हरिद्वार कांवड़ मेले में भिखारी बनकर बैठा यूट्यूबर, 8 घंटे में कमाए 4,000 रुपये

हरिद्वार के कांवड़ मेले में एक यूट्यूब सोशल एक्सपेरिमेंट ने सोशल मीडिया पर बहस छेड़ दी है। यूट्यूबर पुरुषोत्तम वशिष्ठ और उनके दोस्त सचिन ने यह जानने की कोशिश की कि अगर कोई व्यक्ति धार्मिक मेले में भिखारी बनकर पैसे मांगे, तो एक दिन में कितनी रकम जुटा सकता है। सचिन करीब 8 घंटे तक भिखारी का हुलिया बनाकर लोगों के बीच घूमे और दोनों के मुताबिक इस दौरान करीब ₹4,000 जमा हुए।

फटे कपड़े, हाथ में कटोरा और गले में QR कोड

एक्सपेरिमेंट के लिए सचिन ने फटे-पुराने कपड़े पहने और हाथ में छोटा सा कटोरा लेकर श्रद्धालुओं के बीच पैसे मांगने लगे। इस प्रयोग को थोड़ा अलग बनाने के लिए उन्होंने गले में UPI QR कोड भी लटका रखा था, ताकि लोग चाहें तो डिजिटल पेमेंट से भी मदद कर सकें। शुरुआत में दोनों को लगा था कि पूरे दिन में शायद ₹1,000 से ₹2,000 तक ही मिल पाएंगे।

शुरुआत में मिले सिर्फ ₹130

मेले में पैसे मांगने के शुरुआती घंटों में सचिन को ज्यादा सफलता नहीं मिली। काफी कोशिश के बाद उनके पास करीब ₹130 ही जमा हुए। कुछ लोगों ने पैसे देने से साफ इनकार कर दिया, जबकि कुछ श्रद्धालुओं ने उनकी मदद की। कई लोगों ने पैसे न होने की बात कहकर आगे बढ़ना बेहतर समझा, तो कुछ ने सचिन के साथ अच्छा व्यवहार किया।

दुकानदार ने दे दी चश्मे की जोड़ी

मेले में घूमते हुए सचिन कई दुकानदारों से भी बातचीत करने लगे। इसी दौरान एक सनग्लास विक्रेता ने उन्हें चश्मे की एक जोड़ी दे दी। इस घटना के बाद सचिन ने मजाकिया अंदाज में खुद को ‘प्रोफेशनल भिखारी’ तक कह दिया। वहीं, गले में लगे UPI QR कोड से भी करीब ₹40 का डिजिटल भुगतान मिला।

असली भिखारी से हुई दिलचस्प बातचीत

एक वक्त सचिन एक असली भिखारी के पास जाकर बैठ गए। दोनों के बीच बातचीत हुई। बताया गया कि उस व्यक्ति को अपना नाम और वह पहले कहां रहता था, इसकी जानकारी तक याद नहीं थी। यह मुलाकात एक्सपेरिमेंट के दौरान सामने आई उन स्थितियों में से एक थी, जिसने भिक्षावृत्ति के पीछे छिपी व्यक्तिगत परेशानियों की ओर भी ध्यान खींचा।

चार घंटे में ₹800, आठ घंटे में ₹4 हजार

करीब चार घंटे बाद सचिन ने अपनी जमा रकम गिनी तो उनके पास लगभग ₹800 थे। इसके बाद उन्होंने कई घंटे और मेले में बिताए। कभी लोगों ने पैसे दिए तो कभी उन्हें खाली हाथ लौटना पड़ा। इस दौरान कुछ जगहों पर सुरक्षाकर्मियों ने उन्हें वहां से हटने के लिए भी कहा। बारिश और लगातार पैदल चलने की वजह से एक्सपेरिमेंट उनके लिए शारीरिक रूप से भी काफी थकाऊ बन गया। करीब 8 घंटे बाद दोनों ने दावा किया कि कुल मिलाकर लगभग ₹4,000 जमा हुए। यानी इस प्रयोग में औसतन करीब ₹500 प्रति घंटे की रकम जुटी।

₹4 हजार से लाखों की कमाई का हिसाब

इसके बाद दोनों ने इसी आंकड़े के आधार पर अनुमान लगाना शुरू किया। उनका कहना था कि अगर रोजाना इतनी ही रकम मिलती रहे तो महीने में करीब ₹1.2 लाख तक जुटाए जा सकते हैं। वायरल पोस्ट में इससे भी ज्यादा कमाई का एक अनुमान सामने आया, जिसमें 12-13 घंटे रोजाना काम करने पर ₹8,000 से ₹10,000 प्रतिदिन तक की संभावित कमाई की बात कही गई। हालांकि, ये सिर्फ इस एक्सपेरिमेंट पर आधारित अनुमान हैं। इससे यह साबित नहीं होता कि वास्तविक जिंदगी में भीख मांगने वाले लोग नियमित रूप से इतनी रकम कमाते हैं।

‘भीख मांगना बिल्कुल आसान नहीं’

एक्सपेरिमेंट के अंत में दोनों ने माना कि बाहर से आसान दिखने वाला यह काम असल में बेहद थका देने वाला है। घंटों तक अजनबियों के पास जाकर मदद मांगना मानसिक और शारीरिक रूप से काफी मुश्किल लगा। सचिन को जहां कुछ लोगों ने पैसे देकर मदद की, वहीं कुछ लोगों के खराब व्यवहार का भी सामना करना पड़ा। दोनों ने लोगों को सलाह दी कि भीख मांगने को कमाई का जरिया बनाने के बजाय मेहनत और ईमानदारी से कमाने की कोशिश करनी चाहिए।

₹4 हजार की कमाई ने छेड़ दी बड़ी बहस

वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने 8 घंटे में ₹4,000 जमा होने पर हैरानी जताई। कुछ लोगों ने सवाल उठाया कि क्या धार्मिक आयोजनों और पर्यटन स्थलों पर भीख मांगना कुछ लोगों के लिए कमाई का स्थायी जरिया बन गया है।

वहीं, कई यूजर्स ने इस एक्सपेरिमेंट से बड़े निष्कर्ष निकालने से बचने की सलाह दी। उनका कहना था कि सिर्फ 8 घंटे का प्रयोग उन लोगों की असली जिंदगी को नहीं दर्शा सकता, जो गरीबी, बेघरपन, बीमारी, दिव्यांगता, शोषण या लंबे समय से चली आ रही आर्थिक परेशानियों के कारण भीख मांगने को मजबूर हैं।

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अस्पताल में मरीज सो रहे थे, तभी कैंपस में आ गया तेंदुआ, CCTV फुटेज देख सहमे लोग

Darjeeling Leopard: पश्चिम बंगाल का दार्जिलिंग हिल स्टेशनों में खूबसूरत वादियों से घिरा हुई है। दार्जिलिंग भारत की सबसे खूबसूरत और रोमांटिक हिल डेस्टिनेशन्स में से एक है। वहीं इन दिनों दार्जिलिंग का एक वीडियो काफी वायरल हो रहा है। इस वीडियो में दार्जिलिंग सदर अस्पताल के पास एक बड़ा तेंदुआ अस्पताल परिसर में घुस आया था। नाइट ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी और हेल्थ वर्कर अचानक आए तेंदुए को देखकर डर गए। इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई।

CCTV में रिकॉर्ड हुई घटना

दार्जिलिंग सदर अस्पताल में रात के वक्त एक तेंदुआ अस्पताल परिसर में आ गया। उस समय अस्पताल में मरीज सो रहे थे और नाइट ड्यूटी पर कर्मचारी मौजूद थे। बताया जा रहा कि, तेंदुआ काफी बड़ा था और कुछ देर तक अस्पताल के कैंपस में घूमता रहा। अचानक तेंदुए के पहुंचने से अस्पताल के कर्मचारियों और वहां मौजूद लोगों में डर का माहौल बन गया। अस्पताल परिसर में तेंदुए के घूमने की पूरी घटना CCTV कैमरे में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में तेंदुआ देर रात कैंपस के अंदर बिना किसी जल्दबाजी के घूमता नजर आया।

तेंदुआ देख घबरा गए स्वास्थ्यकर्मी

अस्पताल के अंदर जंगली जानवर को देखकर नाइट ड्यूटी पर तैनात स्वास्थ्यकर्मी घबरा गए और सभी सतर्क हो गए। स्थानीय लोगों और अस्पताल के कर्मचारियों का कहना है कि हाल के दिनों में अस्पताल परिसर में तेंदुए के इस तरह आने की कोई दूसरी घटना सामने नहीं आई है। उनके लिए भी यह घटना काफी हैरान करने वाली रही। अस्पताल के आसपास के लोगों में दहशत का माहौल है।

नौकरी का रिजेक्शन मिला तो उम्मीदवार ने कंपनी को ही कर दिया रिजेक्ट, जवाब हुआ वायरल

नौकरी का रिजेक्शन मिला तो उम्मीदवार ने कंपनी को ही कर दिया रिजेक्ट, जवाब हुआ वायरल

नौकरी की तलाश के दौरान बार-बार आने वाले रिजेक्शन ईमेल उम्मीदवारों का हौसला तोड़ सकते हैं। कई बार लोग ऐसे मेल पढ़कर निराश हो जाते हैं, लेकिन एक शख्स ने इसका बिल्कुल उल्टा तरीका अपनाया। कंपनी की ओर से मिले रिजेक्शन के बाद उसने निराश होने के बजाय ऐसा मजेदार जवाब भेज दिया, जिसने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। उसने कंपनी के फैसले को चुपचाप स्वीकार करने के बजाय मजाकिया अंदाज में उसी रिजेक्शन को वापस कंपनी की ओर मोड़ दिया। उसका जवाब सोशल मीडिया पर शेयर होते ही तेजी से वायरल होने लगा।

खास बात यह रही कि इस मजेदार अंदाज ने उन लोगों को भी खूब हंसाया, जो लंबे समय से नौकरी की तलाश में हैं और लगातार रिजेक्शन का सामना कर रहे हैं। पोस्ट पर लोगों ने अपने अनुभव साझा किए और कई यूजर्स ने इस अंदाज को आत्मविश्वास से भरा बताया। वहीं, कुछ लोगों ने इसे नौकरी के रिजेक्शन से निपटने का मजेदार तरीका माना।

‘आपने मुझे रिजेक्ट किया, लेकिन मैं इसे स्वीकार नहीं करता’

X पर @DeepStarts नाम के यूजर ने इस मजेदार जवाब का स्क्रीनशॉट शेयर किया। कैप्शन था, “Bro rejected the rejection email” यानी भाई ने रिजेक्शन वाले ईमेल को ही रिजेक्ट कर दिया। स्क्रीनशॉट में Keane नाम के शख्स का जवाब दिखता है। उसने कंपनी को धन्यवाद देते हुए लिखा कि उसने उम्मीदवार को रिजेक्ट करने में जो दिलचस्पी दिखाई, वह काबिले-तारीफ है। इसके बाद उसने कंपनी के फैसले की तारीफ करते हुए पूरा मामला ही उलट दिया।

रिजेक्शन स्वीकार करने से कर दिया इनकार

Keane ने मजाकिया अंदाज में लिखा कि उसे इस साल कई रिजेक्शन ईमेल मिल चुके हैं। इसलिए काफी सोच-विचार के बाद उसने इस बार कंपनी के रिजेक्शन को स्वीकार नहीं करने का फैसला किया है। उसने कंपनी को उसे रिजेक्ट करने के लिए धन्यवाद भी दिया और आखिर में ऐसी लाइन लिख दी जिसने पूरे ईमेल को और मजेदार बना दिया। उसने कहा कि वह जल्द ही कंपनी की टीम में शामिल होने की उम्मीद करता है।

सोशल मीडिया पर लोगों को खूब पसंद आया अंदाज

इस पोस्ट ने उन लोगों का खास ध्यान खींचा, जो नौकरी के लिए लगातार आवेदन करने और बार-बार रिजेक्शन झेलने का अनुभव रखते हैं। पोस्ट को लाखों व्यूज और हजारों लाइक्स मिले। एक यूजर ने कहा कि अब जब भी उसे नौकरी के लिए रिजेक्शन मिलेगा, वह भी यही तरीका अपनाएगा। एक अन्य यूजर ने लिखा कि Keane ने भर्ती प्रक्रिया के पूरे खेल को ही पलट दिया।

किसी ने हंसी, किसी ने कहा- इसे सच में आजमाएंगे

कई लोगों को यह जवाब इतना मजेदार लगा कि वे अपनी हंसी नहीं रोक पाए। कुछ यूजर्स ने Keane के आत्मविश्वास की भी तारीफ की और कहा कि वह ‘ना’ सुनकर रुकने वालों में से नहीं है। हालांकि, कुछ लोगों के लिए यह सिर्फ मजाक नहीं था। एक यूजर ने साफ कहा कि लोग भले ही इस पर हंस रहे हों, लेकिन वह खुद भी इस तरीके को आजमाने के बारे में गंभीरता से सोच रहा है। यानी नौकरी का एक सामान्य रिजेक्शन ईमेल, Keane के जवाब की वजह से ऐसा वायरल हुआ कि लोगों को रिजेक्शन मिलने के बाद भी मुस्कुराने की एक वजह मिल गई।

छुट्टी पर जाते ही कर्मचारी ने भेजा मजेदार मेल, किसी ने तारीफ की तो किसी ने बताया दिखावा

Saba Pataudi: करीना कपूर की प्रेग्नेंसी न्यूज पर सबा अली खान ने किया रिएक्ट, सोहा अली को लेकर कही ये बड़ी बात

Saba Pataudi: सबा पटौदी अपनी भाभी करीना कपूर खान के सपोर्ट में सामने आई हैं। करीना का एक वीडियो ऑनलाइन सामने आने के बाद ऐसी अटकलें लगाई जा रही थीं कि वह तीसरी बार मां बनने वाली हैं। सबा ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर इन अटकलों पर बात करते हुए कहा कि ‘कुछ बातें निजी होनी चाहिए’।

जिम सेशन के बाद करीना की एक तस्वीर शेयर करते हुए, सबा ने लोगों से कहा कि वे किसी की पर्सनल जिंदगी के बारे में अंदाजा न लगाएं। उन्होंने लिखा- “एक बुरा एंगल… या बालों का बुरा दिन! हर कोई इतनी बड़ी बात कैसे सोच सकता है!! वह एयरपोर्ट से बहुत स्टाइलिश और स्लिम लग रही थीं और आज जिम से भी वैसी ही लग रही हैं! बस यही बात है!!”

उन्होंने यह भी बताया कि वह अपनी बहन सोहा अली खान को दूसरा बच्चा करने के लिए मनाने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन कोई फ़ायदा नहीं हुआ। “मैं अपनी बहन को दूसरा बच्चा करने के लिए मना रही हूं… काश यह सच होता! यह बात कहने पर वह मेरी जान ले लेंगी!”

उन्होंने लोगों से दूसरों की ज़िंदगी में दखल न देने को कहा और लिखा, “खुद भी जियो और दूसरों को भी जीने दो। कुछ बातें पर्सनल ही रहनी चाहिए। कोई अंदाज़ा लगाने की ज़रूरत नहीं है। प्यार और सम्मान के साथ।” सबा का यह पोस्ट करीना के एक वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद आया है, जिसमें लोग उनके लुक को देखकर अंदाज़ा लगा रहे थे कि क्या वह प्रेग्नेंट हैं।

वीडियो क्लिप में करीना जिम सेशन के बाद अपनी कार की ओर जाती हुई दिख रही हैं, जबकि उनकी टीम का एक सदस्य उनके सामने छाता पकड़े हुए है, जिससे पैपराज़ी का नज़ारा कुछ हद तक छिप जाता है। इस वीडियो के बाद ऑनलाइन चर्चा शुरू हो गई कि क्या वह प्रेग्नेंट हैं (बेबी बंप की चर्चा)। जानकारी के लिए बता दें कि करीना और सैफ अली खान, जिनकी शादी अक्टूबर 2012 में हुई थी, के दो बेटे हैं – तैमूर अली खान (जन्म 2016) और जहांगीर अली खान (जिन्हें ‘जेह’ के नाम से भी जाना जाता है, जन्म 2021)।

iPhone नहीं दिलाया तो पहाड़ पर चढ़ा बेटा, बचाने में गई माता-पिता की भी जान; रोंगटे खड़े कर देगी यह घटना

iPhone नहीं दिलाया तो पहाड़ पर चढ़ा बेटा, बचाने में गई माता-पिता की भी जान; रोंगटे खड़े कर देगी यह घटना

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महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में आईफोन खरीदने की जिद पर अड़े 18 वर्षीय युवक और उसे बचाने की कोशिश में उसके माता-पिता की पहाड़ी से गिरकर दर्दनाक मौत हो गई। दिल दहला देने वाली इस घटना का वीडियो वायरल हो रहा है। ALSO READ: भावनगर में जहरीली शराब से 8 की मौत, 14 आरोपी गिरफ्तार

 

आईफोन की किस्त को लेकर अपने पिता से विवाद कर एक 18 साल का लड़का कुणाल गुस्से में पहाड़ी पर चढ़ गया। उसे नीचे उतारने के लिए उसके माता पिता ने काफी मिन्नतें की लेकिन वह नहीं माना। उसे बचाने के चक्कर में माता-पिता भी पहाड़ी से नीचे गिर गए और तीनों की दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना का वीडियो फिलहाल हर जगह वायरल हो रहा है।

 

दरअसल, 19 साल का एक युवक iPhone खरीदवाने की जिद पर अड़ गया। पिता ने इतना महंगा स्‍मार्टफोन दिलाने से साफ इनकार कर दिया। इस पर उसकी पिता से जमकर बहस हुई और नाराज होकर वह खुद को ही मिटाने पर आमाद हो गया और वह खवल्या पहाड़ के सबसे ऊंचे और खतरनाक शिखर पर चढ़ गया। ALSO READ: प्यार का झांसा देकर चलती बाइक पर पिलाया जहर, डेढ़ घंटे तड़पते पति को देखती रही महिला, जयपुर मर्डर केस में बड़ा खुलासा

 

सूचना मिलते ही छत्रपती संभाजीनगर पुलिस, दमकल विभाग और उस युवक के परिजन तुरंत मौके पर पहुंचे। लगभग तीन घंटे तक परिजनों और बचाव दल ने उस युवक को समझाने की कोशिश की, तभी अचानक युवक का संतुलन बिगड़ गया और वह सीधे नीचे गिरने लगा। पिता अपने बेटे को बचाने की कोशिश की। लेकिन बाप-बेटा पहाड़ी से नीचे जा गिरे। वहीं खड़ी मां ने जब ये सब देखा तो उन्‍होंने भी पहाड़ी से छलांग लगा दी। इस हादसे में तीनों की मौके पर ही मौत हो गई।

 

घटना के तुरंत बाद, छत्रपती संभाजीनगर पुलिस और दमकल विभाग के जवानों ने स्थानीय ग्रामीणों की मदद से खदान में उतरकर बचाव अभियान शुरू किया। काफी मशक्कत के बाद, तीनों के शव बाहर निकालकर अस्पताल भेज दिए गए। ALSO READ: सांप के डसने से कोमा में जा रहा था एंबुलेंस ड्राइवर, दोस्तों ने 2 घंटे में मारीं 400 थपकियां; 30 इंजेक्शन भी बेअसर
 

मां ने भी फेंका मंगलसूत्र

मीडिया खबरों के अनुसार, कुणाल जब पहाड़ी पर चढ़ गया था तो पिता के साथ मां संगीता भी उसे समझाने के लिए वहां पहुंची थीं। कुणाल की मां बार-बार उसको बचाने और समझाने की कोशिश कर रही थीं। मां ने बेटे के सामने ही अपना मंगलसूत्र निकाल कर फेंक दिया और कहा था कि तुम्हारा झगड़ा पिता के साथ है। मैं भी उनके साथ नहीं रहूंगी, बस तुम यह सब मत करो। हम दोनों अलग रहेंगे। मगर बेटे ने उनकी भी नहीं सुनी।

पलूशन की वजह से पहले दिल्ली से बेंगलुरु और फिर मिजोरम शिफ्ट हुआ ये कनाडाई शख्स फिर इनका एक्सपीरियंस आंखें खोलने वाला!

भारत में पिछले आठ सालों से रह रहे एक कनाडाई नागरिक ने एयर पलूशन की वजह से दिल्ली और बेंगलुरु छोड़ने के बाद आखिरकार मिजोरम के आइजोल में बसने का फैसला किया है। शख्स का कहना है कि लगातार खराब होती एयर क्वॉलिटी ने उन्हें इस कदम को उठाने के लिए मजबूर कर दिया क्योंकि वे अपने बच्चों के सेहत के साथ कोई जोखिम नहीं लेना चाहते थे।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनकी पोस्ट के बाद यह बहस छिड़ गई है कि आखिर भारतीय महानगरों में रहने वाले लोगों को साफ हवा की तलाश में अपना घर या शहर क्यों छोड़ना पड़ रहा है।

साफ हवा की तलाश में छोड़ना पड़ा दिल्ली और बेंगलुरु

कालेब फ्रिसेन नाम के इस कनाडाई शख्स ने बताया कि सर्दियों के दौरान दिल्ली में होने वाले गंभीर वायु प्रदूषण के कारण उन्होंने सबसे पहले 2018 में दिल्ली छोड़ दी थी। इसके बाद वे यह सोचकर बेंगलुरु चले गए कि इसे भारत का ‘गार्डन सिटी’ कहा जाता है। उनका अनुभव रहा कि समय के साथ बेंगलुरु की हवा की गुणवत्ता भी लगातार खराब होती चली गई। इसके बाद वर्ष 2026 की शुरुआत में वे मिजोरम शिफ्ट हो गए। आइजोल में उनकी पत्नी का परिवार रहता है और दो बच्चों का पालन-पोषण भी उनके इस फैसले की एक बड़ी वजह बना।

फ्रिसेन ने अपनी पोस्ट में लिखा कि, ‘हम दो बच्चों की परवरिश कर रहे हैं और मेरा मानना है कि एक बच्चे को पालने के लिए पूरे समुदाय के सहयोग की जरूरत होती है। मुझे खुशी है कि मैं आइजोल शिफ्ट हो गया। मैं कोई जोखिम नहीं लेना चाहता था कि मेरे बच्चे अस्थमा के मरीज बन जाएं।’

इसके साथ ही उन्होंने भारतीय महानगरों में रहने वाले लोगों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए लिखा कि मुझे इस बात का दुख है कि जो भारतीय महानगरों में रहने का विकल्प चुनते हैं, उन्हें इस तरह रहना पड़ता है। उन्हें साफ हवा में सांस लेने के लिए पहाड़ों की तरफ नहीं भागना पड़ना चाहिए।

पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स की मिली-जुली प्रतिक्रियाएं

इस पोस्ट पर सोशल मीडिया यूजर्स ने तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दी हैं। एक यूजर ने कमेंट करते हुए लिखा कि आइजोल एक सपने जैसा लगता है दोस्त! वहीं एक दूसरे यूजर ने सवाल पूछा कि क्या यह कोई विज्ञापन है?

इसके जवाब में फ्रिसेन ने स्पष्ट किया कि यह कोई पेड प्रमोशन नहीं है। उन्होंने समझाया कि वे भारतीय टेक्नोलॉजी कंपनियों पर वीडियो बनाते हैं और उनके पोस्ट प्रायोजित नहीं होते हैं। एक अन्य यूजर ने आइजोल को एक हरा-भरा और सुंदर शहर बताया और विशेष रूप से इसके एयरपोर्ट पर उतरने के अनुभव की तारीफ की। वहीं एक अन्य व्यक्ति ने प्रदूषण की समस्या का सरल समाधान देते हुए लिखा कि समाधान पहले से मौजूद है, पेड़ लगाओ।

Naneghat Reverse Waterfall: प्रकृति का अनोखा अजूबा! इस झरने में नीचे नहीं बल्कि आसमान की ओर जा रहा पानी! हैरान कर देगा वायरल Video

‘द पैराडाइज’ को लेकर राघव जुयाल ने बढ़ाई एक्साइटमेंट, फिल्म को लेकर जताया पूरा भरोसा!

राघव जुयाल ‘किल’ में विलेन के किरदार में अपनी शानदार परफॉर्मेंस के लिए खूब पसंद किए गए थे। अब वह एक बार फिर एक दमदार और इंटेंस किरदार के साथ वापसी कर रहे हैं। वह ‘द पैराडाइज’ में विक्रम मलिक का किरदार निभाएंगे, जिसकी अनाउंसमेंट के बाद से ही फैंस के बीच जबरदस्त एक्साइटमेंट देखने को मिल रही है। फिल्म में नानी लीड रोल में हैं और एक सेक्स वर्कर के बेटे का किरदार निभा रहे हैं। उनके किरदार की एक दमदार बैकस्टोरी है, जो उनके बदलाव की कहानी में अहम भूमिका निभाती है!

‘द पैराडाइज’ भारतीय सिनेमा की सबसे ज्यादा चर्चित फिल्मों में से एक है, जिसमें नेचुरल स्टार नानी लीड रोल में हैं। इस फिल्म को मशहूर फिल्ममेकर श्रीकांत ओडेला ने डायरेक्ट किया है और अनाउंसमेंट के बाद से ही इसे लेकर जबरदस्त बज बना हुआ है। फिल्म के दमदार टीजर, पोस्टर्स और गानों ने इंटरनेट पर खूब धूम मचाई है, जिनमें दर्शकों को एक्शन, ड्रामा और थ्रिल से भरपूर कहानी की झलक देखने को मिली है। टीजर में नानी के किरदार जदल की दमदार झलक दिखाई गई, जो काफी गुस्सैल, रॉ और देसी अंदाज में नजर आ रहे हैं। फिल्म की कहानी स्लम एरिया की पृष्ठभूमि पर सेट है। हालांकि, राघव जुयाल के किरदार विक्रम मलिक ने सभी को हैरान कर दिया है और दर्शक उन्हें देखने के लिए काफी एक्साइटेड हैं।

राघव पहले ही ‘द पैराडाइज’ से अपने किरदार विक्रम मलिक की झलक दिखाकर सभी को चौंका चुके हैं। इस बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा,“सबने कहा कि ये मैं नहीं हूं। तभी मुझे एहसास हुआ कि ये लोग सिनेमा को कितना प्यार करते हैं।” उन्होंने आगे कहा, “ये फिल्म बहुत जबरदस्त होने वाली है और मुझे सच में लगता है कि अपने हटकर कंटेंट की वजह से ये फिल्म खूब धमाल मचाएगी।”

इसके अलावा, नेचुरल स्टार नानी पहले ही ‘हाय नन्ना’ और ‘सरिपोधा सनिवारम’ जैसी बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्में दे चुके हैं और इस बार वह ‘द पैराडाइज’ में बिल्कुल अलग स्केल और एक दमदार किरदार के साथ नजर आने वाले हैं। वहीं, डायरेक्टर श्रीकांत ओडेला अपनी मेगा ब्लॉकबस्टर डेब्यू फिल्म ‘दसरा’ के बाद वापसी कर रहे हैं, जो बॉक्स ऑफिस पर सफल रही थी और दुनियाभर में 121 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी। इस बार भी वह दर्शकों के लिए एक और दमदार सिनेमाई अनुभव लेकर आने का वादा कर रहे हैं। ‘दसरा’ की सफलता के बाद एक बार फिर इन दोनों की जोड़ी साथ आ रही है और ऐसे में माना जा रहा है कि ये जोड़ी एक नया रिकॉर्ड बना सकती है।

वहीं, ‘द पैराडाइज’ का टीजर और इसके प्रमोशनल कंटेंट पहले ही नए बेंचमार्क बना रहे हैं और रिकॉर्ड तोड़ रहे हैं। फिल्म के गाने ‘आया शेर’ को यूट्यूब पर 200 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिल चुके हैं और इसे 1.8 मिलियन से ज्यादा लाइक्स भी मिले हैं। यह गाना सोशल मीडिया पर भी खूब वायरल हो रहा है, जहां हजारों इंस्टाग्राम रील्स बनाई जा रही हैं और फैंस नानी के लुक और उनके सिग्नेचर हुकस्टेप को रीक्रिएट कर रहे हैं। इन सभी चीजों ने फिल्म को लेकर दर्शकों के बीच एक्साइटमेंट और भी बढ़ा दी है।

एसएलवी सिनेमाज द्वारा प्रोड्यूस की गई ‘द पैराडाइज’ 24 सितंबर 2026 को दुनियाभर के सिनेमाघरों में बड़े स्तर पर रिलीज होने वाली है। फिल्म को आठ भाषाओं- हिंदी, तेलुगु, तमिल, इंग्लिश, स्पैनिश, बंगाली, कन्नड़ और मलयालम में रिलीज किया जाएगा। फिल्म के ग्लोबल स्केल को देखते हुए मेकर्स ने कथित तौर पर हॉलीवुड स्टार रयान रेनॉल्ड्स से ‘द पैराडाइज’ को इंटरनेशनल मार्केट्स में प्रेजेंट करने के लिए संपर्क किया है। अपने विजनरी डायरेक्टर, दमदार स्टारकास्ट और ग्लोबल स्केल के साथ ‘द पैराडाइज’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि एक बड़े कल्चरल फिनॉमिना के तौर पर सामने आ रही है, जिसे लेकर फैंस के बीच एक्साइटमेंट लगातार बढ़ रही है।

Delhi-NCR में H1N1 और डेंगू का बढ़ा खतरा, डॉक्टरों ने बताया किन लक्षणों को नजरअंदाज न करें

दिल्ली-NCR के अस्पतालों में इन दिनों बुखार, फ्लू और डेंगू जैसी मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। ओपीडी (OPD) और इमरजेंसी में इनकी संख्या काफी ज्यादा देखी जा रही है। डॉक्टरों ने बताया है कि पिछले कुछ हफ्तों में इन्फ्लूएंजा A या H1N1 के मामलों में तेजी से उछाल आया है।

डॉक्टरों ने News18 को बताया कि मॉनसून के दौरान ज्यादा नमी और रुक-रुक कर होने वाली बारिश, साथ ही भीड़-भाड़ वाली बंद जगहें और फ्लू का टीका लगवाने वालों की कम संख्या इस बढ़ोतरी की वजह हैं।

हालांकि, ज्यादातर मरीज घर पर आराम और देखभाल से ठीक हो जाते हैं। लेकिन डॉक्टरों ने सलाह दी है कि सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या ऑक्सीजन लेवल गिरने जैसे लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें। ऐसी स्थिति में बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

मौसम और घर के अंदर भीड़-भाड़ की वजह से बढ़ीं बीमारियां

दिल्ली के BLK-Max सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में इंटरनल मेडिसिन विभाग के हेड और वाइस चेयरमैन डॉ. राजिंदर कुमार सिंघल ने कहा, “पिछले कुछ हफ्तों में, पूरे इलाके में तेज बुखार वाली बीमारियों के लिए आउटपेशेंट (OPD) आने वालों और इमरजेंसी में भर्ती होने वाले मरीजों की संख्या में काफी बढ़ोतरी हुई है।”

उन्होंने कहा कि मामलों में रेस्पिरेटरी वायरस इन्फेक्शन और मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों का मिला-जुला असर दिख रहा है। उन्होंने आगे कहा, “मौसम का बदलना, ज्यादा नमी और बीच-बीच में होने वाली बारिश से कम्युनिटी में पैथोजन (बीमारी फैलाने वाले कीटाणु) के जिंदा रहने और फैलने की रफ्तार काफी बढ़ जाती है।”

सिंघल ने कहा कि H1N1 के मामलों में बढ़ोतरी तीन वजहों से हो रही है: पहला, नमी वाला गर्म मौसम, जिससे इन्फेक्शन वाली बूंदें हवा में ज्यादा देर तक बनी रहती हैं। दूसरा, ” लोगों का बंद और एयर कंडीशन वाले कमरों में ज्यादा समय बिताना जहां हवा का बहाव ठीक नहीं होता और वायरस तेजी से फैलता है। और तीसरा, “फ्लू का सालाना वैक्सीनेशन कम होना और साफ-सफाई की आदतों में लापरवाही बरतना, जिससे बहुत से लोग बीमारी की चपेट में आ सकते हैं।”

दिल्ली में H1N1 के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी

फरीदाबाद के अमृता हॉस्पिटल में पल्मोनोलॉजी डिपार्टमेंट के हेड डॉ. अर्जुन खन्ना ने हाल की रिपोर्ट का हवाला देते हुए बताया कि इस साल दिल्ली में H1N1 के 1,449 मामले सामने आए हैं, जो पिछले साल इसी समय के मुकाबले लगभग छह गुना ज्यादा हैं। उन्होंने कहा कि संक्रमण शुरू में हल्का लग सकता है, लेकिन कमजोर मरीजों में यह निमोनिया, खून में ऑक्सीजन का खतरनाक स्तर तक गिरना और कभी-कभी फेफड़ों के गंभीर रूप से फेल होने जैसी स्थिति में बदल सकता है।

खन्ना ने कहा, “बात साफ है: हर बार बुखार होने पर घबराएं नहीं, लेकिन इन्फ्लूएंजा को हल्के में भी न लें।” उन्होंने आगे कहा, “हम ऐसे बहुत से मरीज देख रहे हैं जिन्हें तेज बुखार, शरीर में तेज दर्द, खांसी, गले में खराश और बहुत ज्यादा थकान है। हमें चिंता है कि कुछ मरीजों की हालत उतनी तेजी से बिगड़ रही है, जितनी आम वायरल बुखार में उम्मीद नहीं की जाती।”

खन्ना ने बढ़ते मामलों के पीछे मानसून का मौसम, स्कूलों, ऑफिस और सार्वजनिक परिवहन जैसी भीड़भाड़ वाली बंद जगहों में खराब वेंटिलेशन और फ्लू वायरस में लगातार होने वाले बदलाव को जिम्मेदार बताया। उनका मतलब है कि पिछले संक्रमण या वैक्सीन से मिली सुरक्षा हमेशा के लिए नहीं रहती।

फोर्टिस हॉस्पिटल, शालीमार बाग में रेस्पिरेटरी मेडिसिन और रेस्पिरेटरी क्रिटिकल केयर के HOD, डॉ. विकास मौर्य ने भी कहा कि पिछले साल की तुलना में इस साल H1N1 पॉजिटिव पाए जाने वाले मरीजों की संख्या में “भारी उछाल” आया है। उन्होंने बताया कि फ्लू जैसे लक्षणों वाले मरीजों में से लगभग 70-80% H1N1 पॉजिटिव पाए जा रहे हैं, और इसके बाद इन्फ्लूएंजा के अन्य स्ट्रेन और रेस्पिरेटरी वायरस का नंबर आता है।

मौर्य ने कहा, “मानसून के दौरान होने वाला हर बुखार H1N1 की वजह से नहीं होता। हम अन्य वायरल रेस्पिरेटरी इन्फेक्शन भी देख रहे हैं, जिनमें इन्फ्लूएंजा के अन्य स्ट्रेन जैसे H3N2 के साथ-साथ राइनोवायरस, एडेनोवायरस और COVID-19 जैसे इन्फेक्शन शामिल हैं। चिंता की एक और बात वे वायरस हैं जिनकी पहचान अभी उपलब्ध टेस्ट से नहीं हो पाती, लेकिन मरीज के लक्षणों से लगता है कि यह वायरल इन्फेक्शन है।”

लक्षण और खतरे के संकेत

डॉक्टरों ने News18 को बताया कि H1N1 का असर आम सर्दी-जुकाम की तुलना में अचानक और ज्यादा गंभीर होता है। इसमें तेज बुखार और कंपकंपी, शरीर में तेज दर्द, सिरदर्द और बहुत ज्यादा थकान, सूखी खांसी और गले में खराश जैसे लक्षण होते हैं। बच्चों में उल्टी या दस्त जैसे लक्षण भी दिख सकते हैं।

खन्ना ने कहा, “सिर्फ 102 या 103 डिग्री बुखार खतरनाक नहीं है। खतरे के संकेत तब होते हैं जब इसके साथ सांस लेने में तकलीफ, सीने में बेचैनी, असामान्य रूप से बहुत ज्यादा नींद आना, उलझन या ऑक्सीजन का स्तर कम होना जैसे लक्षण दिखें।”

उन्होंने कहा, “ऐसे में इसका इलाज घर पर नहीं किया जाना चाहिए।”

खन्ना ने आगे कहा कि अगर कोई मरीज ठीक होता हुआ दिखे और फिर अचानक उसे दोबारा तेज बुखार आ जाए और खांसी बढ़ जाए, तो इसे निमोनिया या किसी दूसरी गंभीर समस्या का संभावित संकेत मानकर इलाज किया जाना चाहिए।

किन्हें और कब टेस्ट करवाना चाहिए?

डॉ. सिंघल के अनुसार, हल्के मामलों में फ्लू के लिए रूटीन टेस्टिंग की जरूरत नहीं होती, लेकिन ज्यादा जोखिम वाले ग्रुप्स के लिए इसकी पुरजोर सलाह दी जाती है — जैसे 65 साल से ज्यादा उम्र के लोग, 5 साल से कम उम्र के बच्चे, गर्भवती महिलाएं, और डायबिटीज, फेफड़ों की पुरानी बीमारी, अस्थमा, किडनी की बीमारी, दिल की बीमारी या कमजोर इम्यूनिटी (जैसे कैंसर के इलाज या ऑर्गन ट्रांसप्लांट की वजह से) वाले लोग।

ऐसे लोगों के लिए भी टेस्टिंग की सलाह दी जाती है जिनकी हालत बिगड़ रही हो, जैसे सांस लेने में तकलीफ, सीने में दर्द या ऐसा बुखार जो ठीक न हो रहा हो।

खन्ना ने अस्पताल में भर्ती 29,000 से ज्यादा H1N1 मरीजों पर हुई एक बड़ी स्टडी का भी जिक्र किया, जिसमें पाया गया कि एंटीवायरल दवाएं जल्दी शुरू करने से मौतें कम हुईं। उन्होंने कहा कि डॉक्टर बहुत ज्यादा बीमार और ज्यादा जोखिम वाले मरीजों में टेस्ट के नतीजे आने से पहले ही एंटीवायरल इलाज शुरू कर सकते हैं।

सिंघल ने कहा कि ओसेल्टामिविर (Oseltamivir) जैसी एंटीवायरल दवाएं तब सबसे अच्छा काम करती हैं जब उन्हें लक्षण शुरू होने के 48 घंटों के अंदर शुरू किया जाए।

मानसून के दौरान डेंगू के मामले भी बढ़ रहे हैं

दिल्ली के श्री बालाजी एक्शन मेडिकल इंस्टीट्यूट में इंटरनल मेडिसिन के डायरेक्टर डॉ. अरविंद अग्रवाल ने कहा, “हमारी OPD सेवाओं में हर दिन डेंगू या H1N1 के शक वाले 15 से 20 मामले सामने आ रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “इनमें से 2 से 3 मरीजों को गंभीर पेट दर्द, लगातार उल्टी या ब्लड प्लेटलेट काउंट में तेजी से गिरावट जैसे गंभीर लक्षणों के कारण भर्ती करना पड़ता है।” उन्होंने आगे कहा कि बाकी मरीजों का इलाज OPD में ही हो जाता है, जिसमें वे खुद अपनी सेहत पर नजर रखते हैं और ओरल रिहाइड्रेशन (मुंह से तरल पदार्थ लेना) का तरीका अपनाते हैं।

अग्रवाल ने कहा, “हम लोगों को सलाह देते हैं कि वे अपने आस-पास पानी जमा न होने दें, मच्छर भगाने वाली चीजों का इस्तेमाल करें, साफ-सफाई बनाए रखें और लगातार बुखार होने पर तुरंत डॉक्टर से सलाह लें।”

डॉक्टरों की सलाह और सावधानियां

डॉक्टरों ने गंभीर बीमारी से बचने के लिए सालाना फ्लू वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है, खासकर ज्यादा जोखिम वाले लोगों और हेल्थकेयर वर्कर्स के लिए। इसके साथ ही, खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को ढकने, कम से कम 20 सेकंड तक साबुन और पानी से हाथ धोने या हैंड सैनिटाइजर का इस्तेमाल करने, और बिना बुखार की दवा लिए बुखार उतरने के कम से कम 24 घंटे बाद तक घर पर रहने की भी सलाह दी गई है।

उन्होंने खुद से एंटीबायोटिक्स लेने के खिलाफ भी चेतावनी दी है, क्योंकि ये फ्लू जैसे वायरल इन्फेक्शन पर असर नहीं करतीं और भविष्य में होने वाले इन्फेक्शन का इलाज मुश्किल बना सकती हैं। जब तक डॉक्टर खास तौर पर एंटीवायरल दवा न लिखें, तब तक पैरासिटामोल जैसी बुखार कम करने वाली दवाएं लेना और खूब तरल पदार्थ (fluids) लेना पहला कदम होना चाहिए।

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Naneghat Reverse Waterfall: प्रकृति का अनोखा अजूबा! इस झरने में नीचे नहीं बल्कि आसमान की ओर जा रहा पानी! हैरान कर देगा वायरल Video

Naneghat Reverse Waterfall: महाराष्ट्र में मॉनसून के दौरान, पश्चिमी घाट धुंध से ढकी पहाड़ियों, हरियाली और मौसमी झरनों वाली जगह में बदल जाते हैं। इस इलाके के सबसे अनोखे नज़ारों में से एक है नानेघाट का “रिवर्स वॉटरफॉल” (उल्टा बहने वाला झरना), जहां पानी जमीन की तरफ गिरने के बजाय ऊपर की ओर जाता हुआ दिखता है। यह पुणे ज़िले के जुन्नार इलाके में, ठाणे ज़िले की सीमा के पास स्थित है।

यह नजारा ऐसा लग सकता है जैसे प्रकृति ने कुछ समय के लिए गुरुत्वाकर्षण (gravity) को बंद कर दिया हो। लेकिन इसमें भौतिकी के नियमों का कोई उल्लंघन नहीं होता। यह अद्भुत नज़ारा गिरते हुए पानी और पहाड़ियों पर तेज़ी से चलने वाली हवाओं के मेल से बनता है।

नानेघाट का झरना ऊपर की ओर बहता हुआ क्यों दिखता है?

गुरुत्वाकर्षण के कारण पानी स्वाभाविक रूप से नीचे की ओर गिरता है। लेकिन नानेघाट में, मॉनसून की तेज़ हवाएँ गिरते हुए पानी से इतनी ज़ोर से टकरा सकती हैं कि पानी की बूंदें वापस ऊपर की ओर धकेल दी जाती हैं और बिखर जाती हैं। पानी लगातार नीचे गिरने वाली धारा के रूप में बहने के बजाय, बारीक बूंदों में बंट जाता है। जब ऊपर की ओर बहने वाली हवा काफी तेज़ होती है, तो ये बूंदें वापस पहाड़ी की चोटी की ओर चली जाती हैं, जिससे ऐसा लगता है जैसे कोई झरना उलटी दिशा में बह रहा हो।

दूसरे शब्दों में, गुरुत्वाकर्षण अपना काम कर रहा है। पानी असल में ऊपर की ओर नहीं बह रहा है; हवा अलग-अलग बूंदों के नीचे गिरने की गति को रोककर उन्हें ऊपर की ओर ले जा रही है। इसलिए, इस घटना को गुरुत्वाकर्षण को चुनौती देने वाले झरने के बजाय, हवा की वजह से होने वाला उलटी दिशा में बहने का भ्रम कहना ज़्यादा सही होगा।

मानसून के दौरान ऐसा क्यों होता है?

मानसून बहुत अहम है क्योंकि नानेघाट में भारी बारिश होती है और पश्चिमी घाट से तेज़ हवाएँ गुज़रती हैं। जब बारिश और तेज़ हवाएँ एक साथ होती हैं, तो ‘रिवर्स-वॉटरफ़ॉल’ (उल्टी दिशा में बहने वाले झरने) का नजारा देखने के लिए हालात बिल्कुल सही हो जाते हैं।

इसलिए यह नजारा मौसम पर निर्भर करता है, स्थायी नहीं। आगंतुक एक क्षण में सामान्य रूप से गिरता हुआ पानी देख सकते हैं और हवा तेज होने पर ऊपर की ओर उठने वाली फुहार का शानदार दृश्य देख सकते हैं। महाराष्ट्र टूरिज़्म राज्य के मॉनसून के नज़ारों को धुंध भरी पहाड़ियों, हरियाली और मौसमी झरनों के मौसम के तौर पर बताता है, जिससे बारिश के महीनों में प्रकृति और एडवेंचर ट्रिप के लिए यह जगह बहुत आकर्षक बन जाती है।

नानेघाट सिर्फ़ मॉनसून का एक नज़ारा नहीं है

नानेघाट महाराष्ट्र के पश्चिमी घाट में एक प्राचीन पहाड़ी दर्रा है और लंबे समय से कोंकण क्षेत्र और दक्कन के पठार के बीच यात्रा के लिए इस्तेमाल होता रहा है। आज, यह ट्रेकर्स और मॉनसून में घूमने आने वालों के बीच भी लोकप्रिय है। बारिश के मौसम में, आस-पास की पहाड़ियां बहुत हरी-भरी और धुंध से ढकी हो जाती हैं, जबकि झरने और जलधाराएँ यहाँ के नज़ारों की खूबसूरती और बढ़ा देते हैं।

‘रिवर्स वॉटरफ़ॉल’ (उल्टा बहने वाला झरना) ने नानेघाट को सोशल मीडिया पर काफ़ी लोकप्रिय बना दिया है। पानी के ऊपर की ओर बहते हुए दिखने वाले वीडियो बार-बार वायरल होते रहे हैं। क्या रिवर्स वॉटरफ़ॉल सच में गुरुत्वाकर्षण (ग्रेविटी) के नियम को चुनौती दे रहा है? -नहीं।

“गुरुत्वाकर्षण को मात देना” (defying gravity) सुनने में तो बहुत आकर्षक लगता है, लेकिन वैज्ञानिक रूप से यह घटना गुरुत्वाकर्षण को खत्म नहीं करती। गुरुत्वाकर्षण पानी को नीचे की ओर खींचता रहता है, जबकि तेज़ हवा गिरती हुई पानी की बूंदों पर ऊपर की ओर बल लगाती है। इसे समझने का एक अच्छा तरीका है कि आप कल्पना करें कि बगीचे में इस्तेमाल होने वाले होज़ (पाइप) से तेज़ हवा में पानी की बौछार की जा रही है। पानी उस दिशा में जाने के बजाय, जिसमें उसे शुरू में छोड़ा गया था, हवा के कारण बगल में या पीछे की ओर उड़ सकता है। नानेघाट में, इसका पैमाना और प्राकृतिक माहौल उस जानी-पहचानी भौतिकी की घटना को असाधारण बना देता है।

इसे देखने का सबसे अच्छा समय क्या है?

उल्टा बहने वाला झरना (रिवर्स वॉटरफॉल) मौसम पर निर्भर करने वाली घटना है, इसलिए इस बात की कोई गारंटी नहीं है कि आने वाले लोगों को पानी ऊपर की ओर बहता हुआ दिखेगा ही। मॉनसून के दौरान, खासकर जब तेज़ हवाओं के साथ भारी बारिश होती है, तब इस नज़ारे को देखने का सबसे अच्छा मौका मिलता है।

एक ऐसा नज़ारा जिसे विज्ञान से सबसे अच्छी तरह समझाया जा सकता है

नानेघाट का उल्टा बहने वाला झरना इस बात की याद दिलाता है कि प्रकृति के कुछ सबसे शानदार नज़ारों के लिए किसी अलौकिक या जादुई स्पष्टीकरण की ज़रूरत नहीं होती। मॉनसून की बारिश, इलाके की बनावट और तेज़ हवाओं का मेल ही ऐसा नज़ारा बनाने के लिए काफ़ी है जो प्रकृति की सबसे जानी-पहचानी ताकतों में से एक को चुनौती देता हुआ लगता है।

कुछ पलों के लिए, गिरता हुआ पानी ऐसा लग सकता है जैसे वह आसमान की ओर चढ़ रहा हो। गुरुत्वाकर्षण गायब नहीं हुआ है, बस हवा इतनी तेज़ हो गई है कि पानी बिल्कुल अनोखे और अप्रत्याशित तरीके से व्यवहार करने लगता है।

मुंबई और पुणे से नानेघाट कैसे पहुंचें?

नानेघाट तक मुंबई और पुणे दोनों जगहों से सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है। यात्रा के आखिरी हिस्से में वैशाखरे गाँव के पास ट्रेकिंग बेस तक पहुँचना शामिल है। शुरुआती जगह और मॉनसून के दौरान सड़क की हालत के आधार पर रास्ता और यात्रा का समय अलग-अलग हो सकता है।

मुंबई

पर्यटक कल्याण और मुरबाड होते हुए वैशाखरे की ओर गाड़ी चलाकर जा सकते हैं, जहाँ से नानेघाट का रास्ता शुरू होता है। ट्रैफ़िक और मौसम के आधार पर, बेस तक सड़क से पहुंचने में आम तौर पर लगभग तीन घंटे लगते हैं। ट्रेन से यात्रा करने वालों के लिए कल्याण सबसे नज़दीकी बड़े रेलवे स्टेशनों में से एक है, जिसके बाद नानेघाट की ओर जाने के लिए बस या टैक्सी का इस्तेमाल किया जा सकता है।

पुणे

नानेघाट पहुंचने के लिए सड़क मार्ग आम तौर पर चाकन और जुन्नार से होकर गुज़रता है। शुरुआती जगह और रास्ते के आधार पर, इस सफ़र में लगभग तीन से चार घंटे लग सकते हैं।