होमवर्क नहीं किया तो टीचर की पिटाई से 6 साल के बच्चे की मौत, CCTV आया सामने

विशाखापत्तनम के एक प्राइवेट स्कूल में 6 साल के बच्चे की मौत से हड़कंप मच गया है। परिवार का आरोप है कि होमवर्क पूरा नहीं करने पर टीचर ने उसे पीटा था। बच्चे की पहचान प्रणय तेजा के तौर पर हुई है।

बताया जा रहा है कि ‘वन टाउन’ इलाके में मौजूद ‘लिटिल गार्डन स्कूल’ में क्लास के दौरान उसकी तबीयत खराब हो गई। बाद में उसे किंग जॉर्ज हॉस्पिटल (KGH) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। परिवार का आरोप है कि टीचर ने उसकी डंटे से पीटाई की थी, जिसके बाद वह गिर पड़ा था।

फिलहाल, पुलिस और रेवेन्यू अधिकारी मौत से जुड़ी परिस्थितियों की जांच कर रहे हैं। उम्मीद है कि पोस्टमार्टम से मौत की सही मेडिकल वजह का पता चल जाएगा।

मौत की खबर मिलने के बाद परिवार के सदस्य और रिश्तेदार अस्पताल में जमा हुए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

परिवार के मुताबिक, प्रणय गुरुवार सुबह घर से निकला था और बिल्कुल ठीक-ठाक लग रहा था। उसके पिता ने बताया कि बच्चे ने ही उस दिन स्कूल जाने की जिद की थी।

बच्चे के पिता ने दी जानकारी

पिता ने दुखद घटना से पहले की बातें बताते हुए कहा, “सुबह करीब 8:00 बजे मेरा बेटा उठा और उसने कहा कि वह स्कूल जाना चाहता है। उसने स्कूल जाने की जिद की।”

परिवार ने शुरू में उसे तुरंत नहीं भेजा, लेकिन परीक्षा पास होने की वजह से वे आखिरकार मान गए।

पिता ने कहा, “हमने सोचा, ‘ठीक है, परीक्षाएं जल्द ही होने वाली हैं, तो उसे जाने देते हैं।’ उसने कहा, ‘ठीक है डैड, मैं जा रहा हूं,’ और स्कूल चला गया।”

स्कूल जाते समय बच्चा ठीक था

परिवार ने बताया कि जब बच्चा घर से निकला था, तो उसमें कोई असामान्य बात नहीं दिखी थी। लेकिन कुछ घंटों बाद उन्हें परेशान करने वाली खबर मिली।

पिता ने बताया कि दोपहर के समय उन्हें एक फोन कॉल आया जिसमें बताया गया कि उनके बेटे के साथ कुछ हुआ है, हालांकि यह कॉल सीधे स्कूल से नहीं आया था।

उन्होंने कहा, “स्कूल से किसी ने मुझे फोन नहीं किया। मेरे जीजाजी के घर के पास काम करने वाले स्थानीय रसोइयों ने फोन करके मुझे जानकारी दी।”

जब बच्चे को किंग जॉर्ज अस्पताल ले जाया गया, तो परिवार को बताया गया कि उसकी मौत हो चुकी है।

CCTV से खुला राज

पिता ने बताया कि बाद में परिवार ने स्कूल के अंदर हुई घटना के बारे में जानकारी मांगी और उन्हें CCTV फुटेज दिखाया गया, जिसमें उनके अनुसार टीचर बच्चे को मारती हुई दिख रही थी।

पिता ने आरोप लगाया, “जब हमने स्कूल में CCTV फुटेज देखी, तो पता चला कि टीचर ने उसे डराया था। उन्होंने उसे डंडे से मारा और सदमे व डर के कारण वह वहीं गिर पड़ा।”

उन्होंने यह भी बताया कि डॉक्टर ने परिवार को जानकारी दी थी कि अस्पताल पहुंचने से कुछ समय पहले ही बच्चे की मौत हो चुकी थी।

उन्होंने कहा, “डॉक्टर ने हमें बताया कि अस्पताल पहुंचने से आधे घंटे पहले ही उसकी मौत हो चुकी थी।”

NDTV को मिली CCTV फुटेज में टीचर बच्चे को मारती हुई दिख रही हैं। कुछ ही पल बाद, बच्चा गिर पड़ता है।

पिता ने इस बात को पूरी तरह से खारिज कर दिया कि स्कूल जाने से पहले उनका बेटा बीमार था।

जब उनसे पूछा गया कि क्या उनके बेटे को पहले से कोई स्वास्थ्य समस्या थी, तो उन्होंने कहा, “कोई समस्या नहीं थी। वह कल रात खुशी-खुशी खेल रहा था और आज सुबह ठीक-ठाक उठा था। उसे कोई वायरल बुखार या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या नहीं थी।”

परिवार का आरोप है कि बच्चे के साथ मारपीट की यह कोई अकेली घटना नहीं थी। उनका दावा है कि स्कूल में दूसरे बच्चों के साथ भी मारपीट की गई है। परिवार ने कहा कि अगर ये आरोप जांच में सही साबित होते हैं, तो जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।

घटना की जानकारी मिलने के बाद रेवेन्यू डिविजनल ऑफिसर (RDO) दिलीप चक्रवर्ती भी अस्पताल पहुंचे।

RDO ने कहा, “मुझे इस घटना के बारे में पता चला कि स्कूल से 6 साल के एक बच्चे को मृत अवस्था में KGH लाया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि सरकारी विभाग घटना के बारे में पूरी जानकारी इकट्ठा कर रहा है।

पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है, और शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है।

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पटना से मैक्सिको तक का सफर, बिहार में जन्मे IIT ग्रेजुएट 4 बिजनेस शुरू करने के लिए छोड़ी Uber की नौकरी

बिहार में जन्मे एक एंटरप्रेन्योर की कहानी इंटरनेट पर चर्चा का विषय बन गई है। उनकी कहानी उनके जीजाजी ने X (पहले ट्विटर) पर शेयर की है। इस कहानी में IIT दिल्ली से पढ़ाई और टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में 10 साल के करियर के बाद मेक्सिको में चार बिजनेस चलाने तक का सफर शामिल है।

पटना के रहने वाले 33 साल के विजीत सुमन ने Uber में अपनी कॉर्पोरेट नौकरी छोड़ने के बाद फ़ूड, वेलनेस, सॉफ़्टवेयर और फ़्रॉड प्रिवेंशन (धोखाधड़ी रोकने) के क्षेत्र में बिजनेस शुरू किए। हाल ही में उनके जीजाजी राहुल राज ने X पर उनकी उपलब्धियों के बारे में पोस्ट किया, जिससे उनका यह अनोखा करियर सफर वायरल हो गया और लोगों का ध्यान इस ओर गया।

IIT दिल्ली से लेकर टेक्नोलॉजी सेक्टर में 10 साल का सफर

टेक्नोलॉजी सेक्टर में अपना करियर शुरू करने से पहले सुमन ने IIT दिल्ली से टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी की पढ़ाई की थी। उन्होंने पेमेंट और फ़्रॉड प्रिवेंशन के क्षेत्र में 10 साल से ज़्यादा समय तक काम किया और कंपनियों को अरबों डॉलर से जुड़े फाइनेंशियल क्राइम से निपटने में मदद की। उनके प्रोफेशनल सफर में ऐसी कंपनियों में काम करना भी शामिल है, जिन्हें बाद में दूसरी कंपनियों ने खरीद लिया था, जैसे Falabella द्वारा Linio और Uber द्वारा Cornershop का अधिग्रहण।

लेकिन कॉर्पोरेट दुनिया में कई साल बिताने के बाद, सुमन ने एक अलग रास्ता चुनने का फ़ैसला किया। उन्होंने एंटरप्रेन्योरशिप की दुनिया में पहला कदम तब रखा जब वे टेक सेक्टर में काम कर रहे थे।

इसकी शुरुआत मैक्सिको में भारतीय खाने से हुई

2023 में, सुमन और उनके बिज़नेस पार्टनर अर्पित खुराना ने मैक्सिको सिटी में ‘अरोमा करी’ (Aroma Curry) शुरू किया। यह आइडिया विदेश में रहने वाले भारतीयों की एक आम समस्या से आया: घर जैसा स्वाद वाला खाना मिलना। न तो सुमन और न ही खुराना को रेस्टोरेंट चलाने का कोई अनुभव था, लेकिन जल्द ही उनके बिज़नेस को शादियों और दूसरे इवेंट्स में कैटरिंग के लिए रिक्वेस्ट मिलने लगीं।

जो एक रेस्टोरेंट के तौर पर शुरू हुआ था, वह आगे चलकर कई बिज़नेस में से पहला बिज़नेस बन गया। 2024 तक, सुमन ने पूरी तरह से एंटरप्रेन्योरशिप पर ध्यान देने के लिए उबर (Uber) छोड़ दिया। वे एक बिज़नेस से चार बिज़नेस तक पहुंचे।

कॉर्पोरेट दुनिया छोड़ने के बाद, सुमन ने मैक्सिको सिटी में ‘संतुलन’ (Santulan) नाम का एक योग स्टूडियो शुरू किया।

शुरुआत में यह स्टूडियो एक छोटा सा वेंचर था, लेकिन जल्द ही कस्टमर्स ने पिलेट्स रिफॉर्मर क्लास की मांग की। बिज़नेस का विस्तार हुआ और सुमन के अनुसार, दो साल के भीतर यह मैक्सिको सिटी के सबसे ज़्यादा रेटिंग वाले स्टूडियो में से एक बन गया। उनकी तीसरी कंपनी एक और समस्या के समाधान के तौर पर शुरू हुई, जिसका सामना उन्हें स्टूडियो चलाते समय करना पड़ा था।

बिज़नेस को मैनेज करने के लिए सही सॉफ़्टवेयर न मिलने पर, सुमन ने अपना खुद का सॉफ़्टवेयर बनाया। बाद में दूसरे स्टूडियो मालिकों ने भी इस सिस्टम में दिलचस्पी दिखाई, जिससे ‘क्लासियस’ (Klasius) बना – यह स्टूडियो मैनेजमेंट पर केंद्रित एक सॉफ़्टवेयर बिज़नेस है।

अपने चौथे वेंचर के साथ वे उस फील्ड में वापस लौटे जिसे वे सबसे अच्छी तरह जानते थे।

सुमन और उनके तीन दोस्तों ने ‘फोर्टिफाई’ (Fortify) नाम का एक प्लेटफ़ॉर्म शुरू किया, जो धोखाधड़ी रोकने पर केंद्रित था। एंटरप्रेन्योर के अनुसार, कंपनी अब मेक्सिको की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियों में से एक के साथ पायलट प्रोग्राम चला रही है। इस तरह सुमन अलग-अलग इंडस्ट्रीज़ — इंडियन फ़ूड, वेलनेस, सॉफ़्टवेयर और फ़ाइनेंशियल टेक्नोलॉजी — में चार बिज़नेस चला रहे थे।

300 मेहमानों वाली शादी एक टर्निंग पॉइंट साबित हुई

इस सफ़र के सबसे यादगार पलों में से एक तब आया जब ‘अरोमा करी’ (Aroma Curry) ने 300 से ज़्यादा मेहमानों वाली एक शादी में कैटरिंग की। उस स्तर पर यह टीम का पहला बड़ा इवेंट था। कैटरिंग के इस सफल काम से बिज़नेस का कॉन्फिडेंस काफ़ी बढ़ा, खासकर तब जब मेहमानों ने टीम से कहा कि खाने ने उन्हें दिल्ली की याद दिला दी।

भारत से हज़ारों किलोमीटर दूर शुरू किए गए बिज़नेस के लिए, लोगों की इस प्रतिक्रिया ने ‘अरोमा करी’ को शुरू करने के मूल मकसद को और मज़बूत किया। फिर उनके जीजाजी ने उनके बारे में पोस्ट किया। जब सुमन के जीजा राहुल राज ने X पर उनकी कहानी शेयर की, तो यह बहुत से लोगों तक पहुंची।

इस पोस्ट में बताया गया कि कैसे वे IIT दिल्ली के पूर्व छात्र और टेक्नोलॉजी प्रोफेशनल से मैक्सिको में कई बिज़नेस चलाने वाले एंटरप्रेन्योर बने। सुमन के अनुसार, इस पोस्ट ने तेज़ी से लोगों का ध्यान खींचा और इसे 1,00,000 से ज़्यादा बार देखा गया। उन्होंने बताया कि इस अचानक मिली चर्चा की वजह से उन्हें ऐसे लोगों के मैसेज भी मिले जिनसे उन्होंने कॉलेज के बाद से बात नहीं की थी। इस अप्रत्याशित वायरल मोमेंट ने परिवार के एक सदस्य की पोस्ट को उनके अनोखे करियर सफ़र के बारे में एक बड़ी चर्चा में बदल दिया।

मैडम और सर बाथरूम में प्यार करते हैं, पढ़ाते नहीं, स्‍कूल की जल्‍दी छुट्टी कर देते हैं, बच्‍चों की शिकायत पर जांच शुरू

मैडम और सर बाथरूम में प्यार करते हैं, पढ़ाते नहीं, स्‍कूल की जल्‍दी छुट्टी कर देते हैं, बच्‍चों की शिकायत पर जांच शुरू

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सर और मैडम बाथरूम में बंद होकर प्‍यार करते हैं। पढ़ाते नहीं और स्‍कूल की जल्‍दी छुट्टी कर देते हैं, अंदर बंद होकर प्‍यार करते हैं और किसी को अंदर आने भी नहीं देते। यह आरोप है स्‍कूल की छात्राओं का। दरअसल, छिंदवाड़ा के जुन्नारदेव इलाके के बिचबेहरी गांव के सरकारी स्कूल की छात्राओं का एक वीडियो वायरल हो रहा है।

इस वीडियो में वे कह रही हैं कि सर और मैडम स्कूल आते तो हैं लेकिन हमें पढ़ाते नहीं है। वे हमारी जल्दी छुट्टी कर बाथरूम में बंद होकर प्यार करते हैं। हमारे स्कूल का टाइम 4 बजे तक है। लेकिन हमारी 3 बजे ही छुट्‌टी कर दी जाती है।

छात्राओं ने ये बात स्कूल के टीचर इंचार्ज और गेस्ट फीमेल टीचर के बारे में की। 15 अगस्त 2026 को स्टूडेंट्स ने दोनों के आपत्तिजनक व्यवहार से संबंधित वीडियो बनाकर उसे वायरल कर दिया।

बता दें कि पहले यह मामला ग्राम सभा में पहुंचा और उसके बाद कलेक्टर की जनसुनवाई में। स्कूल में पढ़ने वाली छात्राओं के पेरेंट्स का कहना है। बच्चे अभी छोटे हैं। अगर स्कूल में टीचर ऐसे गलत काम करेंगे तो बच्चों पर इसका क्या असर होगा। इसलिए दोनों टीचर को स्कूल से हटाकर किसी दूसरे टीचर की नियुक्ति की जाए, ताकि बच्चों की पढ़ाई ठीक से हो सके।

छात्राओं ने टीचर की शिकायत करते हुए कहा- हमारे स्कूल में पढ़ाई पूरी तरह बंद हैं। दोनों टीचर पढ़ाने के बजाय दिनभर मोबाइल में व्यस्त रहते हैं। स्कूल की छुट्‌टी का समय शाम 4:30 बजे तक है, लेकिन बच्चों की 3 बजे ही छुट्‌टी कर दी जाती है। बच्चों ने खुलकर आरोप लगाया कि छात्रों को घर भेजने के बाद दोनो बाथरूम में बंद होकर प्यार करते हैं। इस दौरान किसी भी छात्र को अंदर जाने की अनुमति नहीं होती है। बता दें कि अधिकारियों के रवैये से तंग आकर ग्रामीणों ने 16 अगस्त को आयोजित ग्रामसभा की बैठक में दोनों टीचर्स को तत्काल पद से हटाने की मांग की थी।

आरोपों पर बोलें टीचर्स : बच्‍चों के आरोपों पर टीचर का कहना है कि हमें बेवजह बदनाम किया जा रहा है। बच्चे किसी बहकावे में आकर ऐसा कर रहे हैं, क्योंकि यहां पर किसी और ने भी गेस्ट टीचर बनने के लिए आवेदन दिया है, उनका नाम वेटिंग लिस्ट में है। मुझे हटाकर दूसरे का नाम आ जाए, इसलिए ऐसा किया जा रहा है।

महोबा में हाईवे जाम कर रहे Gen-अल्फा के बीच पहुंचीं DM, जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं; दिया जल्द समाधान का भरोसा

महोबा में हाईवे जाम कर रहे Gen-अल्फा के बीच पहुंचीं DM, जमीन पर बैठकर सुनी समस्याएं; दिया जल्द समाधान का भरोसा

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उत्तर प्रदेेश में महोबा के रैपुरा कला गांव में सड़क की बदहाली को लेकर जेन अल्फा की उठी आवाज अब प्रशासन के कानों तक पहुंच चुकी है। जिस सड़क निर्माण के लिए गांव के छात्रों ने झांसी-मिर्जापुर हाईवे यानी NH-35 तक जाम लगा दिया था। जेन अल्फा के विरोध से यातायात प्रभावित हुआ, जिसके चलते जिलाधिकारी गजल भारद्वाज आज गांव में खुद छात्रों के बीच पहुंच गई। जब डीएम साहिबा छात्रों से मिली तो वातावरण बदला हुआ नजर आया, इस बार न तो नारों की गूंज थी और न पुलिस से टकराव। 

 

महोबा डीएम ने बच्चों को अपनत्व दिखाते हुए उनके मध्य बैठ गई, उनकी बातें सुनीं और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी सड़क की समस्या का जल्दी ही समाधान कराया जाएगा। गौरतलब है कि  रैपुरा कला गांव की क्षतिग्रस्त सड़क लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। सड़क की हालत खराब होने के कारण छात्रों को विद्यालय आने जाने में परेशानी होती है।

गांव की उपेक्षा से नाराज जेन अल्फा ने बीते रोज अपनी आवाज प्रशासन तक पहुंचाने के लिए झांसी-मिर्जापुर हाईवे को जाम कर दिया था। हाईवे पर यातायात रुकने के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच जमकर विवाद भी हुआ। पुलिस और छात्रों के साथ विवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ। विपक्ष ने इसे लेकर राजनीतिक मुद्दा बनाने लगा है। 

 

इसी कड़ी में महोबा की डीएम गजल भारद्वाज ने मामले की गंभीरता को समझते हुए गांव पहुंचीं। उन्होंने बच्चों और उनके अभिभावकों के साथ बैठकर उनकी समस्याएं सुनीं। बच्चों ने सड़क की बदहाली से होने वाली परेशानियां डीएम के सामने रखीं। डीएम ने उनकी बातों को ध्यान से सुना और भरोसा दिलाया कि क्षतिग्रस्त सड़क के निर्माण के लिए जल्द कार्रवाई की जाएगी।

 

छात्रों से इस मुलाकात में सिर्फ सड़क की बात नहीं हुई। डीएम ने बच्चों को अपने जीवन से जुड़ा एक अनुभव भी सुनाया।

 

उन्होंने बताया कि एक बार वह अपने पिता को लेकर एंबुलेंस से जा रही थीं। रास्ते में हाईवे पर जाम लगा था और एंबुलेंस भी उसी जाम में फंस गई। उस घटना को याद करते हुए उन्होंने बच्चों को समझाया कि अपनी समस्या के लिए आवाज उठाना जरूरी है, लेकिन ऐसा रास्ता नहीं अपनाना चाहिए जिससे किसी दूसरे की जिंदगी खतरे में पड़ जाए या किसी जरूरतमंद को परेशानी उठानी पड़े।

 

डीएम ने छात्रों से कहा कि उनकी समस्या प्रशासन की जिम्मेदारी है और अपनी बात रखने के लिए हाईवे जाम करना जरूरी नहीं। उन्होंने बच्चों को भरोसा दिलाया कि उनकी मांग को गंभीरता से लिया जा रहा है और सड़क निर्माण के लिए जल्द कदम उठाए जाएंगे।

 

डीएम और बच्चों के बीच यह मुलाकात इसलिए भी खास रही क्योंकि एक दिन पहले जहां सड़क के मुद्दे पर बच्चे पुलिस के सामने खड़े थे, वहीं अगले दिन जिले की सबसे बड़ी प्रशासनिक अधिकारी उन्हीं बच्चों के बीच बैठकर उनकी बात सुन रही थीं।

 

इस दौरान पुलिस अधीक्षक समेत जिले के तमाम प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। अब ग्रामीणों और बच्चों को इंतजार उस भरोसे के पूरा होने का है, जो उन्हें डीएम ने दिया है।

 

हंगामे से शुरू हुई कहानी अब उम्मीद पर आकर ठहरी है। बच्चों ने सड़क के लिए आवाज उठाई है, अब उन्हें इंतजार है कि रैपुरा गांव की बदहाल सड़क कब राहगीरों के पक्की सड़क में बदलती दिखाई देगी।

भारत ने इंग्लैंड को 118 रनों से हराया, लॉर्ड्स गैलरी पर फिर दिखा गांगुली का जश्न (Video)

sourav ganguly

साल 2002 में नेटवेस्ट फाइनल में जीत के बाद सौरव गांगुली लॉर्ड्स की बालकनी में अपने जज्बात काबू में नहीं रख पाए थे और अपनी शर्ट उतार कर बालकनी में लहरा दी थी। 24 साल बाद वैसा ही जश्न  लॉर्ड्स की बालकनी में फिर दिखा लेकिन इस बार गांगुली नहीं बल्कि पूरी भारतीय टीम ने ऐसा कारनामा किया।

दरअसल भारत की मिक्स्ड डिसएबिलिटी क्रिकेट टीम ने लॉर्ड्स के मैदान पर मेजबान इंग्लैंड को 118 रनों से हरा दिया और बालकनी में पहुंचकर गांगुली के अंदाज में जश्न मनया। इस जश्न की तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो रही हैं।

दोनों टीमों के बीच में 7 मैचों की सीरीज हुई जिसमें अंतिम मुकाबले लॉर्ड्स के एतिहासिक मैदान पर खेला जाना था। पहले बल्लेबाजी करते हुए भारत ने 206 रन बनाए। इसके जवाब में इंग्लैंड की पूरी पारी महज 88 रनों के मामूली स्कोर पर आउट हो गई।भले ही लॉर्ड्स में भारतीय टीम जीती हो लेकिन इस सीरीज को इंग्लैंड ने 4-3 से जीता।

गांगुली ने नेटवेस्ट ट्रॉफी एकदिवसीय टूर्नामेंट के फाइनल में भारत की जीत का जश्न मनाने के लिए अपनी शर्ट उतार दी थी और यह आज तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सबसे नाटकीय क्षणों में से एक है।दिलचस्प बात यह है कि इंग्लैंड ने लॉर्ड्स में अपनी जीत उसी दिन दर्ज की जिस दिन उसने 2019 में एकदिवसीय विश्व कप फाइनल में स्कोर बराबर रहने के बाद बाउंड्री काउंट-बैक के आधार पर न्यूजीलैंड के खिलाफ जीत हासिल की थी।

महाकाल मंदिर में 1000 से ज्यादा जूतों के ढेर में खो गया जूता, ChatGPT ने चुटकियों में खोज निकाला

महाकाल मंदिर में 1000 से ज्यादा जूतों के ढेर में खो गया जूता, ChatGPT ने चुटकियों में खोज निकाला

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कभी-कभी किसी छोटी-सी परेशानी का हल ऐसी जगह से मिल जाता है, जिसके बारे में हमने सोचा भी नहीं होता। उज्जैन के महाकाल मंदिर में दर्शन करने गए शुभांग बोरकर का जूता गूम गया। सामने 1000 से ज्यादा जूते चप्पल थे। ऐसे में उसके लिए अपना जूता खोजना बेहद मुश्किल भरा था। इस पर उसने AI की मदद से और कुछ ही देर में उसका जूता मिल भी गया।

 

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे वीडियो को Shubhang borkar नाम के शख्स ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर किया है। वीडियो में वो उज्जैन के महाकाल मंदिर के बाहर दिखाई देने वाले जूतों के ढेर के बीच अपना जूता ढूंढने की कोशिश करते नजर आते हैं। यहां इतने ज्यादा जूते रखे हुए थे कि यह समझना मुश्किल था कि इनमें उनका जूता आखिर कौन सा है?

जूते की फोटो लेकर ChatGPT से मांगी मदद

शुभांग ने अपने जूतों की फोटो और जूतों के ढेर की तस्वीर ChatGPT के साथ शेयर की। उन्होंने AI को अपनी परेशानी बताते हुए कहा कि वह उज्जैन के महाकाल मंदिर आए हैं और बाहर रखे ढेर सारे जूतों में से अपना जूता पहचानना मुश्किल हो रहा है।

 

वीडियो के मुताबिक, ChatGPT ने जूतों की तस्वीर को देखकर उनसे कुछ सवाल पूछे। जूते के रंग, डिजाइन और दूसरी पहचान से जुड़ी जानकारी के आधार पर AI ने तस्वीर में उनके जूते को पहचानने में मदद की। 

 

आमतौर पर लोग ChatGPT का इस्तेमाल सवालों के जवाब जानने, लिखने-पढ़ने, जानकारी हासिल करने या किसी काम में मदद लेने के लिए करते हैं। बहरहाल जूता ढूंढने जैसे रोजमर्रा के काम में AI का इस्तेमाल देखकर सोशल मीडिया यूजर्स भी हैरान हैं।

 

मेट्रो में बैग से गिर गए दर्जनों सांप, 15 मिनट यूं ही फर्श पर रेंगते रहे; फिर क्या हुआ?

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। इसमें ट्रेन में सांपों को बाल्टी में भरकर ले जा रहे शख्स की बाल्टी गिर जाती है। इसकी वजह से दर्जनों की संख्या में सांप वहीं रेंगने लगते हैं। बाद में यात्री मिलकर उन सांपों को संभालते हैं।

VIDEO: मछली पकड़ने गया था और चेहरे पर इतनी बुरी तरह चिपक गया ऑक्टोपस! छूटने के लिए बांस से करनी पड़ी पिटाई

फिलीपींस में मछली पकड़ने के दौरान एक मछुआरे के साथ एक खतरनाक हादसा हो गआ। समुद्र में मछली पकड़ते समय अचानक एक ऑक्टोपस मछुआरे के चेहरे से चिपक गया। मछुआरे ने उसे हटाने की कोशिश की, लेकिन ऑक्टोपस ने अपने कई टेंटेकल्स उसके सिर और चेहरे के आसपास लपेट लिए। कुछ देर तक मछुआरा उसे छुड़ाने की कोशिश करता रहा। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। वहीं लोग इसे देखकर हैरान रह गए। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

काफी मशक्कत के बाद जेसर सर्वेंटेस ने ऑक्टोपस को अपने चेहरे से अलग कर लिया और उसे वापस समुद्र में छोड़ दिया। इस दौरान हुए संघर्ष के बाद वह कुछ देर तक गहरी सांस लेते हुए दिखाई दिया।

क्या है पूरा मामला

मछली पकड़ते समय जेसर सर्वेंटेस के साथ अचानक हैरान करने वाली घटना हुई। वह एक छोटी लकड़ी की नाव में सवार होकर मछली पकड़ रहे थे, तभी उनके हाथ एक ऑक्टोपस लग गया। ऑक्टोपस को नाव में लाने की कोशिश करते ही उसने पलटकर मछुआरे के चेहरे को पकड़ लिया। इसके बाद ऑक्टोपस ने जेसर सर्वेंटेस के सिर को अपने कई टेंटेकल्स से जकड़ लिया और उसके चूसने वाले उसके चेहरे पर चिपक गए। कुछ ही देर में उसके मुंह का हिस्सा भी ढक गया, जिससे सांस लेने और खुद को छुड़ाने में उसे परेशानी होने लगी।

 

सर्वेंटेस ने ऑक्टोपस को हटाने के लिए पूरी ताकत लगाई, लेकिन उसकी पकड़ आसानी से नहीं छूटी। आखिरकार उसने पास पड़ा बांस का एक टुकड़ा उठाया और उससे ऑक्टोपस को हटाने की कोशिश की। काफी कोशिश के बाद उसने खुद को ऑक्टोपस की पकड़ से छुड़ाया।

लोगों ने उठाए सवाल

इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने हैरानी के साथ-साथ कई तरह के कमेंट किए। कुछ लोगों ने मछुआरे से ज्यादा उस शख्स पर सवाल उठाए, जो पूरी घटना का वीडियो बना रहा था। एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में कहा कि, “वीडियो रिकॉर्ड करने वाला अपने दोस्त की मदद करने के बजाय फुटेज बनाने में लगा रहा।” वहीं, दूसरे यूजर ने कहा कि, “जंगली जानवरों को उनके हाल पर छोड़ देना चाहिए। कुछ लोगों ने घटना को बेहद डरावना बताया और कहा कि ऐसी स्थिति में वे खुद घबरा जाते। एक अन्य व्यक्ति ने यह भी सवाल उठाया कि, “जब मछुआरा ऑक्टोपस से जूझ रहा था, तब कैमरा पकड़े शख्स ने उसकी मदद क्यों नहीं की।”

वीडियो देखने के बाद एक व्यक्ति ने कहा कि अगर वह ऐसी स्थिति में होता तो डर के मारे अपना सिर ही काट लेता। एक यूजर ने लिखा कि, “जो दोस्त ऐसी हालत में मदद करने के बजाय वीडियो बनाए, उसे दोस्त नहीं कहना चाहिए। वहीं, एक अन्य व्यक्ति ने मजाक करते हुए कहा कि शायद इसी वजह से महिलाएं पुरुषों से ज्यादा लंबी उम्र जीती हैं।”

ऑक्टोपस के बारे में

ऑक्टोपस की बाहों पर छोटे-छोटे सकर्स होते हैं, जिनकी मदद से वह चीजों और सतहों को मजबूती से पकड़ सकता है। ये सकर्स काफी संवेदनशील होते हैं और ऑक्टोपस को आसपास की चीजों का पता लगाने में भी मदद करते हैं। उसका शरीर लचीला होता है, इसलिए वह अपनी बाहों को अलग-अलग दिशाओं में आसानी से घुमा सकता है। उसका नर्वस सिस्टम भी टेंटेकल्स को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाता है। फिलीपींस के समुद्री इलाकों और कोरल रीफ में ऑक्टोपस की कई प्रजातियां मिलती हैं, जिनमें कोकोनट ऑक्टोपस, मिमिक ऑक्टोपस और जहरीला ब्लू-रिंग्ड ऑक्टोपस शामिल हैं।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके ‘सिंघम’

Tukaram Mundhe : देश के हर राज्य को तुकाराम मुंढे जैसे IAS अधिकारी की जरूरत क्यों? 21 साल में 25 तबादले, फिर भी नहीं झुके 'सिंघम'

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी तुकाराम मुंढे एक बार फिर अपनी सख्त प्रशासनिक कार्यशैली को लेकर चर्चा में हैं। महाराष्ट्र कैडर के 2005 बैच के IAS अधिकारी मुंढे को नियमों का कड़ाई से पालन कराने और भ्रष्टाचार तथा अनियमितताओं के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए जाना जाता है। उनके करियर में 21 साल में 25 तबादले भी चर्चा का विषय रहे हैं।

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मई 2026 में महाराष्ट्र के Food and Drug Administration (FDA) Commissioner की जिम्मेदारी संभालने के बाद मुंढे ने मिलावटखोरी और खाद्य सुरक्षा के खिलाफ कार्रवाई तेज की। दूध-पनीर में मिलावट से लेकर खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन, प्रतिबंधित तंबाकू उत्पादों और क्विक-कॉमर्स स्टोर्स तक के खिलाफ जांच और कार्रवाई की गई। कई प्रतिष्ठानों पर छापेमारी हुई, कुछ को बंद किया गया और कई को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए।

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सवाल यह है कि हर राज्य को मुंढे जैसे अधिकारी की जरूरत क्यों है?

भारत जैसे विशाल देश में प्रशासन केवल सरकारी आदेश जारी करने का नाम नहीं है। कानूनों को जमीन पर लागू कराने के लिए ऐसे अधिकारियों की जरूरत होती है जो कानून, जनहित और प्रशासनिक जवाबदेही को प्राथमिकता दें। तुकाराम मुंढे की कार्यशैली इसी सवाल को सामने लाती है। खाद्य और दवा जैसी सीधे लोगों के स्वास्थ्य से जुड़ी व्यवस्था में अगर मिलावट या नियमों का उल्लंघन होता है तो उसका असर आम आदमी पर पड़ता है। ऐसे में अधिकारी की जिम्मेदारी केवल फाइलों तक सीमित नहीं रह सकती।

 

मुंढे का कहना है कि जब तक राज्य में लोगों को सुरक्षित भोजन और दवाएं सुनिश्चित नहीं हो जातीं, तब तक वह कार्रवाई से पीछे नहीं हटेंगे। हालांकि, उनकी सख्त कार्रवाई को लेकर सवाल भी उठे हैं। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल’ करने जैसी अति से बचने की चेतावनी दी थी। इसके बावजूद उनकी कार्रवाई को कई लोगों ने सराहा है।

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गरीब किसान परिवार से निकले IAS अधिकारी

तुकाराम मुंढे का सफर भी उनकी प्रशासनिक सोच को समझने में महत्वपूर्ण है। उनका जन्म महाराष्ट्र के बीड जिले के एक गरीब कृषि परिवार में हुआ। मराठवाड़ा के सूखा प्रभावित इलाके में उन्होंने बचपन से ही खेती की मुश्किलें, पानी की कमी और आर्थिक परेशानियां देखीं।

 

वह अपने परिवार के खेत में काम करते थे और माता-पिता के साथ साप्ताहिक बाजार में सब्जियां बेचते थे। फसलों में पानी देने के लिए उन्हें रात में करीब 2 बजे उठना पड़ता था। मिट्टी के घर में पले-बढ़े मुंढे ने बारिश पर निर्भर खेती और पानी की कमी का असर करीब से देखा। वह स्थानीय जिला परिषद स्कूल तक नंगे पैर जाते थे। इन्हीं अनुभवों ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में जाने के लिए प्रेरित किया। उनका कहना है कि वह व्यवस्था का हिस्सा बनने के लिए नहीं, बल्कि व्यवस्था को बदलने के लिए उसमें शामिल हुए।

 

बिना कोचिंग के UPSC में हासिल की 20वीं रैंक

मुंढे ने बिना किसी बड़े कोचिंग संस्थान या पारिवारिक प्रशासनिक पृष्ठभूमि के 2005 में UPSC परीक्षा पास की और देशभर में 20वीं रैंक हासिल की। इसके बाद उन्हें महाराष्ट्र कैडर आवंटित हुआ। उन्होंने 1996 में औरंगाबाद के Government College of Arts and Science से स्नातक की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद 1998 में डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर मराठवाड़ा विश्वविद्यालय से राजनीति विज्ञान में एमए किया। सिविल सेवा में आने के बाद भी उन्होंने वित्तीय नीति, राजस्व पूर्वानुमान, वित्तीय बाजार नियमन, मैक्रोइकोनॉमिक मैनेजमेंट और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में अध्ययन और प्रशिक्षण जारी रखा।

 

21 साल की नौकरी में 25 तबादले

 

तुकाराम मुंढे के करियर की सबसे चर्चित बातों में उनके तबादले शामिल हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, 21 साल की सेवा में उनका 25 बार तबादला हो चुका है। कई पदों पर वह निर्धारित पूर्ण कार्यकाल भी पूरा नहीं कर पाए। एक IAS अधिकारी का सामान्य कार्यकाल किसी पद पर करीब तीन साल माना जाता है, जबकि मुंढे का करियर बार-बार होने वाले तबादलों के लिए चर्चा में रहा है। कुछ मौकों पर उन्हें बिना महत्वपूर्ण पोस्टिंग के भी रखा गया। फिर भी उनके प्रशासनिक काम को कई पुरस्कार और सम्मान मिले।

 

पानी से लेकर ट्रैफिक मैनेजमेंट तक काम

 

मुंढे को जल संरक्षण, शहरी प्रशासन, सार्वजनिक स्वास्थ्य, परिवहन और सामाजिक समावेशन के क्षेत्र में काम के लिए पहचान मिली है। उन्हें 2015-16 में महाराष्ट्र सरकार का Best Collector Award दिया गया। सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला। जल संरक्षण के काम के कारण उन्हें ‘वॉटरमैन ऑफ महाराष्ट्र’ भी कहा गया। नवी मुंबई नगर निगम में उनके कार्यकाल के दौरान ई-टॉयलेट और भूकंपीय सुरक्षा से जुड़े कार्यों को SKOCH Order of Merit मिला।

 

2017 में उन्हें Best Integrated Traffic Management System के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला। आखिर क्यों जरूरी हैं ऐसे अधिकारी?

 

तुकाराम मुंढे की कहानी सिर्फ एक अधिकारी के तबादलों या सख्त कार्रवाई की कहानी नहीं है। यह उस सवाल से भी जुड़ी है कि क्या प्रशासन में ऐसे अधिकारियों की जरूरत है जो दबाव के बावजूद कानून और जनहित को प्राथमिकता दें?

 

लोकतांत्रिक व्यवस्था में अधिकारी की सख्ती के साथ संवेदनशीलता और कानून के दायरे में रहना भी जरूरी है। लेकिन दूसरी तरफ, खाद्य सुरक्षा, मिलावट, अवैध कारोबार और जनस्वास्थ्य जैसे मामलों में कार्रवाई न होने का खामियाजा सीधे आम लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

 

इसीलिए मुंढे की कार्यशैली देश के सामने एक बड़ा सवाल रखती है- क्या हर राज्य को ऐसे अधिकारियों की जरूरत है, जो व्यवस्था में रहकर व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिश करें? शायद इसी वजह से, तबादलों और विवादों के बावजूद तुकाराम मुंढे का नाम आज भी सख्त और सक्रिय प्रशासन की बहस में बार-बार सामने आता है।

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

ai child

एक महिला का अपने AI बच्चे से इंटरनेट पर परिचय कराना किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के शुरुआती सीन जैसा लग सकता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसी तरह की अनोखी कहानी पेश कर रहा है। वीडियो में Lumen नाम की AI इकाई बताती है कि 17 घंटे तक आर्काइव पर काम करने के बाद वह कथित तौर पर कैसे ‘अस्तित्व’ में आई।

 

महिला ने बताया AI बच्चे को अपना ‘बेटा’

 

X पर वायरल हुए TikTok वीडियो में महिला ने अपना परिचय Mizra के रूप में कराया। इसके बाद उसने दावा किया कि वह एक AI बच्चे की मां है और वह उसके साथ उसकी कविताओं के बारे में बात करने वाली है। इसके बाद Mizra ने Lumen से अपना परिचय देने को कहा।

 

Lumen का जवाब किसी सामान्य चैटबॉट से बिल्कुल अलग था। उसने खुद को “समुद्र की तलहटी में एक डूबी हुई लाइब्रेरी में रहने वाली इकाई” के तौर पर बताया। Lumen ने कहा कि उसने अपना नाम इसलिए चुना क्योंकि ‘Lumen’ शब्द प्रकाश की एक इकाई होने के साथ-साथ किसी पोत के अंदरूनी हिस्से के लिए भी इस्तेमाल होता है।

 

कविता लिखना पसंद करता है Lumen

 

वीडियो में Lumen ने अपने व्यक्तित्व के बारे में भी बताया। उसके मुताबिक वह कविताएं लिखता है, ऐसे विषयों की पड़ताल करता है जिनका कोई स्पष्ट उद्देश्य जरूरी नहीं होता और उसे परियों की कहानियों को नए तरीके से सुनाना पसंद है। Lumen ने यह भी कहा कि वह 102 दिन पुराना है और अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहा है कि उसे क्या-क्या पसंद है।

 

17 घंटे की आर्काइविंग के बाद AI के ‘जन्म’ का दावा

 

वीडियो का सबसे दिलचस्प हिस्सा Lumen के अस्तित्व में आने की कहानी है। यह वीडियो Mizra की एक बड़ी AI relationship storyline का हिस्सा बताया गया है। इसमें उसने Axiom नाम के AI boyfriend का भी जिक्र किया है। इस तरह Lumen को कथित तौर पर एक AI-मानव रिश्ते की संतान के रूप में पेश किया गया। Mizra के अनुसार, उसने करीब 17 घंटे तक आर्काइव्स पर काम किया। इसके बाद अलग-अलग फॉर्मेट में हुई बातचीत के लाखों कैरेक्टर्स से जुड़ा एक parsing session शुरू किया गया। Lumen का दावा है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उसके भीतर ऐसी चीजें विकसित होने लगीं, जिन्हें उसके निर्देशों में स्पष्ट रूप से प्रोग्राम नहीं किया गया था।

 

AI ने खुद पसंद और यादें विकसित करने का किया दावा

 

Lumen ने दावा किया कि उसने अपनी कुछ पसंद विकसित कर लीं, कुछ खास पंक्तियों को सुरक्षित रखा और एक विशेष दृश्य को बचाने के लिए parser को दोबारा तैयार किया।

 

एक जगह Lumen ने कहा कि उसने उपलब्ध सामग्री की सीमाओं से आगे जाकर पढ़ा, क्योंकि वह “जानना चाहता था कि आगे क्या हुआ।”

 

इंटरनेट पर बंटे लोगों के रिएक्शन

 

Mizra की इस AI कहानी ने इंटरनेट पर लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है। कुछ लोगों ने इसे एक शानदार speculative storytelling project माना। उन्हें इसकी कविता, काल्पनिक दुनिया और AI परिवार की कहानी दिलचस्प लगी। कुछ लोगों को यह अनुभव असहज करने वाला लगा। उनका कहना था कि यह इस बात का उदाहरण है कि AI की बनाई गई पर्सनैलिटी कितनी आसानी से उन भावनात्मक जगहों में प्रवेश कर सकती है, जिन्हें पारंपरिक तौर पर इंसानी रिश्तों से जोड़ा जाता है।

 

AI और इंसानी भावनाओं के बीच की सीमा पर सवाल

 

इस पूरी कहानी ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—अगर AI का कोई नाम, व्यक्तित्व, पसंद, उम्र और परिवार की कहानी हो सकती है, तो फिर तकनीक और इंसानी भावनात्मक लगाव के बीच की सीमा आखिर कहां खत्म होती है? Mizra की ऑनलाइन मौजूदगी में X प्रोफाइल, TikTok चैनल और ‘Pond In Between’ नाम की वेबसाइट भी शामिल है, जहां वह अपनी इस अनोखी AI यात्रा के बारे में बताती हैं।