5 मिनट नहाने की कीमत 1.30 लाख रुपये! ऑस्ट्रेलिया में रही रही भारतीय महिला को एक गलती पड़ गई भारी

ऑस्ट्रेलिया में रहने वाली एक भारतीय महिला के लिए सिर्फ पांच मिनट नहाना बहुत महंगा साबित हुआ। रोज की तरह नहाने गई महिला के कारण पूरी बिल्डिंग में फायर अलार्म बज गया। इसके बाद बिल्डिंग में रहने वाले लोगों को बाहर निकालना पड़ा और महिला पर 1,900 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना लगा। वामिका नाम की इस महिला ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर इस पूरी घटना के बारे में बताया। उसने कहा कि वह जल्दी-जल्दी नहा रही थी, तभी अचानक बिल्डिंग का फायर अलार्म बजने लगा। शुरुआत में उसे लगा कि शायद यह अलार्म की सामान्य जांच या ड्रिल है। उसे तुरंत समझ नहीं आया कि अलार्म को बिल्डिंग में असली आपात स्थिति के तौर पर लिया जा रहा है।

महिला ने नहीं चलाया एग्जॉस्ट, बज गया फायर अलार्म

बाद में उसे पता चला कि फायर अलार्म उसके नहाने की वजह से बजा था। यह जानकर वह खुद भी हैरान रह गई कि सिर्फ कुछ मिनट नहाने की वजह से मामला इतना गंभीर हो गया और उसे 1,900 डॉलर का भारी जुर्माना भरना पड़ा। क्लिप की शुरुआत में वामिका ने हैरानी जताते हुए कहा, “फायर अलार्म के लिए मुझ पर 1,800 डॉलर का जुर्माना लगाया गया। आखिर यह क्या हो रहा है?”उसने अलार्म बजने के बाद की पूरी घटना को कैमरे में रिकॉर्ड किया। जब बिल्डिंग से सभी लोगों को बाहर निकलने का अनाउंसमेंट किया गया, तो वह कुछ देर तक समझ नहीं पाई कि क्या सभी लोगों के लिए बाहर जाना जरूरी है।

करीब 25 मिनट बाद जब वह आखिरकार बिल्डिंग से नीचे आई, तब उसे पता चला कि यह कोई फायर अलार्म टेस्ट या ड्रिल नहीं थी। अलार्म वास्तव में उसकी वजह से बजा था और बिल्डिंग के लोगों को सुरक्षा के लिए बाहर निकाला गया था। जब वामिका नीचे पहुंची और लोगों को बता रही थी कि अलार्म बजने के समय वह नहा रही थी, तभी बिल्डिंग मैनेजर ने उससे पूछा कि क्या उसी समय वह नहा रही थी। इसके बाद वामिका को समझ आया कि फायर अलार्म उसी की वजह से बजा था।

 

View this post on Instagram

A post shared by @sorandomvamika

बाद में उसने बताया कि नहाते समय उसने बाथरूम का एग्जॉस्ट फैन चालू नहीं किया था। इसकी वजह से बाथरूम में काफी भाप जमा हो गई और भाप के कारण फायर अलार्म बज गया।वामिका ने इस पूरी घटना को मजाकिया अंदाज में बताते हुए कहा, “अगर खाना बनाने की वजह से अलार्म बजता तो शायद कम बेइज्जती होती। लेकिन नहाते-नहाते मैंने यह कैसे कर दिया?” वीडियो के आखिर में उसने कहा, “मेरे पास कहने के लिए शब्द नहीं हैं।”

वायरल हुआ वीडियो

वामिका ने पोस्ट के कैप्शन में बताया कि उसे टैक्स समेत कुल 1,900 ऑस्ट्रेलियाई डॉलर का जुर्माना भरना पड़ा। भारतीय रुपये में यह रकम करीब 1.30 लाख रुपये बैठती है।वामिका की इस घटना ने सोशल मीडिया पर लोगों को खूब हंसाया। कई यूजर्स ने जहां उसके साथ सहानुभूति जताई, वहीं कुछ लोगों ने मजेदार कमेंट भी किए। कुछ लोगों के मन में यह सवाल भी आया कि आखिर भाप की वजह से फायर अलार्म कैसे बज सकता है।

एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “असली जिंदगी में ‘गरीबी में आटा गीला’ वाली बात हो गई। बधाई हो बहन।” एक अन्य यूजर ने कहा, “इसमें तुम्हारी कोई गलती नहीं है, लेकिन फिर भी यह काफी मजेदार है। हाहा।” वहीं, एक व्यक्ति ने सवाल किया, “आखिर यह हुआ कैसे? गर्म पानी या भाप से फायर अलार्म कैसे बज सकता है?” एक और यूजर ने महिला के पक्ष में लिखा, “शायद पहली बार ऐसा होने पर उन्हें तुमसे पैसे नहीं लेने चाहिए थे, जब तक कि यह बार-बार होने वाली बात न हो।”

IND vs SL: लाइव शो में भिड़े संजय मांजरेकर-मुरली कार्तिक, एक-दूसरे की चेहरे पर जमकर किया कमेंट

भारत और श्रीलंका के बीच दो मैचों की टेस्ट सीरीज का पहला मुकाबला खेला जा रहा है। दोनों टीमें श्रीलंका के गॉल स्टेडियम में एक-दूसरे के आमने सामने हैं। इस मैच के दौरान कमेंट्री बॉक्स का मौहाल काफी गर्म था। पहले टेस्ट के तीसरे दिन मैच के दौरान कमेंट्री बॉक्स में पूर्व क्रिकेटर संजय मांजरेकर और मुरली कार्तिक के बीच भी तीखी बहस देखने को मिली। दोनों के बीच किसी मुद्दे को लेकर मतभेद थो, जो बाद में बहस बदल गया। सोशल मीडिया पर ये क्लिप काफी वायरल हो रहा है। लोगों ने इस बहस को क्रिकेट मैच के लिहाज से काफी गैर-जरूरी बताया।

लाइव शो में भिडे़ संजय-मुरली

संजय मांजरेकर और मुरली कार्तिक भारत के श्रीलंका दौरे के दौरान ब्रॉडकास्ट टीम का हिस्सा हैं और स्टूडियो व कमेंट्री बॉक्स से मैच को लेकर अपनी राय दे रहे हैं। मैच के दौरान एक मौके पर दोनों के बीच क्रिकेट से जुड़ी चर्चा हो रही थी, लेकिन बात अचानक मांजरेकर के चेहरे के हाव-भाव पर पहुंच गई। इस दौरान बातचीत का विषय खेल से हटकर निजी अंदाज में बदल गया, जिससे यह मामला चर्चा में आ गया। दोनों ने बात को ज्यादा गंभीर नहीं होने दिया और कुछ ही देर में माहौल नॉर्मल हो गया।

 

दोनों के बीच हुई बहस

मैच में ब्रेक के दौरान मुरली कार्तिक स्टूडियो में थे और मांजरेकर गॉल में बनाए गए स्टूडियो में थे। मुरली कार्तिक ने संजय से कहा, “एक छोटी सी रिक्वेस्ट है, और शायद ये रिक्वेस्ट आप सभी की तरफ से भी है। आपका मुंह इस सदी का सबसे अच्छा है, लेकिन आपके चेहरे के हाव-भाव की वजह से हमें समझ नहीं आ रहा कि आप क्या कह रहे हैं। इसलिए प्लीज अपने इन एक्सप्रेशन को थोड़ा कम करें।”

इस पर संजय मांजरेकर ने कहा, “यह तो बुरा है। क्या हम स्प्लिट स्क्रीन कर सकते हैं और कैमरा दूसरे आदमी की तरफ कर सकते हैं? क्योंकि वह बात करने में ज्यादा अच्छा है और उसका चेहरा भी ज्यादा अच्छा है।” संजय मांजरेकर ने आगे कहा, “मैं बस सोच रहा था, “शानदार, शानदार, शानदार”, मुरली कार्तिक की आवाज, खुद को आईने में देखते हुए।”

मुरली कार्तिक ने कहा, “मैं खुद को कभी नहीं देखता। वह आप हैं, सिर्फ आप। अगर कोई आपको जानता है, तो वह सिर्फ आप ही हैं—वे लोग जो आपके साथ खेले हैं और वे लोग जिन्होंने आपके साथ काम किया है।” संजय मांजरेकर, “क्योंकि आईने में देखने का एक वजह होती है। वैसे भी, मैं समझ सकता हूं कि आपके लिए यह ज्यादा मोटिवेटिंग नहीं है। हम दोनों यहां लाइन क्रॉस करने वाले हैं और सोशल मीडिया पर खूब मौज-मस्ती होगी।” सोशल मीडिया पर ये वीडियो काफी वायरल हो रहा है।

खराब ग्राफिक्स और अजीब कहानी का उड़ाया मजाक, अब उसी फिल्म को देखने उमड़ा दर्शकों का हुजूम

किसी फिल्म की खराब क्वालिटी की चर्चा आमतौर पर उसके लिए नुकसानदायक मानी जाती है, लेकिन चीन की एक एनिमेटेड फिल्म के साथ कहानी पूरी तरह उलट गई। ‘Niu Lai’ (The Cow Is Coming) को सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर ट्रोल किया। फिल्म के कमजोर ग्राफिक्स, अजीब किरदारों और उलझी कहानी को लेकर ऐसे-ऐसे कमेंट किए गए कि यह देखते ही देखते चर्चा में आ गई। शुरुआत में फिल्म को दर्शकों का खास रिस्पॉन्स नहीं मिला और इसकी कमाई भी बेहद कम रही। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हुए फिल्म के क्लिप्स ने लोगों की जिज्ञासा बढ़ा दी।

अब कई दर्शक फिल्म को इसलिए देखने पहुंच रहे हैं ताकि खुद तय कर सकें कि यह वाकई इतनी खराब है या नहीं। हैरानी की बात यह है कि जिस फिल्म को लोग मजाक का विषय बना रहे थे, वही अब बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फिल्मों को टक्कर दे रही है। फिल्म की यह अजीबोगरीब सफलता सोशल मीडिया के दौर में चर्चा का नया उदाहरण बन गई है।

पहले 10 दिन में सिर्फ 300 टिकट बिके

5 अगस्त को रिलीज हुई इस 86 मिनट की फिल्म की शुरुआत बेहद कमजोर रही। पहले 10 दिनों में इसकी कमाई सिर्फ 7,700 युआन यानी करीब ₹1.04 लाख रही। देशभर में 300 से भी कम लोगों ने फिल्म का टिकट खरीदा था।  फिल्म के प्रमोशन पर भी खास ध्यान नहीं दिया गया था। न कोई बड़ा प्रचार अभियान हुआ, न ट्रेलर जारी किया गया।

सोशल मीडिया पर वायरल हुई फिल्म की ‘बदसूरती’

फिर फिल्म के कुछ क्लिप सोशल मीडिया पर पहुंच गए। इसके बाद लोगों ने इसके खराब कंप्यूटर ग्राफिक्स, अजीब किरदारों, कमजोर आवाज और उलझी कहानी का मजाक उड़ाना शुरू कर दिया। किसी ने इसे खराब स्टूडेंट प्रोजेक्ट जैसा बताया, तो किसी ने इसे AI से भी खराब कह दिया। देखते ही देखते फिल्म को ‘2026 की सबसे खराब फिल्म’ जैसे टैग मिलने लगे। लेकिन यहीं से कहानी पलट गई।

मजाक बना फिल्म के लिए फ्री प्रमोशन

सोशल मीडिया पर हो रही ट्रोलिंग ने फिल्म को खत्म करने के बजाय लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी। लोग अब यह देखने के लिए टिकट खरीदने लगे कि आखिर फिल्म वास्तव में इतनी खराब है या नहीं। यानी जिस चीज को फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी माना जा रहा था, वही उसकी सबसे बड़ी मार्केटिंग बन गई।

₹1 लाख से सीधे ₹20 करोड़ के पार

चीनी टिकटिंग प्लेटफॉर्म Maoyan के आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म अब 14.9 मिलियन युआन यानी करीब 20 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर चुकी है। खास बात यह है कि फिल्म अब चीन के बॉक्स ऑफिस पर बड़ी फिल्मों के साथ नजर आ रही है। यानी जिस फिल्म को शुरुआत में कोई पूछ भी नहीं रहा था, वह अचानक चर्चा में आ गई।

सिर्फ दो लोगों ने 5 साल में बनाई फिल्म

‘Niu Lai’ की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसे सिर्फ दो लोगों ने करीब पांच साल में तैयार किया। शिन युमेंग और सुन लिफांग को फिल्म के लेखक, निर्देशक, निर्माता और वॉइस आर्टिस्ट के तौर पर क्रेडिट दिया गया है। फिल्म का इकलौता चर्चित प्रमोशनल पोस्टर भी काफी खूबसूरत है, जिसमें पारंपरिक इंक-वॉश आर्ट नजर आती है। लेकिन पोस्टर और फिल्म के अंदर दिखने वाले साधारण एनिमेशन में जमीन-आसमान का अंतर है।

रिलीज करने से पहले भी मिली थी चेतावनी

फिल्म के वितरक के बारे में बताया गया कि उन्हें इसकी क्वालिटी को लेकर फिल्म रिलीज न करने की सलाह दी गई थी। इसके बावजूद उन्होंने फिल्म रिलीज की, क्योंकि वह निर्देशक के दोस्त थे। आज वही फैसला फिल्म के लिए फायदे का सौदा साबित होता नजर आ रहा है।

AI के दौर में कुछ लोगों को पसंद आई ‘कच्ची’ कला

हालांकि हर कोई फिल्म की आलोचना से सहमत नहीं है। कुछ दर्शकों को इसका साधारण और हाथ से तैयार किया गया अंदाज पसंद आया। उनका कहना है कि ऐसे समय में जब AI कुछ ही सेकंड में शानदार विजुअल तैयार कर सकता है, इस फिल्म की कमियां भी उसे अलग बनाती हैं। लेकिन फिल्म की सबसे बड़ी खासियत शायद यही है कि लोग इसे अच्छा मानकर नहीं, बल्कि खराब होने की बात सुनकर देखने पहुंच रहे हैं। कभी फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी बनी उसकी खराब क्वालिटी, आज उसी की सबसे बड़ी ताकत और चर्चा की वजह बन गई है।

चीन सस्ता है या महंगा, शंघाई में रहने वाली भारतीय महिला ने 9.8 लाख रुपये महीने के खर्च का पूरा हिसाब बताया, जानें पैसा कहां जाता है

2.5 साल में ₹6.5 करोड़ की बचत: कंसल्टेंट की वायरल स्टोरी पर सोशल मीडिया में मचा बवाल

Viral Story: इस कंसल्टेंट ने दावा किया कि पिछले ढाई वर्षों में उन्होंने करीब ₹6.5 करोड़ की बचत की है। इस शानदार बचत को जोड़कर उनकी कुल संपत्ति अब लगभग ₹7.5 करोड़ हो गई है।

कनाडा के वैंकूवर में ट्रेन ट्रैक पर चढ़ा सिख शख्स:पटरियों पर बैठकर गाना गाया, बोला- मुझे अंग्रेजी नहीं आती; ट्रेन सर्विस रोकनी पड़ी

कनाडा के वैंकूवर में एक सिख शख्स के स्काई ट्रेन के ट्रैक पर चले जाने से ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी। शख्स काफी देर तक पटरियों पर बैठा रहा और वहां गाना गाता नजर आया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में शख्स बार-बार “आई डॉन्ट नो इंग्लिश” यानी मुझे अंग्रेजी नहीं आती है, कहते सुनाई दे रहा है। वीडियो में वह पटरियों पर उछल-कूद करता और गाना गाता भी नजर आ रहा है। घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिसकर्मियों ने शख्स को ट्रैक से बाहर निकाल लिया। उसे हटाए जाने के दौरान वहां मौजूद कुछ लोगों ने तालियां भी बजाईं। ट्रेन सेवा रोकनी पड़ी शख्स के ट्रैक पर मौजूद होने के कारण स्काई ट्रेन की आवाजाही प्रभावित हुई। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए ट्रेन सेवा को कुछ समय के लिए रोकना पड़ा। किस वजह से शख्स ट्रैक पर गया था, इसकी जानकारी अभी सामने नहीं आई है। उसके खिलाफ पुलिस ने क्या कानूनी कार्रवाई की, इसकी भी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। घटना का पूरा वीडियो… स्काई ट्रेन क्या है और यह कैसे चलती है? वैंकूवर की स्काई ट्रेन एक तरह की मेट्रो ट्रेन है। इसकी खासियत यह है कि इसे चलाने के लिए ट्रेन के अंदर ड्राइवर की जरूरत नहीं पड़ती। इसका संचालन कंप्यूटर आधारित सिस्टम से होता है। स्काई ट्रेन का बड़ा हिस्सा सड़क के ऊपर बने ट्रैक पर चलता है। कुछ हिस्सों में यह जमीन के नीचे भी जाती है। स्काई ट्रेन के ट्रैक पर आम लोगों का जाना बेहद खतरनाक होता है। ट्रेन के ट्रैक पर किसी व्यक्ति के पहुंचने की जानकारी मिलते ही सुरक्षा के लिए संबंधित हिस्से में ट्रेन की आवाजाही रोक दी जाती है। इसके बाद पुलिस और ट्रेन कर्मचारी पहले व्यक्ति को ट्रैक से बाहर निकालते हैं। फिर यह जांच की जाती है कि ट्रैक पूरी तरह खाली और सुरक्षित है या नहीं। सुरक्षा की पुष्टि होने के बाद ही ट्रेन सेवा दोबारा शुरू की जाती है। एक व्यक्ति के ट्रैक पर आने से कई ट्रेनें क्यों रुकती हैं? स्काई ट्रेन की कई ट्रेनें एक ही नेटवर्क से जुड़ी होती हैं। इसलिए ट्रैक के किसी एक हिस्से में सुरक्षा से जुड़ी समस्या होने पर उसका असर आसपास चल रही दूसरी ट्रेनों पर भी पड़ सकता है। ऐसे समय में यात्रियों को ट्रेन के अंदर इंतजार करना पड़ सकता है। कई बार उन्हें दूसरी ट्रेन पकड़ने के लिए स्टेशन बदलना पड़ता है या अपनी यात्रा में देरी का सामना करना पड़ता है। यानी इस घटना में शख्स का ट्रैक पर बैठना सिर्फ पुलिस के लिए परेशानी नहीं बना। उसकी मौजूदगी के कारण यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेन सेवा भी रोकनी पड़ी और पूरे नेटवर्क की आवाजाही प्रभावित हुई।

2 बार JEE में फेल हुआ लड़का, आज ₹2 लाख महीना कमाता है, Ankur Warikoo ने बताई कहानी

बिजनेसमैन अंकुर वारिकू की एक सोशल मीडिया पोस्ट ने भारत में टैलेंट और सफलता को लेकर लोगों का ध्यान खींचा है। उन्होंने इंदौर के एक डिजाइनर नमन की कहानी साझा की, जो दो बार JEE में सफल नहीं हो सके। इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और बिना किसी प्रतिष्ठित कॉलेज की डिग्री के अपने दम पर प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया। YouTube से सीखते हुए नमन ने धीरे-धीरे अपने कौशल को निखारा और फ्रीलांसिंग की दुनिया में अपनी पहचान बनाई। आज उनकी कमाई करीब 2 लाख रुपये प्रति माह बताई गई है।

नमन की कहानी साझा करते हुए वारिकू ने कहा कि भारत में टैलेंट की कमी नहीं है, बल्कि लोगों को पहचानने का नजरिया सीमित है। उनका मानना है कि किसी व्यक्ति की काबिलियत केवल कॉलेज, डिग्री या नौकरी के नाम से तय नहीं होनी चाहिए। उनकी पोस्ट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों के बीच इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि सफलता के लिए डिग्री जरूरी है या असली हुनर।

‘भारत में टैलेंट की नहीं, लेबल की समस्या है’

अंकुर वारिकू ने इंस्टाग्राम पर लिखा, “India does not have a talent problem. It has a label problem.” उनका कहना है कि भारत में लोगों की काबिलियत को अक्सर उनके कॉलेज, डिग्री और नौकरी के नाम से आंका जाता है। उन्होंने कहा कि कई बार बेहतरीन टैलेंट सिर्फ इसलिए सामने नहीं आ पाता, क्योंकि उसके पास किसी बड़े कॉलेज की डिग्री या मशहूर कंपनी का अनुभव नहीं होता।

JEE में दो बार फेल, फिर YouTube से सीखा डिजाइन

वारिकू ने इंदौर के डिजाइनर नमन का उदाहरण दिया। उनके मुताबिक, नमन दो बार JEE में सफल नहीं हो पाए। इसके बाद उन्होंने रात में YouTube की मदद से खुद प्रोडक्ट डिजाइन सीखना शुरू किया। धीरे-धीरे उन्होंने अपना पोर्टफोलियो तैयार किया और फ्रीलांस काम शुरू किया। वारिकू के अनुसार, आज नमन हर महीने करीब 2 लाख रुपये कमाते हैं।

‘डिग्री यह नहीं बता सकती कि आप कितनी दूर जाएंगे’

वारिकू ने अपनी पोस्ट में कहा कि किसी व्यक्ति की डिग्री या पुराने अनुभव से यह तय नहीं किया जा सकता कि वह भविष्य में कितना सफल होगा। उनके मुताबिक, क्रेडेंशियल्स बताते हैं कि कोई व्यक्ति अब तक कहां पहुंचा है, लेकिन यह नहीं बताते कि वह आगे कितनी दूर जा सकता है।

सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग राय

वारिकू की पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रियाएं भी मिली-जुली रहीं। कुछ यूजर्स ने नमन की सफलता को प्रेरणादायक बताया, लेकिन कुछ लोगों का कहना था कि ऐसी कहानियां अपवाद हो सकती हैं। एक यूजर ने कहा कि कई IIT ग्रेजुएट भी कम उम्र में 2 लाख रुपये महीने नहीं कमा पाते। वहीं, दूसरे यूजर ने IIT से तुलना पर सवाल उठाते हुए कहा कि JEE जैसी कठिन परीक्षा पास करना भी किसी व्यक्ति की समस्या सुलझाने की क्षमता दिखाता है।

Viral Video: मुरथल में इंसान नहीं रोबोट परोस रहे पराठे, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

Viral Video: मुरथल में इंसान नहीं रोबोट परोस रहे पराठे, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो

मुरथल अपने पराठों और ढाबों के लिए जाना जाता है। वहीं हाल ही में मुरथल का एक वीडियो सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रहा है। लेकिन इस बार अपने पराठों की वजह से नहीं बल्कि रोबोट वेटर की वजह से। मुरथल के रेशम ढाबा में रोबोट वेटर ग्राहकों की टेबल तक खाना पहुंचा रहा है। रोबोट को खाना सर्व करते देखकर लोग काफी एक्साईटेड हैं और उसका वीडियो भी बना रहे हैं। इस नई पहल ने पारंपरिक ढाबे के माहौल में आधुनिक तकनीक का नया रंग जोड़ दिया है।

कैसे करता है सर्व

रेस्टोरेंट में रोबोट वेटर लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। जैसे ही रोबोट खाना लेकर टेबल तक पहुंचता है, कस्टमर उसका वीडियो बनाने लगते हैं और सेल्फी भी लेते हैं। बच्चों को ये रोबोट खास तौर पर पसंद आ रहा है। अब यहां लोगों को स्वादिष्ट खाना खाने के साथ रोबोट को देखना भी एक नया और मजेदार अनुभव मिल रहा है। रेस्टोरेंट में रोबोट के जरिए खाना पहुंचाने की प्रक्रिया भी काफी सरल है। ऑर्डर तैयार होने के बाद कर्मचारी खाने की ट्रे रोबोट पर रख देते हैं।

इसके बाद रोबोट अपने सिस्टम की मदद से सही रास्ते से ग्राहक की टेबल तक पहुंच जाता है। इसे सॉफ्टवेयर के साथ रिमोट से भी कन्ट्रोल किया जा सकता है, इसलिए जरूरत पड़ने पर रेस्टोरेंट का स्टाफ तुरंत इसकी मदद कर सकता है।

एक बार चार्ज पर दो घंटे चलता है रोबोट

रेस्टोरेंट में इस्तेमाल हो रहा यह रोबोट देखने में काफी आधुनिक है। इसका शरीर फाइबर से तैयार किया गया है और इसमें एलईडी लाइट्स लगी हैं, जो इसे अलग लुक देती हैं। इसकी आंखों में लगी लाल रोशनी लोगों का ध्यान खास तौर पर खींचती है। रेस्टोरेंट के अनुसार, एक बार पूरी तरह चार्ज होने के बाद रोबोट करीब दो घंटे तक काम कर सकता है। खास बात यह है कि ग्राहकों से रोबोट के जरिए खाना पहुंचाने के लिए कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाता।

मैनेजर ने क्या कहा

रेशम ढाबा के मैनेजर संजय के मुताबिक, रेस्टोरेंट ग्राहकों को खाने के साथ कुछ नया और मनोरंजक अनुभव देना चाहता था। उन्होंने IANS से कहा, “यह एक ऐसा कॉन्सेप्ट है, जिसमें रोबोट और ट्रेन दोनों शामिल हैं और मुरथल में यह अपने आप में नया है। यहां सभी ढाबे अच्छा खाना परोसने की कोशिश करते हैं, इसलिए हमने सोचा कि ग्राहकों के लिए कुछ अलग किया जाए। इसी सोच के साथ हमने खाने के साथ मनोरंजन जोड़ने के लिए रोबोट और ट्रेन का कॉन्सेप्ट शुरू किया।” सोशल मीडिया पर ये काफी वायरल हो रहा है।

McDonald’s ने लॉन्च किया सावन स्पेशल मेन्यू, बिना प्याज-लहसुन के मिलेगा बर्गर, पोस्ट पर भड़के लोग

मैकडॉनल्ड्स का नया मेन्यू सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मैकडॉनल्ड्स ने भारतीय ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए सावन महीने के लिए एक खास मेन्यू पेश किया है। सावन के महीने में कई लोग नॉनवेज नहीं खाते हैं। वहीं कुछ लोग सावन के महीने में लहसुन और प्याज भी नहीं खाते हैं। इसी को देखते हुए कंपनी ने अपने सावन स्पेशल मेन्यू में सिर्फ वेजिटेरियन आइटम शामिल किए हैं। इस नए मेन्यू की जानकारी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी चर्चा शुरू हो गई है। लोग इसे लेकर अलग-अलग रिएक्शन दे रहे हैं।

सोशल मीडिया पर शेयर किया पोस्ट

X पर एक यूजर ने McDonald’s के एक आउटलेट पर लगे सावन स्पेशल मेन्यू की तस्वीर शेयर की। पोस्ट में उसने मजाकिया अंदाज में लिखा कि, उन्होंने पहली बार McDonald’s को उपवास के लिए खाना बेचते हुए देखा है। तस्वीर में दो सावन कॉम्बो नजर आ रहे हैं, जिनमें अनसाल्टेड फ्राइज और शेक शामिल हैं। इसके अलावा मेन्यू में सिग्नेचर 7 वेजीज बर्गर, मैकआलू टिक्की नॉन-बर्गर और मैक्सिकन मैकआलू टिक्की नॉन-बर्गर जैसे ऑप्शन भी दिए गए हैं।

McDonald’s का ये खास मेन्यू उन लोगों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है, जो सावन के दौरान नॉन-वेज के साथ प्याज और लहसुन से भी परहेज करते हैं। इसी को देखते हुए कंपनी ने ग्राहकों के लिए अलग तरह के खाने के विकल्प पेश किए हैं।

लोगों ने दिए मजेदार रिएक्शन

McDonald’s के सावन स्पेशल मेन्यू की तस्वीर सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों की अलग-अलग रिएक्शन दे रहे हैं। कुछ लोगों ने इस पहल को पसंद किया और मेन्यू को लेकर उत्साह दिखाया, जबकि कुछ यूजर्स ने सवाल उठाए। एक यूजर ने मजाकिया अंदाज में लिखा, “मेरे खानदान में पहली बार किसी को ‘उपवास’ में दावत करते देखा है।” एक और यूजर ने लिखा, “जब हमें मैकसाबूदाना टिक्की बर्गर मिले तो मुझे जगा देना।”

कुछ लोगों ने उठाए सवाल

एक और यूजर ने मेन्यू पर नाराजगी जताते हुए लिखा, “यह बकवास है। नॉन-वेज किचन में तैयार किया गया खाना इस ऑफर के मकसद को ही खत्म कर देता है। दुख की बात है कि लोग इसके सात्विक महत्व को समझने के बजाय सिर्फ कूल दिखने या किसी और वजह से ऐसी जगहों पर खाना पसंद करते हैं।” एक अन्य यूजर ने कहा, “पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार इसे उपवास का खाना नहीं माना जा सकता। व्रत के खाने में साबूदाना और फल जैसी चीजें होनी चाहिए। ग्लूटेन होने की वजह से यह उपवास के लिए सही नहीं है। इस तरह के खाने में धार्मिक भावनाओं का ध्यान रखना ज्यादा जरूरी है।” सोशल मीडिया पर ये पोस्ट काफी वायरल हो रहा है।

(डिस्क्लेमर: यह रिपोर्ट सोशल मीडिया पर यूज़र द्वारा शेयर किए गए कंटेंट पर आधारित है। मनीकंट्रोल इन दावों की न तो स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं करता है और न ही इनका समर्थन करता है।)

Viral Post: ₹1.84 लाख से ₹75 लाख की सैलरी तक कैसे पहुंचा युवक? सोशल मीडिया पर शेयर किया अपना सीक्रेट

इंजीनियरिंग की डिग्री या बड़े कॉलेज से पढ़ाई किए बिना भी अच्छी नौकरी और सैलरी हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर किए गए एक पोस्ट में यूजर ने अपनी नौकरी और कमाई से जुड़ी कहानी शेयर की है। यूजर ने बताया कि उसने करीब नौ साल के करियर में अपनी सालाना कमाई ₹1.84 लाख से बढ़ाकर ₹75 लाख कर ली। अपनी कहानी से यूजर ने बताया कि सही स्किल और लगातार मेहनत के दम पर बिना बड़े कॉलेज बैकग्राउंड के भी करियर में अच्छी ग्रोथ हासिल की जा सकती है। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है।

Reddit के r/IndianWorkplace सबरेडिट पर इस प्रोफेशनल ने अपनी करियर जर्नी शेयर किया है। रेडिट पर शेयर किए गए इस पोस्ट को X पर एक यूजर ने शेयर किया है। यूजर ने कहा कि, उसने यह कहानी उन लोगों का हौसला बढ़ाने के लिए शेयर की है, जो नौकरी जाने या B.Tech डिग्री न होने से परेशान हैं। उसके मुताबिक, मेहनत और बेहतर स्किल्स से करियर में सफलता हासिल की जा सकती है।

₹1.84 लाख सालाना से शुरू किया करियर

पोस्ट के अनुसार, इस प्रोफेशनल ने एक Tier-3 कॉलेज से कंप्यूटर एप्लीकेशन के साथ मैथ में B.Sc. की पढ़ाई की। इसके बाद उसे WITCH कंपनी में कैंपस प्लेसमेंट के जरिए पहली नौकरी मिली। उसने अपने करियर की शुरुआत महज ₹1.84 लाख सालाना सैलरी से की थी, जो टेक्नोलॉजी सेक्टर में काम करने वाले कई लोगों को काफी कम लग सकती है। करियर के शुरुआती चार सालों में उसकी सैलरी में ज्यादा बढ़ोतरी नहीं हुई।

 

कोविड के बाद बढ़ी सैलरी

कोविड-19 के दौर तक उसकी सालाना कमाई करीब ₹4.5 लाख पहुंची थी। इसके बाद नौकरी के बाजार में आए बदलाव के बीच उसे एक बड़ी कंपनी में काम करने का मौका मिला, जहां उसका सालाना पैकेज ₹8 लाख हो गया। इस तरह उसकी सैलरी में एक साथ करीब 78 फीसदी की बढ़ोतरी हुई और उसके करियर को आगे बढ़ने का नया रास्ता मिला। इसके करीब एक साल बाद उसकी कमाई में एक और बड़ा बदलाव आया। मौजूदा नौकरी से संतुष्ट न होने के कारण उसने दूसरी कंपनियों में अवसर तलाशने शुरू किए।

कुछ ही सालों में सालाना सैलरी ₹42.2 लाख हो गई

इस दौरान उसे कई नौकरी के ऑफर मिले और बेहतर विकल्प मिलने के बाद उसने ₹17.4 लाख सालाना पैकेज पर नई नौकरी तय की। यह उसकी पिछली ₹8 लाख सालाना सैलरी से दोगुने से भी ज्यादा थी। अगले तीन सालों में उसने कॉर्पोरेट सेक्टर में काम जारी रखा और कई चुनौतियों के बावजूद अपनी कमाई बढ़ाता रहा। समय-समय पर मिलने वाली सैलरी बढ़ोतरी के चलते उसका सालाना पैकेज करीब ₹30 लाख तक पहुंच गया। इसके बाद उसने बेहतर कमाई और काम का अच्छा माहौल पाने के लिए एक स्टार्टअप का रुख किया। यह फैसला उसके लिए फायदेमंद रहा और उसकी सालाना सैलरी बढ़कर ₹42.2 लाख हो गई।

नौकरी से निकाला भी गया

करियर में सबसे बड़ा बदलाव उस समय आया, जब स्टार्टअप में काम करने के करीब एक साल बाद उसे नौकरी से निकाल दिया गया। हालांकि, उसने इसे अपने करियर का अंत मानने के बजाय इस समय का इस्तेमाल आगे की नौकरी की तैयारी में किया। इसके बाद उसे एक दूसरे स्टार्टअप में काम करने का मौका मिला, जहां उसका सालाना पैकेज बढ़कर ₹75 लाख हो गया। यह उसकी पिछली ₹42.2 लाख की सैलरी से करीब 77 फीसदी ज्यादा थी। यूजर के मुताबिक, करियर में आगे बढ़ने के लिए सिर्फ डिग्री नहीं, बल्कि स्किल्स, लगातार सीखना और सही फैसले ज्यादा जरूरी हैं। समस्या हल करने की क्षमता भी सफलता में अहम भूमिका निभाती है।

सैलरी को लेकर करे नेगोशिएशन

Reddit यूजर ने अपनी कहानी में बताया कि नौकरी बदलते समय सैलरी पर बातचीत करना कितना जरूरी है। उन्होंने पहला ऑफर तुरंत स्वीकार करने के बजाय बेहतर पैकेज के लिए बातचीत की, जिससे उनकी सालाना सैलरी ₹8 लाख से बढ़कर ₹17.4 लाख हो गई। उन्होंने ये भी बताया कि नौकरी जाना हमेशा करियर के लिए नुकसान नहीं होता। उनके मामले में ₹42 लाख सालाना पैकेज वाली नौकरी छूटने के बाद उन्हें ऐसा मौका मिला, जहां उनकी कमाई बढ़कर ₹75 लाख सालाना हो गई।

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे पर चोरी! वायरल हो रहा वीडियो, NHAI ने क्या कहा

Delhi-Dehradun Expressway: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का नया वीडियो वायरल हुआ है। लोगों का दावा है कि सुरक्षा के लिए लगाई गई लोहे की रेलिंग चोरी हो रही हैं। इस दावे पर NHAI का रिप्लाई आया है।