टूट रही है गंभीर की कोचिंग टीम! भारत को चैंपियन बनाने वाले अब इस धुरंधर ने तोड़ा नाता

भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI) ने भारतीय टीम के सपोर्ट स्टाफ में बदलाव करने का फैसला किया है। बोर्ड सचिव देवजीत सैकिया ने बताया कि, फील्डिंग कोच टी दिलीप का कॉन्ट्रैक्ट आगे नहीं बढ़ाया जाएगा। दिलीप के साथ असिस्टेंट कोच रयान टेन डोएशेट भी अब टीम के साथ नहीं रहेंगे। बीसीसीआई इन दोनों पदों के लिए नए नामों पर विचार कर रहा है और श्रीलंका के खिलाफ अगले महीने शुरू होने वाली दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले नए कोचिंग स्टाफ की घोषणा की जा सकती है।

कब खत्म हुआ कॉन्ट्रैक्ट

इंग्लैंड दौरे के बाद रयान टेन डोएशेट और टी दिलीप का कार्यकाल समाप्त हो गया। इस दौरे पर भारतीय टीम को आयरलैंड और इंग्लैंड के खिलाफ व्हाइट-बॉल सीरीज में निराशाजनक प्रदर्शन का सामना करना पड़ा। न्यूज एजेंसी PTI रिपोर्ट्स के मुताबिक, हेड कोच गौतम गंभीर के करीबी माने जाने वाले टेन डोएशेट को बीसीसीआई ने नया कॉन्ट्रैक्ट देने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इसे स्वीकार नहीं किया। डोएशेट आईपीएल फ्रेंचाइजी केकेआर के साथ दोबारा जुड़ने का फैसला किया।

डोएशेट की गंभीर के साथ कर चुके हैं काम

रयान टेन डोएशेट के टीम इंडिया के सपोर्ट स्टाफ में आने के बाद उनकी भूमिका काफी अहम हो गई थी। वह पहले गौतम गंभीर, अभिषेक नायर और मोर्ने मोर्कल के साथ केकेआर में काम कर चुके थे। लेकिन टीम में पहले से टी दिलीप फील्डिंग कोच थे, फिर भी टेन डोएशेट कई अहम जिम्मेदारियां निभाते नजर आए। मीडिया से बातचीत और टीम की रणनीति से जुड़े कई मुद्दों पर अक्सर वही टीम प्रबंधन का पक्ष रखते थे।

केकेआर में हुई वापसी

रयान टेन डोएशेट के लिए कोलकाता नाइट राइडर्स में वापसी किसी नए सफर की तरह नहीं होगी। वह 2012 और 2014 में खिलाड़ी के रूप में टीम की आईपीएल खिताबी जीत का हिस्सा रह चुके हैं। इसके बाद 2024 के विजेता अभियान में उन्होंने फील्डिंग कोच की भूमिका निभाई थी। अब केकेआर में उनकी फिर से वापसी होने पर वह मुख्य कोच अभिषेक नायर के साथ दोबारा काम करते नजर आ सकते हैं।

कोचिंग में जीता था वर्ल्ड कप

टी दिलीप के अगले कदम को लेकर अभी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। टेन डोशेट और टी दिलीप के कार्यकाल में भारत ने 2025 एशिया कप और 2026 टी-20 वर्ल्ड कप जीता। वहीं टी दिलीप के कार्यकाल में भारत ने 2024 टी-20 वर्ल्ड कप भी जीता था। वहीं, भारतीय टीम को जल्द ही मजबूत कोचिंग संयोजन तैयार करने की जरूरत होगी, क्योंकि 2027 विश्व कप में अब ज्यादा समय नहीं बचा है। नए कोचिंग स्टाफ के कार्यकाल में टीम का प्रदर्शन आयरलैंड, इंग्लैंड और हाल ही में जिम्बाब्वे के खिलाफ सीमित ओवरों की सीरीज में उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा, जिससे टीम प्रबंधन पर बेहतर नतीजे देने का दबाव बढ़ गया है।

Q1 Results: A-1 लिमिटेड का जून तिमाही में दमदार प्रदर्शन, प्रॉफिट और रेवेन्यू में तगड़ा उछाल

Q1 Results: A-1 लिमिटेड ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (Q1 FY27) में शानदार वित्तीय नतीजे घोषित किए हैं। इंडस्ट्रियल एसिड और केमिकल सप्लाई के साथ लॉजिस्टिक्स कारोबार से जुड़ी कंपनी का रेवेन्यू और मुनाफा दोनों में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई। कंपनी का कहना है कि बेहतर ऑपरेशनल प्रदर्शन, नए ऑर्डर और बिजनेस विस्तार का फायदा पहली तिमाही के नतीजों में देखने को मिला।

रेवेन्यू 175 करोड़ रुपये पहुंचा

कंपनी की ऑपरेशन से होने वाली आय (रेवेन्यू) सालाना आधार पर 170.5% बढ़कर 175.01 करोड़ रुपये रही। पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में यह 64.69 करोड़ रुपये थी।

मुनाफे में 429% की बढ़ोतरी

पहली तिमाही में कंपनी का शुद्ध मुनाफा (PAT) 429.3% बढ़कर 3.16 करोड़ रुपये हो गया। एक साल पहले इसी अवधि में कंपनी ने 0.60 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था। वहीं, PAT मार्जिन भी 0.92% से बढ़कर 1.81% हो गया।

EBITDA में भी मजबूत सुधार

कंपनी का EBITDA सालाना आधार पर 210.6% बढ़कर 6.07 करोड़ रुपये पहुंच गया, जो पिछले साल की समान तिमाही में 1.95 करोड़ रुपये था। वहीं, EBITDA मार्जिन 3.02% से बढ़कर 3.47% हो गया। कंपनी के मुताबिक, यह बेहतर ऑपरेशनल एफिशिएंसी और लागत नियंत्रण का नतीजा है।

नए ऑर्डर से कारोबार को मिला सहारा

तिमाही के दौरान कंपनी को सोलर इंडस्ट्रीज लिमिटेड, महाधन एग्रीटेक लिमिटेड और साईं बाबा पॉलीमर टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड जैसे ग्राहकों से करीब 35 करोड़ रुपये के इंडस्ट्रियल सप्लाई ऑर्डर मिले। इसके अलावा कंपनी 127.50 करोड़ रुपये के इंडस्ट्रियल यूरिया सप्लाई ऑर्डर पर भी काम कर रही है।

केमिकल कारोबार का दायरा बढ़ा

A-1 लिमिटेड को ईशान डाइज एंड केमिकल्स लिमिटेड के सल्फर आधारित इंडस्ट्रियल केमिकल्स के लिए प्राइमरी ऑथराइज्ड डीलर नियुक्त किया गया है। कंपनी का मानना है कि इससे उसके इंडस्ट्रियल केमिकल कारोबार और ग्राहक आधार को मजबूती मिलेगी।

इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेगमेंट में एंट्री

A-1 लिमिटेड  ने A-1 सुरेजा इंडस्ट्रीज में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाकर 51% कर ली है। इसके बाद यह कंपनी उसकी सब्सिडियरी बन गई है। इस अधिग्रहण के जरिए A-1 लिमिटेड ने इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेगमेंट में भी कदम रखा है, जिसे भविष्य की ग्रोथ के लिए अहम माना जा रहा है।

क्या बोले मैनेजिंग डायरेक्टर?

A-1 लिमिटेड के मैनेजिंग डायरेक्टर हर्षदकुमार पटेल ने कहा कि कंपनी ने वित्त वर्ष 2027 की मजबूत शुरुआत की है। उनके मुताबिक, इंटीग्रेटेड बिजनेस मॉडल, लंबे समय से ग्राहकों के साथ बने रिश्ते और मजबूत लॉजिस्टिक्स नेटवर्क की बदौलत कंपनी लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही है।

उन्होंने कहा कि कंपनी आगे भी बाजार में अपनी मौजूदगी मजबूत करने, प्रोडक्ट पोर्टफोलियो बढ़ाने और शेयरधारकों के लिए लॉन्ग टर्म वैल्यू बनाने पर फोकस बनाए रखेगी।

Stocks to Watch: 29 जुलाई को फोकस में रहेंगे ये 10 स्टॉक्स, दिख सकती है बड़ी हलचल

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

L&T Q1 Results: इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी को ₹4123 करोड़ मुनाफा, ऑर्डर बुक ₹7.79 लाख करोड़ तक पहुंची

L&T Q1 Results: देश की प्रमुख इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कंपनी लार्सन एंड टुब्रो (L&T) ने जून 2026 तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट सालाना आधार पर 14% बढ़कर 4,123 करोड़ रुपये हो गया। पिछले साल की समान तिमाही में यह 3,617 करोड़ रुपये था। यह बाजार के अनुमान से भी बेहतर रहा। वहीं, कंपनी की कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 6.7% बढ़कर 67,942 करोड़ रुपये पहुंच गई।

L&T की ऑर्डर बुक

इंफ्रास्ट्रक्चर और इंजीनियरिंग कंपनी L&T को जून तिमाही में 1,08,014 करोड़ रुपये के नए ऑर्डर मिले। यह पिछले साल के मुकाबले 14% ज्यादा है। कंपनी को रिहायशी और कमर्शियल बिल्डिंग, ट्रांसपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर, ऑफशोर विंड, हेवी इंजीनियरिंग और मेटल सेक्टर से बड़े ऑर्डर मिले।

कंपनी की कुल ऑर्डर बुक बढ़कर 7,78,954 करोड़ रुपये हो गई। इसमें अंतरराष्ट्रीय ऑर्डर की हिस्सेदारी 52% है। तिमाही के दौरान कंपनी की कुल रेवेन्यू में 51% योगदान विदेशी कारोबार का रहा।

मार्जिन पर दबाव

तिमाही में L&T का EBITDA 3.2% घटकर 6,116 करोड़ रुपये रहा। वहीं, EBITDA मार्जिन पिछले साल के 9.9% से घटकर 9% पर आ गया। इसके बावजूद कंपनी का मुनाफा बेहतर रहा।

ग्रीन एनर्जी और मैन्युफैक्चरिंग से मजबूती

L&T के ग्रीन एनर्जी बिजनेस को तिमाही में 33,042 करोड़ रुपये के ऑर्डर मिले। यह पिछले साल से 58% ज्यादा है। इसकी बड़ी वजह ऑफशोर विंड प्रोजेक्ट रहे। हालांकि, सप्लाई चेन की दिक्कतों के चलते इस सेगमेंट की रेवेन्यू 11% घट गई।

वहीं, मैन्युफैक्चरिंग एंड प्रोडक्ट्स कारोबार में ऑर्डर इनफ्लो 74% बढ़कर 5,535 करोड़ रुपये पहुंच गया। रिफाइनरी इक्विपमेंट से जुड़े बड़े ऑर्डर मिलने का फायदा कंपनी को मिला।

टेक और फाइनेंस ने भी दिखाया दम

L&T के टेक्नोलॉजी, प्लेटफॉर्म्स एंड सर्विसेज कारोबार की रेवेन्यू 15% बढ़कर 14,627 करोड़ रुपये हो गई। दूसरी ओर, फाइनेंशियल सर्विसेज बिजनेस की ऑपरेशनल इनकम 27% बढ़कर 5,042 करोड़ रुपये रही। इस दौरान कंपनी का कुल लोन बुक 1,29,634 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

रियल्टी कारोबार में भी तेजी

L&T के रियल्टी बिजनेस में नए प्रोजेक्ट्स की अच्छी बुकिंग हुई। ऑर्डर इनफ्लो 32% बढ़कर 1,299 करोड़ रुपये हो गया। वहीं, रेवेन्यू दोगुने से ज्यादा बढ़कर 1,009 करोड़ रुपये पहुंच गई।

चेयरमैन ने क्या कहा?

L&T के चेयरमैन और MD एस. एन. सुब्रह्मण्यन ने कहा कि वैश्विक भू-राजनीतिक चुनौतियों के बावजूद कंपनी ने अलग-अलग सेक्टर और बाजारों पर फोकस बनाए रखा। उन्होंने कहा कि कंपनी ने इस तिमाही में Nabha Power की हिस्सेदारी बेचने का काम पूरा किया है। साथ ही, Hyderabad Metro में अपनी 100% हिस्सेदारी बेचने के लिए भी समझौता किया है। इससे कंपनी अपने पोर्टफोलियो को और मजबूत बनाने की रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

L&T के शेयर

L&T के शेयर मंगलवार को 0.63% की बढ़त के साथ 3,830 रुपये पर बंद हुए। पिछले 1 साल में स्टॉक ने 11.92% का रिटर्न दिया है। वहीं, 5 साल में इससे निवेशकों को 139.16% का मुनाफा हुआ है। कंपनी का मार्केट कैप 5.27 लाख करोड़ रुपये है।

Tata Capital Q1 Results: टाटा की कंपनी को ₹1547 करोड़ का मुनाफा, गोल्ड लोन कारोबार में भी एंट्री

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Gold Silver Rates Today: देश और विदेश में सोने-चांदी में बड़ी गिरावट, चांदी एक दिन में 5200 रुपये क्रैश

Gold Silver Rates Today: सोने और चांदी पर 28 जुलाई को बड़ा दबाव दिखा। देश और विदेश में दोनों की कीमतें गिर गईं। दिल्ली सर्राफा बाजार में सोना 2,640 रुपये गिरकर 1,47,000 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। चांदी की कीमत 5,200 रुपये फिसलकर 2,24,800 रुपये प्रति किलोग्राम पर बंद हुई। अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना 1.26 फीसदी गिरकर 4,026 डॉलर प्रति औंस था, जबकि चांदी 1.72 फीसदी गिरकर 57.39 डॉलर प्रति औंस थी।

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में भी गिरावट 

गोल्ड फ्यूचर्स और सिल्वर फ्यूचर्स में भी गिरावट देखने को मिली। कमोडिटी एक्सचेंज एमसीएक्स पर शाम के कारोबार में गोल्ड फ्यूचर्स 1.07 फीसदी यानी 1,536 रुपये गिरकर 1,41,527 रुपये प्रति 10 ग्राम पर चल रहा था। सिल्वर फ्यूचर्स 2.12 फीसदी यानी 4,792 रुपये गिरकर 2,16,3888 रुपये प्रति किलोग्राम पर चल रहा था। बीते तीन महीने में सिल्वर फ्यूचर्स करीब 14 फीसदी क्रैश कर चुका है।

फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी पर नजरें 

बुलियन ट्रेडर्स और इनवेस्टर्स की नजरें 29 जुलाई को आने वाली फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी पर लगी हैं। फेडरल रिजर्व की एफओएमसी की बैठक 28 जुलाई को भारतीय समय के मुताबिक देर शाम में शुरू होगी। इसके नतीजे 29 जुलाई को भारतीय समय के मुताबिक देर रात आएंगे। अमेरिकी केंद्रीय बैंक महंगाई को बढ़ने से रोकने के लिए अपना रुख सख्त कर सकता है।

फेडरल रिजर्व रुख को सख्त बना सकता है

सीएमई फेडवॉच टूल के मुताबिक, कुछ एनालिस्ट्स का मानना है कि फेडरल रिजर्व इंटरेस्ट रेट 0.25 फीसदी बढ़ा सकता है। अगर वह 29 जुलाई को इंटरेस्ट रेट नहीं बढ़ाता है तो भी वह अपना रुख सख्त बनाएगा। ज्यादतर एनालिस्ट्स का मानना है कि फेड सितंबर की अपनी पॉलिसी में इंटरेस्ट रेट बढ़ाएगा। इंटरेस्ट रेट बढ़ने का सोने की कीमतों पर खराब असर पड़ता है। इंटरेस्ट रेट बढ़ने के अनुमान ने सोने की कीमतों पर दबाव बनाया है।

डॉलर में मजबूती का सोने की कीमतों पर असर

उधर, अमेरिकी डॉलर में मजबूती का असर भी सोने की कीमतों पर पड़ रहा है। अमेरिकी डॉलर 28 जुलाई को चार हफ्ते की ऊंचाई पर पहुंच गया। डॉलर में मजबूती से दूसरी करेंसी में सोना खरीदना महंगा हो जाता है। इसका असर सोने की कीमतों पर पड़ता है। बीते कुछ महीनों में डॉलर में मजबूती देखने को मिली है।

बुलियन पर जियोपॉलिटिकल अनिश्चितता का असर

एचडीएफसी सिक्योरिटीज में सीनियर कमोडिटीज एनालिस्ट सौमिल गांधी ने कहा, “फेडरल रिजर्व की पॉलिसी से पहले इनवेस्टर्स सावधानी बरत रहे हैं। इसका असर मंगलवार को सोने की कीमतों पर दिखा।” हालांकि, क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी आई है। लेकिन, इनवेस्टर्स का मानना है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच ठोस समझौता नहीं हो जाता, तब तक ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा।

HDFC बैंक को गवर्नेंस में बड़े सुधार करने होंगे, तभी बहाल होगा निवेशकों का भरोसा : एक्सपर्ट्स

HDFC Bank News: प्राइवेट सेक्टर के एचडीएफसी बैंक को निवेशकों का भरोसा फिर से जीतने के लिए सिर्फ पुराने विवादों को बंद करना काफी नहीं होगा। कॉरपोरेट गवर्नेंस के जानकारों का कहना है कि बैंक को अपनी गवर्नेंस, आंतरिक प्रक्रियाओं और बोर्ड की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करना होगा। उनका मानना है कि निवेशक अब सिर्फ नतीजे नहीं, बल्कि बैंक के काम करने के तरीके को भी देख रहे हैं।

मामला क्या है?

यह चर्चा MSRDC डिपॉजिट मामले के बाद तेज हुई है। बैंक के बोर्ड ने इस मामले की आंतरिक जांच पूरी की। जांच में CEO शशिधर जगदीशन समेत कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर आर्थिक जुर्माना और चेतावनी जारी की गई।

हालांकि, बोर्ड ने यह भी माना कि मामले में किसी तरह की निजी कमाई, गलत मंशा या नियमों के उल्लंघन के सबूत नहीं मिले। इसके बाद बोर्ड ने जगदीशन की दोबारा नियुक्ति की सिफारिश भी की।

एक्सपर्ट्स ने क्या कहा?

Institutional Investor Advisory Services (IiAS) के मैनेजिंग डायरेक्टर अमित टंडन का कहना है कि किसी एक मामले का निपटारा कर देना ही काफी नहीं है। निवेशक अब यह देख रहे हैं कि क्या बैंक ने हाल के गवर्नेंस विवादों से सबक लिया है। क्या बोर्ड की निगरानी पहले से मजबूत हुई है। क्या आंतरिक कंट्रोल बेहतर हुए हैं। उनके मुताबिक गवर्नेंस में सिर्फ नतीजे नहीं, बल्कि उन तक पहुंचने की प्रक्रिया भी उतनी ही अहम होती है।

पुराने मामलों पर भी उठे सवाल

अमित टंडन का कहना है कि इस मामले को अकेले नहीं देखा जाना चाहिए। इसे पूर्व स्वतंत्र निदेशक अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे और हाल के दूसरे गवर्नेंस विवादों के साथ जोड़कर देखना होगा। उनका मानना है कि अब बैंक की सबसे बड़ी चुनौती निवेशकों को यह भरोसा दिलाना है कि उसकी गवर्नेंस सिस्टम पहले से ज्यादा मजबूत हो चुकी है।

बोर्ड का संदेश क्या है?

अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज के मैनेजिंग पार्टनर अश्विन पारेख का कहना है कि बोर्ड की स्वतंत्र जांच से साफ हुआ कि यह मामला नियमों के उल्लंघन का नहीं, बल्कि गवर्नेंस और कारोबारी पहुंच का था। इसलिए बोर्ड ने CEO की दोबारा नियुक्ति की सिफारिश की। हालांकि, अंतिम फैसला RBI को लेना है।

आगे बैंक के लिए क्या चुनौती?

अश्विन पारेख का मानना है कि CEO, CFO और दूसरे वरिष्ठ अधिकारियों पर जुर्माना लगाना अपने आप में बड़ा कदम है। इससे बोर्ड ने साफ संदेश दिया है कि जवाबदेही तय की जाएगी।

वहीं, अमित टंडन का कहना है कि अब बहस सजा की मात्रा पर नहीं होनी चाहिए। असली फोकस इस बात पर होना चाहिए कि भविष्य में ऐसे मामलों को रोकने के लिए बैंक अपनी गवर्नेंस को कितना मजबूत बनाता है।

HDFC बैंक के शेयरों का हाल

देश के सबसे बड़े प्राइवेट लेंडर HDFC बैंक के शेयर मंगलवार को 0.38% गिरकर 736.75 रुपये पर बंद हुए। पिछले 6 महीने में स्टॉक 21.01% गिरा है। वहीं, एक साल में यह 26.64% टूटा है। 5 साल की बात करें, तो निवेशकों को सिर्फ 3.30% रिटर्न मिला है। बैंक का मार्केट कैप 5.64 हजार करोड़ रुपये है।

Q1 Results: प्राइवेट बैंक का मुनाफा 25% बढ़ा, NPA घटा; शेयर 11% उछला

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Bank of Baroda Share Price: नोमुरा ने जून तिमाही के नतीजों के बाद घटाया टारगेट प्राइस, शेयर गिरा

बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) के शेयर में 28 जुलाई को गिरावट दिखी। ब्रोकरेज फर्म नोमुरा ने बीओबी के शेयर का टारगेट प्राइस घटा दिया है। उसने बैंक के जून तिमाही के नतीजों के बाद ऐसा किया है। उसने टारगेट प्राइस को 300 रुपये से घटाकर 280 रुपये कर दिया है। हालांकि, शेयर पर उसने अपनी रेटिंग ‘न्यूट्रल’ बनाए रखी है।

नोमुरा ने कहा है, “बीओबी के जून तिमाही के नतीजे कमजोर रहे। प्रोविजनिंग से पहले बैंक का ऑपरेटिंग प्रॉफिट 6480 करोड़ रुपये रहा। यह साल दर साल आधार पर 13 फीसदी ज्यादा है। लेकिन तिमाही-दर-तिमाही आधार पर 19 फीसदी कम है। यह अनुमान से 4 फीसदी कम है।”

ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “जून तिमाही में बैंक की फीस से इनकम कम रही। इसका असर मुनाफे पर पड़ा। हालाांकि, कोर नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) तिमाही दर तिमाही आधार पर स्टेबल रहा।” हालांकि, रिपोर्ट में यह कहा गया है कि बैंक को एनएमसी ग्रुप के साथ 56.8 अरब रुपये के सेटलमेंट के असर को बर्दाश्त करना पड़ा।

जून तिमाही में ऑपरेटिंग प्रदर्शन कमजोर रहने के बावजूद क्रेडिट कॉस्ट कम रहने से प्रॉफिट को सपोर्ट मिला। बैंक की ग्रॉस लोन ग्रोथ साल दर साल आधार पर 18 फीसदी रही। हालांकि, तिमाही दर तिमाही आधार पर एडवान्सेज में 1 फीसदी गिरावट आई। डिपॉजिट ग्रोथ साल दर साल आधार पर 14 फीसदी रही। लेकिन, CASA रेशियो तिमाही दर तिमाही आधार पर 117 बेसिस प्वाइंट्स घटकर 37.7 फीसदी पर आ गया।

नोमुरा ने बैंक ऑफ बड़ौदा के FY27 के प्रति शेयर अर्निंग्स के अनुमान को 13 फीसदी तक घटाया है। इसकी बड़ी वजह एनएमसी सेटलमेंट है। हालांकि, उसने FY28 के प्रति शेयर अर्निंग्स अनुमान को अपरिवर्तित रखा है। बीओबी का शेयर 25 जुलाई को 2.05 फीसदी गिरकर 239 रुपये पर बंद हुआ। 2026 में यह शेयर 20 फीसदी से ज्यादा गिरा है।

28 जुलाई को शेयर बाजारों के प्रमुख सूचकांक कारोबार के अंतिम कुछ मिनटों में हरे से लाल निशान में आ गए। सेंसेक्स 0.05 फीसदी यानी 46 अंक गिरकर 76,796 पर बंद हुआ। निफ्टी 0.02 फीसदी यानी 7 अंक गिरकर 23,990 पर क्लोज हुआ।

Suzlon Q1 Results: सुजलॉन एनर्जी का मुनाफा गिरा, मार्जिन भी घटा; 7% टूटा स्टॉक

Suzlon Q1 Results: विंड एनर्जी कंपनी सुजलॉन एनर्जी के जून तिमाही के नतीजे मिले-जुले रहे। कंपनी का कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफिट 6% घटकर ₹305 करोड़ रह गया। पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹324 करोड़ था। हालांकि, रेवेन्यू 22% बढ़कर ₹3,829 करोड़ पहुंच गया।

ऑपरेटिंग प्रदर्शन कैसा रहा?

सुजलॉन का EBITDA ₹595 करोड़ रहा। पिछले साल यह ₹599 करोड़ था। वहीं, EBITDA मार्जिन 19% से घटकर 15.5% पर आ गया। यानी कंपनी की ऑपरेटिंग कमाई पर दबाव दिखा।

किस कारोबार से कितनी कमाई

रिन्यूएबल एनर्जी सॉल्यूशंस कारोबार का रेवेन्यू ₹2,494 करोड़ से बढ़कर ₹3,174 करोड़ हो गया। रिन्यूएबल एनर्जी एसेट मैनेजमेंट सर्विसेज का रेवेन्यू ₹632 करोड़ रहा, जो पिछले साल ₹584 करोड़ था। हालांकि, फाउंड्री और फोर्जिंग कारोबार का रेवेन्यू ₹146 करोड़ से घटकर ₹126 करोड़ रह गया।

ऑर्डर बुक और डिलीवरी

जून तिमाही में सुजलॉन ने 506 मेगावाट की डिलीवरी की। यह पिछले साल से 14% ज्यादा है। वहीं, 269 मेगावाट की कमिशनिंग हुई, जो सालाना आधार पर दोगुने से भी ज्यादा है। तिमाही के अंत तक कंपनी की ऑर्डर बुक 6.1 गीगावाट (GW) रही। इसमें 84% ऑर्डर सरकारी कंपनियों और कमर्शियल एंड इंडस्ट्रियल (C&I) सेक्टर से मिले हैं।

सुजलॉन के शेयरों का हाल

कमजोर नतीजों के बाद मंगलवार को सुजलॉन एनर्जी का शेयर करीब 7% गिरकर 50 रुपये से नीचे आ गया। दोपहर 2.16 बजे तक सुजलॉन का स्टॉक 49.69 % गिरकर 49.69 रुपये पर कारोबार कर रहा था। इस गिरावट के साथ 2026 में अब तक स्टॉक का रिटर्न भी निगेटिव हो गया है। पिछले 1 साल में स्टॉक में 17.81% की गिरावट आई है।

सुजलॉन का बिजनेस क्या है

सुजलॉन एनर्जी विंड एनर्जी सेक्टर की कंपनी है। यह विंड टरबाइन बनाती है और पवन ऊर्जा परियोजनाओं के लिए सप्लाई, इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस की सेवाएं देती है। कंपनी EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट और कंस्ट्रक्शन), रिन्यूएबल एनर्जी एसेट मैनेजमेंट और फाउंड्री-फोर्जिंग कारोबार में भी मौजूद है। इसका कारोबार भारत के साथ कई विदेशी बाजारों में भी फैला हुआ है।

Coforge Share Price: कोफोर्ज का शेयर बना रॉकेट, जून तिमाही के नतीजों का असर

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SpaceX आया रिकॉर्ड हाई से 50% नीचे, इस कारण कमजोर हो रहा Elon Musk का शेयर

Elon Musk’s SpaceX Big Fall: एलॉन मस्क की स्पेस कंपनी स्पेसएक्स ने स्टॉक मार्केट में धांसू एंट्री की। इसने निवेशकों को मालामाल कर दिया और दुनिया के सबसे अमीर शख्स एलॉन मस्क और अमीर हो गए और वह दुनिया के इकलौते ट्रिलेनियनर यानी कि एक ट्रिलियन डॉलर यानी $1 लाख करोड़ की दौलत वाले शख्स बन गए। हालांकि अब स्पेसएक्स के शेयरों की भारी गिरावट ने मस्क की दौलत गिरा दी और अब वह ट्रिलेनियनर नहीं रह गए। 24 जुलाई को एलॉन मस्क ने X (पूर्व नाम Twitter) पर मजाकिया अंदाज में लिखा, पूर्व ट्रिलेनियर।

इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को $135 के भाव पर जारी हुए थे। 12 जून को मार्केट में इसकी $150 के भाव पर एंट्री हुई थी और पहले ही कारोबारी दिन $176.52 के हाई पर पहुंचने के बाद $160.95 के भाव पर बंद हुआ। इसके दो ही दिन बाद 16 जून को यह $225.64 के रिकॉर्ड हाई पर पहुंचा था लेकिन अब नास्डाक पर यह $113.50 पर यानी कि हाई लेवल से यह 49.70% नीचे आ चुका है। वैसे इसका रिकॉर्ड निचला स्तर $108.66 है जो इसने 27 जुलाई को इंट्रा-डे में छुआ।

क्यों टूट रहा SpaceX का शेयर?

स्पेसएक्स के आईपीओ फाइलिंग में सामने आया था कि कंपनी कितना खर्च कर रही है और इसका टारगेट क्या है। अब जून 2026 तिमाही के कारोबारी नतीजे से लेटेस्ट तस्वीर सामने आई है जैसे कि कंपनी को जून तिमाही में करीब $430 करोड़ का नेट लॉस हुआ, $470 करोड़ का रेवेन्यू हासिल हुआ, कैपिटल एक्सपेंडिचर $1010 करोड़ रहा जिसमें से $772 करोड़ सिर्फ एआई पर खर्च हुए। जब शेयर चढ़ रहे थे तो निवेशकों ने इन खर्चों पर ध्यान नहीं दिया और इसे एलॉन मस्क के उस अनुमान से भी सपोर्ट मिला जिसमें उन्होंने कहा था कि साल 2030 के आखिरी तक स्पेसएक्स सालाना $1 ट्रिलियन रेवेन्यू हासिल कर सकती है जोकि साल 2025 के $1870 करोड़ के रेवेन्यू से 50 गुना से भी अधिक है।

हालांकि निवेशक अब इसके खर्चों पर ध्यान दे रहे हैं जिसके चलते शेयरों पर दबाव दिखा। इसके अलावा स्टारशिप की 13वीं टेस्ट फ्लाइट रद्द होने से इसके मार्केट कैप में करीब $10 हजार करोड़ की गिरावट आई। स्पेसएक्स के लिए स्टारशिप काफी महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट है, क्योंकि इसी से कंपनी की भविष्य की एआई और मंगल ग्रह से जुड़ी योजनाओं को मजबूती मिलने की उम्मीद है।

अब आगे कैसी रहेगी चाल?

निवेशकों की नजरें अब 4 अगस्त को आने वाले स्पेसएक्स के कारोबारी नतीजे पर हैं। यह पहली बार होगा, जब एक पब्लिक लिस्टेड कंपनी के तौर पर यह अपना रिजल्ट पेश करेगी। इसके अवावा 6 अगस्त को लॉक-अप एक्सपायरी होने को लेकर भी निवेशकों की नजर है। लॉक-अप एक्सपायरी से लाखों शेयर मार्केट में आ सकते हैं तो बिकवाली का दबाव बढ़ सकता है।

ट्रेडिंगकी की रिपोर्ट के मुताबिक इसे कवर करने वाले 31 एनालिस्ट्स ने 12 महीने के लिए इसका औसत टारगेट प्राइस $235.18 तय किया है। एनालिस्ट्स के मुताबिक हाइएस्ट टारगेट प्राइस $800 और लोएस्ट टारगेट $115 का है। स्पेसएक्स में शुरुआती दौर में निवेश करने वाले और Atreides Management के सीआईओ गैविन बेकर ने सीएनबीसी पर कहा कि उन्हें कोई चिंता नहीं है, क्योंकि आईपीओ के बाद शुरुआती दौर में गिरावट सामान्य बात है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।