नोएडा के DLF मॉल में घी, रिफाइंड ऑयल चुराते पकड़ी गई महिला, बिना पैसे दिए फरार होना चाहती थी महिला

नोएडा के सेक्टर 18 स्थित DLF मॉल ऑफ इंडिया के एक स्टोर का वीडियो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है। इस वीडियो में एक महिला पर कथित तौर घी और रिफाइंड कुकिंग ऑयल चुराने का आरोप लगाया जा रहा है। वीडियो में एक महिला को मॉल की सिक्योरिटी टीम ने पकड़ रखा है और उसे लेकर जा रही है। बताया जा रहा है कि महिला मॉल के स्टोर से बिना चीजों का भुगतान किए सामान लेकर जाते हुए पकड़ी गई है। हालांकि, पुलिस और मॉल मैनेजमेंट ने यह कन्फर्म नहीं किया है कि महिला ने कोई सामान चुराया है।

लगभग 30 सेकंड के इस वीडियो में दो महिला सिक्योरिटी गार्ड कथित चोरी की आरोपी महिला को स्टोर के अंदर रोककर ले जाते हुए नजर आ रही हैं। महिला को बाहर निकलते समय अपना चेहरा ढकते हुए देखा जा सकता है। घटना के दौरान, स्टोर के एक कर्मचारी को उस पर सामान चुराने का आरोप लगाते हुए सुना जा सकता है। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर वीडियो के साथ कई दावे किए गए हैं कि महिला लगभग एक महीने से स्टोर आ रही थी और कथित तौर पर कई बार बिना पेमेंट किए घी और रिफाइंड ऑयल ले गई थी। कुछ पोस्ट में यह भी दावा किया गया है कि उसकी गतिविधियां स्टोर के CCTV कैमरों में कैद हो गई थीं।

हालांकि, इन आरोपों को सपोर्ट करने वाला कोई CCTV फुटेज वायरल वीडियो के साथ शेयर नहीं किया गया है। वीडियो में भी महिला को कोई सामान चुराते या बिना पेमेंट किए स्टोर से जाते हुए नहीं दिखाया गया है। वीडियो के चर्चा में आने के बाद, सेक्टर 20 पुलिस से जानकारी मांगी गई। पुलिस ने कहा कि उनकी शुरुआती जांच में पता चला है कि महिला ने स्टोर से लिए गए सामान के लिए पेमेंट किया था। अधिकारियों ने कहा कि मॉल मैनेजमेंट ने भी पुलिस को यही जानकारी दी। पुलिस ने कहा, “महिला ने सामान के लिए पेमेंट किया था। सोशल मीडिया पर लगाए जा रहे आरोप साबित नहीं हुए हैं।”

इस वीडियो पर सोशल मीडिया पर कई तरह के रिएक्शन आए हैं, कई यूजर्स ने इस घटना को शेयर और कमेंट किया है। खबर है कि इसे 100 से ज्यादा लोगों ने शेयर किया है। पुलिस ने कहा कि फुटेज से अभी सिर्फ यह पता चलता है कि महिला को सिक्योरिटी वालों ने रोका था और स्टोर के एक कर्मचारी ने उस पर चोरी का आरोप लगाया था। महिला को किन हालात में रोका गया और स्टोर के अंदर क्या हुआ, यह सिर्फ वायरल वीडियो से पक्के तौर पर पता नहीं लगाया जा सकता। अधिकारियों ने कहा कि सोशल मीडिया पर किए गए दावों को तब तक साबित सच नहीं माना जाना चाहिए जब तक कि उनके पीछे सबूत न हों।

कल का मौमस: देश के 20 से ज्यादा राज्यों में भारी बारिश-तूफान का अलर्ट, दिल्ली-NCR से लेकर दक्षिण भारत तक बदलेगा मौसम

भगवान के ठेकेदार और चमत्कार का कारोबार, सोशल मीडिया पर धर्म के नाम पर फैलता अंधविश्वास

भगवान के ठेकेदार और चमत्कार का कारोबार, सोशल मीडिया पर धर्म के नाम पर फैलता अंधविश्वास

Godmen miracle business

भगवान और भक्त के बीच की दूरी जितनी कम है, बाबा और भक्त के बीच का बाजार उतना ही बड़ा होता जा रहा है। कभी भगवान तक पहुंचने के लिए मंदिर, मस्जिद, गुरुद्वारा या चर्च जाना पड़ता था। अब मोबाइल की स्क्रीन ही नया दरबार है। बाबा लाइव हैं, चमत्कार लाइव है, आशीर्वाद लाइव है और भक्त भी लाइव है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले आस्था निजी हुआ करती थी, अब वह कंटेंट है—और कंटेंट जितना सनसनीखेज हो, उसकी कमाई उतनी ज्यादा। 

 

मनुष्य ने सदियों से भगवान को समझने की कोशिश की है। इसी कोशिश के बीच कुछ लोगों ने खुद को भगवान और भक्त के बीच की अनिवार्य कड़ी घोषित कर दिया। कोई संत बना, कोई बाबा, कोई गॉडमैन और कोई चमत्कारी पुरुष। कोई सीधे हनुमानजी को टेलीफोन लगाता है तो कोई उलटे-सीधे प्रयोग से परेशानी दूर करने का दावा करता है। दावा एक ही—हमारे पास वह शक्ति है जो आपके पास नहीं है।

 

बीमारी है? बाबा ठीक कर देंगे। नौकरी नहीं मिल रही? बाबा रास्ता बताएंगे। शादी नहीं हो रही? बाबा उपाय बताएंगे। कारोबार नहीं चल रहा? बाबा ग्रह बदल देंगे। भविष्य जानना है? बाबा सब जानते हैं। और सबसे दिलचस्प बात यह है कि बाबा का दावा जितना बड़ा होता जाता है, भक्त का सवाल उतना छोटा।

अंधविश्वास की असली ताकत डर है

अंधविश्वास हमेशा मूर्ख लोगों में नहीं पनपता। वह अक्सर परेशान लोगों में पनपता है। जिसके घर में कोई बीमार हो, जिसके पास नौकरी न हो, जिसके कारोबार में लगातार नुकसान हो रहा हो, जिसकी संतान परेशान हो या जिसे भविष्य अंधकारमय दिखाई दे रहा हो—उसे तर्क से ज्यादा तत्काल उम्मीद चाहिए।

 

यहीं चमत्कार का बाजार शुरू होता है।

 

विज्ञान कहता है—इलाज में समय लगेगा। व्यवस्था कहती है—प्रक्रिया पूरी करनी होगी। अर्थव्यवस्था कहती है—मेहनत करनी होगी। 
 

बाबा कहता है—बस विश्वास रखो। और संकट में फंसा इंसान इस छोटे से वाक्य में बड़ी राहत खोज लेता है।

 

यही कारण है कि अंधविश्वास को केवल हंसी में उड़ाना भी पर्याप्त नहीं है। उसके पीछे इंसान की असुरक्षा, डर और उम्मीद छिपी होती है। इस कमजोरी को समझने वाले लोग ही उसे सबसे आसानी से बाजार में बदलते हैं।

सोशल मीडिया ने बाबा को आश्रम से निकालकर हमारी जेब में पहुंचा दिया

 

पहले किसी बाबा के चमत्कार की खबर सुनने के लिए किसी भक्त को आश्रम जाना पड़ता था। अब एक रील काफी है। एक वीडियो में बाबा किसी बीमार व्यक्ति के सिर पर हाथ रखते हैं। अगले फ्रेम में वह व्यक्ति ठीक दिखाई देता है।

 

वीडियो वायरल।

 

नीचे हजारों कमेंट— “जय बाबा की।” “साक्षात भगवान।” “जिसे विश्वास नहीं, वह खुद भुगतेगा।”

 

बस, चमत्कार प्रमाणित हो गया।

 

लेकिन किसी ने यह नहीं पूछा कि बीमारी क्या थी? डॉक्टर ने क्या कहा था? इलाज क्या चल रहा था? व्यक्ति वास्तव में ठीक हुआ या नहीं? वीडियो के पहले और बाद की पूरी कहानी क्या थी?

 

क्यों पूछेंगे? हमें चमत्कार पसंद है, प्रक्रिया नहीं।

 

सोशल मीडिया की सबसे बड़ी समस्या यही है कि वहां वायरल होना कई बार सत्य का प्रमाण समझ लिया जाता है।

एक बाबा की सौ भविष्यवाणियों में दो सही निकल जाएं तो उन्हीं दो के वीडियो लाखों बार चलेंगे। बाकी अट्ठानवे गलत भविष्यवाणियां किसी को याद नहीं रहेंगी। यह चमत्कार नहीं, हमारी स्मृति और हमारी मानसिकता का खेल है।

धर्म को बचाने के लिए अंधविश्वास से लड़ना जरूरी है

धर्म और अंधविश्वास एक चीज नहीं हैं। धर्म आपको विनम्र बना सकता है। अंधविश्वास आपको किसी व्यक्ति का अंधभक्त बना सकता है। 

 

धर्म आपको भीतर देखने की प्रेरणा दे सकता है। अंधविश्वास आपको हर समस्या का समाधान बाहर किसी बाबा में खोजने को मजबूर कर सकता है।

 

धर्म प्रश्नों से डरता नहीं। अंधविश्वास सवाल से डरता है। यही फर्क हमें समझना होगा।

 

किसी संत का सम्मान करना अच्छी बात है। किसी आध्यात्मिक व्यक्ति से सीखना भी अच्छी बात है। लेकिन किसी इंसान को सर्वशक्तिमान मान लेना और अपने जीवन के निर्णय उसकी इच्छा पर छोड़ देना खतरनाक है।

 

भगवान में विश्वास व्यक्तिगत आस्था है, लेकिन इंसान को भगवान बना देना सामाजिक जोखिम।

असली चमत्कार क्या है?

शायद हमें चमत्कार की परिभाषा बदलने की जरूरत है। किसी बीमार व्यक्ति को अस्पताल पहुंचाना चमत्कार है। किसी गरीब बच्चे की पढ़ाई का खर्च उठाना चमत्कार है। किसी बेरोजगार को काम दिलाना चमत्कार है। किसी निराश इंसान को आत्मविश्वास लौटाना चमत्कार है।

 

लेकिन इसके लिए कैमरा नहीं चाहिए। रील नहीं चाहिए। लाखों व्यूज नहीं चाहिए। और शायद इसीलिए ये चमत्कार वायरल नहीं होते। हमें उन लोगों से सावधान रहना चाहिए जो हर समस्या का समाधान अपने पास होने का दावा करते हैं। क्योंकि जो व्यक्ति आपको हर सवाल का जवाब देने का दावा करता है, संभव है कि वह सबसे पहले आपके सवाल पूछने की क्षमता छीनना चाहता हो।

भगवान को एजेंट की जरूरत नहीं

सबसे बड़ा सवाल यही है—अगर भगवान सर्वशक्तिमान हैं, तो उन्हें हमारे और अपने बीच किसी एजेंट की जरूरत क्यों होगी?
 

प्रार्थना के लिए दलाल क्यों? आस्था के लिए फीस क्यों? चमत्कार के लिए पैकेज क्यों? और भगवान तक पहुंचने के लिए किसी इंसान के प्रमाणपत्र की जरूरत क्यों? शायद भगवान से हमारा रिश्ता जितना निजी होगा, बाबा का कारोबार उतना ही छोटा होगा।
 

इसलिए धर्म छोड़ने की जरूरत नहीं है। बाबा के पीछे भागना भी जरूरी नहीं है। जरूरत सिर्फ इतनी है कि आस्था के साथ विवेक भी बचा रहे। क्योंकि आस्था आंखें बंद करके चलना नहीं है।

 

आस्था वह है जिसमें आंखें खुली हों और फिर भी विश्वास कायम रहे।

 

और याद रखिए— जिस समाज में सवाल पूछने वाले कम और चमत्कार बताने वाले ज्यादा हो जाएं, वहां भगवान से ज्यादा खतरा भगवान के ठेकेदारों से होता है। आज सोशल मीडिया पर हमें चमत्कारों की नहीं, सवालों की वायरलिटी चाहिए।

क्योंकि जिस दिन हर बाबा के चमत्कार से पहले एक भक्त पूछेगा—“प्रमाण क्या है?” उस दिन शायद अंधविश्वास की सबसे बड़ी दुकान अपने आप बंद हो जाएगी।
-धर्मराज

Janhvi Kapoor AI Morphed Clip: जाह्नवी कपूर ने साउथ स्टार्स का जताया आभार, तो जानें वीडियो विवाद पर पोस्ट करने वालों पर क्यों भड़के रामगोपाल वर्मा

Janhvi Kapoor AI Morphed Clip: जान्हवी कपूर के AI-मॉर्फ्ड वीडियो चर्चा का विषय बने हुए हैं। एक्ट्रेस ने ‘देवरा’ फिल्म से तेलुगु सिनेमा में डेब्यू किया था और अब ‘चुट्टामल्ले’ गाने का उनका एक आपत्तिजनक AI-मॉर्फ्ड वीडियो ऑनलाइन वायरल हो रहा है।

महिलाओं को सिर्फ एक ‘वस्तु’ की तरह दिखाने के लिए टेक्नोलॉजी के गलत इस्तेमाल पर बात करते हुए एक्ट्रेस ने कहा कि बिना मर्जी के मनगढ़ंत कंटेंट फैलाना “बहुत ज्यादा अपमानजनक और गलत” है। एक डिटेल्ड बयान शेयर करते हुए जाह्नवी ने कहा, “महिलाओं को सिर्फ एक ‘वस्तु’ की तरह दिखाने और बिना मर्जी के मनगढ़ंत कंटेंट फैलाने के लिए टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल करना बहुत अपमानजनक है और यह लगभग सेक्शुअल असॉल्ट (यौन उत्पीड़न) जैसा ही है। मेरी इंडस्ट्री में लगभग हर महिला ने कभी न कभी इसका सामना किया है और हर जगह महिलाएं तेजी से इसका शिकार हो रही हैं।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि कंसेंट, मर्जी, पसंद और महिला के शरीर का सम्मान – ये इंसानियत की सबसे बुनियादी बातें होनी चाहिए, फिर भी न जाने क्यों इन्हें मुश्किल माना जाता है। असल में ये मुश्किल नहीं हैं।” जाह्नवी ने महिला की सीमाओं (बाउंड्रीज़) का सम्मान करने की अहमियत के बारे में भी बात की, चाहे उसने कुछ भी पहना हो या पहले किसी चीज के लिए हामी भरी हो। वहीं उन्होंने इस उनके लिए आवाज उठाने वाले साउथ एक्टर्स को थैंक्यू कहा।

रामगोपाल वर्मा हुए नाराज

अपने X अकाउंट पर नाराजगी जाहिर करते हुए राम गोपाल वर्मा ने लिखा- सभी सेलेब्रिटीज बस एक ही चीज में सफल रहे – उस आपत्तिजनक लिंक का प्रचार करना, जिसकी वजह से करोड़ों लोगों ने उसे देखा।” समझदारी भरा काम तो यह होता कि अपराधी को पकड़ने पर ध्यान दिया जाता और उसका प्रचार किया जाता। इसके बजाय उन्होंने ट्वीट करके पीड़ित की पहचान और आपत्तिजनक कंटेंट की ओर बहुत ज्यादा ध्यान खींचा जो कि खुद भी एक अपराध है।

उन्होंने आगे कहा कि पीड़ित का नाम बताने के बजाय उन्हें इसके पीछे के अपराधी को पकड़ने पर ध्यान देना चाहिए था। उन्होंने कहा- समझदारी इसी में होती कि अपराधी को पकड़ने पर ध्यान दिया जाता और उसे सबके सामने लाया जाता… इसके बजाय, उन्होंने ट्वीट करके पीड़ित की पहचान और आपत्तिजनक कंटेंट पर बहुत ज्यादा ध्यान खींचा, जो कि खुद एक अपराध है।”

एक और ट्वीट में RGV ने AI के बारे में बात करते हुए कहा- “जब आप जीत नहीं सकते तो आपको साथ हो जाना चाहिए… अगर आप AI से लड़ेंगे, तो यह आपका अस्तित्व ही मिटा देगा।”

Video: पहाड़ी मोड़ पर अचानक बेकाबू हुई कार, खंभे से टकराकर खाई में गिरी; डैशकैम में कैद हुआ खौफनाक मंजर

उत्तराखंड के चकराता से सामने आया एक डैशकैम वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में पहाड़ी सड़क पर चलती एक कार अचानक मोड़ पर अपना संतुलन खो देती है। कार सड़क किनारे लगे बिजली के खंभे से टकराती है और देखते ही देखते करीब 100 मीटर गहरी खाई में जा गिरती है। हादसे का पूरा मंजर कैमरे में रिकॉर्ड हो गया। बताया जा रहा है कि कार में तीन लोग सवार थे। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि दो अन्य घायल हुए हैं। वीडियो ने पहाड़ी सड़कों पर ड्राइविंग के जोखिम को फिर चर्चा में ला दिया है

तेज मोड़ पर बिगड़ा कार का संतुलन

बताया जा रहा है कि हादसा चकराता-त्यूणी मोटर मार्ग पर चिल्लाड़ के पास हुआ। यह घटना 2 अक्टूबर की बताई गई है, जबकि हादसे का डैशकैम वीडियो दो दिन बाद सोशल मीडिया पर सामने आया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कार में तीन लोग सवार थे और वाहन उत्तर प्रदेश नंबर का था। पहाड़ी सड़क पर एक तेज मोड़ के दौरान कार बेकाबू हो गई। पहले वह बिजली के पोल से टकराई और फिर करीब 100 मीटर नीचे खाई में जा गिरी।

एक की मौत, दो लोग गंभीर रूप से घायल

हादसे में 39 वर्षीय दुर्गेश चौधरी की जान चली गई। कार में मौजूद दो अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हादसे के बाद राहत और बचाव दल ने खाई में पहुंचकर घायलों को बाहर निकाला।

वायरल वीडियो में हादसे का वह पल साफ नजर आता है, जब कार कुछ सेकंड के भीतर सड़क से बाहर निकलकर पहाड़ से नीचे चली जाती है। यही अचानक हुआ घटनाक्रम लोगों को सबसे ज्यादा हैरान कर रहा है।

खूबसूरत पहाड़ी सड़कें, लेकिन छोटी गलती भी पड़ सकती है भारी

चकराता की पहाड़ी सड़कें अपने खूबसूरत नजारों के लिए जानी जाती हैं, लेकिन यहां ड्राइविंग में जरा-सी चूक भी बेहद खतरनाक साबित हो सकती है। संकरी सड़क, तीखे मोड़, ढलान, कम विजिबिलिटी और सड़क के किनारे पर्याप्त जगह न होना ड्राइवर के लिए मुश्किल बढ़ा देता है।

मैदानी इलाकों की तरह यहां वाहन के संतुलन बिगड़ने पर उसे संभालने के लिए ज्यादा जगह नहीं मिलती। कई बार कुछ सेकंड ही तय कर देते हैं कि वाहन सड़क पर रहेगा या खाई में जाएगा।

चकराता-त्यूणी मार्ग पर पहले भी हो चुके हैं हादसे

यह पहली बार नहीं है जब इस मार्ग पर बड़ा हादसा हुआ हो। नवंबर 2021 में भी त्यूणी-चकराता मार्ग पर एक वाहन करीब 300 मीटर गहरी खाई में गिर गया था। उस हादसे में 13 लोगों की मौत हुई थी, जबकि दो लोग घायल अवस्था में बच पाए थे।

Video: न दिखावा, न बेवजह खर्च… बेंगलुरु के इस कपल ने बनाए 5 ऐसे Money Rules जो हर परिवार के काम आएंगे

The Vvaan Box Office Collection Day 10: ‘द वन’ पर जमकर बरस रही छठी मैया की कृपा, 10वें दिन 70 करोड़ के पार पहुंचा कलेक्शन

The Vvaan Box Office Collection Day 10: द वन फिल्म ने 10वें दिन बॉक्स-ऑफिस कलेक्शन में थोड़ी बढ़ोतरी देखी। सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​स्टारर यह फिल्म सिनेमाघरों में अपने दूसरे हफ्ते में चल रही है। मूवी बॉक्स ऑफिस पर लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही है।

बॉक्स ऑफिस कलेक्शन डे 10

‘द वन – फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ ने 10वें दिन भारत में 2,032 शो में 3.25 करोड़ रुपये (नेट) कमाए। Sacnilk के आंकड़ों के अनुसार फिल्म का कुल भारत नेट कलेक्शन अब 62.10 करोड़ रुपये है, जबकि इसका भारत ग्रॉस कलेक्शन 73.79 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। 10वें दिन का कलेक्शन 9वें दिन की तुलना में 62.5% ज्यादा है, जब फिल्म ने भारत में 2 करोड़ रुपये (नेट) कमाए थे।

विदेशों में फिल्म ने 10वें दिन 50 लाख रुपये कमाए, जिससे इसका कुल विदेशी ग्रॉस कलेक्शन 7 करोड़ रुपये हो गया। इसका वर्ल्डवाइड ग्रॉस कलेक्शन अब 80.79 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। हिंदी (2D) वर्शन की कुल ऑक्यूपेंसी 47.03% रही। मॉर्निंग शो में 16.38% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई, जिसके बाद दोपहर के शो में यह बढ़कर 61.31% हो गई। शाम के शो में सबसे ज्यादा 67.85% ऑक्यूपेंसी रही और रात के शो में 36.77% ऑक्यूपेंसी दर्ज की गई।

अब तक का बॉक्स ऑफिस कलेक्शन

फिल्म ने पहले दिन 8 करोड़ रुपये के साथ शुरुआत की, इसके बाद दूसरे दिन 11.25 करोड़ रुपये और तीसरे दिन 14.35 करोड़ रुपये कमाए। चौथे दिन कलेक्शन गिरकर 5.25 करोड़ रुपये हो गया, लेकिन पांचवें दिन यह बढ़कर 6 करोड़ रुपये हो गया। फिल्म ने छठे दिन 4.25 करोड़ रुपये और सातवें दिन 4.50 करोड़ रुपये कमाए, जिससे पहले हफ्ते का कुल कलेक्शन 53.60 करोड़ रुपये हो गया। 8वें दिन फिल्म ने 3.25 करोड़ रुपये (नेट) कमाए और 9वें दिन फिल्म ने 2 करोड़ रुपये की कमाई की।

‘द वन – फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ के बारे में

दीपक कुमार मिश्रा के डायरेक्शन में बनी ‘द वन – फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ एक हिंदी फैंटेसी थ्रिलर फिल्म है, जिसमें सिद्धार्थ मल्होत्रा ​​और तमन्ना भाटिया मुख्य भूमिकाओं में हैं। फिल्म की कास्ट में अनूप सोनी, सुनील ग्रोवर, श्वेता तिवारी, मनीष पॉल और मिलिंद गुणाजी भी शामिल हैं। यह फिल्म पटना के पास बिहटा में स्थित वन देवी मंदिर से जुड़ी कहानियों से प्रेरित है और इसकी कहानी मिडिल इंडिया के जंगलों पर आधारित है।

कहानी ऋषि कुमार के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शहर में रहने वाला एक व्यक्ति है और अपनी जमीन बेचने के लिए अपने पुश्तैनी गांव लौटता है। एक प्रतिबंधित जंगल और देवी वनदेवी के बारे में चेतावनियों के बावजूद, वह जंगल में चला जाता है और एक अलौकिक शक्ति को जगा देता है। जल्द ही उसका सामना रहस्यमयी ताकतों से होता है और उसे अपने गांव को एक जानलेवा खतरे से बचाना होता है।

फिल्म को अरुणाभ कुमार और जानवी गिल ने लिखा है और इसे बालाजी मोशन पिक्चर्स और द वायरल फीवर (TVF मोशन पिक्चर्स) ने प्रोड्यूस किया है। इसका संगीत तनिष्क बागची, विशाल मिश्रा और अमित त्रिवेदी ने तैयार किया है। ‘द वन – फोर्स ऑफ द फॉरेस्ट’ 25 सितंबर, 2026 को सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी।

Meerut Viral Video: पति को गर्लफ्रेंड संग मोमो डेट पर देख भड़की पत्नी! कार के बोनट पर लटकी; 100 मीटर तक घसीटता रहा शख्स

Meerut Viral Video: उत्तर प्रदेश के मेरठ से पति-पत्नी के रिश्ते और सड़क पर हुए हाई-वोल्टेज ड्रामे का एक चौंकाने वाला वीडियो सामने आया है। आरोप है कि पत्नी ने अपने पति को एक दूसरी महिला के साथ मोमो डेट पर रंगे हाथों पकड़ लिया। पति जब कार लेकर वहां से जाने लगा तो पत्नी उसकी कार के बोनट पर चढ़ गई। इस दौरान कार चलती रही और महिला करीब 100 मीटर तक बोनट पर लटकी रही। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है। पुलिस ने बताया कि पत्नी को कथित तौर पर कार से कुचलने की कोशिश करने के आरोप में उसके पति समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के अनुसार, घटना शनिवार को लोहिया नगर थाना क्षेत्र में हापुड़ रोड स्थित एल-ब्लॉक चौकी के पास हुई।

दूसरी महिला के साथ पति को देख पत्नी ने किया सामना

पुलिस के मुताबिक, शनिवार शाम लोहियानगर इलाके के एल-ब्लॉक पुलिस चौकी के पास मयंक सिंह कथित तौर पर अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मौजूद था। इसी दौरान उसकी पत्नी सुनीता सिंह की नजर दोनों पर पड़ गई। सुनीता ने पति को दूसरी महिला के साथ देखा तो वहां दोनों के बीच बहस शुरू हो गई। बताया जा रहा है कि विवाद बढ़ने के बाद मयंक वहां से कार लेकर निकलने की कोशिश करने लगा।

कार के सामने खड़ी हो गई पत्नी

पुलिस के अनुसार, पति को रोकने के लिए सुनीता कार के सामने खड़ी हो गई। कार आगे बढ़ी तो वह टोयोटा अर्बन क्रूजर टैसर के बोनट पर जा गिरी और कार को रोकने के बजाय वह बोनट पकड़कर लटक गई। वायरल वीडियो में कथित तौर पर महिला को चलती कार के बोनट पर पकड़े हुए देखा जा सकता है। वह आसपास मौजूद लोगों से मदद के लिए लगातार गुहार लगाती सुनाई दे रही है।

करीब 100 मीटर तक बोनट पर लटकी रही महिला

बताया गया है कि कार करीब 100 मीटर तक चलती रही। इस दौरान आसपास के लोग घटना देखकर वहां जुटने लगे। लोगों की भीड़ बढ़ती देख चालक ने आखिरकार कार रोक दी। घटना के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू की।

पुलिस ने बताया कि काजीपुर निवासी महिला की ओर से दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, उसने हसनपुर कला गांव निवासी अपने पति मयंक (36) को एक महिला के साथ कार में देखा और दोनों को रोक लिया तभी पति-पत्नी के बीच कहासुनी हो गई।

महिला की शिकायत के मुताबिक, कहासुनी के बाद पति ने उस पर कार चढ़ाने की कोशिश की। पुलिस के मुताबिक, शिकायत में आरोप लगाया गया है कि मयंक और उसके साथ मौजूद महिला ने उसे झाड़ियों में गिराकर उसका गला दबाने की भी कोशिश की। उसके साथ गाली-गलौज भी की।

पति पर कई गंभीर आरोप, दोनों गिरफ्तार

सुनीता ने अपने पति के खिलाफ मारपीट, दहेज उत्पीड़न और बेवफाई के आरोप लगाते हुए शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस ने मयंक के खिलाफ हत्या के प्रयास का मामला भी दर्ज किया है। पुलिस ने इस मामले में मयंक सिंह और माही वर्मा दोनों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में इस्तेमाल कार, जिसका नंबर UP15ER3086 बताया गया है, उसे भी पुलिस ने जब्त कर लिया है।

मामला लोहियानगर थाने में FIR नंबर 697/2026 के तहत दर्ज किया गया है। पुलिस के अनुसार, केस में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 109(1) और 352 लगाई गई हैं। मामले की आगे जांच जारी है।

ये भी पढें- Justice Ujjal Bhuyan: ‘वोटिंग से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी’; SIR विवाद पर बोले जस्टिस उज्ज्वल भुइयां

सोशल मीडिया पर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें एक महिला एक व्यक्ति को कार से उतारकर उसकी पिटाई करती दिखाई दे रही है। वीडियो में महिला को कार के बोनट पर कुछ दूरी तक घसीटते हुए भी देखा जा सकता है।

पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) संग्राम सिंह ने पीटीआई को बताया कि पुलिस ने मामले का तत्काल संज्ञान लेते हुए दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। घटना में प्रयुक्त कार को जब्त कर लिया गया है और मामले में कानूनी कार्रवाई की जा रही है। दोनों आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया जा रहा है।

पुलिस और प्रदर्शनकारियों की शिकायत

दो महीने छह दिन यानी 66 दिन के बाद जंतर मंतर पर नए सिरे से प्रदर्शन हुआ और साथ ही पुलिस व प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी शुरू हुई। इस बार भी पुलिस और प्रदर्शनकारी अपने अपने हिसाब से शिकायत कर रहे हैं। पुलिस की शिकायत है कि प्रदर्शनकारी पुलिसकर्मियों के नाम लेकर उनको टारगेट कर रहे हैं। पुलिसकर्मियों के बैज पर लिखे गए नाम को पढ़ कर जोर से बोल रहे हैं और उनको निशाना बना रहे हैं। पुलिस को लग रहा है कि इससे सोशल मीडिया में ट्रोलिंग और परेशान करने का मौका बन रहा है। गौरतलब है कि आईसा की नेता नेहा बोरा को जब पुलिस बस में बैठा रही थी तब वे जोर जोर से एक महिला पुलिसकर्मी का नाम ले रही थीं और आरोप लगा रही थीं कि उसने ज्यादती की है। मीडिया में उस नाम की खूब चर्चा हो गई और सोशल मीडिया में भी यह वायरल हो गया।

इसके बाद बताया जा रहा है कि पुलिसकर्मियों ने अपने बैज उतारने शुरू कर दिए। अब वे प्रदर्शनकारियों को पकड़ कर बस में बैठा रहे हैं तो उससे पहले नाम हटा ले रहे हैं। इसकी शिकायत नेताओं और प्रदर्शनकारियों ने की है। सीपीआई के सांसद पी संदेश कुमार ने केंद्रीय गृह मंत्रालय से शिकायत की है। उन्होंने चिट्ठी लिखी है कि पुलिसकर्मी बैज उतार कर कार्रवाई कर रहे हैं। गौरतलब है कि इससे पहले जून और जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने शिकायत की थी सादी वर्दी में बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए थे, जो कील लगे डंडे से लोगों को मार रहे थे। सादी वर्दी में ऐसे कई लोगों की पहचान की गई थी और सुप्रीम कोर्ट में जब यह मामला पहुंचा तो इसे लेकर काफी विवाद भी हुआ था। सो, इस बार सादी वर्दी की बजाय बिना बैज के पुलिस तैनात है।

एक आश्रम में हुई घटना का विश्लेषण

प्रेमानंद महाराज के शिष्यों का माधुकरी माँगना भी सोशल मीडिया का ग्लैमर बन गया। पिछले कुछ वर्षों में प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता को बढ़ाने और उनकी मार्केटिंग करने के जितने प्रयास हुए वैसा ब्रज में पहले कभी नहीं देखा गया। यह ब्रज की भक्ति परंपरा के अनुकूल नहीं था। परिणामतः केलि कुंज की आलोचनाएं भी होने लगी।

वृंदावन के संत प्रेमानंद महाराज के आश्रम में हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। एक नौजवान भक्त की ऐसी रहस्यमय मृत्यु समाज और पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण है। इसकी जाँच हो रही है। पर इससे ज़्यादा चिंता की बात यह है कि कुछ सनातन धर्म विरोधी लोग इस दुर्घटना के लिए प्रेमानंद महाराज को ज़िम्मेदार ठहराकर उनपर कीचड़ उछाल रहे हैं। इस विषय में जो बात मैं आगे कहने जा रहा हूँ वो ऐसे आलोचकों को मेरा निष्पक्ष जवाब है। पर इसके साथ ही मैं उन बातों को भी यहाँ रखूँगा जिनको लेकर प्रेमानंद महाराज के चाहने वालों में भी लंबे समय से मंथन चल रहा है।

भक्तों को लगता है कि महाराज अपने चेलों के जाल में उलझ गए हैं। वे चेले जो महाराज की तपस्या को सोशल मीडिया पर वायरल करवाने की धुन में ब्रज के रसिक संतों की रहनी और आचरण को भूल बैठे हैं। आरोप है कि ऐसे चेले संपत्ति बनाने, कालोनियाँ बनाने और अपने-अपने साम्राज्य स्थापित करने में जुटे हैं।

प्रेमानंद महाराज एक लंबे अरसे से वृंदावन में रहकर तपस्वी का जीवन जी रहे थे। वे भीषण गर्मी के दिनों में भी घंटों यमुना जी की तपती रेत में पड़े रहकर भजन किया करते थे। प्रायः वे वृन्दावन की कँटीली झाड़ियों के बीच बैठ कर भी भजन करते थे। उन्होंने बरसों तक न भला खाया, न भला पहना। हम वृंदावनवासी जानते हैं कि वे वृन्दावन की गलियों में भिक्षा माँगकर रोटी खाते थे। 7-8 बरस पहले तक उनका नाम भी कोई नहीं जानता था। उनके दैन्य और तपस्या की प्रशंसा हर ब्रजवासी करता आया है। वे भी ब्रजवासियों के प्रति भारी श्रद्धा का भाव रखते हैं।

अब से कुछ वर्ष पहले तक यमुना किनारे एक बगीची में, अपने चंद शिष्यों के बीच वे प्रवचन किया करते थे। धीरे-धीरे उनके प्रवचन की लोकप्रियता बढ़ने लगी। देखते ही देखते लगभग हजार भक्त हर प्रातः उनका प्रवचन सुनने आने लगे। उस दौर में मैं भी प्रायः उनका प्रवचन सुनने उस बगीची में जाता था। धीरे-धीरे इस भीड़ में ऐसे युवाओं की संख्या बढ़ने लगी जो आईआईटी – आईआईएम जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों से पढ़ कर देश विदेश में अपनी लाखों की नौकरी छोड़ कर आ गए और प्रेमानंद महाराज के शिष्य बन कर पीली चादर ओढ़ ली।

इन्हीं शिष्यों में कुछ ऐसे शिष्य भी थे जिन्होंने महाराज के प्रति अपने गहरे प्रेम को प्रदर्शित करने के लिए सोशल मीडिया का सहारा लेना शुरू किया। पूरी दुनिया में उन्हें इतना प्रचारित कर दिया कि विराट कोहली से लेकर तमाम जानी-मानी हस्तियां  उनके दर्शन को आने लगी। महाराज की मार्केटिंग इस कदर की गई कि उनके दर्शन के लिए आधी रात से हज़ारों की भीड़ जमा होने लगी। इस भीड़ के कारण वृंदावन की यातायात व्यवस्था भी बाधित हुई। महाराज जब रात में सड़क पर पैदल निकलते तो हज़ारों लोग उनके दर्शन को खड़े रहते।

फिर तो वहाँ पैसे की वर्षा होने लगी। अब संपत्तियां खरीदने व बड़े-बड़े आश्रम बनाने की होड़ लग गई। यमुना की खादर में अवैध रूप से कॉलोनी बनाने के आरोप भी इन्हीं शिष्यों पर लगे। महाराज के दर्शन के लिए एडवांस टोकन मिलने लगे और भारी तामझाम का एक सुनियोजित आडंबर रच दिया गया।

इतना ही नहीं प्रेमानंद महाराज के कुछ वर्ष पहले ही बने शिष्य भी अब सोशल मीडिया पर अपनी मार्केटिंग करवाने लगे। किसी को शिव का स्वरूप बताया जाने लगा तो किसी को ब्रह्म ऋषि। सैंकड़ों सालों से ब्रज के संत घर-घर रोटी माँग कर प्रसाद पाते थे। इसे माधुकरी कहते हैं। ब्रज में ये संतों का सामान्य शिष्टाचार है।

पर किसी ने भी कभी इसे प्रचारित कर सेलिब्रिटी बनने की कोशिश नहीं की। प्रेमानंद महाराज के शिष्यों का माधुकरी माँगना भी सोशल मीडिया का ग्लैमर बन गया। पिछले कुछ वर्षों में प्रेमानंद महाराज की लोकप्रियता को बढ़ाने और उनकी मार्केटिंग करने के जितने प्रयास हुए वैसा ब्रज में पहले कभी नहीं देखा गया। यह ब्रज की भक्ति परंपरा के अनुकूल नहीं था। परिणामतः केलि कुंज की आलोचनाएं भी होने लगी। इसी सबके बीच महाराज के शिष्यों में सत्ता और संपत्ति को लेकर गुटबाजी और झगड़े शुरू हो गए।

इस सब से विचलित हो कर प्रेमानंद महाराज वृंदावन के अपने नए बने आश्रमों को छोड़ कर यमुना के उस पार बेल वन में चले गए। वहाँ जो बृजवासी गांव वाले रहते हैं वे परेशान हैं क्योंकि रात भर महाराज के दर्शनार्थी आते हैं। ब्रजवासी बच्चे घर से निकल जाए तो भीड़ में खो जाते हैं। सारे रास्ते जाम हो जाते हैं। अब वहाँ भी चेलों द्वारा कालोनियां बनाने का खेल चालू हो गया है। महाराज के प्रति श्रद्धा रखने वाले हम जैसे लाखों भक्त हैं। उनके शिष्य रसिक दुलारी शरण की मृत्यु से उस श्रद्धा में कोई कमी नहीं आई है। पर इतना अवश्य है कि अब समय आ गया है कि जब प्रेमानंद महाराज शिष्यों के बनाये इस आडंबर के जाल से निकल कर अपने मूल स्वरूप में लौट आएँ।

जहाँ तक रसिक दुलारी शरण की मृत्यु का प्रश्न है तो सच्चाई तो पुलिस जांच के बाद ही सामने आएगी। पर इतना अवश्य है कि युवा साधकों के बीच ऐसी दुर्घटना होना कोई नई बात नहीं है। साधना की प्रारंभिक अवस्था में अपनी इन्द्रियों पर नियंत्रण न रख पाने के कारण कई युवा साधक अपने लिंग को हानि पहुँचा देते हैं। ये उनकी नासमझी या उत्साह के अतिरेक में उठाया गया एक मूर्खतापूर्ण कदम होता है। इन्द्रियों पर नियंत्रण, मन पर नियंत्रण होने के बाद होता है। अगर मन वास्तव में भगवत भक्ति में रम जाए तो हमारी सभी इंद्रियाँ स्वयं ही शांत हो जाती हैं।

इस तरह के जबरन किए गए प्रयासों से इन्द्रियों पर नियंत्रण नहीं होता ये हर साधक को जानना चाहिए। इस घटना का जो भी परिणाम हो इससे प्रेमानंद महाराज की प्रतिष्ठा में कोई आंच नहीं आएगी। पर उनके इर्द-गिर्द जमा शिष्यों को इससे सबक लेकर आत्मवालोकन करना चाहिए।

बुजुर्ग कपल ने मांगी साइड लोअर बर्थ, युवक ने कहा- ₹1,050 दो फिर मिलेगी सीट, वायरल पोस्ट ने छेड़ी बहस

सोशल मीडिया पर ट्रेन में सीट को लेकर किया गया पोस्ट काफी वायरल हो रहा है। पोस्ट में बताया गया कि एक युवा यात्री ने अपनी साइड लोअर बर्थ एक बुजुर्ग दंपति को देने से मना कर दिया। युवक ने सीट के लिए करीब 2,100 रुपये खर्च किए थे और सीट बदलने के लिए उसने बुजुर्ग दंपति से पैसे भी मांगे। वहीं इस पोस्ट पर लोग तरह-तरह के रिएक्शन दे रहे हैं। इस मामले को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों की राय बंटी हुई है और इसे लेकर बहस जारी है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

सीट चेंज करने से किया मना

इस मामले को एक्स यूजर ने सोशल मीडिया पर शेयर किया। उन्होंने बताया कि, वह 3AC कोच में सफर कर रही थीं और उनकी सीट ऊपर वाली बर्थ पर थी। वहीं सामने बैठे एक युवक की सीट साइड लोअर थी। पोस्ट के अनुसार, एक बुजुर्ग दंपति ने युवक से उसकी साइड लोअर सीट देने की मांग की। उन्होंने कहा कि युवक उम्र में छोटा है, इसलिए वह ऊपर वाली बर्थ पर आसानी से सो सकता है और उन्हें नीचे वाली सीट की जरूरत ज्यादा है। युवक ने बुजुर्ग दंपति की बात तुरंत नहीं मानी।

युवक ने मांगे पैसे

युवक ने बताया कि उसने साइड लोअर बर्थ के लिए करीब 2,100 रुपये का टिकट खरीदा। इसके बाद बातचीत तब अलग मोड़ ले गई, जब युवक ने कहा कि अगर दंपति उसे टिकट की कीमत का आधा यानी 1,050 रुपये दे दें, तो वह अपनी बर्थ उन्हें दे सकता है। उसकी इस बात पर मामला और चर्चा में आ गया। एक्स यूजर के अनुसार, पैसे देने की बात सामने आने के बाद बुजुर्ग दंपति ने अपनी मांग छोड़ दी और युवक अपनी साइड लोअर बर्थ पर बैठा रहा। ऊपर वाली बर्थ से पूरा मामला देखने वाले यात्री ने इस घटना को काफी अलग अनुभव बताया।

क्या छोड़ देना चाहिए सीट

पोस्ट में बताया कि, लंबी ट्रेन यात्रा में साइड लोअर बर्थ को यात्री काफी पसंद करते हैं, इसलिए कई लोग इसे आसानी से छोड़ना नहीं चाहते। इस घटना के बाद सोशल मीडिया पर भी सीट को लेकर यात्रियों की पसंद और बुजुर्गों को प्राथमिकता देने के मुद्दे पर चर्चा शुरू हो गई। पोस्ट में पूछा गया कि क्या किसी यात्री को दूसरे की सुविधा के लिए अपनी रिजर्व बर्थ छोड़ देनी चाहिए। यूजर ने लोगों से पूछा कि वे बुजुर्ग दंपति को अपनी साइड लोअर बर्थ देंगे या इसके बदले पैसे लेने की मांग करेंगे। इस पर लोगों की अलग-अलग राय सामने आई।

 

यूजर ने दिया ये रिएक्शन

ये पोस्ट सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गई। इसके बाद कई लोगों ने रेलवे के रिजर्वेशन नियमों और सफर के दौरान बुजुर्ग यात्रियों को होने वाली परेशानियों को लेकर अपनी राय साझा की। लोगों ने इस मामले पर अपने अनुभव भी बताए और बताया कि ऐसी स्थिति में यात्री और सीनियर सिटीजन दोनों के लिए क्या सही होना चाहिए।

एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि, ‘सीनियर सिटिजन्स को हमेशा लोअर बर्थ क्यों नहीं दी जाती, जबकि टिकट बुक करते समय उनकी उम्र की जानकारी पहले ही दर्ज की जाती है।’ एक यूजर ने कहा कि, ‘उसके माता-पिता और परिवार के अन्य बुजुर्ग सदस्य ऊपर की बर्थ पर नहीं चढ़ सकते, फिर भी उन्हें कई बार अपर बर्थ दे दी जाती है।’ यूजर ने सवाल किया कि जब बुकिंग के समय उम्र की जानकारी साफ तौर पर दी जाती है, तो इसके बावजूद बुजुर्गों को लोअर बर्थ न मिलने की जिम्मेदारी आखिर किसकी है।

दूसरे यूजर ने कहा कि, ‘हो सकता है युवक ने लेट बुकिंग या तत्काल टिकट के लिए ज्यादा पैसे दिए हों।’ उसके मुताबिक, ‘टिकट की कीमत यात्रा के लिए होती है, सिर्फ सीट के लिए नहीं। अगर बुजुर्ग दंपति को लोअर बर्थ की सच में जरूरत थी, तो युवक का पैसे लेने का फैसला उसकी अपनी मर्जी थी।’

Video: गर्लफ्रेंड के साथ मोमोज डेट पड़ा भारी! पत्नी ने पति को रंगे हाथों पकड़ा तो हुआ हाईवोल्टेज ड्रामा

मेरठ के एक शख्स को अपनी गर्लफ्रेंड के साथ मोमोज खाना भारी पड़ गया। व्यक्ति को गर्लफ्रेंड के साथ मोमोज खाते हुए उसकी पत्नी ने देख लिया। पति को दूसरी महिला के साथ देखकर पत्नी नाराज हो गई और दोनों के बीच जमकर बहस हुई। विवाद बढ़ने पर जब पति कार लेकर वहां से जाने लगा, तो पत्नी उसकी कार के बोनट पर बैठ गई और उसे रोकने की कोशिश करने लगी। पत्नी ने अपने पति के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई है। इस घटना का वीडियो भी सामने आया है। ये वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है।

बोनट पर बैठी महिला

पुलिस के अनुसार, शनिवार शाम मयंक सिंह लोहियानगर में एल-ब्लॉक पुलिस चौकी के पास अपनी कथित गर्लफ्रेंड माही वर्मा के साथ मौजूद था। इसी दौरान उसकी पत्नी सुनीता सिंह वहां पहुंच गई और दोनों को साथ देख लिया। इसके बाद सुनीता और मयंक के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते मामला बढ़ गया और मौके पर काफी हंगामा होने लगा। पुलिस के मुताबिक, विवाद के बाद मयंक वहां से निकलने के लिए अपनी कार में बैठ गया। उसे रोकने के लिए सुनीता कार के सामने खड़ी हो गई। बताया जा रहा है कि जैसे ही मयंक ने गाड़ी आगे बढ़ाई, सुनीता कार के बोनट पर गिर गई। इसके बाद कुछ दूर तक वह कार के बोनट पर ही रही।

100 मीटर तक चली कार

वीडियो में सुनीता चलती कार के बोनट को पकड़े हुए नजर आ रही हैं और आसपास मौजूद लोगों से मदद मांगती दिख रही हैं। बताया जा रहा कि कार करीब 100 मीटर तक चलती रही, जिसके बाद सड़क पर लोगों की भीड़ जमा होने लगी। लोगों को इकट्ठा होता देख मयंक ने आखिरकार कार रोक दी। घटना का वीडियो अब सोशल मीडिया पर सामने आया है। अब पुलिस इस मामले की जांच कर रही है।

महिला ने दर्ज करवाई शिकायत

सुनीता ने पुलिस में शिकायत देकर अपने पति मयंक पर मारपीट करने, दहेज के लिए परेशान करने और दूसरी महिला से संबंध रखने के आरोप लगाए हैं। पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मयंक के खिलाफ हत्या की कोशिश के आरोप में भी केस दर्ज किया है। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटाई जा रही है।

वाराणसी में 25 जगहों पर बनेंगे हाईटेक EV चार्जिंग स्टेशन! फ्री वाई-फाई और सिटिंग एरिया के साथ मिलेंगी ये सुविधाएं