Stocks to Watch: Sensex की एक्सपायरी; ICICI Bank, Wipro, IRB Infra समेत इन 11 स्टॉक्स पर फोकस

Stocks to Watch: अधिकतर एशियाई बाजारों से कमजोर रुझानों के बीच गिफ्ट निफ्टी से आज घरेलू मार्केट में फ्लैट शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं। चूंकि आज सेंसेक्स की वीकली एक्सपायरी है तो मार्केट में तेज हलचल दिख सकती है। एक कारोबारी दिन पहले 9 सितंबर को सेंसेक्स (Sensex) 813.35 प्वाइंट्स यानी 1.08% की गिरावट के साथ 74,764.23 और निफ्टी 50 (Nifty 50) भी 203.60 प्वाइंट्स यानी 0.86% की फिसलन के साथ 23,431.50 पर बंद हुआ था। अब आज इंडिविजुअल स्टॉक्स की बात करें तो अपनी खास कॉरपोरेट एक्टिविटीज के चलते कुछ स्टॉक्स में तेज हलचल दिख सकती है। यहां इन शेयरों के बारे में डिटेल्स दी जा रही है।

Stocks to Watch: आज इन स्टॉक्स पर फोकस

Dilip Buildcon

दिलीप बिल्डकॉन ने ओडिशा के पारादीप से छत्तीसगढ़ के रायपुर तक एलपीजी पाइपलाइन को लेकर PNGRB (पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड) से LoI (लेटर ऑफ इंटेंट) मिलने के बाद ₹1,800 करोड़ के प्रोजेक्ट के लिए सबसे कम बोली लगाई है।

Indian Bank

इंडियन बैंक ने एनएसई के आईपीओ में ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत के जरिए अपनी 17.91% होल्डिंग यानी 15 लाख इक्विटी शेयर बेचने का प्रस्ताव पेश किया है। हालांकि इसके लिए रेगुलटेरी अप्रूवल लेना है।

Shakti Pumps India

शक्ति पंप्स (इंडिया) को महाराष्ट्र स्टेट इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी से मैगेल त्याला सौर कृषि पंप योजना के तहत पूरे महाराष्ट्र में 3 HP, 5 HP और 7.5 HP क्षमता वाले 10,000 ऑफ-ग्रिड सोलर फोटोवोल्टिक वॉटर पंपिंग सिस्टम (SPWPS) के लिए लेटर ऑफ एम्पैनलमेंट मिला है। इन 10,000 पंपों की कुल वैल्यू लगभग ₹235.92 करोड़ है, और इसे वर्क ऑर्डर जारी होने के 60 दिनों के भीतर पूरा करना है।

ICICI Bank

आईसीआईसीआई बैंक को आरबीआई से इस बात की मंजूरी मिल गई है कि आवेदक आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल एसेट मैनेजमेंट कंपनी अब सीएसबी बैंक, डीसीबी बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक में 9.95% तक वोटिंग राइट्स हासिल कर सकती है।

IRB Infrastructure Developers

आईआरबी इंफ्रा डेवलपर्स का अगस्त महीने में टोल रेवेन्यू सालाना आधार पर 25% बढ़कर ₹807.4 करोड़ पर पहुंच गया।

Wipro

विप्रो ने नैस्डैक पर लिस्टेड क्राउडस्ट्राइक (CrowdStrike) के साथ मिलकर अपना चीफ इन्फॉर्मेशन सिक्योरिटी ऑफिसर (CISO) कमांड सेंटर लॉन्च किया है। इस कमांड सेंटर को एआई से जुड़े एडवांस्ड रिस्क के खिलाफ कंपनियों की सिक्योरिटी को मजबूत करने के लिए डिजाइन किया गया है।

Hindustan Zinc

हिंदुस्तान जिंक ने कंसंट्रेट यानी कच्चे खनिज को लाने-ले जाने के लिए 30 इलेक्ट्रिक ट्रक को लेकर लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशन कंपनी MFL इंडिया के साथ छह साल का ट्रांसपोर्टेशन कॉन्ट्रैक्ट किया है।

Juniper Green Energy

जुनिपर ग्रीन एनर्जी की पूर्ण मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी जुनिपर ग्रीन स्पार्क टेन ने 75 MW के विंड-सोलर हाइब्रिड पावर प्रोजेक्ट को पूरी तरह से चालू कर दिया है। यह प्रोजेक्ट साइट पर विंड कैपेसिटी के आखिरी 10 MW के चालू होने के बाद पूरा हुआ है। इसके चालू होने के बाद जुनिपर ग्रीन एनर्जी और उसकी सब्सिडियरी कंपनियों की कुल ऑपरेशनल कैपेसिटी लगभग 2,604 MWp हो गई है और साथ ही लगभग 500 MWh की बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) कैपेसिटी भी है।

Biocon

प्राइवेट इक्विटी फर्म ट्रू नॉर्थ की सहयोगी कंपनी एक्टिव पाइन एलएलपी ने बायोकॉन के 1.65 करोड़ शेयर (1.02% हिस्सेदारी) ₹638.37 करोड़ में ₹385 के भाव पर बेच दिए। इसकी जून 2026 तक कंपनी में कुल 1.08% हिस्सेदारी (1.76 करोड़ इक्विटी शेयर) थी। ये शेयर 12 बड़े ग्लोबल और घरेलू निवेशकों- आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल म्यूचुअल फंड, एसबीआई म्यूचुअल फंड, कोटक महिंद्रा एएमसी, आदित्य बिड़ला सन लाइफ एएमसी, बीएनबी परिबास आर्बिट्रेज, सिटीग्रुप ग्लोबल मार्केट्स सिंगापुर, व्हाइटओक कैपिटल म्यूचुअल फंड, आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनी, बजाज लाइफ इंश्योरेंस, सोसिएट जेनरल, एडलवाइस म्यूचुअल फंड और गवर्नमेंट पेंशन फंड ग्लोबल की तरफ से नॉर्जेस बैंक ने प्रति शेयर ₹385 के भाव पर खरीदे।

Khadim India

एंजल इन्वेस्टर पंकज प्रसून ने प्रति शेयर ₹116.19 के भाव पर जूते-चप्पल बनाने वाली खादिम इंडिया के अतिरिक्त 4.18 लाख शेयर ₹4.86 करोड़ में खरीदे हैं। जून 2026 तक कंपनी में उनकी पहले से ही 1.62% हिस्सेदारी (2.97 लाख शेयर) थी। वहीं दूसरी तरफ एम्बिट इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स ने प्रति शेयर ₹115.97 के भाव पर ₹4.27 करोड़ में खादिम इंडिया के 3.69 लाख शेयर बेच दिए।

Mangalam Global Enterprise

लेमन ग्रुप के निवेश वाली Veloce Fintech ने वेलोस अपॉर्च्यूनिटीज फंड और वेलोस अपॉर्च्यूनिटीज फंड-II के जरिए मंगलम ग्लोबल एंटरप्राइज के 1.17 करोड़ इक्विटी शेयर (3.57% होल्डिंग) ₹18.26 करोड़ में प्रति शेयर ₹15.5 के भाव पर खरीदे। वहीं निवेशक चुंगथ करुणाकरण पद्मा कुमार ने अपने पूरे 1.24 करोड़ शेयर (3.78% हिस्सेदारी) ₹19.3 करोड़ में समान भाव पर बेच दिए।

Stocks to Watch: इन पर भी रहेगी नजर

आज इन कंपनियों के आएंगे रिजल्ट: गजा अल्टरनेटिव एसेट मैनेजमेंट, शंकेश ज्वैलर्स।

एक्स-डिविडेंड: एपेक्स फ्रोजन फूड्स, केमक्रक्स एंटरप्राइजेज, दिवगी टॉर्कट्रांसफर सिस्टम्स, एलनेट टेक्नोलॉजीज, गणेश इकोस्फीयर, ग्राउअर एंड वेल इंडिया, हर्षदीप हॉर्टिको, इंडोको रेमेडीज, इंडसिल हाइड्रो पावर एंड मैंगनीज, जेएमजे फिनटेक, लिंक, एमएंडबी इंजीनियरिंग, पावर मेक प्रोजेक्ट्स, रेडिएंट कैश मैनेजमेंट सर्विसेज, सिकाजेन इंडिया, टीवीएस श्रीचक्र, वैलियंट कम्युनिकेशंस, जी एंटरटेनमेंट एंटरप्राइजेज

F&O बैन: आज बंधन बैंक, आईनॉक्स विंड, कीन्स टेक्नोलॉजी इंडिया, एलआईसी हाउसिंग फाइनेंस, मणप्पुरम फाइनेंस, SAIL

स्टॉक मार्केट में आज की लाइव हलचल के लिए यहां जुड़ें

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Stock in Focus: इंफ्रा कंपनी को ₹1800 करोड़ का प्रोजेक्ट मिला, फोकस में रहेगा स्टॉक

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Dilip Buildcon को पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) से लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) मिला है। कंपनी ओडिशा के पारादीप से छत्तीसगढ़ के रायपुर तक LPG पाइपलाइन बनाएगी। प्रस्तावित EPC काम की वैल्यू करीब ₹1,800 करोड़ है। इसमें GST शामिल नहीं है।

36 महीने में पूरा होगा काम

यह प्रोजेक्ट SPV के जरिए पूरा होगा। इसमें दिलीप बिल्डकॉन की 100% हिस्सेदारी होगी। कंपनी को ही करीब ₹1,800 करोड़ का EPC काम देने का प्रस्ताव है। इसे 36 महीने में पूरा करना होगा।

PNGRB अधिकृत कंपनी को LPG पाइपलाइन बिछाने, बनाने, चलाने और जरूरत के मुताबिक उसका विस्तार करने का एक्सक्लूसिव लाइसेंस देगा।

25 साल तक चलेगी पाइपलाइन

प्रोजेक्ट में पाइपलाइन की फाइनेंसिंग, निर्माण और संचालन शामिल है। तीन साल में निर्माण पूरा होने के बाद इसे 25 साल तक चलाया जाएगा।

SPV के जरिए दिलीप बिल्डकॉन पाइपलाइन की डिजाइनिंग, फाइनेंसिंग, निर्माण, संचालन और रखरखाव करेगी। इसके लिए जरूरी मंजूरियां और नियामकीय मंजूरी लेनी होगी।

LPG बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचेगी गैस

इस पाइपलाइन से अलग-अलग तेल कंपनियों के LPG बॉटलिंग प्लांट तक LPG पहुंचाई जाएगी। इसे साझा उपयोग वाली पाइपलाइन के तौर पर भी चलाने का प्रस्ताव है। इसके तहत पात्र तेल कंपनियां और अन्य यूजर तय नियमों के मुताबिक पाइपलाइन की क्षमता का इस्तेमाल कर सकेंगे।

कंपनी LPG की खरीद, ट्रेडिंग, वितरण या बिक्री नहीं करेगी। उसका काम पाइपलाइन तैयार करना और LPG की ढुलाई की सुविधा देना होगा।

दिलीप बिल्डकॉन के शेयर

दिलीप बिल्डकॉन का शेयर बुधवार को BSE पर 0.52% की गिरावट के साथ ₹391.55 पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 11.77% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने 14.82% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 6.40 हजार करोड़ रुपये है।

दिलीप बिल्डकॉन का बिजनेस

ये इंफ्रास्ट्रक्चर और EPC कंपनी है। कंपनी सड़क और हाईवे, रेलवे और मेट्रो, एयरपोर्ट, सिंचाई, माइनिंग, पाइपलाइन, पावर ट्रांसमिशन और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। कंपनी डिजाइन, निर्माण और प्रोजेक्ट संचालन से जुड़ी सेवाएं भी देती है।

IRB Infrastructure: अगस्त में टोल रेवेन्यू 25% बढ़कर ₹807 करोड़, शेयरों पर रहेगी नजर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

20 साल में एग्जिक्यूटिव ट्रेनी से DGM तक का सफर! गेल की तरक्की ने कैसे लंबे समय तक टिके एंप्लॉयी की जिंदगी बदली और मिला अवॉर्ड

आज के दौर में बेहतर सैलरी, जल्दी प्रमोशन और नई चुनौतियों के लिए नौकरी बदलना काफी सामान्य हो गया है। कई प्रोफेशनल्स मानते हैं कि हर कुछ साल में कंपनी बदलने से करियर तेजी से आगे बढ़ता है। लेकिन इसका दूसरा पहलू भी है। अगर कोई कंपनी लगातार अच्छा प्रदर्शन कर रही हो और वहां कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां, सीखने के अवसर और आगे बढ़ने के मौके मिलते रहें, तो लंबे समय तक उसी संगठन के साथ बने रहना भी समझदारी भरा फैसला हो सकता है। ऐसी स्थिति में कर्मचारी कंपनी के बिजनेस और कामकाज को गहराई से समझने के साथ-साथ धीरे-धीरे बड़ी जिम्मेदारियों के लिए तैयार होता है।

समय के साथ अनुभव, नेटवर्क और संगठन का भरोसा भी मजबूत होता है। GAIL में 20 साल पूरे करने वाले राकेश शाही का करियर इसी पहलू की एक दिलचस्प मिसाल पेश करता है, जहां लंबें समय तक काम करना लगातार बढ़ती जिम्मेदारियों और पेशेवर विकास के साथ आगे बढ़ा।

वायरल पोस्ट

GAIL (India) Limited में 20 साल पूरे करने वाले राकेश शाही की LinkedIn पोस्ट इसी पहलू को सामने लाती है। जून 2026 में अपने दो दशक पूरे होने पर उन्होंने Executive Trainee से Deputy General Manager तक के सफर को याद किया। उनकी कहानी बताती है कि सही माहौल मिलने पर कंपनी की ग्रोथ के साथ कर्मचारी का करियर भी लगातार आगे बढ़ सकता है।

एक कंपनी में लंबे समय तक काम करने के फायदे

लंबे समय तक एक ही कंपनी में काम करने का सबसे बड़ा फायदा ये है कि कर्मचारी संगठन के कामकाज और बिजनेस को गहराई से समझने लगता है। समय के साथ उसे ज्यादा जिम्मेदारियां और बड़े प्रोजेक्ट संभालने का मौका मिल सकता है।

राकेश शाही ने अपने करियर के दौरान Project Management, Gas Marketing, Business Development, Pipeline Infrastructure, Policy, Regulation और Compliance जैसे अलग-अलग क्षेत्रों में काम किया। इससे उनकी विशेषज्ञता सिर्फ एक भूमिका तक सीमित नहीं रही।

प्रमोशन के साथ बढ़ती जिम्मेदारी

अगर कंपनी अपने कर्मचारियों की क्षमता को पहचानती है, तो लंबा कार्यकाल Leadership Roles तक पहुंचने का रास्ता भी खोल सकता है। Executive Trainee से DGM तक का सफर इसका उदाहरण है।

हालांकि सिर्फ लंबे समय तक कंपनी में बने रहना प्रमोशन की गारंटी नहीं है। असली फायदा तब होता है, जब संगठन performance को महत्व देता हो और कर्मचारियों को नई जिम्मेदारियां लेने के अवसर देता हो।

Deputation और नए अनुभव का फायदा

राकेश शाही के करियर में PNGRB में deputation भी एक अहम पड़ाव रहा। वहां उन्हें regulatory framework, authorisation, consumer affairs और natural gas sector से जुड़े विषयों पर काम करने का मौका मिला। ऐसे अवसर कर्मचारी के अनुभव को व्यापक बनाते हैं। बड़ी कंपनियों में लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को अलग-अलग विभागों, प्रोजेक्ट्स और संस्थानों के साथ काम करने का अवसर मिल सकता है।

कब कंपनी के साथ बने रहना चाहिए?

हर कर्मचारी के लिए यह सवाल अहम है कि उसे मौजूदा कंपनी में बने रहना चाहिए या नई नौकरी तलाशनी चाहिए। अगर आपको नए प्रोजेक्ट्स और जिम्मेदारियां मिल रही हैं, नई स्किल्स सीखने का मौका है और आपके प्रदर्शन के आधार पर प्रमोशन या अप्रेजल हो रहा है, तो कंपनी में बने रहना फायदेमंद हो सकता है। इसके अलावा कंपनी का बिजनेस मजबूत होना, सीनियर्स का सपोर्ट मिलना और अच्छा वर्क कल्चर भी महत्वपूर्ण संकेत हैं।

कब समझें कि नौकरी बदलने का समय आ गया है?

दूसरी तरफ, अगर कई सालों से आपका काम एक जैसा है और सीखने के मौके खत्म हो चुके हैं, तो बदलाव के बारे में सोचना चाहिए। लगातार अच्छा प्रदर्शन करने के बावजूद प्रमोशन या उचित अप्रेजल न मिलना भी संकेत हो सकता है। अगर कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब हो रही है, भविष्य की संभावनाएं कमजोर हैं या वर्क कल्चर लगातार तनावपूर्ण होता जा रहा है, तो दूसरे अवसर तलाशना बेहतर हो सकता है।

लंबा करियर तभी फायदेमंद जब ग्रोथ जारी रहे

राकेश शाही की कहानी का सबसे बड़ा सबक यही है कि लंबे समय तक एक कंपनी में रहना तभी फायदेमंद है, जब आपकी ग्रोथ भी साथ-साथ हो रही हो। सिर्फ वर्षों की संख्या बढ़ाना करियर की सफलता नहीं है। अगर कंपनी आगे बढ़ रही है, आपको सीखने और जिम्मेदारी लेने के अवसर मिल रहे हैं और आपकी मेहनत को पहचान मिल रही है, तो बार-बार नौकरी बदलने के बजाय उसी संगठन के साथ आगे बढ़ना एक मजबूत करियर रणनीति हो सकती है।

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