काशी विश्वनाथ धाम में VIP दर्शन के नाम पर ठगी, पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए वापस दिलाए पैसे

varansi : cheating on the name of vip darshan

सावन का महीना भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन और महत्वपूर्ण माना जाता है। विशेषकर सावन के सोमवार पर श्री काशी विश्वनाथ धाम में देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन के लिए पहुंचते हैं। आस्था, श्रद्धा और भक्ति के इस महासंगम के बीच कुछ असामाजिक तत्व श्रद्धालुओं की भावनाओं का फायदा उठाकर ठगी करने से भी नहीं चूक रहे हैं।

 

ऐसा ही एक मामला सोमवार को श्री काशी विश्वनाथ धाम में सामने आया, जहां मैसूर से दर्शन करने आई एक महिला श्रद्धालु से आसानी के साथ वीआईपी दर्शन कराने का झांसा देकर एक ठग ने 4 हजार रुपये की ठगी कर ली। महिला ने आराम से जल्दी दर्शन मिलने की उम्मीद में रकम दे दी, लेकिन कुछ ही देर में उसे एहसास हुआ कि उसे दर्शन के नाम पर ठगा गया है।

 

भगवान के नाम पर ठगी का यह दृश्य जैसे ही ड्यूटी पर मौजूद एक पुलिसकर्मी की नजर में पहुंचा तो हड़कंप मच गया। उसने तत्काल प्रभाव से थाना सिगरा को सूचना दी। जानकारी मिलते ही इंस्पेक्टर शिवाकांत मिश्रा अपनी टीम के साथ श्री काशी विश्वनाथ धाम पहुंचे और पीड़ित महिला से पूरी जानकारी ली। इसके बाद आसपास के स्थानीय व्यापारियों और लोगों से पूछताछ की गई।

 

जांच के दौरान लोगों ने बताया कि ठगी करने वाले व्यक्ति का नाम बसंत पांडे है, जो चेतगंज क्षेत्र का निवासी है। आरोप है कि वह मैसूर से आई महिला सहित अन्य चार श्रद्धालुओं को भी शीघ्र दर्शन कराने का लालच देकर पैसे ऐंठने का प्रयास कर रहा था।

 

पुलिस टीम के पहुंचने की भनक लगते ही बसंत पांडे गेट नंबर-4 की ओर से भागने लगा, लेकिन पुलिस ने पीछा कर उसे पकड़ लिया और हिरासत में ले लिया। पुलिस की तत्परता से पीड़ित महिला के 4 हजार रुपये तत्काल ऑनलाइन वापस कराए गए, जिससे श्रद्धालु ने राहत की सांस ली।

 

आस्था से खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं 

सावन के पहले सोमवार पर, जब श्री काशी विश्वनाथ धाम में आस्था का अभूतपूर्व जनसैलाब उमड़ा हुआ था, तब पुलिस की इस संवेदनशील और तुरंत कार्रवाई ने यह संदेश भी दिया कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और उनकी आस्था के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

 

पुलिस टीम की इस सराहनीय कार्यशैली की हर तरफ प्रशंसा हो रही है। महिला श्रद्धालु को ऑनलाइन पैसे वापस दिलवाने का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग वाराणसी पुलिस की मुक्तकंठ से सराहना कर रहे हैं। वहीं कर्नाटक (मैसूर) से आई महिला उत्तर प्रदेश राज्य की उज्ज्वल छवि को लेकर अपने प्रदेश वापस लौटेगी।

 

पुलिस-प्रशासन और मंदिर कमेटी ने श्रृद्धालुओं से अपील

पुलिस-प्रशासन और मंदिर कमेटी ने श्रृद्धालुओं से अपील की है कि श्री काशी विश्वनाथ धाम आने वाला कोई भी भक्त किसी भी अनजान व्यक्ति, दलाल या तथाकथित वीआईपी दर्शन कराने का दावा करने वाले लोगों के झांसे में न आएं। किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तुरंत ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों या प्रशासन को दें, ताकि आस्था के इस पावन पर्व की गरिमा बनी रहे।

Friendship Day Special: प्यार दोस्ती है…., दोस्तों के साथ देखें ये 10 पुरानी यादें ताजा करने वाली फिल्में

Friendship Day Special: फ्रेंडशिप डे के मौके पर, जब हमारे करीबी दोस्त हमसे सैकड़ों मील दूर हों, तो हमें दोस्ती पर बनी कुछ खूबसूरत, गहरी और जिंदगी बदलने वाली फिल्में देखनी चाहिए। जैसे-जैसे आप बड़े होते हैं, दोस्ती बनाए रखने में समय और मेहनत लगती है, लेकिन आपको यह भी एहसास होता है कि अपनी जिंदगी के खास लोगों के संपर्क में रहना कितना जरूरी है। हाल की रिसर्च से पता चलता है कि करीबी दोस्त होने से तनाव कम होता है, आप सतर्क रहते हैं और ज्यादा समय तक जी रहे होते हैं।

शोले

शोले 1975 की एक शानदार बॉलीवुड फ़िल्म है। इस फ़िल्म की कामयाबी के पीछे कई वजहें थीं, जिनमें सबसे अहम थी इसकी बेहतरीन कास्ट, शैतान वीरू के रोल में धर्मेंद्र, हाजिर-जवाब जय के रोल में अमिताभ बच्चन, बदला लेने वाले ठाकुर बलदेव सिंह के रोल में संजीव कुमार, बातूनी बसंती के रोल में हेमा मालिनी, शांत विधवा राधा के रोल में जया भादुरी और कुख्यात गब्बर सिंह के रोल में अमजद खान।

मुन्ना भाई MBBS

‘मुन्ना भाई MBBS’ एक गैंगस्टर की कॉमेडी फ़िल्म है जो डॉक्टर बनना चाहता है। इस फ़िल्म में कॉमेडी और गंभीर, दोनों तरह के हिस्से हैं। यह एक मज़ेदार फ़िल्म है जिसमें मुन्ना भाई और सर्किट जैसे जाने-माने और पसंद किए जाने वाले किरदार हैं। ‘मुन्ना भाई MBBS’ असल में अपनी तरह की एक अलग फिल्म है। इसकी एक्टिंग और ह्यूमर इसे देखने लायक बनाते हैं, क्योंकि ज़्यादातर ड्रामैटिक सीन थोड़े ज़्यादा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाए गए हैं। जहाँ फ़िल्म के मज़ेदार हिस्सों के डायलॉग स्मार्ट और एंटरटेनिंग हैं, वहीं दुखद दृश्यों में डायलॉग बहुत खराब हैं।

सोनू के टिटू की स्वीटी

लव रंजन की फिल्मों को लैंगिक भेदभाव वाले कथानकों के लिए जाना जाता है, और सोनू के टिटू की स्वीटी भी इसका अपवाद नहीं है, बस फर्क इतना है कि इसमें दोस्ती बनाम रोमांस को मुख्य विषय बनाया गया है। सोनू के टिटू की स्वीटी दो पक्के दोस्तों, टिटू (सनी सिंह) और सोनू (कार्तिक आर्यन) की कहानी है, जो लगातार टिटू को गलत महिलाओं के चक्कर में पड़ने से बचाते रहते हैं। स्वीटी (नुसरत भरूचा) टिटू की जिंदगी में आती है और उसका प्यार टिटू की दुनिया को हिला देता है। हालांकि, सोनू को स्वीटी के साथ कुछ गड़बड़ होने का शक होता है और वह टिटू को दोबारा गलत हाथों में पड़ने से बचाने के लिए हर संभव कोशिश करता है।

वीरे दी वेडिंग

सिर्फ़ महिलाओं पर आधारित फ़िल्में बनाने के पारंपरिक तरीके से हटकर, ‘वीरे दी वेडिंग’ ने इंडस्ट्री में हलचल मचा दी। ‘वीरे दी वेडिंग’ पारंपरिक महिला-केंद्रित सिनेमा से हटकर एक ‘असंस्कारी’ फ़िल्म है। इस फ़िल्म में अभिनेत्रियों के बीच गहरे और अटूट रिश्ते को दिखाया गया है। ‘वीरे दी वेडिंग’ भले ही हल्की-फुल्की फ़िल्म है, लेकिन इसकी कहानी के अलग-अलग पहलू इतनी खूबसूरती से बुने गए हैं कि वे बनावटी लगते हैं।

ये जवानी है दीवानी

यह हमारी नीरस जिंदगी में रंग भर देती है। सिनेमैटोग्राफी से लेकर संगीत, लेखन और कलाकारों तक, यह फिल्म दोस्ती का एक प्यारा उत्सव है। यह बॉलीवुड की अब तक की सबसे बेहतरीन दोस्ती पर आधारित फिल्मों में से एक है। यह वीडियो प्यार, विश्वास, क्षमा और मस्ती जैसे दोस्ती के आदर्शों को दर्शाता है।

दिल चाहता है

‘दिल चाहता है’ ताज़ी हवा में गहरी सांस लेने जैसा अनुभव देती है। यह दिखाती है कि किसी बिज़नेस में युवाओं को शामिल करना हमेशा एक अच्छी बात होती है। ‘दिल चाहता है’ बेहतरीन फ़िल्मों में से एक है। यह उन फ़िल्मों में से है जिन्हें पसंद न कर पाना मुश्किल है, खासकर इसलिए क्योंकि यह दिखाती है कि भारतीय सिनेमा के माध्यम का इस्तेमाल कैसे किया जाना चाहिए। फ़िल्म में बस कहीं भी गाना डाल देने के बजाय, निर्देशकों ने हर गाने को ऐसा बनाया है जो ज़रूरी लगे, देखने में दिलचस्प हो और कभी भी उबाऊ न लगे।

फुकरे

यह फ़िल्म आपको आपके कॉलेज के दिनों की याद दिला देगी। यह कहानी है चार ऐसे दोस्तों की जो जल्दी अमीर बनना चाहते हैं और अपने कॉलेज के दिनों का मज़ा लेना चाहते हैं। कॉलेज की लड़कियाँ और प्रॉम नाइट से लेकर इन लड़कों की हरकतों से सब कुछ गड़बड़ हो जाने तक, इस फ़िल्म में सब कुछ है।

छिछोरे

‘छिछोरे’ भावनाओं का एक उतार-चढ़ाव भरा सफ़र है, जो कॉलेज के दिनों की दोस्ती, प्यार, रैगिंग, बहस, मुक़ाबलों और अनगिनत यादों को सम्मान देता है। यह एक दिलचस्प कहानी के ज़रिए ज़रूरी संदेश देने वाली एक प्रासंगिक फ़िल्म है। ‘दंगल’ फ़िल्म के लिए मशहूर नितेश तिवारी द्वारा निर्देशित ‘छिछोरे’ एक ऐसी फ़िल्म है जिसमें बहुत कुछ है और यह बहुत मज़ेदार भी है; यह लंबे समय तक आपके ज़हन में बसी रहती है।

3 इडियट्स

राजकुमार हिरानी ने हमेशा किसी खास विषय पर बात की है और/या समाज की कमज़ोर मान्यताओं और नैतिकताओं पर खुलकर कटाक्ष किया है। यह वीडियो उस आम सोच पर आधारित है कि अगर आप साइंस के स्टूडेंट के तौर पर सफल होना चाहते हैं, तो आपको मेडिकल साइंस या इंजीनियरिंग में ही पढ़ाई करनी चाहिए। रैंचो, राजू और फरहान का सफ़र दर्दनाक और मज़ेदार दोनों है, और हमारा मन इससे कभी नहीं भरता। उनकी दोस्ती का सादगी भरा अंदाज़ हमारे दिलों को छू लेता है और हमें अपने कॉलेज के दोस्तों और उस एक अनोखे दोस्त की याद दिलाता है, जो हमेशा लीक से हटकर सोचने की हिम्मत रखता था।

जिंदगी ना मिलेगी दोबारा

कल्की से शादी से पहले अभय देओल की बैचलर पार्टी के हिस्से के रूप में, तीन दोस्तों (ऋतिक, अभय देओल और फरहान अख्तर) का एक समूह स्पेन की रोड ट्रिप पर निकलता है। ऋतिक और फरहान दोनों ही निजी समस्याओं से जूझ रहे हैं। एक शानदार लेखक की बदौलत इस साधारण सी कहानी को बेहतरीन ढंग से फिल्माया गया है। कलाकारों का अभिनय लाजवाब है। फिल्म में दीप्ति नवल और नसीरुद्दीन शाह भी हैं।

शादी और प्यार फिल्म के प्रमुख विषयों में से हैं। इसके बावजूद, बेहतरीन कॉमेडी आपको हर पल मनोरंजन देती है। हमें लगता है कि यह शानदार लेखन का प्रमाण है। दोस्ती के इस दिन, ला टोमाटीना उत्सव, स्पेन के समुद्र तट और कैटरीना कैफ, सभी देखने लायक हैं।

कुछ कुछ होता है

शाहरुख खान, काजोल और रानी मुखर्जी की ये फिल्म आज भी लोगों की पसंदीदा बनी हुई है। फिल्में फ्रेंडशिप डे सेलिब्रेशन काफी खूबसूरती से दिखाया गया है। वहीं फिल्म का डायलॉग प्यार दोस्ती है…आज भी लोगों की जुबान पर रहता है।

Voda Idea को मिला ₹26.8 करोड़ का नोटिस, अब 3 अगस्त को शेयर फोकस में

Voda Idea Share Price: टेलीकॉम विभाग ने वोडाफोन आइडिया को ₹26.83 करोड़ का लिक्विडेटेड डैमेज यानी हर्जाना भरने का नोटिस भेजा है। कंपनी ने इसके बारे में शनिवार 1 अगस्त को एक्सचेंज फाइलिंग में बताया। ऐसे में अब इसका असर सोमवार 3 अगस्त को स्टॉक मार्केट खुलने पर इसके शेयरों पर दिख सकता है। अभी की बात करें तो एक कारोबारी दिन पहले 31 जुलाई को इसके शेयर पॉजिटिव मार्केट सेंटिमेंट में बीएसई पर 1.09% की बढ़त के साथ ₹13.01 के भाव पर बंद हुए। शुक्रवार को घरेलू इक्विटी बेंचमार्क इंडेक्सेज की बात करें तो सेंसेक्स (Sensex) 166.49 प्वाइंट्स यानी 0.21% की बढ़त के साथ 78,094.64 और निफ्टी 0.27% यानी 66.45 प्वाइंट्स के उछाल के साथ 24,383.60 पर बंद हुआ था।

Voda Idea को क्यों मिला है नोटिस

टेलीकॉम डिपार्टमेंट ने वोडा आइडिया को ₹26.83 करोड़ का हर्जाना भरने का नोटिस भेजा है। टेलीकॉम कंपनी को यह नोटिस साल 2022 की नीलामी में मिले स्पेक्ट्रम के लिए तय मिनिमम रोलआउट ऑब्लिगेशन्स को पूरा नहीं करने के आरोप में मिला है। कंपनी का कहना है कि वह 31 जुलाई को मिले इस नोटिस को अभी रिव्यू कर रही है जिसके बाद आगे क्या करना है, इस पर विचार किया जा रहा है। हालांकि कंपनी का यह कहना है कि इस नोटिस की उसकी सेहत और कारोबार पर असर नहीं होगा। कंपनी को यह नोटिस इस बात के लिए मिला है कि स्पेक्ट्रम मिलने के बाद नेटवर्क के रोलआउट के लिए जो न्यूनतम शर्तें हैं, टेलीकॉम कंपनी ने उसका पालन नहीं किया।

एक साल में कैसी रही शेयरों की चाल

वोडा आइडिया के शेयरों ने एक साल के निचले स्तर से शानदार रिकवरी की है और निवेशकों का पैसा फटाफट ढाई गुना हो गया। पिछले साल 14 अगस्त 2025 को बीएसई पर यह ₹6.12 के भाव पर था जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड निचला स्तर है। इस निचले स्तर से 10 महीने में यह 150.82% चढ़कर 15 जून 2026 को ₹15.35 पर पहुंच गया जोकि इसके शेयरों के लिए एक साल का रिकॉर्ड हाई लेवल है। इस हाई लेवल से शेयर फिलहाल 15% से अधिक नीचे आ चुके हैं लेकिन अब भी यह एफपीओ प्राइस से 18% से अधिक ऊपर हैं। इसके ₹18 हजार करोड़ के एफपीओ के तहत निवेशकों को ₹11 के भाव पर शेयर जारी हुए थे।

FPI Buying in India: विदेशी निवेशकों ने ₹20199 करोड़ डाले भारतीय शेयरों में, 66% तो आया खास रूट से, वजह भी स्पेशल

Zepto IPO: टल गई Swiggy-Eternal से नए मैदान में टक्कर! जेप्टो जुटी इस काम में

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

कनाडा में प्रदर्शन कर रही पंजाबी छात्रा का दर्द:रोकर बोली- जमीन बेच पढ़ने भेजा, यहां वर्क परमिट नहीं दे रहे, घर में आटा भी नहीं आ रहा

कनाडा के पोर्टाज कॉलेज में पढ़ रहे पंजाबी छात्रों का आंदोलन में दर्द छलका है। पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के रिजेक्शन मिलने से स्टूडेंट्स 3 हफ्ते से सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों ने आंकड़े शेयर करते हुए बताया कि हालिया पोल्स के मुताबिक, 485 रिजेक्शन के मुकाबले 50 से भी कम अप्रूवल मिले हैं। जबकि, पोटाज कॉलेज ने एडमिशन के वक्त वादा किया था कि उन्हें PGWP मिलेगा और उनकी डिग्री वैध होगी। अब जब उनके लाखों रुपए कोर्स पर बर्बाद हो गए तो घर जाने के लिए कह रहे हैं। पंजाब की एक छात्रा ने बताया- हालात ये हैं कि रेंट मांगकर भरना पड़ रहा है। 3 दिन भूखी रही। हफ्तों आटा नहीं आ पा रहा। मुझे भेजने के लिए ससुरालवालों ने जमीन तक बेच दी। 22 से 25 लाख रुपए बर्बाद हो गए। अब ससुराल वालों को क्या बताऊं, कैसे घर जाऊं? जो लोग सोचते हैं कि कनाडा में मजे हैं, वे देखे लें, ये यहां की कड़वी सच्चाई है। एक अन्य स्टूडेंट ने बताया कि कनाडा में वर्क परमिट के चक्कर में वह दादा की मौत पर नहीं जा पाई। अब पैसा बर्बाद हो चुका है। घरवालों को क्या बताएं? यह कहते ही वह रोने लगी। पिता की मौत पर 1 साल पहले घर गई छात्रा को कनाडा इमिग्रेशन विभाग ने यह कहते हुए वर्क परमिट देने से इनकार कर दिया कि उसकी एंट्री 2024 में नहीं हुई है। धरना दे रहे स्टूडेंट्स की ऐसी ही दर्द भरी कहानियां हैं। कुछ पर कर्ज का बोझ है तो कई पेरेंट्स को न बता पाने से डिप्रेशन में हैं। आइए जानते हैं, उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी… सड़कों पर धरना दे रहे स्टूडेंट्स ने परेशानियां बताईं… ससुरालवालों ने जमीन बेचकर भेजा, यहां भूखी रह रही हूं अपना नाम न बताते हुए एक मैरिड छात्रा ने बताया कि वह 2 साल से ज्यादा वक्त से कनाडा के पोर्टाज कॉलेज में पढ़ रही है। ससुराल वालों ने अपनी जमीन बेचकर उसे यहां भेजा था। अब इमिग्रेशन विभाग ने कहा कि उनकी डिग्री मान्य नहीं है। छात्रा ने बताया- हालात ये हैं कि किराए तक के पैसे नहीं हैं। गैस स्टेशन पर काम तक नहीं मिल रहा। मैं 3 दिन भूखी रही। 7-7 दिन घर पर आटा नहीं आ रहा है। अब मैं अपने ससुरालवालों से क्या कहूं और उनका 22 लाख रुपए का कर्ज कैसे लौटाऊं? जब यहां कोई काम ही नहीं मिल रहा है। 32 हजार डॉलर फीस भरी गई। हम 24 घंटे नियमों और कायदों के दायरे में रहे और कभी कोई गलत काम नहीं किया। मुझे पता है कि उन्होंने फीस के पैसे कैसे जुटाए थे। कॉलेज के खिलाफ वकील तक नहीं कर सकते पंजाबी स्टूडेंट जशन सिंह ने बताया कि किसी को भी इस बात की उम्मीद नहीं थी। वह अपना 2 साल का डिप्लोमा पूरा कर वर्क परमिट के लिए आए थे, लेकिन हाल ही में नियम बदलने के कारण बड़ी संख्या में रिजेक्शन मिलने लगे हैं। उनका सवाल यह है कि अगर मंजूरी या रिजेक्शन मिल रहा है, तो वह किस आधार पर दिया जा रहा है? जशन ने कहा- हम मुख्य कैंपस भी गए थे और इस मुद्दे पर बात की थी, लेकिन वहां से कोई समाधान नहीं मिला। कॉलेज प्रशासन का साफ कहना था कि वे न तो वकील कर सकते हैं और न ही किसी तरह की मदद कर सकते हैं। दादा की मौत पर पंजाब नहीं जा पाई, यहां भी सब बर्बाद हो गया पंजाबी छात्रा जसमीत कौर ने रोते हुए बताया कि वह यहां 3 साल पहले एल्गोमा यूनिवर्सिटी आई थी, लेकिन फीस ज्यादा होने के कारण उसने अपनी पढ़ाई बदल ली। उसने यहां सब पता किया था कि कोर्स के बाद PGWP मिलेगा और इसका भविष्य में अच्छा स्कोप है। 2 साल पढ़ाई करने के बाद अब सब कुछ बेकार लग रहा है। जसमीत कौर ने कहा- मेरे लगभग 32 हजार डॉलर डूब गए हैं। इसी दौरान मेरे दादा की मौत हो गई। अगर मुझे पहले से पता होता कि ऐसा सब होने वाला है, तो मैं सब कुछ छोड़कर तुरंत वापस चली जाती, ताकि कम से कम आखिरी बार अपने दादा को देख पाती। अब न तो वे वापस आ सकते हैं और न ही पैसे वापस मिल सकते हैं। कॉलेज की भेजी हुई ईमेल भी, फिर भी नहीं मान रहे एक अन्य स्टूडेंट ने बताया कि उनके कॉलेज की तरफ से उन्हें साफ कहा गया था कि वे PGWP के लिए एलिजिबल हैं। इसके लिए उनके पास कॉलेज की भेजी हुई ईमेल भी है। कॉलेज ने उन्हें एक पत्र भी दिया था, ताकि वे उसका उपयोग कर वर्क परमिट ले सकें, लेकिन अब इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) उस पत्र को भी खारिज कर रही है और कह रही है कि यह मान्य कारण नहीं है। छात्र मई 2023 में पढ़ाई के लिए आए थे और जब नवंबर 2024 में नया नियम लागू हुआ, तब तक उनकी पढ़ाई लगभग पूरी हो चुकी थी। आशीष बोले- सांसद और विधायक प्रदर्शन में साथ दें स्टूडेंट आशीष बूरा ने कहा कि सभी छात्र आज अपनी मांग उठाने के लिए एकत्र हुए हैं। पहले वे सिटी हॉल गए थे, लेकिन वहां ज्यादा देर रुकने की अनुमति नहीं मिली, इसलिए फिर उन्होंने इस जगह पर इकट्ठा होने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि अब उनके कई साथी भाई-बहन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। वहां काफी संख्या में छात्र जमा हैं और उन्होंने लोगों से समर्थन मांगने के लिए हॉर्न बजाने की अपील करने वाले पोस्टर लगाए हैं, जिस पर सड़कों से गुजरने वाले लोग लगातार हॉर्न बजाकर अपना पूरा समर्थन दिखा रहे हैं। आशीष ने स्थानीय सांसदों (MP) और विधायकों (MLA) से भी इस प्रदर्शन में साथ देने की अपील की है, क्योंकि यह पूरी बिरादरी और समाज का मामला है। उनकी सरकार से बस यही मांग है कि सभी छात्रों के साथ पूरा इंसाफ और न्याय किया जाए। मानसिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे पंजाबी स्टूडेंट्स छात्रों ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि वे मानसिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन और आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। उनके हेल्थ कार्ड और सिन (SIN) नंबर एक्सपायर हो चुके हैं, जिससे वे काम भी नहीं कर पा रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि अगर छात्र कोई नियम तोड़ते हैं तो उन पर पेनल्टी लगती है या फीस दोबारा ली जाती है। अब जब IRCC और कॉलेज अपनी कही बातों से मुकर रहे हैं और अचानक नियम बदलकर गलतियां कर रहे हैं, तो वे इसका हर्जाना छात्रों को क्यों नहीं देते? पूर्व सांसद छात्रों के समर्थन में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैलगरी के पूर्व सांसद और वकील देवेंद्र शौरी ने छात्रों के समर्थन में कहा कि कनाडा सरकार को अपने नियमों में मानवीय दृष्टिकोण रखना चाहिए। छात्रों को एक रास्ता दिखाया गया था, उन्होंने पैसे और समय लगाया और जब वे मंजिल के पास पहुंचे तो उनसे सीढ़ी खींच ली गई, जो पूरी तरह से गलत है। PGWP किसे मिलता है? PGWP एक ऐसा ओपन वर्क परमिट है जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को कनाडा में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने की अनुमति देता है। इसके लिए जरूर है कि छात्र ने किसी डेजिग्नेटेड लर्निंग इंस्टीट्यूशन (DLI) से पढ़ाई पूरी की हो जो PGWP देने के लिए पात्र हो। इसके अलावा, प्रोग्राम की अवधि कम से कम 8 महीने की होनी चाहिए। 8 महीने से छोटे कोर्स के लिए PGWP नहीं मिलता। पढ़ाई के दौरान छात्र का लगातार फुल-टाइम स्टूडेंट रहना अनिवार्य है। कोर्स पूरा होने के 180 दिनों के भीतर आवेदन करना होता है। आवेदन के समय छात्र के पास वैध स्टडी परमिट या लीगल टेंपररी स्टेटस होना चाहिए। वे नॉन-क्रेडिट प्रोग्राम जिन पर PGWP नहीं मिल रहा क्रेडिट प्रोग्राम वे कोर्स हैं जो किसी आधिकारिक डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट की ओर ले जाते हैं। इनके अंक यूनिवर्सिटी या कॉलेज की मुख्य शैक्षणिक डिग्री में जुड़ते हैं। वहीं, नॉन-क्रेडिट प्रोग्राम ऐसे कोर्स होते हैं जो आमतौर पर व्यक्तिगत विकास, भाषा सीखने, स्किल ट्रेनिंग, या कम अवधि के वोकेशनल सर्टिफिकेट के लिए होते हैं। इनके अंक मुख्य डिग्री में नहीं जुड़ते। कनाडा के अप्रवासन नियमों के तहत नॉन-क्रेडिट प्रोग्राम PGWP के लिए पात्र नहीं होते। यदि किसी छात्र ने ऐसा कोर्स किया है जिसमें एकेडमिक क्रेडिट नहीं मिलते, तो उसे पढ़ाई के बाद वर्क परमिट नहीं दिया जाता। IRCC ने ये नियम बदले ॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰॰ यह खबर भी पढ़ें… कनाडा में आंधी-बारिश में सड़कों पर 500 पंजाबी छात्र, बोले- लाखों का कोर्स किया, अब वर्क परमिट से इनकार कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदन खारिज होने के बाद करीब 1000 भारतीय छात्र संकट में हैं। ये पिछले 3 हफ्ते से अल्बर्टा के कैलगरी में प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कुछ ने 29 जुलाई से भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इनमें 500 छात्र पंजाबी हैं। जो बारिश, तेज धूप और खराब मौसम के बावजूद छात्र अल्बर्टा के कैलगरी में सड़कों पर डटे हुए हैं। पढ़ें पूरी खबर…

छात्रों को दया नहीं, पीएम मोदी की माफी चाहिए… पेपर लीक मुद्दे पर राहुल गांधी का PM पर तीखा हमला

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म

Rahul Gandhi attacks PM Modi: देश में पेपर लीक और परीक्षाओं में धांधली के मुद्दों को लेकर विपक्ष के नेता और कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोला है। राहुल गांधी ने शनिवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' (पूर्व में ट्विटर) पर एक भावुक और तीखी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि देश के लाखों मेहनती छात्रों को प्रधानमंत्री की किसी 'क्षमा' या दया की जरूरत नहीं है, बल्कि प्रधानमंत्री को खुद देश के छात्रों और उनके परिवारों से माफी मांगनी चाहिए।

 

विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने हाल के समय में देश की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हुए पेपर लीक प्रकरणों को लेकर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लाखों युवाओं का भविष्य दांव पर लगा है और कई परिवार इस अव्यवस्था के कारण पूरी तरह बर्बाद हो चुके हैं।

क्या कहा राहुल गांधी ने?

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में कहा कि अपने बच्चों को खोने वाले माता-पिता के आंसू, उनका बिलखना – इससे बड़ा कोई दुःख नहीं होता। ये एक ग़म उनके साथ हमेशा जिंदा रहेगा और साथ ही रह जाते हैं इस टूटी और भ्रष्ट शिक्षा व्यवस्था के बारे में कई सवाल। पेपर लीक, रद्द परीक्षाएं। सालों की तैयारी एक पल में बर्बाद – हमारे छात्रों को उस सिस्टम में ईमानदारी से मेहनत करने के लिए कहा जाता है जो खुद बेईमान है। और उसके बाद भी प्रधानमंत्री की ये हिम्मत है कि वो छात्रों को माफ़ करने की बात करते हैं। ALSO READ: 'Gen Z को डराकर चुप नहीं करा सकते': FIR पर राहुल गांधी का केंद्र सरकार पर हमला, दिल्ली पुलिस के एक्शन पर उठाए सवाल

 

क्या वो एक भी शोकाकुल परिवार से मिले जिन्होंने अपने बच्चे को खोया है या उन लोगों से जिनकी जमा पूंजी, ज़िंदगी, वक्त और सपने सब पेपर लीक से छीन लिए गए? जवाब है नहीं! भारत के छात्रों को प्रधानमंत्री की क्षमा की ज़रूरत नहीं – मोदी जी को उनसे माफ़ी मांगनी चाहिए। ALSO READ: अमित शाह को जाना होगा, छात्रों पर चलवाईं गोलियां, गृह मंत्री को हटाए सरकार, प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले राहुल गांधी

पीड़ित परिवारों के प्रति गहरी संवेदना

राहुल गांधी ने अपनी पोस्ट में उन लाचार माता-पिता के प्रति अपनी गहरी संवेदनाएं व्यक्त कीं, जिन्होंने पेपर लीक और परीक्षा रद्द होने से उपजे मानसिक तनाव के कारण अपने बच्चों को खो दिया है। राहुल ने कहा कि यह सिर्फ एक प्रशासनिक नाकामी नहीं है, बल्कि लाखों युवाओं के सपनों और उनके संघर्ष के साथ खिलवाड़ है। इसमे कोई संदेह नहीं कि देश में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक के मामलों ने शिक्षा व्यवस्था और परीक्षा कराने वाली एजेंसियों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बदल जाएगी संस्कारधानी की सूरत, सीएम डॉ. मोहन यादव ने जबलपुर के लिए खोला सौगातों का पिटारा

भोपाल। मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने शनिवार को जबलपुर के लिए सौगातों का पिटारा खोल दिया। उन्होंने यहां 362.31 करोड़ रुपये की लागत से तैयार 'अमृत 1.0' सीवेज परियोजना का शुभारंभ किया, कठौंदा, ललपुर और तेवर में बने तीन बड़े सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का लोकार्पण किया। उन्होंने सिविल लाइन में आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडर्न लॉन्ड्री की सौगात दी, गुरंदी में 2.5 करोड़ रुपये की लागत से बने नए मछली बाजार का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने पीएम स्वनिधि के हितग्राहियों को डिजिटल कार्ड भी प्रदान किए। इतना ही नहीं, उन्होंने जबलपुर में इमारती लकड़ियों से फर्नीचर निर्माण के लिए फर्नीचर कलस्टर स्थापित करने और सांदीपनि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि जबलपुर फर्नीचर निर्माण का नया केंद्र बनेगा। कार्यक्रम में  'कैच द रेन' अभियान के तहत 11 लाख पौधरोपण महाअभियान का भी शुभारंभ हुआ। 

 

कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मन की बात कार्यक्रम के माध्यम से आकाशवाणी को नई पहचान दी और युवाओं को संचार तकनीक से परिचित कराया। देश की 80 करोड़ आबादी को नि:शुल्क राशन, पक्का मकान, नि:शुल्क शौचालय, हर घर नल से जल, आयुष्मान कार्ड के माध्यम से 5 लाख रुपए तक के इलाज की सुविधा मिल रही है। रेहड़ी वाले छोटे व्यापारियों को पीएम स्वनिधि योजना के अंतर्गत लाभ मिल रहा है। आज जबलपुर के अनेक हितग्राहियों को डिजिटल कार्ड प्रदान किए गए हैं। हर गरीब के जीवन में सुख का सूरज निकले, राज्य सरकार सहयोग की भावना से कार्य कर रही है। सरकार का अर्थ सहकार और सहकार का अर्थ परिवार की सहायता करना है। 

 

ऋषि-मुनियों के समान हैं पेड़-मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि दुनिया के सामने भारत वसुधैब कुटुम्बकम का एक आदर्श उदाहरण है। भारतीय परंपरा प्राचीनकाल से इसी भाव से आगे बढ़ती रही है। प्रकृति के साथ रिश्ता बनाने के लिए आज जबलपुर से 11 लाख पौधे लगाने के लिए पौधारोपण अभियान का शुभारंभ किया गया है। पेड़ हमारे जीवन में ऋषि-मुनियों के समान हैं, जिनसे हमें स्वच्छ हवा मिलती है। वृक्षारोपण के लिए नई मियावाकी पद्धति से एक एकड़ भूमि पर 12 हजार पौधे लगाए जा सकते हैं। यह क्षेत्र तीन साल में सघन वन बन जाता है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश नदियों का मायका है। यहां हरे-भरे सघन वन हैं। नदियां जंगलों को आबाद रखती हैं। लोगों को जल मिलता है। सभी को खुशहाली और आगे बढ़ने का अवसर देती हैं। नर्मदा नदी से गुजरात और राजस्थान को भी समृद्धि मिलती है।

मध्यप्रदेश की जलराशि गंगा बेसिन और यमुना नदी से माध्यम से गंगा सागर तक जाकर समुद्र में मिलती हैं। चंबल और सोन जैसी नदियां गंगा-यमुना की धारा को रफ्तार देती हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सबका साथ-सबका विकास की भावना के साथ आगे बढ़ते हुए सिविल लाइन में आधुनिक सुविधाओं से लैस मॉडर्न लॉन्ड्री की सौगात दी गई है। वहीं, गुरंदी में मछली व्यवसाय से जुड़े लोगों की सुविधा के लिए 2.5 करोड़ रुपये की लागत से पक्के मत्स्य बाजार का लोकार्पण किया गया है। खुले में मछली बिकने से इसे नहीं खाने वालों को बड़ी कठिनाई होती है। दूसरी ओर, खाने वालों के लिए खानपान की शुद्धता पर असर पड़ता है। 


यूसीसी की दिशा में आगे बढ़े हम-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि देश की आजादी के बाद कांग्रेस ने समाज को वोट बैंक के चश्मे से देखा। धर्म के आधार पर लोगों को बांटने की कोशिश की गई। रहीम और रसखान की रचनाएं देखिए, जिनमें भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का चित्रण मिलता है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद देश में कहीं कोई सांप्रदायिक हिंसा नहीं हुई। यह बदलते दौर का भारत है। मध्यप्रदेश सरकार ने इसी भावना से हिंदू और मुस्लिम सहित सभी वर्गों के लिए एक समान कानून लागू करने का निर्णय लिया है। यूसीसी लागू करने के लिए राज्य सरकार ने 3 करोड़ से अधिक एसएमएस भेजे, जिसके बाद 10 लाख से अधिक सुझाव समिति के पास आए। इन सुझावों में 74 प्रतिशत मुस्लिम बहनों ने यूसीसी लागू करने का समर्थन किया। एक जैसे हैं, वैसे ही सभी हैं। इसी भावना से एक समान कानून लागू करने की दिशा में आगे बढ़े हैं।

 

देश के लिए हमारे काम बने मॉडल-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश का लोक निर्माण विभाग देश में सबसे अच्छा काम करने वाला विभाग है। हमारे द्वारा लागू कई काम देश में लागू हो रहे हैं। मध्यप्रदेश ने ब्रिटिशकाल के राजमार्ग कानून और फायर सेफ्टी एक्ट में संशोधन किया। उन्होंने कहा कि सांदीपनि विद्यालय भगवान श्रीकृष्ण और सुदामा की मित्रता के प्रतीक हैं। हमारे बच्चों को संस्कार युक्त शिक्षा मिले, इसीलिए प्रदेशभर में भव्य सांदीपनि विद्यालय बनाए गए हैं। युवाओं का भविष्य संवारने के लिए दो साल में 10 हजार शिक्षक और पुलिस विभाग में 18 हजार पदों पर भर्ती की गई है। सभी विभागों के लगभग ढाई लाख से अधिक शासकीय सेवकों को पदोन्नति दी गई है। उन्होंने कहा कि सिर्फ पुलिस विभाग में ही 25 हजार अधिकारी-कर्मचारियों के प्रमोशन हुए। देश की आजादी के बाद केवल सागर और उज्जैन में ही विश्वविद्यालय थे। लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या बढ़ती गई। वर्तमान समय में 75 से अधिक विश्वविद्यालय हो चुके हैं। हमारी यूनिवर्सिटी ऐसी बनें, जहां विद्यार्थियों को उच्च गुणवत्ता के साथ शिक्षा मिले। भविष्य में जबलपुर मेडिकल यूनिवर्सिटी एक प्रकार से प्रदेश के एम्स की तर्ज पर विकसित होगी और यह मॉडल पूरे प्रदेश में लागू किया जाएगा। 

 

और निखरेगी संस्कारधानी-मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि जबलपुर के समग्र विकास के लिए अधिकारी मेट्रोपोलिटन सिटी का ड्राफ्ट तैयार करें। सरकार एक साल के अंदर जबलपुर को मेट्रोपोलिटन सिटी बनाएगी। यहां चारों दिशा में नैसर्गिक सौंदर्य है। मदन महल के पास एक बड़ा जू (चिड़ियाघर) बनाया जाएगा, जो देशी-विदेशी पर्यटकों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनेगा। मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट तो पहले से है, अब तो चीता भी मध्यप्रदेश में जीता है। यह हमारा सौभाग्य है कि मध्यप्रदेश मगरमच्छ, घड़ियाल, गिद्ध, तेंदुआ जैसे वन्यजीवों के मामले में भी अग्रणी राज्य है। एशिया महाद्वीप से चीता विलुप्त हो गया था, लेकिन मध्यप्रदेश की धरती पर आते ही उनकी संख्या 20 से बढ़कर 52 हो गए। उन्होंने कहा कि यह हमारे सहअस्तित्व की भावना का उत्कृष्ट उदाहरण है। हम जीयो और जीने दो की भावना के साथ वन्यजीवों के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। प्रदेश की धरती से 100 साल पहले हाथी लुप्त हो गए थे। अब इनकी संख्या तेजी से बढ़ी है। असम से जंगली भैंसे लाए गए हैं। भविष्य में गैंडे और किंग कोबरा जैसे जीवों को भी लाकर बसाया जाएगा। वनों की समृद्धि के लिए और पर्यटन से रोजगार के अवसर दिलवाने के लिए सरकार प्रयास कर रही है।

अस्मिता और हर्ष के एतिहासिक स्वर्ण पदक, जूडो में 3 पदक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन

हर्ष सिंह और अस्मिता डे ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत को पहली बार जूडो कराटे में मेडल दिलवाया वह भी गोल्ड। अस्मिता कॉमनवेल्थ गेम्स में जूडो में गोल्ड जीतने वाली पहली महिला जूडोका बनी वहीं इसके बाद हर्ष सिंह भी पहले पुरष जूडोका बने जिन्होंने कॉमनवेल्थ गेम्स  में गोल्ड जीता। इसके अलावा यामिनी ने भी 48.किग्रा वर्ग में सिल्वर मेडल जीता।

भारत ने जूडो में दो स्वर्ण और एक रजत पदक जीता जो 1990 के ऑकलैंड राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो के पदक खेल बनने के बाद भारत का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है।

त्रिपुरा की 23 वर्षीय अस्मिता डे जूडो स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय बन गई जिन्होंने 48 किग्रा से कम भार वर्ग में कनाडा की हेडी क्वाच को नाटकीय ‘गोल्डन स्कोर’ मुकाबले में हराकर खिताब जीता।

हर्ष सिंह राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक जीतने वाले भारत के पहले पुरूष खिलाड़ी बन गए जिन्होंने आस्ट्रेलिया के अनुभवी जोशुआ कैट्ज को हराकर पुरूषों के 60 किलो फाइनल में स्वर्ण पदक जीता ।

पहली बार इन खेलों में उतरे 23 वर्ष के हर्ष ने खिताब के प्रबल दावेदार माने जा रहे जूडोका के खिलाफ संयम खोये बिना जबर्दस्त खेल दिखाया । यामिनी काफी करीब से स्वर्ण पदक जीतने से चूक गईं और उन्हें महिलाओं के 57 किग्रा से कम भार वर्ग के ‘गोल्डन स्कोर’ तक पहुंचे फाइनल में इंग्लैंड की अनुभवी एसिल्या टॉपराक से हारकर रजत पदक से संतोष करना पड़ा।

Optimystix Entertainment IPO: कॉमेडी सर्कस, लाफ्टर शेफ्स, क्राइम पेट्रोल की प्रोड्यूसर होगी लिस्ट, 7 अगस्त को खुलेगा ₹108 करोड़ का इश्यू

विपुल डी शाह की कंपनी ऑप्टिमिस्टिक्स एंटरटेनमेंट इंडिया अपना IPO ला रही है। यह 7 अगस्त को खुलेगा और 11 अगस्त को बंद होगा। एंकर निवेशक 6 अगस्त को बोली लगा सकेंगे। कंपनी 107.88 करोड़ रुपये तक का अमाउंट जुटाना चाहती है। IPO के लिए प्राइस बैंड 165-174 रुपये प्रति शेयर है। इश्यू में 87 करोड़ रुपये के 50 लाख नए शेयर जारी होंगे। साथ ही फाउंडर और प्रमोटर विपुल डी शाह की ओर से 20.88 करोड़ रुपये के 12 लाख शेयरों को ऑफर फॉर सेल के तहत बिक्री के लिए रखा जाएगा।

कंपनी की लिस्टिंग NSE SME पर 14 अगस्त को हो सकती है। ऑप्टिमिस्टिक्स एंटरटेनमेंट फिल्मों और टीवी शो का प्रोडक्शन करती है। यह 150 से ज्यादा टीवी शो प्रोड्यूस कर चुकी है। लिस्ट में कॉमेडी सर्कस, लाफ्टर शेफ्स, क्राइम पेट्रोल, बालवीर, सजन रे झूठ मत बोलो, लेडीज स्पेशल, सास बिना ससुराल, कॉमेडी नाइट्स बचाओ, पापड़ पोल, राइजिंग स्टार जैसे नाम शामिल हैं।

​इसने खेल-खेल में, द डिप्लोमैट, ओएमजी 2 जैसी फिल्मों के साथ-साथ छुरी और चटनी शॉर्ट फिल्म को भी प्रोड्यूस किया है। इसके अलावा 2 वेब सीरीज कैंडी और लुक्खा का प्रोडक्शन भी किया है। विपुल डी शाह कंपनी के चेयरमैन और मैनेजिंग डायरेक्टर भी हैं। राजेश बहल को-प्रमोटर और ग्रुप सीईओ हैं। ऑप्टिमिस्टिक्स एंटरटेनमेंट की शुरुआत साल 2001 में हुई थी। कंपनी को 60 से ज्यादा अवॉर्ड मिल चुके हैं।

IPO के पैसों का कैसे होगा इस्तेमाल

ऑप्टिमिस्टिक्स एंटरटेनमेंट अपने IPO में नए शेयरों को जारी कर हासिल होने वाले पैसों का इस्तेमाल वर्किंग कैपिटल जरूरतों को पूरा करने के लिए और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों के लिए करेगी। पब्लिक इश्यू में 49.94 प्रतिशत हिस्सा क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स के लिए, 15.05 प्रतिशत हिस्सा नॉन इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स के लिए और 35.01 प्रतिशत हिस्सा रिटेल इनवेस्टर्स के लिए रिजर्व है। Optimystix Entertainment IPO के लिए नेक्सजेन फाइनेंशियल सॉल्यूशंस, बुक रनिंग लीड मैनेजर है। रजिस्ट्रार मांशीतला सिक्योरिटीज है।

Optimystix Entertainment की वित्तीय सेहत

कंपनी का वित्त वर्ष 2025-26 में रेवेन्यू 9 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ 135.89 करोड़ रुपये रहा। एक साल पहले रेवेन्यू 125 करोड़ रुपये था। शुद्ध मुनाफा 39 प्रतिशत बढ़कर 24 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2025 में 17.24 करोड़ रुपये था। ऑप्टिमिस्टिक्स एंटरटेनमेंट में T-Series की मालिक सुपर कैसेट्स के पास 6.56 प्रतिशत हिस्सेदारी है। यह कंपनी की सबसे बड़ी पब्लिक शेयरहोल्डर है। इंडीविजुअल इनवेस्टर्स में मनीष गुप्ता के पास 2.13 प्रतिशत, राहुल महेश अग्रवाल के पास 1.91 प्रतिशत और अंकित अग्रवाल के पास 1.37 प्रतिशत हिस्सेदारी है।

स्व-सहायता समूहों को 300 करोड़ रुपए की सौगात, झाबुआ में 283 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का शुभारंभ

mohan yadav

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने 31 जुलाई को झाबुआ जिले के लिए सौगातों का पिटारा खोल दिया। वे जिले के थांदला में आयोजित 'स्व-सहायता समूहों का क्षमतावर्धन एवं ऋण वितरण कार्यक्रम' में सम्मिलित हुए। कार्यक्रम के दौरान सीएम डॉ. यादव ने राज्य के स्व-सहायता समूहों को सिंगल क्लिक से 300 करोड़ रुपए का ऋण वितरित किया।

इसके अलावा उन्होंने झाबुआ में 174.64 करोड़ रुपये की लागत के 29 विकास कार्यों का भूमि-पूजन और 109.17 करोड़ रुपये की लागत के 28 विकास कार्यों का लोकार्पण किया। उन्होंने विभिन्न योजनाओं के हितग्राहियों को हितलाभ वितरित किया और मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया। सीएम डॉ. यादव ने प्राकृतिक और जैविक खेती करने वाले किसानों से संवाद भी किया। उन्होंने रणजी टीम में चयनित थांदला के क्रिकेटर अर्पित भटेवरा को ट्रॉफी भेंटकर शुभकामनाएं दीं। इसके अलावा उन्होंने किसानों और युवाओं को हेलमेट भी दिए। 

 

इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृ्त्व में मध्यप्रदेश तेज गति से आगे बढ़ रहा है। जब वे लगातार तीन बार पड़ोसी राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री थे, तब झाबुआ के आसपास जनजातीय अंचल में विकास के अद्भुत कार्य हुए। पूरी दुनिया गुजरात की शक्ति से परिचित हुई। प्रधानमंत्री मोदी गरीब, किसान, युवा और नारी कल्याण के लिए कार्य करते हैं। उनके मन में बहनों के लिए विशेष सम्मान है। उनके माध्यम से आज स्व-सहायता समूहों से जुड़ी बहनों के सशक्तिकरण के लिए 300 करोड़ रुपये के ऋण दिए गए हैं। स्व-सहायता समूहों से बहनों की समृद्धि का मार्ग खुल रहा है। यह आत्मनिर्भरता और समाजिक सशक्तिकरण का एक बड़ा आंदोलन बन रहा है।

 

हर काम में दक्ष हैं बहनें

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन ने कहा कि  सहयोग, सहभागिता और संपन्नता के बलबूते बहनें नए रिकॉर्ड बना रही हैं। अब हमारी बहनें 10 हजार रुपए प्रति महीना तक आय अर्जित कर रही हैं। प्रदेश की लाड़ली बहनें, उद्यमिता बहनें, कृषि सखी सभी आगे बढ़ रही हैं। प्रदेश में स्व-सहायता समूहों के द्वारा 196 कैफे संचालित किए जा रहे हैं। झाबुआ में भी बहनें 4 कैफे चला रही हैं। प्रदेश में 85 आजीविका पुस्तकालयों का संचालन स्व-सहायता समूहों की बहनों के हाथों में है। प्रदेश में गैर कृषि आधारित 150 से अधिक कार्य हमारी बहनें कर रही हैं। उन्होंने कहा कि यह आयोजन महिला सशक्तिकरण का गौरवशाली क्षण है। होलकर साम्राज्य की रानी लोकमाता अहिल्याबाई ने भील पलटन बनाकर जनजातीय समुदाय पर विश्वास जताया था। रानी दुर्गावती, वीरांगना अवंतीबाई, रानी पद्मावती, वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई जैसी बहनों ने सुशासन और त्याग के बल पर देश और प्रदेश का मान बढ़ाया। 

 

करोड़ों का व्यापार महिलाओं के जिम्मे

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि झाबुआ क्षेत्र प्राकृतिक खेती के लिए वरदान है। आज यहां पर प्राकृतिक खेती करने वाले किसानों से संवाद किया और प्राकृतिक एवं जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए शासन की विभिन्न योजनाओं एवं प्रयासों पर चर्चा भी की। महिला कृषक बहनों ने बताया कि प्राकृतिक खेती के माध्यम स पिछले दो-तीन साल में जीवन में बड़ा बदलाव आया है। राज्य सरकार कृषि कल्याण वर्ष मना रही है। इसमें बहनों की बड़ी भूमिका है। हमारी बहनें ट्रैक्टर से लेकर ड्रोन तक चला रही हैं। ड्रोन दीदियां खेतों में कीट नाशकों का छिड़काव कर रही हैं। इस वर्ष गेहूं उपार्जन में भी दीदियों ने कमाल कर दिया। मध्यप्रदेश ने पूरे देश में सबसे अधिक गेहूं खरीदा है। प्रधानमंत्री मोदी और कृषि मंत्री के सहयोग से 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं का उपार्जन किया। इसमें भी बहनों ने अपने समूहों को लाभान्वित किया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 89 ड्रोन दीदियां, पशुपालन दीदियां, बैंक सखी जैसी बहनें काम कर रही हैं। व्यावयासिक सब्जी उत्पादन, पशुपालन और जैविक खेती में बहनों ने उत्कृष्ट कार्य किया है। महिला किसान उत्पादक संगठनों ने 958 करोड़ रुपए का व्यापार किया है। झाबुआ जिले में 11 हजार 900 से अधिक स्व-सहायता समूह एक लाख 56 हजार से अधिक परिवारों को सामाजिक सुरक्षा और आजीविका का अधिकार दे रहे हैं। प्रदेश में 64 हजार लखपति दीदीयां जनजातीय क्षेत्र में आर्थिक पुनरोत्थन का कार्य कर रही हैं। समूहों के सशक्तिकरण के लिए 285 करोड़ की सहायता दी गई है। उन्होंने कहा कि झाबुआ में अब कड़कनाथ से माध्यम से घर-घर में नगदनाथ हो रहा है। बहनें मुर्गी पालन, पशुपालन, मछली पालन के माध्यम से आगे बढ़ रही हैं। लाड़ली बहनों के खाते में हर माह 1500 रुपए की राशि भेजी जा रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सरकार जो कहती है, करके दिखाती है।

 

सभी के लिए होगा एक समान कानून

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश सरकार ने सभी धर्मों के लोगों के सम्मान के लिए एक समान कानून लागू करने का निर्णय लिया है। इसमें जनजातीय समुदाय को मुक्त रखा गया है। यूसीसी बिल विधानसभा से पास हो चुका है। सरकारी नौकरियों में बहनों को 35 प्रतिशत आरक्षण दिया जा रहा है। माताओं-बहनों को नगरीय निकायों में 50 प्रतिशत आरक्षण मिल रहा है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उद्योग और एमएसएमई के माध्यम से रोजगार के अवसर सृजित किए जा रहे हैं। कल ही ग्वालियर अंचल को टेलीकॉम सेक्टर की बहुत बड़ी सौगात मिली है। प्रधानमंत्री मोदी ने धार जिले में पीएम मित्र पार्क की सौगात दी है। उन्होंने कहा कि इससे अंचल के कपास उत्पादक किसानों को बड़ा लाभ मिलेगा। अब खेत से कारखाना, कारखाने से कपड़ा, कपड़े से गारमेंट और यह गारमेंट्स दुनियाभर में निर्यात किए जाएंगे। इससे निमांड़ अंचल के साथ ही झाबुआ में भी समृद्धि आएगी। पीएम मित्र पार्क से 3 लाख लोगों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष तौर पर रोजगार के अवसर प्राप्त होंगे। उन्होंने कहा कि अब झाबुआ, धार, आलीराजपुर के लोगों को रोजगार के लिए पलायन करने की जरूरत नहीं होगी। अपने घर में ही काम मिलेगा। बड़े-बड़े कारखाने यहां आएंगे। बाहरी लोगों को भी रोजगार मिलेगा। 

 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने झाबुआ को दी सौगातें 

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि आज 70 करोड़ की लागत से झाबुआ में आयुर्वेदिक चिकित्सा महाविद्यालय का भूमि-पूजन किया गया है। प्रदेश को अब तक 9 आयुर्वेदिक कॉलेजों की सौगात मिल चुकी है। यहां 35 करोड़ 29 लाख की लागत से सांदीपनि विद्यालय। झाबुआ के थांदला से अब रेलगाड़ी भी गुजरेगी। थांदला में पक्का हेलीपैड बनेगा। प्रत्येक विधानसभा में खेल स्टे़डियम बनाएंगे। पद्मावती नदी पर घाट निर्माण किया जाएगा। छोटी काशी में भी घाट बनाया जाएगा।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि झाबुआ और धार में धर्मांतरण करने वालों को कानून के अनुसार सजा दिलवाई जाएगी। महिलाओं के खिलाफ अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए महिला सुरक्षा डेस्क और प्रत्येक जिले में महिला थाने बनाए जा रहे हैं। महिलाओं के साथ दुराचार करने वालों को फांसी की सजा दिलवाएंगे। प्रदेश सरकार ने बालाघाट, मंडला, डिंडौरी से नक्सलवाद से को समाप्त किया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि स्व-सहायता समूहों की बहनों के माध्यम से अगले साल से स्कूली बच्चों को सिली हुई ड्रेस उपलब्ध करवाई जाएगी।

रील बनाने जूते पहनकर ‘रथ’ पर चढ़ा मुस्लिम युवक, कोर्ट ने दी रोजाना मंदिर सफाई की सजा

Ulto rath yatra

Ulto Rath Yatra controversy: सोशल मीडिया पर व्यूज और लाइक्स हासिल करने का भूत किस तरह कानूनी मुसीबत बन सकता है, इसका ताजा उदाहरण पूर्व बर्धमान जिले के कालना से सामने आया है। 'उल्टो रथ यात्रा' के दो दिन बाद, एक मुस्लिम युवक द्वारा जूते पहनकर रथ पर चढ़कर रील (Reel) बनाने और उसे फेसबुक पर अपलोड करने के मामले में अदालत ने एक ऐतिहासिक और सुधारात्मक रुख अपनाया है।

 

धार्मिक भावनाओं को आहत करने के आरोपी युवक को अदालत ने जमानत तो दे दी, लेकिन इसके साथ ही एक ऐसी शर्त रखी है जो समाज में मिसाल और चर्चा का विषय बन गई है।

क्या है पूरा मामला?

यह घटना पूर्व बर्धमान जिले के समुद्रगढ़ निवासी बाबूलाल शेख से जुड़ी है। 'उल्टो रथ यात्रा' के समापन के बाद कालना क्षेत्र में खड़े एक धार्मिक रथ की सीढ़ियों पर आरोपी जूते पहनकर चढ़ गया और वहां डांस करते हुए वीडियो बना लिया। वीडियो वायरल होते ही स्थानीय श्रद्धालुओं और निवासियों में भारी रोष फैल गया। 

  • धार्मिक समिति की शिकायत : 'पश्चिम नसरतपुर हरेकृष्ण नामहट्ट संघ' के सचिव जितेन मोंडल के नेतृत्व में समिति ने नदानघाट पुलिस थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई।
  • पुलिस कार्रवाई : एफआईआर के आधार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बाबूलाल शेख को गिरफ्तार कर लिया।
  • लागू कानूनी धाराएं : आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत विभिन्न समूहों के बीच वैमनस्य/दुश्मनी फैलाने और जानबूझकर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने से संबंधित गंभीर प्रावधानों में मामला दर्ज किया गया।

कोर्ट का फैसला : सख्त कानूनी धाराओं के बीच सुधारात्मक न्याय

आरोपी बाबूलाल शेख को कालना के अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियुक्त की ओर से सार्वजनिक रूप से माफी मांगने, पश्चाताप व्यक्त करने (कान पकड़कर माफी मांगने) और जांच में सहयोग करने की दलीलें दी गईं। अदालत ने मामले की संवेदनशीलता और सामाजिक सौहार्द को ध्यान में रखते हुए आरोपी को सशर्त जमानत दे दी।

कोर्ट द्वारा तय की गई मुख्य शर्तें

  • मंदिर एवं सड़क की रोजाना सफाई : जांच पूरी होने तक आरोपी को रोजाना मंदिर परिसर और उससे सटी मुख्य सड़क की सफाई करनी होगी।
  • रथ की सीढ़ियों की धुलाई : रिपोर्ट्स के अनुसार, आरोपी को पुलिस बल की मौजूदगी में रथ की सीढ़ियों को पानी से धोकर साफ करने का आदेश दिया गया।
  • जांच अधिकारी के समक्ष हाजिरी : आरोपी को हफ्ते में कम से कम एक बार जांच अधिकारी के समक्ष पेश होना होगा और विवेचना में पूर्ण सहयोग करना होगा।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय दंड प्रक्रिया (और अब BNS प्रक्रिया) में ऐसे कई अवसर आए हैं जहां अदालतों ने केवल जेल भेजने के बजाय 'सुधारात्मक न्याय' (Restorative Justice) का मॉडल अपनाया है। कोर्ट के इस फैसले से समाज में यह संदेश जाता है कि कानून का उद्देश्य केवल सजा देना ही नहीं, बल्कि गलती का अहसास कराना और सामाजिक समरसता को दोबारा कायम करना भी है।

रील संस्कृति पर सबक

सोशल मीडिया के लिए धार्मिक स्थलों की पवित्रता या सांस्कृतिक प्रतीकों का अनादर करने वालों के लिए यह एक सख्त चेतावनी है। सोशल मीडिया की क्षणिक प्रसिद्धि के लिए कानून और धार्मिक आस्था से खिलवाड़ भारी पड़ सकता है। हालांकि, कोर्ट के इस विवेकपूर्ण फैसले ने जहां एक तरफ सख्त संदेश दिया है, वहीं दूसरी तरफ पश्चाताप कर रहे युवक को समाज में सुधार का अवसर भी प्रदान किया है।