Dividend Stock: बुलेट बाइक वाली कंपनी देगी ₹82 का डिविडेंड, 31 जुलाई से पहले बन जाएं शेयरहोल्डर

बुलेट बाइक बनाने वाली रॉयल एनफील्ड ​की पेरेंट कंपनी आयशर मोटर्स (Eicher Motors) अपने शेयरहोल्डर्स को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए 82 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड देने जा रही है। इसकी सिफारिश कंपनी के बोर्ड ने मई महीने में की थी। डिविडेंड को लेकर शेयरहोल्डर्स की पात्रता तय करने के लिए रिकॉर्ड डेट 31 जुलाई 2026 है। इस तारीख तक जिन शेयरधारकों के नाम शेयरों के लाभार्थी मालिकों के तौर पर रजिस्टर ऑफ मेंबर्स ऑफ द कंपनी या डिपॉजिटरीज के रिकॉर्ड्स में होंगे, वे डिविडेंड पाने के हकदार होंगे।

इसका मतलब यह हुआ कि अगर डिविडेंड पाना चाहते हैं लेकिन आयशर मोटर्स के शेयरहोल्डर नहीं हैं तो 30 जुलाई को ट्रेडिंग खत्म होने से पहले शेयर खरीदने होंगे। फाइनल डिविडेंड पर 20 अगस्त को कंपनी की सालाना आम बैठक में शेयरहोल्डर्स की मंजूरी ली जाएगी। उसके बाद पेमेंट 30 दिनों के अंदर किया जाएगा।

आयशर मोटर्स ने वित्त वर्ष 2025 के लिए 70 रुपये प्रति शेयर का फाइनल डिविडेंड दिया था। शेयर की फेस वैल्यू 1 रुपये है। कंपनी कमर्शियल व्हीकल्स भी बनाती है। यह वित्त वर्ष 2001-02 से लगातार डिविडेंड बांट रही है।

Eicher Motors का शेयर एक साल में 39 प्रतिशत मजबूत

आयशर मोटर्स का शेयर शुक्रवार, 24 जुलाई को BSE पर 7628.40 रुपये पर बंद हुआ। कंपनी का मार्केट कैप 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा है। शेयर BSE 100 इंडेक्स का हिस्सा है। शेयर एक साल में 39 प्रतिशत मजबूत हुआ है। वहीं 3 साल में 130 प्रतिशत की तेजी देख चुका है। कंपनी में जून 2026 के आखिर तक प्रमोटर्स के पास 49.02 प्रतिशत हिस्सेदारी थी।

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29 जुलाई को जारी होंगे जून तिमाही के नतीजे

आयशर मोटर्स के अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजे 29 जुलाई को जारी होंगे। दिन में बोर्ड मीटिंग में इन पर चर्चा की जाएगी और मंजूरी दी जाएगी। उसके बाद वित्तीय नतीजों को रिलीज किया जाएगा। जनवरी-मार्च 2026 तिमाही में आयशर मोटर्स का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा सालाना आधार पर 11.58 प्रतिशत बढ़कर 1,519.95 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले मुनाफा 1,362.15 करोड़ रुपये था। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 6,080.09 करोड़ रुपये दर्ज किया गया, जो मार्च 2025 तिमाही में 5,241.11 करोड़ रुपये था।

पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में, आयशर मोटर्स का शुद्ध कंसोलिडेटेड मुनाफा 16.5 प्रतिशत बढ़कर 5,515.23 करोड़ रुपये हो गया। ऑपरेशंस से कंसोलिडेटेड रेवेन्यू 24 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 23,407.56 करोड़ रुपये दर्ज किया गया।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

ट्रम्प बोले- चीन-रूस जंग में आए तो अंजाम बुरा होगा:पुतिन-जिनपिंग ने मुझे यकीन दिलाया, वे ईरान को हथियार नहीं देंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि उन्हें नहीं लगता कि चीन या रूस ईरान युद्ध में शामिल हैं। हालांकि उन्होंने धमकी दी कि अगर दोनों देशों ने इस युद्ध में दखल दिया तो इसके गंभीर नतीजे होंगे और यह उनके लिए अच्छा नहीं होगा। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर लिखा कि हाल ही में बीजिंग में हुई उनकी मुलाकात के दौरान चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने उन्हें भरोसा दिया था कि वे किसी भी हाल में ईरान को हथियार नहीं देंगे। चीनी कंपनियों के लिए भी यही चीज लागू है। ट्रम्प ने कहा मुझे जिनपिंग पर यकीन है। उन्होंने यह भी कहा कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उनसे कहा था कि वे ईरान को हथियार नहीं बेचेंगे। ट्रम्प ने कहा कि यूक्रेन जंग के बावजूद उनकी पुतिन से बातचीत जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका सीधे यूक्रेन को हथियार नहीं बेचता, बल्कि नाटो देशों को बेचता है। नाटो देश इन हथियारों की पूरी कीमत चुकाते हैं। उसके बाद वे इन्हें किस तरह आगे भेजते हैं, इसकी उन्हें जानकारी नहीं होती। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. नेतन्याहू अमेरिका जाएंगे, जंग के बाद पहली बार ट्रम्प से मुलाकात: इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार को अमेरिका रवाना होंगे। वह राष्ट्रपति ट्रम्प से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं की यह मुलाकात ईरान जंग शुरू होने के बाद पहली बार होगी। 2. कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार: ईरान-अमेरिका में लगातार बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेज उछाल आया है। ब्रेंट क्रूड का भाव मई के बाद पहली बार 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया है। 3. कुवैत में 3 अमेरिकी ठिकानों पर हमला: ईरान ने शुक्रवार को कुवैत में मौजूद अमेरिका के तीन सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमला किया है। इसमें कैंप अरिफजान, कैंप दोहा और कैंप अदैरी को निशाना बनाया गया। 4. ईरान बोला- अमेरिका के आगे नहीं झुकेंगे: ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा है कि ईरान अमेरिका के सामने झुकेगा नहीं और उसकी धमकियां भी बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने यह बयान किर्गिस्तान में SCO के विदेश मंत्रियों की बैठक में दिया। 5. होर्मुज में 28 क्रू मेंबर्स वाले LPG टैंकर पर हमला: ईरान के जलक्षेत्र में एक LPG टैंकर पर हमला हुआ। मोजाम्बिक के झंडे वाला यह टैंकर दिशा 28 भारतीय चालक दल के सदस्यों को लेकर जा रहा था। भारतीय दूतावास ने पुष्टि की है कि सभी भारतीय सुरक्षित हैं। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…

क्या इंसान मैक्सिमम 156 साल तक जिंदा रह सकता है? वैज्ञानिकों को इस नई स्टडी में जो पता चला उसे जानिए

क्या इंसान हमेशा के लिए जिंदा रह सकते हैं? अधिकतर लोगों का जवाब ‘नहीं’ होगा। लेकिन हाल में एक नई स्टडी में चौंकाने वाली चीजें सामने आई हैं। रिसर्च करने वालों ने पाया है कि भले ही भविष्य की दवाएं बुढ़ापे के हर उस लक्षण को सीमित समय तक ठीक करने में कामयाब हो, फिर भी जीवन भर जमा होने वाले रैंडम DNA म्यूटेशन इंसानों की औसत उम्र को लगभग 156 साल तक ही सीमित रख सकते हैं।

‘npj Aging’ में पब्लिश हुई यह स्टडी ऐसे समय में आई है, जब लंबी उम्र से जुड़ी साइंस में दिलचस्पी बढ़ रही है। रिसर्चर और बायोटेक कंपनियां ऐसे इलाज खोज रही हैं, जिनसे उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को धीमा किया जा सके या उसे उलटा भी जा सके।

रूस के स्कोल्कोवो इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी (स्कोल्टेक) के वैज्ञानिकों ने एक मैथमैटिकल मॉडल का इस्तेमाल करके यह अंदाजा लगाया कि अगर उम्र बढ़ने की हर उस प्रक्रिया को खत्म कर दिया जाए, जिसे उलटा जा सकता है-जैसे बीमारी, हार्मोन में कमी और सेल में होने वाले दूसरे बदलाव-और सिर्फ़ ‘सोमैटिक म्यूटेशन’ (समय के साथ सेल में अपने-आप होने वाली रैंडम DNA गड़बड़ियां) ही बाकी रहें, तो इंसान कितने समय तक जीवित रह सकता है।

उनकी स्टडी से पता चला कि सिर्फ़ सोमैटिक म्यूटेशन (शरीर की कोशिकाओं में होने वाले बदलाव) की वजह से इंसानों की औसत उम्र 146 से 194 साल के बीच ही सीमित रहेगी, जिसमें 156 साल का अनुमान सबसे अहम है।

एक्सपेरिमेंटल स्टडीज़ के उलट, यह रिसर्च भविष्य में लोग कितने समय तक जीवित रहेंगे, इस बारे में कोई भविष्यवाणी नहीं है, बल्कि यह एक ‘थॉट एक्सपेरिमेंट’ (सोच-विचार पर आधारित प्रयोग) है। इसका मकसद उम्र बढ़ने की प्रक्रिया के एक खास कारण के असर को अलग करके यह समझना है कि उम्र तय करने में उसकी कितनी भूमिका होती है।

जब भी कोशिकाएं (सेल्स) विभाजित होती हैं, तो DNA में छोटी-मोटी गलतियां हो सकती हैं। हालांकि शरीर ज़्यादातर नुकसान की मरम्मत कर लेता है, लेकिन कुछ म्यूटेशन रह जाते हैं और दशकों तक जमा होते रहते हैं। इनमें से ज़्यादातर नुकसानदायक नहीं होते, लेकिन कुछ कैंसर जैसी बीमारियों का कारण बनते हैं और धीरे-धीरे कोशिकाओं के काम करने की क्षमता को कमज़ोर कर देते हैं।

रिसर्चर्स ने पाया कि सबसे बड़ी चुनौती उन अंगों से जुड़ी है जो खराब हो चुकी कोशिकाओं को आसानी से नहीं बदल पाते। त्वचा और लिवर जैसे टिश्यू लगातार खुद को नया करते रहते हैं और थ्योरी के हिसाब से इस मॉडल में हज़ारों सालों तक काम करते रह सकते हैं, लेकिन दिमाग और दिल ऐसा नहीं कर पाते।

इन अंगों में मौजूद खास कोशिकाएं—न्यूरॉन्स और कार्डियोमायोसाइट्स—शायद ही कभी दोबारा बनती हैं, जिसका मतलब है कि पूरी ज़िंदगी DNA को होने वाला नुकसान जमा होता रहता है। को-ऑथर येवगेनी एफिमोव ने कहा, “न्यूरॉन्स और कार्डियोमायोसाइट्स उम्र को सीमित करने वाले मुख्य कारक थे।”

सिर्फ़ DNA को होने वाले नुकसान के असर को समझने के लिए, रिसर्चर्स ने सबसे पहले एक काल्पनिक “ऐसे इंसान” का मॉडल बनाया जिसकी उम्र बढ़ने के साथ मरने का खतरा नहीं बढ़ता था। उस स्थिति में, औसत जीवनकाल 1,759 साल तक पहुंच गया।

हालांकि, जब सोमैटिक म्यूटेशन (शरीर की कोशिकाओं में होने वाले बदलाव) को शामिल किया गया, तो जीवनकाल तेज़ी से घटकर लगभग 156 साल रह गया। इससे पता चलता है कि सैद्धांतिक अमरता और इंसानों की असल उम्र के बीच के अंतर का एक बड़ा कारण DNA को होने वाला नुकसान है।

इन नतीजों से यह भी पता चलता है कि DNA म्यूटेशन ही बुढ़ापे का एकमात्र कारण नहीं हैं। मुख्य लेखक और कंप्यूटेशनल बायोलॉजिस्ट दिमित्री क्रियुकोव ने ज़ोर देकर कहा कि इस स्टडी का मतलब यह नहीं निकाला जाना चाहिए कि इंसान आखिरकार 156 साल तक जिएंगे।

यह एक गणितीय अनुमान है (भले ही सावधानी से किया गया हो), न कि एक्सपेरिमेंट से मिला डेटा।” लिंक्डइन पर लिखते हुए उन्होंने कहा कि जीवनकाल की गणना की गई सीमाएं “किसी निश्चित नतीजे का ऐलान” नहीं हैं, बल्कि यह दिखाती हैं कि “सोमैटिक म्यूटेशन, भले ही अकेले बुढ़ापे का कारण बनने में आश्चर्यजनक रूप से कमज़ोर हों, लेकिन दूसरी प्रक्रियाओं के साथ मिलकर अहम भूमिका निभा सकते हैं।”

रिसर्चर का कहना है कि उनका सबसे बड़ा योगदान जीवनकाल का आंकड़ा नहीं, बल्कि एक नया फ़्रेमवर्क है जो वैज्ञानिकों को यह मापने में मदद कर सकता है कि बुढ़ापे में अलग-अलग बायोलॉजिकल प्रक्रियाओं का कितना योगदान है। नतीजों पर टिप्पणी करते हुए, फार्मासिस्ट और रीजेनरेटिव मेडिसिन रिसर्चर एगले पाविडे ने न्यूज़वीक को बताया कि यह स्टडी बुढ़ापे की जटिलता को और पुख्ता करती है।

HDFC Bank Share Price : HDFC बैंक पर पड़ी अमेरिका में हो रही जांच की मार,1% टूटा शेयर

HDFC Bank Share Price : HDFC बैंक के शेयर में आज 1 फीसदी की गिरावट है। अमेरिका की तीन शेयरहोल्डर लॉ फर्मों ने HDFC बैंक के खिलाफ अमेरिकी फेडरल सिक्योरिटीज़ कानूनों के संभावित उल्लंघन को लेकर अलग-अलग जांच शुरू की है। इस साल की शुरुआत में मीडिया में आई उन खबरों के बाद यह जांच शुरू की गई है जिनमें बैंक की ओर से कथित अनियमित भुगतान और गवर्नेंस से जुड़ी चिंताओं की आंतरिक जांच का ज़िक्र किया गया था।

ग्लैंसी प्रोंगै वोल्के एंड रोटर LLP (Glancy Prongay),फ्रैंक आर. क्रूज़ के लॉ ऑफिस (Frank R. Cruz) और हॉवर्ड जी.स्मिथ के लॉ ऑफिस (Howard G. Smith) ने इस हफ्ते अलग-अलग बिज़नेस वायर नोटिस जारी करके इन जांचों का ऐलान किया है।

HDFC बैंक के अमेरिकन डिपॉजिटरी रिसीट्स (ADRs)न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हैं। इसकी वजह से बैंक पर US सिक्योरिटीज कानून के तहत जानकारी देने की शर्तें लागू होती हैं।

ग्लैंसी प्रोंगै ने कहा है कि उसने HDFC बैंक के निवेशकों की ओर से कंपनी द्वारा फ़ेडरल सिक्योरिटीज़ कानूनों के संभावित उल्लंघन के मामले में जांच शुरू कर दी है। वह इस बात की जांच कर रही है कि क्या कंपनी ने निवेशकों को कारोबार से जुड़ी ऐसी जानकारी दी जो काफी हद तक गुमराह करने वाली थी, और/या क्या उसने फ़ेडरल सिक्योरिटीज कानूनों का उल्लंघन किया है।

इसी तरह ‘द लॉ ऑफ़िसेज ऑफ़ हॉवर्ड जी स्मिथ’ ने कहा है कि वह फ़ेडरल सिक्योरिटीज़ कानूनों के संभावित उल्लंघन को लेकर HDFC बैंक की जांच कर रही है। इसमें यह भी शामिल है कि क्या कंपनी ने झूठे और/या गुमराह करने वाले बयान जारी किए और/या निवेशकों के लिए जरूरी जानकारी का खुलासा नहीं किया।

इसके अलावा,फ्रैंक आर क्रूज़ के लॉ ऑफिस ने भी कंपनी द्वारा फ़ेडरल सिक्योरिटीज कानूनों के संभावित उल्लंघन के मामले में निवेशकों की ओर से जांच की घोषणा की है।

तीनों लॉ फर्म उन निवेशकों को संपर्क करने के लिए कह रही हैं जिन्हें नुकसान हुआ है,ताकि वे संभावित दावों का आकलन कर सकें।

अमेरिका में किस वजह से शुरू हुई HDFC बैंक की जांच ?

तीनों लॉ फर्मों की इन नोटिस में ‘द इंडियन एक्सप्रेस’की 27 मई को छपी एक रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इस रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि HDFC बैंक ने अपने मार्केटिंग डिपार्टमेंट के जरिए किए गए पेमेंट की इंटरनल विजिलेंस जांच की थी। लॉ फर्म के नोटिस के मुताबिक रिपोर्ट में आरोप लगाया गया था कि बैंक ने महाराष्ट्र राज्य सड़क विकास निगम (MSRDC) को ज्यादा ब्याज देने के लिए ₹45 करोड़ को मार्केटिंग खर्च के तौर पर दिखाया था।

फर्मों का यह भी कहना है कि रिपोर्ट छपने के बाद,27 मई,2026 को HDFC बैंक के शेयर की कीमत 1.02 डॉलर यानी 4.1% गिरकर 23.78 डॉलर प्रति शेयर पर बंद हुए। इससे निवेशकों को नुकसान हुआ।

HDFC बैंक ने किसी भी गलत काम से किया इनकार

मई में रिपोर्ट पब्लिश होने के बाद,HDFC बैंक ने CNBC-TV18 को दिए एक बयान में इन आरोपों का ज़ोरदार खंडन किया था। बैंक ने कहा था “उसके पास मज़बूत इंटरनल निगरानी,ऑडिट और कंट्रोल प्रोसेस और सिस्टम हैं। सभी मामलों को बैंक के तय नियमों के अनुसार निपटाया जाता है और किसी भी इंटरनल रिव्यू के बाद अंतिम फैसला लेने से पहले पूरी प्रक्रिया का पालन किया जाता है। हम चुनिंदा जानकारी के आधार पर किसी भी तरह की गड़बड़ी या दोषी होने की धारणा को पूरी तरह से खारिज करते हैं”।

इस जांच का क्या होगा असर?

तीनों लॉ फर्मों की घोषणाओं को HDFC बैंक के खिलाफ रेगुलेटरी कार्रवाई या मुकदमा नहीं माना जा सकता। अमेरिका में ऐसी जांच आम बात है,खासकर तब जब किसी लिस्टेड कंपनी के शेयर की कीमत बुरी खबर के बाद तेजी से गिरती है।

शेयरहोल्डर लॉ फर्म्स अक्सर यह तय करने के लिए जांच नोटिस जारी करती हैं कि क्या निवेशकों को भ्रामक खुलासों के कारण हुए नुकसान के आरोप में सिक्योरिटी क्लास एक्शन दायर करने का कोई आधार है।

अभी इन फर्मों ने जांच की घोषणा की है और निवेशकों से जानकारी मांगी है। अभी यह एक्शन शेयरहोल्डर लॉ फर्मों की ओर से जांच से जुड़े नोटिस हैं,न कि कोई रेगुलेटरी कार्रवाई या अदालती कार्यवाही। अब देखना यह होगा कि क्या यह आगे चलकर औपचारिक सिक्योरिटीज क्लास एक्शन (शेयरधारकों के सामूहिक कानूनी मुकदमे)में बदलेगा। अभी तक तो किसी निवेशक ने मुकदमे में रुचि नहीं दिखाई है।

CNBC-TV18 ने इस पर HDFC बैंक से प्रतिक्रिया मांगी है,प्रतिक्रिया का इंतजार है। शुक्रवार को HDFC बैंक के शेयर 4.45 रुपए यानी 0.60 फीसदी गिरकर 742.80 रुपए पर बंद हुए हैं। इंट्राडे में इसमें 1 फीसदी की गिरावट देखने को मिली। आज का इसका दिन का लो 737.25 रुपए है। पिछले वीकेंड में जून तिमाही के नतीजे आने के बाद से यह स्टॉक लगातार पांचवें दिन नीचे आया है। इस साल अब तक यह स्टॉक 25% गिर चुका है।

 

Laurus Labs Q1 Results: मार्जिन 30% उछला, रेवेन्यू 29% बढ़ा, दूसरे पैरामीटर्स भी बेहतर रहे नतीजे

Laurus Labs Q1 Results:फार्मास्यूटिकल कंपनी लॉरस लैब्स ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के नतीजों का ऐलान कर दिया है , कंपनी के तिमाही नतीजे सभी पैरामीटर्स पर साल-दर-साल के आधार पर अच्छे रहे है। कंपनी ने अप्रैल-जून 2026 तिमाही के लिए ₹2,026 करोड़ का रेवेन्यू बताया, जो पिछले साल के ₹1,570 करोड़ के आंकड़े से 29% ज़्यादा है।

तिमाही के लिए इंटरेस्ट, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइज़ेशन से पहले की कमाई (EBITDA) साल-दर-साल आधार पर 67% बढ़कर ₹382.1 करोड़ से ₹638.3 करोड़ पर हो गया।

तिमाही के लिए EBITDA मार्जिन साल-दर-साल के आधार पर 24.3% से सात परसेंटेज पॉइंट्स से ज़्यादा बढ़कर 31.5% हो गया। कंपनी के लिए यह मार्जिन कई सालों में सबसे ज़्यादा है, जिसमें अच्छे प्रोडक्ट मिक्स और ऑपरेटिंग लेवरेज की मदद मिली है।

जून तिमाही के आखिर में तिमाही के लिए ग्रॉस मार्जिन पिछले साल के 59.4% और मार्च तिमाही के 61.4% से बढ़कर 62.7% हो गया है।

अलग- अलग सेगमेंट का कैसा रहा प्रदर्शन

लॉरस लैब्स का CDMO बिज़नेस रेवेन्यू साल-दर-साल आधार पर 67% और लगातार 48% बढ़कर ₹870 करोड़ हो गया। कंपनी ने इस ग्रोथ का क्रेडिट लेट-स्टेज क्लिनिकल प्रोजेक्ट्स और कमर्शियल API सप्लाई की लगातार प्रोग्रेस को दिया। कंपनी ने यह भी कहा कि उसके पास 125 से ज़्यादा एक्टिव प्रोजेक्ट्स के साथ एक बढ़ती हुई पाइपलाइन है।

लॉरस ने अपने इन्वेस्टर प्रेजेंटेशन में कहा कि वह कस्टमर डिमांड के आधार पर कमर्शियल स्केल पेप्टाइड्स ब्लॉक को भी आगे बढ़ा रही है।

अफोर्डेबल मेडिसिन्स बिज़नेस का रेवेन्यू तिमाही के दौरान 10% बढ़कर ₹1,156 करोड़ हो गया। हालांकि, यह आंकड़ा सीक्वेंशियल बेसिस पर 5% कम था क्योंकि इसने मार्च क्वार्टर में ₹1,223 करोड़ का आंकड़ा बताया था।

लॉरस ने कहा कि डिवीजन के पास एक हेल्दी ऑर्डर बुक, स्टेबल ARV और स्थापित वॉल्यूम ग्रोथ है, जिससे 10% ग्रोथ हुई। इसने कहा कि इस बिज़नेस के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन की चुनौतियां बनी हुई हैं।

कंपनी इमर्जिंग मार्केट्स में प्रोडक्ट रजिस्ट्रेशन बढ़ा रही है। अपने बिज़नेस के मौके को मजबूत करने के लिए, इसने साउथ अफ्रीका में एक ऑफिस भी खोला है।

रिज़ल्ट अनाउंसमेंट के बाद लॉरस लैब्स के शेयर आज 2% से ज्यादा बढ़कर ₹1,601.20 पर बंद हुआ। 2026 में अब तक स्टॉक 44% ऊपर है।

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

लंदन के लग्जरी होटल में 29 साल के सऊदी प्रिंस की मौत के पीछे क्या घातक कॉकटेल था? जांच में सामने आई ये बात

यूनाइटेड किंगडम में हुई एक अदालती जांच में खुलासा हुआ है कि 29 वर्षीय सऊदी प्रिंस अब्दुल्लाह बिन फहद बिन अब्दुल्लाह बिन अब्दुलअजीज बिन जलावी अल सऊद की मौत लंदन के एक लग्जरी होटल में शराब, पार्टी ड्रग और एंटी-एंजाइटी दवाइयों के एक जानलेवा और घातक कॉकटेल के सेवन से हुई थी। न्यूज18 की रिपोर्ट के मुताबिक प्रिंस अब्दुल्लाह का शव पिछले साल 25 नवंबर को केंसिंग्टन स्थित पांच सितारा मैरियट होटल में उनके कमरे के बाथरूम के फर्श पर पड़ा मिला था। एक क्लीनर जब उनके बंद कमरे में आया तो प्रिंस की संदिग्ध मौत की जानकारी सामने आई। पैरामेडिक्स द्वारा उन्हें बचाने के तमाम प्रयासों के बावजूद मौके पर ही उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था।

होटल में अकेले लौटे थे प्रिंस

द टेलीग्राफ की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रिंस 19 नवंबर को एक हफ्ते के लिए इस 5-स्टार होटल में चेक-इन हुए थे। मौत से ठीक एक रात पहले सीसीटीवी फुटेज में उन्हें आखिरी बार देखा गया था, जब वे सिगरेट पीने के लिए बाहर निकले थे और फिर अकेले ही होटल वापस लौट आए थे। जांचकर्ताओं के लिए यह सीसीटीवी फुटेज बेहद अहम सबूत साबित हुआ, जिससे यह साफ हो गया कि घटना के वक्त उनके साथ कोई अन्य व्यक्ति मौजूद नहीं था और मामले में किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता नहीं थी।

जांच में क्या निकला? शराब, GHB और जैनैक्स का ‘जानलेवा कॉकटेल’

इनर वेस्ट लंदन कॉरोनर्स कोर्ट में हुई जांच के बाद असिस्टेंट कॉरोनर जीन हरकिन इस नतीजे पर पहुंचे कि प्रिंस की मौत मल्टी-ड्रग इंजेशन यानी एक साथ कई तरह के नशीले पदार्थों और दवाओं के सेवन से हुई है। उन्होंने इसे दुर्घटनाजन्य मौत का मामला करार दिया। इसका मतलब है कि यह मौत अनजाने में हुई एक दुर्घटना थी। टॉक्सिकोलॉजी टेस्ट में प्रिंस के खून में अल्कोहल का कंसंट्रेशन 222 mg प्रति 100 ml पाया गया, जो इंग्लैंड में ड्रिंक-एंड-ड्राइव की कानूनी सीमा से करीब तीन गुना अधिक था। विशेषज्ञों ने अदालत को बताया कि सिर्फ शराब का इतना स्तर ही किसी इंसान को कोमा में भेजने के लिए काफी था।

जांचकर्ताओं को उनके शरीर में गामा-हाइड्रॉक्सीब्यूटाइरेट (GHB – जिसे आमतौर पर पार्टी ड्रग कहा जाता है) का संभावित रूप से जानलेवा स्तर मिला। इसके अलावा गांजा, जैनैक्स और दूसरे एंटी-एंजाइटी दवाओं के अंश भी मिले। पोस्ट-मॉर्टम जांच में पाया गया कि प्रिंस को कोई पुरानी या गंभीर बीमारी नहीं थी। मेडिकल साक्ष्यों ने निष्कर्ष निकाला कि शराब और कई दवाओं के इस घातक कॉकटेल ने कार्डियक अरेस्ट को ट्रिगर किया, जिससे उनकी मौत हो गई।

नशे की लत से जूझ रहे थे सऊदी प्रिंस

सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों से पता चला कि मौत से पहले प्रिंस अब्दुल्लाह शराब के अत्यधिक सेवन और जैनैक्स दवा पर निर्भरता की समस्या से जूझ रहे थे। द टेलीग्राफ के मुताबिक उन्हें पिछले साल अगस्त में रोहैम्पटन के प्रायरी क्लीनिक में भर्ती कराया गया था, जहां उन्होंने शराब, बेंजोडायजेपाइन और प्रेगाबालिन से डिटॉक्सिफिकेशन का इलाज कराया था। प्रायरी क्लीनिक छोड़ने के बाद, उन्होंने मर्सियासाइड के रेनफोर्ड हॉल क्लीनिक में रेसेपरेट्री ट्रैक्ट इंफेक्शन का इलाज कराया और अक्टूबर में वहां से डिस्चार्ज हुए थे।

कंसलटेंट मनोचिकित्सक डॉ. विक्टोरिया चमोरो ने अदालत को बताया कि प्रिंस को एंजाइटी के लक्षणों के साथ भर्ती कराया गया था, लेकिन उन्होंने इलाज पर अच्छी प्रतिक्रिया दी थी। डिस्चार्ज के समय उन्हें आत्महत्या के जोखिम वाला नहीं माना गया था, हालांकि बाद में वे निर्धारित ऑनलाइन फॉलो-अप अपॉइंटमेंट में शामिल नहीं हुए थे।

न आत्महत्या का सबूत, न ही किसी साजिश का अंदेशा

असिस्टेंट कॉरोनर जीन हरकिन ने कहा कि ऐसा कोई संकेत नहीं मिला जिससे यह लगे कि प्रिंस अब्दुल्लाह अपनी जान खुद लेना चाहते थे। द सन की रिपोर्ट के मुताबिक कॉरोनर ने नोट किया कि प्रिंस ने कभी खुदकुशी के विचार व्यक्त नहीं किए थे, होटल के कमरे से कोई सुसाइड नोट नहीं मिला और न ही ऐसा कोई सबूत मिला जो यह दर्शाता हो कि उनकी मौत से पहले वहां कोई और व्यक्ति मौजूद था। अकेले होटल लौटने की सीसीटीवी फुटेज ने भी किसी तीसरे पक्ष की संलिप्तता की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया।

सऊदी शाही दरबार ने कुछ दिनों बाद की थी मौत की घोषणा

सऊदी रॉयल कोर्ट ने आधिकारिक तौर पर 2 दिसंबर को प्रिंस अब्दुल्लाह के निधन की सार्वजनिक घोषणा की थी। सऊदी मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक प्रिंस के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में राजकुमारों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया था।

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Market Mantra : AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन महंगे,कैपिटल मार्केट शेयरों में आगे दिखेगी अच्छी तेजी – कैलाश कुलकर्णी

Market Mantra : इस समय बाजार एक दोराहे पर खड़ा है। कच्चा तेल है जिसने बाजार की सांस फूला रखी है। वहीं अबतक आए नतीजे हैं मिलेजुले होने के बाद कमेंट्री के फ्रंट पर अच्छे हैं। IT,बैंक और कंज्यूमर कंपनियां सब आगे की अच्छी राह की बात कर रही हैं। ऐसे में निवेशक कंफ्यूज है कि निवेश को लेकर आगे क्या रणनीति बनाएं,अभी निवेश करें या कुछ महीने पहले देख लें कि हालात क्या करवट लेते हैं। इसी कंफ्यूजन को दूर करने के लिए आज हमारे साथ हैं। HSBC MF के CEO कैलाश कुलकर्णी (Kailash Kulkarni)।

कैलाश कुलकर्णी की राय

कैलाश कुलकर्णी का कहना है कि जियोपॉलिटिकल हालात के चलते बाजार में काफी ज्यादा अनिश्चितता है। पिछले कुछ सालों में भारतीय निवेशक मैच्योर हुए हैं। इसके चलते भारतीय निवेशकों की तरफ से पैनिक बिकवाली नहीं हुई है। निवेशकों अभी वेट एंड वॉच मोड में ही रहना चाहिए। भारतीय इकोनॉमी के हालात काफी बेहतर है।

डाइवर्सिफाइड इंडेक्स में बना पैसा

उन्होंने आगे कहा कि निवेशकों का पैसा डाइवर्सिफाइड इंडेक्स में बना है। निवेशक लार्जकैप की बजाय मिडकैप और स्मॉलकैप में पैसे डाल रहे हैं। फ्लैक्सीकैप कैटेगरी में काफी निवेश आ रहा है। मिडकैप की तरफ निवेशकों का रुझान बढ़ा है। इनमें रिटर्न भी अच्छे मिले हैं।

मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटाइजेशन थीम ज्यादा चल रही है। कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी थीम भी अच्छी चल रही है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के चलते आगे एक्सपोर्ट सेक्टर भी चल सकता है। PLI और चीन+1 के चलते मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को फायदा होगा। देश के 8-10 राज्यों में मैन्युफैक्चरिंग हो रही है।

AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन ज्यादा

कैलाश कुलकर्णी ने आगे कहा कि AI से जुड़ी IT कंपनियों के वैल्युएशन महंगे दिख रहे हैं। IT कंपनियों पर अंडरवेट नजरिया है। BFSI फंड में कैपिटल मार्केट शेयरों पर फोकस है। कैपिटल मार्केट शेयरों में आगे अच्छी तेजी दिखेगी। फार्मा शेयरों पर वेट एंड वॉच का नजरिया है।

Market Mantra : कैलाश कुलकर्णी के मुताबिक मैन्युफैक्चरिंग और डिजिटाइजेशन थीम ज्यादा चल रही है। कंज्यूमर डिस्क्रेशनरी थीम भी अच्छी चल रही है। फ्री ट्रेड एग्रीमेंट के चलते आगे एक्सपोर्ट सेक्टर भी चल सकता है

 

Top Stock Picks : बाजार में वेट एंड वॉच मोड में रहें, किसी गिरावट में इन फार्मा और डिफेंस शेयरों में करें खरीदारी

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Top Stock Picks : बाजार में वेट एंड वॉच मोड में रहें, किसी गिरावट में इन फार्मा और डिफेंस शेयरों में करें खरीदारी

Top Stock Picks : शुक्रवार को दोपहर के कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में गिरावट देखने को मिल रही है। अलग-अलग सेक्टर में बड़े पैमाने पर बिकवाली के कारण बेंचमार्क इंडेक्स पर दबाव बना हुआ। फिलहाल सेंसेक्स 571.57 अंक या 0.75 प्रतिशत गिरकर 75,819.82 पर और निफ्टी 163.20 अंक या 0.68 प्रतिशत गिरकर 23,706.40 पर कारोबार कर रहा है। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में भी 0.5% की गिरावट दर्ज देखने को मिल रही है।

ऐसे में टेक्नो फंडा नजरिए के साथ बाजार पर बात करते हुए जेएम फाइनेंशियल्स (JM Financial Services) के PMS के मैनेजिंग डायरेक्टर आशीष चतुरमोहता ने कहा कि पिछले कुछ दिनों से बाजार में काफी अनसर्टेनिटी देखने को मिल रही है। क्रूड ने फिर से 100 डॉलर का लेवल हासिल कर लिया है। इसके अलावा ग्लोबल मार्केट में एआई डेटा सेंटर रिलेटेड पूरी थीम में अच्छी-खासी बिकवाली देखने को मिली है। ताइवान, कोरिया और यूएस जैसे मार्केट में एआई पर भारी कैपेक्स के चलते दबाव बना है। इस भारी कैपेक्स के चलते Apple जैसे शेयरों की रेवेन्यू विजिबिलिटी काफी कम नजर आ रही है। इसके चलते बाजार में काफी अनिश्चितता देखने को मिल रही है।

इस बीच अगर पश्चिम एशिया का संकट और बढ़ता है तो दुनिया के सभी बाजारों पर इसका असर देखने को मिलेगा। अपने बाजार की बात करें तो निफ्टी ने बहुत दिनों तक अपने 200 डे मूविंग एवरेज को मेंटेन करने की कोशिश की। बैंकिंग सेक्टर में भी हमे ड्रॉप देखने को मिल रहा है। निफ्टी तो ऑलरेडी 200 डे मूविंग एवरेज को क्रॉस ही नहीं कर पा रहा है। ऐसे में बाजार में थोड़ा सा अनसर्टेनिटी का माहौल है। इसको ध्यान में रखते हुए बाजार में वेट एंड वॉच की अप्रोच मेंटेन रखने की सलाह होगी। निफ्टी के 23500- 23400 के पिछले कुछ सपोर्ट बने हुए हैं। अगर ये सपोर्ट टूटते होते हैं तो और कमजोरी आने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। ऐसे में हमें थोड़ी वेट एंड वॉच की अप्रोच रखनी चाहिए। इंडेक्स में लॉन्ग और शॉर्ट दोनों ही साइड में कोई जल्दबाजी करने से बचें।

अपने पसंदीदा शेयरों पर बात करते हुए आशीष चतुरमोहता ने कहा कि उनकी सबसे पहली पसंद हैं हॉस्पिटल स्टॉक्स। इस समय हॉस्पिटल इंडस्ट्री में बहुत बड़ा कंसोलिडेशन चल रहा है। बड़े हॉस्पिटल लगातार छोटे हॉस्पिटल्स को बहुत कम और रीजनेबल वैल्यूएशन पर एक्वायर कर रहे हैं। कहीं ना कहीं इन हॉस्पिटल्स की तीन क्रिटिकल चीजें इंप्रूव हो रही है। इनका एवरेज लेंथ ऑफ स्टे कम हो रहा है। इनके मिक्स हायर मार्जिन साइड में शिफ्ट हो रहे हैं । तीसरी बात यह है कि इनकी ऑक्युपैंसी रेट्स बढ़ रही है। कुल मिलाकर कहें तो आगे हॉस्पिटल सेगमेंट काफी अच्छा प्रदर्शन करेगा। यहां पर लार्ज हॉस्पिटल में अपोलो हॉस्पिटल और मैक्स हॉस्पिटल जैसे स्टॉक काफी अच्छे लग रहे हैं।

अगर मिड एंड स्मॉल सेगमेंट में देखें तो एस्टरडीएम (Aster DM) और पार्क मेडी जैसी कंपनियां काफी इंटरेस्टिंग नजर आ रही हैं। इसके अलावा फार्मा जुड़े कुछ दूसरे शेयर भी अच्छे लग रह हैं। हालांकि, जेरिक साइड पर हमें कुछ अनसर्टेनिटी नजर आ रही है। लेकिन हम अगर इस सेक्टर के स्पेशियलिटी सीडीएमओ और सीआरडीएमओ स्पेस की बात करें तो हमें लगता है यह एरिया टैरिफ से जुड़ी अनसर्टेनिटी से काफी सेफ है। इसके चलते हमें लगता है कि किसी गिरावट में नवीन फ्लोरीन, बायोकॉन और लॉरस लैब जैसे स्टॉक्स में खरीदारी की जा सकती है।

Infosys Share Price : इंफोसिस के नतीजे खराब,लेकिन डिजास्टर नहीं, अब कुछ समय एक दायरे में रह सकता है यह शेयर-अनुज सिंघल

तीसरी थीम डिफेंस स्पेस से है। इस सेक्टर पर सरकार का लगातार फोकस बना हुआ है। डिफेंस कंपनियों का ऑर्डर इनफ्लो काफी स्ट्रांग है। ये कंपनियां डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग दोनों साइड पर काफी फोकस कर रही हैं। इस बात को देखते हुए एरोस्पेस इंजीनियरिंग और डिफेंस एक ऐसा बास्केट होगा जिसमें गिरावट पर खरीदारी की जानी चाहिए।

 

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Market Insight : बाजार में अब नया शॉर्ट करना थोड़ा रिस्की, अगर पहले से शॉर्ट हैं तो अब ट्रेलिंग स्टॉप-लॉस लगाएं

Market Insight : चौतरफा बिकवाली के बीच भारतीय बेंचमार्क इंडेक्स में शुरुआती गिरावट और बढ़ गई है। निफ्टी 23600 के आसपास आ गया है। सुबह 10:50 बजे के आसपास सेंसेक्स 795.76 अंक या 1.04 प्रतिशत गिरकर 75,595.63 पर और निफ्टी 227.50 अंक या 0.95 प्रतिशत गिरकर 23,642.10 पर दिख रहा था। निफ्टी मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स में 1% से ज्यादा की गिरावट आई थी।

बाजार: क्या आज बनेगा बॉटम?

बाजार की आगे की चाल और रणनीति पर अपनी राय साझा करते हुए सीएनबीसी-आवाज़ के मैनेजिंग एडिटर अनुज सिंघल ने कहा कि अगर गिफ्ट निफ्टी सही हुआ तो आज हम रेंज का ब्रेकडाउन करेंगे। लेकिन याद है ना,पिछले शुक्रवार हमने रेंज का ब्रेकआउट देखा था। बुधवार से हमारा नजरिया था कि 23,800 टूटेगा। मगर ये भी संभव है कि ब्रेकडाउन भी टिके नहीं। US की 10 साल की बॉन्ड यील्ड अब मेक ऑर ब्रेक लेवल पर है। 4.7% की बॉन्ड यील्ड के ऊपर अमेरिका में पैनिक होता है। हो सकता है वीकेंड पर डॉनल्ड ट्रंप कुछ कदम पीछे लें। उन्होंने धमकी दी है कि कुछ बड़ा करेंगे। हो सकता है वीकेंड पर वो कहें कि ईरान मान गया है।

कच्चा तेल $102 तक गया लेकिन अब $100 के करीब है। आज शायद IT सबसे पहले रिकवरी दिखाए। इंफोसिस के नतीजे कमजोर हैं लेकिन बहुत ज्यादा कमजोर नहीं हैं। एक नजर मार्केट ब्रेड्थ पर भी रखें जो 2 दिन से काफी कमजोर है।

 

निफ्टी: अब क्या हैं अहम स्तर?

अनुज सिंघल का कहना है कि 23,800 का लेवल तो तो आज निर्णायक तौर पर टूटने वाला है। इस रैली की शुरुआत हुई थी 23,123 से। 23,123 से हम 24,430 तक गए, यानी 1307 अंकों की रैली हुई। उसमें से अब हम रैली का 43% गिर चुके हैं। 50% रिट्रेसमेंट 23,776 पर है और 61.8% रिट्रेसमेंट 23,622 पर है और अब 23,622 निफ्टी की आखिरी लक्ष्मण रेखा है। इसके नीचे बंद हुए तो पूरी रैली खत्म होने का रिस्क होगा।

बाजार: क्या हो अब रणनीति?

बाजार में अब नया शॉर्ट करना थोड़ा रिस्की है। अगर पहले से शॉर्ट हैं तो अब आप ट्रेलिंग SL लगाएं। वीकेंड पर शॉर्ट्स बिल्कुल ना लेकर जाएं, क्योंकि अब बाजार काफी हद तक पैनिक फैक्टर को पचा चुका है और अगर वीकेंड पर कुछ पॉजिटिव हुआ तो बड़ी कवरिंग होगी। मगर दिक्कत ये है कि बाजार का टेक्सचर काफी कमजोर है। पैसा पूरे हफ्ते सिर्फ बेचकर बना है। ऐसे में जोखिम लेकर लॉन्ग करने की रणनीति भी थोड़ी रिस्की है।

ये बाजार थकाने वाला है,इसमें कोई शक नहीं है। इस बाजार में रिवेंज ट्रेडिंग ना करें। जरूरी नहीं है कि इस हफ्ते का नुकसान आप आज ही पूरा भरें। कई बार आपको स्वीकार करना पड़ता है कि ये बाजार अलग है। बाजार में चुनिंदा शेयरों में मौके अब भी हैं,हालांकि बहुत सीमित हैं। पिछले 2-3 दिनों से बड़ा पैसा 2-व्हीलर शेयरों में बना है। अगर शॉर्ट करना नहीं आता तो इस बाजार में काफी दिक्कत है। बाजार में अंदाजे को नहीं बल्कि प्राइस एक्शन को फॉलो कीजिए।

निफ्टी पर रणनीति

निफ्टी के लिए पहला सपोर्ट 23,700-23,750 (ऑप्शंस जोन) पर और सबसे अहम सपोर्ट 23,600-23,650 (Fibonacci लेवल्स) पर है। वहीं, इसके लिए पहला रजिस्टेंस 23,850-23,900 पर और बड़ा रजिस्टेंस 23,950-24,050 पर है। गैपडाउन के बाद वेट एंड वॉच की रणनीति रखें। अगर पहले से शॉर्ट हैं तो आधी पोजिशन बुक करें।

बैंक निफ्टी पर रणनीति

इसके लिए अगला बड़ा सपोर्ट 55,200 पर है। उसके पहले बीच-बीच में शॉर्ट कवरिंग आ सकती है। लेकिन अगर 57,000 जल्दी वापस नहीं आया तो बड़ी गिरावट का खतरा है। बैंक निफ्टी में अब इन लेवल्स पर नया ट्रेड करना लगभग नामुमकिन है। पहले के शॉर्ट्स हैं तो ट्रेलिंग SL के साथ रहें।

 

डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Infosys shares Price: Q1 नतीजों के बाद शेयर 2% टूटा, बना निफ्टी का टॉप लूजर, ब्रोकरेज भी हुए सर्तक

Infosys shares Price:  मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से भारत की दूसरी सबसे बड़ी IT सर्विस कंपनी इंफोसिस  (Infosys ) के शेयरों में गिरावट देखने को मिली। 24, जुलाई को BSE पर इंफोसिस का शेयर 2.5% गिरकर दिन के सबसे निचले स्तर ₹1,023.30 प्रति शेयर पर पहुंच गया। तिमाही नतीजों के ऐलान के बाद आई।

बता दें कि IT कंपनी ने FY27 की अप्रैल-जून तिमाही के लिए कंसोलिडेटेड नेट प्रॉफ़िट में साल-दर-साल (YoY) 12.3% की बढ़ोतरी के साथ ₹7,769 करोड़ बताया, जबकि पिछले साल इसी तिमाही में यह ₹6,921 करोड़ था। हालांकि, पिछली तिमाही के आधार पर, नेट प्रॉफ़िट मार्च तिमाही (Q4FY26) में बताए गए ₹8,501 करोड़ से 8.6% कम हो गया।

IT कंपनी ने जून तिमाही में ऑपरेशन से ₹48,211 करोड़ का रेवेन्यू पोस्ट किया, जिसमें YoY में 14% और तिमाही-दर-तिमाही (QoQ) 3.9% की ग्रोथ दर्ज की गई। Q1FY26 में रेवेन्यू ₹42,279 करोड़ और Q4FY26 में ₹46,402 करोड़ रहा। कॉन्स्टेंट करेंसी (CC) टर्म्स में, रेवेन्यू YoY में 2.4% और QoQ में 1% बढ़ा।

स्टॉक पर क्या है ब्रोकरेजज फर्मों की राय 

HSBC

HSBC उन दो बड़े डाउनग्रेड में से एक है जो इंफोसिस को उसके नतीजों के बाद मिले हैं। ब्रोकरेज ने स्टॉक पर अपनी रेटिंग को पहले की “buy” रेटिंग से घटाकर “hold” कर दिया है और अपना टारगेट प्राइस भी पहले के ₹1,340 से घटाकर ₹1,110 कर दिया है।

HSBC ने अपने नोट में लिखा कि हालांकि गाइडेंस में कटौती की उम्मीद थी, लेकिन यह रकम आम उम्मीदों से ज़्यादा थी। हालांकि HSBC ने इंफोसिस के नियर-टर्म वैल्यूएशन को “सस्ता” बताया है, लेकिन उसे उम्मीद है कि नियर-टर्म क्वार्टर कमजोर रहेंगे।

जेपी मॉर्गन

जेपी मॉर्गन ने भी इंफोसिस को उसकी पिछली “ओवरवेट” रेटिंग से डाउनग्रेड करके “Neutral” कर दिया है और स्टॉक का प्राइस टारगेट ₹1,050 रखा है। रेवेन्यू गाइडेंस में भारी कटौती को बताया और कहा कि ग्रोथ मोमेंटम को अब कई झटके लगे हैं, जिसमें कमजोर डिमांड, बढ़ता AI डिफ्लेशन, और डेमलर में चुनौतियां और एनर्जी, यूटिलिटीज रिसोर्सेज सर्विसेज (EURS) कॉन्ट्रैक्ट का खत्म होना शामिल है।

इंफोसिस का नया ऑर्गेनिक गाइडेंस, जो नेगेटिव 0.2% से पॉजिटिव 1.3% तक है, तेज मंदी की ओर इशारा करता है और वह भी मुश्किल माहौल में 0.4% से 1.4% कंपाउंड क्वार्टरली ग्रोथ रेट (CQGR) बनाए रखने पर निर्भर करता है।

CLSA

ब्रोकरेज ने इंफोसिस पर अपनी “outperform” रेटिंग राय दी है और इसके लिए टारगेट प्राइस ₹1,109 रखा है।CLSA ने कहा कि गाइडेंस में कटौती निराशाजनक थी, लेकिन EBIT मार्जिन बेहतर थे और ऑर्डर बुक भी स्थिर थी।इसने आशीष कुमार दाश को CEO-डेजिग्नेट के तौर पर नियुक्त करने को इंफोसिस के इतिहास में पहला मौका बताया, जब किसी इनसाइडर नॉन-फाउंडर को यह मौका दिया गया हो।

नोमुरा

नोमुरा ने इंफोसिस पर अपनी “Buy” रिकमेंडेशन बनाए रखी है और प्राइस टारगेट ₹1,290 रखा है। इसने नेगेटिव रेवेन्यू को क्लाइंट स्पेसिफिक इश्यूज के लिए सरप्राइज बताया, और कहा कि स्टॉक अभी आकर्षक वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहा है।

इंफोसिस ने गुरुवार को अपने रिजल्ट्स की रिपोर्ट दी, जिसमें उसने अपने फाइनेंशियल ईयर 2027 रेवेन्यू ग्रोथ गाइडेंस के अपर एंड में 50 बेसिस पॉइंट्स की कटौती की। अब गाइडेंस कॉन्स्टेंट करेंसी टर्म्स में 1.5% से 3% है, जो पहले 1.5% से 3.5% था।

सलिल पारेख भी अगले साल अपना टर्म पूरा होने पर MD और CEO का पद छोड़ देंगे और 1 अप्रैल, 2027 से उनकी जगह आशीष दाश लेंगे।

Stock Market Live Update: सेंसेक्स 880 अंक टूटा, निफ्टी 23600 के करीब, लाल निशान में सभी सेक्टर

(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।