Tukaram Mundhe: “क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं?” बॉम्बे हाई कोर्ट ने IAS तुकाराम मुंढे के FDI को क्यों लगाई फटकार?

Tukaram Mundhe: बॉम्बे हाई कोर्ट ने चर्चित IAS अधिकारी तुकाराम मुंढे की अगुवाई वाली महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को दो अलग-अलग मामलों में सुनवाई के दौरान जमकर फटकार लगाई। इसके बाद रेगुलेटर को पुणे में सिप्ला (Cipla) की एक फैसिलिटी और मुंबई में मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) परिसर में चल रहे पांच रेस्टोरेंट के खिलाफ जारी आदेश वापस लेने पड़े। कोर्ट ने FDA की आलोचना करते हुए कहा कि उसने बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में काम किया।

अदालत ने कहा कि कानून का ठीक से विश्लेषण नहीं किया गया। कोर्ट के मुताबिक एक मामले में तो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन किया गया। MCA मामले में बेंच ने रेगुलेटर पर व्यावहारिक नजरिया अपनाने के बजाय किताबी या लकीर का फकीर वाला नजरिया अपनाने का आरोप भी लगाया।

‘क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं?’

बॉम्बे हाई कोर्ट ने सबसे तीखी टिप्पणी बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स में MCA परिसर के पांच रेस्टोरेंट से जुड़े मामले की सुनवाई के दौरान की। एक्टिंग चीफ जस्टिस रवींद्र घुगे और जस्टिस गौतम अंखाड की बेंच ने FDA के रवैये पर सवाल उठाए। इस दौरान यह बात सामने आई कि एक नए जांच में पाया गया कि ये रेस्टोरेंट फूड सेफ्टी नियमों का 88% पालन कर रहे थे। कोर्ट ने FDA से पूछा, “क्या आपको लगता है कि आप भगवान हैं। आप कुछ भी कर सकते हैं?” साथ ही यह भी पूछा कि विभाग बार-बार बिना सोचे-समझे जल्दबाजी में क्यों काम करता है।

‘न्यूज 18’ के मुताबिक हाई कोर्ट ने कहा कि उसने पहले भी FDA से मामले पर सोच-समझकर और व्यावहारिक नजरिया अपनाने को कहा था। लेकिन आरोप लगाया कि विभाग ने इसके बजाय किताबी या लकीर का फकीर वाला रवैया अपनाया। अदालत ने कहा, “हम हर समय विभाग और अधिकारियों को फटकार लगाकर थक चुके हैं। अब कड़े आदेश जारी करने का समय आ गया है। हम संबंधित अधिकारियों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्रवाई करेंगे। वे हमें समझाएं या जेल जाएं।”

कामकाज रोकने का आदेश वापस

इसके बाद FDA ने हाई कोर्ट को बताया कि वह पांच रेस्टोरेंट का कामकाज रोकने का अपना आदेश वापस ले लेगा। साथ ही MCA को नया नोटिस जारी करेगा, ताकि उसे M/s शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर के साथ अपने कॉन्ट्रैक्ट के बारे में जवाब देने का मौका मिल सके। कोर्ट ने इस कदम को मंजूरी देते हुए कहा कि चूंकि रेस्टोरेंट अब फूड सेफ्टी नियमों का पालन कर रहे हैं, इसलिए कामकाज रोकने का आदेश रद्द माना जाएगा। अदालत ने कहा कि अब रेस्टोरेंट फिर से खुल सकते हैं।

‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल न करें’

यह विवाद इसलिए हुआ क्योंकि फूड लाइसेंस MCA के नाम पर जारी किए गए थे। जबकि रेस्टोरेंट M/s शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर चला रही थी। कोर्ट ने कहा कि कानून में ऐसी व्यवस्था को रोकने वाला कोई प्रावधान नहीं है। FDA के फैसला लेने के तरीके पर सवाल उठाए। पीठ ने कहा, “हमें कितनी बार समझाने और संतुलन बनाने की कोशिश करनी चाहिए ताकि विभाग का हौसला न टूटे? हम क्यों कहते हैं, ‘मच्छर मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल न करें’?” कोर्ट ने यह भी सवाल किया कि FDA लागू कानून का ठीक से विश्लेषण किए बिना आदेश क्यों जारी कर रहा था?

सिपला का लाइसेंस रद्द करने का फैसला वापस

दूसरे मामले में हाई कोर्ट ने FDA को पुणे के वाडकी में सिपला फार्मा एंड लाइफ साइंसेज लिमिटेड की कैरिंग एंड फॉरवर्डिंग सुविधा के दवा बिक्री लाइसेंस रद्द करने का आदेश वापस लेने के लिए मजबूर किया। ‘रिएक्टिन प्लस’ टैबलेट की पैकेजिंग और उन्हें वापस मंगाने (रिकॉल) की फॉलो-अप जांच के दौरान कथित उल्लंघन पाए जाने के बाद 27 अगस्त से लाइसेंस रद्द कर दिए गए थे।

कोर्ट ने FDA द्वारा अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए, जिसमें राज्य सरकार द्वारा घोषित सार्वजनिक छुट्टी के दिन सुनवाई के लिए कंपनी के प्रतिनिधि को बुलाने वाला ईमेल भी शामिल था। अदालत ने FDA से कहा, “आप सराहनीय काम कर रहे हैं। लेकिन अब आप हद से आगे बढ़ रहे हैं। ऐसा पहली बार नहीं हो रहा है। आपने गलत किया है, और अब आपको इस मामले को सुलझाना होगा।”

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मुंढे पिछले कुछ दिनों से एफडीए द्वारा मुंबई में खाने-पीने की जगहों और रेस्तरां (जिनमें कुछ बड़े नाम भी शामिल हैं) के खिलाफ की गई सख्त कार्रवाई के कारण चर्चा में बने हुए हैं। कुछ मामलों में तो इस वजह से कानूनी जांच-पड़ताल भी हुई। ऐसे में, एफडीए कमिश्नर ने कहा कि खाने-पीने के प्रतिष्ठानों पर कार्रवाई तथ्यों और नियमों के पालन की जरूरतों के आधार पर की गई थी।

30 की उम्र में सालाना 1-2 लाख की कमाई, टेक कर्मचारी की परेशानी सुनकर लोगों ने बताए आमदनी बढ़ाने के तरीके

कोलकाता के एक तकनीकी कर्मचारी की कम सैलरी और रोजमर्रा की परेशानियों से जुड़ी पोस्ट ने सोशल मीडिया पर नई चर्चा छेड़ दी है। करीब 30 साल के इस कर्मचारी की सालाना कमाई सिर्फ 1 से 2 लाख रुपये है। माता-पिता के साथ रहने के कारण उन्हें किराए का खर्च नहीं उठाना पड़ता, फिर भी उनका कहना है कि जिंदगी में मनमुताबिक खुशियां और सुविधाएं जुटाना मुश्किल हो रहा है। तकनीकी क्षेत्र में काम करने के बावजूद इतनी कम आय ने उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर सोचने पर मजबूर कर दिया है।

उन्होंने रेडिट पर अन्य लोगों से पूछा कि आखिर इतनी कम कमाई में लोग अपने खर्च और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं। उनकी यह बात कई नौकरीपेशा लोगों को अपनी शुरुआती नौकरी और सीमित वेतन के दिनों की याद दिला रही है।

हफ्ते में साढ़े पांच दिन नौकरी

रेडिट पोस्ट के मुताबिक, वह सोमवार से शुक्रवार तक करीब 8.5 घंटे रोज काम करते हैं और शनिवार को भी आधे दिन की ड्यूटी होती है। इतनी मेहनत के बावजूद कम वेतन मिलने से उन्हें अपने भविष्य और जीवनशैली को लेकर चिंता है।

इसी परेशानी ने उन्हें रेडिट पर सवाल पूछने के लिए मजबूर किया कि आखिर इतने कम वेतन में लोग खर्च, करियर और निजी जिंदगी के बीच संतुलन कैसे बनाते हैं।

किसी ने 2.4 लाख से शुरू किया, आज 40 लाख कमा रहा

पोस्ट पर कई लोगों ने अपने अनुभव साझा किए। एक उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत 2.4 लाख रुपये सालाना वेतन से की थी। करीब नौ साल बाद उसकी आय बढ़कर 40 लाख रुपये सालाना हो गई। उसने सलाह दी कि मौजूदा कमाई से परेशान होने के बजाय लगातार नई चीजें सीखते रहना चाहिए और समय-समय पर बेहतर अवसर के लिए नौकरी बदलनी चाहिए।

10 हजार रुपये महीने से शुरुआत

एक अन्य उपयोगकर्ता ने बताया कि उसने अपने करियर की शुरुआत महज 10 हजार रुपये महीने की कमाई से की थी। यानी सालाना आय करीब 1.2 लाख रुपये थी। बाद में उसे पता चला कि बाजार में उसी तरह के काम के लिए दूसरे लोग ज्यादा पैसा कमा रहे हैं। इसके बाद उसने अपने कौशल पर काम किया और कंपनियां बदलता गया। उसके मुताबिक, अब उसकी सालाना आय 15 लाख रुपये से ज्यादा है।

‘1-2 लाख में गुजारा करना बहुत मुश्किल’

एक यूजर ने मौजूदा महंगाई का हवाला देते हुए कहा कि आज के समय में सालाना 1-2 लाख रुपये में जीवन चलाना बेहद मुश्किल है। उसके मुताबिक, कम से कम 3-4 लाख रुपये सालाना तक पहुंचना जरूरी है, क्योंकि 20-30 हजार रुपये महीना भी अब कई लोगों के लिए सिर्फ जरूरतें पूरी करने जितना ही रह गया है।

वहीं, एक अन्य यूजर ने बेहद साधारण तरीके से खर्च संभालने की बात कही और कम कीमत वाले खाने-पीने के विकल्पों का उदाहरण दिया।

कुछ लोगों के लिए कम वेतन भी ‘सीखने’ का मौका

चर्चा में एक कर्मचारी ने बताया कि उसने तीन साल पहले 1.5 लाख रुपये सालाना से शुरुआत की थी। इससे पहले वह उसी कंपनी में सिर्फ 3 हजार रुपये महीने की इंटर्नशिप कर रहा था। उसका कहना था कि कम वेतन पर नौकरी तब तक जारी रखी जा सकती है, जब तक वहां अच्छा काम सीखने और नए कौशल विकसित करने का मौका मिल रहा हो। उसने खुद दो परियोजनाओं पर शुरू से अंत तक काम किया और इस अनुभव को अपने करियर के लिए महत्वपूर्ण बताया।

Trends (25)

रेडिट की चर्चा का सीधा संदेश

इस पूरी चर्चा में एक बात बार-बार सामने आई कम शुरुआती वेतन का मतलब यह नहीं कि करियर वहीं रुक जाएगा। कई लोगों ने अपने अनुभव के जरिए बताया कि कौशल बढ़ाने, बेहतर अवसर तलाशने और सही समय पर नौकरी बदलने से आय में बड़ा बदलाव आ सकता है।

हालांकि, कोलकाता के इस कर्मचारी की परेशानी यह भी दिखाती है कि कम वेतन, बढ़ते खर्च और लंबे कामकाजी घंटों के बीच संतुलन बनाना आज कई युवा कर्मचारियों के लिए आसान नहीं है।

मुंबई-गुरुग्राम की चमक छोड़ भोपाल लौटे कारोबारी, आखिर ऐसा क्या मिला कि वापस जाने का मन नहीं?

मुंबई-गुरुग्राम की चमक छोड़ भोपाल लौटे कारोबारी, आखिर ऐसा क्या मिला कि वापस जाने का मन नहीं?

गुरुग्राम और मुंबई जैसे महानगरों में करीब 17 साल बिताने के बाद कारोबारी और संस्थापक करण कुकरेजा ने अपने शहर भोपाल लौटने का फैसला किया। उनका कहना है कि इस बदलाव ने उनकी जिंदगी का नजरिया ही बदल दिया। जहां बड़े शहरों में करियर की रफ्तार के साथ ट्रैफिक, लंबा सफर और भागदौड़ रोजमर्रा का हिस्सा बन जाते हैं, वहीं भोपाल में उन्हें काम के साथ सुकून भी मिल रहा है।

कुकरेजा के मुताबिक, छोटे शहर में लौटने का सबसे बड़ा फायदा समय और जीवनशैली में महसूस होता है। कम दूरी, कम यात्रा और अपने शहर का परिचित माहौल उनकी जिंदगी को ज्यादा आरामदायक बना रहा है। खास बात यह है कि उनका मानना है कि अब छोटे शहरों में भी काम और कारोबार के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। ऐसे में क्या करियर के लिए हमेशा महानगर में रहना जरूरी है? कुकरेजा की कहानी इस सोच पर विचार करने को मजबूर करती है।

15-20 मिनट में सफर, समय की बड़ी बचत

कुकरेजा ने भोपाल की जिंदगी का जिक्र करते हुए बताया कि शहर के एक हिस्से से दूसरे हिस्से तक पहुंचने में अक्सर सिर्फ 15 से 20 मिनट लग जाते हैं। महानगरों में जहां लोग घंटों ट्रैफिक में फंसे रहते हैं, वहीं भोपाल में कम दूरी और अपेक्षाकृत कम यातायात उनकी दिनचर्या को काफी आरामदायक बनाता है। उन्होंने अपने काम की एक झलक भी साझा की, जिसमें बालकनी, बारिश और लैपटॉप के साथ उनका कार्यस्थल नजर आया। उनके मुताबिक, छोटे शहर में काम करने का मतलब यह नहीं है कि आपको अच्छी पेशेवर जिंदगी से समझौता करना पड़ेगा।

अब छोटे शहरों में भी बन रहे नए मौके

कुकरेजा का मानना है कि आज के समय में छोटे शहर सिर्फ रहने की जगह नहीं रह गए हैं। दूसरे और तीसरे स्तर के शहरों में भी कारोबार और काम के नए अवसर तेजी से सामने आ रहे हैं।

उन्होंने महानगरों में पहले से स्थापित लोगों से अपने गृह नगरों के बारे में दोबारा सोचने की अपील की। उनके अनुसार, छोटे शहरों में काम करने का तरीका भले ही अलग हो, लेकिन यहां भी बहुत कुछ नया शुरू किया जा सकता है।

‘करियर और सुकून में से एक चुनना जरूरी नहीं’

कुकरेजा की कहानी का सबसे दिलचस्प पहलू यही है कि उन्होंने महानगर छोड़ने के बाद करियर को खत्म होते नहीं देखा। इसके उलट, उन्हें लगता है कि छोटे शहर में रहते हुए भी नए काम और कारोबार खड़े किए जा सकते हैं। उनका संदेश है कि अगर किसी ने महानगर में अपनी जिंदगी व्यवस्थित कर ली है, तो एक बार यह जरूर सोचना चाहिए कि क्या वही काम अपने शहर से भी किया जा सकता है। उनके मुताबिक, अपने शहर लौटने पर समय, जिंदगी की रफ्तार और काम के बीच बेहतर संतुलन मिल सकता है।

भोपाल की जिंदगी ने लोगों को भी सोचने पर मजबूर किया

कुकरेजा के अनुभव पर इंटरनेट यूजर्स की भी प्रतिक्रिया आई। कई लोगों ने माना कि दूसरे और तीसरे स्तर के शहर बेहतर जीवनशैली दे सकते हैं। एक यूजर ने कहा कि छोटे शहरों में जीवन की गुणवत्ता वास्तव में बेहतर हो सकती है। एक अन्य व्यक्ति ने कहा कि हर सफल करियर के लिए महानगर में रहना जरूरी नहीं है। कुकरेजा की कहानी इसी बदलती सोच की ओर इशारा करती है, जहां लोग अब बड़ी नौकरी और बड़े शहर के बजाय अपने समय, सुकून और बेहतर जिंदगी को भी उतनी ही अहमियत देने लगे हैं।

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Nepal Flood: ‘शायद इस बार फोन उठ जाए…’ नेपाल बाढ़ में लापता स्वाति के परिवार ने नहीं छोड़ी उम्मीद

नेपाल में 26 अगस्त को आई भयानक बाढ़ ने हजारों परिवारों की जिंदगी बदल दी है। इस तबाही में से अबतक कुल 691 लोगों को मौत हो चुकी है। वहीं 3000 हजार से ज्यादा लोग लापता है। इनके परिवार के लोगों इनकी तलाश में दर-दर भटक रहे हैं। नेपाल में आई अचानक बाढ़ के बाद टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा भी लापता हैं। स्वाति बागरेचा कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए गई थी। 26 अगस्त को बाढ़ आने के बाद से उनका परिवार उनसे संपर्क करने की कोशिश कर रहा है। मोबाइल फोन की घंटी बजने के बावजूद कोई जवाब नहीं मिल रहा है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश के लिए भारतीय और कनाडाई दूतावास से मदद मांगी है।

फोन पर रिंग जा रहा है

PTI के मुताबिक, टोरंटो में रहने वाली 50 वर्षीय इंजीनियर स्वाति बागरेचा के परिवार की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। नेपाल-तिब्बत सीमा के पास अचानक आई बाढ़ के बाद से स्वाति का कोई पता नहीं चल पाया है। परिवार उनके फोन की हर घंटी का इंतजार कर रहा है, इस उम्मीद में कि शायद उनकी कोई खबर मिल जाए। लेकिन फोन का जवाब न मिलने से चिंता और बढ़ती जा रही है। PTI ने स्वाति के भाई डॉ. प्रशांत बागरेचा ने बताया, “उनका मोबाइल फोन अभी भी बज रहा है, लेकिन वह हमारी कॉल रिसीव नहीं कर रही हैं। हम उनकी सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हैं।”

कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं

दिल्ली की रहने वाली स्वाति 8 अगस्त को ईशा फाउंडेशन के 77 लोगों के एक समूह के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं। परिवार के अनुसार, 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे उनसे आखिरी बार संपर्क हुआ था। इसी दिन नेपाल में अचानक भारी बारिश के बाद बाढ़ की स्थिति बन गई थी। इसके बाद से स्वाति से संपर्क नहीं हो पाया है। परिवार के मुताबिक, स्वाति 26 अगस्त को इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए नेपाल-तिब्बत सीमा पर पहुंची थीं। इसके बाद उनसे परिवार की कोई बात नहीं हो सकी। वहीं, उनकी 14 साल की बेटी अनुष्का फिलहाल अपनी बड़ी बहन के साथ मुंबई में रह रही है।

परिवार ने मदद की अपील की

26 अगस्त को नेपाल के रसुवा इलाके में भोटेकोशी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया, जिससे बाढ़ आ गई। बाढ़ का पानी आगे चलकर त्रिशूली और गंडक नदी तंत्र तक पहुंच गया और कई निचले इलाकों में हालात बिगड़ गए। प्रशांत के मुताबिक, मोबाइल की लोकेशन से जानकारी मिली कि स्वाति का फोन चीन की सीमा के पास किसी इलाके में सक्रिय था। हालांकि, फोन को ट्रैक करने में परेशानी आ रही है क्योंकि उसका मोबाइल नंबर टोरंटो में रजिस्टर्ड है। स्वाति के परिवार ने उनकी तलाश में मदद के लिए नेपाल में भारतीय और कनाडाई दूतावास से संपर्क किया है। परिवार ने दोनों देशों के अधिकारियों से स्वाति को सुरक्षित ढूंढने और उन्हें वापस लाने में मदद करने की अपील की है।

शिवराज सिंह चौहान ने परिवार से की बात

PTI की रिपोर्ट के अनुसार, स्थानीय विधायक मुकेश टंडन के प्रयासों के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी स्वाति के परिवार से बातचीत की। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि स्वाति की तलाश के लिए जरूरी राजनयिक और प्रशासनिक स्तर पर हर संभव कोशिश की जाएगी। साथ ही, उनकी सुरक्षित वापसी के लिए संबंधित अधिकारियों से संपर्क कर मदद पहुंचाने का आश्वासन भी दिया गया।

Petrol Diesel Price Today: पेट्रोल-डीजल के आज के रेट जारी, दिल्ली-नोएडा समेत इन शहरों में जानें कीमत

हर दिन की शुरुआत सिर्फ सूरज की किरणों से नहीं होती, बल्कि पेट्रोल और डीजल की नई कीमतों से भी होती है, जो आम आदमी की जेब पर सीधा असर डालती हैं। सुबह 6 बजे देश की तेल विपणन कंपनियां (OMCs) ताजा दरें जारी करती हैं, जो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और डॉलर-रुपए की विनिमय दर में आए बदलावों पर आधारित होती हैं। ये बदलाव रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करते हैं, चाहे वो ऑफिस जाने वाला व्यक्ति हो या फल-सब्जी बेचने वाला व्यापारी।

ऐसे में हर दिन की कीमतों की जानकारी रखना सिर्फ जरूरी ही नहीं, बल्कि समझदारी भी है। सरकार की यह प्रणाली पारदर्शिता सुनिश्चित करती है ताकि उपभोक्ताओं को किसी तरह की भ्रमित जानकारी न मिले।

आपके शहर में आज का पेट्रोल-डीजल का भाव

ये रहे 30 आगस्त 2026 के प्रमुख शहरों के पेट्रोल-डीजल के ताजा रेट

नई दिल्ली: पेट्रोल ₹102.12 प्रति लीटर और डीजल ₹95.20 प्रति लीटर।

मुंबई: पेट्रोल ₹111.18 और डीजल ₹97.83 प्रति लीटर।

कोलकाता: पेट्रोल ₹113.47 जबकि डीजल ₹99.82 प्रति लीटर।

चेन्नई: पेट्रोल ₹107.77 और डीजल ₹99.55 प्रति लीटर।

गुरुग्राम: पेट्रोल ₹102.77 तथा डीजल ₹95.44 प्रति लीटर।

नोएडा: पेट्रोल ₹102.12 और डीजल ₹95.56 प्रति लीटर।

बेंगलुरु: पेट्रोल ₹110.93 जबकि डीजल ₹98.80 प्रति लीटर।

भुवनेश्वर: पेट्रोल ₹109.92 और डीजल ₹100.92 प्रति लीटर।

चंडीगढ़: पेट्रोल ₹98.10 तथा डीजल ₹86.09 प्रति लीटर।

हैदराबाद: पेट्रोल ₹115.69 और डीजल ₹103.82 प्रति लीटर।

जयपुर: पेट्रोल ₹112.66 जबकि डीजल ₹97.78 प्रति लीटर।

लखनऊ: पेट्रोल ₹102.05 और डीजल ₹95.55 प्रति लीटर।

पटना: पेट्रोल ₹113.35 तथा डीजल ₹99.36 प्रति लीटर।

तिरुवनंतपुरम: पेट्रोल ₹115.49 और डीजल ₹104.40 प्रति लीटर।

पिछले दो साल से स्थिर क्यों हैं कीमतें?

मई 2022 के बाद से केंद्र और कई राज्यों द्वारा टैक्स में कटौती की गई, जिसके बाद पेट्रोल-डीजल की कीमतों में स्थिरता देखी जा रही है। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, फिर भी भारतीय उपभोक्ताओं के लिए कीमतें तुलनात्मक रूप से स्थिर बनी हुई हैं।

किन कारणों से तय होती हैं ईंधन की कीमतें?

  1. कच्चे तेल की कीमतें:

पेट्रोल और डीजल का उत्पादन मुख्य रूप से कच्चे तेल से होता है। जब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो इसका असर सीधे भारतीय बाजार पर पड़ता है।

  1. डॉलर के मुकाबले रुपया:

भारत अधिकतर कच्चा तेल आयात करता है, और यह डॉलर में खरीदा जाता है। यदि रुपया कमजोर होता है, तो ईंधन महंगा हो जाता है।

  1. सरकारी टैक्स और शुल्क:

केंद्र और राज्य सरकारें पेट्रोल-डीजल पर भारी टैक्स लगाती हैं, जो खुदरा मूल्य का बड़ा हिस्सा होते हैं। यही कारण है कि राज्यों में कीमतों में अंतर होता है।

  1. रिफाइनिंग की लागत:

कच्चे तेल को इस्तेमाल लायक बनाने की प्रक्रिया (रिफाइनिंग) में भी खर्च होता है। ये लागत कच्चे तेल की गुणवत्ता और रिफाइनरी की क्षमता पर निर्भर करती है।

  1. मांग और आपूर्ति का संतुलन:

बाजार में ईंधन की मांग अगर बढ़ जाती है, तो कीमतें भी ऊपर जाने लगती हैं। खासकर त्योहारों, गर्मी या सर्दी के मौसम में ईंधन की खपत ज्यादा होती है।

कैसे करें अपने शहर की कीमतें SMS से चेक?

अगर आप मोबाइल से ईंधन की कीमत जानना चाहते हैं, तो ये प्रक्रिया आसान है:

Indian Oil ग्राहक: अपने शहर का कोड टाइप करें और उसे “RSP” के साथ 9224992249 पर भेजें।

BPCL ग्राहक: “RSP” लिखकर 9223112222 पर भेजें।

HPCL ग्राहक: “HP Price” लिखकर 9222201122 पर भेजें।

LPG Price Today August 25: गैस सिलेंडर के दाम में फिर आया बड़ा ट्विस्ट!दिल्ली से मुंबई तक जानिए 14.2 KG और कमर्शियल LPG के नए रेट

मलबे में तब्‍दील हुई पशुपतिनाथ की भूमि नेपाल, कई जिंदगियां लापता, किसी की गोद उजड़ी, किसी की जिंदगी का सहारा

मलबे में तब्‍दील हुई पशुपतिनाथ की भूमि नेपाल, कई जिंदगियां लापता, किसी की गोद उजड़ी, किसी की जिंदगी का सहारा

Nepal

कुदरत के कहर और पहाड़ों से बही गगनचुंबी तबाही ने पशुपतिनाथ की पवित्र भूमि नेपाल को पल भर में मलबे के ढेर में तब्दील कर दिया है। चारों तरफ सिर्फ चीख-पुकार, पसरा हुआ सन्नाटा और अपनों को ढूंढती बेबस निगाहें हैं। इस भयानक मंजर ने किसी मां की गोद सूनी कर दी, तो किसी मासूम के सिर से पिता का साया छीन लिया। जहां कल तक जिंदगी मुस्कुराती थी, आज वहां सिर्फ मलबे में दबी उम्मीदें और कभी न भरने वाले जख्म बाकी रह गए हैं।

किसी का घर उजड़ गया तो किसी का पूरा परिवार। किसी का मासूम बच्‍चा जल प्रलय में बह गया तो कोई बुजुर्ग मलबे में दबकर अनंत में कहीं खो गया। अब सिर्फ इंतजार बचा है, अपनों के लौटने का इंतजार। जिंदा नहीं तो कम से कम शव ही मिल जाए। शवों को खोजने की होड़ सी मची है। इस त्रासदी के बाद एक ही सवाल बचा है। अब कैसे फिर से वो घर बसेंगे, कैसे परिवार फिर से पूरा होगा। कैसे फिर से जिंदगी आबाद होगी।

लौटने की प्रतीक्षा, जिंदा न होने का भय : नेपाल में आई भीषण तबाही में 600 से अधिक लोगों की जान जा चुकी है और 2,400 से ज्यादा लोग लापता हैं। सुरक्षा बलों के 11,000 से अधिक जवान राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं। इस आपदा के बीच कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए मुंबई के 61 श्रद्धालुओं का दल भी सीमावर्ती इलाके से लापता है। उनके परिवारों को उनके लौटने का इंतजार और जिंदा नहीं होने का भय सता रहा है।

अस्पतालों के बाहर चिपकी अपनों की तस्वीरें देख देखकर लोग बेहाल हैं। कोई मलबे तो कोई कीचड़ में अपनों के शवों को खोज रहा है। मांएं बेबस हैं, पिता मायूस। बुजुर्ग कुछ समझ नहीं पा रहे हैं और बच्‍चे निढाल हो चुके हैं। तबाही का ऐसा खौफनाक मंजर देखकर हर किसी की रूह कांप गई है।

600 मौतें, 2,400 लापता : शनिवार तक इस प्राकृतिक आपदा में मरने वालों की तादाद 600 को पार कर चुकी है, जबकि 2,400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं। अब तक 163 विदेशी नागरिकों समेत करीब 2,500 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है। नेपाली सेना के 5,000 से अधिक जवानों सहित 11,000 से ज्यादा सुरक्षाकर्मी राहत और बचाव कार्य में दिन-रात जुटे हैं। ऊपरी त्रिशूली 3A जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे 350 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया गया है, जबकि कीचड़ में दबे अन्य लोगों की तलाश जारी है।

हाथ में रह गईं सिर्फ अपनों के नामों की सूचियां : नेपाल के जो भी प्रभावित इलाके हैं, वहां सिर्फ लोग अपनों के नामों की सूचियां और उनकी तस्‍वीरें हाथों में लिए नजर आ रहे हैं। अस्पतालों के बाहर हजारों लोगों की कतारें हैं। इस बीच त्रिशूली में सेना का रिलीफ कैंप प्रभावितों का सबसे बड़ा सहारा बना हुआ है, जहां बुजुर्गों, बच्चों और घायलों का इलाज चल रहा है। इस बीच मौसम विभाग की बारिश की आशंका ने एक बार फिर से लोगों में दहशत जगा दी है।

आखिर कब लौटेंगे 61 श्रद्धालु : नेपाल और तिब्बत सीमा पर आई इस तबाही के बाद मुंबई के 61 श्रद्धालुओं का एक दल भी लापता है, उनके परिजनों की सांसें अटकी हुई हैं। प्रसिद्ध ट्रैकर डॉ. मिलिंद चितले के नेतृत्व में यह दल कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए 23 अगस्त को रवाना हुआ था। 25 अगस्त की शाम को टिमुरे पहुंचने के बाद से इनका परिवारों से संपर्क टूट चुका है। कुछ सदस्यों की आखिरी डिजिटल लोकेशन 26 अगस्त की सुबह बॉर्डर चेकपोस्ट के पास की मिली थी, जिसके बाद से कोई खबर नहीं है।

‘क्या आपको लगता है आप भगवान हैं?’ MCA परिसर में 5 रेस्टोरेंट पर कार्रवाई को लेकर बॉम्बे HC ने FDA को लगाई फटकार

Bombay High Court: बॉम्बे हाई कोर्ट ने शनिवार को सुनवाई करते हुए महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग्स एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) को जमकर फटकार लगाई और मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन (MCA) के BKC परिसर में मौजूद पांच आउटलेट्स के फूड लाइसेंस सस्पेंड करने के उसके आदेशों को रद्द कर दिया। कोर्ट ने कहा कि FDA ने इस मामले में बहुत जल्दबाजी में कार्रवाई की और व्यावहारिक तरीके से फैसला नहीं लिया।

इस दौरान हाई कोर्ट ने FDA के अधिकारियों के खिलाफ ‘अदालत की अवमानना’ की कार्रवाई की चेतावनी भी दी। यह कार्रवाई तब की गई जब एक नए निरीक्षण में पाया गया कि पांचों रेस्टोरेंट फूड सेफ्टी नियमों का 88% पालन कर रहे थे, फिर भी विभाग ने उनके फूड लाइसेंस का सस्पेंशन हटाने से इनकार कर दिया था।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवींद्र घुगे और न्यायमूर्ति गौतम अंखड़ की खंडपीठ ने फूड लाइसेंस पर लगी रोक हटा दी, जिससे इन रेस्टोरेंट को दोबारा खोलने की अनुमति मिल गई, जबकि FDA अलग से किसी तीसरे पक्ष द्वारा उनके संचालन से जुड़े मुद्दों की जांच कर रहा है।

पीठ ने कहा कि मामले पर पुनर्विचार करने के अदालत के पिछले निर्देश के बावजूद FDA ने “व्यावहारिक दृष्टिकोण के बजाय किताबी दृष्टिकोण” अपनाया।

‘बहुत जल्दबाजी में की गई कार्रवाई’

बता दें कि MCA ने FDA के उस फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील की थी, जिसमें साफ-सफाई के नियमों के उल्लंघन और थर्ड-पार्टी ऑपरेशन से जुड़ी गड़बड़ियों के आरोप में पांच रेस्टोरेंट का कामकाज रोक दिया गया था। वहीं, दोबारा जांच के बावजूद, FDA ने सस्पेंशन जारी रखा। उनका तर्क था कि रेस्टोरेंट M/s शिर्के इंफ्रास्ट्रक्चर चला रहा था, जबकि लाइसेंस MCA के नाम पर थे।

हालांकि, कोर्ट ने कहा कि उसने FDA अधिकारियों से साफ तौर पर व्यावहारिक नजरिया अपनाने को कहा था। कोर्ट ने कहा, “साफ तौर पर कहने के बावजूद, FDA ने हमारे आदेश को नहीं माना और व्यावहारिक नजरिए के बजाय लकीर का फकीर बनने वाला नजरिया अपनाया। हम हर समय विभाग और अधिकारियों को डांट-फटकार कर थक चुके हैं। अब सख्त आदेश देने का समय आ गया है। हम संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कोर्ट की अवमानना ​​की कार्रवाई करेंगे। वे हमें समझा लें या जेल जाएं।”

बेंच ने यह भी सवाल किया कि FDA ने कानूनी स्थिति का पूरी तरह से विश्लेषण किए बिना “बेवजह जल्दबाजी” में कदम क्यों उठाया। बेंच ने पूछा, “हम कितनी बार समझाने और संतुलन बनाने की कोशिश करें ताकि विभाग का मनोबल न गिरे? हम क्यों कहते हैं कि मच्छर को मारने के लिए तलवार का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए? क्या आपको लगता है कि आप कोई भगवान हैं और कुछ भी कर सकते हैं?”

यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब महाराष्ट्र में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ FDA की कार्रवाई जारी है। पिछले कुछ हफ्तों में कई खाद्य कंपनियों को नोटिस दिए गए हैं। अधिकारी खाद्य पदार्थों में मिलावट, एक्सपायर्ड सामान की बिक्री और नियमों से जुड़ी दूसरी गड़बड़ियों को लेकर लगातार जांच कर रहे हैं।

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Weather Update: बंगाल की खाड़ी में बन रहा नया सिस्टम, यूपी से MP तक इन राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट, जानिए कहां-कहां तूफानी मौसम

IMD Heavy Rain Alert: देश के कई हिस्सों में मानसून की चाल एक बार फिर से तेज हो गई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने मौसम को लेकर ताजा बुलेटिन जारी करते हुए चेतावनी दी है कि बंगाल की खाड़ी में एक नया कम दबाव का क्षेत्र आकार ले रहा है। इसके असर से आने वाले दिनों में देश के कई राज्यों में मूसलाधार बारिश और तूफानी हवाएं चलने की संभावना है। उत्तर प्रदेश से लेकर मध्य प्रदेश, उत्तराखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल तक बारिश का अलर्ट जारी किया गया है।

मौसम विभाग के मुताबिक पूर्वोत्तर उत्तर प्रदेश और इसके आसपास के इलाकों में बने कम दबाव के क्षेत्र की वजह से पूर्वी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में भारी से बहुत भारी बारिश की स्थिति बनी हुई है। इसके साथ ही उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे पश्चिम बंगाल व उत्तर ओडिशा के तटों पर 29 अगस्त के आसपास एक और नया लो-प्रेशर एरिया बनने वाला है। इस नए सिस्टम के चलते ओडिशा में अति भारी बारिश का खतरा मंडरा रहा है।

उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड में आफत की बारिश, पिछले 24 घंटों का हाल

मौसम विभाग द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक बीते 24 घंटों के दौरान पश्चिम उत्तर प्रदेश में अत्यंत भारी बारिश (21 सेमी या उससे अधिक) दर्ज की गई है। वहीं उत्तराखंड, मेघालय, मिजोरम और पूर्वी मध्य प्रदेश के कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश (12 से 20 सेमी) हुई है। इसके अलावा उत्तर प्रदेश, पूर्वी राजस्थान, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, ओडिशा, झारखंड, बिहार, अरुणाचल प्रदेश और पश्चिम मध्य प्रदेश में भी कुछ जगहों पर भारी बारिश दर्ज की गई है।

उत्तर-पश्चिम भारत: यूपी-उत्तराखंड और हिमाचल में मूसलाधार बारिश का अनुमान

उत्तर-पश्चिम भारत के राज्यों में मानसूनी बारिश का जोर बना रहेगा। उत्तराखंड में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक काफी बारिश की संभावना जताई गई है। इसमें 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। हिमाचल प्रदेश में 30 अगस्त से 3 सितंबर के दौरान काफी बारिश और 31 अगस्त से 3 सितंबर के बीच भारी बारिश की चेतावनी दी गई है।

उत्तर प्रदेश के संदर्भ में पश्चिम यूपी में 28 अगस्त और 2 से 3 सितंबर के दौरान भारी बारिश का अनुमान है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश में 31 अगस्त से 3 सितंबर तक भारी बारिश और गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। जम्मू-कश्मीर, लद्दाख के इलाकों में भी 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच व्यापक बारिश हो सकती है।

मध्य भारत: मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में झमाझम बारिश की चेतावनी

मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के इलाकों में मौसम विभाग ने काफी बारिश का अलर्ट जारी किया है। पूर्वी मध्य प्रदेश में 28 से 30 अगस्त और 2 से 3 सितंबर के बीच मध्यम से तेज बारिश होगी। 28 अगस्त और 3 सितंबर को बेहद भारी बारिश होने की संभावना जताई गई है।

पश्चिम मध्य प्रदेश में 28 अगस्त और 2-3 सितंबर को भारी बारिश हो सकती है। इसके अलावा छत्तीसगढ़ में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक लगातार व्यापक बारिश और वज्रपात की चेतावनी जारी की गई है। विदर्भ क्षेत्र में भी 28 अगस्त और 2-3 सितंबर के दौरान झमाझम बारिश होने के आसार हैं।

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत: ओडिशा में अत्यंत भारी बारिश और तूफानी हवाएं

पूर्वी भारत के राज्यों पर बंगाल की खाड़ी में बन रहे नए मौसमी तंत्र का सबसे ज्यादा असर देखने को मिलेगा। ओडिशा में 28 से 31 अगस्त के दौरान कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश होगी जबकि 30 अगस्त को राज्य में कुछ जगहों पर अत्यंत भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में 28 और 29 अगस्त को 50 से 60 किमी प्रति घंटे (जो बढ़कर 70 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती है) की रफ्तार से तेज तूफानी हवाएं चलने की आशंका है।

गांगेय पश्चिम बंगाल, झारखंड, बिहार और उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल में 28 अगस्त से 1 सितंबर के दौरान मध्यम से भारी बारिश के साथ 30 से 50 किमी प्रति घंटे की गति से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं। बिहार में 28 अगस्त को आकाशीय बिजली चमकने और बिजली गिरने की गंभीर चेतावनी भी दी गई है। पूर्वोत्तर राज्यों अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 28 अगस्त से 3 सितंबर तक भारी बारिश और बिजली कड़कने की गतिविधियां जारी रहेंगी।

पश्चिम और दक्षिण भारत: कोंकण-गोवा में बारिश, दक्षिण भारत में कमजोर रहेगा मानसून

पश्चिमी भारत में कोंकण और गोवा के तटीय इलाकों में 28 अगस्त से 3 सितंबर के दौरान बारिश जारी रहने का अनुमान है। गुजरात, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा और सौराष्ट्र व कच्छ में छिटपुट बारिश देखने को मिल सकती है। दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत की बात करें तो अगले एक हफ्ते के दौरान यहां मानसूनी गतिविधियां थोड़ी सुस्त रहने की संभावना है। हालांकि, तटीय कर्नाटक, केरल, माहे और लक्षद्वीप में 28-29 अगस्त और 2-3 सितंबर को अच्छी बारिश दर्ज की जा सकती है। तेलंगाना, आंध्र प्रदेश, आंतरिक कर्नाटक और तमिलनाडु में 30 से 50 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज सतही हवाएं चलने और छिटपुट बारिश होने की संभावना जताई गई है।

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अनाया बांगर जल्द खेलना चाहती है ऑस्ट्रेलिया के लिए, दक्षिण अफ्रीका की यह ऑलराउंडर हुई नाराज

अनाया बांगर ने हाल ही में यह घोषणा कि वह जल्द ही ऑस्ट्रेलियाई महिला क्रिकेट टीम के लिए खेलना चाहती हैं। हाल ही में उनको बिग बैश के लिए हरी झंडी मिल गई है। इस पर दक्षिण अफ्रीका की ऑलराउंडर खिलाड़ी मारीजैन कैप ने कड़ी आपत्ती जताई। उन्होंने कहा कि  अनाया बांगर को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट खेलने की अनुमति नहीं मिलनी चाहिए। इस पर अनाया बांगर ने कहा है कि ना ही उनका शरीर टेस्टोस्टेरोन बनाएगा ना ही उनके शरीर में खोई हुई मांसपेशिया आएंगी तो इससे किसी को भी क्यों तकलीफ होनी चाहिए।

गौरतलब है कि ‘ट्रांसजेंडर’ खिलाड़ी अनाया बांगड़ सामुदायिक स्तर पर खेलने की अनुमति मिलने के बाद ऑस्ट्रेलिया में अपनी क्रिकेट यात्रा फिर से शुरू करने के लिए तैयार हैं और भले ही उन्हें अभी तक कोई टीम नहीं मिली है लेकिन उन्हें विश्वास है कि इससे उनके लिए अगले साल महिला बिग बैश लीग में खेलने के द्वार खुल जाएंगे।

पूर्व भारतीय क्रिकेटर संजय बांगड़ की ‘बेटी’ अनाया ने इस साल मार्च में लिंग परिवर्तन की सर्जरी कराने से पहले मुंबई के लिए आयु वर्ग के पुरुषों का क्रिकेट  खेला था। अनाया ने यहां पत्रकारों से कहा, ‘‘आज का दिन मेरे लिए बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि कई वर्षों तक प्रतिस्पर्धी क्रिकेट से दूर रहने के बाद मैं आखिरकार उस खेल में वापसी के रास्ते के बारे में बात कर सकती हूं जो मेरे जीवन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है।’’

इस 25 वर्षीय खिलाड़ी ने कहा, ‘‘मैं मार्च 2027 से ऑस्ट्रेलिया में महिला क्रिकेट में वापसी करने की तैयारी कर रही हूं, जिसका उद्देश्य एलीट क्रिकेट खेलना है। मैं यह दावा नहीं कर रही हूं कि मुझे किसी टीम में जगह मिल गई है। मैं बस इतना कह रही हूं कि मुझे टीम में जगह बनाने का मौका मिला है और मैं इसके लिए कड़ी मेहनत करूंगी।’’

अनाया ने इससे पहले बीसीसीआई से महिला क्रिकेट प्रतियोगिताओं में भाग लेने की अनुमति देने की अपील की थी, लेकिन भारतीय बोर्ड से उन्हें कोई जवाब नहीं मिला। ICC ने 2023 में ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को महिला प्रतियोगिताओं से प्रतिबंधित कर दिया था।

अनाया ने कहा कि हाल ही में हुई उनकी जांच से पता चलता है कि अगले साल मार्च में होने वाले एक और परीक्षण में भी उनके टेस्टोस्टेरोन का स्तर समान बना रह सकता है, जिससे उनके लिए महिला क्रिकेट में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त होगा।उन्होंने कहा, ‘‘अगर वह परीक्षण मेरे अनुकूल रहा तो मैं शीर्ष स्तर की क्रिकेट में खेलने की पात्रता हासिल कर लूंगी।’’

‘इन्हें खुद खाओ’: रिश्वत के आरोप में भीड़ ने महाराष्ट्र FDA अधिकारी को घेरा, मुंह में एक्सपायर्ड बिस्किट ठूंसने की कोशिश की

महाराष्ट्र के संभाजीनगर में उस वक्त अजीबोगरीब स्थिति बन गई, जब गुस्साई भीड़ ने एक फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) अधिकारी को घेर लिया और उस पर एक्सपायर्ड बिस्किट के पैकेट फेंकने लगी। NDTV के मुताबिक, भीड़ अधिकारी से कह रही थी, “इन्हें खुद खाओ।”

अधिकारी पर आरोप था कि उन्होंने एक ऐसे दुकानदार को बचाने के लिए रिश्वत ली थी जो कथित तौर पर एक्सपायर हो चुके सामान बेच रहा था। इस हंगामे के बीच, कुछ लोगों ने उनके मुँह में एक्सपायर हो चुके बिस्किट ठूंसने की भी कोशिश की।

लेकिन इतना गुस्सा क्यों?

NDTV के अनुसार, यह गुस्सा एक स्थानीय पान की दुकान पर एक्सपायर्ड (समय-सीमा खत्म हो चुके) प्रोडक्ट बेचने के आरोपों की वजह से भड़का। स्थानीय लोगों का आरोप है कि एक दो साल का बच्चा उस दुकान से खरीदे गए नमकीन स्नैक मिक्स को खाने के बाद बीमार पड़ गया और उसे चक्कर आने लगे।

बच्चे की हालत बिगड़ने पर उसे इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।

इस घटना से छत्रपति संभाजीनगर के लोगों में गुस्सा फैल गया और उन्होंने FDA ऑफिस से संपर्क करके शिकायत दर्ज कराई। इसके बाद, FDA का एक अधिकारी मौके पर पहुंचा और दुकान की जांच शुरू की।

हालांकि, स्थानीय लोगों का आरोप है कि जांच से पहले ही उस नमकीन स्नैक मिक्स को हटा दिया गया था, जिसका इस घटना से संबंध था। जांच के दौरान, अधिकारी को पान की दुकान पर एक्सपायर्ड बिस्कुट के कई पैकेट बिकते हुए मिले।

एक्सपायर्ड पैकेट जब्त तो कर लिए गए, लेकिन स्थानीय लोगों का दावा है कि दुकानदार के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनका आरोप है कि अधिकारी रिश्वत लेकर मामले को रफा-दफा करने की कोशिश कर रहा था।

बता दें कि यह घटना राज्य भर में खाद्य सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के खिलाफ FDA की बड़ी कार्रवाई के दौरान सामने आई है। हाल के हफ्तों में, खाद्य कंपनियों को कई नोटिस जारी किए गए हैं और अधिकारी खाद्य पदार्थों में मिलावट, एक्सपायर्ड प्रोडक्ट्स की बिक्री और अन्य खामियों को लेकर जांच कर रहे हैं।

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