Vinnie Takair: कौन हैं विनी टकायर? डेनिश सिंगर के साथ लंदन के कैसीनो में आर्यन खान हुए स्पॉट

Vinnie Takair: शाहरुख खान के बेटे आर्यन खान की लंदन में हाल की एक आउटिंग सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई है। शाहरुख खान, गौरी खान, आर्यन, सुहाना खान और अबराम खान समेत पूरा खान परिवार कुछ समय से लंदन में छुट्टियां मना रहा है। सुहाना और गौरी के साथ शाहरुख खान के हाल ही में देखे जाने के बाद, अब आर्यन खान को देर रात बाहर घूमते हुए देखा गया।

पिछले साल नेटफ्लिक्स की पॉपुलर सीरीज ‘द बार्ड्स ऑफ बॉलीवुड’ से डायरेक्टर के तौर पर डेब्यू करने वाले स्टार किड को एक मिस्टीरियस महिला के साथ देखा गया। लंदन के एक कसीनो से निकलते हुए दोनों के वीडियोज चर्चा का विषय बन गए हैं और लोग उनके डेटिंग की अफवाहों पर बातें कर रहे हैं।

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियोज में आर्यन को उस मिस्टीरियस महिला के साथ देखा जा सकता है, जब वह एक फैन के साथ फोटो खिंचवाने के लिए रुके थे। इंटरनेट पर उस मिस्टीरियस महिला की पहचान करने में ज़्यादा समय नहीं लगा। वह डेनिश सिंगर Vinnie Takair हैं, जो आर्यन के साथ लंदन के एक कसीनो से निकल रही थीं। कसीनो के बाहर अपनी कार का इंतजार करते समय आर्यन और विनी दोनों ने एक जैसे काले कपड़े पहने हुए थे।

दिलचस्प बात यह है कि विनी इंस्टाग्राम पर अपनी लंदन यात्रा की तस्वीरें पोस्ट कर रही हैं। लेकिन उनमें से किसी में भी आर्यन नज़र नहीं आए। फिर भी, उनके ध्यान रखने वाले फ़ॉलोअर्स ने यह देख लिया कि वह और आर्यन इंस्टाग्राम पर एक-दूसरे को फ़ॉलो करते हैं। इसके अलावा, ऐसा लगता है कि उनके कुछ कॉमन दोस्त भी हैं, जिससे लोगों को लगता है कि वे एक-दूसरे को कुछ समय से जानते हैं।

इससे पहले, ऐसी अफ़वाहें थीं कि आर्यन ब्राज़ीलियाई मॉडल और एक्ट्रेस लारिसा बोनेसी को डेट कर रहे हैं। लारिसा उनके लक्ज़री स्ट्रीटवियर ब्रांड ‘D’YAVOL X’ के प्रमोशन कैंपेन में भी नज़र आई थीं। उन्होंने मुंबई में आर्यन की डायरेक्टोरियल डेब्यू फिल्म के प्रीमियर में भी हिस्सा लिया था।

विनी टकैयर एक डेनिश म्यूज़िक आर्टिस्ट हैं। इंस्टाग्राम पर उनके लगभग 11,000 फ़ॉलोअर्स हैं, जहां वह अपने म्यूज़िक और यात्राओं के बारे में अपडेट शेयर करती रहती हैं। अपनी इंस्टाग्राम प्रोफ़ाइल में उन्होंने कोपेनहेगन और मुंबई को अपने दो शहर बताया है। उन्होंने कई बार मुंबई में परफ़ॉर्म किया है और अपने गानों के म्यूज़िक वीडियो भी शेयर किए हैं, जैसे ‘शाइनिंग लाइट्स’, ‘मेबी आई लव यू’ और ‘ट्रो मिग’।

एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में अपने करियर के साथ-साथ, आर्यन एक एंटरप्रेन्योर के तौर पर भी अपने काम को आगे बढ़ा रहे हैं। ऐसा माना जा रहा है कि लंदन में अपने परिवार के साथ छुट्टियां बिताने के अलावा, यह युवा फ़िल्ममेकर अपने प्रीमियम ब्रांड ‘D’YAVOL Spirits’ को प्रमोट करने की तैयारी कर रहे हैं। यह एक प्रीमियम अल्कोहल ब्रांड है जिसे उन्होंने अपने पिता शाहरुख़ के साथ मिलकर बनाया है। इसे UK के मार्केट में लॉन्च किया जाएगा।

किसान कल्याण के लिए संकल्पित सरकार, सीएम डॉ. मोहन यादव बोले, खेती से घर चलने के साथ रोजगार भी मिलता है

cm mohan yadav

भोपाल। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुरहानपुर में आयोजित बलराम कृषि महोत्सव को वर्चुअली संबोधित किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में कृषक कल्याण वर्ष 2026 में राज्य सरकार किसानों की समृद्धि, सम्मान और कल्याण के लिए अनेक महत्वपूर्ण कार्यों को रफ्तार दे रही है। बलराम कृषि महोत्सव में किसानों को सेवा के साथ सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। किसान नई तकनीक को आत्मसात करें। प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और उद्यानिकी फसलों से अपनी आय बढ़ाएं। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि खेती से केवल एक किसान का घर नहीं चलता है, बल्कि इससे सभी प्रकार के उद्योगों के लिए कच्चा माल और युवाओं को रोजगार के अवसर मिलते हैं। राज्य सरकार ने कृषक कल्याण वर्ष के माध्यम से किसानों को लाभान्वित करने के लिए 16 विभागों के साथ मिलकर कार्ययोजना तैयार की है। किसानों की समृद्धि, उनकी आय दोगुनी करने के लिए जिलास्तर पर बलराम कृषि महोत्सव आयोजित किए जा रहे हैं। इसकी शुरुआत मां अहिल्याबाई होल्कर की धरती इंदौर से की थी।  मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने केला की पैदावर में हुए नुकसान के लिए किसान भाईयों के खातों में सिंगल क्लिक से मुआवजा राशि वितरित की। 

 

कांवड़ियों के लिए सभी जरूरी इंतजाम करने के निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेशवासियों को आज से शुरु हुए पवित्र श्रावण मास की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि श्रावण मास में प्रदेश में जहां से कांवड़ यात्रा निकलने वाली है। सभी कलेक्टरों को निर्देश जारी किए हैं कि कांवड़ियों के लिए सभी जरूरी इंतजाम पहले से कर लिए जाएं। प्रशासन सभी भक्तों के साथ है।

 

केले से बने उत्पादों ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर देश-दुनिया में बनाई पहचान

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि ताप्ती मैया के आशीर्वाद से बुरहानपुर क्षेत्र अपनी उद्यानिकी फसलों के लिए प्रसिद्ध है। यहां के स्वादिष्ट केला, हल्दी और कपास अपने आप में बेहद खास है। यहां सभी धर्मों के बीच मिलकर रहने की संस्कृति खेती में दिखाई देती है। यहां कृषि से लेकर कपड़ा, दवा से लेकर फर्नीचर और पाइप उपकरण से लेकर सब कुछ निर्माण होता है। कपास और कपड़ा उत्पादन के लिए सहूलियत देने के लिए राज्य सरकार ने कपास पर लगने वाले मंडी टैक्स को आधा कर दिया है। इससे प्रदेशभर के कपास उत्पादक किसानों को लाभ मिला, लेकिन इसके लिए मांग सबसे पहले बुरहानपुर जिसे से उठी। राज्य सरकार ऐसे सभी कल्याणकारी फैसलों के लिए किसानों के साथ खड़ी है। बुरहानपुर को केला फसल के प्रसंस्करण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान मिला है। अब केला से न केवल फल, बल्कि रेशे से कपड़ा निर्माण और सजावटी समान तैयार किए जा रहे हैं। इन उत्पादों की ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से बिक्री के जरिए देश-दुनिया में बुरहानपुर को नई पहचान मिल रही है।

 

बुरहानपुर के किसानों को भी मिलेगा धार के पीएम मित्र पार्क का लाभ

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि बुरहानपुर के किसान भाइयों ने खेती में फसलों के विविधिकरण पर विशेष ध्यान दिया है। कपास की फसल हैंडलूम के साथ ही पॉवरलूम से जुड़े कामगारों को सशक्त बनाती है। खंडवा और बुरहानपुर की कपास मंडी में टैक्स 1 रुपए से घटाकर आधा करने के निर्देश दिए थे। बुरहानपुर के किसानों को धार के पीएम मित्र पार्क का भी लाभ मिलेगा। बुरहानपुर अब केवल कच्चे माल ही नहीं, बल्कि प्रोसेसिंग, वैल्यू एडिशन, एक्सपोर्ट का भी बड़ा हब बनने की दिशा में कदम बढ़ा रहा है। जिले में सिंचाई के लिए विभिन्न परियोजनाओं पर कार्य हो रहा है। बुरहानपुर में सिंचाई का रकबा बढ़ा है। हर खेत तक पानी पहुंचाना हमारा संकल्प है।

 

ग्वालियर में टेलीकॉम सेक्टर के मैन्यूफेक्चरिंग जोन के लिए एमओयू

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार महाराष्ट्र के साथ मिलकर ताप्ती मेगा रिचार्ज परियोजना पर काम कर रही है। राज्य सरकार निवेश संवर्धन के लिए भी कार्य कर रही है। ग्वालियर को टेलीकॉम सेक्टर के मैन्यूफेक्चरिंग जोन के रूप में स्थापित करने के लिए आज नई दिल्ली में भारत सरकार और मध्यप्रदेश सरकार के बीच एक एमओयू साइन किया जाएगा। राज्य सरकार युवाओं को रोजगार दिलवाने के लिए, किसानों को उपज का सही मूल्य दिलवाने के लिए संकल्पित है।

पेपर लीक कैसे रोकेंगे! मल्लिकार्जुन खरगे ने क्यों कहा अधूरा बिल लाई सरकार

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill

Mallikarjun Kharge Paper Leak Bill: संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) में 'परीक्षा संशोधन बिल' पर चर्चा के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार पर करारा हमला बोला। खरगे ने सरकार की नीयत और बिल की मंशा पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि यह नया संशोधन विधेयक युवाओं की समस्या को सुलझाने के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश में उबल रहे छात्रों के गुस्से को ठंडा करने के लिए लाया गया है। उन्होंने साफ लहजे में पूछा कि जब इस बिल में यही नहीं बताया गया है कि असल में 'पेपर लीक' कैसे रोका जाएगा, तो फिर इस अधूरे बिल का क्या मतलब?

युवाओं के संघर्ष के आगे झुकी सरकार

राज्यसभा में चर्चा में भाग लेते हुए मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि बीते एक महीने से देश के युवा सड़कों पर धरने पर बैठे थे और अपनी आवाज बुलंद कर रहे थे। यह युवाओं और छात्रों के अनवरत संघर्ष की ही ताकत है कि आखिरकार सरकार को उनके सामने झुकना पड़ा। खरगे ने कहा कि सरकार ने खुद अपनी विफलता छिपाने और अपनी कुर्सी बचाने के लिए इस बिल को जल्दबाजी में पेश किया है। जो कदम सरकार आज उठा रही है, उसे 2024 की शुरुआत में ही क्यों नहीं उठाया गया? ALSO READ: सुप्रीम कोर्ट के दिल्ली सरकार को निर्देश, पैलेट गन से जख्मी छात्रों का करवाए निशुल्क इलाज

केवल आंकड़े बदले हैं, समस्या वहीं की वहीं

विधेयक की कमियों को उजागर करते हुए नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि इस नए संशोधन बिल से जमीनी स्तर पर कुछ नहीं बदलने वाला। इसमें कानून की धाराओं और आंकड़ों में भले ही हेरफेर कर दी गई हो, लेकिन मूलभूत समस्या के समाधान पर यह बिल पूरी तरह मौन है। खरगे ने सवाल उठाया कि बिल में सजा और जुर्माने की बातें तो कह दी गईं, लेकिन 'पेपर लीक' के उस नेक्सस (गिरोह) को कैसे खत्म किया जाएगा और भविष्य में लीक रोकेंगे कैसे, इसका कोई खाका या उल्लेख इस पूरे बिल में है ही नहीं। यह बिल आधा-अधूरा और सिर्फ जनता की आंखों में धूल झोंकने जैसा है। ALSO READ: किसने दिया ऑर्डर?' पोस्टर लेकर संसद पहुंची कांग्रेस, छात्रों पर पैलेट गन मामले में अमित शाह से मांगा जवाब

पीएम और गृहमंत्री की चुप्पी पर सवाल

सरकार के शीर्ष नेतृत्व पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि देश का भविष्य यानी युवा सड़कों पर लाठियां खा रहा था, लेकिन न तो प्रधानमंत्री इस संवेदनशील मुद्दे पर कुछ बोले और न ही गृहमंत्री अमित शाह कहीं नजर आए। खरगे ने पूछा कि इतनी बड़ी-बड़ी धांधलियां और धांधलेबाजों के हौसले बुलंद होने के बावजूद गृहमंत्री आखिर क्यों चुप हैं? जब छात्र अपने हक की लड़ाई लड़ रहे थे, तो सरकार ने उन्हें 'अराजक' करार दे दिया। खरगे ने सवाल किया कि सरकार ने महीनों से प्रदर्शन कर रहे इन मासूम छात्रों से समय रहते बातचीत करने की जहमत तक क्यों नहीं उठाई? ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

'प्रधान' को हटाना पड़ा, पर व्यवस्था कब बदलेगी?

मल्लिकार्जुन खरगे ने तत्कालीन शिक्षा मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान के इस्तीफे पर तंज कसते हुए कहा कि बढ़ते जनाक्रोश और चौतरफा घिरने के बाद आखिरकार सरकार को प्रधान को हटाना ही पड़ा। लेकिन सिर्फ चेहरे बदलने से या दिखावे के लिए ऐसा बिल लाने से काम नहीं चलेगा। जब तक पेपर लीक के सिंडिकेट को खत्म करने का पुख्ता मैकेनिज्म नहीं बनता, तब तक लाखों छात्रों का भविष्य अंधेरे में ही रहेगा।

विपक्ष ने बुलंद की छात्रों की आवाज

खरगे ने राज्यसभा के पटल से देश के युवाओं को भरोसा दिलाया कि विपक्ष उनके साथ चट्टान की तरह खड़ा है। उन्होंने कहा कि विपक्ष सदन से लेकर सड़क तक छात्रों के हक की लड़ाई लड़ता रहेगा और सरकार को युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने की इजाजत बिल्कुल नहीं देगा।

गृहमंत्री से इस्तीफा मांगा

सरकार पर निशाना साधते हुए खरगे ने कहा कि पेपर बाजार में बिकता रहा और पता नहीं चला। क्या सरकार सो रही थी? हमारी खुफिया एजेंसियां क्या कर रही थीं? उन्होंने कहा कि गृहमंत्री अमित शाह विपक्ष के सवालों का जवाब दें। यदि वे सवालों का जवाब नहीं दे रहे हैं तो इस्तीफा दे दें। यदि वे इस्तीफा नहीं देते हैं पीएम मोदी को उन्हें हटा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पेपर लीक का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले 2016, 21, 24 और अब 26 में पेपर लीक हो चुके हैं। कहां है कड़ी से कड़ी सजा? उन्होंने पूछा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और पैलेट गन चलाने का आदेश किसने दिया? इस्तीफे के बाद संसद में धर्मेन्द्र प्रधान के स्वागत को भी उन्होंने सरकार की नाकामी बताया। 

कैसे BGT 19-20 के बाद अजिंक्य रहाणे की टेस्ट कप्तानी खा गए थे रोहित शर्मा

Ajinkya Rahane

अजिंक्य रहाणे ने बतौर कप्तान भारत को ऑस्ट्रेलिया की धरती पर 2019-20 में एतिहासिक 2-1 से सीरीज जीत दिलवाई लेकिन इसके बाद उन्हें कप्तानी से तो क्या धीरे धीरे टीम से अलग कर दिया गया। यह बात सही है कि उनका फॉर्म बॉर्डर गावस्कर टेस्ट सीरीज के बाद लगातार ढलान की ओर गया लेकिन अगर बतौर कप्तान ही उनको टीम की बागडोर थमा दी जाती तो शायद भारतीय टेस्ट टीम को नई ऊंचाइया मिलती।

साल 2020 में एडिलेड टेस्ट में जब भारत 36 रनों पर ऑलआउट हुआ था तो कप्तान विराट कोहली पितृत्व अवकाश के लिए भारत लौट गए थे। इसके बाद सबका यह मानना था कि यह दौरा भारत के लिए बहुत कठिन होने वाला है लेकिन जब दौरा खत्म हुआ तो भारत 2-1 से विजयी रहा था।इसका काफी कुछ श्रेय अजिंक्य रहाणे की कप्तानी को मिला जिन्होंने ऑस्ट्रेलिया की धरती पर युवाओं पर विश्वास दिखाया।

विराट कोहली के कप्तानी के इस्तीफे के बाद अजिंक्य रहाणे की जगह रोहित शर्मा को टेस्ट की कप्तानी दी गई जिसकी सजा भारतीय टेस्ट क्रिकेट आज तक भुगत रहा है। लेकिन समय का फेर कुछ ऐसा रहा कि रणजी ट्रॉफी में रोहित शर्मा को करियर के अंतिम पड़ाव पर अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में खेलना पड़ा।

खराब फॉर्म के बाद अजिंक्य रहाणे ने बल्ले से 2023 में कमाल की वापसी की।अजिंक्य रहाणे ने 18 महीने बाद विश्व टेस्ट चैंपियनशिप 2023 फाइनल में टेस्ट टीम में जगह बनाई थी। उन्होंने पहली पारी में 89 और दूसरी पारी में 46 रन बनाए थे और कुल 165 रन बनाकर उन्होंने एक बार फिर अपनी जगह पक्की की। कैरिबियाई दौरे पर अजिंक्य रहाणे पुनः टेस्ट टीम के उपकप्तान बने। उपकप्तान बनाने के पीछे टीम ने एक बार फिर इशारा किया कि शायद वह फिर कप्तान बन जाए लेकिन ऐसा हो ना सका और वह टेस्ट टीम से किनारे कर दिए गए।

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इससे पहले अजिंक्य रहाणे अफगानिस्तान के खिलाफ घरेलू धरती पर टेस्ट मैच में भारत की अगुवाई कर चुके हैं जिसमें भारत महज 3 दिनों में यह मैच जीत चुका था।

टेस्ट टीम से बाहर होकर भी बतौर कप्तान मुंबई को दिलाई रणजी ट्रॉफी

अजिंक्य रहाणे के लिए बल्ले से रणजी ट्रॉफी का 2024 सत्र बेहद ही खराब रहा था लेकिन वह वानखेड़े स्टेडियम में वह ‘सबसे खुश खिलाड़ी’ थे, जिनकी कप्तानी में टीम 42वीं बार शीर्ष घरेलू टूर्नामेंट की चैम्पियन बनीं। मुंबई ने विदर्भ को 169 रनों से हराकर खिताब अपने नाम किया था।Ajinkya Rahane ने इस दौरान सत्र में महज 214 रन बनाये।


Waaree Energies Q1 Results: सोलर कंपनी को ₹850 करोड़ का मुनाफा, अमेरिका में मिली बड़ी राहत

Waaree Energies Q1 Results: रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी वारी एनर्जीज ने जून तिमाही के मजबूत नतीजे जारी किए हैं। कंपनी का कंसोलिडेटेड शुद्ध मुनाफा 850 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की समान तिमाही में यह 745 करोड़ रुपये था। वहीं, मार्च तिमाही में कंपनी ने 773 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया था। इस तरह मुनाफा सालाना आधार पर 14.09% और तिमाही आधार पर 9.96% बढ़ा।

रेवेन्यू में 79% की बढ़ोतरी

जून तिमाही में वारी एनर्जीज का ऑपरेशन से रेवेन्यू 7,932 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले यह 4,426 करोड़ रुपये था। मार्च तिमाही में भी कंपनी का रेवेन्यू 4,426 करोड़ रुपये रहा था। इस तरह रेवेन्यू में सालाना और तिमाही, दोनों आधार पर करीब 79% की बढ़ोतरी दर्ज हुई।

जून तिमाही में कंपनी का EBITDA बढ़कर 1,440 करोड़ रुपये हो गया। पिछली तिमाही में यह 997 करोड़ रुपये था। यानी तिमाही आधार पर इसमें 44.4% की बढ़ोतरी हुई। हालांकि, EBITDA मार्जिन घटकर 18.2% रह गया। मार्च तिमाही में यह 22.5% था।

अमेरिका से मिला बड़ा फायदा

वारी एनर्जीज ने बताया कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद उसे बड़ा फायदा मिला है। कोर्ट ने एक्सपोर्टर्स पर लगाए गए रेसिप्रोकल ड्यूटी को गैरकानूनी करार दिया था।

इसके बाद अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन (CBP) ने रिफंड क्लेम स्वीकार किए। इसी के आधार पर वारी एनर्जीज ने 349.18 करोड़ रुपये को अन्य ऑपरेटिंग रेवेन्यू के तौर पर दर्ज किया। इसके अलावा, कंपनी ने 25.13 करोड़ रुपये को एसेट्स और इन्वेंट्री की लागत में कमी के रूप में भी दर्ज किया।

वारी एनर्जीज के शेयरों का हाल

वारी एनर्जीज का शेयर बुधवार को 1.59% की बढ़त के साथ 2,738 रुपये पर बंद हुआ। पिछले 6 महीने से स्टॉक लगभग फ्लैट है। वहीं, 1 साल में इसने 14.06% का रिटर्न दिया है। कंपनी का मार्केट कैप 78.71 हजार करोड़ रुपये है।

Vedanta Oil & Gas Q1 Results: डिमर्जर के बाद पहली तिमाही में ₹945 करोड़ का मुनाफा, रेवेन्यू और मार्जिन में गिरावट

Disclaimer: यहां दी गई जानकारी सिर्फ सामान्य जागरूकता के लिए है। किसी भी निवेश, लोन, टैक्स, बीमा या दूसरे वित्तीय फैसले लेने से पहले संबंधित एक्सपर्ट्स से सलाह जरूर लें। मनीकंट्रोल किसी भी फाइनेंशियल प्रोडक्ट या सर्विस की सिफारिश नहीं करता।

Infosys Share Price: तीन दिन में 11% उछला इंफोसिस, शेयर खरीदें, होल्ड करें या बेच दें?

इंफोसिस के शेयरों में 29 जुलाई को लगातार तीसरे दिन जबर्दस्त तेजी रही। शेयर 4.32 फीसदी चढ़कर 1,153.50 रुपये पर बंद हुआ। सिर्फ तीन दिन में यह शेयर करीब 11 फीसदी चढ़ा है। एनालिस्ट्स का कहना है कि आईटी शेयरों को लेकर सेंटिमेंट बेहतर हो रहा है। सवाल है कि इंफोसिस के शेयरों को खरीदना चाहिए, बेचना चाहिए या होल्ड करना चाहिए?

एआई स्टॉक्स में घटी ग्लोबल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी

ग्लोबल इनवेस्टर्स की दिलचस्पी एआई स्टॉक्स में घटी है। दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार के क्रैश में चिप बनाने वाली कंपनियों के शेयरों में गिरावट का बड़ा हाथ है। अमेरिकी चिप कंपनियों में भी कमजोरी दिखी है। इधर, सस्ते वैल्यूएशन पर आईटी शेयरों में इनवेस्टर्स की दिलचस्पी बढ़ी है। 29 जुलाई को भारतीय शेयर बाजारों में सबसे ज्यादा उछाल आईटी इंडेक्स में देखने को मिला।

एआई के इस्तेमाल से आईटी कंपनियों को होगा फायदा

Enrich Money के फाउंडर और सीईओ पोनमुदी आर ने कहा, “इनवेस्टर्स ज्यादा वैल्यूएशन वाली एआई इंफ्रास्ट्रक्चर और सेमीकंडक्टर शेयरों से पैसे निकाल आईटी स्टॉक्स में लगा रहे हैं। आईटी कंपनियों को बगैर बड़े निवेश के एआई से बड़ा फायदा होने की उम्मीद है। भारतीय आईटी कंपनियों को एआई इंफ्रास्ट्रक्चर बिल्डर की जगह एआई इंप्लीमेंटेशन पार्टनर्स के रूप में देखा जा रहा है।”

35-40 फीसदी गिरावट के बाद आईटी स्टॉक्स बना चुके हैं बॉटम

उन्होंने कहा, “ऐसा लगता है कि आईटी स्टॉक्स ने 35-40 फीसदी करेक्शन के बाद मीडियम टर्म बॉटम बना चुके हैं। मौजूदा तेजी की वजह सस्ती कीमतों पर खरीदारी, इंस्टीट्यूनल इनवेस्टमेंट और शॉर्ट कवरिंग है। व्यापक ट्रेंड पॉजिटिलव दिखता है। लेकिन, अगले चरण की तेजी से पहले कंसॉलिडेशन फेज अच्छा और जरूरी है। “

आईटी स्टॉक्स के लिए हाई वैल्यूएशन का रिस्क नहीं के बराबर 

Share.Market by PhonePe में मार्केट एनालिस्ट मयंक जैन ने कहा कि भारतीय आईटी कंपनियों में प्योर-प्ले एआई मॉडल का अभाव रहा है। इससे ये कंपनियां हाई वैल्यूएएशन रिस्क से बची रही हैं। साथ ही शॉर्ट टर्म में कैपिटल राइट-डाउन का रिस्क भी कम रहा है। उन्होंने कहा कि शॉर्ट टर्म में आईटी स्टॉक्स की चाल पश्चिम खासकर अमेरिका में मैक्रोइकोनॉमिक स्थितियों में बेहतरी पर निर्भर करेगा।

इस साल 29 फीसदी फिसला है निफ्टी का स्टॉक

इंफोसिस देश की दूसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी है। पहले नंबर पर टाटा समूह की टीसीएस है। इस साल इंफोसिस का शेयर 29 फीसदी से ज्यादा गिरा है। बीते एक साल में यह करीब 24 फीसदी टूटा है। लेकिन, बीते एक महीने में आईटी शेयरों में अच्छी रिकवरी दिखी है। निफ्टी आईटी इंडेक्स इस दौरान 14.29 फीसदी चढ़ा है।

यूक्रेन के युद्धग्रस्त पोर्ट पर फंसे 13 भारतीय नाविक, ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच जान पर मंडरा रहा खतरा

Russia-Ukraine War: यूक्रेन के चोर्नोमोर्स्क (Chornomorsk) बंदरगाह पर खड़े मालवाहक जहाज MV AMIR1 पर सवार 13 भारतीय नाविकों समेत कुल 15 क्रू मेंबर युद्ध के बीच फंस गए हैं। यूक्रेन में लगातार हो रहे ड्रोन और मिसाइल हमलों के कारण इनकी जान पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है। फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया (FSUI) ने इस स्थिति को ‘बेहद भयावह और जानलेवा’ बताते हुए भारत सरकार समेत संबंधित अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप और सुरक्षित निकासी की मांग की है।

यूनियन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर जारी अपने बयान में कहा कि MV AMIR1 अभी भी चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर खड़ा है। जबकि उसके आसपास लगातार ड्रोन और मिसाइल हमले हो रहे हैं। ऐसे में जहाज पर मौजूद भारतीय नाविक हर पल अपनी जान को लेकर भय के साये में जी रहे हैं।

हर पल सीधे हमले का खतरा

FSUI के मुताबिक, जहाज के आसपास लगातार ड्रोन और मिसाइलों की गतिविधियां देखी जा रही हैं। यूनियन ने कहा कि क्रू के सदस्य इस डर में रह रहे हैं कि किसी भी समय जहाज पर सीधा हमला हो सकता है। यूनियन ने जहाज के मालिकों, जहाज के फ्लैग स्टेट, संबंधित इंटरनेशनल समुद्री अधिकारियों और भारत सरकार से अपील की है कि नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए उन्हें जल्द से जल्द वहां से सुरक्षित निकाला जाए। FSUI ने कहा कि भारतीय नाविकों को युद्ध क्षेत्र में आसान निशाना बनाकर नहीं छोड़ा जा सकता। अब तुरंत कार्रवाई की जानी चाहिए।

MEA पहले ही जता चुका है चिंता

FSUI की यह अपील ऐसे समय आई है जब एक दिन पहले ही विदेश मंत्रालय (MEA) ने ब्लैक सी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर यूक्रेन के सामने गंभीर चिंता जताई थी। सोमवार को भारत ने यूक्रेन के राजदूत डॉ. ओलेक्सांद्र पोलिशचुक को तलब किया था। यह कदम यूक्रेन के ओडेसा (Odesa) बंदरगाह के पास कमर्शियल जहाज MV OMORFI पर हुए हमले के बाद उठाया गया, जिसमें चार भारतीय नाविक भी सवार थे।

कमर्शियल जहाजों पर हमलों की भारत ने की निंदा

विदेश मंत्रालय ने बताया कि MV OMORFI पर हुए हमले में एक भारतीय नागरिक की मौत हो गई थी। भारत ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि व्यापारिक जहाजों पर हमले समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए गंभीर खतरा हैं। भारत ने यूक्रेन से यह भी आग्रह किया कि नागरिक नाविकों को लेकर चलने वाले व्यापारिक जहाजों को किसी भी तरह के सैन्य हमलों का निशाना न बनाया जाए।

ब्लैक सी में बढ़ता खतरा

FSUI का कहना है कि ब्लैक सी क्षेत्र में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता बढ़ रही है। चोर्नोमोर्स्क बंदरगाह पर फंसे MV AMIR1 के चालक दल की सुरक्षित वापसी अब सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। यूनियन ने चेतावनी दी है कि जब तक इन नाविकों को सुरक्षित नहीं निकाला जाता, तब तक वे ड्रोन और मिसाइल हमलों के बीच लगातार जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं।

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FSUI की नई अपील में संघर्ष से प्रभावित ब्लैक सी क्षेत्र में चल रहे मर्चेंट जहाजों पर काम करने वाले भारतीय नाविकों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंता जताई गई है। MV AMIR1 अभी भी चोर्नोमोर्स्क में खड़ा है। यूनियन ने क्रू की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनकी तुरंत वापसी का इंतजाम करने के लिए तुरंत दखल देने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी है कि नाविक बंदरगाह के आसपास बार-बार ड्रोन और मिसाइल हमलों के खतरे में रहते हैं।

Kanwar Yatra 2026: कांवड़ यात्रा को लेकर हाईअलर्ट, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे समेत ये रास्ते रहेंगे बंद, भारतीय रेलवे ने चलाई कई स्पेशल ट्रेनें

Kanwar Yatra 2026: उत्तर भारत के कई राज्यों में प्रशासन ने कांवड़ यात्रा 2026 के दौरान लाखों कांवड़ियों की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। इनमें स्पेशल ट्रेन सेवाएं, अतिरिक्त बसों की व्यवस्था और ट्रैफिक डायवर्जन जैसे उपाय शामिल हैं, ताकि आम यात्रियों को कम से कम परेशानी का सामना करना पड़े।

News18 की रिपोर्ट के मुताबिक, हरिद्वार और ऋषिकेश जाने वाले श्रद्धालुओं की बढ़ती भीड़ को संभालने के लिए उत्तर रेलवे ने स्पेशल ट्रेन सेवाएं शुरू की हैं और कुछ मौजूदा ट्रेनों के रूट का विस्तार भी किया है। इन ट्रेनों में शामिल है-

दिल्ली-सहारनपुर MEMU ट्रेन, जो 30 जुलाई से 14 अगस्त तक हरिद्वार तक चलेगी। यह ट्रेन दिल्ली से शाम 4:15 बजे चलेगी, रात 8:50 बजे सहारनपुर पहुंचेगी। वहां 20 मिनट रुकने के बाद यह रवाना होगी और रुड़की व ज्वालापुर होते हुए रात 10:50 बजे हरिद्वार पहुंचेगी। वापसी की यात्रा में, यह ट्रेन हरिद्वार से रात 2 बजे चलेगी और सुबह 8:45 बजे दिल्ली पहुंचेगी।

इसी तरह, दिल्ली-शामली DEMU ट्रेन को भी 30 जुलाई से 14 अगस्त के बीच शामली, थाना भवन, रामपुर मनिहारन और टपरी होते हुए हरिद्वार तक बढ़ाया गया है।

इसके अलावा, नॉर्दर्न रेलवे तीर्थयात्रा के मौसम में दो स्पेशल मेला ट्रेनें भी चलाएगा। इनमें हरिद्वार-दिल्ली शाहदरा मेला स्पेशल ट्रेन (टपरी के रास्ते) 30 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगी, जबकि योगनगरी ऋषिकेश-दिल्ली शाहदरा मेला स्पेशल ट्रेन (टपरी के रास्ते) 30 जुलाई से 14 अगस्त तक संचालित की जाएगी।

हरियाणा में भी चलेंगी अतिरिक्त बसें 

हरियाणा रोडवेज ने भी कांवड़ यात्रा को देखते हुए तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारियों ने बताया कि अभी बल्लभगढ़ और हरिद्वार के बीच रोजाना दो बसें चल रही हैं और यात्रियों की मांग के आधार पर और बसें चलाई जा सकती हैं। News18 की रिपोर्ट के अनुसार, बस का किराया पहले की तरह 385 रुपये प्रति यात्री रखा गया है।

वहीं, गाजियाबाद पुलिस ने ट्रैफिक मैनेजमेंट का एक विस्तृत प्लान लागू किया है। शहर में 29 जुलाई से 12 अगस्त तक भारी मालवाहक गाड़ियों के आने पर रोक रहेगी। इन भारी वाहनों को ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, NH-9 और दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से डायवर्ट किया जाएगा।

इसके अलावा, गंगा नहर ट्रैक, कांवड़ मार्ग, पाइपलाइन मार्ग, NH-34 और दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पर भी भारी गाड़ियों की आवाजाही पर रोक रहेगी।

गाजियाबाद के इलाकों में वाहनों पर लागू रहेंगी पाबंदियां

5 अगस्त से 12 अगस्त तक गाजियाबाद के कई इलाकों में कारों, टेम्पो, पिकअप और दूसरे हल्के कमर्शियल वाहनों पर भी पाबंदियां लागू रहेंगी। कुछ खास रूटों पर ऑटो-रिक्शा सर्विस बंद रहेगी। जबकि, रोडवेज, प्राइवेट और इलेक्ट्रिक बसों को सीमापुरी बॉर्डर और तुलसी निकेतन के रास्ते शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।

प्रशासन ने एम्बुलेंस और इमरजेंसी गाड़ियों की बिना रुकावट आवाजाही के लिए ग्रीन कॉरिडोर भी बनाए हैं। साथ ही संवेदनशील जगहों पर CCTV कैमरे, ड्रोन और अतिरिक्त ट्रैफिक पुलिसकर्मी तैनात किए जाएंगे।

मुजफ्फरनगर के इन रास्तों पर वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी

वहीं, मुजफ्फरनगर में दिल्ली-हरिद्वार नेशनल हाईवे और गंगा नहर रोड पर भारी वाहनों पर पाबंदियां 30 जुलाई से शुरू हो जाएंगी। 4 अगस्त से 12 अगस्त तक इन रास्तों पर सभी गाड़ियों की आवाजाही पर रोक रहेगी और हाईवे का एक खास हिस्सा सिर्फ कांवड़ यात्रियों के लिए आरक्षित रहेगा।

इसके अलावा, दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे का उत्तर प्रदेश वाला हिस्सा 7 अगस्त से 12 अगस्त तक ट्रैफिक के लिए बंद रहेगा। मेरठ, हरिद्वार और मुजफ्फरनगर जाने वाले यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे वैकल्पिक रास्तों का इस्तेमाल करें, जिनमें ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे, दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और NH-9 शामिल हैं।

मिर्जापुर प्रशानस ने ट्रैफिक डायवर्जन की घोषणा की

मिर्जापुर जिला प्रशासन ने भी 31 जुलाई से 28 अगस्त तक ट्रैफिक डायवर्जन की घोषणा की है। सावन के महीने में दूध, पेट्रोलियम उत्पादों और स्कूल के सामान जैसी जरूरी चीजें ले जाने वाले वाहनों को छोड़कर, अन्य भारी वाहनों की एंट्री पर रोक रहेगी। कांवड़ियों की आवाजाही को आसान बनाने के लिए कई डायवर्जन रूट तय किए गए हैं।

अधिकारियों ने बताया कि यात्रा के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए मुख्य रास्तों और स्नान घाटों पर अस्थायी पुलिस स्टेशन, गोताखोर और अतिरिक्त सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए गए हैं।

अधिकारियों ने जारी की एडवाइजरी

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारियों ने भक्तों और आम यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा करने से पहले ट्रेनों के लेटेस्ट शेड्यूल, बस सेवाओं और ट्रैफिक एडवाइजरी को देख लें, क्योंकि भीड़ की आवाजाही के आधार पर व्यवस्थाओं में बदलाव किया जा सकता है।

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जंतर-मंतर का नया व्याकरण, क्‍या ‘Gen-Z’ की गालियों से हो रहा संस्‍कारों का पतन, सोशल मीडिया में छिड़ी बहस

Gen-Z protest

दिल्‍ली का जंतर-मंतर हमेशा से देश की धड़कन रहा है—यहां कभी इंकलाब के नारे गूंजते हैं, तो कभी व्यवस्था के खिलाफ आक्रोश का सैलाब उमड़ता है। लेकिन हाल ही में, नीट (NEET) परीक्षा पेपर लीक के विरोध में जुटे 'Gen-Z' (नई पीढ़ी) के प्रदर्शन ने विरोध प्रदर्शनों के इतिहास में एक नया और तीखा अध्याय जोड़ दिया है। इस आंदोलन की सबसे बड़ी चर्चा सिर्फ इसके मुद्दों को लेकर नहीं, बल्कि उस भाषा को लेकर है जो प्रदर्शनकारियों के मुंह से निकली। सरकार, प्रधानमंत्री मोदी और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को संबोधित करते हुए जिस खुलेपन और बेबाकी से फूहड़ और भद्दी गालियों का इस्तेमाल किया गया, उसने सोशल मीडिया से लेकर ड्राइंग रूम तक भूचाल ला दिया है।

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यह सिर्फ एक राजनीतिक विरोध नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति और पीढ़ीगत अंतराल (Generation Gap) पर छिड़ी एक अंतहीन बहस बन गया है। देश की साहित्यिक और लेखक बिरादरी इस मुद्दे पर दो स्पष्ट और विपरीत ध्रुवों पर बंट गई है।

साहित्यिक बिरादरी में छिड़ा घमासान: अभिव्यक्ति या पतन?
इस पूरी घटना के बाद वैचारिक गलियारों में एक तीखी खींचतान शुरू हो गई है। एक धड़ा ऐसा है जो इन गालियों को युवा पीढ़ी के घुटनभरे गुस्से और निराशा का स्वाभाविक विस्फोट मान रहा है। इनका तर्क है कि जब सिस्टम युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ करता है, जब उनकी डिग्रियां और सपने पेपर लीक की भेंट चढ़ जाते हैं, तब शालीनता और व्याकरण के दायरे टूट जाते हैं। इस वर्ग का मानना है कि गालियां समाज का हिस्सा हैं और जब सत्ता बहरी हो जाती है, तो भाषा अपनी शालीनता छोड़कर आक्रामक हो जाती है। उनके अनुसार, यह Gen-Z का अपने गुस्से को बिना किसी फिल्टर के बयां करने का तरीका है।

दूसरी तरफ, पारंपरिक साहित्यकारों, विचारकों और वरिष्ठ नागरिकों का एक बड़ा वर्ग इसे संस्कारों का गंभीर हनन और सभ्यता के पतन की शुरुआत मान रहा है। उनका कहना है कि विरोध दर्ज कराने के लोकतांत्रिक और शालीन तरीके सदियों से मौजूद रहे हैं। सार्वजनिक मंचों पर इस स्तर की भद्दी भाषा का प्रयोग न केवल राजनीतिक बहस के स्तर को गिराता है, बल्कि यह दिखाता है कि नई पीढ़ी के भीतर संवाद की संस्कृति खत्म हो रही है।

ओटीटी, सोशल मीडिया और 'मूक स्क्रीन' की देन : इस वैचारिक मंथन में एक और दिलचस्प पहलू पर बात हो रही है—वह है Gen-Z की भाषा का ताना-बाना। आज की पीढ़ी किताबों की दुनिया से दूर, ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की वेब सीरीज, सोशल मीडिया के मीम्स और रील्स की ऐसी दुनिया में जी रही है जहाँ गालियों को 'कूल' और 'रॉ' (Raw) मानकर सामान्यीकृत कर दिया गया है। फिल्मों और सीरीज में एंटी-हीरो के मुंह से निकलने वाली गालियां अब युवाओं के दैनिक बोलचाल का हिस्सा बन चुकी हैं।

जब यही पीढ़ी अपने वास्तविक जीवन में किसी बड़े संकट या अन्याय का सामना करती है, तो उनके पास विरोध की अपनी गढ़ी हुई कोई शास्त्रीय शब्दावली नहीं होती। वे अपनी उसी सिनेमैटिक और सोशल मीडिया वाली दुनिया की भाषा में प्रतिक्रिया देते हैं, जहां आक्रोश का मतलब ही तीखा और अमर्यादित होना है।

क्या यह लोकतंत्र की नई भाषा है?
सवाल यह है कि क्या जंतर-मंतर पर सुनाई दी यह भाषा लोकतंत्र के लिए खतरनाक है या यह एक चेतावनी है? एक तरफ, भाषा की पवित्रता और सार्वजनिक जीवन की गरिमा का सवाल अपनी जगह बिल्कुल सही है। लोकतंत्र में संवाद की एक मर्यादा होती है, और जब वह मर्यादा तार-तार होती है, तो समाज की मूल संरचना खतरे में पड़ जाती है। दूसरी तरफ, यह भी सच है कि यह गुस्सा रातों-रात पैदा नहीं हुआ। युवाओं के भीतर सिस्टम के प्रति जो अविश्वास और लाचारी का भाव है, उसने इस अमर्यादित भाषा को जन्म दिया है।

अंत में, जंतर-मंतर की यह घटना सिर्फ नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं है। यह इस बात का आईना है कि हमारी आने वाली पीढ़ी व्यवस्था से कितनी त्रस्त है और उनके गुस्से को व्यक्त करने के साधन कितने बदल चुके हैं। अब यह बहस सिर्फ इस बात की नहीं है कि गालियां दी जानी चाहिए या नहीं, बल्कि इस बात की है कि क्या हम उस समाज का निर्माण कर रहे हैं जहाँ युवाओं का गुस्सा केवल गालियों के शोर में ही दबकर रह जाए?