Behari Lal Engineering Share: कुछ ही घंटों में निवेशकों का पैसा करीब दोगुना, क्या आप निवेश का मौका चूक गए?

Behari Lal Engineering Share: बिहारी लाल इंजीनियरिंग के शेयरों ने 19 अगस्त को कमाल कर दिया। कुछ ही घंटों में इस शेयर ने निवेशकों का पैसा करीब दोगुना कर दिया। एनएसई पर कंपनी का शेयर 1:20 बजे 84 फीसदी से ज्यादा उछाल के साथ 526 रुपये पर पहुंच गया। कंपनी का शेयर 19 अगस्त को शेयर बाजारों में लिस्ट हुआ। कंपनी ने निवेशकों को प्रति शेयर 285 रुपये के भाव पर शेयर इश्यू किए थे।

कंपनी ने 285 रुपये पर इश्यू किए थे शेयर

19 अगस्त की सुबह Behari Lal Engineering के शेयर इश्यू प्राइस के मुकाबले 63 फीसदी प्रीमियम पर लिस्ट हुए। कंपनी ने इश्यू में शेयर का प्राइस बैंड 271-285 रुपये तय किया था। इस इश्यू को निवेशकों का जबर्दस्त रिस्पॉन्स मिला था। यह इश्यू 108 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था।

ग्रे मार्केट प्रीमियम से ज्यादा पर शेयरों की लिस्टिंग

बिहारी लाल इंजीनियरिंग एक इंटिग्रेटेड आयरन और स्टील मैन्युफैक्चरिंग कंपनी है। लिस्टिंग के बाद कंपनी का मार्केट वैल्यूएशन 2,193.81 करोड़ रुपये पहुंच गया। कंपनी का आईपीओ 302 करोड़ रुपये का था। खास बात यह है कि शेयर की लिस्टिंग अनऑफिशियल मार्केट में शेयर पर चल रहे ग्रे मार्केट प्रीमियम के मुकाबले काफी ज्यादा प्राइस पर हुआ।

एनएसई और बीएसई दोनों में लिस्ट हुए शेयर 

यह आईपीओ 12-14 अगस्त के बीच खुला था। इस इश्यू में कंपनी ने निवेशकों को नए शेयर इश्यू किए थे। ऑफर फॉर सेल के जरिए भी शेयरों की बिक्री हुई थी। कंपनी के शेयर बीएसई और एनएसई दोनों ही स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हुए। इस कंपनी की शुरुआत 1995 में हुई थी।

निवेशक कुछ मुनाफावसली कर सकते हैं

स्वस्तिका इनवेस्टमार्ट में वेल्थ की हेड शिवानी नयाती ने कहा कि जिन निवेशकों को बिहारी लाल इंजीनियरिंग के आईपीओ में शेयर एलॉट हुए हैं, वे कुछ मुनाफावसूली कर सकते हैं। ऐसे निवेशक जो लंबी अवधि के लिए शेयर होल्ड करना चाहते हैं वे 380 रुपये का स्टॉपलॉस लगाकर ऐसा कर सकते हैं।

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शेयर बाजार में गिरावट के बावजूद रॉकेट बने शेयर 

बिहारी लाल इंजीनियरिंग का शेयर लिंस्टिंग के बाद तब रॉकेट बन गया, जब बाजार पर दबाव था। बाजार के प्रमुख सूचकांकों में लगातार छठे दिन गिरावट देखने को मिली। निफ्टी 0.48 फीसदी यानी 114 अंक गिरकर 24,040 पर चल रहा था। सेंसेक्स 0.50 फीसदी यानी 382 अंक की गिरावट के साथ 76,852 पर चल रहा था।

गिरते बाजार में भी इन शेयरों ने दिखाया दम, बड़े ऑर्डर मिलने से आई 10% तक तेजी

शेयर बाजारों में गिरावट के बीच भी कई शेयरों ने धमाल मचाया। कुछ शेयरों की कीमतें 10 फीसदी तक उछल गईं। दरअसल, बड़े ऑर्डर मिलने से इन कंपनियों के शेयरों में जोरदार तेजी आई। इनमें रेलटेल कॉर्पोरेशन, अटलांटा इलेक्ट्रिकल्स, एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग के शेयर शामिल थे।

रेलटेल कॉर्पोरेशन का शेयर 10 फीसदी तक उछला

19 अगस्त को लगातार छठे दिन शेयर बाजारों पर दबाव दिखा। निफ्टी और सेंसेक्स लाल निशान में थे। लेकिन, RailTel Corporation of India का शेयर 10 फीसदी तक चढ़ गया। हालांकि, बाद में शेयर में थोड़ी नरमी आई। 11:30 बजे यह 3.45 फीसदी चढ़कर 287 रुपये पर चल रहा था। इस साल यह शेयर करीब 23 फीसदी गिरा है। रेलटेल कॉर्पोरेशन को एंप्लॉयीज प्रोविडेंट फंड ऑर्गेनाइजेशन (EPFO) से 166.8 करोड़ रुपये का ऑर्डर मिला है।

बड़ा ऑर्डर मिलने का असर अटलांटा इलेक्ट्रिकल्स के शेयर पर भी

Atlanta Electricals के शेयरों को भी आज पंख लग गए। इसकी वजह कंपनी को मिला 193.92 करोड़ रुपये का एक लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) है। यह ऑर्डर कंपनी को आंध्र प्रदेश के ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन से मिला है। इसके तहत कंपनी 160 एमवीए, 220/132 केवी ऑटो ट्रांसफॉर्म्स की 12 यूनिट की डिजाइनिंग, मैन्युफैक्चरिंग, टेस्टिंग और सप्लाई करेगी। अटलांटा इलेक्ट्रिकल्स का शेयर बाजार खुलते ही रॉकेट बन गया था। हालांकि, बाद में यह लाल निशान में आ गया।

इंटरआर्क बिल्डिंग के शेयरों को भी बड़ा ऑर्डर मिलने से लगे पंख

Interarch Building Solutions के शेयर में भी सुबह में जोरदार तेजी दिखी। इसकी वजह कंपनी को मिला 128 करोड़ रुपये का एक ऑर्डर है। यह ऑर्डर एक बड़ी एफएमसीजी कंपनी से मिला है। इसके तहत इंटरआर्क प्री-इंजीनियर्स मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी बनाएगी। यह प्रोजेक्ट 10 महीने में पूरा होगा। कंपनी का शेयर सुबह में 1,771 रुपये पर पहुंच गया था। बाद में तेजी थोड़ी सुस्त पड़ गई।

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एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग को REC से मिला बड़ा ऑर्डर

एचजी इंफ्रा इंजीनियरिंग के शेयरों को भी 19 अगस्त की सुबह पंख लग गए। इसकी वजह कंपनी को मिला एक लेटर ऑफ इंटेंट (LoI) है। यह REC Power Development and consultancy से मिला है। इसके तहत कंपनी यूपी के मऊ और मिर्जापुर में दो सबस्टेशंस बनाएगी। 19 अगस्त की सुबह कंपनी का शेयर एक समय 559 रुपये पर पहुंच गया था। हालांकि, बाद में तेजी थोड़ी कम हुई। यह 5.32 फीसदी चढ़कर 534.70 रुपये पर चल रहा था।

SBI Mutual Fund: एसबीआई म्यूच्यूअल फंड की इन स्कीम्स में पैसे लगाकर पाएं शानदार रिटर्न! जानिए टॉप परफॉर्मेंस वाली बेस्ट योजनाएं

Best SBI Mutual Fund Schemes: भारतीय शेयर बाजार में निवेश के जरिए वेल्थ क्रिएशन करने के लिए म्यूचुअल फंड हमेशा से रिटेल निवेशकों की पहली पसंद रहे हैं। देश के सबसे बड़े फंड हाउसों में से एक एसबीआई म्यूचुअल फंड (SBI Mutual Fund) पर करोड़ों निवेशकों का भरोसा है।

अगर आप भी अपनी मेहनत की कमाई को सही जगह निवेश करके बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो एसबीआई म्यूचुअल फंड की कुछ चुनिंदा योजनाएं आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं। आइए जानते हैं SBI MF की उन बेस्ट स्कीम्स के बारे में, जिन्होंने लंबी अवधि में निवेशकों को मल्टीफोल्ड रिटर्न दिया है।

स्मॉल-कैप और कंट्रा कैटेगरी की स्टार स्कीम्स

ज्यादा रिस्क लेकर रिकॉर्डतोड़ रिटर्न चाहने वाले निवेशकों के लिए ये स्कीम्स सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं:

SBI Small Cap Fund: यह फंड छोटी और तेजी से बढ़ती कंपनियों में निवेश करता है। इस स्कीम ने लंबी अवधि (5 से 10 साल) में 20% से ज्यादा का सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न (CAGR) दिया है। उन निवेशकों के लिए बेस्ट है जो कम से कम 5-7 साल का समय दे सकते हैं।

SBI Contra Fund: यह फंड ‘वैल्यू इन्वेस्टिंग’ की रणनीति पर काम करता है। यानी फंड मैनेजर उन कंपनियों में दांव लगाते हैं जो फिलहाल मार्केट में अंडरवैल्यूड हैं, लेकिन उनका फंडामेंटल बेहद मजबूत है। पिछले कुछ वर्षों में इस फंड ने अपने कैटेगरी के अधिकांश फंड्स को पीछे छोड़ते हुए आउटपरफॉर्म किया है।

लार्ज और मिड-कैप में संतुलन और स्थिरता

अगर आप बहुत ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते और पोर्टफोलियो में स्थिरता के साथ-साथ अच्छी ग्रोथ चाहते हैं:

SBI Large & Midcap Fund: यह फंड देश की टॉप लार्ज-कैप और मिड-कैप कंपनियों का एक संतुलित कॉम्बो है। यह मार्केट के उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से संभालता है और जोखिम को कम करते हुए स्थिर ग्रोथ देता है।

SBI Bluechip Fund: भारत की सबसे बड़ी और मार्केट लीडर कंपनियों में निवेश करने वाला यह फंड नए और सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले निवेशकों के लिए एक क्लासिक विकल्प है।

टैक्स बचाने के साथ तगड़ी कमाई (ELSS)

अगर आप टैक्स सेविंग के साथ-साथ शेयर बाजार की ग्रोथ का फायदा उठाना चाहते हैं, तो यह SBI लॉंग टर्म इक्विटी (ELSS) टैक्स-सेविंग फंड बेस्ट है। इसमें इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है। इसमें 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है, जो अन्य टैक्स-सेविंग विकल्पों (जैसे- PPF या FD) की तुलना में सबसे कम है।

बैलेंस और मॉडरेट रिस्क वाले निवेशकों के लिए हाइब्रिड फंड

SBI Equity Hybrid Fund: यह स्कीम आपके पैसे का बड़ा हिस्सा शेयर बाजार में और कुछ हिस्सा सरकारी बॉन्ड्स में लगाती है। जब शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, तब इसका डेट पोर्टफोलियो आपकी पूंजी को सुरक्षित रखने में मदद करता है।

SBI Balanced Advantage Fund: यह डायनेमिक एसेट अलोकेशन फंड है, जो बाजार के वैल्युएशन के हिसाब से ऑटोमैटिकली इक्विटी और डेट का अनुपात तय करता है।

SIP या लंपसम: कैसे शुरू करें निवेश?

एसबीआई की इन सभी स्कीम्स में आप दो तरीकों से पैसे लगा सकते हैं:

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेन्ट प्लान(SIP): आप हर महीने महज ₹500 की छोटी राशि से अनुशासित निवेश शुरू कर सकते हैं। SIP के जरिए आपको रुपी कॉस्ट एवेरेजिंग का बड़ा फायदा मिलता है।

एकमुश्त (Lump-sum): अगर आपके पास एकमुश्त रकम है तो आप न्यूनतम ₹1,000 या ₹5,000 से भी शुरुआत कर सकते हैं।

एसबीआई म्यूचुअल फंड की ये स्कीम्स लंबे समय में महंगाई को मात देने वाला रिटर्न बनाने में सक्षम हैं। हालांकि, किसी भी स्कीम में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों, समय अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता का सही आकलन जरूर कर लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

PPF vs SIP: 15 साल बाद कौन ज्यादा पैसा देगा? पूरा कैलकुलेशन समझिए

PPF vs SIP: हर साल अगर आपके पास निवेश के लिए ₹1.5 लाख हैं, तो सबसे बड़ा सवाल यही होता है। पैसा PPF में डालें या SIP करें? दोनों 15 साल के लिए अच्छे विकल्प माने जाते हैं। लेकिन दोनों का खेल अलग है। PPF में सरकार की गारंटी मिलती है। SIP में शेयर बाजार की ग्रोथ का फायदा मिलता है।

यही वजह है कि 15 साल बाद दोनों का रिजल्ट भी अलग निकलता है। अगर सिर्फ कमाई देखें तो SIP आगे निकल सकती है। लेकिन सुरक्षा और टैक्स के मामले में PPF की अपनी ताकत है।

PPF और SIP में सबसे बड़ा फर्क

PPF एक सरकारी बचत योजना है। इसमें ब्याज तय होता है और फिलहाल यह 7.1% है। इसमें पैसा सुरक्षित रहता है और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम भी टैक्स-फ्री होती है।

दूसरी तरफ SIP, म्यूचुअल फंड में निवेश का तरीका है। इसमें कोई तय रिटर्न नहीं होता। बाजार अच्छा चला तो कमाई ज्यादा हो सकती है। बाजार कमजोर रहा तो रिटर्न भी कम हो सकता है।

15 साल का हिसाब

मान लेते हैं कि आप हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं। यानी SIP में हर महीने ₹12,500 डालते हैं। तुलना के लिए SIP में 12% सालाना औसत रिटर्न का उदाहरण लिया गया है। यह इक्विटी म्यूचुअल फंड अमूमन लॉन्ग टर्म में देते हैं।

पैमानाPPF
SIP (12% उदाहरण)

हर साल निवेश₹1.5 लाख₹1.5 लाख
कुल निवेश₹22.5 लाख₹22.5 लाख
अनुमानित रिटर्न7.10%12.00%
15 साल बाद रकम₹40.7 लाख₹63.1 लाख
कुल मुनाफा₹18.2 लाख₹40.6 लाख

यानी इस मामले में SIP, PPF से करीब ₹22 लाख ज्यादा पैसा बना सकती है।

उदाहरण से समझिए

मान लीजिए राहुल और अमित दोनों हर साल ₹1.5 लाख निवेश करते हैं। राहुल PPF चुनता है। अमित हर महीने ₹12,500 की SIP करता है।

15 साल बाद राहुल के पास करीब ₹40.7 लाख होंगे। वहीं अमित के पास करीब ₹63.1 लाख हो सकते हैं। दोनों ने बराबर पैसा लगाया, लेकिन रिटर्न का फर्क करीब ₹22 लाख तक पहुंच गया।

अगर SIP का रिटर्न बदल जाए तो?

यहीं असली बात है। SIP में कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए अलग-अलग रिटर्न पर तस्वीर बदल जाती है।

SIP का औसत रिटर्न15 साल बाद रकम
8%₹43 लाख
10%₹52 लाख
12%₹63 लाख
15%₹84 लाख

यानी 8% पर SIP और PPF का फर्क बहुत कम रह जाता है। लेकिन 12-15% रिटर्न मिलने पर अंतर तेजी से बढ़ जाता है।

टैक्स में कौन आगे है?

PPF का सबसे बड़ा फायदा टैक्स है। इसमें जमा किया गया पैसा, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाली रकम तीनों टैक्स-फ्री रहती हैं।

SIP में टैक्स देना पड़ सकता है। यह इस बात पर निर्भर करता है कि आपने किस तरह के म्यूचुअल फंड में निवेश किया है और कितने समय बाद पैसा निकाला है।

किसे क्या चुनना चाहिए?

अगर आपको बिना जोखिम वाला विकल्प चाहिए, तो PPF ज्यादा सुकून देता है। इसमें पैसा सुरक्षित रहता है और रिटर्न भी तय रहता है। अगर आपका लक्ष्य ज्यादा पैसा बनाना है और आप बाजार के उतार-चढ़ाव झेल सकते हैं, तो SIP बेहतर विकल्प बन सकती है।

दोनों में निवेश ज्यादा बेहतर

मान लीजिए आपके पास हर साल ₹1.5 लाख हैं। ऐसे में पूरा पैसा सिर्फ एक जगह लगाने की जरूरत नहीं है। आप ₹75,000 PPF में और ₹75,000 SIP में लगा सकते हैं।

इससे एक तरफ सरकारी सुरक्षा मिलती है। दूसरी तरफ बाजार की ग्रोथ का फायदा भी मिलता है। यही वजह है कि कई वित्तीय सलाहकार लंबी अवधि के लिए इस तरह का संतुलन बेहतर मानते हैं।

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Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Stocks to Watch: 19 अगस्त को इन 12 शेयरों पर रखें नजर, दिख सकती है बड़ी हलचल

Stocks to Watch: बुधवार, 19 अगस्त के कारोबारी सत्र में कई कंपनियों ने बड़े फैसलों और ऑर्डर की जानकारी दी है। इनमें फंड जुटाने, नए कॉन्ट्रैक्ट, ग्रीन एनर्जी निवेश और रणनीतिक हिस्सेदारी खरीदने जैसे अपडेट शामिल हैं। ऐसे में इन शेयरों में बड़ी हलचल देखने को मिल सकती है।

Bharat Petroleum

सरकारी ऑयल रिफाइनिंग कंपनी Bharat Petroleum (BPCL) ने ₹5,000 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। कंपनी बोर्ड ने नॉन-कन्वर्टिबल डिबेंचर (NCD) जारी करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। इससे कंपनी अपनी फंडिंग जरूरतें पूरी करेगी।

RailTel

सरकारी टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी RailTel को EPFO से ₹166.8 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। यह ऑर्डर टैक्स समेत है। इससे कंपनी के ऑर्डर बुक को मजबूती मिल सकती है।

Aster DM Quality Care

हेल्थकेयर कंपनी Aster DM Quality Care में 7.2% हिस्सेदारी करीब ₹4,780 करोड़ के ब्लॉक डील के जरिए बिक सकती है। यह हिस्सेदारी TPG Inc. से जुड़ी Centella Mauritius Holdings बेच सकती है। डील का फ्लोर प्राइस ₹766.10 प्रति शेयर रखा गया है, जो पिछले NSE क्लोजिंग प्राइस से करीब 6.3% कम है।

Krystal Integrated Services

फैसिलिटी मैनेजमेंट कंपनी Krystal Integrated Services को MSRTC से करीब ₹134 करोड़ का वर्क ऑर्डर मिला है। कंपनी मुंबई और छत्रपति संभाजीनगर के तय क्षेत्रों में तीन साल तक इंटीग्रेटेड फैसिलिटी मैनेजमेंट सर्विसेज देगी। यह ऑर्डर 18 अगस्त को सामान्य कारोबारी प्रक्रिया के तहत जारी किया गया।

Atlanta Electricals

ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली कंपनी Atlanta Electricals को आंध्र प्रदेश ट्रांसमिशन कॉर्पोरेशन (APTRANSCO) से ₹193.92 करोड़ का LOI मिला है। कंपनी 160 MVA क्षमता वाले 12 ऑटो ट्रांसफॉर्मर डिजाइन, निर्माण और सप्लाई करेगी।

Exide Industries

बैटरी बनाने वाली कंपनी Exide Industries ने अपनी सहायक कंपनी Exide Energy Solutions में ₹200 करोड़ का निवेश किया है। यह रकम भारत में बन रहे मल्टी-गीगावॉट लिथियम-आयन सेल प्लांट के लिए लगाई गई है। निवेश राइट्स इश्यू के जरिए किया गया।

Highway Infrastructure

इंफ्रा कंपनी Highway Infrastructure को NHAI से ₹80.17 करोड़ का टोल ऑपरेशन कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह कॉन्ट्रैक्ट तमिलनाडु के Palayam Fee Plaza के लिए है। इसकी अवधि 90 दिन होगी।

Jubilant Ingrevia

स्पेशलिटी केमिकल्स कंपनी Jubilant Ingrevia ने Zettaone Technologies India में 40% हिस्सेदारी खरीदने का समझौता किया है। यह सौदा ₹189.2 करोड़ में होगा। इससे कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स डिजाइन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में कदम बढ़ाएगी।

Hindustan Zinc

माइनिंग और मेटल कंपनी Hindustan Zinc ने बताया कि उसकी बिजली खपत में रिन्यूएबल एनर्जी की हिस्सेदारी बढ़कर 22% हो गई है। FY26 में यह करीब 18% थी। कंपनी FY28 तक इसे 70% तक ले जाने का लक्ष्य रखती है।

ONGC

सरकारी तेल और गैस कंपनी ONGC ने असम के गोलाघाट जिले में Khoraghat GGS-1 गैस इवैक्युएशन फैसिलिटी शुरू कर दी है। इससे अपर असम शेल्फ की अतिरिक्त गैस को North East Gas Grid के जरिए प्रोसेस और सप्लाई किया जा सकेगा।

Balkrishna Industries

ऑफ-हाईवे टायर बनाने वाली कंपनी Balkrishna Industries ने ₹550 करोड़ तक जुटाने की मंजूरी दी है। कंपनी यह रकम प्राइवेट प्लेसमेंट के जरिए NCD जारी करके जुटाएगी।

Shilpa Medicare

फार्मा कंपनी Shilpa Medicare ने अमेरिका में Pemetrexed Injection की 27,923 वायल्स को स्वेच्छा से वापस मंगाने का फैसला किया है। कंपनी ने दवा के रंग में असामान्य बदलाव के कारण यह रिकॉल शुरू किया है।

Patanjali Foods: 59% रिटर्न दे सकता है ये FMCG स्टॉक, जेफरीज ने खरीदने की सलाह दी

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tempsens Instruments IPO: खुलने से पहले 56% पर पहुंचा GMP, 20 अगस्त से लगा सकेंगे पैसा

Tempsens Instruments IPO: थर्मल इंजीनियरिंग और स्पेशलाइज्ड केबल बनाने वाली कंपनी Tempsens Instruments का IPO 20 अगस्त को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा। इश्यू खुलने से पहले ही ग्रे मार्केट में इसे लेकर जबरदस्त उत्साह दिख रहा है। Investorgain के मुताबिक, कंपनी का GMP ₹168 पहुंच गया है। यानी अपर प्राइस बैंड के मुकाबले करीब 56% प्रीमियम का संकेत मिल रहा है। वहीं IPO Watch ने करीब 51.33% GMP बताया है।

कंपनी इस IPO के जरिए ₹650 करोड़ जुटाना चाहती है। एंकर निवेशकों के लिए बोली 19 अगस्त को खुलेगी, जबकि रिटेल निवेशक 20 से 24 अगस्त तक आवेदन कर सकेंगे। कंपनी के शेयर 28 अगस्त को BSE और NSE पर लिस्ट होने की संभावना है।

IPO की जरूरी बातें

इश्यू साइज₹650 करोड़
प्राइस बैंड
₹285-300 प्रति शेयर

एंकर बिडिंग19 अगस्त
सब्सक्रिप्शन20 से 24 अगस्त
संभावित लिस्टिंग
28 अगस्त (BSE और NSE)

₹468 पर हो सकती है लिस्टिंग

Tempsens ने IPO का प्राइस बैंड ₹285 से ₹300 प्रति शेयर तय किया है। अगर मौजूदा ₹168 का GMP बना रहता है, तो शेयर की संभावित लिस्टिंग करीब ₹468 पर हो सकती है।

इस हिसाब से प्रति शेयर करीब ₹168 का संभावित फायदा बनता है। हालांकि, यह सिर्फ ग्रे मार्केट का संकेत है। असली लिस्टिंग प्राइस बाजार के सेंटीमेंट और मांग पर तय होगा।

जुटाए गए पैसे का कहां होगा इस्तेमाल?

Tempsens IPO से मिलने वाली रकम का इस्तेमाल अपने कारोबार के विस्तार में करेगी। इसमें इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल बिजनेस में पूंजीगत निवेश शामिल है। इसके अलावा कंपनी कुछ कर्ज भी चुकाएगी और बाकी रकम सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों में खर्च करेगी।

Tempsens क्या करती है?

1990 में शुरू हुई Tempsens Instruments थर्मल इंजीनियरिंग और स्पेशलाइज्ड केबल बनाने वाली कंपनी है। कंपनी इंडस्ट्री के लिए कस्टमाइज्ड टेम्परेचर सेंसर, इलेक्ट्रिकल हीटिंग सॉल्यूशंस और स्पेशलाइज्ड केबल तैयार करती है।

इसके पोर्टफोलियो में कॉन्टैक्ट और नॉन-कॉन्टैक्ट दोनों तरह के टेम्परेचर सेंसर शामिल हैं। कंपनी अलग-अलग औद्योगिक सेक्टर के लिए जरूरत के हिसाब से सॉल्यूशंस भी देती है।

Shiprocket IPO: अलॉटमेंट जारी, 19 अगस्त को हो सकती है लिस्टिंग; GMP दे रहा तगड़े मुनाफे का संकेत

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Torrent Gas IPO: टोरेंट गैस आईपीओ के अपडेटेड पेपर्स फाइल करेगी, ₹4000 करोड़ का हो सकता है इश्यू

टोरेंट गैस आईपीओ के लिए अपडेटेड ड्राफ्ट पेपर्स फाइल करेगी। वह इसे इस हफ्ते ही फाइल कर सकती है। कंपनी का प्लान 4,000 करोड़ रुपये का आईपीओ पेश करने का है। इस मामले से जुड़े दो सूत्रों ने रायटर्स को यह जानकारी दी।

8 राज्यों में पीएनजी सप्लाई करती है कंपनी

Torrent Gas 8 राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में घरों और इंडस्ट्रीज को पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) सप्लाई करती है। यह कंपनी गुजरात के टोरेंट ग्रुप का हिस्सा है, जिसका हेडक्वार्टर अहमदाबाद है। इस समूह की दो कंपनियां- टोरेंट पावर और टोरेंट फार्मा पहले से शेयर बाजार में लिस्टेड हैं।

500 CNG स्टेशंस ऑपरेट करती है

टोरेंट गैस 2,00,000 से ज्यादा घरों और 1,300 से ज्यादा इंडस्ट्रीज को गैस सप्लाई करती है। यह 500 कंप्रेस्ड नेचुरल गैस (CNG) स्टेशंस भी ऑपरेट करती है। यह जानकारी कंपनी की वेबसाइट पर आधारित है। आईपीओ के प्लान के बारे में पूछने पर कंपनी ने रायटर्स के सवालों के जवाब नहीं दिए।

इस हफ्ते अपडेटेड पेपर्स होंगे फाइल

सेबी ने जून में टोरेंट गैस के आईपीओ को मंजूरी दे दी थी। कंपनी ने कॉन्फिडेंशियल रूट से आईपीओ के पेपर्स फाइल किए थे। अपडेटेड रेट हेरिंग प्रॉस्पेक्टस इस हफ्ते फाइल होने की उम्मीद है। यह कंपनी का पहला पब्लिक आईपीओ डॉक्युमेंट होगा। इस साल की पहली छमाही में सुस्ती के बाद आईपीओ बाजार में गतिविधियां काफी बढ़ी हैं।

जुलाई से अब तक आ चुके हैं 27 आईपीओ

इस साल फरवरी के आखिर में अमेरिका और ईरान में लड़ाई शुरू हुई थी। इसका असर आईपीओ बाजार पर भी पड़ा था। जुलाई से अब तक 27 कंपनियां आईपीओ पेश कर चुकी हैं या उसे लॉन्च करने का ऐलान कर चुकी हैं। इस साल की पहली छमाही में करीब 28 कंपनियों ने आईपीओ लॉन्च किए।

आईपीओ के कॉन्फिडेंशियल रूट का मतलब

सेबी के पास कॉन्फिडेंशियल रूट से आईपीओ के पेपर्स फाइल करने पर कंपनी को तब तक इस बारे में सार्वजनिक रूप से कुछ बताने की जरूरत नहीं पड़ती है जब तक वह इश्यू लॉन्च करने के प्लान पर आगे बढ़ने का फैसला नहीं कर लेती। टोरेंट फार्मा का शेयर 18 अगस्त को 1.57 फीसदी चढ़कर 4,977 रुपये पर बंद हुआ। टोरेंट पावर का शेयर 3.76 फीसदी गिरकर 1,263.50 रुपये पर बंद हुआ।

Patanjali Foods: 59% रिटर्न दे सकता है ये FMCG स्टॉक, जेफरीज ने खरीदने की सलाह दी

Patanjali Foods: ग्लोबल ब्रोकरेज Jefferies ने FMCG सेक्टर की कंपनी Patanjali Foods (PFL) पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ₹560 का टारगेट प्राइस दिया है। यह ₹351 के मौजूदा स्तर से ₹560 करीब 60% तक की तेजी का संकेत है।

Patanjali Foods पर क्यों बुलिश है Jefferies?

Jefferies के मुताबिक, Patanjali Foods अगले 12 महीनों की अनुमानित कमाई के मुकाबले करीब 23 गुना वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY26 से FY29 के बीच कंपनी का PAT 23% CAGR से बढ़ सकता है। साथ ही ROCE में करीब 590 बेसिस पॉइंट का सुधार होकर यह 18% तक पहुंच सकता है।

इन्हीं अनुमानों के आधार पर Jefferies ने Sum-of-the-Parts (SOTP) वैल्यूएशन मॉडल से ₹560 का टारगेट तय किया है।

जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन

Patanjali Foods ने FY27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए। कंपनी का रेवेन्यू 29% बढ़कर करीब ₹11,300 करोड़ पहुंच गया, जो Jefferies के अनुमान से करीब 20% ज्यादा रहा। वहीं EBITDA में 69% और PAT में 86% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

एडिबल ऑयल बिजनेस बना सबसे बड़ा सहारा

एडिबल ऑयल सेगमेंट ने अब तक की सबसे मजबूत तिमाही दर्ज की। इस कारोबार का रेवेन्यू 27% बढ़कर ₹8,500 करोड़ पहुंच गया। खासकर सरसों तेल की बिक्री बेहतर रही। पश्चिम एशिया में तनाव और कमोडिटी महंगाई के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं, जिसका फायदा कंपनी को मिला। इस सेगमेंट का EBIT सालाना आधार पर लगभग पांच गुना बढ़ गया।

कंपनी के प्लांटेशन बिजनेस में भी 25% की ग्रोथ रही। खेती वाला क्षेत्र बढ़कर 1.16 लाख हेक्टेयर हो गया है। मैनेजमेंट ने FY27 में एडिबल ऑयल बिजनेस में 3-5% वॉल्यूम ग्रोथ का लक्ष्य रखा है।

Foods & FMCG बिजनेस में क्या रहा?

पतंजलि फूड्स के Foods & FMCG सेगमेंट का रेवेन्यू भी 28% बढ़ा। बिस्किट कारोबार ने सबसे मजबूत तिमाही दर्ज करते हुए ₹560 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया और इसका मार्जिन बढ़कर 15.4% पहुंच गया।

हालांकि इस सेगमेंट की प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव बना रहा, क्योंकि कच्चे माल की लागत तेजी से बढ़ी और कंपनी पूरी बढ़ोतरी ग्राहकों तक नहीं पहुंचा सकी। Jefferies का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में लागत का दबाव कम होने पर इस सेगमेंट की मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है।

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Tata Group News: एन चंद्रशेखरन ने आखिर टाटा संस के चेयरमैन पद से क्यों दिया इस्तीफा? जानिए टाटा समूह के अंदर की पूरी कहानी

Tata Group News: एन चंद्रशेखरन के टाटा संस के चेयरमैन पद से इस्तीफे के ऐलान ने चौंका दिया था। उन्होंने 12 अगस्त को यह ऐलान किया था। तब से उनके इस्तीफे की वजहों को लेकर अलग-अलग तरह की चर्चा सुनने को मिली है। लेकिन, सच यह है कि उनके इस्तीफे के पीछे कोई एक वजह नहीं थी। सूत्रों ने मनीकंट्रोल को बताया कि तीसरी बार टाटा संस के चेयरमैन पद पर उनकी नियुक्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई थी। इसका असर समूह से जुड़े ब़ड़े फैसलों पर पड़ रहा था।

गवर्नेंस और कैपिटल ऐलोकेशन को लेकर चंद्रशेखरन और टाटा ट्रस्ट्स के बीच मतभेद था। इसके अलावा होल्डिंग कंपनी यानी टाटा संस के कॉर्पोरेट स्ट्रक्चर को लेकर भी बहस लगातार बढ़ रही थी। ये सभी मसले अगस्त के दूसरे हफ्ते में ऐसे लेवल पर पहुंच गए, जिसके बाद चंद्रशेखरन ने इस्तीफा देने का फैसला ले लिया।

चंद्रशेखरन ने 12 अगस्त को अपने बयान में कई बातें कही थीं। उन्होंने जुलाई 2025 टाटा ट्रस्ट्स के उस प्रस्ताव का भी जिक्र किया था, जिसमें उन्हें तीसरी बार टाटा संस का चैयरमैन पांच साल के लिए नियुक्त करने की सिफारिश की गई थी। लेकिन, फरवरी 2026 में टाटा संस के बोर्ड की बैठक में एक डायरेक्टर ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। फरवरी से लेकर अब तक यह मसला ठंडे बस्ते में पड़ा रहा।

जुलाई 2025 के प्रस्ताव में एक दूसरी अहम बात भी शामिल थी। इसमें चंद्रशेखरन को टाटा संस को अनलिस्टेड बनाए रखने के लिए हर मुमकिन कोशिश करने को कहा गया था। बाद में यह मसला बड़ा बन गया। स्ट्रक्चर के लिहाज से टाटा संस के भविष्य को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं थी। इसका काफी असर चंद्रशेखरन पर पड़ा। सूत्रों ने बताया कि खासकर इस सवाल का जवाब नहीं था कि क्या आखिर में टाटा संस को खुद को शेयर बाजार में सूचीबद्ध कराना होगा।

मनीकंट्रोल ने खबर दी थी कि 26 मई को बोर्ड की बैठक में टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन को टाटा संस की लिस्टिंग के बारे में अपनी पोजीशन बताने को कहा था। सूत्रों ने बताया कि इस बारे में चंद्रशेखरन की तरफ से कोई जवाब नहीं आया। टाटा संस की लिस्टिंग का मसला काफी अहम है। लिस्टिंग के बाद टाटा संस के लिए नियम और शर्तें काफी बदल जाएंगी। खासकर टाटा ट्रस्ट्स को मिले विशेष अधिकार खत्म हो जाएंगे।

टाटा ट्रस्ट्स अभी टाटा संस से जुड़े सभी बड़े फैसले लेता है। यहां तक कि टाटा संस के बोर्ड में डायरेक्टर्स की नियुक्ति के लिए ट्रस्ट्स के नॉमिनी का एप्रूवल जरूरी है। टाटा संस के शेयर बाजार में लिस्ट होते ही टाटा ट्रस्ट्स के ये अधिकार खत्म हो जाएंगे। टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है।

RBI ने टाटा संस को अपर लेयर वाली NBC की कैटेगरी में रखा है। इस कैटेगरी के एनबीएफसी को सख्त रेगुलेशंस का पालन करना पड़ता है। हालांकि, आरबीआई ने 6 अगस्त को कहा था कि टाटा संस का एनबीएफसी की अपर लेयर कैटेगरी में बने रहने में उसके डीरजिस्ट्रेशन के अप्लिकेशन के नतीजों का कोई हाथ नहीं है। अभी इस अप्लिकेशन पर विचार जारी है।

टाइम्स ऑफ इंडियान ने 17 अगस्त को खबर दी कि चंद्रशेखरन और नोएल टाटा दोनों ने सरकार को अलग-अलग अपनी पोजीशन के बारे में बताया। इस मामले से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, टाटा समूह के भविष्य को लेकर स्पष्ट दिशा का अभाव था। टाटा संस की 18 अगस्त को होने वाली एनुअल जनरल मीटिंग (AGM) में चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति के बारे में फैसला होना है। बतौर चेयरमैन चंद्रशेखरन का दूसरा कार्यकाल 20 फरवरी, 2027 को खत्म हो रहा है।

18 अगस्त को 2 बजे टीसीएस का शेयर 1.25 फीसदी गिरकर 2,284 रुपये पर चल रहा था। टाइटन का शेयर 0.38 फीसदी गिरकर 5049 रुपये पर चल रहा था। टाटा मोटर्स सीवी का शेयर 0.68 फीसदी गिरकर 467 रुपये पर चल रहा था।