर साफ बटर पेपर का इस्तेमाल किया जा रहा है। 14 वर्षीय सुप्रिया वागले को अपने पसंदीदा वड़ा पाव की साफ बटर पेपर में पैकिंग पसंद आई। उसका कहना है कि इससे उसे राहत महसूस होती है और वह स्ट्रीट फूड को लेकर ज्यादा भरोसा कर पा रही है।
Domino’s और Pizza Hut के बाद McDonald’s पर भी एक्शन
मुंढे की टीम ने कई बड़े ब्रांडों के आउटलेट पर भी कार्रवाई की है। Domino’s के चार और Pizza Hut के एक आउटलेट के परमिट निलंबित किए गए हैं। इसके बाद एक McDonald’s आउटलेट पर भी कार्रवाई हुई। विभाग के मुताबिक, निरीक्षण के दौरान वहां जिंदा कीट यानी कॉकरोच और सड़ा हुआ खाना मिला।
हालांकि, Reuters के सवालों पर संबंधित तीनों कंपनियों की ओर से तत्काल प्रतिक्रिया नहीं दी गई। मुंढे की कार्रवाई केवल बड़े अंतरराष्ट्रीय ब्रांडों तक सीमित नहीं रही। विभाग ने मुंबई के एक ब्रिटिश दौर के क्रिकेट क्लब, करीब 70 साल पुराने आइसक्रीम पार्लर और 110 साल पुराने पारसी डेयरी के खिलाफ भी कार्रवाई की है।
कारोबारी बोले- सुधार का समय तो दिया जाए
मुंढे की लोकप्रियता बढ़ने के साथ उनकी कार्यशैली पर सवाल भी उठ रहे हैं। कुछ कारोबारियों का कहना है कि उन्हें नियमों का पालन करने और कमियों को सुधारने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। कुछ प्रतिष्ठानों ने हाई कोर्ट का रुख करते हुए खाद्य विभाग पर कथित तौर पर जरूरत से ज्यादा सख्ती करने का आरोप लगाया है।
एक मामले में अदालत ने विभाग पर 5 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत के अनुसार, संबंधित खाने के प्रतिष्ठान ने अपनी कमियों में सुधार कर लिया था, इसके बावजूद उसका परमिट निलंबित रखा गया था। मुंढे ने कहा कि अदालत की टिप्पणियों को गंभीरता से लिया जाता है। जहां सुधार की गुंजाइश होती है, वहां विभाग सुधार करता है।
हर साल एक लाख से ज्यादा सैंपल की जांच
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2020 से हर साल भारत में खाद्य निरीक्षकों ने एक लाख से ज्यादा सैंपल की जांच की है। इनमें करीब 20 प्रतिशत नमूने असुरक्षित, घटिया या सही लेबलिंग के बिना पाए गए। पिछले तीन वर्षों में करीब 8,000 खाद्य कारोबार लाइसेंस रद्द किए गए हैं। ऐसे आंकड़ों के बीच मुंबई में मुंढे की कार्रवाई को लोग सिर्फ एक अधिकारी की सख्ती के रूप में नहीं। बल्कि खाद्य सुरक्षा को लेकर लंबे समय से चली आ रही समस्या पर बड़े अभियान के रूप में देख रहे हैं।
21 साल की नौकरी में कई बार हुआ तबादला
तुकाराम मुंढे का सख्त प्रशासनिक रवैया नया नहीं है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी के तौर पर करीब 21 साल के करियर में उनका कई बार तबादला हो चुका है। 2018 के एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था कि उनका लगभग हर साल तबादला हो जाता है।
उन्होंने रिश्वत लेने से इनकार करने और प्रशासनिक कार्रवाई से नहीं डरने की बात भी सार्वजनिक रूप से कही है। अब खाद्य सुरक्षा विभाग में उनकी शैली एक बार फिर सुर्खियों में है। लेकिन इस बार सोशल मीडिया पर वायरल होती छापेमारी की तस्वीरों के कारण।
सेलिब्रिटी जैसी लोकप्रियता, लेकिन मुंढे बोले- मैं सेलिब्रिटी नहीं
मुंढे की लोकप्रियता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि पिछले सप्ताह नई दिल्ली में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान लोग उनके साथ सेल्फी लेने के लिए पहुंच गए। लोग उनसे हाथ मिलाने की कोशिश करते नजर आए। एक फैंस ने तो यहां तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को मुंढे को राष्ट्रीय स्तर की जिम्मेदारी देनी चाहिए। हालांकि, मुंढे खुद इस लोकप्रियता को सेलिब्रिटी का दर्जा देने से इनकार करते हैं।
उन्होंने Reuters से बातचीत में कहा, “मुझे नहीं लगता कि मैं कोई सेलिब्रिटी हूं। मैं सिर्फ फूड सेफ्टी कमिश्नर हूं।” मुंढे का अभियान अब मुंबई से आगे भी चर्चा का विषय बन चुका है। उनके सामने चुनौती सिर्फ छापे मारना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कार्रवाई के बाद खाद्य कारोबारियों में साफ-सफाई और सुरक्षा के नियमों का पालन लंबे समय तक बना रहे।
Viral Video: उत्तरी इटली के फोर्ली एयरपोर्ट पर 21 अगस्त को तेज तूफानी हवाओं ने रनवे पर खड़े छोटे विमानों को बुरी तरह हिला दिया। वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि हल्के प्रोपेलर विमान गीले रनवे पर धीरे-धीरे खिसकते, घूमते और झुकते नजर आ रहे हैं।

ICMR's major statement on swine flu : देश में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के किसी नए और खतरनाक वेरिएंट के फैलने की आशंका के बीच भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने स्थिति स्पष्ट की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में H1N1 का कोई नया वेरिएंट सामने नहीं आया है। फिलहाल देश में फैल रहा इन्फ्लूएंजा-A यानी H1N1 pdm09 वायरस पहले से मौजूद स्ट्रेन का ही हिस्सा है। स्वाइन फ्लू की अफवाहों के बीच आईसीएमआर की यह रिपोर्ट देश के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि यह वायरस साल 2025 से ही देश में बना हुआ है, इसलिए किसी को भी डरने की कोई जरूरत नहीं है।
देश में स्वाइन फ्लू यानी H1N1 के किसी नए और खतरनाक वेरिएंट के फैलने की आशंका के बीच भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) के वैज्ञानिकों ने स्थिति स्पष्ट की है। वैज्ञानिकों के मुताबिक, भारत में H1N1 का कोई नया वेरिएंट सामने नहीं आया है। फिलहाल देश में फैल रहा इन्फ्लूएंजा-A यानी H1N1 pdm09 वायरस पहले से मौजूद स्ट्रेन का ही हिस्सा है।
स्वाइन फ्लू की अफवाहों के बीच आईसीएमआर की यह रिपोर्ट देश के लिए बड़ी राहत लेकर आई है। आईसीएमआर के वैज्ञानिकों ने अपनी रिपोर्ट में साफ कर दिया है कि यह वायरस साल 2025 से ही देश में बना हुआ है, इसलिए किसी को भी डरने की कोई जरूरत नहीं है।
वैज्ञानिकों के मुताबिक, वर्तमान वायरस मौसमी फ्लू वैक्सीन में शामिल वायरस से मेल खाता है। लेकिन बच्चों और बुजुर्गों में लक्षण बिगड़ने पर थोड़ी सी लापरवाही भी भारी पड़ सकती है। इन लोगों में बीमारी की वजह से परेशानी थोड़ी बढ़ सकती है। अगर किसी के लक्षण 3-4 दिन में ठीक न हों, या सांस लेने में तकलीफ जैसी दिक्कत होने लगे, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए। H1N1 के लक्षण आम मौसमी फ्लू जैसे हो सकते हैं। इनमें बुखार, खांसी, सिरदर्द, बदन दर्द और थकान शामिल हैं।
यहां बढ़ रहे स्वाइन फ्लू के मामले
दिल्ली में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों ने चिंता बढ़ा दी है। राजधानी में इन्फ्लूएंजा ए के 2392 मामले सामने आ चुके हैं। इनमें 1,777 मामले एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू के हैं। मामलों को देखते हुए दिल्ली सरकार ने अस्पतालों और स्वास्थ्य अधिकारियों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। सरकार का कहना है कि अस्पतालों में इलाज के लिए डॉक्टर, बेड और दवाइयां पर्याप्त हैं। स्वास्थ्य विभाग पूरे मामले पर नजर रख रहा है।
छत्तीसगढ़ में स्वाइन फ्लू के मामले बढ़ने लगे हैं। अब तक 38 मरीजों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा 25 मरीज रायपुर के हैं। रायपुर में मिले मरीजों में आधे से अधिक अभी एक्टिव हैं। इसके अलावा बिलासपुर, दुर्ग, बलौदाबाजार, बस्तर, बेमेतरा और रायगढ़ में भी मरीज मिले हैं। इसे लेकर अब स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट है।
मध्य प्रदेश में स्वाइन फ्लू का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। उज्जैन में एच-1एन-1 संक्रमण से ग्रस्त महिला की मौत के बाद अब प्रदेशभर से स्वाइन फ्लू के मरीज सामने आने लगे हैं। बीते 5 दिनों के आंकड़ों पर गौर करें तो इंदौर और उज्जैन में स्वाइन फ्लू के 4 मामले सामने आए थे, जबकि सिर्फ शनिवार को ही अलग-अलग शहरों से 3 संकर्मितों की पुष्टि हुई है।
गौरतलब है कि स्वाइन फ्लू (H1N1) एक संक्रामक वायरल बीमारी है जो सांस के जरिए, खांसने या छींकने से फैलती है। इसके मुख्य लक्षणों में तेज बुखार, खांसी, गले में खराश, बदन दर्द और थकान शामिल हैं। सही समय पर आराम, तरल पदार्थों के सेवन और डॉक्टर की सलाह से यह ठीक हो जाता है।
सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने रेलवे की संपत्ति को लेकर लोगों का ध्यान खींच लिया है। वीडियो में तीन लोग बाजार में सफेद चादर को शॉल की तरह ओढ़े नजर आ रहे हैं। खास बात यह है कि चादर पर साफ-साफ “WESTERN RAILWAY” लिखा दिखाई दे रहा है। इसी वजह से वीडियो देखते ही लोगों के मन में सवाल उठने लगे कि रेलवे की पहचान वाली ये चादरें आखिर बाजार तक कैसे पहुंचीं। वीडियो को सोशल मीडिया पर शेयर करते हुए दावा किया गया कि ये चादरें रेलवे से चोरी की गई थीं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
वायरल क्लिप के बाद लोगों ने रेलवे की संपत्ति के इस्तेमाल, यात्रियों की जिम्मेदारी और सार्वजनिक सामान की सुरक्षा को लेकर बहस शुरू कर दी। मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि रेलवे में बेडशीट, कंबल और अन्य लिनेन के गायब होने की समस्या पहले भी सामने आती रही है।
कैमरा घूमते ही दिखी रेलवे की पहचान
वीडियो को X पर @GemsOfRailway नाम के अकाउंट से शेयर किया गया है। फुटेज में तीनों लोग एक दुकान के बाहर नजर आते हैं और उनके शरीर पर सफेद रेलवे लिनेन लिपटा हुआ दिखाई देता है। वीडियो रिकॉर्ड करने वाला व्यक्ति दावा करता सुनाई देता है कि इन लोगों ने Western Railway की चादरें चुराई हैं और अब उन्हें ओढ़कर बाजार में घूम रहे हैं। हालांकि, वीडियो में सिर्फ चादर पर रेलवे की मार्किंग दिखाई देती है; इन लोगों ने वास्तव में चादर चोरी की थी या नहीं, इसकी स्वतंत्र पुष्टि पोस्ट से नहीं होती।
Three men spotted in a market openly wearing Indian Railways bedsheets as shawls.
The white linen clearly bears the “WESTERN RAILWAY” marking. these bedsheets were stolen from a Western Railway train.
According to RTI data compiled across railway divisions, from January 2022 to… pic.twitter.com/IsEKca87v8
— Gems Of Railway (@GemsOfRailway) August 22, 2026
‘रेलवे की चादर’ बनी सोशल मीडिया की चर्चा
वीडियो के साथ किए गए पोस्ट में दावा किया गया कि चादरें Western Railway की ट्रेन से चोरी की गई थीं। इसी दावे के बाद लोगों का ध्यान रेलवे में लिनेन की कथित चोरी की समस्या की ओर भी गया। पोस्ट में RTI के आधार पर जनवरी 2022 से मई 2026 के बीच AC कोचों से बेडरोल आइटम गायब होने के आंकड़ों का भी जिक्र किया गया।
करोड़ों रुपये के लिनेन का नुकसान?
पोस्ट में साझा आंकड़ों के मुताबिक, इस अवधि में अलग-अलग रेलवे डिवीजनों से 1.27 करोड़ से ज्यादा बेडरोल आइटम चोरी होने की बात कही गई है। इनमें करीब 46.54 लाख फेस टॉवल, 41.13 लाख बेडशीट, 23.59 लाख पिलो कवर, 12.95 लाख कंबल और 2.76 लाख तकिए शामिल बताए गए हैं। दावे के मुताबिक, इन सामानों की कुल कीमत ₹104.51 करोड़ से ज्यादा बताई गई है। ये आंकड़े पोस्ट में RTI डेटा के हवाले से दिए गए हैं।
लोगों ने कहा- ‘रेलवे को फैशन ब्रांड बना दिया’
वीडियो वायरल होते ही सोशल मीडिया यूजर्स ने अपने अंदाज में प्रतिक्रियाएं देनी शुरू कर दीं। कुछ लोगों ने इसे रेलवे की संपत्ति के प्रति लापरवाही बताया, तो कुछ ने मजाकिया अंदाज में कहा कि चादर को ऐसे पहना गया है जैसे वह किसी फैशन ब्रांड का हिस्सा हो। एक यूजर ने मजाक करते हुए लिखा कि लोग “WESTERN RAILWAY” को ऐसे पहन रहे हैं जैसे कोई फैशन लेबल हो। वहीं कई अन्य लोगों ने नागरिक जिम्मेदारी और सार्वजनिक संपत्ति के सम्मान का मुद्दा उठाया।
असली सवाल सिर्फ चादर का नहीं
इस वायरल वीडियो ने एक दिलचस्प सवाल जरूर खड़ा किया है अगर सार्वजनिक संपत्ति लोगों के निजी इस्तेमाल में पहुंच रही है, तो इसके लिए जिम्मेदारी किसकी है? रेलवे में यात्रियों को दी जाने वाली चादरें और दूसरे लिनेन सार्वजनिक सुविधा का हिस्सा हैं। इनके गायब होने से सीधे तौर पर रेलवे के खर्च और यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर असर पड़ सकता है। फिलहाल वायरल वीडियो में दिख रहे लोगों और चादरों को लेकर लगाए गए चोरी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि सामने नहीं आई है। ऐसे में वीडियो को लेकर सोशल मीडिया की प्रतिक्रियाओं को दावे और आरोप के तौर पर ही देखा जाना चाहिए, जब तक संबंधित अधिकारियों की ओर से इसकी पुष्टि न हो।
आज के दौर में बेहतर सैलरी, जल्दी प्रमोशन और नई चुनौतियों के लिए नौकरी बदलना काफी सामान्य हो गया है। कई प्रोफेशनल्स मानते हैं कि हर कुछ साल में कंपनी बदलने से करियर तेजी से आगे बढ़ता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। अगर कोई कंपनी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हो और वहां कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां, सीखने के अवसर और आगे बढ़ने के मौके मिलते रहें, तो लंबे समय तक उसी संगठन के साथ बने रहना भी समझदारी भरा फैसला हो सकता है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी कंपनी के बिजनेस और कामकाज को गहराई से समझने के साथ-साथ धीरे-धीरे बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार होता है।
समय के साथ अनुभव, नेटवर्क और संगठन का भरोसा भी मजबूत होता है। GAIL में 20 साल पूरे करने वाले राकेश शाही का करियर इसी पहलू की एक दिलचस्प मिसाल पेश करता है, जहां लंबें समय तक काम करना लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों और पेशेवर विकास के साथ आगे बढ़ा।
वायरल पोस्ट
GAIL (India) Limited में 20 साल पूरे करने वाले राकेश शाही की LinkedIn पोस्ट इसी पहलू को सामने लाती है। जून 2026 में अपने दो दशक पूरे होने पर उन्होंने Executive Trainee से Deputy General Manager तक के सफर को याद किया। उनकी कहानी बताती है कि सही माहौल मिलने पर कंपनी की ग्रोथ के साथ कर्मचारी का करियर भी लगातार आगे बढ़ सकता है।
एक कंपनी में लंबे समय तक काम करने के फायदे
लंबे समय तक एक ही कंपनी में काम करने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि कर्मचारी संगठन के कामकाज और बिजनेस को गहराई से समझने लगता है। समय के साथ उसे ज्यादा जिम्मेदारियां और बड़े प्रोजेक्ट संभालने का मौका मिल सकता है।
राकेश शाही ने अपने करियर के दौरान Project Management, Gas Marketing, Business Development, Pipeline Infrastructure, Policy, Regulation और Compliance जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया। इससे उनकी विशेषज्ञता सिर्फ एक भूमिका तक सीमित नहीं रही।
प्रमोशन के साथ बढ़ती जिम्मेदारी
अगर कंपनी अपने कर्मचारियों की क्षमता को पहचानती है, तो लंबा कार्यकाल Leadership Roles तक पहुंचने का रास्ता भी खोल सकता है। Executive Trainee से DGM तक का सफर इसका उदाहरण है।
हालांकि सिर्फ लंबे समय तक कंपनी में बने रहना प्रमोशन की गारंटी नहीं है। असली फायदा तब होता है, जब संगठन performance को महत्व देता हो और कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां लेने के अवसर देता हो।
Deputation और नए अनुभव का फायदा
राकेश शाही के करियर में PNGRB में deputation भी एक अहम पड़ाव रहा। वहां उन्हें regulatory framework, authorisation, consumer affairs और natural gas sector से जुड़े विषयों पर काम करने का मौका मिला। ऐसे अवसर कर्मचारी के अनुभव को व्यापक बनाते हैं। बड़ी कंपनियों में लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को अलग-अलग विभागों, प्रोजेक्ट्स और संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिल सकता है।
कब कंपनी के साथ बने रहना चाहिए?
हर कर्मचारी के लिए यह सवाल अहम है कि उसे मौजूदा कंपनी में बने रहना चाहिए या नई नौकरी तलाशनी चाहिए। अगर आपको नए प्रोजेक्ट्स और जिम्मेदारियां मिल रही हैं, नई स्किल्स सीखने का मौका है और आपके प्रदर्शन के आधार पर प्रमोशन या अप्रेजल हो रहा है, तो कंपनी में बने रहना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा कंपनी का बिजनेस मजबूत होना, सीनियर्स का सपोर्ट मिलना और अच्छा वर्क कल्चर भी महत्वपूर्ण संकेत हैं।
कब समझें कि नौकरी बदलने का समय आ गया है?
दूसरी तरफ, अगर कई सालों से आपका काम एक जैसा है और सीखने के मौके खत्म हो चुके हैं, तो बदलाव के बारे में सोचना चाहिए। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद प्रमोशन या उचित अप्रेजल न मिलना भी संकेत हो सकता है। अगर कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है, भविष्य की संभावनाएं कमजोर हैं या वर्क कल्चर लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है, तो दूसरे अवसर तलाशना बेहतर हो सकता है।
लंबा करियर तभी फायदेमंद जब ग्रोथ जारी रहे
राकेश शाही की कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि लंबे समय तक एक कंपनी में रहना तभी फायदेमंद है, जब आपकी ग्रोथ भी साथ-साथ हो रही हो। सिर्फ वर्षों की संख्या बढ़ाना करियर की सफलता नहीं है। अगर कंपनी आगे बढ़ रही है, आपको सीखने और जिम्मेदारी लेने के अवसर मिल रहे हैं और आपकी मेहनत को पहचान मिल रही है, तो बार-बार नौकरी बदलने के बजाय उसी संगठन के साथ आगे बढ़ना एक मजबूत करियर रणनीति हो सकती है।
डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।
ड्रेस पर नहीं, Margaret Qualley के पैरों पर अटक गई सबकी नजर, आखिर क्या खास था इस अजीब सैंडल में?
उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में मिठाई की दुकान पर हुई एक जांच का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर खूब चर्चा बटोर रहा है। वजह जांच में मिले किसी सैंपल की रिपोर्ट नहीं, बल्कि दुकानदार का एक ऐसा रिएक्शन है, जिसने पूरे मामले को दिलचस्प बना दिया। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम जब दुकान पर पहुंची और मिठाइयों की गुणवत्ता जांचने लगी, तो वहां कुछ ऐसा हुआ जिसने सबका ध्यान खींच लिया। बताया जा रहा है कि अधिकारी ने दुकानदार से उसी दुकान की मिठाई चखने को कहा, लेकिन उसने मिठाई खाने के बजाय हाथ जोड़कर इनकार कर दिया।
कैमरे में कैद यह छोटा सा पल देखते ही देखते सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। अब लोग इस घटना को लेकर तरह-तरह के सवाल उठा रहे हैं। हालांकि, मिठाई की गुणवत्ता को लेकर अंतिम तस्वीर जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी।
अधिकारी ने मिठाई चखने को कहा, दुकानदार पीछे हट गया
बताया जा रहा है कि खाद्य विभाग की टीम शिकायतों के बाद इलाके की मिठाई दुकानों की जांच कर रही थी। इसी दौरान एक दुकान पर अधिकारी ने मिठाई उठाई और दुकानदार को उसे चखने के लिए दिया। लेकिन दुकानदार ने मिठाई खाने के बजाय हाथ जोड़कर साफ तौर पर इनकार कर दिया और पीछे हट गया। उसका यह अंदाज कैमरे में रिकॉर्ड हो गया, जिसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया।
अपनी ही मिठाई से दूरी ने खड़े किए सवाल
मामले में सबसे ज्यादा चर्चा इसी बात की हो रही है कि जिस मिठाई को दुकानदार ग्राहकों को बेच रहा था, उसी का एक टुकड़ा खाने से उसने मना क्यों किया। हालांकि, दुकानदार के इनकार को मिठाई की गुणवत्ता पर अंतिम सबूत नहीं माना जा सकता। इसकी वास्तविक स्थिति जांच के बाद आने वाली लैब रिपोर्ट से ही स्पष्ट होगी।
शिकायत के बाद पहुंची थी जांच टीम
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमीरपुर में मिलावटी और कथित तौर पर घटिया मिठाइयों की बिक्री को लेकर शिकायतें मिली थीं। इसके बाद एसडीएम के नेतृत्व में खाद्य विभाग के अधिकारियों और पुलिसकर्मियों की टीम ने इलाके में जांच अभियान चलाया। टीम ने दुकान पर मौजूद मिठाइयों की जांच की और जरूरी सैंपल भी लिए।
मिठाइयों के सैंपल भेजे गए जांच के लिए
जांच के दौरान अधिकारियों ने मिठाइयों के नमूने एकत्र किए, जिन्हें लैब में परीक्षण के लिए भेजा गया है। इन रिपोर्ट्स से पता चलेगा कि मिठाइयां तय खाद्य सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती हैं या नहीं।अधिकारियों ने गुणवत्ता को लेकर उठे सवालों के बीच संबंधित मिठाइयों को हटाने के निर्देश भी दिए।
During a food department raid at a sweet shop in Hamirpur, UP, the shop owner reportedly refused to eat a sweet from his own shop when a cop offered it to him. pic.twitter.com/9IRBIWvRin
— Ghar Ke Kalesh (@gharkekalesh) August 21, 2026
वीडियो पर सोशल मीडिया में छिड़ी चर्चा
दुकानदार का मिठाई चखने से इनकार करना वीडियो का सबसे चर्चित हिस्सा बन गया। कई यूजर्स ने इसी दृश्य को लेकर सवाल उठाए और अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दीं। हालांकि, लैब रिपोर्ट आने तक मिठाई को मिलावटी या असुरक्षित घोषित करना सही नहीं होगा। फिलहाल मामला जांच के दायरे में है और असली तस्वीर रिपोर्ट सामने आने के बाद ही साफ होगी।
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अच्छी नौकरी, बड़ा पैकेज और तेजी से बढ़ती सैलरी आज के दौर में इन्हें सफलता की पहचान माना जाता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुई एक कहानी ने इस सोच पर सवाल खड़ा कर दिया है। कहानी एक ऐसे सॉफ्टवेयर इंजीनियर की है, जिसकी सालाना कमाई करीब ₹5-6 लाख है, लेकिन उसकी जिंदगी में वह चीज मौजूद है जिसे कई ज्यादा कमाने वाले लोग अब भी तलाश रहे हैं सुकून और अपने समय पर नियंत्रण।
कॉलेज के दोस्त से मॉल में हुई अचानक मुलाकात
X पर पूजा नाम की यूजर ने अपने पुराने कॉलेज क्लासमेट की कहानी साझा की। ग्रेजुएशन के करीब 4-5 साल बाद दोनों की अचानक एक मॉल में मुलाकात हुई। बातचीत के बाद पूजा को उसके दोस्त की जिंदगी के बारे में कई ऐसी बातें पता चलीं, जिन्होंने उसे अपनी ही जिंदगी पर दोबारा सोचने के लिए मजबूर कर दिया।
वह एक छोटी कंपनी में सॉफ्टवेयर इंजीनियर के तौर पर काम करता है और करीब ₹5-6 लाख सालाना कमाता है। कागज पर उसका करियर शायद बहुत चमकदार न लगे, लेकिन उसकी जिंदगी काफी व्यवस्थित और संतुलित नजर आती है।
कम कमाई में पहले घर का सपना पूरा किया
उस दोस्त ने कम आय के दौर में ही सरकारी आवास योजना के जरिए अपना घर खरीद लिया था। अब उसका होम लोन अगले साल तक खत्म होने की उम्मीद है। परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत बनाने में उसकी पत्नी की नौकरी भी अहम भूमिका निभाती है, जो सरकारी स्कूल में शिक्षिका हैं। यानी बड़े पैकेज की दौड़ में शामिल होने के बजाय उसने कम जरूरतों के साथ स्थिर जिंदगी बनाने पर ध्यान दिया।
न महंगी कार, न दिखावे की जिंदगी
इस कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू उसका लाइफस्टाइल है। वह रोजमर्रा के सफर के लिए मुख्य रूप से सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करता है। पढ़ने के लिए स्थानीय लाइब्रेरी की सदस्यता ले रखी है और परिवार के इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों की किफायती स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाता है। जहां आज कई लोग अपनी कमाई बढ़ने के साथ खर्च और इच्छाएं भी बढ़ाते जाते हैं, वहीं उसने अपनी जरूरतों को सीमित रखना चुना।
होम लोन खत्म होते ही नौकरी छोड़ने का प्लान
कहानी का सबसे चौंकाने वाला हिस्सा उसका भविष्य का प्लान है। होम लोन खत्म होने के बाद वह एक छोटी सी स्थानीय किराना दुकान खोलना चाहता है और सॉफ्टवेयर की नौकरी छोड़ने का मन बना चुका है। उसका सपना करोड़ों की संपत्ति बनाना या बड़ी कॉर्पोरेट पोस्ट हासिल करना नहीं है। वह ऐसी जिंदगी चाहता है, जिसमें उसके पास अपने समय पर ज्यादा अधिकार हो।
ज्यादा कमाने के बावजूद पूजा को क्यों हुआ पछतावा?
अपने दोस्त की जिंदगी देखकर पूजा ने अपनी स्थिति की भी तुलना की। उसने बताया कि वह उससे ज्यादा कमाती है, लेकिन कॉर्पोरेट नौकरी के साथ ऑफिस पॉलिटिक्स, मैनेजर, लगातार डेडलाइन और काम के दबाव जैसी परेशानियां भी जुड़ी हैं। यहीं से सवाल उठता है अगर ज्यादा कमाई के बदले लगातार तनाव और समय की कमी मिल रही हो, तो क्या वह जिंदगी वास्तव में ज्यादा समृद्ध है?
असली अमीरी शायद बैंक बैलेंस से आगे है
इस वायरल कहानी ने सोशल मीडिया पर वित्तीय स्वतंत्रता की एक अलग तस्वीर सामने रखी है। जरूरी नहीं कि आर्थिक आजादी का मतलब करोड़ों रुपये की संपत्ति या बड़ा निवेश पोर्टफोलियो ही हो। कई बार कम खर्च, सीमित जरूरतें, कर्ज से मुक्ति और अपने समय पर नियंत्रण भी किसी व्यक्ति को ऐसी आजादी दे सकते हैं, जिसे बड़ी सैलरी के बावजूद हासिल करना मुश्किल होता है।
My friend earns just ₹5-₹6 LPA,
yet he has achieved what people keep chasing even after making crores,
“Peace of Mind.”
We were just classmates in college. Around 4-5 years later,
I randomly ran into him at a mall.
Later, I found out that he lives just a few kilometres from…
— Pooja (@poojaofficial5) August 22, 2026
सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा- ‘सुकून भी तो दौलत है’
कहानी सामने आने के बाद कई यूजर्स ने माना कि सफलता का पैमाना हर व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। कुछ लोगों ने इसे इस बात की याद दिलाने वाला उदाहरण बताया कि बड़ा वेतन हमेशा बड़ी खुशी की गारंटी नहीं देता। आखिरकार, शायद असली सवाल यह नहीं है कि आप कितना कमाते हैं, बल्कि यह है कि अपनी कमाई के बदले आप कितना सुकून, समय और आजादी बचा पाते हैं।
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शादी से पहले होने वाले पति की एक बात सुनकर महिला ने रिश्ता खत्म करने का फैसला लिया। सोशल मीडिया पर ये मामला तेजी से वायरल हो रहा है। महिला ने X पर बताया कि उसने शादी से इनकार इसलिए किया क्योंकि होने वाले पति ने कहा था कि शादी के बाद उसकी मां भी उनके साथ रहेगी। महिला को ये बात पसंद नहीं आया और उसने आगे बढ़ने के बजाय रिश्ता खत्म करना बेहतर समझा। इस पोस्ट के बाद शादी से पहले सीमाओं और जिम्मेदारियों पर साफ बातचीत को लेकर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई।
सोशल मीडिया पर किया पोस्ट
अपनी बातचीत को याद करते हुए महिला ने एक्स पर पोस्ट में बताया कि, “मैंने एक आदमी को इसलिए रिजेक्ट कर दिया क्योंकि उसने मुझसे कहा था कि शादी के बाद उसकी मां हमारे साथ रहेगी।” उस व्यक्ति ने कहा, “वह बूढ़ी हो चुकी हैं, मैं और क्या कर सकता हूं?” महिला ने साफ किया कि उसे इस बात से कोई परेशानी नहीं है कि वह अपनी मां की देखभाल करे, लेकिन उसे इस बात पर आपत्ति है कि बिना उसकी सहमति के उससे भी इस जिम्मेदारी की उम्मीद की जाए। उसने कहा, “तुम उनका ख्याल रखो, लेकिन जिस फैसले में मेरी सहमति नहीं है, उसकी जिम्मेदारी मुझ पर मत डालो।”
जिम्मेदारी साफ होनी चाहिए
महिला ने बताया कि, उसकी बात सुनने के बाद उस व्यक्ति ने उसे स्वार्थी कह दिया। महिला ने कहा कि, शादी करने का फैसला लेने का यह मतलब नहीं है कि कोई व्यक्ति बिना चर्चा के हर तरह की नई जिम्मेदारी स्वीकार कर ले। उसके मुताबिक, शादी से पहले दोनों लोगों के बीच यह साफ होना जरूरी है कि आगे चलकर कौन-सी जिम्मेदारियां किसकी होंगी और किन बातों पर दोनों की सहमति है। महिला ने कहा कि बिना बातचीत और सहमति के किसी पर जिम्मेदारी डालना सही नहीं है।
सोशल मीडिया पर लोगों ने किया रिएक्ट
महिला की पोस्ट सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने अलग-अलग तरह की राय दी। कुछ यूजर्स इस फैसले को लेकर बंटे रहे। कुछ ने इसे सही बताया, तो कुछ ने शादी की जिम्मेदारियों से बचना कहा। इस मुद्दे पर यूजर्स दो अलग-अलग राय में बंटे नजर आए। एक यूजर ने महिला के फैसले पर सवाल उठाते हुए लिखा, “आपने किसी खराब पति को मना नहीं किया। आपने उस आदमी को इसलिए ठुकराया क्योंकि वह शादी से पहले से चली आ रही अपनी एक जिम्मेदारी को छोड़ना नहीं चाहता था।”
I rejected a man because he told me his mother would be living with us after marriage.
He said, “She’s old. What else am I supposed to do?”
I said, “Take care of her. Just don’t make me responsible for a decision I didn’t make.”
He called me selfish.
Maybe.
But marriage…
— miaa. (@miacluv) August 21, 2026
दूसरे यूजर ने कहा, “अगर आप शादी में किसी तरह की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते हैं, तो महिलाओं को भी शादी से पहले प्री-नप एग्रीमेंट करना चाहिए। आप अपनी जिंदगी में जैसा चाहें वैसा रह सकते हैं, लेकिन इसका मतलब यह भी है कि शायद आप शादी की असली जिम्मेदारियों को नहीं समझते।”
लोगों ने उठाए सवाल
इस चर्चा के बीच कुछ यूजर्स ने महिला के फैसले पर काफी तीखी प्रतिक्रिया भी दी। एक यूजर ने लिखा, “वह आदमी बहुत खुशकिस्मत है कि वह इस रिश्ते से बच गया। उसने एक बड़ी मुसीबत को आने से पहले ही टाल दिया।” वहीं, एक अन्य यूजर ने कहा, किसी बुजुर्ग मां की देखभाल को ऐसी जिम्मेदारी बताना, जिसे वह शादी के साथ “विरासत में लेने” के लिए तैयार नहीं थी, उसके सोचने के तरीके को काफी हद तक सामने लाता है।


