Stock in Focus: इंफ्रा कंपनी को ₹1800 करोड़ का प्रोजेक्ट मिला, फोकस में रहेगा स्टॉक

Stock in Focus: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी Dilip Buildcon को पेट्रोलियम एंड नेचुरल गैस रेगुलेटरी बोर्ड (PNGRB) से लेटर ऑफ इंटेंट (LOI) मिला है। कंपनी ओडिशा के पारादीप से छत्तीसगढ़ के रायपुर तक LPG पाइपलाइन बनाएगी। प्रस्तावित EPC काम की वैल्यू करीब ₹1,800 करोड़ है। इसमें GST शामिल नहीं है।

36 महीने में पूरा होगा काम

यह प्रोजेक्ट SPV के जरिए पूरा होगा। इसमें दिलीप बिल्डकॉन की 100% हिस्सेदारी होगी। कंपनी को ही करीब ₹1,800 करोड़ का EPC काम देने का प्रस्ताव है। इसे 36 महीने में पूरा करना होगा।

PNGRB अधिकृत कंपनी को LPG पाइपलाइन बिछाने, बनाने, चलाने और जरूरत के मुताबिक उसका विस्तार करने का एक्सक्लूसिव लाइसेंस देगा।

25 साल तक चलेगी पाइपलाइन

प्रोजेक्ट में पाइपलाइन की फाइनेंसिंग, निर्माण और संचालन शामिल है। तीन साल में निर्माण पूरा होने के बाद इसे 25 साल तक चलाया जाएगा।

SPV के जरिए दिलीप बिल्डकॉन पाइपलाइन की डिजाइनिंग, फाइनेंसिंग, निर्माण, संचालन और रखरखाव करेगी। इसके लिए जरूरी मंजूरियां और नियामकीय मंजूरी लेनी होगी।

LPG बॉटलिंग प्लांट तक पहुंचेगी गैस

इस पाइपलाइन से अलग-अलग तेल कंपनियों के LPG बॉटलिंग प्लांट तक LPG पहुंचाई जाएगी। इसे साझा उपयोग वाली पाइपलाइन के तौर पर भी चलाने का प्रस्ताव है। इसके तहत पात्र तेल कंपनियां और अन्य यूजर तय नियमों के मुताबिक पाइपलाइन की क्षमता का इस्तेमाल कर सकेंगे।

कंपनी LPG की खरीद, ट्रेडिंग, वितरण या बिक्री नहीं करेगी। उसका काम पाइपलाइन तैयार करना और LPG की ढुलाई की सुविधा देना होगा।

दिलीप बिल्डकॉन के शेयर

दिलीप बिल्डकॉन का शेयर बुधवार को BSE पर 0.52% की गिरावट के साथ ₹391.55 पर बंद हुआ। पिछले 1 महीने में स्टॉक 11.77% गिरा है। वहीं, 1 साल में इसने 14.82% का नेगेटिव रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 6.40 हजार करोड़ रुपये है।

दिलीप बिल्डकॉन का बिजनेस

ये इंफ्रास्ट्रक्चर और EPC कंपनी है। कंपनी सड़क और हाईवे, रेलवे और मेट्रो, एयरपोर्ट, सिंचाई, माइनिंग, पाइपलाइन, पावर ट्रांसमिशन और शहरी इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। कंपनी डिजाइन, निर्माण और प्रोजेक्ट संचालन से जुड़ी सेवाएं भी देती है।

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AI Data Centre Theme: AI डेटा सेंटर बूम से 45% तक चढ़े वाटर स्टॉक्स, कौन-कौन हैं इस थीम के बड़े खिलाड़ी?

AI Data Centre Theme: आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की तेज रफ्तार के बीच अब सिर्फ पावर कंपनियां ही नहीं, बल्कि वॉटर सेक्टर की कंपनियां भी निवेशकों के रडार पर आ गई हैं। इसकी वजह है AI डेटा सेंटर, जिन्हें बिजली के साथ-साथ बड़ी मात्रा में पानी की भी जरूरत होती है। पानी का इस्तेमाल सर्वर को ठंडा रखने और दूसरे ऑपरेशनल कामों में किया जाता है।

कुछ वॉटर स्टॉक्स एक महीने में 45% तक चढ़े 

AI थीम और सरकारी योजनाओं की वजह से पिछले एक महीने में कुछ वॉटर स्टॉक्स में 45% तक की तेजी देखने को मिली है। हालांकि, बुधवार के कारोबार में इन शेयरों का प्रदर्शन मिला-जुला रहा।

VA Tech Wabag का शेयर 0.64% गिरा। वहीं Enviro Infra Engineers 0.69%, Indian Hume Pipe Company 0.37% और Denta Water and Infra Solutions 0.25% चढ़े।

Felix Industries 2.67% की बढ़त के साथ सबसे ज्यादा चढ़ने वाला शेयर रहा। वहीं Polysil Irrigation Systems में मामूली तेजी और Welspun Corp में हल्की गिरावट दर्ज की गई।

वॉटर स्टॉक्स में दिलचस्पी क्यों बढ़ रही है?

Master Capital Services के चीफ रिसर्च ऑफिसर रवि सिंह के मुताबिक, इस तेजी की दो बड़ी वजह हैं। पहली, सरकार का पानी से जुड़ी परियोजनाओं पर बढ़ता खर्च। दूसरी, AI डेटा सेंटर की बढ़ती मांग।

उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन जैसी योजनाओं से VA Tech Wabag, Shakti Pumps, Enviro Infra Engineers और Jash Engineering जैसी कंपनियों को ऑर्डर मिलने की अच्छी संभावना बनी हुई है। वहीं AI डेटा सेंटर की थीम ने इस तेजी को और रफ्तार दी है।

सिर्फ AI नहीं, सरकार भी दे रही बड़ा सपोर्ट

Bajaj Finance के मुताबिक, साफ पानी की बढ़ती मांग, शहरीकरण, औद्योगिक इस्तेमाल और सरकारी निवेश की वजह से वॉटर सेक्टर की कंपनियों के लिए लंबी अवधि में अच्छी संभावनाएं हैं। यही वजह है कि कई निवेशक इस सेक्टर को स्थिर ग्रोथ वाला विकल्प मान रहे हैं।

भारत में वॉटर स्टॉक्स में कितना बड़ा मौका है ?

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, भारत का वॉटर और वेस्टवॉटर सेक्टर हर साल ₹25,000 करोड़ से ₹30,000 करोड़ का बाजार बन चुका है। इसमें करीब 40% हिस्सा पानी और 60% हिस्सा वेस्टवॉटर मैनेजमेंट का है।

SBI Cap Securities के मुताबिक, अगले 3-4 साल तक सरकार पानी से जुड़ी परियोजनाओं पर लगातार फोकस रख सकती है। वहीं, Niveshaay के फाउंडर अरविंद कोठारी का कहना है कि देश में अभी सिर्फ करीब 40% सीवेज का ही ट्रीटमेंट होता है। कई शहरों में आज भी सीवर नेटवर्क और जल आपूर्ति की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इस सेक्टर में आगे भी बड़े निवेश की जरूरत बनी रहेगी।

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