12 दिन में सिर्फ 2 दिन शेयर ग्रीन, IPO निवेशकों का पैसा हुआ आधा, इस कारण भारी दबाव

Annu Projects Share Price: टेलीकॉम सेक्टर से लेकर गैस पाइपलाइन के लिए EPC कंपनी अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयरों ने निवेशकों को ऐसा झटका दिया कि आईपीओ निवेशक अब भी मुनाफे के लिए तरस रहे। लिस्टिंग से लेकर अब तक महज 12 कारोबारी दिन हुए हैं और इनमें 8 कारोबारी दिन तो यह 5% के लोअर सर्किट पर बंद हुआ। सिर्फ यही नहीं रिकॉर्ड निचले स्तर से रिकवरी के बावजूद अब भी आईपीओ निवेशक 49% घाटे में हैं। लिस्टिंग के ही दिन इसने कमजोरी दिखाना शुरू कर दिया। एक अहम बात और है कि ग्रे मार्केट से इसकी कमजोर लिस्टिंग के संकेत मिल तो रहे थे लेकिन स्थिति इतनी बुरी होगी, इसका अंदाजा नहीं था।

ग्रे मार्केट में इसकी जीएमपी आईपीओ प्राइस से 7% प्रीमियम से 7% डिस्काउंट तक आई थी और मार्केट में इसकी 27% तक डिस्काउंट पर एंट्री हुई थी। इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹99 के भाव पर जारी हुए थे। अभी की बात करें तो 18 सितंबर को बीएसई पर यह 2.48% की बढ़त के साथ ₹50.48 के भाव पर बंद हुआ था। अब इसकी सर्किट लिमिट 20% है।

अब तक कैसा रहा शेयरों का सफर

अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹99 के भाव पर जारी हुए थे। लिस्टिंग के दिन यानी 2 सितंबर को बीएसई पर इसकी ₹75 पर एंट्री हुई। भारी डिस्काउंट पर एंट्री के बाद शेयरों ने संभलने की कोशिश की थी और उछलकर यह ₹₹78.74 के अपर सर्किट तक पहुंचा था लेकिन फिर पहले ही दिन से मुनाफावसूली का जो दौर शुरू हुआ, उसने तीन हफ्ते से भी कम समय में आईपीओ निवेशकों की पूंजी आधी से भी कम कर दी। 17 सितंबर को बीएसई पर यह ₹46.56 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर आ गया था जोकि आईपीओ प्राइस से 52.97% डाउनसाइड है। 12 कारोबारी दिनों में यह सिर्फ दो दिन 10 सितंबर और 18 सितंबर को ग्रीन जोन में बंद हुआ तो 8 दिन लोअर सर्किट पर।

सेहत कैसी है?

अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयरों में बिकवाली का यह दबाव तो तब है, जब इसकी वित्तीय सेहत कागजों में काफी मजबूत दिख रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 38% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹33.03 करोड़ और टोटल इनकम 25% से अधिक के सीएजीआर से ₹244.59 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹52.54 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹107.45 करोड़ पड़े थे। प्रमोटर्स के होल्डिंग की बात करें तो लिस्टिंग के बाद यह 89.11% से घटकर 65.05% पर आ गई है।

क्यों दिख रहा दबाव

अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयरों पर दबाव की एक वजह तो जियो-पॉलिटिकल टेंशन रही। 2 सितंबर से अब तक निफ्टी 50 करीब 3% कमजोर हुआ है और 12 कारोबारी दिनों में यह 5 ही दिन ग्रीन रहा।

अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयरों पर कुछ ही सेक्टर्स और ग्राहकों पर इसके कारोबार की अधिक निर्भरता ने भी दबाव डाला। कंपनी के रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 में इसका 94.17% रेवेन्यू टेलीकॉम और सीवरेज इंफ्रा से आया जबकि गैस पाइपलाइन से महज 4.03% ही रेवेन्यू आया। इसके अलावा वित्त वर्ष 2026 में 97.96% रेवेन्यू इसे टॉप-10 क्लाइंट्स से मिला।

वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों के हिसाब से इसके कारोबार में बिहार, गोवा और पश्चिम बंगाल की 64% से अधिक हिस्सेदारी है, जिसमें से अकेले बिहार में ही इसका 32% से अधिक कारोबार है।

एक और अहम झटका ऑपरेटिंग एक्टिविटीज से नेट कैश फ्लो का निगेटिव होना है।

वित्त वर्ष 2026 में इसके टॉप-टेन सप्लायर्स की कुल सप्लाई में हिस्सेदारी 67.92% थी।

कंपनी के सामने एक और बड़ा रिस्क ऑपरेशनल रेवेन्यू की तुलना में ट्रेड रिसीवेबल्स डेज की बढ़ती संख्या है यानी कि कंपनी को ग्राहकों से अफना पैसा वसूलने में लगने वाला समय लगातार बढ़ रहा है जोकि वित्त वर्ष 2024 में 138 दिन और वित्त वर्ष 2025 में 163 दिनों से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 237 दिनों पर पहुंच गया।

आगे किस बात पर रहेगी नजर

अन्नू प्रोजेक्ट्स के शेयरों ने आईपीओ प्राइस के मुकाबले आधे से अधिक टूटने के बाद निचले स्तर से वापसी की है। अब इसकी चाल आगे कैसी रही, यह मार्केट सेंटिमेंट के अलावा इस बात पर भी निर्भर करेगा कि जून 2026 तिमाही में इसकी कारोबारी सेहत कैसी रही। कंपनी ने 18 सितंबर को एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी कि 23 सितंबर को इसके बोर्ड की बैठक में जून तिमाही के कारोबारी नतीजे पर चर्चा होगी यानी 23 सितंबर को इसका जून 2026 तिमाही का रिजल्ट आ सकता है।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

बीते पांच सालों में टॉप 8 शहरों के मुकाबले टियर-2 शहरों में घरों की कीमतें ज्यादा बढ़ीं, सीआईआई-नाइट फ्रैंक की रिपोर्ट

बीते एक दशक में देश के सबसे बड़े 8 शहरों के मुकाबले 11 टियर-2 शहरों में घरों की कीमतें करीब दोगुनी रफ्तार से बढ़ी है। इससे रियल एस्टेट सेक्टर की अगले चरण की ग्रोथ में देश के छोटे शहरों की बढ़ती भूमिका का संकेत मिलता है। सीआईआई-नाइट फ्रैंक की एक रिपोर्ट में यह बताया गया है।

देश के इन 11 इन शहरों में तेजी से बढ़ी कीमतें 

इस रिपोर्ट में यह बताया गया है कि 2016 से 2026 के बीच भोपाल, भुवनेश्वर, चंडीगढ़ ट्राइसिटी, गोवा, इंदौर, जयपुर, कोच्चि, नागपुर, विशाखपत्तनम और कोयंबतूर में घरों की कीमतें 9 फीसदी कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ी। इसके मुकाबले देश के 8 सबसे बड़े शहरों में घरों की कीमतें औसत 4 फीसदी सीएजीआर से बढ़ीं।

बीते 5 साल में टियर2 शहरों में कीमतों में ज्यादा इजाफा

घरों की कीमतें बढ़ने के मामले में सबसे बड़े और टियर-2 शहरों के बीच का यह फर्क बीते कुछ सालों में ज्यादा बढ़ा है। 2021 से 2026 के बीच टियर-2 कैटेगरी के 11 शहरों में घरों की कीमतें 63 फीसदी बढ़ी, जबकि सबसे बड़े 8 शहरों में घरों की कीमतें 42 फीसदी बढ़ीं। यह जानकारी CII-Night Frank India की रिपोर्ट पर आधारित है।

 इन वजहों से टियर-2 शहरों में तेजी से बढ़ रही कीमतें

इस रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि टियर-2 शहरों में घरों की कीमतें ज्यादा बढ़ने में इन शहरों में बेहतर हो रहे इंफ्रास्ट्रक्चर, कनेक्टिविटी और कंजम्प्शन का हाथ है। रिपोर्ट के मुताबिक, टियर-2 और टियर-3 शहर की भूमिका रियल एस्टेट सेक्टर की ग्रोथ में बढ़ रही है। हालांकि, वॉल्यूम के लिहाज से अभी भी टॉप शहरों की ग्रोथ में ज्यादा हिस्सेदारी है।

कमर्शियल एक्टिविटी बढ़ने से भी कीमतों को मिल रहा सपोर्ट

नाइट फ्रैंक इंडिया के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर शिशिर बैजल ने कहा, “इंडिया में रियल एस्टेट की ग्रोथ अब सिर्फ पारंपरिक मेट्रोपॉलिटन शहरों तक सीमित नहीं है।” इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर होने से रियल एस्टेट सेक्टर की ग्रोथ को सपोर्ट मिलता रहेगा। टियर-2 शहरों में कमर्शियल एक्टिविटी भी बढ़ रही है।

tier 2 cities

2047 तक 6 ट्रिलियन डॉलर का होगा रियल एस्टेट मार्केट

देश के रियल एस्टेट सेक्टर की ग्रोथ के बारे में भी रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है। इसमें बताया गया है कि रियल एस्टेट सेक्टर 20247 तक 5.8 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इसमें टियर-2 और टियर-3 शहरों का करीब 25-30 फीसदी योगदान होगा। हालांकि, यह जमीन की उपलब्धता, एप्रूवल की रफ्तार, युटिलिटीज और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर पर निर्भर करेगा।

Steamhouse IPO Listing: 16% प्रीमियम पर लिस्ट ₹81 का शेयर, 32 गुना सब्सक्राइब हुआ था आईपीओ

Steamhouse IPO Listing: भाप और नाइट्रोजन बनाने वाली स्टीमहाउस के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 32 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹81 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹93.00 और NSE पर ₹94.50 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 16% से अधिक का लिस्टिंग गेन (Steamhouse Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹94.46 (Steamhouse Share Price) के अपर सर्किट पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 16.62% मुनाफे में हैं।

Steamhouse IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

स्टीमहाउस का ₹414 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 9-11 सितंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 32.07 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 46.19 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 46.60 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 17.78 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹353 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹2 की फेस वैल्यू वाले 75,30,864 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹180.00 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹75.95 करोड़ कैपेसिटी बढ़ाने, ₹38.17 करोड़ एक मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी के सेटअप, ₹23.13 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹35.75 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Steamhouse के बारे में

स्टीमहाउस इंडिया एक इंडस्ट्रियल गैस कंपनी है। यह भाप और नाइट्रोजन बनाती है और अपने पाइपलाइन नेटवर्क के जरिए इसका डिस्ट्रीब्यूशन करती है। यह सिर्फ स्टीम ही नहीं बनाती है बल्कि दूसरी कंपनियों से खरीदकर भी अपने पाइपलाइन से सप्लाई करती है। सचिन, वापी, अंकलेश्वर, सारीग्राम, पनोली और नदेसरी जैसे अहम इंडस्ट्रियल हब्स में इसका 45 किमी से अधिक पाइपलाइन नेटवर्क है। इसकी ग्राहक अनुपम रसायन और एथर इंडस्ट्रीज जैसी कंपनियां हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 19% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹38.64 करोड़ और टोटल इनकम 30% के सीएजीआर से ₹494.97 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹281.62 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹127.57 करोड़ पड़े थे।

 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Groww Share Price: ₹1999 करोड़ की ब्लॉक डील पर शेयर धड़ाम, 4% की भारी गिरावट, Jefferies से समझें स्ट्रैटेजी

Groww Share Price: एक तरफ दो दिनों की गिरावट से उबरते हुए सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी 50 (Nifty) आधे फीसदी से अधिक उछल पड़े तो दूसरी तरफ ग्रो की पैरेंट कंपनी बिलियनब्रेन्स गैराज वेंचर्स (Billionbrains Garage Ventures) के शेयर 4% से अधिक टूट गए। 1.69% की हिस्सेदारी के बराबर शेयरों की ₹1999 करोड़ में ब्लॉक डील ने इसे बुरी तरह तोड़ दिया। निचले स्तर पर खरीदारी के बावजूद अब भी यह कमजोर स्थिति में है। फिलहाल बीएसई पर यह 3.80% की गिरावट के साथ ₹190.05 पर है। इंट्रा-डे में यह 4.66% की गिरावट के साथ ₹188.35 पर है।

Block Deal में किसने बेचे Groww के शेयर और किस भाव पर?

ब्लॉक डील्स के जरिए ग्रो के 10.41 करोड़ शेयरों यानी 1.69% इक्विटी होल्डिंग की प्रति शेयर ₹192 के भाव पर ₹1999 करोड़ में बिक्री हुई। अभी ये शेयर किसने खरीदे और बेचे, आधिकारिक तौर पर इसका खुलासा नहीं हुआ है लेकिन 15 सितंबर को सीएनबीसी-टीवी18 ने सूत्रों के हवाले से जानकारी दी थी कि पीक XV पार्टनर्स इंवेस्टमेंट्स VI-1 और सिकोईया कैपिटल ग्लोबल ग्रोथ फंड III-यूएस/इंडिया एनेक्स फंड ब्लॉक डील्स में शेयर बेच सकते हैं। सूत्रों के मुताबिक इसका बेस ऑफर साइज 1.6% इक्विटी होल्डिंग थी और फ्लोर प्राइस प्रति शेयर ₹191.45 तय किया गया है। जून तिमाही के आखिरी में कंपनी में पीक XV पार्टनर्स इंवेस्टमेंट्स VI-1 की ग्रो में 15.68% तो सिकोईया कैपिटल ग्लोबल ग्रोथ फंड III-यूएस/इंडिया एनेक्स फंड की 1.46% हिस्सेदारी थी।

क्या है Jefferies का रुझान?

मंगलवार को जेफरीज ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया था कि ग्रो की कुल कमाई का लगभग 55% हिस्सा F&O से आता है तो CAS मामले को लेकर कोई भी समाधान आएगा तो वह ग्रो के लिए भी फायदेमंद होगा। जेफरीज का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-2029 के दौरान शुद्ध मुनाफे की सालाना 30% की ग्रोथ को सपोर्ट करने के लिए कई फैक्टर्स काम कर रहे हैं, जैसे कि ब्रोकिंग बिजनेस में 18% की बढ़ोतरी, एमटीएफ और वेल्थ मैनेजमेंट जैसी नई पहल और मार्जिन में 10 पर्सेंटेज प्वाइंट्स की बढ़ोतरी।

इस वित्त वर्ष 2027 के आखिरी तक ग्रो की अपने प्लेटफॉर्म पर अमेरिकी स्टॉक्स जोड़ने की योजना है और ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इससे वित्त वर्ष 2028 की अनुमानित कमाई 5-9% तक और बढ़ सकती है।

इन सब बातों को देखते हुए जेफरीज ने ग्रो को सिर्फ खरीदारी की ही रेटिंग में नहीं रखा है बल्कि इसे फाइनेंशियल आउटपरफॉर्मर्स की लिस्ट में भी रखा है। इस लिस्ट में जेफरीज ऐसे स्टॉक्स रखती है, जिनमें अगले तीन सालों में अपने ऑपरेटिंग प्रॉफिट को 25% CAGR या उससे अधिक की रफ्तार से बढ़ाने की क्षमता होती है।

अब तक कैसी रही शेयरों की चाल?

ग्रो के शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹100 के भाव पर जारी हुए थे और इसकी मार्केट में पिछले साल 12 नवंबर 2025 को एंट्री हुई थी। 29 अप्रैल 2026 को बीएसई पर यह ₹227.00 के रिकॉर्ड हाई लेवल पर था। फिलहाल तो इस हाई से यह काफी नीचे है लेकिन अब आगे की बात करें जेफरीज ने इसे ₹240 के टारगेट प्राइस पर खरीदारी की रेटिंग दी है यानी कि इसके शेयरों के अब तक के रिकॉर्ड हाई लेवल से भी ऊपर। लिस्टिंग के बाद बीएसई पर इसका रिकॉर्ड निचला स्तर ₹112.02 है जो इसने लिस्टिंग के दिन ही छुआ था।

खुल गया ₹1000 करोड़ का Hero Motors IPO, पैसे लगाने से पहले चेक करें डिटेल्स और ब्रोकरेजेज का रुझान

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

खुल गया ₹1000 करोड़ का Hero Motors IPO, पैसे लगाने से पहले चेक करें डिटेल्स और ब्रोकरेजेज का रुझान

Hero Motors IPO: ऑटो कंपोनेंट्स और एडवांस्ड मोबिलिटी मैन्युफैक्चरर हीरो मोटर्स का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए खुल चुका है। ₹1000 करोड़ का आईपीओ खुलने से पहले ICICI प्रूडेंशियल लाइफ इंश्योरेंस कंपनाी समेत 15 एंकर निवेशकों से यह ₹300 करोड़ जुटा चुकी हैं, जिन्हें प्रति शेयर ₹84 के भाव पर 3.57 करोड़ शेयर जारी हुए हैं। अब ग्रे मार्केट में बात करें तो आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से यह ₹10 यानी 11.90% की GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) पर है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स के आधार पर ही किसी आईपीओ में निवेश से जुड़ा फैसला लेना चाहिए।

Hero Motors IPO: डिटेल्स

हीरो मोटर्स का ₹1000 करोड़ का आईपीओ आज 16 सितंबर को खुला है और 18 सितंबर तक खुला रहेगा। इस इश्यू में ₹79-₹84 के प्राइस बैंड और 178 शेयरों के लॉट में पैसे लगा सकते हैं। इस इश्यू के तहत ₹600 करोड़ के नए शेयर जारी होंगे तो ₹10 की फेस वैल्यू वाले ₹400 करोड़ के शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री होगी। ऑफर फॉर सेल के बाद कंपनी में प्रमोटर्स की होल्डिंग 85.57% से घटकर 61.63% रह जाएगी। आईपीओ की सफलता के बाद शेयरों का एलॉटमेंट 21 सितंबर को फाइनल होगा जिसके बाद बीएसई और एनएसई पर 23 सितंबर को इसकी लिस्टिंग होगी। इसका रजिस्ट्रार केफिन टेक है।

अब आईपीओ के पैसों के इस्तेमाल की बात करें तो ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर्स ओपी मुंजाल होल्डिंग और हीरो साइकिल्स को मिलेगा। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹190.00 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹200 करोड़ इक्विपमेंट्स की खरीदारी और बाकी पैसे अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

हीरो मोटर्स के बारे में

हीरो मोटर्स एक ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी कंपनी है। यह भारत के साथ-साथ अमेरिका, यूरोप और एशियन की गाड़ी कंपनियों के लिए पावरट्रेन सॉल्यूशंस तैयार कर मुहैया कराती है। यह दोपहिया से लेकर ई-बाइक, पैसेंजर और कमर्शियल गाड़ियां, ऑफ-रोड वेईकल्स और ईवीटोल्स के लिए सर्विसेज देती है। इसकी ग्राहक बीएमडब्ल्यू एजी, डुकाटी मोटर होल्डिंग, और हमिंगबर्डईवी जैसी दिग्गज कंपनियां हैं।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 55% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹41.17 करोड़ और टोटल इनकम 6% के सीएजीआर से ₹1,216.74 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹400.79 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹116.32 करोड़ पड़े थे।

Hero Motors IPO: क्या है ब्रोकरेजेज की राय

SBI Securities

ब्रोकरेज फर्म एसबीआई सिक्योरिटीज ने हीरो मोटर्स के आईपीओ को न्यूट्रल रेटिंग दी है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि वह लिस्टिंग के बाद कुछ तिमाहियों तक कंपनी के कामकाज पर नजर रखना चाहेगी।

ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से कंपनी का वैल्यूएशन वित्त वर्ष 2026 के लिए 83.8x P/E पर है जो इसकी कम रेवेन्यू ग्रोथ और कुछ ही बड़े ग्राहकों पर निर्भरता को देखते हुए दूसरी कंपनियों के मुकाबले महंगा है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि कंपनी की तकनीकी क्षमताओं के साथ-साथ ई-मोबिलिटी और फोर्ज्ड कंपोनेंट्स में विस्तार उम्मीद जगाती हैं लेकिन मौजूदा वैल्यूएशन में भविष्य की ग्रोथ को पहले ही शामिल कर लिया गया है।

ब्रोकरेज फर्म ने अपनी रिपोर्ट में जिक्र किया है कि वित्त वर्ष 2026 के रेवेन्यू का 61.4% हिस्सा सिर्फ पांच ग्राहकों से आया। ऐसे में इन ग्राहकों की मांग और सोर्सिंग स्ट्रैटेजी में बदलाव का इसके बिजनेस पर असर दिख सकता है।

Anand Rathi

ब्रोकरेज फर्म आनंद राठी का मानना है कि आईपीओ फुल्ली प्राइस्ड है लेकिन इसे लॉन्ग टर्म के लिए सब्सक्राइब रेटिंग दी है।

ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि हीरो मोटर्स ने इलेक्ट्रिक और नॉन-इलेक्ट्रिक मोबिलिटी एप्लीकेशन के लिए तैयार किए गए पावरट्रेन सॉल्यूशन पर फोकस करके ऑटोमोटिव टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में एक अलग पहचान बनाई है। डिजाइन, इंजीनियरिंग, प्रोटोटाइपिंग, वैलिडेशन और मैन्युफैक्चरिंग कैपेबिलिटीज के दम पर यह ऑटोमोटिव ओईएम को सिस्टम-लेवल और कंपोनेंट-लेवल सॉल्यूशन मुहैया कराती है।

हीरो मोटर्स के पोर्टफोलियो में सीवीटी, ईवी ट्रांसमिशन, इलेक्ट्रिक मोटर, ड्राइव यूनिट और गियर सेट शामिल हैं।

हीरो मोटर्स की ई-बाइक पावरट्रेन मार्केट में भी मजबूत स्थिति है। यह भारत से ई-बाइक बनाने वाली कंपनियों को CVT हब बनाने और निर्यात करने वाली इकलौती कंपनी है। ह्यूलैंड (Hewland) में निवेश से हीरो मोटर्स की ट्रांसमिशन डिजाइन और प्रोटोटाइपिंग क्षमताएं मजबूत हुई हैं तो यामाहा मोटर कंपनी लिमिटेड के साथ इसके जॉइंट वेंचर से कंपनी की इलेक्ट्रिक मोटर क्षमताओं को बढ़ावा मिला है।

हीरो मोटर्स की फैसिलिटीज भारत के साथ-साथ यूके और थाईलैंड में भी हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Kanohar Electricals IPO Listing: 8% प्रीमियम पर लिस्ट ₹632 का शेयर, रॉकेट की स्पीड से बढ़ रहा कनोहर का बिजनेस

Kanohar Electricals IPO Listing: ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली कनोहर इलेक्ट्रिकल्स के शेयरों की आज घरेलू मार्केट में प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला था और ओवरऑल इसे 90 गुना से अधिक बोली मिली थी। आईपीओ के तहत ₹632 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE पर इसकी ₹672.05 और NSE पर ₹685.50 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 8% तक का लिस्टिंग गेन (Kanohar Electricals Listing Gain) मिला। लिस्टिंग के बाद शेयर और ऊपर चढ़े। उछलकर BSE पर यह ₹706.25 (Kanohar Electricals Share Price) पर पहुंच गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 11.75% मुनाफे में हैं।

Kanohar Electricals IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

कनोहर इलेक्ट्रिकल्स का ₹1,056 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 8-10 सितंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का धांसू रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 90.59 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 215.37 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 87.74 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 20.51 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹300 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹2 की फेस वैल्यू वाले 1,19,57,915 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹64.18 करोड़ कैपिटल एक्सपेंडिचर की जरूरतों, ₹155.00 करोड़ वर्किंग कैपिटल की बढ़ी जरूरतों, ₹55.50 करोड़ आम कॉरपोरेट उद्देश्यों और ₹65.25 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Kanohar Electricals के बारे में

कनोहर इलेक्ट्रिकल्स देश में ट्रांसफॉर्मर्स बनाती है। यह पावर ट्रांसमिशन, रेलवेज, रिन्यूएबल एनर्जी और पावर डिस्ट्रीब्यूशन जैसी इंडस्ट्रीज को इनकी सप्लाई करती है। इसका कारोबार मुख्य रूप से दो बिजनेस सेगमेंट्स में है- ट्रांसफॉर्मर मैन्युफैक्चरिंग और EPC (इंजीनियरिंग, प्रोक्यूरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन)। यह 100 MVA 132 kV स्कॉट ट्रांसफॉर्मर बनाने वाली उन चार कंपनियों में शुमार है, जिसे रेलवे के R&D से मान्यता मिली हुई है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 170% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹129.73 करोड़ और टोटल इनकम करीब 54% के सीएजीआर से ₹662.86 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹39.04 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹357.95 करोड़ पड़े थे।

 

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Tenneco Clean Air Share: 75% की तेजी के साथ ये शेयर लगाएगा लंबी छलांग, मोतीलाल ओसवाल ने दे दिया बड़ा टारगेट

Tenneco Clean Air India  Share Price: ऑटोमोटिव पार्ट्स बनाने वाली कंपनी टेनेको क्लीन एयर इंडिया (Tenneco Clean Air India) के शेयर 15 सितंबर को 3 फीसदी की तेजी दिखाते नजर आए। शेयर में यह तेजी ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल द्वारा शेयर की कवरेज शुरु करने के बाद आई। मोतीलाल ओसवाल ने शेयर पर Buy रेटिंग दी है और इसके लिए ₹673 का टारगेट प्राइस दिया है।

ब्रोकरेज के ‘बेस केस’ टारगेट का मतलब है कि शुक्रवार को स्टॉक की क्लोजिंग कीमत ₹506.35 से इसमें 33% की बढ़त हो सकती है।

MOFSL को उम्मीद है कि टेनेको क्लीन एयर अपनी ग्रोथ के अगले चरण में प्रवेश करेगी। इसकी वजह क्लीन-एयर और सस्पेंशन प्रोडक्ट्स में कंपनी की लीडरशिप, कड़े एमिशन नियम, गाड़ियों का प्रीमियम होना, नए कस्टमर प्रोग्राम और बढ़ता एक्सपोर्ट है।

ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY26 और FY29 के बीच कमाई में 19% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) होगी, जबकि इसी दौरान क्लीन-एयर और पावरट्रेन रेवेन्यू में लगभग 17% CAGR से बढ़ोतरी की उम्मीद है।

MOFSL के अनुसार, 31 मार्च, 2026 तक कंपनी का ऑर्डर बुक ₹12,400 करोड़ था, जो इसके FY28 रेवेन्यू टारगेट का 100% से ज़्यादा कवरेज देता है।

मजबूत मार्केट पोजीशन

टेनेको क्लीन एयर का कमर्शियल व्हीकल OEM को सप्लाई किए जाने वाले क्लीन-एयर प्रोडक्ट्स में लगभग 58% मार्केट शेयर है, ट्रैक्टर को छोड़कर ऑफ-हाईवे एप्लीकेशन में 68% और पैसेंजर व्हीकल्स में 20% शेयर है। पैसेंजर-व्हीकल शॉक एब्जॉर्बर और स्ट्रट्स में भी इसका लगभग 55% शेयर है।

MOFSL ने कहा कि ग्लोबल टेनेको नेटवर्क के साथ कंपनी के जुड़ने से उसे टेक्नोलॉजी, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी, ग्लोबल OEM संबंध, रिसर्च और डेवलपमेंट क्षमताएं और मैन्युफैक्चरिंग की विशेषज्ञता मिलती है। ब्रोकरेज ने कहा कि कस्टमर के प्रोडक्ट-डेवलपमेंट साइकिल में शामिल होने से ‘स्विचिंग कॉस्ट’ (दूसरे सप्लायर पर जाने की लागत) भी बढ़ जाती है।

क्या है ग्रोथ के मुख्य कारण

ब्रोकरेज BS-VII, CAFE III और TREM-V को प्रति गाड़ी ज़्यादा कंटेंट (पुर्जों/तकनीक) के महत्वपूर्ण कारण के तौर पर देखती है।

कमर्शियल गाड़ियों के लिए, BS-VII और उससे जुड़े एमिशन नियमों से क्लीन-एयर कंटेंट बढ़ने की उम्मीद है, जबकि लाइट कमर्शियल गाड़ियों में कम पैठ (penetration) के कारण मार्केट-शेयर बढ़ाने की गुंजाइश है। ट्रैक्टर एक बड़ा मौका देते हैं, क्योंकि 30-50 HP वाले सेगमेंट का मार्केट में 90% से ज़्यादा हिस्सा है। MOFSL को उम्मीद है कि जैसे-जैसे आफ्टर-ट्रीटमेंट तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा, TREM-V से प्रति गाड़ी क्लीन-एयर कंटेंट ₹5,000 – ₹7,000 तक बढ़ सकता है।

पैसेंजर गाड़ियों में, BS-VII और CAFE III से क्लीन-एयर कंटेंट लगभग 1.3 गुना बढ़ सकता है, जिसकी वजह गैसोलीन डायरेक्ट इंजेक्शन और गैसोलीन पार्टिकुलेट फिल्टर का ज़्यादा इस्तेमाल है। उम्मीद है कि 2028 से एक जापानी OEM के GPF प्रोग्राम से टेनेको के हॉट-एंड बिज़नेस में बढ़ोतरी होगी।

कंपनी ने एक बड़े भारतीय CV OEM के साथ एक नया क्लीन-एयर इंजन प्लेटफॉर्म, एक प्रमुख यूरोपीय कमर्शियल व्हीकल OEM के साथ एक प्रोग्राम और एक ग्लोबल OEM के दो मॉडल्स के लिए CNG प्लेटफॉर्म कोल्ड-एंड असेंबली प्रोग्राम भी हासिल किया है।

सस्पेंशन बिजनेस में 20% की बढ़ोतरी

MOFSL को उम्मीद है कि प्रीमियम बनाने, एक्सपोर्ट, बिज़नेस में ज़्यादा हिस्सेदारी और एडवांस्ड सस्पेंशन सिस्टम के बढ़ते इस्तेमाल की वजह से FY26-FY29 के दौरान सस्पेंशन बिज़नेस में लगभग 20% CAGR (कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट) की बढ़ोतरी होगी।

भारत के पैसेंजर-व्हीकल सस्पेंशन मार्केट में टेनेको की हिस्सेदारी लगभग 55% है। इसका DaVinci DCx, जिसे फरवरी 2026 में महिंद्रा के साथ कमर्शियलाइज़ किया गया था, बहुत कम कीमत पर सेमी-एक्टिव सिस्टम जैसा लगभग 85-90% आराम देता है। MOFSL का मानना ​​है कि यह टेक्नोलॉजी ₹10-35 लाख वाले पैसेंजर-व्हीकल सेगमेंट के लिए काम आ सकती है, जिसका मार्केट में लगभग 70% हिस्सा है।

बढ़ेगा एक्सपोर्ट

टेनेको क्लीन एयर को ग्लोबल टेनेको नेटवर्क में मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट हब के तौर पर भी तैयार किया जा रहा है, जिसके प्रोडक्ट्स नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, एशिया-पैसिफिक और अफ्रीका में सप्लाई किए जाते हैं।

कंपनी अभी लगभग 18-22 देशों में एक्सपोर्ट करती है, जबकि MOFSL को उम्मीद है कि FY29 तक एक्सपोर्ट वैल्यू-एडेड रेवेन्यू का 15% हो जाएगा, जो अभी 7% है। ब्रोकरेज के अनुसार, मौजूदा ऑर्डर बुक में एक्सपोर्ट का हिस्सा लगभग 14% है और आम तौर पर घरेलू बिज़नेस की तुलना में इसमें ज़्यादा मार्जिन मिलता है।

कंपनी के फाइनेंशियल अनुमानों पर ब्रोकरेज की राय

MOFSL को उम्मीद है कि टेनेको का रेवेन्यू FY26 में ₹5,404 करोड़ से बढ़कर FY29 तक ₹8,985 करोड़ हो जाएगा। इसी दौरान EBITDA (ब्याज, टैक्स, डेप्रिसिएशन और अमॉर्टाइजेशन से पहले की कमाई) के ₹925.5 करोड़ से बढ़कर ₹1,560.8 करोड़ होने का अनुमान है, और EBITDA मार्जिन 17.1% से बढ़कर 17.4% हो जाएगा।

टैक्स के बाद एडजस्टेड प्रॉफ़िट के FY26 में ₹630.4 करोड़ से बढ़कर FY29 में ₹1,026 करोड़ होने का अनुमान है, जबकि EPS के ₹15.6 से बढ़कर ₹25.4 होने की उम्मीद है।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंपनी की मज़बूत बैलेंस शीट इस ग्रोथ में मदद करेगी। टेनेको क्लीन एयर की नेट कैश पोज़िशन है, वर्किंग कैपिटल नेगेटिव है और कोर RoCE 90% से ज़्यादा है। साथ ही, कैश-फ़्लो कन्वर्ज़न के भी हेल्दी रहने की उम्मीद है, जिसमें CFO/EBITDA 70% से ज़्यादा और FCF/PAT 80% से ज़्यादा रहेगा।

टेनेको क्लीन एयर का वैल्यूएशन

MOFSL के ₹506 के रेफरेंस प्राइस पर, स्टॉक FY28E की कमाई के 26.1 गुना और FY29E की कमाई के 19.9 गुना पर ट्रेड कर रहा था। ब्रोकरेज ने स्टॉक का वैल्यूएशन सितंबर 2028 की कमाई के 30 गुना के आधार पर किया है, जिससे इसका टारगेट प्राइस ₹673 तय हुआ है।

लंबी अवधि में दे सकता है 75% का रिटर्न

मोतीलाल ओसवाल के ‘बुल केस’ (तेजी वाले अनुमान) में FY29 तक 22.7% रेवेन्यू CAGR, BS-VII को पूरी तरह लागू करने, EV को धीरे अपनाने और सस्पेंशन की तेज़ी से बढ़ती मांग को आधार माना गया है। इस स्थिति में टेनेको क्लीन एयर (Tenneco Clean Air) के लिए ₹886 का प्राइस टारगेट तय किया गया है, जिसका मतलब है कि मौजूदा कीमत से इसमें लगभग 75% की बढ़त की संभावना है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Apana Logistics IPO Listing: खुदरा निवेशकों को बड़ा झटका, ताबड़तोड़ लगाया पैसा, अब ₹60 का शेयर फ्लैट लिस्ट

Apana Logistics IPO Listing: कंटेनर्स को हैंडल करने वाली अपाना लॉजिस्टिक्स के शेयर की आज BSE SME पर फ्लैट एंट्री हुई। इसके आईपीओ को भी निवेशकों का फीका रिस्पांस मिला था और NII (नॉन-इंस्टीट्यूशनल इंवेस्टर्स) का हिस्सा तो पूरा भर भी नहीं पाया था। आईपीओ के तहत ₹60 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज BSE SME पर इसकी ₹60.00 पर ही एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को कोई लिस्टिंग गेन नहीं मिला। आईपीओ निवेशकों को और झटका तब लगा, जब शेयर इसी लेवल पर बना हुआ है। फिलहाल यह ₹60.00 (Apana Logistics Share Price)  पर है यानी कि आईपीओ निवेशक न फायदे में हैं और न घाटे में।

Apana Logistics IPO को मिला था फीका रिस्पांस

अपाना लॉजिस्टिक्स का ₹34 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 7-9 सितंबर तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का मिला-जुला रिस्पांस मिला था और खुदरा निवेशकों के दम पर ओवरऑल यह 1.26 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 0.28 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 2.23 गुना भरा था। इस आईपीओ के तहत ₹10 की फेस वैल्यू वाले 54 लाख नए शेयर जारी हुए हैं।

Apana Logistics के बारे में

अपाना लॉजिस्टिक्स कंटेनर्स की हैंडलिंग और ट्रांसपोर्टेशन का काम करती है। यह कई तरह की लॉजिस्टिक्स सर्विसेज देती है जैसे कि सीएफएस (कंटेनर फ्रेट स्टेशन), आईसीडी (इनलैंड कंटेनर डिपोट) और पोर्ट्स पर कंटेनर हैंडलिंग; रोड ट्रांसपोर्टेशन, थर्ड पार्टी वेयरहाउसेज पर कार्गो हैंडलिंग। इसके अलावा यह ट्रक-ट्रेलर्स और रीच स्टैकर्स के O&M (ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस) का काम भी संभालती है। मार्च 2026 तक इसके बेड़े में 33 ट्रक-ट्रेलर्स, 5 रीच स्टेकर्स और 2 क्रेन्स थे।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना करीब 40% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹5.86 करोड़ और टोटल इनकम करीब 24% के सीएजीआर से ₹31.07 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹6.30 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹8.45 करोड़ पड़े थे।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

iPhone Duo vs Investment: ₹4.49 लाख का फोन खरीदना सही या इसी पैसे को निवेश करना? समझिए पूरा हिसाब

iPhone Duo vs Investment: अमेरिकी टेक कंपनी Apple का iPhone Duo 2TB भारत में ₹4.49 लाख का है। इतनी कीमत में यह फोन लग्जरी खरीदारी की कैटेगरी में आता है। ऐसे में सवाल सिर्फ ये नहीं कि आप इसे खरीद सकते हैं या नहीं। सवाल ये भी है कि अगर यही ₹4.49 लाख निवेश कर दिए जाएं, तो आगे कितनी रकम बन सकती है।

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, फैसला सिर्फ फोन की कीमत देखकर नहीं करना चाहिए। आपकी आमदनी, बचत, निवेश और दूसरे खर्च भी देखने होंगे। साथ ही ये भी देखना होगा कि इस पैसे को खर्च करने की निवेश करने की सूरत क्या रहेगी।

क्या ₹4.49 लाख का iPhone खरीदना सही है?

₹4.49 लाख का स्मार्टफोन खर्च है। इसे निवेश नहीं माना जा सकता। इसलिए खरीदारी तभी ठीक है, जब यह पैसा आपकी अतिरिक्त आय से आ रहा हो। इससे आपके दूसरे वित्तीय लक्ष्य भी प्रभावित नहीं होने चाहिए।

MidasX के को-फाउंडर और CIS अनिल गुप्ता ने कहा, ‘वेल्थ क्रिएशन के नजरिए से ₹4.49 लाख का प्रीमियम स्मार्टफोन खरीदना कंजम्पशन डिसीजन है, निवेश का फैसला नहीं।’ उनके मुताबिक, सवाल सिर्फ फोन की कीमत का नहीं है। यह भी देखना जरूरी है कि अगर यही ₹4.49 लाख कहीं निवेश किए जाते, तो आगे कितनी रकम बन सकती थी।

गुप्ता का कहना है कि इंडेक्स फंड में लगाया पैसा समय के साथ बढ़ सकता है। वहीं फोन खरीदते ही उसकी वैल्यू कम होने लगती है। अगर आपके पास पहले से इमरजेंसी फंड है। पर्याप्त इंश्योरेंस है। लंबे समय के निवेश भी चल रहे हैं। तब इसे लाइफस्टाइल खर्च माना जा सकता है।

कम कीमत का फोन लेकर बाकी पैसा लगाएं?

Capwise Financial Services के फाउंडर और CEO नरेश बियानी के मुताबिक, फैसला सिर्फ फोन और इंडेक्स फंड के बीच नहीं होना चाहिए। आप कम कीमत का फोन भी खरीद सकते हैं। बची रकम को निवेश किया जा सकता है।

लोन लेकर फोन खरीद रहे हैं तो मामला और अहम हो जाता है। Anand Rathi Wealth के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर मनीष श्रीवास्तव के मुताबिक, ₹4.5 लाख के फोन पर दो साल की EMI करीब ₹18,000-19,000 महीने हो सकती है। अगर ये आपकी इनहैंड सैलरी के 5-10% से ज्यादा है और पहले से दूसरी EMI चल रही है, तो ये बड़ा बोझ बन सकता है।

₹4.49 लाख निवेश करने पर कितनी रकम बन सकती है?

मान लीजिए ₹4.49 लाख को एकमुश्त इंडेक्स फंड में लगाया गया। 11% CAGR मानने पर यह रकम 10 साल में करीब ₹12.7 लाख हो सकती है। 15 साल में करीब ₹21.5 लाख और 20 साल में करीब ₹36.2 लाख हो सकती है।

अगर Diversified Equity Fund में 13% CAGR मानें, तो यही रकम 10 साल में करीब ₹15.25 लाख हो सकती है। 15 साल में करीब ₹28.1 लाख और 20 साल में करीब ₹51.8 लाख हो सकती है।

ब्रोकिंग फर्म आनंद राठी के मुताबिक, Nifty 50 ने लंबे समय में करीब 10-11% रिटर्न दिया है। Diversified Equity Funds एक्टिव मैनेजमेंट के जरिए ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं।

खरीदने से पहले इन बातों पर गौर करें

सबसे पहले देखें कि ₹4.49 लाख आपकी सरप्लस रकम है या बचत का हिस्सा। नरेश बियानी ने इसे मासिक खर्च के हिसाब से देखने की भी सलाह दी है। तीन साल में इस खर्च को बांटें तो यह करीब ₹12,500 महीने बैठता है।

मनीष श्रीवास्तव के मुताबिक, बड़ी खरीदारी से पहले 6-8 महीने का इमरजेंसी फंड होना चाहिए। हेल्थ और टर्म इंश्योरेंस भी पर्याप्त होना चाहिए। हाई-इंटरेस्ट कर्ज नहीं होना चाहिए। वित्तीय लक्ष्यों के लिए निवेश भी चलता रहना चाहिए। उनके मुताबिक, आपकी कुल मासिक EMI और फिक्स्ड खर्च आपकी आय के 40-50% से ज्यादा नहीं होने चाहिए।

आईफोन डुओ खरीदें या फिर निवेश करें?

Rupyaapaisa.com के फाउंडर और MD मुकेश पांडे के मुताबिक, अगर फोन खरीदने के बाद भी पर्याप्त खर्च करने लायक रकम बचती है। और इससे जरूरी वित्तीय लक्ष्य प्रभावित नहीं होते, तो खरीदारी की जा सकती है। लेकिन अगर ₹4.49 लाख आपकी बचत का बड़ा हिस्सा है, तो पैसा निवेश करना ज्यादा बेहतर विकल्प हो सकता है।

आखिर में फैसला आपकी जेब और वित्तीय स्थिति पर निर्भर करता है। अगर फोन सरप्लस इनकम से खरीदा जा रहा है, तो यह जरूरी नहीं कि फैसला गलत हो। लेकिन अगर इसके लिए निवेश रोकना पड़ रहा है या इमरजेंसी फंड खत्म हो रहा है, तो ₹4.49 लाख की Opportunity Cost काफी बड़ी हो सकती है।

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Disclaimer: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए सलाह या विचार एक्सपर्ट/ब्रोकरेज फर्म के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदायी नहीं है। यूजर्स को मनीकंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले हमेशा सर्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

Pranav Constructions IPO को 126 गुना बोली, अब ग्रे मार्केट से 15 सितंबर को तगड़ी लिस्टिंग के संकेत

Pranav Constructions IPO: ग्रेटर मुंबई में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट पर काम करने वाली प्रणव कंस्ट्रक्शंस के आईपीओ को निवेशकों को धांसू रिस्पांस मिला था। तीन दिनों में इसका ₹351 करोड़ का आईपाीओ 126 गुना से अधिक भरा था। अब 10 सितंबर को शेयरों के अलॉटमेंट के बाद 15 सितंबर को लिस्टिंग का इंतजार है। लिस्टिंग को लेकर ग्रे मार्केट से मजबूत संकेत मिल रहे हैं और GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) फिलहाल ₹48 यानी 38.71% है यानी कि बीएसई और एनएसई पर इसके शेयरों की करीब 39% प्रीमियम पर एंट्री हो सकती है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक जीएमपी की बजाय लिस्टिंग के दिन मार्केट सेंटिमेंट के साथ-साथ कंपनी के फंडामेंटल्स और फाइनेंशियल्स ही शेयरों की चाल तय करते हैं।

Pranav Constructions IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

प्रणव कंस्ट्रक्शंस का ₹351 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 7-9 सितंबर तक खुला था। इसका प्राइस बैंड प्रति शेयर ₹118-₹124 था। इस आईपीओ को निवेशकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 126.34 गुना सब्सक्राइब हुआ। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 268.54 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 217.73 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 45.31 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹316 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 28,56,869 शेयर यानी ₹35 करोड़ के शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला हैं। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹145.72 करोड़ रीडेवलपमेंट से जुड़े सभी खर्चों, ₹91.50 करोड़ कर्ज हल्का करने, ₹42.57 करोड़ भविष्य के रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स के अधिग्रहण की फंडिंग और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों, और ₹40.31 करोड़ आईपीओ से जुड़े एक्सपेंसेज पर खर्च होंगे।

Pranav Constructions के बारे में

प्रणव कंस्ट्रक्शंस एक रियल एस्टेट कंपनी है जो ग्रेटर मुंबई में रीडेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स पर काम करती है। इसका फोकस वेस्टर्न सबअर्ब्स पर है। यह रीडेवलपमेंट कंपनी है यानी कि इसका मुख्य बिजनेस जमीन खरीदकर उस पर बिल्डिंग बनाना नहीं बल्कि मौजूदा पुरानी सोसायटी/प्रॉपर्टी को फिर से डेवलप करना है। मार्च 2026 तक के आंकड़ों के हिसाब से इसके 28 प्रोडेक्ट्स पूरे हो चुके हैं, 20 पर काम चल रहा है तो 17 पर काम अभी शुरू होना है। यह कम कीमत वाले घरों से लेकर प्रीमियम सेगमेंट के भी प्रोजेक्ट्स पर काम करती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 34% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹71.32 करोड़ और टोटल इनकम 30% से अधिक के सीएजीआर से ₹763.93 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹258.44 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹159.52 करोड़ पड़े थे।

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