पाकिस्तान ने बांग्लादेश जा रही मदद रोकी:न्यूक्लियर फ्यूल ले जा रही फ्लाइट को एयरस्पेस नहीं दिया, सबसे बड़े बिजली संकट से जूझ रहा देश

पाकिस्तान ने बांग्लादेश के लिए न्यूक्लियर फ्यूल लेकर जा रही रूसी फ्लाइट को अपने एयरस्पेस से गुजरने की मंजूरी नहीं दी। यह उड़ान 24 सितंबर को ढाका पहुंचने वाली थी, लेकिन अब फ्यूल की डिलीवरी टल गई है। यह फ्यूल बांग्लादेश के रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट के लिए भेजा जा रहा था। इसका इस्तेमाल प्लांट में बिजली उत्पादन के लिए किया जाना है। यह घटना ऐसे समय हुई है, जब बांग्लादेश गंभीर बिजली संकट से जूझ रहा है। कई गांवों में रोज 10 से 16 घंटे तक बिजली कटौती हो रही है। फ्यूल समय पर नहीं पहुंचने से बिजली उत्पादन शुरू होने में देरी हो सकती है। इससे देश की ऊर्जा व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। आखिरी वक्त में नहीं मिली मंजूरी रूस की सरकारी न्यूक्लियर कंपनी रोसाटॉम बांग्लादेश की रूपपुर प्लांट बना रही है और न्यूक्लियर फ्यूल की सप्लाई भी वही कर रही है। प्लांट की यूनिट-2 के लिए फ्यूल की पहली खेप लेकर रूसी फ्लाइट को अजरबैजान, कजाकिस्तान, पाकिस्तान और भारत के रास्ते ढाका पहुंचना था। एयरपोर्ट पर फ्यूल उतारने की सभी तैयारियां पूरी थीं। तभी बांग्लादेशी अधिकारियों को बताया गया कि रूस को पाकिस्तानी एयरस्पेस इस्तेमाल करने की मंजूरी नहीं मिली है। बांग्लादेश के विज्ञान और तकनीक मंत्री फकीर महबूब अनाम ने कहा कि पाकिस्तान ने मंजूरी न देने की सही वजह नहीं बताई है। अक्टूबर से दूसरे रास्ते से आएगा फ्यूल द डेली स्टार की रिपोर्ट के मुताबिक, अब रोसाटॉम ने फ्यूल की डिलीवरी के लिए दूसरा रास्ता तय किया है। सप्लाई अक्टूबर से दोबारा शुरू होगी। रोसाटॉम ने कहा है कि बाकी फ्यूल दिसंबर तक 7 अलग-अलग कार्गो फ्लाइट्स से बांग्लादेश पहुंचाया जाएगा। कंपनी ने यह भी कहा है कि डिलीवरी में हुई देरी से रूपपुर प्लांट के पूरे शेड्यूल पर असर नहीं पड़ेगा। ढाका में पाकिस्तान के हाई कमीशन ने इस मामले को तकनीकी और प्रक्रिया से जुड़ी दिक्कत बताया है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान बांग्लादेश के साथ अपने रिश्तों को काफी अहमियत देता है और इस घटना को इसी तकनीकी संदर्भ में देखा जाना चाहिए। बांग्लादेश में बन रहा पहला न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश ने अपनी बिजली जरूरत पूरी करने के लिए रूस से 2011 में समझौता किया था। इसके तहत राजधानी ढाका से करीब 160 किलोमीटर दूर पद्मा नदी के किनारे रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बनाने की योजना बनी। यह देश का पहला परमाणु बिजलीघर है। इसे रूस की सरकारी परमाणु एजेंसी रोसाटॉम की अगुवाई में बनाया जा रहा है। प्रोजेक्ट की लागत करीब 12.65 अरब डॉलर है। इस प्रोजेक्ट पर 2017 में काम शुरू हुआ था। बांग्लादेशी अधिकारियों के मुताबिक सब कुछ ठीक रहा तो दिसंबर 2026 से बिजली उत्पादन का काम शुरू होगा। 2 साल पहले ही लेट है रूपपुर प्लांट रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट बांग्लादेश में बिजली की सप्लाई बढ़ाने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका काम कोरोना महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध की वजह से करीब 2 साल पीछे हो चुका है। अप्रैल में प्लांट की यूनिट-1 में न्यूक्लियर फ्यूल डालने का काम शुरू हुआ था। इसके बाद अगस्त में प्लांट की अंतिम टेस्टिंग शुरू हुई। अक्टूबर में यूनिट-1 से करीब 300 मेगावाट बिजली ट्रायल के तौर पर नेशनल ग्रिड में भेजने की तैयारी है। दिसंबर में कमर्शियल बिजली उत्पादन शुरू होने की उम्मीद है। ऐसा होने पर बांग्लादेश न्यूक्लियर पावर पैदा करने वाला दुनिया का 33वां देश बन जाएगा। गैस की कमी और आयात ने बांग्लादेश की परेशानी बढ़ाई बांग्लादेश की बिजली व्यवस्था लंबे समय से प्राकृतिक गैस पर निर्भर है। देश अपनी जरूरत की गैस का एक बड़ा हिस्सा बाहर से महंगे दामों पर खरीदता है। ईरान युद्ध के बाद पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से गैस की सप्लाई पर भी असर पड़ा है। दुनिया की करीब पांचवीं ऊर्जा सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती है। इसके बंद होने से बांग्लादेश जैसे ऊर्जा आयात करने वाले देशों की परेशानी और बढ़ गई है। इस बिजली संकट का असर बांग्लादेश की फैक्ट्रियों पर भी पड़ा है। गारमेंट, फूड, सिरेमिक और फार्मास्युटिकल कंपनियों को उत्पादन कम करना पड़ा है। अस्पतालों में भी बिजली कटौती के दौरान नर्सों को मरीजों की देखभाल के लिए टॉर्च का इस्तेमाल करना पड़ा। ऐसे में बांग्लादेश के लिए रूपपुर न्यूक्लियर पावर प्लांट को जल्द शुरू करना अहम है। इससे देश में बिजली की सप्लाई बढ़ सकती है और बाहर से खरीदी जाने वाली ऊर्जा पर निर्भरता कम हो सकती है। ——————— यह खबर भी पढ़ें… PoK के लोग बोले- हमें भारत का रास्ता दो, तारबंदी हटाओ पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में आजादी की आवाजें तेज हो गई हैं। LoC (नियंत्रण रेखा) से लगभग 7 किमी दूर मंधोल में 25 हजार लोग इसके लिए प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका कहना है कि हम भारत से मिलना चाहते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

बाजार पर मैक्रो का ट्रिपल अटैक!क्या बचेगा निफ्टी का 52-हफ्ते का निचला स्तर? जानें गिफ्ट निफ्टी से क्या दे रहा संकेत

Gift Nifty Indicator: मंगलवार को भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स सेंसेक्स और निफ्टी के सपाट या सतर्क रुख के साथ खुलने की संभावना है। पिछले सेशन में हुई भारी बिकवाली के बाद GIFT निफ्टी में बहुत कम हलचल दिख रही है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें, US ट्रेजरी यील्ड में बढ़ोतरी, FII की लगातार बिकवाली, जियोपॉलिटिकल अनिश्चितताएं और कमजोर ग्लोबल इक्विटी मार्केट का सेंटीमेंट पर असर पड़ रहा है।

सुबह 7:45 बजे GIFT निफ्टी 5 अंक या 0.02 फीसदी गिरकर 22,819 पर ट्रेड कर रहा था। सोमवार को भारतीय इक्विटी मार्केट में भारी गिरावट देखी गई। सेंसेक्स 1,124.02 अंक या 1.52 प्रतिशत गिरकर 72,771.72 पर आ गया, जबकि निफ्टी 360.25 अंक या 1.56 प्रतिशत गिरकर 22,780.25 पर बंद हुआ।

भारतीय इक्विटी मार्केट के लिए बाहरी माहौल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ब्रेंट क्रूड की कीमत $106 प्रति बैरल से ऊपर चली गई क्योंकि US-ईरान शांति प्रयासों में जल्द किसी समाधान की उम्मीद कम हो गई है। वहीं, एशियाई इक्विटी मार्केट में गिरावट आई और US स्टॉक-इंडेक्स फ्यूचर्स भी नीचे ट्रेड कर रहे थे। वॉल स्ट्रीट भी रात भर भारी गिरावट के साथ बंद हुआ क्योंकि तेल की ऊंची कीमतों और ट्रेजरी यील्ड ने महंगाई और फेडरल रिजर्व की ब्याज दर की चाल को लेकर चिंताएं बढ़ा दीं।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली एक बड़ी बाधा बनी रही। FII लगातार तीसरे सेशन में नेट सेलर रहे और 28 सितंबर को 5,300 करोड़ रुपये से अधिक की इक्विटी बेची। DII ने इस आउटफ्लो को संतुलित करते हुए लगभग 5,189 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी।

तेल और बॉन्ड यील्ड के दबाव से एशियाई बाजारों में गिरावट

मंगलवार को एशियाई इक्विटी मार्केट में गिरावट देखी गई क्योंकि तेल की बढ़ती कीमतों और फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरें और बढ़ाने की बढ़ती उम्मीदों ने ट्रेजरी यील्ड को कई सालों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया। MSCI का एशिया-पैसिफिक इक्विटी इंडेक्स 0.5 प्रतिशत गिर गया, जिसमें जापानी और दक्षिण कोरियाई शेयरों में गिरावट देखी गई। हांगकांग का हैंग सेंग 0.4 प्रतिशत गिर गया, जबकि शंघाई कंपोजिट में बहुत कम बदलाव हुआ। ऑस्ट्रेलियाई इक्विटी मार्केट भी मोटे तौर पर सपाट रहा। US इक्विटी फ्यूचर्स में सुस्ती रही; Nasdaq 100 फ्यूचर्स 0.3 प्रतिशत और S&P 500 फ्यूचर्स 0.1 प्रतिशत नीचे रहे।

ब्रेंट क्रूड $106 के पार पहुंचा

मंगलवार को लगातार दूसरे सेशन में तेल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई। मिडिल ईस्ट में सप्लाई में रुकावट की चिंताएं, उस क्षेत्र से क्रूड एक्सपोर्ट में सुधार के संकेतों पर भारी पड़ीं। ब्रेंट क्रूड 1.6 प्रतिशत बढ़कर $106.93 प्रति बैरल हो गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 1.3 प्रतिशत बढ़कर $93.80 पर पहुंच गया।

US-ईरान विवाद में जल्द ही किसी डिप्लोमैटिक समाधान की उम्मीद कम हो गई है। एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा कि बातचीत को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज़ के ज़रिए सप्लाई में संभावित रुकावट की चिंताएं बनी हुई हैं।

इंडेक्स पर क्या हो रणनीति

चॉइस इक्विटी ब्रोकिंग प्राइवेट लिमिटेड के टेक्निकल रिसर्च VP सचिन गुप्ता ने कहा, “तुरंत सपोर्ट 72,300–72,500 पर है, जबकि 72,900–73,000 मुख्य रेजिस्टेंस ज़ोन के तौर पर काम कर सकता है। ब्रॉडर ट्रेडिंग रेंज 72,300–73,000 है, और कुल मिलाकर रुख साइडवेज से लेकर मंदी (बेयरिश) वाला है। शॉर्ट-टर्म स्ट्रक्चर में कुछ स्थिरता लाने के लिए 73,000 के ऊपर लगातार रिकवरी की ज़रूरत होगी। कुल मिलाकर, इंडेक्स साइडवेज से लेकर मंदी वाला बना हुआ है, और जब तक मज़बूत रिबाउंड नहीं दिखता, ट्रेडर्स को सावधान रहना चाहिए। 72,900–73,000 के ऊपर लगातार बढ़त कुछ राहत दे सकती है, जबकि 72,300 के नीचे जाने पर गिरावट का दौर और बढ़ सकता है।”

एनरिच मनी के CEO पोनमुडी आर ने कहा, “भारतीय इक्विटी मार्केट पर दबाव बने रहने की उम्मीद है क्योंकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और U.S.-ईरान संघर्ष को लेकर लगातार अनिश्चितता मार्केट के सेंटीमेंट पर असर डाल रही है। U.S. प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि U.S. इस संघर्ष में ‘बहुत जल्द’ जीत हासिल करेगा, जबकि अधिकारी संघर्ष को खत्म करने के लिए मध्यस्थों से बातचीत कर रहे हैं। हालांकि, बातचीत को लेकर काफी अनिश्चितता बनी हुई है, जिससे होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के ज़रिए संभावित सप्लाई में रुकावट की चिंताएं बनी हुई हैं।”

Stock Market Live Update: गिफ्ट निफ्टी दे रहा संकेत, फ्लैट हो सकती है भारतीय बाजार की शुरुआत

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

LPG Price 29 September 2026: घरेलू गैस के दाम बढ़े या घटे? जानें दिल्ली से पटना तक का रेट

LPG Price 29 September 2026: महीने का अंत आते ही रसोई गैस की कीमतों पर लोगों की नजर टिक जाती है। 29 सितंबर को घरेलू LPG सिलेंडर के दाम में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया गया है। दिल्ली समेत देश के कई प्रमुख शहरों में कीमतें पुराने स्तर पर बनी हुई हैं। वहीं, कमर्शियल सिलेंडर के रेट भी स्थिर हैं। हालांकि, अब नजर 1 अक्टूबर पर है, क्योंकि हर महीने की पहली तारीख को तेल कंपनियां LPG की कीमतों की समीक्षा करती हैं। ऐसे में नए महीने की शुरुआत में सिलेंडर महंगा होगा, सस्ता होगा या मौजूदा रेट पर ही मिलेगा, इस पर उपभोक्ताओं की नजर रहेगी।

सिलेंडर वही, लेकिन सब्सिडी का नियम बदलने वाला है

LPG उपभोक्ताओं के लिए इस बार सिर्फ कीमतों का अपडेट महत्वपूर्ण नहीं है। 1 अक्टूबर से सब्सिडी हासिल करने के नियम में भी बदलाव होने की बात सामने आई है।

सब्सिडी वाले घरेलू सिलेंडर का फायदा जारी रखने के लिए बायोमेट्रिक आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी होगा। जिन ग्राहकों ने e-KYC या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन नहीं कराया है, उनके लिए सरकारी सब्सिडी रुक सकती है।

कनेक्शन बंद नहीं होगा, लेकिन जेब पर पड़ेगा असर

सब्सिडी नहीं मिलने का मतलब यह नहीं है कि आपका गैस कनेक्शन बंद कर दिया जाएगा। कनेक्शन पहले की तरह चलता रहेगा और सिलेंडर की सप्लाई भी मिलती रहेगी।

फर्क सिर्फ इतना होगा कि सब्सिडी का लाभ नहीं मिलने पर सिलेंडर की वास्तविक बाजार कीमत चुकानी पड़ सकती है। इसलिए जिन उपभोक्ताओं ने अभी तक अपना e-KYC या बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन पूरा नहीं किया है, उनके लिए यह अपडेट खास मायने रखता है।

किस शहर में LPG सबसे महंगा?

29 सितंबर के उपलब्ध रेट पर नजर डालें तो अलग-अलग शहरों में घरेलू सिलेंडर की कीमत में अंतर बना हुआ है। दिल्ली में यह 942 रुपये, मुंबई में 941.50 रुपये और कोलकाता में 968 रुपये है।

हैदराबाद में घरेलू सिलेंडर 994 रुपये का है, जबकि रांची में इसकी कीमत 1,010.50 रुपये दर्ज की गई है। कमर्शियल सिलेंडर के दाम भी शहर के हिसाब से अलग हैं।

एक नजर में आज के LPG रेट

शहर14.2 किलो घरेलू19 किलो कमर्शियल
दिल्ली₹942₹2,747.50
मुंबई₹941.50₹2,701
कोलकाता₹968₹2,884
बेंगलुरु₹944.50₹2,831
हैदराबाद₹994₹2,996
चेन्नई₹957.50₹2,916.50
कटक₹968₹2,885
कोयंबटूर₹959₹2,940
रांची₹1,010.50₹2,925.50

LPG के साथ कच्चे तेल पर भी नजर

LPG की कीमतों के बीच अंतरराष्ट्रीय तेल बाजार में भी हलचल तेज है। एशियाई कारोबार में ब्रेंट क्रूड 0.80% की तेजी के साथ 98.22 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया।

ईरान से जुड़े घटनाक्रम और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बनी अनिश्चितता ने तेल बाजार की चिंता बढ़ाई है। इससे आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों पर नजर रखना जरूरी हो गया है।

अब 1 अक्टूबर का इंतजार

फिलहाल 29 सितंबर को घरेलू और कमर्शियल LPG के दाम में कोई बदलाव नहीं हुआ है। अब सबकी नजर 1 अक्टूबर पर है। उस दिन सिर्फ सिलेंडर की कीमतों का अपडेट ही नहीं, बल्कि सब्सिडी से जुड़े नियमों का असर भी उपभोक्ताओं के लिए अहम रहेगा।

Petrol Diesel Price Today: 29 सितंबर के पेट्रोल-डीजल रेट जानें, यहां मिलेगा पूरा अपडेट

Gold Silver Prices Today: चांदी एक ही दिन में ₹5000 सस्ती हुई, सोने के भाव में भी बड़ी गिरावट

Gold Silver Prices Today: सोने और चांदी की कीमतों में सोमवार को बड़ी गिरावट आई। दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोना ₹2,600 टूटकर ₹1.50 लाख प्रति 10 ग्राम पर आ गया। चांदी भी ₹5,000 गिरकर ₹2.32 लाख प्रति किलो पर पहुंच गई।

दोनों कीमती धातुओं पर ग्लोबल मार्केट की बिकवाली का असर दिखा। मजबूत अमेरिकी डॉलर और बढ़ते कच्चे तेल की कीमतों ने भी दबाव बढ़ाया। ग्लोबल मार्केट में भी सोने की कीमत में करीब 3% की गिरावट आई।

डॉलर मजबूत होने से दबाव

ब्रोकरेज प्लेटफॉर्म Lemonn के हेड ऑफ रिसर्च गौरव गर्ग ने कहा कि मजबूत अमेरिकी डॉलर की वजह से सोने और चांदी पर दबाव बना हुआ है।

आमतौर पर डॉलर मजबूत होने पर दूसरी करेंसी में सोना महंगा हो जाता है। इससे इसकी मांग पर असर पड़ सकता है।

कच्चा तेल 108 डॉलर के पार

गौरव गर्ग के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड करीब 4% चढ़कर 108.53 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने से सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी है।

होर्मुज स्ट्रेट को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। इसका असर कच्चे तेल की कीमतों पर दिखा।

ग्लोबल मार्केट में भी सोना-चांदी टूटा

विदेशी बाजार में स्पॉट गोल्ड 128.93 डॉलर यानी 3.01% गिरकर 4,156.44 डॉलर प्रति औंस पर आ गया। वहीं, चांदी 2.96 डॉलर यानी 4.6% टूटकर 61.34 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गई।

Mudrex के लीड क्वांट एनालिस्ट अक्षत सिद्धांत ने कहा कि सोना 4,200 डॉलर प्रति औंस के नीचे आ गया है। चांदी भी करीब 61 डॉलर के स्तर पर कारोबार कर रही है।

अमेरिका-ईरान तनाव का असर

अक्षत सिद्धांत के मुताबिक, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के उस प्रस्ताव को खारिज कर दिया है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट खोलने और परमाणु वार्ता शुरू करने की बात कही गई थी।

ईरान ने भी कहा है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में उसका प्रतिनिधिमंडल अमेरिका के साथ बातचीत की योजना नहीं बना रहा है। इस घटनाक्रम से बाजार में अनिश्चितता बढ़ी है।

Commodity Market : 7 हफ्तों के निचले स्तरों पर पहुंचे सोने-चांदी के दाम, क्रूड में फिर बड़ा उछाल

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Commodity Market : 7 हफ्तों के निचले स्तरों पर पहुंचे सोने-चांदी के दाम, क्रूड में फिर बड़ा उछाल

Commodity Market : कारोबारी हफ्ते की शुरुआत सोने-चांदी के लिए भारी गिरावट के साथ हुई। सोने-चांदी की कीमतें 7 हफ्तों के निचले स्तर पर पहुंच गईं और 3% से ज्यादा की गिरावट दर्ज हुई। MCX पर सोना 1.48 लाख रुपए प्रति 10 ग्राम के नीचे चला गया है। वहीं, MCX पर चांदी 2.27 लाख रुपए प्रति किलो के नीचे आ गई है। वहीं इंटरनेशनल मार्केट में सोना $4200 के नीचे है। जबकि इंटरनेशनल मार्केट में चांदी $62 के नीचे दिख रही है। इस बीच ब्रेंट क्रूड का भाव $107 के पार निकल गया है। महंगे क्रूड से महंगाई बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है। डॉलर इंडेक्स भी 101 के ऊपर कायम है। अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में भी तेजी जारी। महंगाई बढ़ने पर फेड दरें बढ़ा सकता है।

वेंचुरा में कमोडिटी और CRM के हेड, एन एस रामास्वामी का कहना है कि हाल की तेजी के बाद सोने की कीमतों में भारी गिरावट आई है। इसकी वजह अमेरिका में ट्रेजरी यील्ड में तेजी और फेडरल रिजर्व द्वारा और सख्ती बरतने की बढ़ती उम्मीदें हैं। अमेरिका की 10-साल की ट्रेजरी यील्ड बढ़कर 5.2% के ऊपर पहुंच गई है,जो जून 2007 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। जबकि 30-साल की यील्ड बढ़कर लगभग 5.52% हो गई है, जो 2004 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है। होर्मुज जलडमरूमध्य और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव महंगाई की चिंताओं को बढ़ा रहे हैं, जिससे डॉलर इंडेक्स मज़बूत हो रहा है और बॉन्ड यील्ड बढ़ रही है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। इस बीच अमेरिका के उम्मीद से बेहतर आर्थिक आंकड़ों ने ब्याज दरों में और बढ़ोतरी की उम्मीदों को मज़बूत किया है। सितंबर में कंपोजिट PMI बढ़कर 58.4 हो गई है,जो पांच साल से ज़्यादा समय में सबसे तेज़ रफ़्तार है।

इस हफ़्ते बाजार की नजर कोर PCE महंगाई के आंकड़ों (जो फ़ेड का पसंदीदा महंगाई पैमाना है) और GDP के फाइनल आंकड़ों पर रहेगी। ये दोनों बुधवार को आने वाले हैं। वहीं,नॉन-फार्म पेरोल के आंकड़े शुक्रवार को आएंगे। इस हफ्ते अमेरिका और ईरान के बीच संभावित बातचीत पर भी सबकी नजर रहेगी।

आगे सोने की चाल महंगाई की चिंता और ग्लोबल सेंट्रल बैंकों के संभावित एक्शन पर निर्भर करेंगी। फिलहाल इसका ट्रेंड थोड़ा कमजोर बना हुआ है। MCX गोल्ड दिसंबर 149,427 के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके लिए तत्काल रेजिस्टेंस 151,000, 153,500 और 155,500 पर है, जबकि सपोर्ट 148,000, 145,000 और 140,000 पर दिख रहा है। COMEX गोल्ड दिसंबर 4,194 डॉलर के आसपास ट्रेड कर रहा है। इसके लिए सबसे नजदीकी रेजिस्टेंस 4,260 डॉलर और 4,350 डॉलर पर है,जबकि सपोर्ट 4,130, 4,050 और 4,000 डॉलर पर दिख रहा है।

Gold Silver price: MCX पर सोना ₹4,300 हुआ सस्ता, चांदी ₹8000 गिरी, अब क्या करें निवेशक!

क्रूड की चाल पर एक नजर

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच क्रूड में फिर बड़ा उछाल देखने को मिला है। आज कच्चे तेल के दाम करीब 3% चढ़े हैं। ब्रेंट $108 के पार चला गया तो WTI $94 के ऊपर पहुंच गया है। ईरान से बातचीत की उम्मीद के बावजूद तनाव कम नहीं हुआ है। ट्रंप ने ईरान का स्ट्रेट खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया है और ईरान पर ज्यादा मांग रखने का आरोप लगाया है। उधर, ईरान ने US के साथ भीषण जंग के लिए तैयार रहने की बात कही है। बाजार को सप्लाई संकट गहराने की आशंका है।

इक्विटी मार्केट पर क्या होगा असर?

मास्टर कैपिटल सर्विसेज़ में चीफ़ रिसर्च ऑफ़िसर रवि सिंह का कहना है कि बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों,जियोपॉलिटिकल तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को लेकर बनी चिंताओं की वजह से भारी गिरावट आई है। साथ ही FPI की बिकवाली और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का बढ़ना भी बाजार पर भारी पड़ रहा है।

FPI की तरफ से लगातार हो रही निकासी भारतीय इक्विटी पर बिकवाली का दबाव बढ़ा सकती है। डॉलर की मांग के कारण रुपये की कमजोरी बढ़ सकती है, आयातित महंगाई का जोखिम बढ़ा सकता है और बाजार में कुल लिक्विडिटी और निवेशकों का भरोसा घट सकता है।

बैंक,तेल मार्केटिंग कंपनियां,पेंट,टायर,एयरलाइंस और कच्चे तेल से जुड़े अन्य सेक्टर पर असर पड़ सकता है। डिफेंसिव,फार्मास्यूटिकल्स,हेल्थकेयर और FMCG सेक्टर तुलनात्मक रूप मजबूती दिखा सकते हैं।

निवेशकों को कच्चे तेल की कीमतों,ईरान-अमेरिका के बीच बन रही स्थिति,होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी खबरों,अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड,FPI फ्लो,रुपये की चाल,ग्लोबल मार्केट,घरेलू महंगाई और आने वाली कॉर्पोरेट अर्निंग्स पर नजर रखनी चाहिए।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

ट्रम्प बोले- ईरान के खिलाफ जल्द जंग जीतेंगे:युद्ध खत्म होते ही तेल की कीमतें गिरेंगी; मिडटर्म चुनाव से पहले फिर हमले की संभावना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होते ही दुनियाभर में तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। ट्रम्प ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य है। ट्रम्प से पूछा गया कि क्या मिडटर्म चुनाव से पहले अमेरिकी सैन्य हमले फिर शुरू हो सकते हैं। उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया। ट्रम्प ने कहा, “यह संभव है, लेकिन मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता।” ट्रम्प बोले- सैन्य मोर्चे पर हम पहले ही जीत चुके ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों, दोनों के जरिए ईरान पर दबाव बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि सैन्य मोर्चे पर अमेरिका पहले ही जीत चुका है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि कार्रवाई पूरी तरह रुक गई है। ईरान की अर्थव्यवस्था पर ट्रम्प ने कहा कि उसकी मुद्रा की कीमत गिर गई है और महंगाई तेजी से बढ़ी है। उन्होंने ईरान में महंगाई दर करीब 300% होने का दावा किया। ईरान बोला- विनाशकारी जंग के लिए तैयार ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उनका देश जंग दोबारा शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। NBC न्यूज के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में उन्होंने कहा, “हम किसी भी नए हमले का मजबूती से सामना करेंगे, भले ही यह विनाशकारी जंग में बदल जाए।” अराघची ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। हालांकि, उन्होंने बातचीत का रास्ता खुला रखते हुए कहा कि शांति का कोई भी मौका नहीं गंवाना चाहिए। उनके मुताबिक, अब यह फैसला ट्रम्प को करना है कि वे कूटनीति चुनते हैं या युद्ध का रास्ता अपनाते हैं। ईरान ने जंग खत्म करने को 7 दिन का प्रस्ताव रखा था ईरान ने जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अराघची के मुताबिक, ईरान समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले वह विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों और पैसों पर लगी रोक हटाने और अपना तेल बेचने की अनुमति चाहता है। उन्होंने कहा कि ये मांगें जून में अस्थायी सीजफायर के लिए हुए समझौता ज्ञापन (MoU) जैसी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से जवाबी हमलों के बाद वह समझौता टूट गया था।

ट्रम्प बोले- ईरान के खिलाफ जल्द जंग जीतेंगे:युद्ध खत्म होते ही तेल की कीमतें गिरेंगी; मिडटर्म चुनाव से पहले फिर हमले की संभावना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ईरान के साथ युद्ध बहुत जल्द जीत जाएगा। ट्रम्प ने रविवार को फॉक्स न्यूज से बातचीत में यह बात कही। उन्होंने कहा कि युद्ध खत्म होते ही दुनियाभर में तेल की कीमतें तेजी से गिरेंगी। ट्रम्प ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना अमेरिका का सबसे बड़ा लक्ष्य है। ट्रम्प से पूछा गया कि क्या मिडटर्म चुनाव से पहले अमेरिकी सैन्य हमले फिर शुरू हो सकते हैं। उन्होंने इसकी संभावना से इनकार नहीं किया। ट्रम्प ने कहा, “यह संभव है, लेकिन मैं इस बारे में कुछ नहीं कहना चाहता।” ट्रम्प बोले- सैन्य मोर्चे पर हम पहले ही जीत चुके ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका सैन्य कार्रवाई और आर्थिक प्रतिबंधों, दोनों के जरिए ईरान पर दबाव बना रहा है। उन्होंने दावा किया कि सैन्य मोर्चे पर अमेरिका पहले ही जीत चुका है, हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि कार्रवाई पूरी तरह रुक गई है। ईरान की अर्थव्यवस्था पर ट्रम्प ने कहा कि उसकी मुद्रा की कीमत गिर गई है और महंगाई तेजी से बढ़ी है। उन्होंने ईरान में महंगाई दर करीब 300% होने का दावा किया। ईरान बोला- विनाशकारी जंग के लिए तैयार ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उनका देश जंग दोबारा शुरू होने की स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। NBC न्यूज के कार्यक्रम ‘मीट द प्रेस’ में उन्होंने कहा, “हम किसी भी नए हमले का मजबूती से सामना करेंगे, भले ही यह विनाशकारी जंग में बदल जाए।” अराघची ने कहा कि ईरान अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करेगा। हालांकि, उन्होंने बातचीत का रास्ता खुला रखते हुए कहा कि शांति का कोई भी मौका नहीं गंवाना चाहिए। उनके मुताबिक, अब यह फैसला ट्रम्प को करना है कि वे कूटनीति चुनते हैं या युद्ध का रास्ता अपनाते हैं। ईरान ने जंग खत्म करने को 7 दिन का प्रस्ताव रखा था ईरान ने जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया। अराघची के मुताबिक, ईरान समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले वह विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों और पैसों पर लगी रोक हटाने और अपना तेल बेचने की अनुमति चाहता है। उन्होंने कहा कि ये मांगें जून में अस्थायी सीजफायर के लिए हुए समझौता ज्ञापन (MoU) जैसी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से जवाबी हमलों के बाद वह समझौता टूट गया था। ———— ये खबर भी पढ़ें… अमेरिका चुनाव के बाद ईरान पर हमला कर सकता है:रिजल्ट का इंतजार कर रहे ट्रम्प; उनकी रिपब्लिकन पार्टी हार सकती है अमेरिका ईरान पर एक बार फिर बड़ा हमला कर सकता है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, राष्ट्रपति ट्रम्प नवंबर में होने वाले मिडटर्म चुनाव के नतीजों का इंतजार कर रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

Nifty Outlook: लगातार 7 हफ्ते गिरा निफ्टी, अब 28 सितंबर को कैसी रहेगी चाल? जानिए एक्सपर्ट्स से

Nifty Outlook: पिछले हफ्ते बुधवार की तेज बिकवाली के बाद शुक्रवार को निफ्टी संभला। इंडेक्स 77 अंक चढ़कर 23,140 पर बंद हुआ। हालांकि, पूरे हफ्ते निफ्टी 0.88% नीचे रहा। यह लगातार सातवां हफ्ता है, जब इंडेक्स गिरावट के साथ बंद हुआ है।

निफ्टी दिन के निचले स्तर से करीब 142 अंक संभला। इसके बावजूद अगस्त की शुरुआत के 24,772 के स्तर से इंडेक्स अब 1,750 अंक से ज्यादा नीचे आ चुका है।

इन शेयरों में दिखी तेजी

Axis Bank, Asian Paints और M&M शुक्रवार को निफ्टी के टॉप गेनर्स रहे। दूसरी तरफ Max Healthcare, Tata Motors Passenger Vehicles और Infosys सबसे ज्यादा गिरने वाले शेयरों में रहे।

सेक्टोरल इंडेक्स में भी तस्वीर मिली-जुली रही। Consumer Durables, Realty और Auto में खरीदारी दिखी। वहीं Healthcare, Media और IT कमजोर रहे।

ब्रॉडर मार्केट में भी ज्यादा हलचल नहीं रही। Nifty Midcap 100 में 0.14% की गिरावट आई। वहीं Nifty Smallcap 100 में 0.15% की बढ़त रही।

रुपये में भी मजबूती

भारतीय रुपया 15 पैसे मजबूत होकर करीब 95.81 रुपये प्रति डॉलर पर बंद हुआ। एशियाई करेंसी में मजबूती से रुपये को सपोर्ट मिला।

कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का भी फायदा मिला। इसके अलावा अमेरिका और ईरान के बीच सीजफायर की संभावित बातचीत से भी बाजार को राहत मिली।

अगले हफ्ते किन चीजों पर नजर?

अगले हफ्ते बाजार की नजर कच्चे तेल और ग्लोबल बॉन्ड यील्ड पर रहेगी। पश्चिम एशिया की खबरें भी बाजार की चाल तय कर सकती हैं।

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। सऊदी अरब और हूती तनाव पर भी नजर रहेगी। इन घटनाक्रमों का असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। अगर होर्मुज रूट को चरणबद्ध तरीके से फिर खोलने की दिशा में कोई प्रगति होती है, तो बाजार को राहत मिल सकती है।

ग्लोबल मार्केट से मिलेंगे ये संकेत

चीन के आधिकारिक और Caixin PMI आंकड़े अगले हफ्ते अहम रहेंगे। अमेरिका के Consumer Confidence और JOLTS Job Openings के आंकड़ों पर भी नजर होगी।

यूरोजोन की सितंबर की महंगाई के आंकड़े भी बाजार के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसके अलावा अमेरिकी फेडरल रिजर्व के तीन अधिकारियों के बयान और Bank of Japan की बैठक के मिनट्स भी ब्याज दरों को लेकर बाजार की उम्मीदों को प्रभावित कर सकते हैं।

23,000 है सबसे अहम सपोर्ट

HDFC Securities के नागराज शेट्टी के मुताबिक, निफ्टी के लिए 23,000 का स्तर अहम है। अगर इंडेक्स इसके नीचे निर्णायक रूप से फिसलता है तो कमजोरी बढ़ सकती है। ऐसे में 22,600 तक गिरावट का रास्ता खुल सकता है।

ऊपर की तरफ 23,350 के आसपास रेजिस्टेंस दिख रहा है। यानी इस स्तर के ऊपर टिकना भी बाजार के लिए अहम होगा।

23,000 के नीचे और दबाव संभव

Angel One के ओशो कृष्णन भी 23,000 को अहम सपोर्ट मानते हैं। उनके मुताबिक, इसके नीचे तेज गिरावट आती है तो निफ्टी 22,800-22,700 के जोन तक जा सकता है।

ऊपर की तरफ 23,280-23,350 का स्तर शुरुआती रेजिस्टेंस है। इसके बाद 23,500-23,550 का जोन अहम रहेगा।

23,600 के ऊपर तस्वीर बदल सकती है

HDFC Securities के नंदीश शाह के मुताबिक, 23,300 और 23,600 निफ्टी के लिए अहम रेजिस्टेंस हैं। 23,600 का स्तर हाल के फ्लैग पैटर्न के ब्रेकडाउन लेवल से भी जुड़ा है।

नीचे की तरफ 23,000 के बाद 22,700 अगला सपोर्ट है। शाह के मुताबिक, 23,600 के ऊपर निफ्टी टिकता है तो शॉर्ट टर्म का रुझान बदलकर न्यूट्रल हो सकता है।

23,300 के ऊपर मजबूती के संकेत

LKP Securities के रूपक डे के मुताबिक, 23,000 तत्काल सपोर्ट है। इसके बाद 22,700 अगला अहम स्तर है।

ऊपर की तरफ 23,200-23,300 तत्काल रेजिस्टेंस है। निफ्टी 23,300 के ऊपर टिकता है तो टेक्निकल तस्वीर बेहतर हो सकती है। वहीं 23,000 के नीचे निर्णायक गिरावट आने पर कमजोरी फिर बढ़ सकती है।

लंबी और मध्यम अवधि के लिहाज से यह शेयरों में निवेश का शानदार मौका, एक्सपर्ट ने बताई इसकी खास वजह

Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

यमन के बाजार पर हवाई हमले में 7 की मौत:40 घायल; पिछले 2 महीने में यमन में 700 से ज्यादा लोग मारे जा चुके

यमन में रविवार को एक हवाई हमले में 7 लोगों की मौत हो गई है। हूती स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इनमें बच्चे भी शामिल हैं। साथ ही, 40 लोग घायल हुए हैं। हमले में ताइज प्रांत के एक बाजार की दुकानों को निशाना बनाया गया। रॉयटर्स के मुताबिक यमन की सरकार ने कहा कि उसकी सेना ने हूती सैन्य कैंप और वाहनों को निशाना बनाते हुए यह हमले किए। रॉयटर्स ने यमनी सरकार के सूत्रों के हवाले से बताया कि हूती विद्रोहियों ने हाल ही में बाजार के पास एक सैन्य कैंप बनाया था। UN के मुताबिक, पिछले 2 महीने में फिर तेज हुए यमन संघर्ष में नागरिकों समेत 700 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। साथ ही सितंबर की शुरुआत से अब तक यमन में 82 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हो चुके हैं। घटना से जुड़ी तस्वीरें… 2014 से चल रही है यमन में जंग यमन में 2014 से गृहयुद्ध चल रहा है। एक तरफ हूती लड़ाके हैं और दूसरी तरफ यमन की सरकार के समर्थन में लड़ने वाली सेनाएं हैं। सऊदी अरब भी यमन की सरकार का समर्थन करता है। 2022 में UN की कोशिश से दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हुआ था। लेकिन पिछले कुछ महीनों में यह सीजफायर टूट गया। इसके बाद फिर मिसाइल, ड्रोन और हवाई हमले होने लगे। यमन के पास बाब अल-मंदेब स्ट्रेट है। यहां से लाल सागर के रास्ते कई जहाज गुजरते हैं। इसलिए यहां लड़ाई बढ़ने का असर दूसरे देशों के कारोबार और जहाजों की आवाजाही पर भी पड़ सकता है। यमन की सेना का दावा- हूतियों ने सऊदी पर दो ड्रोन दागे यमन सरकार की सेना ने शनिवार को कहा कि हूती विद्रोहियों ने सऊदी की राजधानी रियाद पर दो ड्रोन दागे थे। लेकिन उनके एयर डिफेंस सिस्टम ने दोनों ड्रोन्स को रोक दिया। सेना के मुताबिक, इसके अलावा हूतियों ने सऊदी अरब के दक्षिणी सीमा क्षेत्र खमिस मुशैत को निशाना बनाकर एक बैलिस्टिक मिसाइल भी दागी थी। सऊदी अरब के नागरिक सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि रात में अबहा और जिजान में भी संभावित खतरे की चेतावनी जारी की गई थी। सऊदी पर हूतियों के हमले क्यों बढ़े? यमन की लड़ाई में सऊदी अरब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त यमनी सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूती विद्रोही उसके खिलाफ लड़ रहे हैं। इसी वजह से हूतियों ने सऊदी अरब को भी निशाना बनाना शुरू किया है। जुलाई से हूतियों ने रियाद समेत अबहा, जिजान, नजरान, ताइफ, जेद्दा और यानबू जैसे शहरों पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए हैं। उन्होंने एयरपोर्ट, सैन्य ठिकानों और ऊर्जा से जुड़े बुनियादी ढांचे को भी निशाना बनाया है। लाल सागर में सऊदी जहाजों पर भी हमले हुए हैं। इसके जवाब में सऊदी अरब यमन में हूतियों के ठिकानों पर हवाई हमले कर रहा है, जिससे दोनों पक्षों के बीच टकराव और बढ़ गया है। हूतियों ने तेजी से अहम द्वीपों पर कब्जा किया यमन के हूतियों ने इस महीने लाल सागर के तट की ओर तेजी से बढ़ते हुए बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास के इलाकों पर कब्जा किया है। यह स्ट्रेट लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। इसलिए इस इलाके में लड़ाई का असर समुद्री रास्तों पर भी पड़ सकता है। इसके साथ ही, हुती विद्रोहियों ने सऊदी के जहाज या सऊदी से सामान ले जा रहे सभी जहाजों को निशाना बनाने की बात कही है। ———————- यह खबर भी पढ़ें… दावा- सऊदी अरब ने यमन में मिसाइल अटैक किया यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। हूतियों ने दावा किया है कि सऊदी अरब ने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के पास एक गांव के लोकल मार्केट पर मिसाइल अटैक किया। पूरी खबर पढ़ें…

Iran-US War Update: ‘ईरान में लोग मर रहे हैं, पैसे के लिए खोलना चाहता है होर्मुज’; ट्रंप का बड़ा दावा, तेहरान ने किया पलटवार

Iran-US War Update: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार (26 सितंबर) को दावा किया कि ईरान स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोलना चाहता है, क्योंकि अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी के चलते उसके पास पैसे नहीं आ रहे हैं। ट्रंप ने कहा कि ईरान ने खुद ही अपने लिए मुश्किल खड़ी कर ली है। मीडिया रिपोर्टर्स से बातचीत में ट्रंप ने कहा, “वे तुरंत होर्मुज जलडमरूमध्य खोलना चाहते हैं। जानते हैं क्यों? क्योंकि वे मुश्किल में हैं। उनके पास पैसे नहीं आ रहे हैं, क्योंकि उन्हें अपना पैसा होर्मुज से मिलता है। इसलिए उन्होंने खुद को ही मात दे दी।”

ट्रंप ने कहा कि होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने से पूरी दुनिया के लिए परेशानी पैदा हुई। लेकिन अमेरिका ने ईरान के बंदरगाहों पर अब तक की सबसे बड़ी नाकेबंदी लागू कर दी। उन्होंने इसे ‘स्टील की दीवार’ बताते हुए कहा कि इसके कारण ईरान के पास अब धन का प्रवाह नहीं हो रहा है। ट्रंप के मुताबिक, ईरान ने सोचा था कि जलडमरूमध्य बंद करने से दुनिया के लिए समस्या खड़ी होगी। उन्होंने कहा कि अमेरिका ने जवाब में जलडमरूमध्य को ईरान के लिए बंद कर दिया। जबकि अन्य देशों को इसका इस्तेमाल करने की अनुमति दी।

ईरान के शांति प्रस्ताव को ट्रंप ने ठुकराया

ट्रंप की यह टिप्पणी एक दिन बाद आई, जब उन्होंने खुलासा किया कि उन्होंने कतर के मध्यस्थों के जरिए ईरान की ओर से भेजे गए प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। ईरान ने इस प्रस्ताव की घोषणा इसी सप्ताह न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान की थी। इसके बाद ईरान ने रविवार को कहा कि अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे संघर्ष का समाधान केवल कूटनीति के जरिए ही संभव है। तेहरान ने यह भी कहा कि वह अभी अपने प्रस्ताव पर अमेरिका के आधिकारिक जवाब का इंतजार कर रहा है।

क्या था ईरान का प्रस्ताव?

न्यूज एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस (AP) की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने प्रस्ताव दिया था कि अगर अमेरिका ईरानी बंदरगाहों पर नौसैनिक नाकेबंदी हटाता है, तेहरान तेल की बिक्री पर लगे प्रतिबंधों में छूट देगा। साथ ही अगर सभी मोर्चों पर युद्धविराम लागू होता है, तो ईरान सात दिनों के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से खोलने और अपने परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने के लिए तैयार है। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा कि ट्रंप द्वारा प्रस्ताव खारिज किए जाने की बात अभी आधिकारिक तौर पर तेहरान तक नहीं पहुंची है।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है अहम?

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा रूट्स में से एक है। इसके जरिए बड़ी मात्रा में तेल और अन्य ऊर्जा उत्पादों का परिवहन होता है। जलडमरूमध्य के बंद होने से वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों पर बड़ा असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, पश्चिम एशिया में मौजूदा युद्ध 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों के बाद शुरू हुआ।

इसके बाद ईरान ने इजरायल और खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका से जुड़े सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। साथ ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया। इसके बाद वैश्विक ऊर्जा बाजारों में भारी उथल-पुथल और कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली।

जयशंकर ने रूस और ईरान के विदेश मंत्रियों से की मुलाकात

रूस और ईरान से तेल एवं गैस खरीदने वाले देशों पर प्रतिबंध से संबंधित एक नए कानून पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हस्ताक्षर किए जाने के कुछ दिन बाद भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के इतर रूस और ईरान के साथ विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान और रूस के अपने समकक्षों से मुलाकात की। इन बैठकों में द्विपक्षीय मुद्दों, ब्रिक्स समूह में सहयोग और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष समेत विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई।जयशंकर ने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात कर द्विपक्षीय मुद्दों और ब्रिक्स समूह में सहयोग पर चर्चा की।

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ब्रिक्स में ब्राजील, चीन, मिस्र, इथियोपिया, भारत, इंडोनेशिया, ईरान, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। भारत ने इस महीने की शुरुआत में ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन की मेजबानी की थी, जिसमें रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने भी भाग लिया था।