Lalithaa Jewellery Listing: 66 गुना सब्सक्राइब आईपीओ, ₹201 के शेयर चमकाएंगे पोर्टफोलियो या रेड लिस्ट?

Lalithaa Jewellery Listing: आईपीओ को 66 गुना से अधिक बोली मिलने के बाद अब दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों की ज्वैलरी रिटेल कंपनी ललिता ज्लैवरी मार्ट के शेयरों की लिस्टिंग का इंतजार है। ग्रे मार्केट से बात करें तो इसके शेयरों की लिस्टिंग को लेकर शानदार संकेत मिल रहे हैं। ग्रे मार्केट में इसकी GMP (ग्रे मार्केट प्रीमियम) इश्यू प्राइस से ₹72 यानी 35.82% है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 24 अगस्त को करीब 36% का लिस्टिंग गेन मिल सकता है। हालांकि मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक यह ग्रे मार्केट से मिले संकेतों की बजाय कंपनी की कारोबारी सेहत और लिस्टिंग के दिन मार्केट की परिस्थिति पर निर्भर रहेगा।

इसके शेयर आईपीओ निवेशकों को ₹201 के भाव पर जारी हुए हैं। इसका अलॉटमेंट फाइनल हो चुका है जिसका स्टेटस बीएसई या रजिस्ट्रार एमयूएफजी की साइट पर देख सकते हैं, जिसका स्टेपवाइज प्रोसेस नीचे दिया जा रहा है।

BSE की साइट पर ऐसे करें चेक

https://www.bseindia.com/investors/appli_check.aspx, इस लिंक पर जाएं।

इश्यू टाइप ‘Equity’ चुनें। इश्यू नाम Lalithaa Jewellery चुनें।

एप्लीकेशन नंबर या पैन भरें।

फिर I’m not a robot पर क्लिक करें।

सर्च पर क्लिक करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

रजिस्ट्रार की साइट पर ऐसे करें स्टेटस चेक

https://in.mpms.mufg.com/Initial_Offer/public-issues.html, लिंक पर क्लिक करें।

सेलेक्ट कंपनी पर क्लिक करके Lalithaa Jewellery चुनें।

पैन, एप्लीकेशन नंबर, डीपी/क्लाइंट आईडी, अकाउंट नंबर/IFSC में से कोई भी चुनें। फिर जो विकल्प चुना है, उसके मुताबिक डिटेल्स दें। जैसे कि पैन चुना है तो पैन भरें।

सबमिट करें।

शेयरों का अलॉटमेंट स्टेटस स्कीन पर दिखने लगा कि कितने शेयर अलॉट हुए।

Lalithaa Jewellery IPO को मिला था तगड़ा रिस्पांस

ललिता ज्वैलरी का ₹1,700 करोड़ का आईपीओ 17-19 अगस्त तक खुला था। इसे हर कैटेगरी के निवेशकों का शानदार रिस्पांस मिला और ओवरऑल यह 66.63 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 153.80 गुना, नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 78.17 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 12.51 गुना और एंप्लॉयीज का हिस्सा 9.10 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹1,200 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹5 की फेस वैल्यू वाले 2,48,75,621 शेयरों की ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिक्री हुई है। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले प्रमोटर किरण कुमार जैन को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹1,033.23 करोड़ 10 नए स्टोर्स के सेटअप और बाकी आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Lalithaa Jewellery के बारे में

ललिता ज्वैलरी का कारोबार दक्षिण भारत के टियर-2 और टियर-3 शहरों में मजबूती से फैला हुआ है। यह सोने, चांदी, हीरे इत्यादि के गहने बनाती है। ललिता ज्वैलरी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 67% से अधिक की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹1,009.82 करोड़ और टोटल इनकम 22% के सीएजीआर से ₹25,039.80 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹1,604.14 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹2,679.74 करोड़ पड़े थे।

आईपीओ को लेकर क्या था ब्रोकरेजेज का रुझान

एसबीआई सिक्योरिटीज ने ललिता ज्वैलरी आईपीओ को न्यूट्रल रेटिंग दी थी। ब्रोकरेज फर्म ने कहा था कि वह अभी की बजाय लिस्टिंग के बाद कुछ तिमाही तक कंपनी के परफॉरमेंस को ट्रैक करेगी। आईपीओ के अपर प्राइस बैंड से कंपनी की वैल्यू वित्त वर्ष 2026 की कमाई के मुकाबले 11.1 गुना पर थी जोकि ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक इंडस्ट्री पियर्स के हिसाब से है। हालांकि हेजिंग पॉलिसी नहीं होने को एक रिस्क बताया था। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक गोल्ड के भाव स्थिर होने पर कंपनी का मार्जिन कम हो सकता है।

एक और ब्रोकरेज फर्म स्वास्तिक इंवेस्टमार्ट ने ललिता ज्वैलरी को सब्सक्राइब रेटिंग दी थी। ब्रोकरेज फर्म ने लिस्टिंग गेन के साथ-साथ रिस्क उठा सकने वाले निवेशकों को लॉन्ग टर्म के लिए पैसे लगाने की सलाह दी है। ब्रोकरेज फर्म के मुताबिक कल्याण ज्लैवर्स (Kalyan Jewellers) और टाइटन (Titan) जैसे दिग्गजों के मुकाबले P/E बेसिस पर यह आईपीओ 75% डिस्काउंट पर है। इसके अलावा ब्रोकरेज फर्म ने ₹1066 करोड़ के जीएसटी विवाद और प्रमोटर से जुड़े मामले को अहम रिस्क के तौर पर जिक्र किया है लेकिन यह भी कहा कि टैक्स से जुड़े पुराने मामले काफी हद तक सुलझ चुके हैं।

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डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

इस म्यूचुअल फंड ने ₹1 लाख के निवेश को ₹46 लाख बना दिया, जानिए इस स्कीम के बारे में

म्यूचुअल फंड में निवेश से जोरदार रिटर्न में फंड सेलेक्शन का बड़ा हाथ है। अगर निवेश के लिए सही फंड का चुनाव हो जाए तो फिर पैसे बढ़ना तय है। आईसीआईसीआई एएमसी के फंड ने निवेशकों को मालामाल किया है। इस फंड का नाम आईसीआआईसीआई वैल्यू प्रूडेंशियल फंड है। इस फंड ने सिर्फ 1 लाख रुपये के निवेश को 22 साल में 46.6 लाख रुपये बना दिया है।

इस फंड ने एकमुश्त और सिप दोनों निवेशकों को किया मालामाल

ICICI Prudential Asset Management Company ने अपने इस फंड के बारे में बताया है। ICICI Prudential Value Fund की शुरुआत 22 साल पहले हुई थी। इस फंड ने शुरुआत में पैसे लगाने वाले एकमुश्त और सिप दोनों निवेशकों को मालामाल किया है। इसका कंपाउंडेड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) 19.11 फीसदी है। इसने Nifty Total Return Index (TRI) के मुकाबले काफी ज्यादा रिटर्न दिया है। इस अवधि में निफ्टी 50 टीआरआई का सीएजीआर 14.63 फीसदी है।

वैल्यू इनवेस्टिंग की स्ट्रेटेजी का करता है इस्तेमाल 

आईसीआईसीआई प्रूडेंशियल वैल्यू फंड की शुरुआत 16 अगस्त, 2004 को हुई थी। इस फंड ने हाल ही में 22 साल पूरे किए हैं। यह फंड वैल्यू ओरिएंटेड इक्विटी इनवेस्टमेंट स्ट्रेटेजी का इस्तेमाल करता है। इस फंड का फोकस उन कंपनियों के शेयरों में निवेश करने पर होता है, जिनमें उनके इंटिनसिक वैल्यू से कम पर ट्रेडिंग हो रही होती है। ऐसी कंपनी छोटी या बड़ी हो सकती है।

तीन साल और पांच साल के टाइम फ्रेम में भी अच्छा रिटर्न 

इस फंड का रिटर्न तीन साल और पांच साल के टाइम फ्रेम में भी बहुत अच्छा है। यह क्रमश: 13.44 फीसदी और 16.05 फीसदी है। अगर किसी निवेशक ने इस फंड की शुरुआत के समय इसमें हर महीने 10,000 रुपये का सिप शुरू किया होता तो उसका पैसा बढ़कर 2.37 करोड़ रुपये हो गया होता। यह 17.04 फीसदी का सीएजीआर रिटर्न है। 31 जुलाई को इस फंड का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) 61,102.29 करोड़ रुपये था।

93 फीसदी पैसे का निवेश शेयरों में, फाइनेंशियल कंपनियों में ज्यादा निवेश 

इस फंड ने अपना 93.31 पैसा शेयरों में निवेश किया है। सबसे ज्यादा 38.10 फीसदी निवेश फाइनेंशियल सर्विसेज कंपनियों के शेयरों में है। इसके बाद 9.08 फीसदी का निवेश हेल्थकेयर सर्विसेज कंपनियों के शेयरों में है। उसके बाद 9 फीसदी का निवेश एफएमसीजी कंपनियों के शेयरों में है। इस फंड ने 2022 में अपने बेंचमार्क को निफ्टी 500 वैल्यू 50 टीआरआई से बदलकर निफ्टी 500 टीआरआई कर दिया था।

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निवेश से पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की राय जरूर लें

अगर आप इस फंड में निवेश करना चाहते हैं तो आपको पहले अपने फाइनेंशियल एडवाइजर की सलाह लेनी चाहिए। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी फंड के पिछले रिटर्न को देख भविष्य में उसके रिटर्न का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। निवेशक को रिस्क लेने की अपनी क्षमता, निवेश की अवधि और निवेश के लक्ष्य को ध्यान में रख निवेश का फैसला करना चाहिए।

Stock To Buy: सिक्योरिटी सर्विलांस प्रोडक्ट बनाने वाली इस कंपनी में 53% की तेजी मुमकिन, इस साल अब तक 125% चढ़ा, क्या है आपके पास

Stock To Buy: CP Plus की पैरेंट कंपनी, आदित्य इन्फोटेक (Aditya Infotech) के शेयर गुरुवार, 20 अगस्त को 4.9% बढ़कर ₹3,464 पर पहुंच गए। स्टॉक में तेजी मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज द्वारा इस स्टॉक पर कवरेज शुरू करने के बाद आई है। मोतीलाल ओसवाल ने आदित्य इन्फोटेक के लिए “Buy” (खरीदने की सलाह) की सलाह दी है और इसके लिए ₹4,200 का प्राइस टारगेट तय किया है, जो बुधवार के क्लोजिंग लेवल से 27% की तेजी दिखाता है।

ब्रोकरेज फर्म ने कंपनी के ‘बुल केस’ (सबसे अच्छे हालात) रन के अनुसार, स्टॉक ₹5,066 तक जा सकता है, जिसका मतलब है कि इसमें 53% तक की बढ़ोतरी की संभावना है।

मोतीलाल ओसवाल का कहना है कि आदित्य इन्फोटेक भारत के वीडियो सर्विलांस मार्केट में होने वाली ग्रोथ का फायदा उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है। इस मार्केट में कंपनी की हिस्सेदारी 44% से ज़्यादा है।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि भारत का सर्विलांस मार्केट फाइनेंशियल ईयर 2025 में ₹106 अरब से बढ़कर फाइनेंशियल ईयर 2030 तक ₹227 अरब से ज़्यादा हो जाएगा। उन्हें यह भी उम्मीद है कि आदित्य इन्फोटेक का रेवेन्यू FY26 और FY28 के बीच 44% की कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) से बढ़ेगा, जो इंडस्ट्री की अनुमानित 16%-18% ग्रोथ से काफी ज़्यादा है।

मोतीलाल ओसवाल के अनुसार, स्टैंडर्डाइजेशन टेस्टिंग एंड क्वालिटी सर्टिफिकेशन (STQC) के नियम कॉम्पिटिशन को कम कर सकते हैं और कंपनी को फाइनेंशियल ईयर 2028 तक अपनी मार्केट हिस्सेदारी 58% से ज़्यादा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

ब्रोकरेज को उम्मीद है कि कंपनी FY26-FY28 के दौरान रेवेन्यू, EBITDA और टैक्स के बाद प्रॉफिट में क्रमशः 44%, 58% और 64% की ग्रोथ हासिल करेगी। उन्होंने कॉस्ट एफिशिएंसी और मार्जिन बढ़ाने के लिए लेंस, केबल, प्लास्टिक और मेटल कंपोनेंट्स में बैकवर्ड इंटीग्रेशन को भी एक अहम वजह बताया है।

कंपनी ने ₹1,500 करोड़ जुटाने को मंज़ूरी दी

इसके अलावा, कंपनी के बोर्ड ने 19 अगस्त को इक्विटी शेयर जारी करके ₹1,500 करोड़ तक जुटाने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी। फंड जुटाने का काम एक या उससे ज़्यादा मंज़ूर तरीकों से किया जा सकता है, जैसे कि पब्लिक इश्यू या क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल प्लेसमेंट (QIP), या फिर इन तरीकों का मिला-जुला इस्तेमाल।

फंड जुटाने का यह प्रस्ताव शेयरहोल्डर्स और दूसरी रेगुलेटरी मंज़ूरी पर निर्भर है। कंपनी पोस्टल बैलेट के ज़रिए शेयरहोल्डर्स की मंज़ूरी लेगी और उसने इस प्रस्तावित इश्यू से जुड़े मामलों को देखने के लिए एक बोर्ड कमिटी भी बनाई है।

19 अगस्त की एक्सचेंज फाइलिंग के मुताबिक, कंपनी ने मुंबई में 24 से 26 अगस्त और सिंगापुर में 1 से 3 सितंबर के बीच इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स के साथ वन-ऑन-वन ​​और ग्रुप मीटिंग्स भी तय की हैं।

मार्जिन गाइडेंस

जून तिमाही के नतीजों के बाद, आदित्य इन्फोटेक ने FY27 के लिए अपने EBITDA मार्जिन गाइडेंस (14-15%) को फिर से दोहराया है, जबकि Q1FY27 में EBITDA मार्जिन 14.5% था। मैनेजमेंट ने संकेत दिया है कि वे FY27 की पहली छमाही के बाद आउटलुक का फिर से आकलन करेंगे, साथ ही वे तय गाइडेंस से बेहतर परफॉर्मेंस का इंटरनल टारगेट भी बनाए रखेंगे।

शेयर पर एनालिस्ट की राय

IIFL इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज़ भी आदित्य इन्फोटेक को लेकर पॉजिटिव है। सीनियर वाइस प्रेसिडेंट-रिसर्च रेनू बैद पुगलिया का कहना है कि कंपनी ने भारत के IP कैमरा मार्केट में मज़बूत जगह बनाई है। उन्होंने कैमरा वैल्यू चेन के बड़े हिस्से के लोकलाइज़ेशन (स्थानीय स्तर पर उत्पादन) पर ज़ोर दिया और कहा कि कंपनी को घरेलू प्रतिस्पर्धियों के मुकाबले 18-24 महीने की बढ़त हासिल है, जिसका इस्तेमाल वह एंटरप्राइज़ और सरकारी ग्राहकों के लिए प्रीमियम प्रोडक्ट्स में विस्तार करने के लिए कर रही है।

उन्हें उम्मीद है कि आदित्य इन्फोटेक 40-45% रेवेन्यू CAGR हासिल करेगी, जिसमें मार्जिन 14.5-15% के आसपास रहेगा, जिससे अगले दो सालों में कमाई में 45-50% की बढ़ोतरी होगी। उन्होंने सरकारी सर्टिफिकेशन की नई ज़रूरतों के बाद चीनी कंपनियों के बाहर निकलने को भी कंपनी के ग्रोथ आउटलुक के लिए एक मददगार कारक बताया।

यह स्टॉक “कंसेंसस बाय” (सबकी सहमति से खरीदने लायक) की श्रेणी में है, क्योंकि इस स्टॉक को ट्रैक करने वाले सभी सात एनालिस्ट इसे लेकर बुलिश (तेज़ी की उम्मीद रखने वाले) हैं।

गुरुवार को आदित्य इन्फोटेक के शेयर 4.71% बढ़कर ₹3,459.2 पर ट्रेड कर रहे हैं। इस साल अब तक स्टॉक में 125% की बढ़ोतरी हो चुकी है।

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(डिस्क्लेमर: मनीकंट्रोल.कॉम पर दिए गए विचार एक्सपर्ट के अपने निजी विचार होते हैं। वेबसाइट या मैनेजमेंट इसके लिए उत्तरदाई नहीं है। यूजर्स को मनी कंट्रोल की सलाह है कि कोई भी निवेश निर्णय लेने से पहले सार्टिफाइड एक्सपर्ट की सलाह लें।

नोएडा का ये OTT स्टार्टअप हरियाणवी-भोजपुरी कंटेंट के दम पर चमका! 2 साल में 6.3 गुना बढ़ा रेवेन्यू

STAGE OTT Platform: भारत में जब ओटीटी प्लेटफॉर्म्स की बात होती है, तो ज्यादातर लोग नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम का नाम लेते हैं। लेकिन इस बीच देश के रीजनल ‘बोली आधारित’ ओटीटी प्लेटफॉर्म STAGE ने चुपके से एक ऐसा बड़ा मार्केट कब्जा लिया है, जिसे बड़े-बड़े ब्रॉडकास्टर्स ‘निश’ (Niche) समझकर छोड़ देते थे।

कंपनी द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, FY24 से FY26 के बीच STAGE के रेवेन्यू में 6.3 गुना का जबरदस्त इजाफा हुआ है। इसका सालाना कंपाउंडेड ग्रोथ रेट (CAGR) लगभग 150% रहा है।

FICCI-EY की रिपोर्ट के अनुसार, भारत के डिजिटल वीडियो और ओटीटी मार्केट में बड़े दिग्गजों के बीच STAGE ने अपनी मजबूत जगह बना ली है। भारतीय ओटीटी मार्केट में STAGE की हिस्सेदारी 1.6% पर पहुंच गई है। STAGE ने अपनी शुरुआत हरियाणवी और राजस्थानी बोलियों से की थी, लेकिन अब यह मॉडल 6 भाषा क्षेत्रों में फैल चुका है।

STAGE के सह-संस्थापक और सीईओ विनय सिंघल ने कहा, ‘भारत में 22 आधिकारिक भाषाएं और 1,900 से ज्यादा बोलियां हैं, लेकिन स्ट्रीमिंग इंडस्ट्री ने सिर्फ 5-6 भाषाओं के लिए कंटेंट बनाया। बाकी सबको ‘निश’ कह दिया गया। जबकि देश में ओटीटी पर आधा कंटेंट क्षेत्रीय भाषाओं में देखा जा रहा है। हमने सिर्फ देश की असली संस्कृति को सम्मान देकर प्लेटफॉर्म बनाया है।’

99% कमाई सिर्फ सब्सक्रिप्शन से, विज्ञापन का कोई चक्कर नहीं

जहाँ कई ऐप्स विज्ञापनों पर निर्भर हैं, वहीं STAGE पूरी तरह से ‘सब्सक्रिप्शन-ओनली’ मॉडल पर काम करता है। FY26 में कंपनी की कुल कमाई का 99.2% हिस्सा केवल यूजर सब्सक्रिप्शन से आया है। Q1 FY27 में कुल सब्सक्रिप्शन रेवेन्यू का 80.3% हिस्सा पुराने यूजर्स के रिन्यूअल और रिएक्टिवेशन से आया है। FY24 में यह आंकड़ा सिर्फ 30.4% था, जो दिखाता है कि यूजर्स को इसका कंटेंट बेहद पसंद आ रहा है।

AI के इस्तेमाल से कंटेंट बनाना हुआ सस्ता

STAGE ने अपनी प्रोडक्शन कॉस्ट को घटाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल शुरू किया है। एआई की मदद से ओरिजिनल शोज और मूवीज का प्रोडक्शन टाइम और लागत दोनों काफी कम हो गए हैं। इससे उन भाषाओं/बोलियों में भी कंटेंट बनाना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो गया है, जहां पहले पारंपरिक तरीके से काम करना नामुमकिन माना जाता था।

Zerodha का बड़ा ऐलान: अब एक ही ऐप पर मिलेंगे शेयर और म्यूचुअल फंड, Kite में ही शुरू होगी डायरेक्ट SIP

Zerodha Kite Mutual Fund Trading: देश के सबसे बड़े डिस्काउंट ब्रोकर्स में शामिल जेरोधा ने अपने करोड़ों यूजर्स के लिए बड़ा फैसला किया है। Zerodha बहुत जल्द अपने पॉपुलर स्टॉक ट्रेडिंग ऐप ‘Kite’ पर ही म्यूचुअल फंड में निवेश करने की सुविधा देने जा रहा है। यानी अब निवेशकों को शेयर खरीदने और म्यूचुअल फंड/SIP में पैसा लगाने के लिए अलग-अलग ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करना पड़ेगा।

कंपनी के म्यूचुअल फंड हेड नीलेश वर्मा ने मनीकंट्रोल को दिए इंटरव्यू में बताया कि अगले कुछ ही महीनों में यह नया फीचर Kite ऐप पर लाइव कर दिया जाएगा।

अभी क्या है व्यवस्था और क्यों हो रहा है यह बड़ा बदलाव?

अब तक Zerodha अपने यूजर्स के लिए दो अलग-अलग ऐप्स का इस्तेमाल करता रहा है:

Kite App: एक्टिव ट्रेडिंग और शेयरों की खरीद-बिक्री के लिए।

Coin App: लॉन्ग-टर्म और पैसिव इन्वेस्टमेंट्स जैसे म्यूचुअल फंड्स, NPS और FD के लिए।

फिलहाल, जब यूजर्स Kite ऐप पर म्यूचुअल फंड्स देखते हैं, तो उन्हें खरीदारी करने के लिए ऑटोमैटिकली Coin ऐप पर रीडायरेक्ट कर दिया जाता है। लेकिन Groww जैसे प्रतिस्पर्धी ब्रोकर्स द्वारा एक ही ऐप पर सभी सुविधाएं देने के कारण यूजर्स काफी समय से Zerodha से भी ‘ऑल-इन-वन ऐप’ की मांग कर रहे थे।

Kite ऐप में मिलेंगे 2 सबसे खास और नए फीचर्स

सिंगल ऐप एक्सपीरियंस: अब यूजर्स अपने इक्विटी पोर्टफोलियो और म्यूचुअल फंड निवेश को एक ही स्क्रीन से मैनेज और ट्रैक कर पाएंगे।

पोर्टफोलियो इंपोर्ट करने की सुविधा: यूजर्स किसी दूसरे प्लेटफॉर्म (जैसे- Groww, PayTM Money आदि) पर चल रहे अपने पुराने म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट्स को भी आसानी से Zerodha Kite पर इंपोर्ट कर सकेंगे।

आपको बता दें कि Zerodha अपने ‘Coin’ ऐप को बंद नहीं करेगा। Coin ऐप पैसिव इन्वेस्टर्स के लिए अलग से काम करता रहेगा, लेकिन Kite यूजर्स को अब ऐप बदलने की मजबूरी नहीं होगी।

Zerodha के इस कदम के पीछे के आंकड़े

Zerodha के पास Coin ऐप पर लगभग 30 लाख म्यूचुअल फंड इन्वेस्टर्स और 56 लाख से ज्यादा एक्टिव SIP अकाउंट्स हैं। एसेट अंडर मैनेजमेंट(AUM) के मामले में Coin देश का दूसरा सबसे बड़ा डायरेक्ट म्यूचुअल फंड प्लेटफॉर्म है।

Kite App गूगल प्ले स्टोर पर 1 करोड़+ डाउनलोड्स है और करीब 65 लाख+ एक्टिव यूजर बेस है। वही Coin App के 50 लाख+ डाउनलोड्स और 30 लाख से ज्यादा एक्टिव यूजर है।

Kite का यूजर बेस Coin से दोगुना से भी ज्यादा है। ऐसे में Kite के भीतर ही म्यूचुअल फंड्स का विकल्प मिलने से Zerodha के म्यूचुअल फंड कारोबार में बड़ा उछाल आने की उम्मीद है।

डायरेक्ट म्यूचुअल फंड्स ही क्यों?

Zerodha अपने दोनों प्लेटफॉर्म्स पर सिर्फ डायरेक्ट म्यूचुअल फंड्स ही ऑफर करता है। इसमें निवेशकों को कोई डिस्ट्रीब्यूटर कमीशन या अतिरिक्त चार्ज नहीं देना पड़ता, जिससे लॉन्ग-टर्म में निवेशकों को रेगुलर फंड्स के मुकाबले बेहतर रिटर्न (CAGR) मिलता है।

Groww और Zerodha के बीच म्यूचुअल फंड और SIP ग्राहकों को जोड़ने की होड़ में, Zerodha का यह ‘ऑल-इन-वन’ दांव मार्केट में उसकी पकड़ को और मजबूत कर सकता है।

Pramodini IPO Listing: ₹118 के शेयर ₹120 पर लिस्ट, लगातार मजबूत हो रही प्रमोदिनी की सेहत

Pramodini IPO Listing: डाइग्नॉस्टिक सर्विसेज देने वाली प्रमोदिनी मेडिकेयर के शेयरों की आज NSE SME पर प्रीमियम एंट्री हुई। इसके आईपीओ को ओवरऑल 3 गुना से अधिक बोली मिली थी। इसके आईपीओ के तहत ₹118 के भाव पर शेयर जारी हुए हैं। आज NSE SME पर इसकी ₹120.00 पर एंट्री हुई है यानी कि आईपीओ निवेशकों को 1.69% का लिस्टिंग गेन (Pramodini Listing Gain) मिला। हालांकि आईपीओ निवेशकों की खुशी थोड़ी ही देर में फीकी हो गई जब शेयर टूट गए। टूटकर यह ₹119.05 (Pramodini Share Price)  पर आ गया यानी कि आईपीओ निवेशक अब 0.89% मुनाफे में हैं।

Pramodini IPO के पैसे कैसे होंगे खर्च

प्रमोदिनी मेडिकेयर का ₹69 करोड़ का आईपीओ सब्सक्रिप्शन के लिए 12-14 अगस्त तक खुला था। इस आईपीओ को निवेशकों का अच्छा रिस्पांस मिला था और ओवरऑल यह 3.87 गुना सब्सक्राइब हुआ था। इसमें क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIB) के लिए आरक्षित हिस्सा 3.66 गुना (एक्स-एंकर), नॉन-इंस्टीट्यूशनल इनवेस्टर्स (NII) का हिस्सा 4.96 गुना और खुदरा निवेशकों का हिस्सा 3.49 गुना भरा था।

इस आईपीओ के तहत ₹63 करोड़ के नए शेयर जारी हुए हैं। इसके अलावा ₹10 की फेस वैल्यू वाले 5,00,400 शेयर ऑफर फॉर सेल विंडो के तहत बिके हैं। ऑफर फॉर सेल का पैसा तो शेयर बेचने वाले शेयरहोल्डर्स को मिला है। वहीं नए शेयरों के जरिए जुटाए गए पैसों में से ₹45.15 करोड़ मौजूदा और प्रस्तावित डाइग्नॉस्टिक सेंटर्स के लिए मेडिकल इक्विपमेंट्स की खरीदारी और बाकी पैसे अधिग्रहण और आम कॉरपोरेट उद्देश्यों पर खर्च होंगे।

Pramodini Medicare के बारे में

प्रमोदिनी मेडिकेयर डाइग्नॉस्टिक सर्विसेज मुहैया कराती है। यह टियर1, टियर 2 और टियर 3 शहरों में सरकारी से लेकर प्राइवेट अस्पतालों, PSU, मेडिकल कॉलेजों और प्राइवेट डाइग्नॉस्टिक सेंटर्स को सर्विसेज देती है। इसके सर्विस पोर्टफोलियो में एमआरआई, सीटी स्कैन, एक्सरे, कलर डॉप्लर के साथ अल्ट्रासाउंट, मैमोग्राफी, डेक्सा स्कैन और इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी जैसी रेडियोलॉजी सर्विस; हेमेटोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी, इम्यूनोलॉजी, पैथोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री जैसे क्लिनिकल लेबोरेटरी सर्विस; और पीईटी-सीटी, SPECT और न्यूक्लियर थेरेपी जैसी न्यूक्लियर मेडिसिन सर्विस हैं। कंपनी विजयवाड़ा से 24×7 टेली-रेडियोलॉजी यूनिट और उसी जगह पर एक प्रोसेसिंग लेबोरेटरी भी चलाती है।

कंपनी के वित्तीय सेहत की बात करें तो यह लगातार मजबूत हो रही है। वित्त वर्ष 2024-26 में इसका शुद्ध मुनाफा सालाना 56% की रफ्तार यानी CAGR से बढ़कर ₹17.38 करोड़ और टोटल इनकम 33% के सीएजीआर से ₹63.38 करोड़ पर पहुंच गया। मार्च 2026 तिमाही के आखिरी में कंपनी पर ₹17.85 करोड़ का टोटल कर्ज था जबकि रिजर्व और सरप्लस में ₹36.46 करोड़ पड़े थे।

Behari Lal IPO Listing: 118 गुना सब्सक्रिप्शन के बाद 63% लिस्टिंग गेन, ₹285 के शेयरों का बड़ा धमाल

Shiprocket IPO Listing: ₹97 का शेयर ₹131 पर लिस्ट, आईपीओ को मिली थी 102 गुना बोली

डिस्क्लेमर: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

SBI Mutual Fund: एसबीआई म्यूच्यूअल फंड की इन स्कीम्स में पैसे लगाकर पाएं शानदार रिटर्न! जानिए टॉप परफॉर्मेंस वाली बेस्ट योजनाएं

Best SBI Mutual Fund Schemes: भारतीय शेयर बाजार में निवेश के जरिए वेल्थ क्रिएशन करने के लिए म्यूचुअल फंड हमेशा से रिटेल निवेशकों की पहली पसंद रहे हैं। देश के सबसे बड़े फंड हाउसों में से एक एसबीआई म्यूचुअल फंड (SBI Mutual Fund) पर करोड़ों निवेशकों का भरोसा है।

अगर आप भी अपनी मेहनत की कमाई को सही जगह निवेश करके बड़ा फंड बनाना चाहते हैं, तो एसबीआई म्यूचुअल फंड की कुछ चुनिंदा योजनाएं आपके लिए बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती हैं। आइए जानते हैं SBI MF की उन बेस्ट स्कीम्स के बारे में, जिन्होंने लंबी अवधि में निवेशकों को मल्टीफोल्ड रिटर्न दिया है।

स्मॉल-कैप और कंट्रा कैटेगरी की स्टार स्कीम्स

ज्यादा रिस्क लेकर रिकॉर्डतोड़ रिटर्न चाहने वाले निवेशकों के लिए ये स्कीम्स सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं:

SBI Small Cap Fund: यह फंड छोटी और तेजी से बढ़ती कंपनियों में निवेश करता है। इस स्कीम ने लंबी अवधि (5 से 10 साल) में 20% से ज्यादा का सालाना चक्रवृद्धि रिटर्न (CAGR) दिया है। उन निवेशकों के लिए बेस्ट है जो कम से कम 5-7 साल का समय दे सकते हैं।

SBI Contra Fund: यह फंड ‘वैल्यू इन्वेस्टिंग’ की रणनीति पर काम करता है। यानी फंड मैनेजर उन कंपनियों में दांव लगाते हैं जो फिलहाल मार्केट में अंडरवैल्यूड हैं, लेकिन उनका फंडामेंटल बेहद मजबूत है। पिछले कुछ वर्षों में इस फंड ने अपने कैटेगरी के अधिकांश फंड्स को पीछे छोड़ते हुए आउटपरफॉर्म किया है।

लार्ज और मिड-कैप में संतुलन और स्थिरता

अगर आप बहुत ज्यादा रिस्क नहीं लेना चाहते और पोर्टफोलियो में स्थिरता के साथ-साथ अच्छी ग्रोथ चाहते हैं:

SBI Large & Midcap Fund: यह फंड देश की टॉप लार्ज-कैप और मिड-कैप कंपनियों का एक संतुलित कॉम्बो है। यह मार्केट के उतार-चढ़ाव को बेहतर तरीके से संभालता है और जोखिम को कम करते हुए स्थिर ग्रोथ देता है।

SBI Bluechip Fund: भारत की सबसे बड़ी और मार्केट लीडर कंपनियों में निवेश करने वाला यह फंड नए और सुरक्षित निवेश पसंद करने वाले निवेशकों के लिए एक क्लासिक विकल्प है।

टैक्स बचाने के साथ तगड़ी कमाई (ELSS)

अगर आप टैक्स सेविंग के साथ-साथ शेयर बाजार की ग्रोथ का फायदा उठाना चाहते हैं, तो यह SBI लॉंग टर्म इक्विटी (ELSS) टैक्स-सेविंग फंड बेस्ट है। इसमें इनकम टैक्स एक्ट की धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की छूट मिलती है। इसमें 3 साल का लॉक-इन पीरियड होता है, जो अन्य टैक्स-सेविंग विकल्पों (जैसे- PPF या FD) की तुलना में सबसे कम है।

बैलेंस और मॉडरेट रिस्क वाले निवेशकों के लिए हाइब्रिड फंड

SBI Equity Hybrid Fund: यह स्कीम आपके पैसे का बड़ा हिस्सा शेयर बाजार में और कुछ हिस्सा सरकारी बॉन्ड्स में लगाती है। जब शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आती है, तब इसका डेट पोर्टफोलियो आपकी पूंजी को सुरक्षित रखने में मदद करता है।

SBI Balanced Advantage Fund: यह डायनेमिक एसेट अलोकेशन फंड है, जो बाजार के वैल्युएशन के हिसाब से ऑटोमैटिकली इक्विटी और डेट का अनुपात तय करता है।

SIP या लंपसम: कैसे शुरू करें निवेश?

एसबीआई की इन सभी स्कीम्स में आप दो तरीकों से पैसे लगा सकते हैं:

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेन्ट प्लान(SIP): आप हर महीने महज ₹500 की छोटी राशि से अनुशासित निवेश शुरू कर सकते हैं। SIP के जरिए आपको रुपी कॉस्ट एवेरेजिंग का बड़ा फायदा मिलता है।

एकमुश्त (Lump-sum): अगर आपके पास एकमुश्त रकम है तो आप न्यूनतम ₹1,000 या ₹5,000 से भी शुरुआत कर सकते हैं।

एसबीआई म्यूचुअल फंड की ये स्कीम्स लंबे समय में महंगाई को मात देने वाला रिटर्न बनाने में सक्षम हैं। हालांकि, किसी भी स्कीम में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों, समय अवधि और जोखिम उठाने की क्षमता का सही आकलन जरूर कर लें।

Disclaimer: यहां मुहैया जानकारी सिर्फ सूचना के लिए दी जा रही है। यहां बताना जरूरी है कि मार्केट में निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है। निवेशक के तौर पर पैसा लगाने से पहले हमेशा एक्सपर्ट से सलाह लें। मनीकंट्रोल की तरफ से किसी को भी पैसा लगाने की यहां कभी भी सलाह नहीं दी जाती है।

Patanjali Foods: 59% रिटर्न दे सकता है ये FMCG स्टॉक, जेफरीज ने खरीदने की सलाह दी

Patanjali Foods: ग्लोबल ब्रोकरेज Jefferies ने FMCG सेक्टर की कंपनी Patanjali Foods (PFL) पर ‘Buy’ रेटिंग बरकरार रखी है। ब्रोकरेज ने शेयर के लिए ₹560 का टारगेट प्राइस दिया है। यह ₹351 के मौजूदा स्तर से ₹560 करीब 60% तक की तेजी का संकेत है।

Patanjali Foods पर क्यों बुलिश है Jefferies?

Jefferies के मुताबिक, Patanjali Foods अगले 12 महीनों की अनुमानित कमाई के मुकाबले करीब 23 गुना वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहा है। ब्रोकरेज का अनुमान है कि FY26 से FY29 के बीच कंपनी का PAT 23% CAGR से बढ़ सकता है। साथ ही ROCE में करीब 590 बेसिस पॉइंट का सुधार होकर यह 18% तक पहुंच सकता है।

इन्हीं अनुमानों के आधार पर Jefferies ने Sum-of-the-Parts (SOTP) वैल्यूएशन मॉडल से ₹560 का टारगेट तय किया है।

जून तिमाही में शानदार प्रदर्शन

Patanjali Foods ने FY27 की पहली तिमाही में मजबूत नतीजे पेश किए। कंपनी का रेवेन्यू 29% बढ़कर करीब ₹11,300 करोड़ पहुंच गया, जो Jefferies के अनुमान से करीब 20% ज्यादा रहा। वहीं EBITDA में 69% और PAT में 86% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

एडिबल ऑयल बिजनेस बना सबसे बड़ा सहारा

एडिबल ऑयल सेगमेंट ने अब तक की सबसे मजबूत तिमाही दर्ज की। इस कारोबार का रेवेन्यू 27% बढ़कर ₹8,500 करोड़ पहुंच गया। खासकर सरसों तेल की बिक्री बेहतर रही। पश्चिम एशिया में तनाव और कमोडिटी महंगाई के कारण तेल की कीमतें बढ़ीं, जिसका फायदा कंपनी को मिला। इस सेगमेंट का EBIT सालाना आधार पर लगभग पांच गुना बढ़ गया।

कंपनी के प्लांटेशन बिजनेस में भी 25% की ग्रोथ रही। खेती वाला क्षेत्र बढ़कर 1.16 लाख हेक्टेयर हो गया है। मैनेजमेंट ने FY27 में एडिबल ऑयल बिजनेस में 3-5% वॉल्यूम ग्रोथ का लक्ष्य रखा है।

Foods & FMCG बिजनेस में क्या रहा?

पतंजलि फूड्स के Foods & FMCG सेगमेंट का रेवेन्यू भी 28% बढ़ा। बिस्किट कारोबार ने सबसे मजबूत तिमाही दर्ज करते हुए ₹560 करोड़ का रेवेन्यू हासिल किया और इसका मार्जिन बढ़कर 15.4% पहुंच गया।

हालांकि इस सेगमेंट की प्रॉफिटेबिलिटी पर दबाव बना रहा, क्योंकि कच्चे माल की लागत तेजी से बढ़ी और कंपनी पूरी बढ़ोतरी ग्राहकों तक नहीं पहुंचा सकी। Jefferies का मानना है कि आने वाली तिमाहियों में लागत का दबाव कम होने पर इस सेगमेंट की मार्जिन में सुधार देखने को मिल सकता है।

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