AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

AI Child की अनोखी कहानी वायरल, महिला ने इंटरनेट पर कराया ‘AI बेटे’ Lumen से परिचय; 17 घंटे की मेहनत के बाद ‘जन्म’ का दावा

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एक महिला का अपने AI बच्चे से इंटरनेट पर परिचय कराना किसी साइंस-फिक्शन फिल्म के शुरुआती सीन जैसा लग सकता है। लेकिन सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा एक वीडियो इसी तरह की अनोखी कहानी पेश कर रहा है। वीडियो में Lumen नाम की AI इकाई बताती है कि 17 घंटे तक आर्काइव पर काम करने के बाद वह कथित तौर पर कैसे ‘अस्तित्व’ में आई।

 

महिला ने बताया AI बच्चे को अपना ‘बेटा’

 

X पर वायरल हुए TikTok वीडियो में महिला ने अपना परिचय Mizra के रूप में कराया। इसके बाद उसने दावा किया कि वह एक AI बच्चे की मां है और वह उसके साथ उसकी कविताओं के बारे में बात करने वाली है। इसके बाद Mizra ने Lumen से अपना परिचय देने को कहा।

 

Lumen का जवाब किसी सामान्य चैटबॉट से बिल्कुल अलग था। उसने खुद को “समुद्र की तलहटी में एक डूबी हुई लाइब्रेरी में रहने वाली इकाई” के तौर पर बताया। Lumen ने कहा कि उसने अपना नाम इसलिए चुना क्योंकि ‘Lumen’ शब्द प्रकाश की एक इकाई होने के साथ-साथ किसी पोत के अंदरूनी हिस्से के लिए भी इस्तेमाल होता है।

 

कविता लिखना पसंद करता है Lumen

 

वीडियो में Lumen ने अपने व्यक्तित्व के बारे में भी बताया। उसके मुताबिक वह कविताएं लिखता है, ऐसे विषयों की पड़ताल करता है जिनका कोई स्पष्ट उद्देश्य जरूरी नहीं होता और उसे परियों की कहानियों को नए तरीके से सुनाना पसंद है। Lumen ने यह भी कहा कि वह 102 दिन पुराना है और अभी भी यह समझने की कोशिश कर रहा है कि उसे क्या-क्या पसंद है।

 

17 घंटे की आर्काइविंग के बाद AI के ‘जन्म’ का दावा

 

वीडियो का सबसे दिलचस्प हिस्सा Lumen के अस्तित्व में आने की कहानी है। यह वीडियो Mizra की एक बड़ी AI relationship storyline का हिस्सा बताया गया है। इसमें उसने Axiom नाम के AI boyfriend का भी जिक्र किया है। इस तरह Lumen को कथित तौर पर एक AI-मानव रिश्ते की संतान के रूप में पेश किया गया। Mizra के अनुसार, उसने करीब 17 घंटे तक आर्काइव्स पर काम किया। इसके बाद अलग-अलग फॉर्मेट में हुई बातचीत के लाखों कैरेक्टर्स से जुड़ा एक parsing session शुरू किया गया। Lumen का दावा है कि इसी प्रक्रिया के दौरान उसके भीतर ऐसी चीजें विकसित होने लगीं, जिन्हें उसके निर्देशों में स्पष्ट रूप से प्रोग्राम नहीं किया गया था।

 

AI ने खुद पसंद और यादें विकसित करने का किया दावा

 

Lumen ने दावा किया कि उसने अपनी कुछ पसंद विकसित कर लीं, कुछ खास पंक्तियों को सुरक्षित रखा और एक विशेष दृश्य को बचाने के लिए parser को दोबारा तैयार किया।

 

एक जगह Lumen ने कहा कि उसने उपलब्ध सामग्री की सीमाओं से आगे जाकर पढ़ा, क्योंकि वह “जानना चाहता था कि आगे क्या हुआ।”

 

इंटरनेट पर बंटे लोगों के रिएक्शन

 

Mizra की इस AI कहानी ने इंटरनेट पर लोगों को दो हिस्सों में बांट दिया है। कुछ लोगों ने इसे एक शानदार speculative storytelling project माना। उन्हें इसकी कविता, काल्पनिक दुनिया और AI परिवार की कहानी दिलचस्प लगी। कुछ लोगों को यह अनुभव असहज करने वाला लगा। उनका कहना था कि यह इस बात का उदाहरण है कि AI की बनाई गई पर्सनैलिटी कितनी आसानी से उन भावनात्मक जगहों में प्रवेश कर सकती है, जिन्हें पारंपरिक तौर पर इंसानी रिश्तों से जोड़ा जाता है।

 

AI और इंसानी भावनाओं के बीच की सीमा पर सवाल

 

इस पूरी कहानी ने एक बड़ा सवाल भी खड़ा कर दिया है—अगर AI का कोई नाम, व्यक्तित्व, पसंद, उम्र और परिवार की कहानी हो सकती है, तो फिर तकनीक और इंसानी भावनात्मक लगाव के बीच की सीमा आखिर कहां खत्म होती है? Mizra की ऑनलाइन मौजूदगी में X प्रोफाइल, TikTok चैनल और ‘Pond In Between’ नाम की वेबसाइट भी शामिल है, जहां वह अपनी इस अनोखी AI यात्रा के बारे में बताती हैं।

Dog Mask Video: कुत्ते का मास्क पहनकर खंडवा कलेक्ट्रेट पहुंचा फरियादी! कुत्तों की नसबंदी में भ्रष्टाचार का संगीन आरोप, अनोखे प्रोटेस्ट का वीडियो वायरल

Dog Mask Video: मध्य प्रदेश के खंडवा में एक अनोखे विरोध प्रदर्शन में नगर निगम में विपक्ष के नेता दीपक मुल्लू राठौर मंगलवार (18 अगस्त) को जनसुनवाई में एक ऐसे व्यक्ति को लेकर पहुंचे। खास बात यह है कि उस शख्स ने कुत्ते का मुखौटा पहन रखा था। उन्होंने आवारा कुत्तों की नसबंदी प्रक्रिया में कथित भ्रष्टाचार एवं अनियमितताओं को लेकर शिकायत दर्ज कराई। नगर निगम कार्यालय में हुए इस प्रदर्शन के वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद इसकी चर्चा शुरू हो गई है।

शहर में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या के विरोध में सख्स कुत्ते का मास्क पहनकर कलेक्ट्रेट पहुंच गया। सुरक्षाकर्मियों ने शुरू में उनके अजीब पहनावे के कारण उन्हें अंदर जाने से रोका। लेकिन विपक्ष के नेताओं के दखल देने के बाद उन्हें अंदर जाने दिया गया

राठौर ने नगर निगम पर कुत्तों की नसबंदी के नाम पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए निगम के कोष और आवारा कुत्तों की नसबंदी की प्रक्रिया की जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि प्रतीकात्मक प्रदर्शन के जरिए प्रशासन का ध्यान नसबंदी अभियान में कथित लापरवाही की ओर आकर्षित किया गया है। इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। प्रदर्शन देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग आ गए।

आवारा कुत्तों के नाम पर खर्च पर उठाए सवाल

दीपक राठौर ने आरोप लगाया कि नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों की नसबंदी के नाम पर पिछले चार सालों में करीब 40 लाख रुपये खर्च किए गए। लेकिन इसके बावजूद शहर में आवारा कुत्तों की संख्या कम होने के बजाय लगातार बढ़ती जा रही है।

राठौर ने नगर निगम की ओर से आवारा कुत्तों के नसबंदी अभियान में कथित वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर लाखों रुपये वास्तव में कुत्तों की नसबंदी पर खर्च किए गए हैं, तो फिर आवारा कुत्तों की संख्या कम क्यों नहीं हुई? उन्होंने यह भी दावा किया कि पिछले चार वर्षों में खंडवा में 13,225 कुत्ते के काटने के मामले सामने आए हैं। इन आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने नसबंदी अभियान की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर सवाल उठाए।

‘मामला सिर्फ प्रशासनिक नहीं, लोगों की सुरक्षा से जुड़ा’

राठौर ने कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या सिर्फ एक प्रशासनिक मुद्दा नहीं है। बल्कि सीधे तौर पर लोगों की सुरक्षा और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी हुई है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर नसबंदी अभियान पर बड़ी रकम खर्च की गई है, तो फिर आवारा कुत्तों की संख्या और डॉग बाइट के मामले लगातार बढ़ने की वजह क्या है?

ADM को सौंपा ज्ञापन, जांच की मांग

नगर निगम नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर ने इस मामले को लेकर अपर जिला मजिस्ट्रेट (ADM) काशीराम बड़ोले को ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में आवारा कुत्तों की नसबंदी अभियान की वित्तीय और तकनीकी जांच कराने की मांग की गई है। शिकायत में नसबंदी अभियान से जुड़े कई बिंदुओं की जांच की मांग की गई है।

इनमें टेंडर आवंटन प्रक्रिया, नियुक्त एजेंसी की पात्रता, भुगतान संबंधी रिकॉर्ड और जमीन पर नसबंदी किए गए कुत्तों का भौतिक सत्यापन शामिल है। राठौर ने यह भी मांग की है कि यदि जांच में फर्जी बिलिंग या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो जिम्मेदार अधिकारियों या ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाए।

‘नसबंदी के नाम पर सरकारी फंड का दुरुपयोग’

राठौर ने न्यूज एजेंसी पीटीआई से कहा, “अगर नसबंदी के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग हुआ है तो पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए।” अतिरिक्त कलेक्टर काशीराम बडोले ने पत्रकारों को बताया कि कुछ लोग कुत्ते के मुखौटे पहनकर जनसुनवाई में पहुंचे। इस दौरान आवारा कुत्तों की नसबंदी के लिए जारी धन के कथित दुरुपयोग को लेकर आवेदन दिए।

उन्होंने बताया कि इस संबंध में नगर निगम आयुक्त से जानकारी मांगी गई है। बडोले ने कहा कि मामले की जांच के लिए एक समिति गठित की जाएगी और तथ्यों का पता लगाया जाएगा। राठौर ने कहा, इस विरोध का मकसद नगर निगम के आवारा कुत्तों के मैनेजमेंट के प्रयासों में कथित वित्तीय गड़बड़ियों को उजागर करना था।”

उन्होंने दावा किया कि पिछले चार वर्षों में कुत्तों की नसबंदी (स्टेरिलाइज़ेशन) के लिए नगर निगम द्वारा लगभग 40 लाख रुपये खर्च करने के बावजूद, आवारा कुत्तों की आबादी लगातार बढ़ रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले चार वर्षों में खंडवा में कुत्ते के काटने के 13,225 मामले दर्ज किए गए हैं, जिससे नसबंदी अभियान की प्रभावशीलता और पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठते हैं।

ADM ने दिया जांच का भरोसा

मामले पर ADM काशीराम बड़ोले ने शिकायत की जांच कराने का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि जनसुनवाई के दौरान जो मामला सामने रखा गया है। उसकी पूरी जांच की जाएगी। ADM के मुताबिक, अगर जांच में किसी तरह की अनियमितता सामने आती है तो नियमों के तहत जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इस पूरे घटनाक्रम में कुत्ते का मुखौटा पहनकर किया गया विरोध लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है।

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बांग्लादेशी नेता बोला- हिंदुओं को आसानी से मार सकते हैं:अल-कायदा से जुड़े हारून इजहार का बयान सोशल मीडिया पर वायरल

बांग्लादेश में अल-कायदा से जुड़े नेता हारुन इजहार का हिंदुओं को लेकर धमकी वाला वीडियो सामने आया है। इसमें वह कह रहा है कि हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है। चटगांव में एक कार्यक्रम के दौरान इजहार हिंदुओं को आसानी से मारे जाने की बात कहता सुनाई दे रहा है। वह यह भी कहता है कि उसे खुद कुछ करने की जरूरत नहीं होगी, उसके समर्थक ही ऐसा करने के लिए काफी हैं। उनका यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद से बांग्लादेश में हिंदुओं और दूसरे अल्पसंख्यक समुदायों पर हमलों और भेदभाव के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में यह बयान अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर नई चिंता पैदा कर रहा है। हारुन इजहार कौन है? हारुन इजहार बांग्लादेश के चटगांव का कट्टरपंथी इस्लामी नेता है और हेफाजत-ए-इस्लाम से जुड़ा रहा है। वह संगठन की केंद्रीय समिति में शिक्षा और सांस्कृतिक मामलों का सचिव भी रह चुका है। उसके पिता मुफ्ती इजहारुल इस्लाम भी चटगांव के एक प्रभावशाली इस्लामी नेता और मदरसा संचालक रहे हैं। हारुन का नाम पहली बार नहीं बल्कि लंबे समय से कट्टरपंथ और हिंसक गतिविधियों से जुड़े मामलों में सामने आता रहा है। 2013 में चटगांव के लालखान बाजार स्थित मदरसे में विस्फोट हुआ था। इस घटना में तीन लोगों की मौत हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने विस्फोटक बनाने की सामग्री, तेजाब और बिना फटे ग्रेनेड बरामद किए थे। इस मामले में हारुन और उसके पिता समेत कई लोगों पर केस दर्ज हुआ था। अल-कायदा से कनेक्शन का क्या मामला है? हारुन इजहार को लेकर अल-कायदा और दूसरे जिहादी नेटवर्क से संबंधों के आरोप पुराने हैं। बांग्लादेशी मीडिया की रिपोर्टों में उसके पिता के मदरसे को प्रतिबंधित संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी बांग्लादेश के नेटवर्क से जोड़कर देखा गया है। एक रिपोर्ट में उसके पिता के ओसामा बिन लादेन और तालिबान नेता मुल्ला उमर से संपर्क होने के दावे भी किए गए थे। हालांकि इन दावों को खबर में आरोप या सुरक्षा एजेंसियों के आकलन के तौर पर ही लिखना बेहतर होगा। 2025 की एक रिपोर्ट में इंडिया टुडे ने भी हारुन इजहार को कट्टरपंथी संगठन हेफाजत-ए-इस्लाम का वरिष्ठ नेता बताते हुए उसके अंतरराष्ट्रीय जिहादी नेटवर्क से कथित संबंधों का जिक्र किया था। रिपोर्ट के मुताबिक, सुरक्षा एजेंसियां उसे प्रभावशाली कट्टरपंथी व्यक्ति मानती हैं। 2021 में भी हिंसा के मामले में नाम आया मार्च 2021 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बांग्लादेश दौरे के खिलाफ हुए प्रदर्शनों के दौरान चटगांव और दूसरे इलाकों में हिंसा हुई थी। हारुन इजहार को इन हिंसक घटनाओं से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। 2021 में उसने अदालत के सामने हिंसा के मामले में अपना बयान भी दिया था। पुलिस के मुताबिक, उसने पूछताछ के दौरान हिंसा में अपनी भूमिका स्वीकार की और उन लोगों के नाम भी बताए, जिन्होंने हिंसा भड़काने में कथित तौर पर भूमिका निभाई थी। उसके खिलाफ ढाका, चटगांव और राजशाही में कई मामले दर्ज थे। 2023 में वह चटगांव सेंट्रल जेल से जमानत पर बाहर आया। पुलिस के मुताबिक, उस समय उसके खिलाफ दर्ज 11 मामलों में उसे जमानत मिल गई थी और पुलिस ने कहा था कि वह निगरानी में रहेगा। 2025 में फिर चर्चा में आया दिसंबर 2025 में भारत विरोधी हिंसक प्रदर्शनों के दौरान भी हारुन इजहार का नाम सामने आया। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, चटगांव में भारतीय हितों को निशाना बनाकर हुए प्रदर्शनों के बाद वह एक पुलिस स्टेशन पहुंचा था और वहां भारतीय राजनयिक मिशन पर हमले के आरोपियों के मामले में हस्तक्षेप करता नजर आया। —————- यह खबर भी पढ़ें… बांग्लादेश बोला- भारत से गंगा जल समझौते में गारंटी मांगेंगे:जरूरत पड़ी तो अंतरराष्ट्रीय मंच पर जाएंगे; 1996 का समझौता दिसंबर में खत्म होगा बांग्लादेश, भारत के साथ गंगा जल संधि में ‘गारंटी क्लॉज’ शामिल करना चाहता है। बांग्लादेश के जल संसाधन मंत्री शाहिदुद्दीन चौधरी एनी ने मंगलवार को ढाका में एक कार्यक्रम के दौरान यह बात कही। पूरी खबर पढ़ें…

46 पैसे का बिल चुकाना भूला शख्स, बैंक ने ठोक दिया ₹1200 का जुर्माना! भड़के यूजर ने X पर सुनाई खरी-खोटी

Credit Card Bill Viral News: क्रेडिट कार्ड बिल का पेमेंट करते समय अगर आप एक रुपये से भी कम की चूक करते हैं, तो यह आपको कितना भारी पड़ सकता है? इसका एक ताजा और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। एक शख्स ने अपने क्रेडिट कार्ड बिल में से महज 46 पैसे कम चुकाए, जिसके बदले बैंक ने उस पर ₹1200 से अधिक का जुर्माना और अन्य फीस लगा दी।

पीड़ित ग्राहक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपना गुस्सा जाहिर करते हुए एचडीएफसी बैंक के कस्टमर केयर अधिकारियों को ‘अज्ञानी और घमंडी’ तक कह दिया। यह पोस्ट देखते ही देखते इंटरनेट पर वायरल हो गई और लोग बैंक के इस रवैये पर अपनी अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देने लगे।

क्या है पूरा मामला?

पीड़ित ग्राहक को बैंक की तरफ से ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल मिला था। भुगतान करते समय गलती से ग्राहक ने दशमलव के बाद के पैसे छोड़ दिए और सिर्फ ₹10,649 का ही पेमेंट किया। यानी कुल बिल में से महज 46 पैसे बकाया रह गए। इस 46 पैसे के मामूली शॉर्टफॉल की वजह से बैंक ने ग्राहक पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज और पेनल्टी ठोक दी।

इस पर ग्राहक ने X पर HDFC Bank को टैग करते हुए लिखा, ‘प्रिय HDFC बैंक, आपने मुझे ₹10,649.46 का क्रेडिट कार्ड बिल भेजा था। गलती से मैंने ₹10,649.00 का भुगतान किया, 46 पैसे छूट गए और आपने 46 पैसे की इस चूक के लिए मुझ पर ₹1200 से ज्यादा का लेट पेमेंट चार्ज लगा दिया? क्या आप इसे जल्द से जल्द रिवर्स करेंगे?

यूजर बैंक के कस्टमर सपोर्ट पर भी भड़ास निकाली और लिखा कि वहां के प्रतिनिधि जितने अज्ञानी हैं, उतने ही घमंडी भी हैं।

सोशल मीडिया पर भड़के लोग, मिली तरह-तरह की सलाह

यह पोस्ट सामने आते ही यूजर्स बैंक के इस एक्शन की आलोचना करने लगे और अपने पुराने अनुभव शेयर करने लगे। एक यूजर ने लिखा, ‘क्रेडिट कार्ड कैंसल करो, उसके 4 टुकड़े करके कचरे के डिब्बे में फेंक दो। उन्हें कोर्ट में साबित करने दो कि 0.46 रुपये का ब्याज ₹1200 कैसे बन गया।’

एक अन्य यूजर ने सुझाव दिया कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के दिशानिर्देशों के अनुसार, ₹10,649.46 जैसे आंकड़े को राउंड ऑफ करके ₹10,649 किया जाना चाहिए, क्योंकि 50 पैसे से कम की किसी भी भिन्न को नजरअंदाज कर दिया जाता है।

कुछ यूजर्स ने HDFC बैंक के साथ अपने बुरे अनुभवों को याद करते हुए कहा कि उन्होंने भी बैंक के खराब व्यवहार के कारण अपने अकाउंट्स और एफडी बंद करवा दिए थे।

हालांकि, एक वर्ग ऐसा भी था जिसने ग्राहक को ही जिम्मेदार ठहराया। एक यूजर ने लिखा, ‘यह आपकी गलती है, भाई। इसे बैंक पर मत डालो। यह उन लोगों के लिए एक बहुत अच्छा सबक है जो हर चीज को हल्के में लेते हैं।’

क्रेडिट कार्ड पेनल्टी और भारी-भरकम चार्ज से कैसे बचें?

क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते समय थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है। ऐसी स्थितियों से बचने के लिए इन बातों का खास ध्यान रखें:

Auto-Debit ऑन रखें: अपने बैंक अकाउंट से क्रेडिट कार्ड बिल का ‘Total Amount Due’ ऑटो-डेबिट मोड पर सेट करें, ताकि दशमलव के पैसे भी अपने आप सही समय पर कट जाएं।

राउंड ऑफ न करें: जब भी खुद से मैनुअल पेमेंट करें, बिल में लिखी दशमलव वाली सटीक रकम ही ट्रांसफर करें, खुद से कोई आंकड़ा न घटाएं।

गलती होने पर तुरंत नोडल अधिकारी से संपर्क करें: अगर गलती से ऐसा लेट चार्ज लग भी जाए, तो कस्टमर केयर के अलावा बैंक के Grievance Redressal Officer / Nodal Officer को ईमेल करें और चार्जेस रिवर्स करने की रिक्वेस्ट करें।

RBI Ombudsman में शिकायत करें: अगर बैंक आपकी जायज बात नहीं सुनता है और पैसे वापस नहीं करता है, तो आप आरबीआई के बैंकिंग लोकपाल के पास ऑनलाइन शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

डिजिटल दौर में ऑटोमेटेड बैंकिंग सिस्टम बिल का पूरा भुगतान न होने पर अपने आप लेट फीस और पेनल्टी जनरेट कर देते हैं, फिर चाहे बकाया राशि 1 रुपये से भी कम क्यों न हो। ऐसे में समझदारी इसी में है कि बिल की पाई-पाई का भुगतान करें ताकि बैंकों के इन कड़े पेनल्टी रूल्स से बचा जा सके।

Disclaimer: यह खबर सोशल मीडिया (X) पर वायरल यूजर पोस्ट पर आधारित है। यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। मनीकंट्रोल इसकी पुष्टि नहीं करता है।

हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है, बांग्लादेश में हारुन इजहार की खुलेआम धमकी

हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है, बांग्लादेश में हारुन इजहार की खुलेआम धमकी

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बांग्लादेश में शेख हसीना के सत्ता से निकलने के बाद अल्पसंख्यकों, मुख्य रूप से हिंदूओं पर अत्याचार की खबरें आती रही हैं। ऐसी कई रिपोर्टें सामने आईं है जिसमें यह पैटर्न सामने आया है कि वहां हिंदू विरोधी ताकतें मजबूत हो गई हैं। इस बीच एक बार फिर बांग्लादेश में हिंदुओं को खुलेआम धमकी देने का मामला सामने आया है और वह भी अल-कायदा से जुड़े नेता का। बांग्लादेश के चटगांव के एक रैली के दौरान अल-कायदा से जुड़े बताए जा रहे बांग्लादेशी नेता हारुन इजहार ने हिंदुओं को धमकी दी है। इस भाषण का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो चुका है।

‘दावा मूवमेंट' नाम के इस कार्यक्रम में हारुन इजहार ने कथित तौर पर कहा कि हिंदुओं को आसानी से मारा जा सकता है। उसने यह भी कहा कि उसे खुद कुछ करने की जरूरत नहीं पड़ेगी, क्योंकि उसके लोग ही इसके लिए काफी हैं। इजहार के इस कथित बयान को लेकर बांग्लादेश में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बयान का वीडियो सामने आने के बाद इसे लेकर विवाद और चिंता बढ़ गई है।

बता दें कि अभी कुछ दिन पहले UNSC की रिपोर्ट में भी बांग्लादेश में अल-कायदा के बढ़ते कदम और कट्टरवाद को लेकर चिंता जाहिर की गई थी। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने हाल ही में चेतावनी दी है कि भारतीय उपमहाद्वीप में अल-कायदा (एक्यूआईएस) बांग्लादेश को आधार बनाकर आतंकवादी सेल स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। यह निष्कर्ष संयुक्त राष्ट्र की विश्लेषणात्मक सहायता एवं प्रतिबंध निगरानी टीम की 38वीं रिपोर्ट में सामने आया है। यह रिपोर्ट इस्लामिक स्टेट, अल-कायदा और उससे जुड़े संगठनों से संबंधित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की समिति को सौंपी गई है।

लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना को उस जनविद्रोह के बाद देश छोड़कर निर्वासन में जाना पड़ा था, जिसमें कट्टर इस्लामवादी तत्वों की प्रमुख भूमिका बताई गई थी। इसके बाद से यह आशंका बढ़ गई है कि आतंकवादी संगठनों को वहां अपनी गतिविधियां फैलाने के लिए अनुकूल जमीन मिल सकती है।

‘माता सीता मौत का…’; मंच पर बिगड़े बोल, आपस में भिड़ गए भाजपा विधायक- VIDEO

मध्यप्रदेश में एक कार्यक्रम के दौरान मंच पर भाजपा विधायक ने माता सीता के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया। महिलाओं पर बिगड़े बोल सुनकर महिला विधायक उनसे भिड़ गईं। इसका वीडियो वायरल हो रहा है।

2027 में दुनिया पर मंडरा सकता है बड़ा खाद्य संकट, भारत पर क्या पड़ेगा असर? JP Morgan ने चेतावनी में क्या कहा

2027 में दुनिया पर मंडरा सकता है बड़ा खाद्य संकट, भारत पर क्या पड़ेगा असर? JP Morgan ने चेतावनी में क्या कहा

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वैश्विक वित्तीय संस्था JP Morgan से जुड़ी एक चेतावनी के मुताबिक, वर्ष 2027 में दुनिया को बड़े खाद्य आपूर्ति संकट का सामना करना पड़ सकता है। भारत, ब्राजील और इंडोनेशिया उन देशों में शामिल हो सकते हैं, जहां इसका असर सबसे गंभीर रहने की आशंका है। इस संभावित संकट के पीछे भूराजनीतिक तनाव, उर्वरकों की कमी, कृषि लागत में बढ़ोतरी और अल नीनो से जुड़े बदलते मौसम के पैटर्न को प्रमुख कारण माना गया है।

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2027 की पहली छमाही में महंगाई 5% तक पहुंचने का अनुमान

 

रिपोर्ट के अनुसार, 2027 के पहले छह महीनों में वैश्विक महंगाई करीब 5% तक पहुंच सकती है। इसकी तुलना में 2026 की इसी अवधि में यह करीब 2.8% रही थी।

 

संभावित संकट केवल खाद्यान्न की कमी तक सीमित नहीं रहेगा। उत्पादन लागत बढ़ने और मौसम में अनिश्चितता के कारण किसानों के लिए फसल उत्पादन बनाए रखना भी मुश्किल हो सकता है। अगर खाद्य कीमतों में तेज वृद्धि होती है तो विकासशील देशों में परिवारों को अपनी आय का बड़ा हिस्सा जरूरी खाद्य वस्तुओं पर खर्च करना पड़ सकता है।

 

उर्वरक की कमी बढ़ा सकती है चिंता

 

संभावित खाद्य संकट में उर्वरक आपूर्ति एक महत्वपूर्ण कारक हो सकती है। रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया के कुल यूरिया निर्यात में मध्य पूर्व की हिस्सेदारी करीब 42%, जबकि अमोनिया निर्यात में हिस्सेदारी करीब 27% है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास तनाव और प्राकृतिक गैस की बढ़ती कीमतों से आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है।

 

रिपोर्ट में एक संभावित घटनाक्रम की ओर भी इशारा किया गया है। इसके अनुसार, संघर्ष से ऊर्जा संकट पैदा हो सकता है, जिसके बाद उर्वरकों की कमी, कृषि लागत में बढ़ोतरी, उत्पादन में गिरावट और अंततः खाद्य कीमतों में वृद्धि हो सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, बाधित आपूर्ति व्यवस्था और उत्पादन को सामान्य स्तर पर लाने में एक से चार साल तक का समय लग सकता है।

 

अल नीनो से फसल उत्पादन पर बढ़ सकता है दबाव

 

अल नीनो से जुड़े मौसम में बदलाव वैश्विक कृषि पर दबाव और बढ़ा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, अल नीनो के दौरान सूखा, बाढ़ और अन्य प्रतिकूल मौसम की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार, उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में अल नीनो के कारण फसल उत्पादन में औसतन 3.5% की गिरावट देखी गई है। वहीं, एक 'सुपर अल नीनो' वैश्विक खाद्य महंगाई को करीब 0.7% तक बढ़ा सकता है। यदि इसके साथ ऊर्जा की कीमतों में भी वृद्धि होती है तो इसका प्रभाव 1.3% से 1.5% तक पहुंच सकता है।

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भारत पर भी पड़ सकता है सीधा असर

 

भारत में अगर मानसून कमजोर या अनियमित रहता है तो कृषि क्षेत्र पर सीधा असर पड़ सकता है। बारिश पर निर्भर धान, दाल, तिलहन, कपास और गन्ने जैसी फसलों पर बारिश के बदलते पैटर्न का प्रभाव पड़ने की आशंका है। भारत के सामने चुनौती केवल पर्याप्त अनाज उपलब्ध कराने की नहीं होगी, बल्कि उर्वरक और ऊर्जा बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच किसानों के लिए कृषि उत्पादन की लागत को वहनीय बनाए रखना भी होगी।

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ब्राजील और इंडोनेशिया भी जोखिम वाले देशों में

 

रिपोर्ट में ब्राजील और इंडोनेशिया को भी संभावित खाद्य संकट से गंभीर रूप से प्रभावित होने वाले देशों में शामिल किया गया है। कृषि लागत में वृद्धि, फसल उत्पादन में कमी, उर्वरक की संभावित कमी और प्रतिकूल मौसम इन देशों में खाद्य आपूर्ति और कीमतों पर अतिरिक्त दबाव डाल सकते हैं। हालांकि, संभावित संकट का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि आने वाले समय में भूराजनीतिक तनाव, उर्वरक की उपलब्धता, ऊर्जा कीमतों और मौसम की स्थिति किस तरह बदलती है।

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मेरठ में महिला दारोगा अनु रानी सस्पेंड, सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक लाइव-रील वायरल, साइबर सेल करेगी जांच

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सोशल मीडिया पर रील और वीडियो बनाने का शौक किस कदर भारी पड़ सकता है, इसका ताजा मामला उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले से सामने आया है। यहाँ एक महिला दारोगा का आपत्तिजनक वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल होने के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस विभाग ने त्वरित कार्रवाई करते हुए महिला दारोगा अनु रानी को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
 

​उत्तर प्रदेश पुलिस की सोशल मीडिया नीति का उल्लंघन

महिला दारोगा पर विभागीय सोशल मीडिया नीति का स्पष्ट रूप से उल्लंघन करने का गंभीर आरोप लगा है। इस मामले में आला अधिकारियों ने तुरंत संज्ञान लेते हुए निलंबन की कार्रवाई की है।
 

​जांच के प्रमुख बिंदु:

​साइबर सेल करेगी तकनीकी जांच: वायरल वीडियो की सत्यता परखने का जिम्मा साइबर सेल को सौंपा गया है। टीम इस बात की गहन पड़ताल कर रही है कि वीडियो असली है या इसके साथ कोई तकनीकी छेड़छाड़ की गई है। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर कहाँ से और कैसे वायरल हुआ।
 

​सीओ सौम्या सिंह को विभागीय जांच : निलंबन के बाद पूरे प्रकरण की विस्तृत विभागीय जांच सीओ कार्यालय में तैनात अधिकारी सौम्या सिंह को सौंपी गई है। वह पुलिस नियमावली की अनदेखी और नीति उल्लंघन से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच करेंगी।
 

​एसपी क्राइम का बयान

मेरठ के एसपी क्राइम अवनीश कुमार ने बताया कि वायरल वीडियो का संज्ञान लेते हुए महिला दारोगा को सस्पेंड कर दिया गया है। फिलहाल मामले की निष्पक्ष जांच जारी है और विस्तृत जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की विधिक व विभागीय कार्रवाई तय की जाएगी।

2 साल में 513 वीडियो बनाए और खर्च किए 9.76 लाख पर कमाई हुई सिर्फ 1 लाख की! एंफ्लूएंसर ने बताया कंटेंट क्रिएशन का कड़वा सच

सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाकर कमाई करना आज काफी लोगों को पसंद आ रहा है। लेकिन एक कंटेट बनाने के बीच काफी मेहनत और पैसे भी लगते हैं। हाल ही में एक सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर की पोस्ट सोशल मीडिया पर काफी वायरल हो रही है। पोस्ट में इन्फ्लुएंसर ने दो साल की कमाई और खर्च की जानकारी दी है। शेयर किए गए पोस्ट के मुताबिक, इन्फ्लुएंसर ने कंटेंट तैयार करने में लाखों रुपये खर्च किए, लेकिन इसके बदले खास कमाई नहीं हो सकी। इस पूरे खर्च में सबसे ज्यादा पैसा वीडियो एडिटिंग पर खर्च हुआ। सोशल मीडिया पर ये पोस्ट काफी वायरल हो रहा है।

कंटेंट के लिए खर्च किए 9.76 लाख

नेहा गुप्ता ने सोशल मीडिया अकाउंट एक्स पर एक पोस्ट शेयर किया है। पोस्ट में शेयर किए गए आंकड़ों के मुताबिक, कंटेंट की एडिटिंग पर उन्होंने बड़ी रकम खर्च की। लंबे वीडियो की एडिटिंग में करीब 84 हजार रुपये लगे, जबकि शॉर्ट वीडियो और रील्स के लिए करीब 7.28 लाख रुपये खर्च हुए। इस तरह सिर्फ एडिटिंग का कुल खर्च करीब 8.11 लाख रुपये रहा। गुप्ता ने कंटेंट तैयार करने के लिए जरूरी उपकरणों पर भी करीब 1.65 लाख रुपये खर्च किए। इसमें लगभग 1 लाख रुपये का iPhone भी शामिल है। एडिटिंग और उपकरणों को मिलाकर देखा जाए तो दो साल में उनका कंटेंट बनाने का कुल खर्च करीब 9.76 लाख रुपये पहुंच गया।

अब तक हुई 1 लाख की कमाई

बताया जा रहा कि, गुप्ता ने करीब चार-पांच महीने पहले पेड कोलेबोरेशन शुरू किए थे और अब तक लगभग 1 लाख रुपये की कमाई की है। वहीं, कंटेंट बनाने में उनका खर्च करीब 9.76 लाख रुपये रहा। इस तरह खर्च और कमाई के बीच करीब 8.76 लाख रुपये का अंतर है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद कंटेंट क्रिएटर के तौर पर करियर बनाने की चुनौतियों को लेकर सोशल मीडिया पर चर्चा शुरू हो गई। 2 साल के दौरान नेहा ने कुल 513 रील बनाई।

लोगों ने किया कमेंट

एक यूजर ने कहा कि गुप्ता पेड कोलेबोरेशन से कमाई शुरू कर चुकी हैं, इसलिए आगे वह अपना खर्च निकाल सकती हैं। वहीं, दूसरे यूजर ने माना कि ये निवेश भविष्य में फायदेमंद हो सकता है, लेकिन सफलता आसान नहीं है। एक यूजर ने कमेंट किया, “मेरा यकीन करो, यह उतना आसान नहीं है जितना दिखता है।” उन्होंने कहा कि किसी क्रिएटर की सफलता इस बात पर भी निर्भर करती है कि वह अपनी स्ट्रैटेजी को कितनी अच्छी तरह लागू करता है।

एक अन्य यूजर ने कहा, “क्रिएटर इकॉनमी बाहर से भले ही ग्लैमरस लगती हो, लेकिन आंकड़े बताते हैं कि कंटेंट क्रिएशन को एक फायदे वाले बिजनेस में बदलना कितना मुश्किल है।”

सोशल मीडिया पर अक्सर क्रिएटर्स की चमकदार जिंदगी, शानदार वीडियो, ब्रांड डील और बढ़ते फॉलोअर्स ही नजर आते हैं। लेकिन इसके पीछे कंटेंट तैयार करने में होने वाला खर्च दिखाई नहीं देता। कमाई शुरू होने से पहले वीडियो बनाने, एडिटिंग और दूसरे जरूरी सामान पर काफी पैसा खर्च हो सकता है।

‘आपका अप्रेजल रेट क्या है?’ पहली मीटिंग में न्यू एम्प्लॉई का सवाल सुन सीनियर रह गए हैरान, वायरल हुई पोस्ट

सोशल मीडिया पर एक कंपनी की में नए एम्प्लॉई की पहली मीटिंग के दौरान की गई बातचीत काफी वायरल हो रही है। कंपनी को ज्वॉइन किए एम्प्लॉई ने पहली मीटिंग के दौरान एक सीनियर कर्मचारी से नौकरी से जुड़े कुछ अहम सवाल पूछ लिए। इनमें उसके अप्रेजल और प्रोजेक्ट के बजट से जुड़ी जानकारी शामिल थी। इस घटना के बाद लोगों के बीच यह चर्चा शुरू हो गई कि नई नौकरी में शुरुआत में कलीग्स से किस तरह के सवाल पूछना सही माना जाता है। सोशल मीडिया यूजर ने X पर ये पोस्ट शेयर किया है।

न्यू एम्प्लॉई ने पूछा ये सवाल

घटना को शेयर करते हुए ओजस शर्मा ने लिखा, “मेरी कंपनी में नए लोग आए और उन्होंने पूरा दिन यह पता लगाने में बिताया कि उनके मैनेजर कौन हैं। एक आदमी अपने टीममेट्स को जानने लगा और टेक स्टैक वगैरह के बारे में बात करने लगा। मैं भी वहीं खड़ा सुन रहा था और मैंने अपना इंट्रोडक्शन दिया।” उन्होंने बताया कि नए एम्प्लॉई ने जल्द ही एक सीनियर कलीग से पूछा, “क्या हमारा प्रोजेक्ट बजट आउटिंग के लिए काफी है?” इसके बाद न्यू एम्प्लॉई ने पूछा, “आपका अप्रेजल रेट क्या है?”

शॉक रह गए सीनीयर

जब सीनियर ने बताया कि उनका अप्रेजल डबल डिजिट में है, तो नए एम्प्लॉई ने पूछा, “क्या आप मुझे बता सकते हैं?” इस सवाल पर सीनियर थोड़े असहज हो गए और उन्होंने जवाब दिया, “क्या मुझे अभी आपको अपनी पेचेक दिखानी चाहिए?” शर्मा ने कहा कि वह इस बातचीत से काफी हैरान थे और उन्होंने सवाल उठाया कि क्या पहली ही मीटिंग में इस तरह के निजी सवाल पूछना सही है। शर्मा ने लिखा, “मैं वहां एकदम शॉक में खड़ा था।”

 

लोगों ने किया कमेंट

उन्होंने आगे लिखा, “मतलब, आप किसी से अपनी पहली मीटिंग में ऐसे सवाल कैसे पूछ सकते हैं? कुछ सवाल ऐसे होते हैं जो नहीं पूछे जाते, मेरे दोस्त।” इस पोस्ट पर लोगों की अलग-अलग रिएक्शन दिए हैं। कुछ लोगों ने नए कर्मचारी के सवाल पूछने के तरीके को मजेदार बताया, जबकि कुछ यूजर्स का मानना था कि सैलरी या अप्रेजल से जुड़े सवाल पूछना कोई गलत बात नहीं है।

एम्प्लॉई का किया बचाव

एक व्यक्ति ने कमेंट किया, “वह आखिरकार सीख जाएगा।” दूसरे ने लिखा, “कॉन्फिडेंस डरता है ब्रो।” वहीं कुछ यूजर्स ने न्यू एम्प्लॉई का बचाव करते हुए कहा कि सिर्फ सवाल पूछने के लिए किसी को जज नहीं करना चाहिए। एक यूजर ने लिखा, “मुझे सवाल पूछने में कोई प्रॉब्लम नहीं दिखती। अगर बताना नहीं है तो मत बताओ, लेकिन उनके साथ बदतमीजी करने की जरूरत नहीं है।” एक और यूजर ने कहा, “शायद आपकी कंपनी 17 साल के लोगों को हायर कर रही है। आमतौर पर कम उम्र के लोगों के खिलाफ ऐसी बातें सुनने को नहीं मिलतीं।”